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पिछले एक दशक में विभागीय आय लगभग तीन गुना, डिजिटल सेवाओं के विस्तार पर मुख्यमंत्री का जोर

तकनीक की मदद से रजिस्ट्री कार्यालयों को बनाएं पारदर्शिता और जनसुविधा का आदर्श मॉडल: मुख्यमंत्री पिछले एक दशक में विभागीय आय लगभग तीन गुना, डिजिटल सेवाओं के विस्तार पर मुख्यमंत्री का जोर पेपरलेस रजिस्ट्रेशन, जियो-टैगिंग और एआई आधारित प्रणाली को तेजी से लागू करने के निर्देश पासपोर्ट सेवा केंद्रों की तर्ज पर विकसित होंगे रजिस्ट्री कार्यालय, नागरिक सुविधाएं होंगी बेहतर मानकीकृत मूल्यांकन व्यवस्था से रुकेगी स्टाम्प शुल्क चोरी, घटेंगे विवाद मुख्यमंत्री का निर्देश, सरल होंगे कानून, कहा,कॉरपोरेट पुनर्गठन, एलएलपी और रेरा से जुड़े प्रावधानों को समयानुकूल बनाने की आवश्यकता लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, निवेश गतिविधियों और शहरीकरण की आवश्यकताओं के अनुरूप विभाग को अधिक पारदर्शी, तकनीक आधारित, उत्तरदायी और जनसुविधा केंद्रित बनाया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि रजिस्ट्री कार्यालय आमजन के प्रत्यक्ष संपर्क वाले कार्यालय हैं, इसलिए वहां की व्यवस्थाएं आधुनिक, व्यवस्थित और नागरिक केंद्रित होनी चाहिए। उन्होंने उप निबंधक कार्यालयों को चरणबद्ध ढंग से पासपोर्ट सेवा केंद्रों की तर्ज पर विकसित करने की आवश्यकता बताई।  बैठक में बताया गया कि प्रदेश के रजिस्ट्री कार्यालयों में प्रतिवर्ष लगभग 2.4 करोड़ लोगों का प्रत्यक्ष संपर्क होता है। इसे देखते हुए हेल्प डेस्क, टोकन एवं क्यू मैनेजमेंट सिस्टम, आधुनिक प्रतीक्षालय, महिला एवं शिशु कक्ष, डिजिटल सुविधाएं तथा अन्य नागरिक सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए जिससे नागरिकों को अनावश्यक प्रतीक्षा और असुविधा का सामना न करना पड़े। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग राज्य की राजस्व व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2016-17 में विभाग की सकल आय 11,613.84 करोड़ रुपये थी, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 32,598.49 करोड़ रुपये हो गई है। इसी अवधि में पंजीकृत लेखपत्रों की संख्या 28.25 लाख से बढ़कर 49.34 लाख से अधिक हो गई। मुख्यमंत्री ने इस प्रगति को आगे बढ़ाते हुए राजस्व वृद्धि के साथ सेवा गुणवत्ता और नागरिक संतुष्टि को भी प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस विभागीय सुधारों का प्रमुख आधार बनना चाहिए। संपत्ति एवं विवाह पंजीकरण में आधार प्रमाणीकरण, बायोमेट्रिक और आईरिस आधारित सत्यापन, ऑनलाइन दस्तावेज सत्यापन तथा खतौनी आधारित डिजिटल जांच जैसी व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ किया जाए। पेपरलेस रजिस्ट्रेशन प्रणाली, अभिलेखों के डिजिटाइजेशन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कार्यप्रणाली तथा जियो-टैगिंग व्यवस्था को तेजी से लागू करने की दिशा में प्रभावी कार्यवाही की जाए। उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ाने, विवाद कम करने और राजस्व अपवंचन रोकने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि संपत्तियों के मूल्यांकन में एकरूपता और पारदर्शिता लाने के लिए मानकीकृत मूल्यांकन व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। इससे बाजार आधारित मूल्यांकन सुनिश्चित होगा तथा मूल्यांकन संबंधी विवादों में कमी आएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश तेजी से निवेश और औद्योगिक विकास का केंद्र बन रहा है। ऐसे में विधिक व्यवस्थाओं को भी वर्तमान आर्थिक और व्यावसायिक आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यवस्थाओं में स्पष्टता होने से निवेशकों का विश्वास बढ़ता है, अनावश्यक विवाद और मुकदमेबाजी कम होती है तथा कारोबार करने की सुगमता को बल मिलता है। बैठक में कॉरपोरेट पुनर्गठन, विलय, विभाजन, समामेलन, अधिग्रहण, सीमित दायित्व भागीदारी (एलएलपी), शेयरधारिता में परिवर्तन, आवासीय सहकारी समितियों तथा रेरा के अंतर्गत विक्रय करारों से जुड़े विषयों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इन क्षेत्रों में स्पष्ट और व्यावहारिक स्टाम्प शुल्क व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि विभिन्न राज्यों की सर्वोत्तम व्यवस्थाओं का अध्ययन करते हुए ऐसा विधिक ढांचा तैयार किया जाए जिससे निवेश को प्रोत्साहन मिले, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस मजबूत हो, विवादों में कमी आए और राज्य के राजस्व हित भी सुरक्षित रहें।

योगी सरकार की सतर्कता से निर्बाध बिजली सप्लाई, दिन-रात मैदान में डटे बिजलीकर्मी

भीषण गर्मी में भी बिजली आपूर्ति में उत्तर प्रदेश बना नंबर वन, 31 हजार मेगावाट से अधिक की डिमांड पूरी योगी सरकार की सतर्कता से निर्बाध बिजली सप्लाई, दिन-रात मैदान में डटे बिजलीकर्मी 7 जून को 31,147 मेगावाट बिजली आपूर्ति, देश में सबसे अधिक डिमांड पूरी ट्रांसफार्मर, फीडर और उपकेंद्रों की चौबीसों घंटे निगरानी, मेंटेनेंस कार्य तेज  8 जून को दोपहर 12 बजे 27,838 मेगावाट बिजली सप्लाई, हर घंटे मांग के अनुसार आपूर्ति जारी लखनऊ  उत्तर प्रदेश में इस समय प्रचंड गर्मी का दौर जारी है। प्रदेश के कई जिलों में अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। भीषण गर्मी के कारण बिजली की मांग में लगातार वृद्धि हो रही है, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उप्र. पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में जुटा हुआ है। डिमांड बिजली आपूर्ति करने में उत्तर प्रदेश नंबर वन पर है। बढ़ती मांग के बावजूद प्रदेश में सुचारु बिजली व्यवस्था बनाए रखने को लेकर योगी सरकार के प्रयासों की व्यापक सराहना हो रही है। 6 और 7 जून को यूपी में रिकॉर्ड डिमांड बिजली आपूर्ति की गई यूपी इस समय डिमांड बिजली आपूर्ति करने में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। 7 जून को प्रदेश में 31,147 मेगावाट की रिकॉर्ड डिमांड बिजली आपूर्ति की गई, जो देश में सबसे अधिक रही। इसी तरह 6 जून को भी डिमांड बिजली आपूर्ति करने में  उत्तर प्रदेश सबसे आगे रहा है। 6 जून को 31049 मेगावाट और 5 जून को 29130 मेगावाट डिमांड बिजली आपूर्ति की गई थी। लगातार इतनी बड़ी मात्रा में बिजली उपलब्ध कराना यूपीपीसीएल की मजबूत कार्यप्रणाली और बेहतर प्रबंधन को दर्शाता है। 8 जून को दोपहर 12 बजे 27838 मेगावाट बिजली आपूर्ति की गई 7-8 जून की रात 1 बजे 30165 मेगावाट डिमांड बिजली आपूर्ति की गई। इसी तरह रात 3 बजे 29190 मेगावाट और रात 4 बजे 28482 मेगावाट डिमांड बिजली आपूर्ति की गई है। इसी तरह 8 जून की सुबह 6 बजे 25463 मेगावाट, सुबह 8 बजे 22666 मेगावाट, सुबह 10 बजे 26288 मेगावाट और सुबह 11 बजे 27138 मेगावाट डिमांड बिजली आपूर्ति की गई है। ऐसे ही दोपहर 12 बजे 27838 मेगावाट डिमांड बिजली आपूर्ति की गई है।  विभागीय टीम लगातार मेंटेनेंस कार्य में जुटी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को गर्मी के मौसम में निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। इसी के अनुरूप यूपीपीसीएल की टीमें चौबीसों घंटे बिजली व्यवस्था की निगरानी कर रही हैं। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में बिजली मांग का लगातार विश्लेषण किया जा रहा है ताकि किसी भी स्थिति में उपभोक्ताओं को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। गर्मी के मौसम में बिजली की मांग बढ़ने से ट्रांसफार्मर, फीडर और अन्य विद्युत उपकरणों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसे देखते हुए विभागीय टीमें लगातार मेंटेनेंस कार्यों में जुटी हुई हैं।  बिजली कर्मी दिन-रात फील्ड में रहकर कर रहे कार्य दिन के साथ-साथ रात्रिकालीन समय में भी बिजलीकर्मी फील्ड में रहकर आवश्यक तकनीकी कार्यों को पूरा कर रहे हैं। इससे संभावित खराबियों को पहले ही दूर किया जा रहा है और बिजली आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखने में मदद मिल रही है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में बिजली विभाग के अधिकारी और कर्मचारी लगातार उपकेंद्रों तथा वितरण तंत्र का निरीक्षण कर रहे हैं। निरीक्षण के दौरान बिजली व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है और अधिकारियों को निर्देश दिए जा रहे हैं कि उपभोक्ताओं को हर परिस्थिति में सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और निरंतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।  प्रदेश में लगातार रिकॉर्ड स्तर पर डिमांड बिजली आपूर्ति की जा रहीः निदेशक वितरण यूपीपीसीएल के निदेशक वितरण ज्ञानेंद्र धर द्विवेदी ने बताया कि प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी के कारण बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन पावर कॉरपोरेशन उपभोक्ताओं को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पूरी तत्परता के साथ कार्य कर रहा है। प्रदेश लगातार रिकॉर्ड स्तर पर डिमांड बिजली आपूर्ति कर रहा है। उन्होंने बताया कि यूपीपीसीएल की टीमें हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और उपभोक्ताओं को बेहतर बिजली सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।

योगी सरकार की टेक होम राशन योजना से मातृ एवं शिशु पोषण को मिली नई मजबूती

कुपोषण के खिलाफ जंग में यूपी बना मॉडल, 1.56 करोड़ लाभार्थियों तक पहुंच रहा पौष्टिक आहार  योगी सरकार की टेक होम राशन योजना से मातृ एवं शिशु पोषण को मिली नई मजबूती 4000 से अधिक महिलाओं को मिला रोजगार, महिला स्वयं सहायता समूह संभाल रहे उत्पादन व्यवस्था   जीपीएस, क्यूआर कोड और ओटीपी आधारित सिस्टम से पारदर्शी हुई पूरी वितरण प्रक्रिया महिला एवं बाल विकास विभाग की पहल से यूपी बना देश में पोषण सुधार का अग्रणी मॉडल लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश कुपोषण के खिलाफ अपनी लड़ाई में देश के लिए एक प्रभावी मॉडल बनकर उभरा है। महिला एवं बाल विकास विभाग और बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की सक्रिय कार्यशैली के चलते प्रदेश में संचालित टेक होम राशन योजना मातृ एवं शिशु पोषण को नई मजबूती प्रदान कर रही है। पोषण, तकनीक, पारदर्शिता और महिला सशक्तीकरण को एक साथ जोड़ने वाली यह व्यवस्था अब राष्ट्रीय स्तर पर सराहना प्राप्त कर रही है। योगी सरकार ने भारत सरकार की सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 गाइडलाइन तथा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2023 के अनुरूप रेसिपी आधारित अनुपूरक पुष्टाहार व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू किया है। उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है जिसने इस नई प्रणाली को बड़े पैमाने पर धरातल पर उतारा है। वर्तमान में प्रदेश में हर महीने लगभग 1.56 करोड़ लाभार्थियों तक पौष्टिक आहार पहुंचाया जा रहा है। इनमें छह माह से छह वर्ष तक के बच्चे, गर्भवती महिलाएं, धात्री माताएं तथा अतिकुपोषित बच्चे शामिल हैं। नाटेपन की दर 39.7 से घटकर 31.5 प्रतिशत तक पहुंची  सीएम योगी के मार्गदर्शन में यह पहल केवल राशन वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सकारात्मक असर स्वास्थ्य संकेतकों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2015-16 की तुलना में वर्ष 2019-21 के दौरान प्रदेश में बच्चों में स्टंटिंग यानी नाटेपन की दर 39.7 प्रतिशत से घटकर 31.5 प्रतिशत तक पहुंच गई। इसके अलावा अल्पवजन और दुबलापन जैसी समस्याओं में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि योगी सरकार की पोषण नीति जमीनी स्तर पर प्रभावी परिणाम दे रही है। विशेष पोषण उत्पाद किए जा रहे तैयार  योगी सरकार में इस योजना के तहत विभिन्न आयु वर्गों के लिए विशेष पोषण उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। शिशु अमृत, शिशु आहार, बाल पुष्टिकर और संपूर्ण मातृ आहार जैसे उत्पाद बच्चों और महिलाओं को संतुलित एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध करा रहे हैं। वहीं बच्चों के लिए आरोग्य पोषण, बाल संजीवनी और सक्षम पोषण जैसी ऊर्जा युक्त विशेष व्यवस्थाएं भी की गई हैं। योगी सरकार ने पूरी आपूर्ति व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़कर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की है। जीपीएस ट्रैकिंग, क्यूआर कोड और ओटीपी आधारित सत्यापन प्रणाली के माध्यम से हर पैकेट की डिजिटल निगरानी की जा रही है। इससे वितरण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हुई है और लाभार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण पोषण सामग्री समय पर पहुंच रही है। 4000 से अधिक महिलाएं उत्पादन इकाइयों से जुड़ीं महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में भी यह योजना नई मिसाल बन रही है। टेक होम राशन के उत्पादन और आपूर्ति की जिम्मेदारी मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े महिला स्वयं सहायता समूहों को सौंपी गई है। वर्तमान में प्रदेश की 4000 से अधिक महिलाएं इन उत्पादन इकाइयों से जुड़कर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर प्राप्त कर रही हैं। इससे न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिली है।   हर्षिता माथुर, निदेशक, बाल विकास एवं पुष्टाहार तथा राज्य पोषण मिशन

Stock Market Bounce Back: बाजार में आई जबरदस्त रिकवरी, टाटा से इंडिगो तक निवेशकों की चांदी

मुंबई  शेयर बाजार में जारी गिरावट पर ब्रेक लगा नजर आ रहा है और सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को सेंसेक्स-निफ्टी ने उबरते हुए तेज शुरुआत की. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स इंडेक्स 74000 के पार खुला, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी इंडेक्स ने भी 23,200 के पार निकलकर कारोबार शुरू किया. इस तेजी के बीच बीएसई की लार्जकैप कैटेगरी में शामिल 30 कंपनियों में से 25 के शेयर तेजी के साथ ग्रीन जोन में ट्रेड करते हुए नजर आए. सबसे ज्यादा तेजी टाटा की कंपनी Trent और IndiGo के शेयर में दिखी।  सेंसेक्स-निफ्टी की धांसू शुरुआत  मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार के लिए विदेशों से पॉजिटिव संकेत मिल रहे थे और कारोबार की शुरुआत भी धांसू हुई. बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 73,524 की तुलना में तेज रफ्तार के साथ उछला और 74,035 के लेवल पर खुला. एनएसई निफ्टी ने भी सेंसेक्स के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए ग्रीन जोन में ओपनिंग की. ये 50 शेयरों वाला इंडेक्स पिछले बंद 23,123 के मुकाबले खुलते ही 23,259 पर पहुंच गया।  इन 10 शेयरों में जोरदार तेजी शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत होते ही कई दिग्गज कंपनियों के शेयर छलांग लगाते हुए नजर आए. बीएसई की लार्जकैप कैटेगरी में Trent Share (2.50%), ICICI Bank Share (2%), Axis Bank Share (1.75%) और IndiGo Share (1.50%) की तेजी लेकर कारोबार कर रहा था।  तो वहीं मिडकैप कैटेगरी में शामिल IDFC First Bank Share (3.50%), TI India Share (2.80%), Nykaa Share (2.30%), Bharat Forge Share (2.10%) और Yes Bank Share (2%) की उछाल में नजर आए. स्मॉलकैप कैटेगरी में देखें, तो सबसे तेज उछाल Radington Share  में आई और ये 3 फीसदी की तेजी लेकर कारोबार कर रहा था।  शेयर बाजार में तेजी का बड़ा कारण Stock Market में अचानक आई इस तेजी के पीछे के कारणों की बात करें, तो सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट को माना जा सकता है, जिससे महंगाई का जोखिम कम हुआ है और निवेशकों को सेंटीमेंट सुधरा है।  दरअसर, बीते कारोबारी दिन सोमवार को ईरान-इजरायल संघर्ष बढ़ने के बीच Crude Oil Price में आग लगी हुई नजर आई थी और ब्रेंट क्रूड की कीमत 5 फीसदी के आसपास उछलकर 98 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई थी, लेकिन फिर एक दम से तेल की दाम गिर गए और खबर लिखे जाने तक Brent Crude Price 93 डॉलर के आसपास ट्रेड कर रहा था।  इसके अलावा एशियाई शेयर बाजारों में तेजी के चलते भी निवेशकों की धारणा में बदलाव देखने को मिला. जापान का निक्केई से लेकर साउथ कोरिया का कोस्पी इंडेक्स तक खुलने के साथ ही तूफानी तेजी के साथ कारोबार कर रहे थे। 

संजीव अरोड़ा केस में प्रवर्तन निदेशालय की ताबड़तोड़ रेड, कई ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई

लुधियाना  पंजाब की भगवंत मान सरकार के पूर्व मंत्री संजीव अरोड़ा के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक्शन तेज कर लिया है. ईडी ने सुबह-सुबह यूपी से पंजाब तक छापेमारी की है. संजीव अरोड़ा को ईडी ने पहले ही गिरफ्तार कर लिया था वो अभी गुरुग्राम की जेल में बंद हैं।  ईडी ने संजीव अरोड़ा से जुड़े जिस मामले में देश के अलग-अलग राज्यों में छापेमारी की है, वो दुबई को मोबाइल फोन के फर्जी एक्सपोर्ट से जुड़ा है. कई जगहों पर सुबह से छापेमारी चल रही है. यूपी के नोएडा और बरेली, दिल्ली और पंजाब के जालंधर शहर में ईडी की कार्रवाई जारी है।  अधिकारियों के अनुसार, जिन परिसरों में सर्च ऑपरेशन चल रहा है, उनमें हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड मामले में जांच के दायरे में आए व्यक्तियों और संस्थाओं से जुड़े आवास और व्यावसायिक कार्यालय दोनों शामिल हैं।  केजरीवाल बोले- हिंदू व्यापारियों पर ईडी की रेड आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने ईडी को ईडी पार्टी बताते हुए कहा, 'ED पार्टी आज फिर पंजाब के हिंदू व्यापारियों पर ED की रेड कर रही है. ED पार्टी पंजाब के छोटे-छोटे हिंदू व्यापारियों को तंग कर रही है. मेरी सभी व्यापारियों से अपील है- घबराने की कोई बात नहीं है, पूरा पंजाब और पंजाब सरकार आपके साथ है, हम सब मिलकर ED पार्टी का मुकाबला करेंगे।      ED पार्टी आज फिर पंजाब के हिंदू व्यापारियों पर ED की रेड कर रही है। ED पार्टी पंजाब के छोटे छोटे हिंदू व्यापारियों को तंग कर रही है। पंजाब, यूपी और दिल्ली-NCR में 6 ठिकानों पर छापेमारी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड (Hampton Sky Realty Ltd.) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पंजाब, उत्तर प्रदेश और दिल्ली-NCR में 6 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया है। ED ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत जारी जांच के क्रम में लुधियाना और जालंधर (पंजाब), बरेली (उत्तर प्रदेश) तथा दिल्ली-नोएडा क्षेत्र में एक साथ छापेमारी की। जांच एजेंसी के अनुसार, जिन परिसरों पर तलाशी ली जा रही है उनमें मामले से जुड़े व्यक्तियों और संस्थाओं के आवासीय एवं व्यावसायिक कार्यालय शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड से जुड़े वित्तीय लेन-देन और कथित मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों की जांच के तहत की जा रही है। तलाशी के दौरान दस्तावेजों, डिजिटल उपकरणों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। फिलहाल ED की कार्रवाई जारी है और एजेंसी द्वारा बरामद सामग्री का विश्लेषण किया जा रहा है। मामले में आगे और खुलासे होने की संभावना है। संजीव अरोड़ा के खिलाफ एक्शन क्यों? संजीव अरोड़ा को ED ने 100 करोड़ रुपये के जीएसटी धोखाधड़ी से जुड़े धनशोधन मामले में गिरफ्तार किया था, जिसमें उनसे जुड़ी कुछ इकाइयां शामिल हैं. अरोड़ा से जुड़ी कंपनी हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड (HSRL) ने फर्जी दस्तावेजों और फर्जी निर्यात के जरिए करीब ₹102.5 करोड़ की अवैध कमाई की और GST रिफंड लेकर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया. बता दें कि HSRL को पहले रितेश प्रॉपर्टीज एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड के नाम से जाना जाता था। 

100% इथेनॉल पर दौड़ेगी मारुति की नई कार, देश को मिलेगी पहली E100 फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक

नई दिल्ली  मारुति सुजुकी इस साल पर्यावरण दिवस के मौके पर फ्लेक्स फ्यूल से चलने वाली गाड़ी पेश करने वाली है। उन्होंने पर्यावरण के अनुकूल फ्यूल की तरफ बढ़ने की जरूरत पर भी जोर दिया। इस घोषणा से संकेत मिलता है कि Maruti Suzuki 5 जून 2025 को एक ऐसी फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ी को सामने ला सकती है या प्रदर्शित कर सकती है जो इथेनॉल के हाई-ब्लेंड्स यानी E-100 तक पर चलने में सक्षम होगी। भारत की पहली ऐसी गाड़ीः ध्यान देने वाली बात यह है कि वर्तमान में भारत में एक भी फ्लेक्स-फ्यूल 4-व्हीलर गाड़ी बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं है। जल्द ही लॉन्च होने वाली Maruti Suzuki की यह फ्लेक्स फ्यूल गाड़ी देश की पहली ऐसी 4-व्हीलर होगी जो E100 तक पर चलने में सक्षम होगी। इसके लिए इसमें खास तौर पर तैयार किए गए फ्यूल स्टोरेज, डिलीवरी और इग्निशन सिस्टम दिए जाएंगे। E100 के लिए बदलावः आने वाली Maruti Suzuki E100 फ्लेक्स फ्यूल गाड़ी में E85 प्रोटोटाइप के मुकाबले कई और बदलाव किए गए हैं जिससे इसे E100 ईंधन के अनुकूल बनाया जा सके। बता दें कि इथेनॉल में नमी सोखने की ज्यादा क्षमता होती है। Ethanol की ज्यादा मात्रा होने पर खास तौर से तैयार किए गए फ्यूल सिस्टम और इंजन पार्ट्स की जरूरत होती है क्योंकि इथेनॉल पारंपरिक पेट्रोल के मुकाबले ज्यादा आसानी से नमी सोख लेता है। ये है इसका फायदाः हमारे फ्यूल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ाने के इस प्रयास से कम लागत वाला, प्रदूषण मुक्त और स्वदेशी ईंधन उत्पादन और उसकी सप्लाई होगी। ग्लोबल स्तर पर ऊर्जा सुरक्षा की चिंताओं और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच यह कदम कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता को भी कम करेगा। 12 कंपनियां ऐसी गाड़ियां प्रदर्शित कर चुकी हैंः उन्होंने आगे बताया कि Toyota, TATA, Mahindra और Suzuki सहित कुल 12 कंपनियां पहले ही ऐसी गाड़ियां प्रदर्शित कर चुकी हैं। Honda और Suzuki की वजह से फ्लेक्स फ्यूल से चलने वाले टू-व्हीलर्स भी आ चुके हैं। उन्होंने स्कूटर, कार, ट्रक, बस और ट्रैक्टर जैसे सभी सेगमेंट्स में EV के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर अपना उत्साह जताया। भारत ने E20 पेट्रोल को मानकीकृत कर दिया है और BIS ने E22, E25, E27 और E30 फ्यूल के लिए स्पेसिफिकेशंस जारी कर दिए हैं जो Ethanol मिश्रण के अगले चरण की तैयारी है।

चरित्र पर सवाल नहीं उठाए जा सकते! सहमति से बने संबंधों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा बयान

हैदराबाद सुप्रीम कोर्ट ने अपनी एक टिप्पणी में कहा है कि आपसी सहमति से दो अविवाहित व्यस्कों के बीच बने शारीरिक संबंध किसी व्यक्ति के खराब चरित्र का प्रमाण नहीं हो सकता है. न्यायाधीश मनमोहन और मनोज मिश्रा की पीठ ने यह टिप्पणी तेलंगाना राज्य स्तरीय पुलिस भर्ती बोर्ड को एक ऐसे उम्मीदवार की नियुक्ति का निर्देश देते हुए की, जिसका पुलिस कांस्टेबल के रूप में चयन एक आपराधिक मामले की वजह से रद्द कर दिया गया था।  इस उम्मीदवार पर शादी का झांसा देकर रेप का आरोप लगा था, जो बाद में अदालत के बाहर सुलझ गया था. लेकिन तेलंगाना राज्य स्तरीय पुलिस भर्ती बोर्ड ने उस आरोप को देखते हुए खराब चरित्र का आधार देकर उम्मीदवार की भर्ती को रोक दिया था. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा, "सहमति से बने दो अविवाहित वयस्कों के बीच शारीरिक संबंध अपने आप में किसी व्यक्ति के चरित्र के खराब होने का आधार नहीं हो सकता है और न ही ऐसा होना चाहिए. ऐसा कोई कानून नहीं है जो सहमति से बने दो अविवाहित वयस्कों को अपनी पसंद का संबंध रखने से रोकता हो।  उम्मीदवार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी इस मामले में उम्मीदवार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी. सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीदवार की ओर से दायर अपील को स्वीकार कर लिया और तेलंगाना उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश के उस आदेश को बरकरार रखा जिसमें बोर्ड को पुलिस कांस्टेबल के पद पर उसकी नियुक्ति पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया गया था. तेलंगाना राज्य स्तरीय पुलिस भर्ती बोर्ड ने उनकी नियुक्ति इस आधार पर रद्द कर दी थी कि उनके खिलाफ 2014 में दर्ज विवाह का वादा करके बलात्कार का मामला दर्ज कराया गया था।  हर संबंध शादी में तबदील नहीं होता है सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस उम्मीदवार का अपनी पड़ोसी के महिला के साथ संबंध था. आरोप लगने के बाद दोनों पक्षों के बीच समझौता भी हो गया था. साल 2015 में लोक अदालत में इसका निपटारा भी हो गया था. आईपीसी की धारा 376 के तहत कोई आरोप नहीं लगाया गया था. ऐसे में उस आधार पर उम्मीदवार को भर्ती न करने का फैसला सही नहीं है।  कोर्ट ने कहा "हर रिश्ता शादी में तब्दील नहीं होता है. इसलिए, केवल इसलिए कि रिश्ता शादी में तब्दील नहीं हुआ, यह मानने का कोई आधार नहीं है कि एक पक्ष ने दूसरे को धोखा दिया है. इस आधार पर यह भी नहीं कहा जा सकता है कि उस व्यक्ति का चरित्र खराब था। 

SpiceJet का बड़ा विस्तार, डैम्प लीज पर लिए गए 3 Airbus A320; 737 Max फिर से सेवा में

नई दिल्ली विमानन कंपनी स्पाइसजेट ने अपने बेड़े को मजबूत करने और परिचालन क्षमताओं को बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। एयरलाइन ने तीन एयरबस ए320 विमानों को डैम्प लीज पर लेने के लिए एक अंतिम समझौता किया है। ये तीनों विमान आगामी जुलाई 2026 में एयरलाइन के बेड़े में शामिल हो जाएंगे। बोइंग 737 मैक्स की भी हुई वापसी फ्लीट (बेड़े) विस्तार के साथ-साथ स्पाइसजेट को एक और बड़ी सफलता मिली है। कंपनी ने अपने एक ग्राउंडेड (खड़े हुए) बोइंग 737 मैक्स विमान को तकनीकी रूप से पूरी तरह ठीक कर वापस सेवा में उतार दिया है। इस विमान ने व्यावसायिक उड़ानें भरना भी शुरू कर दिया है। व्यस्त सीजन में यात्रियों को मिलेगी राहत आने वाले व्यस्त यात्रा सीजन को देखते हुए इस अतिरिक्त क्षमता से एयरलाइन के घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय रूटों पर उड़ानों के संचालन में लचीलापन आएगा। इससे यात्रियों को टिकट बुकिंग में आसानी होगी और उड़ानों के रद होने या देरी होने जैसी समस्याओं में भी कमी आएगी। स्पाइसजेट के चीफ बिजनेस ऑफिसर देबोजो महर्षि ने कहा कि ये विमान हमें यात्रियों की बढ़ती मांग को पूरा करने, परिचालन को अधिक मजबूत बनाने और व्यस्त यात्रा अवधि के दौरान नेटवर्क को बेहतर करने में मदद करेंगे। हम अपनी विकास योजनाओं के साथ आगे बढ़ रहे हैं और हमारा ध्यान लगातार अपने बेड़े के विस्तार और परिचालन तैयारियों को बेहतर बनाने पर है। डैम्प लीज क्या है? विमानन क्षेत्र में डैम्प लीज का मतलब एक ऐसे समझौते से है, जिसके तहत विमान देने वाली कंपनी विमान के साथ-साथ पायलट और केबिन क्रू (फ्लाइट अटेंडेंट) भी मुहैया कराती है, लेकिन विमान का रख-रखाव और बीमा खुद एयरलाइन (इस मामले में स्पाइसजेट) संभालती है। यह कम समय में उड़ानों की संख्या बढ़ाने का एक बेहतरीन जरिया है।  

बैंक घोटाला केस में नया मोड़! हरियाणा के दो वरिष्ठ IAS अफसरों की भूमिका पर CBI की नजर

चंडीगढ़ हरियाणा में हुए 661 करोड़ रुपए के कथित बैंकिंग फ्रॉड मामले की जांच अब ऐसे दौर में पहुंचती दिख रही है, जहां एजेंसियां सिर्फ बैंक रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन पर नहीं, बल्कि उस प्रशासनिक ढांचे को भी समझने में जुट गई हैं जिसके भीतर पूरा घटनाक्रम आकार लेता गया। इसी कड़ी में अब जांच को लेकर एक बड़ा इनपुट सामने आया है। सूत्रों के अनुसार केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) हरियाणा के दो आईएएस अधिकारियों को सरकारी गवाह बनाए जाने की संभावना पर गंभीरता से विचार कर रही है। जानकारी यह भी सामने आई है कि जिन दो अधिकारियों के नाम पर विचार किया जा रहा है, वे मूल रूप से हरियाणा सिविल सेवा (एचसीएस) से प्रमोट होकर आईएएस बने हैं। प्रशासनिक स्तर पर लंबे अनुभव और विभागीय प्रक्रियाओं की समझ के कारण एजेंसी मान रही है कि उनके पास ऐसी सूचनाएं हो सकती हैं जो इस पूरे मामले की कई अधूरी कड़ियों को जोड़ने में मदद करें। जांच से जुड़े सूत्रों ने क्या कहा? जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि एजेंसी का मौजूदा फोकस केवल इस बात तक सीमित नहीं है कि सरकारी धन किन खातों तक पहुंचा। अब कोशिश यह समझने की भी है कि सरकारी विभागों के खाते किस प्रक्रिया से संचालित हुए, कथित फर्जी एफडीआर कैसे तैयार हुए, रकम के ट्रांसफर को किस स्तर पर मंजूरी मिली और वित्तीय नियंत्रण व्यवस्था में कहां-कहां चूक या मिलीभगत की संभावना बनी। जांच एजेंसियों का मानना है कि बड़े वित्तीय मामलों में केवल बैंक एंट्री पूरी कहानी नहीं बताती। कई बार फाइलों की आवाजाही, विभागीय आदेश, प्रशासनिक स्वीकृतियां और फैसलों की शृंखला असली तस्वीर सामने लाती है। ऐसे में सिस्टम के भीतर काम कर चुके अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। फिलहाल इस पूरे मामले की जांच सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) दोनों स्तरों पर जारी है। पहले ही कई व्यक्तियों और कथित संस्थाओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ चुकी है। साथ ही, कुछ अधिकारियों के खिलाफ जांच की अनुमति दिए जाने के बाद मामला प्रशासनिक जवाबदेही के दायरे में भी आ गया है। अब नजर उस संभावित कदम पर टिकी है जिसमें दो आईएएस अधिकारियों को सरकारी गवाह बनाया जा सकता है। पहले पूछताछ हुई, अब गवाही के विकल्प पर मंथन सूत्रों के मुताबिक जिन अधिकारियों को लेकर चर्चा चल रही है, उनसे पहले भी पूछताछ की जा चुकी है। पूछताछ के दौरान उपलब्ध कराए गए दस्तावेज, विभागीय नोटिंग और प्रशासनिक रिकॉर्ड के आधार पर एजेंसी को कुछ ऐसे संकेत मिले हैं जिन्होंने जांच को नया आयाम दिया। बताया जा रहा है कि अब एजेंसी यह आकलन कर रही है कि क्या इन अधिकारियों के पास उपलब्ध जानकारी को औपचारिक रूप से सरकारी गवाही के रूप में उपयोग किया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो जांच को घटनाओं का क्रम समझने, निर्णय लेने वाले स्तरों की पहचान करने और अन्य संभावित भूमिकाओं तक पहुंचने में मदद मिल सकती है। सूत्र यह भी मानते हैं कि अंदरूनी गवाही कई बार उन सवालों के जवाब दे देती है जो दस्तावेजों में सीधे दिखाई नहीं देते। दिल्ली-एनसीआर तक पहुंचा सर्च ऑपरेशन, जांच का दायरा बढ़ा मामले में हाल के दिनों में जांच एजेंसी ने पहली बार हरियाणा और चंडीगढ़ से बाहर जाकर दिल्ली-एनसीआर तक कार्रवाई का विस्तार किया। कई स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया गया। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस कार्रवाई के दौरान डिजिटल उपकरण, वित्तीय दस्तावेज, बैंकिंग रिकॉर्ड और कुछ प्रशासनिक सामग्री एजेंसी के कब्जे में आई है। अब इनकी तकनीकी जांच और दस्तावेजी मिलान की प्रक्रिया चल रही है। एजेंसी यह समझने की कोशिश कर रही है कि सरकारी खाते खोलने, धन को अलग-अलग माध्यमों से स्थानांतरित करने और वित्तीय दस्तावेजों के उपयोग के बीच क्या संबंध मौजूद थे। नोएडा लिंक के बाद और गहरे हुए सवाल जांच के दौरान नोएडा स्थित एक निजी कंपनी तक पहुंचने के बाद एजेंसियों ने कथित वित्तीय प्रवाह के दूसरे स्तरों की भी पड़ताल तेज कर दी है। संदेह यह है कि सरकारी स्रोतों से निकलने वाली रकम आगे कई चरणों से होकर अन्य खातों या संरचनाओं तक पहुंची हो सकती है। इस दिशा में जुटाए गए रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि धन के प्रवाह की पूरी शृंखला को समझा जा सके।  

सुपोषण की दिशा में नई पहल, विदिशा का ‘पोषण संजीवनी अभियान’ बना प्रदेश के लिए मिसाल

प्रदेश में सुपोषण का नया रोडमैप विदिशा के पोषण संजीवनी अभियान ने पेश की राज्य स्तरीय मिसाल भोपाल प्रदेश को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए निरंतर अभिनव और नीतिगत प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में विदिशा जिले से सफलता की एक ऐसी गौरवशाली गाथा सामने आई है, जिसने पूरे राज्य के सामने प्रशासनिक सूझबूझ और जनभागीदारी का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के 'स्वस्थ मध्यप्रदेश' के संकल्पों को जमीनी धरातल पर उतारते हुए विदिशा जिला प्रशासन द्वारा शुरू किए गए 'पोषण संजीवनी अभियान' ने गंभीर कुपोषण के खिलाफ एक निर्णायक और प्रभावी जंग छेड़ दी है। यह अभियान इस बात का जीवंत प्रमाण बन गया है कि जब जिला प्रशासन और समाज की संवेदनशील ताकतें एक साथ कदम बढ़ाती हैं, तो कठिन से कठिन सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का समाधान सहज संभव हो जाता है। अमूमन यह देखा जाता है कि पोषण पुनर्वास केंद्रों (एनआरसी) में उपचार के बाद जब बच्चे घर लौटते हैं, तो परिवारों की सीमित आर्थिक क्षमता और माताओं में पोषण संबंधी जागरूकता की कमी के कारण वे दोबारा कुपोषण चक्र में फंस जाते हैं। जून 2025 में हुए एक व्यापक सर्वे के दौरान जिले में 1,307 गंभीर कुपोषित बच्चों की पहचान होने पर समस्या की गंभीरता और स्पष्ट हो गई। इसी चुनौती को एक बड़े अवसर में बदलते हुए विदिशा जिला कलेक्टर अंशुल गुप्ता के नेतृत्व में 'पोषण संजीवनी अभियान' की परिकल्पना की गई, जिसका मूल ध्येय बच्चों का तात्कालिक उपचार नहीं बल्कि उनका दीर्घकालिक सुपोषण सुनिश्चित करना था। अभियान के तहत प्रत्येक चिन्हित गंभीर कुपोषित बच्चे को तीन महीने तक अतिरिक्त पोषण देने के लिए ₹3000 मूल्य की विशेष 'सुपोषण किट' प्रदान की जा रही है। उच्च गुणवत्तायुक्त पौष्टिक तत्वों से भरपूर इस किट में दो किलो मूंगदाल, एक किलो बेसन, पंद्रह सौ ग्राम मुरमुरा, एक लीटर खाद्य तेल, एक किलो शुद्ध घी, डेढ़ किलो मूंगफली, एक किलो गुड़ पाउडर, दो किलो मल्टीग्रेन आटा, एक किलो सत्तू, दो किलो चावल और पांच सौ ग्राम तिल जैसी अत्यंत पौष्टिक सामग्रियां शामिल की गई हैं। यह संतुलित आहार बच्चों को प्रतिदिन लगभग 750 अतिरिक्त कैलोरी प्रदान करता है, जो उनके शारीरिक विकास के लिए संजीवनी साबित हो रहा है। इस पूरे अभियान की सफलता के पीछे जनभागीदारी एक प्रमुख कारण बना। इस पुनीत कार्य में समाज के विभिन्न वर्गों, स्थानीय व्यापारियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने अभूतपूर्व संवेदनशीलता का परिचय दिया। समाज के सामूहिक प्रयासों से देखते ही देखते ₹39.21 लाख की सम्मानजनक राशि स्वेच्छा से एकत्र हो गई, जिसके माध्यम से अब तक सभी 1,307 बच्चों तक सुपोषण किट पहुंचाई जा चुकी है। यह जनसहयोग इस बात का सशक्त प्रतीक है कि समाज अपने नौनिहालों के स्वास्थ्य के प्रति कितना सजग और उत्तरदायी है। तकनीक और जमीनी निगरानी से सफल परिणाम प्रशासन ने केवल राशन वितरण तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि माताओं के व्यवहार में स्थायी बदलाव लाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के जमीनी अमले को पूरी मुस्तैदी से काम पर लगाया। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा माताओं को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्रियों से सरल और पौष्टिक व्यंजन जैसे लड्डू, हलवा और सत्तू पेय बनाने की विधियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही, बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और आनंद को ध्यान में रखते हुए उन्हें खिलौना किट और स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए टिफिन व पानी की बोतलें भी उपहार स्वरूप दी गईं। तकनीक और कड़े पर्यवेक्षण के मोर्चे पर भी यह मॉडल बेहद सुदृढ़ है। 'पोषण ट्रैकर' ऐप के माध्यम से प्रत्येक बच्चे के चयन से लेकर उसकी शारीरिक प्रगति का संपूर्ण डिजिटल रिकॉर्ड संधारित किया जा रहा है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा नियमित रूप से घर-घर जाकर बच्चों की वृद्धि निगरानी की गई। वहीं विभाग के पर्यवेक्षक लगातार बच्चों का वजन मापकर उनकी वास्तविक स्थिति का जमीनी आकलन कर रहे हैं। 63%  से अधिक बच्चे हुए सामान्य इस बेहद सुनियोजित और समन्वित प्रयास के जो परिणाम निकलकर आए हैं, वे राज्य स्तर पर बेहद उत्साहजनक और प्रेरणादायी हैं। जिले के कुल 1,307 कुपोषित बच्चों में से 772 बच्चे पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य श्रेणी में आ चुके हैं, जिससे 63.02% की उल्लेखनीय और ऐतिहासिक रिकवरी दर दर्ज की गई है। यह शानदार सफलता इस अभियान को मध्यप्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी एक अनुकरणीय 'रोल मॉडल' के रूप में स्थापित करती है। यह अभियान अब एक प्रशासनिक पहल से आगे बढ़कर विदिशा में एक व्यापक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। जिला प्रशासन के सशक्त नेतृत्व में अब स्वयंसेवी संस्थाओं, प्रबुद्ध समाज सेवियों एवं विभिन्न सरकारी विभागों की सक्रिय अंतर-विभागीय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। विभाग द्वारा इन गंभीर कुपोषित बच्चों की सतत और गहन निगरानी की जा रही है ताकि परिवर्तन केवल कागजी आंकड़ों तक सीमित न रहे, बल्कि हर बच्चे के स्वस्थ भविष्य के संकल्प में बदले। भविष्य की तैयारियों को लेकर भी सरकार और प्रशासन की प्रतिबद्धता स्पष्ट दिखाई देती है। आगामी तिमाही के लिए 650 नए गंभीर कुपोषित बच्चों को इस अभियान से जोड़कर कुपोषण मुक्त करने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के तहत एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अडाणी फाउंडेशन के सहयोग से जून माह में लटेरी, सिरोंज एवं कुरवाई जैसी दूरस्थ परियोजनाओं के चिन्हित गंभीर कुपोषित बच्चों के बीच 500 अतिरिक्त सुपोषण किट के वितरण का लक्ष्य रखा गया है। विदिशा का यह सुपोषण मॉडल यह संदेश देता है कि जब शासन, प्रशासन, समाज और संस्थाएं एकजुट होकर पूरी संवेदनशीलता से कार्य करते हैं, तो कुपोषण जैसी सामाजिक बुराई के खिलाफ जीत सुनिश्चित हो जाती है।