samacharsecretary.com

25 साल बाद खुलासा: वीवीएस लक्ष्मण ने किस बैट से खेली थी ऐतिहासिक 281 रन की पारी

बेंगलुरु 

पूर्व भारतीय क्रिकेटर वीवीएस लक्ष्मण टीम इंडिया के उस फैब-4 का हिस्सा थे, जिसमें सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और सौरव गांगुली जैसे दिग्गज शामिल थे। इन चार खिलाड़ियों ने भारत को टेस्ट क्रिकेट में अलग पहचान दिलाई और कई ऐतिहासिक पारियां खेली। ऐसे में वीवीएस लक्ष्मण की 281 रनों की वो पारी तो हर किसी को याद होगी, जो उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ईडन गार्डन्स के मैदान पर खेली थी। उनकी इस पारी के दम पर ही भारत ने अनहोनी को होनी करके दिखाया था और ऑस्ट्रेलिया के मुंह से जीत छीन ली थी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि लक्ष्मण ने यह पारी अपने नहीं बल्कि किसी और के बैट से खेली थी? जी हां, 25 साल बाद उस क्रिकेट ने खुद इसका खुलासा किया है।

इस खिलाड़ी का नाम ‘वेंकटपति राजू’ है, जिन्होंने भारत के लिए 28 टेस्ट मैच खेले हैं। 2 साल के लंबे इंतजार के बाद वेंकटपति राजू की उसी मैच में टीम इंडिया में वापसी हुई थी और वह उनके करियर का आखिरी मुकाबला भी थी।

 वेंकटपति राजू ने बताया, “लगभग दो साल बाद मैं वापसी कर रहा था और टीम के आस-पास सब कुछ बदल चुका था: फिटनेस का स्तर, रवैया और सोच। मुझे आज भी वह शाम याद है जब ऑस्ट्रेलिया ने हमें फॉलो-ऑन खेलने पर मजबूर कर दिया था। नेशनल सिलेक्टर मदन लाल ने हमसे कहा कि हम हार न मानें और लड़ते रहें। तब लक्ष्मण ने कुछ ऐसा कहा जिसने मुझे हैरान कर दिया। उन्होंने कहा, 'हो सकता है हम यह मैच जीत जाएं।' उस समय यह सोचना भी मुश्किल लग रहा था, लेकिन उन्हें खुद पर पूरा भरोसा था। राहुल द्रविड़ नंबर 6 पर बैटिंग करने आए, जबकि लक्ष्मण बैटिंग ऑर्डर में ऊपर आ गए। यह फैसला कोच जॉन राइट और कप्तान सौरव गांगुली के बीच हुई बातचीत के बाद लिया गया था। यह एक बहुत ही समझदारी भरा कदम साबित हुआ।

लक्ष्मण और द्रविड़ एक-दूसरे को सालों से जानते थे—अपने साउथ ज़ोन और U-19 के दिनों से।

एक बार जब वे क्रीज़ पर जम गए, तो उन्होंने पूरे दिन जिस तरह से बैटिंग की, उससे मैच का रुख ही पूरी तरह बदल गया। ड्रेसिंग रूम के अंदर काफी तनाव था। अगर एक भी विकेट गिर जाता, तो निचले क्रम के बल्लेबाज़ों की बारी आ जाती। लेकिन जिस तरह से उन्होंने बैटिंग की, उससे हमारी उम्मीदें बनी रहीं। दूसरी तरफ, ऑस्ट्रेलिया को जीतने की इतनी आदत हो चुकी थी कि वे मैच ड्रॉ कराने के बारे में सोच भी नहीं रहे थे। इसी वजह से उनके लिए चीज़ें और भी मुश्किल हो गईं। इस सीरीज़ का ज़्यादातर श्रेय हरभजन सिंह को जाता है। लेकिन पांचवें दिन सचिन तेंदुलकर की गेंदबाज़ी का स्पेल बहुत ही अहम साबित हुआ। उन्हें दबाव में गेंदबाज़ी करने का काफी अनुभव था—जैसे 1993 के हीरो कप का वह मशहूर आखिरी ओवर—और जब टीम को उनकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी, तब उन्होंने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन किया।

लक्ष्मण की वह पारी सचमुच असाधारण थी। वे शेन वॉर्न की गेंद पर क्रीज़ से आगे निकलकर शॉट लगा रहे थे, और स्पिन के विपरीत दिशा में भी गेंद को बाउंड्री के पार भेज रहे थे। यह आत्मविश्वास उन्हें हैदराबाद की टर्निंग पिचों पर सालों तक घरेलू क्रिकेट खेलने से मिला था। मेरे लिए कोलकाता टेस्ट इसलिए भी खास था, क्योंकि यह मेरे करियर का आखिरी मैच साबित हुआ। मार्क वॉ का विकेट लेना इस मैच को और भी ज़्यादा यादगार बना गया। यह मेरे लिए एक बेहतरीन विदाई थी। इससे भी ज़्यादा अहम बात यह है कि इस टेस्ट मैच ने भारतीय क्रिकेट की पूरी तस्वीर ही बदल दी। इस मैच ने टीम के अंदर यह विश्वास जगाया कि हम किसी भी मुश्किल हालात से उबरकर जीत हासिल कर सकते हैं। एक और छोटी सी निजी याद भी जुड़ी है: जिस बल्ले से लक्ष्मण ने वह मशहूर 281 रनों की पारी खेली थी, वह असल में मेरा ही था। तो इस तरह, एक छोटे से रूप में ही सही, उस ऐतिहासिक पारी में मेरा भी कुछ योगदान रहा।”

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here