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Shardiya Navratri 2026: सप्तमी पर करें मां कालरात्रि की पूजा, जानें प्रिय भोग, शुभ रंग और पौराणिक कथा

शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की आराधना की जाती है। देवी का यह रूप जितना उग्र और शक्तिशाली है, उतना ही भक्तों के लिए कल्याणकारी भी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि अपने भक्तों को भय, नकारात्मक शक्तियों और जीवन की बाधाओं से लड़ने का साहस प्रदान करती हैं। उन्हें शुभ फल देने वाली देवी होने के कारण 'शुभंकरी' नाम से भी पुकारा जाता है। मान्यता है कि सच्चे मन से मां की उपासना करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है। आइए जानते हैं नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि, प्रिय भोग, मंत्र, आरती, कथा और शुभ रंग के बारे में। नवरात्रि का सातवां दिन कब है? वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि की सप्तमी तिथि 17 अक्तूबर, शनिवार को मनाई जाएगी। इस दिन मां कालरात्रि की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी का स्मरण करने से मन में साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है। भक्त उनसे जीवन की परेशानियों को दूर करने और परिवार की सुख-शांति बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं। देवी कालरात्रि का स्वरूप पुराणों के अनुसार देवी दुर्गा ने राक्षस रक्तबीज का वध करने के लिए कालरात्रि को उत्पन्न किया था। इनके शरीर का रंग घने अंधकार जैसा है, बिखरे हुए बाल, गले में विद्युत जैसी माला और तीन नेत्र इनकी विशेषता है। इनके सांसों से अग्नि ज्वालाएं निकलती रहती हैं और इनका वाहन गर्दभ है। वर और अभय मुद्रा में हाथ तथा खड्ग और काँटे का अस्त्र धारण करने वाली मां कालरात्रि भयानक स्वरूप के बावजूद शुभ फल देने वाली हैं, इसलिए इन्हें शुभंकरी भी कहा जाता है।   मां कालरात्रि की पूजा विधि     नवरात्रि के सातवें दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।     इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें।     मां कालरात्रि की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें और उनके सामने दीपक जलाएं।     देवी को रोली, कुमकुम, अक्षत और फूल अर्पित करें। इसके बाद धूप-दीप दिखाकर मंत्रों का जाप करें।     मां को गुड़ या गुड़ से बनी मिठाई का भोग लगाएं।     अंत में मां कालरात्रि की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि तथा कल्याण की प्रार्थना करें। मां कालरात्रि का प्रिय भोग धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि को गुड़ विशेष प्रिय माना जाता है। इस दिन देवी को गुड़, गुड़ का हलवा, गुड़ की खीर या मालपुआ अर्पित किया जा सकता है। भोग लगाते समय शुद्धता और श्रद्धा का ध्यान रखें। पूजा के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांटें। मान्यता है कि देवी को गुड़ का भोग लगाने से जीवन में आने वाली बाधाओं से मुक्ति और सुख-समृद्धि की कामना पूरी होती है। नवरात्रि के सातवें दिन का शुभ रंग और फूल नवरात्रि के सातवें दिन नीला रंग पहनना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि यह रंग शक्ति, स्थिरता और सकारात्मकता का प्रतीक है। मां कालरात्रि की पूजा में चमेली के फूल अर्पित करने की परंपरा भी प्रचलित है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार गुड़हल या अन्य सुगंधित फूल भी चढ़ा सकते हैं। मां कालरात्रि की पौराणिक कथा पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज जैसे असुरों ने तीनों लोकों में उत्पात मचाना शुरू किया, तब देवता चिंतित होकर भगवान शिव के पास पहुंचे। देवताओं की रक्षा के लिए मां दुर्गा ने असुरों से युद्ध किया। युद्ध के दौरान रक्तबीज नामक दैत्य को वरदान प्राप्त था कि उसके रक्त की प्रत्येक बूंद धरती पर गिरते ही उसके समान एक नया दैत्य पैदा हो जाएगा। रक्तबीज का वध करना कठिन हो गया, क्योंकि उसके रक्त से लगातार नए दैत्य उत्पन्न होने लगे। तब देवी ने उग्र कालरात्रि स्वरूप धारण किया। मान्यता है कि मां ने रक्तबीज के शरीर से निकलने वाले रक्त को धरती पर गिरने से पहले ही ग्रहण कर लिया और उसका संहार किया। इस प्रकार देवी ने देवताओं को संकट से मुक्त कराया और अधर्म पर विजय प्राप्त की। मां कालरात्रि की यह कथा बुराई के विरुद्ध संघर्ष, साहस और धर्म की रक्षा का संदेश देती है। नवरात्रि के सातवें दिन भक्त देवी की पूजा करके जीवन से भय और नकारात्मकता दूर करने तथा शक्ति और सद्बुद्धि प्राप्त करने की प्रार्थना करते हैं। मां कालरात्रि की आरतीः कालरात्रि जय जय महाकाली।  काल के मुंह से बचाने वाली। दूष्ट संचारक नाम तुम्हारा।  महाचेही तेरा अवतारा ॥ पृथ्वी और आकाश पे सारा। महाकाली है तेरा पसारा॥ खड्ग खप्पर रखने वाली। दुष्टों का लहू चखने वाली ॥ कलकत्ता स्थान तुम्हारा। सब जगह देख तेरा नजारा ॥ सभी देवता सब नर-नारी।  गावे स्तुति सभी तुम्हारी॥ रक्तदन्ता और अन्नपूर्णा। कृपा करे तो कोई भी दुःख ना॥ ना कोई चिता रहे ना बीमारी। ना कोई गम ना संकट भारी ॥ उस पर कभी कष्ट ना आवे। महाकाली मां जिसे बचावे ॥ तू भी भक्त प्रेम से कह। कालरात्रि मां तेरी जय ॥ मां कालरात्रि के प्रिय मंत्रः ॐ कालरात्र्यै नमः बीज मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः देवी मंत्र: ॐ देवी कालरात्र्यै नमः ॥ प्रार्थना या स्तुति मंत्रः या देवी सर्वभूतेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥  

शनिवार का राशिफल: 17 अक्टूबर को इन राशियों को मिल सकती है बड़ी खुशखबरी

मेष राशि– प्रोफेशनल लाइफ में कार्यों की तारीफ होगी। पारिवारिक जीवन की दिक्कतें दूर होंगी। आज आप फैमिली के साथ ट्रिप का प्लान बना सकते हैं। भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी। लव लाइफ में खुशनुमा माहौल रहेगा। पार्टनर के साथ समय व्यतीत करेंगे। इससे रिश्तों में प्यार और रोमांस जगेगा। स्वास्थ्य पहले से अच्छा रहेगा। वृषभ राशि– दिन मिलाजुला रहने वाला है। दान-पुण्य के कार्यों के लिए आज का दिन शुभ रहने वाला है। धार्मिक कार्यों में दिलचस्पी बढ़ेगी। व्यापार में विस्तार होगा। प्रेम जीवन में कुछ समस्याएं आ सकती हैं। स्टूडेंट्स को तनाव महसूस हो सकता है। स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। मिथुन राशि- दिन उतार-चढ़ाव से भरा रहेगा। प्रोफेशनल लाइफ में समस्याएं हो सकती हैं। कर्क राशि वाले आज यात्रा पर जा सकते हैं। अपने स्वास्थ्य पर ज्यादा ध्यान देना होगा। हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं। अपनी डाइट में प्रोटीन और विटामिन्स से भरपूर फूड शामिल करें। लव लाइफ में दिक्कतें रहेंगी। खर्चों पर थोड़ा ध्यान दें। कर्क राशि- कर्क राशि वालों को सावधान रहना होगा। घर में चल रहे विवाद सुलझाएं। जल्दबाजी में कोई फैसला न लें और पुरानी गलती को दोबारा न दोहराएं। अपने करियर गोल्स पर फोकस करें। रिलेशनशिप की दिक्कतों को बातचीत के जरिए सुलझाने का प्रयास करें। इस समय निवेश न करें। आर्थिक स्थिति भी आज अच्छी नहीं कही जा सकती है। सिंह राशि- सिंह राशि वालों के लिए दिन सामान्य रहेगा। मन को शांत रखें। अशांति महसूस हो सकती है। करियर को लेकर मन चिंतित रहेगा। निवेश के नए मौकों पर नजर रखें। पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ की प्रॉब्लम को सुलझाने के लिए परिजनों से सुझाव लें। वाणी पर नियंत्रण रखें। तुला राशि- तुला राशि वालों को सावधान रहना होगा। घर में चल रहे विवाद सुलझाएं। जल्दबाजी में कोई फैसला न लें और पुरानी गलती को दोबारा न दोहराएं। अपने करियर गोल्स पर फोकस करें। रिलेशनशिप की दिक्कतों को बातचीत के जरिए सुलझाने का प्रयास करें। इस समय निवेश न करें। आर्थिक स्थिति भी आज अच्छी नहीं कही जा सकती है। वृश्चिक राशि- वृश्चिक राशि वालों के लिए दिन शुभ रहेगा। प्रोफेशनल लाइफ में कार्यों की तारीफ होगी। पारिवारिक जीवन की दिक्कतें दूर होंगी। आज आप फैमिली के साथ ट्रिप का प्लान बना सकते हैं। भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी। लव लाइफ में खुशनुमा माहौल रहेगा। पार्टनर के साथ समय व्यतीत करेंगे। इससे रिश्तों में प्यार और रोमांस जगेगा। स्वास्थ्य पहले से अच्छा रहेगा। धनु राशि- आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। घर के छोटे भाई-बहन करियर में नई उपलब्धि हासिल करेंगे। पारिवारिक जीवन में सुख-शांति बनी रहेगी। ऑफिस में खूब मान-सम्मान मिलेगा। स्टूडेंट्स को शैक्षिक कार्यों में अपार सफलता मिलेगा। वैवाहिक जीवन अच्छा रहेगा। मकर राशि- मकर राशि वालों को सावधान रहना होगा। घर में चल रहे विवाद सुलझाएं। जल्दबाजी में कोई फैसला न लें और पुरानी गलती को दोबारा न दोहराएं। अपने करियर गोल्स पर फोकस करें। रिलेशनशिप की दिक्कतों को बातचीत के जरिए सुलझाने का प्रयास करें। इस समय निवेश न करें। आर्थिक स्थिति भी आज अच्छी नहीं कही जा सकती है। कुंभ राशि- कुंभ राशि वालों के लिए दिन उतार-चढ़ाव से भरा रहेगा। प्रोफेशनल लाइफ में समस्याएं हो सकती हैं। कर्क राशि वाले आज यात्रा पर जा सकते हैं। अपने स्वास्थ्य पर ज्यादा ध्यान देना होगा। हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं। अपनी डाइट में प्रोटीन और विटामिन्स से भरपूर फूड शामिल करें। लव लाइफ में दिक्कतें रहेंगी। खर्चों पर थोड़ा ध्यान दें। मीन राशि- मीन राशि वालों के लिए शुभ दिन कहा जा सकता है। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। घर के छोटे भाई-बहन करियर में नई उपलब्धि हासिल करेंगे। पारिवारिक जीवन में सुख-शांति बनी रहेगी। ऑफिस में खूब मान-सम्मान मिलेगा। स्टूडेंट्स को शैक्षिक कार्यों में अपार सफलता मिलेगा। वैवाहिक जीवन अच्छा रहेगा।

Navratri 2026: कल मां कालरात्रि की पूजा, गुड़ का भोग लगाएं और इन मंत्रों का करें जाप

नवरात्रि का सातवां दिन: नवरात्रि का सातवां दिन मां दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप को समर्पित है। नवरात्रि के सातवें दिन को 'सप्तमी' भी कहा जाता है। मान्यता है कि मां कालरात्रि अपने भक्तों के जीवन में कष्टों, बाधाओं से मुक्ति और खुशियों का संचार करती हैं। कहा जाता है कि सच्चे मन से देवी कालरात्रि की उपासना करने से मनुष्य को मनवांछित फल की प्राप्ति होती है और नकारात्मक शक्तियों से छुटकारा मिलता है। वो सभी सुखों को प्राप्त करता है। नवरात्रि की सप्तमी कब है? पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, शारदीय नवरात्रि का सप्तमी व्रत 17 अक्टूबर 2026, शनिवार को रखा जाएगा। पंडित जी कहते हैं कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मुश्किल समय में मां कालरात्रि का ध्यान लगाने और स्मरण करने से जातक को मानसिक शांति और साहस मिलता है। यही कारण है कि मां को 'शुभंकरी' भी कहा जाता है। कहा जाता है कि मां का स्वरूप भले ही अत्यंत भयानक और विकराल है लेकिन वह अपने भक्तों का हमेशा कल्याण करती हैं और शुभ फलों को प्रदान करती हैं। 17 अक्टूबर को मां कालरात्रि के पूजन के शुभ मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:28 बजे तक ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:59 बजे से सुबह 05:47 बजे तक अपराह्न (शाम) का पूजा मुहूर्त: दोपहर 03:54 बजे से शाम 06:14 बजे तक। मां कालरात्रि की पूजा विधि: 1. मां कालरात्रि की पूजा करने के लिए नवरात्रि के सातवें दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। 2. अब पूजा स्थल की साफ-सफाई करें और गंगाजल से शुद्ध करें। 3. मां कालरात्रि की प्रतिमा या फोटो को स्थापित करें। 4. अब मां को रोली, कुमकुम, अक्षत, फूल, धूप और दीप अर्पित करें। 5. मां की आरती उतारें और उनके मंत्रों का यथाशक्ति जाप करें। मां कालरात्रि के प्रिय मंत्र: मान्यता है कि मां कालरात्रि की पूजा में उनके प्रिय मंत्रों का जाप करने से जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। सामान्य मंत्र: ॐ कालरात्र्यै नम: बीज मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नम: देवी मंत्र: ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥ प्रार्थना या स्तुति मंत्र: या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥ नवर नवरात्रि के सातवें दिन का शुभ रंग और फूल: नवरात्रि के सातवें दिन नीला रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि मां कालरात्रि में नीले रंग के वस्त्र पहनने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मां कालरात्रि की पूजा में रात में खिलने वाली चमेली और नीले या गुड़हल के फूल अर्पित किए जाते हैं। मां कालरात्रि का प्रिय भोग: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि को गुड़ और गुड़ से बनी चीजें (जैसे गुड़ का हलवा, गुड़ की खीर या मालपुआ) अत्यंत प्रिय हैं। मान्यता है कि मां को गुड़ से बनी चीजों को अर्पित करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और व्यक्ति की कुंडली में राहु दोष शांत होता है। मां कालरात्रि की कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, दैत्य शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज ने तीनों लोकों में अपना आतंक मचाना शुरू किया तो सभी देवी-देवतागण परेशान हो गए। सभी समस्या का समाधान पूछने के लिए भगवान शिव के पास पहुंचे। तब भगवान शिव ने मां पार्वती से राक्षसों का वध करके अपने भक्तों की रक्षा करने के लिए कहा। भगवान शिव का आदेश पाने के बाद मां पार्वती ने मां दुर्गा का रूप धारण किया और शुंभ-निशुंभ का वध किया। लेकिन जैसे ही मां दुर्गा ने रक्तबीज का वध किया तो उसके रक्त की बूंदों से हजारों-लाखों रक्तबीज उत्पन्न हो गए। तब मां दुर्गा ने मां कालरात्रि का रूप धारण किया और रक्तबीज का वध किया और उसके शरीर से निकलने वाले रक्त को अपने मुख में भर लिया। मां कालरात्रि की आरती: कालरात्रि जय जय महाकाली। काल के मुंह से बचाने वाली॥ दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा। महाचंडी तेरा अवतारा॥ पृथ्वी और आकाश पे सारा। महाकाली है तेरा पसारा॥ खड्ग खप्पर रखने वाली। दुष्टों का लहू चखने वाली॥ कलकत्ता स्थान तुम्हारा। सब जगह देखूं तेरा नजारा॥ सभी देवता सब नर-नारी। गावें स्तुति सभी तुम्हारी॥ रक्तदन्ता और अन्नपूर्णा। कृपा करे तो कोई भी दुःख ना॥ ना कोई चिंता रहे ना बीमारी। ना कोई गम ना संकट भारी॥ उस पर कभी कष्ट ना आवे। महाकाली मां जिसे बचावे॥ तू भी भक्त प्रेम से कह। कालरात्रि मां तेरी जय॥

Dhanteras 2026: धनतेरस पर कब करें पूजा और खरीदारी? जानें शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

Dhanteras 2026 : हर साल कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि को धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है. इस धन त्रयोदशी भी कहो जाता है. इस दिन भगवान धनवंतरी, कुबेर महाराज और माता लक्ष्मी की पूजा का विधान बताया गया है. मान्यता है कि इस दिन इनके विधिवत पूजन और कुछ खास चीजों की खरीदारी से धनधान्य और सुख-संपन्नता में वृद्धि होती है. आइए जानते हैं इस साल धनतेरस का त्योहार किस तारीख को मनाया जाएगा और इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहने वाला है. धनतेरस 2026 का शुभ मुहूर्त हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह करीब 9:30 बजे शुरू होगी. इस तिथि का समापन 7 नवंबर 2026 को सुबह करीब 11:45 बजे होगा. ऐसे में धनतेरस का त्योहार 6 नवंबर दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा. खरीदारी और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है? धनतेरस पर नई चीजों की खरीदारी बेहद शुभ मानी जाती है. मान्यता है कि इस दिन सोना, चांदी, पीतल के बर्तन, झाड़ू और धनिया खरीदकर घर लाने से सुख-संपन्नता बढ़ती है. बहुत सारे लोग अपने जरूरत की चीजें भी इस दिन खरीदकर लाते हैं. किसी नए काम की शुरुआत करना भी इस दिन लाभकारी माना गया है. धनतेरस का शुभ मुहूर्त खरीदारी का मुहूर्त- 6 नवंबर को सुबह 9:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक पूजा का शुभ मुहूर्त- शाम 6:18 बजे से रात 8:10 बजे तक धनतेरस पूजा की विधि धनतेरस के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें. घर और पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें. फिर एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर भगवान धनवंतरी और कुबेर महाराज की प्रतिमा स्थापित करें. इनके साथ मां लक्ष्मी की संयुक्त पूजा भी की जा सकती है. इनके समक्ष घी का दीपक जलाएं. गेहूं की एक कटोरी चौकी पर रखें. इसके बाद भगवान को कुमकुम और चंदन से तिलक करें. उन्हें फल, फूल और मिठाई अर्पित करें. फिर इनके मंत्रों का जाप करें. अंत में सभी देवी-देवताओं की आरती करें और हाथ जोड़कर सुख-समृद्धि की कामना करें. धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ माना जाता है? धनतेरस पर खरीदारी करना बहुत शुभ माना जाता है. इस दिन सोना-चांदी, पीतल के बर्तन या नए बर्तन, झाड़ू, धनिया, पीली कौड़ी और लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा खरीदना शुभ माना जाता है. इसके अलावा, आप चाहें तो कोई गैजेट, इलेक्ट्रोनिक आइटम या घर की जरूरत का कोई सामान भी खरीदकर ला सकते हैं. मान्यता है कि धनतेरस पर इन चीजों की खरीदारी से धनधान्य में और सुख-संपन्नता में दिन दूनी रात चौगुनी वृद्धि होती है.

Maa Katyayani Katha 2026: नवरात्रि के छठे दिन पढ़ें मां कात्यायनी की व्रत कथा

Navratri Day 6 2026 Maa Katyayani Katha: नवरात्रि के छठे दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा करते हैं. इस बार नवरात्रि का छठा दिन यानि आश्विन शुक्ल षष्ठी तिथि 16 अक्टूबर को है. मां कात्यायनी चार भुजाओं वाली देवी हैं, वे अपनी भुजाओं में तलवार और कमल धारण करती हैं. उनकी एक भुजा अभय मुद्रा और एक भुजा वर मुद्रा में होती है. मां कात्यायनी की पूजा करने से यश और सफलता की प्राप्ति होती है. नकारात्मकता का नाश होता है, भक्तों को शक्ति और निडरता मिलती है. मां कात्यायनी सिंह पर सवारी करती हैं. सिंह पर सवार होकर माता असुरों का विनाश करती हैं. मां कात्यायनी कौन हैं? महिषासुर वध के लिए कैसे हुई देवी की उत्पत्ति? मां कात्यायनी की कथा पौराणिक क​था के अनुसार, प्राचीन समय में कात्यायन ऋषि थे, तो देवी भगवती के अनन्य भक्त थे. उन्होंने वर्षों तक कठोर तप किया, ताकि मां जगदंबा प्रसन्न हों. एक दिन मां भगवती उनकी तपस्या से प्रसन्न हुईं और दर्शन दिया. उन्होंने माता को प्रणाम किया, देवी ने वरदान मांगने को कहा. तब कात्यायन ऋषि ने उनको अपनी पुत्री के रूप में पाने की इच्छा प्रकट की. तब उन्होंने कहा कि ऐसा ही होगा. उस समय महिषासुर का तीनों लोकों में अत्याचार बढ़ रहा था. उसने स्वर्ग पर भी अधिकार कर लिय था. उसके आतंक से देवता, ऋषि-मुनि और मनुष्य सभी भयभीत थे. उसे कोई हरा नहीं पा रहा था. ऐसी स्थिति में एक दिन त्रिदेवों ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने अपने तेज पुंज से एक दिव्य देवी को प्रकट किया. कात्यायन ऋषि ने सबसे पहले उस देवी की विधिपूर्वक पूजा अर्चना की. वही देवी कात्यायनी के रूप में पहचानी गईं. अश्विन कृष्ण चतुर्दशी को मां कात्यायनी का प्रकाट्य हुआ. उन्होंने अश्विन शुक्ल सप्तमी, अष्टमी और नवमी यानि लगातार तीन दिनों तक उनकी पूजा स्वीकार की. फिर दशमी तिथि को मां कात्यायनी ने अपना युद्ध वाला स्वरूप धारण किया और महिषासुर का वध कर दिया. इसके बाद से तीनों लोकों में धर्म और शांति की स्थापना हुई. सुयोग्य जीवनसाथी के लिए उपाय य​दि आपके विवाह में किसी प्रकार से कोई बाधा या समस्या आ रही है तो आपको मां कात्यायनी की पूजा करनी चाहिए. ऐसे ही जो लोग सुयोग्य जीवनसाथी की कामना करते हैं, उनको भी मां कात्यायनी की कृपा लेनी चाहिए मां कात्यायनी के मंत्र और प्रिय भोग मां कात्यायनी की विधि विधान से पूजा करते समय आपको शहद, मीठा पान और लौकी का भोग लगाना चाहिए. मां देवी कात्यायन्यै नम या देवी सर्वभू‍तेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ से इनका पूजन कर सकते हैं.

आज का राशिफल 16 अक्टूबर 2026: शुक्रवार को किन राशियों को मिलेगी सफलता? जानें भविष्यफल

मेष राशि– तनाव दूर करने के लिए वॉक पर जा सकते हैं। सिंगल लोगों की लाइफ में किसी नए शख्स की एंट्री होने की संभावना है। करियर में बैलेंस मेंटेन करके चलें। खुद को हाइड्रेटेड जरूर रखें। वृषभ राशि- आपकी मेहनत आपको पूरी लगन से अपना प्रदर्शन दिखाने में मदद करेगी। शाम रोमांटिक रहने वाली है। ऑफिस का काम आपके दिन को व्यस्त बना सकता है। हाइड्रेटेड रहना न भूलें। मिथुन राशि– फाइनेंशियली आप अच्छे रहेंगे। प्रोफेशनल लाइफ में खुद पर फीलिंग्स को हावी न होने दें। जल्दबाजी में आकर आज कोई जरूरी डिसीजन न ही लें तो बेहतर है। ब्रेक लेते रहें। कर्क राशि– ऑफिस का काम घर लेकर न आएं। सेहत पर ध्यान देने की आज जरूरत है। इन्वेस्टमेंट करना आज ठीक नहीं रहेगा। कुछ लोगों को राजनीतिक लाभ मिल सकता है। सिंह राशि- आपको अपने स्वास्थ्य की देख-रेख करनी चाहिए। बॉस की सलाह पर ध्यान दें। आज डाइट को हेल्दी रखें। भले ही आपकी शादी को काफी समय हो गया हो लेकिन साथ में समय व्यतीत करना जरूरी है। कन्या राशि- थोड़ा स्ट्रेस फील कर सकते हैं। आज का राशिफल नए विचारों को लाइफ में लाने की एडवाइस दे रहा है। करियर तौर पर प्रोडक्टिव रहेंगे। आर्थिक दृष्टि से अच्छा अवसर आज दरवाजे पर दस्तक दे सकता है। तुला राशि- सीनियर्स के साथ किसी नए प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर सकते हैं। वित्तीय स्थिति आज पॉजिटिव रहने वाली है। वर्क और लाइफ के बीच बैलेंस मेन्टेन करके रखना बेहद जरूरी है। वृश्चिक राशि- सही दृष्टिकोण और थोड़े से साहस के साथ आप अपने रोमांटिक सपनों को एक खूबसूरत हकीकत में बदल सकते हैं। वर्क प्रेशर आज ज्यादा फील हो सकता है। बैलेंस मेंटेन रखें। धनु राशि- काम करते दौरान समय-समय पर ब्रेक लें। सुख-समृद्धि भरा दिन रहेगा दिन। हेल्दी ड्रिंक का सेवन करें। पैसे के मामले में होशियार रहना आज बेहद जरूरी है। आज खुद पर फोकस करें। मकर राशि- आपको सेल्फ केयर पर फोकस करना चाहिए। नए रास्ते खोजने के लिए आप तैयार हैं। अपनी मेंटल हेल्थ पर ध्यान दें। आगे बढ़ने और दुनिया को यह दिखाने से न डरें की आप कितने काबिल हैं। कुंभ राशि– आपका शरीर और दिमाग दोनों तालमेल में रहने वाले हैं। अपनी फीलिंग्स को पार्टनर के साथ शेयर करना अच्छा साबित होगा। स्ट्रेस दूर करने के लिए मेडिटेशन या योग का सहारा लें। मीन राशि– करियर में कुछ नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। फाइनेंशियल दिक्कतों से छुटकारा पाने के लिए अपने पार्टनर से सलाह लें। आज काफी मोटिवेटेड फील करेंगे। भीड से अलग होने से न डरें।

मां कात्यायनी को चढ़ाएं शहद का भोग, जानें पूजा मंत्र और आरती

मां कात्यायनी पूजा विधि और मंत्र:नवरात्रि का छठा दिन 16 अक्टूबर, शुक्रवार को है। मां दुर्गा की छठवीं शक्ति हैं मां कात्यायनी। नवरात्रि में छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। मान्यता है इनकी पूजा करने से भक्तों को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति होती है। साधक को रोग, शोक, संताप और भय नष्ट हो जाते हैं। कहा जाता है कि मां कात्यायनी की उपासना करने से जातक के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, महर्षि कात्यायन ने मां भवानी की उपासना की थी और उनकी कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर मां दुर्गा ने उनकी बेटी के रूप में जन्म लिया था। इसलिए यह देवी मां कात्यायनी कहलाईं। जानें मां कात्यायनी की पूजा विधि, मुहूर्त, भोग, मंत्र और आरती। मां कात्यायनी का स्वरूप: मां की चार भुजाएं हैं। दाईं ओर का ऊपर वाला हाथ अभय मुद्रा में है। नीचे वाला हाथ वर मुद्रा में हैं। मां के बाईं ओर के ऊपर वाले हाथ में तलवार है और नीचे वाले हाथ में कमल का फूल है। मां का वाहन सिंह है। मां कात्यायनी की कैसे करें पूजा: नवरात्रि के छठवें दिन मां कात्यायनी की पूजा करने के लिए सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके मां दुर्गा और मां कात्यायनी का ध्यान करें। मां कात्यायनी के पूजा की आसान विधि: सबसे पहले पूजा स्थल पर मां कात्यायनी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। अब गंगाजल से पूजा स्थल को पवित्र करें और मां के सामने घी का दीपक जलाएं। मां को रोली, अक्षत, पुष्प और चुनरी आदि अर्पित करें। मां कात्यायनी को शहद या शहद से बनी मिठाई का भोग लगाएं। इसके बाद मां कात्यायनी के मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें। दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। अंत में मां की आरती करें और परिवार की तरक्की और सुख-समृद्धि की कामना करें। 16 अक्टूबर 2026 को पूजा का शुभ मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त – सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक। ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04:52 बजे से सुबह 05:40 बजे तक। गोधूलि मुहूर्त: शाम 05:51 बजे से शाम 06:16 बजे तक सायाह्न संध्या: शाम 05:51 बजे से रात 07:06 बजे तक मां कात्यायनी का प्रिय भोग: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी का प्रिय भोग शहद है। मां को शहद और शहद से बनी चीजों का भोग लगाने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। नवरात्रि के छठे दिन का शुभ रंग और पुष्प: मां कात्यायनी को लाल प्रिय है। नवरात्रि के छठे दिन लाल रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। इस दिन मां को गुड़हल और गुलाब के फूल अर्पित करना शुभ माना गया है। मान्यता है कि ऐसा करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और मनवांछित फल देती हैं। मां कात्यायनी बीज मंत्र: ॐ देवी कात्यायन्यै नमः ॥ या ॐ ह्रीं नमः ॥ स्तुति मंत्र- चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना । कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी ॥ ध्यान मंत्र- या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ मां कात्यायनी की आरती- जय-जय अम्बे जय कात्यायनी जय जगमाता जग की महारानी बैजनाथ स्थान तुम्हारा वहा वरदाती नाम पुकारा कई नाम है कई धाम है यह स्थान भी तो सुखधाम है हर मंदिर में ज्योत तुम्हारी कही योगेश्वरी महिमा न्यारी हर जगह उत्सव होते रहते हर मंदिर में भगत हैं कहते कत्यानी रक्षक काया की ग्रंथि काटे मोह माया की झूठे मोह से छुडाने वाली अपना नाम जपाने वाली बृहस्‍पतिवार को पूजा करिए ध्यान कात्यायनी का धरिए हर संकट को दूर करेगी भंडारे भरपूर करेगी जो भी मां को 'चमन' पुकारे कात्यायनी सब कष्ट निवारे।।

अक्टूबर में कब है मां सरस्वती की पूजा? जानें आवाहन की तारीख, पूजन विधि और मंत्र

हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि में होने वाली सरस्वती पूजा का विशेष महत्व है। मां सरस्वती को ज्ञान, बुद्धि, विद्या, संगीत और कला की देवी माना जाता है। मां सरस्वती की विशेष रूप से पूजा-अर्चना विद्यार्थी, शिक्षक, लेखक, कलाकार और शिक्षा से जुड़े लोग करते हैं। आमतौर पर मां सरस्वती की पूजा वसंत पंचमी के दिन धूमधाम के साथ की जाती है। लेकिन अक्टूबर महीने में भी नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है, जिनमें ज्ञान और विद्या से जुड़ी देवी की आराधना का विशेष महत्व है। अक्टूबर 2026 में सरस्वती पूजा कब है? शारदीय नवरात्रि के दौरान मां सरस्वती पूजा में पहला दिन आवाहन और दूसरा दिन प्रधान पूजा का होता है। 2026 में मां सरस्वती पूजा की पूजा 17 अक्टूबर 2026, शनिवार है। इससे ठीक एक दिन पहले 16 अक्टूबर को मां सरस्वती का आवाहन होगा। सरस्वती आवाहन क्या है? आवाहन का सरल अर्थ है आमंत्रित करना। पूजा की शुरुआत में भक्त मां सरस्वती का ध्यान लगाते हैं और उनसे पूजन स्वीकार करने की प्रार्थना करते हैं। इस दिन देवी का स्वागत किया जाता है। इस बार 16 अक्टूबर 2026 को मूल नक्षत्र में मां सरस्वती का आवाहन दोपहर 03:33 बजे से शाम 05:50 बजे तक होगा। सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है? सरस्वती प्रधान पूजा इस उपासना का मुख्य दिन है। इस दिन मां शारदा की पूजा करके विद्या, सद्बुद्धि और सीखने की क्षमता के लिए प्रार्थना की जाती है। इस साल 17 अक्टूबर 2026 को पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में पूजा का मुहूर्त दोपहर 03:32 बजे से शाम 05:49 बजे तक रहेगा। सरस्वती पूजा का धार्मिक महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां सरस्वती की आराधना करने से व्यक्ति को ज्ञान की प्राप्ति, एकाग्रता और जीवन में सही निर्णय लेने की शक्ति मिलती है। सरस्वती पूजा की विधि: 1. मां सरस्वती की पूजा करने के लिए सबसे पहले सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल की सफाई करें। 2. मां सरस्वती की प्रतिमा या तस्वीर को साफ चौकी पर स्थापित करें। 3. मां को सफेद या पीले फूल, अक्षत, फल, मिठाई और धूप-दीप आदि अर्पित करें। 4. पूजन में अपनी किताबें, कॉपियां, कलम या संगीत से संबंधित सामग्री पूजा स्थल पर रखें। 5. मां सरस्वती के मंत्र का जाप करें और परिवार की सुख-समृद्धि व ज्ञान वृद्धि की प्रार्थना करें। 6. अंत में आरती करके प्रसाद बांटें। मां सरस्वती का कौन-सा मंत्र जपें? पूजा के समय मां सरस्वती के प्रसिद्ध मंत्र ‘ॐ ऐं सरस्वत्यै नम:’ का जाप किया जा सकता है।

उत्तर-पूर्व दिशा में इन चीजों को रखने से बचें, जानें क्या कहता है वास्तु शास्त्र

वास्तु शास्त्र में उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण को बहुत ही शुभ मानते हैं। जानें यहां पर किन चीजों को रखने से बचना चाहिए?  ईशान कोण में क्या ना रखें? वास्तु शास्त्र में कुछ दिशाओं को बहुत ही शुभ माना जाता है और इन्हीं में से एक है ईशान कोण। शास्त्र में उत्तर-पूर्व दिशा को ही ईशान कोण कहा जाता है। इस दिशा को बहुत ही खास मानते हैं और यहां पर कुछ चीजों को रखने से बचने की सलाह दी जाती है। जानें ये दिशाएं कौन सी हैं? सबसे पवित्र कोना है ईशान कोण शास्त्र के अनुसार घर के उत्तर और पूर्व दिशा के बीच वाले कोने को ही ईशान कोण कहते हैं। मान्यता है कि यहां पर सबसे ज्यादा पॉजिटिव एनर्जी रहती है। इस दिशा में पूजा करना और ध्यान वगैरह लगाना बहुत ही खास माना जाता है। ऐसे में इस दिशा को हमेशा खुला, साफ और हल्का रखने की कोशिश करनी चाहिए। ईशान कोण में ना रखें भारी सामा ईशान कोण की ओर आप भूलकर भी कोई भारी सामान ना रखें। इस दिशा में अलमारी, बेड, सोफा या फिर लोहे का कोई भी भारी सामान रखने से बचें। अगर ऐसा नहीं करेंगे तो घर में वास्तु दोष लगने का डर होगा। उत्तर-पूर्व दिशा में ना रखें जूते-चप्पल नियम के अनुसार घर की इस दिशा में कोई भी ऐसा सामान या चीज ना रखें जिससे गंदगी हो। यहां पर जूते-चप्पल ना निकालें। इसके अलावा कूड़ेदान रखने से भी बचें। आप इस दिशा को जितना साफ रखेंगे उतना ही अच्छा होगा और इससे घर का माहौल भी अच्छा बनेगा। ईशान कोण में ना बनवाएं ये 2 चीजें वास्तु शास्त्र के अनुसार ईशान कोण की ओर कभी भी किचन ना बनवाएं। यहां पर बाथरूम भी बनवाना सही नहीं मानते हैं। अगर इस दिशा में ये गलती की जाए तो कई काम में बाधाएं आनी शुरू हो सकती है। ऐसे में घर बनवाते समय इन बातों का विशेष ख्याल रखना चाहिए। सफाई से जुड़ी चीजें ना रखें ईशान कोण में कभी भी सफाई से जुड़ी चीजें जैसे झाड़ू या फिर पोछा वगैरह रखने से बचें। वास्तु मान्यता के हिसाब से ईशान कोण वाला कोना पवित्र होता है तो ऐसे में यहां पर इन चीजों को रखने से बचना चाहिए और कोशिश करनी चाहिए कि ये जगह हल्की और खाली ही रहे। ईशान कोण में क्या रखें? अब सवाल ये है कि आखिर ईशान कोण की साइड कौन सी चीजें रख सकते हैं? वास्तु नियम के हिसाब से यहां पर पानी से भरा कटोरा रख सकते हैं जिसे उरली भी कहा जाता है। आप हर सुबह इसका पानी बदलकर इसमें फूल डाल सकते हैं। इसके अलावा इस दिशा में तुलसी का पौधा रखना भी शुभ होता है।    

नवरात्रि में कन्या पूजन को लेकर कन्फ्यूजन खत्म, 19 को अष्टमी और 20 अक्टूबर को नवमी; जानें मुहूर्त

Sharadiya Navratri:  शारदीय नवरात्रि में इस बार महाअष्टमी और नवमी को लेकर थोड़ा कंफ्यूजन बना हुआ है। बता दें कि महाअष्टमी और नवमी में कन्या पूजन किया जाता है। महाअष्टमी के दिन कन्या पूजन करने और व्रत रखने का विधान है। जबकि महानवमी के दिन हवन करके व्रत का पारण किया जाता है। लेकिन, इस बार महानवमी और अष्टमी की तारीख को लेकर लोगों के बीच में थोड़ा कंफ्यूजन बना हुआ है। जिस वजह से लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि कन्या पूजन रविवार में करें या सोमवार में करें। आइए जानते हैं ज्योतिष से किन दिन अष्टमी और नवमी मनाई जाएगी। महा अष्टमी और महानवमी 2026 कब ?  पंडित राकेश झा बताते हैं कि पंचांग की गणना के अनुसार, 18 तारीख को सुबह में 8 बजकर 29 मिनट के बाद अष्टमी तिथि का संयोग बनेगा। जबकि 19 तारीख को 10 बजकर 52 मिनट तक अष्टमी तिथि रहेगी। ऐसे में 18 तारीख को उदय तिथि के अनुसार अष्टमी तिथि नहीं लगने की वजह से इस दिन को अष्टमी नहीं मान्य होगा और 19 तारीख को उदया तिथि में अष्टमी होने से 19 तारीख को ही अष्टमी से संबंधित पूजा विधान किया जाएगा और इसी दिन देवी को खोंचा अर्पित किया जाएगा। वहीं, 20 तारीख को उदय तिथि के साथ नवमी तिथि का आरंभ हो जाएगा और दोपहर में 12 बजकर 50 मिनट तक नवमी तिथि रहेगी। ऐसे में जो लोग नवमी तिथि को कन्या पूजन करते हैं वह 20 तारीख को सुबह में 12 बजकर 50 मिनट से पहले ही कन्या पूजन कर लें। बता दें कि तिथि और मुहूर्त का विवरण यहां पंचांग दिवाकर के अनुसार दिया गया है। हालांकि, अलग-अलग स्थान और परंपराओं के अनुसार, तिथि और पूजा का समय अलग-अलग हो सकता है ऐसे में अगर कोई कंफ्यूजन है तो अपने स्थानीय पुरोहित से पूछकर ही पूजा करें। अष्टमी और नवमी में किस देवी की पूजा की जाती है अष्टमी और नवमी में मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। मां महागौरी को पवित्रता, शांति और सौम्यता का प्रतीक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि मां महागौरी की पूरे विधि विधान से पूजा करने से जीवन में सुख समृद्धि आती है। साथ ही मां सिद्धिदात्री की पूजा करने से यश, बल, मोक्ष और धन की प्राप्ति होती है।