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मोहन भागवत का तीन दिवसीय जबलपुर दौरा, कॉलेज के युवाओं और RSS पदाधिकारियों से करेंगे चर्चा

 जबलपुर युवाओं के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने और उनसे सीधे संवाद करने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत मध्य प्रदेश के जबलपुर पहुंचेंगे. उनका यह दौरा 24 अक्टूबर से शुरू होकर तीन दिन चलेगा. इस दौरान भागवत कॉलेज में पढ़ने वाले युवा स्वयंसेवकों से मुलाकात करेंगे. 25 अक्टूबर को होने वाले एक विशेष शिविर में उनका संबोधन भी प्रस्तावित है.इसके अलावा वे स्थानीय पदाधिकारियों और प्रांतीय कार्यकारिणी के सदस्यों के साथ बैठकें करेंगे।  RSS के महाकौशल प्रांत के प्रचार प्रमुख विनोद कुमार ने शनिवार को एक न्यूज एजेंसी को इसकी जानकारी दी. मोहन भागवत 25 अक्टूबर को महाकौशल प्रांत के Gen-Z स्वयंसेवकों के शिविर में शामिल होंगे. यहां वे कॉलेज में पढ़ने वाले स्वयंसेवकों से बातचीत करेंगे और उन्हें संबोधित करेंगे।  हालांकि, इस संवाद में किन मुद्दों पर चर्चा होगी, इसे लेकर अभी कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है. भागवत के कार्यक्रम में संगठन के स्थानीय पदाधिकारियों और प्रांतीय कार्यकारिणी की टीमों के साथ बैठकें भी शामिल हैं. इन बैठकों में संगठन से जुड़े विषयों पर चर्चा की जाएगी।  38 जिलों तक फैला है महाकौशल प्रांत RSS का महाकौशल प्रांत संगठन के मध्य क्षेत्र के अंतर्गत आता है. इसमें मध्य प्रदेश के 38  जिले शामिल हैं. जबलपुर, सागर और रीवा यहां के संभागीय मुख्यालय हैं. इस लिहाज से जबलपुर का दौरा संघ के लिए क्षेत्रीय स्तर पर भी अहम है।  युवा स्वयंसेवकों के शिविर में भागवत की मौजूदगी ऐसे समय में हो रही है, जब संगठन इस क्षेत्र में युवाओं से संपर्क बढ़ाने पर जोर दे रहा है. अब देखना यह होगा कि 25 अक्टूबर को होने वाले शिविर में भागवत युवाओं से किन मुद्दों पर बात करते हैं और उनके संबोधन में किन विषयों पर जोर रहता है। 

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना से आकाश जायसवाल को मिला स्वरोजगार

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विगत दिनों उमरिया जिले के गुरूवाही ग्राम में आयोजित लाडली बहना कार्यक्रम में आकाश जायसवाल को प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना अंतर्गत राइस मिल स्थापना की स्वीकृति के बाद प्रमाण पत्र प्रदान किया। शासन की योजनाएं युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उद्यानिकी विभाग अंतर्गत प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना से लाभान्वित ग्राम बचहा, विकासखंड मानपुर निवासी आकाश जायसवाल इसका उदाहरण हैं। आकाश जायसवाल पिता श्री सुरेश जायसवाल ने पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद स्वयं का व्यवसाय स्थापित करने का निर्णय लिया। उन्होंने नौकरी की जगह स्वरोजगार को प्राथमिकता देते हुए राइस मिल स्थापित करने की योजना बनाई। इसके लिए उन्होंने उद्यानिकी विभाग द्वारा संचालित प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना में आकाश को सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की इंदवार शाखा से 29 लाख 89 हजार 296 रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। इसके साथ ही उन्हें 35 प्रतिशत अनुदान के प्रावधान के अंतर्गत लगभग 10 लाख रुपये की सब्सिडी का लाभ मिलेगा। इससे उन्हें अपना उद्यम स्थापित करने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी। आकाश जायसवाल के पिता टेंट व्यवसाय करते हैं। आकाश का मानना है कि शासन की इस योजना से उन्हें अपने सपनों को साकार करने का अवसर मिला है। उनका प्रयास है कि राइस मिल के माध्यम से व्यवसाय को आगे बढ़ाने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित किए जा सकें।  

वीज़ा संबंधी प्रामाणिक जानकारी के लिए सरकारी अथवा दूतावास की आधिकारिक वेबसाइट का करें उपयोग

भोपाल विदेश मंत्रालय भारत सरकार द्वारा एडवाइजरी जारी कर विदेशों में रोज़गार और निवास वीज़ा दिलाने के नाम पर सोशल मीडिया पर सक्रिय फ़र्ज़ी वीज़ा एवं माइग्रेशन एजेंसियों से नागरिकों को पूरी तरह सतर्क रहने की सलाह दी गई है। अबू धाबी स्थित भारतीय दूतावास और दुबई एवं उत्तरी अमीरात स्थित भारत के महावाणिज्य दूतावास (कॉन्सुलेट जनरल) को भारतीय नागरिकों से ऐसी कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें भारत से बाहर (संयुक्त अरब अमीरात सहित) संचालित निजी एजेंसियों द्वारा धोखाधड़ी किए जाने के मामले सामने आए हैं। यह एजेंसियाँ सोशल मीडिया पर आकर्षक विज्ञापन देकर विभिन्न देशों में नौकरी या निवास वीज़ा दिलाने का झूठा दावा करती हैं। आवेदकों से भारी शुल्क वसूलने के बाद न तो कोई वीज़ा या सेवा प्रदान की जाती है और न ही धनराशि लौटाई जाती है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे केवल सोशल मीडिया विज्ञापनों के आधार पर कोई निर्णय न लें और भारत के बाहर से कार्य कर रही निजी एजेंसियों पर बिना गहन जाँच-पड़ताल के भरोसा न करें। नागरिकों को परामर्श दिया गया है कि वे जिस देश में जाने की योजना बना रहे हैं, भारत स्थित उस देश के दूतावास अथवा वाणिज्य दूतावास से वीज़ा की आवश्यक औपचारिकताओं, आवेदन प्रक्रिया और वैध तरीकों की सीधे पुष्टि करें। किसी भी एजेंसी द्वारा वीज़ा दिलाने के मात्र वादे के आधार पर कोई भुगतान न किया जाए, क्योंकि वीज़ा जारी करने का संपूर्ण अधिकार केवल संबंधित देश की सरकार का होता है और कोई भी एजेंसी इसकी गारंटी नहीं दे सकती। वीज़ा से संबंधित प्रामाणिक और अद्यतन जानकारी के लिए बिचौलियों पर निर्भर रहने के बजाय हमेशा संबंधित देश की सरकारी अथवा दूतावास की आधिकारिक वेबसाइट का ही उपयोग करें।  

निजी निवेश, सार्वजनिक-निजी भागीदारी के सरलीकरण से खुलेंगे आवास विकास के नए अवसर

पोर्टल ugconclave.mp.gov.in पर सहभागिता के लिए ऑनलाइन पंजीयन प्रारंभ भोपाल मध्यप्रदेश में तीव्र गति से हो रहे शहरीकरण को दृष्टिगत रखते हुए नागरिकों की आवासीय आवश्यकताओं की समुचित पूर्ति तथा सर्वसुलभ एवं किफायती आवासों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए राज्य सरकार द्वारा बहुआयामी प्रयास किए जा रहे हैं। आगामी 28 अक्टूबर, 2026 को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में राज्य स्तरीय 'अर्बन कॉन्क्लेव-2026' का आयोजन किया जा रहा है। कॉन्क्लेव में शहरी आवास विकास, निजी निवेश की संभावनाओं, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) और भविष्य की भावी आवश्यकताओं के अनुरूप शहरों के सुव्यवस्थित नियोजन से जुड़े विभिन्न नीतिगत एवं क्रियान्वयन संबंधी विषयों पर गहन विचार-मंथन किया जाएगा। कॉन्क्लेव से प्रदेश में समावेशी शहरी विकास के नए अवसरों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) एवं निम्न आय वर्ग (एलआईजी) के परिवारों के लिए सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और किफायती आवासों की सुलभता सुनिश्चित करने के सतत् प्रयासों को एक नई दिशा प्राप्त होगी। प्रदेश के नगरों में बढ़ती आवासीय माँग को ध्यान में रखते हुए ऐसे प्रगतिशील एवं नवोन्मेषी विकास मॉडलों को अंगीकार करने पर विशेष बल दिया जा रहा है, जिससे समाज के प्रत्येक जरूरतमंद वर्ग को उसकी आर्थिक क्षमता के अनुरूप समुचित आवास उपलब्ध कराए जा सकें। इस दिशा में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'प्रधानमंत्री आवास योजना–शहरी 2.0' के दूरगामी उद्देश्यों के सर्वथा अनुरूप आवासीय सुविधाओं का व्यापक विस्तार, शासकीय भूमि का पारदर्शी एवं प्रभावी उपयोग तथा आधुनिक तकनीक आधारित विकास मॉडलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह अनूठी पहल प्रदेश की दीर्घकालीन आवासीय आवश्यकताओं की पूर्ति करने के साथ ही एक सशक्त, समृद्ध एवं सतत शहरी अधोसंरचना के निर्माण में अत्यधिक सहायक सिद्ध होगी। शहरी आवास विकास के लिए पर्याप्त भूमि की सुलभता सुनिश्चित करने तथा किफायती आवास परियोजनाओं को वित्तीय व व्यावहारिक दृष्टि से अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए विकास संबंधी नियमों एवं प्रावधानों में समयानुकूल सुधार किए जा रहे हैं। इसके अंतर्गत फ्लोर एरिया रेशियो में न्यायसंगत वृद्धि, विभिन्न शुल्कों एवं प्रभारों में विशेष रियायत तथा सार्वजनिक-निजी भागीदारी पर आधारित विकास मॉडलों को प्रोत्साहित करने के लिए अनुकूल वातावरण निर्मित किया जा रहा है। इन दूरदर्शी उपायों से स्थापत्य एवं आवास निर्माण क्षेत्र में निजी पूंजी निवेश की व्यापक संभावनाएं उत्पन्न होंगी। अर्बन कॉन्क्लेव में देश-विदेश के प्रतिष्ठित निवेशकों, विषय विशेषज्ञों, नगरीय विकास निकायों तथा वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधियों की सहभागिता से इस क्षेत्र में नए अवसरों का सूत्रपात होगा। राज्य सरकार द्वारा आवासीय आवश्यकताओं को केवल पारंपरिक निर्माण तक सीमित न रखकर एक समग्र एवं व्यापक दृष्टिकोण से देखा जा रहा है। इसके तहत किफायती किराये के आवासों, औद्योगिक एवं निर्माण श्रमिकों के लिए सुरक्षित आवासीय परिसरों तथा समाज के विभिन्न आय वर्गों की विविध आवश्यकताओं के अनुसार सर्वसुविधायुक्त विकल्पों के विकास पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। इसके साथ ही बस्तियों के पुनर्विकास तथा बुनियादी जन-सुविधाओं का विस्तार कर शहरी निवासियों के जीवन स्तर के उन्नयन के ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। इससे आजीविका की तलाश में शहरों में आगमन करने वाले श्रमिकों सहित प्रत्येक जरूरतमंद वर्ग को सुरक्षित एवं सुविधाजनक आवासीय विकल्प उपलब्ध हो सकेंगे। राज्य स्तरीय अर्बन कॉन्क्लेव शहरी विकास के क्षेत्र से जुड़े राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों, प्रमुख निवेशकों, वित्तीय संस्थानों, नवोन्मेषी स्टार्ट-अप्स तथा ऊर्जावान युवाओं को मध्यप्रदेश में सृजित हो रही अपार विकास संभावनाओं से सीधे जुड़ने का एक सशक्त मंच प्रदान करेगा। कॉनक्लेव में सहभागिता के इच्छुक निवेशक, स्टार्ट-अप्स एवं युवा आधिकारिक पोर्टल https://ugconclave.mp.gov.in/ पर जाकर अपना ऑनलाइन पंजीयन करा सकते हैं। राज्य सरकार की इस दूरदर्शी पहल से प्रदेश के शहरों में सतत, समावेशी एवं आधुनिक विकास का नया अध्याय प्रारंभ होगा।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विजयवाड़ा में उद्योगपतियों और निवेशकों से की चर्चा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश में निवेश के नए अवसरों और औद्योगिक साझेदारियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में विजयवाड़ा, आंध्र प्रदेश में प्रमुख उद्योगपतियों एवं निवेशकों से वन-टू-वन चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठकों के दौरान निवेशकों और उद्योगपतियों से मध्यप्रदेश में उपलब्ध निवेश की व्यापक संभावनाओं, अनुकूल औद्योगिक वातावरण तथा उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा लागू की गई विभिन्न उद्योग मित्र नीतियों की जानकारी साझा की।  

इंदौर जैसे जलसंकट की आहट! धार में ट्यूबवेल बंद, 11 जिलों में बढ़ी चिंता

इंदौर/ धार /उज्जैन  इंदौर जैसे जलसंकट की आहट मध्य प्रदेश के 11 जिलों में सुनाई देने लगी है। इन जिलों में सामान्य से 80% या उससे कम बारिश हुई है। नदियों में पानी कम है और डैम भी पूरी तरह नहीं भर सके हैं। ऐसे में गर्मी से पहले ही जलसंकट का खतरा बढ़ने लगा है। इंदौर की 40 लाख आबादी को पानी देने वाले जलस्रोत भी खाली होने लगे हैं। भीषण जलसंकट की आशंका को देखते हुए नगर निगम ने सरकार से 50 करोड़ रुपए का पैकेज मांगा है। धार में हालात ज्यादा चिंताजनक हैं। यहां अक्टूबर में ही ट्यूबवेलों से कम पानी आ रहा है। उज्जैन में सिर्फ 70 दिन का पानी बचा है। पानी की कमी से पेयजल व्यवस्था के साथ सिंहस्थ की तैयारियां भी प्रभावित हो सकती हैं। शहर में भूजल स्तर गिरकर 200 फीट तक पहुंच गया है। वहीं, प्रभावित जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग उठ रही है, लेकिन अब तक जलसंकट से निपटने के लिए कोई ठोस योजना तैयार नहीं हुई है। उज्जैन में नर्मदा से पानी लेने की कवायद उज्जैन में इस बार औसतन 682 मिमी यानी करीब 27 इंच बारिश हुई, जबकि यहां सामान्य बारिश 35 इंच है। कम बारिश के कारण शहर को पानी सप्लाई करने वाला गंभीर डैम पूरी तरह नहीं भर पाया। डैम की क्षमता 2,250 एमसीएफटी है, लेकिन इस बार इसमें पानी का स्तर केवल 636 एमसीएफटी तक पहुंचा। इसमें से 100 एमसीएफटी डेड स्टोरेज घटाने के बाद जलापूर्ति के लिए उपलब्ध पानी से सिर्फ 70 दिन, यानी 22 दिसंबर तक ही पानी सप्लाई किया जा सकेगा। उज्जैन निगम के अपर आयुक्त पवन कुमार सिंह ने बताया कि इससे पहले, इस साल जून में भी गंभीर डैम में पानी की कमी के चलते रोजाना जलप्रदाय के लिए नर्मदा की पाइपलाइन से पानी लिया गया था। इंदौर के 22 जोन में पानी की किल्लत इंदौर में गर्मी शुरू होने से पहले ही जलसंकट चुनौती बनने लगा है। नगर निगम की सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक शहर में कुल 6,040 ट्यूबवेल हैं, जिनमें से 361 बंद हो चुके हैं। वहीं, शहर की जरूरत पूरी करने के लिए 200 नए ट्यूबवेल खोदने की आवश्यकता बताई गई है। इनमें से 100 के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। शहर के 22 जोन में पानी की समस्या बनी हुई है। कई इलाकों में लोग अभी से टैंकर बुलवाकर पानी की व्यवस्था कर रहे हैं। चिंता इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि इस बार शहर में सामान्य से करीब 14 इंच कम बारिश हुई है। ऐसे में नए ट्यूबवेल की खुदाई के साथ भूजल की उपलब्धता भी चुनौती रहेगी। नगर निगम को बंद ट्यूबवेल चालू करने, नए जलस्रोत विकसित करने और मौजूदा संसाधनों से जलप्रदाय बनाए रखने की व्यवस्था करनी होगी। 361 ट्यूबवेल बंद, 200 नए खोदने की जरूरत नगर निगम की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, शहर के 6,040 ट्यूबवेल में से 361 फिलहाल बंद हैं। इनमें ऐसे स्थान भी शामिल हैं, जहां नर्मदा जल का कनेक्शन नहीं है। ऐसे क्षेत्रों में स्थानीय जलस्रोत बंद होने से पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। निगम ने बंद ट्यूबवेल की मरम्मत, पंप सुधारने और तकनीकी समस्याओं के निराकरण के लिए 10 समर्पित टीमें लगाने की योजना बनाई है। दूसरी ओर, शहर की जरूरतों को देखते हुए 200 नए ट्यूबवेल खोदने की आवश्यकता बताई गई है। फिलहाल 100 के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। भूजल स्तर कम, खुदाई से पहले सर्वे जरूरी नए ट्यूबवेल खोदने की योजना के सामने भूजल की उपलब्धता बड़ी चुनौती है। कई इलाकों में भूजल स्तर नीचे होने के कारण बोरिंग से पर्याप्त पानी मिलना आसान नहीं है। ऐसे में खुदाई के लिए स्थान तय करते समय तकनीकी सर्वे और भूजल की स्थिति का आकलन जरूरी होगा। इसके साथ वर्षाजल संचयन, भूजल पुनर्भरण और मौजूदा जलस्रोतों के बेहतर इस्तेमाल पर भी ध्यान देना होगा। 105 में से 95 टंकियों से रोजाना जलप्रदाय नगर निगम की रिपोर्ट के अनुसार, शहर में कुल 105 जलप्रदाय टंकियां हैं। इनमें से 95 से रोजाना पानी की सप्लाई की जा रही है। शेष 10 टंकियों से नियमित जलप्रदाय नहीं होने के कारणों का स्पष्ट ब्योरा सामने नहीं आया है। इन टंकियों से जुड़े क्षेत्रों में जलापूर्ति की स्थिति और वैकल्पिक व्यवस्था भी अहम होगी। सामान्य से 14 इंच कम बारिश शहर में सामान्य तौर पर करीब 37 इंच बारिश होती है, जबकि इस बार लगभग 23 इंच बारिश दर्ज की गई। यानी सामान्य बारिश के मुकाबले करीब 14 इंच कम पानी बरसा। कम बारिश का असर आने वाले महीनों में भूजल की उपलब्धता पर पड़ सकता है। ऐसे में गर्मी के दौरान बढ़ने वाली पानी की मांग को पूरा करना नगर निगम के लिए चुनौती होगा। गेहूं का रकबा 75% तक घटेगा भारतीय किसान संघ से जुड़े किसानों ने बताया कि इस बार गेहूं का रकबा 75% तक घटेगा। जिसके चलते खाद्यान की कमी तो होगी ही, साथ में महंगाई भी बढ़ेगी। इधर, मालवा में होने वाला लहसुन प्याज का रकबा भी 70 प्रतिशत तक कम होगा। धार में 49.45% कम बारिश, खेती पर संकट धार में इस बार सिर्फ 25.84 इंच बारिश हुई है, जो सामान्य से करीब 10 इंच कम है। 2025 में यहां औसतन 51.13 इंच बारिश हुई थी। कम बारिश का असर अब खेतों से लेकर बाजार तक दिखने की आशंका है। किसान लगातार जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग कर रहे हैं। पर्याप्त बारिश होने पर किसान गेहूं, लहसुन, प्याज और मटर समेत कई फसलें उगाते हैं, लेकिन इस बार पानी की कमी को देखते हुए कई किसान चना, तिवड़ा, तुकमरी (तुकमारिया), रायड़ा और कम पानी में होने वाली दूसरी फसलों की बुवाई कर रहे हैं। पानी की कमी के कारण कई बोरिंग अभी से बंद हो गए हैं, जबकि कुछ में रुक-रुककर पानी आ रहा है। इससे सिंचाई करने में परेशानी हो रही है और फसलों का उत्पादन घटने की आशंका है। धार शहर की करीब डेढ़ लाख आबादी की पेयजल जरूरतें पूरी करने वाले दिलावरा, नटनागरा, नयापुरा और सीतापाट तालाबों में अब करीब 25 से 30% पानी ही बचा है। वहीं, मुंज तालाब भी लगभग 40% भरा हुआ है। बोरिंग में पानी कम होने और तालाबों … Read more

रूस में न्यूमोनिक प्लेग का असर, भोपाल में अंतरराष्ट्रीय रामलीला महोत्सव निरस्त

भोपाल राजधानी में चल रहे इंटरनेशनल रामलीला महोत्सव से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। रूस में फैले न्यूमोनिक प्लेग के कथित प्रकोप के कारण रूसी कलाकारों की एक मंडली भोपाल नहीं पहुंच पाई है। स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के चलते इन कलाकारों को भारत यात्रा के लिए जरूरी क्लीयरेंस नहीं मिल सकी, जिसके कारण उनकी बहुप्रतीक्षित प्रस्तुति रद्द करनी पड़ी है। रविंद्र भवन में होने वाला था आयोजन यह कलाकार भोपाल के प्रतिष्ठित रविंद्र भवन में अपनी कला का प्रदर्शन करने वाले थे, लेकिन ऐन वक्त पर उनका दौरा टल गया। इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए संस्कृति संचालक एन.पी. नामदेव ने पुष्टि की है कि रूस की यह परफॉर्मेंस अब नहीं होगी। उन्होंने बताया कि विभाग को भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद की तरफ से रूसी कलाकारों की मंडली के आगमन को लेकर कोई भी औपचारिक पुष्टि या सूचना प्राप्त नहीं हुई थी। फेस्टिवल पर क्या पड़ा असर? हालांकि विदेशी कलाकारों के न आने से एक बड़ा आकर्षण कम हुआ है, लेकिन आयोजन समिति ने साफ किया है कि महोत्सव तय कार्यक्रम के अनुसार पूरी भव्यता के साथ जारी रहेगा। फेस्टिवल में अन्य निर्धारित प्रस्तुतियां लगातार जारी हैं और दर्शक रामलीला के विभिन्न स्वरूपों का आनंद उठा रहे हैं। गंभीर बीमारी के चलते बरती जा रही सुरक्षा स्वास्थ्य विभाग और अंतरराष्ट्रीय यात्रा मानकों के तहत रूस में फैली इस गंभीर बीमारी को लेकर बरती जा रही सख्ती के कारण ही कलाकारों के आगमन पर रोक लगी है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा और स्वास्थ्य प्राथमिकताओं को देखते हुए यह स्थिति बनी है। न्यूमोनिक प्लेग और इसके लक्षण न्यूमोनिक प्लेग (Pneumonic Plague) 'येर्सिनिया पेस्टिस' (Yersinia pestis) नामक बैक्टीरिया के संक्रमण से फैलने वाली एक अत्यंत गंभीर और दुर्लभ बीमारी है। यह प्लेग का सबसे खतरनाक रूप माना जाता है, जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदों के जरिए हवा के माध्यम से आसानी से एक से दूसरे इंसान में फैल सकता है। हालांकि, यदि शुरुआती दौर में ही इस खतरनाक संक्रमण की पहचान हो जाए और तुरंत एंटीबायोटिक्स से इसका इलाज शुरू कर दिया जाए, तो मरीज के पूरी तरह से ठीक होने की संभावना काफी अधिक होती है। भारत में इसका क्या है असर? वर्तमान में इस घटना से भारत या अन्य देशों को किसी बड़े खतरे का कोई सीधा संकेत नहीं है WHO का बयान रूसी स्वास्थ्य अधिकारियों और उपभोक्ता स्वास्थ्य निगरानी एजेंसी ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को सूचित किया है कि की गई जांच में महिला के शरीर में प्लेग या किसी अन्य खतरनाक रोगजनक की पुष्टि नहीं हुई है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए WHO ने रूस से और अधिक पारदर्शी जानकारी की मांग की है, हालांकि शुरुआती आकलन के अनुसार रूस से बाहर आम जनता के लिए इसका खतरा 'बहुत कम' माना गया है।  

शहडोल में मुख्यमंत्री के दौरे की तैयारी तेज, बिना अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे अधिकारी

शहडोल   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के 25 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित शहडोल दौरे को ध्यान में रखते हुए शहडोल कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने जिले के अलग अलग विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों को कार्यक्रम की तैयारियों के संबंध में दायित्व सौंपे हैं. कलेक्टर ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक तैयारियां समय रहते पूरी करनी है. ऐसे में कोई भी अधिकारी बिना अनुमति के जिला मुख्यालय से बाहर न जाएं।  शहडोल में यहां होगा सीएम का कार्यक्रम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यक्रम का आयोजन जिला मुख्यालय स्थित बाणगंगा मैदान में किया जाएगा. कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने संबंधित अधिकारियों को बाणगंगा मैदान का समतलीकरण कराने, प्रदर्शनी की व्यवस्था करने, हितग्राहियों को हितलाभ वितरण की तैयारियां करने और लोकार्पण एवं शिलान्यास के लिए प्रस्तावित कार्यों की सूची तैयार करने के भी निर्देश दिए हैं।  हेलीपैड और पहुंच मार्ग की होगी मरम्मत मुख्यमंत्री मोहन यादव के संभावित शहडोल दौरे को ध्यान में रखते हुए शहडोल कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने कहा है कि हेलीपैड और हेलीपैड से कार्यक्रम स्थल तक पहुंच मार्गों की मरम्मत कराएं, संबंधित अधिकारियों को इसके निर्देश भी जारी कर दिए हैं. कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने कहा, '' कार्यक्रम से संबंधित सभी व्यवस्थाएं समय रहते पूर्ण की जाएं, ताकि आयोजन के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो।  बिना अनुमति अधिकारी न छोड़े मुख्यालय शहडोल कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि 25 अक्टूबर तक कोई भी अधिकारी बिना अनुमति के मुख्यालय नहीं छोड़े. उन्होंने अलग-अलग विभागों को सौंपे गए दायित्वों की समयपूर्व तैयारी सुनिश्चित करने और निर्धारित समय-सीमा में सभी कार्य पूर्ण करने के निर्देश भी दिए हैं. इस बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत शिवम प्रजापति, शहडोल साउथ डीएफओ श्रद्धा पेंद्रे, अपर कलेक्टर सरोधन सिंह, एसडीएम अमृता गर्ग सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे। 

उज्जैन-आगर मार्ग पर दर्दनाक हादसा, पुलिया से उतरकर पलटी यात्री बस, दो लोगों की दबकर मौत

उज्जैन  उज्जैन-आगर मार्ग पर तराना फंटे के पास बाइक सवार को बचाने के प्रयास में यात्री बस अनियंत्रित होकर पुलिया से उतरकर पलट गई। हादसे में बस के नीचे दबने से दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पांच महिलाएं घायल हो गई। दुर्घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने बस से यात्रियों को निकाला। राघवी पुलिस ने बताया कि बस क्रमांक एमपी 70 पी 0161 शुक्रवार दोपहर आगर से उज्जैन की ओर जा रही थी। तराना फंटे के पास बाइक सवार को बचाने के प्रयास में चालक बस पर नियंत्रण नहीं रख पाया और बस पुलिया के समीप से नीचे उतरकर पलट गई। बस की चपेट में आने से दो ग्रामीणों की मौत बताया जा रहा है कि इस दौरान फंटे के पास खड़े मोहन पुत्र मांगीलाल उम्र 50 वर्ष और महेश पुत्र बापू दोनों निवासी ब्राह्मण बड़ोदिया इंगोरिया बस की चपेट में आकर नीचे दब गए। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि दोनों व्यक्ति ग्राम ठुकराल रिश्तेदार के यहां जा रहे थे। रास्ते में दोनों मार्ग के समीप खड़े होकर बीड़ी पी रहे थे। बताया जा रहा है कि बस में 40 से अधिक लोग सवार थे। हादसे में बस में सवार गंगाबाई, तेजूबाई, विष्णुबाई, पेपाबाई और सगनाबाई सभी निवासी आगर भी घायल हुई हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, उन्हें गंभीर चोट नहीं आई है।  

भोपाल गैस त्रासदी के कचरे पर रिपोर्ट पेश, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बताई स्थिति

भोपाल/जबलपुर  भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के जहरीले कचरे को जलाने के बाद निकली राख में पारे की मात्रा उपस्थित होने के संबंध में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के द्वारा हाईकोर्ट में रिपोर्ट पेश की गई. हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल व जस्टिस बीपी शर्मा की युगलपीठ ने रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लेते हुए कहा है कि अगली सुनवाई के दौरान संबंधित पक्ष के अधिवक्ता व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत करें. वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से उनके तर्कों को नही सुना जाएगा।  क्या है पूरा मामला? दरअसल, भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड के जहरीले कचरे का विनष्टीकरण किए जाने की मांग करते हुए आलोक प्रताप सिंह द्वारा साल 2004 में याचिका दायर की गई थी. याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की मृत्यु हो जाने पर हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई संज्ञान याचिका के रूप में शुरू कर दी थी, जिसके बाद हाईकोर्ट के आदेश पर यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे का विनष्टीकरण पीथमपुर जिला धार में किया गया था।  पूर्व में याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया गया कि यूनियन कार्बाइड परिसर से जहरीले कचरे को हटाए जाने के बावजूद भी आसपास के कई वार्डों में आम जनता को अब भी दूषित और जहरीला पानी की सप्लाई होने का खतरा है. युगलपीठ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति के जरिए पानी के सैंपल लेकर उनकी विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश जारी किए थे. विनष्टीकरण के बाद भी राख में पारा? पिछली सुनवाई के दौरान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से पानी की जांच रिपोर्ट पेश की गई. संबंधित पक्षों ने रिपोर्ट का अध्ययन करने के लिए समय प्रदान करने का आग्रह किया. वहीं, याचिका की सुनवाई के दौरान प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया कि यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड के जहरीले कचरे को जलाने से बची हुई राख में पारा पाया गया है. राख का विनष्टीकरण वर्तमान में मानव बस्तियों के बहुत करीब स्थित ट्रीटमेंट, स्टोरेज और डिस्पोजल फैसिलिटी पीथमपुर, जिला धार में किया जा रहा है।  प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पेश की रिपोर्ट सरकार की ओर से बताया गया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, सभी पैरामीटर तय सीमा के अंदर हैं. इसके बाद हाईकोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को राख के संबंध में अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में प्रस्तुत करने के आदेश जारी किए थे. याचिका की सुनवाई के दौरान प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की ओर से राख में उपस्थित पारा के संबंध में रिपोर्ट पेश की गई, जिसे कोर्ट में रिकॉर्ड पर लिया और संबंधित पक्षों को 27 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर तर्क देने के आदेश दिए हैं।