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गांधी चौक स्थित पुराने जनपद पंचायत भवन में नवीन शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का भूमिपूजन

सारंगपुर नगर के हृदय स्थल गांधी चौक स्थित पुराने जनपद पंचायत भवन परिसर में रविवार को प्रदेश सरकार के तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री डॉ. गौतम टेटवाल ने नवीन शॉपिंग कॉम्प्लेक्स निर्माण कार्य का विधिवत पूजा-अर्चना एवं भूमिपूजन किया। यह परियोजना सारंगपुर नगर के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। राज्यमंत्री डॉ. गौतम टेटवाल ने कहा कि सारंगपुर को आधुनिक एवं व्यवस्थित नगर के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। नवीन शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनने से स्थानीय व्यापार को नई गति मिलेगी, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास और जनसुविधाओं के विस्तार के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। डॉ. टेटवाल के अथक प्रयासों और लगातार की गई पहल का ही परिणाम है कि लंबे समय से प्रतीक्षित यह महत्वपूर्ण परियोजना अब धरातल पर उतर रही है। क्षेत्रवासियों ने भी इस विकास कार्य को लेकर हर्ष व्यक्त करते हुए इसे सारंगपुर के लिए बड़ी सौगात बताया। कार्यक्रम में जनपद पंचायत अध्यक्ष  देननारायण नागर, नगरपालिका अध्यक्ष  पंकज पालीवाल, भाजपा मंडल अध्यक्ष महेश पुष्पद, नगर पालिका उपाध्यक्ष प्रतिनिधि  निलेश वर्मा, जनपद पंचायत उपाध्यक्ष  कैलाश नागर चाटकीया, जनपद सदस्य  करणसिंह दरबार, मंडल महामंत्री  कमल राठौर, पार्षद  कुलदीप राठौर,  संतोष कुम्भकार,  अंकित अवस्थित,  पवन लाला,  मोहन लववंशी,  योगेश महेश्वरी सहित जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित रहे।

अस्पताल में अचानक गिरी सीलिंग, भिंड में अफरा-तफरी के बीच महिला मरीज और नवजात जख्मी

भिंड. भिंड जिला अस्पताल में रविवार दोपहर करीब 1 बजे स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट (SNCU) वॉर्ड की छत का प्लास्टर भरभराकर गिर गया। हादसे के वक्त वॉर्ड में माताएं अपने नवजात बच्चों को दूध पिला रही थीं। मलबा गिरने से तीन महिलाएं और एक नवजात शिशु घायल हो गए। सभी घायलों को प्राथमिक इलाज के लिए तुरंत ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि वॉर्ड में अचानक तेज आवाज आई और छत का प्लास्टर सीधे बेड के पास गिरा, जिससे वहां मौजूद महिलाएं बुरी तरह घबरा गईं। अपने बच्चों की जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगीं। वॉर्ड में अफरा-तफरी मच गई। हादसे के तुरंत बाद अस्पताल का स्टाफ पहुंचा और घायलों को बाहर निकाला। अन्य बच्चों को किया गया सुरक्षित शिफ्ट अस्पताल स्टाफ ने आनन-फानन में घायल महिलाओं और शिशु को ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया। डॉक्टरों के मुताबिक, प्राथमिक उपचार के बाद अब सभी की हालत खतरे से बाहर है। घटना के बाद एहतियात के तौर पर वार्ड में भर्ती अन्य सभी नवजात बच्चों को तुरंत दूसरे सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर दिया गया। इस अचानक हुए हादसे के चलते अस्पताल परिसर में कुछ देर के लिए अव्यवस्था का माहौल बना रहा। जर्जर है बिल्डिंग, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप हादसे के बाद मरीजों के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने इतने जर्जर भवन में मरीजों और नवजातों को रखने पर गहरी नाराजगी जाहिर की। बताया जा रहा है कि जिला अस्पताल की यह बिल्डिंग काफी पुरानी और जर्जर स्थिति में है। यहां पहले भी छतों से प्लास्टर गिरने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन मरम्मत को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। फिलहाल, अस्पताल प्रशासन ने मामले की जांच कराने और क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत कराने का आश्वासन दिया है।

गर्मी में रेलवे का तोहफा: 15 मई से रोजाना चलेगी स्पेशल ट्रेन

भोपाल  इन दिनों स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां हैं, साथ ही शादी – ब्याह का सीजन भी, ऐसे में बड़ी संख्या में लोग यात्रा कर रहे हैं या यात्रा की तैयारी में हैं। ऐसे में भारतीय रेलवे की ओर से राहत भरी खबर सामने आई है। बढ़ती भीड़ और लंबी वेटिंग के बीच रेलवे ने पुणे से गोरखपुर के बीच रोजाना समर स्पेशल ट्रेन चलाने का फैसला लिया है। ये फैसला ऐसे समय में आया, जब लंबी दूरी की ट्रेनों में 'नो रूम' की स्थिति बनी है और यात्रियों को कंफर्म टिकट मिलना मुश्किल है। इस स्पेशल ट्रेन में कुल 18 कोच रहेंगे। इनमें एसी, स्लीपर और जनरल श्रेणी शामिल है। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सभी वर्गों के लिए सीटें उपलब्ध कराई गई हैं। एमपी के यात्रियों को होगा फायदा रेलवे के इस कदम से मध्य प्रदेश के यात्रियों को भी सीधा फायदा होगा। प्रदेश के इटारसी जंक्शन, रानी कमलापति स्टेशन और बीना जंक्शन पर इस ट्रेन के स्टॉपेज होंगे। इससे भोपाल समेत आसपास के इलाकों से यात्रा करने वालों को सुलभ यात्रा का अतिरिक्त विकल्प मिलेगा। बढ़ती मांग और सीमित सीटों के बीच रेलवे की ये नई सेवा यात्रियों के दबाव को कम करने में अहम भूमिका निभाएगी। 15 मई से 15 जुलाई तक संचालन गाड़ी संख्या 01415/01416 पुणे-गोरखपुर-हड़पसर स्पेशल ट्रेन का संचालन 15 मई से 15 जुलाई तक किया जाएगा। इस दौरान कुल 62 ट्रिप किए जाएंगे। रोजाना चलने वाली ये ट्रेन गर्मियों के पीक सीजन में यात्रियों के लिए राहत का सबब साबित होगी। एमपी में 3 स्टॉपेज समेत इन स्टेशनों पर ठहराव ये ट्रेन मध्य प्रदेश में मुख्य रूप से इटारसी, रानी कमलापति और बीना स्टेशन पर स्टॉप लेगी। इसके अलावा दौंड, मनमाड, भुसावल, खंडवा, झांसी, कानपुर, लखनऊ और गोंडा जैसे बड़े स्टेशनों पर भी ठहराव करेगी। इस तरह महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच ट्रेन के माध्यम से कनेक्टिविटी बढ़ेगी। ट्रेन का टाइमिंग शेड्यूल ट्रेन संख्या 01415 पुणे से सुबह 6:50 बजे रवाना होगी। रात 9:10 बजे इटारसी, 11:15 बजे रानी कमलापति और अगले दिन 1:25 बजे बीना पहुंचेगी। इसके बाद शाम 4:00 बजे गोरखपुर पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन संख्या 01416 गोरखपुर से शाम 5:30 बजे चलेगी और तीसरे दिन सुबह 3:15 बजे पुणे पहुंचेगी। 'NO Room' की स्थिति से राहत गर्मियों में ट्रेनों में भारी भीड़ के कारण कई रूट्स पर वेटिंग लिस्ट 100 के पार चली गई है। ऐसे में नई स्पेशल ट्रेन शुरू होने से यात्रियों को कंफर्म टिकट मिल सकेगी। यह खासतौर पर उन लोगों के लिए राहत है, जो लंबे समय से टिकट के लिए परेशान हैं।

फोटो में दिख रहा शख्स भाई, पिता या दोस्त भी हो सकता है: अदालत

ग्वालियर हाईकोर्ट की युगल पीठ ने बच्चों की कस्टडी से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में मानवीय ²ष्टिकोण अपनाते हुए बच्चों को मां के साथ रखने का आदेश दिया है । कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मासूम बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए मां का सानिध्य और ममता अनिवार्य है। पति द्वारा पेश किए गए स्क्रीनशॉट पर टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने कहा कि अगर वह अपने दोस्त का हाथ भी पकड़े हुए है, तो भी इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलेगा कि वह व्यभिचारी जीवन जी रही है। केवल एक फोटो के आधार पर यह मान लेना गलत है कि महिला का आचरण खराब है, क्योंकि फोटो में दिख रहा व्यक्ति उसका भाई, पिता या कोई मित्र भी हो सकता है। पति को कोर्ट ने फटकार भी लगाई। कोर्ट ने 15 हजार रुपए भरण पोषण दिए जाने का आदेश भी दिया है। ग्वालियर निवासी प्रीति (परिवर्तित नाम) ने अपने साढ़े तीन साल और डेढ़ साल के दो मासूम बच्चों की कस्टडी के लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता का आरोप था कि पति, सास और ननद ने उसे प्रताडि़त कर घर से निकाल दिया और बच्चों को अपने कब्जे में रख लिया है। सुनवाई के दौरान पति की ओर से पत्नी पर चरित्रहीनता के आरोप लगाते हुए एक स्क्रीनशॉट पेश किया गया था। हालांकि, अदालत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि केवल किसी के साथ हाथ पकड़े हुए फोटो होने से यह साबित नहीं होता कि महिला का आचरण गलत है। कोर्ट ने यह भी पाया कि काउंसङ्क्षलग के दौरान पति ने खुद स्वीकार किया था कि वह पत्नी के साथ मारपीट और गाली-गलौज करता है। कोर्ट ने कहा कि मां बच्चों की प्राकृतिक संरक्षक     कोर्ट ने कहा कि इतने छोटे बच्चों के लिए मां ही उनकी प्राकृतिक संरक्षक है और उन्हें मां की कंपनी की आवश्यकता है।     सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कोर्ट ने दोहराया कि कस्टडी के मामलों में कानूनी अधिकारों से ऊपर बच्चों का हित, उनका स्वास्थ्य और शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण है।     अदालत ने पति को निर्देश दिया है कि वह बच्चों के नाम पर खोले गए बैंक खाते में हर महीने 15,000 रुपए जमा करे, जिसका उपयोग उनकी परवरिश के लिए किया जाएगा।     हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए बच्चों को मां के सुपुर्द रखने का आदेश जारी रखा है। हालांकि, कोर्ट ने पति को यह स्वतंत्रता दी है कि वह भविष्य में ’गार्जियन एंड वाड्र्स एक्ट’ के तहत कस्टडी के लिए कानूनी प्रक्रिया अपना सकता है।

10 मीटर एयर राइफल मिक्स्ड टीम स्पर्धाओं में देशभर के निशानेबाजों ने दिखाया दम

भोपाल  खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित म.प्र. राज्य शूटिंग अकादमी, भोपाल में आयोजित “24वीं कुमार सुरेन्द्र सिंह मेमोरियल शूटिंग चैंपियनशिप (राइफल इवेंट्स)” के अंतर्गत आज 10 मीटर एयर राइफल मिक्स्ड टीम सीनियर, जूनियर एवं यूथ वर्ग की स्पर्धाओं का सफल आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में देशभर से आए खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। 10 मीटर एयर राइफल मिक्स्ड टीम सीनियर वर्ग में राजस्थान की जोड़ी ने जीता स्वर्ण 10 मीटर एयर राइफल मिक्स्ड टीम सीनियर स्पर्धा में राजस्थान के दिव्यांश एस पंवार एवं मनीषा की जोड़ी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 503.6 अंक अर्जित कर स्वर्ण पदक प्राप्त किया। रेलवे की अर्जुन बाबूता एवं सोनम उत्तम की टीम ने 502.5 अंक के साथ रजत पदक हासिल किया, जबकि पश्चिम बंगाल के अभिनव शॉ एवं इस्मिता की जोड़ी ने 438.3 अंक अर्जित कर कांस्य पदक प्राप्त किया। जूनियर वर्ग में हरियाणा का दबदबा 10 मीटर एयर राइफल मिक्स्ड टीम जूनियर स्पर्धा में हरियाणा की अमीरा एवं रोहित कन्यन की जोड़ी ने 501.9 अंक अर्जित कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। पश्चिम बंगाल के अभिनव शॉ एवं स्वास्तिका ने 501.0 अंक के साथ रजत पदक प्राप्त किया। महाराष्ट्र की अवनी राठौड़ एवं प्रीतम केंद्रे की टीम ने 432.8 अंक अर्जित कर कांस्य पदक हासिल किया। यूथ वर्ग में महाराष्ट्र की जोड़ी रही अव्वल 10 मीटर एयर राइफल मिक्स्ड टीम यूथ वर्ग में महाराष्ट्र की शाम्भवी एवं वेदांत वाघमारे की जोड़ी ने 496.6 अंक अर्जित कर स्वर्ण पदक प्राप्त किया। उत्तरप्रदेश के अंश डबास एवं कोपल ने 496.1 अंक के साथ रजत पदक हासिल किया, जबकि पश्चिम बंगाल के स्वास्तिका एवं अभिनव शॉ ने 434.7 अंक अर्जित कर कांस्य पदक जीता। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में खिलाड़ियों का उत्कृष्ट प्रदर्शन प्रतियोगिता में विभिन्न राज्यों, रेलवे, सेना एवं अन्य संस्थानों के खिलाड़ियों ने सहभागिता करते हुए उच्च स्तरीय प्रदर्शन किया। यह आयोजन युवाओं में शूटिंग खेल के प्रति रुचि, अनुशासन एवं प्रतिस्पर्धात्मक भावना को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। 15 मई तक आयोजित होंगी विभिन्न स्पर्धाएँ उल्लेखनीय है कि यह राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता 03 मई 2026 से 15 मई 2026 तक म.प्र. राज्य शूटिंग अकादमी, भोपाल में आयोजित की जा रही है। प्रतियोगिता के अंतर्गत आगामी दिनों में विभिन्न राइफल स्पर्धाओं का आयोजन किया जाएगा। खेल मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने खिलाड़ियों को दी शुभकामनाएँ सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सभी खिलाड़ियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की राष्ट्रीय प्रतियोगिताएँ खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित करती हैं।  सारंग ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश में खेल अधोसंरचना एवं अकादमियों के माध्यम से देश को भविष्य के श्रेष्ठ खिलाड़ी मिलते रहेंगे। 

मध्यप्रदेश को बड़ी रेल सौगात, नई लाइन से गुजरात की दूरी होगी कम

झाबुआ मध्य प्रदेश में जून महीने तक नई रेल लाइन का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। सांसद अनिता चौहान की अध्यक्षता में हुई झाबुआ जिला विकास समन्वय एवं मूल्यांकन समिति (दिशा) की बैठक में जिले के विकास को नई रफ्तार देने पर चर्चा की गई। बैठक का मुख्य आकर्षण इंदौर-दाहोद रेल परियोजना रही। इसके तहत रेलवे अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि गुजरात के कतवारा से झाबुआ के मध्य रेल लाइन (Katwara-Jhabua railway line) निर्माण का कार्य जून 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इंदौर-दाहोद परियोजना का हिस्सा है ये रेल लाइन बता दें कि, गुजरात के कतवारा से मध्य प्रदेश के झाबुआ तक बन रही रेल लाइन महत्वाकांक्षी इंदौर-दाहोद रेल लाइन प्रोजेक्ट ( Indore-Dahod railway line project) का हिस्सा। इस परियोजना के तहत 204.76 किलोमीटर तक ब्रॉडगेज रेलवे लाइन का निर्माण किया जाना है। इस परियोजना की कुल लागत 1873 करोड़ रुपए है जिसके अंतर्गत प्रदेश के धार और झाबुआ जैसे अन्य आदिवासी जिलों में पहली बार रेल नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा। इससे गुजरात तक की दूरी कम होगी। बैठक में शामिल वरिष्ठ अधिकारी और जन प्रतिनिधि कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम घरसट की मौजूदगी में हुई बैठक में विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि विकास कार्यों में गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखा जाए। ताकि अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंच सके। बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष सोनल जसवंत भाबोर, भाजपा जिलाध्यक्ष भानू भूरिया, थांदला विधायक वीरसिंह भूरिया, एएसपी प्रतिपाल सिंह महोबिया सहित सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और जन प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इन मुद्दों पर विशेष रूप से फोकस किया जल संरक्षणः जिले में गहराते जल संकट के स्थायी समाधान पर चर्चा करते हुए ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग की समीक्षा की गई। जिला पंचायत सीईओ जितेन्द्रसिंह चौहान ने बताया स्वीकृत 1233 खेत तालाबौ में से 260 पूर्ण हो चुके हैं, शेष 30 मई तक पूरे होंगे। डगवेल रिचार्ज के 4071 कार्यों में से 2244 पूर्ण हो चुके है, शेष 15 मई तक पूरे करने का लक्ष्य है। जिले के 147 पुराने अमृत सरोवरी मैं से 112 लबालब है। अमृत 2.0 के तहत 14 नए तालाबों का निर्माण जारी वाले 1,748 हैंडपंपों के पास अनिवार्य रूप से रिचार्ज पिट बनाए जाएं ताकि भूजल स्तर सुधारा जा सके। कृषि एवं तकनीक: कृषि विभाग की समीक्षा के दौरान उप संचालक एनएस रावत ने आगामी खरीफ सीजन के लिए बीज और उर्वरक की पर्याप्त उपलब्धता का भरोसा दिलाया। किसानों को ई-विकास प्रणाली से जोड़ने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर जागरूकता शिविर लगाए जाएंगे। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष सोनल जसवंत भाबीर ने किसानों की सहायता के लिए एक समर्पित हेल्पलाइन नंबर जारी करने का सुझाव दिया। सांसद ने जल संकट को देखते हुए कम पानी वाली और सूखा प्रतिरोधी फसलों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। बुनियादी ढांचा और बिजली व्यवस्थाः प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत मजरा-टोला योजना में 181 सड़कों की डीपीआर तैयार की जा रही है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत क्षतिग्रस्त ग्वाली ब्रिज का मुद्दा विधायक वीरसिह भूरिया ने उठाया, जिस पर अधिकारियों ने बताया कि पुराने ठेकेदार का अनुबंध निरस्त कर नई निविदा प्रक्रिया शुरू सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' के तहत जिले में 435 घरों में सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं। सांसद ने इस योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार में जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा। शिक्षा और स्वास्थ्यः टीबी मुक्त झाबुआ का संकल्प : सांसद ने स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा करते हुए एक भावुक अपील की। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से निक्षय मित्र बनने और टीबी मरीजों को गोद लेकर उन्हें फूड बास्केट उपलब्ध कराने का आग्रह किया। जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया जिले के विद्यार्थियों को 5,933 साइकिलें वितरित की जा चुकी हैं और 'अपार आईडी' निर्माण का कार्य प्रगति पर है। महिला विकासः प्रधानमंत्री मातृ वंदना और लाड़ली लक्ष्मी योजना के माध्यम से 350 से अधिक नए हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया है। पारदर्शी भुगतान और उपार्जनः जिला आपूर्ति अधिकारी ने जानकारी दी कि अब तक 19,368 मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की जा चुकी है, जिसका 31.52 करोड़ रुपए का भुगतान सीधे किसानों के खातों में पीएम-किसान हितग्राहियों की ई-केवाईसी शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।

तबादला नीति में बड़ा बदलाव, स्वैच्छिक ट्रांसफर को प्राथमिकता देने की तैयारी

भोपाल मध्य प्रदेश में इस बार स्वेच्छा से स्थानांतरण मांगने वालों को प्राथमिकता मिल सकती है। कर्मचारी विभिन्न कारणों से स्वैच्छिक आधार पर स्थानांतरण चाहते हैं जबकि विभागों की प्राथमिकता प्रशासनिक आधार रहता है। स्थानांतरण नहीं होने से कार्य प्रभावित होता है। इसे देखते हुए ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पिछली कैबिनेट की बैठक में स्वयं यह बात उठाई और कहा कि स्वैच्छिक स्थानांतरण तो अधिक होने चाहिए। अब सामान्य प्रशासन विभाग आगामी मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में जो स्थानांतरण नीति प्रस्तावित करने जा रहा है, उसमें स्वेच्छा से स्थानांतरण चाहने वालों को प्राथमिकता दी जा सकती है। सूत्रों का कहना है कि प्रति वर्ष बड़ी संख्या में अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा व्यक्तिगत कारण बताकर स्वैच्छिक स्थानांतरण की मांग की जाती है। किसी भी संवर्ग में 20 प्रतिशत से अधिक स्थानांतरण करने की अनुमति नहीं होती है। इसके कारण अधिकांश आवेदनों का निराकरण नहीं हो पाता है। स्वैच्छिक तबादलों के लाभ और प्रस्तावित नीति स्वैच्छिक स्थानांतरण में प्रशासनिक व्यय भी नहीं देना होता है। इसका दूसरा लाभ यह है कि ऐच्छिक स्थान पर पहुंचने से कर्मचारी की उत्पादकता बढ़ती है, क्योंकि वह मन लगाकर काम कर सकता है। इस व्यावहारिक पक्ष को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने स्वैच्छिक स्थानांतरण को प्राथमिकता देने की बात कही। इसके आधार पर सामान्य प्रशासन विभाग स्थानांतरण नीति-2026 में यह प्रस्तावित कर रहा है कि स्वैच्छिक आवेदनों को गुण-दोष के आधार पर पहले निराकरण किया जाएगा। यदि संभव होगा तो पहले इनके ही तबादले किए जाएंगे, फिर प्रशासनिक आधार को देखा जाएगा। स्थानांतरण से प्रतिबंध 15 मई से 15 जून तक के लिए हटाया जा सकता है। निर्धारित किए जा सकते हैं ये प्रविधान अखिल भारतीय सेवा, न्यायिक सेवा, राज्य प्रशासनिक सेवा, राज्य पुलिस सेवा, राज्य वन सेवा एवं मंत्रालय सेवा के अधिकारियों-कर्मचारियों पर यह नीति लागू नहीं होगी।     शिक्षा विभाग की अलग नीति रहेगी, जिसका आधार सामान्य प्रशासन विभाग की नीति को सुनिश्चित किया जाएगा।   जिला संवर्ग एवं राज्य संवर्ग के तृतीय-चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के जिले के अंदर स्थानांतरण कलेक्टर के माध्यम से प्रभारी मंत्री की मंजूरी के बाद होंगे।     प्रथम श्रेणी अधिकारियों के स्थानांतरण विभागीय मंत्री एवं मुख्यमंत्री के समन्वय से होंगे।     पिछले एक वर्ष में स्थानांतरित कर्मचारियों को सामान्यतः दोबारा स्थानांतरित नहीं किया जाएगा।     उप पुलिस अधीक्षक से नीचे के स्थानांतरण पुलिस स्थापना बोर्ड के माध्यम से होंगे।     गंभीर बीमारी, न्यायालयीन आदेश, गंभीर शिकायत या अनुशासनात्मक कार्रवाई जैसी परिस्थितियों में प्रतिबंध अवधि में भी स्थानांतरण किए जा सकेंगे।  

आवास निर्माण के लिए DPR की मंजूरी, PM Awas Yojana के तहत 10 हजार फ्लैट बनेंगे

इंदौर   प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के तहत नगर निगम ने विभिन्न स्थलों पर आवास निर्माण करने के लिए कुल 5 डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) राज्य शासन के जरिए केंद्र सरकार को भेजी थी। सरकार के 5 में से 2 डीपीआर मंजूर करते ही निगम फ्लैट निर्माण के काम पर लग गया है, जो कि ताप्ती परिसर ट्रेजर फैंटेसी (सिंदौड़ा रंगवासा) और बढिय़ा कीमा में बनेंगे। सबके पास खुद का आवास हो और मकान की कीमत भी कम हो इसके लिए प्रधानमंत्री आवास योजना शुरू की गई है। योजना के पहले चरण में इंदौर शहर और आसपास 13 जगहों पर मिली सरकारी जमीन पर 18606 फ्लैट बनने के साथ लोगों को आबंटित होना शुरू हो गए हैं। अब प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 पर काम शुरू किया गया है। भेजी गई डीपीआर मंजूरी इसके चलते ताप्ती परिसर ट्रेजर फैंटेसी (सिंदौड़ा रंगवासा), सनावदिया, बढिय़ा कीमा और उमरीखेड़ा में 10 हजार फ्लैट बनाने की डीपीआर मंजूरी के लिए राज्य शासन के जरिए केंद्र सरकार को भेजी गई। निगम अफसरों के अनुसार ताप्ती परिसर और बढिया कीमा की डीपीआर मंजूर हो गई है। अब जल्द ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।  इसके लिए पिछले दिनों निगमायुक्त क्षितिज सिंघल और प्रधानमंत्री आवास योजना के अपर आयुक्त अर्थ जैन ने स्थल निरीक्षण किया था। साथ ही अफसरों को निर्देशित किया गया कि योजना के अंतर्गत प्रस्तावित सभी आवासीय परियोजनाओं से पात्र हितग्राहियों को शीघ्र लाभ मिल सके, इसके लिए फ्लैट का निर्माण जल्द से जल्द शुरू किया जाए। प्रधानमंत्री आवास योजना-2.0 पर एक नजर     6048 वन बीएचके के फ्लैट आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए बनेंगे।     1368 टू बीएचके के फ्लैट बनेंगे। 720 थ्री बीएचके के फ्लैट बनेंगे। प्रधानमंत्री आवास योजना क्या है… प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों, निम्न आय वर्ग (LIG), और मध्यम आय वर्ग (MIG) के परिवारों को 2022 (और अब 2.0 के तहत आगे) तक पक्का घर उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत सरकार घर बनाने या खरीदने के लिए सब्सिडी और वित्तीय सहायता प्रदान करती है। योजना के तहत, पात्र लाभार्थियों को नया घर बनाने या कच्चे घर को पक्का करने के लिए लगभग 1.20 लाख से 2.50 लाख तक की वित्तीय सहायता/सब्सिडी मिलती है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदक के पास पहले से कोई पक्का घर नहीं होना चाहिए। यह योजना मुख्य रूप से EWS (आर्थिक रूप से कमजोर), LIG (निम्न आय वर्ग) और MIG (मध्यम आय वर्ग) के लिए है।

एमपी में डॉक्टरों की भर्ती का नया रिकार्ड, अस्पतालों के लिए जारी हुई सबसे बड़ी सूची

इंदौर  मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) इंदौर की ओर से मेडिकल ऑफिसर भर्ती परीक्षा के परिणाम घोषित किया गया है। आयोग की ओर से जारी इस चयन परिणाम अब तक का सबसे बड़ा रिजल्ट माना जा रहा है, क्योंकि 1832 पदों के लिए 4 हजार से ज्यादा उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था। दो इंटरव्यू पैनल ने 45 दिनों के भीतर उम्मीदवारों का साक्षात्कार करवाया। प्रक्रिया पूरी होने के बाद महीनेभर में आयोग की ओर से दो भाग में रिजल्ट बनाया गया, जिसमें 87 प्रतिशत मुख्य भाग का परिणाम निकाला है। आयोग ने मेडिकल ऑफिसर पद के लिए 27 जनवरी से इंटरव्यू रखे थे। इसमें 1832 पदों के लिए 4047 उम्मीदवार को बुलाया गया था। ये प्रक्रिया 10 अप्रैल तक चली। शुक्रवार को आयोग ने साक्षात्कार में चयनित उम्मीदवारों की सूची जारी की है, जिसमें 87 फीसद (1649 पद) मुख्य भाग शामिल है। वेटिंग लिस्ट में 186 उम्मीदवार बता दें कि, 1649 उम्मीदवारों में से 384 सामान्य से हैं, जबकि 225 एससी, 642 एसटी, 197 ओबीसी और 201 ईडब्ल्यूएस पद हैं। लेकिन, 1220 उम्मीदवारों का चयन किया गया है। जबकि, 186 उम्मीदवारों को वेटिंग लिस्ट में रखा गया है। 13 फीसदी पदों पर दूसरी सूची में आएगा परिणाम आयोग ने स्पष्ट किया है कि, शासन के निर्देशों के तहत फिलहाल 87 प्रतिशत पदों का परिणाम घोषित किया गया है, जबकि शेष 13 प्रतिशत पदों की चयन प्रक्रिया अलग से पूरी होगी। इन पदों का परिणाम बाद में जारी किए जाएंगे। भर्ती में कुछ पद विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए भी आरक्षित रखे गए हैं। आयोग के अनुसार, चयन पूरी तरह मेरिट एवं आरक्षण नियमों के आधार पर हुआ है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद और आरक्षण का पेंच अब इस मामले में अधिकारियों का मानना है कि, मेडिकल ऑफिसर के इतने बड़े स्तर पर चयन होने से राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा। अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी दूर होने के साथ ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर होने की संभावना बढ़ी है। आयोग के ओएसडी रवींद्र पंचभाई का कहना है कि, ओबीसी आरक्षण के चलते 13 फीसदी प्रावधिक भाग का रिजल्ट नहीं निकाला गया है। डिप्टी सीएम ने दिए थे जल्द भर्ती करने के निर्देश सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी दूर करने के लिए उप स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने विभाग को निर्देश दिए थे। उन्होंने बीते एक साल में कई बार विभाग की समीक्षा की और अधिकारियों को निर्देशित किया था कि, रिक्त पदों पर जल्द से जल्द नए चिकित्सकों की भर्ती होनी चाहिए।

डायल-112 जवानों की संवेदनशील कार्यवाही से घायल राष्ट्रीय पक्षी को समय पर मिला उपचार

भोपाल  शाजापुर जिले के थाना सुनेरा क्षेत्र में डायल-112 जवानों की संवेदनशील एवं मानवीय कार्रवाई से घायल राष्ट्रीय पक्षी मोर को समय पर उपचार उपलब्ध कराया गया। इस त्वरित कार्यवाही से घायल पक्षी को आवश्यक देखभाल एवं संरक्षण मिल सका। 09 मई को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112, भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना सुनेरा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मेहंदी में एक मोर घायल अवस्था में पड़ा है। पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही सुनेरा थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 एफआरव्ही वाहन को तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। डायल-112 स्टाफ आरक्षक  बृजमोहन यादव एवं पायलट  महेंद्र सिंह जादौन ने  मौके पर पहुँचकर पाया कि वन क्षेत्र से भटककर आया मोर अज्ञात कारणों से घायल हो गया था। डायल-112 जवानों ने तत्परता एवं संवेदनशीलता का परिचय देते हुए घायल मोर को सुरक्षित संरक्षण में लिया तथा एफआरव्ही वाहन की सहायता से उपचार एवं देखभाल हेतु वन केंद्र, शाजापुर पहुँचाकर वन विभाग के अधिकारियों के सुपुर्द किया। डायल-112 जवानों की मानवीय एवं संवेदनशील कार्यवाही से राष्ट्रीय पक्षी को समय पर उपचार एवं संरक्षण उपलब्ध कराया जा सका। डायल-112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा मानव ही नहीं बल्कि वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी संवेदनशील एवं प्रतिबद्ध है।