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गुणवत्ता की निगरानी के लिए मानक मापदंड तय किए जाएं: राज्यपाल पटेल

गुणवत्ता की निगरानी के मानक मापदंड किए जाए निर्धारित : राज्यपाल पटेल  राज्यपाल ने सिकल सेल उन्मूलन अभियान की प्रगति पर हर्ष व्यक्त किया लोक भवन में जनजातीय कार्य विभाग समीक्षा बैठक हुई भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि योजनाओं की मंशा और क्रियान्वयन की व्यवहारिकता में संवेदनशीलता की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता का मूल्यांकन मुख्यतः तकनीकी विषय है, इसलिए हितग्राहियों की प्रतिक्रिया पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। निर्माण सामग्री एवं कार्य की गुणवत्ता की निगरानी के मानक मापदंड निर्धारित किए जाए। अधिकारियों द्वारा निगरानी मापदंड के अनुसार नियमित गुणवत्ता परीक्षण करना चाहिए।       राज्यपाल पटेल लोक भवन में बुधवार को आयोजित समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे।  राज्यपाल को बैठक में पीएम-जनमन योजना अंतर्गत 9 विभागों की 11 अधोसंरचनात्मक, 7 हितग्राही मूलक योजनाओं और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत 17 विभागों की 25 योजनाओं  की प्रगति की जानकारी दी गई। राज्यपाल पटेल ने कहा कि जनजातीय बहुल क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता की पहल पीएम-जनमन योजना और धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजनाएं है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य के लिए निर्धारित समय सीमा तक कार्य की रीति-नीति उचित नहीं है। रणनीति, समय सीमा से पहले कार्य पूरा करने की होनी चाहिए। नए कार्यों के क्रियान्वयन में पूर्व अनुभवों और चुनौतियों को दृष्टिगत रखते हुए कार्य योजना तैयार की जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अति पिछड़ी जनजातियों के विकास और उत्थान के प्रयासों को आवश्यकता और बहुलता की प्राथमिकता के साथ क्रियान्वयन की औपचारिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाए। राज्यपाल पटेल ने प्रदेश में सिकल सेल उन्मूलन अभियान के तीव्र गति से क्रियान्वयन पर हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 से पूर्व वर्ष 2026 तक लक्ष्य का पूरा होना अनुमानित है। उन्होंने सभी संबंधितों को इसके लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि 15 वर्ष की आयु तक के सिकल सेल रोगी वाहक के स्वास्थ्य प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। इससे उनका भावी जीवन सुरक्षित हो जाएगा। जरूरी है कि सिकल सेल की दवाओं की उपलब्धता सदैव सुनिश्चित रहे। एलोपैथिक उपचार पद्धति के साथ ही आयुर्वेद औषधियों के उपयोग के संबंध में जन जागरण के प्रयासों की जरूरत भी बताई। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद की दवाओं के उपयोग से रक्त की उपलब्धता बढ़ने और थकान में कमी के उत्साह जनक प्रारंभिक परिणाम प्राप्त हुए है। राज्यपाल ने बैठक में जनजातीय बहुल क्षेत्रों की तहसीलवार बुनियादी सुविधाओं का मानचित्र तैयार कर प्रभावी निगरानी, जन औषधि केन्द्रों के संचालन में जनजातीय युवाओं की भागीदारी तथा विद्यालयों में छात्राओं, छात्र के पृथक शौचालयों की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर बल दिया। समीक्षा बैठक में जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा, जनजातीय प्रकोष्ठ की सदस्य सचिव श्रीमती मीनाक्षी सिंह, प्रकोष्ठ के सदस्य, लोक भवन और जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।  

जो एक बार मध्यप्रदेश आता है, वह यहीं का होकर रह जाता है: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

जो एक बार मध्यप्रदेश आता है, वह यहीं का होकर रह जाता है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव राज्य सरकार ने उद्योग अनुकूल वातावरण बनाने के लिए लागू की हैं पारदर्शी और उद्योग मित्र नीतियां मध्यप्रदेश देश के सबसे तेजी से प्रगति करने वाले राज्यों में है शामिल विकसित भारत @2047 में 2 ट्रिलियन डॉलर का होगा मध्यप्रदेश का योगदान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीरांगना रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर किया उनका स्मरण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विकसित मध्यप्रदेश पर आयोजित कॉन्क्लेव को किया संबोधित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि समय तभी बदलता है, जब संकल्प बड़ा होता है। सभी भारतीयों के लिए यह गर्व का विषय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृढ़ संकल्प और दूरदर्शी नेतृत्व में भारत का समय बदला है। विश्व के कई देशों ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से प्रधानमंत्री मोदी को विभूषित किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने विकसित भारत @2047 और अर्थव्यवस्था को 30 ट्रिलियन डॉलर पहुंचाने का संकल्प लिया है। राज्य सरकार का यह प्रयास होगा कि इसमें से लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर का योगदान मध्यप्रदेश का हो। मध्यप्रदेश, प्रधानमंत्री मोदी के सेवा, सुशासन और जन कल्याण के संकल्पों को पूर्ण करने का निरंतर प्रयास कर रहा है। वर्तमान में मध्यप्रदेश की गिनती देश के सबसे तेजी से प्रगति करने वाले राज्यों में हो रही है। हम विरासत भी और विकास भी के पथ पर लगातार अग्रसर हो रहे है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज वीरांगना रानी दुर्गावती का बलिदान दिवस है। उन्होंने रानी दुर्गावती का स्मरण करते हुए कहा कि प्रदेशवासी रानी दुर्गावती के बलिदान को सदैव याद रखेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव "विकसित मध्यप्रदेश" विषय पर आयोजित कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल में आयोजित कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ  किया। कॉन्क्लेव में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, सूक्ष्म लघु एवं उद्योग मंत्री चैतन्य काश्यप, मुख्य सचिव अनुराग जैन विशेष रूप से उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कॉन्क्लेव में शामिल उद्योगपतियों से राज्य में मौजूद निवेश संभावनाओं का लाभ उठाने का आह्वान करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश की विशेषता है कि एक बार जो मध्यप्रदेश आता है, यहीं का होकर रह जाता है। कार्यक्रम में उद्योग व्यापार जगत के प्रतिनिधि, निवेशक, बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधि तथा नीति निर्माता शामिल हुए।  प्रदेश में पिछले तीन साल से विकास का कारवां लगातार बढ़ रहा है आगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में पिछले तीन साल से विकास का कारवां लगातार आगे बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश में नए उद्योग स्थापित करने के लिए पर्याप्त लैंड बैंक है। राज्य सरकार ने उद्योग अनुकूल वातावरण तैयार करने लिए पारदर्शी और उद्योग मित्र नीतियां लागू की हैं। मध्यप्रदेश की इन्हीं विशेषताओं के कारण निवेशक उद्योग लगाने के लिए राज्य में आ रहे हैं। देश के मध्य में स्थित होने के कारण उन्हें  कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स का विशेष लाभ भी मिलेगा। प्रदेश सरकार ने चारों दिशाओं में सड़क कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए अधोसंरचना विकास पर विशेष बल दिया है। राज्य सरकार 10 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों को ला चुकी है धरातल पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में भोपाल में पहली बार ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 का आयोजन किया गया, जिसमें अभूतपूर्व निवेश प्राप्त हुआ और एमओयू साइन हुए। यह प्रसन्नता का विषय है कि 10 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों को राज्य सरकार धरातल पर ला चुकी है। मध्यप्रदेश की छवि कृषि प्रधान राज्य के साथ उद्योग मित्र राज्य की भी बनी है। राज्य सरकार ने वर्ष 2025 को उद्योग और रोजगार को समर्पित किया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय युवा प्रतिभाओं ने दुनिया की बड़ी से बड़ी कंपनियों में शीर्ष पदों पर पहुंचकर भारत का मान बढ़ाया है। स्पेस टेक्नोलॉजी में भारतीय वैज्ञानिकों ने नए कीर्तिमान गढ़े हैं। राज्य सरकार ने भी अपनी स्पेस-टेक पॉलिसी लॉन्च की है। मध्यप्रदेश को सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए हम निरंतर प्रयास कर रहे हैं। 

भोपाल-इंदौर समेत 16 नगर निगमों में जल्द होगी एल्डरमैन की नियुक्ति, सरकार की तैयारी पूरी

भोपाल/ इंदौर  एमपी में हफ्ते भर में नगरीय निकायों में एल्डरमैन की नियुक्ति हो सकती है। सीएम डॉ. मोहन यादव और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के बीच मंथन पूरा हो चुका है। संभवत: इसी हफ्ते में बचे हुए निकायों में एल्डरमैन घोषित करने की तैयारी है। प्रदेश के करीब 244 नगरीय निकायों में मनोनीत पार्षदों यानी एल्डरमैन की नियुक्ति होना बाकी है। नगर निगमों में नियुक्त होंगे एल्डरमैन एमपी के 16 नगर निगमों में 12-12 एल्डरमैन नियुक्त किए जाएंगे। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर जबलपुर सहित सभी नगर निगमों के एल्डरमैन के लिए संभावित नामों की लिस्ट जिला स्तरीय कोर ग्रुप में चर्चा के बाद प्रदेश संगठन को भेजे जा चुके हैं। दो बडे़ शहरों में कुछ नामों पर चर्चा अंतिम दौर में है। इन नगर निगमों में नियुक्त होंगे मनोनीत पार्षद     भोपाल     इंदौर     जबलपुर     ग्वालियर     उज्जैन     सागर     रीवा     सतना     सिंगरौली     मुरैना     छिंदवाड़ा     देवास     कटनी     रतलाम     खंडवा     बुरहानपुर मार्च में 169 निकायों में नियुक्त हुए थे एल्डरमैन मार्च में मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के 169 नगरीय निकायों में एल्डरमैन की नियुक्ति के आदेश जारी किए थे। इन नियुक्तियों में विशेष रूप से नगर परिषदों और नगर पालिकाओं को कवर किया गया था, जिसका विवरण इस प्रकार है। नगर परिषद: एमपी में कुल 299 नगर परिषद हैं। इनमें से 28 मार्च को 123 नगर परिषदों में एल्डरमैन नियुक्त किए गए थे। तय फॉर्मूले के मुताबिक, प्रत्येक नगर परिषद में 4-4 एल्डरमैन मनोनीत किए गए। इस लिहाज से नगर परिषदों में कुल 492 एल्डरमैन बनाए गए थे। अब 176 नगर परिषदों में नियुक्तियां होना बाकी हैं। नगर पालिका: एमपी में कुल 98 नगर पालिका परिषद हैं। इनमें से मार्च में 46 नगर पालिकाओं में एल्डरमैन की घोषणा की गई थी। यहां के लिए प्रति नगर पालिका 6-6 एल्डरमैन का फॉर्मूला तय किया गया था, जिससे नगर पालिकाओं में कुल 276 एल्डरमैन नियुक्त हुए। अब 52 नगर परिषदों में एल्डरमैन नियुक्त होने बाकी हैं। यदि दोनों को जोड़कर देखा जाए, तो मार्च में हुई घोषणा के तहत कुल 768 एल्डरमैन नगर परिषद और नगर पालिका में नियुक्त किए गए थे। हालांकि, उस समय आपसी सहमति न बन पाने के कारण सागर को छोड़कर शेष बुंदेलखंड और चंबल संभाग के कई निकायों की सूची होल्ड पर रख दी गई थी। क्या होती है एल्डरमैन की भूमिका? मध्य प्रदेश नगर पालिका अधिनियम के तहत नगरीय निकायों में ऐसे लोगों को एल्डरमैन बनाया जाता है, जिन्हें प्रशासनिक अनुभव और नगरीय निकायों के कामकाज का अच्छा ज्ञान हो। ये मनोनीत पार्षद परिषद की बैठकों और चर्चाओं में हिस्सा तो ले सकते हैं और अपने सुझाव भी दे सकते हैं। इनके पास बैठकों के दौरान वोट देने का अधिकार नहीं होता है। यानी ये परिषद में 'मार्गदर्शक' की भूमिका निभाते हैं, 'निर्णायक' की नहीं। इनका कार्यकाल वर्तमान परिषद के कार्यकाल के साथ या आगामी आदेश तक प्रभावी रहता है।

ग्रीष्मकालीन छुट्टियों में बढ़ी मांग, मैसूरू-मदार स्पेशल ट्रेन का संचालन अवधि विस्तारित

रतलाम  पश्चिम रेलवे द्वारा यात्रियों की सुविधा तथा विशेष रूप से ग्रीष्मकालीन छुट्टियों के दौरान बढ़ती यात्रा मांग को ध्यान में रखते हुए विशेष किराये पर संचालित मैसूरू-मदार साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन के फेरे पुनः विस्तारित किए गए हैं। जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार के अनुसार 06281 मैसूरू-मदार स्पेशल 11 जुलाई व 06282 मदार-मैसूरू स्पेशल 13 जुलाई 2026 तक विस्तारित की गई है। ट्रेनों के आगमन/प्रस्थान समय, ठहराव और संरचना के समय के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए यात्री www.enquiry.indianrail.gov.in पर जा सकते हैं। साथ ही रेलवन एप के माध्यम से भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। उल्लेखनीय है कि यात्रियों के बढ़ते दबाव और विशेष मांग के चलते स्पेशल ट्रेन के फेरे बढ़ाए गए हैं। मैसूरू-मदार साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन विशेष किराये पर संचालित की जा रही है। गोल्डन टेम्पल मेल अगले छह माह तक बांद्रा टर्मिनस से ही संचालित होती रहेगी रतलाम : रेल मंडल से गुजरने वाली गोल्डन टेम्पल मेल के टर्मिनल स्टेशन से संबंधित अस्थायी परिचालन व्यवस्था को आगामी छह माह तक जारी रखने की अधिसूचना जारी की गई है। 12903 मुंबई सेंट्रल-अमृतसर गोल्डन टेम्पल मेल 17 फरवरी 2027 तक मुंबई सेंट्रल के बजाय बांद्रा टर्मिनस से ही ओरिजिनेट होगी। इसी प्रकार 12904 अमृतसर–मुंबई सेंट्रल गोल्डन टेम्पल मेल 15 फरवरी 2027 तक मुंबई सेंट्रल के बजाय बांद्रा टर्मिनस पर ही टर्मिनेट होगी।

तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में बड़ा हादसा टला, झूला पुल की लोडिंग तार की कड़ी टूटी

 ओंकारेश्वर तीर्थनगरी ओंकारेश्वर को ममलेश्वर से जोड़ने वाले प्रमुख झूला पुल की लोडिंग तार की एक कड़ी टूटने से मंगलवार देर रात पुल से आवाजाही को बंद कर दिया गया है। बुधवार सुबह प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर पुल के दोनों ओर ताला लगा दिया है। स्थानीय लोगों के अनुसार ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर और ममलेश्वर मंदिर को जोड़ने वाले इस पुल की कड़ी टूटने से पुल की अन्य सपोर्ट कड़ियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है, जिससे सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। पुल का एक हिस्सा हल्का झुका हुआ भी नजर आ रहा है। इससे लोगों की सुरक्षा को लेकर खतरा और बढ़ गया है। इसी के मद्देनजर पुल को आवाजाही के लिए बंद करने का निर्णय लिया गया है। नायब तहसीलदार उदय मंडलोई ने बताया कि मरम्मत कार्य शुरू करा दिया गया है और तकनीकी जांच के बाद ही पुल को दोबारा खोला जाएगा। अनुमान है कि दो से तीन दिन में आवागमन बहाल हो सकता है। रखरखाव और दीर्घकालिक सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 में भी महाशिवरात्रि से पहले पुल में तकनीकी खराबी सामने आई थी। वर्ष 2004 में एनएचडीसी द्वारा निर्मित इस पुल में दूसरी बार खराबी आने से इसके रखरखाव और दीर्घकालिक सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पांच दिन पहले इसी पुल से गुजरी थीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु विदित हो कि पांच दिन पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु इसी झूला पुल से भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन और पूजन करने के लिए गुजरी थीं। गनीमत रही कि उस दौरान कोई अनहोनी नहीं हुई। उनके दौरे के बाद यह घटना सामने आई है। रखरखाव में लापरवाही या जिम्मेदारी से बचने की कोशिश स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल की एक कड़ी टूटने के बाद अन्य सपोर्ट कड़ियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है और पुल का एक हिस्सा हल्का झुक भी गया है। वर्ष 2004 में एनएचडीसी द्वारा निर्मित इस पुल में वर्ष 2023 के बाद दूसरी बार तकनीकी खराबी सामने आई है। इसके बावजूद समय पर व्यापक मरम्मत और सुरक्षा ऑडिट नहीं होना चिंता का विषय है। तीन वर्ष पूर्व महाशिवरात्रि पर पुल की केबल टूटने से करीब दो माह तक आवाजाही बंद रही थी। तत्कालीन कलेक्टर अनूप कुमार सिंह ने पुल पर भार कम करने के लिए इसके उपर लगा टीन का शेड हटवा दिया था। हैंडओवर पर एनएचडीसी और नगर परिषद के बीच खींचतान सूत्रों के अनुसार लंबे समय से झूला पुल को नगर परिषद को हैंडओवर करने का मामला लंबित है। एनएचडीसी और नगर परिषद के बीच जिम्मेदारी तय नहीं होने से रखरखाव प्रभावित होने की बात भी सामने आती रही है। सवाल यह है कि आखिर पुल की नियमित निगरानी और मरम्मत की अंतिम जिम्मेदारी किसकी है। जब तक यह स्थिति स्पष्ट नहीं होगी, तब तक श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर खतरा बना रहेगा। फिलहाल एनएचडीसी ही इसका रखरखाव कर रही है। बढ़ती श्रद्धालुओं की भीड़, सुरक्षा इंतजाम कमजोर ओंकारेश्वर में हर दिन हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों के चलते आने वाले समय में यह संख्या कई गुना बढ़ने वाली है। ऐसे में झूला पुल जैसी महत्वपूर्ण संरचनाओं की नियमित तकनीकी जांच,लोड क्षमता का परीक्षण और वैकल्पिक व्यवस्था तत्काल सुनिश्चित करना जरूरी हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी लापरवाही भविष्य में किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। सिंहस्थ पर फोकस, लेकिन स्थानीय व्यवस्थाएं उपेक्षित प्रशासन का पूरा ध्यान सिंहस्थ की तैयारियों पर केंद्रित है, लेकिन स्थानीय बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्थाओं की अनदेखी अब सामने आने लगी है। नर्मदा पर बना यह झूला पुल तीर्थयात्रियों की जीवनरेखा हैए इसलिए इसके रखरखाव को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। अनुभवी प्रशासनिक नेतृत्व की जरूरत स्थानीय लोगों का मानना है कि सिंहस्थ जैसे विशाल आयोजन और ओंकारेश्वर जैसी संवेदनशील धार्मिक नगरी के प्रभावी प्रबंधन के लिए केवल प्रोबेशनरी आइएएस अधिकारी पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। यहां अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी की तैनाती समय की आवश्यकता है। पिछले करीब चार साल से पुनासा एसडीएम के पद पर प्रशिक्षु आइएएस की लर्निंग स्कूल बना हुआ है। यहां के एसडीएम के पास ही ओंकारेश्वर जैसी महत्वपूर्ण जगह का प्रभार भी रहता है। इधर ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट में लंबे समय से रिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी ;सीईओद्ध के पद पर भी योग्य और अनुभवी अधिकारी की नियुक्ति शीघ्र की जानी चाहिएए ताकि विकास कार्यों, सुरक्षा प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं का बेहतर समन्वय हो सके। नायब तहसीलदार उदय मंडलोई ने बताया कि पुल की मरम्मत शुरू कर दी गई है और तकनीकी परीक्षण के बाद ही इसे दोबारा खोला जाएगा। अनुमान है कि दो से तीन दिन में आवागमन बहाल हो सकता हैए लेकिन इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि समय रहते स्थायी और जिम्मेदार समाधान नहीं निकाला गया तो भविष्य में किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। इस मामले में कलेक्टर ऋषव गुप्ता और पुनासा एसडीएम पकंज वर्मा से वस्तु स्थिति जाने के लिए फोन लगाने पर चर्चा नहीं हो सकी  

महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था का सैलाब, दान राशि पहुंची 142 करोड़ रुपए

उज्जैन  महाकाल लोक बनने के बाद बाबा महाकाल के दरबार में श्रद्धालुओं की आस्था के साथ दान का प्रवाह भी लगातार बढ़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में महाकाल मंदिर समिति को रिकॉर्ड 142 करोड़ रुपए की आय हुई है, जिसमें केवल दान मद से ही 78 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं। यह बीते छह वर्षों में सबसे अधिक दान है और पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में करीब 27 करोड़ रुपए ज्यादा है। मंदिर समिति के अनुसार दान पेटियों से 62 करोड़ रुपए, नगद काउंटर पर 5 करोड़ 50 लाख रुपए, मनी ऑर्डर से 1.23 लाख रुपए, ऑनलाइन माध्यम से 3 करोड़ 60 लाख रुपए, अन्नक्षेत्र से 3 करोड़ 38 लाख रुपए तथा गुप्त दान के रूप में 4 करोड़ 65 लाख रुपए प्राप्त हुए। लड्‌डू की बिक्री 65 करोड़ की वहीं लड्डू प्रसादी की बिक्री से 65 करोड़ रुपए की आय हुई। इसके अलावा श्रद्धालुओं ने सोने-चांदी के करोड़ों रुपए मूल्य के आभूषण भी दान किए हैं। गौरतलब है कि 11 अक्टूबर 2022 को प्रधानमंत्री ने महाकाल लोक का लोकार्पण किया था। इसके बाद महाकाल मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में करीब तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई है। पहले जहां प्रतिदिन 40 से 50 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर डेढ़ से दो लाख प्रतिदिन तक पहुंच गई है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ मंदिर की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। दान कक्ष में सिली हुई जेब वाले कपड़ों में ही मिलती है एंट्री राम मंदिर में दान को लेकर चल रहे विवाद के बाद श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के सहायक प्रशासक आशीष पलवड़िया ने बताया कि मंदिर में प्राप्त होने वाले दान के संबंध में पूरी पारदर्शिता और निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है। मंदिर परिसर में कुल 95 दान पेटियां स्थापित हैं, जिनमें श्रद्धालु बड़ी संख्या में दान करते हैं। इसके अलावा श्रद्धालु क्यूआर कोड के माध्यम से भी ऑनलाइन दान कर रहे हैं। हर सप्ताह दान पेटियां खोली जाती हैं। इन्हें सुरक्षा व्यवस्था के बीच गणना कक्ष तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद निरीक्षक, सहायक प्रशासक तथा मंदिर समिति के अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में दान पेटियां खोली जाती हैं। दान की गणना की फोटोग्राफी कराई जाती है और पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में संपन्न होती है। दान की गणना के लिए नियुक्त कर्मचारियों को विशेष नियमों का पालन करना पड़ता है। उन्हें बिना जेब वाले कपड़े या सिली हुई जेब वाले परिधान पहनने के बाद ही गणना कक्ष में प्रवेश की अनुमति दी जाती है, ताकि किसी प्रकार की अनियमितता की आशंका न रहे। दान बढ़ा तो खर्च भी दोगुना हुआ श्री महाकाल लोक के लोकार्पण से पहले महाकाल मंदिर का क्षेत्रफल 2.82 हेक्टेयर था, जो विस्तार के बाद बढ़कर 47 हेक्टेयर हो गया है। वर्तमान में मंदिर समिति के कुल 306 कर्मचारी कार्यरत हैं। इन कर्मचारियों के वेतन के अलावा मंदिर की सुरक्षा, साफ-सफाई, रखरखाव, निर्माण कार्य, पर्व-त्योहारों की व्यवस्थाएं, धर्मशाला, अन्नक्षेत्र, महाकालेश्वर वैदिक शोध संस्थान, गोशाला तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर बड़ी राशि खर्च होती है। मासिक खर्च भी बढ़कर 5 करोड़ से ज्यादा इसके अतिरिक्त महाशिवरात्रि, श्रावण मास, नागपंचमी सहित अन्य प्रमुख पर्वों पर श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए भी अतिरिक्त व्यय किया जाता है। पहले मंदिर का मासिक खर्च करीब 2.5 करोड़ रुपए था, जो अब बढ़कर 5 करोड़ रुपए से अधिक प्रतिमाह हो गया है।

मध्य प्रदेश में बदला मौसम, 15 जिलों में बारिश-आंधी का अलर्ट; 48 जिलों में 52% कम बारिश

भोपाल  मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून अब कुछ ही दूरी पर है। एक-दो दिनों में यह मध्य प्रदेश में दाखिल होने वाला है। मानसून बालाघाट, सिवनी और मंडला इलाके से आने की संभावना है। मानसूनी बादलों ने पहले ही पड़ोसी राज्यों छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र को कवर कर चुके हैं और जल्द ही मध्य प्रदेश की ओर बढ़ने की उम्मीद है। एक से दो दिन में मानसून देगी दस्तक मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार को दक्षिण-पश्चिम मानसून मध्य अरब सागर के बाकी हिस्सों, महाराष्ट्र के और इलाकों, तेलंगाना और ओडिशा के बाकी हिस्सों, और छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ा है। मानसून की उत्तरी सीमा अभी दहानू, वर्धा, रायपुर डाल्टनगंज और मोतिहारी से होकर गुजर रही है। अगले एक-दो दिनों में मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए हालात अनुकूल हैं। आंधी-बारिश की वजह से दिन के तापमान में खासी गिरावट हुई है। पचमढ़ी में पारा सबसे कम 30.2 डिग्री दर्ज किया गया। खरगोन में 30.4 डिग्री, धार में 31 डिग्री, सिवनी में 32.2 डिग्री, छिंदवाड़ा में 35.3 डिग्री, बैतूल-मंडला में 35.5 डिग्री और रायसेन में 35.6 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं प्रदेश के 5 बड़े शहरों की बात करें तो इंदौर में 33.9 डिग्री, भोपाल में 32.2 डिग्री, ग्वालियर में 41 डिग्री, उज्जैन में 34.8 डिग्री और जबलपुर में 35.4 डिग्री सेल्सियस रहा। दतिया-सीधी में पारा सबसे ज्यादा 41.2 डिग्री रहा। जारी है प्री मानसून बारिश वहीं, मध्य प्रदेश के कई इलाकों में प्री मानसून बारिश का दौर जारी है। भोपाल में बुधवार की सुबह भी बारिश हुई है। साथ ही लोगों को गर्मी और तापमान से राहत मिली है। मंगलवार को भोपाल में अधिकतम तापमान 32.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया और न्यूनतम तापमान 24.6 डिग्री सेल्सियस रहा। मंगलवार सुबह साढ़े आठ बजे तक भोपाल में बीते 24 घंटों में 19.8 मिमी बारिश हुई। भोपाल में बुधवार को होगी बारिश मौसम विभाग ने भोपाल में बुधवार को आंशिक रूप से बादल छाए रहने का अनुमान लगाया है। साथ ही दोपहर या शाम के समय आंधी-तूफान, बिजली कड़कने और हल्की बारिश की संभावना है। अधिकतम और न्यूनतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस और 24 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। हवा की औसत गति लगभग 30 किमी प्रति घंटा रहेगी। कम बारिश वाले जिले- अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आलीराजपुर, बड़वानी, बैतूल, भिंड, बुरहानपुर, दतिया, देवास, धार, ग्वालियर, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, खरगोन, मुरैना, नर्मदापुरम, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, शाजापुर, सीहोर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा। ज्यादा बारिश वाले जिले- भोपाल, अशोकनगर, आगर-मालवा, गुना, मंदसौर, नीमच और श्योपुर। धार में 2 इंच, भोपाल में पौन इंच बारिश, 17 जिलों में पानी गिरा इससे पहले सोमवार को प्रदेश में प्री-मानसूनी एक्टिविटी देखने को मिली। धार में करीब 2 इंच पानी गिर गया। वहीं, भोपाल में पौन इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। इंदौर, खंडवा, रायसेन, राजगढ़, उज्जैन, छिंदवाड़ा, जबलपुर, खजुराहो, सागर, सतना, सिवनी, बड़वानी, शाजापुर, सीहोर समेत कई जिलों में आंधी-बारिश का दौर बना रहा। मौसम विभाग के अनुसार, सोमवार को पचमढ़ी सबसे ठंडा रहा। यहां पर अधिकतम तापमान 31.6 डिग्री दर्ज किया गया। धार में 32.9 डिग्री, सिवनी में 34.2 डिग्री, रायसेन में 35.4 डिग्री, शाजापुर में 35.7 डिग्री रहा। दतिया में सबसे ज्यादा 42.2 डिग्री दर्ज किया गया। सीधी, खजुराहो, टीकमगढ़ नौगांव और नरसिंहपुर में 40 डिग्री या इससे ज्यादा रहा। प्रदेश के 5 बड़े शहरों की बात करें तो इंदौर में 34.7 डिग्री, उज्जैन में 35 डिग्री, भोपाल में 35.2 डिग्री, जबलपुर में 36 डिग्री और ग्वालियर में 40.2 डिग्री सेल्सियस रहा। आंधी और बारिश की चेतावनी इसके साथ ही सीहोर, जबलपुर, सागर, भोपाल, विदिशा, रायसेन, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, इंदौर, देवास, शाजापुर, आगर, गुना, अशोकनगर, सिंगरौली, रीवा, मऊगंज, सतना, अनुपपुर, शहडोल और उमरिया समेत एमपी के कई जिलों में आंधी बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की चेतावनी जारी की गई है। साथ ही डिडोंरी, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, पांढुर्णा, सीधी और नरसिंहपुर के लिए भी चेतावनी जारी है।

मध्य प्रदेश शिक्षक भर्ती में नया मोड़, चॉइस फिलिंग जारी रहेगी लेकिन नियुक्ति पर अंतरिम रोक

 जबलपुर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने शिक्षक भर्ती प्रक्रिया से जुड़े एक मामले में याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत प्रदान करते हुए चॉइस फिलिंग की अनुमति दे दी है। साथ ही स्पष्ट किया है कि उनके नियुक्ति आदेश फिलहाल जारी नहीं किए जाएंगे और यह प्रक्रिया याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी। यह मामला डेढ़ हजार से अधिक अभ्यर्थियों से जुड़ा है। कोर्ट के समक्ष भोपाल निवासी प्रिया देव सहित अन्य बनाम मध्य प्रदेश शासन व अन्य प्रकरण की सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता प्रवीण कुमार वर्मा व डॉ. ज्योति वर्मा ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि सभी याचिकाकर्ता एक जैसी शर्तों और विवाद से प्रभावित हैं, इसलिए अलग-अलग याचिकाएं दायर करना व्यावहारिक नहीं होगा। इस पर कोर्ट ने संयुक्त याचिका दायर करने संबंधी आवेदन स्वीकार कर लिया। चॉइस फिलिंग में भाग लेने की अनुमति दी अधिवक्ता वर्मा ने यह भी तर्क दिया कि इसी प्रकार के मामले डब्ल्यूपी क्रमांक 21474/2026 में हाई कोर्ट द्वारा 19 जून, 2026 को अंतरिम राहत प्रदान की जा चुकी है। तर्कों से सहमत होते हुए कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को चॉइस फिलिंग में भाग लेने की अनुमति दे दी, लेकिन नियुक्ति आदेश जारी करने पर रोक लगा दी। राज्य शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता प्रवीण नामदेव उपस्थित रहे। कोर्ट ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। मामले को चार सप्ताह बाद संबंधित याचिका के साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

सुभाषनगर-एम्स रूट पर 2 दिन नहीं चलेगी भोपाल मेट्रो, CMRS करेगी निरीक्षण

भोपाल राजधानी भोपाल के सुभाषनगर से एम्स के बीच दौड़ रही मेट्रो अगले 2 दिन यानी, बुधवार और गुरुवार को बंद रहेगी। यह आम लोगों के लिए नहीं दौड़ेगी। दो दिन तक कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) सिग्नलिंग सिस्टम की जांच करेगी। यह टीम भोपाल पहुंच गई है। निरीक्षण के बाद टीम 'ओके' रिपोर्ट देगी। इसके बाद सिग्नलिंग सिस्टम चालू हो जाएंगे। जिससे मेट्रो का नया शेड्यूल और टाइमिंग तय होगी। जुलाई में सिग्नलिंग सिस्टम चालू होने के बाद नया शेड्यूल जारी होगा। मेट्रो प्रबंधन के अनुसार, निरीक्षण एवं परीक्षण पूरा होने के बाद 26 जून से मेट्रो फिर से अपने निर्धारित समय पर दौड़ने लगेगी। सुभाष नगर से एम्स के बीच करीब 7 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर सिग्नलिंग सिस्टम का काम पूरा हो गया है। भोपाल और इंदौर मेट्रो में ऑरेंज-येलो लाइन के 2 रूट 30 किलोमीटर लंबे हैं। फिलहाल 12 किमी में ही मेट्रो दौड़ रही है, लेकिन इसकी रफ्तार काफी धीमी है। इस वजह से सवाल उठने लगे हैं। 800 करोड़ रुपए में नया सिस्टम भोपाल में मेट्रो संचालन की सुस्त रफ्तार को तेज करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सुभाष नगर से एम्स के बीच प्रायोरिटी कॉरिडोर पर सिग्नलिंग सिस्टम का काम पूरा हो गया। करीब 30 किमी के लिए हुए करीब 800 करोड़ रुपए के टेंडर का यह पहला चरण है। अभी एक ही ट्रैक पर दौड़ रही मेट्रो जानकारी के अनुसार, भोपाल और इंदौर में अभी सिग्नलिंग सिस्टम नहीं है। इस वजह से मेट्रो प्रबंधन को केवल एक ही ट्रैक (डाउन ट्रैक) पर ट्रेन चलानी पड़ रही हैं। यही वजह है कि भोपाल में ट्रेनों की फ्रिक्वेंसी 75 मिनट रखी गई है, जिससे यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। यहां दोपहर 12 से शाम 4 बजे के बाद ही मेट्रो दौड़ रही है। जिस ट्रैक पर दौड़ती, उसी पर वापसी सुभाष नगर से एम्स के बीच डाउन ट्रैक पर ही ट्रेन दोनों दिशाओं में चलाई जा रही हैं। यानी जो जा रही है, वह उसी ट्रैक पर लौट रही है। जबकि अप ट्रैक (एम्स से सुभाष नगर) पर ट्रेन नहीं दौड़ती। नए सिस्टम के बाद दोनों तरफ से ट्रेन चलेगी। मेट्रो की रीढ़ होता है सिग्नलिंग सिस्टम जानकारों के मुताबिक सिग्नलिंग सिस्टम किसी भी मेट्रो नेटवर्क का सबसे अहम हिस्सा होता है। यही तय करता है कि ट्रेन कितनी दूरी पर चलेगी। ट्रेन की अधिकतम और न्यूनतम गति नियंत्रित करता है। ट्रेनों के बीच सुरक्षित गैप बनाए रखता है। ऑटोमेटेड ऑपरेशन और इमरजेंसी कंट्रोल संभालता है। सिस्टम के बिना मल्टी-ट्रैक ऑपरेशन संभव नहीं होता, जिससे पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो पाता। दिल्ली मेट्रो जैसी तकनीक भोपाल मेट्रो में वही आधुनिक सिग्नलिंग तकनीक लागू की जा रही है, जो दिल्ली मेट्रो में इस्तेमाल होती है। इस तकनीक के लागू होने के बाद ट्रेन दोनों ट्रैक पर चल सकेंगी। ट्रेनों के बीच का अंतर (हेडवे) कम होगा और फ्रिक्वेंसी तेजी से बढ़ाई जा सकेगी। नए सिस्टम से यह फायदा नए सिस्टम के शुरू होने के बाद मेट्रो दोनों ओर से चलेगी। इससे 75 मिनट की टाइमिंग कम होगी। इससे लोगों को आसानी से मेट्रो मिल सकेगी। फेरे भी बढ़ जाएंगे। ऐसे में सुबह और शाम को ऑफिस टाइमिंग पर भी मेट्रो मिल सकेगी।

मानहानि मामले में आज आएगा बड़ा फैसला, राहुल गांधी की नजरें MP हाईकोर्ट पर

 जबलपुर  मध्य प्रदेश में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय सिंह की ओर से दायर मानहानि के केस में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को व्यक्तिगत उपस्थिति से राहत मिलेगी या नहीं, इसका निर्णय बुधवार को होगा। इसके लिए दायर राहुल की याचिका पर मंगलवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। प्रकरण में कार्तिकेय सिंह का आरोप है कि वर्ष 2018 में झाबुआ जिले में एक चुनावी सभा के दौरान राहुल गांधी ने पनामा पेपर्स प्रकरण में उनके पिता शिवराज सिंह चौहान और उनके नाम का उल्लेख किया, जिससे उनकी मानहानि हुई। केस की सुनवाई भोपाल की एमपी-एमएलए कोर्ट कर रही है। वहां से सुनवाई में पेश न होने पर राहुल गांधी को समन जारी किया गया था। इसे समन को हाई कोर्ट की जबलपुर स्थित मुख्य पीठ में चुनौती देते हुए राहुल की ओर से ट्रायल कोर्ट में व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दिए जाने की मांग की गई थी। हाई कोर्ट ने पिछली सुनवाई में ट्रायल कोर्ट से केस संबंधित रिकार्ड तलब किया था। मंगलवार की सुनवाई में कोर्ट ने रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद प्रकरण में निर्णय बुधवार के लिए पुनः सूचीबद्ध कर दिया। अब हाई कोर्ट यह तय करेगी कि अंतिम निर्णय तक राहुल गांधी को कोई अस्थायी संरक्षण दिया जाए या नहीं।