samacharsecretary.com

गढ़वा–पलामू क्षेत्र को बड़ी सौगात, 261 किमी रेल परियोजना से विकास को मिलेगी रफ्तार

जागरण (गढ़वा)  गढ़वा एवं पलामू प्रमंडल के लाखों लोगों के लिए बहुप्रतीक्षित बरवाडीह–गढ़वा रोड–रामानुजगंज–अंबिकापुर नई रेल लाइन परियोजना को केंद्र सरकार ने बड़ी सौगात दी है। रेल मंत्रालय द्वारा 26 मई 2026 को भारत के राजपत्र (संख्या-2568) में प्रकाशित अधिसूचना के माध्यम से 261.838 किलोमीटर लंबी इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना को झारखंड एवं छत्तीसगढ़ में 'विशेष रेल परियोजना' घोषित कर दिया गया है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, बिलासपुर द्वारा जारी अधिसूचना संख्या का.आ. 2660(अ) के अनुसार रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 2(37A) के तहत यह निर्णय लिया गया है। अधिसूचना के प्रकाशन के साथ ही यह प्रभावी हो गई है। परियोजना के अंतर्गत अंबिकापुर, रामानुजगंज, गढ़वा रोड तथा बरवाडीह के बीच नई सिंगल रेल लाइन का निर्माण किया जाएगा। निर्माण कार्य में आएगी तेजी विशेष रेल परियोजना का दर्जा मिलने से भूमि अधिग्रहण, वन एवं पर्यावरण स्वीकृति सहित विभिन्न प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तेजी आने की संभावना बढ़ गई है। इससे लंबे समय से लंबित इस परियोजना के निर्माण कार्य में गति आने की उम्मीद जगी है। गढ़वा जिला अंतर्गत भंडरिया एवं बड़गड़ प्रखंड सहित गढ़वा जिले के लोगों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। क्षेत्रवासियों का मानना है कि रेल लाइन बनने से आवागमन की सुविधा बढ़ेगी, व्यापार एवं रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान होगी। साथ ही झारखंड और छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती क्षेत्रों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को भी नई गति मिलेगी। गौरतलब है कि बरवाडीह–अंबिकापुर रेल लाइन की मांग कई दशकों से उठती रही है। अब परियोजना को विशेष रेल परियोजना घोषित किए जाने के बाद लोगों को उम्मीद जगी है कि निर्माण कार्य जल्द शुरू होगा और क्षेत्र का वर्षों पुराना रेल संपर्क का सपना साकार हो सकेगा। बरवाडीह–अंबिकापुर रेल परियोजना को विशेष रेल परियोजना घोषित किया जाना क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। इससे परियोजना के कार्यान्वयन में तेजी आएगी और वर्षों से लंबित लोगों की मांग पूरी होने का मार्ग प्रशस्त होगा। यह निर्णय गढ़वा, पलामू और सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। – आनंद प्रसाद सोनी, सांसद प्रतिनिधि बड़गड़। केंद्र सरकार का यह निर्णय क्षेत्र के लोगों के लिए बड़ी सौगात है। रेल लाइन बनने से आवागमन आसान होगा और व्यापार, शिक्षा तथा रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होंगे। इससे झारखंड और छत्तीसगढ़ के बीच संपर्क और मजबूत होगा तथा क्षेत्र के आर्थिक विकास को नई दिशा मिलेगी। – कुंवर सिंह, सांसद प्रतिनिधि, भंडरिया। विशेष रेल परियोजना का दर्जा मिलने से बरवाडीह–अंबिकापुर रेल लाइन निर्माण का सपना अब साकार होता दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री एवं रेल मंत्रालय के इस निर्णय से क्षेत्र के लाखों लोगों को लाभ मिलेगा। यह परियोजना विकास, रोजगार और बेहतर परिवहन व्यवस्था का नया अध्याय लिखेगी। – बजरंग प्रसाद, भाजपा मंडल अध्यक्ष दशकों से क्षेत्र की जनता इस रेल परियोजना की प्रतीक्षा कर रही थी। विशेष रेल परियोजना घोषित होने से लोगों में नई उम्मीद जगी है कि अब निर्माण कार्य शीघ्र शुरू होगा। यह रेल लाइन क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास के साथ-साथ युवाओं के लिए भी नए अवसर लेकर आएगी। – मनोज कुमार राज, सामाजिक कार्यकर्ता  

झारखंड सरकार ने रेलवे को सौंपी 150 एकड़ जमीन, दो चरणों में पूरा होगा गोड्डा–पीरपैंती रेल कॉरिडोर

 भागलपुर आजादी के लंबे कालखंड के बाद भी बिहार और झारखंड के सीमावर्ती प्रक्षेत्र गोड्डा से पीरपैंती के बीच सीधे रेल संपर्क न होने से स्थानीय आबादी पूरी तरह सड़क मार्ग पर निर्भर थी. हालांकि, अब पूर्व रेलवे के निर्माण विभाग की सक्रियता से इस कमी को दूर करने का प्रयास तेज कर दिया गया है. कुल 1,393 करोड़ रुपये की लागत वाली इस नई रेल लाइन परियोजना के प्रथम चरण का काम वर्तमान में गति पकड़ चुका है. इसी कड़ी में, प्रथम चरण का निर्माण पूरा होने से पहले दूसरे चरण के लिए आवश्यक जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने की प्रशासनिक तैयारी शुरू कर दी गई है, ताकि तकनीकी विसंगतियों के कारण परियोजना के काम में कोई रुकावट न आए. झारखंड सरकार ने रेलवे को सौंपी 150 एकड़ जमीन; दो चरणों में बंटा है पूरा प्रोजेक्ट इस रेल परियोजना के प्रशासनिक और भौगोलिक विस्तार की मुख्य कड़ियां इस प्रकार हैं. कुछ महीने पहले इस परियोजना की कमान संभालते हुए झारखंड सरकार ने रेलवे को 150 एकड़ भूमि आधिकारिक रूप से उपलब्ध करा दी थी. गोड्डा के जिला भू-अर्जन पदाधिकारी ने इस संबंध में पूर्व रेलवे के डिप्टी चीफ कंस्ट्रक्शन कुमार हेमंत को भूमि आवंटन का आधिकारिक पत्र सौंपा था, जिसके बाद से रेलवे की तकनीकी टीम धरातल पर मुस्तैद है. यह पूरी 62 किलोमीटर की रेल योजना दो अलग-अलग चरणों में पूरी की जा रही है. पहले फेज के तहत गोड्डा से महागामा तक रेल ट्रैक बिछाने का काम तेजी से चल रहा है, जबकि दूसरे फेज में महागामा से पीरपैंती तक की दूरी को रेल कड़ियों से जोड़ा जाएगा. एनटीपीसी फरक्का को कोयला आपूर्ति में मिलेगी राहत; व्यापार को मिलेगा संबल “इस नए रेलखंड के पूरी तरह संधारित हो जाने के बाद एनटीपीसी (NTPC) फरक्का को ललमटिया माइंस से कोयले की आपूर्ति के लिए एक नया और छोटा मार्ग मिल जाएगा, जिससे वर्तमान में कहलगांव होकर जाने वाले रूट का अतिरिक्त दबाव कम होगा. इसके अतिरिक्त, मिर्जाचौकी, पाकुड़ और साहेबगंज प्रक्षेत्र से स्टोन चिप्स के परिवहन के लिए यह ट्रैक सबसे मुफीद साबित होगा. साथ ही, सरकार द्वारा पीरपैंती में प्रस्तावित नए पावर प्लांट के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में भी यह रेल परियोजना गेम-चेंजर साबित होगी.” पहले फेज के काम के साथ ही दूसरे फेज के भूमि अधिग्रहण की रूपरेखा तैयार पूर्व रेलवे के कंस्ट्रक्शन विभाग के कनिष्ठ और वरिष्ठ अधिकारी इस परियोजना की लाइव मॉनिटरिंग कर रहे हैं ताकि समय सीमा के भीतर कली-मजदूरों और निर्माण एजेंसियों को फील्ड में उतारा जा सके. रेल मार्ग के चालू होने से न केवल आम यात्रियों को सुगम सफर की सुविधा मिलेगी, बल्कि सीमावर्ती जिलों के व्यापारिक प्रक्षेत्र को भी एक नया आर्थिक संबल प्राप्त होगा. इस संबंध में आधिकारिक बयान साझा करते हुए पूर्व रेलवे के डिप्टी चीफ कंस्ट्रक्शन कुमार हेमंत ने बताया कि गोड्डा से पीरपैंती नई रेल लाइन योजना के लिए झारखंड सरकार से 150 एकड़ भूमि प्राप्त हो चुकी है. पहले फेज के तहत गोड्डा से महागामा तक निर्माण कार्य पूरी मुस्तैदी से जारी है. पहले चरण की कड़ियों को आपस में जोड़ने के साथ ही, दूसरे फेज के लिए भूमि अधिग्रहण का काम भी जल्द ही धरातल पर शुरू कर दिया जाएगा ताकि पूरी परियोजना को बिना किसी प्रशासनिक विसंगति के समय पर पूरा किया जा सके.

बिहार में रेल नेटवर्क विस्तार की तैयारी, ₹1852 करोड़ की नई लाइन को मिली मंजूरी

किशनगंज. सीमांचल क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्र को पूर्वोत्तर भारत से जोड़ने वाली जालालगढ़- किशनगंज नई रेल लाइन बिछने की उम्मीद फिर से जगी है। साल 2008-09 में स्वीकृत हुई यह परियोजना तकनीकी और बजटीय कारणों से करीब 17 वर्षों से ठप पड़ी थी, लेकिन अब इसे फिर से गति दिया जा रहा है। रेलवे बोर्ड और उत्तर पूर्वी सीमांत रेलवे संशोधित लागत का अंतिम मूल्यांकन कर रही हैं। तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने वर्ष 2008-09 में इस परियोजना का शिलान्यास किया था। उस समय इसकी अनुमानित लागत 360 करोड़ रुपए थी। करीब 17 सालों में भूमि अधिग्रहण और निर्माण लागत में वृद्धि के कारण अब परियोजना की लागत बढ़कर लगभग 1852 करोड़ रुपये के करीब हो गई है। प्रस्तावित रेल लाइन की कुल लंबाई 51.632 किलोमीटर होगी। यह रेल मार्ग पूर्णिया के जलालगढ़ जंक्शन से शुरू होकर अमौर, बैसा, रौटा, खाताहाट, महीनगांव, दौला जैसे क्षेत्रों से गुजरेगा और किशनगंज मुख्यालय तक पहुंचेगा। इस पूरे खंड में यात्रियों की सुविधा के लिए आठ नए रेलवे स्टेशन बनाने की योजना है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना के पूरा होने के बाद न्यू जलपाईगुड़ी से कटिहार जाने वाली ट्रेनों के लिए एक वैकल्पिक और अपेक्षाकृत छोटा मार्ग उपलब्ध होगा। इससे वर्तमान में अत्यधिक व्यस्त मुकुरिया-किशनगंज रेलखंड पर ट्रेनों का दबाव कम होगा। परियोजना से यात्री और मालगाड़ियों के परिचालन में सुधार आएगा। पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी चिकन नेक क्षेत्र के समानांतर यह एक वैकल्पिक रेल संपर्क उपलब्ध कराएगी। इस रेलवे लाइन का निर्माण हो जाने से आपातकालीन परिस्थितियों में सेना और सुरक्षा बलों की आवाजाही के लिए यह मार्ग रणनीतिक कवच साबित हो सकता है। अमौर और बैसा जैसे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को इस रेल लाइन से सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना है। महानंदा और कनकई नदी की बाढ़ से प्रभावित इन इलाकों के किसान अपनी मक्का, जूट और धान जैसी फसलों को अब आसानी से सिलीगुड़ी, कोलकाता और दिल्ली की बड़ी मंडियों तक पहुंचा सकेंगे। वहीं, सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में रेल संपर्क बेहतर होने से स्थानीय व्यापार को नई गति मिलेगी, परिवहन लागत घटेगी और सीमांचल क्षेत्र के आर्थिक विकास को नया आधार मिलेगा। इस नए रेल खंड के निर्माण से जहां सुरक्षा की दृष्टि से वैकल्पिक रेलवे रूट बनेगा, वहीं सुदूर ग्रामीण क्षेत्र को रेलवे कनेक्टिविटी सुविधा मिल जाएगी। दरअसल, तत्कालीन किशनगंज सांसद मरहूम तस्लीमुद्दीन के पहल से तत्कालीन यूपीए सरकार के समय इस परियोजना को हरी झंडी मिली थी, लेकिन तत्कालीन रेल मंत्री के शिलान्यास के कुछ दिनों के बाद इस परियोजना में ग्रहण लग गया था और 17 साल तक इस परियोजना पर काम शुरू नहीं हो पाया। वहीं, अब केंद्र सरकार ने परियोजना को रिवाइज कर राशि देने की घोषणा की है। बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने बताया कि किशनगंज-जलालगढ़ के बीच नई रेल लाइन बिछाने को लेकर कार्य चल रहा है। रेल मंत्रालय जल्द ही इस दिशा में काम शुरू होगा।

पचपदरा रिफाइनरी को रेलवे कनेक्टिविटी, 33 लाख का सर्वे स्वीकृत

बालोतरा राजस्थान में बालोतरा से पचपदरा को रेल मार्ग से जोड़ने की दिशा में रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है. रेलवे ने बालोतरा से पचपदरा को जोड़ने वाली नई लाइन के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे को मंजूरी दे दी है. राजस्थान के महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पचपदरा रिफाइनरी के लिए बालोतरा से पचदरा तक 11 किमी नई लाइन के सर्वे के लिए 33 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की गई है. यह रेल लाइन पचपदरा को बालोतरा, बाड़मेर और आसपास के क्षेत्रों को रेलवे नेटवर्क से जोड़ेगी. साथ ही क्षेत्र का जोधपुर और अहमदाबाद व दिल्ली-जयपुर की ओर भी सम्पर्क स्थापित होगा. सर्वे काम पूरा होने के बाद बनेगी DPR बालोतरा से पचपदरा तक प्रस्तावित रेल रूट इन क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने में निर्णायक भूमिका निभाएगा. इस नई रेल लाइन के निर्माण से पचपदरा स्थित रिफ़ाइनरी तक रेल मार्ग के माध्यम से पहुंच और सुगम होगी. साथ ही रोज़गार, व्यापार, कृषि और स्थानीय उद्योगों के लिए नए परिवहन का विकल्प उपलब्ध होगा. 11 किलोमीटर नई लाइन के लिए फ़ाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) पूरा होने के बाद परियोजना की वित्तीय और तकनीकी व्यवहार्यता के आधार पर DPR तैयार कर कार्य स्वीकृत रेलवे बोर्ड स्वीकृति के लिए भेजी जाएगी. 35 साल पहले इस मार्ग पर चलती थी ट्रेन इस मार्ग पर लगभग 35 साल पहले ट्रेन चला करती थी, जिसे 1992 में बंद कर दिया गया था और बाद में रेलवे ट्रैक भी हटा लिया गया था. इस पुरानी ट्रेन की कहानी पचपदरा के नमक उद्योग से जुड़ी है. सैकड़ों सालों से नमक उत्पादन का केंद्र रहे पचपदरा में, स्थानीय नगर सेठ गुलाब चंद के आग्रह पर तत्कालीन अंग्रेज़ सरकार ने 1939 में बालोतरा से पचपदरा साल्ट तक एक रेलवे ट्रैक बिछाया था. इस ट्रेन में नमक लदान के लिए वैगन के साथ दो यात्री कोच भी जोड़े गए थे. पचपदरा साल्ट की नमक खदानों से हज़ारों टन नमक रोज़ाना इसी ट्रेन से ढोया जाता था.1990 की बाढ़ में रेलवे ट्रैक क्षतिग्रस्त हो गया, जिसके बाद ट्रेन बंद कर दी गई थी.

मध्यप्रदेश को बड़ी रेल सौगात, नई लाइन से गुजरात की दूरी होगी कम

झाबुआ मध्य प्रदेश में जून महीने तक नई रेल लाइन का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। सांसद अनिता चौहान की अध्यक्षता में हुई झाबुआ जिला विकास समन्वय एवं मूल्यांकन समिति (दिशा) की बैठक में जिले के विकास को नई रफ्तार देने पर चर्चा की गई। बैठक का मुख्य आकर्षण इंदौर-दाहोद रेल परियोजना रही। इसके तहत रेलवे अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि गुजरात के कतवारा से झाबुआ के मध्य रेल लाइन (Katwara-Jhabua railway line) निर्माण का कार्य जून 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इंदौर-दाहोद परियोजना का हिस्सा है ये रेल लाइन बता दें कि, गुजरात के कतवारा से मध्य प्रदेश के झाबुआ तक बन रही रेल लाइन महत्वाकांक्षी इंदौर-दाहोद रेल लाइन प्रोजेक्ट ( Indore-Dahod railway line project) का हिस्सा। इस परियोजना के तहत 204.76 किलोमीटर तक ब्रॉडगेज रेलवे लाइन का निर्माण किया जाना है। इस परियोजना की कुल लागत 1873 करोड़ रुपए है जिसके अंतर्गत प्रदेश के धार और झाबुआ जैसे अन्य आदिवासी जिलों में पहली बार रेल नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा। इससे गुजरात तक की दूरी कम होगी। बैठक में शामिल वरिष्ठ अधिकारी और जन प्रतिनिधि कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम घरसट की मौजूदगी में हुई बैठक में विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि विकास कार्यों में गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखा जाए। ताकि अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंच सके। बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष सोनल जसवंत भाबोर, भाजपा जिलाध्यक्ष भानू भूरिया, थांदला विधायक वीरसिंह भूरिया, एएसपी प्रतिपाल सिंह महोबिया सहित सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और जन प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इन मुद्दों पर विशेष रूप से फोकस किया जल संरक्षणः जिले में गहराते जल संकट के स्थायी समाधान पर चर्चा करते हुए ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग की समीक्षा की गई। जिला पंचायत सीईओ जितेन्द्रसिंह चौहान ने बताया स्वीकृत 1233 खेत तालाबौ में से 260 पूर्ण हो चुके हैं, शेष 30 मई तक पूरे होंगे। डगवेल रिचार्ज के 4071 कार्यों में से 2244 पूर्ण हो चुके है, शेष 15 मई तक पूरे करने का लक्ष्य है। जिले के 147 पुराने अमृत सरोवरी मैं से 112 लबालब है। अमृत 2.0 के तहत 14 नए तालाबों का निर्माण जारी वाले 1,748 हैंडपंपों के पास अनिवार्य रूप से रिचार्ज पिट बनाए जाएं ताकि भूजल स्तर सुधारा जा सके। कृषि एवं तकनीक: कृषि विभाग की समीक्षा के दौरान उप संचालक एनएस रावत ने आगामी खरीफ सीजन के लिए बीज और उर्वरक की पर्याप्त उपलब्धता का भरोसा दिलाया। किसानों को ई-विकास प्रणाली से जोड़ने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर जागरूकता शिविर लगाए जाएंगे। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष सोनल जसवंत भाबीर ने किसानों की सहायता के लिए एक समर्पित हेल्पलाइन नंबर जारी करने का सुझाव दिया। सांसद ने जल संकट को देखते हुए कम पानी वाली और सूखा प्रतिरोधी फसलों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। बुनियादी ढांचा और बिजली व्यवस्थाः प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत मजरा-टोला योजना में 181 सड़कों की डीपीआर तैयार की जा रही है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत क्षतिग्रस्त ग्वाली ब्रिज का मुद्दा विधायक वीरसिह भूरिया ने उठाया, जिस पर अधिकारियों ने बताया कि पुराने ठेकेदार का अनुबंध निरस्त कर नई निविदा प्रक्रिया शुरू सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' के तहत जिले में 435 घरों में सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं। सांसद ने इस योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार में जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा। शिक्षा और स्वास्थ्यः टीबी मुक्त झाबुआ का संकल्प : सांसद ने स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा करते हुए एक भावुक अपील की। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से निक्षय मित्र बनने और टीबी मरीजों को गोद लेकर उन्हें फूड बास्केट उपलब्ध कराने का आग्रह किया। जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया जिले के विद्यार्थियों को 5,933 साइकिलें वितरित की जा चुकी हैं और 'अपार आईडी' निर्माण का कार्य प्रगति पर है। महिला विकासः प्रधानमंत्री मातृ वंदना और लाड़ली लक्ष्मी योजना के माध्यम से 350 से अधिक नए हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया है। पारदर्शी भुगतान और उपार्जनः जिला आपूर्ति अधिकारी ने जानकारी दी कि अब तक 19,368 मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की जा चुकी है, जिसका 31.52 करोड़ रुपए का भुगतान सीधे किसानों के खातों में पीएम-किसान हितग्राहियों की ई-केवाईसी शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।