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Punjab News: होशियारपुर में ड्रग तस्करी से जुड़ी अवैध संपत्ति ध्वस्त, आरोपी दंपती पर प्रशासन की कार्रवाई

होशियारपुर. होशियारपुर के सरहाला कलां गांव में पंचायत जमीन पर बने अवैध ढांचे को नशा विरोधी अभियान के तहत गिरा दिया गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह ढांचा पंचायत की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करके बनाया गया था। जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों आरोपी नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस अधिनियम के तहत दर्ज कई मामलों में नामजद हैं। पुलिस के मुताबिक, दंपती पर कुल 14 मामले दर्ज हैं, जिनमें से कुछ मामलों में उन्हें दोषी भी ठहराया जा चुका है, जबकि कई मामले अभी अदालत में विचाराधीन हैं। फिलहाल दोनों आरोपी जेल में बंद हैं। सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल तैनात पुलिस ने दावा किया है कि यह संपत्ति नशा तस्करी से अर्जित धन के जरिए बनाई गई थी। इसी आधार पर प्रशासन ने अवैध निर्माण को हटाने की कार्रवाई की। कार्रवाई से पहले गांव में पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था, ताकि किसी भी प्रकार के विरोध या कानून व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रित किया जा सके। जिला पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह कार्रवाई राज्य सरकार के “नशे के खिलाफ युद्ध” अभियान का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि नशा तस्करी से जुड़ी अवैध संपत्तियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और जहां भी ऐसे मामलों की पुष्टि होगी, वहां सख्त कार्रवाई की जाएगी। मई महीने में 95 मामले दर्ज जिले में नेशनल नारकोटिक्स कोऑर्डिनेशन पोर्टल (एनकॉर्ड) के तहत नशों के खिलाफ चल रही कार्रवाई की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में बताया गया कि मई माह में 95 मामले दर्ज कर 123 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने 878 ग्राम हेरोइन, 26 किलो से अधिक चूरा-पोस्त, एक हजार से अधिक नशीले कैप्सूल और 15,100 रुपये की ड्रग मनी बरामद की। अधिकारियों ने नशा मुक्ति केंद्रों में भर्ती, जागरूकता अभियान और संपत्ति जब्ती की कार्रवाई पर भी चर्चा की। बैठक में विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाकर अभियान को और तेज करने के निर्देश दिए गए।

Punjab News: तरनतारन में नकली नशा मुक्ति केंद्र पर छापा, फर्जी डॉक्टर बनकर मरीज किए गए भर्ती

तरनतारन. तरनतारन में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त कार्रवाई में एक कथित अवैध नशा मुक्ति केंद्र का भंडाफोड़ किया गया है। आरोप है कि केंद्र संचालक खुद को डॉक्टर बताकर लोगों के साथ धोखाधड़ी कर रहे थे और नशा छुड़ाने के नाम पर उन्हें गैरकानूनी तरीके से केंद्र में बंधक बनाकर रखा गया था। छापेमारी के दौरान पुलिस ने सात लोगों को वहां से मुक्त कराया। मामले में दो लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है, जिनमें से एक आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि दूसरे की तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। थाना सिटी तरनतारन के प्रभारी निरीक्षक परमजीत सिंह विरदी ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि शहर में एक नशा मुक्ति केंद्र बिना वैधानिक अनुमति के संचालित किया जा रहा है। सूचना के आधार पर स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ संयुक्त रूप से छापा मारा गया। जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। डॉक्टर बता कर रहे थे उपचार पुलिस के अनुसार, अमृतसर निवासी सरबजीत सिंह और राणा प्रताप सिंह इस केंद्र का संचालन कर रहे थे। दोनों पर आरोप है कि वे स्वयं को डॉक्टर बताकर लोगों को उपचार का भरोसा देते थे। इसके बाद नशे की लत से जूझ रहे लोगों को केंद्र में रखकर उनका गैरकानूनी तरीके से इलाज किया जाता था। पुलिस का दावा है कि केंद्र में मौजूद लोगों को उनकी इच्छा के विरुद्ध बंधक बनाकर रखा गया था। छापेमारी के दौरान केंद्र से सात लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इन सभी को तत्काल गांव ठरू स्थित सरकारी नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां अब उनका चिकित्सकीय उपचार और देखभाल की जा रही है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच की शुरू पुलिस ने दोनों आरोपितों के खिलाफ धोखाधड़ी, गैरकानूनी तरीके से लोगों को बंधक बनाकर रखने और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। कार्रवाई के दौरान राणा प्रताप सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि दूसरे आरोपित सरबजीत सिंह की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। थाना प्रभारी परमजीत सिंह विरदी ने कहा कि मामले की गहन जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि केंद्र कितने समय से संचालित किया जा रहा था, यहां अब तक कितने लोगों का इलाज किया गया और क्या इसके लिए किसी प्रकार की वैधानिक अनुमति ली गई थी या नहीं।

मोदी कैबिनेट विस्तार में पंजाब को मिल सकती है बड़ी हिस्सेदारी, राघव चड्ढा, LPU चांसलर और चुघ रेस में

 चंडीगढ़  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल फेरबदल में पंजाब की लॉटरी लग सकती है। पंजाब में विधानसभा चुनाव बेहद निकट हैं। ये अगले साल की शुरुआत में प्रस्तावित हैं लेकिन इनके जल्दी भी होने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। आम आदमी पार्टी शासित पंजाब से अभी केंद्रीय मंत्रिमंडल में सिर्फ रवनीत सिंह बिट्टू हैं। वे केंद्रीय राज्य मंत्री हैं। सियासी हलकों में चर्चा है कि मिशन पंजाब में जुटी बीजेपी राज्य को अधिक प्रतिनिधित्व दे सकती है। रवनीत सिंह बिट्टू की जगह पर किसी नए चेहरे को मौका मिल सकता है। सूत्रों का दावा है कि पंजाब को दो से तीन मंत्री मिल सकते हैं।हालांकि इस दौड़ में अमृतसर के रहने वाले व हाल ही में बिट्‌टू की जगह राज्यसभा भेजे तरूण चुघ भी शामिल हैं। सरकारी सूत्रों के मुताबिक संडे या मंडे को केंद्रीय कैबिनेट में फेरबदल हो सकता है। चर्चा है कि इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरूवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिले, जिसमें उन्हें इसके बारे में सुझाव दिया गया है। हालांकि अभी मंत्रीपद वाले नए चेहरों को लेकर कोई औपचारिक पुष्टि या सूचना नहीं है। 2014 के बाद से सिर्फ तीन मंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में पंजाब की प्रतिनिधित्व कम रहा है। 2014 के बाद शिरोमणि अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बादल केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री बनी थीं। उन्होंने 2020 में कृषि कानूनों के विरोध में इस्तीफा दे दिया था। इसके अलावा केंद्र में बीजेपी के सोम प्रकाश मंत्री बने थे। वह 2019 से 2024 तक रहे। इसके बाद रवनीत सिंह बिट्टू बने थे। पंजाब की क्या है सियासी ताकत:     पंजाब विधानसभा में कुल 117 सीटें हैं। विधानसभा में बीजेपी के दो MLA हैं।     पंजाब में लोकसभा की कुल सीटें 13 हैं। बीजेपी के पास कोई सीट नहीं है।     पंजाब में राज्यसभा की कुल सीटें सात हैं। इनमें छह बीजेपी के पास हैं। AAP के 7 सांसद तोड़ने में चड्‌ढा की अहम भूमिका राघव चड्‌ढा 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे। उन्होंने पार्टी की जीत के लिए ऑन ग्राउंड भी वर्किंग की। चुनाव के बाद पार्टी ने 117 में से 92 सीटें जीती। सरकार बनी और भगवंत मान मुख्यमंत्री बन गए। जिसके बाद शुरुआती 2 साल तक राघव चड्‌ढा को पंजाब में सुपर CM की तरह माना गया। हालांकि इसके बाद उनके पार्टी से रिश्ते बिगड़ने लगे। जब आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल को शराब के केस में जेल हुई तो चड्‌ढा तब यूके में थे। इसके बाद वह वापस लौटे तो बगावत कर दी और AAP के 7 सांसद तोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। राघव चड्‌ढा को मंत्री बनाने से भाजपा को पंजाब में क्या फायदा भाजपा को पंजाब में मीडिया नैरेटिव के लिए एक बड़ा चेहरा मिल सकता है। राघव चड्‌ढा AAP की कोर टीम में रह चुके हैं। ऐसे में भाजपा से मंत्रीपद मिलने के बाद चड्‌ढा 2027 के चुनाव में एग्रेसिव ढंग से काम करेंगे। ऐसे में AAP के खिलाफ वह नैरेटिव खड़ा कर सकते हैं। इसके अलावा चड्‌ढा शहरी क्षेत्र में अपना असर दिखा सकते हैं, खास तौर पर लुधियाना और जालंधर जैसे इंडस्ट्रियल शहरों में, जहां वे कारोबारियों और केंद्र के बीच पुल का काम कर सकते हैं। AAP को इससे क्या नुकसान होगा? राघव चड्‌ढा केंद्र में मंत्री बने तो AAP को मनोवैज्ञानिक के साथ संगठनात्मक झटका लग सकता है। 2022 में AAP के लिए चड्‌ढा ने वोट मांगे। अब वही AAP की बुराई करेंगे तो वोटर के मन में सत्ताधारी पार्टी आप के प्रति सवाल खड़े होंगे। वहीं राघव चड्‌ढा भाजपा में बड़ी भूमिका में आए तो AAP में उनसे जुड़े नेता भी उनके साथ जा सकते हैं। खास तौर पर अगर AAP किसी MLA या हारे उम्मीदवार का टिकट काटे या किसी दावेदार को टिकट न दे तो ऐसी सूरत में वह चड्‌ढा के साथ जा सकते हैं। आप के दो पूर्व नेता हैं रेस में पश्चिम बंगाल की जीत के बाद पंजाब को गंभीरता से ले रही बीजेपी राज्य को केंद्रीय मंत्रिमंडल फेरबदल में अधिक तवज्जो दे सकती है। चर्चा है कि पंजाब में AAP छोड़कर आए नेताओं को इनाम मिल सकता है। इनमें सेलिब्रेटी फेस राघव चड्ढा का नाम सबसे आगे है। उनके साथ अशोक मित्तल (लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी) का भी नाम चल रहा है। चर्चा है कि दोनों में किसी एक को मंत्री बनाया जा सकता है, लेकिन अभी फैसला नहीं हुआ है। रवनीत बिट्टू को बीजेपी चुनावों में झोंकना चाहती है। उनकी जगह पर हाल ही में मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद बने तरुण चुघ को लाया जा सकता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कद्दावर नेता चुघ पंजाब चुनाव में पार्टी को मजबूती देंगे। वह पंजाब से ही आते हैं।  

परियोजना बंद तो खत्म हुई नौकरी, संविदा वैज्ञानिक को राहत नहीं; पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब स्टेट काउंसिल फार साइंस एंड टेक्नोलॉजी में कार्यरत संविदा वैज्ञानिक दिव्या कौशिक को राहत देने से इनकार करते हुए उनकी  अपील   खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि जिस परियोजना के लिए नियुक्ति की गई थी, वह 31 मार्च 2026 को समाप्त हो चुकी है और ऐसी स्थिति में संविदा सेवा को जारी रखने का कोई आधार नहीं बनता। जस्टिस जसगुरप्रीत सिंह पुरी और जस्टिस अमरजोत भट्टी की खंडपीठ ने यह फैसला उस अपील पर सुनाया, जिसमें एकल पीठ द्वारा पारित 23 मार्च और 6 अप्रैल 2026 के अंतरिम आदेशों को चुनौती दी गई थी। अदालत ने कहा कि मूल  याचिका अभी भी एकल पीठ के समक्ष लंबित है और अपील केवल अंतरिम आदेशों के खिलाफ दायर की गई है, इसलिए हस्तक्षेप का कोई औचित्य नहीं है। 2011 में जॉइन की थी सेवा याचिकाकर्ता दिव्या कौशिक की ओर से कहा गया कि उन्हें वर्ष 2011 में पेटेंट इनफार्मेशन सेंटर (पीआईसी) में वैज्ञानिक के पद पर संविदा आधार पर नियुक्त किया गया था और समय-समय पर उनका कार्यकाल बढ़ाया जाता रहा। उन्होंने  याचिका में उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उनके पद को समाप्त कर दिया गया था। एकल पीठ ने 16 जुलाई 2024 को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। हालांकि बाद में परिषद की ओर से दायर आवेदन पर एकल पीठ ने 23 मार्च 2026 को आदेश में संशोधन करते हुए कहा था कि यदि परियोजना 31 मार्च 2026 के बाद भी बढ़ाई जाती है तो यथास्थिति का आदेश जारी रहेगा, अन्यथा परिषद उस आदेश से बाध्य नहीं होगी। इस आदेश को वापस लेने की मांग भी 6 अप्रैल 2026 को खारिज कर दी गई थी। 5 वर्षों के लिए थी परियोजना सुनवाई के दौरान परिषद की ओर से अदालत को बताया गया कि 'पेटेंट इनफार्मेशन सेंटर' परियोजना पांच वर्ष की अवधि के लिए थी और यह 31 मार्च 2026 को पूरी हो चुकी है। इसलिए परियोजना के साथ सह-समाप्त (को-टर्मिनस) संविदा नियुक्ति भी स्वत  समाप्त हो गई। परिषद ने यह भी बताया कि नियुक्ति पत्र में स्पष्ट शर्त थी कि परियोजना की अवधि समाप्त होने पर अनुबंध समाप्त माना जाएगा। खंडपीठ ने कहा कि एकल पीठ द्वारा पारित आदेश न तो अवैध हैं और न ही उनमें किसी प्रकार की त्रुटि है। चूंकि परियोजना का विस्तार नहीं हुआ और वह पूर्ण हो चुकी है, इसलिए संविदा कर्मचारी की सेवा जारी रखने का कोई कानूनी आधार नहीं बचता। इन टिप्पणियों के साथ अदालत ने अपील खारिज कर दी।

High Court Verdict: प्रोजेक्ट बंद होने पर संविदा वैज्ञानिक को नहीं मिली राहत, सेवा बहाली की याचिका खारिज

चंडीगढ़ पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब स्टेट काउंसिल फार साइंस एंड टेक्नोलॉजी में कार्यरत संविदा वैज्ञानिक दिव्या कौशिक को राहत देने से इनकार करते हुए उनकी  अपील   खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि जिस परियोजना के लिए उनकी नियुक्ति की गई थी, वह 31 मार्च 2026 को समाप्त हो चुकी है और ऐसी स्थिति में संविदा सेवा को जारी रखने का कोई आधार नहीं बनता। जस्टिस जसगुरप्रीत सिंह पुरी और जस्टिस अमरजोत भट्टी की खंडपीठ ने यह फैसला उस अपील पर सुनाया, जिसमें एकल पीठ द्वारा पारित 23 मार्च और 6 अप्रैल 2026 के अंतरिम आदेशों को चुनौती दी गई थी। अदालत ने कहा कि मूल  याचिका अभी भी एकल पीठ के समक्ष लंबित है और अपील केवल अंतरिम आदेशों के खिलाफ दायर की गई है, इसलिए हस्तक्षेप का कोई औचित्य नहीं है। 2011 में जॉइन की थी सेवा याचिकाकर्ता दिव्या कौशिक की ओर से कहा गया कि उन्हें वर्ष 2011 में पेटेंट इनफार्मेशन सेंटर (पीआईसी) में वैज्ञानिक के पद पर संविदा आधार पर नियुक्त किया गया था और समय-समय पर उनका कार्यकाल बढ़ाया जाता रहा। उन्होंने  याचिका में उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उनके पद को समाप्त कर दिया गया था। एकल पीठ ने 16 जुलाई 2024 को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। हालांकि बाद में परिषद की ओर से दायर आवेदन पर एकल पीठ ने 23 मार्च 2026 को आदेश में संशोधन करते हुए कहा था कि यदि परियोजना 31 मार्च 2026 के बाद भी बढ़ाई जाती है तो यथास्थिति का आदेश जारी रहेगा, अन्यथा परिषद उस आदेश से बाध्य नहीं होगी। इस आदेश को वापस लेने की मांग भी 6 अप्रैल 2026 को खारिज कर दी गई थी। 5 वर्षों के लिए थी परियोजना सुनवाई के दौरान परिषद की ओर से अदालत को बताया गया कि 'पेटेंट इनफार्मेशन सेंटर' परियोजना पांच वर्ष की अवधि के लिए थी और यह 31 मार्च 2026 को पूरी हो चुकी है। इसलिए परियोजना के साथ सह-समाप्त (को-टर्मिनस) संविदा नियुक्ति भी स्वत  समाप्त हो गई। परिषद ने यह भी बताया कि नियुक्ति पत्र में स्पष्ट शर्त थी कि परियोजना की अवधि समाप्त होने पर अनुबंध समाप्त माना जाएगा। खंडपीठ ने कहा कि एकल पीठ द्वारा पारित आदेश न तो अवैध हैं और न ही उनमें किसी प्रकार की त्रुटि है। चूंकि परियोजना का विस्तार नहीं हुआ और वह पूर्ण हो चुकी है, इसलिए संविदा कर्मचारी की सेवा जारी रखने का कोई कानूनी आधार नहीं बचता। इन टिप्पणियों के साथ अदालत ने अपील खारिज कर दी

95% मैपिंग पूरी, अब BLO से बदसलूकी पर होगी कड़ी कार्रवाई; प्रशासन ने जारी किए सख्त निर्देश

चंडीगढ़ पंजाब में एसआईआर शुरू हो चुका है। बीएलओ को फील्ड में किसी प्रकार की कोई परेशानी पेश न आए, इसके लिए सभी इलेक्टरोल रजिस्ट्रेशन अफसरों (एसडीएम व एडीसी) को हिदायतें जारी कर दी गई हैं। सभी ईआरओ रोजाना अपने-अपने क्षेत्रों के बीएलओ के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करेंगे। इसके लिए मुख्य निर्वाचन कार्यालय की ओर से विशेष लिंक तैयार किया जा रहा है, जो सभी एआरओ को उपलब्ध करवाया जाएगा।  इसी लिंक के माध्यम से सभी बीएलओ की एक माह रोजाना वर्चुअल बैठकें होंगी और उनसे फीडबैक जुटाया जाएगा। दरअसल, प्री मैपिंग के दौरान फील्ड से बीएलओ की कई शिकायतें आई थीं, जिसमें उन्होंने अपने साथ लोगों द्वारा दुर्व्यवहार करने की बात कही थी। एसआईआर के दौरान ऐसी घटनाएं दोबारा न हो, इसके लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनिंदिता मित्रा खासी गंभीर हैं। मित्रा ने कहा, बीएलओ की सुरक्षा की जिम्मेदारी बहुत जरूरी है क्योंकि इस पूरी प्रक्रिया में बीएलओ की रीढ़ हैं। वे एसआईआर में एक बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। लिहाजा सभी ईआरओ को निर्देश दिए जा चुके हैं कि वे रोजाना वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बीएलओ के साथ जुड़ेंगे। उनकी समस्याओं भी इसी दौरान चर्चा होगी। फील्ड से यदि किसी भी बीएलओ के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं सामने आती हैं तो सभी ईआरओ बनती कार्रवाई करने के लिए सक्षम होंगे।   मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि प्रदेश में 86.02 प्रतिशत प्री-मैपिंग हो गई है। कोशिश की जा रही है कि हाउस-टू-हाउस एन्यूमरेशन फॉर्म भरवाने के दौरान भी बीएलओ संबंधित क्षेत्र के बीएलएओ के साथ मिलकर अनमैप्ड लोगों की भी मैपिंग कर लें। यह प्रतिशत और बढ़ सकता है। मानसा में सबसे अधिक, मोहाली में सबसे कम मैपिंग मानसा जिले में सबसे अधिक 95.07 प्रतिशत मैपिंग हो चुकी है, जो सबसे ज्यादा है जबकि मोहाली जिले में सबसे कम 69.05 प्रतिशत मैपिंग हुई है। सीईओ अनिंदिता मित्रा बताती हैं कि दरअसल, साल 2003 (पंजाब में एसआईआर हुआ था) के बाद मोहाली में व्यापक स्तर पर बदलाव हुआ है। कई रिहायशी इलाके नए जुड़े हैं, कई हाईराइज भवन बने हैं, बहुत से लोग बाहर से आकर यहां बसे हैं, यह भी प्री-मैपिंग कम रहने की एक बड़ी वजह है लेकिन एसआईआर के दौरान यह सब कवर अप हो जाएगा। इसके अलावा लुधियाना में 77.17 प्रतिशत, जालंधर में 82.94, कपूरथला में 83.10, पटियाला में 85.05, फरीदकोट में 85.49, रूपनगर में 85.55, पठानकोट में 86.06, गुरदासपुर में 86.94, फिरोजपुर में 87.61, फतेहगढ़ साहिब में 88.16, फाजिल्का में 88.52, अमृतसर में 88.61, बठिंडा में 88.88, होशियारपुर में 89.69, संगरूर में 89.89, शहीद भगत सिंह नगर (नवांशहर) में 90.08, मोगा में 90.47, मलेरकोटला में 91.33, बरनाला में 92.24, श्री मुक्तसर साहिब में 92.79, तरनतारन में 93.03 व मानसा में 95.07 प्रतिशत प्री-मैपिंग हो चुकी है। पहले दिन 24,453 बीएलओ ने घरों में वितरित किए फॉर्म पंजाब में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) 2026 के तहत पहले दिन 24,453 बीएलओ ने घर-घर दौरे शुरू कर दिए हैं। 24 जुलाई तक यह दौरा जारी रहेगा, जिसके तहत पंजाब भर के 2,14,61,043 मतदाताओं तक पहुंच बनाई जाएगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनिंदिता मित्रा ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे गणना फॉर्म वितरित करने और भरने में सहायता के लिए अपने घरों का दौरा करने वाले बीएलओ का सहयोग करें।  उन्होंने लोगों से अनुरोध है कि वे अपनी एक ताजा रंगीन फोटो तैयार रखें, फॉर्म भरकर, उस पर हस्ताक्षर करें और बीएलओ को सौंप दें व विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया पूरी होने तक दूसरी प्रति अपने पास सुरक्षित रखें।  मित्रा ने मतदाताओं को विश्वास दिलाते हुए कहा कि किसी भी स्थिति में घबराने की आवश्यकता नहीं है। यदि कोई घर बंद पाया जाता है तो बीएलओ फॉर्म को दरवाजे के नीचे से अंदर पहुंचा देगा और संबंधित घर के अगले दौरे की तारीख के बारे में दीवार पर स्टिकर चिपका दिया जाएगा। बीएलओ फॉर्म एकत्र करने के लिए तीन बार घर-घर जाएंगे। यदि मतदाता घर पर उपस्थित नहीं है, तो परिवार का कोई भी वयस्क सदस्य, संबंधित व्यक्ति से अपना रिश्ता बताकर उसके फॉर्म पर हस्ताक्षर करके फॉर्म वापस बीएलओ को दे सकता है।   

बेअदबी केसों में अब संवेदनशील होगी पुलिस की भाषा, PBI की 22 पवित्र शब्दों वाली नई गाइडलाइन जारी

चंडीगढ़. पंजाब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी से जुड़े बेअदबी मामलों की जांच अब केवल कानूनी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जांच की भाषा और दस्तावेजों में भी धार्मिक मर्यादा और श्रद्धा स्पष्ट रूप से दिखाई देगी। पंजाब ब्यूरो आफ इन्वेस्टिगेशन (पीबीआइ) ने बेअदबी से जुड़े मामलों की जांच के लिए 22 सम्मानजनक धार्मिक शब्दों की सूची जारी करते हुए राज्य के सभी पुलिस कमिश्नरों, रेंज अधिकारियों और जिला पुलिस प्रमुखों को विस्तृत दिशा-निर्देश भेजे हैं। पीबीआइ की ओर से जारी इस सर्कुलर का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बेअदबी जैसे अत्यंत संवेदनशील मामलों में पुलिस की ओर से इस्तेमाल की जाने वाली भाषा किसी भी रूप में धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचाए। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि केस डायरी, एफआइआर, चार्जशीट और जांच से जुड़े सभी आधिकारिक दस्तावेजों में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी तथा उनसे संबंधित वस्तुओं और प्रक्रियाओं का उल्लेख केवल निर्धारित सम्मानजनक शब्दों से ही किया जाए। पंजाबी में उच्चारित शब्द ही लिखे जाएं पीबीआइ निदेशक एलके यादव की ओर से जारी सर्कुलर में कहा है कि जांच में “क्लीनिकल और आब्जेक्टिव लैंग्वेज” का प्रयोग किया जाए, ताकि तथ्यों को निष्पक्ष तरीके से दर्ज किया जा सके, लेकिन साथ ही धार्मिक गरिमा भी अक्षुण्ण बनी रहे। सर्कुलर में यह भी कहा गया है कि जांच के दौरान ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाना चाहिए जिससे पवित्र सामग्री का दोबारा अनादर होने का जोखिम पैदा हो। पीबीआइ की ओर से जारी सूची में जागत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी, पावन स्वरूप, पावन अंग, रुमाला साहिब, चौर साहिब, पालकी साहिब, पीढ़ा साहिब, चंदोआ साहिब, सैंची साहिब, गुटका साहिब, नितनेम, प्रकाश स्थान, सुखासन, थड़ा साहिब, ग्रंथी सिंह, सेवक/सेवादार, बिरध अवस्था, चाले पाना/पहुंच कर्मा और आनंद कारज जैसे शब्द शामिल हैं। इन शब्दों को अंग्रेजी दस्तावेजों में भी ठीक उसी तरह लिखा जाएगा जैसे पंजाबी में उच्चारित किए जाते हैं, ताकि मूल धार्मिक संदर्भ और सम्मान बना रहे। मर्यादा का पूर्ण पालन करना जरूरी उदाहरण के तौर पर रुमाला साहिब को श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी पर आदरपूर्वक ओढ़ाए जाने वाले सजावटी वस्त्र के रूप में परिभाषित किया गया है। चौर साहिब को श्रद्धा स्वरूप किया जाने वाला चंवर बताया गया है, जबकि पालकी साहिब वह पवित्र स्थान है जहां श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पावन स्वरूप स्थापित किया जाता है। इसी तरह बिरध अवस्था का उपयोग उस स्थिति के लिए होगा जब पावन स्वरूप समय और उपयोग के कारण पुराना हो जाए। सर्कुलर का एक अहम हिस्सा यह भी है कि बेअदबी मामलों की जांच के दौरान पुलिस को धार्मिक संस्थाओं के साथ समन्वय बनाकर काम करना होगा। यदि घटनास्थल से श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी या उसके किसी अंग की बरामदगी होती है तो पुलिस संबंधित धार्मिक अधिकारियों, विशेषकर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर कार्रवाई करेगी। सर्कुलर में साफ कहा गया है कि एसजीपीसी द्वारा निर्धारित धार्मिक प्रोटोकाल और सिख रहत मर्यादा का पूरी तरह पालन किया जाना चाहिए। घटनास्थल पर मौजूद पवित्र सामग्री को अत्यंत सम्मान और गरिमा के साथ संभालना अनिवार्य होगा। पहले भी SOP हो चुकी है जारी गौरतलब है कि यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पंजाब सरकार पहले ही बेअदबी मामलों को लेकर सख्त कानूनी ढांचा तैयार कर चुकी है। अप्रैल में पीबीआइ ने बेअदबी मामलों की जांच के लिए एक विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) जारी किया था। इसमें हाई रेजोल्यूशन फोटोग्राफी, डिजिटल साक्ष्यों के संरक्षण, इलेक्ट्रॉनिक फुटप्रिंट की जांच और साजिश की कड़ियों को जोड़ने जैसे आधुनिक जांच मानक शामिल किए गए। साथ ही जांच एजेंसियों को 60 से 90 दिनों के भीतर चालान अदालत में पेश करने की समयसीमा भी दी गई। 20 अप्रैल को लागू किया गया था एक्ट इसके अलावा पंजाब सरकार ने 20 अप्रैल को जागत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट-2025 को लागू किया था। इस कानून के तहत श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी से जुड़े अपराधों के लिए न्यूनतम सात साल से लेकर 20 साल तक की सजा का प्रावधान है। साथ ही दोषी पर दो लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि जांच में यह साबित होता है कि बेअदबी सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी या इसके पीछे शांति भंग करने अथवा सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की मंशा थी, तो सजा 10 साल से लेकर उम्रकैद तक हो सकती है। ऐसे मामलों में पांच लाख रुपये से 25 लाख रुपये तक जुर्माने का भी प्रावधान रखा गया है। हालांकि इस कानून की कुछ धाराओं को लेकर धार्मिक संस्थाओं ने आपत्ति भी जताई है। एसजीपीसी और अकाल तख्त ने विशेष रूप से “कस्टोडियन” शब्द के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इस शब्द की व्यापक व्याख्या से ग्रंथियों, प्रबंधकों, गुरुद्वारा कमेटियों और सेवादारों पर अनजाने में भी आपराधिक जिम्मेदारी आ सकती है, जबकि कई बार मर्यादा का उल्लंघन जानबूझकर नहीं होता। रिकॉर्ड मेंटेनेंस और पावन स्वरूपों की ट्रैकिंग संबंधी कुछ प्रावधानों पर भी सिख संस्थाओं ने चिंता जताई है।

Punjab News: सिख विधायकों और मंत्रियों की श्री अकाल तख्त पर पेशी पर सस्पेंस, 29 जून से पहले कमेटी का अहम निर्णय

चंडीगढ़  मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा है कि 29 जून को श्री अकाल तख्त साहिब में पेश होने को लेकर अंतिम फैसला विधानसभा की कमेटी करेगी। कमेटी जो निर्देश देगी उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब के प्रति उनका सिर हमेशा झुका है और भविष्य में भी झुका रहेगा। श्री अकाल तख्त साहिब ने ‘दि जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट, 2026’ के संबंध में पंजाब के सभी सिख विधायकों और कैबिनेट मंत्रियों को 29 जून सुबह 11 बजे सचिवालय में तलब किया है। वहीं गैर सिख विधायकों से लिखित स्पष्टीकरण और गैर सिख मंत्रियों से 29 जून से पहले अपनी राय लिखित रूप में देने को कहा गया है। पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां को भी अलग से बुलावा भेजा गया है। सूत्रों के अनुसार बुलावे के बाद श्री अकाल तख्त सचिवालय की ओर से विधायकों और मंत्रियों से फोन पर भी संपर्क किया गया है ताकि उन्हें भेजे गए आधिकारिक पत्रों की जानकारी दी जा सके। मुख्यमंत्री मान ने कहा कि जब भी उन्हें पहले श्री अकाल तख्त साहिब बुलाया गया, वह एक विनम्र सिख के रूप में वहां पहुंचे। भविष्य में भी बुलावा आने पर बिना किसी हिचकिचाहट के उपस्थित होंगे। उन्होंने कहा कि वह श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता को कभी चुनौती नहीं दे सकते। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस बार विधानसभा से जुड़े मामले में संस्थागत प्रक्रिया का पालन किया जाएगा और कमेटी के निर्णय के अनुसार ही आगे कदम उठाया जाएगा।  सियासी लाभ के लिए जारी कराए जा रहे आदेश मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक ताकतें धार्मिक संस्थाओं का इस्तेमाल अपने सियासी हितों के लिए कर रही हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें धार्मिक रूप से बदनाम करने और राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से उनके खिलाफ आदेश जारी करवाए जा रहे हैं। मान ने कहा कि राजनीतिक आकाओं के इशारे पर धार्मिक पदों पर बैठे लोगों से घोषणाएं करवाई जा रही हैं और अब उन्हें निशाना बनाने के लिए रोज नए आदेश जारी किए जा रहे हैं। 

पंजाब में मानसून की एंट्री, फिरोजपुर में झमाझम बारिश; 27-28 जून को कई जिलों में बारिश का अलर्ट जारी

फिरोजपुर  शुक्रवार सुबह से शुरू हुई झमाझम बारिश ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया। पिछले कई दिनों से पड़ रही भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों को बारिश ने बड़ी राहत दी है। सुबह से लगातार हो रही वर्षा के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई और वातावरण में ठंडक घुल गई। बारिश शुरू होते ही सड़कों और बाजारों का नजारा भी बदल गया। लोगों ने गर्मी से राहत मिलने पर खुशी जताई। ठंडी हवाओं के चलने से मौसम सुहावना हो गया, जिससे लोगों ने राहत की सांस ली। मौसम में आए इस बदलाव से जहां आम जनजीवन को राहत मिली है, वहीं किसानों ने भी बारिश को फसलों के लिए लाभदायक बताया। हालांकि लगातार बारिश जारी रहने पर कुछ निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनने की आशंका भी बनी हुई है। फिलहाल लोगों के लिए यह बारिश भीषण गर्मी से राहत लेकर आई है। भीषण गर्मी और उमस से परेशान पंजाब व चंडीगढ़ के लोगों के लिए राहत भरी खबर है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में बारिश की संभावना जताई है। विभाग के अनुसार, 27 और 28 जून को कई जिलों में बारिश होने के आसार हैं। इसे देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं दूसरी तरफ पंजाब में बिजली की मांग ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। भीषण गर्मी के बीच राज्य में बिजली की मांग 16 हजार मेगावाट के पार पहुंच गई है। बीते दिन अधिकतम मांग 16,335 मेगावाट दर्ज की गई, जो इस वर्ष का सबसे उच्च स्तर है। पिछले वर्ष 25 जून को यह मांग 14,697 मेगावाट थी, जबकि वर्ष 2024 में अधिकतम मांग 15,345 मेगावाट दर्ज की गई थी। राज्य के 15 में से 12 थर्मल पावर यूनिट फिलहाल बिजली उत्पादन कर रहे हैं। मौसम अपडेट 1. 26 जून राज्य के अधिकांश इलाकों में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। 2. 27 और 28 जून इन दो दिनों में मानसून सबसे ज्यादा सक्रिय रहेगा। मौसम विभाग ने पंजाब के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। कई जिलों में जलभराव और ट्रैफिक प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई है। 3. 29 जून से 1 जुलाई बारिश का दौर जारी रहेगा, हालांकि इसकी तीव्रता कुछ कम हो सकती है। कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश देखने को मिलेगी। तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आएगी मौसम विभाग के मुताबिक, फिलहाल पंजाब के कई जिलों में अधिकतम तापमान 36 से 41 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। अगले तीन दिनों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने से तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज होने की संभावना है। इससे लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी और मौसम सुहावना होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बारिश धान की रोपाई कर रहे किसानों के लिए काफी लाभदायक होगी।  

पंजाब सरकार का बड़ा फैसला, 1 जुलाई से सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक खुलेंगे सभी सरकारी कार्यालय

चंडीगढ़. पंजाब सरकार के कार्यालयों का समय एक बार फिर सामान्य कर दिया गया है। भीषण गर्मी के चलते राज्य सरकार ने पहले दफ्तरों का समय बदलकर सुबह 7:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक कर दिया था, लेकिन अब मौसम में बदलाव और तापमान में राहत के बाद सरकार ने पुराने समय को बहाल करने का फैसला लिया है। नए आदेश 1 जुलाई से लागू होंगे। जिस अनुसार सरकारी कार्यालयों में कामकाज सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक होगा। गौरतलब है कि पंजाब सरकार ने 24 मई 2026 को गर्मी और हीटवेव के बढ़ते असर को देखते हुए दफ्तरों के समय में बदलाव किया था। इसके तहत 25 मई 2026 से पंजाब सिविल सचिवालय सहित सभी सरकारी कार्यालयों में कामकाज सुबह 7:30 बजे शुरू होकर दोपहर 1:30 बजे तक सीमित कर दिया गया था। गर्मी से दी थी राहत सरकार का तर्क था कि दोपहर के समय पड़ने वाली तेज गर्मी से कर्मचारियों और आम लोगों को राहत दी जा सके। उस दौरान पंजाब में लगातार तापमान 44 से 46 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच रहा था। मौसम विभाग ने भी कई जिलों में हीटवेव का अलर्ट जारी किया था। इसी के मद्देनजर सरकार ने यह अस्थायी व्यवस्था लागू की थी, ताकि कर्मचारियों को अत्यधिक गर्मी से बचाया जा सके और कामकाज भी प्रभावित न हो। अस्थायी व्यवस्था की समाप्त अब मुख्य सचिव कार्यालय की ओर से जारी ताजा आदेश में कहा गया है कि अस्थायी व्यवस्था समाप्त की जा रही है और सचिवालय का कामकाज फिर सामान्य समय के अनुसार चलेगा। इससे कर्मचारियों, अधिकारियों और सचिवालय में काम से आने वाले लोगों को पहले की तरह पूरे कार्यालय समय का लाभ मिलेगा। सरकारी हलकों में इसे सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था की वापसी माना जा रहा है। गर्मी के कारण लागू किया गया बदलाव करीब एक महीने तक प्रभावी रहा और अब जुलाई की शुरुआत के साथ सचिवालय फिर अपनी नियमित कार्यप्रणाली में लौट आएगा।