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CM भगवंत मान की पत्नी के रिश्तेदार बताए जा रहे अमरदीप ग्रेवाल LOC के तहत रोके गए

चंडीगढ़  अमरदीप सिंह ग्रेवाल को दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया है. जानकारी के मुताबिक, उनके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी था. प्रवर्तन निदेशालय (ED) उनसे जुड़े मामले की जांच कर रहा है. हालांकि, फिलहाल उनकी गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।  शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि अमरदीप ग्रेवाल को दिल्ली एयरपोर्ट पर ED ने पकड़ा है. मजीठिया के मुताबिक, ग्रेवाल पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी के करीबी रिश्तेदार हैं।  बिक्रम सिंह मजीठिया ने आरोप लगाया कि ग्रेवाल का नाम 5 करोड़ रुपये के कथित सौदे से जुड़ा है. मजीठिया ने यह भी दावा किया कि ED की पूछताछ में इस मामले से जुड़े अन्य लोगों और कथित लेनदेन को लेकर जानकारी सामने आ सकती है।  मजीठिया ने अपनी पोस्ट में अमरदीप ग्रेवाल को 'जुगनी का जीजा' बताते हुए कई सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि ग्रेवाल को लेकर पहले से LOC जारी था और अब ED की पूछताछ से मामले की कड़ियां सामने आ सकती हैं।  फिलहाल, इस मामले में बिक्रम सिंह मजीठिया की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. अमरदीप ग्रेवाल की ओर से भी इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. ED की जांच और पूछताछ के बाद ही मामले से जुड़ी अन्य जानकारियां स्पष्ट हो सकेंगी। 

CM भगवंत मान का भरोसा, पंजाब में बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करेगी सरकार

चंडीगढ़  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब में बिजली की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी, क्योंकि केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ हुई बैठक के बाद केंद्र ने राज्य को बिजली और कोयले की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने का भरोसा दिया है. उन्होंने कहा कि पंजाब इस वर्ष केंद्रीय पूल में 180 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) चावल का योगदान देगा. उन्होंने कहा कि देश के अन्न भंडार में राज्य के इस योगदान को लगातार जारी रखने के लिए विश्वसनीय बिजली आपूर्ति अनिवार्य है. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शाहपुर कंडी बांध के संबंध में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा बार-बार जारी किए जा रहे नोटिसों पर भी चिंता जताई और बताया कि कोयले की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार कोल इंडिया और झारखंड सरकार के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है।  इस बैठक के कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं को साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “आज मैंने केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसके दौरान पंजाब को बिजली और कोयले की निर्बाध आपूर्ति से संबंधित मुद्दों पर सार्थक चर्चा हुई. हमने केंद्र को अवगत कराया कि पंजाब देश के अन्न भंडार में 180 लाख मीट्रिक टन चावल का योगदान देता है और इस योगदान को बनाए रखने के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति बेहद जरूरी है. मुझे खुशी है कि केंद्रीय मंत्री ने हमारी लगभग सभी मांगें स्वीकार कर ली हैं और बिजली तथा कोयले की निर्बाध आपूर्ति का भरोसा दिया है. हमने भी अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है कि पंजाब देश के अन्न भंडार में अपना बहुमूल्य योगदान जारी रखेगा. इंकलाब जिंदाबाद।  बैठक के बाद मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “बैठक के दौरान पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) से संबंधित कई मुद्दों, विशेष रूप से कोयले की आपूर्ति और बिजली के संबंध में विस्तारपूर्वक विचार-विमर्श किया गया. हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पंजाब को कोयले या बिजली की किसी प्रकार की कमी का सामना न करना पड़े और बिजली उत्पादन बिना किसी रुकावट के जारी रहे. पंजाब केंद्रीय पूल में 180 लाख मीट्रिक टन चावल की आपूर्ति करता है और इतनी बड़ी मात्रा में अनाज उत्पादन के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति अत्यंत जरूरी है।  मुख्यमंत्री ने कहा, “हम पछवाड़ा कोयला खदानों से कोयले की आपूर्ति के संबंध में कोल इंडिया और झारखंड सरकार के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए हैं. हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि कोयले की आपूर्ति में कोई बाधा न आए, ताकि पंजाब बिना किसी रुकावट के बिजली उत्पादन जारी रख सके. मुझे संतोष है कि केंद्रीय बिजली मंत्री ने हमें बिजली और कोयले की पर्याप्त तथा निरंतर आपूर्ति का भरोसा दिया है. हमने भी केंद्र को आश्वासन दिया है कि देश की खाद्यान्न संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए पंजाब हमेशा अग्रणी भूमिका निभाता रहेगा.” उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर लागू की जा रही केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं से संबंधित मुद्दे भी उठाए गए।  मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “मैंने केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल खट्टर को पंजाब में रणजीत सागर और शाहपुर कंडी बांध परियोजनाओं का दौरा करने के लिए आमंत्रित किया है. बांध का निर्माण पूरा होने के बाद राज्य को पर्यावरण संबंधी प्राधिकरणों या राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की ओर से बार-बार नोटिस जारी होने की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा. हमें चल रही परियोजना के संबंध में लगभग हर वर्ष एक या दो नोटिस मिलते रहते हैं, जिससे अनावश्यक परेशानियां पैदा होती हैं.” मुख्यमंत्री ने कहा, “देश के जलविद्युत उत्पादन में पंजाब का योगदान लगभग 40 प्रतिशत है. हमने केंद्रीय बिजली मंत्री के साथ इन मुद्दों पर चर्चा की है, क्योंकि हमारी जलविद्युत परियोजनाओं का सुचारू संचालन और पूरा होना राज्य के साथ-साथ देश के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।  बरगाड़ी और बहिबल कलां की घटनाओं के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “जब ये घटनाएं हुई थीं, उस समय पिछली सरकारें सत्ता में थीं. इसके बाद आई कांग्रेस सरकार ने भी इन मामलों को इतना कमजोर कर दिया था कि अब हमें इन्हें दोबारा तैयार करना पड़ रहा है. आने वाले दिनों में हम नए गवाहों को शामिल करके और नई रणनीति अपनाते हुए अदालत में चालान पेश करेंगे, ताकि इन मामलों को मजबूत किया जा सके।  महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के निमंत्रण मिलने के बावजूद विदेश यात्रा की अनुमति के संबंध में पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा, “पेरिस में एक फूड फेस्टिवल आयोजित किया जा रहा है, जहां पंजाब का प्रतिनिधित्व करने के लिए मार्कफेड की ओर से एक स्टॉल लगाया जा रहा है. मुझे इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए फ्रांस सरकार की ओर से भी निमंत्रण मिला है. इसके अलावा, मुझे जापान में तीन दिनों तक महिला और पुरुष हॉकी के सेमीफाइनल तथा फाइनल मुकाबले देखने के लिए आमंत्रित किया गया था।  उन्होंने कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि पंजाब के हितों के लिए की जाने वाली यात्राओं की अनुमति नहीं दी जा रही है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर ऐसे देशों की यात्राएं करते रहते हैं, जिनके नाम शायद हमने पहले कभी सुने भी नहीं होते. एक मुख्यमंत्री, जो राज्य का प्रतिनिधित्व करने, निवेश आकर्षित करने और रोजगार के अवसर पैदा करने का प्रयास कर रहा हो, उसे लोगों की भलाई के लिए ऐसी यात्राएं करने की अनुमति मिलनी चाहिए।  मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “मैंने अब अदालत का रुख किया है और उम्मीद है कि कल अनुमति मिल जाएगी. हम केवल पंजाब की बेहतरी के लिए यात्राएं करना चाहते हैं, ताकि निवेशकों को राज्य की ओर आकर्षित किया जा सके और उन्हें यहां कारोबार स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके. इससे पंजाब के लोगों, विशेष रूप से हमारे युवा लड़कों और लड़कियों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।  मानसा में हुई दुखद घटना की निंदा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और इसके लिए जिम्मेदार प्रत्येक व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा. इस घटना की साजिश रचने में शामिल प्रत्येक व्यक्ति को कानून के कटघरे में लाया … Read more

पंजाब सरकार 19 अक्टूबर को करेगी ₹800 करोड़ के बॉन्ड की नीलामी, जानें पूरी डिटेल

चंडीगढ़।  पंजाब सरकार विकास योजनाओं और पूंजीगत खर्चों को पूरा करने के लिए 800 करोड़ रुपये का कर्ज जुटाएगी। इसके लिए सरकार 7.65 प्रतिशत सालाना ब्याज दर वाले पंजाब एसजीएस 2043 सरकारी बांड दोबारा जारी करेगी। इन बांड की अवधि 17 साल होगी। सरकार को 12 अगस्त 2043 को मूलधन चुकाना होगा। पंजाब सरकार के वित्त विभाग ने 15 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में अधिसूचना जारी की है, जो 16 अक्टूबर को पंजाब सरकार के राजपत्र में प्रकाशित हुई। अधिसूचना के अनुसार, 800 करोड़ रुपये के ये बांड 12 अगस्त 2026 को जारी किए गए 7.65 प्रतिशत पंजाब एसजीएस 2043 बांड को दोबारा जारी करने के तहत बेचे जाएंगे। इस कर्ज से चल रही पूंजीगत खर्च की योजनाओं और अन्य विकास योजनाओं के खर्च का एक हिस्सा पूरा किया जाएगा। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 293(3) के तहत केंद्र सरकार की सहमति भी प्राप्त की गई है। 19 अक्टूबर को होगी नीलामी सरकारी बांड की बिक्री भारतीय रिजर्व बैंक के मुंबई कार्यालय के माध्यम से नीलामी के जरिए की जाएगी। नीलामी 19 अक्टूबर 2026 को होगी। प्रतिस्पर्धी बोली लगाने वाले निवेशक सुबह 10:30 बजे से 11:30 बजे तक और गैर-प्रतिस्पर्धी बोली लगाने वाले सुबह 10:30 बजे से 11 बजे तक रिजर्व बैंक के ई-कुबेर सिस्टम पर बोलियां जमा कर सकेंगे। नीलामी के दौरान बांड की कूपन दर का निर्धारण रिजर्व बैंक करेगा। कुल 800 करोड़ रुपये की निर्धारित राशि में से अधिकतम 10 प्रतिशत हिस्सा पात्र व्यक्तियों और संस्थानों को गैर-प्रतिस्पर्धी बोली व्यवस्था के तहत आवंटित किया जा सकेगा। इस व्यवस्था में एक बोलीदाता के लिए अधिकतम सीमा अधिसूचित राशि का एक प्रतिशत होगी। 21 अक्टूबर को करना होगा भुगतान नीलामी का परिणाम 19 अक्टूबर को ही रिजर्व बैंक की वेबसाइट पर जारी किया जाएगा। सफल बोलीदाताओं को 21 अक्टूबर 2026 को बैंकिंग समय समाप्त होने से पहले भुगतान करना होगा। इसके लिए नकद, बैंकर्स चेक, पे आर्डर, डिमांड ड्राफ्ट या निर्धारित बैंक खाते से चेक के माध्यम से भुगतान किया जा सकेगा। साल में दो बार मिलेगा ब्याज इन बांड पर 7.65 प्रतिशत सालाना ब्याज मिलेगा। ब्याज की गणना मूल जारी तिथि 12 अगस्त 2026 से बांड के अंकित मूल्य पर की जाएगी। ब्याज का भुगतान हर साल दो बार, 12 फरवरी और 12 अगस्त को होगा। बांड की अवधि 12 अगस्त 2026 से शुरू होकर 12 अगस्त 2043 तक रहेगी। परिपक्वता पर सरकार मूलधन का भुगतान अंकित मूल्य के बराबर करेगी।ये सरकारी प्रतिभूतियां बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 24 के तहत बैंकों के वैधानिक तरलता अनुपात (एसएलआर) के लिए पात्र होंगी। साथ ही, इन बांड को रेडी फारवर्ड सुविधा के तहत भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।

पंजाब के सीमावर्ती गांव में खेतों से मिली नशे की खेप, BSF और पुलिस ने की संयुक्त कार्रवाई

बटाला भारत-पाक सीमा पर BSF और पंजाब पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए 4 किलो से अधिक नशीले पदार्थ बरामद किए हैं। सीमावर्ती गांव तलवंडी हिंदुआं के खेतों में छिपाकर रखी गई खेप में 3 किलो से ज्यादा हेरोइन और 1 किलो से अधिक अफीम शामिल है। BSF के गुरदासपुर सेक्टर की 200 बटालियन और थाना डेरा बाबा नानक पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि सीमा पार (पाकिस्तान) से भारतीय क्षेत्र में नशीले पदार्थों की एक बड़ी खेप भेजी गई है। इसे सीमावर्ती गांव तलवंडी हिंदुआं के खेतों में छिपाया गया है। इलाके की घेराबंदी की, बड़ा सर्च ऑपरेशन चलाया प्राप्त खुफिया जानकारी के आधार पर BSF और पुलिस के जवानों ने तुरंत हरकत में आते हुए पूरे इलाके की घेराबंदी की और एक बड़ा सर्च ऑपरेशन चलाया। गहन तलाशी के दौरान जवानों को खेतों से 3 किलोग्राम से अधिक हेरोइन और 1 किलोग्राम से अधिक अफीम बरामद हुई। वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे, जांच जारी सरहद पर इतनी बड़ी मात्रा में नशीला पदार्थ मिलने की खबर मिलते ही BSF की 200 बटालियन के आला अधिकारी और पंजाब पुलिस के उच्चाधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। नशीले पदार्थों को कब्जे में ले लिया गया है मामले की पुष्टि करते हुए थाना डेरा बाबा नानक के एसएचओ अशोक कुमार ने बताया कि नशीले पदार्थों को कब्जे में ले लिया गया है। आगे की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह खेप सीमा पार से किस तस्कर के जरिए आई थी और भारतीय क्षेत्र में इसे किसे डिलीवर किया जाना था।  

पंजाब में नशे के नेटवर्क पर केंद्र सख्त, MHA ने मान सरकार से मांगा जवाब

चंडीगढ़  पंजाब में नशे के खिलाफ लड़ाई अब गंभीर सवालों के घेरे में है. नशे के कारोबार से जुड़े कथित हमलों और आत्महत्या के मामलों पर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है. गृह मंत्री अमित शाह के मंत्रालय ने पंजाब सरकार से कई घटनाओं पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. पंजाब की भगवंत मान सरकार को गुरदासपुर में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले लोगों पर हमला, मानसा में परविंदर सिंह झोटा की हत्या और संगरूर में गुलजार सिंह की कथित आत्महत्या पर जवाब देने के लिए कहा गया है. गृह मंत्रालय ने इन घटनाओं के कानून-व्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर भी चिंता जताई है. मामला इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि गुलजार सिंह ने कथित तौर पर अपने इलाके में नशीले पदार्थों की उपलब्धता पर सवाल उठाए थे. उन पर स्थानीय स्तर पर दबाव बनाए जाने के आरोप भी सामने आए हैं. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के नतीजे सामने आना जरूरी है।  गुरदासपुर में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वालों पर हमला गृह मंत्रालय के मुताबिक, गुरुवार रात गुरदासपुर जिले के मारी पनवां गांव में बिक्रमजीत सिंह, निशान सिंह और गुरमुख सिंह पर हमला हुआ. मंत्रालय ने इस घटना को कथित तौर पर नशीले पदार्थों से जुड़े मामले के रूप में दर्ज किया है. इन घटनाओं ने नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले लोगों की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं. केंद्र ने पंजाब सरकार से घटना की परिस्थितियों और संबंधित कार्रवाई का ब्योरा मांगा है. हालांकि, हमले के पीछे की पूरी वजह जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।  मानसा में हत्या, संगरूर मामला गृह मंत्रालय ने मानसा में परविंदर सिंह झोटा की हत्या का भी संज्ञान लिया है. इसके अलावा संगरूर में गुलजार सिंह की कथित आत्महत्या का मामला भी रिपोर्ट में शामिल है. मंत्रालय के अनुसार, गुलजार सिंह नशे की लत से जूझ रहे एक व्यक्ति के पिता थे. उन्होंने अपने इलाके में नशीले पदार्थों की उपलब्धता पर सवाल उठाए थे. उन्होंने पंजाब के एक मंत्री पर भी आरोप लगाए थे. मंत्रालय ने कहा कि गुलजार सिंह को स्थानीय ग्राम पंचायत द्वारा कथित तौर पर प्रताड़ित किया गया. उन पर दबाव बनाए जाने के आरोप भी हैं. आरोप है कि इसी वजह से उन्होंने आत्महत्या की. इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।  अमित शाह के दृष्टिपत्र पर भी मांगा जवाब गृह मंत्रालय ने पंजाब सरकार से एक अन्य मुद्दे पर भी रिपोर्ट मांगी है. यह रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा मुख्यमंत्रियों के साथ साझा किए गए नारकोटिक्स नियंत्रण दृष्टिपत्र से संबंधित है. इस दृष्टिपत्र की अवधि 2026 से 2029 तक है. केंद्र ने राज्य सरकार से पूछा है कि इस दिशा में अब तक क्या कार्रवाई की गई है. इसमें नशीले पदार्थों पर नियंत्रण और संबंधित उपायों की प्रगति का ब्योरा मांगा गया है।  अब पंजाब सरकार की रिपोर्ट पर नजर इन घटनाओं पर केंद्र की कार्रवाई ने पंजाब में नशे की समस्या को फिर चर्चा में ला दिया है. अब राज्य सरकार की रिपोर्ट से घटनाओं की परिस्थितियों और प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी मिलने की उम्मीद है. सबसे अहम सवाल यह है कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी. साथ ही, सामने आए आरोपों की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई भी महत्वपूर्ण होगी। 

पेरिस क्यों जाना चाहते थे CM भगवंत मान? विदेश मंत्रालय की मंजूरी से इनकार पर विवाद

चंडीगढ़  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान आखिर पेरिस क्यों जाना चाहते हैं? इस सवाल पर अब केंद्र और पंजाब सरकार आमने-सामने हैं. मान को फ्रांस जाने की इजाजत नहीं मिलने पर मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया. अब पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र के फैसले को चुनौती देने वाली पंजाब सरकार की याचिका मंजूर कर ली है. इससे विदेश दौरे को लेकर जारी खींचतान में नया मोड़ आ गया है. मान का कहना है कि उनका दौरा किसी राजनीतिक कार्यक्रम के लिए नहीं है. वह पंजाब के किसानों और सहकारी क्षेत्र के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना चाहते हैं. दूसरी तरफ केंद्र ने मुख्यमंत्री की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है. इसी वजह से यह मामला अब सिर्फ एक विदेश दौरे का नहीं रह गया है।  भगवंत मान को 15 से 21 अक्टूबर तक फ्रांस के पेरिस में एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करना था. वहां दुनिया की प्रमुख खाद्य और कृषि उत्पाद व्यापार प्रदर्शनियों में शामिल SIAL Paris 2026 आयोजित हो रही है. पंजाब की सहकारी संस्था मार्कफेड को भी इस प्रदर्शनी में जगह मिली है. सरकार की योजना अपने उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के सामने पेश करने की थी. इसके लिए व्यापारिक संगठनों और निवेशकों से मुलाकात का कार्यक्रम भी बनाया गया था. लेकिन विदेश मंत्रालय ने राजनीतिक मंजूरी देने से इनकार कर दिया. पंजाब सरकार ने आरोप लगाया कि आवेदन बिना कोई वजह बताए खारिज कर दिया गया. केंद्र ने जवाब में सुरक्षा से जुड़े इनपुट का हवाला दिया. हाईकोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अब इस विवाद ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है।  मार्कफेड के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंचाना चाहते हैं मान भगवंत मान के प्रस्तावित दौरे का मुख्य उद्देश्य पंजाब के कृषि और खाद्य उत्पादों को नए बाजार उपलब्ध कराना था. SIAL Paris 2026 का आयोजन 17 से 21 अक्टूबर तक पेरिस के नॉर्ड विलेपिंट प्रदर्शनी केंद्र में होना है. यह प्रदर्शनी हर दो साल में आयोजित होती है और इसमें खाद्य उद्योग से जुड़े कारोबारी तथा खरीदार हिस्सा लेते हैं. पंजाब सरकार की याचिका के मुताबिक मार्कफेड को भारत मंडप में स्टॉल आवंटित किया गया था. कृषि और खाद्य उत्पादों को विदेशों में बेचने में मदद करने वाली सरकारी संस्था (APEDA) ने 3 सितंबर को इसकी पुष्टि की थी. राज्य सरकार का कहना था कि दौरे का पूरा खर्च मार्कफेड उठाने वाली थी. कार्यक्रम में स्टॉल का दौरा करने के अलावा व्यापारिक संगठनों, आयातकों और निवेशकों के साथ बैठकें भी प्रस्तावित थीं।  विदेश मंत्रालय ने क्यों रोकी राजनीतिक मंजूरी? पंजाब सरकार के अनुसार उसने 9 सितंबर को विदेश मंत्रालय के ऑनलाइन पोर्टल पर राजनीतिक मंजूरी के लिए आवेदन किया था. राज्य ने दौरे का उद्देश्य व्यापार को बढ़ावा देना बताया था. याचिका में कहा गया कि मंत्रालय ने न तो कोई अतिरिक्त जानकारी मांगी और न ही कमी बताई. आवेदन पर केवल ‘अस्वीकृत’ लिखा दिखाई दिया. केंद्र की ओर से अदालत में पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन ने सुरक्षा से जुड़ी गंभीर आशंकाओं का हवाला दिया. केंद्र के मुताबिक खुफिया इनपुट में विदेश में सक्रिय कट्टरपंथी समूहों से मुख्यमंत्री को खतरे की जानकारी मिली थी. भीड़भाड़ वाले अंतरराष्ट्रीय आयोजन में सुरक्षा व्यवस्था करना भी चुनौती बताया गया. केंद्र ने यह दलील भी दी कि औपचारिक निमंत्रण के अभाव में मेजबान देश की ओर से सुरक्षा इंतजाम कराना मुश्किल हो सकता है।  हाईकोर्ट में पंजाब सरकार ने क्या दलील दी?     पंजाब सरकार की ओर से पेश वकील चंचल सिंगला ने कहा कि विदेश यात्रा की मंजूरी देने की प्रक्रिया को राज्य सरकार के कामकाज पर रोक लगाने का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए. उनका तर्क था कि राजनीतिक मंजूरी के लिए दिया गया आवेदन बिना कारण बताए खारिज कर दिया गया. राज्य सरकार ने यह भी कहा कि निमंत्रण पहले ही मिल चुका था और मेजबान देश के साथ सुरक्षा समन्वय किया जा सकता था।      न्यायमूर्ति त्रिभुवन दहिया की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पंजाब सरकार की याचिका मंजूर कर ली. हालांकि विस्तृत आदेश का इंतजार है. इससे जुड़े अंतिम निर्देशों और उनके दायरे की स्पष्ट जानकारी विस्तृत आदेश से ही मिलेगी।  मान ने लगाया भेदभाव का आरोप     भगवंत मान ने केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे विदेश जाने का अधिकार सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास है. उन्होंने कहा कि पंजाब का उद्देश्य निवेश लाना और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना है. मान ने जापान के प्रस्तावित दौरे का भी जिक्र किया. उनके मुताबिक वहां हॉकी मैच देखने के साथ एशियन चैंपियंस ट्रॉफी के लिए संबंधित लोगों को आमंत्रित करने की योजना थी।      पंजाब सरकार ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के विदेश दौरों का हवाला देकर भेदभाव का आरोप भी लगाया. उसके मुताबिक हरियाणा के मुख्यमंत्री को विदेशी निवेश और व्यापारिक बैठकों के लिए मंजूरी मिलती रही है. केंद्र की ओर से इस आरोप को लेकर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता. फिलहाल हाईकोर्ट के फैसले के बाद सबकी नजर विस्तृत आदेश पर है. यही स्पष्ट करेगा कि भगवंत मान के प्रस्तावित पेरिस दौरे को लेकर आगे की स्थिति क्या होगी।   

झोटा हत्याकांड में बढ़ा विवाद, परिवार अपनी 5 मांगों पर अड़ा; अस्पताल पहुंचे SGPC अध्यक्ष

मानसा मानसा में एंटी ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर झोटा की हत्या के पाँचवे दिन भी परिवार और लोगों का धरना जारी है। परिवार सीएम भगवंत मान और डीजीपी गौरव यादव के इस्तीफे, सीबीआई जांच समेत 5 मांगों पर अड़ा हुआ है। प्रशासन कई बार परिवार से बातचीत कर चुका है, लेकिन अभी कोई निर्णय नहीं हुआ।  पिता भीम सिंह का कहना है कि मांगें पूरी होने के बाद ही बेटे की डेडबॉडी लेंगे। अभी तक शव का पोस्टमॉर्टम भी नहीं हुआ है। शव मानसा के सिविल अस्पताल में रखा हुआ है। गुरुवार में हत्या के विरोध में पंजाब बंद रहा। प्राइवेट स्कूल-कॉलेज के साथ बाजार बंद रहे। किसान संगठनों ने नेशनल हाईवे जाम किए। पुलिस ने किसान नेताओं को हिरासत में भी लिया। लुधियाना में प्रदर्शन के दौरान CM मान का होर्डिंग उतारने पोल पर चढ़े युवक की करंट लगने से मौत हो गई। उधर, मामला बढ़ता देख सीएम मान ने आज हाई लेवल मीटिंग बुलाई है। वहीं, मानसा लक्ष्मी नारायण मंदिर में शहर के लोगों और सीनियर पुलिस अधिकारियों की भी मीटिंग तय है। झोटा की 13 अक्टूबर को नशा बेचने का विरोध करने पर मेडिकल स्टोर मालिक अश्विनी कुमार ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। पुलिस अश्विनी कुमार के साथ उसकी पत्नी नीलम रानी और मदद करने वाले को गिरफ्तार कर चुकी है। उसे 7 दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है। मानसा के एसएसपी वैभव चौधरी ने कहा कि अश्विनी ने वारदात के बाद अपना मोबाइल फोन फेंक दिया था। अश्विनी ने आखिरी कॉल अपने चाचा को की थी, जबकि अपने बेटे को चार कॉल की थीं। ड्रग इंस्पेक्टर से देर रात तक पूछताछ इस मामले में आरोपी मेडिकल संचालक अश्विनी कुमार के लाइसेंस रिन्यूअल को लेकर स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। संबंधित ड्रग इंस्पेक्टर नरेश की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, डायरेक्टर हेल्थ सर्विसेज और मानसा के डिप्टी कमिश्नर ने मामले से जुड़ा रिकॉर्ड तलब किया है। वहीं, ड्रग इंस्पेक्टर से देर रात तक पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच का मुख्य बिंदु यह है कि मेडिकल संचालक के खिलाफ मामले दर्ज होने और शिकायतें मिलने के बावजूद उसके मेडिकल स्टोर का लाइसेंस बार-बार कैसे रिन्यू होता रहा। विभागीय अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि लाइसेंस रिन्यूअल के दौरान संबंधित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं। मामले में अब तक क्या-क्या हुआ…     मेडिकल स्टोर पर गोली मारकर हत्या: 13 अक्टूबर मानसा में मेडिकल स्टोर पर नशे की बिक्री को लेकर परविंदर सिंह झोटा और दुकान मालिक अश्विनी कुमार के बीच विवाद हुआ। झोटा फेसबुक पर लाइव थे। इसी दौरान अश्विनी ने उन पर गोलियां चला दीं। झोटा की मौत हो गई और उनके चार साथी घायल हुए।     मुख्य आरोपी राजस्थान से गिरफ्तार: 14 अक्टूबर को पुलिस ने आरोपी अश्विनी कुमार को राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार किया। मामले में एफआईआर दर्ज हुई। पुलिस ने एक अन्य व्यक्ति को भी आरोपी की फरारी में मदद करने के आरोप में पकड़ा।     मेडिकल स्टोर में तोड़फोड़, घर का हिस्सा गिराया: 14 अक्टूबर को हत्या के विरोध में लोगों ने आरोपी के मेडिकल स्टोर में तोड़फोड़ कर आग लगा दी। प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर उसके घर का एक हिस्सा अवैध निर्माण का हवाला देकर गिराया।     परिवार ने अंतिम संस्कार रोका, रखीं मांगें: झोटा के पिता भीम सिंह ने इंसाफ मिलने तक अंतिम संस्कार नहीं करने की बात कही। परिवार ने सीबीआई जांच, पीजीआई चंडीगढ़ के डॉक्टरों के बोर्ड से पोस्टमॉर्टम और मुख्यमंत्री भगवंत मान व डीजीपी गौरव यादव के इस्तीफे समेत 5 मांगें रखीं।     पंजाब बंद, बाजार-हाईव बंद किए: 15 अक्टूबर को पंजाब बंद रखा गया। कई जगह बाजार बंद रहे और धरने हुए। किसान संगठनों, विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने बंद का समर्थन किया। स्कूल, बाजार और हाईवे बंद किए गए। झोटा के पिता ने बंद को सफल बनाने के लिए लोगों का धन्यवाद किया और अगले दिन से दुकानें खोलने की अपील की।     पत्नी भी नामजद, थाना प्रभारी सस्पेंड: मानसा के SSP वैभव चौधरी ने बताया कि आरोपी की पत्नी नीलम रानी की भी भूमिका सामने आने के बाद उसे भी मामले में नामजद कर गिरफ्तार किया गया। थाना सिटी-2 की प्रभारी बेअंत कौर को सस्पेंड कर दिया गया। वहीं DSP हरजिंदर सिंह गिल के खिलाफ जांच के लिए DGP ऑफिस को सिफारिश की गई है।     हाईकोर्ट पहुंचा मामला, सीबीआई जांच की मांग: हत्या की जांच सीबीआई को सौंपने के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। याचिका में पुलिस की भूमिका के साथ मेडिकल स्टोर के ड्रग लाइसेंस और आरोपी के हथियार लाइसेंस की स्वतंत्र जांच की मांग भी की गई। मामले दर्ज होने के बाद लाइसेंस जारी किया अश्विनी के खिलाफ पांच मामले दर्ज होने के बावजूद जिला प्रशासन ने 21 अगस्त 2024 को उसका हथियार लाइसेंस जारी किया था। खास बात यह है कि लाइसेंस की सिफारिश करते समय पुलिस रिकॉर्ड में इन मामलों का उल्लेख भी किया गया था। अश्विनी कुमार के खिलाफ वर्ष 2013 से 2026 तक कुल 6 एफआईआर दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इनमें से दो मामलों में उसे अदालत से बरी किया जा चुका है, जबकि तीन मामले धारा 188 के तहत दर्ज होने की बात कही गई है। छठा मामला 14 अक्टूबर 2026 को झोटा हत्याकांड के संबंध में दर्ज किया गया। जानकारी के अनुसार, अश्विनी के पास 7.62 एमएम की पिस्टल और 12 बोर की गन थी। लाइसेंस की वैधता 21 अगस्त 2024 से 20 अगस्त 2029 तक थी। उसे एक बार में 50 कारतूस खरीदने और सालभर में अधिकतम 100 कारतूस खरीदने की अनुमति भी दी गई थी।  

SGPC का ऐलान: झोटा की फोटो सिख अजायबघर में लगेगी, घायलों को 5 लाख की मदद

अमृतसर  पंजाब की युवा पीढ़ी को नशों से बचाने के संघर्ष में जान गंवाने वाले भाई परविंदर सिंह झोटा की तस्वीर केंद्रीय सिख अजायबघर में लगेगी। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के प्रधान हरजिंदर सिंह धामी ने शनिवार को भाई झोटा के पिता बापू भीम सिंह से बताई।  धामी ने कहा कि सिख कौम भाई झोटा की कुर्बानी हमेशा याद रखेगी। नशों के खिलाफ उनके संघर्ष को आगे बढ़ाना समय की जरूरत है। एसजीपीसी परिवार के साथ है और हर संभव मदद करेगी। भाई झोटा के साथ घायल हुए युवाओं का हाल जानने के बाद धामी ने प्रत्येक घायल को 5-5 लाख रुपए की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया। कमेटी इलाज का पूरा खर्च उठाएगी उन्होंने बताया कि अगर घायल चाहें तो एसजीपीसी उनका इलाज श्री गुरु रामदास मेडिकल कॉलेज अमृतसर में करवाएगी। कमेटी इलाज का पूरा खर्च उठाएगी। धामी ने कहा कि अजायबघर में उनकी तस्वीर लगाने का मकसद उनके संघर्ष और युवा पीढ़ी को नशों से बचाने के संकल्प को याद रखना है। बच्चों के नाम 10-10 लाख की FD की पेशकश SGPC प्रधान ने परविंदर सिंह झोटा के दो बच्चों के नाम पर 10-10 लाख रुपए की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) करवाने और उनकी परवरिश की जिम्मेदारी उठाने की पेशकश की। हालांकि, झोटा के पिता भईम सिंह ने अपने परिवार के लिए यह मदद लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि परमात्मा की कृपा से उनका परिवार आत्मनिर्भर है। संघर्ष कर रही संगत के लिए लंगर जारी रहेगा एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने इंसाफ के लिए संघर्ष कर रही संगत के लिए लगातार लंगर सेवा जारी रखने और शौचालयों सहित अन्य जरूरी सुविधाओं का प्रबंध करने का भी ऐलान किया। उन्होंने कहा कि दुख की इस घड़ी में SGPC परिवार के साथ खड़ी है। परिवार की ओर से जो भी आदेश दिया जाएगा, उसे स्वीकार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि परिवार के दुख को शब्दों में बयां करना मुश्किल है, लेकिन सिख संस्थाओं का फर्ज है कि ऐसे समय में परिवार का साथ दिया जाए और उसे अकेला महसूस न होने दिया जाए। ये पदाधिकारी भी रहे मौजूद इस मौके पर तख्त श्री दमदमा साहिब, तलवंडी साबो के जत्थेदार सिंह साहिब बाबा टेक सिंह, SGPC की अंतरिम कमेटी के सदस्य गुरप्रीत सिंह झब्बर, सचिव बलविंदर सिंह काहलवां, सतवीर सिंह और हरभजन सिंह वक्ता मौजूद रहे। इनके अलावा तख्त श्री दमदमा साहिब के मैनेजर नरेंद्रजीत सिंह, गुरुद्वारा बाबा गांधा सिंह जी के मैनेजर सुरजीत सिंह ठिकरीवाल और इंचार्ज भोला सिंह भी उपस्थित थे।

GB रियल्टी ग्रुप की शिकायत पर कार्रवाई, मोहाली में 35 सोशल मीडिया अकाउंट जांच के घेरे में

मोहाली मोहाली के एक इमिग्रेशन सलाहकार और उससे जुड़े कारोबारी समूह को इंटरनेट मीडिया पर कथित तौर पर बदनाम करने के मामले में पंजाब पुलिस ने 35 अकाउंट के खिलाफ केस दर्ज किया है। आरोप है कि इन अकाउंट के माध्यम से बिना सत्यापन वाली सामग्री प्रसारित कर कंपनी को कनाडा में कथित धोखाधड़ी के मामले से जोड़ा गया। संबंधित कारोबारी समूह जीबी रियल्टी ग्रुप शैक्षणिक संस्थान चलाने के साथ मोहाली और न्यू चंडीगढ़ में रियल एस्टेट कारोबार से जुड़ा है। इस मामले में FIR नंबर 29, 13 अक्टूबर को एसएएस नगर के सेक्टर-79 स्थित साइबर क्राइम थाने में दर्ज की गई है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 356(2) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 के तहत मामला दर्ज किया है। कंपनी-एमडी के बारे में झूठी अफवाहें फैलाईं जीबी रियल्टी ग्रुप की ओर से अधिवक्ता पारस शर्मा ने पुलिस को शिकायत दी है। शिकायत के अनुसार, अज्ञात व्यक्तियों ने यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया मंचों पर कंपनी और उसके प्रबंध निदेशक के बारे में कथित तौर पर झूठी अफवाहें फैलाईं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन पोस्ट में कंपनी को कनाडा में हुए कथित धोखाधड़ी के मामले से जोड़कर पेश किया गया। कंपनी के अनुसार ये आरोप निराधार हैं। शिकायतकर्ता ने पुलिस को उन सोशल मीडिया अकाउंट और पोस्ट के लिंक भी दिए हैं, जिनके माध्यम से कथित सामग्री साझा की जा रही थी। इसके साथ ही संबंधित सामग्री हटाने और अकाउंट ब्लॉक करने की मांग की गई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर केस दर्ज किया है। हालांकि, एफआईआर में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। कनाडा के ओंटारियो में भी चल रही जांच यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब कनाडा के ओंटारियो प्रांत में निजी करियर कॉलेजों को विद्यार्थियों की आर्थिक सहायता देने वाली योजना में संभावित अनियमितताओं की जांच चल रही है। प्रांतीय सरकार ने शुरुआती ऑडिट में सामने आई आशंकाओं के बाद मामला ओंटारियो प्रांतीय पुलिस (ओपीपी) को जांच के लिए सौंपा है। ऑडिट फर्म केपीएमजी को नियुक्त किया गया ओंटारियो के कॉलेज एवं विश्वविद्यालय मंत्री नोलन क्विन के अनुसार, ओंटारियो स्टूडेंट असिस्टेंस प्रोग्राम के इस्तेमाल को लेकर बढ़ती चिंताओं के बाद सरकार ने निरीक्षण शुरू किए थे। इसके बाद मामले की विस्तृत समीक्षा के लिए ऑडिट फर्म केपीएमजी को नियुक्त किया गया। अधिक आवेदन आने जैसे बिंदुओं पर चिंता जताई शुरुआती निष्कर्षों में कुछ निजी करियर कॉलेजों के बीच साझा स्वामित्व, कॉलेजों और इमिग्रेशन भर्ती सेवाओं के बीच संबंध, विद्यार्थियों के सत्यापन की कमजोर प्रक्रिया और कुछ क्षेत्रों से ओएसएपी के तहत असामान्य रूप से अधिक आवेदन आने जैसे बिंदुओं पर चिंता जताई गई। प्रांतीय सरकार ने मामले की जानकारी ऑडिटर जनरल को भी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, 7 करियर कॉलेजों को शैक्षणिक सत्र 2024-25 में ओएसएपी के तहत लगभग 385 मिलियन कनाडाई डॉलर की अनुदान राशि मिली थी। हालांकि, इस जांच और मोहाली में दर्ज एफआईआर के बीच किसी सीधे संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।  

पंजाब उपभोक्ता आयोग का फैसला, LIC को कारोबारी के परिजनों को देने होंगे ₹26.50 लाख

चंडीगढ़  मोगा में जुलाई 2020 में एक कारोबारी की हत्या के बाद अतिरिक्त दुर्घटना बीमा राशि देने से इन्कार करना भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआइसी) को भारी पड़ गया।पंजाब राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एलआइसी को चार बीमा पालिसियों के तहत 26.50 लाख रुपये का दोहरा दुर्घटना लाभ देने का आदेश दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि केवल हत्या को सुनियोजित अपराध बताकर अतिरिक्त दुर्घटना बीमा लाभ देने से इन्कार नहीं किया जा सकता। आयोग ने परिवार को 50 हजार रुपये मुआवजा और मुकदमे का खर्च देने के भी निर्देश दिए हैं। पहले कर दी थी शिकायत खारिज आयोग के न्यायिक सदस्य एचपीएस महल और सदस्य किरण सिब्बल की पीठ ने कारोबारी की पत्नी, नाबालिग बेटे और मां की अपील पर यह फैसला सुनाया। इससे पहले मोगा जिला उपभोक्ता आयोग ने 29 नवंबर 2022 को परिवार की शिकायत खारिज कर दी थी। राज्य आयोग ने 13 अक्टूबर को सुनाए फैसले में जिला आयोग का आदेश रद करते हुए एलआइसी की सेवा में कमी मानी। 2020 में हुई थी कारोबारी की हत्या कारोबारी तजिंदर सिंह कंबो की 14 जुलाई 2020 को उनकी दुकान पर अज्ञात हमलावरों ने हत्या कर दी थी। उनकी पत्नी रिपनदीप कौर कंबो चारों बीमा पालिसियों में नामित थीं।इन पालिसियों के तहत पांच लाख, 10 लाख, 1.60 लाख और 10 लाख रुपये की बीमा राशि निर्धारित थी। एलआइसी ने कारोबारी की मृत्यु के बाद मूल बीमा राशि का भुगतान कर दिया, लेकिन अतिरिक्त दुर्घटना लाभ देने से इन्कार कर दिया। एलआइसी ने 30 अप्रैल 2021 को जारी अस्वीकृति पत्र में हत्या को सुनियोजित बताते हुए इंटरनेट मीडिया पर कथित हमलावर की एक पोस्ट और पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट का हवाला दिया था। निगम का कहना था कि हत्या गैंगस्टर सुखप्रीत सिंह उर्फ सुखा गिल लम्मे से जुड़ी थी और इसका उद्देश्य क्षेत्र में आतंक पैदा करना था। आयोग ने लगाई बीमा कंपनी को फटकार परिवार ने आयोग में दलील दी कि ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है, जिससे साबित हो कि मृतक का गैंगस्टरों की गतिविधियों से संबंध था या उसने हमले को उकसाया था। आयोग ने भी पाया कि कथित विवाद की पुष्टि प्राथमिकी या मोगा के डीएसपी सिटी की रिपोर्ट से नहीं होती। रिकार्ड में मृतक को पहले धमकी दिए जाने या आरोपितों के साथ उसकी किसी बातचीत का प्रमाण भी नहीं मिला। आयोग ने कहा कि हमलावरों का हत्या करने का इरादा और यह सवाल कि उससे हुई मृत्यु बीमा पालिसी के तहत दुर्घटनावश हुई मृत्यु की श्रेणी में आती है या नहीं, दोनों अलग-अलग विषय हैं। किसी आपराधिक घटना का पहले से नियोजित होना अपने आप में अतिरिक्त दुर्घटना लाभ खारिज करने का आधार नहीं बन सकता। फैसले में एलआइसी के 15 अक्टूबर 2007 के परिपत्र का भी उल्लेख किया गया। इसके अनुसार, यदि पुलिस रिकार्ड से यह संकेत नहीं मिलता कि हत्या मृतक द्वारा स्वयं उकसाई गई थी या दावेदार की उसमें कोई भूमिका थी, तो दुर्घटना लाभ का दावा रोका नहीं जाना चाहिए। अब मिलेगा दोहरा दुर्घटना लाभ और ब्याज आयोग ने कहा कि एलआइसी यह साबित नहीं कर सकी कि कारोबारी की मृत्यु पालिसी के दायरे से बाहर थी। निगम ने लाभ देने से इन्कार करने के समर्थन में कोई ऐसा अपवाद संबंधी प्रविधान भी प्रस्तुत नहीं किया, जो इस मामले में लागू होता। आयोग ने चारों पालिसियों के तहत दोहरा दुर्घटना लाभ देने के साथ 30 अप्रैल 2021 से वास्तविक भुगतान तक छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया है।इसके अलावा 50 हजार रुपये की संयुक्त मुआवजा राशि और मुकदमे का खर्च भी देना होगा। यह राशि कारोबारी की पत्नी, नाबालिग बेटे और मां को बराबर हिस्सों में दी जाएगी। आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के 60 दिनों के भीतर भुगतान करना होगा। परिवार ने कुल 26.60 लाख रुपये का दावा किया था, हालांकि आयोग ने अंतिम देय राशि का अलग से निर्धारण नहीं किया।