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SEO-Friendly Title 2: पंजाब कांग्रेस में सियासी हलचल, भूपेश बघेल ने दोनों गुटों के नेताओं संग की अलग-अलग मुलाकात

चंडीगढ़. पंजाब कांग्रेस में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर पार्टी का मंथन लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। कांग्रेस में गुटबाजी के बीच विधानसभा चुनाव को लेकर प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल लगातार कांग्रेस नेताओं से मिले। मंगलवार को पंजाब कांग्रेस भवन में पार्टी के प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल ने नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। बैठकों का सिलसिला दोपहर बाद तक चलता रहा। हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा इस बैठक में शामिल नहीं हुए। दोनों फिलहाल दिल्ली में हैं। चुनावी रणनीति पर चर्चा तेज बैठक में पंजाब कांग्रेस के तीनों वर्किंग प्रेसिडेंट, महासचिवों और संगठन के अन्य पदाधिकारियों से अलग-अलग बातचीत की गई। दोपहर बाद जिला कांग्रेस अध्यक्षों के साथ भी बैठक प्रस्तावित रही, जिसमें संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और चुनावी रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक के बाद पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने कहा कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और सभी नेता 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल लगातार नेताओं से व्यक्तिगत रूप से बातचीत कर रहे हैं ताकि संगठन को और मजबूत बनाया जा सके। वड़िंग ने कहा कि अगले तीन-चार दिनों तक यह मंथन जारी रहेगा और सभी नेताओं से एक-एक कर चर्चा की जाएगी। एक दो दिनों में चंडीगढ़ में होगी मुलाकात चरणजीत सिंह चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा के बैठक में शामिल नहीं होने के सवाल पर वड़िंग ने कहा कि दोनों नेताओं से भूपेश बघेल की फोन पर बातचीत हो चुकी है। वे फिलहाल पंजाब से बाहर हैं और एक-दो दिन में चंडीगढ़ आकर प्रभारी से मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि चुनाव समिति के दोनों चेयरमैन भी जल्द इस प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे। जिला कांग्रेस अध्यक्षों की बैठक में कुछ पदाधिकारियों के अनुपस्थित रहने पर वड़िंग ने स्पष्ट किया कि दो जिला अध्यक्ष अमरनाथ यात्रा पर गए हुए हैं। उन्होंने पहले ही लिखित रूप से इसकी सूचना दे दी थी, इसलिए उनकी अनुपस्थिति का कोई अन्य अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए। उधर, कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने दिल्ली में अपनी मौजूदगी को लेकर उठ रहे सवालों पर कहा कि उनका दिल्ली जाना पूरी तरह निजी कारणों से है। उन्होंने बताया कि वह अपनी पत्नी को विदेश जाने के लिए छोड़ने के लिए दिल्ली आए हैं और उनके दौरे का किसी राजनीतिक गतिविधि से कोई संबंध नहीं है। 'मतभेद जल्द सुलझाएं जाएंगे' बैठक के बाद वर्किंग प्रेसिडेंट राजकुमार वेरका ने कहा कि कांग्रेस 2027 के चुनाव को ध्यान में रखकर लगातार रणनीति तैयार कर रही है। पार्टी में गुटबाजी के सवाल पर उन्होंने कहा कि ऐसा कुछ नहीं है। यदि कहीं कोई मतभेद है तो उसे भी जल्द सुलझा लिया जाएगा। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले दिनों में पंजाब कांग्रेस के सभी नेता एक मंच पर नजर आएंगे और चुनाव की तैयारियों को मिलकर आगे बढ़ाएंगे।

VIP नंबर का जबरदस्त क्रेज! जालंधर में एक्टिवा के लिए ₹8.52 लाख खर्च, 9 नंबरों की ई-ऑक्शन से 25 लाख की कमाई

जालंधर  जालंधर में फैंसी नंबरों का क्रेज किसी से छिपा नहीं है। रीजनल परिवहन कार्यालय (RTO) की ओर से आयोजित ऑनलाइन ई-ऑक्शन में इस बार PB 08 GA सीरीज के 0001 नंबर के लिए सबसे अधिक 8 लाख 52 हजार 500 रुपए की बोली लगी। यह नंबर किसी लग्जरी कार नहीं, बल्कि एक्टिवा स्कूटर का है।  अभी एक्टिवा का ऑन रोड प्राइस करीब 1.10 लाख रुपए है। यानी बोली लगी रकम से करीब 8 एक्टिवा खरीदी जा सकती थीं। वहीं, ई-ऑक्शन में 0007 नंबर 3 लाख 11 हजार रुपए, 0005 नंबर 2 लाख 83 हजार रुपए, 0008 नंबर 2.50 लाख रुपए, जबकि 0002, 0003, 0006 और 0009 नंबर 2-2 लाख रुपए में बिके। 000 सीरीज के नंबर लाखों रुपए में बिक रहे पिछले महीनों से लगातार 000 सीरीज के नंबर लाखों रुपए में बिक रहे हैं। हालांकि ऑक्शन में 8 लाख रुपए से ज्यादा कीमत में भी नंबर बिके हैं, लेकिन पिछले महीनों के मुकाबले यह ऑक्शन सबसे बेहतर रहा। इससे पहले PB 08 FZ सीरीज का 0001 नंबर 8 लाख 61 हजार रुपए में नीलाम हुआ था। 0001 नंबर 8,500 रुपए कम कीमत पर बिका मौजूदा सीरीज का 0001 नंबर उससे महज 8,500 रुपए कम कीमत पर बिका। आरटीओ अधिकारियों के अनुसार, इच्छुक वाहन मालिक पोर्टल पर बोली लगाते हैं। सबसे अधिक बोली लगाने वाले को संबंधित नंबर आवंटित किया जाता है। तीन दिन ऐसे होती है ई-ऑक्शन… हर सप्ताह शनिवार, रविवार और सोमवार तक फैंसी नंबरों के लिए ऑनलाइन आवेदन लिया जाता है। मंगलवार और बुधवार को आवेदक परिवहन विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन बोली लगाते हैं। हर क्लिक के साथ बोली 500 रुपए बढ़ती है। 0001 से 0010 तक के नंबरों का रिजर्व प्राइस 5 लाख रुपए है। रिजर्व प्राइस 1 लाख रुपए है इनमें भाग लेने के लिए 1 लाख रुपए सिक्योरिटी अमाउंट और 2,000 रुपए आवेदन शुल्क जमा करना होता है। 0011 से 0099 तक के नंबरों का रिजर्व प्राइस 1 लाख रुपए है। नीलामी पूरी होने के बाद सफल बोलीदाता को निर्धारित समय सीमा के भीतर पैसे जमा कराने होते हैं।

‘न पद की चाह, न सिद्धांतों से समझौता’, मंत्री अनिल विज ने 5 दशक की राजनीति पर कही बड़ी बात

चंडीगढ़. हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज का राजनीतिक व्यक्तित्व जितना बेबाक और स्पष्टवादी माना जाता है, उतना ही उनका संगठन के प्रति समर्पण भी चर्चा का विषय रहा है। करीब पांच दशक से भाजपा और उसके वैचारिक परिवार से जुड़े विज का कहना है कि उन्होंने जीवन में कभी पद, मंत्रालय या राजनीतिक लाभ की इच्छा नहीं की। पार्टी ने जब जो जिम्मेदारी सौंपी, उसे बिना किसी 'अगर-मगर' के स्वीकार किया। सात बार विधायक रहे विज का दावा है कि उनकी सबसे बड़ी ताकत न धनबल है, न बाहुबल और न ही जातीय समीकरण, बल्कि जनता का विश्वास और संगठन के संस्कार हैं। 'भाजपा में मुझसे ज्यादा आज्ञाकारी शायद ही कोई होगा' अनिल विज ने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में कभी पार्टी के निर्णयों पर सवाल नहीं उठाया। बैंक की नौकरी छोड़ने से लेकर चुनाव लड़ने और पार्टी के निर्देश पर अलग होकर फिर दोबारा लौटने तक हर निर्णय उन्होंने संगठन के आदेश को सर्वोपरि मानकर लिया। उनके अनुसार, उन्होंने कभी किसी आदेश पर 'इफ एंड बट' नहीं किया और जहां जिम्मेदारी मिली, वहीं पूरी निष्ठा से काम किया। 'संगठन के संस्कार मेरी नस-नस में हैं' विज ने कहा कि उनका पूरा राजनीतिक जीवन संगठन की पाठशाला में बीता है। उन्होंने बताया कि संगठन ने उन्हें हमेशा 'डिजर्व, नॉट डिजायर' का संस्कार दिया। यही कारण है कि उन्होंने कभी किसी पद, मंत्रालय या राजनीतिक जिम्मेदारी की मांग नहीं की। सरकार बनने के बाद भी वे अन्य नेताओं की तरह दिल्ली जाकर पैरवी करने के बजाय अपने विधानसभा क्षेत्र अंबाला छावनी में जनता के बीच ही रहे। 'भाजपा लोकतांत्रिक पार्टी है, जुगाड़ की राजनीति नहीं करती' भाजपा की कार्यप्रणाली पर बोलते हुए विज ने कहा कि उनकी पार्टी किसी परिवार या व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं की लोकतांत्रिक पार्टी है। बिना किसी का नाम लिए उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा में निर्णय एक तय प्रक्रिया के तहत होते हैं और संगठन का अधिकार सर्वोपरि होता है। उन्होंने स्वयं को पार्टी का सच्चा सिपाही बताते हुए कहा कि जहां भी संगठन खड़ा करेगा, वहीं पूरी निष्ठा से सेवा करते रहेंगे। 'कांग्रेस पहले भी मेरे सवालों से डरती थी, आज भी डरती है' विज ने कहा कि विपक्ष में रहते हुए उन्होंने सदन में तथ्यों और आंकड़ों के साथ सरकार को घेरा, इसलिए उन्हें सबसे अधिक बार सदन से बाहर निकाला गया। उनका दावा है कि आज भी कांग्रेस तथ्यात्मक बहस से बचती है और इसी कारण उनके सवालों से असहज रहती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष दोनों की भूमिका समान रूप से महत्वपूर्ण होती है, लेकिन कांग्रेस दोनों भूमिकाओं में असफल रही है। 'सबसे वरिष्ठ विधायक होने के नाते मेरे अनुभव का लाभ पार्टी को मिलना चाहिए' अनिल विज का कहना है कि लोकतंत्र में अपनी राय रखना प्रत्येक जनप्रतिनिधि का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि वे हमेशा पार्टी और सरकार के मंचों पर अपनी बात रखते हैं। कई बार उस पर सहमति बनती है और कई बार नहीं, लेकिन विचार रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती का प्रतीक है। उनका मानना है कि सात बार विधायक और सबसे वरिष्ठ विधायकों में शामिल होने के कारण उनके अनुभव का लाभ संगठन और सरकार को मिलना चाहिए। 'न धनबल, न बाहुबल, न जात-पात- मेरी ताकत सिर्फ जनता का प्यार' अनिल विज ने कहा कि उनकी राजनीति कभी धन, बाहुबल या जातीय समीकरणों पर आधारित नहीं रही। उन्होंने कहा कि वे पहले जैसे थे, आज भी वैसे ही हैं और आगे भी बेबाकी से अपनी बात कहते रहेंगे। उनके अनुसार, यदि कोई ताकत उन्हें सात बार विधानसभा तक लेकर आई है तो वह केवल जनता का विश्वास, स्नेह और सहयोग है।

बठिंडा में ई-रिक्शा चालकों की बढ़ी परेशानी, ऐप के जरिए बीच रास्ते रुक रहे वाहन

बठिंडा. शहर में ई-रिक्शा चालकों की परेशानी का एक नया और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अब तक चोरी, बैटरी और दुर्घटनाओं जैसी समस्याओं से जूझ रहे ई-रिक्शा चालकों के सामने एक नया खतरा खड़ा हो गया है। सोमवार देर रात बठिंडा के रेलवे रोड नजदीक अस्पताल बाजार के पास एक ई-रिक्शा को अज्ञात व्यक्ति ने मोबाइल एप के माध्यम से बंद कर दिया। ई-रिक्शा संचालक रेलवे स्टेशन के बाहर से सवारी लेकर जा रहा था। रेलवे स्टेशन से 500 मीटर की दूरी पर पहुंचने पर ई-रिक्शा अचानक बंद हो गया। जिसके बाद सवारी उतरकर दूसरे आटो पर चली गई, जबकि ई-रिक्शा चालक करीब दो घंटे तक परेशान होता रहा। इतना ही परेशान ई-रिक्शा संचालक ने बताया कुछ ही देर पहले हनुमान चौंक के पास भी एक अन्य ई-रिक्शा भी इसी तरह अचानक बंद हो गया। दोनों मामलों में चालक करीब दो घंटे तक परेशान रहे और उन्हें समझ नहीं आया कि आखिर रिक्शा अचानक क्यों बंद हो गया। एप डाउनलोड कर आवश्यक प्रक्रिया पूरी की घटना के दौरान वहां से गुजर रहे नौजवान वेलफेयर सोसायटी के सदस्यों ने भीड़ देखकर कारण जानने का प्रयास किया। संस्था के सदस्यों ने मोबाइल पर संबंधित एप डाउनलोड कर आवश्यक प्रक्रिया पूरी की, जिसके बाद ई-रिक्शा दोबारा चालू हो गया। बताया जा रहा है कि बठिंडा में इस तरह की यह पहली घटना है, जिसने ई-रिक्शा चालकों के साथ-साथ आम लोगों की भी चिंता बढ़ा दी है। नौजवान वेलफेयर सोसायटी के प्रधान सोनू माहेश्वरी ने कहा कि कुछ शरारती लोग तकनीक का गलत इस्तेमाल कर गरीब ई-रिक्शा चालकों को परेशान कर रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से ऐसे लोगों की पहचान कर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। कैसे मोबाइल एप से बंद हो जाता है ई-रिक्शा? विशेषज्ञों के अनुसार आजकल बाजार में आने वाले कई आधुनिक ई-रिक्शा स्मार्ट कंट्रोल सिस्टम से लैस होते हैं। इनमें वाहन के कंट्रोलर या जीपीएस माड्यूल को मोबाइल एप से जोड़ा जाता है। अलग-अलग कंपनियां अपनी-अपनी आधिकारिक एप उपलब्ध कराती हैं, जिनके जरिए वाहन की लोकेशन देखी जा सकती है, बैटरी की स्थिति जानी जा सकती है और जरूरत पड़ने पर वाहन को लाक या अनलाक भी किया जा सकता है। यदि किसी ई-रिक्शा का कंट्रोल सिस्टम असुरक्षित तरीके से कान्फ़िगर किया गया हो, डिफाल्ट पासवर्ड बदला न गया हो या किसी अनधिकृत व्यक्ति को उस वाहन तक डिजिटल पहुंच मिल जाए, तो वह एप के माध्यम से वाहन को लाक कर सकता है। हालांकि यह सुविधा मूल रूप से सुरक्षा के लिए बनाई गई है, ताकि चोरी होने पर वाहन को रोका जा सके, लेकिन इसका दुरुपयोग होने की आशंका भी रहती है। कौन-सी एप होती है? ई-रिक्शा को बंद करने के लिए कोई एक सार्वभौमिक मोबाइल एप नहीं होती। प्रत्येक निर्माता या कंट्रोलर कंपनी अपनी अलग आधिकारिक एप उपलब्ध कराती है। कुछ वाहनों में जीपीएस ट्रैकिंग कंपनियों की एप, जबकि कुछ में ब्लूटूथ आधारित कंट्रोल एप काम करती हैं। इसलिए किसी भी घटना में यह जानना जरूरी होता है कि संबंधित ई-रिक्शा में किस कंपनी का कंट्रोलर या स्मार्ट लाक सिस्टम लगा है। उसी की आधिकारिक एप से अधिकृत उपयोगकर्ता वाहन को अनलाक कर सकता है। यदि अचानक बंद हो जाए ई-रिक्शा तो क्या करें? विशेषज्ञों का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है। सबसे पहले वाहन की बैटरी, मुख्य स्विच और फ्यूज की जांच करें। यदि सब कुछ सामान्य है और वाहन फिर भी चालू नहीं हो रहा, तो यह संभव है कि वह डिजिटल लाक मोड में चला गया हो। ऐसी स्थिति में वाहन के निर्माता, डीलर या अधिकृत सर्विस सेंटर से संपर्क करें। यदि आपके वाहन में स्मार्ट कंट्रोल एप का उपयोग होता है, तो उसी आधिकारिक एप में लाग-इन कर अधिकृत खाते से वाहन को अनलाक किया जा सकता है। यदि स्वयं प्रक्रिया की जानकारी न हो, तो किसी प्रशिक्षित तकनीशियन की मदद लें। किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा बताई गई एप डाउनलोड करने या अपना ओटीपी और पासवर्ड साझा करने से बचें। इन बातों का रखें विशेष ध्यान – ई-रिक्शा खरीदने के बाद डिफाल्ट पासवर्ड तुरंत बदलें। वाहन से जुड़ी मोबाइल एप केवल मालिक के मोबाइल में ही रखें। ओटीपी, यूजर आईडी या पासवर्ड किसी से साझा न करें। समय-समय पर एप और वाहन का साफ्टवेयर अपडेट कराते रहें। अनजान व्यक्ति की वजह से वाहन बंद होने का संदेह हो, तो तुरंत पुलिस और डीलर को सूचना दें। सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी अजनबी को वाहन का क्यूआर कोड, कंट्रोलर नंबर या डिजिटल जानकारी न दिखाएं। प्रशासन और कंपनियों की भी बढ़ी जिम्मेदारी तकनीकी जानकारों का मानना है कि यदि ऐसे मामले बढ़ते हैं, तो निर्माता कंपनियों को अपने डिजिटल सुरक्षा तंत्र को और मजबूत बनाना होगा। दो-स्तरीय सुरक्षा (टू-फैक्टर आथेंटिकेशन), मजबूत पासवर्ड प्रणाली और मालिक की पहचान के बिना वाहन लाक या अनलाक न होने जैसी सुविधाएं अनिवार्य की जानी चाहिए। वहीं पुलिस और साइबर सेल को भी ऐसे मामलों की जांच कर यह पता लगाना होगा कि कहीं कोई व्यक्ति तकनीकी खामी का फायदा उठाकर गरीब चालकों को निशाना तो नहीं बना रहा।

Punjab Congress Crisis: बघेल की बैठक में नहीं पहुंचे चन्नी, दिल्ली में हाईकमान से करेंगे शिकायत

चंडीगढ़  पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर शुरू हुआ विवाद फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। पार्टी हाईकमान की ओर से मतभेद दूर करने की जिम्मेदारी संभाल रहे पंजाब मामलों के प्रभारी भूपेश बघेल मंगलवार को भी लगातार दूसरे दिन नेताओं के साथ बैठक करेंगे। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा और वरिष्ठ नेता परगट सिंह के दिल्ली में होने के कारण वे इस बैठक में शामिल नहीं होंगे। बघेल मंगलवार को सबसे पहले पंजाब कांग्रेस भवन में जिला कांग्रेस अध्यक्षों के साथ बैठक करेंगे। इसके बाद हाल ही में गठित चुनाव समिति, कोर कमेटी तथा अन्य समितियों के अध्यक्षों के साथ अलग-अलग बैठक कर वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा करेंगे। सोमवार को उन्होंने चुनाव समिति के अध्यक्ष डॉ. अमर सिंह, विजय इंदर सिंगला, नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग से वन-टू-वन मुलाकात कर संगठन की स्थिति पर फीडबैक लिया था। पार्टी के भीतर चल रहे असंतोष की तस्वीर हुई स्पष्ट  चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थक नेताओं के बैठक में शामिल न होने से पार्टी के भीतर चल रहे असंतोष की तस्वीर और स्पष्ट हो गई है। चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा और परगट सिंह फिलहाल दिल्ली में हैं। सूत्रों के अनुसार चन्नी समर्थक नेता कांग्रेस नेतृत्व से मुलाकात कर संगठनात्मक नियुक्तियों और प्रदेश नेतृत्व से जुड़े अपने पक्ष को रखने की तैयारी में हैं। इस बीच मंगलवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के विदेश दौरे से लौटने की भी संभावना है। सूत्रों के मुताबिक चन्नी ने राहुल गांधी से मिलने का समय मांगा है। हालांकि मुलाकात का समय तय नहीं हुआ था। माना जा रहा है कि चन्नी गुट प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के नेतृत्व और हालिया संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर अपनी आपत्तियां सीधे केंद्रीय नेतृत्व के सामने रख सकता है। उधर, प्रताप सिंह बाजवा भी चन्नी गुट और वड़िंग गुट के बीच संवाद स्थापित कर विवाद सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस सहमति बनती नजर नहीं आई है। पार्टी के भीतर दो धड़ों के बीच खिंचतान बरकरार रहने से विधानसभा चुनाव-2027 की तैयारियों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। बघेल ने कहा चन्नी से हुई है उनकी बात भूपेश बघेल ने कहा कि उनकी चरणजीत सिंह चन्नी से फोन पर बात हुई है। चन्नी फिलहाल शहर से बाहर हैं और एक-दो दिन में लौटेंगे। उनके लौटने के बाद उनसे अलग से बैठक कर पंजाब की चुनावी रणनीति और संगठनात्मक मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। बघेल का कहना है कि वह सभी नेताओं से व्यक्तिगत स्तर पर बातचीत कर मतभेद दूर करने और पार्टी को एकजुट कर चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।  

‘सतलुज’ फिल्म पर बनेगी समीक्षा कमेटी, जसवंत सिंह खालड़ा के उठाए सवालों को लेकर बढ़ी बहस

चंडीगढ़. पंजाबी अभिनेता दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को लेकर केंद्र सरकार ने समीक्षा समिति (रिव्यू कमेटी) गठित की है। भाजपा के पंजाब अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों की ओर से की गई अपील के बाद यह कमेटी बनाई गई है। इसकी पुष्टि भाजपा नेता आरपी सिंह ने की है। समिति फिल्म की विषयवस्तु, तथ्यों और इसमें दर्शाए गए घटनाक्रम की समीक्षा करेगी। दावा किया जा रहा है कि फिल्म केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) से मंजूरी लिए बिना ओटीटी प्लेटफॉर्म पर जारी की गई थी। यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और उनके संघर्ष पर आधारित है। करीब तीन साल तक रिलीज अटकी रहने के बाद फिल्म को पहले तय नाम 'पंजाब 95' की जगह 'सतलुज' नाम से दो दिन पहले ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया गया था। हालांकि रिलीज के महज दो दिन बाद ही फिल्म को प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया। इसके बाद एक बार फिर जसवंत सिंह खालड़ा का मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है। जसवंत सिंह खालड़ा ने आतंकवाद के दौर में पंजाब में कथित फर्जी मुठभेड़ों और लावारिस शवों के अंतिम संस्कार से जुड़े मामलों को उजागर करने का अभियान चलाया था। उन्होंने श्मशान घाटों, नगर निगम और अन्य सरकारी अभिलेखों से दस्तावेज जुटाकर दावा किया था कि उस दौर में करीब 25 हजार युवकों की कथित फर्जी मुठभेड़ों में हत्या कर उन्हें लावारिस बताकर अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनके दावों ने उस समय पूरे देश में हलचल मचा दी थी और मानवाधिकार उल्लंघन का मुद्दा राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया था। इसी अभियान के दौरान 6 सितंबर 1995 को अमृतसर स्थित उनके घर के बाहर से उनका कथित अपहरण कर लिया गया। इसके बाद उनकी पत्नी परमजीत कौर खालड़ा ने न्याय के लिए लंबी कानूनी लड़ाई शुरू की। अगले दिन उन्होंने थाना इस्लामाबाद में अपहरण का मामला दर्ज कराया, लेकिन पुलिस लगातार यह कहती रही कि जसवंत सिंह खालड़ा उसकी हिरासत में नहीं हैं। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और मामले को अदालत तक पहुंचाया। पुलिस से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर परमजीत कौर ने 12 सितंबर 1995 को सुप्रीम कोर्ट में हैबियस कॉर्पस याचिका दायर की। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि सरकार बताए कि जसवंत सिंह खालड़ा कहां हैं और यदि वे किसी एजेंसी की हिरासत में हैं तो उन्हें अदालत के समक्ष पेश किया जाए। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार से जवाब तलब किया और बाद में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए 15 नवंबर 1995 को मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी। सीबीआई की जांच और लंबी अदालती प्रक्रिया के बाद विशेष अदालत ने वर्ष 2005 में छह पुलिस अधिकारियों को दोषी ठहराया। बाद में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने चार दोषियों की सजा बढ़ाकर उम्रकैद कर दी। यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां 23 नवंबर 2011 को हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा गया। करीब 16 वर्ष तक चली इस कानूनी लड़ाई के बाद दोषियों की सजा कायम रही। अब फिल्म 'सतलुज' को लेकर बनी समीक्षा समिति के बीच जसवंत सिंह खालड़ा का संघर्ष और 1990 के दशक के पंजाब से जुड़े घटनाक्रम एक बार फिर सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बन गए हैं। समिति की रिपोर्ट के बाद फिल्म को लेकर आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।

चंडीगढ़ हाईकोर्ट को मिली नई ग्रीन पार्किंग, 6.23 एकड़ में 700+ गाड़ियां होंगी पार्क

चंडीगढ़. पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट आने वाले वकीलों, वादियों और आम लोगों को चंडीगढ़ प्रशासन ने बड़ी राहत प्रदान की है। हाईकोर्ट के बाहर कच्ची और पथरीली जगहों पर प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग ने ग्रीन पार्किंग बना दी है। करीब साढ़े तीन करोड़ की लागत से बनी इस पार्किंग को आम लोगों के लिए शुरू कर दिया गया है। यहां करीब 6.23 एकड़ में पार्किंग का निर्माण किया गया है, जहां 700 से ज्यादा गाड़ियां खड़ी करने की क्षमता होगी। लंबे समय से लोग पार्किंग के कारण परेशान होते थे। इस पार्किंग के बनने से लोगों की समस्या का काफी हद तक समाधान हुआ है। पार्किंग को पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। पूरे परिसर में ग्रीन पेवर ब्लाॅक्स लगाए गए हैं, जिनके बीच घास भी रहेगी। तय दूरी पर पेड़ भी लगे हैं, ताकि हरियाली बनी रहे और वाहनों को प्राकृतिक छाया मिल सके। ग्रीन पेवर ब्लाक्स की विशेषता यह है कि बारिश का पानी जमीन में आसानी से समा जाएगा, जिससे जलभराव की समस्या भी नहीं होगी। पिछले वर्ष हाईकोर्ट ने अपने आदेश में इस क्षेत्र में ग्रीन पेवर ब्लाॅक्स लगाने की अनुमति दी थी। इसके बाद प्रशासन ने लैंडस्केप कंसल्टिंग कंपनी से डिजाइन तैयार कराया। चूंकि यह क्षेत्र यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कैपिटल काॅम्प्लेक्स का हिस्सा है, इसलिए पूरे प्रोजेक्ट को विशेष निगरानी और हेरिटेज मानकों के आधार पर किया गया। इस काम के लिए प्रशासन ने पिछले साल टेंडर जारी कर दिया था। अक्टूबर 2025 से यहां निर्माण कार्य शुरू हो गया था। वर्ष 2023 में हेरिटेज इम्पैक्ट असेसमेंट रिपोर्ट में यहां भूमिगत मल्टीलेवल पार्किंग बनाने का विरोध किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार ऐसा निर्माण धरोहर परिसर के वास्तविक स्वरूप को प्रभावित कर सकता था और ट्रैफिक व प्रदूषण भी बढ़ा सकता था। इसी वजह से प्रशासन ने पर्यावरण अनुकूल ग्रीन पार्किंग बनाने का फैसला किया।

CBI कोर्ट में आज बड़ा दिन, निलंबित DIG भुल्लर मामले में आएगा फैसला; बचाव पक्ष ने अधिकार क्षेत्र पर उठाए सवाल

चंडीगढ़  रिश्वत मामले में गिरफ्तार पंजाब के निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर और उनके बिचौलिए कृष्णु शारदा की ओर से दायर डिस्चार्ज अर्जी पर मंगलवार को चंडीगढ़ सीबीआई की विशेष अदालत फैसला सुनाएगी। दोनों आरोपियों को सीबीआई ने पिछले साल 16 अक्टूबर को गिरफ्तार किया।  भुल्लर की ओर से दायर डिस्चार्ज अर्जी में कहा गया है कि वह पंजाब सरकार के अधिकारी हैं, इसलिए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का अधिकार सीबीआई के पास नहीं था। अर्जी में दावा किया गया है कि सीबीआई ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई की और उन्हें गिरफ्तार किया। एजेंसी ने कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई की बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि राज्य कैडर के आईपीएस अधिकारियों पर कार्रवाई से जुड़े मद्रास हाईकोर्ट के एक फैसले का लाभ इस मामले में भी मिलना चाहिए। इसी आधार पर अदालत से उन्हें आरोपों से मुक्त करने की मांग की गई है। वहीं, सीबीआई के सरकारी वकील ने इस अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि एजेंसी ने कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई की है। 8 लाख रुपए रिश्वत मांगने का आरोप यह मामला पिछले साल उस समय सामने आया था, जब मंडी गोबिंदगढ़ के व्यापारी आकाश बत्ता की शिकायत पर सीबीआई ने कार्रवाई की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि एक आपराधिक मामले में गिरफ्तारी का डर दिखाकर उनसे 8 लाख रुपए रिश्वत मांगी गई थी। इसी शिकायत के आधार पर सीबीआई ने हरचरण सिंह भुल्लर और कृष्णु शारदा को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने भुल्लर के सेक्टर-40 स्थित आवास पर छापेमारी की थी। जांच के दौरान वहां से करीब 7.5 करोड़ रुपए नकद, लगभग ढाई किलो सोना और कई महंगी घड़ियां बरामद हुई थीं। इसके बाद सीबीआई ने उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला भी दर्ज किया। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू कर रखी है।

पंजाब के बठिंडा में पुलिसकर्मी किडनैप, 2 लाख की फिरौती मांगने का आरोप, जांच शुरू

बठिंडा. थाना कैंट क्षेत्र में एक पुलिसकर्मी के कथित अपहरण, मारपीट और दो लाख रुपये की फिरौती मांगने का मामला सामने आया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर दो नामजद और तीन अज्ञात आरोपितों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस को दिए बयान में सिपाही कुलविंदर सिंह ने बताया कि आरोपित हरजिंदर सिंह, पोपा और उनके तीन अज्ञात साथियों ने पहले उसकी वीडियो बनाई। इसके बाद उसके साथ मारपीट की और जबरन अपनी गाड़ी में बैठाकर गांव सेमा कलां ले गए। शिकायत के अनुसार आरोपितों ने वहां उसे धमकाते हुए दो लाख रुपये की फिरौती मांगी। आरोप है कि इस दौरान उसका एटीएम कार्ड भी अपने कब्जे में ले लिया और उसकी स्विफ्ट कार नंबर पीब-03एजी-5030 भी साथ ले गए। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपितों ने सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई और पुलिसकर्मी को अवैध रूप से बंधक बनाकर धमकियां दीं। मामले की जांच के बाद थाना कैंट पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ अपहरण, मारपीट, फिरौती मांगने, सरकारी कार्य में बाधा डालने और अन्य संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है। पुलिस आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।

चंडीगढ़ में PM मोदी के दौरे पर करोड़ों की तैयारी, ₹2 करोड़ के टेंट समेत एक दिन में निकले 8 टेंडर

 चंडीगढ़  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 17 जुलाई को प्रस्तावित चंडीगढ़ दौरे को लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। कार्यक्रम पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज में आयोजित किया जाना है। इसके लिए प्रशासन के विभिन्न इंजीनियरिंग विभागों ने एक ही दिन में 8 अलग-अलग टेंडर जारी हुए। चंडीगढ़ दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पीजीआई और पंजाब यूनिवर्सिटी के महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन करेंगे। इसके साथ ही भारतीय रेलवे की महत्वाकांक्षी अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत तैयार किए गए कालका, मोहाली, अंब अंदौरा और आनंदपुर साहिब समेत चार आधुनिक रेलवे स्टेशनों को भी समर्पित किया जाएगा। प्रधानमंत्री चंडीगढ़ से इन स्टेशनों का वर्चुअल लोकार्पण करेंगे। 3 पॉइंट्स में जानें PM मोदी के दौरे को लेकर खास इंतजाम:-     एयर कंडीशनिंग सिस्टम भी लगाया जाएगा: सबसे बड़े टेंट टेंडर के तहत कार्यक्रम स्थल पर करीब 6000 वर्ग मीटर का वाटरप्रूफ जर्मन हैंगर लगाया जाएगा। बारिश की संभावना को देखते हुए इसे तैयार किया जा रहा है, ताकि खराब मौसम में भी कार्यक्रम सुचारू रूप से आयोजित किया जा सके। पूरे पंडाल को ठंडा रखने के लिए 600 टन क्षमता का एयर कंडीशनिंग सिस्टम भी लगाया जाएगा।     वाटर कूलर और 24 पोर्टेबल टॉयलेट लगाने की व्यवस्था: कार्यक्रम में आने वाले वीआईपी और प्रधानमंत्री के लिए एसी युक्त लाउंज, बैठक व्यवस्था, कारपेट, फर्नीचर और बैरिकेडिंग सहित अन्य इंतजाम किए जाएंगे। इसके अलावा 2200 सोफे, 300 कुर्सियां, 70 हजार वर्ग फीट कारपेट, 65 हजार वर्ग फीट बैरिकेडिंग, 20 वाटर कूलर और 24 पोर्टेबल टॉयलेट लगाने की व्यवस्था की जाएगी।     11 जनरेटर लगेंगे, 8 हाई-रेजोल्यूशन CCTV से सुरक्षा: कार्यक्रम के लिए बिजली की व्यवस्था भी पूरी तरह सुनिश्चित की जाएगी। इसके तहत 11 जनरेटर (125 केवीए), 28 जनरेटर (250 केवीए) और एक 500 केवीए डीजी सेट लगाया जाएगा।  सुरक्षा और सजावट के लिए 8 हाई-रेजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरे, एलईडी लाइट्स, 4000 रंगीन गमले, बैरिकेडिंग और फायर सेफ्टी के इंतजाम किए जाएंगे। सभी टेंडर शॉर्ट नोटिस पर जारी किए गए हैं। कुछ टेंडर दो-तीन दिन में पूरे हो जाएंगे, जबकि अन्य एक सप्ताह के भीतर फाइनल कर दिए जाएंगे। इसके बाद चुनी गई एजेंसियां तुरंत काम शुरू करेंगी। आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद रेलवे प्रवक्ता के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चंडीगढ़ दौरे की आधिकारिक सूचना अभी पीएमओ से आनी बाकी है। हालांकि, रेलवे ने अपने स्तर पर तैयारियां पूरी कर ली हैं। इन चारों स्टेशनों के आधुनिकीकरण से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलने के साथ-साथ स्थानीय पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। रेलवे अधिकारियों ने  इन स्टेशनों पर चल रही तैयारियों का जायजा लिया। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत देशभर में 1300 से अधिक रेलवे स्टेशनों का चरणबद्ध तरीके से आधुनिकीकरण किया जा रहा है। लोकल कल्चर-आर्किटेक्चर को बढ़ावा योजना की एक प्रमुख विशेषता स्थानीय संस्कृति और वास्तुकला को बढ़ावा देना भी है। इसी उद्देश्य से स्टेशनों के निर्माण में स्थानीय कला, विरासत और क्षेत्रीय पहचान को शामिल किया गया है, ताकि प्रत्येक स्टेशन अपने शहर और क्षेत्र की सांस्कृतिक छवि को दर्शा सके। ये स्टेशन केवल यात्रा के केंद्र नहीं होंगे, बल्कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए भी विकसित किए जा रहे हैं। अब तक 172 से अधिक स्टेशनों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। आने वाले समय में चरणबद्ध तरीके से अन्य स्टेशनों का भी लोकार्पण किया जाएगा। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चंडीगढ़ का पिछला दौरा 3 दिसंबर 2024 को हुआ था। उस दौरान उन्होंने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में देश के तीन नए आपराधिक कानूनों के सफल क्रियान्वयन को राष्ट्र को समर्पित किया था। यदि प्रस्तावित कार्यक्रम को अंतिम मंजूरी मिलती है, तो यह दौरा स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को जनता को समर्पित करने के लिहाज से चंडीगढ़ के लिए अहम माना जा रहा है।