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गुणवत्ता की निगरानी के लिए मानक मापदंड तय किए जाएं: राज्यपाल पटेल

गुणवत्ता की निगरानी के मानक मापदंड किए जाए निर्धारित : राज्यपाल पटेल  राज्यपाल ने सिकल सेल उन्मूलन अभियान की प्रगति पर हर्ष व्यक्त किया लोक भवन में जनजातीय कार्य विभाग समीक्षा बैठक हुई भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि योजनाओं की मंशा और क्रियान्वयन की व्यवहारिकता में संवेदनशीलता की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता का मूल्यांकन मुख्यतः तकनीकी विषय है, इसलिए हितग्राहियों की प्रतिक्रिया पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। निर्माण सामग्री एवं कार्य की गुणवत्ता की निगरानी के मानक मापदंड निर्धारित किए जाए। अधिकारियों द्वारा निगरानी मापदंड के अनुसार नियमित गुणवत्ता परीक्षण करना चाहिए।       राज्यपाल पटेल लोक भवन में बुधवार को आयोजित समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे।  राज्यपाल को बैठक में पीएम-जनमन योजना अंतर्गत 9 विभागों की 11 अधोसंरचनात्मक, 7 हितग्राही मूलक योजनाओं और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत 17 विभागों की 25 योजनाओं  की प्रगति की जानकारी दी गई। राज्यपाल पटेल ने कहा कि जनजातीय बहुल क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता की पहल पीएम-जनमन योजना और धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजनाएं है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य के लिए निर्धारित समय सीमा तक कार्य की रीति-नीति उचित नहीं है। रणनीति, समय सीमा से पहले कार्य पूरा करने की होनी चाहिए। नए कार्यों के क्रियान्वयन में पूर्व अनुभवों और चुनौतियों को दृष्टिगत रखते हुए कार्य योजना तैयार की जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अति पिछड़ी जनजातियों के विकास और उत्थान के प्रयासों को आवश्यकता और बहुलता की प्राथमिकता के साथ क्रियान्वयन की औपचारिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाए। राज्यपाल पटेल ने प्रदेश में सिकल सेल उन्मूलन अभियान के तीव्र गति से क्रियान्वयन पर हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 से पूर्व वर्ष 2026 तक लक्ष्य का पूरा होना अनुमानित है। उन्होंने सभी संबंधितों को इसके लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि 15 वर्ष की आयु तक के सिकल सेल रोगी वाहक के स्वास्थ्य प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। इससे उनका भावी जीवन सुरक्षित हो जाएगा। जरूरी है कि सिकल सेल की दवाओं की उपलब्धता सदैव सुनिश्चित रहे। एलोपैथिक उपचार पद्धति के साथ ही आयुर्वेद औषधियों के उपयोग के संबंध में जन जागरण के प्रयासों की जरूरत भी बताई। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद की दवाओं के उपयोग से रक्त की उपलब्धता बढ़ने और थकान में कमी के उत्साह जनक प्रारंभिक परिणाम प्राप्त हुए है। राज्यपाल ने बैठक में जनजातीय बहुल क्षेत्रों की तहसीलवार बुनियादी सुविधाओं का मानचित्र तैयार कर प्रभावी निगरानी, जन औषधि केन्द्रों के संचालन में जनजातीय युवाओं की भागीदारी तथा विद्यालयों में छात्राओं, छात्र के पृथक शौचालयों की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर बल दिया। समीक्षा बैठक में जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा, जनजातीय प्रकोष्ठ की सदस्य सचिव श्रीमती मीनाक्षी सिंह, प्रकोष्ठ के सदस्य, लोक भवन और जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।  

IAEA का ईरान को सख्त संदेश, परमाणु स्थलों के निरीक्षण पर नहीं होगा समझौता

 टोक्यो अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल मारियानो ग्रॉसी ने बुधवार को संकेत दिया कि ईरान के न्यूक्लियर एनरिचमेंट साइट्स का निरीक्षण उनकी टीम द्वारा किया जाएगा. यह अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए हुए अंतरिम समझौते का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है. IAEA प्रमुख का यह इस मामले में अब तक का सबसे स्पष्ट बयान है. संयुक्त राष्ट्र की यह परमाणु निगरानी एजेंसी ईरान के परमाणु भंडार की स्थिति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।  इजरायल ने ईरान के साथ 2025 में 12 दिनों तक चले युद्ध के दौरान उनके परमाणु स्थलों को निशाना बनाया था. अमेरिका ने भी B-2 बमवर्षक विमानों से ईरान के फोर्दो, नतांज और इस्फहान न्यूक्लियर फैसेलिटी पर हमले किए थे. इन हमलों के बाद से ईरान ने IAEA को उन परमाणु सुविधाओं तक पहुंचने से रोक रखा है. इन परमाणु सुविधाओं में ईरान के पास इतना उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम होने का अनुमान है कि यदि वह चाहे तो लगभग 10 परमाणु बम बना सकता है।  ईरान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है. हालांकि, वह दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जिसके पास बिना किसी घोषित वेपन प्रोग्राम के 60 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम मौजूद है. इन परमाणु स्थलों का IAEA की टीम द्वारा निरीक्षण करने के मामले में अमेरिका और ईरान ने 23 जून को विरोधाभासी बयान दिए थे. अमेरिका ने दावा किया था कि ईरान ने अपने परमाणु स्थलों का निरीक्षण करने की अनुमति दे दी है. वहीं, ईरान ने इस तरह की कोई अनुमति देने से इनकार किया था।  ईरान के परमाणु स्थलों का निरीक्षण होकर रहेगा: IAEA जापान के फुकुशिमा दाइची परमाणु संयंत्र में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में IAEA प्रमुख राफेल मारियानो ग्रॉसी ने पत्रकारों से कहा, 'मैं राजनीतिक बयानों को समझ सकता हूं, वे वास्तविकता का हिस्सा हैं. लेकिन मैं आपको यह याद दिलाना चाहता हूं कि दोनों देशों के राष्ट्रपतियों द्वारा एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं. उस समझौते में स्पष्ट रूप से लिखा है कि परमाणु सामग्री और परमाणु सुविधाओं से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी IAEA द्वारा की जाएगी. जाहिर है, ऐसा करने के लिए हमें निरीक्षण करना होगा. यह निरीक्षण परसों हो, एक हफ्ते बाद हो या 10 दिन बाद, यह महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि यह होगा।  ये निरीक्षण इसलिए बेहद अहम माने जा रहे हैं क्योंकि समझौते के तहत ईरान के उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम भंडार को कम संवर्धित स्तर तक लाने यानी 'डाउनब्लेंड' करने की बात कही गई है. ईरान की ओर से ग्रॉसी के इस बयान पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने मंगलवार को तेहरान में पत्रकारों से कहा था कि पिछले साल अमेरिका द्वारा बमबारी किए गए परमाणु स्थलों का निरीक्षण करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों के आने की कोई योजना नहीं है।  उन्होंने यह बयान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की टिप्पणी को खारिज करते हुए दिया था. पिछले साल के 12 दिन तक चले युद्ध के बाद से IAEA को ईरान के कुछ अन्य परमाणु स्थलों, जैसे बुशेहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र, का दौरा करने की अनुमति दी गई है. लेकिन संवर्धन स्थलों तक पहुंच न होने के कारण एजेंसी यह सत्यापित नहीं कर पा रही है कि ईरान के यूरेनियम भंडार की वास्तविक स्थिति क्या है और यूरेनियम संवर्धन में इस्तेमाल होने वाली सेंट्रीफ्यूज मशीनों की स्थिति कैसी है. ईरान और IAEA दोनों का कहना है कि तेहरान फिलहाल यूरेनियम संवर्धन नहीं कर रहा है. हालांकि, परमाणु विशेषज्ञों को आशंका है कि ईरान अपने यूरेनियम भंडार को किसी गुप्त स्थान पर स्थानांतरित कर सकता है। 

सांसदों के जाने के बाद उद्धव की बढ़ीं मुश्किलें, अब दफ्तर को लेकर नया विवाद

मुंबई  लोकसभा सांसदों की बगावत के झटके से उबर रही शिवसेना (यूबीटी) की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रहीं. पार्टी को अब संसद में एक और बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है. पार्टी के 6 सांसदों के शिवसेना (शिंदे) में विलय के बाद न सिर्फ उसकी संसदीय ताकत घटेगी, बल्कि संसद भवन परिसर में मिले उसके दफ्तर पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।  सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में लोकसभा अध्यक्ष की औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद शिवसेना (यूबीटी) के संसदीय दल में सिर्फ चार सांसद ही बाकी रह जाएंगे।   संसद के नियम के तहत आमतौर पर पांच या उससे ज्यादा सांसदों वाले दलों को ही संसद भवन परिसर में अलग दफ्तर आवंटित किया जाता है. ऐसे में पार्टी को अपने वर्तमान कार्यालय से हाथ धोना पड़ सकता है।  संसदीय गतिविधियों में पार्टी की भागीदारी पर पड़ सकता है असर सांसदों की संख्या घटने का असर राजनीतिक और संसदीय गतिविधियों में पार्टी की भागीदारी पर भी पड़ सकता है. अहम राष्ट्रीय और संसदीय मुद्दों पर केंद्र सरकार की ओर से बुलाई जाने वाली सर्वदलीय बैठकों में आमतौर पर पांच से कम सांसदों वाले दलों को आमंत्रित नहीं किया जाता है. ऐसे में भविष्य में शिवसेना (यूबीटी) की इन बैठकों में मौजूदगी पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।  फिलहाल शिवसेना (यूबीटी) के संसदीय दल का दफ्तर संविधान सदन (पुराना संसद भवन) के कमरा नंबर 128A में स्थित है. ये दफ्तर अविभाजित शिवसेना को आवंटित कमरे नंबर 128 के ठीक बगल में है. सांसदों की संख्या में संभावित कमी के बाद इस कार्यालय के आवंटन की स्थिति पर भी नजरें टिकी हुई हैं।  महाराष्ट्र की राजनीति में 'ऑपरेशन टाइगर' की चर्चा पिछले कई दिनों से महाराष्ट्र की राजनीति में 'ऑपरेशन टाइगर' खूब चर्चा में हैं. इस दलबदल को एकनाथ शिंदे का 'ऑपरेशन टाइगर' कहा जा रहा है. शिवसेना पर आए इस संकट को राज्यसभा सांसद संजय राउत सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं. संजय राउत दिल्ली में हैं. वहीं पार्टी के सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई भी दिल्ली में ही ठहरे हुए हैं.  बताया जा रहा है कि संजय राउत दलबदल को रोकने के लिए किताबों और संसदीय प्रक्रिया का अध्यन करने में लगे हैं।  संजय राउत और अनिल देसाई ने दिल्ली के प्रमुख वकीलों के साथ इस बात पर बातचीत की कि अगर छह सांसद बेहतर अवसरों की तलाश में अगर पार्टी बदल लेते हैं तो उसमें क्या कानूनी उपाय किए जाने चाहिए. इसको लेकर अनिल परब ने बताया कि अगर सुप्रीम कोर्ट यूबीटी और शिंदे गुट के धनुष-बाण चिन्ह वाले फैसले पर सुनवाई की होती तो हमारा पक्ष मजबूत होता।  शिवसेना संकट पर क्या बोले एक्सपर्ट्स? इस बीच एक्सपर्ट्स का कहना है कि ठाकरे के लिए इस संकट से निपटना चुनौती भरा हो सकता है, जिसे देश की राजनीति के तेजी से बदलते स्वरूप के रूप में देखा जाना चाहिए. लेखक और शिवसेना के इतिहासकार प्रकाश अकोलकर यह सब पैसे का खेल है. कोई भी पार्टी बीजेपी के पैस और संसाधनों का सामना नहीं कर सकती. सांसद से लेकर विधायक तक बिकने को तैयार हैं. बीजेपी जो ऐसा कर रही है यह बेहद शर्मनाक है।  उन्होंने कहा कि 20 से 25 साल के युवाओं की सिर्फ यही राय है कि उद्धव ठाकरे को बीजेपी का डटकर सामना करना चाहिए. एक कार्यकर्ता ने कहा कि अब समय आ गया है कोई बीजेपी के सामने खड़ा हो और देश में विपक्षी पार्टियों को खत्म करने की नापाक साजिश को पर्दाफाश करे।  वहीं दूसरी तरफ कई शिवसैनिक 'ऑपरेशन टाइगर के विरोध के लिए सड़कों पर उतरने के लिए भी तैयार हैं.' बता दें कि पार्टी बदलने वाले 6 सांसदों में संजय दीना पाटिल ने पहले कहा था कि उनकी गठबंधन में जाने की मर्जी नहीं है। 

जो एक बार मध्यप्रदेश आता है, वह यहीं का होकर रह जाता है: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

जो एक बार मध्यप्रदेश आता है, वह यहीं का होकर रह जाता है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव राज्य सरकार ने उद्योग अनुकूल वातावरण बनाने के लिए लागू की हैं पारदर्शी और उद्योग मित्र नीतियां मध्यप्रदेश देश के सबसे तेजी से प्रगति करने वाले राज्यों में है शामिल विकसित भारत @2047 में 2 ट्रिलियन डॉलर का होगा मध्यप्रदेश का योगदान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीरांगना रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर किया उनका स्मरण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विकसित मध्यप्रदेश पर आयोजित कॉन्क्लेव को किया संबोधित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि समय तभी बदलता है, जब संकल्प बड़ा होता है। सभी भारतीयों के लिए यह गर्व का विषय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृढ़ संकल्प और दूरदर्शी नेतृत्व में भारत का समय बदला है। विश्व के कई देशों ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से प्रधानमंत्री मोदी को विभूषित किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने विकसित भारत @2047 और अर्थव्यवस्था को 30 ट्रिलियन डॉलर पहुंचाने का संकल्प लिया है। राज्य सरकार का यह प्रयास होगा कि इसमें से लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर का योगदान मध्यप्रदेश का हो। मध्यप्रदेश, प्रधानमंत्री मोदी के सेवा, सुशासन और जन कल्याण के संकल्पों को पूर्ण करने का निरंतर प्रयास कर रहा है। वर्तमान में मध्यप्रदेश की गिनती देश के सबसे तेजी से प्रगति करने वाले राज्यों में हो रही है। हम विरासत भी और विकास भी के पथ पर लगातार अग्रसर हो रहे है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज वीरांगना रानी दुर्गावती का बलिदान दिवस है। उन्होंने रानी दुर्गावती का स्मरण करते हुए कहा कि प्रदेशवासी रानी दुर्गावती के बलिदान को सदैव याद रखेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव "विकसित मध्यप्रदेश" विषय पर आयोजित कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल में आयोजित कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ  किया। कॉन्क्लेव में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, सूक्ष्म लघु एवं उद्योग मंत्री चैतन्य काश्यप, मुख्य सचिव अनुराग जैन विशेष रूप से उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कॉन्क्लेव में शामिल उद्योगपतियों से राज्य में मौजूद निवेश संभावनाओं का लाभ उठाने का आह्वान करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश की विशेषता है कि एक बार जो मध्यप्रदेश आता है, यहीं का होकर रह जाता है। कार्यक्रम में उद्योग व्यापार जगत के प्रतिनिधि, निवेशक, बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधि तथा नीति निर्माता शामिल हुए।  प्रदेश में पिछले तीन साल से विकास का कारवां लगातार बढ़ रहा है आगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में पिछले तीन साल से विकास का कारवां लगातार आगे बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश में नए उद्योग स्थापित करने के लिए पर्याप्त लैंड बैंक है। राज्य सरकार ने उद्योग अनुकूल वातावरण तैयार करने लिए पारदर्शी और उद्योग मित्र नीतियां लागू की हैं। मध्यप्रदेश की इन्हीं विशेषताओं के कारण निवेशक उद्योग लगाने के लिए राज्य में आ रहे हैं। देश के मध्य में स्थित होने के कारण उन्हें  कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स का विशेष लाभ भी मिलेगा। प्रदेश सरकार ने चारों दिशाओं में सड़क कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए अधोसंरचना विकास पर विशेष बल दिया है। राज्य सरकार 10 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों को ला चुकी है धरातल पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में भोपाल में पहली बार ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 का आयोजन किया गया, जिसमें अभूतपूर्व निवेश प्राप्त हुआ और एमओयू साइन हुए। यह प्रसन्नता का विषय है कि 10 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों को राज्य सरकार धरातल पर ला चुकी है। मध्यप्रदेश की छवि कृषि प्रधान राज्य के साथ उद्योग मित्र राज्य की भी बनी है। राज्य सरकार ने वर्ष 2025 को उद्योग और रोजगार को समर्पित किया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय युवा प्रतिभाओं ने दुनिया की बड़ी से बड़ी कंपनियों में शीर्ष पदों पर पहुंचकर भारत का मान बढ़ाया है। स्पेस टेक्नोलॉजी में भारतीय वैज्ञानिकों ने नए कीर्तिमान गढ़े हैं। राज्य सरकार ने भी अपनी स्पेस-टेक पॉलिसी लॉन्च की है। मध्यप्रदेश को सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए हम निरंतर प्रयास कर रहे हैं। 

8th Pay Commission: महंगाई के असर से बदल सकते हैं वेतन के नियम, कर्मचारियों की नई मांग

नई दिल्ली ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज़ फेडरेशन (AIDEF) ने आठवें वेतन आयोग से महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) का कैलकुलेशन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले फॉर्मूले में बदलाव की मांग की है. उनका कहना है कि मौजूदा फॉर्मूला कर्मचारियों और पेंशनर्स पर महंगाई के बोझ का सही कैलकुलेशन नहीं करता है।  महंगाई के अनुसार ज्‍यादा खर्च  अभी महंगाई भत्ता (DA) और पेंशन भत्ता (DR) में संशोधन अखिल भारतीय औद्योगिक श्रमिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW) के 12 महीने के एवरेज पर बेस्‍ड है. यह इंडेक्‍स कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बढ़ती कीमतों के लिए नुकसान की भरपाई करने और महंगाई के खिलाफ उनकी खरीदने की क्षमता की रक्षा के लिए है।  मौजूदा फॉर्मूले में बड़ी खामियां             हालांकि, आठवें वेतन आयोग को सौंपे गए अपने दूसरे डिमांड में AIDEF ने कहा कि मौजूदा फॉर्मूले में महत्वपूर्ण कमियां हैं और यह कर्मचारियों और सेवानिवृत्त लोगों के बदलते खर्च करने के तरीकों को पर्याप्त रूप से नहीं दिखा सकता है।    देखें ये आंकड़े        फेडरेशन के अनुसार, 2022-23 में पेश किए गए संशोधित कंज्‍यूमर प्राइस इंडेक्‍स में फूड आइटम्‍स और मौसमी एग्री प्रोडक्‍ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी को पर्याप्‍त तौर पर नहीं बताता है. एआईडीईएफ ने बताया कि खाद्य और पेय पदार्थों का भार अब सूचकांक में 36.75% है, जबकि आवास, स्वास्थ्य सेवा, परिवहन, संचार और डिजिटल सेवाओं जैसी कैटेगरी को ज्‍यादा वेटेज दिया गया है।    पेंशनर्स के लिए चुनौती AIDEF ने पेंशनभोगियों के चुनौतियों का भी जिक्र किया, जिनमें से कई अपनी मंथली इनकम का एक बड़ा हिस्सा स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम, दवाओं, चिकित्सा उपचार और देखभाल सेवाओं पर खर्च करते हैं. अगर इन आवश्यक वस्तुओं की कीमतें महंगाई से ज्‍यादा बढ़ती हैं, तो महंगाई राहत में बदलाव उतना नहीं होता है।  मौजूदा फॉर्मूले की जांच की मांग इन चिंताओं को देखते हुए, AIDEF ने मौजूदा महंगाई फॉर्मूले की जांच करने और सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के खर्च को मैनेज करने के लिए बदलने के लिए कहा है।  हर राज्‍य में आयोग की हो रही बैठक गौरतलब है कि आठवें वेतन आयोग की बैठक कई राज्‍यों में पूरी हो चुकी है, जिसमें सैलरी बढ़ोतरी, महंगाई भत्ते में इजाफा और फिटमेंट फैक्‍टर समेत कई मांग रखी गई है. 

वोटर लिस्ट अपडेट के लिए पंजाब में बड़ा अभियान, 86% मैपिंग पूरी; कल से शुरू होगा SIR

अमृतसर  पंजाब में मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए 25 जून से विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान शुरू किया जा रहा है। इसके तहत राज्यभर में 24,453 बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे। यह अभियान 24 जुलाई तक चलेगा। पंजाब की मुख्य चुनाव अधिकारी अनिंदिता मित्रा ने बुधवार को पंजाब भवन में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर अभियान की रूपरेखा साझा की। उन्होंने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से संचालित की जाएगी। 2.14 करोड़ मतदाताओं तक पहुंचेगा चुनावी अमला मुख्य चुनाव अधिकारी के अनुसार, राज्य के 24,453 BLO अगले एक महीने तक घर-घर जाकर गणना प्रपत्र वितरित करेंगे, उनका सत्यापन करेंगे और उन्हें वापस एकत्र करेंगे। इस दौरान पंजाब के 2 करोड़ 14 लाख 61 हजार 43 मतदाताओं का डेटा अपडेट किया जाएगा। साथ ही मतदान केंद्रों के युक्तिकरण का कार्य भी 24 जुलाई तक पूरा कर लिया जाएगा। 3 अगस्त को जारी होगी प्रारूप मतदाता सूची अभियान पूरा होने के बाद 3 अगस्त को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद मतदाता नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन से संबंधित दावे और आपत्तियां 2 सितंबर तक दर्ज करा सकेंगे। इनका निपटारा 28 सितंबर तक किया जाएगा और 1 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी जाएगी। 86 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं की मैपिंग पूरी बैठक के दौरान बताया गया कि पंजाब में अब तक 86.02 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग पूरी हो चुकी है। जिन मतदाताओं की मैपिंग नहीं हो सकी है, उनकी सूची सभी राजनीतिक दलों को उपलब्ध करा दी गई है। चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों से अभियान को सफल बनाने में सहयोग की अपील की है। सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि रहे मौजूद बैठक में अतिरिक्त मुख्य चुनाव अधिकारी अमनदीप गर्ग, संयुक्त मुख्य चुनाव अधिकारी नवनीत कौर बल्ल समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। आम आदमी पार्टी की ओर से फैरी सॉफ्ट, कांग्रेस की ओर से हरदीप सिंह किंगरा और हैप्पी खेड़ा, भाजपा की ओर से परमपाल कौर, शिरोमणि अकाली दल की ओर से एडवोकेट अर्शदीप सिंह क्लेर और नछत्तर सिंह गिल तथा बसपा की ओर से जसवंत राय और हरभजन सिंह उपस्थित रहे। इस अभियान के जरिए चुनाव आयोग राज्य की मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाने का प्रयास करेगा, ताकि आगामी चुनावों में पात्र मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग कर सकें।  

यमुना जल बंटवारे पर बनी सहमति, 32 साल बाद हरियाणा-राजस्थान करेंगे समझौता

जयपुर /चंडीगढ़  हरियाणा और राजस्थान के बीच पिछले 32 वर्षों से लंबित यमुना जल बंटवारे का विवाद आखिरकार सुलझ गया है. दोनों राज्यों ने वर्ष 1994 के यमुना जल समझौते को लागू करने पर सहमति बना ली है. इस ऐतिहासिक सहमति को औपचारिक रूप देने के लिए सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में दोनों राज्यों के बीच एक आधिकारिक MoU पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।  इस मौके पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, राजस्थान सीएम भजनलाल शर्मा और हरियाणा सीएम नायब सिंह सैनी भी मौजूद रहेंगे. समझौते से पहले दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय त्रिपक्षीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें विवाद के स्थायी समाधान पर अंतिम सहमति बनी।  बैठक में राजस्थान और हरियाणा सरकारों ने आपसी समन्वय के साथ दशकों पुराने गतिरोध को समाप्त करने की कार्ययोजना को मंजूरी दी. यह विवाद मुख्य रूप से वर्ष 1994 में हुए यमुना जल समझौते के क्रियान्वयन को लेकर था. उस समझौते के तहत मॉनसून के दौरान यमुना में उपलब्ध अतिरिक्त पानी में राजस्थान को भी हिस्सेदारी दी गई थी।  हालांकि, आवश्यक बुनियादी ढांचे के अभाव और तकनीकी बाधाओं के चलते यह योजना पिछले 32 वर्षों से लागू नहीं हो सकी थी. इसका सबसे अधिक असर राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र पर पड़ा, जहां चूरू, झुंझुनूं और सीकर जिले लंबे समय से पेयजल संकट का सामना कर रहे हैं।  अब हाल ही में हुई उच्च स्तरीय बैठक में बनी सहमति के बाद हथिनिकुंड बैराज से राजस्थान तक पाइपलाइन बिछाकर पानी पहुंचाने का रास्ता साफ हो गया है. इस परियोजना के पूरा होने पर शेखावाटी क्षेत्र के लाखों लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।  सरकारों का मानना है कि यह समझौता न केवल दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे जल विवाद का समाधान करेगा, बल्कि राजस्थान के जल-संकटग्रस्त इलाकों के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि साबित होगा. इससे क्षेत्र में पेयजल उपलब्धता बढ़ेगी और भविष्य में जल प्रबंधन को लेकर राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सकेगा। 

मंगेतर सिया के जन्मदिन को खास बनाना चाहता था केतन, महाबलेश्वर में की थी बड़ी बुकिंग

 पुणे जिस सिया गोयल ने अपने मंगेतर केतन अग्रवाल किले से धक्का देकर मार दिया, उसने सिया के बर्थडे पर ग्रैंड सेलिब्रेशन की तैयारी कर रखी थी. जांच में सामने आया है कि 19 जून को केतन अग्रवाल ने महाबलेश्वर के एक बड़े रिजॉर्ट में लगभग 40 से 50 कमरे बुक किए थे. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सिया गोयल पर केतन अग्रवाल की हत्या की मुख्य साजिशकर्ता होने का आरोप है।  इस पूरे मामले की जांच करने वालों का दावा है कि सिया ने इस पूरे कांड की साजिश इसलिए रची, क्योंकि वह केतन अग्रवाल से शादी नहीं करना चाहती थी. वह अपने बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी के साथ रिलेशन रखना चाहती थी।  पुलिस ने कहा कि सिया ने अपने बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी के साथ मिलकर हत्या की प्लानिंग की. जांच के दौरान सामने आया कि सिया पहले 31 मई को केतन के साथ ट्रेकिंग के लिए लोहागढ़ किले गई थी. पुलिस को शक है कि इसी दौरान केतन को चट्टान से नीचे धकेलने का खयाल सबसे पहले उसके मन में आया था।  इसके बाद 14 जून को दोनों ने फिर से फोटोशूट के बहाने लोहागढ़ किले का विजिट किया. इस दौरान सिया ने यह कहकर हंगामा कर दिया कि उसके पास एक सांप आ गया है, लेकिन केतन को घाटी में धकेलने की प्लानिंग नाकाम रही. बाद में 18 जून को सिया के बर्थडे से एक दिन पहले वह केतन को एक बार फिर लोहागढ़ किले ले गई. पुलिस का दावा है कि चेतन चौधरी के साथ मिलकर उसने केतन को चट्टान से नीचे धकेल दिया गया।  मंगेतर के साथ सिया की रोमांटिक पोस्ट पुणे में मंगेतर की हत्या करने वाली 20 साल की सिया गोयल ने सोशल मीडिया अकाउंट पर केतन अग्रवाल (26) के साथ कई रोमांटिक पोस्ट किए थे। कभी प्रपोजल की तस्वीरें, कभी फूल देकर प्यार जताने वाले पल, तो कभी डांस और गले मिलने के वीडियो। दोनों की नवंबर में होने वाली शादी की तैयारियां भी सोशल मीडिया पोस्ट का हिस्सा थीं। इस साल फरवरी में सगाई के बाद सिया ने इंस्टाग्राम पर एक केक की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा था- मेरे दिल को उसका घर मिले एक महीना पूरा हुआ। उसने केतन को टैग भी किया था। पुलिस के मुताबिक, 18 जून को केतन की मौत के दिन लोहगढ़ किले पर एक युवक 33°C तापमान में हुडी पहनकर आया था। पुलिस ने जांच में इसे ही आधार बनाकर एक-एक कड़ियां जोड़ीं। आखिरकार सिया और उसे बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी (22) को केतन की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया। 19 जून को सिया का बर्थडे, केतन से पहले से सेलिब्रेशन शुरू कर दिया सोशल मीडिया पर सिया और उसके मंगेतर केतन का रिश्ता किसी परफेक्ट लव स्टोरी जैसी थी। 19 जून को सिया का बर्थडे था। केतन ने एक महीने पहले यानी 19 मई से ही काउंटडाउन सेलिब्रेशन शुरू कर दिया था। वह रोज उसे अलग-अलग तरीके से अपनी मंगेतर सरप्राइज देता। सिया सोशल मीडिया पर इसके वीडियो पोस्ट करती थी। ये पोस्ट अब वायरल हो रहे हैं। एक पोस्ट में केतन अपनी कार फूलों से सजाकर सिया को गिफ्ट देता दिखा। सिया ने इसका वीडियो पोस्ट कर लिखा- उसने 'पसंद है तुम्हें' वाली बात को बहुत सीरियसली से ले लिया। बैकग्राउंड में 'पसंद है तुम्हें' गाना भी बज रहा था। एक स्टोरी में उसने केतन की तस्वीर को ‘दैट स्माइल’ कैप्शन के साथ शेयर किया था। केतन की मौत के अगले दिन सिया ने इंस्टाग्राम पर एक इमोशनल पोस्ट लिखी- ‘केतन तुम मुझे मेरे जन्मदिन पर अकेला छोड़ गए। वापस आ जाओ।’ पिता ने बयां किया दर्द, बोले- बेटा कोहिनूर था केतन के पिता विशाल अग्रवाल से जब बात की गई तो उन्होंने कहा कि 26 साल का बेटा गुजर गया, ये दुख समंदर से बड़ा है. मेरा बेटा मेरे बुढापे का सहारा था, मेरा वंशज था. विशाल अग्रवाल ने कहा कि मेरी चिता को वही मुखाग्नि देने वाला था. आज वही चला गया. मेरा सब खत्म हो गया. उन्होंने बताया कि केतन पढ़ाई में होशियार था. उसने यूएस से एमबीए किया था. इसके बाद वह मेरे बिजनेस में ही हाथ बंटा रहा था. बेटा मेरे लिए कोहिनूर था, जिसे धोखे से मार दिया।  कॉल रिकॉर्ड से प्रेमी का खुलासा, 2004 कॉल्स और 238 घंटे बातचीत हुई पुलिस को कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और डिजिटल कम्युनिकेशन डेटा की जांच से पता चला सिया चेतन नाम के लड़के से लगातार संपर्क में थी। दोनों के बीच 1 जनवरी से 18 जून तक 2004 कॉल्स हुए। इससे दोनों के बीच गहरे संबंध के संकेत मिले। पुलिस ने चेतन की तस्वीरों और सोशल मीडिया प्रोफाइल की जांच की। जब उसकी तस्वीरों को CCTV फुटेज में दिख रहे हुडी वाले युवक से मैच किया गया तो हत्या का शक और मजबूत हो गया। इसके बाद पुलिस ने चेतन चौधरी को हिरासत में लिया। प्रेमी बोला- सिया बदनामी के कारण भागकर शादी के खिलाफ थी पूछताछ में चेतन से जब पूछा गया कि सिया और तुमने भागकर शादी क्यों नहीं की। इस पर उसने बताया कि सिया सगाई तोड़कर भागने के पक्ष में नहीं थी। उसे लगता था कि इससे उसके परिवार की बदनामी होगी। इसके बाद पुलिस ने सिया और चेतन दोनों को गिरफ्तार कर हत्या और आपराधिक साजिश के आरोप में मामला दर्ज किया। रियल एस्टेट कारोबारी थे केतन, शादी के लिए 17 करोड़ में पैलेस बुक था केतन अग्रवाल पुणे के गहुंजे के रहने वाले थे। वे रियल एस्टेट कारोबारी और सक्सेस ग्रुप के डायरेक्टर विशाल अग्रवाल के बेटे थे। विशाल पुणे के रियल एस्टेट सर्कल में ‘लैंड बैंक’ माने जाते हैं। केतन भी कंपनी में डायरेक्टर और चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (CMO) के पद पर थे। उन्होंने सिंबायोसिस यूनिवर्सिटी से BBA किया था। अमेरिका के बैब्सन F.W. ओलिन ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस से एंटरप्रेन्योरशिप में MS (मास्टर ऑफ साइंस) की डिग्री ली। सिया ड्राई फ्रूट्स कारोबारी की बेटी है। नवंबर में दोनों की शादी होनी थी। इसके लिए राजस्थान में 17 करोड़ रुपए का एक पैलेस बुक किया जा चुका था। मेहमानों के लिए दो चार्टर्ड प्लेन बुक थे। बहन को हुआ शक, 4 दिन बाद पहुंची थी सिया पुलिस जांच में 18 जून की … Read more

पाकिस्तान को भारत का सख्त संदेश, ख्वाजा आसिफ के बयान पर PoK का मुद्दा उठाकर दिया जवाब

 नई दिल्ली भारत ने  पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के हालिया युद्ध संबंधी बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. भारत ने कहा कि पीओके में अपनी नाकामियों को छिपाने और मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान भटकाने के लिए पाकिस्तान की ओर से ऐसी बयानबाजी की जा रही है. साथ ही भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर हो रही कार्रवाई का मुद्दा भी उठायाव्।  विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा, 'पाकिस्तानी रक्षा मंत्री की टिप्पणियों को लेकर हमने रिपोर्ट्स देखी हैं. इस तरह के बयान पाकिस्तान की अपनी विफलताओं को छिपाने और मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान हटाने की हताश कोशिश हैं. हम इन मनगढ़ंत दावों को पूरी तरह खारिज करते हैं.' रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूदा हालात पाकिस्तान की दशकों पुरानी नीतियों का नतीजा हैं।  उन्होंने कहा, 'पीओके में चल रहे घटनाक्रम पाकिस्तान की उस नीति का सीधा परिणाम हैं, जिसमें आर्थिक शोषण, मौलिक अधिकारों से वंचित करना और अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों में प्रशासनिक दमन शामिल रहा है.' विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई कर रही है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान ने पीओके में सरकारी विरोधी प्रदर्शनों को दबाने के लिए आवश्यक वस्तुओं और दवाओं की आपूर्ति रोकी है, इंटरनेट सेवाएं बंद की हैं और निहत्थे नागरिकों के खिलाफ बल प्रयोग किया है।  रणधीर जायसवाल ने कहा कि इन घटनाओं में कई लोगों की जान भी गई है. भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी इस मामले में पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की मांग की. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'हम उम्मीद करते हैं कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को उसके कृत्यों, गलत नीतियों और मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जवाबदेह ठहराएगा।  भारत की यह प्रतिक्रिया पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की उस चेतावनी के तीन दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि सिंधु जल संधि को लेकर भारत की किसी कार्रवाई से पाकिस्तान की जल सुरक्षा प्रभावित होती है तो उनका देश सैन्य कार्रवाई का रास्ता अपना सकता है. एक पाकिस्तानी न्यूज चैनल से बातचीत में ख्वाजा आसिफ ने कहा था, 'जिस क्षण हमें लगेगा कि हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा, जिसमें पानी भी शामिल है, खतरे में है, हम भारत के खिलाफ युद्ध शुरू करेंगे. निश्चित रूप से करेंगे। 

कोलकाता हादसे का भयावह मंजर, चश्मदीद बोला- मलबे में दबे लोग मदद की गुहार लगा रहे थे

कोलकाता कोलकाता के तारातला इलाके में बुधवार को बड़ा हादसा हो गया. यहां एक निर्माणाधीन फैक्ट्री शेड के गिरने से 18 लोग घायल हो गए और कई अन्य के फंसे होने की आशंका है. हादसे से बचाए गए लोगों में से चार की हालत गंभीर बताई जा रही है. मलबे के नीचे फंसे लोगों को ढूंढने और निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. हालांकि अभी यह सामने नहीं आ सका है कि इमारत के भीतर कितने लोग फंसे थे. घायलों को उपचार के लिए शहर के SSKM Hospital भेजा गया है। मलबे से निकाले गए 18 घायलों को SSKM अस्पताल में भेजा गया है।   पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी मौके पर पहुंचे और घटना स्थल पर राहत व बचाव कार्य का जायजा लिया।   केंद्रीय मंत्री सुकांता मजुमदार ने कहा, 'अभी-अभी यह हादसा हुआ है. इस समय सबसे महत्वपूर्ण काम राहत और बचाव अभियान है. बचाव कार्य जारी है और हमारी सरकार पूरे मामले पर नजर रखे हुए है.' उन्होंने कहा, कि हो सकता है कि इस निर्माण की अनुमति पिछली सरकार के दौरान दी गई हो. ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं. हाल ही में यह भी देखा गया था कि कोलकाता नगर निगम ने कई ऐसे निर्माण कार्यों को अनुमति दी थी जो अवैध थे. सरकार इस पूरे मामले की जांच करेगी और सभी पहलुओं को देखेगी।  मजदूरों पर गिरे बीम और भारी स्लैब सामने आया है कि शेड में काम कर रहे मजदूरों पर लोहे के बड़े भारी बीम और कंक्रीट के स्लैब गिर पड़े, जिससे उन्हें निकलने का मौका नहीं मिला और वह मलबे में ही दबे रह गए. ढांचा गिरने के तुरंत बाद, बचाव दल मौके पर पहुंचा और लोगों का रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उन्हें मलबे के नीचे से मदद के लिए चीखें सुनाई दे रही थीं, क्योंकि बचाव दल अंदर दबे लोगों तक पहुंचने के लिए जी-जान से काम कर रहे थे।  मलबे में दबे लोगों की चीख-पुकार घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचने वालों में शामिल उज्ज्वल कुमार ने हादसे के बाद का भयावह मंजर बताया. उन्होंने कहा कि मलबे के नीचे दबे लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे. उन्होंने और उनके साथियों ने मौके पर पहुंचकर फंसे लोगों को पानी पिलाया और राहत कार्य में मदद की।  ग्राउंड फ्लोर पर चल रहा था काम मौके पर मौजूद एक शख्स ने बताया कि नीचे ग्राउंड फ्लोर पर काम चल रहा था. पहली और दूसरी मंजिल पर कंक्रीट के स्ट्रक्चर का काम पूरा हो चुका था. नीचे काम करते हुए लोगों पर ही पूरी इमारत ढह गई. दमकल विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि कंक्रीट डालने के काम के दौरान शेड ढह गया और उन्होंने यह भी कहा कि घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।  भारी बीम बन रही रेस्क्यू ऑपरेशन में रोड़ा भारी बीम और मोटी सरिया के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में दिक्कत आ रही है इसलिए उन्हें हटाने के लिए गैस कटर का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि फंसे हुए लोगों तक पहुंच बनाने के लिए  ड्रिलिंग की जा रही है. कोलकाता पुलिस की आपदा प्रबंधन टीम के एक सदस्य ने कहा, 'मलबे के नीचे से लोगों के शोर सुनकर आवाज की दिशा में काम किया जा रहा है.' पश्चिम बंगाल सरकार ने स्थिति पर नज़र रखने और बचाव एवं राहत कार्यों के समन्वय के लिए राज्य सचिवालय नबन्ना में एक कंट्रोल रूम बनाया गया है. राज्य मंत्री इंद्रनील खान ने बचाव कार्यों की समीक्षा करने के लिए घटनास्थल का दौरा किया।  कैसे हुआ हादसा, होगी जांच- इंद्रनील खान इंद्रनील खान ने कहा है कि, 'हम हादसे के कारणों और किसी भी तरह की गड़बड़ी की जांच भी करेंगे, लेकिन अभी हमारी प्राथमिकता लोगों को बचाना है.' शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल और कोलकाता नगर आयुक्त स्मिता पांडे भी घटनास्थल पर पहुंचीं, जबकि भाजपा नेता राकेश सिंह इससे पहले ही वहां का दौरा कर चुके थे. पिछले छह से सात महीनों से गोदाम का निर्माण कार्य चल रहा था. यह ज़मीन बेहेरा ब्रदर्स कंस्ट्रक्शन के शंभू बेहेरा की है, जबकि इस प्रोजेक्ट को डिवेलप असगर खान कर रहे थे. असगर खान का इलाके में दबदबा बताया जाता है. सामने आ रहा है कि इमारत के बनाए जाने में सुरक्षा मानकों और सुरक्षित निर्माण के तौर-तरीकों का पालन नहीं किया गया था. इन दावों पर आगे की जांच की जा रही है।  सरकार करेगी पूरे मामले की जांच- केंद्रीय मंत्री सुकांता मजुमदार इस हादसे को लेकर केंद्रीय मंत्री सुकांता मजुमदार ने कहा, 'अभी-अभी यह हादसा हुआ है. इस समय सबसे महत्वपूर्ण काम राहत और बचाव अभियान है. बचाव कार्य जारी है और हमारी सरकार पूरे मामले पर नजर रखे हुए है.' उन्होंने कहा, कि हो सकता है कि इस निर्माण की अनुमति पिछली सरकार के दौरान दी गई हो. ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं. हाल ही में यह भी देखा गया था कि कोलकाता नगर निगम ने कई ऐसे निर्माण कार्यों को अनुमति दी थी जो अवैध थे. सरकार इस पूरे मामले की जांच करेगी और सभी पहलुओं को देखेगी।  तारातला में निर्माणाधीन गोदाम का शेड गिरने के बाद मौके पर राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है. मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए प्रशासन, दमकल विभाग और अन्य एजेंसियां संयुक्त रूप से काम कर रही हैं. हादसे के कारणों की जांच भी शुरू कर दी गई है।