samacharsecretary.com

अमेरिका-ईरान टकराव के बीच समुद्र में नई सैन्य हलचल

तेहरान  ईरान ने अपनी हल्की पनडुब्बियों को होर्मुज जलडमरूमध्य में तैनात करने का फैसला लिया है। फारस खाड़ी की डॉल्फिन कहे जाने वाली ये पनडुब्बियां दुश्मन के जहाजों और युद्धपोतों को निशाना बना सकती हैं। ईरान की ओर से यह ऐलान ऐसे समय किया गया है, जब होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका के साथ उसका तनाव चरम पर है। दोनों देशों के बलों में इस हफ्ते गोलाबारी के बाद होर्मुज के आसपास भारी तनातनी है। ऐसे में ईरान की ओर से पनडुब्बियों की तैनाती समुद्र में चल रहे टकराव को और ज्यादा बढ़ा सकती है। ईरान नेवी के कमांडर रियर एडमिरल शाहराम ईरानी की ओर से रविवार को ऐलान किया गया है कि स्वदेशी रूप से निर्मित हल्की पनडुब्बियां 'फारसी खाड़ी की डॉल्फिन' को होर्मुज जलडमरूमध्य में उतार दिया गया है। बयान में कहा गया है कि खतरों, क्षमताओं और ऑपरेशनल जरूरतों के आधार पर इन सबमरीन को तैनात और विस्तारित किया जा रहा हैं। अलर्ट पर रहती हैं ये पनडुब्बी भारत में ईरान के दूतावास के एक्स अकाउंट पर बताया गया है कि फारसी खाड़ी की डॉल्फिन हर समय अलर्ट पर रहती हैं और कार्रवाई के लिए तैयार रहती हैं। ये हल्की पनडुब्बियां होर्मुज जलडमरूमध्य के रणनीतिक जलक्षेत्र में समुद्र तल पर लंबे समय तक विश्राम (बॉटम रेस्ट) कर सकती हैं। इससे यह दुश्मन जहाजों पर नजर रख पाती हैं। ईरानी नेवी की ओर से बताया गया है कि उसकी ये पनडुब्बियां ना सिर्फ दुश्मन जहाजों को ट्रैक करती हैं बल्कि साथ ही जरूरत पड़ने पर हमला भी कर सकती हैं। दुश्मन के जहाजों को ट्रैक करने और उन्हें बेअसर करना इन पनडुब्बियों की क्षमता का ही एक अहम हिस्सा है, जो समुद्र में इनकी ताकत बढ़ाता है। पानी के नीचे कर रहीं गश्त बयान में कहा गया है कि ईरान की समुद्री प्रतिरोधक क्षमता का प्रदर्शन करने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य में 'डेना' डिस्ट्रॉयर पर मारे गए लोगों को समर्पित एक ऑपरेशन के दौरान ये पनडुब्बियां पानी की सतह पर आईं। कई सैन्य-गठन अभ्यास करने के बाद वे अपने मिशन को जारी रखने के लिए फिर से पानी के नीचे चली गईं। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का अहम समुद्री रूट है। खाड़ी देशों से दुनिया के बड़े हिस्से में इसी रास्ते से तेल-गैस पहुंचता है। अमेरिका और इजरायल के 28 फरवरी को किए गए हमलों के जवाब में ईरान ने यहां यातायात रोक दिया है। अमेरिका ने भी इसे ब्लॉक करते हुए दुनिया के जहाजों को इससे ना गुजरने देने का ऐलान कर दिया है। इसके चलते यह इलाका संवेदनशील बना हुआ है। एनर्जी सप्लाई पर संकट ईरान और अमेरिका की नाकेबंदी ने दुनिया की एनर्जी सप्लाई को संकट में डाल दिया है। खाड़ी देशों के होर्मुज से होकर गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही रुकने का सीधा असर तेल-गैस की कीमत पर हो रहा है। इसका सीधा असर साउथ एशिया और दुनिया के दूसरे हिस्से के साथ-साथ अमेरिकी बाजार पर भी हुआ है। भारत में भी इसका प्रभाव देखा गया है।  

Mother’s Day Gift: रायपुर महिला जेल में वीडियो कॉलिंग सुविधा शुरू, कैदियों को परिवार से मिलने का नया जरिया

रायपुर आज मदर्स डे के ममतामयी अवसर पर रायपुर की महिला जेल में बंदिनियों के लिए खुशियों की एक नई किरण जगी है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा की घोषणा के अनुरूप, जेल प्रशासन ने महिला बंदिनियों को प्रिजन इनमेट वीडियो कॉलिंग सिस्टम का बहुप्रतीक्षित तोहफा दिया है। अपनों से दूरी होगी कम वीडियो कॉलिंग की सुविधा से जेल विभाग और बीएसएनएल के बीच हुए अनुबंध के तहत इस सिस्टम को स्थापित किया गया है। अब महिला बंदी अपने परिजनों और अधिवक्ताओं से सीधे वीडियो कॉल के जरिए संवाद कर सकेंगी, जिससे उनके मानसिक संबल और कानूनी विमर्श में मदद मिलेगी।  हुनर को मिला सम्मान निश्चय कार्यक्रम के अंतर्गत कौशल विकास का प्रशिक्षण पूर्ण करने वाली 38 महिला बंदिनियों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह उनके पुनर्वास और भविष्य में स्वावलंबन की दिशा में एक बड़ा कदम है। जेल में अपनी माताओं के साथ रह रहे 14 मासूम बच्चों को विभाग की ओर से विशेष उपहार वितरित किए गए, जिससे बच्चों के चेहरे पर खिली मुस्कान खिल गया और जेल परिसर का माहौल उत्सवमय हो गया। इस संवेनदनशील पहल के शुभारंभ अवसर पर जेल और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें मुख्य रूप से श्री हिमांशु गुप्ता (डीजी, जेल), श्री योगेश सिंह क्षत्री (जेल अधीक्षक), श्री विजय छबलानी (प्रतिनिधि, BSNL), सुश्री गरिमा पांडेय (प्रभारी, महिला जेल) एवं समस्त जेल स्टाफ, संबंधित महिला बंदिनी उपस्थित रहे। यह पहल न केवल बंदिनियों को उनके मानवाधिकारों और परिवार से जोड़ने का माध्यम बनेगी, बल्कि जेल सुधार की दिशा में तकनीकी समावेश का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी पेश करेगी।

बाघ की दहशत से सहमे ग्रामीण, सूखी सेवनिया क्षेत्र में 15 दिन से बढ़ा खतरा

भोपाल. सूखी सेवनिया क्षेत्र में पिछले 15 दिनों से एक बाघ की लगातार मौजूदगी ने ग्रामीणों में दहशत फैला दी है। बाघ अब तक आधा दर्जन मवेशियों को अपना शिकार बना चुका है। डर का आलम यह है कि कई ग्रामीण रात में घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं, वहीं किसानों ने खेतों पर जाना भी कम कर दिया है। गांवों तक पहुंच रहा बाघ जिला पंचायत उपाध्यक्ष मोहन सिंह जाट के अनुसार बाघ कनेरा गांव सहित करोंद खुर्द, कड़ैया, छापर, अगरिया, मुगालिया कोट और चांचेड़ क्षेत्र में लगातार घूम रहा है। वह पहाड़ी और नदी किनारे के रास्तों से गांवों तक पहुंच रहा है और गांव के बाहर बंधे मवेशियों को शिकार बना रहा है। वन विभाग ने लगाए ट्रैप कैमरे वन परिक्षेत्र समरधा अंतर्गत बीट बालमपुर के कक्ष क्रमांक 160 में, जो नेशनल टेक्निकल रिसर्च आर्गेनाइजेशन को हस्तांतरित क्षेत्र से लगा हुआ है। सूचना मिलने के बाद वन विभाग मध्य प्रदेश की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। क्षेत्र में लगाए गए ट्रैप कैमरों में शिकार स्थल के आसपास बाघ की मौजूदगी दर्ज हुई है। वन विभाग ने पूरे इलाके में निगरानी बढ़ा दी है और टीम तैनात कर दी गई है। ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह वन अधिकारियों के अनुसार बाघ की गतिविधियों को देखते हुए सभी गांवों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। ग्रामीणों को रात में जंगल किनारे आवाजाही से बचने और मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर बांधने की सलाह दी गई है। क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है हलाली नदी के समीप आठ मई को एक गाय के शिकार की सूचना वन विभाग को प्राप्त हुई। वन अमले ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और क्षेत्र में ट्रैप कैमरा लगाए थे। पूरे क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है। – लोकप्रिय भारती, डीएफओ, वन विभाग

जगन्नाथ मंदिर पहुंचे CM विष्णुदेव साय, हरिनाम संकीर्तन यज्ञ में शामिल होकर मांगी प्रदेश की खुशहाली

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर के गायत्री नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में आयोजित हरिनाम संकीर्तन नामयज्ञ में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने विधि-विधान के साथ भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री साय ने हरिनाम संकीर्तन की परंपरा को भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन लोगों को आध्यात्मिक रूप से जोड़ने के साथ-साथ समाज में भाईचारे और सद्भाव का संदेश भी देते हैं। इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालुगण उपस्थित थे। मुगंली को देंगे 353 करोड़ की सौगात मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज मुंगेली जिले को 353 करोड़ 58 लाख रुपये से अधिक की विकास सौगात देंगे. जिला मुख्यालय मुंगेली में आयोजित इस बड़े कार्यक्रम में मुख्यमंत्री 414 विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे. इनमें 152 करोड़ 02 लाख रुपये से अधिक लागत के 284 कार्यों का लोकार्पण और 201 करोड़ 56 लाख रुपये से अधिक के 130 कार्यों का भूमिपूजन शामिल है. कार्यक्रम का मुख्य आयोजन डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्टेडियम, मुंगेली में होगा. मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में है.

बेंगलुरु में पीएम मोदी की यात्रा से पहले हड़कंप, विस्फोटक सामग्री बरामद

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र की बेंगलुरु यात्रा के दौरान सुरक्षा एजेंसियों में उस समय हड़कंप मच गया, जब उनके निर्धारित रूट के पास से जिलेटिन की छड़ें बरामद हुईं. यह घटना शहर के बाहरी इलाके कनकपुरा रोड की बताई जा रही है, जहां प्रधानमंत्री को एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए गुजरना था. विस्फोटक सामग्री मिलने के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत अलर्ट मोड में आ गईं और पूरे इलाके में सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया. पुलिस ने इस मामले में एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लिया है. उससे फिलहाल गुप्त स्थान पर पूछताछ की जा रही है. शुरुआती जांच के बाद सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया गया है ताकि प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान किसी भी तरह की चूक न हो. सुरक्षा जांच के दौरान मिलीं जिलेटिन स्टिक्स यह घटना रविवार सुबह की बताई जा रही है. बेंगलुरु के कग्गलीपुरा इलाके के पास थाथागुनी क्षेत्र में सुरक्षा जांच चल रही थी, तभी पुलिस को संदिग्ध विस्फोटक सामग्री दिखाई दी. यह स्थान उस मार्ग के बेहद करीब है, जहां से प्रधानमंत्री का काफिला गुजरने वाला था. इसी रास्ते से आगे Art of Living Foundation केंद्र भी पड़ता है, जहां प्रधानमंत्री का कार्यक्रम निर्धारित था. पुलिस सूत्रों के मुताबिक जिलेटिन की छड़ें एक पुल के पास कंपाउंड वॉल के किनारे फेंकी गई थीं. सूचना मिलते ही बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वायड को मौके पर बुलाया गया. इलाके की घेराबंदी कर पूरी जांच की गई. राहत की बात यह रही कि विस्फोटक सामग्री प्रधानमंत्री के काफिले के वहां पहुंचने से पहले ही बरामद कर ली गई. धमकी भरे फोन कॉल से शुरू हुआ पूरा मामला इस पूरे मामले की शुरुआत एक संदिग्ध फोन कॉल से हुई. जानकारी के अनुसार तड़के सुबह एक अज्ञात व्यक्ति ने स्थानीय पुलिस स्टेशन में कॉल कर दावा किया कि एचएएल एयरपोर्ट और आर्ट ऑफ लिविंग सेंटर के आसपास विस्फोट हो सकते हैं. फोन कॉल मिलते ही सुरक्षा एजेंसियां हरकत में आ गईं और बताए गए इलाकों में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया. हालांकि एचएएल एयरपोर्ट के आसपास कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली, लेकिन कनकपुरा रोड के पास जिलेटिन स्टिक्स बरामद होने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया. तकनीकी जांच और मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस ने एक संदिग्ध व्यक्ति को कोरामंगला इलाके के एक घर से हिरासत में लिया. पहले भी कर चुका है ऐसी हरकतें पूछताछ में सामने आया है कि पकड़ा गया व्यक्ति पहले भी वीआईपी दौरों के दौरान इसी तरह के धमकी भरे कॉल कर चुका है. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक अतीत में भी उसे हिरासत में लिया गया था, लेकिन उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने की बात सामने आने पर चेतावनी देकर छोड़ दिया गया था. हालांकि इस बार मामला ज्यादा गंभीर माना जा रहा है क्योंकि सिर्फ धमकी ही नहीं दी गई, बल्कि मौके से वास्तविक विस्फोटक सामग्री भी बरामद हुई है. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आरोपी ने यह विस्फोटक सामग्री कहां से हासिल की और उसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है. पुलिस कई एंगल से कर रही जांच मामले की जांच फिलहाल वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की निगरानी में चल रही है. डीसीपी स्तर के अधिकारी संदिग्ध और उसके परिवार के सदस्यों से पूछताछ कर रहे हैं. जांच एजेंसियों का मुख्य फोकस जिलेटिन स्टिक्स के स्रोत और उन्हें वहां रखने के उद्देश्य का पता लगाना है. इसके साथ ही पुलिस इस संभावना की भी जांच कर रही है कि कहीं यह किसी संगठित साजिश का हिस्सा तो नहीं था. अधिकारियों का कहना है कि मामले को बेहद संवेदनशील मानते हुए हर एंगल से जांच की जा रही है ताकि भविष्य में इस तरह की किसी सुरक्षा चूक को रोका जा सके.

RCB टीम का छत्तीसगढ़ पहुंचने पर भव्य स्वागत, खिलाड़ियों ने की कला, संस्कृति और खानपान की जमकर तारीफ

रायपुर  आईपीएल के रोमांच के बीच आरसीबी की टीम के छत्तीसगढ़ पहुँचने पर खिलाड़ियों का छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संस्कृति और लोककलाओं के साथ भव्य स्वागत किया गया। टीम 10 मई को रायपुर में Mumbai Indians के खिलाफ मुकाबला खेलेगी। रायपुर स्थित रिसॉर्ट में टीम के पहुँचते ही पारंपरिक तिलक, आरती और लोकनृत्य के माध्यम से खिलाड़ियों का स्वागत किया गया। इस दौरान छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की रंगत और पारंपरिक संगीत ने खिलाड़ियों का ध्यान आकर्षित किया। कई खिलाड़ी लोककलाकारों के प्रदर्शन को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करते नजर आए। इस वीडियो को आरसीबी ने अपने ऑफिसियल इंस्टा हैंडल पर शेयर किया है जिसे अब तक 50 लाख से भी ज्यादा लोग देख चुके हैं। वहीं इस मुकाबले को देखने मुकेश अम्बानी के बेटे आकाश अम्बानी भी रायपुर आ सकते हैं । वहीं 13 मई को होने वाले आरसीबी और केकेआर मैच देखने के लिए सुपरस्टार शाहरुख खान भी रायपुर आ सकते हैं। खिलाड़ियों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक खानपान के बारे में भी जानकारी दी गई। उन्हें प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों से परिचित कराया गया, जिसकी खिलाड़ियों ने सराहना की। आईपीएल मुकाबले को लेकर रायपुर में क्रिकेट प्रेमियों के बीच खासा उत्साह देखा जा रहा है। वहीं, खिलाड़ियों के पारंपरिक स्वागत ने खेल के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की संस्कृति और मेहमाननवाज़ी की भी अलग पहचान प्रस्तुत की है।

योगी कैबिनेट में बड़ा फेरबदल: 8 नेताओं को मिला मंत्री पद, जातीय संतुलन पर फोकस

 लखनऊ  योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल का दूसरा विस्तार दोपहर 3.30 बजे से जन भवन में हुआ। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने आठ मंत्रियों पद की शपथ दिलाई। भूपेन्द्र चौधरी और मनोज कुमार पाण्डेय ने कैबिनेट मंत्री और डॉ. सोमेंद्र तोमर व अजीत पाल ने राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार के पद की शपथ ली। इनके साथ कृष्णा पासवान, कैलाश सिंह राजपूत, सुरेन्द्र दिलेर व हंसराज विश्वकर्मा ने राज्यमंत्री के पद की शपथ ली। योगी आदित्यनाथ सरकार 2.0 में अभी मुख्यमंत्री, दो उपमुख्यमंत्री समेत 21 कैबिनेट मंत्री हैं। इनके साथ 14 राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 18 राज्य मंत्री हैं। सरकार में 54 मंत्री हैं तो अधिकतम 60 मंत्री ही बनाये जा सकते है। बिना किसी को मंत्रिमंडल से हटाए आठ को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। योगी आदित्यनाथ सरकार एक में कैबिनेट मंत्री रहे पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र चौधरी व रायबरेली के ऊंचाहार से विधायक समाजवादी पार्टी से बगावत करने वाले मनोज कुमार पाण्डेय ने कैबिनेट मंत्री के पद की शपथ ली। इनके साथ अति पिछड़ी जाति से आने वाले वाराणसी के विधान परिषद सदस्य हंसराज विश्वकर्मा, फतहेपुर की खागा सीट से विधायक अनुसूचित जाति की कृष्णा पासवान, अलीगढ़ के खैर से विधायक सुरेन्द्र दिलेर और कन्नौज के तिर्वा से विधायक कैलाश सिंह राजपूत ने पहली बार राज्यमंत्री के पद की शपथ ली। इन मंत्रियों ने ली पद की शपथ उत्तर प्रदेश जन भवन में आज आठ मंत्रियों को शपथ दिलाई गई। इनमें दो राज्यमंत्रियों के कद में बढ़ोतरी गई है। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह चौधरी व मनोज कुमार पाण्डेय ने कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली। चौधरी इससे पहले योगी आदित्यनाथ की पहली सरकार (2017-2022) में  पंचायती राज मंत्री  रह चुके हैं। रायबरेली के ऊंचाहार से विधायक और अखिलेश यादव सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे मनोज कुमार पाण्डेय ने योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री पद शपथ ली। लेंगे। कन्नौज के तिर्वा से विधायक विधायक कैलाश सिंह राजपूत मंत्रिपद की शपथ लेंगे। वाराणसी में भाजपा के जिलाध्यक्ष और विधान परिषद सदस्य हंसराज विश्वकर्मा अलीगढ़ के खैर से भाजपा के विधायक सुरेंद्र दिलेर फतेहपुर के खागा से भाजपा की विधायक कृष्णा पासवान मेरठ दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के विधायक डॉ. सोमेंद्र तोमर का कद बढ़ाया गया है। वह सरकार में राज्य मंत्री ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत हैं, अब इनको राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार के रूप में शपथ दिलाई जाएगी। कानपुर देहात के सिकंदरा से भाजपा के विधायक अजीत पाल योगी आदित्यनाथ सरकार में राज्य मंत्री विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग है। इनको प्रोन्नत किया गया है। अब यह राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार के पद की शपथ लेंगे। दो वर्ष पहले हुआ था पहला विस्तार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल का पहला विस्तार लोकसभा चुनाव से पहले पांच मार्च 2024 को हुआ था। तब सामाजिक समीकरण को ध्यान में रखते हुए पिछड़े, दलित, अगड़े के साथ ही पूरब से पश्चिम को साधते हुए चार नए कैबिनेट मंत्री बनाए गए थे। इनमें सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर, भाजपा एमएलसी दारा सिंह चौहान, मुजफ्फरनगर की पुरकाजी सीट से रालोद विधायक अनिल कुमार और गाजियाबाद की साहिबाबाद सीट से भाजपा विधायक सुनील कुमार शर्मा मंत्री बने थे। इसके साथ कैबिनेट मंत्रियों की संख्या मुख्यमंत्री योगी सहित 22 हो गई, लेकिन लोकसभा चुनाव के बाद जितिन प्रसाद केंद्रीय मंत्री बन गए थे। इस तरह से वर्तमान में 21 कैबिनेट मंत्री हैं। मौजूदा मंत्रिमंडल का जातीय समीकरण योगी आदित्यनाथ 2.0 सरकार जब गठित हुई उस समय पिछड़ा वर्ग के 20, आठ दलित, सात ब्राह्मण, छह राजपूत, चार वैश्य, दो भूमिहार मंत्री बनाय गये थे। पहले विस्तार में दो पिछड़े वर्ग मंत्रियों में बढ़ोत्तरी हुई, जिससे मंत्री पिछड़े वर्ग के मंत्रियों की संख्या 22 हो गई। इसके अतिरिक्त एक सुनील शर्मा ब्राह्मण को मंत्रिमंडल में स्थान मिला, लेकिन जितिन प्रसाद केंद्रीय मंत्री बन गये, जिससे ब्राहमण मंत्रियों की संख्या सात ही रही। अलबत्ता अनिल कुमार के रूप में दलित मंत्रियों की संख्या बढ़कर नौ हो गई थी। भाजपा विधायकों का जातीय समीकरण वर्तमान में भाजपा के पास 258 विधायक हैं। इनमें से 45 राजपूत, 42 ब्राह्णण, ओबीसी के 84, एससी के 59 और अन्य सवर्ण विधायक की संख्या 28 हैं। इसी तरह 100 सदस्यों वाली विधान परिषद में भाजपा के 79 सदस्य हैं। इनमें राजपूत 23, ब्राहम्ण 14, ओबीसी 26, मुस्लिम 02 और अन्य सवर्ण 12 और एससी वर्ग के दो सदस्य हैं। जातीय व क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में अब सिर्फ आठ महीने ही है। इसको देखते हुए भाजपा यूपी में योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए जातीय व क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश करेगी। जहां छह और मंत्री बनाए जा सकते हैं वहीं मौजूदा राज्यमंत्रियों में से कुछ को कैबिनेट मंत्री बनाया जाएगा। राज्यसभा चुनाव में सपा से बगावत करने वाले विधायकों में से दो को मंत्री पद का पुरस्कार मिल सकता है। वर्तमान में मुख्यमंत्री योगी, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक सहित कुल 54 मंत्री। राज्य में अधिकतम 60 मंत्री बन सकते हैं। जातीय व क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए मंत्रियों के छह रिक्त पदों को भरा जाएगा।  

अंबाला, सोनीपत और पंचकूला में निकाय चुनाव बने प्रतिष्ठा की लड़ाई, हरियाणा में नेताओं की पूरी ताकत झोंकी

 चंडीगढ़  नगर निगम और नगरपालिका चुनाव इस बार स्थानीय मुद्दों से आगे बढ़कर राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई में बदल गए हैं। अंबाला, सोनीपत, पंचकूला, सांपला और उकलाना में भाजपा और कांग्रेस ने पूरी ताकत झोंक दी है। कहीं पुराने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी आमने-सामने हैं तो कहीं विकास बनाम भ्रष्टाचार और बदहाली चुनावी केंद्र बने हुए हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा तक कई बड़े नेताओं ने चुनाव प्रचार किया। उकलाना में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता कुमारी सैलजा का प्रभाव और कांग्रेस की मजबूत पकड़ मानी जाती रही है, ऐसे में भाजपा के लिए यह किला भेदना आसान नहीं माना जा रहा। भाजपा ट्रिपल इंजन सरकार और विकास कार्यों को मुद्दा बना रही है, जबकि कांग्रेस स्थानीय समस्याओं और भ्रष्टाचार के आरोपों के साथ चुनाव मैदान में है। अब सभी प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में बंद होगी। कुछ जगह निर्दलीय प्रत्याशी भी अपनी ताकत दिखा रहे हैं। सोनीपत नगर निगम चुनाव में भाजपा विकास माडल और ट्रिपल इंजन सरकार को मुद्दा बनाकर प्रचार कर रही है, जबकि कांग्रेस नगर निगम कार्यालय में प्रॉपर्टी आइडी, भ्रष्टाचार और शहर की बदहाल व्यवस्था को चुनावी केंद्र बना रही है। भाजपा प्रत्याशी राजीव जैन अपने नौ महीने के कार्यकाल और सरकार के समर्थन को आधार बनाकर वोट मांग रहे हैं। उनके समर्थन में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली, सांसद मनोज तिवारी और कई मंत्री प्रचार कर चुके हैं। दूसरी ओर कांग्रेस प्रत्याशी कमल दिवान के समर्थन में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, दीपेंद्र हुड्डा, राज बब्बर और अन्य नेता मैदान में उतरे। कांग्रेस पेयजल, सड़क, सीवर, स्ट्रीटलाइट और सफाई व्यवस्था को मुद्दा बना रही है। चुनाव में शहरी मतदाताओं के साथ निगम क्षेत्र में शामिल गांवों के वोट भी अहम माने जा रहे हैं। पंचकूला: संगठनात्मक ताकत और पलायन के असर की परीक्षा पंचकूला नगर निगम चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है। भाजपा प्रत्याशी श्यामलाल बंसल के समर्थन में मुख्यमंत्री सहित कई मंत्री और राष्ट्रीय स्तर के नेता प्रचार में पहुंचे। भाजपा ने कई आजाद उम्मीदवारों को अपने पक्ष में बैठाकर चुनावी माहौल मजबूत करने का प्रयास किया। दूसरी ओर कांग्रेस प्रत्याशी सुधा भारद्वाज को संगठनात्मक कमजोरी और नेताओं के भाजपा में जाने से नुकसान झेलना पड़ा। कांग्रेस विधायक चंद्रमोहन के सहारे चुनाव मैदान में सक्रिय रही। यहां इनेलो और आम आदमी पार्टी भी मैदान में हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच माना जा रहा है। भाजपा 2020 की जीत दोहराने का दावा कर रही है, जबकि कांग्रेस स्थानीय मुद्दों और जनसंपर्क के भरोसे चुनाव लड़ रही है। सांपला पालिका: हुड्डा के प्रभाव क्षेत्र में भाजपा की परीक्षा रोहतक जिले की सांपला नगरपालिका चुनाव इस बार स्थानीय निकाय से आगे बढ़कर राजनीतिक प्रतिष्ठा का केंद्र बन गया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के प्रभाव वाले क्षेत्र में भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी है। चुनाव प्रचार के अंतिम दिन तक भाजपा संगठन और उसके नेता प्रत्याशी के समर्थन में सक्रिय दिखाई दिए। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी रही कि चुनावी गतिविधियों पर प्रदेश स्तर तक लगातार नजर रखी गई। भाजपा इस चुनाव को हुड्डा प्रभाव वाले क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के अवसर के रूप में देख रही है। दूसरी ओर कांग्रेस समर्थित खेमे और निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी रोड शो, नुक्कड़ सभाओं और जनसंपर्क के जरिए पूरी ताकत लगाई। चुनाव में स्थानीय मुद्दों के साथ राजनीतिक साख की लड़ाई भी खुलकर दिखाई दी। ननपा क्षेत्र के 15 हजार 624 मतदाता चेयरमैन पद के 10 और वार्डों के 53 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला करेंगे। उकलाना पालिका: कांग्रेस के गढ़ में कमल खिलाने की चुनौती हिसार जिले की उकलाना नगरपालिका चुनाव इस बार भाजपा के लिए राजनीतिक परीक्षा बन गया है। विधानसभा क्षेत्र में अब तक भाजपा को सफलता नहीं मिली है और यहां कांग्रेस का प्रभाव माना जाता रहा है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता कुमारी सैलजा का ये गृहक्षेत्र है ऐसे में भाजपा ने पहली बार चुनाव चिह्न पर वरिष्ठ नेता एवं वेयरहाउसिंग कारपोरेशन के पूर्व चेयरमैन श्रीनिवास गोयल की पुत्रवधु निकिता गोयल को मैदान में उतारा है। दूसरी ओर निर्दलीय प्रत्याशी रीमा सोनी को कांग्रेस, इनेलो और आम आदमी पार्टी का समर्थन मिला हुआ है। रीमा पूर्व पार्षद की बेटी हैं। चुनाव प्रचार में मुख्यमंत्री से लेकर कई मंत्री भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में पहुंचे, जबकि कांग्रेस विधायक नरेश सेलवाल और अन्य नेताओं ने भी पूरी ताकत झोंकी। पूर्व मंत्री अनूप धानक भी भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में सक्रिय रहे।

विजय बने मुख्यमंत्री, तमिलनाडु में सत्ता परिवर्तन पर पीएम मोदी ने दी बधाई

तमिलनाडु तमिलनाडु में 10 मई से विजय थलापति का राज शुरू हो चुका है। विजय के ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें तमिलनाडु का पद भार ग्रहण करने के लिए बधाई दी और साथ ही केंद्र सरकार की तरफ से पूरी मदद करने का भरोसा भी दिलाया। उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, "श्री सी. जोसेफ विजय को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर बहुत बधाई। उनके आगामी कार्यकाल के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं। केंद्र सकार तमिलनाडु सरकार और वहां के लोगों की भलाई के लिए लगातार काम करती रहेगी।"    तमिलनाडु की नई नवेली सरकार को बधाई देने के साथ ही एक दूसरे कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी कांग्रेस को एक परजीवी पार्टी बताते हुए अन्य विपक्षी पार्टियों को चेताया भी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस दशकों तक डीएमके के साथ खड़ी रही, लेकिन हवा बदलते ही उसने पाला भी बदल लिया। कांग्रेस को लेकर चेताया कर्नाटक में एक कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने कहा, "तमिलनाडु की मौजूद स्थिति को देखिए। वहां पर पिछले पच्चीस से तीस वर्षों तक कांग्रेस और डीएमके के बीच घनिष्ठ संबंध रहे। डीएमके के साथ गठबंधन ने कई बार कांग्रेस को संकटों से उबारा। वास्तव में, 2014 से पहले दस वर्षों तक कांग्रेस का जो शासन चला, वह काफी हद तक डीएमके के समर्थन के कारण ही कायम रहा। लेकिन जैसे ही राजनीतिक हवा ने रुख बदला, कांग्रेस पार्टी ने डीएम के को धोखा दे दिया। सत्ता की लालसा में चूर कांग्रेस ने पहले ही मौके पर डीएमके को छुरा घोंपा। अब कांग्रेस को राजनीतिक रूप से प्रासंगिक बने रहने के लिए एक और पार्टी की जरूरत है, जिसके सहारे वह आगे बढ़ सके।" विजय की ऐतिहासिक शपथ इससे पहले, अभिनेता से राजनेता बने थलापति विजय ने रविवार सुबह चेन्नई के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में हुए एक भव्य कार्यक्रम में पद और गोपनीयता की शपथ ली। उनके साथ ही नौ नए मंत्रियों ने भी शपथ ली। इस दौरान हजारों की संख्या में समर्थक वहां मौजूद थे। लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी वहां पर पहुंचे। शपथ के साथ ही विजय तमिलनाडु के नौवें मुख्यमंत्री बन चुके हैं। अपने पहले ही भाषण में उन्होंने साफ कर दिया कि सत्ता का एक ही केंद्र होगा, और वह स्वयं विजय ही होंगे। गौरतलब है कि हाल ही में संपन्न तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और 234 सदस्यीय विधानसभा में 108 सीटें जीतीं। बाद में पार्टी को विदुथलाई चिरुथाइगल काची (VCK) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) का समर्थन मिला, जिससे उसकी सीटों की संख्या 120 हो गई और उसने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया। विजय का शपथ ग्रहण तमिलनाडु में एक बड़ा राजनीतिक बदलाव है, क्योंकि लगभग 70 वर्षों में यह पहली बार है कि डीएमके-एआईएडीएमके गठबंधन से बाहर की कोई सरकार राज्य में सत्ता में आई है।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया मोड़: टीएमसी-वामपंथी संभावित एकता से बदले समीकरण

नई दिल्ली पश्चिम बंगाल में कभी वामपंथ की सबसे बड़ी विरोधी मानी जाने वाली मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सुर अब विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद बदलते नजर आ रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने भाजपा को रोकने के इराने से विपक्षी दलों से साथ आने की अपील की है। ममता ने संकेत दिए हैं कि भाजपा के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए उन्हें वामदलों और यहां तक कि धुर-वामपंथियों से भी परहेज नहीं है। उनका यह बयान न केवल बंगाल बल्कि देश की राजनीति में एक बड़ी हलचल पैदा कर रहा है। जिस ममता बनर्जी ने तीन दशक पुराने वामपंथी किले को ढहाया था, आज वही उनके साथ मंच साझा करने की बात कह रही हैं। ममता बनर्जी की राजनीति की नींव ही वामपंथ के विरोध पर टिकी थी। 1970 और 80 के दशक में जब पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चा अभेद्य माना जाता था, तब ममता बनर्जी एक आक्रामक युवा नेता के रूप में उभरीं। सिंगूर और नंदीग्राम आंदोलन से बनाई पहचान साल 2006-2008 के दौरान सिंगूर में टाटा नैनो प्लांट के खिलाफ भूमि अधिग्रहण आंदोलन और नंदीग्राम में पुलिस फायरिंग की घटनाओं ने ममता बनर्जी को बंगाल की जनमानस का मसीहा बना दिया। उन्होंने 'मां, माटी, मानुष' का नारा दिया, जिसने वामपंथ के उस सर्वहारा वर्ग को अपनी ओर खींच लिया जो कभी माकपा (CPIM) का आधार था। साल 2011 के विधानसभा चुनावों में ममता बनर्जी ने वह कर दिखाया जो असंभव माना जाता था। उन्होंने 34 साल पुराने वामपंथी शासन को उखाड़ फेंका। बुद्धदेव भट्टाचार्य की हार और राइटर्स बिल्डिंग से लाल झंडे का हटना भारतीय राजनीतिक इतिहास की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक थी। उस समय ममता ने कसम खाई थी कि वह बंगाल से वामपंथ का नामोनिशान मिटा देंगी। आज की मजबूरी या रणनीति? पिछले एक दशक में बंगाल की राजनीतिक जमीन पूरी तरह बदल चुकी है। वामदल हाशिए पर चले गए हैं और भाजपा मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी है। ममता बनर्जी अब महसूस कर रही हैं कि मतों का बिखराव अंततः भाजपा को फायदा पहुंचाता है। हालिया बयानों में ममता ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय स्तर पर और विशेष रूप से बंगाल में भाजपा के विजय रथ को रोकने के लिए विपक्ष की एकता अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि यदि देश को बचाना है और धर्मनिरपेक्षता को कायम रखना है तो सभी गैर-भाजपाई ताकतों को एक साथ आना होगा। इसमें उन्होंने विशेष रूप से 'वाम' और 'घोर वामपंथी' विचारधारा वाले समूहों का नाम लेकर सबको चौंका दिया है। जमीनी कार्यकर्ताओं का टकराव बंगाल के गांवों में आज भी टीएमसी और वामपंथी कार्यकर्ताओं के बीच खूनी संघर्ष का इतिहास रहा है। क्या शीर्ष नेतृत्व के हाथ मिलाने से जमीनी स्तर पर कार्यकर्ता एक-दूसरे को स्वीकार करेंगे? वामदलों के लिए ममता बनर्जी आज भी उनकी सत्ता छीनने वाली नेता हैं। माकपा के कई नेता ममता पर ही भाजपा को बंगाल में जगह देने का आरोप लगाते रहे हैं। धुर-वामपंथी समूह अक्सर संसदीय राजनीति से दूरी बनाकर रखते हैं या बेहद कट्टर रुख अपनाते हैं। ममता का उन्हें साथ आने का न्योता देना यह दर्शाता है कि वह भाजपा के खिलाफ एक संयुक्त मोर्चा बनाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। ममता बनर्जी का यह हृदय परिवर्तन राजनीति की उस कड़वी सच्चाई को दर्शाता है जहां "दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है।" 2011 में जिस वामपंथ को उन्होंने अपना सबसे बड़ा शत्रु माना था, 2026 की दहलीज पर खड़े बंगाल में वह उसे एक संभावित सहयोगी के रूप में देख रही हैं। भाजपा के 'हिंदुत्व कार्ड' की बढ़ती स्वीकार्यता ममता बनर्जी अब एक व्यापक छतरी तैयार करना चाहती हैं। यदि यह गठबंधन आकार लेता है तो यह भारतीय लोकतंत्र के सबसे दिलचस्प और विरोधाभासी गठबंधनों में से एक होगा। जहां 'तृणमूल' और 'लाल सितारा' एक ही झंडे के नीचे भाजपा को चुनौती देते नजर आएंगे।