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नगर परिषद चुनावों में सुरक्षा और नामांकन प्रक्रिया पर हाईकोर्ट की नजर, प्रशासन को अहम आदेश

गुरदासपुर. पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने गुरदासपुर, कादियां और दीनानगर की आगामी नगर परिषद चुनावों को ध्यान में रखते हुए चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। ये आदेश 26 मई 2026 को तीन याचिकाओं के संयुक्त निपटारे के दौरान जारी किए गए। डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस हरसिमरण सिंह सेठी और जस्टिस दीपक मंचंदा शामिल थे, ने बलजीत सिंह, सुखविंदर पाल सिंह और परमिंदर सिंह द्वारा दायर याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। याचिकाकर्ताओं के वकील याजुर शर्मा ने अदालत के समक्ष दलील दी कि जून के पहले सप्ताह में होने वाले चुनावों के दौरान उम्मीदवारों को नामांकन पत्र दाखिल करने से रोका जा सकता है या मनमर्जी से खारिज किया जा सकता है। साथ ही उन्होंने उम्मीदवारों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। इस पर अदालत ने चुनाव प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए स्पष्ट निर्देश जारी किए। अदालत ने आदेश दिया कि रिटर्निंग अधिकारी के कार्यालय, मतदान केंद्र, मतगणना केंद्र और वोटों के भंडारण स्थलों पर निगरानी कैमरे लगाना अनिवार्य होगा। किसी भी उम्मीदवार को नामांकन पत्र दाखिल करने से नहीं रोका जाएगा और यदि कोई नामांकन खारिज किया जाता है तो उसके स्पष्ट कारण लिखित रूप में 48 घंटों के भीतर देना अनिवार्य होगा। इसके अलावा नामांकन पत्र में छोटी गलतियों के मामले में उम्मीदवार को सुधार का अवसर देने के निर्देश भी दिए गए हैं। यदि किसी उम्मीदवार के पास नो-ऑब्जेक्शन प्रमाण पत्र नहीं है, तो वह शपथ पत्र के माध्यम से अपनी योग्यता साबित कर सकता है। अदालत ने सुरक्षा के मद्देनज़र संबंधित जिला पुलिस प्रमुख को निर्देश दिए हैं कि उम्मीदवारों की सुरक्षा से जुड़ी शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई की जाए और चुनाव स्थलों के आसपास अनधिकृत व्यक्तियों की मौजूदगी पर रोक सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही अदालत ने पंजाब राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि मशीनों या बैलेट पेपर के माध्यम से मतदान कराने के संबंध में 7 दिनों के भीतर निर्णय लिया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पहले जारी किए गए निर्देश भी इन तीनों नगर परिषदों पर लागू होंगे और कोई भी अधिकारी इनसे पीछे नहीं हट सकता। अदालत के इस फैसले को चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

निकाय चुनाव नतीजे: उकलाना में निर्दलीय जीत, सोनीपत और अन्य नगर निकायों में भाजपा मजबूत

 हिसार हरियाणा के हिसार जिले की उकलाना नगर पालिका चेयरपर्सन सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी रीमा सोनी ने शानदार जीत दर्ज की है। 23 वर्षीय रीमा सोनी ने भाजपा प्रत्याशी निकिता गोयल को 2806 वोटों के बड़े अंतर से हराकर चुनाव अपने नाम कर लिया। निकिता गोयल भाजपा के पूर्व चेयरमैन श्री निवास गोयल की बहू हैं। उकलाना का यह चुनाव इसलिए भी खास माना जा रहा था क्योंकि भाजपा और कांग्रेस दोनों ने इसे प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया था। कांग्रेस विधायक नरेश सेलवाल लगातार रीमा सोनी के पक्ष में प्रचार कर रहे थे, जबकि भाजपा उम्मीदवार के समर्थन में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी समेत पांच मंत्रियों ने चुनाव प्रचार किया था। चार राउंड में साफ हो गई तस्वीर मतगणना के दौरान शुरू से ही रीमा सोनी बढ़त बनाए रहीं। चार राउंड की गिनती में किसी भी चरण में वह पीछे नहीं हुईं। तीसरे राउंड के बाद ही उनके समर्थकों ने जीत का जश्न मनाना शुरू कर दिया था। मतगणना केंद्र के बाहर समर्थकों ने गुलाल उड़ाकर और नारे लगाकर खुशी जाहिर की। बताया जा रहा है कि दूसरे राउंड के बाद भाजपा नेता श्री निवास गोयल अपनी बहू निकिता गोयल के साथ काउंटिंग सेंटर से बाहर निकल गए थे। रीमा को मिले 7078 वोट चुनाव परिणाम के अनुसार रीमा सोनी को कुल 7078 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी निकिता गोयल को 4272 वोट हासिल हुए। इस तरह रीमा ने 2806 वोटों के अंतर से एकतरफा जीत दर्ज की। जीत के बाद रीमा सोनी ने समर्थकों के साथ रोड शो निकाला। उनके घर और चुनाव कार्यालय के बाहर समर्थकों की भारी भीड़ जुटी रही। पिता हरीश सोनी ने भी बेटी की जीत पर खुशी जताते हुए कहा कि जनता ने विकास और विश्वास के नाम पर मतदान किया है। सांपला नगर पालिका में निर्दलीय उम्मीदवारों का दबदबा हरियाणा निकाय चुनावों में कई नगर पालिकाओं और नगर निगमों के नतीजे सामने आने लगे हैं। सांपला नगर पालिका में निर्दलीय उम्मीदवारों का दबदबा देखने को मिला। यहां 16 वार्डों में से 10 वार्डों पर निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की, जबकि भाजपा को 6 सीटों पर सफलता मिली। परिणाम आने के बाद क्षेत्र में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सोनीपत में भाजपा की बड़ी जीत सोनीपत नगर निगम चुनाव में भाजपा ने बड़ी जीत दर्ज की है। भाजपा उम्मीदवार राजीव जैन मेयर चुनाव जीत गए हैं। वहीं वार्ड स्तर पर भी भाजपा को बढ़त मिलती नजर आई। वार्ड नंबर 14 से भाजपा प्रत्याशी किरन चांदना ने 1967 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। इसके अलावा वार्ड नंबर 13 से भाजपा के महेश लूथरा ने 1644 वोटों से जीत दर्ज की। थारूहेड़ा नगर पालिका चुनाव परिणाम धारूहेड़ा नगर पालिका वार्ड पार्षद चुनाव के नतीजे भी घोषित कर दिए गए हैं। वार्ड नंबर 1 से कविता, वार्ड 2 से देवेंद्र कुमार शर्मा, वार्ड 3 से त्रिलोक सिंह धारीवाल और वार्ड 4 से निहाल सिंह विजयी रहे। वार्ड 5 से गोपाल, वार्ड 6 से कृष्णा देवी, वार्ड 7 से मोनिका और वार्ड 8 से अमन राव ने जीत दर्ज की। इसी तरह वार्ड 9 से रंजन यादव, वार्ड 10 से अमित यादव, वार्ड 11 से रीना रानी और वार्ड 12 से धर्मवीर चुनाव जीते। वार्ड 13 से प्रिया कुमारी, वार्ड 14 से अनिल कुमार, वार्ड 15 से किरण और वार्ड 16 से मनीषा सैनी विजयी घोषित हुए। वहीं वार्ड 17 से मंशा सैनी और वार्ड 18 से सुमित्रा देवी ने जीत हासिल की।

अंबाला, सोनीपत और पंचकूला में निकाय चुनाव बने प्रतिष्ठा की लड़ाई, हरियाणा में नेताओं की पूरी ताकत झोंकी

 चंडीगढ़  नगर निगम और नगरपालिका चुनाव इस बार स्थानीय मुद्दों से आगे बढ़कर राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई में बदल गए हैं। अंबाला, सोनीपत, पंचकूला, सांपला और उकलाना में भाजपा और कांग्रेस ने पूरी ताकत झोंक दी है। कहीं पुराने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी आमने-सामने हैं तो कहीं विकास बनाम भ्रष्टाचार और बदहाली चुनावी केंद्र बने हुए हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा तक कई बड़े नेताओं ने चुनाव प्रचार किया। उकलाना में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता कुमारी सैलजा का प्रभाव और कांग्रेस की मजबूत पकड़ मानी जाती रही है, ऐसे में भाजपा के लिए यह किला भेदना आसान नहीं माना जा रहा। भाजपा ट्रिपल इंजन सरकार और विकास कार्यों को मुद्दा बना रही है, जबकि कांग्रेस स्थानीय समस्याओं और भ्रष्टाचार के आरोपों के साथ चुनाव मैदान में है। अब सभी प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में बंद होगी। कुछ जगह निर्दलीय प्रत्याशी भी अपनी ताकत दिखा रहे हैं। सोनीपत नगर निगम चुनाव में भाजपा विकास माडल और ट्रिपल इंजन सरकार को मुद्दा बनाकर प्रचार कर रही है, जबकि कांग्रेस नगर निगम कार्यालय में प्रॉपर्टी आइडी, भ्रष्टाचार और शहर की बदहाल व्यवस्था को चुनावी केंद्र बना रही है। भाजपा प्रत्याशी राजीव जैन अपने नौ महीने के कार्यकाल और सरकार के समर्थन को आधार बनाकर वोट मांग रहे हैं। उनके समर्थन में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली, सांसद मनोज तिवारी और कई मंत्री प्रचार कर चुके हैं। दूसरी ओर कांग्रेस प्रत्याशी कमल दिवान के समर्थन में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, दीपेंद्र हुड्डा, राज बब्बर और अन्य नेता मैदान में उतरे। कांग्रेस पेयजल, सड़क, सीवर, स्ट्रीटलाइट और सफाई व्यवस्था को मुद्दा बना रही है। चुनाव में शहरी मतदाताओं के साथ निगम क्षेत्र में शामिल गांवों के वोट भी अहम माने जा रहे हैं। पंचकूला: संगठनात्मक ताकत और पलायन के असर की परीक्षा पंचकूला नगर निगम चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है। भाजपा प्रत्याशी श्यामलाल बंसल के समर्थन में मुख्यमंत्री सहित कई मंत्री और राष्ट्रीय स्तर के नेता प्रचार में पहुंचे। भाजपा ने कई आजाद उम्मीदवारों को अपने पक्ष में बैठाकर चुनावी माहौल मजबूत करने का प्रयास किया। दूसरी ओर कांग्रेस प्रत्याशी सुधा भारद्वाज को संगठनात्मक कमजोरी और नेताओं के भाजपा में जाने से नुकसान झेलना पड़ा। कांग्रेस विधायक चंद्रमोहन के सहारे चुनाव मैदान में सक्रिय रही। यहां इनेलो और आम आदमी पार्टी भी मैदान में हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच माना जा रहा है। भाजपा 2020 की जीत दोहराने का दावा कर रही है, जबकि कांग्रेस स्थानीय मुद्दों और जनसंपर्क के भरोसे चुनाव लड़ रही है। सांपला पालिका: हुड्डा के प्रभाव क्षेत्र में भाजपा की परीक्षा रोहतक जिले की सांपला नगरपालिका चुनाव इस बार स्थानीय निकाय से आगे बढ़कर राजनीतिक प्रतिष्ठा का केंद्र बन गया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के प्रभाव वाले क्षेत्र में भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी है। चुनाव प्रचार के अंतिम दिन तक भाजपा संगठन और उसके नेता प्रत्याशी के समर्थन में सक्रिय दिखाई दिए। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी रही कि चुनावी गतिविधियों पर प्रदेश स्तर तक लगातार नजर रखी गई। भाजपा इस चुनाव को हुड्डा प्रभाव वाले क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के अवसर के रूप में देख रही है। दूसरी ओर कांग्रेस समर्थित खेमे और निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी रोड शो, नुक्कड़ सभाओं और जनसंपर्क के जरिए पूरी ताकत लगाई। चुनाव में स्थानीय मुद्दों के साथ राजनीतिक साख की लड़ाई भी खुलकर दिखाई दी। ननपा क्षेत्र के 15 हजार 624 मतदाता चेयरमैन पद के 10 और वार्डों के 53 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला करेंगे। उकलाना पालिका: कांग्रेस के गढ़ में कमल खिलाने की चुनौती हिसार जिले की उकलाना नगरपालिका चुनाव इस बार भाजपा के लिए राजनीतिक परीक्षा बन गया है। विधानसभा क्षेत्र में अब तक भाजपा को सफलता नहीं मिली है और यहां कांग्रेस का प्रभाव माना जाता रहा है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता कुमारी सैलजा का ये गृहक्षेत्र है ऐसे में भाजपा ने पहली बार चुनाव चिह्न पर वरिष्ठ नेता एवं वेयरहाउसिंग कारपोरेशन के पूर्व चेयरमैन श्रीनिवास गोयल की पुत्रवधु निकिता गोयल को मैदान में उतारा है। दूसरी ओर निर्दलीय प्रत्याशी रीमा सोनी को कांग्रेस, इनेलो और आम आदमी पार्टी का समर्थन मिला हुआ है। रीमा पूर्व पार्षद की बेटी हैं। चुनाव प्रचार में मुख्यमंत्री से लेकर कई मंत्री भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में पहुंचे, जबकि कांग्रेस विधायक नरेश सेलवाल और अन्य नेताओं ने भी पूरी ताकत झोंकी। पूर्व मंत्री अनूप धानक भी भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में सक्रिय रहे।

पिंक टॉयलेट से लेकर स्मार्ट सिटी तक: अंबाला के लिए भाजपा का बड़ा विकास एजेंडा

अंबाला भाजपा ने हरियाणा निकाय चुनाव के तहत अंबाला नगर निगम के लिए अपना 'संकल्प पत्र' जारी कर दिया है। 'समर्पित सेवा-सशक्त सुशासन' के ध्येय के साथ पार्टी ने शहर के सर्वांगीण विकास, महिला सुरक्षा और आधुनिक बुनियादी सुविधाओं को अपनी प्राथमिकता बताया है।   महिलाओं और झुग्गीवासियों के लिए विशेष घोषणाएं भाजपा ने वादा किया है कि सभी निकायों में महिलाओं के लिए पिंक टॉयलेट बनाए जाएंगे, जिनमें सैनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन और शिशु आहार कक्ष जैसी सुविधाएं होंगी। इसके अलावा, महिलाओं के नाम पर रजिस्टर्ड मकानों पर 25% हाउस टैक्स छूट देने का भी संकल्प लिया गया है। झुग्गी बस्तियों के पुनर्वास के लिए गठित विकास बोर्ड को सशक्त कर आवास और बुनियादी सुविधाएं मिशन मोड में प्रदान की जाएंगी।   स्वामित्व योजना और करों में राहत संकल्प पत्र के अनुसार, 20 वर्षों से अधिक समय से रह रहे परिवारों को भूमि व मकान का वैध मालिकाना हक देकर रजिस्ट्री सुनिश्चित की जाएगी। नगर निगम में शामिल ग्रामीण क्षेत्रों के लिए हाउस टैक्स प्रणाली को सरल बनाया जाएगा और कृषि उपयोग वाले परिसरों को कर में विशेष राहत दी जाएगी। साथ ही, पानी और सीवरेज के नए कनेक्शनों पर शुल्क माफी की घोषणा भी की गई है।   अंबाला के लिए विशेष विकास परियोजनाएं     सीवरेज और जल प्रबंधन: 11 गांवों में सीवरेज नेटवर्क का विस्तार और लगभग 170 करोड़ की लागत से नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया जाएगा। सेक्टर-24 में ₹40 करोड़ की लागत से वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट बनेगा।       इन्फ्रास्ट्रक्चर: सेक्टर-10 में ₹60 करोड़ की लागत से 500 सीटों वाला अत्याधुनिक सभागार और सेक्टर-23 में ₹10 करोड़ की लागत से नया फायर स्टेशन बनाया जाएगा।       सफाई व्यवस्था: कूड़े से बिजली बनाने के लिए संयंत्र स्थापित किया जाएगा और सफाई कर्मचारियों व मशीनों की संख्या बढ़ाई जाएगी।       जल निकासी: सेक्टर-23 और 25 में ₹10 करोड़ की लागत से स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जाएगा ताकि जलभराव से मुक्ति मिल सके।   सुरक्षा और स्मार्ट सिटी पहल शहर की सुरक्षा के लिए प्रमुख बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर व्यापक सीसीटीवी नेटवर्क और एक इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम स्थापित किया जाएगा । स्ट्रीट लाइट व्यवस्था का विस्तार किया जाएगा, खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ महिलाओं की सुरक्षा सर्वोपरि है । इसके अलावा, प्रॉपर्टी टैक्स, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और बिल्डिंग प्लान जैसी नागरिक सेवाओं को पूरी तरह ऑनलाइन किया जाएगा ।    

अंबाला में जनता का मूड बदला, विकास नहीं तो वोट नहीं का रुख पानी निकासी और

अंबाला  हरियाणा में अंबाला नगर निगम चुनाव से पहले शहर का सियासी माहौल पूरी तरह गरमा चुका है. दरअसल आगामी 10 मई को मेयर और पार्षद पदों के लिए मतदान होना है, जिसमें भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी के साथ-साथ कई निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनावी मैदान में उतर चुके हैं. सभी दल अपने-अपने वादों और योजनाओं के साथ जनता को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इस बार शहर की जनता का रुख साफ तौर पर बदला हुआ नजर आ रहा है. बता दे कि स्थानीय स्तर पर किए गए सर्वे और लोगों से बातचीत से यह स्पष्ट हुआ है कि मतदाता अब केवल वादों पर भरोसा करने के बजाय बीते पांच वर्षों के कार्यों का हिसाब मांग रहे हैं.वही अंबाला शहर के वार्ड नंबर 4 स्थित बलदेव नगर क्षेत्र में लोगों की प्रतिक्रियाएं इसी बदलाव की ओर इशारा करती हैं, क्योंकि यहां के कई निवासी पिछले कार्यकाल से असंतुष्ट दिखाई दिए और उन्होंने साफ कहा कि इस बार वोट केवल काम के आधार पर ही दिया जाएगा. पानी निकासी है सबसे बड़ा मुद्दा वही स्थानीय निवासी कस्तुरीलाल वर्मा ने लोकल 18 को बताया कि उनकी उम्र 80 साल की हो गई है लेकिन पानी की निकासी बलदेव नगर में काफी ज्यादा एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है. उन्होंने कहा कि जब भी बाढ़ आती है तो कोई भी नेता दिखाई नहीं देता है और वह उस समस्या से खुद ही जूझते हैं, जबकि पानी निकासी को सही ढंग से ठीक किया जाए तो यह समस्या बिल्कुल भी उत्पन्न नहीं होगी. उन्होंने बताया कि वह तो इस बार वोट पानी निकासी के मुद्दे को लेकर ही करेंगे और इस समस्या को हर उम्मीदवार के सामने रखेंगे. स्थानीय निवासी परमानंद ने बताया कि सफाई व्यवस्था उनके इलाके में काफी ज्यादा चरमराई हुई है ओर वह चाहते हैं कि जो भी पार्षद बने वह इन मुद्दों पर कार्य जरूर करें. उन्होंने कहा कि पिछले 5 साल में सड़के और लाइट की व्यवस्था तो ठीक रही है लेकिन जल निकासी काफी ज्यादा प्रभावित रही है. आवारा पशुओं का करें खास इंतजाम गौरव बख्शी ने कहा कि इस बार के निकाय चुनाव में लोगों की जो सबसे बड़ी मांग है वह आवारा पशुओं की सही जगह पर व्यवस्था करना हैं ओर साफ सफाई की सुचारू रूप से करवाना है. उन्होंने बताया कि पिछले 5 साल स्ट्रीट लाइट्स अगर खराब हो जाती थी तो उसे ठीक करने में काफी दोनों का समय लगता था,ऐसे में वह चाहते की इस बार जो भी उम्मीदवार इन लोगों की जरूरत पर काम करेगा, तो वह उसे ही चुनेंगे.क्योंकि चुनाव खत्म होने के बाद अक्सर स्थानीय नेता अपने वादे भूल जाते है ओर फिर आम जनता काफी दिनों तक परेशान रहती है. वहीं अमित कुमार ने बताया कि पिछले 5 सालों में जो वादे किए गए थे वह बिल्कुल भी पूरे नहीं हुए हैं. कहा कि जब लोगों को पार्षदों से कम होता है तो वह फोन तक नहीं उठाते हैं और फिर चुनावों में किए गए वादे अक्सर भूल जाते हैं. इसलिए वह चाहते हैं कि यह निकाय चुनावों में जिस मर्जी पार्टी का पार्षद बने,लेकिन लोगों से किए गए वादों पर बस खरा उतारे.वही कुछ ओर स्थानीय निवासियों ने बताया कि आवारा पशु सबसे बड़ा मुद्दा क्षेत्र के लिए बने हुए हैं क्योंकि आए दिन आम जनता घायल होती है,ओर बहुत से एक्सीडेंट होते हैं.कई बार बच्चों को कुत्ते काट लेते हैं जिसकी वजह से उन्हें बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता है लेकिन पिछले 5 सालों में इस पर किसी प्रकार का कोई काम नहीं हो पाया है जबकि शहर में लोग इन समस्याओं को लेकर काफी ज्यादा परेशान है.

चुनावी प्रचार का शोर बना छात्रों की पढ़ाई में बाधा, अभिभावकों का विरोध तेज

रांची नगर निगम चुनाव के दौरान बज रहे लाउडस्पीकरों का तेज शोर इन दिनों बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए बड़ी समस्या बन गया है। कई इलाकों से शिकायत मिल रही है कि तय समय के बाद भी प्रचार में तेज आवाज में लाउडस्पीकर बजाए जा रहे हैं, जिससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। नगर निगम चुनाव प्रचार के दौरान शहर के अलग-अलग इलाकों में तेज आवाज में लाउडस्पीकर बज रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि इससे बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे बच्चों को काफी परेशानी हो रही है। देर रात तक शोर रहने से बच्चों का ध्यान पढ़ाई में नहीं लग पा रहा है। कांके रोड निवासी राजेश कुमार ने बताया कि उनका बेटा इंटरमीडिएट परीक्षा की तैयारी कर रहा है, लेकिन कई बार रात 10 बजे के बाद भी लाउडस्पीकर बजते रहते हैं। दिनभर प्रचार वाहनों से तेज आवाज में अनाउंसमेंट किया जाता है। समझाने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होती। बरियातू की रहने वाली सुनीता देवी ने बताया कि उनकी बेटी मैट्रिक की छात्रा है। परीक्षा के समय इस तरह का शोर बच्चों पर मानसिक दबाव बढ़ा रहा है। डोरंडा इलाके के एक अन्य अभिभावक ने भी कहा कि दिन में स्कूलों में परीक्षाएं चल रही हैं और शाम-रात का समय ही पढ़ाई के लिए मिलता है, लेकिन प्रचार का शोर पढ़ाई में बाधा बन रहा है। बोर्ड परीक्षाएं जारी, शांति की जरूरत इस समय राज्य में झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक), केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और इंडियन सर्टिफिकेट ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (आईसीएसई) की बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं। ऐसे में स्कूलों और आसपास के इलाकों में शांति और अनुशासन बनाए रखना जरूरी है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि लाउडस्पीकर का उपयोग केवल तय समय सीमा के अंदर ही किया जा सकता है। ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण नियमों के अनुसार रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर बजाने पर पूरी तरह रोक है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि परीक्षार्थियों के हित को ध्यान में रखते हुए निगरानी बढ़ा दी गई है। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए सहयोग करें, ताकि परीक्षा के दौरान उन्हें शांत माहौल मिल सके।  

जमशेदपुर के मानगो निकाय चुनाव में बन्ना और सरयू में सिंदूर पर महाभारत!

जमशेदपुर. मानगो नगर निगम चुनाव के अखाड़े में अब विकास के मुद्दे आइसीयू में चले गए हैं, उनकी जगह एक चुटकी सिंदूर और व्यक्तिगत चरित्र हनन ने ले ली है। जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने गुरुवार को पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता के उन आपत्तिजनक आरोपों का चुन-चुनकर जवाब दिया, जिन्होंने शहर की राजनीति में भूचाल ला दिया था। राय ने दो टूक कहा कि जो व्यक्ति हर नारी को केवल देह की दृष्टि से देखता हो, उससे मर्यादा की उम्मीद करना ही बेमानी है। सियासी दंगल में गुरुवार को सरयू राय के तेवर रुद्र नजर आए। उन्होंने बन्ना गुप्ता को अल्पज्ञानी बताते हुए कहा कि किसी महिला के चरित्र पर अंगुली उठाना अक्षम्य अपराध है। राय ने स्पष्ट किया कि मधु और उनका पूरा शिक्षित परिवार (माता, बेटा और बेटी) उनके साथ रहता है। उन्होंने कहा, मैं रामार्चा पूजा में बैठता हूं, पंडित पूजा कराते हैं और संकल्प के समय कई महिलाएं मौजूद रहती हैं। बन्ना की सोच इतनी विकृत है कि उन्हें पवित्र संकल्प में भी केवल पति-पत्नी का रिश्ता दिखता है। बेहुदगी की भी एक सीमा होती है। सरयू राय ने बन्ना गुप्ता को आईना दिखाते हुए उनका वह अश्लील वीडियो याद दिलाया, जो विधानसभा चुनाव के कुछ दिन पहले रिलीज हुआ था। राय ने तीखा हमला करते हुए कहा, बन्ना गुप्ता को उस वीडियो वाली महिला को पत्नी के रूप में स्वीकार कर लेना चाहिए, क्योंकि सच्चाई सबके सामने है। जिसका अपना दामन दागों से भरा हो, वह दूसरों के सिंदूर और पूजा पर सवाल उठा रहा है। राय ने तंज कसा कि बन्ना गुप्ता मेयर पति बनकर नगर निगम के पैसों को लूटने की फिराक में हैं और इसी बौखलाहट में वे मानसिक संतुलन खो बैठे हैं। दरअसल, इस विवाद की पटकथा बुधवार को बन्ना गुप्ता ने लिखी थी। एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान बन्ना ने सरयू राय के निजी जीवन पर सीधा हमला करते हुए ''आपरेशन सिंदूर'' छेड़ा था। बन्ना ने सार्वजनिक रूप से पूछा था कि सरयू राय जिस महिला के साथ सालों से रामार्चा पूजा में पति-पत्नी के रूप में बैठते हैं, उनके सम्मान में अपनी चुप्पी क्यों नहीं तोड़ते? बन्ना ने व्यंग्य करते हुए कहा था कि अगर रिश्ता इतना ही गहरा है, तो सरयू राय उस महिला की मांग में सिंदूर क्यों नहीं भर देते और उन्हें समाज में पत्नी का दर्जा क्यों नहीं देते? बन्ना ने राय पर दोहरा चरित्र जीने का आरोप लगाते हुए उन्हें सार्वजनिक रूप से इस रिश्ते को स्वीकार करने की चुनौती दी थी। अब मानगो की चुनावी जंग पूरी तरह व्यक्तिगत ईगो और चरित्र हनन की भेंट चढ़ चुकी है। एक तरफ बन्ना गुप्ता ने सिंदूर को हथियार बनाया, तो दूसरी तरफ सरयू राय ने नैतिकता और पुराने वीडियो के जरिए पलटवार किया। मानगो की राजनीति में अब कीचड़ इतना गहरा हो गया है कि जनता विकास के कम और विवादों के चर्चे ज्यादा कर रही है। अब देखना यह है कि मानगो की महारानियों की इस लड़ाई में यह व्यक्तिगत हमला किसे ले डूबता है।

झारखंड निकाय चुनाव में रांची के 5 भवनों का मतगणना के लिए चयन

रांची. नगर निकाय चुनाव को लेकर मतगणना स्थल को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की कवायद तेज हो गई है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद रांची के पंडरा बाजार स्थित मतगणना स्थल पर फिलहाल रोक लगी हुई है। इसी को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर शहर के पांच प्रमुख भवनों को चिह्नित किया है और इन स्थलों का निरीक्षण कर प्रस्ताव तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस संबंध में जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त रांची की ओर से संबंधित विभागों को पत्र जारी कर मतगणना एवं बज्रगृह के लिए संभावित स्थलों का भौतिक निरीक्षण कराने का निर्देश दिया गया है। स्पष्ट किया गया है कि आगामी चुनावों को देखते हुए मतगणना और बज्रगृह के लिए उपयुक्त स्थान का चयन किया जाना आवश्यक है। इसी क्रम में गैर सरकारी और सरकारी भवनों को विकल्प के रूप में चिन्हित किया गया है। जिन पांच स्थलों को विकल्प के तौर पर रखा गया है, उनमें खेलगांव स्थित शेख भिखारी प्रशासनिक भवन परिसर, मोरहाबादी स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी महाविद्यालय, नामकुम के सिरका टोली स्थित झारखंड यूनिवर्सिटी आफ टेक्नोलाजी, नामकुम के रिंग रोड पर स्थित सरला बिरला यूनिवर्सिटी तथा कांके के रिंग रोड स्थित ट्रांसपोर्ट नगर शामिल हैं। इन सभी स्थलों का निरीक्षण कर विस्तृत प्रतिवेदन तैयार किया जाएगा, जिसे आगे कार्यालय को भेजा जाएगा। वहीं इस पूरे मामले पर राज्य निर्वाचन आयुक्त अलका तिवारी ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल पंडरा बाजार में ही मतगणना की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि जिला निर्वाचन कार्यालय की ओर से अभी तक किसी वैकल्पिक स्थल को लेकर कोई प्रस्ताव राज्य निर्वाचन आयोग को प्राप्त नहीं हुआ है। आयोग की ओर से जैसे ही कोई प्रस्ताव आएगा, उस पर नियमानुसार विचार किया जाएगा। स्पष्ट है कि हाईकोर्ट के आदेश के चलते जिला प्रशासन एहतियातन विकल्प तैयार कर रहा है, जबकि राज्य निर्वाचन आयोग की तैयारी फिलहाल पंडरा बाजार को केंद्र में रखकर ही चल रही है। आने वाले दिनों में जिला प्रशासन के प्रस्ताव के बाद स्थिति और स्पष्ट होने की संभावना है।

झारखंड में की रामगढ नगर परिषद के चुनाव में वार्ड आरक्षण से बदल रहा समीकरण

रामगढ़. नगर परिषद चुनाव को लेकर अब जिले में समीकरण पूरी तरह से बदल गया है। पहले तक जहां चुनाव लड़ने में किसी तरह की बाध्यता निवर्तमान पार्षदों को नहीं थी, अब वार्डाें के आरक्षण ने कई उम्मीदवारों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। उल्लेखनीय है इस बार आसन्न नगर परिषद चुनाव को लेकर यहां के 32 वार्डाें में से 15 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित हो गए हैं। वार्डाें के आरक्षण ने कई उम्मीदवारों के अरमानों पर पानी फेर दिया है जो कल तक वार्ड पार्षद थे और अगली बार भी जोर आजमाइश करने के सपने देख रहे थे। अब मौजूदा वार्डों की स्थिति को देख या तो वे अपनी दावेदारी छोड़ रहे हैं या फिर किसी और वार्ड में संभावना तलाशने में जुटे हैं। जिन वार्डाें को महिलाओं के लिए आरक्षित किया गया है वहां वे अपनी पत्नी को उम्मीदवार बनाने की तैयारी में लगे हैं। जिन संभावित प्रत्याशियों के लिए यह भी संभव नहीं हो पा रहा वे अब चुनाव से ही तौबा कर रहे हैं। नगर परिषद क्षेत्र के 32 वार्डों में से वार्ड संख्या 09 महिला प्रत्याशी के लिए आरक्षित किया गया है।इसी तरह वार्ड 10 अनुसूचित जनजाति की महिला उम्मीदवार के लिए, वार्ड 11 महिला, वार्ड 12 अनुसूचित जन जाति की महिला, वार्ड 14, अनुसूचित जाति की महिला, वार्ड 16 अनुसूचित जाति की महिला, वार्ड 18 अनुसूचित जन जाति की महिला, वार्ड 19 व 20 अनारक्षित महिला, वार्ड 22, 23, 24 व 25 महिला के लिए, वार्ड 27 व 31 अत्यंत पिछड़ा वर्ग की महिला के लिए आरक्षित किया गया है। इधर, चुनाव को लेकर जिला निर्वाचन विभाग की ओर से तैयारियां जोर शोर से शुरू कर दी गई है। लगातार चुनाव की तैयारियों को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग भी जिले के अधिकारियों को भी आवश्यक निर्देश वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दे रहा है।

निकाय चुनाव से पहले BJP की धमाकेदार तैयारी, 100 पार्षद निर्विरोध और कई मंत्री संबंधी उम्मीदवार

मुंबई  महाराष्ट्र में 2 दिसंबर को होने वाले नगरपालिका और नगर पंचायत चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) को बड़ी चुनावी बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। पार्टी ने दावा किया है कि नामांकन वापसी की अंतिम तिथि पर 100 से अधिक पार्षद निर्विरोध चुने जा चुके हैं। राज्य BJP अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने शुक्रवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व का असर है कि इतने बड़े स्तर पर BJP उम्मीदवार बिना मतदान के ही जीत हासिल कर रहे हैं। शुक्रवार नाम वापसी का अंतिम दिन था। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही तीन नगरपालिका परिषदों में अध्यक्ष पद पर भी BJP उम्मीदवारों का निर्विरोध चुनाव हुआ है। रविंद्र चव्हाण ने इसे जनता के विकासोन्मुखी नीतियों पर विश्वास का प्रमाण बताया। इन निर्विरोध जीतों में से 49 उत्तरी महाराष्ट्र से, 41 पश्चिमी महाराष्ट्र से, चार कोकण क्षेत्र से, तथा मराठवाड़ा और विदर्भ से क्रमशः तीन-तीन पार्षद शामिल हैं। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, कुल 103 सीटें निर्विरोध जीती गईं, जिनमें 100 नगर सेवक और तीन नगर अध्यक्ष पद शामिल हैं। वंशवाद और दबाव के आरोपों से घिरी BJP बता दें कि 246 नगर परिषदों और 42 नगर पंचायतों के लिए मतदान 2 दिसंबर को होगा और परिणाम 3 दिसंबर को घोषित किए जाएंगे। लेकिन मतदान से पहले ही BJP की कई जीतों ने राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है। हालांकि, विपक्ष इन निर्विरोध जीतों को लेकर गंभीर आरोप लगा रहा है। उनका कहना है कि भाजपा नेताओं के रिश्तेदारों को जीत सुनिश्चित कराने के लिए विरोधी उम्मीदवारों पर दबाव डाला गया और प्रशासन का इस्तेमाल किया गया। उदाहरण के तौर पर, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के चचेरे भाई आल्हाद कलोटी चिखलदरा नगर पंचायत से पार्षद निर्विरोध चुने गए। कांग्रेस नेता यशोमती ठाकुर ने आरोप लगाया कि विपक्षी उम्मीदवारों को धमकाकर या लालच देकर हटाया गया। इसी तरह, जल संसाधन मंत्री गिरिश महाजन की पत्नी साधना महाजन को जामनेर नगर परिषद का अध्यक्ष पद निर्विरोध मिला, जहां नौ नामांकनों में से आठ वैध थे लेकिन बाकी सभी उम्मीदवारों ने वापसी कर ली। धुले जिले के डोंधिचा नगर पंचायत में मंत्री जयकुमार रावल की मां नयना कुंवर रावल 26 अन्य पार्षदों के साथ निर्विरोध चुनी गईं। विपक्षी उम्मीदवार शरयू भावसार का नामांकन खारिज होने के बाद वे बिना चुनाव मैदान के ही विजेता घोषित हुईं। भावसार ने आरोप लगाया कि मंत्री के दबाव में नामांकन रद्द किया गया। सोलापुर के अंगार नगर पंचायत में भाजपा के 17 उम्मीदवार सभी सीटें निर्विरोध जीतने वाले हैं। कई और नेता-परिवार भी चुनाव मैदान में या निर्विरोध विजेता सूत्रों के अनुसार BJP मंत्रियों और विधायकों- श्रम मंत्री आकाश फुंडकर, वस्त्र मंत्री संजय सवकारे, मंत्री अशोक उईके, पूर्व सांसद रामदास तडस, विधायक मंगेश चव्हाण और विधायक प्रकाश भरसकले के रिश्तेदार भी या तो चुनाव मैदान में हैं, या कई पहले ही निर्विरोध जीत चुके हैं। विपक्ष का तंज: BJP का वंशवाद ‘ग्राम पंचायत लेवल’ तक पहुंचा कांग्रेस, शरद पवार की NCP और शिवसेना (UBT) ने आरोप लगाया कि BJP की वंशवाद राजनीति अब पूरी तरह स्थानीय निकाय चुनावों तक पहुंच चुकी है। विपक्षी पार्टियों का दावा है कि पुलिस और प्रशासन पर असर डालकर विरोधियों को चुनाव से हटाया जा रहा है। महाराष्ट्र में स्थानीय चुनावों के लिए राजनीतिक तापमान अपने चरम पर है।