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सभी सरकारी दस्तावेज होंगे ऑनलाइन, हरियाणा सरकार ने विभागों को दिए निर्देश

चंडीगढ़  हरियाणा में दस्तावेजों के डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने को लेकर सरकार ने सभी विभागों से एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है। प्रदेश में सभी कानूनों, नियमों, सरकारी आदेश, सर्कुलर, अधिसूचनाओं, नीतियों और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों का केंद्रीकृत ऑनलाइन रिकॉर्ड तैयार किया जाना है। ताकि सभी दस्तावेज विभागवार, विषयवार और अंतिम अपडेट की तारीख के साथ ऑनलाइन उपलब्ध हो जाए और आसानी से सर्च किए जा सके। मुख्य सचिव ने भेजा रिमाइंडर मुख्य सचिव कार्यालय ने सभी प्रशासनिक सचिवों को रिमाइंडर जारी कर कहा है कि नौ जून को दिए गए निर्देशों के बावजूद कई विभागों से अब तक कार्रवाई रिपोर्ट नहीं मिली है। विभागों से कहा गया है कि बिना और देरी किए एक्शन टेकन रिपोर्ट निर्धारित ई-मेल पर भेजी जाए, ताकि आगे की प्रक्रिया शुरू की जा सके। साथ ही सभी विभागों को अपने-अपने कानूनों, नियमों और अन्य दस्तावेजों की संपादन योग्य डिजिटल कॉपी तैयार कर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। यह भी बताना होगा कि कौन-से नियम या कानून अप्रासंगिक हो चुके हैं और किनमें संशोधन, सरलीकरण या निरस्तीकरण की जरूरत है। विभागों की छह बिंदुओं पर समीक्षा सरकार नियामकीय सुधार के तहत सभी विभागों के नियमों की छह बिंदुओं पर समीक्षा करा रही है। इसमें अनावश्यक लाइसेंस खत्म करना, पुराने और अप्रासंगिक नियम हटाना, जोखिम आधारित निरीक्षण व्यवस्था लागू करना तथा प्रक्रियाओं को सरल बनाना शामिल है।  

साइबर अपराध पर हरियाणा पुलिस की सख्ती, 31% धनवापसी के साथ जांच में बड़ी सफलता

चंडीगढ़ हरियाणा में साइबर अपराधियों से निपटने में सख्ती और जागरूकता अभियान का असर दिखने लगा है। विशेषकर हाट स्पाट नूंह में साइबर ठगों का नेटवर्क तोड़ने में खासी सफलता मिली है। पिछले छह महीन में 14 हजार 139 अवैध आनलाइन सामग्री हटाई गई और 3947 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। डेढ़ साल के दौरान नूंह से 927 साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी की गई है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई समीक्षा बैठक में बताया गया कि साइबर ठगी के मामलों में 31 प्रतिशत धन वापसी सुनिश्चित की है। यह राष्ट्रीय औसत 3.85 प्रतिशत से आठ गुना अधिक है। पिछले डेढ़ साल में 9100 पुलिस कर्मियों को साइबर जांच का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। 25 जून से ई-जीरो एफआईआर सुविधा लागू पुलिस अधीक्षक (साइबर) मयंक गुप्ता ने बताया कि साइबर अपराधियों से निपटने के लिए प्रशिक्षण, नीति, अनुसंधान एवं विकास, डार्क वेब जांच तथा वर्चुअल डिजिटल एसेट से संबंधित विशेष प्रकोष्ठ स्थापित करने का प्रस्ताव है। 25 जून से ई-जीरो एफआइआर सुविधा लागू कर दी गई है। राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर प्राप्त एक लाख रुपये से अधिक की साइबर धोखाधड़ी संबंधी शिकायतें स्वतः इलेक्ट्रानिक जीरो एफआइआर में परिवर्तित होकर संबंधित साइबर पुलिस थानों को चली जाती हैं। इससे ऐसे मामलों में त्वरित पंजीकरण और जांच सुनिश्चित हो रही है। इस दौरान गृह सचिव सुधीर राजपाल, पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल तथा गृह विभाग की अतिरिक्त सचिव डा. वंदना दिसोदिया ने भी अपनी बात रखी। नूंह में पकड़े सर्वाधिक साइबर अपराधी नूंह में सर्वाधिक साइबर अपराधी पकड़े गए हैं। पिछले डेढ़ साल में हरियाणा पुलिस ने 473 एफआइआर दर्ज करते हुए 927 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया। आरोपितों से 751 मोबाइल फोन तथा 1442 सिम कार्ड जब्त किए। इसके अतिरिक्त 43 हजार 354 मोबाइल नंबर तथा उनसे जुड़े 5007 आइएमईआइ को ब्लाक किया गया। प्रदेश में साइबर अपराध जांच के दौरान फ्रीज किए गए बैंक खातों से संबंधित 533 शिकायतों में से 410 का निपटान किया जा चुका है। 675 पुलिसकर्मी साइबर अपराध की जांच में जुटे प्रदेश में 675 पुलिस कर्मी साइबर अपराध जांच में कार्यरत हैं। इसके अलावा 3742 अधिकारियों ने साइट्रेन पोर्टल के माध्यम से आनलाइन प्रशिक्षण प्राप्त किया है। हरियाणा पुलिस अकादमी मधुबन में 5390 पुलिस कर्मियों को विशेष आफलाइन प्रशिक्षण दिया गया। हरियाणा पुलिस के दो अधिकारी साइबर कमांडो के रूप में प्रशिक्षित किए गए हैं तथा 12 अन्य अधिकारी साइबर कमांडो प्रशिक्षण के अगले चरण के लिए पात्र घोषित किए गए हैं। समन्वय पोर्टल पर हरियाणा ने अन्य राज्यों से प्राप्त 8872 अनुरोधों में से 8,625 का निपटान कर 97 प्रतिशत से अधिक दक्षता दर्ज की है।

हर ब्लॉक में मॉडल स्कूल, हर जिले में मेडिकल कॉलेज की योजना

 पटना  मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को दैनिक जागरण के यूफोरिया कार्यक्रम में राज्य की कानून-व्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य व बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर दूरगामी कार्ययोजना स्पष्ट की। बापू सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि एक वर्ष में बिहार में विक्रमशिला विश्वविद्यालय की आधारशिला रख देंगे। सभी 534 ब्लाॅक में माॅडल स्कूल और 38 जिलों में खुलेंगे मेडिकल काॅलेज राज्य के 14 हजार से अधिक हाई स्कूलों में से सभी 534 ब्लाॅकों को चिन्हित कर वहां शानदार माॅडल स्कूल बनाए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य है कि 2030 में वोट मांगने से पहले बिहार के सभी 38 जिलों में सर्वसुविधायुक्त मेडिकल काॅलेज व अस्पताल बना दिए जाएं। इसके पहले कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्यमंत्री, कला संस्कृति मंत्री डाॅ. प्रमोद चंद्रवंशी, दैनिक जागरण बिहार के मुख्य महाप्रबंधक आनंद त्रिपाठी, राज्य संपादक आलोक मिश्रा, दैनिक जागरण बिहार के डिप्टी एडिटर अश्विनी कुमार सिंह आदि ने किया। 126 किमी लंबा मरीन ड्राइव बनेगा राज्य की समृद्धि में दैनिक जागरण की बड़ी भूमिका की बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी माह से 213 नए डिग्री काॅलेज स्थापित करने का काम शुरू किया जा रहा है। राज्य में 126 किलोमीटर लंबा शानदार मरीन ड्राइव बनाने का काम किया जाएगा। उन्‍होंने कई अन्‍य बिंदुओं पर भी अपनी बातें रखीं। कला संस्कृति मंत्री डॉ प्रमोद चंद्रवंशी ने कहा कि बिहार के सारे जिलाधिकारियों व एसपी को पत्र भी लिख दिया गया है।राज्य में कहीं भी किसी तरह से कोई फूहड़ गाने बजते हैं, उसको कड़ाई से बंद कराएं। इसमें किसी तरह की कोताही स्‍वीकार्य नहीं है।  

बाबा बैद्यनाथ से टांगीनाथ धाम तक, जानिए झारखंड के प्रमुख शिवालय

 रांची  भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र महीना सावन शुरू होते ही झारखंड पूरी तरह शिवमय हो गया है। राज्य के प्रसिद्ध शिवालयों में सुबह से ही बोल बम और हर-हर महादेव के जयघोष गूंज रहे हैं। देवघऱ से लेकर रांची, गुमला और खूंटी तक लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं। अगर आप भी इस सावन बाबा भोलेनाथ का आशीर्वाद लेना चाहते हैं, तो झारखंड के इन प्रसिद्ध शिव मंदिरों की यात्रा आपकी आस्था को और मजबूत बना सकती है। बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है। सावन के महीने में यहां लाखों कांवरिये और श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। हर साल आयोजित होने वाला श्रावणी मेला देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है, इसलिए इसे मनोकामना लिंग भी कहा जाता है। बासुकीनाथ धाम, देवघर-दुमका मार्ग देवघर-दुमका मार्ग पर स्थित बासुकीनाथ धाम का धार्मिक महत्व बेहद खास है। मान्यता है कि बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के बाद बासुकीनाथ में पूजा किए बिना यात्रा अधूरी मानी जाती है। सावन के दौरान यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है और पूरा मंदिर परिसर शिवभक्ति में डूबा रहता है। पहाड़ी मंदिर, रांची राजधानी रांची का प्रसिद्ध पहाड़ी मंदिर सावन में श्रद्धालुओं का प्रमुख आकर्षण बन जाता है। करीब 350 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर तक पहुंचने के लिए 468 सीढ़ियां चढ़़नी पड़ती है। सावन में रोजाना फूलों से बाबा का भव्य श्रृंगार होता है और सुबह तड़के से ही दर्शन के लिए लंबी कतारें लग जाती हैं। आमरेश्वर धाम (अंगराबाड़ी), खूंटी खूंटी जिले में स्थित आमरेश्वर धाम, जिसे श्रद्धालु अंगराबाड़ी के नाम से भी जानते हैं, सावन में आस्था का बड़ा केंद्र बन जाता है। इस प्राचीन मंदिर को झारखंड का मिनी बाबा धाम कहा जाता है। दूर-दूर से श्रद्धालु यहां जलाभिषेक करने और भोलेनाथ का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। टांगीनाथ धाम, गुमला गुमला जिले का टांगीनाथ धाम अपने ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। यहां भगवान शिव के अनेक प्राचीन शिवलिंग और देवी-देवताओं की प्रतिमाएं मौजूद हैं। मान्यता है कि भगवान परशुराम का दिव्य फरसा आज भी यहां स्थापित है, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। सावन में यहां विशेष पूजा और श्रावणी मेले का आयोजन होता है। क्यों खास है झारखंड का सावन? झारखंड में सावन केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि संस्कृति और परंपरा का भी प्रतीक है। सुल्तानगंज से देवघर तक की कांवर यात्रा, लाखों श्रद्धालुओं की पदयात्रा और शिवालयों में होने वाले विशेष अनुष्ठान इस महीने को और भी खास बना देते हैं। अगर आप इस सावन आध्यात्मिक यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो झारखंड के ये शिव मंदिर आपकी सूची में जरूर होने चाहिए।  

दिल्ली-पंजाब से 6 संदिग्ध गिरफ्तार, हथियार और पेट्रोल बम बरामद

नई दिल्ली दिल्ली पुलिस ने एक बड़े ऑपरेशन में शहजाद भट्टी नेटवर्क के दो अलग-अलग मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने दिल्ली और पंजाब से 6 संदिग्धों को दबोचा है। गिरफ्तार किए गए संदिग्ध दो अलग-अलग नेटवर्क के तहत काम कर रहे थे। एक नेटवर्क आतंकी गतिविधियों से जुड़ा था जबकि दूसरा अवैध हथियारों की तस्करी में शामिल था। पुलिस ने आरोपियों के पास से कई पिस्तौल और पेट्रोल बम बरामद किए हैं दिल्ली पुलिस की शुरुआती जांच से पता चला है कि यह नेटवर्क संगठित तरीके से काम कर रहा था। दिल्ली पुलिस का कहना है कि इस नेटवर्क के तार कई राज्यों से जुड़े हो सकते हैं। हाल ही में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई समर्थित आतंकी और हथियार नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। दिल्ली पुलिस के अनुसार, आईएसआई समर्थित आतंकी और हथियार नेटवर्क के 3 संदिग्धों को पंजाब से जबकि एक को दिल्ली से पकड़ा गया था। बताया जाता है कि इन संदिग्धों को उनके आकाओं ने दिल्ली में धार्मिक स्थलों और पुलिस प्रतिष्ठानों की रेकी करने की जिम्मेदारी दी थी। आतंकी अपने नापाक मंसूबे में कामयाब हो पाते उससे पहले ही पुलिस ने नेटवर्क का भंडाफोड़ कर दिया है। दिल्ली को दहलाने की थी योजना दिल्ली पुलिस की ओर से जारी बयान में बताया गया था कि संदिग्ध पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के एजेंट शहजाद भट्टी और उसके गुर्गों के इशारे पर दिल्ली में आतंकी गतिविधि को अंजाम देने की साजिश में जुटे थे। ये सभी संदिग्ध पकड़े जाने से बचने के लिए पाकिस्तानी आकाओं की ओर से मुहैया कराए गए विदेशी नंबरों का इस्तेमाल कर रहे थे। खुफिया इनपुट पर ऐक्शन सूत्रों के अनुसार, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को खुफिया इनपुट मिले थे कि पाकिस्तानी ISI एजेंट शहजाद भट्टी अपने गुर्गों के साथ दिल्ली-एनसीआर में आतंकी वारदात को अंजाम देने की कोशिशों में जुटा है। इसके लिए इस टेरर नेटवर्क ने पंजाब के युवाओं की भर्ती की है। इसके बाद मुखबिरों से मिले इनपुट के आधार पर दिल्ली और पंजाब में कई जगहों पर छापेमारी की गई। टेरर नेटवर्क पर लगातार कस रहा शिकंजा दिल्ली पुलिस सेल के हाथ लगे एक गुर्गे ने पूछताछ में खुलासा किया था कि वह शहजाद भट्टी नेटवर्क के पाकिस्तानी आकाओं के संपर्क में था। वह ड्रोन के जरिए हथियार जुटा रहा था। उसके खुलासे के बाद पंजाब से दो और संदिग्धों को दबोचा गया था। उनके पास से एक जिगाना पिस्टल, 4 कारतूस और 2 मोबाइल बरामद किए गए थे। बाद में दिल्ली से चौथे संदिग्ध गगनप्रीत को दबोचा गया था। इसके बाद से लगातार इस टेरर नेटवर्क के गुर्गों को पकड़ा जा रहा है।

परिवार पहचान पत्र अपडेट पर सरकार का बड़ा फैसला, वृद्धावस्था पेंशन जारी रहेगी

चंडीगढ़  हरियाणा में परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) में जन्मतिथि सत्यापन की प्रक्रिया शुरू होने के बाद हजारों बुजुर्गों में यह आशंका पैदा हो गई थी कि यदि उनके पास उम्र साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेज नहीं हुए तो उनकी वृद्धावस्था सम्मान भत्ता पेंशन बंद हो सकती है। सरकार ने अब इस चिंता को दूर करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर ऐसी वैकल्पिक व्यवस्था तैयार की जा रही है, जिससे किसी भी पात्र बुजुर्ग की पेंशन केवल दस्तावेजों के अभाव में नहीं रुकेगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों की जन्मतिथि का सत्यापन अभी बाकी है, उन्हें पहले की तरह नियमित रूप से पेंशन मिलती रहेगी। हरियाणा सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन बुजुर्गों की थी, जिनका जन्म कई दशक पहले हुआ था और जिनके पास जन्म प्रमाण पत्र, शैक्षणिक प्रमाण पत्र या अन्य सरकारी रिकार्ड उपलब्ध नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे मामलों की संख्या काफी अधिक है। इसे देखते हुए सरकार ने बीच का रास्ता निकालते हुए नई व्यवस्था पर काम शुरू किया है। बुजुर्ग की आयु का होगा सत्यापन नई व्यवस्था के तहत यदि किसी बुजुर्ग के पास जन्मतिथि सत्यापित करने के लिए निर्धारित दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, तो परिवार पहचान पत्र में दर्ज उसके सबसे बड़े बेटे या बेटी के जन्म संबंधी रिकार्ड के आधार पर बुजुर्ग की आयु का सत्यापन किया जा सकेगा। परिवार पहचान पत्र प्राधिकरण के कार्डिनेटर डा. सतीश खोला ने बताया कि इसके लिए जरूरी होगा कि बड़ी संतान का नाम परिवार पहचान पत्र में दर्ज हो तथा उसकी जन्मतिथि पहले से सत्यापित हो। इस व्यवस्था से हजारों ऐसे लाभार्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो केवल दस्तावेजों की कमी के कारण परेशान थे। सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल जन्मतिथि सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है और इसका सीधा संबंध पेंशन भुगतान से नहीं है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश हैं कि कोई भी पात्र नागरिक केवल सत्यापन प्रक्रिया लंबित होने के कारण सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं होगा। जन्मतिथि सत्यापन के लिए चाहिएं पांच प्रमुख दस्तावेज वर्तमान में जन्मतिथि सत्यापन के लिए पांच दस्तावेज मान्य हैं। इनमें जन्म प्रमाण पत्र, दसवीं कक्षा की मार्कशीट, वर्ष 2019 तक बना मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट तथा पेंशन पेमेंट आर्डर (पीपीओ) शामिल हैं। जिन लाभार्थियों के पास इनमें से कोई भी दस्तावेज उपलब्ध है, उन्हें सरकार की ओर से भेजे गए संदेश के अनुसार 30 दिनों के भीतर संबंधित दस्तावेज परिवार पहचान पत्र पोर्टल पर अपलोड करने होंगे। परिवार पहचान पत्र प्राधिकरण के कार्डिनेटर डा. सतीश खोला के अनुसार दिसंबर तक परिवार पहचान पत्र में दर्ज सभी महत्वपूर्ण जानकारियों को अपडेट और सत्यापित करने का लक्ष्य रखा गया है। हरियाणा सरकार का उद्देश्य किसी भी पात्र व्यक्ति की पेंशन या अन्य सरकारी सुविधा बंद करना नहीं, बल्कि रिकार्ड को अधिक प्रमाणिक बनाना है ताकि भविष्य में सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी विवाद और रुकावट के पात्र लोगों तक आसानी से पहुंचता रहे।  

मध्य प्रदेश ने रचा इतिहास, दुर्लभ प्राचीन पांडुलिपियों को सहेजने और संरक्षित करने में देश में प्रथम

दुर्लभ प्राचीन पांडुलिपियों को सहेजने और संरक्षित करने में मध्यप्रदेश देश में प्रथम देश की प्राचीन मेधा को भावी पीढ़ी तक पहुँचाने का महायज्ञ- अपर मुख्य सचिव  शुक्ला ज्ञान भारतम् ऐप पर मध्यप्रदेश ने अपलोड की सबसे अधिक दुर्लभ पांडुलिपियाँ प्रदेश की 34 लाख 45 हजार से अधिक पांडुलिपियों पन्नों का पंजीकरण, 12 लाख से अधिक पांडुलिपियों का हुआ सत्यापन भोपाल : प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सांस्कृतिक अभ्युदय के संकल्प को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सशक्त नेतृत्व में साकार किया जा रहा है। मध्यप्रदेश की धरती ने भारत की प्राचीन ज्ञान-संपदा और सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने के विषय में देश भर में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार की डिजिटल पहल 'ज्ञान भारतम् ऐप' के अनुसार, दुर्लभ प्राचीन पांडुलिपियों की सूचना दर्ज करने और उनके संरक्षण के मामले में मध्यप्रदेश पूरे देश में प्रथम स्थान पर आ गया है। यह सफलता राज्य की समृद्ध ऐतिहासिक और बौद्धिक विरासत को वैश्विक पटल पर पुनः स्थापित करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रही है। अब तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार, ज्ञान भारतम् ऐप के माध्यम से 3 जुलाई 2026 को मध्यप्रदेश ने अब तक कुल 34 लाख 45 हजार 439 पांडुलिपियों पन्नों का पंजीकरण किया जा चुका है। 12 लाख 13 हजार 127 पांडुलिपियों का 'ज्ञान भारतम्' द्वारा सफलतापूर्वक सत्यापन हुआ है शेष सत्यापन की प्रक्रिया में हैं, जिनका चरणबद्ध तरीके से परीक्षण एवं प्रमाणीकरण किया जा रहा है। देश की प्राचीन मेधा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का महायज्ञ- अपर मुख्य सचिव श्री शिव शेखर शुक्ला अपर मुख्य सचिव संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व तथा सामान्य प्रशासन श्री शिव शेखर शुक्ला ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा है कि आज भी विश्वभर के मंदिरों, मठों, पुस्तकालयों और संग्रहालयों में संरक्षित भारतीय पाण्डुलिपियाँ हमारी समृद्ध ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर हैं। इनका संरक्षण, डिजिटलीकरण और पुनर्प्रसार भारत की प्राचीन ज्ञान-संपदा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। इसी के साथ भारत अपनी ज्ञान परंपरा को वैश्विक स्तर पर पुनः स्थापित करते हुए 'विश्व गुरु' की अपनी गौरवशाली पहचान को सशक्त बना रहा है। मध्यप्रदेश के जिलों के उत्कृष्ट प्रयासों ने न केवल प्रदेश की समृद्ध ज्ञान परंपरा के संरक्षण को नई दिशा दी है, बल्कि भारत की प्राचीन सांस्कृतिक एवं बौद्धिक धरोहर को संरक्षित करने के राष्ट्रीय अभियान को भी मजबूती प्रदान की है। प्रदेश में पांडुलिपियों के पंजीकरण के लिए विशेष अभियान ज्ञान भारतम् अभियान के अंतर्गत पांडुलिपियों के पंजीकरण में मध्यप्रदेश के सभी जिलों में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। 1 जुलाई तक के आकंड़ों के अनुसार इनमें भोपाल ने सबसे अधिक 24 लाख 26, हजार 172 पांडुलिपियों का पंजीकरण किया है। इसके बाद इंदौर में 3,99,477, रीवा में 2,68,763, बैतूल में 1,00,593 तथा छिंदवाड़ा में 77,094 पांडुलिपियां दर्ज की गईं। पन्ना से 64,257, सागर से 60,025, ग्वालियर से 29,870, उज्जैन से 20,995, रायसेन से 15,539, मंदसौर से 12,412, अनूपपुर से 11,829, नीमच से 8,950, मऊगंज से 8,406, खंडवा से 5,740, जबलपुर से 4,715, सतना से 4,061, नर्मदापुरम (होशंगाबाद) से 4,049, गुना से 3,937, उमरिया से 3,824, दतिया से 3,179, विदिशा से 2,745, सीधी से 2,497, अशोकनगर से 1,908, बालाघाट से 1,741, शहडोल से 1,397, टीकमगढ़ से 1,290, मंडला से 957, शिवपुरी से 943, धार से 870, भिंड से 800, रतलाम से 731, मुरैना से 655, शाजापुर से 638, बड़वानी से 614, सीहोर से 607, सिवनी से 564, छतरपुर से 381, देवास से 330, श्योपुर से 310, नरसिंहपुर से 254, राजगढ़ से 198, निवाड़ी से 177, खरगोन से 171, मैहर से 146, दमोह से 133, बुरहानपुर से 120, हरदा से 84, कटनी से 83, आगर मालवा से 57, सिंगरौली से 33, झाबुआ से 17, अलीराजपुर से 8, पांढुर्ना से 3 तथा डिंडोरी से 1 पांडुलिपि का पंजीकरण किया गया। यह व्यापक सहभागिता दर्शाती है कि प्रदेश के सभी जिलों ने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और पांडुलिपि धरोहर के संरक्षण एवं दस्तावेजीकरण के राष्ट्रीय अभियान में अपनी सक्रिय और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 'ज्ञान भारतम् ऐप' और इसका उद्देश्य 'ज्ञान भारतम् ऐप' भारत सरकार की एक अनूठी डिजिटल पहल है, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को सुरक्षित रखना और दुर्लभ पांडुलिपियों का एक विशाल डिजिटल अभिलेख (Digital Archive) तैयार करना है। ये भारतीय पांडुलिपियाँ केवल अतीत की स्मृतियाँ नहीं हैं, बल्कि 'वसुधैव कुटुम्बकम्' (विश्व एक परिवार है) की भावना से प्रेरित ज्ञान, संस्कृति और जीवन मूल्यों का जीवंत स्रोत हैं, जो संपूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती हैं। इस डिजिटल अभियान के माध्यम से शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के लिए इन अमूल्य ग्रंथों तक पहुँच बेहद आसान हो गई है। पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटलीकरण में नागरिक भी बन सकते हैं भागीदार ज्ञान भारतम् ऐप न केवल सूचना देता है, बल्कि आम जनता को भी इस सांस्कृतिक महायज्ञ से जोड़ता है। स्मार्ट सर्च: उपयोगकर्ता शीर्षक, लेखक, भाषा, विषय और संग्रह स्थल के आधार पर किसी भी पांडुलिपि की जानकारी आसानी से खोज सकते हैं। यदि किसी व्यक्ति या संस्था के पास कोई दुर्लभ पांडुलिपि उपलब्ध है, तो वे ऐप के माध्यम से उसके संरक्षण या डिजिटलीकरण के लिए सीधे अनुरोध दर्ज कर सकते हैं। आम नागरिक अपने पास मौजूद प्राचीन हस्तलिखित ग्रंथों की जानकारी साझा कर भारत को पुनः 'विश्व गुरु' के रूप में स्थापित करने में अपना योगदान दे सकते हैं। जिलों से मिलीं दुर्लभ प्राचीन पांडुलिपियाँ ज्ञान भारतम् मिशन से हुए संरक्षण कार्य से कई प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपियों का पता चला है। टीकमगढ़ से 10 फीट लंबा जम्बूद्वीप का रहस्यमयी नक्शा मिला है। इसमें प्राचीन भारतीय भूगोल को दर्शाने वाला 'जम्बूद्वीप' का एक अत्यंत रहस्यमयी और दुर्लभ नक्शा अंकित है।चित्र में बीच में वृत्ताकार संरचना है, उसके चारों ओर पर्वत-मालाएं और क्षेत्र दिखाए गए हैं। इसी तरह पन्ना से महाकवि केशव दास रचित रसिक प्रिया(1591 ई) की हस्त लिखित पांडुलिपि श्री राम जानकी मंदिर में मिली है। यह रीतिकाल का एक प्रतिष्ठित 'लक्षण-ग्रंथ' है जो काव्यशास्त्र, श्रृंगार रस और नायिका-भेद पर आधारित है। इसमें अमूर्त शास्त्रीय नियमों को राधा-कृष्ण के प्रेम प्रसंगों और मौलिक छंदों के माध्यम से समझाया गया है। बुरहानपुर से 220 वर्ष पुराना हस्तलिखित 20 फीट लंबा प्राचीन … Read more

यूपी में स्टार्टअप, डेटा सेंटर और पशुधन बीमा नीति को हरी झंडी

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लखनऊ स्थित 5 कालीदास मार्ग पर कैबिनेट बैठक हुई। जिसमें 27 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। शाहजहांपुर जिले की तहसील जलालाबाद नगर का नाम बदलकर परशुरामपुरी करने का फैसला लिया गया। सरकार के इस निर्णय के बाद नाम परिवर्तन से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। बैठक के बाद आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील शर्मा ने बताया कि प्रदेश में निवेश, नवाचार और रोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन की स्थापना के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। साथ ही यूपी स्टार्टअप नीति-2026 और डेटा सेंटर नीति-2026 को भी स्वीकृति प्रदान की गई है। सरकार का मानना है कि इन नीतियों से प्रदेश में नए निवेश आकर्षित होंगे और युवाओं को उद्यमिता के बेहतर अवसर मिलेंगे। योगी कैबिनेट में 27 प्रस्तावों पर मुहर पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग के मंत्री धर्मपाल सिंह ने बताया कि कैबिनेट ने मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना को भी मंजूरी दी है। यह योजना प्रदेश के सभी 75 जिलों में लागू होगी। इसके तहत लघु एवं सीमांत किसानों, पशुपालकों और डेयरी संचालकों के पशुओं का बीमा कराया जाएगा, ताकि महामारी, दुर्घटना, अपंगता या मृत्यु की स्थिति में उन्हें आर्थिक सहायता मिल सके। इसके अलावा गोरखपुर और मुरादाबाद में 100-100 बेड का अस्पताल और वाराणसी में ईएसआई का मेडिकल कॉलेज बनेगा। इनके लिए निशुल्क जमीन हस्तांतरण के प्रस्ताव को मंजूरी दी गईं। वाराणसी के मेडिकल कॉलेज में 50% सीटें श्रमिकों के परिवार के लिए आरक्षित होगी। तीन नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना को मंजूरी उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी सरकार ने तीन नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना को मंजूरी दी है। इनमें कानपुर के बिल्हौर में महर्षि योगी इंटरनेशनल कृषि विश्वविद्यालय, फतेहपुर में ठाकुर युगराज सिंह विश्वविद्यालय और गाजियाबाद में अजय कुमार गर्ग विश्वविद्यालय शामिल हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की पेंशन बढ़ाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। एक देश में दो विधान, दो प्रधान के खिलाफ शंखनाद इससे पहले लखनऊ में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उन्होंने देश की अखंडता के लिए 'एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान' के खिलाफ शंखनाद किया और 1953 में कश्मीर में बलिदान दिया। नेहरू सरकार की तुष्टीकरण नीति और धारा 370 के खिलाफ उनके सपने को पीएम मोदी के नेतृत्व में 2019 में धारा 370 हटाकर और संविधान लागू करके पूरा किया गया। सीएम ने यह भी कहा कि जिस बंगाल को उन्होंने बचाया, आज वहां भाजपा की डबल इंजन सरकार उनके स्थलों के पुनरुद्धार के लिए प्रभावी काम कर रही है।

लखपति दीदी अभियान से ग्रामीण महिलाएं बन रही आत्मनिर्भर उद्यमी

भिवानी  हरियाणा के गांवों में अब कहावत बदलती नजर आ रही है जिस गांव म्हैं बहु बेटी कमाऊ हो ली, समझो उस गांव की तकदीर चमक ली…। मामूली बचत से शुरू हुई यह मुहिम अब आत्मनिर्भर हरियाणा की सबसे मजबूत पहचान बनती जा रही है। जी हां कभी चौके-चूल्हे और घर-आंगन तक सीमित मानी जाने वाली ग्रामीण महिलाएं आज हरियाणा के विकास की ऐसी कहानी लिख रही हैं, जिस पर पूरा गांव गुमान कर रहा है। बचत की छोटी-सी पोटली तै शुरू हुआ सफर अब लाखों के कारोबार तक पहुंच गया है स्वयं सहायता समूहों और लखपति दीदी अभियान ने गांव की बहु बेटियां म्हैं ऐसा भरोसा जगाया है कि अब वे केवल अपने परिवार की आमदनी बढ़ाने तक ही सीमित नहीं, बल्कि पूरे गांव की तरक्की की मजबूत धुरी बन चुकी हैं। कहीं अचार-पापड़ की खुशबू है तो कहीं देशी अनाज के बिस्कुट, कहीं ड्रोन उड़ाती दीदी है तो कहीं जैविक उत्पादों से दूसरे राज्यों तक पहचान बना रही महिलाएं। गांव की चौपालों में अब खेती-किसानी के साथ कारोबार की बातें भी सुनाई देने लगी हैं। साफ है, हरियाणा के गांवों में बदलाव की बयार चल पड़ी है और इस बदलाव की अगुवाई महिलाएं कर रही हैं। बचत तै बरकत… यही बन गया गांव का नया मंत्र हरियाणा में आज 63 हजार से ज्यादा महिला स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे करीब 6.21 लाख परिवार जुड़े हुए हैं। प्रदेश में 5300 ग्राम संगठन और 270 क्लस्टर लेवल फेडरेशन महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की कड़ी बने हुए हैं। कभी हर महीने 100-200 रुपये की बचत करने वाली महिलाएं आज उसी बचत के दम पर बैंक से ऋण लेकर अपना कारोबार खड़ा कर रही हैं। डेयरी, हस्तशिल्प, अचार, पापड़, मसाले, देशी खाद्य उत्पाद, सिलाई-कढ़ाई, ब्यूटी पार्लर, अगरबत्ती, जैविक खेती और कई छोटे उद्योग अब गांव की महिलाओं की पहचान बन चुके हैं। पहले जो महिलाएं घर की चौखट लांघने में झिझकती थीं, आज वे अपने उत्पादों की मार्केटिंग कर रही हैं, ऑनलाइन आर्डर ले रही हैं और दूसरे राज्यों तक सामान भेज रही हैं। गांव की चौपाल में अब केवल फसलों की नहीं, बल्कि कारोबार बढ़ाने की भी चर्चा होती है लखपति दीदी बनण की होड़, बढ़ रहया आत्मविश्वास स्वयं सहायता समूहों की इस मुहिम को लखपति दीदी अभियान ने नई रफ्तार दी है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार हरियाणा में 58 हजार से ज्यादा महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। यानी वे सालाना एक लाख रुपये या उससे अधिक की आय अर्जित कर रही हैं। कमाई बढ़ने के साथ महिलाओं का आत्मविश्वास भी बढ़ा है। अब वे केवल घर के खर्च तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बच्चों की पढ़ाई, परिवार के स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता और पंचायतों के फैसलों में भी अपनी मजबूत भागीदारी निभा रही हैं। गांव की दूसरी महिलाएं भी इन्हें देखकर आगे बढ़ने का हौसला जुटा रही हैं। हरियाणवी जायके का स्वाद देशभर में पहुंच रहा गांव की दीदियों का हुनर अब हरियाणा की सरहदों से बाहर भी अपनी पहचान बना चुका है। बहल की रेखा के बनाए देशी अचार, पापड़ और मिर्च-मसाले नोएडा, चंडीगढ़ समेत कई राज्यों में पसंद किए जा रहे हैं। गुरुग्राम के चंदू गांव की पूजा शर्मा देशी अनाज से तैयार बिस्कुट दिल्ली, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश तक भेज रही हैं। ताजनगर की रवि प्रजापति जैविक उत्पाद तैयार कर रही हैं, जिनकी बाजार में अच्छी मांग है। ढिगावा निवासी सुषमा देवी के मिर्च-मसाले, रोस्टेड अनाज, बेसन, पापड़, देशी घी और दूध ग्राहकों की पहली पसंद बन चुके हैं। मंढाणा की शकुंतला आधुनिक तकनीक अपनाकर ड्रोन दीदी के रूप में किसानों की मदद कर रही हैं। साहलेवाला की विद्या के पायदान, कृष्णा के तैयार किए हरियाणवी परिधान, नीलम का ब्यूटी पार्लर और प्रमिला की देशी गुड़ की सुहाली व साबुन भी बाजार में खूब पसंद किए जा रहे हैं। भिवानी बस अड्डे पर बनाई कैंटीन की थाली का जायका ही न्यारा है। गांव खरक की सुमन के अचार और सुनीता की तैयार की गई चूड़ियों की भी अच्छी मांग है। ये केवल कुछ उदाहरण हैं। प्रदेश में ऐसी हजारों महिलाएं हैं जो कभी बेरोजगार थीं, लेकिन स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने के बाद आज अपने परिवार के साथ-साथ गांव की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रही हैं। अब गांव में अक्सर यह बात सुनने को मिल जाती है हमारी बहु बेटियां ईब किसे तै कम कोन्या। अब बाजार भी साथ, सरकार भी साथ महिलाओं के उत्पाद केवल गांव तक सीमित न रहें, इसके लिए सरकार भी लगातार प्रयास कर रही है। प्रदेश में 13 सांझा बाजार संचालित किए जा रहे हैं, जहां स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की बिक्री होती है। इसके अलावा 420 मिशन कैंटीन और 18 बस अड्डों पर 20 दुकानें महिलाओं के लिए स्थायी बाजार उपलब्ध करा रही हैं। डिजिटल प्लेटफार्म, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, प्रशिक्षण और बैंकिंग सुविधाओं ने भी महिलाओं के कारोबार को नई पहचान दी है। अब गांव की बहु बेटियां मोबाइल पर आर्डर ले रही हैं और अपने उत्पादों को दूर-दराज के बाजारों तक पहुंचा रही हैं। नंबर गेम प्रदेश में महिला ग्राम संगठन : 5300 महिला स्वयं सहायता समूह : 63,000 समूहों से जुड़े परिवार : 6.21 लाख क्लस्टर लेवल फेडरेशन : 270 सांझा बाजार : 13 मिशन कैंटीन : 420 18 बस अड्डों पर संचालित दुकानें : 20 लखपति दीदी : 58,000 से अधिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी सूरजभान ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों को बेहतर बाजार, डिजिटल प्लेटफार्म और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। आने वाले वर्षों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत महिलाएं ही होंगी। जब महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होती हैं तो केवल एक परिवार नहीं, बल्कि पूरा गांव विकास की राह पर आगे बढ़ता है।  

जिला प्रशासन की बैठक में रियल एस्टेट पर बड़ा फैसला, नई दरें जल्द लागू होंगी

जयपुर जयपुर में जमीन खरीदना अब महंगा हो सकता है. शहर में जमीने 49 फीसदी तक महंगी हो सकती है, जिसे 7 दिन के भीतर ही लागू कर दिया जाएगा. जिला प्रशासन की बैठक में डीएलसी दरों में बड़े बदलाव का फैसला लिया गया है. जिला कलक्टर संदेश नायक की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जिला दर निर्धारण समिति की बैठक आयोजित हुई. इस बैठक में डीएलसी दरों को लेकर रिवाइज करने का निर्णय लिया है. शहर की डीएलसी दरों में 10% से लेकर 49% तक की बढ़ोतरी को प्रस्तावित किया गया है. गौरतलब है कि इससे पहले अप्रैल महीने में भी डीएलसी दरों में 10% की वृद्धि की गई थी. इस बार जिन क्षेत्रों में बाजार मूल्य अधिक है और जहां तेजी से विकास हो रहा है, वहां दरों में बढ़ोतरी की गई है. वहीं, कुछ इलाकों में डीएलसी दरें घटाने के प्रस्ताव भी सामने रखे गए हैं. क्या होती है डीएलसी रेट किसी भी जमीन की बाजार कीमत सरकार निर्धारित करती है. यही डीएलसी रेट होती है, जिसे जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में बैठक में तय किया जाता है. डीएलसी की दरों पर जमीन की रजिस्ट्री या भूमि का आवंटन होता है. नगर निकाय द्वारा आरक्षित दर पर जमीन आवंटन के साथ ही विकास शुल्क को भी शामिल किया जाता है.   50 फीसदी से अधिक की दरों पर सरकार करेगी फैसला जानकारी के मुताबिक, 50% से कम बढ़ोतरी वाले प्रस्ताव 7 दिन के भीतर लागू कर दिए जाएंगे. जबकि 50% से अधिक वृद्धि वाले प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजे जाएंगे. इसी तरह, दरों में कमी से जुड़े प्रस्तावों पर भी अंतिम फैसला राज्य सरकार ही करेगी. नई डीएलसी दरों का सीधा असर संपत्ति की खरीद-फरोख्त और रजिस्ट्री पर पड़ेगा.