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Women’s T20 World Cup 2026: Doodle से लेकर लाइव स्ट्रीमिंग तक, जानें पूरी डिटेल्स

ICC Women’s T20 World Cup शुरू होने से पहले Google ने एक खास Doodle जारी किया है. 12 जून को लॉन्च किए गए इस रंग-बिरंगे डूडल में क्रिकेट स्टंप्स, बेल्स और गेंद को दिखाया गया है, जो टूर्नामेंट के पहले दिन का जश्न मनाते हैं. Google ने डूडल के साथ बताया कि 2026 ICC Women’s T20 World Cup शुरू हो चुका है. टी20 क्रिकेट की एनर्जी और रोमांच से जुड़ा है. यह डूडल उन जरूरी क्रिकेट के सामान को दर्शाता है, जिनके साथ दुनिया की बेहतरीन टीमें खिताब जीतने की कोशिश करेंगी. इन देशों में दिखेगा Doodle यह खास डूडल भारत समेत कई देशों में दिखाई देगा. इनमें श्रीलंका, पाकिस्तान, न्यूजीलैंड, नीदरलैंड्स, आयरलैंड, जमैका, गुयाना, यूएस वर्जिन आइलैंड्स, त्रिनिदाद और टोबैगो, सेंट विंसेंट एंड ग्रेनेडाइंस, एंटीगुआ और बारबुडा और डोमिनिका शामिल हैं. Google का यह डूडल महिला क्रिकेट के सबसे बड़े मंच की शुरुआत को और भी खास बना रहा है. इंग्लैंड और श्रीलंका के बीच होगा टूर्नामेंट का पहला मुकाबला 12 जून को यूनाइटेड किंगडम के बर्मिंघम में क्रिकेट का रोमांच अपने चरम पर होगा. टूर्नामेंट का पहला मैच इंग्लैंड और श्रीलंका के बीच खेला जाएगा. यह मुकाबला एजबेस्टन स्टेडियम में खेला जाएगा, लेकिन मैच शुरू होने से पहले दर्शकों को शानदार ओपनिंग सेरेमनी का भी मजा मिलेगा. इस खास मौके पर मशहूर वेस्ट एंड म्यूजिकल ‘Wicked’ की 20 साल पूरे होने का जश्न मनाया जाएगा. म्यूजिकल की कलाकार एम्मा किंग्स्टन और जिजी स्ट्रेलन, जो एल्फाबा और ग्लिंडा की भूमिका निभाती हैं, पूरी कास्ट के साथ शानदार परफॉर्मेंस देंगी. टूर्नामेंट के आगाज से पहले सभी 12 टीमों के कप्तानों ने लंदन के ऐतिहासिक वाटरलू ब्रिज पर आयोजित ‘कैप्टेन्स कार्निवल’ में हिस्सा लिया. मैच स्थानीय समयानुसार शाम 6:30 बजे शुरू होगा, जबकि भारतीय क्रिकेट फैंस इस मुकाबले का लुत्फ रात 11:00 बजे से उठा सकेंगे. भारत में ICC Women’s T20 World Cup के मैच कहां देखें? अगर आप भारत में ICC Women’s T20 World Cup के मुकाबलों का मजा लेना चाहते हैं, तो मैचों का लाइव टेलीकास्ट Star Sports के चैनलों पर देखा जा सकता है. वहीं, मोबाइल, लैपटॉप या स्मार्ट टीवी पर लाइव स्ट्रीमिंग के लिए JioHotstar ऐप सबसे आसान ऑप्शन रहेगा. भारतीय टीम अपना पहला मैच 14 जून को पाकिस्तान के खिलाफ खेलेगी. इसके बाद टीम इंडिया ग्रुप स्टेज में कई अहम मैच खेलेगी, जबकि उसका आखिरी ग्रुप मुकाबला 28 जून को लंदन के आइकोनिक लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होगा.

फेक ऐप, फ्रॉड कॉल और मोबाइल चोरी पर Google का बड़ा वार, यूजर्स को मिलेगी ट्रिपल सुरक्षा

 नई दिल्ली गूगल ने एंड्रॉयड शो:आईओ एडिशन का लाइवस्ट्रीम किया है, जो कंपनी के एनुअल कॉन्फ्रेंस गूगल आईओ 2026 से करीब एक सप्ताह पहले किया है. गूगल ने एंड्रॉयड स्मार्टफोन के लिए आने वाले अपकमिंग फीचर और टूल्स की जानकारी दी है. गूगल की एनुअल कॉन्फ्रेंस 19-20 मई को होगी।  गूगल अब बैंकिंग स्कैम कॉल्स से बचाने के लिए न्यू फीचर तैयार कर रहा है. बैंकिंग स्कैम  में साइबर ठग खुद की पहचान बैंक का कर्मचारी बताकर लोगों से अकाउंट की जानकारी हासिल करते हैं, ताकि उनके पैसे चुरा सकें. स्पूफिंग टेक्नोलॉजी की मदद से अक्सर लोगों को लगता है कि शायद बैंक से ही कॉल है।  गूगल ने अपने टूल को बेहतर करने के लिए कुछ चुनिंदा बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ पार्टनरशिप कर रहा है. बैंकिंग फ्रॉड को रोकने के लिए कंपनी स्पूफिंग प्रोटेक्शन फीचर लेकर आ रही है।  फर्जी कॉल्स को खुद का काट देगा  यह फीचर पार्टनर बैंक के नाम पर यूज होने वाले फर्जी कॉल्स को अपने आप काट देगा. साथ ही यूजर्स को एक नोटिफिकेशन भी मिलेगा कि वह संभवतः एक स्कैम कॉल्स थी।   गूगल का यह न्यू फीचर सिर्फ उन यूजर्स को मिलेगा, जिनका स्मार्टफोन एंड्रॉयड 11 और उससे ऊपर के डिवाइसों के लिए रोलआउट किया जाएगा. कंपनी ने बताया है कि इस साल के अंत तक कई बैंकों को शामिल कर लिया जाएगा।  लाइव थ्रेड डिटेक्शन फीचर  गूगल अपने लाइव थ्रेड डिटेक्शन फीचर को भी एक्सपेंड करने का ऐलान कर चुका है. यह फीचर ऐप्स के व्यवहार को एनालाइज करेगा और अगर कोई संदिग्ध एक्टिविटी मिलेगी तो उसे पकड़ा जा सकेगा. ऐसे में साइबर ठगों के ऐप्स पर लगाम लगेगी।  गूगल इसके लिए डाइनेमिक सिग्नल मॉनिटरिंग नाम की तकनीक का इस्तेमाल करती हैं. ये टेक्नोलॉजी किसी भी ऐप के द्वारा किए गए संदिग्ध पैटर्न और गतिविधियों को पहचान सकता है. साथ ही SMS फॉरवर्डिंग जैसी एक्टिविटी को भी देखता है।  डिवाइस चोरी होने से बचाएगा  गूगल एक और नया फीचर लेकर आ रहा है, जिसकी मदद से डिवाइस को चोरी से बचाया जा सकेगा. एक बार फोन को लोस्ट मार्क कर दिया गया तो चोर तब तक फोन का यूज नहीं कर पाएंगे जब तक उसको बायोमेट्रिक तरीके से अनलॉक नहीं किया जाता है. यह फीचर Android 17 डिवाइसों में डिफॉल्ट रूप से ऑन मिलेगा।  ऐप परमिशन और लोकेशन कंट्रोल करेगा  गूगल एक नया प्राइवेसी फीचर भी ला रहा है, जिसमें एक बटन होगा, जिसकी मदद से यूजर किसी ऐप को केबल तक अपनी सटीक लोकेशन देगा जब तक वह ऐप ओपन रहेगा। 

QR कोड अनिवार्य! Google ने वेबसाइट एक्सेस में किया नया नियम लागू

नई दिल्ली इंटरनेट इस्तेमाल करते समय आपने कई बार “I’m Not a Robot” वाला Captcha जरूर देखा होगा। यह सिस्टम वेबसाइट्स को बॉट्स और फर्जी ट्रैफिक से बचाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन अब Google इस पुराने सिस्टम को बदलने की तैयारी में है। गूगल एक नया QR Code बेस्ड ह्यूमन वेरिफिकेशन सिस्टम टेस्ट कर रही है, जिसमें यूजर्स को वेबसाइट इस्तेमाल करने से पहले अपने फोन को लिंक करना पड़ सकता है। इस नए सिस्टम में यूजर को वेबसाइट पर दिख रहे QR Code को अपने स्मार्टफोन से स्कैन करना होगा। इसके बाद फोन के जरिए यह पुष्टि की जाएगी कि वेबसाइट इस्तेमाल करने वाला इंसान है या कोई बॉट। आज के समय में AI और ऑटोमेटेड बॉट्स पहले से ज्यादा स्मार्ट हो चुके हैं। यही वजह है कि Google अब नया तरीका तलाश रहा है जिससे असली यूजर्स और बॉट्स के बीच फर्क करना आसान हो सके। फिलहाल यह फीचर शुरुआती चरण में बताया जा रहा है और Google ने आधिकारिक तौर पर इसकी पूरी जानकारी शेयर नहीं की है। आने वाले समय में कंपनी इसे कुछ वेबसाइट्स और सेवाओं पर टेस्ट कर सकती है। अगर यह फीचर सफल रहता है, तो इंटरनेट इस्तेमाल करने का तरीका आने वाले वर्षों में काफी बदल सकता है। Google का नया QR Code Verification सिस्टम गूगल ऐसा सिस्टम विकसित कर रहा है जिसमें वेबसाइट खोलने पर यूजर को QR Code दिखाई देगा। यूजर को यह QR Code अपने स्मार्टफोन से स्कैन करना होगा। इसके बाद फोन के जरिए वेबसाइट को यह सिग्नल मिलेगा कि सामने असली इंसान है, कोई ऑटोमेटेड बॉट नहीं। यह सिस्टम मौजूदा Captcha की जगह ले सकता है। अभी ज्यादातर वेबसाइट्स पर तस्वीर पहचानना, ट्रैफिक लाइट चुनना या टेक्स्ट टाइप करना पड़ता है। लेकिन नए सिस्टम में यह प्रक्रिया काफी अलग हो सकती है। Google क्यों बदलना चाहता है Google Captcha सिस्टम गूगल लंबे समय से reCAPTCHA सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा है। शुरुआत में यह काफी असरदार माना जाता था, लेकिन अब AI तकनीक इतनी आगे बढ़ चुकी है कि कई बॉट्स Captcha टेस्ट को आसानी से पास कर लेते हैं। गूगल का मानना है कि फोन लिंक्ड वेरिफिकेशन ज्यादा सुरक्षित हो सकता है क्योंकि इसमें असली डिवाइस और यूजर की पहचान को ट्रैक करना आसान होगा। इससे फर्जी अकाउंट, स्पैम और बॉट एक्टिविटी को कम करने में मदद मिल सकती है। ऐसे काम करेगा यह नया फीचर इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक यूजर जब किसी वेबसाइट पर जाएगा तो वहां QR Code दिखाई देगा। इसके बाद यूजर अपने फोन से QR Code स्कैन करेगा। स्कैन करने के बाद फोन एक तरह का डिजिटल सिग्नल वेबसाइट को भेजेगा, जिससे यह पुष्टि होगी कि सामने असली यूजर मौजूद है। प्राइवेसी को लेकर उठ रहे सवाल Google के इस नए सिस्टम को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा प्राइवेसी पर हो रही है। कई लोगों का कहना है कि अगर हर वेबसाइट के साथ फोन लिंक किया जाएगा, तो यूजर की ऑनलाइन एक्टिविटी को ज्यादा आसानी से ट्रैक किया जा सकेगा।

गूगल का बड़ा अपडेट: अब आपकी ऐप्स से जुड़कर जवाब देगा AI

गूगल ने इस साल की शुरुआत में सर्चिंग को बेहतर बनाने के लिए पर्सनल इंटेलीजेंस फीचर को लॉन्च किया था. साल की शुरुआत में इसको अमेरिका में लॉन्च किया था और अब इसको भारत में लॉन्च कर दिया गया है. Gemini के लिए पर्सनल इंटेलिजेंस फीचर की मदद से यूजर्स को बेहतर सर्चिंग एक्सपीरियंस मिलेगा. ये लेटेस्ट फीचर गूगल के ऐप्स जैसे जीमेल, गूगल फोटोज, यूट्यूब और गूगल सर्च से जानकारी को सुरक्षित तरीके से जोड़ता है, जिसके बाद यूजर्स की पसंद के आधार पर जवाब देता है. उदाहरण के तौर पर समझें तो आप जयपुर घूमने का प्लान बनाते हैं और ट्रिप को लेकर सर्च करते हैं. इसके बाद पर्सनल इंटेलिजेंस फीचर जीमेल पर रिसीव टिकट और होटल की डिटेल्स को लेगा, जिसके बाद वह यूट्यूब पर देखे वीडियो के आधार पर घूमने की सलाह देगा. साथ लगने वाले समय को भी बताएगा. दो कैपिबिलिटीज पर काम करता है पर्सनल इंटेलिजेंस फीचर असल में दो कैपिबिलिटीज पर काम करता है. इसमें एक कॉम्प्लैक्स और अलग-अलग सोर्स से आने वाली को समझना है. दूसरा कनेक्टेड ऐप्स से खास जानकारी निकालना है.  यह सिस्टम टेक्स्ट, फोटो और वीडियो डेटा को मिलाकर AI ज्यादा सटीक जवाब देने की कोशिश करता है. डेटा प्राइवेसी का रखा है ध्यान Google का दावा है कि यह फीचर यूजर्स की प्राइवेसी को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. वैसे तो इस फीचर बंद करके रखा जाता है, जिसे यूजर्स को खुद मैनुअली जाकर ऑन करना होता है. इसमें यूजर्स को पूरा कंट्रोल मिलता है, जिसमें यूजर्स तय कर सकते हैं कि कौन-कौन से ऐप्स से डेटा ले सकते हैं. यहां गौर करने वाली बात यह है कि यह सिस्टम थर्ड पार्टी ऐप्स के पास जाता नहीं है. यहां सोर्स को एकदम ट्रांस्परेंट रखा है, जहां AI बता सकता है कि जवाब किस स्रोत से आया है. मॉडल ट्रेनिंग कैसे होती है गूगल ने साफ कर दिया है कि जेमिनाई सीधे यूजर के जीमेल या फोटोज के डेटा पर ट्रेन नहीं होगा. ये ट्रेनिंग लिमिटेड डेटा पर होगी, जिसमें प्रॉम्प्ट और AI के जवाब पर होती है. बताते चलें कि मौजूदा वर्जन अभी बीटा फेज में है, जिसमें कुछ लिमिटेशन मौजूद हैं. भारत में यह फीचर अभी सिर्फ गूगल एआई प्लस, प्रो और अल्ट्रा सब्सक्राइबर के लिए रोलआउट हो रहा है. जल्द ही फ्री वर्जन यूजर्स के लिए भी यह उपलब्ध होगा. यह वेब और स्मार्टफोन पर काम करेगा. AI पर्सनालाइज को कैसे करें ऑन गूगल का पर्सनल इंटीलेंज फीचर को ऑन करना बहुत ही सिंपल है. एलिजिबल यूजर्स को जेमिनाई ऐप्स को ओपन करना होगा, फिर सेटिंग्स में जाना होगा. इसके बाद पर्सनल इंटेलीजेंस पर क्लिक करें, जिसके बाद कनेक्टेड ऐप्स को चुनना होगा.

गूगल का ऐलान: अब Gmail ईमेल होंगे और ज्यादा सुरक्षित

गूगल ने एक बड़ा ऐलान किया है, जिसमें जीमेल यूजर्स को एंड टू एंड एनक्रिप्शन का सपोर्ट मिलेगा. यह सपोर्ट एंड्रॉयड और आईओएस दोनों ऑपरेटिंग सिस्टम पर मिलेगा. एंड टू एंड एनक्रिप्शन की सुविधा इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप वॉट्सऐप पर भी मिलता है.   एक बार अपडेट मिलने के बाद यूजर्स को सेंसटिव ईमेल भेजने के लिए सिक्योरिटी लेयर के लिए अलग से सॉफ्टवेयर या एक्सटेंशन की जरूरत नहीं होगी. ईमेल सुरक्षित तरीके से रिसीवर तक पहुंच जाएगा. एंड टू एंड एनक्रिप्शन क्या होता है? एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, असल में एक तरह का डिजिटल सिक्योरिटी लॉक सिस्टम है. इस टेक्नोलॉजी का यूज करने पर डेटा भेजने वाले और रिसीव करने वाले के अलावा अन्य कोई शख्स ईमेल या मैसेज को बीच में डिकोड नहीं कर पाएगा. सीधे शब्दों में समझें तो आप किसी बक्से को भेजते हैं, जिसमें सोना-चांदी है. ऐसे लोग उसमें ताला लगा देते हैं और चाबी सिर्फ रिसीवर के पास है. एंड टू एंड एनक्रिप्शन कुछ ऐसे ही काम करता है. गूगल ने जीमेल के एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन सपोर्ट को एंड्रॉयड और आईओएस डिवाइस तक एक्सपेंशन का ऐलान किया है. एक बार अपडेट मिलने के बाद यूजर्स अब सीधे Gmail मोबाइल ऐप की मदद से एन्क्रिप्टेड ईमेल लिख, भेज और पढ़ सकेंगे. इन यूजर्स को मिलेगी सुविधा एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन गूगल वर्क स्पेस के एंटरप्राइज यूजर्स को मिलेगी, जिनके पास क्लाइंट-साइड एनक्रिप्शन कैपिबिलटीज है. इसके लिए पहले एडमिन कंसोल के जरिए एंड्रॉयड और आईओएस सपोर्ट को एक्टिवेट करना होगा, उसके बाद ही यूजर्स इसका एक्सेस कर पाएंगे. गूगल बता चुका है कि अपडेट रैपिड रिलीज और शेड्यूल रिलीज दोनों डोमेन के लिए लाइव हो चुका है. एक बार मोबाइल पर एंड टू एंड इनक्रिप्शन की सुविधा मिलने के बाद यूजर्स कहीं से भी सुरक्षित तरीके से एक्सेस कर पाएंगे. पहले एन्क्रिप्टेड ईमेल के लिए डेस्कटॉप या थर्ड-पार्टी टूल्स की जरूरत होती थी.

3.5 अरब लोगों के लिए गूगल का चेतावनी अलर्ट, ‘जीरो डे’ संकट से बचने के लिए करें ये जरूरी कदम

नई दिल्ली टेक्नोलॉजी जगत की दिग्गज कंपनी Google का क्रोम ब्राउजर दुनियाभर में पॉपुलर है और भारत समेत दुनियाभर में इसके 3.5 अरब से ज्यादा यूजर हैं. अब अधिकतर यूजर्स पर एक बड़ा खतरा मंडरा रहा है, जो असल में दो कमजोरियों हैं, जिनको गूगल ने जीरो डे कैटेगरी की कमजोरियों में रखा है. हैकर्स इनका फायदा उठाकर क्रोम ब्राउजर यूजर्स को शिकार बना सकते हैं. ये जानकारी फॉर्ब्स ने अपनी रिपोर्ट में दी है। खतरे को भांपते हुए क्रोम की तरफ से इमरजेंसी सिक्योरिटी अपडेट जारी किया है और यूजर्स को तुरंत ब्राउजर को अपडेट करने की जानकारी शेयर की है. ब्राउजर को अपडेट करने के बाद यूजर्स अपने डिवाइस और डेटा को सुरक्षित कर सकते हैं। वल्नरेबिलिटी को लेकर ज्यादा डिटेल्स नहीं दी वल्नरेबिलिटी को लेकर अभी बहुत ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है. कंपनी का मानना है कि जब तक अधिकतर यूजर्स लेटेस्ट अपडेट के साथ ब्राउजर की कमजोरियों को फिक्स नहीं कर लेते हैं तब तक इनकी डिटेल्स को सीमित रखा जाएगा, जिससे हैकर्स इनका फायदा ना उठा सकें. इन कमजोरियों को CVE-2026-3909 और CVE-2026-3910 के नाम से ट्रैक किया जा रहा है। क्यों ब्राउजर्स को निशाना बना रहे हैं हैंकर्स ?  इंटरनेट यूजर्स किसी भी इंफॉर्मेशन को सर्च करने के लिए ब्राउजर पर ही सर्चिंग करते हैं. हर एक स्मार्टफोन और पीसी यूजर्स के पास ब्राउजर होता है, जिसमें क्रोम सबसे ज्यादा मार्केट शेयर वाला ब्राउजर है. ऐसे में हैकर्स ब्राउजर को निशाना बनाते हैं ताकि वह यूजर्स कि डिटेल्स को आसानी से हैकर कर सकें। यहां एक पुरानी रिपोर्ट के बारे में बताते हैं, Omdia की 2025 की रिपोर्ट है, जो Palo Alto Networks के लिए तैयार की गई थी. रिपोर्ट के मुताबिक, एक साल में 95 परसेंट ऑर्गनाइजेसन को एक ऐसा साइबर सिक्योरिटी का सामना करना पड़ा, जिसकी शुरुआत कर्मचारियों के कंप्यूटर से हुई थी। ब्राउजर हैकिंग पर साइबर एक्सपर्ट का क्या कहना ब्राउजर हैकिंग को लेकर साइबर एक्सपर्ट का कहना है कि अब हैकर्स सीधा ब्राउजर को निशाना बनाते हैं. इसमें हैकर्स चोरी हुए टोकन के जरिए सेशन हाइजेकिंग और ऐसे एजवांस्ड एडवांस्ड फिशिंग अटैक शामिल हैं, जो लंबे समय से चले आ रहे मल्टी फैक्टर ऑथेंटिकेशन को भी बायपास कर सकते हैं।  

Chrome में अब Gemini का फीचर, Google ब्राउजर करेगा यूजर की मदद खुद

नई दिल्ली इंटरनेट ब्राउज़िंग का तरीका धीरे-धीरे बदल रहा है. ब्राउजर में एजेंटिक फीचर्स मिल रहे हैं. Perplexity Comet हो या या OpenAI का ATLAS ब्राउजर, ये सभी एजेंटिक AI देते हैं. यानी ब्राउजर खुद ही आपका काम कर देता है।Google ने अपने ब्राउज़र Google Chrome में Google Gemini AI को भारत में रोलआउट करना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही यह फीचर कनाडा और न्यूज़ीलैंड के यूज़र्स को भी दिया जा रहा है. गूगल ने इस फीचर का ऐलान पहले ही कर दिया था और तब से यूजर्स को इसका इंतजार था। क्रोम में ऐसे यूज होगा गूगल जेमिनी अब तक Gemini का इस्तेमाल अलग ऐप या वेबसाइट के जरिए किया जाता था. लेकिन इस अपडेट के बाद यह सीधे Chrome के अंदर काम करेगा. यानी अगर आप कोई खबर पढ़ रहे हैं, किसी प्रोडक्ट के बारे में जानकारी देख रहे हैं या किसी टॉपिक पर सर्च कर रहे हैं, तो उसी पेज पर AI से सवाल पूछ सकते हैं. इसके लिए अलग से नया टैब खोलने की जरूरत नहीं होगी। साइड पैनल में जुड़ा Gemini Chrome में यह फीचर एक साइड पैनल के रूप में दिखेगा. यूज़र इसे खोलकर Gemini से चैट कर सकते हैं. अगर कोई आर्टिकल बहुत लंबा है तो AI से उसका समरी पूछा जा सकता है। अगर किसी वेबसाइट पर दी गई जानकारी थोड़ी मुश्किल है तो Gemini उसे आसान भाषा में समझा सकता है. उदाहरण के तौर पर अगर कोई टेक्नोलॉजी या फाइनेंस से जुड़ा आर्टिकल पढ़ रहा है, तो AI से पूछा जा सकता है कि इसका मतलब क्या है या इसका छोटा सार क्या है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समझेगा कॉन्टेक्स्ट इस फीचर की एक और खास बात यह है कि AI एक से ज्यादा टैब को भी समझ सकता है. मान लीजिए आपने किसी स्मार्टफोन या लैपटॉप के बारे में अलग-अलग वेबसाइट खोल रखी हैं। ऐसे में Gemini उन टैब्स में दी गई जानकारी को देखकर तुलना करने में मदद कर सकता है. इससे यूज़र को अलग-अलग साइट पढ़ने में ज्यादा समय नहीं लगाना पड़ेगा। डेस्क्टॉप यूजर्स को पहले मिलेगा ये फीचर रिपोर्ट्स के मुताबिक यह फीचर अभी धीरे-धीरे रोलआउट किया जा रहा है. सबसे पहले इसे डेस्कटॉप यूज़र्स के लिए लाया गया है. यानी Windows और Mac पर Chrome इस्तेमाल करने वाले यूज़र्स को यह फीचर मिलने लगा है. आने वाले समय में इसे और ज्यादा यूज़र्स तक पहुंचाया जा सकता है। भारत को ध्यान में रखते हुए इसमें कई भाषाओं का सपोर्ट भी दिया गया है. इससे यूज़र अपनी भाषा में भी AI से सवाल पूछ सकेंगे. यानी अगर कोई हिंदी में सवाल पूछता है तो AI उसी भाषा में जवाब दे सकता है। दरअसल पिछले कुछ समय से टेक कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स में AI को तेजी से जोड़ रही हैं. गूगल पहले ही Gemini को अपने कई प्रोडक्ट्स में ला चुका है. अब Chrome में इसका इंटीग्रेशन दिखाता है कि कंपनी चाहती है कि यूज़र्स को ब्राउज़र के अंदर ही एक AI असिस्टेंट मिल जाए, जो इंटरनेट इस्तेमाल करते समय तुरंत मदद कर सके।  

Nano Banana 2 लॉन्च: Google AI से मिनटों में तैयार करें 4K फोटो, जानें कैसे और कहां होगा इस्तेमाल

गूगल के नैनो बनाना टूल का इस्‍तेमाल करके तस्‍वीरें बनवाने वाले तमाम लोगों के लिए बड़ी खबर है। गूगल ने Nano Banana 2 (Gemini 3.1 Flash Image) नाम से अपना नया इमेज मॉडल लॉन्‍च कर दिया है। कंपनी ने पिछले साल अगस्‍त में नैनो बनाना को पेश किया था। उसका इस्‍तेमाल करके लोगों ने खूब फोटो बनवाईं। साड़ी ट्रेंड भी काफी सुर्खियों में रहा। अब Nano Banana 2 आ गया है। गूगल ने बताया है कि इसकी मदद से लोग 4K फोटो एआई से बनवा पाएंगे। टूल को रोलआउट किया जा रहा है, आइए जानते हैं इसे कहां इस्‍तेमाल किया जा सकेगा। Nano Banana 2 क्‍या है? गूगल ने पिछले साल अगस्‍त में Nano Banana को पेश किया था। फिर नवंबर में Nano Banana Pro को रिलीज किया। अब कंपनी ने Nano Banana 2 (Gemini 3.1 Flash Image) को उतारा है। कहा है कि यह उसका सबसे नया इमेज मॉडल है। दावा है कि इसकी मदद से ज्‍यादा बेहतर क्‍वॉलिटी वाली फोटोज को तेजी से बनवाया जा सकता है। कंपनी के सीईओ सुंदर पिचाई ने कहा है कि यह गूगल का अबतक का सबसे बेस्‍ट इमेज जेनरेशन मॉडल है। Nano Banana 2 के प्रमुख फीचर्स तस्‍वीरें ज्‍यादा रियल: गूगल ने बताया है कि Nano Banana 2 मॉडल, Gemini के रियल-वर्ल्ड नॉलेज का इस्‍तेमाल करके किसी इमेज को ज्‍यादा रियल बनाता है। अब लोग इन्‍फ्रोग्राफ‍िक्‍स तैयार करवा सकते हैं। नोट्स को डायग्राम में बदल सकते हैं। डेटा विजुअलाइजेशन भी इससे कर सकते हैं। टेक्‍स्‍ट को इमेज में लगाने और ट्रांसलेशन में माहि‍र: गूगल ने बताया है कि Nano Banana 2 किसी टेक्‍स्‍ट को सही तरीके से इमेज में लगाने और ट्रांसलेशन में माहि‍र हो गया है। दावा है कि किसी तस्‍वीर में टेक्‍स्‍ट लगवाना अब इसके बायें हाथ का खेल है। दावा है कि यह हाई-क्‍वॉलिटी और सच लगने वाली तस्‍वीरें बनाता है। जैसा कहा, वैसा बनाएगा: Nano Banana 2 अपने यूजर के प्रॉम्‍प्‍ट्स को बारीकी से समझकर इमेज बनाता है। दावा है कि यह वैसी ही तस्‍वीर बनाने में सक्षम है जैसा किसी यूजर ने सोचा था। हाई-क्‍वॉलिटी इमेज: नैनो बनाना2 की मदद से लोग 4K तक अलग-अलग आस्पेक्ट रेशियो और रेजॉलूशन में फोटोज बनवा सकेंगे। दावा है कि यूजर्स को वाइब्रेंट लाइटिंग, बेहतर टेक्सचर और शार्प डिटेल मिलेंगी। Nano Banana 2 कौन कर पाएगा इस्‍तेमाल? Nano Banana 2 को गूगल के सभी प्रमुख प्रोडक्‍ट्स से जोड़ा जा रहा है। Gemini ऐप: जेमिनी ऐप में यह नैनो बनाना के अबतक आए मॉडलों की जगह लेगा। कंपनी ने कहा है कि Google AI Pro और Ultra सब्सक्राइबर इसे इस्‍तेमाल कर पाएंगे।

रिस्की ऐप्स पर बड़ी कार्रवाई: AI की मदद से Google ने बचाए करोड़ों यूजर्स

नई दिल्ली गूगल ने गुरुवार को 2025 में एंड्रॉयड इकोसिस्टम को सिक्योर रखने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी है. अपने ऐनुअल सिक्योरिटी अपडेट में कंपनी ने बताया कि कैसे गूगल प्ले को सुरक्षित बनाने के लिए लाखों ऐप्स को ब्लॉक किया गया है. कंपनी ने लाखों ऐसे ऐप्स को ब्लॉक किया है जो मालवेयर फैला सकते थे.  इतना ही नहीं ये ऐप्स फाइनेंशियल फ्रॉड्स, छिपे हुए सब्सक्रिप्शन और प्राइवेसी में दखल के जरिए यूजर्स को नुकसान पहुंचा सकते थे. इससे पहले किसी यूजर को कोई नुकसान हो गूगल ने इन्हें अपने प्लेटफॉर्म से हटा दिया है. कंपनी ने बताया है कि उन्होंने AI टूल की मदद से ऐसे ऐप्स को पहचाना है.  17.5 लाख ऐप्स को किया ब्लॉक गूगल ने बताया कि 2025 में 17.5 लाख ऐप्स को Google Play पर पब्लिश होने से पहले ही ब्लॉक कर दिया गया है, क्योंकि उन्होंने कंपनी की पॉलिसी का उल्लंघन किया था. कंपनी ने इसकी जानकारी 19 फरवरी को रिलीज हुए ब्लॉक में दी है. साथ ही कंपनी ने 80 हजार डेवलपर्स को भी बैन किया है, जो ऐसी एक्टिविटी से जुड़े हुए थे.  दिग्गज टेक कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि उन्होंने 2,55,000 ऐप्स को यूजर के सेंसिटिव और गैरजरूरी डेटा तक पहुंचने से रोका है. गूगल ने अपनी प्राइवेसी पॉलिसी को मजबूत किया है और प्राइवेसी फॉर्वर्ड डेवलपमेंट को प्रमोट करने की बात कही है.  AI कैसे कर रहा है गूगल की मदद? ऐप डिस्कवरी में लोगों के भरोसे को बनाए रखने के लिए गूगल ने एंटी-स्पैम सिस्टम को बेहतर किया है. इसकी वजह से 16 लाख स्पैम रेटिंग और रिव्यूज को ब्लॉक किया गया है. इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड रिव्यूज भी शामिल हैं. इसके अलावा रिव्यू बॉम्बिंग कैपेन की वजह से ऐप्स को होने वाले नुकसान को भी कम किया गया है.  कंपनी का कहना है कि इससे यूजर्स और डेवलपर्स दोनों को फायदा हुआ है. कंपनी ने बताया है कि उसका जेनरेटिव AI पावर्ड रिव्यू सिस्टम किसी ऐप को कैसे एनालाइज करता है. ये सिस्टम किसी ऐप की अर्ली लाइफ साइकिल डेवपलमेंट को एनालाइज करने, मैलवेयर, स्पाईवेयर और फाइनेशियल स्कैम को डिटेक्ट करने में मदद करता है.

टेक्नोलॉजी में नया अध्याय: Jio–Google–Microsoft की Trusted Tech Alliance, भारत के डिजिटल भविष्य पर क्या होगा असर?

नई दिल्ली अफ्रीका, एशिया, यूरोप और नॉर्थ अमेरिका की 15 बड़ी कंपनियों ने ‘ट्रस्टेड टेक एलायंस’ (TTA) के गठन की घोषणा की है। यह एक जैसी सोच वाली इंटरनेशनल टेक कंपनियों का एक समूह है, जो कनेक्टिविटी, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, सेमीकंडक्टर, सॉफ्टवेयर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए ऐसी तकनीक बनाने के लिए साथ आए हैं जिस पर दुनिया यकीन कर सके और जिसे परखा जा सके। इस एलायंस में भारत की ओर से Jio Platforms शामिल है। जर्मनी में आयोजित म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस के दौरान इस एलायंस का ऐलान किया गया। ये दिग्गज कंपनियां हैं इस एलायंस का हिस्सा एलायंस के संस्थापक सदस्यों में अमेजन, वेब सर्विसेज, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल क्लाउड, एरिक्सन, नोकिया, एसएपी और एनटीटी जैसी कुल 15 ग्लोबल टेक कंपनियां शामिल हैं। एलायंस का कहना है कि आगे और कंपनियों को इससे जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही, देश और दुनिया के लेवल पर अपनी तकनीक को और बेहतर बनाने, दूसरी कंपनियों के साथ मुकाबले में बने रहने और एक मजबूत डिजिटल सिस्टम तैयार करने पर काम जारी रहेगा। जियो का बड़ा संकल्प लॉन्च के मौके पर जियो प्लेटफॉर्म्स के सीईओ किरण थॉमस ने कहा कि विश्व स्तर पर डिजिटल विकास को गति देने के लिए भरोसेमंद, सुरक्षित और पारदर्शी टेक्नोलॉजी जरूरी है। जियो प्लेटफॉर्म्स को गर्व है कि वह 'ट्रस्टेड टेक एलायंस' का हिस्सा बना है, ताकि टेक्नोलॉजी की दुनिया में मिलकर ऐसे नियम और तरीके बनाए जा सकें जो सुरक्षित हों और जिन पर सब भरोसा कर सकें। उन्होंने आगे बताया कि हम इस कोशिश के जरिए दुनिया भर के पार्टनर्स के साथ मिलकर आने वाले समय की इंटरनेट कनेक्टिविटी, क्लाउड और AI सिस्टम को इतना बेहतर बनाना चाहते हैं कि लोग लंबे समय तक उन पर भरोसा कर सकें। माइक्रोसॉफ्ट के वाइस चेयर और प्रेसिडेंट ब्रैड स्मिथ ने इस मौक पर कहा कि मौजूदा वैश्विक माहौल में समान सोच वाली कंपनियों का साथ आना जरूरी है, ताकि सीमाओं के पार तकनीक में भरोसा और उच्च मानक कायम किए जा सकें। वहीं एरिक्सन के सीईओ बोर्ये एकहोम ने कहा कि कोई एक कंपनी या देश अकेले सुरक्षित और भरोसेमंद डिजिटल ढांचा नहीं बना सकता, इसके लिए वैश्विक सहयोग जरूरी है। ग्लोबल मंच पर बढ़ेगी भारत की धाक इस एलायंस के तहत सदस्य कंपनियों ने पांच प्रमुख सिद्धांतों पर सहमति जताई है। इसमें कंपनियों को चलाने के ईमानदार तरीके, सुरक्षा की समय-समय पर जांच, सामान और सेवाओं की सप्लाई का मजबूत नेटवर्क, एक ऐसा सिस्टम जहां सब मिलकर काम कर सकें और कानून के हिसाब से लोगों के डेटा को सुरक्षित रखना शामिल है। इन नियमों के जरिए कंपनियां यह सुनिश्चित करेंगी कि टेक्नोलॉजी सुरक्षित, विश्वसनीय और जिम्मेदारी के साथ संचालित हो, चाहे उसका विकास या इस्तेमाल कहीं भी हो। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जियो की भागीदारी से भारत को वैश्विक डिजिटल मानकों के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का मौका मिलेगा। इससे देश में क्लाउड, 5G और AI आधारित सर्विसेज को ग्लोबल स्तर की विश्वसनीयता मिल सकती है और डेटा सुरक्षा को लेकर ग्राहकों का भरोसा और मजबूत होगा।