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AI की रेस में चीन का Kling आगे? जानिए क्यों दुनियाभर में मचा रहा है तहलका

नई दिल्ली AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से वीडियो बनाने का ट्रैंड इन दिनों काफी चल रहा है। क्रिएटर्स के लिए AI एक जरूरी टूल बन गया है। चीन की कंपनी Kuaishou का Kling प्लेटफॉर्म भी Google के Veo और OpenAI के Sora जैसे बड़े एआई वीडियो एडिटिंग टूल को कड़ी टक्कर दे रहा है। अब इसका नाम भी टॉप एआई एडिटिंग टूल की लिस्ट में शामिल हो गया है। बता दें कि Kling को जून, 2024 में लॉन्च किया गया था। इसके बाद इसने लगभग 1.2 करोड़ मंथली एक्टिव यूजर्स का बेस बना लिया है। इसकी सालाना आय लगभग 24 करोड़ अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई है। इसके बारे में डिटेल में जानते हैं। वीडियो जनरेशन बेंचमार्क में बदली रैंकिंग आजकल एलियन का हमला और डिजिटल इंसानों द्वारा लाइव स्ट्रीमिंग होस्ट करना आम बात हो गई है। वीडियो जनरेशन बेंचमार्क में रैंकिंग बदल रही है। Kling, Google के Veo और OpenAI के Sora के साथ टॉप टियर में अपनी जगह बना चुका है। Kuaishou का Kling समय के साथ-साथ हिट होता जा रहा है, लेकिन सवाल यह है कि इसकी लोकप्रियता इतनी क्यों बढ़ रही है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2024 में ही इसने 2 करोड़ अमेरिकी डॉलर से ज्यादा की कमाई की थी। इससे इसकी साल भर की कमाई 14 करोड़ अमेरिकी डॉलर हो गई थी। जनवरी 2025 में, रोजाना की औसत कमाई पिछले महीने की तुलना में लगभग 30% बढ़ गई। तीन कारण से सफल हुआ टूल Kuaishou के अनुसार, Kling जनरेटिव-एआई युग का नया मॉडर्न अवतार बता रहा है। कंपनी ने अप्रैल 2025 में इस टूल के लिए एक अलग बिजनेस यूनिट बनाई। पिछले साल की अर्निंग कॉल्स में कंपनी के अधिकारी बार-बार इसके बढ़ते यूजर बेस और कमाई का जिक्र करते रहे। Kling के ऑपरेशन हेड Zeng Yushen के अनुसार, इस वीडियो जनरेटर की सफलता के पीछे तीन मेन कारण हैं। इसमें बेहतरीन एआई मॉडल, मजबूत इंटरैक्टिव डिजाइन और क्रिएटर्स के इकोसिस्टम के साथ जुड़ाव शामिल है।

अंतरिक्ष में डेटा सेंटर की तैयारी में Google, तकनीकी दुनिया में मची हलचल

नई दिल्ली दुनियाभर में AI कंपनियां अपने डेटा सेंटर्स को लेकर काम कर रही हैं. कोई धरती पर या फिर कोई समंदर के अंदर डेटा सेंटर बना रहा है. इस दिशा में Google एक कदम आगे निकलने की कोशिश कर रहा है. अब गूगल अंतरिक्ष में AI कंप्यूटिंग सिस्टम को बनाने जा रहा है, जिसको आगे डेटा सेंटर के रूप में भी यूज किया जा सकेगा. इसको लेकर Google ने एक सफल परीक्षण किया है और सीईओ सुंदर पिचाई ने पोस्ट करके इसकी जानकारी भी दी है.  सुंदर पिचाई ने बताया कि गूगल ने लो अर्थ ऑर्बिट में पाई जाने वाले रेडिएशन की कंडिशन को फॉलो करते हुए एक सफल टेस्टिंग की है. इसमें ट्रिलियम-जनरेशन टेंसर प्रोसेसिंग यूनिट्स (TPUs) को टेस्ट किया है.   प्रोजेक्ट सनकैचर के लिए यह एक बड़ी सफलता है. इस प्रोजेक्ट की मदद से गूगल अपने सबसे महत्वकांक्षी योजनाओं में से एक को पूरा करना चाहते है. कंपनी इसकी मदद से अंतरिक्ष में AI कंप्यूटिंग सिस्टम का सेटअप लगाना चाहता है, जिसको सूरज की रोशनी से पावर मिलेगी.   सुंदर पिचाई ने समझाया, TPU क्या है?  गूगल सीईओ सुंदर पिचाई ने बताया कि TPU असल में खास तरह की चिप्स हैं, जिनको आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) के काम को बेहतर बनाने के लिए तैयार किया है. इन चिप्स की टेस्टिंग रेडिएशन एक्सपोजर के दौरान की गई और इन चिप्स पर डैमेज का कोई भी निशान नहीं दिखा है.     सफल टेस्टिंग से इस बात के पॉजिटिव साइन मिलते हैं कि गूगल का एडवांस्ड हार्डवेयर सिस्टम, आउटर स्पेस के खतरनाक एनवायरमेंट का भी सामना करना सकेगा. बताते चलें कि आउटर स्पेस में हाई रेडिशन और तापमान तेजी से बदलता है.  इस प्रोजेक्ट का मकसद सूर्य से आने वाली ऊर्जा को पावर में बदलने का है. इसके लिए सोलर पावर पैनल्स का यूज किया जा सकता है. इस पावर को पृथ्वी के लो ओर्बिट में स्थापित लार्ज स्केल AI कंप्यूटर सिस्टम में ट्रांसफर किया जाएगा.  इस प्रोजेक्ट की जरूरत क्यों पड़ी?  दरअसल, AI मॉडल जैसे ChatGPT, Gemini, Claude आदि को चलाने के लिए बहुत ज्यादा बिजली की जरूरत होती है. बिजली की इस जरूरत को पूरा करने के लिए अगर कोयला, गैस या डीजल का यूज होता है तो काफी ज्यादा प्रदूषण होगा. ऐसे में कंपनी इसको सोलर पावर से चलाना चाहती है, जिसके लिए लो अर्थ ऑर्बिट में पूरा सेटअप लगाने का प्लान बनाया है.   कहां से मिली है प्रेरणा  गूगल को इस प्रोजेक्ट की प्रेरणा मूनशूट प्रोजेक्ट से मिली है, जिसे अब अल्फाबेट की X डिविजन के रूप में जाना जाता है. इस डिविजन का काम अनोखी टेक्नोलॉजी तैयार करना है, जो अधिकतर लोगों की सोच से परे होती हैं. 2027 की दी है डेडलाइन  सुंदर पिचाई ने बताया कि अगर सब कुछ ठीक चला तो 2027 की शुरुआत तक Planet कंपनी के साथ मिलकर अपने दो प्रोटोटाइप सेटेलाइट लॉन्च करेगी. इसके बाद प्रोजेक्ट को आगे भी लेकर जाएंगे. 

Google @27: Backrub से बना सर्च इंजन का सम्राट, अब तक कोई नहीं बना टक्कर का खिलाड़ी

नई दिल्ली दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक Google अब 27 साल की हो गई है. साल 1998 में लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन ने इसकी शुरुआत की थी. बहुत कम लोगों की पता होगा की गूगल का पहला नाम Backrub था, जिसकी शुरुआत एक सिंपल सर्च इंजन के तौर पर हुई थी. वैसे इसका नाम आधिकारिक लॉन्च से पहले ही फाउंडर्स ने बदलकर गूगल कर दिया था. ये सर्च इंजन आज लोगों के लिए इंटरनेट की पहचान बन चुका है. डिजिटल वर्ल्ड में गूगल लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया है. गूगल सर्च, यूट्यूब, एंड्रॉयड प्लेटफॉर्म, जीमेल, मैप और अब Google Gemini AI ये सभी हम लोगों की जिंदगी का हिस्सा बनते जा रहे हैं. इन सब के पीछे गूगल है.  दिलचस्प है कंपनी के लोगो की कहानी गूगल के लोगो की कहानी भी बेहद दिलचस्प है. आपने ज्यादातर कंपनियों के लोगो सिंगल कलर या दो कलर में देखा होगा, लेकिन गूगल ने इन सब से अलग जाते हुए अपने लोगो में कई रंगों को शामिल किया. गूगल के लोगो में लाल, नीला और पीला रंग तो शामिल है, लेकिन बीच में हरे रंग का L भी है. जिसे ये दिखाने के लिए बनाया गया है कि गूगल दूसरों से अलग सोचता है.  गूगल की शुरुआत अमेरिका के कैलिफोर्निया से हुई. यहां एक गैरेज में इस सर्च इंजन को तैयार किया गया, जो आज दुनिया के सर्च मार्केट पर राज करता है. स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के दो स्टूडेंट्स का तैयार किया गया प्रोजेक्ट आज दुनिया की कहानी बदल रहा है. गूगल की पेरेंट कंपनी अल्फाबेट का मार्केट कैप 2.99 ट्रिलियन डॉलर है. लोगों की जिंदगी का बन गया है हिस्सा बहुत से लोगों के लिए इंटरनेट का मतलब, गूगल है. जैसे ही लोगों को कुछ सर्च करना होता है, तो उनका जवाब आता है गूगल कर लो. गूगल करने का मतलब इंटरनेट पर सर्च करना हो चुका है. ये दिखाता है कि लोगों के दिमाग में गूगल की छवि कितनी मजबूत है. यही वजह है कि सर्च इंजन मार्केट में अब तक कोई गूगल को टक्कर नहीं दे पाया.  आने वाला समय AI का है और गूगल इस पर भी तेजी से काम कर रहा है. भले ही OpenAI, Perplexity जैसी कंपनियां गूगल को चुनौती दे रही हैं, लेकिन गूगल Gemini बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच गया है. कंपनी ने अपनी तमाम सर्विसेस में AI को इंटीग्रेट कर दिया है, जो लोगों के काम को आसान बना रहा है.  

व्हाट्सएप पर बिना इंटरनेट वीडियो कॉलिंग की सुविधा, गूगल का कमाल

नई दिल्ली  Google ने हाल ही में अपनी Pixel 10 सीरीज को वैश्विक बाजार में लॉन्च किया है, जिसमें एक बेहद उपयोगी और नया फीचर दिया गया है। कंपनी के दावे के अनुसार, यह दुनिया की पहली ऐसी स्मार्टफोन सीरीज है जो बिना किसी नेटवर्क के भी WhatsApp के माध्यम से ऑडियो-वीडियो कॉल की सुविधा प्रदान करती है। यह सीरीज 28 अगस्त से बिक्री के लिए उपलब्ध होगी। सैटेलाइट के जरिए होगी ऑडियो-वीडियो कॉल Google ने अपने X (पूर्व में ट्विटर) पोस्ट में बताया कि Pixel 10 सीरीज के यूजर्स जल्द ही सैटेलाइट कनेक्टिविटी के साथ WhatsApp पर कॉल कर पाएंगे। यह फीचर उन आपातकालीन स्थितियों में बहुत काम आएगा जहां कोई नेटवर्क या वाई-फाई उपलब्ध नहीं होता। इस तकनीक के माध्यम से यूजर्स अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट्स का उपयोग करके कम्यूनिकेट कर सकेंगे। Google के पोस्ट में एक टीजर भी दिखाया गया है, जिसमें सैटेलाइट कनेक्टिविटी के साथ ऑडियो-वीडियो कॉल की संभावना को दर्शाया गया है। हालांकि, यह सुविधा सिर्फ उन टेलीकॉम ऑपरेटरों के नेटवर्क पर ही काम करेगी जो सैटेलाइट सर्विस देते हैं। भारत में इस फीचर का लाभ लेने के लिए यूजर्स को अभी इंतजार करना पड़ सकता है, क्योंकि देश में सैटेलाइट सर्विस की शुरुआत अभी तक नहीं हुई है। हालांकि, BSNL ने सोशल मीडिया पर इस सेवा के बारे में संकेत जरूर दिए हैं। सैटेलाइट के जरिए होगी ऑडियो-वीडियो कॉल Google ने अपने X (पूर्व में ट्विटर) पोस्ट में बताया कि Pixel 10 सीरीज के यूजर्स जल्द ही सैटेलाइट कनेक्टिविटी के साथ WhatsApp पर कॉल कर पाएंगे। यह फीचर उन आपातकालीन स्थितियों में बहुत काम आएगा जहां कोई नेटवर्क या वाई-फाई उपलब्ध नहीं होता। इस तकनीक के माध्यम से यूजर्स अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट्स का उपयोग करके कम्यूनिकेट कर सकेंगे।  Google के पोस्ट में एक टीजर भी दिखाया गया है, जिसमें सैटेलाइट कनेक्टिविटी के साथ ऑडियो-वीडियो कॉल की संभावना को दर्शाया गया है। हालांकि, यह सुविधा सिर्फ उन टेलीकॉम ऑपरेटरों के नेटवर्क पर ही काम करेगी जो सैटेलाइट सर्विस देते हैं। भारत में इस फीचर का लाभ लेने के लिए यूजर्स को अभी इंतजार करना पड़ सकता है, क्योंकि देश में सैटेलाइट सर्विस की शुरुआत अभी तक नहीं हुई है। हालांकि, BSNL ने सोशल मीडिया पर इस सेवा के बारे में संकेत जरूर दिए हैं। दुनिया का पहला फोन होने का दावा Google का दावा है कि Pixel 10 सीरीज सैटेलाइट के जरिए WhatsApp ऑडियो और वीडियो कॉल की सुविधा देने वाला दुनिया का पहला फोन होगा। हालांकि, कंपनी ने इस तकनीक के काम करने के तरीके के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी है। अभी तक, सैटेलाइट सेवाओं का उपयोग केवल उन क्षेत्रों में ऑडियो कॉल और SMS भेजने के लिए होता है जहां कोई नेटवर्क नहीं होता। यह सेवा भी केवल उन्हीं देशों में उपलब्ध है जहां सैटेलाइट सर्विस शुरू हो चुकी है।  दुनिया का पहला फोन होने का दावा Google का दावा है कि Pixel 10 सीरीज सैटेलाइट के जरिए WhatsApp ऑडियो और वीडियो कॉल की सुविधा देने वाला दुनिया का पहला फोन होगा। हालांकि, कंपनी ने इस तकनीक के काम करने के तरीके के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी है। अभी तक, सैटेलाइट सेवाओं का उपयोग केवल उन क्षेत्रों में ऑडियो कॉल और SMS भेजने के लिए होता है जहां कोई नेटवर्क नहीं होता। यह सेवा भी केवल उन्हीं देशों में उपलब्ध है जहां सैटेलाइट सर्विस शुरू हो चुकी है।

Google ला रहा नया प्लेटफॉर्म, Android और ChromeOS का होगा मर्जर

Google एक बड़ी प्लानिंग तैयार कर रहा है और आने वाले दिनों में Android और ChromeOS को मिलाकर एक पावरफुल सिंगल ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) को तैयार किया जाएगा. यहां आपकी जानकारी के लिए बता देते हैं कि इसके कयास लंबे समय से लगाए जा रहे थे और अब कंपनी ने टेक रडार को दिए गए इंटरव्यू में बताया है कि दोनों को मिलाकर एक सिंगल प्लेटफॉर्म बनाने की दिशा में काम हो रहा है.   जानकारी के मुताबिक, Android Ecosystem के प्रेसिडेंट Sameer Samat ने कहा कि हम Chrome OS और Android की खूबियों को एक ही प्लेटफॉर्म पर शामिल करने जा रहे हैं. इसके लिए एक नया ऑपरेटिंग सिस्टम तैयार किया जाएगा, हालांकि किसी टाइमलाइन का जिक्र नहीं किया है.  यूजर्स को मिलेगा एक जैसा एक्सपीरियंस  Chrome OS और Android दोनों प्लेटफॉर्म का मर्जर करके एक प्लेटफॉर्म बनाने से यूजर्स को काफी फायदा देखने को मिलेगा. इस मर्जर की मदद से यूजर्स को मोबाइल, टैबलेट, और Chromebook का यूज करने पर एक जैसा एक्सपीरियंस मिल सकता है. Google अपने दो ऑपरेटिंग सिस्टम को मिलाकर एक प्लेटफॉर्म बनाने की दिशा में काम कर रहा है.      ChromeOS को लेकर बताते देते हैं कि यह Chromebook लैपटॉप के लिए तैयार किया है. यह कई मामलों में अच्छा है, जिसके साथ Android Apps का भी सपोर्ट मिलता है. इसके बावजूद इसमें कुछ लिमिटेशन भी हैं.      Android ऑपरेटिंग सिस्टम की पॉपुलैरिटी किसी से छिपी नहीं है. Google Pixel, Samsung, OnePlus, Redmi, Realme समेत दुनियाभर में ढेरों ब्रांड हैं, जिनमें Android OS का यूज किया जाता है.    Chrome OS और Android से क्या होगा फायदा? Android और Chrome OS प्लेटफॉर्म का मर्जर होने के बाद यूजर्स को काफी नया एक्सपीरियंस देखने को मिल सकता है. इसमें दोनों प्लेटफॉर्म अपने फीचर्स और ऐप्स को शेयर कर सकेंगे. आपकी जानकारी के लिए बता देते हैं कि Android Apps पहले से ही Chromebook पर चलते हैं और इस न्यू मर्जर के बाद यूजर्स को बेहतर यूजर एक्सपीरियंस देखने को मिलेगा.  क्रोम और एंड्रॉयड का मर्जर से मिलेगी क्रॉस डिवाइस कनेक्टिविटी  Google भी Apple जैसा ईकोसिस्टम तैयार करने की कोशिश में लगा है. जहां सभी डिवाइस आसानी से कनेक्ट हो जाते हैं और इससे यूजर्स को बेहतर एक्सपीरियंस भी मिलता है. यहां यूजर्स को बेहतर क्रॉस डिवाइस कनेक्टिविटी का फायदा मिलेगा.