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Argentina vs Egypt: मेसी की टीम क्वार्टर फाइनल में, VAR विवाद पर मिस्र का बड़ा आरोप- FIFA नहीं चाहता था बाहर हों अर्जेंटीना

अटलांटा फीफा वर्ल्ड कप 2026 में अर्जेंटीना का शानदार प्रदर्शन जारी है. 7 जुलाई (मंगलवार) को अटलांटा के अटलांटा स्टेडियम में आयोजित राउंड ऑफ 16 मुकाबले में अर्जेंटीना ने मिस्र को 3-2 से हराया. इस जीत के साथ ही अर्जेंटीना की टीम क्वार्टर फाइनल में पहुंच गई. क्वार्टर फाइनल में अर्जेंटीना का सामना 12 जुलाई को कैनसस सिटी के कैनसस सिटी स्टेडियम में कोलंबिया/स्विट्जरलैंड से होगा।  इस मुकाबले में 78वें मिनट तक अर्जेंटीना 0-2 से पिछड़ रहा था, लेकिन इसके बाद लियोनेल मेसी की अगुवाई में मौजूदा वर्ल्ड चैम्पियन टीम ने जोरदार वापसी की. 13 मिनट के अंदर तीन गोल कर अर्जेंटीना ने मिस्र की टीम पूरी तरह पस्त कर दिया।  अर्जेंटीना की जीत के हीरो कप्तान लियोनेल मेसी रहे, जिन्होंने एक गोल दागने के अलावा एक गोल में असिस्ट दिया. मेसी ने 79वें मिनट में क्रिस्टियन रोमेरो को गोल करने में असिस्ट दिया. इसके बाद मेसी ने 83वें मिनट में गोंजालो मोंटिएल के पास पर बेहतरीन गोल दागा. वहीं इंजरी टाइम (90+2वें मिनट) में एनजो फर्नांडीज ने लौटारो मार्टिनेज के पास पर गोल दाग अर्जेंटीना को 3-2 की निर्णायक लीड दिला दी।  FIFA नहीं चाहता था अर्जेंटीना बाहर हो फुटबॉल में साजिश की कहानियां नई नहीं हैं, लेकिन जब बात लियोनेल मेसी और अर्जेंटीना की होती है तो यह बहस खत्म होने का नाम नहीं लेती. 2022 के कतर विश्व कप में शुरू हुई 'रेफरी की मेहरबानी' वाली चर्चा अब 2026 फीफा विश्व कप में फिर भड़क उठी है. इस बार वजह बना प्री-क्वार्टर फाइनल, जहां अर्जेंटीना ने मिस्र को 3-2 से हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई. लेकिन मुकाबले के बाद जीत से ज्यादा चर्चा रेफरी और VAR (Video Assistant Referee) के फैसलों की होने लगी।  मिस्र का आरोप- FIFA मेसी को बाहर नहीं होने देना चाहता था मुकाबले में मिस्र ने 2-0 की बढ़त बनाने वाला गोल कर दिया था. 58वें मिनट में मुस्तफा जिको ने गेंद नेट में पहुंचाई, लेकिन VAR ने बिल्ड-अप में मारवान अटिया द्वारा लिसांद्रो मार्टिनेज पर कथित फाउल दिखाया. रेफरी फ्रांस्वा लेटेक्सियर ने ऑन-फील्ड रिव्यू के बाद गोल रद्द कर दिया।  यहीं से विवाद शुरू हुआ. अर्जेंटीना ने इसके बाद अंतिम 13 मिनट में तीन गोल दागकर मैच पलट दिया। मैच के बाद मिस्र के कोच होसम हसन ने बेहद गंभीर आरोप लगाए. उनका कहना था, 'शायद वे चाहते थे कि विश्व चैम्पियन टूर्नामेंट में बना रहे. शायद वे चाहते थे कि मेसी की दौड़ जारी रहे.' उन्होंने यहां तक कह दिया, 'अब मैं कभी विश्व कप नहीं देखूंगा, क्योंकि इस प्रतियोगिता में न्याय नहीं है।  गोल करने वाले मुस्तफा जिको भी रेफरी पर भड़क उठे. उनका कहना था कि रेफरी के फैसलों ने मिस्र की सारी मेहनत पर पानी फेर दिया और टूर्नामेंट को अर्जेंटीना की ओर मोड़ दिया गया।  क्या VAR प्रोटोकॉल का गलत इस्तेमाल हुआ? विवाद सिर्फ गोल रद्द होने तक सीमित नहीं है. पूर्व प्रीमियर लीग रेफरी ग्राहम स्कॉट ने माना कि यह सामान्य फुटबॉल संपर्क था और इतनी दूर हुई घटना पर VAR को दखल नहीं देना चाहिए था. उनके अनुसार जिस फाउल के आधार पर गोल रद्द किया गया, उसके बाद अर्जेंटीना के खिलाड़ियों के पास गेंद वापस हासिल करने के कई मौके थे. ऐसे में इसे Attacking Possession Phase (APP) का हिस्सा मानना VAR प्रोटोकॉल के खिलाफ था।  पूर्व FIFA रेफरी फर्नांडो ग्युरेरो ने भी इसी राय का समर्थन किया. उनका कहना था कि रेफरी और VAR दोनों ने प्रोटोकॉल की गलत व्याख्या की, जिसका सीधा नुकसान मिस्र को हुआ।  यही नियम बाकी टीमों पर क्यों नहीं? यहीं से बहस और गहरी हो जाती है. कुछ ही दिन पहले FIFA के रेफरिंग प्रमुख पियरलुइजी कोलिना ने कहा था कि अधिकारियों को सामान्य शारीरिक संपर्क पर खेल नहीं रोकने के निर्देश दिए गए हैं ताकि मैच की रफ्तार बनी रहे।  लेकिन अगर यही मानक है, तो फिर मिस्र का गोल क्यों रद्द हुआ? इसी सवाल ने पुराने विवाद भी फिर जिंदा कर दिए हैं।  कतर से शुरू हुई बहस, 2026 में फिर भड़की     2022: पोलैंड के खिलाफ मेसी को मिला विवादित पेनल्टी     2022: सऊदी अरब मैच में लंबे स्टॉपेज टाइम पर सवाल     2026: ऑस्ट्रिया के खिलाफ मेसी के गोल से पहले कथित फाउल पर VAR ने दखल नहीं दिया     2026: अल्जीरिया के खिलाफ मेसी की चुनौती पर रेड कार्ड की समीक्षा नहीं हुई इन सभी घटनाओं को जोड़कर सोशल मीडिया पर लंबे समय से यह नैरेटिव बनाया जाता रहा है कि अर्जेंटीना को अहम मौकों पर रेफरी का फायदा मिलता है।  मिस्र को पेनल्टी भी नहीं मिली मिस्र का दावा है कि मैच के अंतिम दौर में मोहम्मद सलाह बॉक्स के अंदर संपर्क के बाद गिरे थे, जबकि एक अन्य खिलाड़ी की जर्सी भी खींची गई थी. इसके बावजूद VAR ने समीक्षा तक नहीं की।  पूर्व इंग्लैंड स्टार इयान राइट ने कहा कि यदि अर्जेंटीना के खिलाफ दूर हुई घटना पर गोल वापस लिया जा सकता है, तो मिस्र की पेनल्टी अपील की भी कम से कम समीक्षा होनी चाहिए थी।  क्या सचमुच अर्जेंटीना को मिल रही है विशेष छूट? फिलहाल इसका कोई ठोस सबूत नहीं है कि FIFA किसी टीम का पक्ष ले रहा है. बड़े टूर्नामेंटों में विवादित फैसले हमेशा बहस का विषय रहे हैं. लेकिन जब एक जैसी परिस्थितियों में अलग-अलग फैसले दिखते हैं, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।  मिस्र की हार के बाद यह बहस पहले से कहीं ज्यादा तेज हो गई है. अब अर्जेंटीना के हर बड़े मैच में रेफरी और VAR के फैसले पहले से ज्यादा बारीकी से परखे जाएंगे. सवाल सिर्फ इतना है कि यह महज संयोग है या फिर वास्तव में विश्व चैम्पियन टीम को बाकी देशों से अलग नजरिए से देखा जा रहा है।  मेसी ने मिस की पेनल्टी मुकाबले के पहले हाफ में अर्जेंटीना को कई मौके मिले, लेकिन गोल दागने में मिस्र की टीम कामयाब रही. यासर इब्राहिम ने 15वें मिनट में गोल कर मिस्र को 1-0 से आगे कर दिया. इस गोल में असिस्ट मरवान अत्तिया ने दिया था. इसके बाद लियोनेल मेसी 21वें मिनट में पेनल्टी मिस कर गए।  मिस्र के गोलकीपर मोस्तफा शोबेर ने इस मौके पर शानदार बचाव किया. दूसरे हाफ में … Read more

जापान एशियन गेम्स में मध्यप्रदेश का जलवा, 19 खिलाड़ी टीम में शामिल; 30 रिजर्व में चयनित

भोपाल  जापान में होने वाले आगामी एशियन गेम्स को लेकर मध्य प्रदेश के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अब तक 19 स्थान पक्के कर लिए हैं. इस बार एथलेटिक्स, शूटिंग और वाटर स्पोर्ट्स जैसे खेलों में राज्य की दावेदारी सबसे मजबूत दिख रही है. प्रदेश के 50 संभावित खिलाड़ियों में से 19 ने मुख्य सूची में जगह बना ली है, जबकि 30 खिलाड़ियों को अभी भी रिजर्व रखा गया है।  वाटर स्पोर्ट्स में दबदबा, कैनो स्लैलम में रिकॉर्ड 9 चयन मध्य प्रदेश की वाटर स्पोर्ट्स टीम ने इस बार इतिहास रच दिया है. सबसे ज्यादा सफलता कैनो स्लैलम स्पर्धा में मिली है, जहां एक साथ 9 खिलाड़ियों ने क्वालिफाई किया है. इनमें विशाल केवट, पल्लवी जगताप, भरत केवट, हितेश केवट, शिखा चौहान, विशाल वर्मा, प्रद्युमन सिंह राठौड़, भूमि बघेल और रीना सेन शामिल हैं. इसके अतिरिक्त कयाक एंड कैनो में प्रोहित बारोई ने भी अपनी जगह सुरक्षित की है।  शूटिंग और एथलेटिक्स में भी चमके सितारे शूटिंग में प्रदेश के स्टार शूटरों से एक बार फिर पदक की उम्मीदें हैं. रायफल कैटेगरी से ऐश्वर्य प्रताप सिंह और आशी चौकसे ने क्वालिफाई किया है, जबकि शॉटगन कैटेगरी से नीरु ठंडा और मनीषा कीर ने अपना स्थान पक्का किया है. वहीं एथलेटिक्स की बात करें तो शाटपुट (गोला फेंक) में समरदीप सिंह ने दमदार प्रदर्शन किया है. पोल वाल्ट स्पर्धा में देव मीणा और निकिता आकरे ने देश का प्रतिनिधित्व करने की पात्रता हासिल की है।  समान अवसर की मिसाल, ब्लाइंड जूडो में कपिल परमार चयन प्रक्रिया की सबसे खूबसूरत बात यह रही कि इसमें समाज के हर वर्ग को समान अवसर दिए गए. इसी कड़ी में दिव्यांग वर्ग से आने वाले कपिल परमार ने ब्लाइंड जूडो में क्वालिफाई कर प्रदेश का मान बढ़ाया है. वहीं एशियन गेम्स के पिछले संस्करणों की बात करें तो मध्य प्रदेश के इन खिलाड़ियों का ट्रैक रिकार्ड शानदार रहा है. ग्वांगझू एशियन गेम्स में ऐश्वर्य प्रताप सिंह ने दो स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया था. वहीं महिला शूटर आशी चौकसे ने भी दो रजत और एक कांस्य पदक अपने नाम किया था।  दो महीने की स्पेशल ट्रेनिंग और फिटनेस का दिखा असर कोच जेपी सिंह के अनुसार "इस बड़ी सफलता के पीछे खेल विभाग की दो महीने की कड़ी मेहनत है. विभाग ने विभिन्न अकादमियों से शार्टलिस्ट किए गए खिलाड़ियों की फिटनेस, फार्म और तकनीक को सुधारने के लिए विशेष रणनीति बनाई थी. हर खिलाड़ी की व्यक्तिगत जरूरतों के हिसाब से ट्रेनिंग शेड्यूल डिजाइन किया गया था, जिसका सकारात्मक परिणाम आज सबके सामने है। 

अधूरा रह गया रोनाल्डो का सबसे बड़ा सपना, World Cup से बाहर होने के बाद भावुक हुए स्टार फुटबॉलर

 आर्लिंग्टन पुर्तगाल के स्टार स्ट्राइकर क्रिस्टियानो रोनाल्डो का फीफा वर्ल्ड कप जीतने का सपना अधूरा रह गया. स्पेन के खिलाफ राउंड ऑफ 16 मुकाबले में पुर्तगाल को 0-1 से दिल तोड़ने वाली हार मिली. इसके साथ ही 41 साल के रोनाल्डो का वर्ल्ड कप सफर हमेशा के लिए खत्म हो गया. मैच के बाद निराश रोनाल्डो ने पुष्टि की कि यह उनके करियर का आखिरी वर्ल्ड कप था, लेकिन उन्होंने इंटरनेशनल फुटबॉल से संन्यास लेने पर फिलहाल कोई फैसला नहीं किया है।  7 जुलाई (मंगलवार) को आर्लिंग्टन के डलास स्टेडियम में आयोजित यह मुकाबला बहुत देर तक बराबरी पर था, लेकिन दूसरे हाफ के इंजरी टाइम में सब्स्टीट्यूट मिकेल मेरिनो ने गोल दागकर पुर्तगाल और रोनाल्डो का सपना तोड़ दिया. हार के बाद रोनाल्डो का दर्द साफ दिखाई दिया. उन्होंने स्वीकार किया कि आखिरी वर्ल्ड कप से इस तरह विदाई लेना उनके लिए बेहद दुखद है।  क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने कहा, 'इस तरह वर्ल्ड कप से बाहर होने का दुख है. मैंने अपना सबकुछ दिया. मैंने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की और मैं साफ अंतरात्मा के साथ यहां से जा रहा हूं. हां, यह मेरा आखिरी वर्ल्ड कप था, लेकिन अब मेरे पास सोचने और अपने परिवार के साथ समय बिताने का मौका होगा. मैं जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करूंगा।  भावनाओं में नहीं बहना चाहता: रोनाल्डो स्पेन के खिलाफ हार के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रोनाल्डो ने पुर्तगाल के लिए भी अपना आखिरी मुकाबला खेल लिया है. रोनाल्डो ने इस सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया. उन्होंने साफ किया कि वह हार की निराशा और भावनाओं में बहकर अपने भविष्य पर कोई फैसला नहीं करेंगे।  क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने कहा, 'मैं भावनाओं में बहकर कोई फैसला नहीं करता.' उनके इस बयान से संकेत मिलता है कि भले ही उनका वर्ल्ड कप करियर खत्म हो गया हो, लेकिन वह पुर्तगाल के लिए कुछ समय और खेलते हुए दिखाई दे सकते हैं. रोनाल्डो का मानना था कि पुर्तगाल ने स्पेन के खिलाफ कड़ा मुकाबला खेला और मैच किसी भी टीम के पक्ष में जा सकता था।  क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने बताया, 'स्पेन थोड़ा भाग्यशाली रहा. यह ऐसा मुकाबला था, जो किसी भी टीम के पक्ष में जा सकता था.' रोनाल्डो ने अपने करियर में रिकॉर्ड की बराबरी करते हुए छठी बार फीफा वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया. उन्होंने इस टूर्नामेंट में तीन गोल भी दागे, लेकिन वह अपनी टीम को खिताब तक नहीं पहुंचा सके।  दो दशक के अपने शानदार वर्ल्ड कप करियर में क्रिस्टियानो रोनाल्डो कभी फाइनल तक नहीं पहुंच पाए. हार की निराशा के बावजूद रोनाल्डो ने पुर्तगाल के लिए अपने योगदान पर गर्व जताया. उन्होंने याद दिलाया कि उनकी मौजूदगी में पुर्तगाल ने फुटबॉल इतिहास की सबसे बड़ी सफलताएं हासिल कीं।  क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने कहा, 'मैंने पुर्तगाल के लिए तीन खिताब जीते हैं. क्रिस्टियानो रोनाल्डो से पहले पुर्तगाल ने एक भी खिताब नहीं जीता था. राष्ट्रीय टीम का सबसे बड़ा खिताब हमने 2016 में यूरोपियन चैम्पियनशिप के रूप में जीता था. सच कहूं तो मेरे लिए वह वर्ल्ड कप जितना ही महत्वपूर्ण है।  क्रिस्टियानो रोनाल्डो की कप्तानी में पुर्तगाल ने यूरो 2016 का खिताब जीतकर इतिहास रचा था. इसके बाद टीम ने 2019 और 2025 में यूईएफए नेशन्स लीग की ट्रॉफी भी अपने नाम की. रोनाल्डो ने क्लब और इंटरनेशनल फुटबॉल में लगभग हर बड़ी उपलब्धि हासिल की. पांच बार बैलन डी'ओर जीता, पुर्तगाल को तीन बड़े खिताब दिलाए और अनगिनत रिकॉर्ड अपने नाम किए. लेकिन वर्ल्ड कप की ट्रॉफी उनके हाथों में नहीं आ सकी।   

वर्ल्ड कप जीत के नायक शापूर जादरान नहीं रहे, क्रिकेट जगत में शोक

नई दिल्ली अफगानिस्तान क्रिकेट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाले शापूर जादरान का निधन हो गया है, लंबे समय से गंभीर और दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे जादरान ने मंगलवार (7 जुलाई) को अंतिम सांस ली. अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (ACB) ने सोशल मीडिया के जरिए उनके निधन की जानकारी दी. शापूर जादरान के निधन की खबर सामने आने के बाद क्रिकेट जगत में शोक की लहर दौड़ गई. बाएं हाथ के तेज गेंदबाज शापूर जादरान पिछले कई महीनों से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे. जनवरी से नई दिल्ली के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था. उनके भाई घमई जादरान और अफगानिस्तान के पूर्व कप्तान असगर अफगान इलाज के दौरान उनके साथ भारत आए थे. जादरान की तबीयत पिछले साल अक्टूबर में खराब हुई थी, जिसके बाद उनकी हालत लगातार गंभीर होती चली गई. अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (ACB) ने शापूर जादरान के निधन पर दुख जताते हुए बयान जारी किया. एसीबी ने कहा, 'बेहद दुख और गहरे शोक के साथ अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड पूर्व तेज गेंदबाज शापूर जादरान के निधन पर शोक व्यक्त करता है. शापूर जादरान अफगानिस्तान क्रिकेट की नींव रखने वाली हस्तियों में से एक थे. उनके समर्पण, जुनून और अटूट प्रतिबद्धता ने देश में क्रिकेट के विकास और उसके उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. वह उन गौरवशाली क्रिकेटरों में शामिल थे, जिन्होंने अफगानिस्तान क्रिकेट के शुरुआती सफर में अहम भूमिका निभाई और टीम को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का रास्ता तैयार किया.' किस बीमारी से जूझ रहे थे शापूर? शापूर जादरान हेमोफैगोसाइटिक लिम्फोहिस्टियोसाइटोसिस (HLH) नाम की एक दुर्लभ और जानलेवा बीमारी से जूझ रहे थे. इस बीमारी में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली असामान्य रूप से सक्रिय हो जाती है और शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचाने लगती है. परिवार की ओर से साझा की गई जानकारी के मुताबिक, गंभीर संक्रमण के कारण उनकी हालत और बिगड़ गई थी. संक्रमण उनके शरीर के कई हिस्सों में फैल गया था. शापूर जादरान के भाई घमई जादरान ने इस साल की शुरुआत में क्रिकइंफो को बताया था, 'यह बेहद गंभीर संक्रमण था. उनका पूरा शरीर संक्रमण की चपेट में था, जिसमें टीबी भी शामिल थी. संक्रमण उनके दिमाग तक फैल गया था.' इलाज के दौरान शापूर जादरान की हालत में कुछ समय के लिए सुधार भी हुआ था. इसके बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी और वह करीब तीन सप्ताह तक अस्पताल के पास स्थित एक होटल में रहे थे. 39वां जन्मदिन नहीं मना सके शापूर हालांकि, यह राहत ज्यादा समय तक नहीं चली. संक्रमण ने एक बार फिर गंभीर रूप ले लिया, जिसके बाद उन्हें दोबारा अस्पताल में भर्ती कराया गया. हालत बिगड़ने पर उन्हें ICU में रखा गया, जहां आखिरकार उन्होंने दम तोड़ दिया. दुखद संयोग यह रहा कि शापूर जादरान का निधन उनके 39वें जन्मदिन से सिर्फ एक दिन पहले हुआ. शापूर जादरान को अफगानिस्तान क्रिकेट के शुरुआती नायकों में गिना जाता है. लंबे कद, तेज रफ्तार, आक्रामक रन अप और लंबे बालों के कारण उन्होंने क्रिकेट के मैदान पर अपनी अलग पहचान बनाई थी. उनके करियर का सबसे यादगार पल 2015 के वनडे वर्ल्ड कप में आया था. अफगानिस्तान की टीम तब पहली बार वनडे वर्ल्ड कप में हिस्सा ले रही थी. स्कॉटलैंड के खिलाफ डुनेडिन में खेले गए रोमांचक मुकाबले में शापूर जादरान ने विजयी रन बनाकर अफगानिस्तान को वर्ल्ड कप इतिहास की पहली जीत दिलाई थी. जीत के बाद मैदान पर हाथ फैलाकर दौड़ते हुए जादरान के जश्न की तस्वीर अफगानिस्तान क्रिकेट के इतिहास के सबसे यादगार पलों में शामिल हो गई. एसीबी ने अपने बयान में आगे कहा, 'अपने पूरे करियर के दौरान शापूर ने सम्मान, साहस और गर्व के साथ अफगानिस्तान क्रिकेट की सेवा की. मैदान पर उपलब्धियों के अलावा वह अफगानिस्तान के कई युवा क्रिकेटरों और दुनियाभर के क्रिकेट फैन्स के लिए प्रेरणा थे. उनके जुझारूपन, दृढ़ संकल्प और खेल के प्रति प्यार ने कई लोगों को उम्मीद दी और एक पूरी पीढ़ी को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित किया.' शापूर जादरान ने 2009 में अफगानिस्तान के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू किया था. उन्होंने 44 ओडीआई और 36 टी20 इंटरनेशनल मुकाबलों में अपने देश का प्रतिनिधित्व किया. ओडीआई मैचों में उन्होंने 36.95 की औसत से 43 विकेट झटके. जबकि टी20 इंटरनेशनल में उन्होंने 24.51 के एवरेज से 37 विकेट चटकाए. उन्होंने अपना आखिरी इंटरनेशनल मुकाबला 2020 में खेला था. हालांकि, इसके बाद भी उन्होंने घरेलू क्रिकेट खेलना जारी रखा और 2022 में अपना आखिरी प्रतिस्पर्धी मुकाबला खेला. जनवरी 2025 में शापूर ने क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की थी.

रात 11 बजे के रोमांच में गफ की जीत, बेंचिच को हराकर अंतिम आठ में बनाई जगह

लंदन महिला सिंगल्स में सातवीं वरीयता प्राप्त अमेरिका की कोको गफ ने रविवार देर रात स्विट्जरलैंड की बेलिंडा बेंचिच को 4-6, 6-3, 6-4 से हराकर पहली बार विंबलडन के क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। कोर्ट नंबर-1 की छत बंद होने के बीच खेला गया यह मुकाबला रात 11 बजे के निर्धारित ‘कर्फ्यू’ से महज दो मिनट पहले समाप्त हुआ। विंबलडन में रात 11 बजे के बाद खेल जारी रखने की अनुमति नहीं होती लंबे इंतजार के बाद कोर्ट पर उतरी दोनों खिलाड़ी शुरुआत में अपनी सर्वश्रेष्ठ लय में नहीं दिखीं। 11वीं वरीयता प्राप्त बेंचिच ने पहला सेट अपने तीसरे सेट प्वाइंट पर जीत लिया, जब गफ ने रिटर्न नेट में मार दिया। हालांकि इसके बाद गफ ने शानदार वापसी की। दूसरे सेट में गफ ने की वापसी दूसरे सेट में उन्होंने दो बार बेंचिच की सर्विस तोड़ी और शानदार ड्रॉप शॉट तथा बेहतरीन लॉब की मदद से मुकाबले को निर्णायक सेट तक पहुंचाया। तीसरे सेट में दो बार की ग्रैंडस्लैम चैंपियन गफ ने आक्रामक खेल दिखाते हुए कोर्ट के कोनों का शानदार इस्तेमाल किया और बेंचिच पर लगातार दबाव बनाए रखा। मैच के अंतिम क्षणों में समय तेजी से बीत रहा था, लेकिन गफ ने एक दमदार स्मैश से मैच प्वाइंट बनाया और फिर तेज सर्विस के जरिए मुकाबला अपने नाम कर लिया, जिसका जवाब बेंचिच नहीं दे सकीं। 22 वर्षीय गफ ने मैच में 35 विनर्स लगाए, जबकि बेंचिच केवल 19 विनर्स ही लगा सकीं। हालांकि गफ ने 46 अनफोर्स्ड एरर और नौ डबल फॉल्ट भी किए। जीत के बाद गफ ने कहा, आखिरकार क्वार्टर फाइनल में पहुंचकर मैं बेहद खुश हूं। यह मेरे लिए लंबे इंतजार के बाद मिली सफलता है। उन्होंने कहा कि अंतिम गेम में उनकी नजर लगातार घड़ी पर थी क्योंकि विंबलडन में रात 11 बजे के बाद खेल जारी रखने की अनुमति नहीं होती। अब क्वार्टर फाइनल में गफ का सामना अपनी हमवतन और चौथी वरीयता प्राप्त जेसिका पेगुला से होगा। सिनर लगातार पांचवीं बार अंतिम आठ में पहुंचे विश्व नंबर एक और गत चैंपियन जानिक सिनर ने ऑल इंग्लैंड क्लब में शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए विंबलडन के क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया। सोमवार रात खेले गए प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले में शीर्ष वरीय सिनर ने जापान के क्वालीफायर शिंतारो मोचिजुकी को 6-3, 7-6 (7-0), 6-3 से सीधे सेटों में हराया। विश्व नंबर एक सिनर ने पूरे मुकाबले में दबदबा बनाए रखा और मोचिजुकी को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। खास बात यह रही कि टूर्नामेंट में अब तक सिनर को किसी भी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी का सामना नहीं करना पड़ा है और क्वार्टर फाइनल में भी उन्हें गैर वरीय जर्मनी के अनुभवी खिलाड़ी जॉन लेनार्ड स्ट्रफ से भिड़ना होगा। स्ट्रफ ने पहली बार बनाई क्वार्टरफाइनल में जगह 36 वर्षीय स्ट्रफ ने अपने करियर में पहली बार किसी ग्रैंडस्लैम के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई है। विश्व रैंकिंग में 74वें स्थान पर काबिज स्ट्रफ ने पोलैंड के हुबर्ट हुर्काज के विरुद्ध मुकाबले में दो सेट से पिछड़ने के बाद शानदार वापसी की। हालांकि तीसरे सेट के दौरान हुर्काज बाएं कूल्हे की चोट के कारण मुकाबला जारी नहीं रख सके और उन्हें रिटायर होना पड़ा। यह स्ट्रफ का 47वें ग्रैंड स्लैम प्रयास में पहला क्वार्टर फाइनल है। यदि सिनर स्ट्रफ को हराने में सफल रहते हैं तो उनका सामना सेमीफाइनल में सात बार के चैंपियन नोवाक जोकोविक और कनाडा के तीसरी वरीयता प्राप्त आगर फेलिक्स अलिसियामे के बीच होने वाले क्वार्टर फाइनल के विजेता से हो सकता है।  

IND vs ENG: तीसरे T20 में भारत करेगा बड़े बदलाव? बिश्नोई OUT, प्रिंस यादव IN, वैभव सूर्यवंशी को मिल सकता है मौका

नॉटिंघम आयरलैंड दौर पर शर्मनाक हार झेलनी वाली भारतीय टीम इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज में भी 0-1 से पीछे है. मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड में आयोजित दूसरे टी20I में 190 रन बनाने के बावजूद मिली हार ने भारतीय टीम की बल्लेबाजी, गेंदबाजी और प्लेइंग-11 के कॉम्बिनेशन पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।  अब मंगलवार (7 जुलाई) को नॉटिंघम के ट्रेंट ब्रिज मैदान पर होने वाले सीरीज के तीसरे टी20I मुकाबले में टीम मैनेजमेंट के सामने सही प्लेइंग-11 चुनने की बड़ी चुनौती होगी. पिछले मुकाबले में 60 रन लुटाने वाले लेग स्पिनर रवि बिश्नोई पर गाज गिर सकती है और उनकी जगह एक अतिरिक्त तेज गेंदबाज को मौका मिल सकता है. वहीं 15 साल के वैभव सूर्यवंशी से भी डेब्यू की नाकामी को पीछे छोड़कर बड़ी पारी की उम्मीद होगी. मुकाबला भारतीय समयानुसार रात 10 बजे शुरू होगा।  दूसरे टी20I मुकाबले में रवि बिश्नोई का प्रदर्शन टीम इंडिया की हार की बड़ी वजहों में से एक रहा था. उन्होंने अपने चार ओवरों में बिना कोई विकेट लिए 60 रन लुटाए. इंग्लैंड की पारी का 17वां ओवर मैच का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, जिसमें बिश्नोई ने 29 रन लुटाकर मुकाबले का रुख पूरी तरह पलट दिया. अक्षर पटेल और वरुण चक्रवर्ती के रहते इंग्लिश परिस्थितियों में तीसरे स्पेशलिस्ट स्पिनर को खिलाने का फैसला टीम पर भारी पड़ा।  …तो प्रिंस यादव की होगी एंट्री अब ट्रेंट ब्रिज में रवि बिश्नोई का प्लेइंग-11 से बाहर होना लगभग तय माना जा रहा है. उनकी जगह एक अतिरिक्त तेज गेंदबाज को मौका दिया जा सकता है. अगर बिश्नोई को प्लेइंग-11 से बाहर किया जाता है तो प्रिंस यादव को मौका मिलने की संभावना है. गेंद को मूव कराने की उनकी क्षमता इंग्लिश परिस्थितियों में टीम इंडिया के लिए उपयोगी साबित हो सकती है. प्रसिद्ध कृष्णा भी एक विकल्प हैं, लेकिन टी20 क्रिकेट में उनकी बैक ऑफ लेंथ गेंदों पर बड़े शॉट खेलना अपेक्षाकृत आसान रहा है. ऐसे में प्रिंस यादव को प्लेइंग-11 में शामिल किए जाने की संभावना ज्यादा लग रही है।  मैनचेस्टर में अर्शदीप सिंह ने तीन विकेट लेकर भारतीय टीम को मुकाबले में बनाए रखा था. उन्होंने अपने शुरुआती ओवर में ही फिल साल्ट और जोस बटलर को पवेलियन भेजकर इंग्लैंड को दो बड़े झटके दिए. हालांकि इसके बाद इंग्लैंड के कप्तान हैरी ब्रूक ने उनके एक ओवर में 27 रन बटोरकर पलटवार किया. इंग्लैंड ने शुरुआती झटकों से उबरते हुए 191 रनों का लक्ष्य एक ओवर बाकी रहते हासिल कर लिया. ऐसे में तीसरे मुकाबले में भारतीय गेंदबाजों के सामने सिर्फ विकेट लेने की नहीं, बल्कि डेथ ओवर्स में रन रोकने की भी बड़ी चुनौती होगी।  वैभव सूर्यवंशी उड़ाएंगे गर्दा! तीसरे टी20I में एक बार फिर सबसे ज्यादा नजरें 15 साल के वैभव सूर्यवंशी पर होंगी. वैभव अपने डेब्यू मुकाबले में 10 गेंदों पर 14 रन ही बना सके थे. हालांकि छोटी सी पारी में उन्होंने अपनी प्रतिभा और बेखौफ अंदाज की झलक जरूर दिखाई. वैभव ने जोफ्रा आर्चर और जोश टंग के खिलाफ छक्के जड़कर बता दिया कि उनके खेलने का अंदाज बदलने वाला नहीं है. अब इंटरनेशनल डेब्यू का दबाव खत्म हो चुका है. ऐसे में ट्रेंट ब्रिज की बैटिंग फ्रेंडली पिच पर वैभव के पास अपनी पहली बड़ी इंटरनेशनल पारी खेलने का शानदार मौका होगा।  इंग्लैंड दौरे पर भारतीय बल्लेबाजी में अगर किसी खिलाड़ी ने अपने स्वाभाविक अंदाज को बरकरार रखा है तो वह अभिषेक शर्मा हैं. उन्होंने पिछली दो पारियों में 59 और 43 रन बनाए हैं और दिलचस्प बात यह है कि दोनों इनिंग्स में उन्होंने 24-24 गेंदों का सामना किया. इंग्लैंड के गेंदबाज जहां अतिरिक्त उछाल, पिच से मिल रही मूवमेंट और गति में बदलाव से बाकी भारतीय बल्लेबाजों को परेशान कर रहे हैं, वहीं अभिषेक ने शुरू से ही आक्रामक क्रिकेट खेला है. वैभव और अभिषेक की विस्फोटक ओपनिंग जोड़ी अगर ट्रेंट ब्रिज में लंबी साझेदारी करती है तो इंग्लैंड के गेंदबाजों पर शुरुआती ओवरों में ही दबाव बनाया जा सकता है।  कप्तान श्रेयस अय्यर और ईशान किशन ने इस दौरे पर कुछ रन जरूर बनाए हैं, लेकिन दोनों बल्लेबाज अब तक इंग्लैंड के गेंदबाजी आक्रमण पर पूरी तरह हावी नहीं हो पाए हैं. भारतीय बल्लेबाज पिछले छह महीने में ज्यादातर सपाट पिचों पर खेले हैं. अब इंग्लैंड में उन्हें अतिरिक्त उछाल, सीम मूवमेंट और सैम करन जैसे गेंदबाजों की वैरिएशन के खिलाफ संघर्ष करना पड़ रहा है. तिलक वर्मा ने मैनचेस्टर में 11 गेंदों पर नाबाद 24 रनों की तेज पारी जरूर खेली थी, लेकिन बीच के ओवरों में इंग्लैंड के स्पिनर्स और धीमी गेंदों के खिलाफ भारतीय बल्लेबाजों को बेहतर रणनीति के साथ उतरना होगा।  श्रेयस अय्यर की कप्तानी में टीम इंडिया अब तक चार टी20 इंटरनेशनल मुकाबले खेल चुकी है, जिसमें उसे तीन में हार मिली. जबकि एक मुकाबला बारिश के कारण रद्द हुआ. आयरलैंड के खिलाफ भारत को 0-2 से सीरीज गंवानी पड़ी. इसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ पहला टी20I बारिश के कारण धुल गया और दूसरे मुकाबले में भारत को चार विकेट से हार का सामना करना पड़ा. ऐसे में तीसरा टी20I सिर्फ सीरीज में वापसी के लिहाज से ही नहीं, बल्कि कप्तान श्रेयस अय्यर के लिए भी बेहद अहम होने वाला है।  मुकाबले में भारत की संभावित प्लेइंग-11: अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी, ईशान किशन (विकेटकीपर), श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा, शिवम दुबे, हर्षित राणा, अक्षर पटेल, प्रिंस यादव, अर्शदीप सिंह और वरुण चक्रवर्ती।  इंग्लैंड की प्लेइंग-11: फिल साल्ट, जोस बटलर (विकेटकीपर), हैरी ब्रूक (कप्तान), जैकब बेथेल, टॉम बैंटन, सैम करन, विल जैक्स, लियाम डॉसन, जोफ्रा आर्चर, आदिल राशिद और जोश टंग। 

अस्मिता लीग साउथ ज़ोन कैनोइंग-कयाकिंग चैंपियनशिप में मध्यप्रदेश बना ओवरऑल चैंपियन

अस्मिता लीग साउथ ज़ोन कैनोइंग एवं कयाकिंग चैंपियनशिप में मध्यप्रदेश रहा ओवरऑल चैंपियन मध्यप्रदेश राज्य कैनोइंग एवं कयाकिंग अकादमी के खिलाड़ियों ने जीते 38 पदक 16 स्वर्ण, 17 रजत एवं 5 कांस्य पदकों के साथ प्रदेश ने किया शानदार प्रदर्शन भोपाल  मध्यप्रदेश राज्य कैनोइंग एवं कयाकिंग अकादमी के खिलाड़ियों ने 4 से 5 जुलाई 2026 तक आंध्रप्रदेश के विशाखापट्टनम स्थित गंबरमगेड्डा रिजर्वायर में आयोजित अस्मिता लीग साउथ ज़ोन कैनोइंग एवं कयाकिंग चैंपियनशिप-2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रदेश को ओवरऑल चैंपियन बनने का गौरव दिलाया। प्रतियोगिता में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने विभिन्न स्पर्धाओं में कुल 38 पदक अर्जित किए, जिनमें 16 स्वर्ण, 17 रजत एवं 5 कांस्य पदक शामिल हैं। पदकों की शानदार बरसात, प्रदेश ने किया शीर्ष स्थान हासिल चैंपियनशिप में मध्यप्रदेश ने सर्वाधिक 38 पदकों के साथ पदक तालिका में प्रथम स्थान प्राप्त किया। खिलाड़ियों के उत्कृष्ट तकनीकी कौशल, अनुशासित प्रदर्शन और निरंतर अभ्यास का परिणाम रहा कि प्रदेश ने अन्य राज्यों को पीछे छोड़ते हुए ओवरऑल चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया। यह उपलब्धि मध्यप्रदेश राज्य कैनोइंग एवं कयाकिंग अकादमी में उपलब्ध उच्च स्तरीय प्रशिक्षण व्यवस्था तथा खिलाड़ियों की प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है। राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश की बढ़ती सशक्त पहचान अस्मिता लीग जैसी प्रतिष्ठित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में ओवरऑल चैंपियन बनने की यह उपलब्धि मध्यप्रदेश में खेल प्रतिभाओं के सुनियोजित विकास और खेल अधोसंरचना की गुणवत्ता को दर्शाती है। प्रदेश के खिलाड़ी निरंतर राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर मध्यप्रदेश को नई पहचान दिला रहे हैं। खेल मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने दी बधाई खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने इस शानदार उपलब्धि पर मध्यप्रदेश राज्य कैनोइंग एवं कयाकिंग अकादमी के सभी खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों एवं सहयोगी स्टाफ को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं एवं प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है, जिसका परिणाम राष्ट्रीय स्तर पर लगातार मिल रही सफलताओं के रूप में सामने आ रहा है। युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत मध्यप्रदेश राज्य कैनोइंग एवं कयाकिंग अकादमी के खिलाड़ियों का यह प्रदर्शन प्रदेश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायी है। यह सफलता सिद्ध करती है कि समर्पण, अनुशासन, उत्कृष्ट प्रशिक्षण और निरंतर प्रयास के बल पर राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धियां प्राप्त की जा सकती हैं।  

टीम इंडिया संकट में, श्रेयस अय्यर की कप्तानी और ड्रेसिंग रूम पर छिड़ी बहस

नई दिल्ली टी20 वर्ल्ड कप की मौजूदा चैम्पियन और दुनिया की नंबर-1 टी20 टीम भारत इन दिनों लगातार सवालों के घेरे में है. आयरलैंड दौरे पर लगातार दो हार के बाद इंग्लैंड के खिलाफ भी मिली शिकस्त ने टीम की परेशानियां बढ़ा दी हैं. इन हारों ने सिर्फ खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर ही नहीं, बल्कि कप्तानी, ड्रेसिंग रूम के माहौल और टीम के भीतर तालमेल को लेकर भी बहस छेड़ दी है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ खराब क्रिकेट का नतीजा है या फिर नए कप्तान श्रेयस अय्यर के साथ पर्याप्त बॉन्डिंग और तालमेल न बन पाना भी इसकी एक अहम वजह है? दरअसल, श्रेयस अय्यर की कप्तानी की कहानी सामान्य नहीं रही. उन्होंने ढाई साल से अधिक समय तक कोई टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला था. इसके बाद उनकी टीम में वापसी हुई और वापसी के साथ ही उन्हें कप्तानी की जिम्मेदारी भी सौंप दी गई. भारतीय क्रिकेट में आमतौर पर कप्तान वही बनता है, जो लंबे समय से टीम का नियमित हिस्सा हो या उपकप्तान की भूमिका निभा रहा हो. इस बार चयनकर्ताओं और मुख्य कोच गौतम गंभीर ने परंपरा से हटकर फैसला लिया.यही फैसला अब चर्चा के केंद्र में है. क्या ड्रेसिंग रूम में बना असहज माहौल? भारतीय टीम में हार्दिक पंड्या, शुभमन गिल, अक्षर पटेल और तिलक वर्मा जैसे खिलाड़ी हाल के वर्षों में नेतृत्व समूह का हिस्सा रहे हैं. ऐसे में अचानक लंबे समय तक टीम से बाहर रहे खिलाड़ी को कप्तान बना देना कुछ खिलाड़ियों के लिए चौंकाने वाला फैसला हो सकता है. क्रिकेट में भले ही खिलाड़ी सार्वजनिक तौर पर कुछ न कहें, लेकिन कप्तानी हर किसी का सपना होती है. ऐसे फैसले ड्रेसिंग रूम के माहौल और खिलाड़ियों की मानसिकता पर असर डाल सकते हैं. मिल ही नहीं पाया साथ काम करने का समय श्रेयस अय्यर के सामने सबसे बड़ी चुनौती कप्तानी संभालने से पहले ही खड़ी हो गई थी. अफगानिस्तान सीरीज खत्म होने के तुरंत बाद भारतीय टीम इंग्लैंड रवाना हो गई. खिलाड़ियों को नए कप्तान के साथ समय बिताने, उनकी रणनीति समझने या टीम के भीतर तालमेल बनाने का लगभग कोई मौका नहीं मिला. विदेशी परिस्थितियों में सीमित अभ्यास और नए नेतृत्व के साथ कम समय ने मुश्किलें और बढ़ा दीं. यह भी पढ़ें: वैभव सूर्यवंशी ने 10 गेंदों में दिखा दिया ट्रेलर, अब बस एक कमी दूर हुई तो इंग्लैंड पर टूट पड़ेंगे! कप्तानी का अनुभव, पर अंतरराष्ट्रीय चुनौती अलग यह कहना गलत होगा कि श्रेयस अय्यर को बिना उपलब्धियों के कप्तानी मिली है. आईपीएल 2024 में उन्होंने कोलकाता नाइट राइडर्स को खिताब दिलाया और अगले सीजन पंजाब किंग्स को वर्षों बाद फाइनल तक पहुंचाया. उनकी कप्तानी और बल्लेबाजी दोनों की काफी तारीफ हुई. यही वजह थी कि उन्हें टी20 टीम की कमान सौंपी गई. हालांकि फ्रेंचाइजी क्रिकेट और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का दबाव अलग होता है. यहां सिर्फ कप्तान की रणनीति नहीं, बल्कि पूरे ड्रेसिंग रूम का भरोसा और तालमेल भी उतना ही अहम होता है. … अब जीत ही बदल सकती है कहानी लगातार हार के बाद श्रेयस अय्यर पर दबाव बढ़ना तय है. हालांकि उनके पास खुद को साबित करने का समय भी है. भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने उन्हें भविष्य की योजना के तहत कप्तानी सौंपी है और फिलहाल उनके विकल्प भी सीमित हैं. ऐसे में ट्रेंट ब्रिज में होने वाला तीसरा टी20 मुकाबला श्रेयस के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है. अगर भारत जीत दर्ज करता है तो कप्तानी को लेकर उठ रहे सवाल कुछ समय के लिए शांत हो सकते हैं… लेकिन अगर हार का सिलसिला जारी रहा, तो यह बहस और तेज होगी कि क्या टीम से लंबे समय तक बाहर रहे खिलाड़ी को सीधे कप्तान बनाना सही फैसला था या फिर नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया कुछ और तरीके से होनी चाहिए थी.

बेल्जियम का दमदार प्रदर्शन, अमेरिका को 4-1 से हराकर FIFA वर्ल्ड कप से किया बाहर

सिएटल फीफा वर्ल्ड कप 2026 में बेल्जियम ने शानदार खेल दिखाते हुए मेजबान अमेरिका को 4-1 से हरा दिया है। इस जीत के साथ ही बेल्जियम की टीम क्वार्टर फाइनल में पहुंच गई है। सिएटल स्टेडियम में खेले गए इस मैच में बेल्जियम की टीम शुरू से अंत तक हावी रही और उन्होंने अमेरिका को मैच में वापस आने का कोई मौका ही नहीं दिया। अब क्वार्टर फाइनल में बेल्जियम की टक्कर स्पेन से होगी। पहले हाफ में डी केटेलारे ने बेल्जियम के लिए दागे दो गोल मैच शुरू होते ही बेल्जियम ने अटैक करना शुरू कर दिया और 9वें मिनट में ही चार्ल्स डी केटेलारे ने गोल करके अपनी टीम को 1-0 से आगे कर दिया। इसके बाद 31वें मिनट में अमेरिका के मलिक टिलमैन ने एक गोल करके स्कोर 1-1 की बराबरी पर ला दिया। लेकिन अमेरिका की यह खुशी सिर्फ दो मिनट ही टिक पाई, क्योंकि 33वें मिनट में डी केटेलारे ने अपना दूसरा गोल कर बेल्जियम को फिर से बढ़त दिलाई। दूसरे हाफ में भी बेल्जियम ने दागे दो गोल मैच के दूसरे हाफ में भी बेल्जियम का जलवा जारी रहा। 57वें मिनट में हांस वनाकेन ने टीम के लिए तीसरा गोल किया। इस गोल के बाद अमेरिका के लिए इस मैच में वापसी की उम्मीदें लगभग खत्म हो गईं। इसके बाद मैच के आखिरी समय (इंजरी टाइम 90+3 मिनट) में रोमेलु लुकाकू ने चौथा गोल करके बेल्जियम को 4-1 से एक शानदार जीत दिला दी। इस जीत के साथ ही बेल्जियम ने मेजबान यूएसए को इस वर्ल्ड कप से बाहर कर दिया। इस मैच के लिए फोलारिन बालोगुन से हटाया गया था बैन इस मैच में अमेरिकी टीम के लिए अच्छी बात यह थी कि उनके प्रमुख खिलाड़ी फोलारिन बालोगुन की टीम में वापसी हो गई थी। रेड कार्ड मिलने की वजह से उन पर एक मैच का बैन (प्रतिबंध) लगा था, लेकिन फीफा ने एक विवादित फैसले में उनका यह बैन हटा दिया। इसके बाद भी अमेरिकी टीम अपने ही देश में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई। बेल्जियम की टीम ने खासकर अमेरिका के डिफेंडर्स की गलतियों का पूरा फायदा उठाया। अब क्वार्टर फाइनल में बेल्जियम का सामना स्पेन से होगा, जिसने अपने पिछले मैच (राउंड ऑफ-16) में पुर्तगाल को 1-0 से हराया था। पुर्तगाल की टीम इस वर्ल्ड कप में राउंड ऑफ 16 से बाहर हो गई। ट्रम्प के फोन के बाद अमेरिकी खिलाड़ी का रेड-कार्ड रद्द फीफा वर्ल्ड कप में अमेरिकी फुटबॉलर फोलारिन बालोगुन का रेड कार्ड रद्द होने पर विवाद हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो को फोन करने के बाद रेड कार्ड रद्द किया गया। इसके बाद बालोगुन को बेल्जियम के खिलाफ प्री-क्वार्टर फाइनल मैच खेलने की परमीशन मिल गई। हालांकि, बालोगुन के खेलने के बाद भी अमेरिकी टीम बेल्जियम के खिलाफ 1-4 से हारकर टूर्नामेंट से बाहर गई। फुटबॉल वर्ल्ड कप के इतिहास में यह पहला मामला है, जब किसी राष्ट्राध्यक्ष ने रेड कार्ड रद्द करने की पैरवी की हो और फीफा ने इसे मान भी लिया हो। फीफा के इस फैसले का बेल्जियम फुटबॉल संघ और यूरोपियन फुटबॉल यूनियन ने विरोध किया है। 2018 वर्ल्ड कप के दौरान भी कुछ देशों के नेताओं ने रेफरी के फैसलों पर सार्वजनिक टिप्पणी की थी, लेकिन उन मामलों में फीफा ने अपने निर्णयों में कोई बदलाव नहीं किया था। 2002 वर्ल्ड कप में साउथ कोरिया के पक्ष में कुछ विवादित फैसलों पर राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चा हुई थी, लेकिन तब भी किसी सजा या निर्णय को बदला नहीं गया था। बालोगुन को बोस्निया के खिलाफ रेड कार्ड दिखाया गया था 25 साल के बालोगुन को पिछले नॉकआउट मुकाबले में रेड कार्ड मिला था। नियमों के अनुसार उन्हें एक मैच का बैन झेलना चाहिए था। इसके बावजूद फीफा ने उन्हें बेल्जियम के खिलाफ राउंड ऑफ-16 मुकाबले में खेलने की मंजूरी दे दी। बेल्जियम फुटबॉल महासंघ ने फीफा के इस फैसले के खिलाफ अपील दायर की, जो खारिज हो गई। बालोगुन ने टूर्नामेंट में तीन गोल किए। ट्रम्प ने दखल देने की बात मानी प्री क्वार्टर फाइनल से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बालोगुन रेड कार्ड मामले में दखल देने की बात स्वीकार की। उन्होंने सोमवार को व्हाइट हाउस में कहा, 'मैंने ही फीफा से कहा था कि वे अमेरिका के स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन पर लगाए गए एक मैच के बैन का रीव्यू करे। ट्रम्प ने कहा- ‘मैंने फीफा अध्यक्ष इन्फेंटिनो से बात की। उन्होंने कहा, मुझे नहीं लगता कि यह फाउल था।’ इसके बाद फीफा ने बालोगुन को बेल्जियम से मैच खेलने की अनुमति दे दी। इस पर ट्रम्प ने कहा- फीफा ने सही निर्णय लिया। अगर प्रतिबंध लागू किया जाता तो टूर्नामेंट पर बड़ा धब्बा लग जाता। फीफा बोला- नियमों के आधार पर फैसला लिया फीफा प्रेसिडेंट इन्फेंटिनो ने सोशल मीडिया पर कहा कि अनुशासन समिति ने पूरी स्वतंत्रता के साथ निर्णय लिया। हर मामले का मूल्यांकन संबंधित नियमों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर किया जाता है। हालांकि, इस फैसले ने विश्व कप के दौरान फीफा की पारदर्शिता और निर्णय प्रक्रिया को लेकर नई बहस छेड़ दी है। फीफा हमेशा यह दावा करता रहा है कि उसके फैसले राजनीतिक प्रभाव से पूरी तरह स्वतंत्र होते हैं। ऐसे में विश्व कप के दौरान किसी देश के राष्ट्रपति की सार्वजनिक दखलअंदाजी और उसके बाद खिलाड़ी को मिली राहत ने खेल प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 1962 में गरिंचा का रेड कार्ड रद्द हुआ था यह वर्ल्ड कप के इतिहास में रेड कार्ड रद्द होने का दूसरा मामला है। पहला मामला 1962 में सामने आया था। तब ब्राजील के गरिंचा को सेमीफाइनल में चिली के खिलाफ रेड कार्ड दिखाया गया था। हालांकि, गरिंचा ने फाइनल में हिस्सा लिया और चेकोस्लोवाकिया पर जीत हासिल की। उस समय रेड कार्ड के बाद खिलाड़ी पर प्रतिबंध नहीं लगता था, बल्कि अधिकारी सबूतों के आधार पर सजा तय करते थे। 1962 में फीफा की अनुशासनात्मक समिति का निर्णय राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों से घिरा हुआ था।

चार्ल्स डी केटेलेरे के दो गोल, बेल्जियम ने अमेरिका को हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई

नई दिल्ली फीफा वर्ल्ड कप 2026 की सहमेजबान टीम संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) का सफर निराशाजनक अंदाज में खत्म हो गया. 7 जुलाई (मंगलवार) को सिएटल के सिएटल स्टेडियम में आयोजित राउंड ऑफ 16 मुकाबले में बेल्जियम ने अमेरिकी टीम पर 4-1 से बड़ी जीत दर्ज की.   इस हार के साथ ही घरेलू दर्शकों के सामने वर्ल्ड कप में लंबा सफर तय करने का यूएसए का सपना टूट गया. बेल्जियम की जीत के सबसे बड़े हीरो चार्ल्स डी केटेलेरे रहे. उन्होंने अमेरिका की कमजोर डिफेंस का पूरा फायदा उठाते हुए दो गोल किए और एक अन्य गोल में असिस्ट किया. चार्ल्स डी केटेलेरे ने 9वें और 33वें मिनट में गोल किया. हालांकि इसी बीच मलिक टिलमैन (31वें मिनट) ने जरूर यूएसए के लिए एक गोल दागा. फिर 57वें मिनट में हंस वनाकेन ने गोल दागकर स्कोर बेल्जियम के पक्ष में 3-1 कर दिया. दूसरे हाफ के इंजरी टाइम में रोमेलु लुकाकू ने गोल कर बेल्जियम की जीत पर मोहर लगा दी. इस शानदार जीत के साथ बेल्जियम ने क्वार्टर फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है, जहां शनिवार को कैलिफोर्निया के इंगलवुड में उसका सामना स्पेन से होगा. अमेरिका के कोच का फूटा गुस्सा अपनी टीम के खराब प्रदर्शन और लगातार हो रही गलतियों से अमेरिका के कोच मौरिसियो पोचेतीनो बेहद निराश दिखाई दिए. अमेरिकी टीम के गोल खाने के बाद पोचेतीनो ने गुस्से में बेंच के सामने रखे एक रैक पर लात मार दी, जिससे पानी की चार बोतलें हवा में उड़ गईं. उनका यह रिएक्शन साफ बता रहा था कि वह अपनी टीम के प्रदर्शन से कितने नाराज थे. इस मैच के लिए अमेरिकी टीम को स्टार फॉरवर्ड फोलारिन बालोगुन की वापसी से बड़ी राहत मिली थी. बालोगुन पर रेड कार्ड के कारण एक मैच का प्रतिबंध लगाया गया था, लेकिन फीफा ने विवादास्पद फैसले में उनका निलंबन हटा दिया था. इसके बावजूद अमेरिकी टीम घरेलू मैदान पर उम्मीदों के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी. खासतौर पर उसके डिफेंडर्स की गलतियों का बेल्जियम ने जमकर फायदा उठाया. पहले हाफ में यूएसए की रक्षापंक्ति की गलतियों के कारण बेल्जियम ने दो गोल दागे. इसके बाद दूसरे हाफ की शुरुआत में गोलकीपर मैट फ्रीज की बड़ी चूक ने अमेरिकी टीम की वापसी की उम्मीदों को लगभग खत्म कर दिया. मुकाबले में एक समय अमेरिका ने वापसी की उम्मीद जगाई थी. मलिक टिलमैन ने पहले हाफ के बीच में शानदार फ्री-किक पर गोल दागकर स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया था. यह मौजूदा वर्ल्ड कप में फ्री-किक से उनका दूसरा गोल था. हालांकि अमेरिकी खिलाड़ियों और दर्शकों की खुशी ज्यादा देर तक कायम नहीं रह सकी. खेल दोबारा शुरू होने के महज 61 सेकंड बाद बेल्जियम ने एक और गोल दागकर फिर से बढ़त हासिल कर ली. यह गोल अमेरिकी टीम के लिए बड़ा झटका साबित हुआ और इसके बाद यूएसए मुकाबले में वापसी नहीं कर सका.