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बेल्जियम का दमदार प्रदर्शन, अमेरिका को 4-1 से हराकर FIFA वर्ल्ड कप से किया बाहर

सिएटल फीफा वर्ल्ड कप 2026 में बेल्जियम ने शानदार खेल दिखाते हुए मेजबान अमेरिका को 4-1 से हरा दिया है। इस जीत के साथ ही बेल्जियम की टीम क्वार्टर फाइनल में पहुंच गई है। सिएटल स्टेडियम में खेले गए इस मैच में बेल्जियम की टीम शुरू से अंत तक हावी रही और उन्होंने अमेरिका को मैच में वापस आने का कोई मौका ही नहीं दिया। अब क्वार्टर फाइनल में बेल्जियम की टक्कर स्पेन से होगी। पहले हाफ में डी केटेलारे ने बेल्जियम के लिए दागे दो गोल मैच शुरू होते ही बेल्जियम ने अटैक करना शुरू कर दिया और 9वें मिनट में ही चार्ल्स डी केटेलारे ने गोल करके अपनी टीम को 1-0 से आगे कर दिया। इसके बाद 31वें मिनट में अमेरिका के मलिक टिलमैन ने एक गोल करके स्कोर 1-1 की बराबरी पर ला दिया। लेकिन अमेरिका की यह खुशी सिर्फ दो मिनट ही टिक पाई, क्योंकि 33वें मिनट में डी केटेलारे ने अपना दूसरा गोल कर बेल्जियम को फिर से बढ़त दिलाई। दूसरे हाफ में भी बेल्जियम ने दागे दो गोल मैच के दूसरे हाफ में भी बेल्जियम का जलवा जारी रहा। 57वें मिनट में हांस वनाकेन ने टीम के लिए तीसरा गोल किया। इस गोल के बाद अमेरिका के लिए इस मैच में वापसी की उम्मीदें लगभग खत्म हो गईं। इसके बाद मैच के आखिरी समय (इंजरी टाइम 90+3 मिनट) में रोमेलु लुकाकू ने चौथा गोल करके बेल्जियम को 4-1 से एक शानदार जीत दिला दी। इस जीत के साथ ही बेल्जियम ने मेजबान यूएसए को इस वर्ल्ड कप से बाहर कर दिया। इस मैच के लिए फोलारिन बालोगुन से हटाया गया था बैन इस मैच में अमेरिकी टीम के लिए अच्छी बात यह थी कि उनके प्रमुख खिलाड़ी फोलारिन बालोगुन की टीम में वापसी हो गई थी। रेड कार्ड मिलने की वजह से उन पर एक मैच का बैन (प्रतिबंध) लगा था, लेकिन फीफा ने एक विवादित फैसले में उनका यह बैन हटा दिया। इसके बाद भी अमेरिकी टीम अपने ही देश में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई। बेल्जियम की टीम ने खासकर अमेरिका के डिफेंडर्स की गलतियों का पूरा फायदा उठाया। अब क्वार्टर फाइनल में बेल्जियम का सामना स्पेन से होगा, जिसने अपने पिछले मैच (राउंड ऑफ-16) में पुर्तगाल को 1-0 से हराया था। पुर्तगाल की टीम इस वर्ल्ड कप में राउंड ऑफ 16 से बाहर हो गई। ट्रम्प के फोन के बाद अमेरिकी खिलाड़ी का रेड-कार्ड रद्द फीफा वर्ल्ड कप में अमेरिकी फुटबॉलर फोलारिन बालोगुन का रेड कार्ड रद्द होने पर विवाद हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो को फोन करने के बाद रेड कार्ड रद्द किया गया। इसके बाद बालोगुन को बेल्जियम के खिलाफ प्री-क्वार्टर फाइनल मैच खेलने की परमीशन मिल गई। हालांकि, बालोगुन के खेलने के बाद भी अमेरिकी टीम बेल्जियम के खिलाफ 1-4 से हारकर टूर्नामेंट से बाहर गई। फुटबॉल वर्ल्ड कप के इतिहास में यह पहला मामला है, जब किसी राष्ट्राध्यक्ष ने रेड कार्ड रद्द करने की पैरवी की हो और फीफा ने इसे मान भी लिया हो। फीफा के इस फैसले का बेल्जियम फुटबॉल संघ और यूरोपियन फुटबॉल यूनियन ने विरोध किया है। 2018 वर्ल्ड कप के दौरान भी कुछ देशों के नेताओं ने रेफरी के फैसलों पर सार्वजनिक टिप्पणी की थी, लेकिन उन मामलों में फीफा ने अपने निर्णयों में कोई बदलाव नहीं किया था। 2002 वर्ल्ड कप में साउथ कोरिया के पक्ष में कुछ विवादित फैसलों पर राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चा हुई थी, लेकिन तब भी किसी सजा या निर्णय को बदला नहीं गया था। बालोगुन को बोस्निया के खिलाफ रेड कार्ड दिखाया गया था 25 साल के बालोगुन को पिछले नॉकआउट मुकाबले में रेड कार्ड मिला था। नियमों के अनुसार उन्हें एक मैच का बैन झेलना चाहिए था। इसके बावजूद फीफा ने उन्हें बेल्जियम के खिलाफ राउंड ऑफ-16 मुकाबले में खेलने की मंजूरी दे दी। बेल्जियम फुटबॉल महासंघ ने फीफा के इस फैसले के खिलाफ अपील दायर की, जो खारिज हो गई। बालोगुन ने टूर्नामेंट में तीन गोल किए। ट्रम्प ने दखल देने की बात मानी प्री क्वार्टर फाइनल से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बालोगुन रेड कार्ड मामले में दखल देने की बात स्वीकार की। उन्होंने सोमवार को व्हाइट हाउस में कहा, 'मैंने ही फीफा से कहा था कि वे अमेरिका के स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन पर लगाए गए एक मैच के बैन का रीव्यू करे। ट्रम्प ने कहा- ‘मैंने फीफा अध्यक्ष इन्फेंटिनो से बात की। उन्होंने कहा, मुझे नहीं लगता कि यह फाउल था।’ इसके बाद फीफा ने बालोगुन को बेल्जियम से मैच खेलने की अनुमति दे दी। इस पर ट्रम्प ने कहा- फीफा ने सही निर्णय लिया। अगर प्रतिबंध लागू किया जाता तो टूर्नामेंट पर बड़ा धब्बा लग जाता। फीफा बोला- नियमों के आधार पर फैसला लिया फीफा प्रेसिडेंट इन्फेंटिनो ने सोशल मीडिया पर कहा कि अनुशासन समिति ने पूरी स्वतंत्रता के साथ निर्णय लिया। हर मामले का मूल्यांकन संबंधित नियमों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर किया जाता है। हालांकि, इस फैसले ने विश्व कप के दौरान फीफा की पारदर्शिता और निर्णय प्रक्रिया को लेकर नई बहस छेड़ दी है। फीफा हमेशा यह दावा करता रहा है कि उसके फैसले राजनीतिक प्रभाव से पूरी तरह स्वतंत्र होते हैं। ऐसे में विश्व कप के दौरान किसी देश के राष्ट्रपति की सार्वजनिक दखलअंदाजी और उसके बाद खिलाड़ी को मिली राहत ने खेल प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 1962 में गरिंचा का रेड कार्ड रद्द हुआ था यह वर्ल्ड कप के इतिहास में रेड कार्ड रद्द होने का दूसरा मामला है। पहला मामला 1962 में सामने आया था। तब ब्राजील के गरिंचा को सेमीफाइनल में चिली के खिलाफ रेड कार्ड दिखाया गया था। हालांकि, गरिंचा ने फाइनल में हिस्सा लिया और चेकोस्लोवाकिया पर जीत हासिल की। उस समय रेड कार्ड के बाद खिलाड़ी पर प्रतिबंध नहीं लगता था, बल्कि अधिकारी सबूतों के आधार पर सजा तय करते थे। 1962 में फीफा की अनुशासनात्मक समिति का निर्णय राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों से घिरा हुआ था।

चार्ल्स डी केटेलेरे के दो गोल, बेल्जियम ने अमेरिका को हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई

नई दिल्ली फीफा वर्ल्ड कप 2026 की सहमेजबान टीम संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) का सफर निराशाजनक अंदाज में खत्म हो गया. 7 जुलाई (मंगलवार) को सिएटल के सिएटल स्टेडियम में आयोजित राउंड ऑफ 16 मुकाबले में बेल्जियम ने अमेरिकी टीम पर 4-1 से बड़ी जीत दर्ज की.   इस हार के साथ ही घरेलू दर्शकों के सामने वर्ल्ड कप में लंबा सफर तय करने का यूएसए का सपना टूट गया. बेल्जियम की जीत के सबसे बड़े हीरो चार्ल्स डी केटेलेरे रहे. उन्होंने अमेरिका की कमजोर डिफेंस का पूरा फायदा उठाते हुए दो गोल किए और एक अन्य गोल में असिस्ट किया. चार्ल्स डी केटेलेरे ने 9वें और 33वें मिनट में गोल किया. हालांकि इसी बीच मलिक टिलमैन (31वें मिनट) ने जरूर यूएसए के लिए एक गोल दागा. फिर 57वें मिनट में हंस वनाकेन ने गोल दागकर स्कोर बेल्जियम के पक्ष में 3-1 कर दिया. दूसरे हाफ के इंजरी टाइम में रोमेलु लुकाकू ने गोल कर बेल्जियम की जीत पर मोहर लगा दी. इस शानदार जीत के साथ बेल्जियम ने क्वार्टर फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है, जहां शनिवार को कैलिफोर्निया के इंगलवुड में उसका सामना स्पेन से होगा. अमेरिका के कोच का फूटा गुस्सा अपनी टीम के खराब प्रदर्शन और लगातार हो रही गलतियों से अमेरिका के कोच मौरिसियो पोचेतीनो बेहद निराश दिखाई दिए. अमेरिकी टीम के गोल खाने के बाद पोचेतीनो ने गुस्से में बेंच के सामने रखे एक रैक पर लात मार दी, जिससे पानी की चार बोतलें हवा में उड़ गईं. उनका यह रिएक्शन साफ बता रहा था कि वह अपनी टीम के प्रदर्शन से कितने नाराज थे. इस मैच के लिए अमेरिकी टीम को स्टार फॉरवर्ड फोलारिन बालोगुन की वापसी से बड़ी राहत मिली थी. बालोगुन पर रेड कार्ड के कारण एक मैच का प्रतिबंध लगाया गया था, लेकिन फीफा ने विवादास्पद फैसले में उनका निलंबन हटा दिया था. इसके बावजूद अमेरिकी टीम घरेलू मैदान पर उम्मीदों के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी. खासतौर पर उसके डिफेंडर्स की गलतियों का बेल्जियम ने जमकर फायदा उठाया. पहले हाफ में यूएसए की रक्षापंक्ति की गलतियों के कारण बेल्जियम ने दो गोल दागे. इसके बाद दूसरे हाफ की शुरुआत में गोलकीपर मैट फ्रीज की बड़ी चूक ने अमेरिकी टीम की वापसी की उम्मीदों को लगभग खत्म कर दिया. मुकाबले में एक समय अमेरिका ने वापसी की उम्मीद जगाई थी. मलिक टिलमैन ने पहले हाफ के बीच में शानदार फ्री-किक पर गोल दागकर स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया था. यह मौजूदा वर्ल्ड कप में फ्री-किक से उनका दूसरा गोल था. हालांकि अमेरिकी खिलाड़ियों और दर्शकों की खुशी ज्यादा देर तक कायम नहीं रह सकी. खेल दोबारा शुरू होने के महज 61 सेकंड बाद बेल्जियम ने एक और गोल दागकर फिर से बढ़त हासिल कर ली. यह गोल अमेरिकी टीम के लिए बड़ा झटका साबित हुआ और इसके बाद यूएसए मुकाबले में वापसी नहीं कर सका.

क्रिस्टियानो रोनाल्डो का आखिरी वर्ल्ड कप खत्म, स्पेन ने पुर्तगाल को बाहर का रास्ता दिखाया

नई दिल्ली पुर्तगाल के स्टार स्ट्राइकर क्रिस्टियानो रोनाल्डो का फीफा वर्ल्ड कप जीतने का सपना अधूरा रह गया. स्पेन के खिलाफ राउंड ऑफ 16 मुकाबले में पुर्तगाल को 0-1 से दिल तोड़ने वाली हार मिली. इसके साथ ही 41 साल के रोनाल्डो का वर्ल्ड कप सफर हमेशा के लिए खत्म हो गया. मैच के बाद निराश रोनाल्डो ने पुष्टि की कि यह उनके करियर का आखिरी वर्ल्ड कप था, लेकिन उन्होंने इंटरनेशनल फुटबॉल से संन्यास लेने पर फिलहाल कोई फैसला नहीं किया है. 7 जुलाई (मंगलवार) को आर्लिंग्टन के डलास स्टेडियम में आयोजित यह मुकाबला बहुत देर तक बराबरी पर था, लेकिन दूसरे हाफ के इंजरी टाइम में सब्स्टीट्यूट मिकेल मेरिनो ने गोल दागकर पुर्तगाल और रोनाल्डो का सपना तोड़ दिया. हार के बाद रोनाल्डो का दर्द साफ दिखाई दिया. उन्होंने स्वीकार किया कि आखिरी वर्ल्ड कप से इस तरह विदाई लेना उनके लिए बेहद दुखद है. क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने कहा, 'इस तरह वर्ल्ड कप से बाहर होने का दुख है. मैंने अपना सबकुछ दिया. मैंने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की और मैं साफ अंतरात्मा के साथ यहां से जा रहा हूं. हां, यह मेरा आखिरी वर्ल्ड कप था, लेकिन अब मेरे पास सोचने और अपने परिवार के साथ समय बिताने का मौका होगा. मैं जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करूंगा.' भावनाओं में नहीं बहना चाहता: रोनाल्डो स्पेन के खिलाफ हार के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रोनाल्डो ने पुर्तगाल के लिए भी अपना आखिरी मुकाबला खेल लिया है. रोनाल्डो ने इस सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया. उन्होंने साफ किया कि वह हार की निराशा और भावनाओं में बहकर अपने भविष्य पर कोई फैसला नहीं करेंगे. क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने कहा, 'मैं भावनाओं में बहकर कोई फैसला नहीं करता.' उनके इस बयान से संकेत मिलता है कि भले ही उनका वर्ल्ड कप करियर खत्म हो गया हो, लेकिन वह पुर्तगाल के लिए कुछ समय और खेलते हुए दिखाई दे सकते हैं. रोनाल्डो का मानना था कि पुर्तगाल ने स्पेन के खिलाफ कड़ा मुकाबला खेला और मैच किसी भी टीम के पक्ष में जा सकता था. क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने बताया, 'स्पेन थोड़ा भाग्यशाली रहा. यह ऐसा मुकाबला था, जो किसी भी टीम के पक्ष में जा सकता था.' रोनाल्डो ने अपने करियर में रिकॉर्ड की बराबरी करते हुए छठी बार फीफा वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया. उन्होंने इस टूर्नामेंट में तीन गोल भी दागे, लेकिन वह अपनी टीम को खिताब तक नहीं पहुंचा सके. दो दशक के अपने शानदार वर्ल्ड कप करियर में क्रिस्टियानो रोनाल्डो कभी फाइनल तक नहीं पहुंच पाए. हार की निराशा के बावजूद रोनाल्डो ने पुर्तगाल के लिए अपने योगदान पर गर्व जताया. उन्होंने याद दिलाया कि उनकी मौजूदगी में पुर्तगाल ने फुटबॉल इतिहास की सबसे बड़ी सफलताएं हासिल कीं. क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने कहा, 'मैंने पुर्तगाल के लिए तीन खिताब जीते हैं. क्रिस्टियानो रोनाल्डो से पहले पुर्तगाल ने एक भी खिताब नहीं जीता था. राष्ट्रीय टीम का सबसे बड़ा खिताब हमने 2016 में यूरोपियन चैम्पियनशिप के रूप में जीता था. सच कहूं तो मेरे लिए वह वर्ल्ड कप जितना ही महत्वपूर्ण है.' क्रिस्टियानो रोनाल्डो की कप्तानी में पुर्तगाल ने यूरो 2016 का खिताब जीतकर इतिहास रचा था. इसके बाद टीम ने 2019 और 2025 में यूईएफए नेशन्स लीग की ट्रॉफी भी अपने नाम की. रोनाल्डो ने क्लब और इंटरनेशनल फुटबॉल में लगभग हर बड़ी उपलब्धि हासिल की. पांच बार बैलन डी'ओर जीता, पुर्तगाल को तीन बड़े खिताब दिलाए और अनगिनत रिकॉर्ड अपने नाम किए. लेकिन वर्ल्ड कप की ट्रॉफी उनके हाथों में नहीं आ सकी.

वर्ल्ड कप में एम्बाप्पे का 19वां गोल, मेसी के रिकॉर्ड से सिर्फ एक कदम दूर

नई दिल्ली फीफा वर्ल्ड कप 2026 में फ्रांस के स्टार स्ट्राइकर कीलियन एम्बाप्पे का शानदार प्रदर्शन जारी है. एम्बाप्पे के दम पर फ्रांस ने पराग्वे को 1-0 से हराकर लगातार चौथी बार क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली. 5 जुलाई (रविवार) को फिलाडेल्फिया के फिलाडेल्फिया स्टेडियम में भीषण गर्मी के बीच खेले गए इस मुकाबले में एम्बाप्पे ने पेनल्टी पर मैच का इकलौता गोल दागा और अपनी टीम को जीत दिलाई. करीब 38 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच खेले गए इस मुकाबले में पराग्वे ने फ्रांस को लंबे समय तक गोल करने का मौका नहीं दिया. लेकिन 70वें मिनट में VAR (वीडियो असिस्टेंट रेफरी) के दखल के बाद फ्रांस को पेनल्टी मिली. पराग्वे के डिएगो गोमेज पर फाउल का फैसला आने के बाद एम्बाप्पे ने बिना गलती किए गेंद को गोल में पहुंचा दिया. फीफा वर्ल्ड कप में कीलियन एम्बाप्पे का ये 19वां गोल रहा. खास बात यह है कि उन्होंने यह उपलब्धि सिर्फ 19 मैचों में हासिल की है. अब वह लियोनेल मेसी (20 गोल) से सिर्फ एक गोल पीछे हैं. अर्जेंटीना के कप्तान और महान फुटबॉलर मेसी फीफा वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा गोल दागने वाले प्लेयर हैं. गोल्डन बूट की रेस में सबसे आगे कीलियन एम्बाप्पे इस वर्ल्ड कप में अब तक 7 गोल कर चुके हैं और गोल्डन बूट की दौड़ में शीर्ष पर हैं. लियोनेल मेसी ने भी सात गोल किए हैं, लेकिन एम्बाप्पे ने इस वर्ल्ड कप में दो असिस्ट भी किए हैं. चार साल पहले कतर में आयोजित वर्ल्ड कप में एम्बाप्पे ने गोल्डन बूट जीता था, लेकिन फाइनल में मेसी की अगुवाई वाली अर्जेंटीना ने फ्रांस को हराकर खिताब अपने नाम किया था. पराग्वे के गोलकीपर ऑरलैंडो गिल ने शानदार प्रदर्शन किया और फ्रांस के कई हमलों को नाकाम किया. उन्होंने कीलियन एम्बाप्पे के दो खतरनाक शॉट्स को इंजरी टाइम में रोका, जबकि मनु कोने के शानदार प्रयास को भी गोल बनने से बचा लिया. हालांकि, पेनल्टी पर वह एम्बाप्पे को रोक नहीं सके. फ्रांस ने लगातार चौथी बार वर्ल्ड कप के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई है. अब उसका सामना मोरक्को से होगा. यह मुकाबला 10 जुलाई को फॉक्सबोरो के बोस्टन स्टेडियम में खेला जाएगा. फ्रांस की नजर अब लगातार दूसरी बार वर्ल्ड कप फाइनल की ओर बढ़ने पर होगी, जबकि कीलियन एम्बाप्पे की कोशिश मेसी का रिकॉर्ड तोड़ने और एक बार फिर गोल्डन बूट जीतने की रहेगी.

मेक्सिको ने रचा इतिहास, हैती के प्रदर्शन ने बटोरी सुर्खियां, स्विट्जरलैंड ने भी दर्ज की बड़ी जीत

मैक्सिको  फीफा वर्ल्ड कप 2026 (FIFA World Cup 2026) के ग्रुप राउंड के मुकाबलों में गुरुवार को कई यादगार नतीजे देखने को मिले. मैक्सिको ने चेक रिपब्लिक को 3-0 से हराकर पहली बार वर्ल्ड कप के ग्रुप स्टेज के तीनों मैच जीतने का कारनामा किया. वहीं 52 साल बाद वर्ल्ड कप में लौटी हैती की टीम मोरक्को से हार गई, लेकिन दो गोल दागकर अपने फैन्स को जश्न मनाने का मौका दे गई।  उधर स्विट्जरलैंड ने कनाडा को 2-1 से हराकर ग्रुप-B में पहला स्थान हासिल किया, जबकि बोस्निया-हर्जेगोविना ने कतर को 3-1 से हराकर नॉकआउट राउंड में पहुंचने की उम्मीदों को मजबूत कर लिया।  मैक्सिको ने पहली बार जीते ग्रुप स्टेज के तीनों मैच ग्रुप-A का विजेता पहले ही बन चुका मैक्सिको चेक रिपब्लिक के खिलाफ भी पूरी तरह हावी रहा. दूसरे हाफ में 22 वर्षीय मातेओ चावेज ने 55वें मिनट में गोल कर टीम को बढ़त दिलाई. इसके छह मिनट बाद जूलियन क्विनोनेस ने टूर्नामेंट का अपना दूसरा गोल दागकर स्कोर 2-0 कर दिया।  इंजरी टाइम में अल्वारो फिडाल्गो ने तीसरा गोल कर जीत पर मुहर लगा दी. मैक्सिको ने पहली बार वर्ल्ड कप के ग्रुप राउंड में तीनों मुकाबले जीते हैं. इससे पहले उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1986 और 2002 में रहा था, जब टीम ने दो जीत और एक ड्रॉ हासिल किया था।  इस मुकाबले में 17 वर्षीय गिल्बर्टो मोरा मैक्सिको के लिए वर्ल्ड कप शुरू करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने. वहीं 40 वर्षीय गोलकीपर गुइलेर्मो ओचोआ ने अपना छठा वर्ल्ड कप खेलकर लियोनेल मेसी और क्रिस्टियानो रोनाल्डो जैसे दिग्गजों की बराबरी कर ली।  हार के बावजूद हैती के लिए यादगार रहा दिन 52 साल बाद वर्ल्ड कप खेलने उतरी हैती की टीम मोरक्को से 4-2 से हार गई, लेकिन उसके दो गोल पूरे देश के लिए गर्व का कारण बन गए।  10वें मिनट में लेनी जोसेफ के शानदार प्रयास से मोरक्को के गोलकीपर यासीन बूनू के खाते में आत्मघाती गोल दर्ज हुआ और हैती ने बढ़त बना ली. इसके बाद विल्सन इसाडोर ने 43वें मिनट में दूसरा गोल कर टीम को फिर बढ़त दिला दी।  हालांकि मोरक्को ने लगातार तीन गोल दागकर मैच अपने नाम कर लिया और नॉकआउट राउंड में जगह बना ली. इसके बावजूद हजारों हैती समर्थकों ने पूरी रात अपनी टीम का उत्साह बढ़ाया. हैती के कोच सेबेस्टियन मिग्ने ने कहा कि टीम ने साबित किया कि वह इस मंच पर खेलने की हकदार है और अब 52 साल का इंतजार दोबारा नहीं होना चाहिए।  स्विट्जरलैंड ने कनाडा की उम्मीदों पर फेरा पानी ग्रुप-B के निर्णायक मुकाबले में स्विट्जरलैंड ने मेजबान कनाडा को 2-1 से हराकर टॉप पोजीशन हासिल कर ली. दूसरे हाफ की शुरुआत के महज 40 सेकंड बाद रूबेन वर्गास ने गोल कर स्विस टीम को बढ़त दिलाई. इसके बाद 20 वर्षीय जोहान मंजांबी ने 57वें मिनट में गोल कर स्कोर 2-0 कर दिया।  कनाडा की ओर से प्रॉमिस डेविड ने 76वें मिनट में गोल कर वापसी की कोशिश की, लेकिन टीम बराबरी नहीं कर सकी. हार के बावजूद कनाडा ने पहली बार वर्ल्ड कप के नॉकआउट राउंड में जगह बनाई है. अब उसका मुकाबला राउंड ऑफ-32 में साउथ अफ्रीका से होगा।  बोस्निया ने बढ़ाई नॉकआउट की उम्मीद सिएटल में खेले गए मुकाबले में बोस्निया-हर्जेगोविना ने कतर को 3-1 से हराकर टूर्नामेंट में अपनी उम्मीदें जिंदा रखीं. 18 वर्षीय केरिम अलायबेगोविच ने 29वें मिनट में गोल कर टीम को बढ़त दिलाई और वर्ल्ड कप इतिहास के सबसे युवा गोल स्कोररों में शामिल हो गए. इसके बाद कतर के सुल्तान अल-ब्रेक के आत्मघाती गोल ने बोस्निया की बढ़त दोगुनी कर दी।  कतर ने हसन अल हायडोस के गोल से वापसी की कोशिश की, लेकिन 80वें मिनट में एरमिन माहमिक ने तीसरा गोल कर मुकाबला खत्म कर दिया. तीसरे स्थान पर रहने वाली बोस्निया अब सर्वश्रेष्ठ थर्ड-प्लेस टीमों में शामिल होकर राउंड ऑफ-32 में पहुंचने की मजबूत दावेदार बन गई है। 

हालैंड का जलवा और ‘वाइकिंग रो’ का जश्न—नॉर्वे की जीत बना स्टेडियम का यादगार नजारा

नई दिल्ली  नॉर्वे ने सोमवार को न्यू जर्सी में सेनेगल को 3-2 से हराकर फीफा वर्ल्ड कप 2026 के नॉकआउट चरण में अपनी जगह पक्की कर ली। जीत के बाद खिलाड़ियों ने कप्तान मार्टिन ओडेगार्ड के नेतृत्व में समर्थकों के साथ पारंपरिक "वाइकिंग रो" के जरिए जश्न मनाया। वाइकिंग रो वर्ल्ड कप के दौरान नॉर्वे के प्रशंसकों के बीच एक लोकप्रिय परंपरा बन गई है। इसमें समर्थक वाइकिंग्स की लंबी नाव जैसी आकृति में बैठते हैं और ढोल की ताल पर चप्पू चलाने जैसी गतिविधि करते हैं। इसकी तुलना अक्सर आइसलैंड के प्रसिद्ध "वाइकिंग क्लैप" से की जाती है। खिलाड़ी और कोचिंग स्टाफ ने साथ मनाया जश्न नॉर्वे के समर्थक अपने दोनों वर्ल्ड कप मुकाबलों के दौरान और मेजबान शहरों बोस्टन और न्यूयॉर्क सिटी में इस नारे और उत्सव का प्रदर्शन कर चुके हैं। सोमवार की जीत के बाद खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ ने भी प्रशंसकों के साथ इस जश्न में भाग लिया मैच में शानदार प्रदर्शन करने वाले एरलिंग हालैंड ने कहा कि अगर नॉर्वे जीत हासिल करता है तो वह इस उत्सव को मनाने के लिए उत्सुक थे। हालैंड ने फॉक्स स्पोर्ट्स से कहा, 'मैंने इसे इंटरनेट पर देखा था यह पूरी तरह वायरल हो चुका है। मैच से पहले मार्टिन ओडेगार्ड ने मुझसे पूछा, क्या तुम्हें लगता है कि हमें भी इसमें शामिल होना चाहिए?' मैंने कहा, 'अगर हम जीतते हैं, तो जरूर करेंगे।' क्या होता है वाइकिंग रो? कहा जाता है कि वाइकिंग रो एकता शक्ति और टीमवर्क का प्रतीक है। यह परंपरा युद्ध से पहले एक साथ चप्पू चलाने वाले वाइकिंग योद्धाओं की छवि से प्रेरित है। राष्ट्रीय टीम के प्रति समर्थन दिखाने के लिए प्रशंसक एक साथ तालमेल में यह गतिविधि करते हैं। फुटबॉल कै मैदान पर भी खिलाड़ी एकता के साथ खेलते हैं। इसीलिए खेल में भी इस सेलिब्रेशन का खास महत्व है। कैसा रह मैच का हाल इसके साथ ही बात की जाए मैच की तो नॉर्वे ने 43वें मिनट में मार्कस होल्मग्रेन पेडरसन के गोल की बदौलत बढ़त हासिल की। इसके बाद एरलिंग हालैंड ने 48वें और 58वें मिनट में गोल दागकर विपक्षी खेमे पर दबाव बना दिया। इस परिणाम के साथ नॉर्वे ने ग्रुप I में कम से कम दूसरा स्थान सुनिश्चित कर लिया है। शुक्रवार को मैसाचुसेट्स के फॉक्सबोरो में फ्रांस के खिलाफ होने वाला उनका अंतिम ग्रुप-स्टेज मुकाबला यह तय करेगा कि ग्रुप में शीर्ष स्थान किस टीम के पास जाएगा।

एम्बाप्पे का जलवा बरकरार! बारिश के बीच फ्रांस ने इराक को हराकर नॉकआउट में बनाई जगह

 फिलाडेल्फिया फीफा विश्व कप 2026 में फ्रांस ने शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए इराक को 3-0 से हरा दिया. इस जीत के साथ ही दो बार की चैम्पियन टीम फ्रांस ने नॉकआउट स्टेज में अपनी जगह पक्की कर ली. 23 जून (मंगलवार) को फिलाडेल्फिया के फिलाडेल्फिया स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में फ्रांस की जीत के हीरो स्टार फॉरवर्ड कीलियन एम्बाप्पे रहे, जिन्होंने दो गोल दागकर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई. उस्मान डेम्बेले ने टीम के लिए तीसरा गोल दागा।  यह मुकाबला सिर्फ फ्रांस की जीत के लिए ही नहीं, बल्कि खराब मौसम के कारण भी चर्चा में रहा. पहले हाफ के बाद भारी बारिश और तूफान की चेतावनी के चलते मैच को दो घंटे से अधिक समय के लिए रोकना पड़ा, मैदान पर पानी भर गया था और ग्राउंड स्टाफ को खेल दोबारा शुरू कराने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी. हालांकि लंबे इंतजार के बाद मुकाबला फिर शुरू हुआ और फ्रांस ने अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी।  अपना 100वें अंतरराष्ट्रीय मैच खेल रहे कीलियन एम्बाप्पे ने 14वें मिनट में गोल कर फ्रांस को शुरुआती बढ़त दिलाई. इसके बाद दूसरे हाफ में उन्होंने 54वें मिनट में एक और गोल दागकर स्कोर 2-0 कर दिया. इराक के डिफेंडर जैद तहसीन की गलती का फायदा उठाते हुए एम्बाप्पे ने यह गोल किया. बाद में उस्मान डेम्बेले ने भी गोल कर फ्रांस की जीत पर मुहर लगा दी।  ब्राजीली दिग्गज रोनाल्डो को पछाड़ा इस मैच में दो गोल करने के साथ ही कीलियन एम्बाप्पे ने विश्व कप में अपने कुल गोलों की संख्या 16 तक पहुंचा दी. इसके साथ ही उन्होंने जर्मनी के दिग्गज मिरोस्लाव क्लोज की बराबरी कर ली, वहीं ब्राजील के महान स्ट्राइकर रोनाल्डो को पीछे छोड़ दिया. अब उनसे आगे केवल अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी हैं, जिनके नाम विश्व कप में 18 गोल दर्ज हैं।  फ्रांस को टूर्नामेंट जीतने के प्रबल दावेदारों में माना जा रहा है. 2018 में विश्व कप जीतने वाली और 2022 में फाइनल तक पहुंचने वाली फ्रांसीसी टीम इस बार भी खिताब की मजबूत दावेदार नजर आ रही है. कीलियन एम्बाप्पे, उस्मान डेम्बेले और डेसिरे डोए जैसे खिलाड़ियों की मौजूदगी टीम को और खतरनाक बनाती है।  उधर, इराक के लिए यह मुकाबला कई मायनों में निराशाजनक रहा. टीम के स्टार स्ट्राइकर अयमेन हुसैन 26वें मिनट में चोटिल होकर मैदान से बाहर चले गए. उनकी जगह अली अल-हमदी को मैदान में उतारा गया. इराक विश्व कप में सिर्फ दूसरी बार खेल रहा है और अब उसके लिए आगे का सफर काफी मुश्किल हो गया है।  नॉर्वे भी अगले राउंड में उधर ग्रुप-I से फ्रांस के अलावा नॉर्वे ने भी नॉकआउट राउंड में जगह बना ली है. 23 जून (मंगलवार) को न्यू जर्सी के मेट लाइफ स्टेडियम में हुए मुकाबले में नॉर्वे ने सेनेगल को 3-2 से हराया. नॉर्वे के लिए एर्लिंग हालैंड ने दो गोल स्कोर किए. मार्कस पेडरसन ने भी एक गोल दागा. वहीं सेनेगल के लिए दोनों गोल इस्माइला सार ने किए। 

फीफा वर्ल्ड कप 2026: अमेरिका की लगातार दूसरी जीत, मोरक्को ने भी दर्ज की अहम जीत

 नई दिल्ली  फीफा वर्ल्ड कप-2026 के संयुक्त मेजबान अमेरिका ने ग्रुप-डी के मैच में ऑस्ट्रेलिया को मात देकर नॉकआउट दौर में जगह बना ली है। वहीं, मोरक्को ने ग्रुप-सी के मैच में स्कॉटलैंड को पटखनी देते हुए अगले दौर में जाने की संभावनाओं को मजबूत कर लिया है। अमेरिका नॉकआउट दौर में पहुंचाने वाली दूसरी टीम बन गई है। उससे पहले, एक और संयुक्त मेजबान मैक्सिको ने अगले दौर में जगह बनाई थी। वह ऐसा करने वाली पहली टीम थी। 96 साल बाद हुआ ऐसा अमेरिका की ये इस वर्ल्ड कप में लगातार दूसरी जीत है और इसी के साथ उसने 96 साल का सूखा खत्म किया है। इस वर्ल्ड कप से पहले अमेरिका ने साल 1929 में लगातार दो मैच जीते थे। इस डबल को दोहराने में अमेरिका को 96 साल लग गए। उसने अपने पहले मैच में पैराग्वे को 4-1 से मात दी थी। सीटल स्टेडियम में खेले गए इस मैच में अमेरिका के लिए पहला गोल ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ी कैमरन बर्गेस ने किया। उन्होंने गेंद को क्लियर करने के प्रयास में आत्मघाती गोल कर डाला जिससे अमेरिका 11वें मिनट में ही 1-0 से आगे हो गई। पहले हाफ के खत्म होने से दो मिनट पहले यानी 43वें मिनट में एलेक्स फ्रीमैन ने अमेरिका के लिए दूसरा गोल कर दिया। दूसरे हाफ में कोई गोल हो नहीं सका और अमेरिका ने ये मैच जीतते हुए शान से नॉकआउट दौर में जगह बनाई। मोरक्को ने भी जीता मैच वहीं मोरक्को ने भी स्कॉटलैंड के खिलाफ शुरुआती बढ़त ले ली थी जिसे कायम रखते हुए जीत हासिल की। मोरक्को के लिए इस्माइल साल्बारी ने डेढ़ मिनट में गोल करते हुए अपनी टीम को बढ़त दिलाई और फिर इसे कायम रखते हुए स्कॉटलैंड को पटखनी दी। ब्राहिम डिएज ने स्कॉटलैंड को डिफेंस को भेदते हुए इस्लमाइल तक शानदार पास दिया। इसके बाद इस्माइल ने एक झन्नटेदार किक से गेंद को नेट में डाल अपनी टीम को 1-0 से आगे कर दिया। इसी स्कोरलाइन से मोरक्को ने जीत हासिल की और अगले दौर में जाने की उम्मीदों को पुख्ता किया।  

नेमार के बिना भी चमका ब्राजील, हैती को हराकर विश्व कप में खोला जीत का खाता

 नई दिल्ली  मोरक्को के खिलाफ अपने पहले मैच में 1-1 से ड्रॉ खेलने पर मजबूर होने वाली ब्राजील ने शनिवार को फीफा वर्ल्ड कप-2026 में अपनी पहली जीत हासिल कर ली है। ग्रुप-सी के मैच में ब्राजील ने हैती को 3-0 से मात देकर अपना खाता खोला। पहले मैच में ड्रॉ खेलने के बाद ब्राजील को इस मैच में जीत की सख्त जरूरत थी और उसने इसी तरह का खेल दिखाते हुए तीन अंक लिए जिससे अब उसके कुल चार अंक हो गए हैं और वह मोरक्को की बराबरी पर है जिसने स्कॉटलैंड को मात दी है। शुरू से दिखाया दबदबा हैती की ये लगातार दूसरी हार है और वह अगले दौर की रेस से लगभग बाहर हो गई है। अपने स्टार खिलाड़ी नेमार के बिना उतरी ब्राजील ने शुरू से ही इस मैच में अपना दबदबा दिखाया। 23वें मिनट में उसने अपना पहला गोल किया। उसके लिए ये गोल माथेयास कुनहो ने किया। माथेयास यहीं नहीं रुके। उन्होंने 36वें मिनट में एक और गोल कर दिया और अपनी टीम को 2-0 की बढ़त दिला दी। पहले हाफ का अंत ब्राजील के पक्ष में 2-0 से होता दिख रहा था, लेकिन इस हाफ के अतिरिक्त समय में विनिसियस जूनियर ने लुकास पाक्वेटा के पास पर शानदार गोल कर स्कोर 3-0 कर दिया। दूसरे हाफ में नहीं हो सका गोल हैती के लिए वापसी काफी मुश्किल थी, लेकिन उसके पास पूरा दूसरा हाफ था। हालांकि, ब्राजील की दीवार को भेदना उसके लिए आसान नहीं रहा। इस हाफ में उसके लिए उपलब्धि यही रही कि उसने और कोई गोल नहीं होने दिया। ब्राजील ने काफी कोशिश की, लेकिन दूसरे हाफ में वह हैती के डिफेंस को चकमा नहीं दे सकी। हालांकि, उसके पास जीत के लिए पर्याप्त स्कोर था जो उसके काम आया और ब्राजील ने इस टूर्नामेंट की अपनी पहली जीत हासिल की।  

लियोनेल मेसी के पास वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने का मौका, एक गोल से रच देंगे फीफा वर्ल्ड कप में नया इतिहास

नई दिल्ली  फीफा वर्ल्ड कप 2026 अपने पूरे शबाब पर पहुंच चुका है और दुनिया के महानतम खिलाड़ियों में शुमार लियोनेल मेसी ने टूर्नामेंट के अपने पहले ही मैच में तहलका मचा दिया है. अर्जेंटीना के कप्तान मेसी ने अल्जीरिया के खिलाफ मैच में शानदार हैट्रिक गोल दागकर साफ संकेत दे दिए हैं कि वे इस विश्व कप में किस इरादे से उतरे हैं. मेसी के इस जादुई प्रदर्शन ने एक बार फिर फुटबॉल जगत में 'गोट' (GOAT – सर्वकालिक महान खिलाड़ी) की बहस पर विराम लगा दिया है।  200वें मैच में 118वां अंतरराष्ट्रीय गोल विश्व चैंपियन कप्तान लियोनेल मेसी भले ही अपना आखिरी वर्ल्ड कप खेल रहे हैं, लेकिन मैदान पर 38 साल की उम्र में भी उनमें 18 साल के युवा खिलाड़ी जैसा जोश और फुर्ती नजर आ रही है. अल्जीरिया के खिलाफ खेला गया यह मुकाबला मेसी के करियर का 200वां अंतरराष्ट्रीय मैच था, जिसे उन्होंने बेहद यादगार बना दिया. मैच के 17वें मिनट में ही विपक्षी डिफेंडर्स और गोलकीपर को छकाते हुए मेसी ने एक पावरफुल शॉट मारा जो सीधे नेट में गया. इस गोल के साथ मेसी ने अपने करियर का 118वां अंतरराष्ट्रीय गोल दर्ज किया. इसके बाद मेसी का जलवा जारी रहा और उन्होंने मैच के 60वें मिनट में अपना दूसरा और फिर 76वें मिनट में तीसरा गोल दागकर अपनी शानदार हैट्रिक पूरी की।  क्लोजे के वर्ल्ड रिकॉर्ड की बराबरी की, अब इतिहास रचने से 1 कदम दूर इस धमाकेदार हैट्रिक के साथ ही लियोनेल मेसी ने फीफा वर्ल्ड कप के इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने के जर्मनी के मिरोस्लाव क्लोजे के सर्वकालिक रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है. वर्ल्ड कप में अब मेसी के नाम भी कुल 16 गोल दर्ज हो गए हैं. अगले मैच में मैदान पर उतरते ही मेसी के पास सिर्फ 1 गोल करते ही इस महा-रिकॉर्ड को तोड़ने का सुनहरा मौका होगा, जिसे करते ही वो विश्व कप इतिहास में सबसे ज्यादा गोल दागने वाले दुनिया के इकलौते खिलाड़ी बन जाएंगे।  फीफा वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा गोल दागने वाले टॉप-5 फुटबॉलर मिरोस्लाव क्लोजे (जर्मनी) – 16 गोल लियोनेल मेसी (अर्जेंटीना) – 16 गोल रॉनल्डो नाजारियो (ब्राजील) – 15 गोल किलियन एम्बापे (फ्रांस) – 14 गोल गेर्ड मुलर (जर्मनी) – 14 गोल