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रायगढ़ स्टील प्लांट में बड़ा हादसा, फर्नेस विस्फोट में 4 श्रमिक झुलसे

रायगढ़. छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से बड़ी खबर सामने आई है। पूंजी पथरा स्थित रायगढ़ इस्पात संयंत्र में फर्नेस ब्लास्ट हुआ है, जिसकी चपेट में आने से करीब 4 मजदूर घायल हो गए हैं। सभी घायलों को तत्काल अपेक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। जानकारी के अनुसार, फर्निश में अधिक नमी (मॉइश्चर) जमा हो जाने के कारण ब्लास्ट होने की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक सभी घायलों की स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है। घायलों में अमरेश कुमार, फिरोज आलम खान और रामनाथ सूर्यवंशी (जांजगीर-चांपा) शामिल हैं, जबकि एक अन्य घायल की पहचान अभी नहीं हो सकी है। सभी घायलों की स्थिति फिलहाल स्थिर और खतरे से बाहर बताई जा रही है, हालांकि इनमें से दो घायलों को बेहतर उपचार के लिए रेफर करने की तैयारी है। ब्लास्ट होने की बात से इस्पात के जीएम ने किया इनकार रायगढ़ इस्पात के जीएम सुनील पांडा ने कहा कि बरसात के समय में फर्नेस में रॉ मैटेरियल के कारण नमी (मॉइश्चर) आ जाता है। नमी आने की वजह से जब फर्नेस हिट होता है तो कभी-कभी उसमें गैस का फॉर्मेशन हो जाता है। गैस ऊपर निकलने के कारण धुआं काफी फैल गया और आसपास मौजूद मजदूरों में अफरा-तफरी मच गई। इस दौरान ऊपर कार्य कर रहे कुछ मजदूरों ने घबराहट में इधर-उधर छलांग लगा दी, जिसकी वजह से उन्हें चोटें आई हैं। उन्होंने ब्लास्ट होने की बात से इनकार किया है और कहा कि यह घटना अफरा-तफरी के कारण हुई है। इस घटना में करीब चार लोग घायल हुए हैं। घटना के बाद उद्योग प्रबंधन के अधिकारी अपेक्स अस्पताल में मौजूद हैं और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। वहीं मौके पर औद्योगिक स्वास्थ्य विभाग की टीम और पुलिस भी पहुंचकर मामले की जांच में जुट गई है।

कोदो-कुटकी की खेती से बढ़ेगी आय और सेहत, किसानों के लिए बेहतर विकल्प

विशेष लेख कोदो-कुटकी की खेती अपनाएं, पोषण और समृद्धि दोनों पाएं पारंपरिक धरोहर से आधुनिक पहचान तक रायपुर  छत्तीसगढ़ की समृद्ध कृषि परंपरा में कोदो और कुटकी का विशेष महत्व रहा है। सदियों से आदिवासी और ग्रामीण समुदायों के भोजन का अभिन्न हिस्सा रहे ये लघु धान्य आज एक बार फिर किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं। बदलती जलवायु परिस्थितियों, पोषण संबंधी चुनौतियों और बेहतर कृषि की आवश्यकता के बीच कोदो-कुटकी जैसी मिलेट फसलें भविष्य की खेती का मजबूत आधार बनकर उभर रही हैं। कोदो (पास्पलम स्क्रोबिकुलेटम) और कुटकी (पैनिकम सुमाट्रेंस) ऐसी फसलें हैं जिन्हें कम पानी, कम लागत और सीमित संसाधनों में भी सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है। यही कारण है कि ये छोटे और सीमांत किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा का माध्यम बन रही हैं। कम उपजाऊ, पथरीली और ढालू भूमि में भी इनकी खेती संभव है, जहां अन्य फसलें अपेक्षित उत्पादन नहीं दे पातीं। आज जब दुनिया स्वास्थ्यवर्धक भोजन की ओर लौट रही है, तब कोदो और कुटकी का महत्व और बढ़ गया है। कोदो में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, आयरन और कैल्शियम प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जबकि कुटकी फाइबर, प्रोटीन, फास्फोरस तथा अन्य खनिज तत्वों से भरपूर होती है। विशेषज्ञों के अनुसार इनका नियमित सेवन मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा और एनीमिया जैसी समस्याओं के नियंत्रण में सहायक हो सकता है। यही वजह है कि आज इन्हें ‘सुपर फूड’ के रूप में पहचान मिल रही है। छत्तीसगढ़ सरकार भी मिलेट फसलों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। वर्ष 2026 में कोदो का न्यूनतम समर्थन मूल्य 3,200 रुपये प्रति क्विंटल तथा कुटकी का 3,350 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने के साथ इन फसलों की खेती के प्रति उत्साह बढ़ा है। विभागीय जानकारी के अनुसार खरीफ वर्ष 2025 में प्रदेश में कोदो फसल 39.02 हेक्टेयर और कुटकी फसल 38.03 हेक्टेयर रकबे में लगाए गए थे। वैसे विगत खरीफ वर्ष में प्रति हेक्टेयर कोदो की उत्पादन 550 किलोग्राम तथा कुटकी की उत्पादन 675 किलोग्राम दर्ज की गई है। यानी कोदो की उत्पादन 21.46 टन थी, वहीं 25.67 टन कुटकी का उत्पादन हुआ था। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भी किसानों से धान के साथ-साथ कोदो, कुटकी और रागी जैसी फसलों का उत्पादन बढ़ाने की अपील की है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि उन्नत तकनीकों को अपनाकर कोदो-कुटकी की उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। मानसून की शुरुआत के साथ जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के प्रथम पखवाड़े तक बुवाई, बीजोपचार, कतार पद्धति, संतुलित उर्वरक प्रबंधन तथा समय पर खरपतवार नियंत्रण जैसे उपाय किसानों को बेहतर उत्पादन दिला सकते हैं। बढ़ती बाजार मांग, मिलेट आधारित उत्पादों का विस्तार और सरकारी प्रोत्साहन योजनाएं इन फसलों के व्यावसायिक महत्व को लगातार बढ़ा रही हैं। एक समय केवल ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों तक सीमित रहने वाली कोदो-कुटकी आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहचान बना रही हैं। पोषण सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आर्थिक उन्नति के लिए कोदो और कुटकी अत्यंत महत्वपूर्ण फसलें हैं। आवश्यकता इस बात की है कि किसान आधुनिक तकनीकों के साथ इन पारंपरिक फसलों का उत्पादन बढ़ाएं और उपभोक्ता इन्हें अपने दैनिक भोजन का हिस्सा बनाएं। कोदो-कुटकी केवल अनाज नहीं, बल्कि स्वस्थ समाज, उत्तम कृषि और समृद्ध भविष्य की आधारशिला हैं। (एल.डी. मानिकपुरी, सहायक जनसंपर्क अधिकारी)

बस्तर के छात्रों को बड़ी सौगात, IIT मद्रास में सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी की ट्रेनिंग पाएंगे 30 प्रतिभाशाली विद्यार्थी

जगदलपुर. बस्तर संभाग के युवाओं के लिए तकनीकी शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में एक नई उम्मीद की किरण जगी है। पहली बार बस्तर के 30 मेधावी छात्रों को देश के प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास में सेमीकंडक्टर चिप मैन्युफैक्चरिंग की विशेष ट्रेनिंग लेने का अवसर मिलेगा। यह पहल न केवल छात्रों को अत्याधुनिक तकनीकों से परिचित कराएगी, बल्कि उन्हें भविष्य के हाई-टेक रोजगार बाजार के लिए भी तैयार करेगी। जानकारी के अनुसार, IIT मद्रास में 12 जुलाई से 24 जुलाई तक आयोजित होने वाले विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए बस्तर विश्वविद्यालय के छात्रों का चयन किया जाएगा। चयन प्रक्रिया विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित इंटरनल टेस्ट की मेरिट सूची के आधार पर पूरी होगी। इसमें चयनित 30 छात्र पहली बार हवाई यात्रा कर चेन्नई पहुंचेंगे और देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों में से एक IIT मद्रास में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। इस कार्यक्रम को लेकर प्रशासन भी उत्साहित है। चयनित छात्रों को राज्यपाल की मौजूदगी में रवाना किया जाएगा। खास बात यह है कि छात्रों की हवाई यात्रा का पूरा खर्च दंतेवाड़ा जिला प्रशासन वहन करेगा, जबकि इस पहल को सफल बनाने में बस्तर कलेक्टर का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली छात्रों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। बस्तर विश्वविद्यालय के कुलपति मनोज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान छात्रों को सेमीकंडक्टर चिप निर्माण, माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स, एडवांस डेटा ट्रांसफर सिस्टम और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। यह प्रशिक्षण छात्रों को भविष्य की तकनीकी चुनौतियों और उद्योगों की मांग के अनुरूप कौशल विकसित करने में मदद करेगा। प्रशिक्षण का एक बड़ा लाभ रोजगार के अवसरों के रूप में भी सामने आ सकता है। रायपुर में स्थापित हो रही गैलियम नाइट्राइड (GaN) आधारित 5G और 6G डेटा ट्रांसफर टेक्नोलॉजी कंपनी में प्रशिक्षित युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाएं बनने की उम्मीद है। ऐसे में यह कार्यक्रम बस्तर के छात्रों को सीधे उभरती हुई सेमीकंडक्टर और दूरसंचार उद्योग से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में बस्तर के लिए यह पहल एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल क्षेत्र के युवाओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों और उद्योगों तक उनकी पहुंच भी मजबूत होगी। बस्तर विश्वविद्यालय और जिला प्रशासन की यह संयुक्त पहल क्षेत्र के प्रतिभाशाली युवाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोल सकती है।

गोदाम में डिटर्जेंट नहीं, बन रहा था गुटखा! छापेमारी के बाद फरार किराएदार की तलाश

दुर्ग. दुर्ग जिले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए भारी मात्रा में गुटखा और उसके निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री जप्त की है। पूरा मामला जेवरा सिरसा चौकी क्षेत्र के कचांदुर गांव का है, जहां डिटर्जेंट पाउडर बनाने के नाम पर एक गोदाम किराए पर लेकर अवैध रूप से जर्दा युक्त गुटखा तैयार और पैकेजिंग का काम किया जा रहा था। दरअसल सुपेला का रहने वाला मोहम्मद मुस्तफा के गोदाम को उत्तर प्रदेश उन्नाव के रहने वाले मोहम्मद शान ने करीब 20 दिन पहले किराए पर लिया था। गोदाम लेने के दौरान उसने डिटर्जेंट पाउडर निर्माण का काम करने की जानकारी दी थी, लेकिन कई दिनों तक उसका गोदाम मालिक से कोई संपर्क नहीं हुआ। किराएदार का मोबाइल फोन लगातार बंद रहने से गोदाम मालिक को संदेह हुआ, जिस पर उसने जेवरा सिरसा चौकी पुलिस को इसकी सूचना दी। सूचना मिलने पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और गोदाम की जांच की तो जांच के दौरान वहां से 32 बड़े बोरों में तैयार गुटखा, 32 बोरों में मीठी सुपारी, गुटखा बनाने में उपयोग होने वाला रॉ मटेरियल, और पैकिंग, मिक्सिंग मशीन बरामद की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने फूड सेफ्टी विभाग की टीम को भी मौके पर बुलाया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गोदाम में अवैध गुटखा की पैकेजिंग और निर्माण का कार्य किया जा रहा था। फिलहाल बरामद सामग्री को फूड सेफ्टी अधिकारियों को सौंपी गयी है, और मामले में संबंधित व्यक्तियों की तलाश के साथ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

उदंती-सीतानदी में बाघिन की दस्तक, टाइगर रिजर्व के सुनहरे भविष्य की जगी उम्मीद

उदंती-सीतानदी में बाघिन की दस्तक, टाइगर रिजर्व के सुनहरे भविष्य की जगी उम्मीद   कैमरा ट्रैप में लगातार कैद हो रही बाघिन, संरक्षण प्रयासों को मिली बड़ी सफलता रायपुर  उदंती- सीतानदी टाइगर रिजर्व के लिए ऐतिहासिक खबर सामने आई है। हाल में विभिन्न स्थानों पर लगाए गए कैमरा ट्रैप में एक बाघिन की तस्वीरें और वीडियो लगातार कैद हुए हैं। वन विभाग के अनुसार बाघिन प्राकृतिक रूप से विचरण करते हुए इस क्षेत्र तक पहुंची है और अब इसे अपना स्थायी आशियाना बनाने की ओर बढ़ रही है। संरक्षण प्रयासों का दिखने लगा सकारात्मक परिणाम             मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व तथा वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण एवं संवर्धन के लिए लगातार प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में बाघिन की उपस्थिति इन प्रयासों की सफलता का महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है। वन विभाग द्वारा पिछले कुछ वर्षों में वन्यजीवों के लिए सुरक्षित और अनुकूल वातावरण तैयार करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण पहल की गई हैं, जिनका सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगा है। बेहतर आवास का मिला प्रमाण             लंबे समय से बाघों की वापसी की प्रतीक्षा कर रहे उदंती-सीतानदी के लिए यह घटनाक्रम बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक बाघ या बाघिन का किसी वन क्षेत्र को स्थायी निवास चुनना वहां के बेहतर आवास, पर्याप्त शिकार आधार और सुरक्षित वातावरण का प्रमाण होता है। बाघिन की नियमित उपस्थिति पूरे परिदृश्य के पुनर्जीवन और संरक्षण प्रयासों की सफलता का संकेत है। बाघों की स्थायी मौजूदगी का साक्षी बनेगा           वन अधिकारियों के मुताबिक कैमरा ट्रैप में बाघिन स्वस्थ और आत्मविश्वास से भरी दिख रही है। उसकी गतिविधियों से स्पष्ट है कि वह क्षेत्र का निरीक्षण कर प्रभाव क्षेत्र स्थापित करने की प्रक्रिया में है। परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो यह क्षेत्र फिर से बाघों की स्थायी मौजूदगी का साक्षी बनेगा। संरक्षण प्रयासों का मिला परिणाम           पिछले कुछ वर्षों में उदंती-सीतानदी में आवास सुधार और वन्यजीव संरक्षण के लिए व्यापक कार्य हुए हैं। सघन गश्त, एंटी-पोचिंग नेटवर्क को मजबूती, सैकड़ों कृत्रिम जलस्रोत-झिरियों का निर्माण, क्षतिग्रस्त वन क्षेत्रों का पुनर्स्थापन, अतिक्रमण हटाकर वनभूमि की वापसी और वन्यजीवों के लिए सुरक्षित माहौल तैयार करने जैसे कदम उठाए गए हैं। बाघिन की मौजूदगी को इन्हीं प्रयासों का सकारात्मक परिणाम माना जा रहा है। निगरानी और सुरक्षा बढ़ाई जाएगी             कैमरा ट्रैप की तस्वीरों-वीडियो ने वन अधिकारियों और वन्यजीव प्रेमियों में नई ऊर्जा भर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि बाघिन के स्थायी बसने से यह रिजर्व मध्य भारत के प्रमुख बाघ आवासों में फिर अपनी पहचान बना सकता है और भविष्य में अन्य बाघों के आगमन का मार्ग प्रशस्त होगा। बाघिन की सुरक्षा और अनुकूल आवास सुनिश्चित करने प्रयास             वन विभाग ने बाघिन की सुरक्षा और अनुकूल आवास सुनिश्चित करने के लिए निगरानी व संरक्षण गतिविधियां और सुदृढ़ करने का निर्णय लिया है। विभाग का कहना है कि यह सिर्फ एक बाघिन की मौजूदगी नहीं, बल्कि प्रकृति की सकारात्मक प्रतिक्रिया और जंगलों के पुनर्जीवन की कहानी है।

छत्तीसगढ़ में रिश्वतखोरी पर सख्ती, तहसील की सहायक ग्रेड-02 को कलेक्टर ने किया सस्पेंड

कोरबा. जिले में शासकीय कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामलों में लगातार सख्त कार्रवाई कर रहा है। इसी क्रम में कलेक्टर कुणाल दुदावत ने तहसील कार्यालय कटघोरा में पदस्थ सहायक ग्रेड-02 मंजू कृष्णा धिरही को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं दंडाधिकारी कटघोरा के समक्ष एक शिकायत प्रस्तुत की गई थी, जिसमें तहसील कार्यालय कटघोरा में नकल जारी करने के एवज में आवेदक किशन कुमार से अवैध राशि की मांग किये जाने का आरोप लगाया गया था। शिकायत के समर्थन में एक वीडियो रिकॉर्डिंग भी प्रस्तुत की गई थी। मामले की जांच और परीक्षण के बाद अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कटघोरा ने सहायक ग्रेड-02 मंजू कृष्णा धिरही के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की थी। इसके आधार पर कलेक्टर ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय तहसील कार्यालय पोंड़ी-उपरोड़ा निर्धारित किया गया है।

1 जुलाई से लागू होगी वीबी जी राम जी योजना, ग्रामीण क्षेत्रों में उत्साह का माहौल

1 जुलाई से लागू होगी वीबी जी राम जी योजना, ग्रामीण क्षेत्रों में उत्साह का माहौल ग्राम सभाओं के माध्यम से दी जा रही योजना की जानकारी, मानव श्रृंखला बनाकर ग्रामीणों ने दिया जनजागरूकता का संदेश केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने भी की मानव श्रृंखला द्वारा जागरूकता की सराहना रायपुर, प्रदेश के ग्रामीण परिवारों को आजीविका और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा आगामी 1 जुलाई 2026 से लागू की जा रही वीबी जी राम जी (विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन-ग्रामीण) योजना को लेकर पूरे प्रदेश में व्यापक जनजागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के मार्गदर्शन में ग्राम पंचायतों, जनपद पंचायतों और जिला स्तर पर लगातार प्रशिक्षण, बैठकें और ग्राम सभाएं आयोजित कर ग्रामीणों को योजना के विभिन्न प्रावधानों एवं लाभों की जानकारी दी जा रही है। सांकरा एवं देवरी में ग्रामीणों ने बनाई मानव श्रृंखला             योजना के प्रति ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। प्रदेश के विभिन्न गांवों में आयोजित ग्राम सभाओं में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लेकर योजना की जानकारी प्राप्त की तथा इसके सफल क्रियान्वयन में सहयोग का संकल्प लिया। इसी क्रम में बेमेतरा जिले के जनपद पंचायत बेरला की ग्राम पंचायत सांकरा एवं देवरी में ग्रामीणों ने योजना के प्रचार-प्रसार के लिए अनूठी पहल करते हुए मानव श्रृंखला का निर्माण किया। ग्रामीणों ने हाथों में जागरूकता संबंधी तख्तियां लेकर “वीबी जी राम जी – गांव की प्रगति, हम सबकी जिम्मेदारी”, “रोजगार और आजीविका का नया संबल” तथा “समृद्ध गांव, सशक्त परिवार” जैसे संदेशों के माध्यम से लोगों को योजना से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।  केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की सराहना         केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी अपने एक्स अकॉउंट से पोस्ट कर लिखा कि छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले से आई इस तस्वीर को देखकर मन आनंद और उत्साह से भर गया। यह तस्वीर गाँव की जनता के जागरूकता और आत्मविश्वास का प्रतीक है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने भी बेमेतरा जिले के इन प्रयासों की सराहना करते हुए अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट कर लिखा कि यह मानव श्रृंखला बन रही है, जो योजना के प्रति जन-जागरूकता का प्रतीक बनी हुई है। पात्र परिवारों को लाभ दिलाने और जानकारी पहुंचाने लिया संकल्प           मानव श्रृंखला के माध्यम से ग्रामीणों ने यह संदेश दिया कि योजना केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में जनभागीदारी का एक महत्वपूर्ण अभियान है। इस अवसर पर ग्रामीणों ने पात्र परिवारों को योजना का लाभ दिलाने तथा अधिक से अधिक लोगों तक इसकी जानकारी पहुंचाने का संकल्प भी लिया। ग्राम सभा मे अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी           ग्राम सभाओं में अधिकारियों द्वारा बताया गया कि वीबी – जीरामजी योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को रोजगार एवं आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना तथा ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि करना है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पंचायत स्तर पर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों और हितग्राहियों को दिया जाएगा प्रशिक्षण          पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा निर्धारित कार्ययोजना के अनुसार 30 जून 2026 तक पंचायत, ब्लॉक एवं जिला स्तर के सभी अधिकारी-कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों तथा हितग्राहियों का प्रशिक्षण पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए विभिन्न चरणों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि योजना के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की कठिनाई न आए और पात्र परिवारों को समय पर लाभ मिल सके। 1 जुलाई से प्रदेश के लाखों ग्रामीण परिवारों मिलेगा प्रत्यक्ष लाभ           योजना के प्रचार-प्रसार के लिए ग्राम सभाओं, चौपालों, पोस्टर-बैनर, मुनादी, रथ प्रचार एवं डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया जा रहा है। वहीं सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक, स्व-सहायता समूहों की महिलाएं, जनप्रतिनिधि तथा स्थानीय सामाजिक संगठन सक्रिय रूप से लोगों को योजना की जानकारी देने में जुटे हुए हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि यह योजना गांवों में रोजगार और आजीविका के नए अवसर सृजित करने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। 1 जुलाई से योजना के लागू होने के साथ ही प्रदेश के लाखों ग्रामीण परिवारों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलने की भी उम्मीद है।  उप मुख्यमंत्री शर्मा ने भी लाइव आकर दी जानकारी          उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा भी  मंगलवार को अपने फ़ेसबुक अकाउंट पर लाइव आकर आगामी ग्राम सभा और वीबी जीरामजी के संबंध में लोगों को जानकारी दी और लोगों को योजना का लाभ लेने को प्रेरित किया साथ ही उन्होंने लोगों के सवालों का भी समाधान किया।

स्कूल बसों की जांच में बड़ा खुलासा, जगदलपुर के 44 वाहन जांच से रहे नदारद

जगदलपुर. स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन का विशेष जांच अभियान तेज हो गया है. परिवहन, शिक्षा विभाग और यातायात पुलिस की संयुक्त टीम निजी स्कूल वाहनों की जांच कर रही है. 20 स्कूलों के 110 वाहनों की जांच का लक्ष्य तय किया गया था. लेकिन निर्धारित समय में केवल 66 वाहन ही जांच के लिए पहुंचे. 44 वाहन जांच प्रक्रिया से पूरी तरह गायब रहे. इस लापरवाही पर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है. आरटीओ डीसी बंजारे ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा..अनुपस्थित स्कूलों और वाहनों की सूची तैयार कर ली गई है. अब संबंधित स्कूल संचालकों पर दंडात्मक कार्रवाई की तैयारी है. वाहनों का फिटनेस प्रमाणपत्र और पंजीयन निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है. प्रशासन ने सभी स्कूलों को सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं. आने वाले दिनों में जांच अभियान और तेज किया जाएगा.

वन मंत्री केदार कश्यप की पहल, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में शुरू होगी हॉर्नबिल सफारी

वन मंत्री केदार कश्यप की पहल से उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में शुरू होगी हॉर्नबिल सफारी हॉर्नबिल संरक्षण के साथ स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार का नया अवसर पीवीटीजी गांवों ओढ़, अमलोर और आमामोरा में बढ़ी मालाबार पाइड हॉर्नबिल की संख्या रायपुर 'हॉर्नबिल सफारी' से तात्पर्य हॉर्नबिल पक्षियों को देखने के लिए की जाने वाली वन्यजीव सफारी या हॉर्नबिल से जुड़े प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों से है। हॉर्नबिल मुख्य रूप से जंगलों, विशेषकर पश्चिमी घाट और मध्य भारत के नम पर्णपाती और सदाबहार वनों में रहना पसंद करता है। ‘हॉर्नबिल सफारी’ प्रारंभ करने का लिया गया निर्णय              छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण और सामुदायिक विकास को नई दिशा देने वाली एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की जा रही है। वन मंत्री केदार कश्यप की पहल पर रिजर्व प्रबंधन द्वारा विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) के गांवों ओढ़, अमलोर और आमामोरा में ‘हॉर्नबिल सफारी’ प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया है। यह पहल दुर्लभ मालाबार पाइड हॉर्नबिल के संरक्षण को मजबूती देने के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी सृजित करेगी। संरक्षण और आजीविका को साथ लेकर आगे बढ़ रहा वन विभाग          वन मंत्री केदार कश्यप की सोच के अनुरूप वन विभाग वन एवं वन्यजीवों के संरक्षण कार्यों को स्थानीय समुदायों की भागीदारी और आजीविका से जोड़ने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पाण्डेय तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) ओ.पी. यादव के मार्गदर्शन में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में कई नवाचार किए जा रहे हैं, जिनसे वन्यजीव संरक्षण और ग्रामीण विकास को एक साथ बढ़ावा मिल रहा है। चार वर्षों में बढ़ी हॉर्नबिल की आबादी         उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में पिछले चार वर्षों के दौरान मालाबार पाइड हॉर्नबिल की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यह सफलता एंटी-पोचिंग अभियान, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई, फलदार वृक्षों के संरक्षण एवं रोपण तथा ‘हॉर्नबिल रेस्टोरेंट’ जैसी अभिनव पहल का परिणाम है। स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी ने भी इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हॉर्नबिल ट्रैकिंग टीम निभा रही महत्वपूर्ण भूमिका         हॉर्नबिल संरक्षण के लिए गठित विशेष ट्रैकिंग टीम लगातार पक्षियों की गतिविधियों, घोंसलों और आवास क्षेत्रों की निगरानी कर रही है। वन विभाग के कर्मचारियों के साथ स्थानीय ट्रैकर्स भी इस अभियान से जुड़े हुए हैं। उनके सतत प्रयासों से ओढ़, अमलोर और आमामोरा के आसपास का वन क्षेत्र आज हॉर्नबिल के सुरक्षित आवास और आकर्षक बर्डिंग स्थल के रूप में विकसित हो चुका है। प्रकृति प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए बनेगा नया आकर्षण         प्रस्तावित हॉर्नबिल सफारी के माध्यम से पर्यटक, पक्षी प्रेमी, वन्यजीव फोटोग्राफर और शोधकर्ता प्राकृतिक वातावरण में हॉर्नबिल का अवलोकन कर सकेंगे। सफारी के संचालन के लिए प्रारंभिक चरण में दो जिप्सी वाहनों की व्यवस्था की गई है। स्थानीय युवाओं को मिलेगा प्रशिक्षण और रोजगार         हॉर्नबिल सफारी की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता स्थानीय समुदायों की भागीदारी है। पीवीटीजी गांवों के युवाओं और ग्रामीणों को बर्ड वॉचिंग तथा नेचर गाइड का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद वे पर्यटकों के लिए नेचर गाइड और हॉर्नबिल गाइड के रूप में कार्य करेंगे। इससे उन्हें स्थायी आय और रोजगार का अवसर मिलेगा तथा सामुदायिक आधारित इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। मध्य भारत का उभरता बर्डिंग डेस्टिनेशन         रायपुर से लगभग 130 किलोमीटर दूर स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व तेजी से मध्य भारत के प्रमुख बर्डिंग और नेचर टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। यहां मालाबार पाइड हॉर्नबिल के अलावा शाहीन बाज, भारतीय पिट्टा, ब्राउन फिश आउल, ग्रे-हेडेड फिश ईगल, विभिन्न प्रजातियों के कठफोड़वा, बार्बेट, मिनिवेट सहित अनेक स्थानीय और प्रवासी पक्षियों की विविधता देखने को मिलती है। वन्यजीवों की समृद्ध जैव विविधता का केंद्र          यह क्षेत्र पक्षियों के साथ-साथ भारतीय विशाल गिलहरी (इंडियन जायंट स्क्विरल) और भारतीय विशाल उड़न गिलहरी (इंडियन जायंट फ्लाइंग स्क्विरल) जैसे दुर्लभ वन्यजीवों के लिए भी प्रसिद्ध है। यही कारण है कि यह क्षेत्र प्रकृति और वन्यजीव प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। संरक्षण, विकास और पर्यटन का सफल संगम         विशेषज्ञों के अनुसार उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में की जा रही यह पहल इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि वैज्ञानिक वन प्रबंधन, वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय समुदायों की सहभागिता के माध्यम से संरक्षण आधारित आजीविका और सतत पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है। हॉर्नबिल सफारी के शुरू होने से छत्तीसगढ़ को प्राकृतिक पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान मिलेगी और ग्रामीण विकास को भी गति प्राप्त होगी। मोबाइल नंबर – 7976688165, 7566510937 वेबसाइट – : www.udantisitanaditigerreserve.in पर पर्यटक, संपर्क कर विस्तृत जानकारी ले सकते हैं।

वीरांगना रानी दुर्गावती का शौर्य और बलिदान राष्ट्र की प्रेरणा का अमर स्रोत: CM विष्णुदेव साय

वीरांगना रानी दुर्गावती का शौर्य और बलिदान राष्ट्र की प्रेरणा का अमर स्रोत : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित केनाल लिंकिंग रोड पर वीरांगना रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस के अवसर पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रानी दुर्गावती का अदम्य साहस, पराक्रम और बलिदान भारतीय इतिहास की अमूल्य धरोहर है। उनका जीवन राष्ट्रप्रेम, स्वाभिमान और मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण का सर्वोच्च उदाहरण है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रानी दुर्गावती का शौर्य और त्याग आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का प्रकाश स्तंभ है। उनकी गौरवगाथा हमें विपरीत परिस्थितियों में भी साहस, आत्मविश्वास और कर्तव्यनिष्ठा के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि समाज द्वारा अपने महान नायकों और गौरवशाली इतिहास का स्मरण करना अत्यंत आवश्यक है। जो समाज अपने इतिहास और विरासत को विस्मृत कर देता है, उसका भविष्य भी संकटग्रस्त हो जाता है, जबकि जो समाज अपने महापुरुषों को कृतज्ञता और सम्मान के साथ याद रखता है, उसका भविष्य सदैव उज्ज्वल होता है। मुख्यमंत्री ने रानी दुर्गावती के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने मुगल साम्राज्य की विशाल सेना के सामने अद्वितीय वीरता का परिचय दिया। अंतिम क्षण तक संघर्ष करते हुए उन्होंने मातृभूमि की रक्षा और स्वाभिमान की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी तथा वीरगति को प्राप्त हुईं। उनका बलिदान भारतीय इतिहास में साहस और स्वाभिमान के अप्रतिम अध्याय के रूप में सदैव स्मरणीय रहेगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश "विकास भी, विरासत भी" के मंत्र पर आगे बढ़ रहा है। विकास की यात्रा तभी सार्थक होती है, जब हम अपनी सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक चेतना और महान विभूतियों के योगदान को भी समान रूप से संरक्षित करें। रानी दुर्गावती ने जिस राष्ट्रचेतना, स्वाभिमान और संघर्ष की भावना का संचार किया, वह आज भी समाज को दिशा प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती का जीवन केवल इतिहास का विषय नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर हमें विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के संकल्प को और अधिक दृढ़ता के साथ आगे बढ़ाना चाहिए। इस अवसर पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप, विधायक पुरंदर मिश्रा, विधायक भूलन सिंह मरावी, डॉ. नंदकुमार साय, रायपुर नगर निगम महापौर श्रीमती मीनल चौबे, छत्तीसगढ़ औषधीय पादप बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम, छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रूप सिंह मंडावी सहित जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।