samacharsecretary.com

सारंगपुर कला में 47.85 लाख, कारेसरा में 59.63 लाख और मड़मड़ा में 48.19 लाख रुपए से बनेगा गौरव पथ

रायपुर नवरात्रि के पावन अवसर पर उप मुख्यमंत्री कवर्धा विधायक  विजय शर्मा ने कबीरधाम जिले के ग्राम सारंगपुर कला, कारेसरा और मड़मड़ा में कुल 1 करोड़ 55 लाख 67 हजार रुपए की लागत से गौरव पथ निर्माण का भूमिपूजन कर ग्रामीणों को विकास की सौगात दी। इसमें ग्राम सारंगपुर कला में 47.85 लाख रुपए, कारेसरा में 59.63 लाख रुपए और मड़मड़ा में 48.19 लाख रुपए की लागत से गौरव पथ का निर्माण किया जाएगा। इन निर्माण कार्यों से तीनों गांवों में सड़क सुविधा बेहतर होगी और ग्रामीणों को आवागमन में सहूलियत मिलेगी। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने मां दुर्गा की पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। उन्होंने ग्राम सारंगपुर कला में 5.20 लाख रुपए की लागत से सीसी रोड निर्माण की घोषणा भी की। गुणवत्ता से समझौता नहीं, टिकाऊ सड़क निर्माण पर जोर उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने अधिकारियों को गौरव पथ निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और टिकाऊपन का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सड़कें ऐसी बननी चाहिए, जो लंबे समय तक चलें और ग्रामीणों को बेहतर आवागमन की सुविधा दें। निर्माण कार्यों में लापरवाही किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने ग्राम बंदौरा की सड़क का उदाहरण देते हुए बताया कि सड़क की खराब स्थिति की शिकायत मिलने पर उन्होंने तत्काल उसे उखाड़कर दोबारा बनाने के निर्देश दिए थे। अगले ही दिन सड़क उखाड़ने की कार्रवाई शुरू हो गई। उन्होंने कहा कि गांव की सड़कों का उपयोग ग्रामीण ही करते हैं, इसलिए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर नजर रखने और किसी भी कमी की जानकारी देने में स्थानीय लोगों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष  ईश्वरी साहू, जिला पंचायत सदस्य  मनीराम साहू, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष  विदेशीराम धुर्वे, जनपद अध्यक्ष   रामकिंकर वर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठकर सुनीं समस्याएं कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने अपने सहज अंदाज में ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठकर उनसे सीधा संवाद किया। उन्होंने लोगों की समस्याएं और मांगें सुनीं तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों को उनके निराकरण के लिए त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने ग्राम सारंगपुर कला में 5.20 लाख रुपये की लागत से सीसी रोड निर्माण की घोषणा की। ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी जरूरतों को सुनने और संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश देने से जनसमस्याओं के समाधान पर जोर दिया गया। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि नई सरकार के गठन के बाद प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 12 लाख से अधिक आवासों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। इसके साथ ही पात्र परिवारों को आवास का लाभ दिलाने के लिए सर्वे सूची के अनुसार आगे की प्रक्रिया जारी रहेगी। बस्तर में विकास और पर्यावरण संरक्षण पर जोर उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने बस्तर के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह के मार्गदर्शन में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान चलाया गया, जिसमें सफलता मिली है। बस्तर में पेड़ों की कटाई और बड़ी खनन परियोजनाओं को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं पर उन्होंने कहा कि इन विषयों पर लोगों के बीच भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति देखें। साथ ही उन्होंने जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।

तकनीक से सुगम होगा न्याय, विधि से सुनिश्चित होगी निष्पक्षता; दुर्ग कोर्ट में विधिक संगोष्ठी आयोजित

रायपुर : तकनीक से सुगम न्याय, विधि से सुनिश्चित निष्पक्षता: दुर्ग जिला न्यायालय में ‘न्याय श्रुति नियम, 2025’ पर विधिक संगोष्ठी एवं डिजिटल साक्ष्य प्रदर्शनी आयोजित तकनीक से सुगम न्याय, विधि से सुनिश्चित निष्पक्षता: दुर्ग जिला न्यायालय में ‘न्याय श्रुति नियम, 2025’ पर विधिक संगोष्ठी एवं डिजिटल साक्ष्य प्रदर्शनी आयोजित रायपुर  न्याय की राह में दूरियाँ कम हो रही हैं और तकनीक न्यायिक प्रक्रिया को नए आयाम दे रही है। अब ऑडियो-वीडियो माध्यमों से साक्ष्य दर्ज करने से लेकर डिजिटल साक्ष्यों के महत्व को समझने तक, न्याय व्यवस्था में तकनीक की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। ऐसे में तकनीक का उपयोग केवल सुविधाजनक ही नहीं, बल्कि विधिसम्मत, निष्पक्ष और विश्वसनीय होना भी आवश्यक है।        इसी दृष्टिकोण को केंद्र में रखते हुए जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग में 16 अक्टूबर को “ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से न्यायिक कार्यवाही एवं न्याय श्रुति नियम, 2025 का विधिक एवं व्यावहारिक परिप्रेक्ष्य” विषय पर विधिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में न्यायिक कार्यवाही के आधुनिक स्वरूप, साक्ष्य की प्रक्रिया और तकनीकी साधनों के विधिसम्मत उपयोग पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम के साथ ई-साक्ष्य एवं डिजिटल साक्ष्यों से संबंधित प्रदर्शनी भी आयोजित की गई, जिसने आयोजन को व्यावहारिक और ज्ञानवर्धक स्वरूप प्रदान किया। ’न्यायालय की सीमाओं से परे साक्ष्य, लेकिन विधि के दायरे में’      प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री के. विनोद कुजूर तथा प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय, दुर्ग श्रीमती सुमन एक्का की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित संगोष्ठी में द्वितीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश श्री प्रशांत पराशर ने ‘न्याय श्रुति नियम, 2025’ के प्रमुख प्रावधानों और उनके व्यावहारिक क्रियान्वयन पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम का अभिभाषण प्रथम व्यवहार न्यायाधीश, कनिष्ठ श्रेणी, दुर्ग कु. दीपांशी जैन द्वारा प्रस्तुत किया गया। संगोष्ठी में इस बात पर बल दिया गया कि आधुनिक तकनीक न्यायिक कार्यवाही को अधिक सुगम और समयबद्ध बनाने में सहायक हो सकती है, लेकिन इसका प्रभावी उपयोग तभी संभव है, जब विधिक प्रावधानों का पालन करते हुए साक्ष्य की विश्वसनीयता और न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए। ’ई-साक्ष्य एवं डिजिटल साक्ष्यों की प्रदर्शनी : तकनीक को समझने का व्यावहारिक माध्यम’       संगोष्ठी का एक महत्वपूर्ण आकर्षण प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा आयोजित ई-साक्ष्य की प्रक्रिया एवं डिजिटल साक्ष्यों से संबंधित प्रदर्शनी रही। प्रदर्शनी का उद्देश्य डिजिटल साक्ष्यों की प्रक्रिया, उनके महत्व और न्यायिक कार्यवाही में उनकी प्रासंगिकता के प्रति समझ विकसित करना था। इस पहल ने संगोष्ठी की विषयवस्तु को व्यावहारिक आयाम प्रदान किया। जहाँ संगोष्ठी में नियमों और प्रक्रियाओं की विधिक व्याख्या की गई, वहीं प्रदर्शनी के माध्यम से ई-साक्ष्य एवं डिजिटल साक्ष्यों से संबंधित जानकारी को एक अलग और सहज स्वरूप में प्रस्तुत किया गया। इस प्रकार न्यायिक तकनीक से जुड़े विषयों को केवल सैद्धांतिक चर्चा तक सीमित न रखते हुए, उन्हें प्रत्यक्ष जानकारी और जागरूकता से जोड़ने का प्रयास किया गया। ’विधिक जागरूकता में नवाचार: रंगोली ने भी बढ़ाई आयोजन की गरिमा’      कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा आकर्षक रंगोली का निर्माण कराया गया। रंगोली ने आयोजन को रचनात्मक स्वरूप प्रदान करने के साथ उसकी शोभा भी बढ़ाई। विधिक संगोष्ठी, डिजिटल साक्ष्य प्रदर्शनी और कलात्मक प्रस्तुति का यह समन्वय दर्शाता है कि विधिक जागरूकता को प्रभावी बनाने के लिए पारंपरिक और आधुनिक, दोनों प्रकार के माध्यम उपयोगी हो सकते हैं। ’न्यायिक प्रक्रिया में तकनीक और संस्थागत समन्वय पर जोर’      कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारीगण के अतिरिक्त उप संचालक अभियोजन श्री भीम सिंह राजपूत, दुर्ग बार एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री रमेश शर्मा, सचिव श्री रविशंकर सिंह तथा जेल अधीक्षक श्री मनीष संभाकर सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों की सहभागिता ने न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े पक्षों के बीच समन्वय और साझा समझ के महत्व को रेखांकित किया। संगोष्ठी का उद्देश्य न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, अभियोजन पक्ष तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों को ‘न्याय श्रुति नियम, 2025’ के प्रावधानों और ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से न्यायिक कार्यवाही के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराना था।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन में संवेदनशील शासन, पारदर्शी व्यवस्था और जनभागीदारी से मजबूत हो रहा जनता का विश्वास

रायपुर  लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति जनता का विश्वास है और सुशासन उस विश्वास को मजबूत करने का सबसे प्रभावी माध्यम। जब शासन की योजनाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती हैं, समस्याओं का समयबद्ध समाधान होता है और आम नागरिक को अपने अधिकारों एवं सुविधाओं के लिए अनावश्यक भटकना नहीं पड़ता, तभी सुशासन की अवधारणा सार्थक होती है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में इसी भावना के अनुरूप संवेदनशील, पारदर्शी और जनोन्मुखी प्रशासन को प्राथमिकता दी जा रही है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास‘ के मूलमंत्र को आत्मसात करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। शासन की कार्यप्रणाली को अधिक सरल, सुलभ और जवाबदेह बनाने के प्रयासों से प्रशासन और आम नागरिकों के बीच संवाद तथा विश्वास का नया वातावरण विकसित हो रहा है। सुशासन की पहली शर्त है कि आम नागरिक की बात सुनी जाए और उसकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी पहल हो। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने जनसमस्याओं के निराकरण को शासन की प्राथमिकताओं में स्थान दिया है। नागरिकों को अपनी समस्याएं, शिकायतें और सुझाव सीधे शासन-प्रशासन के समक्ष रखने का अवसर मिल रहा है। जिला और विकासखंड स्तर पर आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर भी प्रशासन को नागरिकों के निकट लाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहे हैं। इन शिविरों में विभिन्न विभागों की सेवाओं और योजनाओं की जानकारी देने के साथ पात्र हितग्राहियों को लाभान्वित करने तथा प्राप्त आवेदनों के निराकरण की दिशा में कार्य किया जा रहा है। डिजिटल सुशासन से आसान हो रही शासकीय सेवाएं बदलते समय में तकनीक सुशासन का सशक्त आधार बनकर उभरी है। छत्तीसगढ़ में डिजिटल माध्यमों से शासकीय सेवाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। सेवा सेतु पोर्टल और डिजिटल सेवा केंद्रों के माध्यम से नागरिकों को विभिन्न विभागों की सेवाओं के लिए आवेदन करने और प्रक्रियाओं की जानकारी प्राप्त करने की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इससे विशेष रूप से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों के लिए शासकीय सेवाओं तक पहुंच आसान बनाने में सहायता मिल रही है। डिजिटल व्यवस्थाओं का महत्व केवल ऑनलाइन आवेदन तक सीमित नहीं है। इनका उद्देश्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाना, अनावश्यक विलंब कम करना और नागरिकों को सेवाओं की स्थिति की जानकारी उपलब्ध कराना भी है। तकनीक आधारित प्रशासन से शासन और जनता के बीच विश्वास का संबंध और अधिक मजबूत करने की संभावनाएं बढ़ी हैं। अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना सर्वाेच्च प्राथमिकता मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार गरीबों, किसानों, महिलाओं, युवाओं, श्रमिकों और जनजातीय समुदायों के कल्याण को विशेष प्राथमिकता दे रही है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। यह सहायता घरेलू आवश्यकताओं, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और छोटी बचत जैसे कार्यों में महिलाओं के लिए उपयोगी साबित हो रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों के पक्के घर का सपना साकार करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। किसानों के लिए संचालित योजनाएं, स्वास्थ्य सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका से जुड़ी पहलें भी नागरिकों के जीवन में आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा का आधार बन रही हैं। इन योजनाओं की वास्तविक सफलता उन परिवारों के जीवन में दिखाई देती है, जिन्हें शासन की सहायता से अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने और बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। शिकायत निवारण से जवाबदेह प्रशासन की ओर सुशासन का अर्थ केवल योजनाओं का संचालन नहीं, बल्कि नागरिकों की शिकायतों को गंभीरता से सुनना और उनका समाधान सुनिश्चित करना भी है। इसी दिशा में सीएम हेल्पलाइन 1076 नागरिकों को शिकायत दर्ज कराने और उसके निराकरण की स्थिति जानने का माध्यम उपलब्ध कराती है। नगरीय क्षेत्रों में निदान-1100 के माध्यम से साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों के समाधान की व्यवस्था विकसित की गई है। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य शिकायत निवारण में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। जब नागरिक अपनी समस्या दर्ज कराने के साथ उसकी प्रगति भी जान सकते हैं, तब प्रशासन के प्रति उनका भरोसा मजबूत होता है। गांव से शहर तक विकास, हर वर्ग के कल्याण का प्रयास छत्तीसगढ़ की बड़ी आबादी ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में निवास करती है। इसलिए सुशासन की सफलता का महत्वपूर्ण आधार दूरस्थ अंचलों तक शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, बिजली और अन्य आवश्यक सुविधाओं की पहुंच है। राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण विकास, जनजातीय कल्याण, महिला सशक्तिकरण और आजीविका संवर्धन से जुड़ी योजनाओं के माध्यम से विकास को अधिक समावेशी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। विशेष रूप से बस्तर और सरगुजा जैसे अंचलों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार तथा स्थानीय समुदायों के सशक्तिकरण का महत्व और भी बढ़ जाता है। सुशासन की वास्तविक पहचान तब बनती है, जब दूरस्थ गांव में रहने वाले नागरिक को भी वही सम्मान, सुविधा और अवसर प्राप्त हों, जो शहरों में उपलब्ध हैं। जनभागीदारी से मजबूत होता सुशासन का संकल्प प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर छत्तीसगढ़ में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक आयोजित सेवा संकल्प अभियान ने जनसेवा और जनभागीदारी की भावना को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान किया। अभियान के अंतर्गत सेवा सेतु, सेवा की कहानी, सेवा मेरा योगदान और सुशासन सेवा संवाद जैसी पहलों ने नागरिकों को शासन की सेवाओं, जनकल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ने का संदेश दिया। सुशासन केवल सरकार और प्रशासन के प्रयासों से नहीं, बल्कि जागरूक नागरिकों की सक्रिय सहभागिता से भी मजबूत होता है। नागरिकों के सुझाव, सामाजिक सहयोग और जनहित के कार्यों में भागीदारी विकास की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाते हैं। सुशासन का वास्तविक अर्थ है हर नागरिक के जीवन में सकारात्मक बदलाव मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में सुशासन को जनसेवा, संवेदनशीलता और जवाबदेही से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। योजनाओं की प्रभावशीलता, शिकायतों का समयबद्ध समाधान और नागरिकों की संतुष्टि ही इन प्रयासों की वास्तविक कसौटी होगी। सुशासन का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें गरीब को सम्मान, किसान को संबल, महिलाओं को सुरक्षा, युवाओं को अवसर और … Read more

सरगुजा के बच्चों में भी देश में पहचान बनाने की प्रतिभा: मंत्री राजेश अग्रवाल

प्रतिभा बड़े शहरों की मोहताज नहीं, सही अवसर और मार्गदर्शन मिले तो सरगुजा का बच्चा भी देश में बना सकता है अपनी अलग पहचान: मंत्री राजेश अग्रवाल मंत्री राजेश अग्रवाल ने सरगुजा जिले के 35 शासकीय स्कूलों में नीट एवं जेईई की निःशुल्क लाइव ऑनलाइन कोचिंग का किया शुभारंभ सरगुजा के 2,120 विद्यार्थियों को दो वर्षों तक मिलेगी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की गुणवत्तापूर्ण कोचिंग आधुनिक स्मार्ट क्लासरूम, विशेषज्ञ शिक्षकों और एआई आधारित तकनीक से संवरेंगे विद्यार्थियों के सपने रायपुर  सरगुजा जिले के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के डॉक्टर और इंजीनियर बनने के सपनों को साकार करने की दिशा में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल की गई है। अब जिले के शासकीय विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को नीट एवं जेईई जैसी प्रतिष्ठित राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बड़े शहरों की ओर रुख करने की आवश्यकता कम होगी। उन्हें अपने विद्यालयों में ही आधुनिक स्मार्ट क्लासरूम, विषय विशेषज्ञ शिक्षकों और नवीनतम डिजिटल तकनीक के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण कोचिंग की सुविधा मिलेगी। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने शनिवार को जिला कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आयोजित कार्यक्रम में सरगुजा जिले के 35 शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में नीट एवं जेईई की निःशुल्क लाइव ऑनलाइन कोचिंग का शुभारंभ किया। जिला खनिज संस्थान न्यास एवं स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी परियोजना से लगभग 2,120 विद्यार्थियों को दो वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर मिलेगा। यह पहल विशेष रूप से उन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी, जो आर्थिक एवं भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बड़े शहरों में जाकर महंगी कोचिंग प्राप्त नहीं कर पाते। अब सरगुजा के विद्यार्थियों को अपने ही विद्यालय में राष्ट्रीय स्तर के शिक्षकों से पढ़ने, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने और अपनी प्रतिभा को निखारने का अवसर प्राप्त होगा। यह केवल कोचिंग की शुरुआत नहीं, बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव है: मंत्री अग्रवाल कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि यह केवल एक शैक्षणिक परियोजना का शुभारंभ नहीं, बल्कि सरगुजा के हजारों बच्चों के सपनों को नई उड़ान देने का संकल्प है। शिक्षा ही वह सशक्त माध्यम है, जिससे समाज और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य संवारा जा सकता है। हमारा प्रयास है कि सरगुजा का कोई भी प्रतिभाशाली विद्यार्थी केवल संसाधनों और आर्थिक परिस्थितियों के अभाव में अपने सपनों से वंचित न रहे। मंत्री अग्रवाल ने कहा कि शासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को नीट और जेईई जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर संसाधन एवं गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है। इस पहल से विद्यार्थियों को विषय विशेषज्ञों का मार्गदर्शन मिलेगा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में आने वाली आर्थिक एवं शैक्षणिक कठिनाइयों को कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती। सही अवसर, उचित मार्गदर्शन और कठिन परिश्रम करने का हौसला हो तो सरगुजा का बच्चा भी देश में अपनी अलग पहचान बना सकता है। आवश्यकता केवल इस बात की है कि बच्चों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए समान अवसर और उचित संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। बड़े सपने देखिए, पूरी मेहनत से उन्हें साकार कीजिए और सरगुजा का नाम रोशन कीजिए: मंत्री अग्रवाल मंत्री अग्रवाल ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए लक्ष्य निर्धारित करना, अनुशासन बनाए रखना और निरंतर मेहनत करना आवश्यक है। पढ़ाई के साथ अच्छा व्यवहार और सकारात्मक सोच  सफलता की महत्वपूर्ण आधारशिला है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आप बड़े सपने देखिए, उन्हें पूरा करने के लिए पूरी लगन से मेहनत कीजिए और सफलता हासिल कर अपने माता-पिता, विद्यालय, सरगुजा तथा छत्तीसगढ़ का नाम रोशन कीजिए। उन्होंने विद्यालयों के प्राचार्यों को निर्देशित किया कि ऑनलाइन कोचिंग में विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए और अभिभावकों को भी बच्चों की पढ़ाई के प्रति जागरूक एवं प्रेरित किया जाए।  35 स्कूलों के 2,120 विद्यार्थियों को मिलेगा दो वर्षों तक विशेषज्ञ शिक्षकों का मार्गदर्शन परियोजना के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2026-27 एवं 2027-28 के दौरान कक्षा 11वीं विज्ञान संकाय के लगभग 2,120 विद्यार्थियों को दो वर्षों तक लाइव ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराई जाएगी। गणित समूह के विद्यार्थी जेईई तथा जीव विज्ञान समूह के विद्यार्थी नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकेंगे। कोचिंग का संचालन फिजिक्स वाला लिमिटेड द्वारा किया जाएगा। जिले के सभी 35 चयनित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में एक साथ लाइव टू-वे इंटरैक्टिव कक्षाएं संचालित होंगी। हिंदी एवं अंग्रेजी के मिश्रित माध्यम में आयोजित होने वाली इन कक्षाओं में विद्यार्थी विषय विशेषज्ञ शिक्षकों से सीधे संवाद कर अपनी शंकाओं का समाधान भी प्राप्त कर सकेंगे। विद्यार्थियों को लाइव कक्षाओं के साथ रिकॉर्डेड लेक्चर, मोबाइल ऐप, लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम, क्लास नोट्स, मुद्रित अध्ययन सामग्री, प्रश्न बैंक, ऑनलाइन मॉक टेस्ट और ऑल इंडिया टेस्ट सीरीज जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।  एआई तकनीक से होगी विद्यार्थियों की प्रगति की निगरानी, स्मार्ट क्लासरूम में मिलेगी आधुनिक शिक्षा परियोजना की विशेषता यह है कि इसमें विद्यार्थियों की पढ़ाई और प्रदर्शन के आकलन के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा। एआई आधारित लर्निंग एनालिटिक्स, प्रदर्शन ट्रैकिंग तथा अभिभावक रिपोर्टिंग डैशबोर्ड के माध्यम से विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति की निगरानी की जाएगी। सभी चयनित विद्यालयों में आधुनिक स्मार्ट क्लासरूम की व्यवस्था की गई है। इनमें 75 इंच के 4के इंटरैक्टिव फ्लैट पैनल, कंप्यूटर सिस्टम, वायरलेस माइक्रोफोन, एचडी वेब कैमरा, स्पीकर सिस्टम और कम से कम तीन घंटे के पावर बैकअप की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। कार्यक्रम में सांसद चिंतामणि महाराज ने कहा कि कमजोर आर्थिक परिस्थितियों के कारण अनेक प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आवश्यक मार्गदर्शन नहीं मिल पाता। ऐसे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की यह पहल सराहनीय है। उन्होंने विद्यार्थियों को कड़ी मेहनत और लगन से सफलता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। लुण्ड्रा विधायक प्रबोध मिंज ने कहा कि युवाओं के भविष्य को संवारने की दिशा में यह अत्यंत महत्वपूर्ण परियोजना है। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में अपनी पूरी क्षमता का उपयोग करने का आह्वान किया। राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर ने कहा कि यह पहल सरगुजा जिले … Read more

बिना ठोस टिप्पणी के शिकायतें बंद करने पर कार्रवाई, PWD के 13 अधिकारियों से मांगा जवाब

सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों के निराकरण को लेकर शासन गंभीर शिकायतों को बिना सारगर्भित टीप के बंद किए जाने पर पीडब्लूडी के 13 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस विभाग ने 15 दिनों में मांगा जवाब   रायपुर नागरिकों द्वारा सीएम हेल्पलाइन-1076 पर दर्ज कराई गई शिकायतों के समाधान को लेकर राज्य शासन बेहद गंभीर है। पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का संबंधित विभागों द्वारा सक्रियता और गंभीरता से निराकरण किया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग ने सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों के असंतोषप्रद समाधान और लापरवाही पर 13 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इनमें तीन अधीक्षण अभियंता, पांच कार्यपालन अभियंता और पांच अनुविभागीय अधिकारी शामिल हैं। सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों को बिना सारगर्भित टीप के बंद किए जाने के कारण लोक निर्माण विभाग द्वारा अधिकारियों के विरुद्ध ये कार्रवाई की गई है। सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर विगत दो महीनों अगस्त और सितम्बर माह में लोक निर्माण विभाग से संबंधित शिकायतों की समीक्षा में पाया गया कि एल-1, एल-2 और एल-3 स्तर पर शिकायतों को ऐसी टीप के साथ बंद किया गया है, जो शिकायत का समाधान नहीं दर्शाती है। विभाग ने एल-1 स्तर पर शिकायतों के असंतोषप्रद समाधान पर राष्ट्रीय राजमार्ग उप संभाग बिलासपुर के अनुविभागीय अधिकारी श्री अतुल राज पेगवार, बेमेतरा उप संभाग के अनुविभागीय अधिकारी श्री राजेश कुमार बाजपेयी, पेंड्रा उप संभाग के अनुविभागीय अधिकारी श्री जगदीश प्रसाद, सेतु उप संभाग दुर्ग के अनुविभागीय अधिकारी श्री अशोक कुमार हरियाले और पाटन उप संभाग की अनुविभागीय अधिकारी श्रीमती सोनल ढालेन्द्र को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। एल-2 स्तर पर शिकायतों के उचित निराकरण नहीं होने पर विभाग द्वारा बेमेतरा संभाग के कार्यपालन अभियंता श्री केशव प्रसाद लहरे, कोरबा संभाग के कार्यपालन अभियंता श्री घासीराम जांगड़े, राष्ट्रीय राजमार्ग संभाग बिलासपुर के कार्यपालन अभियंता श्री रोशन कुमार साहू, सारंगढ़ संभाग के कार्यपालन अभियंता श्री प्यारे लाल पैकरा और कांकेर संभाग की कार्यपालन अभियंता श्रीमती प्रज्ञा नंद को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।  इसी प्रकार से सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों को एल-3 स्तर पर बिना सारगर्भित टीप के बंद किए जाने पर मंडल क्रमांक-2, रायपुर के अधीक्षण अभियंता श्री डी.के. नेताम, दुर्ग मंडल की अधीक्षण अभियंता श्रीमती अर्पणा चौरपगार तथा राष्ट्रीय राजमार्ग मंडल बिलासपुर के अधीक्षण अभियंता श्री महादेव लहरे को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। राज्य शासन ने इन अधिकारियों को जारी कारण बताओ नोटिस में कहा है कि शिकायत बंद करते समय यह अपेक्षित है कि टीप में स्थल निरीक्षण के निष्कर्ष, की गई या प्रस्तावित कार्यवाही, उसकी तिथि या समय-सीमा एवं शिकायतकर्ता को दी गई सूचना का स्पष्ट उल्लेख हो। यदि शिकायत अन्य विभाग से संबंधित हो तो उसका कारण सहित उल्लेख हो। ऐसा नहीं पाए जाने पर टीप से नागरिकों की समस्या का निराकरण नहीं हुआ तथा पोर्टल पर निराकरण के आँकड़े भ्रामक हुए।  लोक निर्माण विभाग ने इसे कर्त्तव्य पालन में लापरवाही और पदीय कर्त्तव्यों का सही ढंग से निर्वहन नहीं किया जाना मानते हुए संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अधिकारियों को अपना लिखित प्रतिवाद नोटिस मिलने के 15 दिनों की समयावधि में लोक निर्माण विभाग के सचिव को प्रस्तुत करने कहा गया है। लिखित प्रतिवाद निर्धारित समयावधि में प्राप्त नहीं होने पर अधिकारियों के विरूद्ध एकपक्षीय कार्यवाही की जाएगी।

बस्तर के विकास पर अमित शाह का जोर, नक्सलवाद के बाद अब इन चुनौतियों पर रहेगा फोकस

रायपुर  छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद खत्म हो गया है। नक्सलवाद के खात्मे के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बस्तर को लेकर नया प्लान बनाया है। अमित शाह ने कहा कि सरकार नक्सलवाद के शेष निशानों को खत्म करने और बस्तर को एक शांतिपूर्ण तथा समृद्ध क्षेत्र के रूप में बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में बुनियादी ढांचे और सुविधाओं को बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शासन प्रमुख के तौर पर 25 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में ‘सेवा संकल्प अभियान’ का आयोजन किया गया था। गुरुवार को दिव्यांग के लिए सहायक उपकरणों के वितरण समारोह को अमित शाह ने वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि केवल नक्सलवाद के खत्म होने से “पांच दशकों की पीड़ा” नहीं मिटेगी। पीड़ा का दूर करना सरकार की जिम्मेदारी अमित शाह ने कहा नक्सलवाद को खत्म करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पांच दशकों में इसके कारण लोगों को जो पीड़ा झेलनी पड़ी है, उसे दूर करना भी सरकार की जिम्मेदारी है। इसका सबसे अधिक असर क्षेत्र के गरीब आदिवासी समुदायों पर पड़ा है। शाह ने कहा कि नक्सलवाद ने बस्तर के गरीब आदिवासी समुदायों को बहुत अधिक पीड़ा पहुंचाई है। उन्होंने कहा, “हमें इस पीड़ा से मिले घावों को भरना होगा, पीड़ितों को फिर से अपने पैरों पर खड़े होने में मदद करनी होगी, और यह सुनिश्चित करना होगा कि वे गरिमा और सम्मान के साथ जी सकें।” ‘नियाद नेल्लनार’ योजना के तहत बस्तर में बुनियादी ढांचे के विस्तार और जरूरी सेवाएं पहुंचाने के लिए काफी प्रयास किए गए हैं। उन्होंने कहा, “बस्तर क्षेत्र के पारंपरिक आदिवासी नेतृत्व ने भी इसमें बड़ा योगदान दिया है।” पुनर्वास के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए नक्सलियों के पुनर्वास और प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि लगभग 8,526 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। उन्होंने बताया कि 7,328 ऐसे लोगों के बैंक खाते खुलवाए गए जिनके पास खाते नहीं थे जबकि 1,620 लोगों को इनाम की राशि दी गई। उन्होंने कहा कि 7,882 लोगों को प्रोत्साहन राशि दी गई, 455 लोगों को रोजगार मिला और 129 लोगों को जमीन आवंटित की गई। पीएम आवास का मिला लाभ इसके अलावा, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 4014 लाभार्थियों को घर मिले हैं, और 2308 से अधिक आदिवासी लोगों ने कौशल विकास प्रशिक्षण प्राप्त किया है। 6,763 नए राशन कार्ड जारी किए गए हैं, 2,808 परिवारों को मुफ्त बिजली दी गई है, और 372 नयी सड़क परियोजनाओं पर काम शुरू हो गया है। 670 छोटे पुलों का निर्माण कार्य चल रहा है, 48,526 लोगों को आधार कार्ड जारी किए गए हैं, और 44 ग्राम पंचायतों को ‘इलवाड पंचायत पुरस्कार’ के तहत मान्यता दी गई है। सुरक्षा शिविरों को बदला जा रहा है गृह मंत्री ने बताया कि 500 ​​से अधिक सुरक्षा शिविर स्थापित किए गए हैं, जिनमें से 200 से ज्यादा शिविरों को ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ में बदल दिया जाएगा। जिन स्थानों पर कभी हमारे सुरक्षाकर्मी आपकी रक्षा के लिए बैठते थे, अब वहीं भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार के अधिकारी विकसित बस्तर की नींव रखेंगे। ये सार्वजनिक सेवा केंद्र सरकार को विकसित बस्तर के अपने दृष्टिकोण को साकार करने में मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि इन केंद्रों से बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा संबंधी जरूरतों, युवाओं के रोजगार से जुड़े मुद्दों तथा आदिवासी समुदायों की आर्थिक आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलेगी।

CG में कैबिनेट विस्तार की तैयारी? हर संभाग से एक मंत्री बनाने की चर्चा

रायपुर छत्तीसगढ़ की सियासत में एक बार फिर से मंत्रिमंडल के विस्तार की अटकलें लग रही है। दावा किया जा रहा है कि प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी के दौरे के बाद फेरबदल की स्थिति साफ हो जाएगी। पिछले सात-आठ महीनों से रायपुर से लेकर दिल्ली तक इस तरह की अटकलें रुक-रुक कर सामने आती रही हैं। सूत्रों के अनुसार, मंत्रिमंडल में फेरबदल के पीछे मुख्य रूप से क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को साधना है। फेरबदल में हर संभाग से एक मंत्री बनाने की अटकलें लग रही हैं। सरगुजा संभाग से कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभागों में बदलाव या फेरबदल की चर्चाएं सबसे आगे हैं। वहीं, आदिवासी बहुल बस्तर संभाग से दो नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावना है। सियासी अटकलें तेज सूत्रों के अनुसार, बिलासपुर और अन्य मैदानी संभागों में भी क्षेत्रीय व सामाजिक समीकरणों को साधने के लिए नए चेहरों को मौका मिलने और कुछ मौजूदा मंत्रियों की विदाई या विभागों की अदला-बदली की अटकलें बाजार में गर्म हैं। केंद्र में इस बात पर भी जोर है कि सरकार और संगठन के बीच तालमेल को बेहतर करने के लिए कुछ पुराने और अनुभवी चेहरों की दोबारा वापसी हो सकती है। संघ पृष्ठभूमि और प्रशासनिक अनुभव रखने वाले नेताओं को लेकर राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट बनी हुई है। इसके साथ ही कुछ नए विधायकों को भी मंत्रिमंडल में जगह मिलने की बातें कही जा रही हैं। हालांकि, ये तमाम बातें फिलहाल राजनीतिक सूत्रों, अंदरखाने की चर्चाओं और कयासों पर ही आधारित हैं। आधिकारिक तौर पर इस संबंध में कोई घोषणा नहीं की गई है। चार नेताओं के नाम की चर्चा इन तमाम चर्चाओं के बीच संभावित चेहरों और नामों को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है। जानकारों के अनुसार, जिन चार नए और संभावित चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल करने की अटकलें लगाई जा रही हैं, वे अलग-अलग संभागों से आते हैं। इसके साथ ही, पूर्व मंत्री और अनुभवी नेताओं को मौका दिने की बात कही जा रही है। 25 अक्टूबर को पहुंचेंगी स्मृति ईरानी भाजपा की नवनियुक्त प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी का 25 अक्टूबर से दो दिवसीय दौरान प्रस्तावित है। स्मृति ईरानी के दौरे से पहले कैबिनेट में फेरबदल की चर्चा को अहम माना जा रहा है। स्मृति ईरानी अपने छत्तीसगढ़ दौरे में राजधानी रायपुर के कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में मुख्यमंत्री, मंत्रियों, पार्टी पदाधिकारियों और वरिष्ठ नेताओं के साथ मैराथन बैठकें करेंगी।

किसानों के लिए बड़ी खबर! छत्तीसगढ़ सरकार ने धान खरीदी को लेकर शुरू की तैयारी

रायपुर  छत्तीसगढ़ में धान खरीदी को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। सरकार ने भी धान खरीदी को लेकर तैयारियां शुरू कर दी है। शुक्रवार को खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री दयाल दास बघेल ने अधिकारियों के साथ अहम बैठक की। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आगामी धान खरीदी के दौरान किसानों की सुविधा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसानों को पंजीयन और टोकन प्राप्त करने से लेकर खरीदी केंद्र में धान विक्रय तक किसी भी स्तर पर परेशानी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए सभी आवश्यक तैयारियां समय रहते पूरी कर ली जाएं। उन्होंने अधिकारियों को धान खरीदी केंद्रों में बारदाना, इलेक्ट्रॉनिक तौल, बिजली, पेयजल सहित किसानों की सुविधा से जुड़ी सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। खरीदी शुरू होने से पहले दूर करें कमियां विभागीय समीक्षा बैठक में आगामी खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान खरीदी की तैयारियों, कस्टम मिलिंग, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, खाद्यान्न भंडारण एवं परिवहन सहित विभागीय योजनाओं और गतिविधियों की विस्तार से समीक्षा की गई। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि धान खरीदी की पूरी प्रक्रिया व्यवस्थित, पारदर्शी और किसान हितैषी होनी चाहिए। खरीदी शुरू होने से पहले सभी केंद्रों में आवश्यक संसाधनों और सुविधाओं की उपलब्धता का परीक्षण कर कमियों को दूर किया जाए। किसानों की सुविधा का रखें विशेष ध्यान मंत्री ने कहा कि खरीदी केंद्र तक पहुंचने वाले किसान को अनावश्यक प्रतीक्षा अथवा असुविधा का सामना नहीं करना पड़े। टोकन व्यवस्था सुचारु रखी जाए और किसानों को प्रक्रिया से जुड़ी जरूरी जानकारी समय पर उपलब्ध कराई जाए। धान खरीदी से जुड़े अधिकारी अपने-अपने स्तर पर तैयारियों की नियमित समीक्षा करें और किसी भी समस्या का तत्काल समाधान सुनिश्चित करें। उन्होंने खरीदी केंद्रों में पर्याप्त मात्रा में बारदानों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि बारदाने की कमी के कारण खरीदी प्रभावित नहीं होनी चाहिए। नए धान खरीदी केंद्रों में इलेक्ट्रॉनिक माप-तौल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही सभी केंद्रों में बिजली, पेयजल एवं अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध रहें। धान का उठाव भी सही समय पर हो खाद्य मंत्री ने कस्टम मिलिंग की स्थिति की समीक्षा करते हुए इसमें तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों अथवा केंद्रों में धान के उठाव या कस्टम मिलिंग से संबंधित समस्या सामने आ रही है, वहां वास्तविक स्थिति का आकलन कर समयबद्ध समाधान किया जाए। धान खरीदी, उठाव और कस्टम मिलिंग के बीच बेहतर समन्वय रखा जाए, जिससे पूरी व्यवस्था निर्बाध रूप से संचालित हो सके।

रेल यात्रियों के लिए खुशखबरी! छत्तीसगढ़ में चलेंगी 3 नई मेमू ट्रेनें

रायपुर  भारतीय रेलवे ने छत्तीसगढ़ में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने और यात्रियों की सुविधा के लिए तीन नई मेमू (MEMU) ट्रेनों के संचालन को स्वीकृति प्रदान कर दी है. इस फैसले की आधिकारिक जानकारी केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल को पत्र भेजकर दी।  इन नई सेवाओं में रायपुर-रावघाट मेमू (68768/68769) के साथ-साथ रायपुर और कुरुद के मध्य दो अलग-अलग मेमू ट्रेनें (68772/68771 एवं 68774/68773) शामिल हैं।  रायपुर से कुरुद और रावघाट के मुख्य मार्गों पर मेमू ट्रेनों के शुरू होने से दैनिक यात्रियों, नौकरीपेशा वर्ग, विद्यार्थियों, व्यापारियों और किसानों को आवागमन में सीधी और तीव्र सुविधा प्राप्त होगी. इसके अतिरिक्त, दूर-दराज के इलाकों से इलाज के लिए राजधानी रायपुर आने वाले मरीजों का सफर भी बेहद आसान और किफायती हो जाएगा।  इन ट्रेनों के चलने से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि क्षेत्र के व्यापारिक और सामाजिक ताने-बाने को भी मजबूती मिलेगी।  रेलवे द्वारा दी गई इस बड़ी राहत पर खुशी व्यक्त करते हुए सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने बताया कि वे लंबे समय से क्षेत्रवासियों के लिए बेहतर, सुरक्षित और किफायती परिवहन सेवाओं के विस्तार हेतु प्रयासरत थे।  उन्होंने इस जनहितकारी पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति आभार जताया. सांसद ने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य में बुनियादी ढांचे और रेल तंत्र के आधुनिक विस्तार को अभूतपूर्व गति मिल रही है।   

CG School Holiday: छत्तीसगढ़ में दीपावली की छुट्टी 6 दिन की, शिक्षा विभाग ने जारी किया नया आदेश

छत्तीसगढ़ में दीपावली अवकाश अब 6 दिन का, स्कूल शिक्षा विभाग ने जारी किया संशोधित आदेश प्रदेश के स्कूलों में 6 से 11 नवंबर तक रहेगा दीपावली अवकाश रायपुर छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षण सत्र 2026-27 के लिए पूर्व में घोषित दीपावली अवकाश में आंशिक संशोधन करते हुए अब कुल 6 दिनों का अवकाश घोषित किया है। संशोधित आदेश के अनुसार प्रदेश के शासकीय, अनुदान प्राप्त एवं गैर अनुदान प्राप्त स्कूलों तथा डी.एड., बी.एड., एम.एड. महाविद्यालयों में 6 नवंबर से 11 नवंबर 2026 तक दीपावली अवकाश रहेगा। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 16 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश के अनुसार पूर्व में 21 सितंबर 2026 को जारी शैक्षणिक कैलेंडर में दीपावली अवकाश 6 नवंबर से 10 नवंबर 2026 तक कुल 5 दिनों के लिए निर्धारित किया गया था। राज्य शासन ने उक्त आदेश में आंशिक संशोधन करते हुए दीपावली अवकाश की अवधि एक दिन बढ़ाकर 11 नवंबर 2026 तक कर दी है।इस निर्णय से प्रदेश के विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं शैक्षणिक संस्थानों को दीपावली पर्व के अवसर पर एक अतिरिक्त दिन का अवकाश मिलेगा। अब 6 से 11 नवंबर तक रहेगा दीपावली अवकाश स्कूल शिक्षा विभाग के संशोधित निर्णय के अनुसार, प्रदेश के स्कूलों में दीपावली की छुट्टियां अब 6 नवंबर से 11 नवंबर तक रहेंगी। इससे विद्यार्थियों को लगातार छह दिन का अवकाश मिलेगा। छुट्टी बढ़ने से त्योहार के दौरान बच्चों और उनके परिवारों को अतिरिक्त समय मिल सकेगा। दीपावली के मौके पर कई परिवारों में पूजा-पाठ, घर की सजावट और रिश्तेदारों से मिलने की तैयारियां होती हैं। ऐसे में छुट्टी बढ़ने से विद्यार्थियों को इन गतिविधियों में शामिल होने का अधिक अवसर मिलेगा। दशहरा और शीतकालीन अवकाश का कैलेंडर भी जारी स्कूल शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र के लिए दशहरा, दीपावली और शीतकालीन अवकाश की तारीखें भी निर्धारित की हैं। विभाग की ओर से जारी कैलेंडर के अनुसार, तीनों अवसरों पर अवकाश का कार्यक्रम इस प्रकार है।     दशहरा अवकाश: 17 अक्टूबर से 21 अक्टूबर तक     दीपावली अवकाश: 6 नवंबर से 11 नवंबर तक     शीतकालीन अवकाश: 24 दिसंबर से 28 दिसंबर तकपहले दशहरा, दीपावली और शीतकालीन अवकाश के लिए कुल 15 दिनों की छुट्टियां निर्धारित की गई थीं। दीपावली अवकाश में एक दिन की बढ़ोतरी के बाद विद्यार्थियों को अब कुल 16 दिनों का अवकाश मिलेगा। विद्यार्थियों और अभिभावकों को मिली राहत दीपावली की छुट्टी बढ़ाने का फैसला विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए राहत भरा है। लगातार छह दिन की छुट्टी मिलने से बच्चों को त्योहार मनाने के साथ आराम करने का भी अतिरिक्त समय मिलेगा। हालांकि, स्कूलों में अवकाश की संशोधित तारीखों की पुष्टि संबंधित विभाग के आधिकारिक आदेश से कर लेना उचित होगा।