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Higher Education Reform: AI और डिजिटल जांच पर फोकस, छात्रों के मूल्यांकन में होंगे बड़े बदलाव

भोपाल  मध्य प्रदेश का उच्च शिक्षा विभाग आने वाले समय में शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में कई बड़े बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। विभाग का फोकस अब एआई आधारित शिक्षण, डिजिटल मूल्यांकन, ऑनलाइन उपस्थिति और विद्यार्थियों की डिजिटल शैक्षणिक पहचान पर है। हालही में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में इन बदलावों की रूपरेखा पर मंथन किया गया है। सबसे बड़ा बदलाव परीक्षा और मूल्यांकन व्यवस्था में देखने को मिल सकता है। विभाग उत्तर पुस्तिकाओं के शत-प्रतिशत डिजिटल वैलिडेशन की दिशा में काम कर रहा है। इसके लागू होने के बाद कॉपियों की जांच और मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज और विश्वसनीय होने की उम्मीद है। इससे परिणामों में देरी और मूल्यांकन संबंधी शिकायतों में भी कमी आ सकती है।  परीक्षा पैटर्न में बदलाव के संकेत उच्च शिक्षा विभाग वर्तमान मूल्यांकन प्रणाली की समीक्षा भी कर रहा है। अभी 30 प्रतिशत आंतरिक मूल्यांकन और 70 प्रतिशत लिखित परीक्षा का प्रावधान है, लेकिन इसे 40:60 करने पर विचार किया जा रहा है। यदि ऐसा होता है तो विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई, प्रोजेक्ट कार्य और कक्षा में सहभागिता को अधिक महत्व मिलेगा। कॉलेजों में बढ़ेगा एआई का दायरा विभाग एआई को उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की दिशा में काम कर रहा है। महाविद्यालयों में  एआईसे जुड़े सर्टिफिकेट कोर्स संचालित किए जा रहे हैं, ताकि विद्यार्थी नई तकनीकों को समझ सकें और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप खुद को तैयार कर सकें। साथ ही एआई टूल्स के जिम्मेदार और रचनात्मक उपयोग पर भी जोर दिया जा रहा है। हर विद्यार्थी की बनेगी डिजिटल पहचान विद्यार्थियों के लिए  अपार आईडी तैयार करने का काम भी तेजी से चल रहा है। इसके जरिए छात्रों का पूरा शैक्षणिक रिकॉर्ड एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगा। इससे प्रवेश, अंकसूची, प्रमाण-पत्र और अन्य शैक्षणिक प्रक्रियाएं आसान हो सकेंगी। मोबाइल ऐप से दर्ज होगी उपस्थिति विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए ‘सार्थक ऐप’ आधारित उपस्थिति प्रणाली लागू करने की तैयारी की जा रही है। इससे कॉलेजों में उपस्थिति की निगरानी आसान होगी और कक्षाओं में नियमित सहभागिता बढ़ाने में मदद मिलेगी। भारतीय भाषाओं में भी मिलेगा पढ़ाई का विकल्प नई शिक्षा नीति के तहत तेलुगु, तमिल, मराठी समेत विभिन्न भारतीय भाषाओं में पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को उनकी पसंद और सुविधा के अनुसार शिक्षा उपलब्ध कराना है। विद्यार्थियों को वैश्विक अवसरों से जोड़ने का प्रयास उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि तकनीक आधारित शिक्षा केवल प्रशासनिक सुधार का माध्यम नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को वैश्विक अवसरों से जोड़ने का भी सशक्त साधन है। विभाग का लक्ष्य विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम बनाना है, ताकि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, गुणवत्ता और दक्षता बढ़ाई जा सके। 

योगी सरकार उच्च शिक्षा में गुणवत्ता सुधार पर फोकस

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था अब एक बड़े बदलाव की दहलीज पर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विश्वविद्यालयों के कायाकल्प के बाद, अब राज्य सरकार ने प्रदेश के डिग्री कॉलेजों को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतारने का लक्ष्य तय किया है। जिस तरह यूपी के सात विश्वविद्यालयों ने नैक (NAAC) की 'A++' रैंकिंग हासिल कर देशभर में मिसाल पेश की है, ठीक उसी तर्ज पर अब डिग्री कॉलेजों को भी उत्कृष्ट श्रेणी में लाने के लिए 'मिशन मोड' में काम शुरू हो गया है। विश्वविद्यालयों से डिग्री कॉलेजों तक: रैंकिंग का नया रोडमैप उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने स्पष्ट किया है कि सरकार का विजन अब केवल बड़े संस्थानों तक सीमित नहीं है।  विशेष कार्यशालाएं: प्रदेशभर के डिग्री कॉलेजों के प्राचार्यों के लिए विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किए जा रहे हैं। इसमें उन्हें नैक रैंकिंग की बारीकियों, डेटा संकलन और गुणवत्ता सुधार के मंत्र दिए जा रहे हैं। रिसर्च और डिजिटल कल्चर: कॉलेजों को केवल 'डिग्री बांटने' वाला केंद्र न मानकर, उन्हें शोध (Research) और डिजिटल शिक्षा का हब बनाने पर जोर दिया जा रहा है। बी-ग्रेड का दौर खत्म, ए++ की लगी झड़ी योगी सरकार के सत्ता में आने से पहले प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था अक्सर रैंकिंग के मामले में पिछड़ जाती थी। ऐतिहासिक सुधार: पहले जहां विश्वविद्यालय बी या बी-प्लस ग्रेड तक ही पहुंच पाते थे, आज कुलाधिपति (राज्यपाल) और सरकार के साझा प्रयासों से राज्य के सात विश्वविद्यालय ए++ रैंकिंग प्राप्त कर चुके हैं। ग्लोबल बेंचमार्क: उत्तर प्रदेश के दो विश्वविद्यालय अब 'क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग' में शामिल हैं, जबकि छह संस्थानों ने 'क्यूएस एशिया रैंकिंग' में अपनी जगह पक्की की है। तीन विश्वविद्यालय यूजीसी की 'ग्रेड-1' श्रेणी का गौरव हासिल कर चुके हैं। छात्र सुविधाएं और रोजगार: नई शिक्षा नीति का आधार उच्च शिक्षा में यह गुणात्मक सुधार केवल कागजी नहीं है, बल्कि इसका सीधा लाभ छात्रों को मिल रहा है।  इंफ्रास्ट्रक्चर: कॉलेजों में स्मार्ट क्लासरूम, अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं और बेहतर छात्र सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।  नई शिक्षा नीति (NEP): पाठ्यक्रमों को रोजगारपरक बनाकर छात्रों की संख्या बढ़ाने और उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।  प्रतिस्पर्धा: कॉलेजों के बीच बेहतर रैंकिंग हासिल करने की होड़ से अंततः शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा।  

​उच्च शिक्षा मंत्री से मिले कुलपति प्रो. दयाल, विश्वविद्यालय के गुणात्मक विकास और समस्याओं पर हुई चर्चा

​उच्च शिक्षा मंत्री से मिले कुलपति प्रो. दयाल, विश्वविद्यालय के गुणात्मक विकास और समस्याओं पर हुई चर्चा ​रायपुर      कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज दयाल ने  छत्तीसगढ़ के माननीय उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान कुलपति ने मंत्री जी को पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया। बैठक के दौरान विश्वविद्यालय के भविष्य, शैक्षणिक सुधारों और बुनियादी ढाँचे के विकास को लेकर व्यापक चर्चा हुई। ​विकास के लिए मिले महत्वपूर्ण सुझाव     ​मुलाकात के दौरान उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने विश्वविद्यालय में संख्यात्मक विस्तार के साथ-साथ गुणात्मक विकास शिक्षा के स्तर में सुधार) पर विशेष जोर दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय को और अधिक उन्नत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव और निर्देश साझा किए। इस अवसर पर उपस्थित कुलसचिव श्री सुनील कुमार शर्मा ने विश्वविद्यालय की लंबे समय से लंबित समस्याओं को मंत्री जी के समक्ष रखा, जिस पर सकारात्मक चर्चा हुई। ​राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) पर केंद्रित है पाठ्यक्रम   ​विश्वविद्यालय वर्तमान में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के मूल उद्देश्यों—गुणवत्ता, समानता, पहुँच और वहनीयता—को ध्यान में रखकर अपने पाठ्यक्रमों का संचालन कर रहा है। यहाँ के मीडिया पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों को रटने की पद्धति से दूर कर उनमें-​आलोचनात्मक सोच,​रचनात्मकता ​बहुविषयक शिक्षा और कौशल विकास ​पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, ताकि वे आधुनिक पत्रकारिता की चुनौतियों का सामना कर सकें। ​भीषण गर्मी को देखते हुए छात्रों के लिए बड़ी राहत लाइब्रेरी में बनेगा एयरकूल्ड रीडिंग रूम    ​कुलपति प्रो. मनोज दयाल ने आगामी परीक्षाओं और छात्रों की पढ़ाई के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन को महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। भीषण गर्मी के प्रकोप को देखते हुए उन्होंने लाइब्रेरी में 'एयरकूल्ड रीडिंग रूम'  की व्यवस्था करने को कहा है, ताकि छात्र-छात्राएं बिना किसी परेशानी के सुचारु रूप से अपना अध्ययन जारी रख सके।

रांची में नई पहल: NEP 2020 के तहत झारखंड का इंटरनेशनल एजुकेशन हब बनाने की तैयारी

रांची  झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने राज्य में 'ऑफिस ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स' (Office of International Affairs) की स्थापना का निर्णय लिया है। यह कार्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020 के प्रावधानों के तहत कार्य करेगा। उच्च शिक्षा के वैश्वीकरण के लिए एक 'सिंगल विंडो' सुविधा प्रदान करेगा। इसका मुख्य उद्देश्य झारखंड के छात्रों को अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक मानकों से जोड़ना और विदेशी संस्थानों तक उनकी पहुंच को सुलभ बनाना है। एक्सचेंज प्रोग्राम और अंतरराष्ट्रीय सहयोग यह कार्यालय प्रमुख रूप से एक्सचेंज प्रोग्राम संचालित करेगा, जिससे झारखंड के विद्यार्थी विदेशों में जाकर उच्च शिक्षा और शोध (Research) कर सकेंगे। इसके साथ ही, विदेशी छात्रों को भी झारखंड के शिक्षण संस्थानों में अध्ययन और शोध के अवसर दिए जाएंगे। कार्यालय की मुख्य भूमिकाएं         नामांकन में सहायता: विदेशी विश्वविद्यालयों में चलने वाले कोर्सेज और उनकी जटिल नामांकन प्रक्रिया की जानकारी विद्यार्थियों को यहां उपलब्ध होगी।         कार्यशालाओं का आयोजन: शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में कार्यशालाएं होंगी, जहां विदेशी संस्थानों के प्रतिनिधि छात्रों का मार्गदर्शन करेंगे।         झारखंड की ब्रांडिंग: विदेशों में विशेष कार्यक्रम आयोजित कर झारखंड के संस्थानों की शोध क्षमताओं और अवसरों से दुनिया को अवगत कराया जाएगा।         वित्तीय योजनाओं का संचालन: भविष्य में उच्च शिक्षा के लिए स्वीकृत होने वाली आर्थिक सहायता योजनाओं का क्रियान्वयन भी इसी कार्यालय के माध्यम से होगा।   मरांगगोके पारदेशीय छात्रवृत्ति योजना को मिलेगा बल झारखंड सरकार वर्तमान में 'मरांगगोमके जयपाल सिंह मुंडा पारदेशीय छात्रवृत्ति योजना' के माध्यम से राज्य के प्रतिभाशाली बच्चों को विदेश भेज रही है। हाल ही में इस योजना के लाभार्थियों की संख्या 25 से बढ़ाकर 50 कर दी गई है।   इस योजना के तहत एसटी, एससी और ओबीसी श्रेणी के छात्रों को यूनाइटेड किंगडम और उत्तरी आयरलैंड के विश्वविद्यालयों में मास्टर और एमफिल करने के लिए 100% वित्तीय सहायता दी जाती है। 'ऑफिस ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स' के गठन के बाद इस योजना का संचालन और भी अधिक प्रभावी और सुव्यवस्थित होने की संभावना है।   राज्य सरकार के इस कदम से न केवल झारखंड के मेधावी छात्र वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकेंगे, बल्कि झारखंड भी उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर मजबूती से उभरेगा।

NET-PhD धारकों का आक्रोश बढ़ा, संविदा भर्ती को बताया भविष्य से खिलवाड़

जयपुर  राजस्थान के उच्च शिक्षा विभाग में भर्ती को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है. राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा कॉलेजों में 3,540 पदों पर 'टीचिंग एसोसिएट' की संविदा भर्ती निकालने के फैसले ने प्रदेश के शिक्षित युवाओं में आक्रोश भर दिया है. युवा इस योजना को 'शिक्षावीर' करार देकर इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं. नेट और PhD धारकों के साथ धोखा विरोध कर रहे युवाओं का कहना है कि जिन्होंने बरसों मेहनत कर NET, JRF और PhD जैसी डिग्रियां हासिल की हैं, उनके भविष्य के साथ यह खिलवाड़ है. युवाओं का तर्क है कि सरकार स्थाई भर्ती करने के बजाय अस्थायी नियुक्तियां कर रही है, जिससे उच्च शिक्षा का स्तर गिरेगा. छात्रों का कहना है कि यदि कॉलेजों में स्थाई आचार्य नहीं होंगे, तो शोध (Research) और नए विमर्श पूरी तरह ठप हो जाएंगे, जिसका सीधा असर विद्यार्थियों की स्किल और शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ेगा. वेतन पर भड़के युवा भर्ती के विरोध का सबसे बड़ा कारण तय किया गया मानदेय है. टीचिंग एसोसिएट के लिए मात्र 28,500 रुपये वेतन तय किया गया है. छात्र नेताओं का कहना है कि यह राशि एक तृतीय श्रेणी शिक्षक से भी कम है. UGC के मानकों के अनुसार, एक सहायक आचार्य की बेसिक पे ही 57,700 रुपये से शुरू होती है. ऐसे में आधे वेतन पर उच्च शिक्षित युवाओं से काम कराना उनका अपमान है. खाली पदों से जूझते विश्वविद्यालय प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों की हालत पहले ही जर्जर है. कॉलेजों में शैक्षणिक स्टाफ के 32% पद खाली पड़े हैं. प्रदेश की 15 में से 7 यूनिवर्सिटी ऐसी हैं जहां एक भी नियमित शिक्षक नहीं है. राजस्थान विश्वविद्यालय में 60% शिक्षकों के पद रिक्त हैं. सियासी पारा चढ़ा, कांग्रेस ने घेरी सरकार अब इस मुद्दे पर सियासत भी गर्मा गई है. नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने सरकार पर हमला बोला है. विपक्ष का आरोप है कि सेना में 'अग्निवीर' की तर्ज पर अब सरकार 'शिक्षावीर' और 'डॉक्टरवीर' बनाकर युवाओं के भविष्य को अंधकार में धकेल रही है. युवाओं ने चेतावनी दी है कि यदि संविदा भर्ती वापस लेकर स्थाई नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो आंदोलन और उग्र होगा.

एक छत के नीचे शिक्षा की सभी सुविधाएं: हरियाणा के 22 कॉलेजों को मिलेगा मॉडल संस्कृति दर्जा

चंडीगढ़  प्रदेश के उच्चतर शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव होने जा रहा है। प्रदेश के 22 सरकारी कॉलेजों को जल्द ही मॉडल संस्कृति कॉलेज के रूप में विकसित किया जाएगा। इनमें कैथल का डॉ. बीआर आंबेडकर गवर्नमेंट कॉलेज का नाम भी शामिल है। उच्चतर शिक्षा निदेशालय की ओर से इसकी आधिकारिक अनुमति दे दी गई है। इस निर्णय को प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है।   इन कॉलेजों में न केवल पढ़ाई की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि विद्यार्थियों को आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं, नए कोर्स और प्रशिक्षित शिक्षकों का लाभ भी मिलेगा। मॉडल संस्कृति कॉलेजों की परिकल्पना का मुख्य उद्देश्य सरकारी कॉलेजों को निजी संस्थानों के समकक्ष बनाना है, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा के लिए बाहर न जाना पड़े। इन कॉलेजों में सु-प्रशिक्षित और ट्रेंड शिक्षकों द्वारा पढ़ाई करवाई जाएगी। साथ ही नई शिक्षा नीति के अनुरूप पाठ्यक्रम लागू किए जाएंगे, जिससे विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुख और कौशल आधारित शिक्षा मिल सके।   इन कॉलेजों में कई नए विषय और कोर्स शुरू किए जाएंगे, जो वर्तमान समय की जरूरतों के अनुरूप होंगे। साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स के पारंपरिक विषयों के साथ-साथ स्किल डेवलपमेंट, आईटी, डेटा एनालिटिक्स, पर्यावरण अध्ययन, स्टार्टअप और उद्यमिता जैसे विषयों को भी शामिल किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ भविष्य के लिए तैयार किया जा सकेगा।   इन कॉलेजों को मॉडल संस्कृति बनने की मिली अनुमति     जिला                                        कॉलेज का नाम     कैथल                                       डॉ. बीआर आंबेडकर गवर्नमेंट कॉलेज, कैथल।     अंबाला                                     गवर्नमेंट पीजी कॉलेज, अंबाला कैंट।     भिवानी                                     गवर्नमेंट कॉलेज।     चरखी दादरी                             गवर्नमेंट कॉलेज फॉर वूमेन, बाढ़रा।     फरीदाबाद                                पंडित जवाहरलाल नेहरू गवर्नमेंट कॉलेज।     फतेहाबाद                                गवर्नमेंट कॉलेज फॉर वूमेन, बोडिया खेड़ा।     गुरुग्राम                                    द्रोणाचार्य गवर्नमेंट कॉलेज।     हिसार                                      गवर्नमेंट कॉलेज।     झज्जर                                      गवर्नमेंट कॉलेज।     जींद                                        गवर्नमेंट कॉलेज।     करनाल                                   पंडित चिरंजीलाल शर्मा गवर्नमेंट कॉलेज।     कुरुक्षेत्र                                   गवर्नमेंट कॉलेज फॉर गर्ल।     नारनौल                                   गवर्नमेंट कॉलेज।     पलवल                                    गवर्नमेंट कॉलेज।     पंचकूला                                  गवर्नमेंट पीजी कॉलेज सेक्टर-1     पानीपत                                   गवर्नमेंट कॉलेज।     नूंह                                         गवर्नमेंट कॉलेज नगीना।     रेवाड़ी                                     गवर्नमेंट कॉलेज फॉर वूमेन।     रोहतक                                   पंडित नेकीराम शर्मा गवर्नमेंट कॉलेज।     सिरसा                                    गवर्नमेंट नेशनल कॉलेज।     सोनीपत                                  गवर्नमेंट कॉलेज फॉर वूमेन गोहाना।     यमुनानगर                               गवर्नमेंट कॉलेज छछरौली। अधिकारी के अनुसार डॉ. बीआर अंबेडकर गवर्नमेंट कॉलेज कैथल के प्रिंसिपल डॉ. मनोज भांभू ने बताया कि मॉडल संस्कृति कॉलेज बनने से कॉलेज में आधुनिक लैब खोली जाएगी। विद्यार्थियों के लिए सुविधाएं बढ़ाने के साथ ही नए कोर्स भी शामिल होंगे। कॉलेज को मॉडल संस्कृति बनने के बाद बाकी कॉलेज भी इसका अनुसरण करेंगे और इसके उपरांत उन बाकी कॉलेजों को भी मॉडल संस्कृति बनाया जाएगा।

छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा हुई सुलभ, छात्रों के सपनों को मिली उड़ान

रायपुर छत्तीसगढ़ एक ऐसा राज्य है जहाँ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार में शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन और विकास का सबसे बड़ा माध्यम माना जाने लगा है। शिक्षा ही वह शक्ति है जो किसी भी व्यक्ति, समाज और राज्य को नई दिशा देती है। लेकिन उच्च शिक्षा तक पहुँचना हमेशा से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए एक चुनौती रहा है। आर्थिक तंगी के कारण कई मेधावी छात्र अपनी पढ़ाई अधूरी छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इस समस्या को गहराई से समझा और समाधान के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया — मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान योजना। इस योजना ने हजारों छात्रों के लिए उच्च शिक्षा की राह को आसान बना दिया है। अब छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के लिए लिए गए शिक्षा ऋण पर ब्याज की चिंता नहीं करनी पड़ती, क्योंकि सरकार वह बोझ अपने ऊपर ले रही है। मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान योजना की पृष्ठभूमि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद प्रभावित और पिछड़े क्षेत्रों के छात्र अक्सर आर्थिक कठिनाइयों के कारण तकनीकी व व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाते थे। उच्च शिक्षा तक पहुँचने में सबसे बड़ी रुकावट महँगी फीस और शिक्षा ऋण का बोझ था। इसी समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार ने यह योजना शुरू की।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का मानना है कि “शिक्षा में निवेश ही सबसे बड़ा निवेश है, क्योंकि शिक्षित युवा ही राज्य और राष्ट्र का भविष्य गढ़ते हैं।” इसी सोच के तहत यह योजना लागू की गई। इस योजना के अंतर्गत अधिकतम 4 लाख रुपए तक का शिक्षा ऋण ब्याज मुक्त उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना का लाभ लेने के लिए छात्र के परिवार की वार्षिक आय 2 लाख रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए। बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, जशपुर आदि नक्सल प्रभावित जिलों के छात्रों को पूर्णत: ब्याज मुक्त ऋण मिलता है।अन्य जिलों के छात्रों को केवल 1% ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है। शेष ब्याज सरकार वहन करती है।बैंक द्वारा लगाए जाने वाले ब्याज की पूरी या आंशिक राशि सरकार देती है।इससे छात्रों पर सिर्फ मूलधन  चुकाने की ही बाध्यता रहती है। इस योजना में 35 तकनीकी और व्यावसायिक पाठ्यक्रम शामिल हैं। इनमें डिप्लोमा, स्नातक (ग्रेजुएशन), स्नातकोत्तर (पोस्ट ग्रेजुएशन) और पेशेवर कोर्स सम्मिलित हैं।योजना के लिए पात्र छात्रों का छत्तीसगढ़ का निवासी होना आवश्यक है। उसकी वार्षिक पारिवारिक आय 2 लाख रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए। छात्र को किसी मान्यता प्राप्त संस्थान में प्रवेश लेना अनिवार्य है। इस योजना के लिए राज्य के किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक / सहकारी बैंक में शिक्षा ऋण के लिए आवेदन किया जा सकता है। आवेदन पत्र के साथ आवश्यक दस्तावेज़ (निवासी प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, प्रवेश पत्र, अंकसूची, आधार कार्ड आदि) जमा करना होता है। बैंक से ऋण स्वीकृत होने के बाद छात्र को योजना का लाभ पाने के लिए उच्च शिक्षा विभाग या जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में आवेदन करना होता है। योजना के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का योगदान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस योजना को बहुत ही कुशलता से धरातल पर उताराने का काम किया है। उनके नेतृत्व में इस योजना का विस्तार इस तरह से किया गया, जिससे नक्सल प्रभावित जिलों के छात्रों को विशेष लाभ मिला।इस योजना में ऑनलाइन प्रक्रिया को सरल बनाया गया ताकि छात्रों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।बजट में बढ़ोतरी करते हुए उच्च शिक्षा विभाग के बजट में इस योजना के लिए पर्याप्त प्रावधान किया गया। इस योजना के लिए एक निगरानी तंत्र बनाया गया है जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि बैंक समय पर छात्रों को ऋण दें और ब्याज अनुदान में देरी न हो। योजना के सामाजिक और आर्थिक प्रभाव छत्तीसगढ़ के मुखिया के नेतृत्व में मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान योजना से गरीब और पिछड़े वर्ग के छात्र उच्च शिक्षा तक पहुँच पा रहे हैं।नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी इस योजना के पहुँचने से काफ़ी उम्मीद बढ़ी है इससे शिक्षा से जुड़ने वाले युवाओं की संख्या बढ़ी है, जिससे नक्सलवाद से लड़ाई को नई ताक़त मिल रही है। तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा लेकर युवा नौकरी और स्वरोज़गार में आगे बढ़ रहे हैं और परिवारों पर ब्याज का बोझ घटने से वे बच्चों की शिक्षा के लिए और अधिक उत्साहित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की भावी योजनाएँ छत्तीसगढ़ सरकार इस योजना को और व्यापक बनाने की तैयारी में है। इस योजना में मिलने वाले ऋण सीमा को 4 लाख रुपए से बढ़ाकर 7 लाख रुपए तक करने पर विचार किया जा रहा है। इस योजना में नॉन-प्रोफेशनल कोर्स (जैसे BA, B.Sc, B.Com) को भी शामिल करने की योजना बनाई जा रही है। डिजिटल पोर्टल पर पूरी तरह से ऑनलाइन आवेदन और स्वीकृति की सुविधा बनाई जा रही है। छात्रवृत्ति और ऋण अनुदान को जोड़कर “डबल बेनिफिट स्कीम” बनाने पर विचार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान योजना छत्तीसगढ़ के युवाओं के सपनों को पंख देने वाली योजना है। यह न केवल छात्रों की आर्थिक समस्याएँ हल कर रही है बल्कि राज्य को ज्ञान और कौशल की शक्ति से सशक्त भी बना रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का यह कदम शिक्षा को लोकतांत्रिक और सुलभ बनाने की दिशा में ऐतिहासिक है। आज जब कोई भी छात्र यह महसूस करता है कि उसकी पढ़ाई सिर्फ पैसे की वजह से अधूरी नहीं रहेगी, तो यह योजना अपने उद्देश्य में सफल मानी जाती है।