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छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण की बड़ी सफलता, नर चीतल शिकार मामले में 7 आरोपी गिरफ्तार; कोर्ट ने भेजा जेल

रायपुर : वन्यजीव संरक्षण में बड़ी सफलता : नर चीतल के अवैध शिकार का खुलासा, सात आरोपी गिरफ्तार, न्यायालय ने भेजा जेल सरकार की सख्ती से वन्यजीव अपराधों पर लग रहा अंकुश, वन्यजीव संरक्षण को मिल रही मजबूती रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार वन, वन्यजीव और जैव विविधता के संरक्षण के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वन विभाग और छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम द्वारा अवैध शिकार के विरुद्ध विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। इन अभियानों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। इसी क्रम में कवर्धा परियोजना मंडल ने नर चीतल के अवैध शिकार के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों को न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने के बाद जेल भेज दिया गया। मुखबिर की सूचना पर योजनाबद्ध कार्रवाई वन विकास निगम के बोड़ला परियोजना परिक्षेत्र के भलपहरी बीट स्थित जंगल में शिकारियों ने जाल बिछाकर लगभग तीन वर्ष के नर चीतल का शिकार किया। इसके बाद उसके मांस को पकाकर आपस में बांटने की तैयारी की जा रही थी। मुखबिर से मिली सूचना पर वन विकास निगम की टीम ने तत्काल योजनाबद्ध तरीके से घेराबंदी कर दबिश दी और सभी सात आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। शिकार में प्रयुक्त सामग्री और चीतल का मांस जब्त कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से लगभग 500 ग्राम पका हुआ चीतल का मांस, नायलॉन की रस्सी, तीन कुल्हाडि़यां, स्टील के तार एवं लकड़ी से बने फंदे तथा खून से सना थैला बरामद कर जब्त किया गया। आरोपियों के विरुद्ध वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की गई। सघन निगरानी और गश्त से मिल रही सफलता वन विभाग और वन विकास निगम द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित गश्त, सूचना तंत्र को मजबूत करने तथा विशेष निगरानी अभियान चलाने के कारण वन्यजीव अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो रहा है। विभाग की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से अवैध शिकार करने वालों के विरुद्ध लगातार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। वन्यजीव संरक्षण के लिए सरकार की स्पष्ट नीति मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्राकृतिक संसाधनों और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार वन विभाग आधुनिक निगरानी व्यवस्था, नियमित गश्त और प्रभावी सूचना तंत्र के माध्यम से वन्यजीव अपराधों पर अंकुश लगाने का कार्य कर रहा है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि वन्यजीवों का अवैध शिकार करने या प्राकृतिक संपदा को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।  वन मंत्री श्री कश्यप ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वन्यजीवों के संरक्षण में अपनी भागीदारी निभाएं। यदि कहीं भी अवैध शिकार या वन अपराध की जानकारी मिले तो उसकी सूचना तत्काल वन विभाग को दें, ताकि समय रहते प्रभावी कार्रवाई कर प्रदेश की समृद्ध वन्यजीव संपदा और जैव विविधता का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

इन्फ्लुएंसर मीट से चमकेगा छत्तीसगढ़ पर्यटन, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दुनिया देखेगी प्रदेश की खूबसूरती

इन्फ्लुएंसर मीट से छत्तीसगढ़ पर्यटन को मिलेगी वैश्विक पहचान, डिजिटल मंचों पर गूंजेंगी प्रदेश की खूबसूरती पाँच दिवसीय फेम टूर में मैनपाट, सतरेंगा और रामगढ़ महोत्सव का अनुभव ले रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, करोड़ों दर्शकों तक पहुंचेगा छत्तीसगढ़ का प्राकृतिक, सांस्कृतिक और जनजातीय वैभव रायपुर डिजिटल माध्यमों के जरिए छत्तीसगढ़ पर्यटन को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में छत्तीसगढ़ टूरिज़्म बोर्ड द्वारा 26 से 30 जून 2026 तक पाँच दिवसीय "इन्फ्लुएंसर मीट एवं फेमिलराइजेशन (फेम) टूर" का आयोजन किया जा रहा है। इस अभिनव पहल के तहत राज्य के विभिन्न जिलों से चयनित प्रमुख सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराया जा रहा है, ताकि उनके माध्यम से प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन संभावनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार देश और दुनिया तक पहुंच सके। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागी प्रदेश के प्रसिद्ध हिल स्टेशन मैनपाट, प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण सतरेंगा तथा ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व के रामगढ़ महोत्सव का भ्रमण कर रहे हैं। इस यात्रा के दौरान इन्फ्लुएंसर्स प्राकृतिक छटा, जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक लोककलाओं, पर्यटन सुविधाओं और सांस्कृतिक आयोजनों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कर रहे हैं। साथ ही वे विभिन्न डिजिटल मंचों के लिए आकर्षक फोटो, वीडियो और रचनात्मक सामग्री तैयार कर रहे हैं, जिसके माध्यम से छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों की विशेषताएं लाखों दर्शकों तक पहुंचेंगी। मैनपाट अपनी मनोहारी वादियों, तिब्बती संस्कृति, झरनों और प्राकृतिक आकर्षणों के कारण प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में विशेष स्थान रखता है। वहीं सतरेंगा इको-टूरिज्म के क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ गंतव्य है, जहां विशाल जलाशय, प्राकृतिक वातावरण और रोमांचक गतिविधियां पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। इसके साथ ही रामगढ़ महोत्सव के माध्यम से प्रतिभागी छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं, लोक कलाओं और ऐतिहासिक विरासत से भी रूबरू हो रहे हैं। यह आयोजन पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन, पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा के नेतृत्व, प्रबंध संचालक विवेक आचार्य के सक्षम संचालन तथा उपमहाप्रबंधक श्रीमती पूनम शर्मा के निर्देशन में छत्तीसगढ़ टूरिज़्म बोर्ड की टीम द्वारा सुव्यवस्थित रूप से संचालित किया जा रहा है। आयोजन का अंतिम दिन 30 जून को निर्धारित है। डिजिटल युग में सोशल मीडिया पर्यटन प्रचार का सबसे प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। ऐसे में इस इन्फ्लुएंसर मीट के माध्यम से तैयार की जा रही डिजिटल सामग्री छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों को देश और दुनिया के करोड़ों लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे प्रदेश के पर्यटन स्थलों की लोकप्रियता और दृश्यता बढ़ेगी, पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी तथा स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, हस्तशिल्प, लोककला, ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।  इस प्रकार के नवाचार आधारित प्रचार अभियान राज्य को देश के अग्रणी पर्यटन गंतव्यों में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। आगामी समय में भी पर्यटन के प्रभावी प्रचार-प्रसार के लिए ऐसे अभिनव प्रयास निरंतर किए जाते रहेंगे।

सेजबहार फेस-1 कॉलोनी की भूमि से गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने हटाया अतिक्रमण

सेजबहार फेस-1 कॉलोनी की भूमि से गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने हटाया अतिक्रमण वर्ष 2006 में आवासीय परियोजना हेतु आबंटित भूमि पर निजी बिल्डर द्वारा किया जा रहा था अवैध निर्माण रायपुर, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने अपनी परिसंपत्तियों की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए सेजबहार फेस-1 कॉलोनी स्थित मंडल की भूमि पर किए गए अतिक्रमण को हटाकर भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराया है। कार्रवाई के दौरान निजी बिल्डर द्वारा बिना अनुमति निर्मित की जा रही सड़क को हटाया गया। दीनदयाल आवास योजना के अंतर्गत कलेक्टर रायपुर के आदेश 03 फरवरी 2006 के माध्यम से ग्राम सेजबहार एवं ग्राम दतरेंगा की कुल 21.538 हेक्टेयर (लगभग 53.19 एकड़) भूमि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल को आवासीय परियोजना विकसित करने के लिए आबंटित की गई थी। इस भूमि में ग्राम सेजबहार के खसरा क्रमांक 162/1 के भाग तथा ग्राम दतरेंगा के खसरा क्रमांक 341/1 एवं 341/3 शामिल हैं। परियोजना के लिए विकास अनुज्ञा 17 मई 2006 को स्वीकृत की गई थी। 1435 एलआईजी आवासों के निर्माण का था प्रावधान स्वीकृत ले-आउट के अनुसार परियोजना क्षेत्र में कुल 1435 एलआईजी (लो इनकम ग्रुप) आवासों का निर्माण प्रस्तावित था। मंडल द्वारा किए गए स्थल निरीक्षण एवं अभिलेख परीक्षण में पाया गया कि 1435 प्रस्तावित आवासों में से 1327 आवास स्वीकृत ले-आउट के अनुरूप निर्मित किए गए, जबकि 39 आवास स्वीकृत अभिन्यास से पृथक निर्मित पाए गए। इस प्रकार कुल 1366 आवासों का निर्माण किया गया। भूमि विवाद के कारण नहीं बन सके 79 आवास निरीक्षण, अभिलेख परीक्षण तथा पूर्व अधिकारियों एवं अभियंताओं से प्राप्त जानकारी के अनुसार निर्माण अवधि के दौरान भूमि विवाद उत्पन्न होने के कारण स्वीकृत ले-आउट में दर्शाए गए भवन क्रमांक 1287 से 1345 तथा 1412 से 1431 तक कुल 79 आवासों का निर्माण नहीं हो सका। सातवें चरण के अंतर्गत अनुबंध क्रमांक 41, दिनांक 07 अगस्त 2006 के तहत 192 आवासों के निर्माण का प्रावधान था, जिसके अंतर्गत 193 एलआईजी आवासों का निर्माण किया गया। विवादित क्षेत्र में स्थित 79 आवासों का निर्माण न होने के कारण उनका विक्रय भी नहीं किया गया। सीमांकन के दौरान सामने आया अतिक्रमण हाल ही में मंडल द्वारा अपनी लगभग 18 हेक्टेयर भूमि का राजस्व अभिलेखों के आधार पर सीमांकन कराया गया। सीमांकन के दौरान यह तथ्य सामने आया कि एक निजी बिल्डर द्वारा मंडल की भूमि के हिस्से पर अवैध रूप से कब्जा कर सड़क निर्माण किया जा रहा है। सीमांकन रिपोर्ट में अतिक्रमण की पुष्टि होने के बाद मंडल ने तत्काल कार्रवाई प्रारंभ की। अवैध सड़क हटाकर भूमि को कराया अतिक्रमणमुक्त कार्यपालन अभियंता संभाग क्रमांक-3, सेजबहार रायपुर श्री नितेश कश्यप के नेतृत्व में मंडल की टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की। इस दौरान संपदा अधिकारी श्री अमृत लाल बरमन, सहायक अभियंता श्री हेमंत निषाद, उप अभियंता श्रीमती निकिता मिश्रा, श्री अनुपम राठौर, श्री पेमेन्द्र ध्रुव, श्री अमय विक्रम तथा श्री कमलेश दास सहित अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों की उपस्थिति में अनधिकृत सड़क को हटाकर भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराया गया। भूमि पर विकसित होगी नई आवासीय परियोजना मंडल के अधिकारियों ने बताया कि संबंधित भूमि मंडल की महत्वपूर्ण परिसंपत्ति है तथा भविष्य में इस क्षेत्र में नई आवासीय परियोजना विकसित करने की योजना है। उन्होंने कहा कि मंडल अपनी भूमि एवं परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है तथा किसी भी प्रकार के अतिक्रमण के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रखी जाएगी।

टीबी मुक्त छत्तीसगढ़ मिशन की प्रगति पर मंथन, मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य विभाग को दिए अहम निर्देश

मुख्य सचिव ने टीबी मुक्त छत्तीसगढ, राष्ट्रीय स्वास्थ्य बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम और सुरक्षित मातृत्व अभियान के कार्यों की समीक्षा की रायपुर मुख्य सचिव विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में टीवी मुक्त भारत के तहत छत्तीसगढ़ को टीवी मुक्त बनाने के लिए किए जा रहे कार्यों की विस्तार से समीक्षा की। मुख्य सचिव ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम एवं प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत किए जा रहे स्वास्थ्य कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा की।                  मुख्य सचिव ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत छत्तीसगढ़ में कार्य करने वाले स्वास्थ्य अधिकारियों को कहा है कि राज्य में टीबी के मरीजों की जांच के लिए व्यापक स्तर पर जांच शिविर लगाये जायें। जिसमें जांच के दौरान मिलने वाले टीबी के मरीजों का त्वरित ईलाज किया जाए। इसके लिए प्रत्येक गांव और शहरों में विशेष अभियान चलाया जाए। उन्होंने टीबी मरीजों के जांच के लिए सभी जरूरी उपकरणों एक्स-रे मशीन एवं रेडियोग्राफरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने कहा है।                 विकासशील ने मरीजों की शीघ्र पहचान कर ईलाज शुरू किया जाना चाहिए एवं मरीजों को स्वास्थ्य कार्यक्रमों के तहत पोषण आहार एवं पौष्टिक सामग्री हेतु निर्धारित राशि तुरंत उपलब्ध कराया जाना चाहिए। टीबी मुक्त अभियान के अंतर्गत जो गांव और ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त होती है। इसके बारे में गांव में होने वाली ग्राम सभा में लोगों को बताया जाना चाहिए। इसी तरह से प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं की घर-घर जाकर जांच की जाए। महिलाओं के बीपी, वजन, हिमोग्लोबिन इत्यादि की जांच की जाए। आवश्यकता पड़ने पर गर्भवती महिलाओं को एफआरयू में रेफर किए जाए।                  मुख्य सचिव ने बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बच्चों की स्क्रीनिंग की जाए। सभी आंगनबाड़ी, स्कूलों में हर बच्चें की जांच अनिवार्य रूप से की जाए। रोग युक्त पाए जाने बच्चों को बड़े अस्पतालों में ईलाज के लिए भेजा जाए। अस्पतालों में ईलाज करा रहे बच्चों की टैªकिंग की जाकर उनके स्वास्थ्य की लगातार मॉनिटरिंग कर समुचित उपचार दिया जाए। सभी शिशुओं को जरूरी टीके लगाए जाये। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अधिकारियों ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के अंतर्गत राज्य में किए जा रहे कार्यों की विस्तार से जानकारी दी।

छत्तीसगढ़ में निवेशकों का भरोसा बढ़ा, 9,580 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव; सरकार ने बिछाया रेड कारपेट

छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए बिछा रेड कारपेट, 9,580 करोड़ रुपये के मिले प्रस्ताव इन्वेस्टर कनेक्ट में हैदराबाद के निवेशकों को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का न्योता आईटी, टेक्सटाइल, डेटा सेंटर, फार्मा के क्षेत्र में खुली 7,800 रोजगार की राह  रायपुर  छत्तीसगढ़ ने निवेश आकर्षित करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। हैदराबाद में आयोजित ‘छत्तीसगढ़ इन्वेस्टर कनेक्ट’ कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों की सात प्रमुख कंपनियों ने 9,580 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव दिए हैं, जिनसे 7,800 से अधिक रोजगार सृजित होने की संभावना है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने देश के प्रमुख उद्योगपतियों और निवेशकों को छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए आमंत्रित करते हुए कहा विकसित भारत के ग्रोथ इंजन के रूप में छत्तीसगढ़ तेजी से उभर रहा है और राज्य में निवेशकों के लिए ‘रेड कारपेट’ बिछा हुआ है।  कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन सहित दक्षिण भारत के कई बड़े उद्योगपति, निवेशक और कारोबारी प्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने बताया कि नई औद्योगिक नीति लागू होने के बाद दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु के साथ-साथ जापान और दक्षिण कोरिया में आयोजित इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रमों के माध्यम से राज्य को 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। राज्य सरकार इन प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए तेजी से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज निवेश के लिए देश के सबसे बेहतर राज्यों में से एक बनकर उभर रहा है। राज्य में उद्योगों के लिए आसान प्रक्रियाएं, सिंगल विंडो व्यवस्था, बेहतर बुनियादी सुविधाएं और उद्योग अनुकूल नीतियां उपलब्ध हैं। उन्होंने निवेशकों को छत्तीसगढ़ में उद्योग स्थापित करने का आमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हैदराबाद ने आईटी, फार्मा, बायोटेक्नोलॉजी और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। छत्तीसगढ़ भी इन क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है और दोनों राज्यों के उद्योगपति एवं उद्यमी मिलकर नए अवसरों का लाभ उठा सकते हैं। उन्होंने कहा कि मध्य भारत में स्थित छत्तीसगढ़ देश का सबसे उपयुक्त लॉजिस्टिक हब बनने की क्षमता रखता है। छत्तीसगढ़ सात राज्यों से घिरा हुआ है और 60 करोड़ से अधिक उपभोक्ताओं तक सीधी पहुंच प्रदान करता है। रेलवे नेटवर्क, भारतमाला परियोजना, एयर कार्गो सुविधाओं तथा खनिज संसाधनों की उपलब्धता उद्योगों के लिए इसे अत्यंत अनुकूल बनाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश में ग्रीन स्टील को बढ़ावा देने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल है। ऊर्जा क्षेत्र में राज्य को 3.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिससे प्रदेश देश के प्रमुख पावर हब के रूप में उभर रहा है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सात प्रमुख कंपनियों को छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए ‘इन्विटेशन टू इन्वेस्ट’ (ऑफर लेटर) प्रदान किए। इनमें डेटा सेंटर, सीमेंट, सेमीकंडक्टर एवं जीपीयू इंफ्रास्ट्रक्चर, सौर ऊर्जा उपकरण निर्माण, वस्त्र, फार्मास्यूटिकल और डेयरी प्रसंस्करण क्षेत्रों की अग्रणी कंपनियां शामिल हैं। सबसे बड़ा निवेश प्रस्ताव हाइपरनेक्स्ट डाटा सेंटर लिमिटेड की ओर से प्राप्त हुआ, जिसने छत्तीसगढ़ में भारत का पहला समर्पित डिजास्टर रिकवरी डेटा सेंटर कैंपस स्थापित करने के लिए ₹4,200 करोड़ के निवेश का प्रस्ताव दिया। इस परियोजना से राज्य में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलेगी और छत्तीसगढ़ डेटा सेंटर क्षेत्र का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकेगा। इस परियोजना से लगभग 250 रोजगार सृजित होंगे।  फीग्रेड एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड ने सीमेंट क्षेत्र में 2,912 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव दिया है, जिससे लगभग 4,000 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। वहीं निवाई लैब्स प्राइवेट लिमिटेड ने ₹1,000 करोड़ के निवेश से एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), जीपीयू इंफ्रास्ट्रक्चर, एडवांस कंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर असेंबली से जुड़ी सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव दिया। इससे राज्य में आधुनिक तकनीकी उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा एवं लगभग 200 रोजगार सृजित होंगे। सौर ऊर्जा उपकरण निर्माण क्षेत्र की एसजी मार्ट लिमिटेड ने 700 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव दिया है, जिससे लगभग 450 लोगों को रोजगार मिल सकता है।  सरवणा मिल्स प्राइवेट लिमिटेड ने ₹528 करोड़ के निवेश से अत्याधुनिक टेक्सटाइल और परिधान निर्माण इकाई स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। इस परियोजना से लगभग 2,500 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। फार्मास्यूटिकल क्षेत्र की काबरा ड्रग्स ने 200 करोड़ रुपये तथा डेयरी क्षेत्र की दिनशॉज़ डेयरी फूड्स प्राइवेट लिमिटेड ने 40 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव दिया है। इन दोनों परियोजनाओं से क्रमशः लगभग 250 और 150 रोजगार सृजित होंगे। हैदराबाद दौरे के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और राज्य के प्रतिनिधिमंडल ने देश की कई अग्रणी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठकें कीं। इनमें गूगल इंडिया, आईबीएम, पॉलीकैब इंडिया, पेज इंडस्ट्रीज और डेल्टा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल रहीं। बैठकों में छत्तीसगढ़ में निवेश की संभावनाओं, उपलब्ध औद्योगिक सुविधाओं और राज्य सरकार की उद्योग-अनुकूल नीतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके अलावा स्वामी नारायण गुरुकुल संगठन के प्रतिनिधियों ने भी मुख्यमंत्री से मुलाकात कर  रायपुर के टाटीबंध में 650 बिस्तरों वाले चैरिटेबल अस्पताल की स्थापना के प्रस्ताव पर चर्चा की। इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रम में आईटी, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, एयरोस्पेस एवं रक्षा, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) और उन्नत विनिर्माण जैसे भविष्य के उद्योगों में निवेश के अवसरों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। निवेशकों ने इन क्षेत्रों में विशेष रुचि दिखाई। कार्यक्रम में सीएसआईडीसी के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, इन्वेस्टमेंट कमिश्नर सुऋतु सेन, सीएसआईडीसी के प्रबंध संचालक विश्वेश कुमार, उद्योग विभाग के संचालक प्रभात मलिक एवं अन्य अधिकारीगण शामिल थे।

जनभागीदारी के दम पर हरियाली की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़, पर्यावरण संरक्षण को मिली नई दिशा

विश्व पर्यावरण दिवस 2026 हरित विकास, जल संरक्षण और जनभागीदारी से पर्यावरणीय समृद्धि की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़ रायपुर,    प्रकृति केवल हमारे जीवन का आधार नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और भविष्य की संरक्षक भी है। स्वच्छ वायु, निर्मल जल, घने वन और समृद्ध जैव विविधता किसी भी सभ्य समाज की अमूल्य धरोहर होते हैं। तेजी से बढ़ते शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के इस दौर में पर्यावरण संरक्षण केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व की अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है। इसी उद्देश्य से प्रतिवर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है, जो हमें प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों का स्मरण कराता है। प्राकृतिक संपदा से समृद्ध छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में शामिल है, जहां पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य के विशाल वन क्षेत्र, समृद्ध जैव विविधता और जल संसाधन इसकी पर्यावरणीय पहचान हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार हरित विकास, जल संरक्षण और जनभागीदारी को केंद्र में रखकर अनेक योजनाओं का सफल संचालन कर रही है। हरियाली से समृद्धि की ओर छत्तीसगढ़ में वृक्षारोपण को केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय से भी जोड़ा गया है। ’हरियाली प्रसार योजना’ और ’किसान वृक्ष मित्र योजना’ के माध्यम से किसानों को कृषि वानिकी के लिए पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं तथा उन्हें अपनी भूमि पर वृक्ष लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे एक ओर हरित क्षेत्र का विस्तार हो रहा है तो दूसरी ओर किसानों को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ भी प्राप्त हो रहा है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर संचालित ”एक पेड़ मां के नाम“ अभियान ने पर्यावरण संरक्षण को जनभावनाओं से जोड़ने का कार्य किया है। इस अभियान के माध्यम से लाखों नागरिक अपनी मां के सम्मान में पौधारोपण कर प्रकृति संरक्षण का संदेश दे रहे हैं। यह पहल पर्यावरणीय जिम्मेदारी को सामाजिक आंदोलन का स्वरूप प्रदान कर रही है। शहरों को मिल रही हरित पहचान तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। इस दिशा में ’ऑक्सीवन योजना’ के तहत शहरों में ऑक्सीजन पार्क और हरित क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं। वहीं पर्यावरण वानिकी योजना’ के माध्यम से सड़क किनारे वृक्षारोपण, पर्यावरण पार्कों का निर्माण तथा सार्वजनिक स्थलों का हरित विकास किया जा रहा है। ये प्रयास न केवल प्रदूषण नियंत्रण में सहायक हैं, बल्कि नागरिकों को बेहतर जीवन गुणवत्ता भी प्रदान कर रहे हैं। जल संरक्षण बना जनआंदोलन जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए जल संरक्षण आज सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस दिशा में कई अभिनव पहलें की हैं। ’मोर गांव मोर पानी’ और ’मोर गांव मोर तरिया’ जैसे अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण की नई चेतना पैदा कर रहे हैं। परंपरागत तालाबों का पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन, चेक डैम निर्माण और जल पुनर्भरण संरचनाओं के विकास से भूजल स्तर में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य में ’भूजल एवं जल संरक्षण कार्यक्रमों’ के तहत जल स्रोतों के संरक्षण और संवर्धन पर विशेष बल दिया जा रहा है। जल सुरक्षा की यह सोच आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित भविष्य की नींव रख रही है। नदियों और आर्द्रभूमियों का संरक्षण प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने के लिए ’नदी तट वृक्षारोपण योजना’ के अंतर्गत नदी किनारों पर बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जा रहा है। इससे मिट्टी के कटाव पर नियंत्रण, भूजल संवर्धन और जैव विविधता संरक्षण में मदद मिल रही है। इसी प्रकार आर्द्र भूमि (वेटलैंड) जलवायु अनुकूलन परियोजना के तहत महानदी जलग्रहण क्षेत्र में आर्द्रभूमियों के संरक्षण और पुनर्जीवन का कार्य किया जा रहा है। यह पहल जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और प्राकृतिक जल तंत्र को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। नई पीढ़ी को पर्यावरण का प्रहरी बनाने की पहल पर्यावरण संरक्षण की सफलता जन-जागरूकता और जनभागीदारी पर निर्भर करती है। इसी उद्देश्य से ’राष्ट्रीय हरित कोर योजना (नेशनल ग्रीन कॉर्प्स)’ तथा ’ईको-क्लब कार्यक्रमों’ के माध्यम से स्कूलों और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को पर्यावरणीय गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, जल संरक्षण और जैव विविधता संरक्षण संबंधी कार्यक्रमों के जरिए बच्चों और युवाओं में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित की जा रही है। पर्यावरण संरक्षण : सरकार और समाज की साझा जिम्मेदारी पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है। इसके लिए प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। एक पौधा लगाना, जल की बचत करना, प्लास्टिक का कम उपयोग करना, प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना और स्वच्छता बनाए रखना ऐसे छोटे-छोटे कदम हैं जो बड़े परिवर्तन का आधार बन सकते हैं। विश्व पर्यावरण दिवस हमें यह संदेश देता है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। छत्तीसगढ़ आज हरियाली, जल संरक्षण और जनभागीदारी आधारित विकास मॉडल के माध्यम से इसी संतुलित दृष्टिकोण को साकार कर रहा है। यदि हम सभी प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों को समझें और पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाएं, तो आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ, हरित और सुरक्षित पृथ्वी सौंप सकेंगे। धरती हमें विरासत में नहीं मिली है, बल्कि हमने इसे आने वाली पीढ़ियों से उधार लिया है। इसलिए पर्यावरण की रक्षा करना हम सभी का नैतिक दायित्व है। •  डॉ. दानेश्वरी संभाकर     उपसंचालक, जनसंपर्क  

मोतियाबिंद ऑपरेशन की बड़ी उपलब्धि, छत्तीसगढ़ में 1.63 लाख से ज्यादा लोगों की लौटी रोशनी

रोशनी लौटाने की मुहिम में छत्तीसगढ़ आगे: 1.63 लाख से अधिक मोतियाबिंद ऑपरेशन से हजारों चेहरों पर लौटी मुस्कान सरकारी, NGO और निजी संस्थानों की साझेदारी से 91% लक्ष्य हासिल, 15 जिले बने कैटरेक्ट ब्लाइंडनेस बैकलॉग फ्री रायपुर  छत्तीसगढ़ में आंखों की रोशनी बचाने और मोतियाबिंद से दृष्टिहिनता मुक्त समाज की दिशा में स्वास्थ्य विभाग की पहल लगातार प्रभावी साबित हो रही है। राष्ट्रीय दृष्टिहीनता एवं अल्प दृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य ने वर्ष 2025-26 में निर्धारित लक्ष्य की तुलना में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज करते हुए 1 लाख 63 हजार 641 से अधिक मोतियाबिंद ऑपरेशन पूरे किए गए हैं। यह कुल निर्धारित लक्ष्य का लगभग 91 प्रतिशत है, जिसने प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण और सुलभ नेत्र चिकित्सा सेवाओं की मजबूत तस्वीर प्रस्तुत की है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा Vision 20-20 की अवधारणा के अनुरूप शासकीय संस्थानों, गैर-शासकीय संगठनों (NGO) और निजी अस्पतालों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया गया है। इसका परिणाम यह है कि दूरस्थ क्षेत्रों तक भी नेत्र उपचार सेवाएं पहुँच रही हैं और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। शासन द्वारा अनुबंधित संस्थाओं को नियमानुसार भुगतान सुनिश्चित किए जाने से सेवाओं की निरंतरता और प्रभावशीलता भी बनी हुई है। राज्य में कुल उपलब्धि में शासकीय एवं NGO अस्पतालों की भागीदारी 51 प्रतिशत रही, जबकि निजी क्षेत्र ने 49 प्रतिशत योगदान देकर इस स्वास्थ्य अभियान को गति दी। विभागीय अधिकारियों के अनुसार यह साझेदारी मॉडल न केवल उपचार की पहुँच बढ़ा रहा है, बल्कि समयबद्ध और व्यवस्थित नेत्र चिकित्सा प्रबंधन का भी उदाहरण बन रहा है। कोविड काल में नेत्र ऑपरेशन प्रभावित होने के कारण मोतियाबिंद के लंबित मामलों में वृद्धि हुई थी, लेकिन अब स्वास्थ्य विभाग ने विशेष अभियान चलाकर स्थिति को तेजी से सुधारा है। भारत सरकार की राष्ट्रीय नेत्र ज्योति योजना के तहत घर-घर सर्वे कर चिन्हित मरीजों का उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे जिलों को कैटरेक्ट ब्लाइंडनेस बैकलॉग फ्री स्टेटस (CBBFS) दिलाने की दिशा में ठोस प्रगति हो रही है। प्रदेश के 15 जिले अब तक यह स्टेटस प्राप्त कर चुके हैं, जबकि अन्य जिलों में भी अभियान तेज गति से जारी है। रायपुर स्थित माना का 150 बिस्तरीय नेत्र चिकित्सालय राज्य स्तरीय रेफरल सेंटर के रूप में कार्य करते हुए दूर-दराज के मरीजों को विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध करा रहा है। वहीं, बड़े शहरों में स्थित NGO बेस अस्पतालों के माध्यम से विभिन्न जिलों के मरीजों का प्रोटोकॉल आधारित सुरक्षित ऑपरेशन सुनिश्चित किया जा रहा है। समय पर जांच, पहचान और निःशुल्क उपचार की यह व्यवस्था हजारों लोगों के जीवन में नई रोशनी लेकर आई है और छत्तीसगढ़ को नेत्र स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक मजबूत मॉडल के रूप में स्थापित कर रही है।

छत्तीसगढ़ के उसूर ब्लॉक ने बढ़ाया प्रदेश का मान, नीति आयोग रैंकिंग में मिला दूसरा स्थान

वन मंत्री केदार कश्यप ने दी बीजापुरवासियों को बधाई, मुख्यमंत्री साय बोले – यह सुशासन का प्रमाण रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के 'सुशासन' और जन- कल्याणकारी नीतियों का असर अब राज्य के सबसे दूरस्थ अंचलों में दिखने लगा है। इसी कड़ी में बीजापुर जिले से एक गौरवशाली खबर सामने आई है। नीति आयोग द्वारा जारी देश के आकांक्षी ब्लॉकों की 'चैंपियंस ऑफ द क्वार्टर' (अक्टूबर- दिसंबर 2025) की रिपोर्ट में बीजापुर के उसूर ब्लॉक ने सेंट्रल जोन में पूरे देश में दूसरा स्थान हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन किया है। मुख्यमंत्री साय ने दी बधाई, कहा – यह जनता के भरोसे की जीत है   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर उसूर ब्लॉक और बीजापुर जिले के नागरिकों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं एवं जिला प्रशासन को बधाई दी। उन्होंने कहा, "उसूर ब्लॉक का राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान प्राप्त करना हमारे सुशासन और अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का प्रत्यक्ष प्रमाण है। बस्तर के सुदूर गांवों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना हमारी प्राथमिकता है। उसूर ने कठिन परिस्थितियों में जो कर दिखाया है, वह पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा है। यह सफलता जमीनी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, मितानिन बहनों, एएनएम और डॉक्टरों के समर्पण का परिणाम है। हमारा लक्ष्य अब देश में प्रथम स्थान हासिल करना है।" मंत्री कश्यप ने जताया हर्ष, बढ़ाया हौसला   वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में उसूर ब्लॉक की यह राष्ट्रीय सफलता बेहद गौरवशाली है। उन्होंने कहा, "यह इस बात का सीधा प्रमाण है कि हमारी सरकार की नीतियां प्रदेश के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पूरी प्रामाणिकता के साथ पहुंच रही हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद स्वास्थ्य कर्मियों और जिला प्रशासन ने जो समर्पण दिखाया है, वह सराहनीय है। हमारा संकल्प बस्तर के हर गांव तक विकास की रोशनी पहुंचाना है।" मंत्री कश्यप कहा कि कभी बुनियादी सुविधाओं से दूर माना जाने वाला उसूर ब्लॉक आज देश के लिए विकास का मॉडल बन गया है। इस सफलता का श्रेय जमीनी डॉक्टरों, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और मितानिन बहनों की दिन-रात की मेहनत को जाता है। विकास की नई इबारत: कड़े मानकों पर खरा उतरा उसूर   नीति आयोग ने स्वास्थ्य और सामाजिक विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण संकेतकों के आधार पर मूल्यांकन किया था, जिसमें उसूर ब्लॉक ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया : 1. संचारी रोगों पर नियंत्रण: मलेरिया, डेंगी और अन्य संचारी रोगों की रोकथाम के लिए सुदूर गांवों तक प्रभावी अभियान चलाया गया। 2. सुरक्षित मातृत्व: संस्थागत प्रसव की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई, जिससे शिशु और मातृ मृत्यु दर में भारी कमी आई। 3. सशक्त टीकाकरण कवच: बच्चों और गर्भवती महिलाओं के नियमित टीकाकरण के साथ एचपीवी टीकाकरण को जमीनी स्तर पर सफल बनाया गया। 4. गंभीर बीमारियों की जांच: बीपी, शुगर और कैंसर जैसी गैर-संचारी बीमारियों की मुफ्त जांच व उपचार की सुविधा गांव-गांव तक पहुंचाई गई। अगला संकल्प: देश में हासिल करना है प्रथम स्थान  कलेक्टर विश्वदीप और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और प्रभारी मंत्री केदार कश्यप के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय गौरव पूरे जिले के लिए बड़ी प्रेरणा है। शासन और प्रशासन का अगला लक्ष्य स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को और निखारते हुए आगामी तिमाहियों में देश में पहला स्थान हासिल करना है, जिसके लिए काम तेज कर दिया गया है।

नियमित नियुक्ति की शर्त पर ही संविदाकर्मी की सेवा समाप्ति वैध: हाईकोर्ट

बिलासपुर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने संविदा व अस्थायी कर्मचारियों का अनुबंध खत्म होने के बाद उनकी जगह अस्थायी कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए क्रेडा द्वारा जारी विज्ञापन पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने ऊर्जा सचिव सहित अन्य अफसरों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) द्वारा सेवाकर्ता इकाई संविदा भर्ती के लिए नया विज्ञापन जारी किया था, जिसे लेकर सेवाकर्ता इकाइयों द्वारा अधिवक्ता नरेंद्र मेहेर के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच में हुई। याचिका की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने क्रेडा द्वारा जारी विज्ञापन पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति सेवाकर्ता इकाई के पद पर वित्तीय वर्ष 2025-2026 के लिए हुई थी, जिनका अनुबंध 31 मार्च 2026 को समाप्त हुआ। अनुबंध समाप्त होने के बाद क्रेडा ने याचिकाकर्ताओ की सेवावृद्धि न करते हुए उनके स्थान पर नया विज्ञापन जारी कर दिया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने पैरवी करते हुए कहा कि किसी भी संविदा अथवा अस्थायी कर्मचारियों को उनकी जगह अन्य अस्थायी कर्मचारी रखने की शर्त पर कार्यमुक्त नहीं किया जा सकता है। ऐसे कर्मचारियों को नियमित कर्मचारी नियुक्त किए जाने की स्थिति में ही हटाया जा सकता है। वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने सुप्रीम कोर्ट के न्याय दृष्टांत मनीष गुप्ता विरुद्ध अध्यक्ष जन भागीदारी समिति तथा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायदृष्टांत मंजू गुप्ता विरुद्ध छत्तीसगढ़ शासन तथा अंकिता नामदेव विरुद्ध छत्तीसगढ़ शासन का हवाला दिया। सीनियर एडवोकेट ने बताया कि पूर्व में भी छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) द्वारा टेक्नीशियन संविदा के पद विज्ञापन जारी किया गया था, जिस पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने जारी किए गए विज्ञापन पर रोक लगा दी थी। याचिका की सुनवाई के बाद कोर्ट ने छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) द्वारा सेवाकर्ता इकाई के पद पर जारी विज्ञापन पर रोक लगा दिया है। कोर्ट ने ऊर्जा विभाग के सचिव, अधीक्षण अभियंता (क्रेडा), कार्यपालन अभियंता जोनल कार्यालय तथा सहायक अभियंता को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। 52 कर्मियों ने दायर की है याचिका क्रेडा द्वारा जारी विज्ञापन को चुनौती देते हुए रायपुर जिले के कमलेश कुमार साहू व अन्य नौ, राजनांदगांव जिले के योगेश कुमार साहू व अन्य छह, बेमेतरा जिले से लीलाधर साहू व अन्य छह, खैरागढ़ -गंडई-छईखदान जिले से नरेंद्र कुमार साहू वह अन्य पांच, जयपुर जिले से गणेश कुमार साहू व अन्य 26 ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर की है।

शासकीय व्यय में मितव्ययिता और वित्तीय अनुशासन के लिए वित्त विभाग ने जारी किए नए निर्देश

शासकीय व्यय में मितव्ययिता और वित्तीय अनुशासन के लिए वित्त विभाग ने जारी किए नए निर्देश 30 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेंगे निर्देश, सरकारी खर्चों में कटौती और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर रायपुर छत्तीसगढ़ शासन के वित्त विभाग ने शासकीय व्यय में मितव्ययिता एवं वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वित्त निर्देश जारी किया है। विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार सभी विभागों, संभागीय आयुक्तों, कलेक्टरों तथा विभागाध्यक्षों को सरकारी संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग तथा अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। वित्त विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव द्वारा जारी इन निर्देशों का उद्देश्य राज्य के वित्तीय संसाधनों का कुशल प्रबंधन करना और सार्वजनिक व्यय में अनुशासन स्थापित करना है। यह निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं और 30 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेंगे। कारकेड वाहनों के उपयोग पर नियंत्रण निर्देशों के अनुसार मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद, निगम-मंडल एवं आयोगों के पदाधिकारियों के कारकेड में केवल अत्यावश्यक वाहनों का ही उपयोग किया जाएगा। अन्य शासकीय संसाधनों का भी संयमित उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा राज्य के शासकीय वाहनों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहनों में परिवर्तित करने के लिए आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे ईंधन व्यय में कमी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिल सके। ईंधन और वाहन व्यय में मितव्ययिता पेट्रोल एवं डीजल पर होने वाले व्यय को न्यूनतम स्तर पर रखने के निर्देश दिए गए हैं। एक ही दिशा में जाने वाले अधिकारियों के लिए वाहन पूलिंग व्यवस्था लागू की जाएगी। विदेश यात्राओं पर रोक अत्यंत अपरिहार्य परिस्थितियों को छोड़कर राज्य शासन के व्यय पर शासकीय सेवकों की विदेश यात्राओं पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। आवश्यक होने पर मुख्यमंत्री की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। वर्चुअल बैठकों को प्रोत्साहन भौतिक बैठकों के स्थान पर वर्चुअल एवं ऑनलाइन बैठकों को बढ़ावा दिया जाएगा। निर्देशों के अनुसार भौतिक बैठकें यथासंभव माह में एक बार ही आयोजित की जाएंगी और विभागीय समीक्षा बैठकें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संचालित होंगी। ऊर्जा संरक्षण पर विशेष ध्यान कार्यालयीन समय के बाद सभी विद्युत उपकरण—जैसे लाइट, पंखे, एसी और कंप्यूटर—अनिवार्य रूप से बंद किए जाएंगे। शासकीय भवनों में ऊर्जा की बर्बादी रोकने के लिए आवश्यक उपाय किए जाएंगे। ई-ऑफिस और डिजिटल कार्यप्रणाली को बढ़ावा बैठकों में मुद्रित दस्तावेजों के स्थान पर इलेक्ट्रॉनिक फाइलों (PDF, PPT आदि) का उपयोग किया जाएगा। साथ ही, कार्यालयीन पत्राचार एवं नोटशीट का संचालन अनिवार्य रूप से e-Office के माध्यम से किया जाएगा, ताकि कागज और स्टेशनरी व्यय में कमी लाई जा सके। iGOT कर्मयोगी पोर्टल का अधिकतम उपयोग प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए भौतिक प्रशिक्षण के स्थान पर iGOT कर्मयोगी पोर्टल का उपयोग बढ़ाया जाएगा। विभागों को अपने प्रशिक्षण पाठ्यक्रम इस पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं। वित्त विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है। शासन का मानना है कि इन उपायों से न केवल सरकारी खर्चों में कमी आएगी, बल्कि प्रशासनिक दक्षता और जवाबदेही में भी उल्लेखनीय सुधार होगा।