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अंबाला, सोनीपत और पंचकूला में निकाय चुनाव बने प्रतिष्ठा की लड़ाई, हरियाणा में नेताओं की पूरी ताकत झोंकी

 चंडीगढ़  नगर निगम और नगरपालिका चुनाव इस बार स्थानीय मुद्दों से आगे बढ़कर राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई में बदल गए हैं। अंबाला, सोनीपत, पंचकूला, सांपला और उकलाना में भाजपा और कांग्रेस ने पूरी ताकत झोंक दी है। कहीं पुराने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी आमने-सामने हैं तो कहीं विकास बनाम भ्रष्टाचार और बदहाली चुनावी केंद्र बने हुए हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा तक कई बड़े नेताओं ने चुनाव प्रचार किया। उकलाना में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता कुमारी सैलजा का प्रभाव और कांग्रेस की मजबूत पकड़ मानी जाती रही है, ऐसे में भाजपा के लिए यह किला भेदना आसान नहीं माना जा रहा। भाजपा ट्रिपल इंजन सरकार और विकास कार्यों को मुद्दा बना रही है, जबकि कांग्रेस स्थानीय समस्याओं और भ्रष्टाचार के आरोपों के साथ चुनाव मैदान में है। अब सभी प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में बंद होगी। कुछ जगह निर्दलीय प्रत्याशी भी अपनी ताकत दिखा रहे हैं। सोनीपत नगर निगम चुनाव में भाजपा विकास माडल और ट्रिपल इंजन सरकार को मुद्दा बनाकर प्रचार कर रही है, जबकि कांग्रेस नगर निगम कार्यालय में प्रॉपर्टी आइडी, भ्रष्टाचार और शहर की बदहाल व्यवस्था को चुनावी केंद्र बना रही है। भाजपा प्रत्याशी राजीव जैन अपने नौ महीने के कार्यकाल और सरकार के समर्थन को आधार बनाकर वोट मांग रहे हैं। उनके समर्थन में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली, सांसद मनोज तिवारी और कई मंत्री प्रचार कर चुके हैं। दूसरी ओर कांग्रेस प्रत्याशी कमल दिवान के समर्थन में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, दीपेंद्र हुड्डा, राज बब्बर और अन्य नेता मैदान में उतरे। कांग्रेस पेयजल, सड़क, सीवर, स्ट्रीटलाइट और सफाई व्यवस्था को मुद्दा बना रही है। चुनाव में शहरी मतदाताओं के साथ निगम क्षेत्र में शामिल गांवों के वोट भी अहम माने जा रहे हैं। पंचकूला: संगठनात्मक ताकत और पलायन के असर की परीक्षा पंचकूला नगर निगम चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है। भाजपा प्रत्याशी श्यामलाल बंसल के समर्थन में मुख्यमंत्री सहित कई मंत्री और राष्ट्रीय स्तर के नेता प्रचार में पहुंचे। भाजपा ने कई आजाद उम्मीदवारों को अपने पक्ष में बैठाकर चुनावी माहौल मजबूत करने का प्रयास किया। दूसरी ओर कांग्रेस प्रत्याशी सुधा भारद्वाज को संगठनात्मक कमजोरी और नेताओं के भाजपा में जाने से नुकसान झेलना पड़ा। कांग्रेस विधायक चंद्रमोहन के सहारे चुनाव मैदान में सक्रिय रही। यहां इनेलो और आम आदमी पार्टी भी मैदान में हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच माना जा रहा है। भाजपा 2020 की जीत दोहराने का दावा कर रही है, जबकि कांग्रेस स्थानीय मुद्दों और जनसंपर्क के भरोसे चुनाव लड़ रही है। सांपला पालिका: हुड्डा के प्रभाव क्षेत्र में भाजपा की परीक्षा रोहतक जिले की सांपला नगरपालिका चुनाव इस बार स्थानीय निकाय से आगे बढ़कर राजनीतिक प्रतिष्ठा का केंद्र बन गया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के प्रभाव वाले क्षेत्र में भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी है। चुनाव प्रचार के अंतिम दिन तक भाजपा संगठन और उसके नेता प्रत्याशी के समर्थन में सक्रिय दिखाई दिए। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी रही कि चुनावी गतिविधियों पर प्रदेश स्तर तक लगातार नजर रखी गई। भाजपा इस चुनाव को हुड्डा प्रभाव वाले क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के अवसर के रूप में देख रही है। दूसरी ओर कांग्रेस समर्थित खेमे और निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी रोड शो, नुक्कड़ सभाओं और जनसंपर्क के जरिए पूरी ताकत लगाई। चुनाव में स्थानीय मुद्दों के साथ राजनीतिक साख की लड़ाई भी खुलकर दिखाई दी। ननपा क्षेत्र के 15 हजार 624 मतदाता चेयरमैन पद के 10 और वार्डों के 53 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला करेंगे। उकलाना पालिका: कांग्रेस के गढ़ में कमल खिलाने की चुनौती हिसार जिले की उकलाना नगरपालिका चुनाव इस बार भाजपा के लिए राजनीतिक परीक्षा बन गया है। विधानसभा क्षेत्र में अब तक भाजपा को सफलता नहीं मिली है और यहां कांग्रेस का प्रभाव माना जाता रहा है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता कुमारी सैलजा का ये गृहक्षेत्र है ऐसे में भाजपा ने पहली बार चुनाव चिह्न पर वरिष्ठ नेता एवं वेयरहाउसिंग कारपोरेशन के पूर्व चेयरमैन श्रीनिवास गोयल की पुत्रवधु निकिता गोयल को मैदान में उतारा है। दूसरी ओर निर्दलीय प्रत्याशी रीमा सोनी को कांग्रेस, इनेलो और आम आदमी पार्टी का समर्थन मिला हुआ है। रीमा पूर्व पार्षद की बेटी हैं। चुनाव प्रचार में मुख्यमंत्री से लेकर कई मंत्री भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में पहुंचे, जबकि कांग्रेस विधायक नरेश सेलवाल और अन्य नेताओं ने भी पूरी ताकत झोंकी। पूर्व मंत्री अनूप धानक भी भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में सक्रिय रहे।

सतलोक आश्रम मामले में बड़ा अपडेट, रामपाल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी की अर्जी लगाई

 हिसार पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने देशद्रोह मामले में जमानत पर रिहा हुए सतलोक आश्रम संचालक रामपाल ने अदालत में भविष्य की पेशियों को लेकर एक अर्जी लगाई है। रामपाल ने अधिवक्ता के माध्यम से अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जैस्मीन शर्मा की अदालत में अर्जी देकर आगामी तारीखों पर वीडियो कान्फ्रेंसिंग (वीसी) के माध्यम से पेश होने की अनुमति मांगी है। अदालत ने इस पर पुलिस से 16 मई को जवाब मांगा है। सतालोक आश्रम संचालक रामपाल और उसके समर्थकों के खिलाफ बरवाला स्थित सतलोक आश्रम में साल 2014 में हुई हिंसा और प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान विभिन्न गंभीर धाराओं में केस दर्ज किए गए थे। पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई के दौरान आश्रम में टकराव हुआ था उस समय पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई के दौरान आश्रम में टकराव हुआ था, जिसमें छह लोगों की मौत हुई थी और पुलिस-प्रशासन को भारी विरोध का सामना करना पड़ा था। उसके बाद रामपाल व अन्य के खिलाफ देशद्रोह समेत विभिन्न आपराधिक धाराओं में मामले दर्ज किए गए थे। इस संबंध में रामपाल के अधिवक्ता महेंद्र सिंह नैन ने बताया कि अदालत में दायर अर्जी में सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए वीसी के माध्यम से अदालत में पेश होने की अनुमति देने की मांग की है। अदालत ने पुलिस से जवाब-तलब किया है। हाल ही में रिहा हुआ है रामपाल बता दें कि रामपाल लंबे समय तक जेल में रहने के बाद हाल ही में हाई कोर्ट से जमानत पर रिहा हुआ है। 16 मई को होने वाली सुनवाई पर पुलिस का पक्ष सुनने के बाद अदालत अपना फैसला देगी। पुलिस ने रामपाल को 19 नवंबर 2014 को गिरफ्तार किया था। 8 दिसंबर 2014 से न्यायिक हिरासत जेल में भेजा था। हाई कोर्ट ने आठ अप्रैल 2026 को रामपाल की नियमित जमानत याचिका स्वीकार की थी। रामपाल चार आपराधिक मामलों में जिला अदालत से बरी हो चुका है, जबकि हत्या के दो मामलों की मिली उम्रकैद की सजा को पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने निलंबित किया हुआ है।

कुमारी सैलजा ने कहा: हरियाणा में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर हालात चिंताजनक

 चंडीगढ़  सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने एनसीआरबी की ताजा रिपोर्ट पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार आने के बाद जिस प्रकार हरियाणा महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में देश में शीर्ष स्थान पर पहुंच गया है, वह बेहद गंभीर और चिंताजनक स्थिति है। सासंद कुमारी सैलजा ने कहा कि एनसीआरबी के आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि प्रदेश में कानून व्यवस्था लगातार कमजोर हुई है। रिपोर्ट के अनुसार नाबालिग लड़कियों की तस्करी के मामलों में हरियाणा देश में सबसे आगे है और महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं। यह स्थिति हरियाणा जैसे प्रगतिशील प्रदेश के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। कुमारी सैैलजा ने कहा कि हरियाणा को विकास, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में देश के लिए उदाहरण बनना चाहिए था, लेकिन आज प्रदेश अपराध, भय और असुरक्षा की घटनाओं के कारण चर्चा में है। महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा को लेकर आम परिवारों में चिंता का माहौल है। सांसद ने कहा कि प्रदेश में बढ़ता नशा और बेरोजगारी भी अपराधों में वृद्धि का बड़ा कारण बन रहे हैं। युवाओं के सामने रोजगार के अवसर सीमित होते जा रहे हैं, जिसके कारण अपराध और गैंगवार जैसी घटनाओं में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है। यह स्थिति समाज के लिए बेहद खतरनाक संकेत है। कुमारी सैैैलजा ने प्रदेश सरकार से मांग की कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए सख्त और ठोस कदम उठाए जाएं। साथ ही नशे के नेटवर्क पर कड़ी कार्रवाई की जाए तथा युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा कि केवल दावे और प्रचार से स्थिति नहीं सुधरेगी, सरकार को जमीन पर परिणाम देने होंगे। सांसद ने कहा कि कांग्रेस पार्टी प्रदेश की महिलाओं, युवाओं और आम जनता की सुरक्षा एवं सम्मान के मुद्दे को मजबूती से उठाती रहेगी और सरकार को उसकी जिम्मेदारी का अहसास कराती रहेगी। सांसद ने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार देश में 2024 में लडकियों की तस्करी के 1659 केस हुए इनमें सबसे ज्यादा हरियाणा में दर्ज हुए। लोकसेवकों द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार के मामले में हरियाणा देश में तीसरे स्थान पर है। अवैध हथियारों के मामले में हरयिाणा देश में पांचवें स्थान पर है। बाबा केदारनाथ के दर्शन किएः कुमारी सैलजा ने आज प्रात: केदारनाथ मंदिर में बाबा केदारनाथ जी के पावन दर्शन कर विधिवत पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर उन्होंने देशवासियों की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य एवं खुशहाली की कामना की। कुमारी सैलजा ने कहा कि बाबा केदारनाथ का आशीर्वाद समस्त देशवासियों पर बना रहे तथा देश निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर हो। उन्होंने श्रद्धा एवं आस्था के साथ मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश और देश में शांति, भाईचारे एवं जनकल्याण की प्रार्थना भी की।

गन्ना खेती को बढ़ावा: चौड़ी कतार विधि पर हरियाणा में बढ़ी सब्सिडी, किसानों को राहत

 पंचकूला हरियाणा सरकार ने गन्ने की खेती को प्रोत्साहित करने व किसानों को अधिकाधिक लाभ प्रदान करने की योजना तैयार की है। 'गन्ना प्रौद्योगिकी मिशन' के अंतर्गत अब जो किसान चार फीट की दूरी पर चौड़ी कतारों में गन्ना रोपण करेंगे, उन्हें हरियाणा सरकार की ओर से पांच हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। पहले यह राशि किसानों को तीन हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से मिलती थी। दो हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से इसमें बढ़ोतरी की गई है। हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने विभागीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक में कहा कि हरियाणा का किसान केवल अन्न पैदा करने वाला नहीं, बल्कि राज्य की आर्थिक और सामाजिक स्थिरता का सशक्त आधार भी है, इसलिए किसान को मजबूत करना भाजपा सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। उन्होंने बताया कि पांच हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बजट में की थी, जिसे राज्य सरकार द्वारा स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। 15 अक्टूबर से करें आवेदन श्याम सिंह राणा ने बैठक में कहा कि बढ़ी हुई प्रोत्साहन राशि को प्राप्त करने के लिए गन्ना उत्पादक किसानों को पोर्टल के माध्यम से 15 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक आवेदन करना होगा। फरवरी 2027 के अंत तक भौतिक सत्यापन करने के बाद संबंधित किसान को प्रोत्साहन राशि का भुगतान कर दिया जाएगा। उन्होंने जानकारी दी कि किसानों को एकल-आंख विधि से भी गन्ने की बिजाई करने पर प्रोत्साहन राशि बढ़ाकर पांच हजार रुपये प्रति एकड़ की गई है, जो कि पहले तीन हजार रुपये प्रति एकड़ थी। उन्होंने बताया कि प्रदेश की प्रत्येक सहकारी चीनी मिल अपने क्षेत्र के किसानों को शुगरकेन हार्वेस्टर मशीन उपलब्ध करवाएगी, ताकि किसानों की फसल कटाई पर लागत कम हो सके। किसान अक्टूबर से दिसंबर तक पौध लगा सकते हैं कृषि मंत्री के अनुसार टिश्यू कल्चर के माध्यम से गन्ने की उत्पादकता में वृद्धि की जाएगी। इस विधि से तैयार हुई गन्ने की पौध को किसानों को मुफ्त उपलब्ध करवाया जाएगा। करनाल सहकारी चीनी मिल द्वारा यह पौध तैयार होगी। इस मिल से किसान अक्टूबर से दिसंबर तक पौध ले सकते हैं। राणा ने कहा कि इन सभी पहल से किसानों की आय बढ़ाने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयेंद्र कुमार और निदेशक राज नारायण कौशिक समेत कई अधिकारी शामिल हुए।

नायब सिंह सैनी ने शुरू की नई डिजिटल सुविधा, किसानों और आम लोगों को बड़ी राहत

 चंडीगढ़  हरियाणा में अब भवनों के निर्माण के लिए नक्शों की अनुमति ऑनलाइन तरीके से मिलेगी। इसके अलावा, किसानों को उनके वाट्सएप पर जे-फार्म भेजे जाएंगे, जिनके आधार पर वे 72 घंटे के भीतर अपनी फसल की पेमेंट प्राप्त कर सकते हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शुक्रवार को इन दोनों योजनाओं की शुरुआत की। हरियाणा सरकार ने 25 अप्रैल को चालू रबी खरीद सीजन के दौरान एमएसपी पर बेची गई गेहूं, सरसों व चना की फसलों के जे-फार्म किसानों के वाट्सएप पर भेजने की घोषणा की थी। छह मई तक 5 लाख 78 हजार किसानों द्वारा अपनी उपज मंडियों में बेची गई। इन किसानों को 13 लाख 77 हजार जे-फार्म जारी किए गए हैं। यह सुविधा प्रदेश में पहली बार शुरू की गई है। अब किसानों को अपना जे-फार्म लेने के लिए आढ़तियों के पास नहीं जाना पडे़गा। आसानी से मिलेगा अप्रूवल हरियाणा ऑनलाइन बिल्डिंग प्लान अप्रूवल सिस्टम के अंतर्गत डिजिटल प्लेटफार्म काम करेगा, जिसके माध्यम से आम नागरिकों को घर बैठे ही प्लाट और निर्माण से जुड़ी मंजूरी बिना किसी देरी के आसानी से मिल सकेंगी। पहले चरण में, पुरानी नगर पालिकाओं या कोर क्षेत्रों में प्लांड रिहायशी प्लाटों की ऑनलाइन मंजूरी शुरू की गई है। इस सिस्टम से समय की बचत होगी, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा और काम की जवाबदेही तय होगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्लेटफार्म की शुरुआत करते हुए कहा कि अब आम आदमी को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और पूरी प्रक्रिया तेज, पारदर्शी व सरल बनेगी। नया सिस्टम लागू होने से पहले आर्किटेक्ट्स और नगर निकाय अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि आम जनता को किसी भी तरह की परेशानी न हो। उन्होंने जानकारी दी कि जे-फार्म किसानों को वाट्सएप पर भेजकर योजना की शुरुआत की जा चुकी है। भविष्य में फसल की बिक्री के बाद समस्त जे-फार्म किसानों को उनके वाट्सएप नंबर पर ही मिलेंगे। किसानों की कितने हुई आवक? मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने गेहूं खरीद के लिए मंडियों में व्यापक इंतजाम किए हैं। प्रदेश में एक अप्रैल से सात मई तक 84 लाख 18 हजार टन गेहूं की आवक हुई है। इसमें से 83 लाख 75 हजार टन गेहूं की बिक्री हेतु किसानों का बाायोमीट्रिक सत्यापन हो चुका है। उन्होंने कहा कि अब तक 82 लाख 55 हजार टन गेहूं की खरीद की जा चुकी है। एक सवाल के जवाब में नायब सिंह सैनी ने कहा कि बाायोमीट्रिक सत्यापन के लिए किसानों को कोई परेशान नहीं थी, बल्कि विपक्षी दलों के नेताओं को ज्यादा दिक्कत थी। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण कुमार गुप्ता, सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग के महानिदेशक केएम पांडुरंग, शहरी विकास प्राधिकरण के मुख्य प्रशासक चंद्रशेखर खरे और मुख्यमंत्री के मीडिया सचिव प्रवीन आत्रे शामिल रहे।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व को लेकर हरियाणा सरकार की खास तैयारी, CM नायब सैनी का बड़ा बयान

चंडीगढ़. हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 12 ज्योतिर्लिंग की चर्चा करते हुए भारत सरकार द्वारा 11 मई को बनाए जा रहे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व पर प्रकाश डाला है। नायब सैनी ने विचार रखते हुए कहा कि हमारे देश में अनेक ऐसे पूजनीय स्थल हैं, जो हमारी आस्था और संस्कृति को मजबूत बनाते हैं। गुजरात स्थित श्री सोमनाथ मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि यह भारत के आध्यात्मिक संकल्प का जीवंत प्रतीक है। भगवान शिव के 12 आदि ज्योतिर्लिंगों में प्रथम स्थान रखने वाला सोमनाथ मंदिर, भारत के पवित्र भूगोल में एक विशिष्ट स्थान रखता है। यह प्रत्येक भारतीय के जीवन में रचा-बसा हुआ है, जिसके बिना वह अपने अस्तित्व की कल्पना नहीं कर सकता। भारत सरकार 11 मई तक सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मना रही है, जो सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले आक्रमण के एक हजार वर्ष बाद भी मंदिर के शाश्वत और अविनाशी होने का पर्व है। हरियाणा सरकार इस पर्व को उसी भव्यता, आध्यात्म और उत्साह से मनाएगी, जिसकी परिकल्पना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की है। इस मंदिर ने सदियों तक आक्रमण और पुनर्निर्माण का अद्वितीय इतिहास देखा है। वर्ष 1026 में हुए आक्रमण के बाद भी हर बार इसका पुनर्निर्माण हुआ, जो भारतीय समाज की अटूट आस्था और सांस्कृतिक चेतना का प्रमाण है। स्वतंत्रता के पश्चात सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रयासों से मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ और 11 मई 1951 को इसका प्राण-प्रतिष्ठा समारोह सम्पन्न हुआ। इस पर्व को मनाने का यही मूल उद्देश्य है कि कितने ही उतार-चढ़ाव आए, परंतु सोमनाथ हमारी अटूट आस्था का प्रतीक बना रहा और बना रहेगा। यह भारतीय जन मानस के हृदय में वास करता है। यह पर्व उन असंख्य महान विभूतियों को स्मरण करने का भी है, जो सोमनाथ मंदिर पर क्रूर हमलों के बावजूद उनके सम्मुख डटकर खड़े रहे। 1940 के दशक में स्वतंत्रता की भावना पूरे भारत में फैल रही थी, सरदार पटेल जैसे महान नेताओं के नेतृत्व में स्वतंत्र भारत की नींव रखी जा रही थी। ऐसे में उन्हें सोमनाथ मंदिर की दुर्दशा व्यथित कर रही थी। 13 नवंबर 1947 को दीपावली के समय सरदार पटेल ने सोमनाथ के जर्जर अवशेषों के सामने खड़े होकर समुद्र का जल हाथ में लेकर संकल्प लिया था कि सोमनाथ का पुनर्निर्माण होगा। उनके आह्वान ने सिर्फ गुजरात ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारतवर्ष को नये उत्साह से भर दिया। दुर्भाग्यवश सरदार पटेल अपने उस सपने को साकार होते नहीं देख सके, जिसके लिए उन्होंने स्वयं को समर्पित कर दिया था। इससे पहले कि जीर्णोद्धार के बाद सोमनाथ मंदिर भक्तों के लिए खुलता, उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस पावन अवसर पर सोमनाथ के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की है, क्योंकि बीते 75 वर्षों में यह मंदिर केवल पुनर्निर्माण का प्रतीक नहीं रहा, बल्कि भारत के सांस्कृतिक आत्मविश्वास और अटूट आस्था का सशक्त केंद्र बनकर उभरा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी श्री सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने अध्यक्ष होने के नाते भी इस विरासत को संजोकर रखने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प लिया है। आज सोमनाथ मंदिर भव्य वास्तुकला, आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक विरासत का अद्वितीय संगम है। यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि देश की आत्मा से जुड़ा एक जीवंत तीर्थ है, जो हर दिन लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। प्रधानमंत्री मोदी ने देश भर के धार्मिक एवं तीर्थ स्थलों को विश्वविख्यात कर हिंदू धर्म को प्रखर प्रतिनिधित्व दिया है। उन्होंने विकास भी विरासत भी के मूल मंत्र से प्रेरित होकर सोमनाथ से काशी, कामाख्या से केदारनाथ, अयोध्या से उज्जैन तक आध्यात्मिक केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया है। साथ ही, उनकी पारंपरिक पहचान को भी बरकरार रखा है। यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व ने हिंदू धर्म को पुनर्जीवित किया है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि इस अदभुत धार्मिक शक्ति के दर्शन मात्र से ही आपको अविस्मरणीय अनुभूति होगी।

सोमनाथ मंदिर को बताया भारत की आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक, सीएम सैनी का विचार

 चंडीगढ़  हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 12 ज्योतिर्लिंग की चर्चा करते हुए भारत सरकार द्वारा 11 मई को बनाए जा रहे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व पर प्रकाश डाला है, नायब सैनी के विचार कुछ इस प्रकार है… हमारे देश में अनेक ऐसे पूजनीय स्थल हैं, जो हमारी आस्था और संस्कृति को मजबूत बनाते हैं। गुजरात स्थित श्री सोमनाथ मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि यह भारत के आध्यात्मिक संकल्प का जीवंत प्रतीक है। भगवान शिव के 12 आदि ज्योतिर्लिंगों में प्रथम स्थान रखने वाला सोमनाथ मंदिर, भारत के पवित्र भूगोल में एक विशिष्ट स्थान रखता है। यह प्रत्येक भारतीय के जीवन में रचा-बसा हुआ है, जिसके बिना वह अपने अस्तित्व की कल्पना नहीं कर सकता। भारत सरकार 11 मई तक सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मना रही है, जो सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले आक्रमण के एक हजार वर्ष बाद भी मंदिर के शाश्वत और अविनाशी होने का पर्व है। हरियाणा सरकार इस पर्व को उसी भव्यता, आध्यात्म और उत्साह से मनाएगी, जिसकी परिकल्पना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की है। इस मंदिर ने सदियों तक आक्रमण और पुनर्निर्माण का अद्वितीय इतिहास देखा है। वर्ष 1026 में हुए आक्रमण के बाद भी हर बार इसका पुनर्निर्माण हुआ, जो भारतीय समाज की अटूट आस्था और सांस्कृतिक चेतना का प्रमाण है। स्वतंत्रता के पश्चात सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रयासों से मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ और 11 मई 1951 को इसका प्राण-प्रतिष्ठा समारोह सम्पन्न हुआ। इस पर्व को मनाने का यही मूल उद्देश्य है कि कितने ही उतार-चढ़ाव आए, परंतु सोमनाथ हमारी अटूट आस्था का प्रतीक बना रहा और बना रहेगा। यह भारतीय जन मानस के हृदय में वास करता है। यह पर्व उन असंख्य महान विभूतियों को स्मरण करने का भी है, जो सोमनाथ मंदिर पर क्रूर हमलों के बावजूद उनके सम्मुख डटकर खड़े रहे। 1940 के दशक में स्वतंत्रता की भावना पूरे भारत में फैल रही थी, सरदार पटेल जैसे महान नेताओं के नेतृत्व में स्वतंत्र भारत की नींव रखी जा रही थी। ऐसे में उन्हें सोमनाथ मंदिर की दुर्दशा व्यथित कर रही थी। 13 नवंबर 1947 को दीपावली के समय सरदार पटेल ने सोमनाथ के जर्जर अवशेषों के सामने खड़े होकर समुद्र का जल हाथ में लेकर संकल्प लिया था कि सोमनाथ का पुनर्निर्माण होगा। उनके आह्वान ने सिर्फ गुजरात ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारतवर्ष को नये उत्साह से भर दिया। दुर्भाग्यवश सरदार पटेल अपने उस सपने को साकार होते नहीं देख सके, जिसके लिए उन्होंने स्वयं को समर्पित कर दिया था। इससे पहले कि जीर्णोद्धार के बाद सोमनाथ मंदिर भक्तों के लिए खुलता, उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस पावन अवसर पर सोमनाथ के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की है, क्योंकि बीते 75 वर्षों में यह मंदिर केवल पुनर्निर्माण का प्रतीक नहीं रहा, बल्कि भारत के सांस्कृतिक आत्मविश्वास और अटूट आस्था का सशक्त केंद्र बनकर उभरा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी श्री सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने अध्यक्ष होने के नाते भी इस विरासत को संजोकर रखने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प लिया है। आज सोमनाथ मंदिर भव्य वास्तुकला, आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक विरासत का अद्वितीय संगम है। यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि देश की आत्मा से जुड़ा एक जीवंत तीर्थ है, जो हर दिन लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। प्रधानमंत्री मोदी ने देश भर के धार्मिक एवं तीर्थ स्थलों को विश्वविख्यात कर हिंदू धर्म को प्रखर प्रतिनिधित्व दिया है। उन्होंने विकास भी विरासत भी के मूल मंत्र से प्रेरित होकर सोमनाथ से काशी, कामाख्या से केदारनाथ, अयोध्या से उज्जैन तक आध्यात्मिक केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया है। साथ ही, उनकी पारंपरिक पहचान को भी बरकरार रखा है। यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व ने हिंदू धर्म को पुनर्जीवित किया है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि इस अदभुत धार्मिक शक्ति के दर्शन मात्र से ही आपको अविस्मरणीय अनुभूति होगी। – लेखक नायब सिंह सैनी, मुख्यमंत्री, हरियाणा

हल्दी से कैंसर पर वार! हरियाणा की यूनिवर्सिटी तैयार कर रही खास नैनो-जैल तकनीक

हिसार. महिलाओं में तेजी से बढ़ रहे ब्रेस्ट कैंसर मामलों के बीच गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (जीजेयू) में हर्बल आधारित नैनो-जैल पर शोध शुरू किया गया है। फार्मास्युटिकल साइंसिज विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. रेखा राव इस शोध के माध्यम से ऐसी जैल विकसित करने पर काम कर रही हैं, जो शुरुआती स्तर पर कैंसर कोशिकाओं की पहचान और लक्षित उपचार में सहायक हो सके। शोध में गुरुग्राम स्थित डीपीजी यूनिवर्स कालेज की डॉ. वर्षा भी सहयोग कर रही हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार नैनो फार्मूलेशन तकनीक पर आधारित यह जैल प्रभावित हिस्से पर सीधे काम करने के सिद्धांत पर विकसित की जा रही है। इसमें हल्दी के सक्रिय तत्व ‘कुरकुमिन’ जैसे हर्बल घटकों का उपयोग किया जाएगा, जिससे साइड इफेक्ट कम रहने की संभावना जताई जा रही है। शोध पूरा होने पर इसका पेटेंट कराया जाएगा। जानें… क्या है नैनो-जैल तकनीक शोध के तहत विकसित की जा रही जैल नैनो फार्मूलेशन तकनीक पर आधारित होगी। इसका उद्देश्य कैंसर कोशिकाओं को लक्षित कर दवा के प्रभाव को प्रभावित हिस्से तक केंद्रित करना है। शोधकर्ताओं के अनुसार वर्तमान उपचार में दवाओं की अधिक मात्रा और उनके व्यापक प्रभाव से शरीर पर दुष्प्रभाव पड़ते हैं। नैनो-जैल तकनीक इस चुनौती को कम करने की दिशा में उपयोगी हो सकती है। हरियाणा में बढ़ रहे ब्रेस्ट कैंसर के मामले हर साल लगभग 8 हजार से 10 हजार नए ब्रेस्ट कैंसर मामले सामने आने का अनुमान है। गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला और हिसार जैसे शहरी क्षेत्रों में मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। विशेषज्ञ बदलती जीवनशैली, तनाव, खानपान और जागरूकता की कमी को प्रमुख कारण मानते हैं। चिकित्सकों के अनुसार अधिकांश महिलाएं शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं, जिससे बीमारी कई बार तीसरे या चौथे चरण में सामने आती है। साइड इफेक्ट कम करने का प्रयास इस जैल में हल्दी से प्राप्त ‘कुरकुमिन’ जैसे हर्बल तत्वों का उपयोग किया जाएगा। शोधकर्ताओं का मानना है कि हर्बल बेस होने के कारण इसके दुष्प्रभाव कम हो सकते हैं। जैल को त्वचा पर लगाने योग्य रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है, ताकि प्रभावित हिस्से पर सीधे उपयोग संभव हो सके।

नायब सरकार की नई पहल: किसानों और लोगों को घर बैठे मिलेंगी बड़ी सुविधाएं

चंडीगढ़. हरियाणा में अब भवनों के निर्माण के लिए नक्शों की अनुमति ऑनलाइन तरीके से मिलेगी। इसके अलावा, किसानों को उनके वाट्सएप पर जे-फार्म भेजे जाएंगे, जिनके आधार पर वे 72 घंटे के भीतर अपनी फसल की पेमेंट प्राप्त कर सकते हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने दोनों योजनाओं की शुरुआत की। हरियाणा सरकार ने चालू रबी खरीद सीजन के दौरान एमएसपी पर बेची गई गेहूं, सरसों व चना की फसलों के जे-फार्म किसानों के वाट्सएप पर भेजने की घोषणा की थी। छह मई तक 5 लाख 78 हजार किसानों द्वारा अपनी उपज मंडियों में बेची गई। इन किसानों को 13 लाख 77 हजार जे-फार्म जारी किए गए हैं। यह सुविधा प्रदेश में पहली बार शुरू की गई है। अब किसानों को अपना जे-फार्म लेने के लिए आढ़तियों के पास नहीं जाना पडे़गा। आसानी से मिलेगा अप्रूवल हरियाणा ऑनलाइन बिल्डिंग प्लान अप्रूवल सिस्टम के अंतर्गत डिजिटल प्लेटफार्म काम करेगा, जिसके माध्यम से आम नागरिकों को घर बैठे ही प्लाट और निर्माण से जुड़ी मंजूरी बिना किसी देरी के आसानी से मिल सकेंगी। पहले चरण में, पुरानी नगर पालिकाओं या कोर क्षेत्रों में प्लांड रिहायशी प्लाटों की ऑनलाइन मंजूरी शुरू की गई है। इस सिस्टम से समय की बचत होगी, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा और काम की जवाबदेही तय होगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्लेटफार्म की शुरुआत करते हुए कहा कि अब आम आदमी को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और पूरी प्रक्रिया तेज, पारदर्शी व सरल बनेगी। नया सिस्टम लागू होने से पहले आर्किटेक्ट्स और नगर निकाय अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि आम जनता को किसी भी तरह की परेशानी न हो। उन्होंने जानकारी दी कि जे-फार्म किसानों को वाट्सएप पर भेजकर योजना की शुरुआत की जा चुकी है। भविष्य में फसल की बिक्री के बाद समस्त जे-फार्म किसानों को उनके वाट्सएप नंबर पर ही मिलेंगे। किसानों की कितने हुई आवक? मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने गेहूं खरीद के लिए मंडियों में व्यापक इंतजाम किए हैं। प्रदेश में एक अप्रैल से सात मई तक 84 लाख 18 हजार टन गेहूं की आवक हुई है। इसमें से 83 लाख 75 हजार टन गेहूं की बिक्री हेतु किसानों का बाायोमीट्रिक सत्यापन हो चुका है। उन्होंने कहा कि अब तक 82 लाख 55 हजार टन गेहूं की खरीद की जा चुकी है। एक सवाल के जवाब में नायब सिंह सैनी ने कहा कि बाायोमीट्रिक सत्यापन के लिए किसानों को कोई परेशान नहीं थी, बल्कि विपक्षी दलों के नेताओं को ज्यादा दिक्कत थी। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण कुमार गुप्ता, सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग के महानिदेशक केएम पांडुरंग, शहरी विकास प्राधिकरण के मुख्य प्रशासक चंद्रशेखर खरे और मुख्यमंत्री के मीडिया सचिव प्रवीन आत्रे शामिल रहे।

हल्दी के ‘कुरकुमिन’ से कैंसर उपचार की नई उम्मीद, GJU में शुरू हुआ खास शोध

 हिसार  महिलाओं में तेजी से बढ़ रहे ब्रेस्ट कैंसर मामलों के बीच गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (जीजेयू) में हर्बल आधारित नैनो-जैल पर शोध शुरू किया गया है। फार्मास्युटिकल साइंसिज विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. रेखा राव इस शोध के माध्यम से ऐसी जैल विकसित करने पर काम कर रही हैं, जो शुरुआती स्तर पर कैंसर कोशिकाओं की पहचान और लक्षित उपचार में सहायक हो सके। शोध में गुरुग्राम स्थित डीपीजी यूनिवर्स कालेज की डॉ. वर्षा भी सहयोग कर रही हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार नैनो फार्मूलेशन तकनीक पर आधारित यह जैल प्रभावित हिस्से पर सीधे काम करने के सिद्धांत पर विकसित की जा रही है। इसमें हल्दी के सक्रिय तत्व ‘कुरकुमिन’ जैसे हर्बल घटकों का उपयोग किया जाएगा, जिससे साइड इफेक्ट कम रहने की संभावना जताई जा रही है। शोध पूरा होने पर इसका पेटेंट कराया जाएगा। जानें… क्या है नैनो-जैल तकनीक शोध के तहत विकसित की जा रही जैल नैनो फार्मूलेशन तकनीक पर आधारित होगी। इसका उद्देश्य कैंसर कोशिकाओं को लक्षित कर दवा के प्रभाव को प्रभावित हिस्से तक केंद्रित करना है। शोधकर्ताओं के अनुसार वर्तमान उपचार में दवाओं की अधिक मात्रा और उनके व्यापक प्रभाव से शरीर पर दुष्प्रभाव पड़ते हैं। नैनो-जैल तकनीक इस चुनौती को कम करने की दिशा में उपयोगी हो सकती है। हरियाणा में बढ़ रहे ब्रेस्ट कैंसर के मामले हर साल लगभग 8 हजार से 10 हजार नए ब्रेस्ट कैंसर मामले सामने आने का अनुमान है। गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला और हिसार जैसे शहरी क्षेत्रों में मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। विशेषज्ञ बदलती जीवनशैली, तनाव, खानपान और जागरूकता की कमी को प्रमुख कारण मानते हैं। चिकित्सकों के अनुसार अधिकांश महिलाएं शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं, जिससे बीमारी कई बार तीसरे या चौथे चरण में सामने आती है। हर्बल तत्वों पर फोकस, साइड इफेक्ट कम करने का प्रयास इस जैल में हल्दी से प्राप्त ‘कुरकुमिन’ जैसे हर्बल तत्वों का उपयोग किया जाएगा। शोधकर्ताओं का मानना है कि हर्बल बेस होने के कारण इसके दुष्प्रभाव कम हो सकते हैं। जैल को त्वचा पर लगाने योग्य रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है, ताकि प्रभावित हिस्से पर सीधे उपयोग संभव हो सके।