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‘हर दावे के पीछे तथ्य, साक्ष्य और तर्क जरूरी’, लॉ स्टूडेंट्स से बोले CM योगी

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (RMLNLU) के पांचवें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने विकसित भारत की परिकल्पना को एक मुकदमे के उदाहरण से समझाया. इस दौरान उन्होंने कहा कि अगर केस नंबर 2047 हो और उसका विषय विकसित भारत हो, तो इस मामले में 140 करोड़ भारतीय याचिकाकर्ता होंगे. उनकी ओर से दलील रखने वाले अधिवक्ता को हर दावे के समर्थन में तथ्य, साक्ष्य और तर्क पेश करने होंगे।  मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत की बात करते समय यह बात ध्यान में जरूर रखना होगा कि देश के भविष्य से जुड़े हर दावे को तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर साबित किया जाना भी जरूरी है. इसके लिए ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी निभाना भी जरूरी है।  सच बोलना और लगातार अध्ययन करना जरूरी इस दौरान योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में प्राचीन भारतीय शिक्षा परंपरा के बारे में बोलते हुए कहा कि सत्यं वद: धर्मं चर: स्वाध्यायान्मा प्रमदः. इसका अर्थ है सत्य बोलना, धर्म का आचरण करना और अध्ययन में कभी आलस्य नहीं करना. उन्होंने कहा कि किसी अधिवक्ता के लिए इससे बेहतर कार्य-निर्देश नहीं हो सकता. मुख्यमंत्री ने दीक्षांत समारोह की परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि उपाधि प्राप्त करने वाले छात्र भले ही नए गाउन पहनते हों, लेकिन भारत का दीक्षांत उपदेश हजारों वर्ष पुराना है. उन्होंने कहा कि गुरुकुलों और विश्वविद्यालयों में इस शिक्षा को लंबे समय से जीवन का हिस्सा बनाया जाता रहा है।  आपातकाल और न्यायपालिका की भूमिका का किया जिक्र मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में देश के लोकतांत्रिक इतिहास और न्यायपालिका की भूमिका का भी उल्लेख किया. उन्होंने 12 जून 1975 को इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले का जिक्र किया, जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के चुनाव को रद्द कर दिया गया था. इसके 13 दिन बाद, 25 जून 1975 को देश में आपातकाल लागू किया गया था. उन्होंने न्यायमूर्ति एचआर खन्ना की असहमति का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ी, लेकिन इतिहास में उनकी असहमति का महत्व बना रहा. योगी आदित्यनाथ ने साल 2017 में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का भी जिक्र किया, जिसमें न्यायमूर्ति खन्ना की असहमति को सही माना गया था।  मुख्यमंत्री ने कहा कि 1975 के दौर ने देश को यह समझाया कि ‘रूल ऑफ लॉ’ यानी कानून का शासन और ‘रूलर ऑफ लॉ’ यानी शासक का कानून अलग-अलग अवधारणाएं हैं. उनके मुताबिक, लोकतंत्र में कानून का शासन सर्वोपरि होना चाहिए।  उत्तर प्रदेश की छवि और निवेश पर भी बोले योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की पहले की छवि का जिक्र करते हुए कहा कि करीब 10 साल पहले राज्य में निवेश की बात करने पर लोग सवाल उठाते थे. उस समय कानून-व्यवस्था, कनेक्टिविटी, निर्यात और स्पष्ट नीतियों को लेकर चिंताएं जताई जाती थीं. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को कभी बीमारू राज्यों की श्रेणी में रखा जाता था और लोगों के मन में यह धारणा बन गई थी कि राज्य में सुधार नहीं हो सकता. मुख्यमंत्री ने कहा कि संसद में भी उन्होंने ऐसी सोच देखी थी, जहां उत्तर प्रदेश की स्थिति को लेकर निराशा जताई जाती थी। 

UP Election 2027: BJP की वापसी या सत्ता परिवर्तन? चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की सियासत में साल 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर अभी से जोड़-तोड़ और सियासी बयानबाजी का दौर तेज हो गया है. चुनाव से ठीक पहले सूबे की हवा किस तरफ बह रही है और जनता के मन में क्या चल रहा है, इसे जानने के लिए न्यूज18 ने मेगा सर्वे किया है. इस मेगा सर्वे के आंकड़े राजनीतिक दलों की धड़कनें बढ़ाने वाले हैं. सर्वे में जनता से सीधा सवाल किया गया कि उत्तर प्रदेश में अगली सरकार किसकी बनेगी, जिसके नतीजों ने तस्वीर काफी हद तक साफ कर दी है।  जनता के बीच जाकर किए गए इस सबसे बड़े ओपिनियन पोल में जब यह पूछा गया कि आगामी चुनाव में किसकी सरकार बनेगी, तो मतदाताओं ने खुलकर अपनी राय रखी. सर्वे के आंकड़े इस प्रकार हैं:     बीजेपी गठबंधन: राज्य के 67 प्रतिशत लोगों ने भरोसा जताया है कि उत्तर प्रदेश में एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) गठबंधन की सरकार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करेगी।      सपा-कांग्रेस गठबंधन: मुख्य विपक्षी दल के रूप में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन को 26 प्रतिशत लोगों का समर्थन मिलता नजर आ रहा है.     बहुजन समाज पार्टी (BSP): मायावती के नेतृत्व वाली बसपा को इस सर्वे में 5 प्रतिशत लोगों का साथ मिला है।      अन्य और कह नहीं सकते: अन्य दलों के खाते में 1 प्रतिशत और कोई भी स्पष्ट राय न रखने वाले ‘कह नहीं सकते’ वर्ग में भी 1 प्रतिशत लोग शामिल रहे।  युवाओं की भागीदारी सबसे ज्यादा सर्वे में उम्र के हिसाब से 26 से 35 साल के लोगों की हिस्सेदारी सबसे अधिक 36% रही. 36 से 45 वर्ष के आयु वर्ग के 29% और 18 से 25 साल के 17% लोगों से बातचीत की गई. 46 से 55 वर्ष के लोगों की हिस्सेदारी 11%, 56 से 65 वर्ष की 5% और 66 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों की हिस्सेदारी 1% बताई गई. लिंग के आधार पर सर्वे में 76% पुरुष और 24% महिलाएं शामिल थीं. इस अनुपात को ध्यान में रखना जरूरी है, क्योंकि सर्वे में दोनों समूहों की भागीदारी बराबर नहीं थी।  क्यों विश्वसनीय है यह सर्वे? इस मेगा सर्वे के दायरे और इसकी पारदर्शिता का अंदाजा इसके सैंपल साइज से लगाया जा सकता है. यह सर्वे उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में किया गया।  भागीदारी: सर्वे टीमों ने घर-घर जाकर कुल 30,925 लोगों से आमने-सामने बात की, जिसमें गांव और शहर दोनों के 18 वर्ष से अधिक आयु के लोग शामिल रहे।  डेमोग्राफिक्स: इसमें 18 से 66+ वर्ष तक के आयु वर्ग, 76% पुरुष और 24% महिलाओं के साथ-साथ व्यापारी, किसान, छात्र, कामगार, बेरोजगार और नौकरीपेशा हर वर्ग की राय ली गई।  सामाजिक समीकरण: सर्वे में विभिन्न जातियों (OBC 45.8%, सामान्य 35.8%, SC 14.7%, ST 2.4%) और प्रमुख धर्मों के मतदाताओं को शामिल कर पूरी तरह संतुलित ओपिनियन पोल तैयार किया गया। 

यूपी के 75 जिलों में 124 वन स्टॉप सेंटर, 3.18 लाख मामलों में महिलाओं को मिली मदद

बंदिशों से बेखौफ उड़ान तक वन स्टॉप सेंटर से संवर रही महिलाओं की जिंदगी, मुश्किलों को मात देकर आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़ रहीं बेटियां लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण को मजबूत करने के लिए संचालित वन स्टॉप सेंटर संकटग्रस्त महिलाओं को सुरक्षा, परामर्श और पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। लखनऊ की तीन महिलाओं की कहानियां इस पहल के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाती हैं। पारिवारिक बंदिशों से जूझ रही एक युवती ने काउंसलिंग के बाद पढ़ाई जारी रखी और आज उच्च पद पर सेवाएं देकर जिम्मेदारी निभा रही है। वहीं, शोषण की शिकार एक बालिका ने मुश्किलों से उबरकर प्रतिष्ठित होटल में नौकरी हासिल की। घरेलू प्रताड़ना से प्रभावित एक अन्य महिला भी शिक्षा और रोजगार के सहारे आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ रही है। काउंसलिंग से बदली परिवार की सोच महिला कल्याण विभाग की निदेशक सी. इंदुमति ने बताया कि लखनऊ की 31 वर्षीय युवती ने वन स्टॉप सेंटर को ईमेल भेजकर जानकारी दी कि परिजन उन्हें उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से रोक रहे हैं। पारिवारिक तनाव के बीच सेंटर की टीम ने उनके घर पहुंचकर परिजनों से बातचीत की। इसके बाद सुरक्षित और गोपनीय माहौल में काउंसलिंग कराई गई। टीम के समझाने पर परिवार ने युवती को पढ़ाई जारी रखने की स्वतंत्रता दी। वन स्टॉप सेंटर पर काउंसलिंग से युवती को मुश्किल परिस्थितियों से उबरकर आगे बढ़ने का हौसला मिला। उसने अपनी पढ़ाई पूरी की और प्रतिष्ठित पद पर सेवाएं देकर नई मिसाल पेश कर रही है। शोषण से निकलकर होटल में बनाई पहचान लखनऊ की एक बालिका ने 16 वर्ष की उम्र में वन स्टॉप सेंटर पहुंचकर बचपन से हो रहे पारिवारिक शोषण की जानकारी दी। सेंटर ने उसे काउंसलिंग और संरक्षण उपलब्ध कराने के साथ कानूनी कार्रवाई में सहयोग किया। बाल कल्याण समिति के आदेश पर उसे राजकीय संरक्षण में रखा गया और शिक्षा जारी रही। 12वीं उत्तीर्ण करने के बाद उसे बेंगलुरु के इको संस्थान में होटल मैनेजमेंट का प्रशिक्षण दिलाया गया। आज वह लखनऊ के होटल में नौकरी कर रही है। घरेलू प्रताड़ना से मुक्ति, अब पढ़ाई और नौकरी लखनऊ की एक अन्य 31 वर्षीय महिला ने शिकायत की कि पति उसे बंधक बनाकर शारीरिक, मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना दे रहा है। वन स्टॉप सेंटर की टीम पुलिस के साथ मौके पर पहुंची और महिला को सुरक्षित निकाला। सेंटर में 12 दिन के अस्थायी आश्रय के दौरान काउंसलिंग की गई। महिला को उसका विवाह संबंधी सामान वापस दिलाने और सुरक्षित मायके पहुंचाने में भी मदद मिली। अब वह स्वतंत्र रूप से रहकर पढ़ाई और नौकरी कर रही है। प्रदेश के 75 जिलों में 124 केंद्र, 3.18 लाख मामलों में मदद महिला कल्याण विभाग की निदेशक सी. इंदुमति ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित वन स्टॉप सेंटर योजना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश के सभी 75 जिलों में 124 केंद्र संचालित हैं। इनके माध्यम से अब तक करीब 3,18,500 मामलों में महिलाओं और बालिकाओं को सहायता दी गई है। केंद्रों पर अस्थायी आश्रय, चिकित्सकीय सहायता, परामर्श, विधिक मदद और पुलिस सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

समाजवादी पार्टी शिक्षा की घोषित दुश्मन: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

बैलेट पेपर से हो रहा है चुनाव, न्याय के पक्ष में परिणाम देने का काम जनता-जनार्दन का: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश विधान परिषद के लखनऊ खंड स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के भाजपा सम्मेलन को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया संबोधित। समाजवादी पार्टी शिक्षा की घोषित दुश्मन: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शिक्षकों का अपमान और शिक्षा व्यवस्था की उपेक्षा सपा की राजनीति का आधार: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ‘सपा ने वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया दिया, हमने वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट और वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज दिया’ परिवारवाद और वंशवाद की विषबेल को उखाड़ फेंकें, आपका प्रतिनिधि वह बने जिसमें जज्बा और सामर्थ्य हो : मुख्यमंत्री योगी संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करने की प्रवृत्ति का जवाब बनेगा यह चुनाव : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शिक्षकों को पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज, दुर्घटना पर 40 लाख से 1.5 करोड़ रुपये तक बीमा सुरक्षा अधिवक्ताओं को भी पांच लाख रुपये तक कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा, मृत्यु पर परिवार को पांच लाख रुपये की सहायता का प्रावधान लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह शिक्षा की घोषित दुश्मन है। शिक्षा व्यवस्था की उपेक्षा और शिक्षकों का अपमान उसकी राजनीति का आधार रहा है। उन्होंने कहा कि सपा सरकार के समय शिक्षण संस्थानों पर पेशेवर गुंडों का दबदबा था और युवाओं के सामने पहचान का संकट खड़ा हुआ। इसके विपरीत, भाजपा सरकार ने शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए काम किया है। मुख्यमंत्री ने शिक्षक एवं स्नातक मतदाताओं से अपील की कि वे इस चुनाव में परिवारवाद और वंशवाद को नकारते हुए योग्य और सक्षम प्रतिनिधि चुनें। 'शिक्षक-स्नातक सम्मेलन' में जनता को किया संबोधित उत्तर  प्रदेश विधान परिषद के आगामी लखनऊ खंड स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर लखनऊ में  'शिक्षक-स्नातक सम्मेलन' का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल हुए एवं कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। यह सम्मेलन लखनऊ स्नातक क्षेत्र से भाजपा के प्रत्याशी इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह और लखनऊ शिक्षक क्षेत्र से प्रत्याशी उमेश द्विवेदी के समर्थन में आयोजित किया गया था।  कार्यक्रम में पहुंचने पर क्षेत्रीय अध्यक्ष अवधेश द्विवेदी, भाजपा प्रदेश महामंत्री दिलीप पटेल और दोनों प्रत्याशियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का  बुके भेंट कर भव्य स्वागत व अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री को अंगवस्त्र ,पुष्पगुच्छ भेंट किया गया और स्मृति चिह्न के रूप में भगवान श्रीराम की प्रतिमा भेंट की गई। मुख्यमंत्री ने लखनऊ खंड के मतदाता महासम्मेलन को संबोधित करते हुए सपा की नीतियों पर सवाल उठाए और शिक्षकों, युवाओं तथा अधिवक्ताओं के हित में सरकार की ओर से किए गए कार्यों का उल्लेख किया। ‘समाजवादी पार्टी शिक्षा की घोषित दुश्मन’ मुख्यमंत्री ने कहा, “शिक्षा की व्यवस्था की उपेक्षा, शिक्षकों का अपमान, यहीं से समाजवादी पार्टी ने अपनी राजनीति की थी।” उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के समय शिक्षण संस्थानों में पेशेवर गुंडे हावी हो जाते थे और शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। उनके अनुसार, शिक्षा और युवा पिछली सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल नहीं थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा की व्यवस्था कमजोर होने का असर केवल शिक्षकों और विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे समाज, प्रदेश और देश का भविष्य भी प्रभावित होता है। उन्होंने शिक्षकों के सम्मान, विद्यालयों की सुविधाओं और युवाओं के अवसरों को बेहतर बनाने की जरूरत पर जोर दिया। ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया’ के मुकाबले वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट मुख्यमंत्री ने सपा सरकार पर माफिया के प्रभाव को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा, “समाजवादी पार्टी ने 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया' दिया, हमने 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट' दिया, 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज' दिया।” उन्होंने कहा कि पहले प्रदेश में माफिया जमीनों पर कब्जा कर लेते थे और आम लोगों, शिक्षकों तथा सरकारी संपत्तियों की जमीनों को भी निशाना बनाया जाता था। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि भाजपा सरकार ने कानून-व्यवस्था में सुधार के साथ विकास को प्राथमिकता दी है। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों के विस्तार, बेहतर कनेक्टिविटी और निवेश से रोजगार के अवसर बढ़ने का भी उल्लेख किया। ‘परिवारवाद और वंशवाद की विषबेल हटाइए’ मुख्यमंत्री ने शिक्षक एवं स्नातक विधान परिषद चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह और उमेश द्विवेदी के समर्थन में मतदान की अपील की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के मतदाताओं को ऐसा प्रतिनिधि चुनना चाहिए, जो उनकी समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठा सके और जिम्मेदारी के साथ काम करे। उन्होंने कहा, “आपका प्रतिनिधि वह बनेगा जिसमें जज्बा हो और जिसमें सामर्थ्य हो।” परिवारवाद और वंशवाद पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने मतदाताओं से इसे बढ़ावा देने वाली राजनीति को नकारने का आह्वान किया। उन्होंने दोनों प्रत्याशियों को शिक्षकों और स्नातकों की आवाज उठाने में सक्षम बताया। बैलेट पेपर से चुनाव, न्याय के पक्ष में परिणाम देने की अपील मुख्यमंत्री ने कहा, एमएलसी चुनाव “ईवीएम से नहीं, बैलेट पेपर से हो रहा है और परिणाम न्याय के पक्ष में देने का काम आपको करना है।” उन्होंने संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करने की प्रवृत्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि यह चुनाव उसका भी जवाब होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने मतदाताओं से सतर्क रहकर मतदान करने और अति-आत्मविश्वास से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि चुनाव में प्रत्येक मत महत्वपूर्ण है और कार्यकर्ताओं को मतदाताओं तक पहुंचने के लिए लगातार प्रयास करना चाहिए। शिक्षकों को पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज मुख्यमंत्री ने शिक्षकों और उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सुविधाओं का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि बेसिक, माध्यमिक, उच्च शिक्षा, विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग कॉलेजों और स्ववित्तपोषित संस्थानों सहित विभिन्न श्रेणियों के शिक्षकों तथा उनके परिवारों को प्रति वर्ष पांच लाख रुपये तक कैशलेस उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने कहा कि सरकारी और सहायता प्राप्त संस्थानों से जुड़े शिक्षकों, शिक्षामित्रों तथा अनुदेशकों के साथ किसी अनहोनी या दुर्घटना की स्थिति में परिवार को बीमा कवर के माध्यम से 40 लाख रुपये से लेकर 1.5 करोड़ रुपये तक की आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था है। रसोइयों के लिए भी दो लाख रुपये का सुरक्षा बीमा कवर उपलब्ध कराने का उल्लेख किया। ऑपरेशन कायाकल्प से स्कूलों में बेहतर सुविधाएं, ड्रॉपआउट दर 20 से घटकर तीन … Read more

कासगंज पुलिस ने 7 दिन में बरामद किए 120 मोबाइल

कासगंज पुलिस ने सात दिन में बरामद किए 120 लोगों के मोबाइल, तकनीक के सहारे मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा तक पहुंची पुलिस योगी सरकार में डिजिटल पुलिसिंग का दिखा असर, गुम मोबाइलों की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई से आमजन को मिली बड़ी राहत प्रदेश के थानों पर साइबर हेल्प डेस्क के जरिए शिकायतों के निस्तारण पर जोर, तकनीक बन रही पुलिस और जनता के बीच भरोसे की कड़ी लखनऊ योगी सरकार के मिशन शक्ति 6.0 अभियान के पहले ही सप्ताह में उत्तर प्रदेश पुलिस ने तकनीक आधारित पुलिसिंग और जनशिकायतों के निस्तारण में बड़ी कामयाबी हासिल की है। इसी क्रम में कासगंज पुलिस ने महज सात दिनों के भीतर करीब 32 लाख रुपये कीमत के गुम मोबाइल फोन बरामद कर 120 लोगों को बड़ी राहत पहुंचाई है। खास बात यह है कि इन मोबाइलों की तलाश केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रही। पुलिस ने तकनीकी संसाधनों की मदद से मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा तक गुम मोबाइलों का पता लगाया और उन्हें बरामद कर उनके वास्तविक स्वामियों को सौंप दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पुलिसिंग को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और आमजन की शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में कासगंज पुलिस की यह उपलब्धि मिशन शक्ति 6.0 के शुरुआती सप्ताह की महत्वपूर्ण सफलता बनकर सामने आई है। सात दिन में 32 लाख के मोबाइल बरामद, दूसरे राज्यों तक पहुंची पुलिस मिशन शक्ति 6.0 की शुरुआत 11 अक्टूबर को हुई थी। अभियान के पहले सप्ताह में कासगंज पुलिस ने गुम मोबाइल फोन की बरामदगी के लिए विशेष अभियान चलाया। पुलिस ने प्राप्त शिकायतों के आधार पर तकनीकी माध्यमों से मोबाइल फोन की लोकेशन ट्रेस करनी शुरू की। इस दौरान कई मोबाइल फोन की लोकेशन उत्तर प्रदेश से बाहर मिली। इसके बाद पुलिस ने अपनी कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा तक संपर्क एवं समन्वय स्थापित किया। तकनीकी सहायता से मोबाइल फोन का पता लगाकर उन्हें बरामद किया गया। सात दिनों के भीतर करीब 32 लाख रुपये कीमत के मोबाइल बरामद कर 120 लोगों को वापस सौंपे गए। मोबाइल के साथ वापस मिली लोगों की ‘डिजिटल दुनिया' आज मोबाइल फोन केवल बातचीत का साधन नहीं, बल्कि व्यक्ति की पूरी डिजिटल दुनिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। बैंकिंग, यूपीआई भुगतान, जरूरी दस्तावेज, कारोबार से जुड़ी जानकारियां, पारिवारिक तस्वीरें और महत्वपूर्ण संपर्क मोबाइल में ही सुरक्षित रहते हैं। ऐसे में फोन खोने पर व्यक्ति को केवल आर्थिक नुकसान नहीं होता, बल्कि उसकी रोजमर्रा की कई जरूरी गतिविधियां भी प्रभावित हो जाती हैं। कासगंज पुलिस की कार्रवाई से ऐसे ही 120 लोगों को राहत मिली। जिन लोगों को अपने मोबाइल वापस मिलने की उम्मीद कम रह गई थी, उनके हाथों में दोबारा फोन पहुंचने से उनके चेहरे खिल उठे। पुलिस की इस पहल ने आमजन के बीच भरोसे को भी मजबूत किया है। शिकायत दर्ज करने से लेकर मोबाइल लौटाने तक पुलिस ने की कार्रवाई कासगंज के पुलिस अधीक्षक ओपी सिंह ने बताया कि गुम मोबाइलों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तकनीकी संसाधनों के माध्यम से उनकी तलाश शुरू की। मोबाइल फोन ट्रेस होने के बाद उनकी बरामदगी सुनिश्चित की गई। इसके बाद स्वामित्व और पहचान का सत्यापन कर संबंधित व्यक्तियों को मोबाइल सौंप दिए गए। उन्होंने बताया कि अभियान में इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया कि शिकायतों का निस्तारण केवल कागजी औपचारिकता बनकर न रह जाए, बल्कि शिकायतकर्ता को वास्तविक राहत मिले। इसी उद्देश्य से पुलिस टीमों ने दूसरे राज्यों तक संपर्क स्थापित कर गुम मोबाइलों की बरामदगी सुनिश्चित की। योगी सरकार में तकनीक आधारित पुलिसिंग को मिल रहा बढ़ावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और जनशिकायतों के प्रभावी निस्तारण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रदेश के थानों में साइबर हेल्प डेस्क की व्यवस्था के माध्यम से साइबर अपराध और डिजिटल माध्यमों से जुड़ी शिकायतों में लोगों को सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। डिजिटल लेनदेन, ऑनलाइन बैंकिंग और मोबाइल आधारित सेवाओं के बढ़ते उपयोग के बीच तकनीकी संसाधनों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है। कासगंज पुलिस की यह कार्रवाई इसका उदाहरण है कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल केवल साइबर अपराधियों की पहचान और कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिकों की रोजमर्रा की परेशानियों को दूर करने में भी उपयोगी साबित हो रहा है। मिशन शक्ति 6.0 में जनसेवा और जवाबदेही का संदेश मिशन शक्ति 6.0 के पहले सप्ताह में कासगंज पुलिस की इस उपलब्धि का महत्व केवल 32 लाख रुपये के मोबाइल फोन बरामद करने तक सीमित नहीं है। इससे 120 लोगों को उनकी महत्वपूर्ण डिजिटल जानकारियों और संपर्कों तक दोबारा पहुंच मिली है। साथ ही यह संदेश भी गया है कि गुम मोबाइल की शिकायत पर पुलिस तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए दूसरे राज्यों तक भी तलाश कर सकती है। योगी सरकार के अभियान के शुरुआती सप्ताह में सामने आई यह उपलब्धि पुलिस की सक्रियता, तकनीकी दक्षता और शिकायतों के बेहतर निस्तारण का उदाहरण है। मोबाइल की बरामदगी से जहां लोगों को उनकी खोई हुई डिजिटल दुनिया वापस मिली, वहीं पुलिस के प्रति उनका विश्वास भी मजबूत हुआ है।

अरुंधति को बचपन में सीएम योगी के वीडियो से मिली सीख

योगी आदित्यनाथ को बड़ा भाई मानती हैं अरुंधति, विवाह पर आशीर्वाद का आग्रह दिसंबर में होनी है शादी,  मुख्यमंत्री के शुभकामना संदेश को भी बताया अनमोल लखनऊ कभी अपनी आंखों में आने वाले आंसुओं को कमजोरी समझने वाली केरल की अरुंधति के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक सीख जिंदगी का नजरिया बदलने वाली बन गई। बचपन में योगी के एक वीडियो से उन्होंने समझा कि भावुक होना कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी भावनाओं को स्वीकार करने का साहस है। वर्षों बाद भी यह सीख उनके जीवन का हिस्सा बनी हुई है। अब जब अरुंधति विवाह कर अपने जीवन के नए अध्याय की शुरुआत करने जा रही हैं, तो उन्होंने अपने प्रेरणास्रोत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हाथ से लिखकर दो पेज का पत्र भेजा है और विवाह में शामिल होकर नवदंपती को आशीर्वाद देने का आग्रह किया है। पत्र में शादी का न्योता है, पर उससे भी ज्यादा है- सीएम के प्रति कृतज्ञता का भाव। जब आंसुओं को कमजोरी मानने लगी थीं अरुंधति अरुंधति ने सीएम योगी को भेजे अपने पत्र में बचपन की उस मनःस्थिति को साझा किया है, जब छोटी-छोटी बातों पर भावुक होकर रो पड़ना उन्हें खुद अपनी कमजोरी लगने लगा था। उनके कुछ दोस्त उन्हें समझाते थे कि मजबूत बनने के लिए भावनाओं पर काबू रखना जरूरी है। धीरे-धीरे उनके मन में भी यह सवाल घर करने लगा कि क्या आसानी से रो पड़ने वाला व्यक्ति कभी मजबूत बन सकता है? क्या अपनी भावनाएं जाहिर करना शर्मिंदगी की बात है? इसी दौरान उनके चचेरे भाई ने उन्हें योगी आदित्यनाथ का एक वीडियो दिखाया। वीडियो में योगी काफी भावुक थे। चचेरे भाई ने समझाया कि योगी जैसा बनो, भावुक होते हुए भी अत्यंत मजबूत। इससे अरुंधति को एक नई दृष्टि मिली। उन्हें यह समझने में मदद मिली कि आंसू किसी व्यक्ति की कमजोरी का प्रमाण नहीं होते। इस अनुभव ने उनके भीतर चल रहे द्वंद्व को बदलने में अहम भूमिका निभाई। जिस भावुकता को वह अपनी कमी मानने लगी थीं, उसे अब वह अपनी सहज मानवीय संवेदना के रूप में देखने लगीं। योगी की सीख से समझा, मजबूत होने का असली अर्थ अरुंधति के लिए इस अनुभव का महत्व केवल उस पल तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने समझा कि मजबूत होने का अर्थ हर परिस्थिति में भावनाओं को छिपाना नहीं, बल्कि मुश्किलों का सामना करते हुए खुद पर भरोसा बनाए रखना है। गिरने के बाद दोबारा खड़े होना, चुनौतियों के बीच आगे बढ़ना और अपनी जिम्मेदारियों को निभाना ही वास्तविक साहस है। अरुंधति ने पत्र में लिखा है-‘ जब भी मैं खुद पर संदेह करती हूं,  आपसे मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।‘ अरुंधती का योगी आदित्यनाथ के प्रति सम्मान उनकी सार्वजनिक भूमिका से भी जुड़ा है। उनके लिए उनकी यात्रा मेहनत, दृढ़ निश्चय और निरंतर प्रयास का संदेश देती है। इस तरह बचपन में देखे गए एक वीडियो से मिली सीख अरुंधती के लिए आत्मविश्वास का ऐसा आधार बन गई, जिसे वह आज भी अपने जीवन में महसूस करती हैं। जीवन के सबसे खास मौके पर याद आए प्रेरणास्रोत अरुंधति और राहुल का विवाह 20 दिसंबर 2026 में केरल के अलुवा स्थित ग्रीन पार्क कन्वेंशन सेंटर में होना है। जीवन के इस खास अवसर पर अरुंधति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से समारोह में शामिल होने का आग्रह किया है। लिखा है-‘ मेरे लिए आप एक नेता से कहीं बढ़कर हैं। मैंने आपको हमेशा एक बड़े भाई की तरह देखा है, जिसकी यात्रा ने मुझे हिम्मत और प्रेरणा दी है।‘अरुंधति ने पत्र में मुख्यमंत्री की व्यस्तताओं का उल्लेख करते हुए यह भी लिखा है कि यदि उनके लिए समारोह में पहुंचना संभव न हो, तो उनका शुभकामना संदेश और आशीर्वाद भी उनके लिए बेहद अनमोल होगा। उन्होंने इस बात के लिए आभार जताया कि सीएम योगी की एक सीख ने उन्हें अपनी भावनाओं को कमजोरी मानने के बजाय स्वीकार करना सिखाया।

कोहरे में हादसों पर लगेगी लगाम? योगी सरकार ने हाईवे-एक्सप्रेसवे की सुरक्षा के लिए बनाया प्लान

हाईवे-एक्सप्रेसवे पर बढ़ेगी सुरक्षा, शीतलहर-कोहरे में हादसे रोकने के लिए योगी सरकार ने शुरू की तैयारी एंबुलेंस और रेस्क्यू वाहन, हाईवे-एक्सप्रेसवे पर दुर्घटना संभावित जगहों पर रहेंगे तैनात सड़क हादसों को रोकने के लिए अनफिट और असुरक्षित वाहनों पर होगी कार्रवाई कोहरे में सड़क सुरक्षा के लिए रिफ्लेक्टिव संकेतक और सफेद पट्टियां सही करने के निर्देश राहत आयुक्त के निर्देश, सड़क सुरक्षा व्यवस्था की नियमित जांच और कमियां तत्काल दूर करने पर जोर लखनऊ,   उत्तर प्रदेश में शीतलहर और घने कोहरे के दौरान हादसों पर अंकुश लगाने के लिए योगी सरकार ने सड़क सुरक्षा के इंतजाम मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर दुर्घटना संभावित स्थलों के आस-पास पर्याप्त संख्या में पेट्रोलिंग वाहन, एंबुलेंस और रेस्क्यू वाहन उपलब्ध रखने पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि हादसा होने की स्थिति में घायलों को तत्काल सहायता और समय पर चिकित्सा सुविधा मिल सके। राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने संबंधित विभागों और कार्यदायी संस्थाओं को सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। दुर्घटना संभावित स्थलों पर तैनात रहेंगे एंबुलेंस और रेस्क्यू वाहन राहत आयुक्त ने राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर दुर्घटना संभावित स्थलों के आस-पास पर्याप्त संख्या में पेट्रोलिंग वाहन, एंबुलेंस और रेस्क्यू वाहन उपलब्ध रखने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य हादसे की स्थिति में घायलों तक जल्द पहुंचना और उन्हें बिना देरी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। सर्दियों में घने कोहरे के कारण दृश्यता कम होने से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में राहत एवं बचाव व्यवस्था को पहले से तैयार रखना महत्वपूर्ण है। रिफ्लेक्टिव संकेतक और सफेद पट्टियां स्पष्ट रखने के निर्देश सड़क सुरक्षा के लिए हाईवे और एक्सप्रेसवे पर लगे रिफ्लेक्टिव चिह्नों, कैट्स आई, दिशासूचक बोर्ड और अन्य संकेतकों की नियमित जांच करने के लिए कहा गया है। राहत आयुक्त ने सड़क की बॉर्डर लाइन और मध्य रेखा पर बनी सफेद पट्टियों को स्पष्ट रखने के निर्देश दिए हैं। धूल से ढकी, मिट चुकी या उखड़ी पट्टियों का तत्काल नवीनीकरण कराया जाएगा, ताकि कम दृश्यता के दौरान वाहन चालकों को सड़क की सीमा और दिशा समझने में परेशानी न हो। मोड़ और दुर्घटना संभावित स्थानों पर बढ़ेगी सतर्कता उन्होंने कहा कि प्रमुख चौराहों, तिराहों, क्रॉसिंग, मोड़ों और दुर्घटना संभावित स्थलों पर स्टॉप लाइन, जेब्रा क्रॉसिंग व यातायात संकेतकों को दुरुस्त रखा जाएगा। जरूरत के अनुसार चेतावनी संकेतक और गति सीमा से जुड़े बोर्ड भी लगाए जाएंगे। इन व्यवस्थाओं से कोहरे के दौरान वाहन चालकों को सड़क की स्थिति और संभावित खतरों के बारे में समय रहते जानकारी मिल सकेगी। अनफिट और असुरक्षित वाहनों के संचालन पर लगेगी रोक राहत आयुक्त ने निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं चलने वाले अनफिट वाहनों और जुगाड़ से निर्मित असुरक्षित वाहनों के संचालन पर प्रभावी रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। परिवहन विभाग और यातायात पुलिस आपसी समन्वय से जांच और प्रवर्तन कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे, ताकि असुरक्षित वाहनों से होने वाले संभावित हादसों को रोका जा सके। फॉग लाइट और रिफ्लेक्टिव टेप के प्रति जागरूक होंगे चालक सड़क हादसों की रोकथाम के लिए जन-जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे। वाहन चालकों को फॉग लाइट और रिफ्लेक्टिव टेप का इस्तेमाल करने, आगे चल रहे वाहन से पर्याप्त सुरक्षित दूरी बनाए रखने और गति नियंत्रित रखने के लिए जागरूक किया जाएगा। साथ ही, सड़क पर लगे चेतावनी संकेतकों और निर्धारित गति सीमा का पालन करने पर जोर दिया जाएगा। कोहरे में दृश्यता के अनुसार नियंत्रित रखनी होगी गति राहत आयुक्त ने आगामी दिनों में घने कोहरे के दौरान दृश्यता के अनुरूप वाहनों की गति नियंत्रित रखने और आवश्यक यातायात प्रबंधन उपाय अपनाने पर जोर दिया है। वाहन चालकों से अपील की गई है कि वे अत्यधिक कोहरे में विशेष सावधानी बरतें और परिस्थितियों के अनुकूल ही वाहन चलाएं। कम दृश्यता में तेज गति और आगे चल रहे वाहन से कम दूरी दुर्घटना का जोखिम बढ़ा सकती है। राहत आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं को सड़क सुरक्षा से जुड़े सभी इंतजामों की नियमित जांच करने और कमियों को तत्काल दूर करने के निर्देश दिए हैं। यातायात नियमों के पालन की अपील राहत आयुक्त ने आमजन और वाहन चालकों से अपील की है कि घने कोहरे में फॉग लाइट का प्रयोग करें, सुरक्षित गति बनाए रखें और आगे चल रहे वाहन से पर्याप्त दूरी रखें। दृश्यता कम होने पर अतिरिक्त सतर्कता बरतें व यातायात नियमों का पालन करें।

2016 के 65 मिनट से घटकर अब मात्र 5 मिनट हुआ पुलिस रिस्पॉन्स टाइमः मुख्यमंत्री

अधर्म, अत्याचार व आतंक का अंत ही न्याय, शांति एवं निर्भय समाज की स्थापना का आधारः मुख्यमंत्री शारदीय नवरात्र की सप्तमी तिथि पर सीएम ने की मां कालरात्रि के स्वरूप की आराधना दुष्टों, असुरों और रक्तबीज जैसी तामसिक शक्तियों का संहार कर धर्म की स्थापना एवं भक्तों को अभय प्रदान करती हैं मां कालरात्रिः मुख्यमंत्री अर्थशक्ति बनकर उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास को नई गति दे रही है नारी शक्तिः सीएम  डबल इंजन सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति ने आसुरी शक्तियों का दमन कर प्रदेश में स्थापित किया कानून का राज एवं भयमुक्त वातावरणः सीएम योगी कृषि, उद्योग, सेवा और उद्यमिता सहित विभिन्न क्षेत्रों में नारी शक्ति की बढ़ती भागीदारी ने प्रदेश की विकास यात्रा को दी नई ऊर्जाः मुख्यमंत्री   2016 के 65 मिनट से घटकर अब मात्र 5 मिनट हुआ पुलिस रिस्पॉन्स टाइमः मुख्यमंत्री   लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शारदीय नवरात्र की सप्तमी तिथि पर मां कालरात्रि के स्वरूप की आराधना की। इसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ पर लिखा कि दुष्टों, असुरों और रक्तबीज जैसी तामसिक शक्तियों का संहार कर धर्म की स्थापना एवं भक्तों को अभय प्रदान करने वाली मां कालरात्रि का दिव्य स्वरूप हमें संदेश देता है कि अधर्म, अत्याचार व आतंक का अंत ही न्याय, शांति एवं निर्भय समाज की स्थापना का आधार है। 2017 से पहले रक्तबीज रूपी माफिया, दंगाइयों और अपराधियों का था आतंक  मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार को आईना दिखाते हुए बताया कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में रक्तबीज रूपी माफिया, दंगाइयों और अपराधियों के आतंक से उत्पन्न भय एवं अराजकता के अंधकार ने बहन-बेटियों की सुरक्षा, शिक्षा व स्वावलंबन की राह में गंभीर बाधाएं खड़ी कर दी थीं। वहीं विगत 9.5 वर्षों में डबल इंजन सरकार की अपराध और अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति ने इन आसुरी शक्तियों का दमन कर प्रदेश में कानून का राज एवं भयमुक्त वातावरण की स्थापना की है। महिला सुरक्षा के प्रति सरकार प्रतिबद्ध मुख्यमंत्री ने लिखा कि मिशन शक्ति, इंटीग्रेटेड 1090 हेल्पलाइन, महिला बीट पुलिसिंग और सेफ सिटी परियोजना जैसी पहलों ने बहन-बेटियों के लिए घर की चौखट से लेकर सड़क, शिक्षण संस्थानों व कार्यस्थलों तक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया है। पुलिस रिस्पॉन्स टाइम का वर्ष 2016 के 65 मिनट से घटकर मात्र 5 मिनट रह जाना, प्रदेश में कानून-व्यवस्था की तत्परता और महिला सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का स्पष्ट प्रमाण है।  सुरक्षा के विश्वास से प्रेरित होकर नाइट शिफ्ट में भी कार्य कर रहीं महिलाएं  मुख्यमंत्री ने प्रदेश में सुरक्षा के माहौल का जिक्र किया, कहा कि सुरक्षा के इसी विश्वास से प्रेरित होकर आज महिलाएं नाइट शिफ्ट में भी निडर होकर कार्य कर रही हैं। महिला श्रम बल भागीदारी का 12 प्रतिशत से बढ़कर 36 प्रतिशत से अधिक होना इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश की नारी शक्ति, अर्थशक्ति बनकर उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास को नई गति दे रही है। हर क्षेत्र में नारी शक्ति की बढ़ती भागीदारी ने प्रदेश की विकास यात्रा को दी नई ऊर्जा  सीएम ने लिखा कि कृषि, उद्योग, सेवा और उद्यमिता सहित विभिन्न क्षेत्रों में नारी शक्ति की बढ़ती भागीदारी ने प्रदेश की विकास यात्रा को नई ऊर्जा दी है। यही भागीदारी उत्तर प्रदेश की जीएसडीपी और प्रति व्यक्ति आय में हुई तीन गुना वृद्धि की यात्रा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

मैगी खाने के बाद परिवार के 5 लोगों की मौत? ग्रेटर नोएडा में मचा हड़कंप

ग्रेटर नोएडा ग्रेटर नोएडा में एक ही परिवार के पांच लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है. मरने वालों में माता-पिता और उनके तीन बच्चे शामिल हैं. यह मामला ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा थाना क्षेत्र का है. एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत से इलाके में हड़कंप मच गया है।  शुरुआती जानकारी के मुताबिक, परिवार की मौत किसी चीज को खाने की वजह से होने की आशंका जताई जा रही है. बताया जा रहा है कि परिवार ने आखिरी बार चाय पी थी और मैगी खाई थी. इसके बाद परिवार के पांचों लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. हालांकि, अभी तक मौत की असली वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है।  मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस जांच में जुट गई है. पुलिस ने पांचों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह साफ हो पाएगी. फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच-पड़ताल कर रही है।  फूड पॉइजनिंग की आशंका परिवार के पांच लोगों की मौत के मामले में फूड पॉइजनिंग की आशंका जताई जा रही है. शुरुआती जानकारी में कुछ खाने के बाद मौत होने की बात सामने आई है. हालांकि, इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है. परिवार ने आखिरी बार चाय और मैगी खाई थी, लेकिन इन चीजों की वजह से ही मौत हुई है या इसके पीछे कोई दूसरी वजह है, यह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।  पुलिस मामले की जांच कर रही है और मौत की वजह का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। 

लखनऊ में अंतरराज्यीय कार्यशाला, 8 राज्यों और 4 केंद्रशासित प्रदेशों की होगी भागीदारी

लखनऊ में 23-24 अक्टूबर को जुटेंगे आठ राज्यों और चार केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधि, सीएम योगी करेंगे कार्यशाला का उद्घाटन मिशन कर्मयोगी के तहत सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों को आधुनिक और दक्षता आधारित बनाने पर होगा मंथन, केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह भी रहेंगे मौजूद लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्तर के प्रशासनिक सुधारों और क्षमता निर्माण से जुड़े महत्वपूर्ण आयोजनों का केंद्र बनने जा रहा है। इसी क्रम में 23- 24 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में क्षमता निर्माण आयोग (कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन-सीबीसी) की दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला ‘साधना श्रृंखला-2026’ का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस कार्यशाला का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह भी उपस्थित रहेंगे। कार्यशाला में उत्तरी क्षेत्र के आठ राज्यों और चार केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। इसका उद्देश्य सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों को आधुनिक, तकनीक-सक्षम और दक्षता आधारित क्षमता निर्माण संस्थानों के रूप में विकसित करने की रणनीति तैयार करना है। यह पहल मिशन कर्मयोगी के तहत सरकारी अधिकारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने और प्रशासनिक व्यवस्था को नागरिक-केंद्रित बनाने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। आठ राज्यों और चार केंद्रशासित प्रदेशों की भागीदारी उत्तर प्रदेश सरकार की मेजबानी में आयोजित होने वाली इस कार्यशाला में बिहार, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, पंजाब, राजस्थान और उत्तराखंड के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसके अतिरिक्त चंडीगढ़, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के अधिकारी भी भाग लेंगे। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ प्रशिक्षण संस्थानों के प्रमुख, संकाय सदस्य, विषय विशेषज्ञ और उद्योग जगत के प्रतिनिधि भी विचार-विमर्श करेंगे। हिमालयी क्षेत्रों से लेकर गंगा के मैदानी इलाकों और राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्रों तक फैले राज्यों की भागीदारी से विभिन्न प्रशासनिक परिस्थितियों में प्रशिक्षण संबंधी जरूरतों, चुनौतियों और नवाचारों पर साझा चर्चा का अवसर मिलेगा। चार प्रमुख क्षेत्रों पर होगा विचार-विमर्श कार्यशाला में संस्थागत शासन एवं नेतृत्व, प्रशिक्षण संस्थानों की कार्यक्षमता और आपसी सहयोग, संकाय एवं संस्थागत दक्षताओं तथा डिजिटल परिवर्तन जैसे विषयों पर चर्चा होगी। प्रशिक्षण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। इस दौरान प्रत्येक राज्य और केंद्रशासित प्रदेश को अपनी आवश्यकताओं एवं प्राथमिकताओं के अनुरूप सुधार की पहचान करने और उनके क्रियान्वयन के लिए व्यावहारिक रोडमैप तैयार करने में सहायता दी जाएगी। इसका लक्ष्य प्रशिक्षण संस्थानों को सरकारी अधिकारियों की वास्तविक कार्यगत जरूरतों के अनुरूप अधिक प्रभावी बनाना है। 700 से अधिक प्रशिक्षण संस्थान एक मंच पर इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए ‘यूनिफाइड न्यू-एज नेशनल ट्रेनिंग इनिशिएटिव्स’ (UNNATI) पोर्टल का उपयोग किया जाएगा। साधना सप्ताह-2026 के दौरान शुरू किया गया यह पोर्टल 700 से अधिक प्रशिक्षण संस्थानों को एक साझा मंच पर जोड़ता है। इसके माध्यम से प्रशिक्षण संसाधनों को साझा करने, संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने और आंकड़ों के आधार पर कार्यक्षमता में सुधार करने में मदद मिलेगी। राष्ट्रीय प्रशिक्षण सुधार ढांचे को मिलेगी दिशा ‘साधना श्रृंखला-2026’ चार क्षेत्रीय कार्यशालाओं की श्रृंखला है। इसकी शुरुआत 29-30 सितंबर को विजयवाड़ा में हुई थी, जबकि पूर्वोत्तर क्षेत्र की कार्यशाला 9 अक्टूबर को गुवाहाटी में आयोजित की गई। लखनऊ में होने वाली कार्यशाला के निष्कर्षों को अन्य क्षेत्रीय कार्यशालाओं के परिणामों के साथ प्रशिक्षण संस्थान परिवर्तन ढांचा (ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट ट्रांसफॉर्मेशन फ्रेमवर्क) तैयार करने में शामिल किया जाएगा।