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फिंगरप्रिंट और रेटिना समान होने से अटका था आधार, योगी सरकार की पहल से जुड़वा बहन को मिली पहचान

लखनऊ। योगी सरकार की संवेदनशील प्रशासनिक व्यवस्था में जनसमस्याओं के समाधान के साथ मानवीय सरोकारों को भी प्राथमिकता दी जा रही है। रामपुर में इसका एक उदाहरण उस समय सामने आया, जब बायोमीट्रिक समानता के कारण पिछले कई वर्षों से पहचान के संकट से जूझ रहीं जुड़वा बहनों को जिला प्रशासन की पहल पर अपनी अलग-अलग पहचान मिली। मोहल्ला खारी कुआं निवासी जुबैर इलियास की जुड़वा बेटियों तुबा जुबैर व खिजरा जुबैर के फिंगरप्रिंट और आंखों की पुतलियों (रेटिना) की बायोमीट्रिक समानता के चलते आधार पंजीकरण में तकनीकी अड़चन आ रही थी। एक बच्ची का कार्ड बनने के बाद दूसरी बच्ची का डेटा डुप्लीकेट बताकर खारिज कर दिया जाता था। योगी सरकार के संवेदनशील प्रशासन ने दिलाई पहचान समस्या का समाधान न होने से परिवार कई वर्षों से परेशान था। दूसरी बेटी का पहचान पत्र नहीं बनने से उसके स्कूल दाखिले, सरकारी योजनाओं और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़ी भविष्य की जरूरतों को लेकर पिता चिंतित थे। ऐसे में अपनी समस्या लेकर जुबैर इलियास रामपुर जिला प्रशासन के जनता दर्शन पहुंचे, जहां डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने योगी सरकार की जनता के प्रति संवेदनशील नीति का परिचय देते हुए दिल्ली स्थित भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) मुख्यालय में संपर्क किया। तीन माह के प्रयास के बाद एक जैसे फिंगरप्रिंट व रेटिना की बायोमेट्रिक समानता के बावजूद दोनों जुड़वा बहनों को आखिरकार अपनी अलग पहचान मिल गई।  जनता दर्शन में डीएम ने लिया तत्काल संज्ञान रामपुर जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर आमजन की समस्याओं के निस्तारण के लिए रोजाना सुबह दस बजे कलेक्ट्रेट परिसर में जनता दर्शन का आयोजन किया जाता है। करीब तीन माह पहले जनता दर्शन में जब जुबैर इलियास ने अपनी बेटियों की इस समस्या के बारे में बताया तो उन्होंने तुरंत इसका संज्ञान लेते हुए एक्शन लिया। उन्होंने यूआईडीएआई, नई दिल्ली के सचिव से दूरभाष पर सीधा संपर्क साधा और इस दुर्लभ बायोमीट्रिक समस्या से अवगत कराते हुए विशेष तकनीकी समाधान की पैरवी की। इसके बाद मुख्यालय ने अपवाद के तहत दोनों बच्चियों के दस्तावेज जारी करने की प्रक्रिया पूरी की। संवेदनशील सरकार का उदाहरण वर्षों से पहचान के संकट से जूझ रहे परिवार के लिए यह बड़ी राहत रही। आधुनिक व्यवस्था में स्कूल दाखिले, सरकारी योजनाओं और विभिन्न नागरिक सुविधाओं तक पहुंच के लिए आधार एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बन चुका है। ऐसे में दूसरी बेटी की पहचान सुनिश्चित होने से उसके भविष्य को लेकर परिवार की चिंता भी दूर हुई। सीएम योगी के विजन को साकार करते हुए जिला प्रशासन ने तकनीकी अड़चन को पात्र नागरिक के अधिकार और जरूरी दस्तावेज हासिल करने की राह में बाधा नहीं बनने दिया। डीएम से मिलकर जताया आभार पहचान पत्र मिलने के बाद जुबैर दोनों बेटियों के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और डीएम का व्यक्तिगत आभार व्यक्त किया। इस मौके पर जिलाधिकारी ने कहा कि सीएम योगी की मंशा के अनुरूप जनता दर्शन में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की समस्या का समाधान और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र नागरिकों तक पहुंचाना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

सपा राज की गुंडागर्दी पर योगी सरकार ने लगाया ब्रेक’, मंत्री असीम अरुण का अखिलेश पर तीखा हमला

लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार में समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर अखिलेश यादव द्वारा उठाए गए सवालों पर पलटवार करते हुए कहा कि सपा सुप्रीमो वहां की कानून व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं, जहां की व्यवस्था पूरे देश के लिए मानक बन गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के बाहर कहीं भी जाइए, लोग उत्तर प्रदेश जैसी कानून व्यवस्था चाहते हैं। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताते हुए धन्यवाद भी दिया। पूर्ववर्ती सपा सरकार के समय की कानून व्यवस्था से तुलना करते हुए मंत्री असीम अरुण ने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार में जो स्थिति थी, वह किसी से छिपी नहीं है। लूट, डकैती, अपहरण और माफियागर्दी चल रही थी। योगी जी ने इसे व्यवस्थित तरीके से रोका और समाप्त किया। उन्होंने सरकार के अगले एजेंडे पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जैसे अपराध की सफाई हुई, उसी तरह अब योगी सरकार भ्रष्टाचार की सफाई में जुटी है। उन्होंने विश्वास जताया कि इसमें भी निर्णायक सफलता मिलेगी। आरक्षण को लेकर भी सपा को घेरा सरकारी भर्तियों पर असीम अरुण ने कहा कि सपा सरकार के समय नियमित भर्तियां हुई ही नहीं। जो हुईं, उनमें भारी भ्रष्टाचार हुआ। आउटसोर्सिंग की भर्तियों में आरक्षण की व्यवस्था सपा ने खत्म कर दी। योगी जी का धन्यवाद कि आज प्रदेश में लाखों भर्तियां हो रही हैं और इनमें आरक्षण के नियमों को पूरी ईमानदारी और सख्ती से लागू किया जा रहा है। सपा ने आउटसोर्सिंग में जो आरक्षण समाप्त किया था, योगी सरकार ने उसे पूरी तरह लागू किया है। आउटसोर्सिंग कॉरपोरेशन भी बना दिया गया है, ताकि नियमित भर्तियों और आउटसोर्सिंग दोनों में आरक्षण जमीन पर लागू हो। महापुरुषों के सम्मान पर मंत्री ने कहा कि बाबा साहेब और अन्य सामाजिक नायकों की प्रतिमाओं के लिए योगी जी ने मूर्ति विकास योजना दी है। प्रत्येक विधानसभा को एक-एक करोड़ रुपये दिए गए हैं। मूर्तियों के जीर्णोद्धार, सुधार और सुंदरता के लिए दस-दस लाख रुपये तक खर्च किए जा सकते हैं। इसके विपरीत सपा सरकार के समय अखिलेश यादव ने महापुरुषों के अपमान में कोई कसर नहीं छोड़ी चाहे जिले हों, मेडिकल कॉलेज हों या कन्नौज का इंजीनियरिंग कॉलेज, हर जगह अपमान का काम हुआ। जब बाबा साहेब का अपमान हो रहा था तब हंस रहे थे अखिलेश उन्होंने कहा कि सपा जो फर्जी आंकड़े दिखा रही है, उनकी कोई वैल्यू नहीं है। कैबिनेट मंत्री और सुपर सीएम कहे जाने वाले आजम खान ने बाबा साहेब पर अभद्र टिप्पणी की थी और उस समय अखिलेश यादव मंच पर बैठे हंसते रहे। यह सबके सामने है। बस के ऊपर आज कोई भी रंग लगा लीजिए, सबको 2017 वाली बस का रंग भी याद है और वह बस किस तरह फंसी, यह भी याद है। रोजगार के सवाल पर असीम अरुण ने कहा कि सपा युवाओं को रोजगार नहीं मिलने का आरोप लगा रही है। आज व्यापक स्तर पर सरकारी नौकरियां दी गई हैं, प्राइवेट सेक्टर तेजी से बढ़ा है, कृषि में विस्तार हुआ है। युवाओं के पास काम या नौकरी की कमी नहीं है। बच्चे सरकारी नौकरी कर रहे हैं, प्राइवेट नौकरी कर रहे हैं और स्वावलंबन से खुद व्यवसाय और स्टार्टअप चला रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त किया कि ऐसा माहौल बना जिससे यह सफलता मिली।

कोयला संकट के बीच योगी सरकार का प्रभावी प्रबंधन, रोस्टर के अनुसार बिजली आपूर्ति जारी

लखनऊ कोयला खदान क्षेत्रों में अतिवृष्टि से देशभर में कोयले की आपूर्ति प्रभावित होने और तापीय विद्युत उत्पादन में आई कमी के बीच उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बिजली आपूर्ति व्यवस्था को संभालने के लिए प्रभावी प्रबंधन पर जोर दिया है। विषम परिस्थितियों के बावजूद उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन प्रबंधन उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए प्रदेश के ग्रामीण, तहसील, नगर पंचायत और बुंदेलखंड क्षेत्रों में निर्धारित रोस्टर के अनुसार और कई स्थानों पर उससे अधिक विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में जुटा है। अपर मुख्य सचिव ऊर्जा एवं ऊर्जा निगमों के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने सोमवार को विद्युत आपूर्ति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी क्षेत्रों में निर्धारित शिड्यूल के अनुसार बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। इसके लिए जहां से भी विद्युत उपलब्ध हो, उसे प्राप्त कर आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत किया जाए। 1500 से 2000 मेगावाट की कमी के बावजूद आपूर्ति वर्तमान में कोयले की कमी के कारण उत्तर प्रदेश को सामान्य दिनों की तुलना में करीब 1500 से 2000 मेगावाट विद्युत की कमी का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान परिस्थितियों में विद्युत की मांग भी पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ी है। वहीं कोयले की कमी के कारण लगभग 35 गीगावाट उत्पादन प्रभावित हुआ है। विंड एवं हाइड्रो पावर के उत्पादन में भी कमी आई है। इसके बावजूद वर्तमान परिस्थितियों में लगभग 27,000 मेगावाट तक की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। ग्रामीण, तहसील और नगर पंचायत क्षेत्रों में निर्धारित रोस्टर से अधिक बिजली देने की कोशिश की जा रही है। जल्द मिलेगी अतिरिक्त बिजली रात्रि में 2000 से 3000 मेगावाट अतिरिक्त विद्युत उपलब्ध न हो पाने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित कटौती की जा रही है। हालांकि आगामी दो-तीन दिनों में अनपरा डी, हरदुआगंज-ई तथा जवाहरपुर की बॉयलर ट्यूब लीकेज के कारण बंद इकाइयों के उपलब्ध होने से लगभग 1500 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिलने की संभावना है। इसके अलावा अनपरा के कोयले को लैंको की ओर डायवर्ट करने तथा बारा में कोयला आपूर्ति में सुधार के चलते रात्रि में अधिकतम उत्पादन सुनिश्चित करने से लगभग 700 मेगावाट विद्युत उपलब्धता एवं आपूर्ति में वृद्धि हुई है। योगी सरकार का फोकस, जनता को अधिकतम राहत पावर कारपोरेशन प्रबंधन का कहना है कि वर्ष 2017 एवं 2021 जैसी कोयला आपूर्ति संबंधी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी प्रबंधन करते हुए दिन के समय प्रदेश के सभी क्षेत्रों में कटौती मुक्त विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। ग्रामीण, तहसील, नगर पंचायत एवं बुंदेलखंड क्षेत्रों में निर्धारित रोस्टर से अधिक घंटे विद्युत आपूर्ति देने का प्रयास लगातार जारी है। कोयला आपूर्ति में सुधार के लिए कोयला मंत्रालय के उच्च प्रबंधन से भी समुचित कोयला आपूर्ति सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है।

योगी सरकार की नीतियों से यूपी बना इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर हब, 43 हजार करोड़ का निवेश, 3 लाख से ज्यादा रोजगार के अवसर

लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पारंपरिक औद्योगिक विकास से आगे बढ़कर इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और डीप-टेक जैसे भविष्य के क्षेत्रों में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। सरकार की निवेश-अनुकूल नीतियों, बेहतर कनेक्टिविटी और विशाल तकनीकी मानव संसाधन के दम पर प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का मजबूत आधार तैयार हुआ है। राज्य में 200 से अधिक कंपनियां इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में काम कर रही हैं, जबकि इस सेक्टर में 43 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश और 3 लाख से ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। प्रदेश की इस बढ़ती ताकत का सबसे बड़ा प्रमाण मोबाइल फोन निर्माण है। देश में निर्मित होने वाले 55 प्रतिशत से अधिक मोबाइल फोन का उत्पादन उत्तर प्रदेश में हो रहा है। इसके साथ ही गौतमबुद्ध नगर क्षेत्र में दो इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित हो चुके हैं। मोबाइल फोन के अलावा टैबलेट, लैपटॉप, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, घरेलू उपकरण, सोलर सेल, डिफेंस एवं लॉजिस्टिक्स ड्रोन और रोबोटिक्स मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में भी प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है।  इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में यूपी की मजबूत पकड़ योगी सरकार की नीतियों का असर इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के बढ़ते दायरे में साफ दिखाई देने लगा है। प्रदेश में 200 से अधिक कंपनियों की मौजूदगी ने एक व्यापक इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम तैयार किया है। एलजी, हैयर, डिक्सन, रैपे, एडवर्ब, सैमसंग और भगवती जैसी प्रमुख कंपनियां इस इकोसिस्टम का हिस्सा हैं। उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी-2025 भी निवेश आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। फैक्टशीट के अनुसार इस नीति के तहत अब तक 3800 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश आकर्षित हुए हैं।  सेमीकंडक्टर क्षेत्र में यूपी की बड़ी एंट्री इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग की मजबूत नींव के बाद अब उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भी अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है। केंद्र सरकार के सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम 2.0 में 1.27 लाख करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ भारत में मजबूत और लचीला सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने का लक्ष्य है। इस दिशा में उत्तर प्रदेश को भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला राज्य बताया जा चुका है। प्रदेश में केंद्र सरकार से स्वीकृत एक सेमीकंडक्टर एटीएमपी सुविधा मौजूद है। इंडिया चिप प्राइवेट लिमिटेड की यह सुविधा यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र के सेक्टर-28 में है और इसमें 3700 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हो चुका है।  1 हजार एकड़ के सेमीकंडक्टर पार्क से नया औद्योगिक केंद्र यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में 1 हजार एकड़ का सेमीकंडक्टर पार्क प्रदेश की भविष्य की टेक्नोलॉजी आधारित औद्योगिक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार कर रहा है। इसके साथ ही एनएक्सपी, रेनेसास, क्वालकॉम, कैडेंस जैसी वैश्विक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम कंपनियों की मौजूदगी यूपी की बढ़ती क्षमता को दर्शा रहीं हैं। इससे प्रदेश में सेमीकंडक्टर निर्माण के साथ डिजाइन, पैकेजिंग, टेस्टिंग और इससे जुड़े अन्य उद्योगों के लिए भी संभावनाएं मजबूत हो रही हैं।  जेवर एयरपोर्ट और फ्रेट कॉरिडोर देंगे उद्योगों को रफ्तार टेक्नोलॉजी आधारित उद्योगों के विकास के लिए मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी है। उत्तर प्रदेश में जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और एक्सप्रेसवे नेटवर्क जैसे कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध हैं। ग्रेटर नोएडा में 75 एकड़ का रोबोटिक्स एवं एआई कंप्यूटिंग पार्क भी इस तकनीकी इकोसिस्टम को नई दिशा दे रहा है। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स, एआई और रोबोटिक्स आधारित उद्योगों को एक साथ विकसित करने का आधार मजबूत हो रहा है। आईटी और डेटा सेंटर में भी हजारों करोड़ का निवेश उत्तर प्रदेश का टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम केवल इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर तक सीमित नहीं है। आईटी पॉलिसी के तहत 7 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश दर्ज किया गया है। लखनऊ में 100 एकड़ की एचसीएल आईटी सिटी और प्रदेश में सात एसटीपीआई आईटी पार्क इस क्षेत्र के विस्तार को गति दे रहे हैं। डेटा सेंटर क्षेत्र में भी 21 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का उल्लेख फैक्टशीट में किया गया है। इससे प्रदेश में डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे का विस्तार हो रहा है।  24 हजार से अधिक स्टार्टअप, डीप-टेक पर भी जोर योगी सरकार के कार्यकाल में प्रदेश का स्टार्टअप इकोसिस्टम भी तेजी से विस्तारित हुआ है। उत्तर प्रदेश में 24 हजार से अधिक डीपीआईआईटी पंजीकृत स्टार्टअप हैं। उत्तर प्रदेश स्टार्टअप पॉलिसी-2026 के साथ नोएडा और लखनऊ में यू-हब के माध्यम से डीप-टेक स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है। वहीं यूपी को डीपीआईआईटी स्टेट स्टार्टअप रैंकिंग फ्रेमवर्क-2024 में ‘टॉप परफॉर्मर’ का दर्जा भी मिला है।  युवा तकनीकी प्रतिभा बनेगी सबसे बड़ी ताकत सेमीकंडक्टर और डीप-टेक जैसे क्षेत्रों के लिए केवल निवेश और जमीन ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि बड़ी संख्या में प्रशिक्षित इंजीनियर, तकनीशियन, शोधकर्ता और इनोवेटर भी जरूरी हैं। इस मामले में उत्तर प्रदेश के पास देश के सबसे बड़े तकनीकी मानव संसाधन आधारों में से एक है। प्रदेश में 760 से अधिक कॉलेज हैं, जिनमें हर साल चार लाख से अधिक विद्यार्थी नामांकित होते हैं। आईआई कानपुर, आईआईटी बीएचयू और एनसीआर में स्थापित संस्थानों समेत तकनीकी संस्थानों का नेटवर्क प्रदेश को सेमीकंडक्टर और अन्य उभरती तकनीकों के लिए प्रतिभा उपलब्ध कराने में सक्षम बना रहा है।  वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी की दिशा में टेक्नोलॉजी बनेगी आधार उत्तर प्रदेश की मौजूदा रणनीति इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, एआई, रोबोटिक्स और डीप-टेक को एक साथ जोड़कर तकनीक आधारित विकास का मॉडल तैयार करने पर केंद्रित है। राज्य की विशाल आबादी, युवा कार्यबल, इंजीनियरिंग एवं तकनीकी प्रतिभा, मजबूत औद्योगिक आधार और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर इसे बड़े निवेश के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बना रहे हैं।

योगी सरकार का जल प्रबंधन मॉडल बदलेगा बुंदेलखंड की कृषि व्यवस्था, खेतों तक पहुंचेगी इजराइली तकनीक

लखनऊ  बुंदेलखंड में जल संकट की चुनौती से निपटने के लिए योगी सरकार का इंडिया-इजराइल बुंदेलखंड वाटर प्रोजेक्ट अब केवल जलाशय और सिंचाई ढांचा तैयार करने तक सीमित नहीं है। झांसी के गंगावली में चल रहे मिनी पायलट प्रोजेक्ट के जरिए अब यह परखा जा रहा है कि उपलब्ध पानी का वैज्ञानिक प्रबंधन कर कम पानी में अधिक और बेहतर कृषि उत्पादन कैसे हासिल किया जा सकता है। परियोजना के अगले चरण में ड्रिप, स्प्रिंकलर, ऑटोमेटेड इरिगेशन, सोलर पंपिंग, वाटर बजटिंग और संरक्षित खेती जैसी तकनीकों को स्थानीय परिस्थितियों में परखा जाएगा। नमामि गंगे और ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के विशेष सचिव एवं निदेशक, भूगर्भ जल विभाग डॉ. राजेश कुमार प्रजापति ने कहा कि सबसे खास बात यह है कि परियोजना में ‘जितना पानी उपलब्ध, उसी के अनुरूप खेती’ की अवधारणा को बढ़ावा देने की तैयारी है। पांड वाटर बजटिंग के जरिए तालाब में उपलब्ध उपयोगी पानी का आकलन किया जाएगा और उसी आधार पर फसल क्षेत्र व गर्मी की फसलों के लिए पानी की सीमा तय करने का प्रस्ताव है। इससे जरूरत से ज्यादा पानी निकालने के बजाय उपलब्ध जल का अधिकतम उत्पादक उपयोग किया जा सकेगा। पानी के हिसाब से तय होगी खेती की योजना बुंदेलखंड जैसे जल-संवेदनशील क्षेत्र में वाटर बजटिंग को परियोजना की महत्वपूर्ण कड़ी बनाया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रमों में किसानों को तालाब के पानी का हिसाब-किताब और संतुलन तैयार करने की जानकारी दी जाएगी। उपलब्ध उपयोगी पानी के आधार पर फसल क्षेत्र निर्धारित करने और गर्मी की फसलों के लिए वाटर सीलिंग तय करने की व्यवस्था प्रस्तावित है। इसका सीधा फायदा यह होगा कि खेती की योजना उपलब्ध जल संसाधनों को ध्यान में रखकर बनाई जाएगी। अनियंत्रित सिंचाई और जरूरत से अधिक पानी निकालने के बजाय जल-बजट आधारित सिंचाई को बढ़ावा मिलेगा। इससे सीमित जल का बेहतर उपयोग करते हुए कृषि उत्पादकता बढ़ाने की संभावना बनेगी। भूजल की स्थिति पर भी रखी जाएगी वैज्ञानिक नजर डॉ. राजेश कुमार प्रजापति ने कहा कि परियोजना के शुरुआती चरण में भूजल स्तर में सुधार को लेकर अभी कोई मात्रात्मक निष्कर्ष स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया है। हालांकि, भविष्य में वास्तविक प्रभाव का वैज्ञानिक मूल्यांकन करने के लिए बोरवेल और ऑब्जर्वेशन वेल की व्यवस्था की गई है। इनके माध्यम से जल स्रोत और जल उपयोग की निगरानी की जाएगी। परियोजना में प्री-प्रोजेक्ट और पोस्ट-प्रोजेक्ट भूजल आंकड़ों की तुलना कर यह आकलन करने की तैयारी है कि जल दक्षता बढ़ाने वाली व्यवस्थाओं से भूजल पर दबाव कितना कम होता है। यानी परियोजना का मूल्यांकन केवल दावों के आधार पर नहीं, बल्कि आंकड़ों के आधार पर करने की व्यवस्था तैयार की जा रही है। इजराइली तकनीक का बुंदेलखंड की जमीन पर परीक्षण इंडिया-इजराइल सहयोग के तहत माइक्रो इरिगेशन, ड्रिप, स्प्रिंकलर, ऑटोमेटेड इरिगेशन, एससीएडीए, सोलर पंपिंग, रिजर्वायर आधारित जल प्रबंधन, वाटर बजटिंग और संरक्षित खेती जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया जा रहा है। परियोजना का उद्देश्य केवल विदेशी तकनीक को स्थापित करना नहीं है, बल्कि यह देखना है कि बुंदेलखंड की स्थानीय परिस्थितियों में कौन सी तकनीक सबसे ज्यादा प्रभावी साबित होती है। इसके लिए पानी की मात्रा, सिंचाई दक्षता, फसल की पैदावार, खेती की लागत और जल उत्पादकता जैसे मानकों को मापने की व्यवस्था प्रस्तावित है। जलाशय से खेत तक पहुंचेगी आधुनिक सिंचाई व्यवस्था परियोजना के अगले चरण में जलाशय से खेत तक पाइपलाइन बिछाने, ड्रिपलाइन और स्प्रिंकलर लगाने, ग्रीनहाउस/टनल व सिंचाई स्वचालन प्रणाली को क्रियाशील करने की योजना है। इसके साथ किसानों को खाद एवं उर्वरक के उचित इस्तेमाल, जल बजट तैयार करने, फसल की योजना बनाने और कृषि यंत्रों के संचालन का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इससे किसानों को केवल सिंचाई का नया साधन नहीं मिलेगा, बल्कि पानी, फसल और कृषि लागत को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने की तकनीकी जानकारी भी मिलेगी। प्रदर्शन खेत से किसानों के अपने खेत तक पहुंचेगा मॉडल परियोजना की एक महत्वपूर्ण कड़ी सफल तकनीकों को किसानों के अपने खेतों तक पहुंचाना है। गंगावली के डेमोस्ट्रेशन फार्म यानी प्रदर्शन खेत में जिन तकनीकों और व्यवस्थाओं के बेहतर परिणाम सामने आएंगे, उन्हें किसानों के खेतों में अपनाने और दोहराने का अवसर दिया जाएगा। इससे मिनी पायलट प्रोजेक्ट केवल प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सफल मॉडल को व्यापक स्तर पर किसानों तक ले जाने का आधार तैयार होगा। हर फसल और हर बूंद का रखा जाएगा रिकॉर्ड परियोजना में निगरानी को केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं रखा गया है। प्रदर्शन खेतों पर फसल उत्पादन, पानी के इस्तेमाल, पानी के समान वितरण, कृषि सामग्री की मात्रा, लागत, सकल लाभ और किसानों द्वारा नई तकनीकों को अपनाने जैसे महत्वपूर्ण मानकों का नियमित रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था प्रस्तावित है। खेत से जुड़े अभिलेख डिजिटल रूप में दर्ज किए जाएंगे। मौसम के अनुसार किसानों के परिणामों का सूचना-पटल तैयार करने की भी व्यवस्था प्रस्तावित है। इससे परियोजना के प्रभाव का चरणबद्ध और वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जा सकेगा। कृषि और भूजल विभागों की भी रहेगी तकनीकी भागीदारी भूगर्भ जल विभाग के अधिशासी अभियंता व वैयक्तिक सहायक निदेशक अनुपम ने कहा कि परियोजना के परिणामों के सत्यापन के लिए कृषि, उद्यान और भूजल विभागों को तकनीकी सहयोग से जोड़ने का प्रावधान किया गया है। इससे अलग-अलग विभागों की विशेषज्ञता का इस्तेमाल कर परियोजना के परिणामों को जांचने और आगे की रणनीति तैयार करने में मदद मिलेगी।

योगी सरकार का बड़ा स्वास्थ्य कवच, कई वर्गों को परिवार सहित कैशलेस इलाज मुहैया कराया

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश सरकार ने हाल के महीनों में विभिन्न वर्गों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा से जोड़कर स्वास्थ्य सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। शिक्षकों से लेकर पीआरडी जवानों, रसोइयों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं तक के लिए परिवार सहित इलाज की सुविधा का विस्तार किया गया है। इन फैसलों से गंभीर बीमारी की स्थिति में इलाज के खर्च की चिंता कम होने के साथ जरूरतमंद परिवारों को समय पर बेहतर उपचार मिल सकेगा।  शिक्षकों और परिवारों को पांच लाख तक का स्वास्थ्य कवर उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत विश्वविद्यालयों, अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों, स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों और स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में कार्यरत 1.28 लाख से अधिक शिक्षकों और उनके आश्रित परिवारों को मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा सुविधा योजना से जोड़ा गया है। इसके तहत प्रत्येक पात्र परिवार को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर मिलेगा। सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती, उपचार, दवाइयों और डिस्चार्ज तक का खर्च योजना के तहत वहन किया जाएगा। योजना में 1900 से अधिक उपचार पैकेज शामिल हैं, जिनमें कैंसर, हृदय और किडनी जैसी गंभीर बीमारियों का उपचार भी शामिल है।   पीआरडी जवानों और परिवारों को भी स्वास्थ्य सुरक्षा मुख्यमंत्री योगी ने हाल में प्रांतीय रक्षक दल के 31 हजार से अधिक स्वयंसेवकों और उनके परिवारों को भी प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक के मुफ्त कैशलेस इलाज की सुविधा दी है। सरकारी और सरकार से सूचीबद्ध अस्पतालों में इस सुविधा का लाभ मिलेगा। औसत परिवार के हिसाब से 1.55 लाख से अधिक लोग इससे लाभान्वित होंगे।  रसोइया बहनों को भी परिवार सहित कैशलेस इलाज परिषदीय विद्यालयों में पीएम पोषण योजना के तहत बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाली रसोइयों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ दिया गया है। मुख्यमंत्री ने उनके मानदेय में प्रतिमाह एक हजार रुपये की बढ़ोतरी के साथ परिवार सहित पांच लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की घोषणा की। इससे बीमारी की स्थिति में इलाज के लिए कर्ज लेने की चिंता कम होगी। विभिन्न जिलों की रसोइयों ने इसे परिवार की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में बड़ी राहत बताया है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं को भी बड़ा स्वास्थ्य कवच आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को भी इस स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में लाया गया है। मुख्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं का मानदेय आठ हजार से बढ़ाकर 12 हजार रुपये और सहायिकाओं का चार हजार से बढ़ाकर छह हजार रुपये करने की घोषणा के साथ कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और उनके परिवारों को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का एलान किया। कार्यकर्ताओं ने इसे उनके श्रम और जिम्मेदारियों के सम्मान के साथ परिवार के लिए बड़ी राहत बताया है।

बाढ़ प्रभावितों की मदद में योगी सरकार का राहत तंत्र मुस्तैद, 17,544 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया

लखनऊ उत्तर प्रदेश में बाढ़ की स्थिति के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राहत एवं बचाव अभियान लगातार युद्धस्तर पर जारी है। उत्तर प्रदेश बाढ़ राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक गुरुवार को प्रदेश के 26 जिलों में बाढ़ का असर रहा। करीब 3.53 लाख आबादी प्रभावित होने के बावजूद राहत एवं बचाव तंत्र की सक्रियता से अब तक कोई जन या पशु हानि नहीं दर्ज की गई है।प्रभावितों को 72,897 बाढ़ राहत किट और 3.67 लाख से अधिक लंच पैकेट वितरित किए जा चुके हैं।  प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ भोजन, राहत सामग्री और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। अब तक 17,544 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। अभी 4,847 लोग बाढ़ शरणालयों में रह रहे हैं। प्रदेश में कुल 1,312 बाढ़ शरणालय स्थापित किए गए हैं। 1 हजार से ज्यादा मेडिकल टीमें सक्रिय राहत और बचाव अभियान को प्रभावी बनाने के लिए 1,634 बाढ़ चौकियां, 1,697 नाव-मोटरबोट और 1,068 मेडिकल टीमें सक्रिय हैं। इससे प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी के साथ जरूरतमंद लोगों तक तत्काल मदद पहुंचाई जा रही है। राहत सामग्री वितरण में भी तेजी योगी सरकार के राहत अभियान में प्रभावित परिवारों तक भोजन और जरूरी सामग्री पहुंचाने पर विशेष जोर है। अब तक 72,897 बाढ़ राहत खाद्यान्न पैकेट और 3,67,551 लंच पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। इसके अलावा पशुओं के लिए 5 हजार क्विंटल से अधिक भूसा वितरित किया जा चुका है। स्वास्थ्य सुरक्षा के तहत 5.52 लाख से अधिक क्लोरीन टैबलेट और 1.87 लाख से अधिक ओआरएस पैकेट भी वितरित किए जा चुके हैं। बाढ़ से 45 हजार से अधिक पशु प्रभावित हैं, लेकिन अभी तक किसी पशु की मृत्यु नहीं हुई है। इसी तरह जनहानि की भी कोई सूचना नहीं मिली है।   प्रदेश के बाढ़ प्रभावित जिले अमरोहा, अयोध्या, आजमगढ़, बदायूं, बलिया, बाराबंकी, बस्ती, चंदौली, फर्रुखाबाद, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, कासगंज, कानपुर, लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर, मुरादाबाद, पीलीभीत, प्रयागराज, रायबरेली, रामपुर, संत कबीर नगर, शाहजहांपुर, उन्नाव और वाराणसी।

जलभराव की समस्या का तत्काल समाधान सुनिश्चित करने के लिए नगर निगमों और स्थानीय निकायों को किया गया सचेत

लखनऊ योगी सरकार ने बारिश के दौरान नगरीय क्षेत्रों में नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए व्यवस्थाओं की निगरानी तेज कर दी है। इसी क्रम में नगर विकास मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर जल निकासी, नाला- नालियों की सफाई और पेयजल आपूर्ति समेत विभिन्न व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बरसात के दौरान नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और जलभराव की समस्या का तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाए। नगर विकास मंत्री ने नाला-नालियों की सफाई व्यवस्था पर विशेष जोर देते हुए कहा कि बरसात के दौरान जलभराव की प्रमुख वजहों में नाला-नालियों का अवरुद्ध होना भी शामिल है। इसलिए सभी नगर निकायों में नाला-नालियों की सफाई का कार्य पूरी गंभीरता के साथ कराया जाए। सफाई के बाद निकली सिल्ट और कचरे का तत्काल निस्तारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि वह दोबारा नालियों में न पहुंचे। उन्होंने सभी नगरीय निकायों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सफाई व्यवस्था में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में प्रत्येक वर्ष जलभराव की समस्या सामने आती है, उन्हें चिन्हित कर वहां प्रभावी जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। एके शर्मा ने पेयजल आपूर्ति की भी समीक्षा की और अधिकारियों को निर्देश दिए कि बरसात के मौसम में पेयजल की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न हो। नागरिकों को पर्याप्त एवं शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाए। जहां कहीं पेयजल आपूर्ति से संबंधित शिकायतें प्राप्त हों, उनका प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाए। मंत्री ने आगामी त्योहारों के मद्देनजर नगरीय व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद रखने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान शहरों में लोगों की आवाजाही और भीड़ बढ़ती है। ऐसे में साफ-सफाई, जल निकासी, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था तथा अन्य नागरिक सुविधाओं को पहले से ही दुरुस्त रखा जाए। धार्मिक एवं सार्वजनिक स्थलों के आसपास विशेष साफ-सफाई कराई जाए और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त संसाधनों की व्यवस्था की जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नगर निगमों और नगर निकायों की व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी की जाए तथा अधिकारी केवल कार्यालयों तक सीमित न रहें, बल्कि मौके पर जाकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश के शहरों को स्वच्छ, सुंदर, सुरक्षित और बेहतर नागरिक सुविधाओं से युक्त बनाने के लिए सरकार लगातार कार्य कर रही है। इस दिशा में नगर निकायों की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण है।

बुनकरों को सरकारी खरीद के माध्यम से मिलेगा स्थायी बाजार और रोजगार

लखनऊ  प्रदेश की योगी सरकार हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग को प्रोत्साहन देने तथा प्रदेश के बुनकरों को अधिक से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए सरकारी संस्थानों में स्थानीय स्तर पर निर्मित हथकरघा उत्पादों की खरीद को बढ़ावा दे रही है। इसी क्रम में मंगलवार को विधान भवन स्थित कक्ष संख्या-80 में खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग एवं अन्य सरकारी विभागों तथा शासकीय उपक्रमों में प्रयुक्त होने वाले बेडशीट एवं गॉज बैंडेज की खरीद और आपूर्ति सुनिश्चित किए जाने के संबंध में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में मंत्री राकेश सचान ने कहा कि प्रदेश के बुनकरों को सरकारी खरीद का बाजार उपलब्ध कराना योगी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकारी संस्थानों में स्थानीय बुनकरों द्वारा निर्मित गुणवत्तापूर्ण वस्त्रों की खरीद बढ़ने से प्रदेश के लाखों बुनकर परिवारों को रोजगार और आर्थिक मजबूती मिलेगी तथा प्रदेश में उत्पादित वस्त्रों के लिए स्थायी बाजार भी विकसित होगा। उल्लेखनीय है कि 07 अगस्त 2026 को लोकभवन, लखनऊ में हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग निदेशालय, उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित राष्ट्रीय हथकरघा दिवस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वास्थ्य विभाग सहित सरकारी विभागों एवं शासकीय उपक्रमों में प्रमुख रूप से प्रयुक्त होने वाले बेडशीट एवं गॉज बैंडेज की खरीद सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुपालन में बैठक के दौरान इसकी कार्ययोजना पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में लगभग 2,13,107 बुनकर कार्यरत हैं। बेडशीट तथा गॉज बैंडेज सहित विभिन्न वस्त्रों का उत्पादन प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में बुनकरों द्वारा किया जा रहा है। सरकारी खरीद में इन उत्पादों को प्राथमिकता मिलने से बुनकरों के उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराया जा सकेगा और परंपरागत बुनकरी व्यवसाय से नई पीढ़ी को जोड़ने में भी मदद मिलेगी। समीक्षा बैठक में प्रस्तावित व्यवस्था के तहत सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में आवश्यकतानुसार बेडशीट, तकिया कवर तथा गॉज बैंडेज क्लॉथ की आपूर्ति उत्तर प्रदेश राज्य हथकरघा निगम लिमिटेड के माध्यम से सुनिश्चित किए जाने पर चर्चा हुई। इसके लिए प्रदेश के बुनकर सहकारी समितियों एवं बुनकरों से गुणवत्तापूर्ण उत्पादन कराया जाएगा। संबंधित चिकित्सा संस्थानों द्वारा अपनी आवश्यकता के अनुरूप मांग एवं क्रय आदेश समय से जारी किए जाने की व्यवस्था विकसित करने पर भी विचार किया गया। मंत्री राकेश सचान ने उत्पादों की गुणवत्ता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि सरकारी संस्थानों को उपलब्ध कराई जाने वाली सामग्री निर्धारित मानकों के अनुरूप और गुणवत्तापूर्ण होनी चाहिए।  बैठक में आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए नोडल अधिकारी नामित किए जाने पर भी चर्चा हुई। नोडल अधिकारी विभिन्न चिकित्सालयों, मेडिकल कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों से समन्वय स्थापित करते हुए उनकी आवश्यकताओं, निर्धारित विशिष्टियों एवं आपूर्ति से संबंधित सूचनाएं प्राप्त कर  विभाग को उपलब्ध कराएगा। इससे मांग के अनुरूप समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि योगी सरकार द्वारा हथकरघा क्षेत्र के लिए निर्धारित आरक्षित वस्तुओं की खरीद का उद्देश्य केवल सरकारी खरीद की प्रक्रिया पूरी करना नहीं, बल्कि प्रदेश के बुनकर परिवारों को स्थायी रोजगार और बाजार उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि जब बुनकरों को उनके उत्पाद का सुनिश्चित बाजार मिलेगा तो परंपरागत बुनकरी से जुड़ी युवा पीढ़ी भी इस व्यवसाय की ओर आकर्षित होगी और प्रदेश की समृद्ध हथकरघा परंपरा को नई गति मिलेगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप पूरी कार्ययोजना को शीघ्र अंतिम रूप दिया जाए। उत्पादों के मानक, गुणवत्ता जांच, दर निर्धारण, मांग प्राप्त करने, क्रय आदेश जारी करने, भुगतान तथा समयबद्ध आपूर्ति सहित सभी बिंदुओं को शामिल करते हुए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की जाए। उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को आपसी समन्वय से कार्य करते हुए अगले सप्ताह तक आवश्यक बिंदुओं को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए। बैठक में प्रमुख सचिव हथकरघा-वस्त्रोद्योग अनिल सागर, विशेष सचिव शेषमणि पांडेय, संयुक्त आयुक्त पी. सी. ठाकुर सहित स्वास्थ्य विभाग एवं हथकरघा-वस्त्रोद्योग विभाग के अधिकारियों के साथ अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

नदियों के तट से पांच किमी. की परिधि में पौधरोपण कर 22240 से अधिक हेक्टेयर भूमि को आच्छादित करेगी योगी सरकार

लखनऊ  योगी सरकार पौधरोपण महायज्ञ-2026 के तहत उत्तर प्रदेश में 13 प्रमुख नदियों के किनारे बड़े पैमाने पर पौधरोपण करेगी। गंगा, यमुना, गोमती, सरयू, समेत कई प्रमुख नदियों के किनारे पौधरोपण होगा। गंगा के किनारे 4495.72 हेक्टेयर में 79.86 लाख से अधिक पौधरोपण होगा तो यमुना किनारे सर्वाधिक 647 स्थल चिह्नित किए गए हैं, जहां पौधरोपण कराए जाएंगे। नदियों के तट से पांच किमी. की परिधि में कुल 2673 स्थल चिह्नित किए गए हैं, इनके किनारे 22240 हेक्टेयर से अधिक में 3.83 करोड़ से अधिक पौधरोपण होगा।  यमुना नदी के तट क्षेत्र पर होंगे सर्वाधिक पौधरोपण  सीएम योगी के निर्देश पर नदियों के किनारे पौधरोपण होंगे। अविरल धारा पौधरोपण कार्यक्रम के तहत यमुना नदी के तट पर सर्वाधिक पौधे रोपित किए जाएंगे। यमुना के कैचमेंट एरिया में 647 स्थलों पर 6531.77 हेक्टेयर क्षेत्रफल में 1 करोड़, 8 लाख, 18 हजार से अधिक पौधे लगाए जाएंगे। वहीं गंगा नदी के किनारे 603 स्थलों पर 4495.72 हेक्टेयर में पौधे लगाए जाएंगे। इसके किनारे 79.86 लाख से अधिक पौधे लगाए जाएंगे। गंगा किनारे के वन प्रभागों प्रयागराज, प्रतापगढ़, कौशांबी, फतेहपुर, वाराणसी, गाजीपुर, मीरजापुर, भदोही, काशी वन्यजीव व बलिया आदि में यह पौधरोपण प्रस्तावित है।  इन 13 नदियों के समीप होगा अविरल धारा पौधरोपण क्रम  नदी    स्थल   क्षेत्रफल (हेक्टेयर)   पौधों की संख्या  1  यमुना       647      6531.77         1,08,18,731 2 गंगा         603       4495.72          79,86,512 3 गोमती        297      1521.5          31,37,845 4 सरयू/घाघरा   254      1635.58         27,75,860 5  सई        238      1032.52          23,29,609 6  बेतवा       171       3281.76         52,35,132 7 राप्ती       155          1037.67         16,60,272 8 छोटी गंडक   105       513.00          8,20,800 9  सोन        67        970.63         14,77,158  10  रामगंगा    51        268.51         4,49,978 11  केन       39       667.9            10,68,381 12  हिंडन     33        131.55          3,16,480 13  चंबल     13         152.00           2,28,200 कुल–     2673        22240.11        3,83,04,958 पौधरोपण महायज्ञ-2026 के दौरान वन विभाग की तरफ से प्रदेश में 13 नदियों के किनारे अविरल धारा पौधरोपण कराया जाएगा। इसमें मां गंगा, मां यमुना, मां सरयू आदि के नदियों के तट से 5 किमी. की परिधि में पौधरोपण होगा। नदियों के किनारे 3.83 करोड़ से अधिक पौधरोपण को लेकर भी विभाग ने तैयारी पूरी कर ली है। मुख्यमंत्री जी के दिशा-निर्देशन में पौधरोपण महायज्ञ उत्सव के साथ मनाया जाएगा।  अदिति शर्मा  मुख्य वन संरक्षक (प्रचार/प्रसार), वन विभाग