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योगी सरकार का उत्तर प्रदेश को देश का अग्रणी खेल केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश खेल और शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। इसी क्रम में मेरठ स्थित मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए विभिन्न स्नातक, परास्नातक और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया शुरू कर दी है। अभ्यर्थी 10 जुलाई तक विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह पहल प्रदेश के खिलाड़ियों और खेल क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर लेकर आई है। बीएससी योग और एमएससी योग में प्रवेश शुरू इस वर्ष से विश्वविद्यालय में तीन वर्षीय बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स (बीपीईएस) और बीएससी योग पाठ्यक्रम में प्रवेश दिए जाएंगे। इसके साथ ही दो वर्षीय एमएससी योग कार्यक्रम में भी दाखिले होंगे। खेल क्षेत्र में नए अवसरों को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय ने स्पोर्ट्स जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में एक वर्षीय पीजी डिप्लोमा कोर्स भी शुरू किया है। विवि में बीपीईएस कोर्स 2025-26 से शुरू हो चुका है। प्रवेश प्रक्रिया से संबंधित विस्तृत प्रॉस्पेक्टस वेबसाइट https://sportsuniup.com/ पर उपलब्ध कर दिया गया है। खिलाड़ियों और छात्रों को आवेदन के लिए लगभग एक महीने का समय दिया गया है। कई खेलों में पीजी डिप्लोमा कोर्स भी हो रहा शुरू अगर सीटों की बात करें तो बीपीईएस में 50, बीएससी योग में 40, एमएससी योग में 20 और स्पोर्ट्स जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में 15 सीटों पर प्रवेश होंगे। इसके अलावा इस सत्र से स्कूल ऑफ कोचिंग के अंतर्गत एथलेटिक्स, बैडमिंटन, बॉक्सिंग, हॉकी, कबड्डी, कुश्ती और योग जैसे खेलों में एक वर्षीय पीजी डिप्लोमा कोर्स भी शुरू हो रहा है। इन सभी में पीजी डिप्लोमा के लिए 15-15 सीट पर प्रवेश होगा। इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य छात्रों को रोजगारोन्मुख और व्यावहारिक शिक्षा उपलब्ध कराना है ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें। उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सीधे प्रवेश की सुविधा विश्वविद्यालय में उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सीधे प्रवेश की सुविधा प्रदान की गई है। ओलंपिक, एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल, विश्व चैंपियनशिप, एशियाई चैंपियनशिप और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों को सीधे प्रवेश दिया जाएगा। इसके अलावा खेलो इंडिया, एसजीएफआई राष्ट्रीय खेल, सीनियर, जूनियर और सब-जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को भी विशेष अवसर मिलेगा। विश्वविद्यालय ने सभी पाठ्यक्रमों में 10 प्रतिशत अतिरिक्त सीटें उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए आरक्षित रखने का निर्णय लिया है। ये सीटें स्वीकृत क्षमता के अतिरिक्त होंगी। कुल 12 कोर्सों में होगा प्रवेश मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय के कुलपति मेजर जनरल दीप अहलावत ने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 से विश्वविद्यालय में 9 डिप्लोमा, 2 स्नातक और 1 परास्नातक पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। कुल 12 नए कोर्सों में प्रवेश फिटनेस टेस्ट के आधार पर होगा। कक्षा 12वीं के अंकों और फिटनेस टेस्ट के प्रदर्शन को मिलाकर मेरिट तैयार की जाएगी। उन्होंने बताया कि पदक विजेता खिलाड़ियों को सीधे प्रवेश की सुविधा दी जाएगी। कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय का मुख्य उद्देश्य खिलाड़ियों का समग्र विकास करना है। साथ ही इसका विजन उत्तर प्रदेश को देश का अग्रणी खेल केंद्र बनाना है।

लैपटॉप से लेकर निःशुल्क शिक्षा तक, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड) बनी बच्चों का मजबूत सहारा

लखनऊ. कोविड महामारी में अपने माता-पिता को खो चुके बच्चों के लिए योगी सरकार अभिभावक की भूमिका निभा रही है। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड) के तहत अनाथ और बेसहारा बच्चों को न केवल आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, बल्कि उनके बेहतर भविष्य के लिए शिक्षा को भी प्राथमिकता दी गई है। महिला कल्याण विभाग के द्वारा सरकार 8085 बच्चों को लैपटॉप वितरित कर उन्हें डिजिटल शिक्षा से जोड़ चुकी है। डिजिटल युग में यह पहल बच्चों के लिए ज्ञान और अवसरों के नए द्वार खोल रही है। इससे वो ऑनलाइन अध्ययन, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और तकनीकी दक्षता हासिल करने में सक्षम हो रहे हैं। वहीं 11 से 18 वर्ष तक के बच्चों को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय और अटल आवासीय विद्यालयों में कक्षा 12 तक निःशुल्क प्रदान कर रही हैं। योजना के अंतर्गत प्रत्येक बच्चे को प्रतिमाह उसकी शिक्षा जारी रखने के लिए 4 हजार रुपये प्रतिमाह की सहायता भी दी जा रही है। यह पहल बच्चों के सपनों को नई उड़ान देने का माध्यम बन रही है। निःशुल्क शिक्षा के साथ आर्थिक संबल योगी सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि संसाधनों के अभाव में कोई भी बच्चा अपनी पढ़ाई अधूरी न छोड़े। योजना के अंतर्गत 11 से 18 वर्ष तक के बच्चों को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों और अटल आवासीय विद्यालयों में कक्षा 12 तक निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही प्रत्येक पात्र बच्चे को 4 हजार रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता भी प्रदान की जा रही है। यह सहायता बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इससे किताबें, स्टेशनरी और अन्य जरूरी शैक्षिक संसाधन जुटाने में मदद मिलती है। सरकार का यह प्रयास सामाजिक सुरक्षा और शिक्षा के समन्वित मॉडल के रूप में सामने आया है। प्रतिस्पर्धी माहौल से जुड़ रहे बच्चे लैपटॉप वितरण और आधुनिक शैक्षिक सुविधाओं के माध्यम से बच्चों को प्रतिस्पर्धी माहौल से जोड़ने की दिशा में भी प्रभावी कार्य किया जा रहा है। शिक्षा आधारित यह मॉडल बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार कर रहा है। योगी सरकार का प्रयास है कि ये बच्चे आत्मनिर्भर बनेः निदेशक योगी सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि महामारी से प्रभावित कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। निःशुल्क शिक्षा, आर्थिक सहायता और डिजिटल संसाधनों के माध्यम से बच्चों को आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। योगी सरकार का प्रयास है कि ये बच्चे आत्मनिर्भर बनें और अपने सपनों को साकार कर सकें। इसलिए प्रदेश के सभी जिला प्रोबेशन अधिकारियों को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के पात्र बच्चों को समय पर लाभ प्रदान करने तथा ऐसे बच्चों का नियमित फॉलोअप लेकर उनके सम्पूर्ण विकास सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। सी. इंदुमती, निदेशक, महिला कल्याण विभाग

निपुण भारत मिशन को नई धार देगी योगी सरकार, जुलाई में प्रदेशभर में होंगी ‘निपुण संकल्प कार्यशालाएं’

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार निपुण भारत मिशन को और अधिक प्रभावी तथा परिणामोन्मुखी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान को मजबूत करने के साथ-साथ विद्यालयों में सीखने के परिणामों में सुधार लाने के उद्देश्य से जुलाई में प्रदेश के सभी जनपदों में ‘निपुण संकल्प कार्यशालाओं’ का आयोजन किया जाएगा।  प्रदेश के 33 केंद्रों पर 6 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक आयोजित होने वाली इन कार्यशालाओं में विभिन्न जनपदों के शैक्षणिक अधिकारी और विशेषज्ञ प्रतिभाग करेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शिक्षा क्षेत्र में चल रहे सुधारों की यह पहल निपुण भारत मिशन को जमीनी स्तर पर और मजबूत बनाने के साथ-साथ प्रदेश के लाखों बच्चों को बेहतर अधिगम अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इन कार्यशालाओं के माध्यम से शैक्षणिक सत्र 2026-27 की रणनीति, निपुण विद्यालय लक्ष्य, विद्यालय गुणवत्ता सुधार, निपुण 2.0, बालवाटिका संचालन तथा डेटा आधारित अनुश्रवण की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। शिक्षा सुधार का वास्तविक प्रभाव तभी दिखाई देता है जब योजनाएं और नीतियां प्रभावी रूप से कक्षा-कक्ष तक पहुंचें। इसलिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों, खंड शिक्षा अधिकारियों, डायट प्राचार्यों, एआरपी, एसआरजी, डायट मेंटरों तथा जिला समन्वयकों को एक साझा मंच पर लाकर शैक्षणिक गुणवत्ता संवर्धन की रणनीति तैयार की जाएगी। कार्यशालाओं में शैक्षणिक सत्र 2026-27 की अकादमिक रणनीति, निर्धारित शैक्षणिक कैलेंडर, विद्यालय स्तर पर संचालित गतिविधियों तथा निपुण विद्यालय लक्ष्यों पर विशेष मंथन होगा।  कार्यशालाओं में परख (PARAKH) राष्ट्रीय सर्वेक्षण से प्राप्त निष्कर्षों की समीक्षा करते हुए सीखने के परिणामों को बेहतर बनाने की रणनीति तैयार की जाएगी। साथ ही जिला, ब्लॉक और विद्यालय स्तर पर वार्षिक लक्ष्य निर्धारण, उनकी नियमित समीक्षा तथा डेटा आधारित अनुश्रवण व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर भी जोर रहेगा। योगी सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक विद्यालय में सीखने के परिणामों का सतत मूल्यांकन हो और समयबद्ध सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें। निपुण भारत मिशन के विस्तार के अंतर्गत कक्षा 3 से 5 तक प्रस्तावित लक्ष्य आधारित शिक्षण, प्रभावी कक्षा-शिक्षण के लिए 10 प्वाइंट टूलकिट, कैच-अप शिक्षण तथा निपुण प्लस में प्रस्तावित सुधारों पर भी चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही बालवाटिका के प्रभावी संचालन तथा कक्षा 1 से 5 तक शिक्षक संदर्शिका आधारित संरचित शिक्षण पद्धति को विद्यालयों में लागू करने की रणनीति तैयार की जाएगी, जिससे बच्चों की सीखने की नींव और अधिक मजबूत हो सके। कार्यशालाओं में विभागीय प्राथमिकताओं की समीक्षा, एआईपीएफएसएसी पोर्टल के प्रभावी उपयोग, बीईओ और एआरपी के बीच बेहतर समन्वय, विद्यालय गुणवत्ता सुधार की कार्ययोजना तथा शिक्षकों को प्रभावी फीडबैक उपलब्ध कराने जैसे विषयों को भी शामिल किया गया है। इससे शैक्षणिक नेतृत्व को मजबूत करने और विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

इन महिलाओं को प्रधानमंत्री आवास योजना अथवा मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत मिलेगा पक्का मकान

लखनऊ योगी सरकार महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी सशक्तीकरण को लेकर लगातार नए कदम उठा रही है। इसी क्रम में योगी सरकार ने तीन तलाक तथा एसिड अटैक जैसी गंभीर सामाजिक त्रासदियों से प्रभावित महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। योगी सरकार इन पीड़ित महिलाओं को प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना तथा मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना से लाभान्वित करने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही निराश्रित महिलाओं को भी इन सभी योजनाओं का लाभ देने की तैयारी शुरू कर दी गयी है। कई विभागों से समन्वय स्थापित कर एकत्रित किया जा रहा डाटा  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर महिला कल्याण विभाग ने विभागीय स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी है। इसके साथ ही महिला कल्याण विभाग तीन तलाक एवं एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं के साथ निराश्रित महिलाओं का विस्तृत डाटा एकत्रित किया जा रहा है, ताकि पात्र महिलाओं को योजनाओं का लाभ प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जा सके। शासन स्तर पर इसके लिए आवश्यक दिशा-निर्देश और शासनादेश (जीओ) तैयार करने की प्रक्रिया भी चल रही है। महिला कल्याण विभाग द्वारा पीड़ित महिलाओं का सत्यापित विवरण एकत्रित किया जा रहा है। इसके आधार पर लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें विभिन्न योजनाओं से जोड़ा जाएगा। योगी सरकार का उद्देश्य है कि किसी भी पात्र महिला को केवल जानकारी के अभाव या प्रक्रियागत जटिलताओं के कारण सरकारी योजनाओं से वंचित न रहना पड़े। इसके लिए विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को दिए थे निर्देश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिये थे कि जिन महिलाओं को तीन तलाक या एसिड अटैक जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है और जिनके पास स्थायी आवास नहीं है, उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना अथवा मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत पक्का घर उपलब्ध कराया जाए। इसके साथ ही इन महिलाओं और उनके परिवारों को आयुष्मान भारत योजना एवं मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना से जोड़कर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का भी लाभ दिया जाए। मालमू हो कि एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं को लंबे समय तक इलाज, सर्जरी और पुनर्वास की आवश्यकता होती है। वहीं, तीन तलाक से प्रभावित कई महिलाएं आर्थिक और सामाजिक असुरक्षा का सामना करती हैं। ऐसे में आवास और स्वास्थ्य सुरक्षा दोनों उपलब्ध कराकर योगी सरकार उनके जीवन को अधिक सुरक्षित और सम्मानजनक बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।

जिम्मेदार ड्राइविंग की संस्कृति विकसित करने के उद्देश्य से अभियान चला रहा है परिवहन विभाग

लखनऊ  योगी आदित्यनाथ सरकार सड़क पर लोगों के जीवन और सम्पत्ति की सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर है। प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने, यातायात नियमों के पालन को बढ़ावा देने और नागरिकों में जिम्मेदार ड्राइविंग की संस्कृति विकसित करने के उद्देश्य से अभियान चलाए जा रहे हैं। इसी क्रम में परिवहन विभाग ने अन्य संबंधित विभागों के साथ मिलकर विशेष प्रवर्तन अभियान चलाया और महज 7 दिन में बड़े स्तर पर कार्रवाई की। परिवहन विभाग के अनुसार, प्रदेश में विशेष प्रवर्तन अभियान के दौरान नियमों का पालन न करने पर 20 से 26 मई तक 57,186 चालान किए गए। वहीं 2,669 वाहनों को सीज किया। सड़क दुर्घटनाओं में हेलमेट और सीट बेल्ट की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी कारण इन दोनों बिंदुओं पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। अभियान के दौरान 23,758 हेलमेट न लगाने वालों के चालान किए गए। इसी तरह 9,083 लोगों के सीट बेल्ट न लगाने पर चालान काटे गए। ड्राइविंग के दौरान मोबाइल का उपयोग दुर्घटना की संभावना को कई गुना बढ़ा देता है। इसको देखते हुए जागरूकता और चेतावनी देने के लिए ड्राइविंग के दौरान मोबाइल उपयोग करने वाले 3,676 लोगों पर कार्रवाई की गई। अनाधिकृत बसों पर भी लगाम विभाग ने सड़क हादसों को रोकने के लिए अनाधिकृत बसों पर भी कार्रवाई की। प्रदेशभर में ऐसी 1,502 बसों का चालान काटा और 400 से अधिक को सीज किया गया। वहीं माल वाहनों में सवारी ढोने पर 1 हजार से अधिक चालन किए गए। साथ ही 91 वाहनों को सीज भी किया। अभियान के माध्यम से लोगों को हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट लगाने, ओवरलोडिंग से बचने, वाहन चलाते समय मोबाइल का उपयोग न करने जैसे महत्वपूर्ण संदेश दिए गए। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि अभियान का उद्देश्य केवल दंडात्मक कार्रवाई करना नहीं, बल्कि लोगों को नियमों के पालन के लिए प्रेरित करना भी है।

वर्ष 2012 से 2017 तक भर्ती प्रक्रिया रही ठप, योगी सरकार ने मिशन मोड में पूरी की चयन प्रक्रिया

लखनऊ उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में वर्षों से चले आ रहे भर्ती संकट को समाप्त कर व्यवस्था परिवर्तन का नया अध्याय लिखा है। पूर्व में वर्ष 2012 से 2017 तक माध्यमिक शिक्षा में भर्ती प्रक्रिया लगभग ठप रही, जिसके कारण विद्यालयों में शिक्षकों के हजारों पद रिक्त हो गए और शिक्षा व्यवस्था गंभीर चुनौतियों से घिर गई।  वर्ष 2017 में योगी सरकार के गठन के बाद स्थिति तेजी से बदली। सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को मिशन मोड में आगे बढ़ाते हुए पारदर्शिता, सुशासन और मेरिट को केंद्र में रखा, जिसका परिणाम 33,401 पदों पर सफल चयन के रूप में सामने आया। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2017 से वर्ष 2022 तक प्रधानाचार्यों के 783, प्रवक्ता के 5,321 तथा प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) के 27,297 पदों पर चयन प्रक्रिया पूरी की गई। इस प्रकार कुल 33,401 पदों पर भर्ती कर माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था को नया संबल प्रदान किया गया। नीति स्पष्ट, नीयत साफ और नतीजे सामने माध्यमिक शिक्षा में भर्ती प्रक्रिया की यह सफलता योगी सरकार की नीति, नीयत और नतीजों का स्पष्ट उदाहरण है। सरकार की नीति विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को दूर कर शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की रही, नीयत पारदर्शी और निष्पक्ष चयन प्रक्रिया सुनिश्चित करने की रही, जबकि इसका नतीजा हजारों रिक्त पदों पर भर्ती के रूप में सामने आया। जहां पूर्ववर्ती सरकार के दौरान चयन प्रक्रिया ठहराव का शिकार रही, वहीं योगी सरकार ने लंबित प्रक्रियाओं को गति देकर यह साबित किया कि राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रभावी प्रशासनिक क्रियान्वयन से वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान संभव है। माध्यमिक शिक्षा में 33 हजार से अधिक पदों पर भर्ती केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि यह उस बदलाव की कहानी है जिसमें ठप पड़ी चयन प्रक्रिया को गति मिली, युवाओं को अवसर मिला और विद्यालयों को शिक्षक मिले।  योगी सरकार ने दूर की विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी वर्षों तक भर्ती प्रक्रिया प्रभावित रहने के कारण माध्यमिक विद्यालयों में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी एक बड़ी चुनौती बन चुकी थी। इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई और शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ रहा था। योगी सरकार ने इस चुनौती को शिक्षा सुधार के व्यापक एजेंडे का हिस्सा बनाते हुए रिक्त पदों को भरने की दिशा में ठोस कदम उठाए। परिणामस्वरूप लंबे समय से लंबित चयन प्रक्रियाओं को गति मिली और हजारों युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए। बड़ी संख्या में टीजीटी, प्रवक्ता और प्रधानाचार्यों की नियुक्ति से विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ी है। इससे शिक्षण व्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने में भी सहायता मिली है। विद्यालयों में शैक्षणिक नेतृत्व को मजबूत करने के लिए प्रधानाचार्यों की नियुक्तियां भी महत्वपूर्ण साबित हुईं हैं, जिससे प्रशासनिक दक्षता और शैक्षणिक वातावरण दोनों बेहतर हुए हैं। शिक्षा सुधारों को मिला मजबूत आधार प्रदेश में ऑपरेशन अलंकार, स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब, विज्ञान एवं कंप्यूटर प्रयोगशालाओं के सुदृढ़ीकरण, डिजिटल शिक्षा और नकलविहीन परीक्षा प्रणाली जैसी पहल के साथ-साथ बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक बदलाव लाई है। पर्याप्त शिक्षकों की उपलब्धता से विद्यालयों में शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को नई गति मिली है और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का आधार और मजबूत हुआ है।

51 लाख किसानों को 45 हजार करोड़ से अधिक का सीधा लाभ

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में खाद्य तथा रसद विभाग ने किसानों और गरीब परिवारों के लिए मजबूत सुरक्षा कवच का काम किया है। रबी विपणन वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक प्रदेश में गेहूं खरीद अभियान को व्यापक स्तर पर संचालित किया गया। इस दौरान कुल 51,70,117 किसानों को लाभ मिला। योगी सरकार की ओर से किसानों को 45,935.46 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। प्रदेश में गेहूं खरीद को सुचारु बनाने के लिए 5,837 गेहूं क्रय केंद्र संचालित किए गए, जिससे किसानों को अपनी उपज बेचने में सहूलियत मिल रही है।  योगी सरकार की प्राथमिकता रही कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ समय पर मिले और उन्हें बिचौलियों पर निर्भर न रहना पड़े। यही वजह रही कि खरीद प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया गया है। विभिन्न फसलों की खरीद से लाखों किसानों को मिला सीधा फायदा खाद्य तथा रसद विभाग के अधिकारियों ने बताया कि धान खरीद के क्षेत्र में प्रदेश ने बड़ा रिकॉर्ड बनाया है। वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक धान खरीद से 80,39,539 किसानों को लाभ पहुंचाया गया। किसानों को इसके बदले 1,03,694.71 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।इसी प्रकार खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 एवं 2025-26 के अंतर्गत ज्वार खरीद से 26,972 किसान लाभान्वित हुए हैं, जिन्हें 363.35 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। वहीं बाजरा खरीद से 1,48,718 किसानों को फायदा पहुंचा और उन्हें 1,854 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। किसानों के विश्वास को योगी सरकार ने किया मजबूत   इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि योगी सरकार केवल गेहूं और धान तक सीमित नहीं रही, बल्कि अन्य फसलों की खरीद को भी बढ़ावा दिया गया। खाद्य तथा रसद विभाग की सक्रिय कार्यप्रणाली ने प्रदेश में किसानों के विश्वास को मजबूत किया है। समय पर भुगतान, खरीद केंद्रों का विस्तार और पारदर्शी व्यवस्था ने यह साबित किया है कि योगी सरकार किसानों और गरीबों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

गांव-गांव बदल रही तस्वीर! गौ संरक्षण के जरिए योगी सरकार बढ़ा रही किसानों की आमदनी

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में गो संरक्षण को केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तीकरण और प्राकृतिक खेती से जोड़कर विकास का मजबूत मॉडल बनाया गया है। उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 7700 से अधिक गोशालाएं संचालित हैं, जहां 12 लाख से ज्यादा निराश्रित गोवंश संरक्षित किए जा रहे हैं। योगी सरकार की यह पहल गांवों में रोजगार, आय और आत्मनिर्भरता का नया आधार बनकर उभर रही है। योगी सरकार अब तक 1.62 लाख से अधिक गाय किसानों और पशुपालकों को सौंप चुकी है। इन पशुओं के पालन-पोषण के लिए लाभार्थियों को 1500 रुपये प्रतिमाह की सहायता राशि भी प्रदान की जा रही है। इससे किसानों को दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ जैविक खेती में भी लाभ मिल रहा है।  महिला स्वयं सहायता समूहों को मिला आत्मनिर्भरता का नया रास्ता उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि प्रदेश के 38 जिलों में महिला स्वयं सहायता समूह गो आधारित उत्पादों के निर्माण और विपणन से जुड़ चुके हैं। इससे 50 हजार से अधिक महिलाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। गोबर और पंचगव्य आधारित उत्पादों के कारोबार में करीब 30 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। इसके अलावा उन्नाव में महिलाएं गाय के गोबर से प्राकृतिक डिस्टेंपर पेंट तैयार कर रहीं हैं। यह पेंट कम लागत वाला होने के साथ एंटीबैक्टीरियल, एंटी फंगल और पूरी तरह गंध रहित है। पर्यावरण के अनुकूल होने के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। इससे स्थानीय स्तर पर छोटे उद्योगों को भी बढ़ावा मिल रहा है। जैविक खाद और पंचगव्य उत्पाद बने ग्रामीण रोजगार का नया आधार उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि योगी सरकार की नीतियों में गोबर को अपशिष्ट नहीं बल्कि आय और रोजगार के संसाधन के रूप में विकसित किया गया है। प्रदेश में गोबर से जैविक खाद, धूपबत्ती, साबुन, पंचगव्य उत्पाद और बायोगैस तैयार की जा रही है। जैविक खाद का बाजार मूल्य 4 हजार से 6 हजार रुपये प्रति टन तक पहुंच चुका है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है। वहीं प्राकृतिक खेती से 8 लाख से ज्यादा किसान जुड़ चुके हैं। जिससे रासायनिक खाद की लागत में 30 से 40 प्रतिशत तक कमी आई है।

तपती गर्मी में भी UP में नहीं थमी बिजली सप्लाई, योगी सरकार की सख्त निगरानी से व्यवस्था दुरुस्त

लखनऊ.  उत्तर प्रदेश में पड़ रही प्रचंड गर्मी के बीच योगी सरकार प्रदेशवासियों को निर्धारित शेड्यूल के अनुसार निर्बाध बिजली आपूर्ति देने के लिए पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर ऊर्जा विभाग लगातार बिजली व्यवस्था की निगरानी कर रहा है, जिससे आम लोगों को गर्मी के इस कठिन दौर में बड़ी राहत मिल रही है। इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा) एवं उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उन्होंने प्रदेश के सभी डिस्कॉम के प्रबन्ध निदेशक से लेकर अधिशासी अभियन्ताओं से विद्युत आपूर्ति को लेकर विस्तृत जानकारी ली तथा उन्हें आवश्यक निर्देश दिये। यूपीपीसीएल अध्यक्ष ने नोएडा, लखनऊ, गाजियाबाद, बुलन्दशहर, बिजनौर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, मुरादाबाद, रामपुर, मथुरा, फिरोजाबाद, झांसी, बरेली, उन्नाव, बनारस, अयोध्या, गोरखपुर, देवरिया और कानपुर (केस्को) के मुख्य अभियन्ताओं से विद्युत आपूर्ति के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। डॉ. आशीष कुमार गोयल ने बैठक में कहा कि इस समय भीषण गर्मी से लोग बेहाल हैं। ऐसे मौसम में सुचारु विद्युत आपूर्ति का अत्यधिक महत्व है। इसलिए सभी क्षेत्रों को निर्धारित शेड्यूल के अनुरूप विद्युत आपूर्ति प्राप्त हो। सभी अधिकारी एवं कार्मिक अपने-अपने क्षेत्रों में विशेष रूप से सजगता बरतें। उपकेन्द्रों एवं संवेदनशील क्षेत्रों में पेट्रोलिंग की जाए। जिन क्षेत्रों में रात्रि में अचानक लोड में अत्यधिक बढ़ोत्तरी होने के कारण ट्रांसफार्मर या लाइनों पर लोड बढ़ता है, उनको चिन्हित कर विजिलेन्स की टीम के साथ जांच अभियान चलाने के निर्देश दिये। बैठक के दौरान यूपीपीसीएल अध्यक्ष ने ट्रांसफार्मर की क्षतिग्रस्तता, ट्रिपिंग एवं सामग्री उपलब्धता के बारे में भी पूछा। सभी मुख्य अभियन्ताओं का कहना था कि निर्धारित शेड्यूल के अनुरूप ग्रामीण एवं शहरों को क्रमशः 18 एवं 24 घंटे विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। सभी सब स्टेशनों पर रात्रिकालीन ड्यूटी लगाई गयी है। वरिष्ठ अधिकारी भी देर रात्रि तक व्यवस्था की मॉनीटरिंग में लगाए गये हैं। पर्याप्त संख्या में सामग्री एवं अनुरक्षण कार्यों के लिए मैन पावर उपलब्ध है। अध्यक्ष डॉ. गोयल ने कहा कि लाइनों, सब स्टेशनों एवं ट्रांसफार्मर की नियमित जांच होती रहे। हेल्प लाइन नंबर 1912 पर आने वाली शिकायतों का त्वरित निस्तारण हो। नए कनेक्शन के लिए झटपट पोर्टल पर प्राप्त आवेदनों का भी शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करें। मुख्य अभियंताओं ने बताया कि पिछले वर्षों की तुलना में ट्रिपिंग एवं आपूर्ति बहाल करने के समय में सुधार हुआ है। ऐसे स्थान जहां पर रात्रि में अचानक लोड बढ़ता है उनको चिन्हित करके विजिलेन्स के साथ चोरी रोकने के प्रयास किये जा रहे हैं। इसके कारण कई स्थानों पर लोड कम हुआ है और विद्युत फाल्ट में भी कमी आई है . डॉ. गोयल ने निर्देशित किया कि संवेदनशील स्टेशनों पर अधिकारियों की तैनाती बढ़ाएं। रिले की सेटिंग ठीक कराएं। इसमें टेस्ट डिवीजन के कार्मिक अभियान के रूप में लगें। ट्रांसमिशन के साथ बेहतर ताल मेल रखें। निदेशक वितरण इसका रिव्यू करें। अध्यक्ष ने कहा कि गर्मी और लू के मौसम में सामान्य शटडाउन न लिया जाये। कहीं भी ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त होने, तार गिरने तथा ट्रिपिंग जैसी समस्याओं का बिना विलम्ब निस्तारण सुनिश्चित किया जाये। ट्रांसमिशन एवं वितरण के अधिकारी परस्पर सामंजस्य स्थापित करके कार्य करें जिससे ट्रांसमिशन के कारण विद्युत आपूर्ति बाधित न हो। डॉ. गोयल ने कहा कि अधिकारी अपने-अपने कार्य क्षेत्र में मौजूद रहें। अपना जनसम्पर्क अच्छा रखें। जन प्रतिनिधियों, मीडिया कर्मियों, उपभोक्ताओं तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं का वाट्सएप ग्रुप बनाएं, जिसमें बिजली आपूर्ति सम्बन्धी आवश्यक सूचनाएं सबको मिलती रहें। अधिक विद्युत व्यवधान वाले क्षेत्रों में विशेष सजगता बरती जाए। ऐसे संवेदनशील स्थानों पर वरिष्ठ अधिकारी स्वंय जाकर समस्याओं को समझें और उनका निराकरण करायें साथ ही संचार माध्यमों से उपभोक्ता को बतायें। यूपीपीसीएल अध्यक्ष ने कहा कि विद्युत वितरण कार्यों से जुड़े अधिकारी एवं कर्मचारी उपभोक्ताओं को विद्युत व्यवधान और आपूर्ति के बारे में सही जानकारी दें। उन्होंने कहा कि किसी की भी लापरवाही से विद्युत आपूर्ति प्रभावित होगी तो उस पर कार्रवाई होगी। बैठक को पावर कारपोरेशन के प्रबन्ध निदेशक नितीष कुमार ने भी सम्बोधित किया। उन्होंने राजस्व वसूली बढ़ाने तथा बिजनेस प्लान की प्रगति तथा आगामी कार्य योजना के बारे में विस्तृत जानकारी ली तथा इसमें तेजी लाने के निर्देश दिये।

नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, योगी सरकार के प्रयास ला रहे रंग

लखनऊ.  सड़क सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बेहद संजीदा हैं। हादसों को न्यूनतम करने की दिशा में वे समय-समय पर संबंधित विभागों की समीक्षा, सकारात्मक प्रयास, जागरूकता आदि पर जोर देते हैं। लिहाजा, सड़क सुरक्षा को लेकर योगी सरकार के प्रयास रंग ला रहे हैं। ई-डीएआर पोर्टल के मुताबिक, वर्ष 2025 की जनवरी से अप्रैल की समयावधि की अपेक्षा जनवरी 2026 से अप्रैल 2026 के बीच दुर्घटनाओं और इससे होने वाली मृत्यु में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। इस अवधि में पिछले वर्ष की तुलना में 3669 (21 प्रतिशत) दुर्घटनाएं कम हुई हैं, जबकि मृतकों की संख्या में भी 2212 (22 प्रतिशत) की कमी दर्शाई गई है। सीएम के निर्देश के उपरांत सड़क सुरक्षा जागरूकता के लिए लगभग 2000 स्थानों पर होर्डिंग लगाई गई और प्रचार-प्रसार के जरिए परिवहन विभाग आमजन को निरंतर जागरूक भी कर रहा है।   परिवहन निगम के 18 हजार से अधिक चालकों का हुआ चेकअप  सीएम योगी के निर्देश पर परिवहन निगम के चालकों की निरंतर स्वास्थ्य/नेत्र जांच की जा रही है। हर छमाही चेकअप किया जा रहा है। अप्रैल 2026 तक 18,975 वाहन चालकों का स्वास्थ्य परीक्षा किया जा चुका है। शेष 2560 चालकों की जांच भी चल रही है। सड़क सुरक्षा के दृष्टिगत यूपीएसआरटीसी की बसों पर रेट्रो रिफ्लेक्टर टेप लगाया जा चुका है। ब्रेथ एनालाइजर परीक्षण अनिवार्य किया गया है। वहीं 300 किमी. से अधिक यात्रा वाली बसों में दो चालक की ड्यूटी भी अनिवार्य की गई है। सड़क सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग/निगम काफी संजीदगी से प्रयासों को धरातल पर उतार रहा है।  जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट (जेडएफडी) योजना भी हो रही कारगर  सड़क दुर्घटनाओं में जनहानि को न्यूतनम करने के उद्देश्य से केंद्रीय सड़क, परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश के 20 जनपदों के 242 क्रिटिकल थानों को जीरो फैटेलिटी योजना के लिए चिह्नित किया गया था। यातायात निदेशालय के मुताबिक इस योजना के क्रियान्वयन के उपरांत 4 महीने में 566 व्यक्तियों की जान बचाई जा चुकी है। उत्तर प्रदेश के सभी 75 जनपदों के 487 क्रिटिकल पुलिस थानों पर यह योजना लागू की गई है। इन 487 क्रिटिकल थानों में 573 क्रिटिकल कॉरिडोर टीम गठित की गई है। हर टीम में एक उपनिरीक्षक व 4 मुख्य आरक्षी/ आरक्षी (2865 पुलिसकर्मी) नियुक्त हैं, जो जीरो फैटेलिटी को सुनिश्चित करने के लिए कार्य कर रहे हैं।  होल्डिंग एरिया को भी किया गया चिह्नित  पहली जनवरी 2026 से 15 मई 2026 के बीच सभी 18 मंडलों मे होल्डिंग एरिया भी चिह्नित व नोटिफाइड किए गए। मंडलों में 656 होल्डिंग एरिया चिह्नित किए गए, इसमें से 630 को नोटिफाइड भी किया गया। आगरा मंडल में सर्वाधिक 121, बरेली में 103, मुरादाबाद में 75, आजमगढ़ में 62 होल्डिंग एरिया चिह्नित/नोटिफाइड किए गए हैं।  मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर परिवहन विभाग सड़क सुरक्षा को लेकर आम नागरिकों को निरंतर जागरूक कर रहा है। सड़क दुर्घटनाओं को न्यूनतम करने की दिशा में संबंधित विभागों के साथ ठोस कदम भी उठाए जा रहे हैं। आम नागरिकों से भी निवेदन है कि हेलमेट, सीट बेल्ट व यातायात के नियमों का पालन करें। सड़क सुरक्षा, स्कूली वाहनों के फिटनेस आदि को लेकर जल्द ही फिर से अभियान प्रारंभ किया जाएगा।  आशुतोष निरंजन, परिवहन आयुक्त, उत्तर प्रदेश