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बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में होगा राज्यस्तरीय कार्यक्रम, सुबह 11 बजे सीएम योगी आदित्यनाथ करेंगे शुभारंभ

लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने शिक्षामित्रों के मानदेय में वृद्धि के बाद अब उनके सम्मान को भी प्राथमिकता देते हुए व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। इस पहल को प्रदेशव्यापी स्वरूप देते हुए आगामी 5 मई को गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राज्यस्तरीय भव्य कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे। ₹18,000 प्रतिमाह मानदेय के साथ लगभग 1.43 लाख शिक्षामित्रों को इस प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा, जिसके माध्यम से पूरे प्रदेश में यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि शिक्षा व्यवस्था की नींव को मजबूत करने वाले शिक्षामित्रों को अब उचित पहचान और संबल मिल रहा है। शिक्षामित्रों को अप्रैल माह से ही बढ़े हुए मानदेय का लाभ मिलना शुरू हो चुका है और अब 5 मई को गोरखपुर के बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह से मुख्यमंत्री इसके औपचारिक शुभारंभ के साथ शिक्षामित्रों से संवाद भी करेंगे। सुबह 11 बजे होने वाले इस कार्यक्रम के समानांतर सभी जनपदों में भी आयोजन कर इसे व्यापक रूप दिया जाएगा। परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत लगभग 1.43 लाख शिक्षामित्रों के लिए लिया गया यह निर्णय अब पूरी तरह लागू हो चुका है। 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी इस व्यवस्था के अंतर्गत बेसिक शिक्षा के 13,597 और समग्र शिक्षा के 1,29,332 शिक्षामित्रों को ₹18,000 प्रतिमाह की दर से भुगतान किया जा रहा है, जिससे उनका आर्थिक सशक्तीकरण हुआ है। योगी सरकार शिक्षा क्षेत्र में सुधार और बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। मानदेय में वृद्धि और यह पहल शिक्षामित्रों के मनोबल को बढ़ाने के साथ-साथ विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता को भी नई दिशा देगी। गोरखपुर में होने वाला यह आयोजन शिक्षा सुधार के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। लाइव प्रसारण और व्यापक भागीदारी कार्यक्रम का सीधा प्रसारण दूरदर्शन और मुख्यमंत्री के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर किया जाएगा, जिससे प्रदेशभर के शिक्षामित्र इस अवसर के साक्षी बन सकें। साथ ही, सभी जनपदों में भी समानांतर रूप से आयोजन किए जाएंगे, जहां स्थानीय स्तर पर जन-प्रतिनिधियों, अधिकारियों, शिक्षकों और शिक्षामित्रों की भागीदारी उल्लेखनीय होगी।

मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड) से अनाथ बच्चों को मिल रहा सहारा

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार बेसहारा बेटियों के लिए अभिभावक की भूमिका निभा रही है। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड-19) के तहत योगी सरकार ने न सिर्फ अनाथ बच्चों के भविष्य को सुरक्षित किया है, बल्कि बेसहारा बेटियों की शादी कराकर उनके जीवन में माता-पिता की कमी को काफी हद तक पूरा करने का प्रयास किया है। इस योजना के तहत अब तक 60 से ज्यादा बेसहारा बेटियों की शादी कराई जा चुकी है। योजना के तहत योगी सरकार बेटियों की शादी के लिए 1 लाख रुपये की आर्थिक मदद कर रही है। यह इस बात का प्रतीक है कि सरकार जमीनी स्तर पर जिम्मेदारी निभा रही है। बेटियों की शादी कराकर सरकार ने अभिभावक की भूमिका निभाई दरअसल मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड-19) आज हजारों परिवारों के लिए उम्मीद का सहारा बन चुकी है। योगी सरकार ने इस योजना के तहत अब तक 66 बेसहारा बेटियों की शादी कराई है। इस तरह यह सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि उन बेटियों के लिए एक भरोसा है, जिनके सिर से माता-पिता का साया उठ चुका है। सरकार इन बेटियों के विवाह के लिए 1,01,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है, जिससे उनका नया जीवन सम्मान के साथ शुरू हो सके। वर्तमान में 10 हजार से ज्यादा बच्चों को मिल रहा लाभ इस योजना की शुरुआत साल 2021 में की गई थी। इसका उद्देश्य उन बच्चों को सहारा देना है, जिन्होंने कोविड-19 महामारी के कारण 1 मार्च 2020 के बाद अपने माता-पिता या अभिभावकों को खो दिया था। ऐसे बच्चों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनके भरण-पोषण, शिक्षा और भविष्य की होती है। इसे ध्यान में रखते हुए योगी सरकार ने एक व्यापक और संवेदनशील व्यवस्था तैयार की। वर्तमान समय में इस योजना के तहत 10,904 बच्चों को लाभ मिल रहा है, जबकि शुरुआत में यह संख्या 13,926 थी।  हजारों बच्चों को मिल रहा योजना का लाभ कई बच्चे समय के साथ वयस्क हो गए या योजना की अवधि पूरी कर चुके हैं, जिससे लाभार्थियों की संख्या में कमी आई है। इसके बावजूद हजारों बच्चों को निरंतर सहायता मिल रही है, जो इस योजना की प्रभावशीलता को दर्शाता है। साथ ही बच्चों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार प्रतिमाह 4000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है। यह सहायता 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने या 12वीं कक्षा पास करने तक (जो पहले हो) दी जाती है। इसके साथ ही शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने 8085 लैपटॉप भी वितरित किए हैं, जिससे बच्चे डिजिटल शिक्षा से जुड़ सकें और प्रतिस्पर्धी माहौल में पीछे न रहें। कोविड के कारण अनाथ हुए बच्चों के लिए निशुल्क आवास की व्यवस्था योजना के तहत 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए कई विशेष प्रावधान किए गए हैं। जिन बच्चों का कोई अभिभावक नहीं है, उनके लिए सरकारी बाल देखरेख संस्थाओं में निःशुल्क आवास की व्यवस्था की गई है। वहीं 11 से 18 वर्ष तक के बच्चों को कक्षा 12 तक कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय और अटल आवासीय विद्यालयों में मुफ्त शिक्षा दी जा रही है। इसके साथ ही उन्हें 12,000 रुपये सालाना की अतिरिक्त सहायता भी प्रदान की जाती है। बच्चों की संपत्ति सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी जिलाधिकारी को योगी सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इन बच्चों की संपत्ति सुरक्षित रहे। इसके लिए जिलाधिकारी को इन बच्चों का संरक्षक बनाया गया है, ताकि उनकी चल-अचल संपत्ति की कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। यह कदम बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके अलावा 18 से 23 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को भी योजना के दायरे में रखा गया है। उच्च शिक्षा, डिप्लोमा या प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे नीट,जेईई और क्लैट की तैयारी कर रहे युवाओं को प्रतिमाह 2500 रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जा रही है। इससे न केवल उनकी पढ़ाई जारी रहती है, बल्कि उन्हें अपने सपनों को साकार करने का अवसर भी मिलता है। योगी सरकार का लक्ष्यः कोई बेटी खुद को असहाय न महसूस करें महिला कल्याण निदेशालय की निदेशक डॉ. वंदना वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड-19) प्रदेश सरकार की एक संवेदनशील और दूरदर्शी पहल है, जिसका उद्देश्य उन बच्चों और बेटियों को संबल देना है, जिन्होंने महामारी में अपने अभिभावकों को खो दिया। डॉ. वर्मा ने बताया कि योजना के तहत बच्चों को आर्थिक सहायता, मुफ्त शिक्षा, डिजिटल संसाधन और सुरक्षित आवास जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। साथ ही बालिग होने पर बेटियों के विवाह के लिए आर्थिक सहयोग भी सुनिश्चित किया गया है। प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी बच्चा या बेटी खुद को असहाय महसूस न करे और सभी को समान अवसर मिल सकें।

यूपी में शिक्षा पर फोकस: योगी आदित्यनाथ सरकार का मिशन—अब कोई बच्चा नहीं रहेगा स्कूल से बाहर, 1 मई से विशेष अभियान शुरू

श्रमिक बस्तियों से ईंट-भट्ठों तक पहुंचेगी टीम, 6 से 14 आयु वर्ग का 100 प्रतिशत नामांकन लक्ष्य ड्रॉपआउट पर सीधा प्रहार, योगी सरकार ने ‘स्कूल चलो अभियान’ को मिशन मोड में किया लागू ड्रॉपआउट बच्चों को चिह्नित कर मुख्यधारा से जोड़ने पर फोकस, ट्रांजिशन दर बढ़ाने का लक्ष्य लखनऊ योगी सरकार ने शिक्षा के मोर्चे पर बड़ा और निर्णायक कदम उठाते हुए ‘स्कूल चलो अभियान’ को उत्तर प्रदेश में मिशन मोड में लागू कर दिया है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि अब कोई भी बच्चा स्कूल से बाहर नहीं रहेगा। इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा, पार्थ सारथी सेन शर्मा ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 6 से 14 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे का नामांकन हर हाल में सुनिश्चित किया जाए। पहली मई से प्रदेशभर में विशेष अभियान चलाकर श्रमिक बस्तियों, ईंट-भट्ठों और वंचित वर्गों के बच्चों को चिह्नित कर स्कूल से जोड़ा जाएगा। यह अभियान खास तौर पर उन बच्चों पर केंद्रित होगा, जो अब तक शिक्षा की मुख्यधारा से बाहर हैं। दिव्यांग बच्चों के नामांकन को प्राथमिकता देने, आरटीई के अंतर्गत लॉटरी के माध्यम से चयनित पात्र बच्चों का आवंटित विद्यालय में शत-प्रतिशत नामांकन कराने और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में बालिकाओं के प्रवेश को बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकार ने ड्रॉपआउट और आउट-ऑफ-स्कूल बच्चों की पहचान कर उन्हें पुनः शिक्षा से जोड़ने के लिए जमीनी स्तर पर रणनीति तैयार की है। कक्षा 5 से 6, 8 से 9 और 10 से 11 तक 100% ट्रांजिशन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बच्चों की पढ़ाई बीच में न छूटे और शिक्षा की निरंतरता बनी रहे। जागरूकता अभियान, स्थानीय प्रशासन की सक्रिय भागीदारी और निरंतर मॉनिटरिंग के माध्यम से इस अभियान को प्रभावी बनाने की योजना है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश हैं कि प्रत्येक गांव, वार्ड और बस्ती स्तर पर सर्वे कर बच्चों को चिह्नित किया जाए और उन्हें विद्यालय से जोड़ा जाए। जहां पहले ड्रॉपआउट चिंता का विषय था, अब सरकार घर-घर पहुंचकर हर बच्चे को स्कूल से जोड़ रही है।

योगी सरकार की योजना का असर, डेयरी नेटवर्क से महिलाओं की आय बढ़ी

 लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा शुरू की गई 'महिला सामर्थ्य योजना' आज अवध क्षेत्र में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के कायाकल्प का सबसे बड़ा माध्यम बनकर उभरी है। अयोध्या से लेकर कानपुर नगर तक के सात जनपदों के डेढ़ हजार से अधिक गांवों में इस योजना ने न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि उनके सामाजिक और आर्थिक स्तर को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया है। अब इस योजना का सफल विस्तार लखनऊ, उन्नाव और बाराबंकी जैसे जिलों में भी किया जा रहा है, जो प्रदेश की 'आधी आबादी' के सशक्तिकरण के प्रति सरकार के संकल्प को दर्शाता है। मुख्यमंत्री का विजन: सशक्त महिला, समृद्ध समाज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि जब एक महिला आर्थिक रूप से मजबूत होती है, तो पूरा परिवार और समाज समृद्ध होता है। इसी सोच को धरातल पर उतारते हुए 'महिला सामर्थ्य योजना' के माध्यम से महिलाओं को उत्पादन से लेकर बाजार उपलब्ध कराने और भुगतान की प्रक्रिया तक सीधे जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री के इस फोकस का नतीजा है कि आज अवध की महिलाएं डेयरी नेटवर्क का हिस्सा बनकर अपने परिवारों की मुख्य आर्थिक संरक्षक बन चुकी हैं। डेयरी नेटवर्क से श्वेत क्रांति और 1380 करोड़ का डीबीटी इस योजना की सबसे बड़ी सफलता इसका विशाल डेयरी नेटवर्क है। अवध क्षेत्र के गांवों से आज प्रतिदिन लगभग 4 लाख लीटर दूध का संग्रह किया जा रहा है। यह महज एक आंकड़ा नहीं, बल्कि संगठित आर्थिक गतिविधि का प्रमाण है। योजना की पारदर्शिता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक महिलाओं के बैंक खातों में 1380 करोड़ रुपये से अधिक की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सीधे भेजी जा चुकी है। इस व्यवस्था ने बिचौलिया तंत्र को जड़ से खत्म कर महिलाओं का भरोसा सरकार और सिस्टम पर मजबूत किया है। शून्य से शिखर तक: एक लाख महिलाओं का जुड़ाव योजना की विकास यात्रा किसी मिसाल से कम नहीं है। मार्च 2023 में महज 340 गांवों और 8000 महिलाओं के साथ शुरू हुआ यह अभियान आज 1550 गांवों तक फैल चुका है, जिसमें एक लाख से अधिक महिलाएं सक्रिय रूप से जुड़ी हैं। दुग्ध व्यवसाय का यह तेजी से हुआ विस्तार यह सिद्ध करता है कि योगी सरकार की नीतियां सीधे जमीन पर असर डाल रही हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए द्वार खोल रही हैं। सफलता की मिसाल: सुल्तानपुर की अनीता वर्मा योजना की कामयाबी को सुल्तानपुर के दूबेपुर ब्लॉक की अनीता वर्मा जैसी हजारों महिलाओं की सफलता से समझा जा सकता है। मुकुंदपुर गांव की रहने वाली अनीता ने केवल दो गायों से अपना काम शुरू किया था और आज वह सफलता का एक वैश्विक मॉडल बन चुकी हैं। गत वर्ष उन्हें लगभग साढ़े छह लाख रुपये का भुगतान हुआ है। अनीता की यह कहानी न केवल आर्थिक बदलाव की गाथा है, बल्कि यह साबित करती है कि यदि ग्रामीण महिलाओं को सही अवसर और सरकारी योजनाओं का साथ मिले, तो वे समाज का भविष्य बदलने की क्षमता रखती हैं।  

यूपी बोर्ड रिजल्ट आज 4 बजे, योगी सरकार ने पारदर्शिता और समयबद्धता से सेट किया नया उदाहरण

यूपी बोर्ड रिजल्ट आज  4 बजे होगा घोषित, योगी सरकार ने पारदर्शिता और समयबद्धता से रचा नया मानक परीक्षार्थी परिषद की आधिकारिक वेबसाइट और डिजिलॉकर पोर्टल पर देख सकेंगे अपना परिणाम 8033 केंद्रों पर 50 लाख से अधिक परीक्षार्थियों ने दी है परीक्षा, रिकॉर्ड समय में पूरा हुआ मूल्यांकन 254 मूल्यांकन केंद्रों पर लगभग 2.75 करोड़ उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन मात्र 15 कार्यदिवसों में पूरा किया गया लखनऊ/प्रयागराज  माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित वर्ष 2026 की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षाओं का परिणाम गुरुवार 23 अप्रैल को अपराह्न 4:00 बजे परिषद मुख्यालय, प्रयागराज से घोषित किया जाएगा। परीक्षार्थी अपना परिणाम परिषद की आधिकारिक वेबसाइट और डिजिलॉकर पोर्टल पर देख सकेंगे।परीक्षाफल उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की ऑफिशियल वेबसाइट और डिजिलॉकर रिजल्ट पोर्टल पर देखा जा सकेगा, जिससे छात्रों को घर बैठे ही आसान और त्वरित तरीके से परिणाम प्राप्त हो सकेगा। 50 लाख से अधिक छात्रों ने दी परीक्षा इस वर्ष बोर्ड परीक्षाएं 18 फरवरी से 12 मार्च के बीच प्रदेश के 8033 परीक्षा केंद्रों पर 15 कार्यदिवसों में शांतिपूर्ण एवं नकलविहीन वातावरण में संपन्न कराई गईं। हाईस्कूल में लगभग 26.02 लाख और इंटरमीडिएट में 24.91 लाख परीक्षार्थी शामिल हुए, जो प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के व्यापक दायरे को दर्शाता है। रिकॉर्ड समय में पूरा हुआ मूल्यांकन कार्य परीक्षाओं के सफल आयोजन के बाद 254 मूल्यांकन केंद्रों पर लगभग 2.75 करोड़ उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन 18 मार्च से 4 अप्रैल के बीच मात्र 15 कार्यदिवसों में पूरा किया गया। इस बार परिणाम को त्रुटिहीन बनाने के लिए प्रधानाचार्यों और वरिष्ठ प्रवक्ताओं को अंकेक्षक के रूप में नियुक्त किया गया, जिससे मूल्यांकन प्रक्रिया की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित हो सके। नकलविहीन और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली फोकस योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी, तकनीक आधारित और समयबद्ध बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। सरकार की सख्त निगरानी और प्रभावी व्यवस्थाओं के चलते परीक्षाएं पूरी तरह नकलविहीन और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुईं। परीक्षा से लेकर मूल्यांकन और परिणाम घोषित करने तक की प्रक्रिया में तय समयसीमा का पालन कर नया मानक स्थापित किया गया है। छात्रों के लिए स्क्रूटनी और कंपार्टमेंट की सुविधा माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने परीक्षार्थियों को अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए कहा है कि परिणाम के बाद यदि किसी छात्र को अपने अंकों को लेकर संतोष न हो, तो उन्हें निराश होने की आवश्यकता नहीं है। बोर्ड के द्वारा स्क्रूटनी और कंपार्टमेंट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही अभिभावकों से अपील की गई है कि वे बच्चों का मनोबल बनाए रखें और उन्हें सकारात्मक सहयोग दें।

UP में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा: गन्ना समितियों में फ्री स्पेस देगी योगी सरकार

लखनऊ.  योगी सरकार ने प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए गन्ना समितियों में रोजगार के लिए निशुल्क स्थान देने का निर्णय लिया है। यह स्थान ‘आधी आबादी’ को प्रेरणा कैंटीन और अपने उत्पादों के प्रदर्शन व बिक्री के लिए दिया जाएगा। ऐसे में सीएम योगी के निर्देश पर चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग और उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ने एमओयू साइन किया है। योगी सरकार की पहल से स्वयं सहायता समूह की ग्रामीण महिलाओं को गन्ना समितियों के माध्यम से सीधे रोजगार और स्वरोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।  दो साल के लिए दिया जाएगा निशुल्क स्थान गन्ना आयुक्त मिनिस्थी एस. ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप प्रदेश की आधी आबादी को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गन्ना समितियों में अपने उत्पादों की बिक्री के लिए स्थान दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश की गन्ना सहकारी समितियां अपने परिसरों में उपलब्ध खाली या अतिरिक्त स्थान को महिला स्वयं सहायता समूहों को उपलब्ध कराएंगी। यह स्थान प्रेरणा कैंटीन चलाने और अपने उत्पादों के प्रदर्शन व बिक्री के लिए उपयोग किया जाएगा। खास बात यह है कि इन स्थानों के उपयोग के लिए शुरुआती दो वर्षों तक कोई किराया नहीं लिया जाएगा। दो साल की मोरेटोरियम अवधि के बाद स्वयं सहायता समूहों को केवल 50 प्रतिशत किराया ही देना होगा, जो जिला प्रशासन द्वारा निर्धारित सर्किल रेट के अनुसार तय किया जाएगा।  डिस्प्ले/मार्केटिंग सेंटर से हस्तनिर्मित और घरेलू उत्पादों की कर सकेंगी बिक्री गन्ना आयुक्त ने बताया कि गन्ना समितियों द्वारा उपलब्ध कराए गए स्थान का स्वामित्व पूरी तरह संबंधित समिति के पास ही रहेगा। किसी भी परिस्थिति में इस स्थान का स्वामित्व स्वयं सहायता समूहों या किसी अन्य संस्था को हस्तांतरित नहीं किया जाएगा। इससे सरकारी परिसंपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। प्रेरणा कैंटीन और डिस्प्ले/मार्केटिंग सेंटर के माध्यम से महिलाएं अपने हस्तनिर्मित और घरेलू उत्पादों को बेच सकेंगी। इनमें खाद्य पदार्थों के अलावा सोलर लैंप, हस्तशिल्प, कृषि उत्पाद और अन्य स्थानीय वस्तुएं शामिल हैं। इससे न केवल महिलाओं की आय बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय उत्पादों को भी एक संगठित बाजार मिलेगा। इसके लिए विभाग स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को प्रशिक्षण, विपणन और प्रचार-प्रसार में भी सहयोग देगा। महिलाओं को मेलों, प्रदर्शनियों और अन्य सार्वजनिक आयोजनों में भाग लेने का अवसर मिलेगा, जिससे उनके उत्पादों की पहुंच बढ़ेगी। इसके अलावा जरूरत पर अतिरिक्त सहयोग भी प्रदान किया जाएगा ताकि गन्ना क्षेत्र से जुड़ी महिलाओं को अधिक से अधिक अवसर मिल सकें। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती, बढ़ेगा उत्पादन और खपत उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (यूपीएसआरएलएम) को भी योजना में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। मिशन यह सुनिश्चित करेगा कि स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को कैंटीन संचालन, साफ-सफाई, खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता नियंत्रण का उचित प्रशिक्षण मिले। वहीं, खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) के साथ समन्वय भी किया जाएगा। इससे उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिलेंगी। इससे जहां एक ओर महिलाओं को रोजगार मिलेगा, वहीं दूसरी ओर गन्ना समितियों की गतिविधियों में भी विविधता आएगी। स्थानीय स्तर पर उत्पादन और खपत बढ़ेगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।  

बालवाटिका को सक्षम, संवेदनशील और सृजनशील नागरिक गढ़ने की पहली प्रयोगशाला बना रही योगी सरकार

लखनऊ. बालवाटिका को प्रारंभिक शिक्षा के केंद्र के साथ-साथ योगी सरकार उसे भविष्य के सक्षम, संवेदनशील और सृजनशील नागरिकों के निर्माण की पहली प्रयोगशाला के रूप में विकसित करने की दिशा में निर्णायक पहल कर रही है। प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को नई दिशा देते हुए बालवाटिका (3 से 6 वर्ष आयु वर्ग) को समग्र विकास के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। बालवाटिका के नवीन पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा के ‘पंचकोश’ सिद्धांत को बाल विकास के पांच प्रमुख आयामों से वैज्ञानिक रूप से जोड़ा गया है। अन्नमय कोष को शारीरिक विकास, प्राणमय कोष को सामाजिक-भावनात्मक एवं नैतिक विकास, मनोमय कोष को भाषा एवं साक्षरता, विज्ञानमय कोष को संज्ञानात्मक विकास तथा आनंदमय कोष को सौंदर्यबोध विकास से जोड़ा गया है। इसी के अनुरूप एससीईआरटी द्वारा इनके लिए चहक, कदम और कलांकुर जैसी वर्कबुक, गतिविधि पुस्तिकाएं, चित्र कथा, संख्या ज्ञान, कला एवं संगीत आधारित सामग्री विकसित की गई है। ये खेल, कहानी और गतिविधि आधारित शिक्षण पद्धति के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करतीं हैं।  योगी सरकार की इस पहल से बच्चों का विकास शैक्षणिक स्तर के साथ-साथ उनके शरीर, मन, बुद्धि और भावनाओं के संतुलित व समग्र विकास के रूप में होगा। वे प्रारंभिक अवस्था से ही सृजनशील, संवेदनशील और सक्षम नागरिक के रूप में विकसित भी होंगे।  यह है उद्देश्य इस पाठ्यक्रम को तैयार करने का उद्देश्य बच्चों के व्यक्तित्व के प्रत्येक पहलू को संतुलित रूप से विकसित करना है, ताकि प्रारंभिक अवस्था से ही उनकी सीखने की नींव मजबूत हो सके। बालवाटिका के लिए तैयार यह पाठ्यक्रम खेल, गतिविधि और अनुभव आधारित शिक्षण पर आधारित है। बच्चों को कहानी, संवाद, चित्रकला और समूह गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर दिया जा रहा है, जिससे वे बिना दबाव के भाषा और संख्यात्मक दक्षताओं के साथ-साथ सामाजिक व्यवहार भी विकसित कर सकें। यह हैं पाठ्यक्रम-बाल विकास के निर्धारित चरण पाठ्यक्रम में शारीरिक विकास के लिए खेलकूद, भाषा विकास के लिए संवाद आधारित गतिविधियां, संज्ञानात्मक विकास के लिए जिज्ञासा आधारित सीखने की प्रक्रिया, सामाजिक एवं नैतिक विकास के लिए समूह सहभागिता तथा सौंदर्यबोध के लिए रचनात्मक गतिविधियों को शामिल किया गया है। इससे बच्चों में आत्मविश्वास, संवेदनशीलता और सृजनात्मक सोच का विकास सुनिश्चित किया जा सकेगा। भविष्य में दिखेगा सकारात्मक प्रभाव एससीईआरटी के संयुक्त निदेशक डॉ. पवन सचान का कहना है कि 3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों के विकास की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है, जिसमें विकसित होने वाली लगभग 85% क्षमताएं बच्चे के भविष्य की दिशा तय करती हैं। ऐसे में इस आयु वर्ग के लिए समग्र और गुणवत्तापूर्ण बाल केंद्रित पाठ्यक्रम विकसित किया गया है।

पांच अग्रणी राज्य देश के कुल दूध का करते हैं 54 फीसदी उत्पादन, इसमें अकेले यूपी की हिस्सेदारी 16 फीसदी

ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं ने संभाली कमान, पांच कंपनियों के जरिए जुड़ीं चार लाख महिला किसान सीएम योगी के कार्यकाल में पहली बार इतनी सशक्त हुईं महिलाएं लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश में पहले की तुलना में 40 प्रतिशत दुग्ध उत्पादन बढ़ गया है। यही नहीं, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख दुग्ध उत्पादक राज्यों को पीछे छोड़ते हुए यूपी सबसे सशक्त बनकर उभरा है। देश के कुल दुग्ध उत्पादन में पांच अग्रणी राज्यों की 54 फीसदी हिस्सेदारी है, जिसमें अकेले उत्तर प्रदेश का योगदान 16 फीसदी तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा प्रदेश की बढ़ती ताकत और मजबूत डेयरी संरचना का स्पष्ट उदाहरण है। सीएम योगी के कार्यकाल में दुग्ध उत्पादन में जबरदस्त उछाल दर्ज हुआ है। वर्ष 2016-17 में जहां उत्पादन 277 लाख मीट्रिक टन था, वहीं वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 388 लाख मीट्रिक टन के पार पहुंच गया है।  सीएम योगी के जमीनी स्तर पर किए प्रयासों का परिणाम : मुकेश मेश्राम पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने बताया कि करीब 40 प्रतिशत की यह वृद्धि प्रदेश में योजनाबद्ध विकास और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जमीनी स्तर पर किए गए ठोस प्रयासों का परिणाम है। बड़ी ताकत बनीं ग्रामीण महिलाएं इस दुग्ध क्रांति की बड़ी ताकत ग्रामीण महिलाएं बनीं हैं। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से लाखों महिलाएं डेयरी गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। प्रदेश के 31 जिलों में महिला समूह प्रतिदिन करीब 10 लाख लीटर दूध का संग्रहण कर रहे हैं और करीब 5000 करोड़ रुपये का कारोबार कर चुके हैं। प्रदेश में पांच प्रमुख दुग्ध उत्पादक कंपनियों के जरिए करीब चार लाख महिला किसान जुड़ीं हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है। फरवरी 2026 तक इन कंपनियों का कुल कारोबार पांच हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। बुंदेलखंड क्षेत्र में ‘बलिनी एमपीसीएल’, पूर्वांचल में ‘काशी एमपीसीएल’, अवध क्षेत्र में सामर्थ्य एमपीसीएल, गोरखपुर मंडल में ‘श्री बाबा गोरखनाथ कृपा एमपीसीएल, तराई क्षेत्र में सृजन एमपीसीएल’ से जुड़कर महिलाएं रिकॉर्ड बना रही हैं। उत्तर प्रदेश की बदल रही तस्वीर पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने बताया कि योगी सरकार के कार्यकाल में पहली बार महिलाओं को इतने बड़े पैमाने पर आर्थिक मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें सशक्त बनाया गया है। दुग्ध उत्पादन में यह रिकॉर्ड वृद्धि न केवल आर्थिक मजबूती का संकेत है, बल्कि उत्तर प्रदेश की बदलती तस्वीर का भी प्रतीक बन गई है।

योगी सरकार की पहल को बताया तकनीकी सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम, कहा- डिजिटल सुविधाओं से सशक्त होंगी कार्यकत्रियां

लखनऊ. योगी सरकार में अब आंगनवाड़ी सेवाएं डिजिटल रूप से और अधिक प्रभावी बनने जा रहीं हैं। आंगनवाड़ी व्यवस्था को और दुरुस्त बनाने के लिए लोकभवन में आयोजित विशेष कार्यक्रम को दौरान स्मार्टफोन और नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाली लाभार्थियों के चेहरे खुशी से खिल उठे। उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए खुद को गौरवान्वित महसूस किया। उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल तकनीकी सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास और स्वावलंबन को भी नई मजबूती प्रदान करती है। नवनियुक्त कार्यकत्रियों ने मुख्यमंत्री की इस पहल को लेकर सराहना करते हुए खुशी जताई।   कार्यक्रम में पहुंचीं नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकत्री अंजली ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि स्मार्टफोन से हमारा काम सुचारु रूप से चल पायेगा, साथ ही अब डाटा संरक्षण में आसानी होगी। तो वहीं नवनियुक्त आशा कार्यकत्री सुभाषिनी ने कहा कि मुझे मुख्यमंत्री के हाथों से अपना नियुक्ति पत्र प्राप्त हुआ जिसकी मुझे बहुत ख़ुशी है। उन्होंने कहा कि हमारी नियुक्तियां मेरिट आधार पर पूर्ण रूप से पारदर्शी तरीके से हुईं हैं।   नवनियुक्त आशा कार्यकत्री रितिका सिंह ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुझे मुख्यमंत्री से आज जो ग्रोथ मॉनिटरिंग डिवाइस प्राप्त हुआ है उससे आंगनवाड़ी में बच्चों का वजन अच्छे से नाप पाऊंगी। सुपरवाइजर अरुणा बाजपेयी ने बताया कि  मुझे आज स्मार्टफोन मिला है जिससे मैं अपना विभागीय कार्य को और बेहतर तरीके से कर पाऊंगी।  लाभार्थियों ने कहा कि डिजिटल आंगनवाड़ी की यह पहल न केवल कार्यकत्रियों को सशक्त बनाएगी, बल्कि आने वाली पीढ़ी के बेहतर भविष्य की नींव भी रखेगी। यह कार्यक्रम केवल उपकरण वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह प्रदेश में बदलती व्यवस्था, पारदर्शी शासन और तकनीक के माध्यम से सशक्त समाज की दिशा में एक बड़ा संदेश बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री की इस पहल से प्रदेश की आंगनवाड़ी सेवाएं अब डिजिटल रूप से और अधिक प्रभावी बनेंगी। योगी सरकार की यह पहल उत्तर प्रदेश को आत्मनिर्भर और आधुनिक बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है।

योगी सरकार फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट के विद्यार्थियों को बनाएगी धुरंधर

लखनऊ.  योगी सरकार उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज (यूपीएसआईएफएस) के विद्यार्थियों को फॉरेंसिक की फील्ड में धुरंधर बनाने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसके लिए योगी सरकार फॉरेंसिक की दिग्गज यूनिवर्सिटी से एमओयू साइन करने जा रही है। यह एमओयू यूपीएसआईएफएस और चार विभिन्न संस्थानों के बीच होगा। इसमें महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी गोरखपुर, धीरूभाई अंबानी यूनिवर्सिटी गांधीनगर, उत्तर प्रदेश कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं और किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) शामिल हैं। इन संस्थानों के साथ सहयोग से यूपीएसआईएफएस के छात्रों को इंटर्नशिप, रिसर्च और प्रैक्टिकल एक्सपोजर के व्यापक अवसर मिलेंगे। इससे जहां एक ओर छात्रों को व्यावहारिक और उच्च स्तरीय प्रशिक्षण मिलेगा। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें वास्तविक परिस्थितियों में फॉरेंसिक विशेषज्ञ के रूप में तैयार करना है। केजीएमयू में विद्यार्थी मौत की परिस्थितियों और वैज्ञानिक तरीके से हुए विश्लेषण का करेंगे अध्ययन यूपीएसआईएफएस के डायरेक्टर जीके गोस्वामी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ फॉरेंसिक साइंस के छात्रों को ‘जॉब रेडी’ बनाना चाहते हैं। अब तक फॉरेंसिक शिक्षा में थ्योरी का दबदबा ज्यादा था, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का थ्योरी के साथ प्रैक्टिकल पर विशेष फोकस है। इसी के तहत सीएम योगी के निर्देश पर यूपीएसआईएफएस चार विभिन्न संस्थानों महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी गोरखपुर, धीरूभाई अंबानी यूनिवर्सिटी गांधीनगर, उत्तर प्रदेश कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं और किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमओयू करने जा रहा है। इन एमओयू के जरिए छात्रों को केस स्टडी, पोस्टमार्टम प्रक्रिया, मेडिकल-लीगल पहलुओं और अपराध अनुसंधान के व्यावहारिक पहलुओं को समझने का मौका मिलेगा। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के साथ होने वाले समझौते के तहत यूपीएसआईएफएस के छात्र फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग में पोस्टमार्टम की बारीकियों को करीब से समझ सकेंगे। इसमें पंचनामा से लेकर पोस्टमार्टम की पूरी प्रक्रिया का अध्ययन शामिल होगा। इससे छात्रों को यह समझने में मदद मिलेगी कि किसी घटना में मौत किन परिस्थितियों में हुई और वैज्ञानिक तरीके से उसका विश्लेषण कैसे किया जाता है। अपराध के पीछे सामाजिक व मनोवैज्ञानिक कारणों को जेल जाकर समझेंगे छात्र यूपीएसआईएफएस के डिप्टी डायरेक्टर चिरंजीव मुखर्जी ने बताया कि उत्तर प्रदेश कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं के साथ एमओयू से छात्रों को जेलों में जाकर बंदियों के केस स्टडी करने का मौका मिलेगा। छात्र यह जान सकेंगे कि बंदियों के मामलों में जमानत कैसे होती है, जेल का वातावरण कैसा होता है और अपराध के पीछे सामाजिक व मनोवैज्ञानिक कारण क्या होते हैं। यह अनुभव उन्हें अपराध की जड़ों को समझने में मदद करेगा, जो एक फॉरेंसिक एक्सपर्ट के लिए बेहद जरूरी है। वहीं, महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, गोरखपुर के साथ एमओयू से दोनों संस्थानों के छात्रों को इंटरशिप के अवसर मिलेंगे। इसके साथ ही दोनों संस्थानों के फैकल्टी मेंबर दोनों संस्थानों में अपने लेक्चर दे सकेंगे। वहीं आगे चलकर, दोनों संस्थान मिलकर फॉरेंसिक साइंस की एक ज्वाइंट लैब भी स्थापित करेंगे। इस लैब में अत्याधुनिक तकनीकों के जरिए अनुसंधान और परीक्षण किए जाएंगे। इससे न केवल छात्रों को नई तकनीकों का ज्ञान मिलेगा, बल्कि राज्य में फॉरेंसिक इंफ्रास्ट्रक्चर भी मजबूत होगा।  फैकल्टी मेंबर एक दूसरे के संस्थानों में देंगे लेक्चर धीरूभाई अंबानी यूनिवर्सिटी, गांधीनगर के साथ एमओयू से दोनों संस्थानों के बीच छात्र और फैकल्टी एक्सचेंज प्रोग्राम चलाए जाएंगे। यूपीएसआईएफएस के छात्र वहां जाकर इंटर्नशिप कर सकेंगे, जबकि धीरूभाई अंबानी यूनिवर्सिटी के छात्र लखनऊ आकर फॉरेंसिक प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। इससे राष्ट्रीय स्तर पर ज्ञान और अनुभव का आदान-प्रदान होगा। इस पहल की एक खास बात यह भी है कि केवल छात्र ही नहीं, बल्कि फैकल्टी मेंबर्स भी एक-दूसरे के संस्थानों में जाकर लेक्चर दे सकेंगे। इससे शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार होगा और छात्रों को विविध विशेषज्ञों का मार्गदर्शन मिलेगा। यह पहल डिजिटल क्राइम, साइबर फ्रॉड और जटिल आपराधिक मामलों में वैज्ञानिक जांच ही सटीक निष्कर्ष तक पहुंचने का सबसे विश्वसनीय माध्यम होगा।