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योगी सरकार एक लाख सूर्य सखियों से गांव-गांव तक पहुंचाएगी सौर ऊर्जा की रोशनी

सीएम योगी के निर्देश पर सोलर पैनल के इंस्टालेशन, सोलर पैनल, लाइटिंग, ईवी चार्जिंग के कार्यों में महिलाओं को जोड़ा जाएगा  – यूपीएसआरएलएम द्वारा सोलर एनर्जी को बढ़ावा देने और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए उठाया गया कदम – सीएम योगी के मार्गदर्शन में यूपीएसआरएलएम की ओर से डीईडब्लयूईई(Decentralized Energy for Women’s Economic Empowerment) कार्यक्रम का बुधवार को किया जा रहा आयोजन – कार्यक्रम में प्रदेश के कई वरिष्ठ अधिकारी, पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाले विशेषज्ञ और वैज्ञानिक लेंगे हिस्सा   लखनऊ योगी सरकार प्रदेश की बेटियों और महिलाओं को सशक्त, आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। वहीं ग्रामीण विकास में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई योजनाएं चलायी जा रही हैं। इसी के तहत योगी सरकार स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की सोलर पैनल, लाइटिंग, ईवी चार्जिंग समेत सोलर आधारित योजनाओं में भागीदारी बढ़ाने के लिए महिला सूर्य सखी से जोड़ने जा रही है। इसी क्रम में सीएम योगी के मार्गदर्शन में बुधवार को यूपीएसआरएलएम की ओर से DEWEE(Decentralized Energy for Women’s Economic Empowerment)कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इसका वर्ष 2030 तक 1 लाख महिला नेतृत्व वाले उद्यमों तक डीआरई (Decentralized Renewable Energy) को पहुंचाना है। इसके जरिये जहां सोलर एनर्जी के क्षेत्र में तेजी से इजाफा होगा, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण और शहरी महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होंगी। कार्यक्रम में देश और विदेश के सौर ऊर्जा के क्षेत्र के विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे और डीआई को धरातल पर उतारने के लिए खाका खींचेंगे।  सौर ऊर्जा से रोशन होंगे प्रदेश के ग्रामीण और दूर-दराज के इलाके यूपीएसआरएलएम की निदेशक दीपा रंजन ने बताया कि योगी सरकार द्वारा लगातार महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास पर जोर दिया जा रहा है। उनका यह मानना है कि अगर महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होंगी, तो समाज में समृद्धि का रास्ता खुल सकेगा। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में  महिलाओं के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, जिनमें डीआरई को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण कदम है। ऐसे में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण जीवन मिशन द्वारा डीआरई पहल महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs)को सशक्त बनाने की दिशा में एक नया कदम है। उन्होंने बताया कि डीआरई ऑफ-ग्रिड यानी मिनी ग्रिड ऊर्जा समाधानों से संबंधित है, ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। इन इलाकों में  पारंपरिक बिजली नेटवर्क पहुंचने में काफी परेशानी होती है, वहां डीआरई घरों और समुदायों को स्वच्छ, सस्ती और विश्वसनीय ऊर्जा प्रदान करेगा। इस पहल के जरिए महिलाएं न केवल अपनी आर्थ‍िक स्थिति को सुधार सकती हैं, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा समाधानों के प्रचार-प्रसार में भी सक्रिय भूमिका निभा सकती हैं। महिलाओं को सौर ऊर्जा से जोड़ेगी योगी सरकार डीईडब्ल्यूईई कार्यक्रम के तहत महिलाएं न केवल डीआरई समाधानों की स्थापना, रखरखाव और मरम्मत में सक्षम होंगी, बल्कि वे अपने समुदायों में स्वच्छ ऊर्जा से जुड़ी सेवाएं भी प्रदान करेंगी। इससे उनकी आय में वृद्धि होगी और वे समाज में बेहतर भूमिका निभा सकेंगी। इसके अलावा महिलाएं छोटे-छोटे उद्यमों को भी स्थापित कर सकेंगी, जिससे उन्हें सशक्त होने का एक नया अवसर मिलेगा। निदेशक ने बताया कि कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए विभाग ने कई महत्वपूर्ण संस्थाओं के साथ साझेदारी की है। इसमें पीसीआई इंडिया, एचसीबीसी, ग्लोबल एनर्जी एलायंस फॉर पीपल एंड प्लेनेट, गेट्स फाउंडेशन इंडिया और प्रेरणा ओजस जैसी संस्थाएं शामिल हैं। यह संस्थाएं प्रदेश के 20 जिलों में डीआरई को धरातल पर उतारने में अहम भूमिका निभाएंगी। इन संस्थाओं के सहयोग से महिलाओं के लिए एक समावेशी और लचीला स्वच्छ ऊर्जा तंत्र का निर्माण किया जाएगा।    कार्यक्रम में यूपीएसआरएलएम की निदेशक दीपा रंजन, पीसीआई इंडिया के जलवायु एवं रणनीति निदेशक शिशिर कुमार सिंह, ग्राम्य विकास आयुक्त जीएस प्रियदर्शी, यूपीनेडा के निदेशक इंद्रजीत सिंह, उद्योग निदेशक एवं एमएसएमई आयुक्त कानुपर केवी पांडियन, अपर मुख्य सचिव ग्रामीण विकास विभाग हिमांशु कुमार, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय भारत सरकार के वरिष्ठ निदेशक-वैज्ञानिक जीवन कुमार जेठानी और गेट्स फाउंडेशन के निदेशक हरि मेनन आदि शामिल रहेंगे।  

उत्तर प्रदेश में कृषि श्रमिकों को मिलेगा नियमित भत्ता, सरकार देगी ₹6552 प्रति माह

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने कृषि श्रमिकों को लेकर ऐतिहासिक फैसला लिया है. राज्य सरकार ने कृषि से जुड़े श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी दरों में बढ़ोतरी की है, जिससे लाखों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा. अब कृषि श्रमिकों को प्रतिदिन 252 रुपये या मासिक 6552 रुपये का वेतन मिलेगा. सरकार के इस फैसले की खास बात यह है कि अब पशुपालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन जैसे कार्यों को भी कृषि श्रम की कैटेगरी में रखा गया है. इससे ऐसे श्रमिकों को भी न्यूनतम मजदूरी के तहत सुरक्षा और लाभ मिल सकेगा, जो पहले असंगठित क्षेत्र में आते थे. मजदूरी का भुगतान अब सिर्फ कैश तक सीमित नहीं रहेगा. सरकार ने डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से डिजिटल माध्यम में भी मजदूरी भुगतान करने का फैसला लिया है. इससे लेनदेन पारदर्शी होगा और श्रमिकों को समय पर मजदूरी मिल सकेगी. अब श्रमिकों को प्रति घंटे के हिसाब से भी न्यूनतम मजदूरी दी जाएगी. यह व्यवस्था खास तौर से उन लोगों के लिए लाभकारी है, जो पूरे दिन की बजाय कुछ घंटों के लिए काम करते हैं. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो श्रमिक पहले से इस नई दर से अधिक मजदूरी पा रहे हैं, उन्हें उनका पुराना लाभ मिलता रहेगा. ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल सरकार का मानना है कि इस ऐतिहासिक फैसले से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. सरकार ने इसे सिर्फ आर्थिक निर्णय नहीं, बल्कि श्रमिकों को सम्मान और आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर करने वाला कदम बताया है. प्रदेशभर में सभी प्रकार की खेती, बागवानी, सिंचाई, फसल कटाई और कृषि सहायक कार्यों पर ये नई मजदूरी दरें लागू होंगी. माना जा रहा है कि यह फैसला श्रमिकों के कल्याण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा.

योगी सरकार ने राज्यभर में मंदिरों, आश्रमों और धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार की योजना तैयार की

लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को संवारने की पहल की है. पर्यटन को बढ़ावा देने और आस्था से जुड़े केंद्रों को विकसित करने के उद्देश्य से सरकार ने मंदिरों, आश्रमों और तीर्थ स्थलों के जीर्णोद्धार की योजना तैयार की है. खासतौर पर पूर्वांचल क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जहां धार्मिक पर्यटन को नया आयाम देने की तैयारी है. उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्यभर में स्थित प्रमुख मंदिरों, संतों के आश्रमों और धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार की योजना तैयार की है. सरकार का मानना है कि इससे धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा. स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी. विशेष रूप से पूर्वांचल क्षेत्र को धार्मिक पर्यटन के नए हब के रूप में विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया है. एजेंसी के अनुसार, राज्य पर्यटन विभाग द्वारा जारी बयान के अनुसार, एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया है. इसके तहत उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में धार्मिक स्थलों का सौंदर्यीकरण और विकास किया जाएगा. योजना के तहत बलिया के भृगु आश्रम में स्थित चित्रगुप्त मंदिर का सौंदर्यीकरण, तेंदुआ पट्टी फरसतार मौजा होलपुर में हनुमान मंदिर परिसर का विकास और बसंतपुर गांव में उदासीन मठ का पुनर्विकास शामिल है. वहीं आजमगढ़ जिले में महाराजगंज स्थित भैरव बाबा स्थल और मिश्रपुर का राम-जानकी मंदिर भी इस परियोजना में शामिल हैं. इसके अलावा फूलपुर पवई (आजमगढ़) में दुर्वासा ऋषि आश्रम, मऊ के दुआरी गांव में स्थित श्री वीर बाबा ब्रह्म स्थान और कन्नौज जिले के सदर क्षेत्र में फूलमती देवी मंदिर का भी कायाकल्प किया जाएगा. इनके अलावा गोरखपुर के बांसगांव, सिंहपुर और धन्नीपुर में स्थित परमहंस बाबा से जुड़े स्थलों को भी शामिल किया गया है. इन स्थलों के आसपास बुनियादी सुविधाओं जैसे सड़क, शौचालय, पार्किंग, लाइट और सूचना केंद्रों का भी विकास किया जाएगा. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2024 में राज्य में कुल 65 करोड़ से अधिक पर्यटक आए थे, जो कि देश के किसी भी राज्य के मुकाबले सबसे अधिक है. अब इन धार्मिक स्थलों के विकास से आने वाले वर्षों में यह आंकड़ा और बढ़ने की संभावना है. पर्यटन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि धार्मिक पर्यटन संस्कृति और विरासत को संरक्षित करेगा, इससे स्थानीय लोगों को स्वरोजगार और व्यापार के नए अवसर भी मिलेंगे. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं धार्मिक स्थलों के संरक्षण और प्रचार-प्रसार को लेकर प्रतिबद्ध हैं.