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SSB शमशी में 472 पुलिस जवानों की पासिंग आउट परेड, प्रशिक्षण पूरा कर संभालेंगे जिम्मेदारी

कुल्लू  हिमाचल प्रदेश के शमशी स्थित सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) परिसर में  राजस्थान पुलिस के प्रथम बैच बीआरटीसी का दीक्षांत परेड समारोह आयोजित किया गया। समारोह में 472 प्रशिक्षु जवानों ने सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा किया। राजस्थान पुलिस के प्रशिक्षण निदेशालय के अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस एच.जी.आर. सुहास मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। समारोह का आयोजन केंद्रीयकृत प्रशिक्षण केंद्र, सशस्त्र सीमा बल सपड़ी के उप महानिरीक्षक अजय कुमार के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में किया गया। परेड के दौरान प्रशिक्षु जवानों ने अनुशासन, शारीरिक दक्षता, आत्मविश्वास और सामूहिक समन्वय का शानदार प्रदर्शन किया। 472 जवानों ने अनुशासन के साथ दी सलामी दीक्षांत समारोह की शुरुआत 472 प्रशिक्षु जवानों द्वारा उप महानिरीक्षक अजय कुमार को सुसंगठित सलामी देने के साथ हुई। इसके बाद मुख्य अतिथि एच.जी.आर. सुहास का स्वागत किया गया और उन्हें सलामी दी गई। मुख्य अतिथि ने परेड का निरीक्षण किया। इस दौरान जवानों की सटीक कदमताल, एकरूपता और अनुशासित संचलन ने उपस्थित अधिकारियों एवं गणमान्य व्यक्तियों को प्रभावित किया। प्रशिक्षुओं का प्रदर्शन उनके कठिन प्रशिक्षण, नियमित अभ्यास और कर्तव्य के प्रति समर्पण को दर्शाता रहा। एसएसबी के प्रशिक्षकों की मुख्य अतिथि ने की सराहना समारोह को संबोधित करते हुए एच.जी.आर. सुहास ने राजस्थान पुलिस के जवानों को उच्चस्तरीय और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए सशस्त्र सीमा बल के अधिकारियों एवं प्रशिक्षकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान जवानों को आधुनिक तकनीकों, आवश्यक व्यावसायिक कौशल और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से निपटने के व्यावहारिक तरीकों से अवगत कराया गया। उन्होंने विश्वास जताया कि यह प्रशिक्षण जवानों को भविष्य में कठिन परिस्थितियों में विवेकपूर्ण निर्णय लेने, साहस के साथ चुनौतियों का सामना करने और अपने दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन करने में मदद करेगा। अधिकारियों और प्रशिक्षण टीम के योगदान की सराहना दीक्षांत समारोह के सफल आयोजन में केंद्रीयकृत प्रशिक्षण केंद्र सपड़ी की टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उप महानिरीक्षक अजय कुमार के मार्गदर्शन में सहायक कमांडेंट बाबू लाल रैगर और रवि कुमार ने आयोजन की व्यवस्थाओं और नियोजन में अहम योगदान दिया। इसके अलावा उप कमांडेंट अमित, सहायक कमांडेंट चंदन कुमार, कमांडेंट (चिकित्सा) डॉ. बृजेश, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आर.के. वर्मा और डॉ. नवीन के प्रयासों की भी सराहना की गई। कमांडेंट (प्रशिक्षण) आर.के. डोगरा के मार्गदर्शन और प्रोत्साहन को भी आयोजन की सफलता में महत्वपूर्ण बताया गया। सेवानिवृत्त सहायक कमांडेंट जिया लाल के प्रशिक्षण, व्यक्तित्व निर्माण और व्यावसायिक दक्षता विकसित करने में दिए गए योगदान को भी विशेष रूप से याद किया गया। आयोजन में आरक्षक से लेकर अधिकारी स्तर तक के कर्मचारियों ने अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। राजस्थान पुलिस और एसएसबी के बीच सहयोग का प्रतीक यह दीक्षांत समारोह राजस्थान पुलिस और सशस्त्र सीमा बल के बीच प्रशिक्षण के क्षेत्र में सहयोग, समन्वय और आपसी विश्वास को दर्शाता है। प्रशिक्षण पूरा करने वाले जवानों ने राष्ट्रसेवा, जनसुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। समारोह ने अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा, साहस और सामूहिक प्रयासों के महत्व को रेखांकित किया। उम्मीद जताई गई कि प्रशिक्षित जवान प्रशिक्षण के दौरान अर्जित ज्ञान और कौशल का उपयोग करते हुए भविष्य में नागरिकों की सुरक्षा तथा जनसेवा के दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करेंगे।

दिल्ली से मुंबई जा रही बस खाई में गिरी, कराड़िया के पास दर्दनाक हादसे में 8 की मौत

 कोटा राजस्थान के कोटा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर एक बड़ा सड़क हादसा हो गया. सवारियों से भरी एक बस अचानक बेकाबू होकर खाई में गिर गई. इस घटना में 8 लोगों के मौत की जानकारी सामने आई है।  जिला कलेक्टर पीयूष सामरिया ने हादसे में 8 लोगों की मौत की पुष्टि की है. बस में भोपाल के 21 लोग सवार थे, जिनमें बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल थे. वे भोपाल से खाटूश्यामजी दर्शन करने जा रहे थे।  इस बीच, घायल यात्रियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. जिला कलेक्टर पीयूष सामरिया और कोटा रेंज आईजी हरेंद्र महावर एमबीएस अस्पताल पहुंचे और घायलों का हाल जाना। 

राजस्थान के प्रो. आशुतोष पारीक और प्रो. परवेज अल्वी को बड़ी उपलब्धि, वैश्विक वैज्ञानिकों की सूची में मिली जगह

जयपुर   वनस्थली विद्यापीठ के फार्मेसी विभाग के प्रो. आशुतोष पारीक को वर्ष 2026 की विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में स्थान मिला है। स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के शोध-आधारित आंकड़ों पर तैयार और एल्सेवियर की ओर से प्रकाशित इस सूची में फार्माकोलॉजी एवं फार्मेसी क्षेत्र में उन्होंने वैश्विक स्तर पर 1,66,116 शोधकर्ताओं में 2403वीं रैंक हासिल की है। इस उपलब्धि के साथ वे दुनिया के शीर्ष 1.45 प्रतिशत वैज्ञानिकों में शामिल हो गए हैं। देश और प्रदेश में भी पहचान भारत में इस क्षेत्र के सूचीबद्ध 371 शोधकर्ताओं में शोधपत्रों पर प्राप्त बाहरी उद्धरणों के आधार पर प्रो. पारीक शीर्ष 45 में शामिल हैं। राजस्थान के 20 चयनित वैज्ञानिकों में भी उन्होंने स्थान बनाया है। प्रति शोधपत्र 9.02 गैर-स्व-उद्धरण के आधार पर वे प्रदेश के शीर्ष पांच वैज्ञानिकों में शामिल हैं। अस्थमा और कैंसर उपचार पर शोध करीब 18 वर्षों से औषधि विज्ञान, उच्च शिक्षा और अनुसंधान से जुड़े प्रो. पारीक के प्रमुख शोध क्षेत्रों में अस्थमा के लिए नवीन औषधि-वितरण प्रणालियां, न्यूरोफार्माकोलॉजी और कैंसर उपचार शामिल हैं। उनके शोध प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं, जिनमें 'द लैंसेट' भी शामिल है। उन्हें प्रो. एमएल श्रॉफ मेमोरियल नेशनल अवार्ड, आईपीजीए यंग साइंटिस्ट अवार्ड सहित कई सम्मान मिल चुके हैं। प्रो. परवेज अल्वी भी शीर्ष वैज्ञानिकों में शामिल वनस्थली. वनस्थली विद्यापीठ के भौतिकी विभाग में कार्यरत प्रो. परवेज अहमद अल्वी को वर्ष 2026 के दुनिया के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में शामिल किया गया है। यह सूची स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय और शैक्षणिक प्रकाशक एल्सेवियर की ओर से जारी की गई है। प्रो. अल्वी ने सिंगल ईयर और करियर लॉन्ग, दोनों श्रेणियों में स्थान हासिल किया है। वे वर्ष 2021, 2023, 2024 और 2026 में भी इस सूची में शामिल हो चुके हैं। प्रो. अल्वी का शोध क्षेत्र फिजिक्स एंड एस्ट्रोनॉमी तथा उपक्षेत्र एप्लाइड फिजिक्स है। वर्ष 2026 की सिंगल ईयर श्रेणी में उनकी वैश्विक रैंक 1,12,416 रही, जबकि संबंधित उपक्षेत्र में रैंक 2,014 दर्ज की गई। इस श्रेणी में उनका एच-इंडेक्स 20 और एचएम-इंडेक्स 8 रहा। करियर लॉन्ग श्रेणी में उनकी वैश्विक रैंक 4,35,762 और संबंधित उपक्षेत्र में रैंक 11,906 रही। इस श्रेणी में उनका एच-इंडेक्स 38 तथा एचएम-इंडेक्स 17 दर्ज किया गया। प्रो. अल्वी ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से एमएससी, एमफिल और पीएचडी की उपाधियां प्राप्त की हैं। उन्हें विदेश में विजिटिंग प्रोफेसर पद के लिए भी आमंत्रित किया गया है। उनकी उपलब्धि को विद्यापीठ में शोध और वैज्ञानिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजस्थान में गांजे की अवैध खेती पर सवाल, 400 से अधिक जमीन मालिकों के बीच असली आरोपी तलाशना चुनौती

जयपुर उदयपुर जिले के मांडवा क्षेत्र में हाल ही में पकड़ी गई करीब 57 हेक्टेयर में फैली गांजे की अवैध खेती का अनुमानित मूल्य 200 करोड़ रुपए आंका गया है। खेतों में पौधे तीन-चार फीट ऊंचे होने के बावजूद स्थानीय पुलिस और प्रशासन को इसकी भनक नहीं लगी। अब जांच में सबसे बड़ी चुनौती खेती करने वालों की पहचान करना है। गांजे की खेती 56 खसरों में मिली है, जिनके 400 से अधिक मालिक बताए जा रहे हैं। कई खसरों में 10-10 खातेदार हैं। इनमें भाई-बहन भी शामिल हैं, जबकि कुछ खातेदार दूसरे स्थानों पर रहते हैं। ऐसे में जमीन के मालिकों की सूची के आधार पर वास्तविक खेती करने वालों की पहचान करना मुश्किल हो रहा है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने मामला दर्ज करने के बाद पटवारी, ग्राम सेवक, थानाधिकारी और उपाधीक्षक से संबंधित जमीनों और गांजे की खेती करने वालों की जानकारी मांगी है। उनसे खेती करने वालों की पहचान कर सूची उपलब्ध कराने को कहा गया है। सवाल- आखिर निगरानी से कैसे बची गांजे की खेती? गांजे की खेती तैयार होने में कई महीने लगते हैं। इसके बावजूद इतनी बड़ी खेती का पता नहीं चलना स्थानीय सूचना तंत्र और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि बुवाई से लेकर पौधों के तीन-चार फीट ऊंचे होने तक जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली। पहले भी पकड़ी गई गांजे की खेती राजस्थान के कई जिलों में जंगलों, पहाड़ी क्षेत्रों और खेतों में गांजे की खेती पकड़ी जा चुकी है। हालांकि, कई मामलों में खेती करने वालों और इसके पीछे सक्रिय नेटवर्क तक पहुंचना चुनौती बना रहा। इस वर्ष जनवरी से सितंबर तक राजस्थान पुलिस 10,213 किलोग्राम गांजा बरामद कर चुकी थी। खेतों में छिपाकर उगाए गांजे के पौधे उदयपुर: कोटड़ा के नयावास गांव में 7-8 अक्टूबर को 9.4 बीघा जमीन पर गांजे के 7,577 पौधे मिले। इनसे 2,273 किलोग्राम गांजा तैयार होने का अनुमान था, जिसकी कीमत 11.76 करोड़ रुपए आंकी गई। जयपुर ग्रामीण: समोद क्षेत्र के विजय सिंहपुरा-बांसा गांव में 29 मार्च को बगीचे में उगाए गए गांजे के 1,510 पौधे जब्त किए गए। इस मामले में एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया। डूंगरपुर: पांथल गांव में 18 सितंबर को कपास की फसल के बीच उगाए गए गांजे के 2,505 पौधे जब्त किए गए। पहचान करना चुनौती उदयपुर में जिन खसरों में गांजे की खेती मिली है, उनमें कई-कई मालिक हैं। कुछ खसरों में 10-10 खातेदार हैं। ऐसे में पुलिस और प्रशासन से खेती करने वालों की पहचान कर उनके नाम मांगे गए हैं, ताकि उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके। -घनश्याम सोनी, जोनल निदेशक, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, जोधपुर

त्योहारी सीजन में यात्रियों को राहत, नवंबर-दिसंबर तक चलेंगी कई स्पेशल ट्रेनें

जयपुर दीपावली और छठ महापर्व पर घर जाने वाले यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए रेलवे ने स्पेशल ट्रेनों के संचालन की अवधि बढ़ाई है। उत्तर पश्चिम रेलवे की ओर से कई स्पेशल ट्रेनों के नए फेरे चलाए जा रहे हैं, जबकि पहले से संचालित कुछ ट्रेनों को नवंबर और दिसंबर तक विस्तार दिया गया है। इससे जयपुर सहित राजस्थान के विभिन्न शहरों से उत्तर प्रदेश, बिहार, प्रयागराज, हरिद्वार, मुंबई और दक्षिण भारत जाने वाले यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है। प्रयागराज, बिहार और यूपी के लिए ट्रेनें प्रयागराज-सीकर साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन का संचालन 30 नवंबर तक बढ़ाया गया है। श्रीगंगानगर-समस्तीपुर स्पेशल ट्रेन 18 अक्टूबर से 29 नवंबर तक चलेगी। इसके अलावा मदार-पटना, प्रयागराज-साबरमती और कानपुर सेंट्रल-असारवा के बीच भी स्पेशल ट्रेनें संचालित की जा रही हैं। हरिद्वार और ऋषिकेश के लिए भी सुविधा हरिद्वार जाने वाले यात्रियों के लिए साबरमती-हरिद्वार, वेरावल-हरिद्वार और बाड़मेर-हरिद्वार स्पेशल ट्रेनें उपलब्ध हैं। वहीं, अजमेर और उदयपुर सिटी से योगनगरी ऋषिकेश के लिए भी स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं। लालकुआं-साबरमती स्पेशल ट्रेन 25 नवंबर तक संचालित होगी। मुंबई और दक्षिण भारत के लिए बढ़े फेरे जोधपुर-चेन्नई और कोयम्बटूर-जयपुर-कोयम्बटूर साप्ताहिक स्पेशल ट्रेनों का संचालन बढ़ाया गया है। इसके अलावा बांद्रा टर्मिनस, मुंबई सेंट्रल और सोलापुर के लिए भी अतिरिक्त फेरे निर्धारित किए गए हैं। कई अन्य स्पेशल ट्रेनों की अवधि बढ़ाई त्योहारी सीजन में यात्रियों की सुविधा के लिए भगत की कोठी-दानापुर स्पेशल ट्रेन 25 नवंबर तक और अजमेर-रांची स्पेशल ट्रेन 27 नवंबर तक चलेगी। सुबेदारगंज-भगत की कोठी और जोधपुर-मऊ सहित अन्य स्पेशल ट्रेनों की संचालन अवधि भी बढ़ाई गई है। ओखा-शकूरबस्ती, भावनगर-शकूरबस्ती, हिसार-वलसाड, बीकानेर-साईनगर शिर्डी और भिवानी रूट की स्पेशल ट्रेनों के फेरे भी बढ़ाए गए हैं। इन व्यवस्थाओं से त्योहार के दौरान यात्रियों को अतिरिक्त विकल्प मिलेंगे। हालांकि, कन्फर्म टिकट की उपलब्धता संबंधित ट्रेन में सीटों और मांग पर निर्भर करेगी। टिकट बुकिंग कैसे करें? आइआरसीटीसी की आधिकारिक वेबसाइट irctc.co.in या IRCTC Rail Connect ऐप से टिकट बुक कर सकते हैं। किसी भी रेलवे स्टेशन के आरक्षण काउंटर से टिकट लिया जा सकता है। दो ट्रेन आज से बदले रूट से चलेंगी जयपुर. धर्मवरम-नागसमुद्रम-पेनुकोंडा रेलखंड के दोहरीकरण का काम पूरा होने के बाद रेलवे ने अजमेर और जोधपुर से बेंगलुरु जाने वाली दो ट्रेनों का मार्ग स्थायी रूप से बदल दिया है। अजमेर-बेंगलुरु एक्सप्रेस और जोधपुर-बेंगलुरु एक्सप्रेस 16 अक्टूबर से परिवर्तित मार्ग धर्मवरम-नागसमुद्रम-पेनुकोंडा होकर संचालित होंगी।

जैसलमेर में नाइट टूरिज्म पर पूरी रोक नहीं, डीएनपी के बाहर ऊंट सफारी जारी

जैसलमेर राजस्थान के जैसलमेर घूमने का प्लान बना रहे पर्यटकों के लिए सम और कनोई क्षेत्र के धोरों को लेकर बड़ी खबर है। वन विभाग ने राष्ट्रीय मरु उद्यान (डीएनपी) के दायरे में आने वाले धोरों पर सूर्यास्त के बाद ऊंट सफारी और अन्य पर्यटन गतिविधियों पर रोक लगाई है। हालांकि, इस आदेश को लेकर पर्यटकों और पर्यटन कारोबारियों में असमंजस पैदा हो गया था। अब वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह पाबंदी पूरे सम क्षेत्र या जैसलमेर के सभी धोरों पर लागू नहीं है। डीएनपी की सीमा से बाहर पर्यटन गतिविधियां पहले की तरह जारी रहेंगी। यह पूरा मामला क्षेत्रीय वन अधिकारी की ओर से 11 अक्टूबर को जारी पत्र के बाद सामने आया। इसमें राष्ट्रीय मरु उद्यान के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण को लेकर दिशा-निर्देश दिए गए थे। विभाग ने धोरों पर बढ़ते कचरे, नाइट टूरिज्म के दौरान लेजर लाइट के अत्यधिक इस्तेमाल और सूर्यास्त के बाद पर्यटन गतिविधियों पर चिंता जताई थी। पत्र सामने आने के बाद पर्यटन कारोबारियों और पर्यटकों के बीच चर्चा शुरू हो गई कि क्या अब सम के विश्व प्रसिद्ध सैंड ड्यून्स पर सूर्यास्त के बाद घूमना, ऊंट सफारी करना और अन्य गतिविधियों का आनंद लेना बंद हो जाएगा। इससे रिसोर्ट संचालकों के साथ बाहर से आने वाले पर्यटकों में भी भ्रम की स्थिति बन गई। डीएनपी के बाहर प्रतिबंध नहीं, इन जगहों पर नाइट टूरिज्म ले सकते हैं आनं वन विभाग ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि सूर्यास्त के बाद गतिविधियों पर रोक केवल राष्ट्रीय मरु उद्यान की निर्धारित सीमा में आने वाले धोरों तक सीमित है। इसे जैसलमेर के सभी पर्यटन स्थलों पर लागू नहीं माना जाना चाहिए। डीएनपी सीमा से बाहर स्थित लखमणा और अन्य धोरों पर पहले की तरह ऊंट सफारी और पारंपरिक पर्यटन गतिविधियां संचालित होती रहेंगी। यानी पर्यटकों को जैसलमेर में सूर्यास्त के समय रेतीले धोरों का नजारा देखने और डेजर्ट सफारी का अनुभव लेने के विकल्प मिलते रहेंगे, बशर्ते वे संबंधित क्षेत्र के नियमों का पालन करें। पर्यावरण संरक्षण के लिए उठाया कद सम कैम्प्स एंड वेलफेयर सोसायटी के कैलाश कुमार व्यास के अनुसार, रिसोर्ट संचालक पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े नियमों की पालना कर रहे हैं। धोरों को साफ रखने के लिए समय-समय पर सफाई अभियान भी चलाए जाते हैं। डीएनपी के उप वन संरक्षक चंद्रपालसिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि सूर्यास्त के बाद ऊंट सफारी और अन्य गतिविधियों पर रोक केवल डीएनपी क्षेत्र में है। अन्य धोरों पर यह प्रतिबंध लागू नहीं है। ऐसे में जैसलमेर आने वाले पर्यटकों को यात्रा से पहले अपने चुने हुए पर्यटन स्थल की सीमा और वहां लागू नियमों की जानकारी जरूर लेनी चाहिए। इन्होंने कहा- 'सम क्षेत्र के केवल डीएनपी एरिया में ही सूर्यास्त के बाद ऊंट सफारी और अन्य पर्यटन गतिविधियों पर रोक लगाई गई है। यह दिशा-निर्देश अन्य ड्यून्स के लिए नहीं है।' -चंद्रपालसिंह चौहान, उप वन संरक्षक, डीएनपी, जैसलमेर

Chambal Water Sharing: रबी फसलों की सिंचाई के लिए 18 अक्टूबर से शुरू होगा जल प्रवाह

कोटा चंबल जल बंटवारे तथा रबी फसल के लिए बांधों में जल उपलब्धता के संबंध में मध्य प्रदेश-राजस्थान अंतरराज्यीय नियंत्रण मंडल की बैठक हुई। इसमें दोनों राज्यों के अधिकारियों ने एकराय से कहा कि इस बार बारिश कम होने से चंबल के बांधों में पानी की उपलब्धता कम है। ऐसे में सिंचाई के साथ गर्मी में पेयजल की जरूरत के हिसाब से प्रबंधन किया जाना आवश्यक है। दोनों राज्यों के बीच चंबल की दाईं मुख्य नहर में 18 अक्टूबर से पानी छोड़ने पर सहमति बनी। मध्य प्रदेश ने रबी के मुख्य सीजन में राजस्थान की ओर से जल समझौते के अनुरूप पानी नहीं देने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि मांग के अनुरूप पानी नहीं दिया जाता। बैठक में तय किया कि दोनों राज्यों के अधीक्षण अभियंता स्तर के अधिकारी जल बंटवारें और जल प्रवाह पर आपस में समन्वय करेंगे, ताकि कोई विवाद नहीं हो। तकनीकी समिति की बैठक राजस्थान के मुख्य अभियंता (पूर्व) एवं अतिरिक्त सचिव, सीएडी राजस्थान जयपुर की अध्यक्षता में वर्चुअली हुई। बैठक में रबी फसलों के लिए बांधों में जल उपलब्धता एवं जलस्तर के संधारण तथा इस वर्ष 2026-27 के लिए जल मांग एवं आपूर्ति से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया गया। मध्य प्रदेश के अधिकारियों ने 18 अक्टूबर से 2000 क्यूसेक पानी की मांग रखी एवं राजस्थान के सीएडी अधिकारियों ने भी इसी तिथि से दाईं मुख्य नहर में जल प्रवाह करने की मांग रखी, जिस पर दोनों राज्यों के अधिकारियों ने सहमति दे दी। 18 अक्टूबर से जल प्रवाह शुरू होगा, जो धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा। बांधों में पानी कम, जल प्रबंधन पर जोर इस वर्ष कम वर्षा होने से बांधों में जल उपलब्धता पिछले वर्ष की भांति कम है। इस कारण रबी फसल के लिए जल उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए किसानों को कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों, जैसे चना आदि की खेती के लिए प्रोत्साहित करने पर बल दिया गया। साथ ही, अधिक जल की खपत वाली फसलों के स्थान पर कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों को अपनाने के संबंध में चम्बल कमाण्ड क्षेत्र के काश्तकारों को प्रोत्साहन करने के लिए कहा गया। राणा प्रताप सागर बांध का जल स्तर 1,150 फीट रखा जाएगा राणा प्रताप सागर एवं जवाहर सागर बांध वृत्त कोटा के अधीक्षण अभियंता ने बैठक में बताया कि इस रबी सीजन के दौरान बांध के जलस्तर को कम से कम 1,150 फीट बनाए रखें। साथ ही, रबी सीजन के बाद राणा प्रताप सागर का जलस्तर 1,145 फीट बनाए रखें, जिससे आगामी गर्मियों में पीने के लिए पानी की परेशानी उत्पन्न न हो। सीएडी कोटा के अधीक्षण अभियंता ने भी नहर संचालन के दौरान राणा प्रताप सागर का स्तर 1150 फीट रखने के लिए कहा, जिससे मांग अनुसार नहरों का संचालन का नियंत्रण राणा प्रताप सागर से किया जा सके। इसके अनुसार मध्य प्रदेश से गांधी सागर में लगातार पानी छोड़ने की मांग की गई। मध्य प्रदेश के गांधी सागर बांध खंड के अधीक्षण अभियंता ने सकारात्मक आश्वासन दिया है। पीक डिमांड के दौरान जल उपलब्ध कराने की मांग मध्य प्रदेश ने पीक डिमांड अवधि के दौरान जल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। इस संबंध में जल की उपलब्धता एवं आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए दोनों राज्यों के मध्य समन्वय बनाए रखने पर सहमति जताई गई। सीएडी कोटा के अधीक्षण अभियंता ने कहा कि दोनों राज्यों की ओर से पानी की पीक डिमांड एक साथ होने पर रेगुलेशन में परेशानी आती है। वर्ष 2026-27 के दौरान मध्य प्रदेश को जल की आपूर्ति निर्धारित इंडेंट के अनुसार किए जाने की पूरी कोशिश की जाएगी। मध्य प्रदेश मुख्य सीजन में जल समझौते अनुरूप 3200 क्यूसेक पानी देने की मांग की है। इन्होंने कहा- 'दोनों राज्यों के मध्य जल बंटवारे, रबी फसलों के जल की उपलब्धता तथा बांध के जलस्तर के उचित संधारण के संबंध में अधिकारियों के आपसी समन्वय से कार्य करने पर सहमति बनी। बैठक सभी बिन्दुओं में सकारात्मक माहौल में चर्चा हुई है। बजट व मरम्मत के मुद्दों पर भी चर्चा हुई है।' -संजय कुमार सिंह सचिव, मध्यप्रदेश-राजस्थान अंतरराज्यीय नियत्रंण मण्डल, कोटा बांधों में मौजूदा समय में पानी फीसदी में गांधी सागर बांध : 76.18 राणा प्रतार सागर बांध : 72.12 जवाहर सागर बांध : 71.63 कोटा बैराज : 98.08

फसल बीमा क्लेम पर बड़ा फैसला, डूंगरपुर के किसानों को मिलेंगे 7.69 करोड़ रुपये

जयपुर  पंचायतीराज चुनाव प्रक्रिया के बीच फसल खराब होने पर बीमा क्लेम के इंतजार में बैठे किसानों के लिए राहत की खबर है। फसल कटाई प्रयोगों और बीमित क्षेत्र को लेकर बीमा कंपनियों की ओर से दर्ज आपत्तियों के निस्तारण के बाद डूंगरपुर और जालोर के किसानों को करोड़ों रुपए का लाभ मिलेगा। अकेले डूंगरपुर में 155 फसल कटाई प्रयोगों पर दर्ज आपत्तियां दूर होने से किसानों को करीब 7.69 करोड़ रुपए का लाभ मिलेगा, जबकि जालोर में दो अलग-अलग प्रकरणों में 13 करोड़ रुपए से अधिक की राशि से जुड़ी आपत्तियों का निस्तारण किया गया। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों की शिकायतों के निस्तारण के लिए बुधवार को जयपुर स्थित कृषि पंत भवन में राज्य स्तरीय शिकायत निराकरण समिति (एसजीआरसी) की बैठक हुई। कृषि विभाग की शासन सचिव मंजू राजपाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में विभिन्न जिलों से मिले प्रकरणों की समीक्षा कर उनका निस्तारण किया गया। कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने कहा कि फसल बीमा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कृषि विभाग, बीमा कंपनियों और संबंधित वित्तीय संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। किसानों के बीमा संबंधी प्रकरणों में तथ्यों और अभिलेखों की समुचित जांच की गई है, ताकि पात्र किसानों को योजना का लाभ लेने में अनावश्यक परेशानी न हो। डूंगरपुर: एक साल से लंबित था भुगतान डूंगरपुर जिले में खरीफ मौसम 2025 के दौरान बीमा कंपनी ने 155 फसल कटाई प्रयोगों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। समिति ने इन आपत्तियों का निस्तारण किया, जिससे किसानों को करीब 7.69 करोड़ रुपए का लाभ मिलेगा। जालोर: दो साल से चक्कर काट रहे थे किसान जालोर जिले में रबी मौसम 2023-24 के दौरान चवरडा पटवार मंडल में सरसों की फसल के फसल कटाई प्रयोगों पर बीमा कंपनी की ओर से दर्ज आपत्तियों का निस्तारण किया गया। इसके बाद किसानों के लिए 1 करोड़ 22 लाख रुपए का बीमा क्लेम मंजूर किया गया। 13 पटवार मंडलों में 12.36 करोड़ रुपए की आपत्तियों का निस्तारण जालोर में खरीफ मौसम 2024 के दौरान गिरदावरी रिपोर्ट के अभिलेखों में दर्ज फसलों का बीमित क्षेत्र वास्तविक बोए गए क्षेत्र से अधिक होने से संबंधित मामला सामने आया था। इस संबंध में 13 पटवार मंडलों में करीब 12 करोड़ 36 लाख रुपए की राशि से जुड़ी आपत्तियों का निस्तारण किया गया, जिससे किसानों को लाभ मिलेगा।  

राजस्थान के राज्य वृक्ष खेजड़ी पर संकट, बालोतरा में तेजी से सूख रहे पेड़; जांच की मांग तेज

बाड़मेर  थार की जीवनरेखा और राज्य वृक्ष खेजड़ी पर संकट मंडराने लगा है। बालोतरा जिले के गिड़ा क्षेत्र की ग्राम पंचायत कुम्पलिया के राजस्व गांव चौधरी भूनारामजी गोदारा नगर में हरे-भरे खेजड़ी के पेड़ तेजी से सूख रहे हैं। पेड़ों के तनों और जड़ों के आसपास जमीन पर चूने या पत्थर जैसी कठोर सफेद परत जम रही है। ग्रामीणों के अनुसार, खेतों में लगी करीब 50 से अधिक खेजड़ी इससे प्रभावित हुई है, वहीं अन्य पेड़ों में भी ऐसे लक्षण दिख रहे है। कुम्पलिया के पूर्व पंच रणधीर सिंह गोदारा पेड़ों को बचाने के प्रयास कर रहे हैं। किसानों और पर्यावरण प्रेमियों ने समस्या की जांच और स्थायी समाधान के लिए प्रशासन से मांग की है। पर्यावरण को नुकसान की आशंका खेजड़ी अकाल में पशुओं को लूंग के रूप में चारा देती है। इसकी सांगरी पौष्टिक सब्जी है और पेड़ मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी मदद करता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, प्रभावित और स्वस्थ पेड़ों की मिट्टी, सिंचाई के पानी और जड़ों की जांच जरूरी है। कृषि विश्वविद्यालय और कृषि विभाग की संयुक्त टीम सर्वे कर वास्तविक कारणों का पता लगा सकती है। खाद-कीटनाशकों से किए उपचार सफल नहीं रणधीर सिंह गोदारा के अनुसार, जड़ों के आसपास फफूंद जैसी सफेद परत बन रही है। इससे जड़ों की नमी और पोषक तत्व प्रभावित होने तथा जड़ सड़न की आशंका है। पानी, खाद और कीटनाशकों से किए गए शुरुआती उपचार सफल नहीं हुए। हालांकि, समस्या का वास्तविक कारण अभी वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है। मिट्टी में लवणों का जमाव, अधिक क्षारीयता, सोडियम की अधिकता, खराब जल निकास या जड़ों से जुड़े रोग संभावित कारण हो सकते हैं। जिला परिषद सदस्य दौलताराम गोदारा ने कलक्टर को पत्र लिखकर विशेषज्ञों की टीम भेजने और वैज्ञानिक उपचार कराने की मांग की है। खेजड़ी को बचाने के लिए पेड़ के साथ जड़ों के आसपास की मिट्टी को भी स्वस्थ बनाना होगा। मिट्टी, पानी और जड़ों की वैज्ञानिक जांच से सही कारण पता लगाकर समय पर उपचार किया जा सकता है। – डॉ. कृष्णा सहारण, कृषि विशेषज्ञ एवं सहायक आचार्य, कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर खेजड़ी का एक पौधा तैयार करने में वर्षों की मेहनत लगती है। प्रशासन को तत्काल अनुसंधान और आवश्यक उपचार के कदम उठाने चाहिए, ताकि जीवनदायिनी वृक्षों को बचाया जा सके। -दौलताराम गोदारा, जिला परिषद सदस्य

श्रीगंगानगर के रावला में ड्रोन तस्करी का बड़ा खुलासा, RDX और हथियारों के साथ पंजाब के 2 युवक गिरफ्तार

श्रीगंगानगर सीमा पार से आने वाले ड्रोन अब रावला के खेतों में सिर्फ नशे की खेप नहीं गिरा रहे। हेरोइन और अफीम के बाद अब हथियार और विस्फोटक मिलने से सीमा सुरक्षा के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। जनवरी से अक्टूबर तक सामने आई घटनाओं की कड़ियां जोड़ें तो रावला क्षेत्र ड्रोन तस्करी के संवेदनशील केंद्र के रूप में उभरता दिखाई देता है। ताजा मामले में करीब 7.750 किलोग्राम आरडीएक्स, एक रिमोट, पांच बैटरियां, दो कैपलर, तुर्की निर्मित दो जिगाना पिस्टल, चार मैगजीन और करीब 867 कारतूस मिलने से जांच का दायरा नशा तस्करी से आगे बढ़कर संभावित आतंकी नेटवर्क तक पहुंच गया है। सुरक्षा एजेंसियों से मिली जानकारी के अनुसार, रावला के चक 12 केएनडी क्षेत्र में ड्रोन से गिराए गए तीन पैकेटों से विस्फोटक और हथियार बरामद हुए। मामले में पंजाब निवासी दो युवकों को गिरफ्तार किया गया है। बरामद सामग्री में आरडीएक्स भी शामिल है। राजस्थान एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ), बीएसएफ और स्थानीय पुलिस की कार्रवाई के बाद अब खेप भेजने वालों, इसे लेने पहुंचे लोगों और इसके संभावित इस्तेमाल की पड़ताल की जा रही है। विस्फोटक तक पहुंचा नेटवर् रावला क्षेत्र में इस साल की शुरुआत से ही ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थ पहुंचाए जाने के मामले सामने आते रहे हैं। जनवरी में हेरोइन और ड्रोन बरामद होने, मार्च में करीब 10 किलोग्राम हेरोइन की खेप पकड़े जाने और सितंबर में हेरोइन व अफीम मिलने के बाद अक्टूबर में हथियारों और विस्फोटक की बरामदगी ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। लगातार हो रही बरामदगियों से यह सवाल उठ रहा है कि क्या सीमा पार से खेप गिराने और उन्हें आगे पहुंचाने के लिए कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय है? स्थानीय स्तर पर खेप लेने वालों, पंजाब तक फैले संपर्कों और सीमा पार बैठे संचालकों के बीच कड़ियां तलाशना जांच का अहम हिस्सा होगा। खेप का अंतिम ठिकाना कहां? अब एजेंसियों के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि ड्रोन किस दिशा से आया, खेप कहां गिराई गई, उसे लेने वाले कौन थे और विस्फोटक व हथियार किसके पास पहुंचने थे। रावला में नशीले पदार्थों की बार-बार बरामदगी के बीच हथियारों और विस्फोटक की ताजा खेप ने सीमा पार तस्करी के संभावित बड़े नेटवर्क की पड़ताल को और महत्वपूर्ण बना दिया है। चुनाव से पहले साजिश की आशंका पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले हथियारों और विस्फोटक की इतनी बड़ी खेप मिलने से इनके संभावित इस्तेमाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं। क्या इस सामग्री को किसी बड़ी वारदात के लिए भेजा गया था? क्या इसके तार पंजाब में सक्रिय आपराधिक या आतंकी नेटवर्क से जुड़े हैं? फिलहाल इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही मिल सकेंगे। चुनाव से पहले पंजाब में अशांति फैलाने की आशंका को जांच के संभावित पहलुओं में शामिल किया जा सकता है। बटाला ग्रेनेड हमले से जुड़ी कड़ी बटाला की अर्बन एस्टेट पुलिस चौकी पर 1 अगस्त को हुए ग्रेनेड विस्फोट के मामले में पंजाब पुलिस ने तीन आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी थी। रावला में गिरफ्तार युवकों में से एक के पंजाब में हुए ग्रेनेड हमले में शामिल होने का संदेह भी जताया गया है। हालांकि, गिरफ्तार युवक की पहचान और बटाला मामले में उसकी भूमिका की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। यदि दोनों मामलों के बीच संबंध स्थापित होता है तो जांच का दायरा राजस्थान और पंजाब के बीच सक्रिय हथियार व विस्फोटक नेटवर्क तक फैल सकता है। टाइमलाइन: ड्रोन से आई नशे और हथियारों की खेप 2 जनवरी – 15 केएनडी के पास: खेत में 4 किलो 88 ग्राम हेरोइन और एक ड्रोन मिला। बताया गया कि यह खेप दिसंबर के अंतिम दिनों में गिराई गई थी। लौटते समय ड्रोन खेत में गिर गया था। मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया। 26-27 मार्च – चक 2 केएनडी क्षेत्र: ड्रोन से गिराई गई करीब 10 किलोग्राम हेरोइन बरामद हुई। कार्रवाई में पंजाब के तीन तस्करों और दो स्थानीय मददगारों सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया। 12-13 सितंबर – चक 14 केएनडी: खेत में 5 किलोग्राम हेरोइन और 508 ग्राम अफीम बरामद हुई। 12-14 अक्टूबर – चक 12 केएनडी: ड्रोन से गिराए गए पैकेटों से करीब 7.750 किलोग्राम आरडीएक्स, एक रिमोट, पांच बैटरियां, दो कैपलर, तुर्की निर्मित दो जिगाना पिस्टल, चार मैगजीन और करीब 867 कारतूस बरामद हुए। मामले में पंजाब के दो युवकों को गिरफ्तार किया गया। अधिकारी का बयान “ड्रोन के जरिए आया आरडीएक्स हाई क्वालिटी का एक्सप्लोसिव है। इसमें कीलें व अन्य नुकीली सामग्री मिली हुई पाई गई हैं। पंजाब में थानों और पुलिस चौकियों पर हमलों के लिए आरडीएक्स का इस्तेमाल हैंड ग्रेनेड में हुआ है। रावला क्षेत्र में मिला आरडीएक्स अपग्रेड है। अब एक लेवल ऊपर जाकर आईईडी विस्फोट के लिए इसे तैयार किया गया है। पंजाब का पैटर्न देखते हुए सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इसका इस्तेमाल कहां होना था। आरडीएक्स की मात्रा और इसकी क्वालिटी को देखकर लगता है कि जिन हाथों तक यह पहुंचना था, उनकी योजना बड़े पैमाने पर विध्वंस करने की रही होगी।” — विकास कुमार, महानिरीक्षक, एएनटीएफ