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हाई कोर्ट की राज्य सरकार से जवाब-तलब, पंचायत चुनाव पर OBC आयोग की रिपोर्ट पेश करने के निर्देश

 लखनऊ  पंचायत चुनाव और वर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किए जाने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से महत्वपूर्ण जानकारी तलब की है।अदालत ने पंचायत चुनावों से संबंधित पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश राज्य सरकार को दिया है। साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग से संभावित चुनाव कार्यक्रम के बारे में स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति एके चौधरी की अवकाशकालीन पीठ ने स्थानीय अधिवक्ता ओम प्रकाश प्रजापति की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी। याचिका में राज्य सरकार के 25 मई के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत वर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम की धारा-12 के अनुसार ग्राम प्रधान का कार्यकाल शपथ ग्रहण की तिथि से केवल पांच वर्ष का होता है। इसके बावजूद समय पर पंचायत चुनाव न कराकर मौजूदा प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त कर दिया गया, जिससे उनका कार्यकाल अनिश्चितकाल तक बढ़ गया है। यह व्यवस्था कानून के विपरीत है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि यदि किसी कारण से समय पर पंचायत चुनाव नहीं कराए जा सकते, तो पूर्व व्यवस्था के अनुसार एडीओ पंचायत या किसी अन्य सरकारी अधिकारी को प्रशासक नियुक्त किया जाए। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने चुनाव तैयारियों और आरक्षण प्रक्रिया की स्थिति जानने के लिए ओबीसी आयोग की रिपोर्ट तलब की तथा निर्वाचन आयोग से संभावित चुनाव कार्यक्रम पर स्पष्ट जवाब मांगा है।

यूपी पंचायत चुनाव मामला: ग्राम प्रधानों की नियुक्ति पर हाईकोर्ट सख्त, ओबीसी रिपोर्ट पेश करने के निर्देश

इलाहाबाद इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में ग्राम प्रधानों को प्रदेश में पंचायत चुनाव होने और नए प्रधान चुने जाने तक प्रशासक नियुक्त करने संबधी राज्य सरकार के आदेश को चुनौती दी गई। ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के मामले में बुधवार हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में सुनवाई हुई। याची अमरेंद्र नाथ ने बताया कि सुनवाई के दौरान सरकार से सवाल किया कि उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव कब कराए जाएंगे। कोर्ट ने राज्य सरकार से उत्तर पनिर्वाचन आयोग को आदेश दिया कि अगली सुनवाई 10 जुलाई तक पंचायत चुनाव कराए जाने की संभावित डेट बताएं। इसके साथ ही सुनवाई के दौरान ओबीसी आयोग की रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर बी सराफ व न्यायमूर्ति एके चौधरी की अवकाशकालीन पीठ ने स्थानीय अधिवक्ता ओम प्रकाश प्रजापति की ओर से दाखिल याचिका पर पारित किया है। याचिका में ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने संबधी राज्य सरकार के 25 मई के आदेश को चुनौती दी गई है। कहा गया है कि उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम की धारा 12 के तहत प्रधानों का कार्यकाल उनके शपथ लेने के पश्चात से सिर्फ पांच वर्ष का ही हो सकता है। सरकार ने समय पर पंचायत चुनाव न करा के मौजूदा प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त कर दिया। इस प्रकार से उनका कार्यकाल अनिश्चितकाल तक के लिए बढ़ा दिया गया है जो कि विधि विरूद्ध है। याचिका में मांग की गई कि पूर्व व्यवस्था के तहत यदि पंचायत चुनाव समय पर नहीं हो पा रहे तो एडीओ पंचायत या किसी अन्य अधिकारी को प्रशासक नियुक्त किया जाय। प्रधानों ने प्रशासक के रूप में 27 मई से काम संभाला है यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव न हो पाने पर पहली बार 57694 निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक की जिम्मेदारी दिए जाने के बाद अब उनके काम के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिया गया है। प्रशासक की जिम्मेदारी संभालने के बाद अब नए काम वो डीएम की अनुमति से ही करा सकेंगे। ग्राम पंचायतों के निवर्तमान प्रधानों ने प्रशासक के रूप में 27 मई से काम संभाला है। ऐसे में अब इस तिथि से वह कोई भी नया काम कराने के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से डीएम को प्रस्ताव भेजेंगे। फिर डीएम की अनुमति से ही वह कोई नया काम करा सकेंगे। सिर्फ ग्राम पंचायतों के प्रशासक नियुक्त किए जाने से पूर्व की तिथि से स्वीकृत व अनुमोदित दैनिक, निर्माणाधीन, मरम्मत कार्य और पूर्ण हो चुके कामों का भौतिक व तकनीकी मूल्यांकन कराते हुए भुगतान प्रशासक पूर्व की भांति कर सकेंगे।

चुनावी प्रक्रिया को लेकर बढ़ी हलचल, आयोग ने विभागों से मांगा जरूरी डेटा

जयपुर राजस्थान में पंचायत राज संस्थाओं और नगरीय निकायों के चुनावों को लेकर एक बार फिर गतिविधियां तेज हो गई हैं. राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत राज विभाग और स्वायत्त शासन विभाग से आरक्षण संबंधी नवीनतम आंकड़े उपलब्ध कराने को कहा है. आयोग का मानना है कि आवश्यक डेटा मिलते ही चुनावी प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा. विभागों से मांगे आंकड़े राज्य निर्वाचन आयोग ने सरकार और संबंधित विभागों को पत्र लिखकर जरूरी आंकड़े मांगे हैं.  आयोग का कहना है कि पंचायत और निकाय चुनावों में आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया पूरी किए बिना चुनाव कार्यक्रम जारी करना संभव नहीं है. आयोग ने विभागों को स्पष्ट किया है कि डेटा उपलब्ध होते ही चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ाया जाएगा. आयोग को कोर्ट में देना है जवाब उल्लेखनीय है कि चुनाव में देरी को लेकर आयोग को न्यायालय में भी जवाब देना पड़ा था.  15 अप्रैल को चुनाव नहीं कराए जाने के मामले में आयोग ने कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए आवश्यक आंकड़े उपलब्ध नहीं होने को प्रमुख कारण बताया था. राज्य सरकार की ओर से पहले ओबीसी आरक्षण से संबंधित आयोग की रिपोर्ट का हवाला दिया गया था, लेकिन निर्वाचन आयोग का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया शुरू करने के लिए अंतिम और प्रमाणित आंकड़ों की आवश्यकता है.  यही वजह है कि विभागों से एक बार फिर विस्तृत डेटा मांगा गया है. पंचायत और निकाय चुनाव लंबित राजस्थान में पंचायत राज और नगरीय निकायों के चुनाव काफी समय से लंबित हैं. ऐसे में आयोग के ताजा पत्राचार के बाद चुनावों को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं.  अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार आयोग को मांगा गया डेटा कब तक उपलब्ध कराती है क्योंकि इसी पर चुनावी प्रक्रिया की दिशा तय होगी.

अगले साल झारखंड में हो सकते हैं पंचायत चुनाव, प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज

धनबाद. झारखंड में अगले वर्ष यानी अप्रैल-मई 2027 के महीने में पंचायत चुनाव होगा। चुनाव सही ढंग से संपन्न कराने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिलों के जिला निर्वाचन पदाधिकारी को पत्र देकर तैयारियां करने का आदेश दिया है। साथ ही पंचायत चुनाव को लेकर कई जानकारियों की मांग की है। इस आदेश के बाद धनबाद जिले में कार्रवाई शुरू कर दी गई है। राज्य निर्वाचन आयोग की तरफ से जिलों को भेजे गए पत्र में बताया गया है कि अप्रैल-मई 2027 में पंचायत चुनाव होना है। इस त्रिस्तरीय चुनाव के तहत जिला परिषद, मुखिया, पंचायत समिति सदस्य और पंचायत वार्ड सदस्य के पद पर चुनाव होगा। ऐसे में जिलों से वहां मौजूद छोटी और बड़ी मतपेटियों की संख्या, बूथों की जानकारी, पंचायतों की संख्या से संबंधित जानकारी की मांग की गई है। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, धनबाद जिले में 256 पंचायते हैं और जिला के पास करीब पांच हजार से अधिक मतपेटियां हैं। यह भी बताया गया है कि प्रत्येक बूथ के लिए दो बड़ी मतपेटी और एक छोटी मतपेटी का उपयोग किया जाएगा। इस संबंध में जिला पंचायती राज पदाधिकारी धनबाद मुकेश कुमार बाउरी ने बताया कि राज्य निर्वाचन आयोग से आदेश पत्र प्राप्त हुआ है। उपरोक्त आदेशों पर जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त धनबाद से आदेश लेने के बाद कार्य आरंभ कर दिया जाएगा। मतपत्र से होगा चुनाव: नगर निकाय चुनाव की तरह ही पंचायत चुनाव भी मतपत्रों के माध्यम से ही होगा। राज्य निर्वाचन आयोग ने मतपेटियों के बावत जानकारी मांगी है। इससे यह साफ हो गया है कि मतपत्रों से ही चुनाव होगा। एक मतदाता को तीन वोट देने होंगे। इनमें जिला परिषद सदस्य, मुखिया और पंचायत समिति सदस्य पद के लिए वोट दिया जाएगा। चार रंगों के रहेंगे मतपत्र: निर्वाचन आयोग के अनुसार त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के तहत होने वाले चुनाव में अलग-अलग पदों के लिए चार रंग के मतपत्रों को उपयोग किया जाएगा। इसमें सफेद रंग का मतपत्र पंचायत के वार्ड सदस्य के लिए होगा। इसी प्रकार से मुखिया के लिए गुलाबी, पंचायत समिति सदस्य के लिए हल्का हरा और जिला परिषद सदस्यों के लिए हल्के पीले रंग का मतपत्र होगा।

ओबीसी आयोग रिपोर्ट और संसाधन कमी का हवाला, पंचायत चुनाव टालने पर अर्जी पर बहस

जयपुर पंचायत-निकाय चुनाव के मामले में हाईकोर्ट सोमवार (11 मई) को सुनवाई करेगा. राज्य सरकार की ओर से 6 महीने के लिए चुनाव टालने को लेकर दलील दी जा चुकी है. सरकार ने कोर्ट में आवेदन दाखिल करते हुए था कि मौजूदा परिस्थितियों में दिसंबर से पहले चुनाव कराना संभव नहीं है. इस तर्क के साथ समय बढ़ाने की अर्जी दायर की गई थी. वहीं, राज्य निर्वाचन आयोग भी भजनलाल सरकार के तर्क के पक्ष में है. दिसंबर तक कई परिषद का कार्यकाल होगा खत्म सरकार की ओर से कहा गया कि अक्टूबर से दिसंबर के बीच कई पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. उस अवधि के बाद चुनाव कराना ज्यादा उचित होगा. सरकार ने ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का भी हवाला दिया था. साथ ही  प्रार्थना पत्र में स्कूल स्टाफ, ईवीएम और अन्य संसाधनों की उपलब्धता के भी तर्क जोड़े गए. 15 अप्रैल तक चुनाव कराने के दिए थे निर्देश पिछले कई महीनों से पंचायत-निकाय चुनाव के मामले में कानूनी दांव-पेंच जारी है. हाईकोर्ट ने पहले सरकार को 15 अप्रैल तक चुनाव कराने के निर्देश दिए थे. उस वक्त भी सरकार ने समय सीमा के भीतर चुनाव कराने में असमर्थता जताई थी. एक बार फिर चुनाव टालने की अर्जी दायर होने के बाद आज की सुनवाई अहम होगी.  

अब डुप्लीकेट वोटिंग पर लगेगी लगाम, AI से होगी मतदाताओं की पहचान

 लखनऊ पंचायत चुनाव की तारीखें भले ही अभी घोषित न हुईं हों लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव की तैयारियों में जुटा हुआ है। इस बार के चुनाव में बड़ा तकनीकी बदलाव भी देखने को मिलेगा। फर्जी वोटिंग रोकने व कोई भी मतदाता दोबारा वोट न डाल सकें, इसके लिए आयोग ने ''फेशियल रिकाग्निशन सिस्टम'' (एफआरएस) बनवाया है। इस नई व्यवस्था के तहत मतदान केंद्रों पर वोट डालने आने वाले मतदाताओं के फोटो पहचान पत्र व उनकी फोटो खींची जाएगी। यह फोटो सीधे सर्वर पर अपलोड होगी। अगर कोई भी दोबारा वोट डालने आया तो सिस्टम सतर्क कर देगा। राज्य निर्वाचन आयुक्त आरपी सिंह ने बताया कि इस तकनीक के लागू होने से किसी भी व्यक्ति द्वारा दूसरे के नाम पर वोट डालने की संभावना लगभग खत्म हो जाएगी। यदि कोई मतदाता फर्जी तरीके से मतदान करने का प्रयास करता है, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करेगा और मौके पर मौजूद पीठासीन अधिकारी उसे पकड़ सकेंगे। इसके लिए आयोग एक विशेष मोबाइल एप तैयार करवाया है। पीठासीन अधिकारियों के मोबाइल फोन में यह एप इंस्टाल किया जाएगा, जिसमें मतदाता पहचान पत्र और लाइव फोटो अपलोड कर एआइ से सत्यापन किया जाएगा। चुनाव ड्यूटी के दौरान पीठासीन अधिकारी के फोन पर न तो कोई काल आ सकेगी और न वे इससे कोई काल कर सकेंगे। आयोग पीठासीन अधिकारियों को मोबाइल डाटा के लिए 200 रुपये भी देगा। मतदान के दौरान जैसे ही मतदाता की फोटो ली जाएगी, एप तुरंत एआइ का इस्तेमाल कर जांच करेगा कि वह पहले कहीं और वोट तो नहीं डाल चुके है। इससे डुप्लीकेट वोटिंग पर पूरी तरह अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। इस पायलट प्रोजेक्ट का परीक्षण मंगलवार को शाहजहांपुर की नगर पंचायत कटरा व कुशीनगर की नगर पंचायत फाजिलनगर के अध्यक्ष पद के उपचुनाव में करीब 50 हजार मतदाताओं पर सफलतापूर्वक किया गया। अब इसे पंचायत चुनावों में 2.20 लाख पोलिंग बूथों पर व्यापक स्तर पर लागू करने की तैयारी है। वर्तमान में पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूची तैयार करने का कार्य चल रहा है। आयोग का दावा है कि इस नई तकनीक से चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनेगी, साथ ही फर्जी मतदान पर पूरी तरह लगाम लग सकेगी।

हरियाणा के पंचायत उप-चुनाव की मतदाता सूची में 9 मार्च तक दर्ज होगी आपत्ति

गुड़गांव. राज्य निर्वाचन आयोग हरियाणा द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार जिला में पंचायत उप-चुनाव 2026 के तहत मतदाता सूची तैयार की जा रही है। भविष्य में जिला की 11 पंचायतों तथा सोहना पंचायत समिति में एक वार्ड में उप-चुनाव करवाए जाने हैं। मतदाता सूची का ड्राफ्ट प्रकाशन 02 मार्च को किया जा चुका है। 09 मार्च तक दावे व आपत्तियां दर्ज कराई जा सकती हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी एवं डीसी अजय कुमार ने बताया कि पंचायती राज संस्थानों की वोटर लिस्ट तैयार करने के लिए एक समयबद्ध कार्यक्रम जारी किया गया है। 19 फरवरी से 28 तक वार्ड अनुसार वोटर लिस्ट का प्रारूप तैयार किया गया। इसके उपरांत 2 मार्च को प्रारूप वोटर लिस्ट का प्रकाशन किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रकाशित वोटर लिस्ट से सम्बंधित दावे और आपत्तियां 9 मार्च तक दर्ज की जाएगी, जिनका निपटारा 12 मार्च तक होगा। अपील दायर करने की अंतिम तारीख 16 मार्च है, और अपील का निपटारा 19 मार्च तक होगा। अंतिम वोटर लिस्ट 27 मार्च को प्रकाशित की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी, ताकि पंचायत चुनाव निष्पक्ष और सुचारू रूप से संपन्न हो सकें। निर्धारित समय तक अगर किसी ने अपनी आपत्ति तथा दावे दर्ज नहीं करवाए तो उसके बाद किसी भी प्रकार की सुनवाई नहीं की जाएगी।

राजस्थान BJP ने पंचायत चुनाव में जीत का बनाया फॉर्मूला

जयपुर. राजस्थान में 'गांव की सरकार' चुनने का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। प्रदेश की 14 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में होने वाले चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी बिसात बिछा दी है। बता दें कि सत्ता और संगठन ने मिलकर एक ऐसी 'सीक्रेट रणनीति' तैयार की है, जिसका मकसद न केवल जीत हासिल करना है, बल्कि विपक्ष के किलों को भी ढहाना है। अब बस इंतजार है तो राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा चुनावी तारीखों के औपचारिक एलान का। राठौड़, चतुर्वेदी और तिवाड़ी संभालेंगे मोर्चा बीजेपी ने इस बार पंचायत चुनावों की जिम्मेदारी अपने सबसे अनुभवी और रणनीतिकार नेताओं को सौंपी है। पार्टी ने जिला परिषद और पंचायत चुनाव समितियों के नाम फाइनल कर लिए हैं। सूत्रों के मुताबिक, इन प्रमुख नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। इन नेताओं ने ही परिसीमन और पुनर्गठन को लेकर पार्टी की सिफारिशें तैयार की हैं। ताकि चुनावों में बीजेपी को अधिकतम भौगोलिक और राजनीतिक लाभ मिल सके। राजेंद्र राठौड़ (पूर्व नेता प्रतिपक्ष): जमीनी राजनीति के माहिर खिलाड़ी। अरुण चतुर्वेदी (अध्यक्ष, राज्य वित्त आयोग): संगठन और सत्ता के बीच समन्वय के विशेषज्ञ। घनश्याम तिवाड़ी (राज्यसभा सांसद): नीतिगत और कानूनी बारीकियों के जानकार। CM भजनलाल शर्मा का 'संभाग प्लान' मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा खुद इन चुनावों की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने सभी संभागों के प्रमुख नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। इन बैठकों का एकमात्र एजेंडा पंचायत चुनाव 2026 था। मुख्यमंत्री का जोर इस बात पर है कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधा मतदान केंद्र तक पहुंचे। विस्तारकों ने टटोली जनता की नब्ज रणनीति बनाने से पहले बीजेपी ने हर विधानसभा स्तर पर 'विस्तारक' तैनात किए थे। इन विस्तारकों का काम केवल पार्टी के कार्यक्रम चलाना नहीं था, बल्कि जमीन पर जनता की नाराजगी और उम्मीदों को समझना था। विस्तारकों की ग्राउंड रिपोर्ट के आधार पर ही प्रत्याशियों के चयन और प्रचार के मुद्दों का खाका खींचा गया है। अगले महीने बज सकता है चुनावी बिगुल राज्य निर्वाचन आयोग ने फाइनल वोटर लिस्ट जारी कर दी है। इस बार 4.02 करोड़ से ज्यादा मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। प्रदेश की 41 जिला परिषदों, 457 पंचायत समितियों और 14,403 ग्राम पंचायतों में अगले महीने चुनाव होने की पूरी संभावना है। कार्यकाल का गणित: कब-कहां होंगे चुनाव? वर्तमान में 12 जिला परिषदों और 130 पंचायत समितियों का कार्यकाल अभी बाकी है, जो अलग-अलग चरणों में पूरा होगा। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि जैसे ही चुनाव आयोग कार्यक्रम जारी करेगा, वैसे ही प्रभारी और उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी जाएगी। 5 सितंबर तक: 6 जिला परिषद और 78 पंचायत समितियों का समय पूरा होगा। 29 अक्टूबर तक: 2 जिला परिषद और 22 पंचायत समितियों का कार्यकाल खत्म होगा। 22 दिसंबर तक: 4 जिला परिषद और 30 पंचायत समितियों का कार्यकाल पूरा होगा।

पंचायत चुनाव और मतदाता सूची का काम पूरा

जयपुर. राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कर दिया। चार करोड़ दो लाख बीस हजार 734 मतदाता मतदान कर सकेंगे।प्रदेश में 41 जिला परिषद, 457 पंचायत समिति और 14 हजार 403 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें से जिनके कार्यकाल खत्म हो चुके हैं, उनमें कोर्ट के निर्देशों के अनुसार संभवतः अगले महीने चुनाव कराए जा सकते हैं। आयोग ने 29 जनवरी को मतदाता सूची का प्रारूप जारी किया था। इसमें 3 करोड़ 96 लाख 47 हजार 166 मतदाता थे। वहीं, आपत्तियां और सुझाव आने के बाद उनका निपटारा करते हुए 13 लाख 66 हजार 435 नाम जोड़े गए हैं। जबकि 7 लाख 92 हजार 867 हटाए गए हैं। अब मतदाता सूची में कुल वृद्धि 5 लाख 73 हजार 568 मतदाताओं की हुई है। अंतिम मतदाता सूची में 4,02,20,734 वोटर हैं। इनमें 2,08,62,380 पुरुष, 1,93,58,147 महिला तथा 207 ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल हैं। बांसवाड़ा में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी बांसवाड़ा जिले में सर्वाधिक 4.55 तथा फलोदी जिले में 4.46 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, टोंक जिले में न्यूनतम 0.04 प्रतिशत एवं श्रीगंगानगर जिले में 0.19 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। 12 जिला परिषद और 130 पंचायत समितियों का कार्यकाल शेष आयोग के अनुसार, फिलहाल 41 में से 12 जिला परिषद और 457 पंचायत समितियों में से 130 का कार्यकाल शेष है। इनका कार्यकाल अलग-अलग समय पर दिसंबर 2026 तक पूरा होगा। 5 सितंबर तक 6 जिला परिषद और 78 पंचायत समितियों का कार्यकाल पूरा होगा। वहीं, 29 अक्टूबर तक 2 जिला परिषद और 22 पंचायत समितियां का कार्यकाल खत्म होगा। इसके बाद 22 दिसंबर तक 4 जिला परिषद और 30 पंचायत समितियों का कार्यकाल पूरा हो जाएगा। ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का बढ़ रहा इंतजार पंचायत-नगरीय निकाय चुनाव कराने से पहले वार्डों का आरक्षण तय करने के लिए ओबीसी आयोग की रिपोर्ट आना जरूरी है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही आरक्षण तय होगा, लेकिन आयोग की रिपोर्ट का इंतजार खत्म नहीं हो रहा। इससे चुनावों को लेकर वार्डों की आरक्षण प्रक्रिया रुकी हुई है।

निकाय और पंचायत आम चुनाव 2026 से पहले चुनाव मोड में आया प्रशासन

जयपुर. निकाय व पंचायती राज संस्थाओं के आम चुनाव-2026 से पहले प्रशासन ने ‘चुनावी मोड’ में कदम बढ़ा दिए हैं। निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए प्रदेशभर में पंचायत समिति विकास अधिकारियों (बीडीओ) के तबादलों का बड़ा फैसला लिया गया है। आदेश के अनुसार अब कोई भी बीडीओ अपनी गृह पंचायत समिति में पदस्थापित नहीं रहेगा। साथ ही जो अधिकारी पिछले चार वर्षों में तीन वर्ष से अधिक समय तक एक ही जिला, नगर पालिका या पंचायत समिति क्षेत्र में कार्यरत रहे हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से हटाया जाएगा। अतिरिक्त कार्यभार भी होगा समाप्त जिन अधिकारियों को लंबे समय से विकास अधिकारी के रिक्त पद का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है और वे तीन वर्ष से अधिक समय से एक ही क्षेत्र में कार्यरत हैं, उनका अतिरिक्त कार्यभार भी तुरंत हटाया जाएगा। विभाग का उद्देश्य है कि चुनाव के दौरान कोई भी अधिकारी अत्यधिक प्रभावशाली स्थिति में न रहे। जिला परिषद सीईओ पर जिम्मेदारी ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग ने सभी जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में पदस्थापित बीडीओ की सूची तैयार कर जांच करें। तीन दिन के भीतर अनुपालन रिपोर्ट अनिवार्य रूप से भेजनी होगी। रिपोर्ट में देरी होने पर संबंधित सीईओ की जिम्मेदारी तय की जाएगी। जयपुर ग्रामीण में दिखेगा असर पंचायत समिति बस्सी सहित जयपुर ग्रामीण क्षेत्र की बस्सी, चाकसू, जमवारामगढ़, तूंगा, आंधी और कोटखावदा पंचायत समितियों में वर्षों से जमे अधिकारियों पर इस आदेश का सीधा असर पड़ेगा। इनका कहना है… राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार यह कदम उठाया गया है। चुनाव निष्पक्ष व पारदर्शी ढंग से कराने के लिए निर्धारित अवधि से अधिक समय से एक ही स्थान पर तैनात अधिकारियों को हटाया जा रहा है। आदेशों की समयबद्ध पालना सुनिश्चित की जाएगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। – डॉ. जोगराम, शासन सचिव एवं आयुक्त, ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग