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राजस्थान में सूखे की मार, 23 जिलों की 80 तहसीलों में राहत के आदेश; 53 की हालत गंभीर

बालोतरा मानसून की बेरुखी, कम बारिश, गिरते भूजल स्तर और खरीफ फसलों को हुए नुकसान ने राजस्थान के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। राज्य सरकार के आपदा प्रबंधन, सहायता एवं नागरिक सुरक्षा विभाग की ओर से जारी 2 सूखा अधिसूचनाओं में प्रदेश के 80 तहसील क्षेत्रों को सूखाग्रस्त श्रेणी में शामिल किया गया है। जिनमें 53 गंभीर स्थिति में हैं। अधिसूचना के तहत प्रभावित क्षेत्रों में छह माह तक राजस्व वसूली पर रोक भी लगा दी गई है। मजेदार बात यह है कि अभी पंचायत चुनाव चल रहे हैं और तीन चरण और बाकी हैं। इन 80 तहसीलों में अभी चुनाव बाकी हैं ऐसे में राजस्व वसूली रोकने सहित कई प्रावधानों से मौजूदा भाजपा सरकार को चुनाव में फायदा मिल सकता है। अधिसूचनाओं में बाड़मेर की 10 और बालोतरा की 9 तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित की गई हैं। 23 जिलों की तहसीलें शामिल दोनों अधिसूचनाओं में 23 जिलों की 80 तहसीलें शामिल की गई हैं। पहली अधिसूचना में बाड़मेर और बालोतरा के अलावा जालोर की 9, जोधपुर की 7, डूंगरपुर की 7, जैसलमेर और फलोदी की 5-5, बांसवाड़ा की 3 तथा चूरू, पाली, सिरोही, ब्यावर और नागौर की एक-एक तहसील शामिल है। वहीं पाली की 7, बालोतरा की 6, जोधपुर की 5, जैसलमेर और फलोदी की 2-2 तथा चूरू, जालोर, बाड़मेर, ब्यावर और बीकानेर की एक-एक तहसील शामिल है। किसानों को मिलेगी राहत अधिसूचनाओं के तहत प्रभावित क्षेत्रों में छह माह तक निर्धारित राजस्व वसूली और संबंधित कार्यवाहियों पर रोक के प्रावधान से किसानों को राहत मिल सकती है। चारा डिपो व पेयजल की सुचारु आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। सुशील कुमार यादव, जिला कलक्टर, बालोतरा चुनाव के बीच नाराजगी दूर करने की कवायद प्रदेश में चल रहे पंचायत चुनावों के बीच उठाए गए इस कदम के चुनावी नफे से जोड़कर भी देखा जा रहा है। पहले चरण में बाड़मेर में जिला परिषद के 23 वार्ड व दस पंचायत समितियों में चुनाव हो चुके हैं। अगले चरण में बाड़मेर, बालोतरा, जैसलमेर सहित अन्य जिलों में भी चुनाव होने हैं। पंचायत चुनाव के आगामी चरणों में इन जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में राहत कार्यों का क्रियान्वयन महत्वपूर्ण रहेगा। पेयजल, चारा, फसल खराबे और आर्थिक सहायता से जुड़े मुद्दों पर प्रभावी कार्रवाई ग्रामीणों की नाराजगी दूर करने और सरकार के प्रति भरोसा कायम करने का प्रयास हो सकती है।

राजस्थान पंचायत चुनाव का बिगुल बजा, 3314 पंचायतों में 22 अक्टूबर को होगा मतदान

जयपुर  राजस्थान में आज अधिसूचना जारी होने के साथ ग्रामीण सरकार के सियासी हलचल बढ़ जाएगी। गुरुवार यानी आज से जहां 16 जिला परिषद, 104 पंचायत समिति व 3314 ग्राम पंचायतों में चुनाव की अधिसूचना जारी हो जाएगी, वहीं 16 जिला परिषदों व 104 पंचायत समितियों में सदस्यों के नामांकन की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। पहले चरण में ही 3314 ग्राम पंचायतों में पंच-सरपंच के चुनाव भी हैं, जिनके लिए नामांकन प्रक्रिया मतदान से एक दिन पहले 23 अक्टूबर को पूरी होगी। राजस्थान में लगभग आधी 6940 ग्राम पंचायतों को पंच, सरपंच व उपसरपंच इसी माह मिल जाएंगे। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार पहले चरण की 3314 ग्राम पंचायतों में 25 एवं दूसरे चरण की 3626 ग्राम पंचायतों में 31 अक्टूबर को चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। शेष दो चरणों के चुनाव अगले माह होंगे। मतदान दलों को नहीं लाने पडेंगे गद़्दे-तकिया, पांच दिन रुकेंगे मतदानकर्मी राज्य निर्वाचन आयोग ने इस बार मतदान दलों की सुविधाओं का भी पूरा ध्यान रखा है। इस बार में सुरक्षाकर्मियों सहित मतदान दल में शामिल कर्मचारियों को अपने साथ बिस्तर नहीं ले जाने पडेंगे, उनके लिए गद्दे-चद्दर-तकिया की व्यवस्था के लिए आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों को व्यवस्था सौंप दी है। इसके अलावा छाया-पानी व रोशनी की व्यवस्था के लिए भी पहले से ही दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं, जिससे मतदाताओं व चुनाव कर्मियों को परेशानी का सामना नहीं करना पडेगा। मतदान कर्मी करीब पांच दिन रुकेंगे, इसको देखते हुए उनके लिए कुक व हेल्पर की व्यवस्था भी जिला निर्वाचन अधिकारी करेंगे। इसका खर्च मतदानकर्मी स्वयं वहन करेंगे, जिसके लिए राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से प्रत्येक मतदानकर्मी को 2200 से 3450 रुपए तक भुगतान किया जाएगा। प्रत्येक मतदान केंद्र पर 17650 रुपए खर्च राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से प्रत्येक दल को पांच दिन में होने वाले खर्च के रूप में 17650 रुपए दिए जाएंगे। इस दल में सहायक मतदान अधिकारी से रिटर्निंग अधिकारी तक कुल 6 कर्मचारी शामिल होंगे, जिनको प्रतिदिन के हिसाब से कुल 2550 रुपए मिलेंगे। शांतिपूर्ण मतदान के लिए 10 बड़े प्रतिबंधात्मक आदेश लागू राजस्थान में पंचायती चुनाव को लेकर प्रशासन भी एक्शन मोड में है। निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान के लिए 10 बड़े प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए गए हैं। सरकारी कर्मचारियों के अवकाश और बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने पर रोक रहेगी। रात 10 से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर प्रतिबंधित रहेगा। प्रचार वाहन, सभा और जुलूस के लिए अनुमति जरूरी होगी। BNSS की धारा 163 के तहत हथियारों के प्रदर्शन पर रोक रहेगी। सरपंच प्रत्याशियों को सीमित प्रचार समय मिलेगा और विजय जुलूस नहीं निकलेगा। सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट पर कार्रवाई होगी। मतदान केंद्र के 200 मीटर दायरे में मोबाइल प्रतिबंधित रहेगा। मतदान से 48 घंटे पहले और मतगणना के दिन ड्राई डे रहेगा।

राजस्थान पंचायत चुनाव में बड़ा आरक्षण अपडेट, 1.30 लाख वार्ड पंच सीटों की तस्वीर साफ

जयपुर आरक्षण लॉटरी के बाद अब ग्राम पंचायतों में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे दावेदारों की नजर अपने-अपने गांव की सीट पर है। सरपंच के कुल 14,403 पदों में से 3,058 पद अनुसूचित जनजाति (ST), 2,493 पद अनुसूचित जाति (SC) और 1,961 पद अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षित किए गए हैं। राजस्थान में पंचायत चुनाव को लेकर गुरुवार को बड़ा अपडेट सामने आया। प्रदेश की 14,403 ग्राम पंचायतों में सरपंच पदों के लिए आरक्षण की लॉटरी निकाली गई। इसके साथ ही प्रदेशभर में हजारों गांवों की चुनावी तस्वीर साफ हो गई है। उपखंड मुख्यालयों पर हुई लॉटरी में सरपंच के 14,403 और वार्ड पंच के 1,30,584 पदों के लिए आरक्षण तय किया गया। खास बात यह है कि प्रदेश में करीब 7,200 महिला सरपंच और करीब 65 हजार महिला वार्ड पंच चुनी जाएंगी। सरपंच के 14 हजार से ज्यादा पदों का आरक्षण तय आरक्षण लॉटरी के बाद अब ग्राम पंचायतों में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे दावेदारों की नजर अपने-अपने गांव की सीट पर है। सरपंच के कुल 14,403 पदों में से 3,058 पद अनुसूचित जनजाति (ST), 2,493 पद अनुसूचित जाति (SC) और 1,961 पद अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षित किए गए हैं। महिला आरक्षण के चलते बड़ी संख्या में गांवों की कमान इस बार महिलाओं के हाथ में जाएगी। करीब 7,200 पद महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे। ऐसे में कई गांवों में लंबे समय से चुनाव की तैयारी कर रहे पुरुष दावेदारों की उम्मीदों पर भी आरक्षण लॉटरी ने असर डाला है। वार्ड पंचों में भी हजारों सीटें महिलाओं के लिए सरपंचों के साथ-साथ 1,30,584 वार्ड पंच पदों के लिए भी आरक्षण तय कर दिया गया है। इनमें 21,962 वार्ड SC, 19,117 वार्ड ST और करीब 15 हजार वार्ड OBC के लिए आरक्षित किए गए हैं। वहीं, कुल आरक्षण व्यवस्था के तहत करीब 65 हजार महिला वार्ड पंच भी चुनी जाएंगी। यानी पंचायत चुनाव में इस बार महिलाओं की भागीदारी बड़े स्तर पर दिखाई देगी। 4 जिलों में बड़ा उलटफेर, सभी सरपंच सीट ST के लिए आरक्षण लॉटरी में सबसे ज्यादा चर्चा बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर जिलों की हो रही है। इन चार जिलों में सरपंच के सभी 1,253 पद ST वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं। आंकड़ों के मुताबिक बांसवाड़ा में 327, डूंगरपुर में 442, प्रतापगढ़ में 277 और सलूंबर में 207 सरपंच पद हैं। इन सभी पदों पर ST वर्ग के उम्मीदवार ही चुनाव लड़ सकेंगे। इन जिलों में आरक्षण का सीधा असर उन दावेदारों पर पड़ेगा जो लंबे समय से सरपंच चुनाव की तैयारी कर रहे थे। अब टिकट और चुनावी रणनीति भी आरक्षण के हिसाब से तय होगी। बाड़मेर में दोबारा निकली लॉटरी, क्यों मचा विवाद? इधर बाड़मेर पंचायत समिति में सरपंच पदों की आरक्षण लॉटरी के दौरान विवाद खड़ा हो गया। लॉटरी में कपूरड़ी ग्राम पंचायत को SC वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया गया था। इस पर जनप्रतिनिधियों ने आपत्ति दर्ज कराई। आपत्ति करने वालों का कहना था कि ग्राम पंचायत में SC वर्ग की आबादी नहीं है। मामला सामने आने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने पूरी पंचायत समिति की आरक्षण लॉटरी दोबारा निकालने के आदेश दिए। इससे बाड़मेर की पंचायत समिति में कई सीटों का आरक्षण बदलने की संभावना बन गई है। अब चुनाव की तारीखों का इंतजार सरपंच और पंच के साथ-साथ प्रधान, जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्यों के आरक्षण का पूरा ब्योरा राज्य निर्वाचन आयोग को भेजा जाएगा। आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब चुनाव कार्यक्रम की घोषणा का इंतजार है। संभावना जताई जा रही है कि शनिवार या सोमवार तक राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत चुनाव की घोषणा कर सकता है। इसके बाद अक्टूबर के पहले सप्ताह से चुनाव की अधिसूचना जारी होने और नामांकन प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार पंचायत चुनाव की पूरी प्रक्रिया 15 नवंबर तक पूरी करनी है। ऐसे में आरक्षण लॉटरी के बाद अब राजस्थान के गांवों में चुनावी सरगर्मी तेज होना तय माना जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि किस गांव की कमान महिला के हाथ जाएगी और किस सीट पर कौन सा वर्ग मैदान में उतरेगा?

धनबाद में पंचायत चुनाव को लेकर बड़ी अपडेट, 2,939 मतदान केंद्रों में 27 जर्जर

धनबाद झारखंड में अप्रैल-मई 2027 में त्रिस्तरीय पंचायत संभावित है। इसको लेकर प्रशासनिक तैयारियां चल रही हैं। चुनाव और पंचायतों से संबंधित विभिन्न रिपोर्ट समय-समय पर राज्य निर्वाचन आयोग को भेजी जा रही है। इस कड़ी में धनबाद जिला की पंचायतों, मतदाताओं और मतदान केंद्रों से संबंधित रिपोर्ट व सूची प्रकाशित की गई है। जिसके अनुसार जिले के नौ प्रखंडों के 242 पंचायतों में 10,61,604 मतदाता मतदान करेंगे। जबकि 2939 मतदान केंद्रों में से 27 मतदान केंद्र जर्जर हैं या फिर इन्हें स्थानांतरित करने अथवा इनके मरम्मति की आवश्यकता है। जर्जर मतदान केंद्रों की स्थानांतरित करने की जरूरत जिले के ग्रामीण इलाकों में स्थित इन मतदान केंद्रों में से 27 की हालत खराब है। ये अत्यंत जर्जर हो चुके हैं या फिर इनकी मरम्मति की जरूरत है। ऐसे मतदान केंद्रों में बलियापुर प्रखंड के मुकुंदा पंचायत का बीसीसीएल बिजली घर गोल्डेन पहाली पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है। जिसे करमाटांड शिफ्ट किया गया है। जबकि आंगनबाड़ी केंद्र ब्राम्हण टोला का मतदान केंद्र के निजी भवन में संचालित हैं। इसे करमाटांड शिफ्ट करने का प्रस्ताव है। पूर्वी टुंडी के चार केंद्रों जर्जर पूर्वी टुंडी प्रखंड के महोलीडीह पंचायत के आंगनबाड़ी केंद्र का मतदान भवन ध्वस्त हो चुका है। जबकि सामुदायिक भवन पंडुआ पूरी तरह से जर्जर है। रूपन में पुराना पंचायत भवन फुलपहाड़ी की हालत खस्ता है। वहीं लटानी और पांड्राबेजरा पंचायत के मतदान केंद्र प्राथमिक विद्यालय शंकरडीह में था। इस स्कूल को उत्क्रमित विद्यालय रघुनाथपुर में मर्ज कर दिया गया है। इसी प्रकार से प्राथमिक विद्यालय डुमरजोर को मध्य विद्यालय पोलकेरा में मिला दिया गया है। इनके जगह पर नए भवन को चिन्हित करना होगा। पूर्वी टुंडी की तरह ही कलियासोल प्रखंड का जमाकुदर, ऐलाकेंद्र, सालुकचपड़ा और कलियासोल पंचायत में सामुदायिक भवन फतेहपुर, मध्य विद्यालय कुशियारा, चासपाड़ा पुराना पंचायत भवन, प्राथमिक विद्यालय कालुबथान पूर्व और पश्चिम अत्यंत जर्जर हैं। एग्यारकुंड में 14 मतदान केंद्रों की हालत खराब एग्यारकुंड प्रखंड में सबसे अधिक 14 मतदान केंद्रों की हालत खराब है। चांच में एनपीएस डुमरीजोड भूधंसान की चपेट में आ चुका है। प्राथमिक विद्यालय हरिजन स्कूल बंद हो गया है। इन दोनों को पीएस बुटबाड़ी और सामुदायिक भवन पंचायत उपसचिवालय में भेजने का प्रस्ताव दिया गया है। वहीं जोगरात पंचायत में पीएस जूनकूदर का कमरा नंबर एक व दो की स्थिति खराब है। गोपीनाथपुर में सामुदायिक भवन आदिवासी टोला, एग्यारकुंड उत्तर में जामबानी लोहिया भवन, शिवलीबाड़ी दक्षिण में सामुदायिक भवन गड़ियाखान और गोपालपुर में पुराना पंचायत भवन व सामुदायिक भवन राजापुर के मरम्मत की जरूरत बताई गई है। वहीं कालीपहाड़ी दक्षिण पंचायत में प्राथमिक विद्यालय डीवीसी रांची कालोनी का मतदान केंद्र संख्या 46 से 51 तक जर्जर है। भौगोलिक रूप से नहीं बदलेंगी पंचायतें, दावा आपत्ति की मांग अब यह भी साफ हो गया है कि आने वाले पंचायत चुनाव में इनके भौगोलिक स्वरूप में किसी भी प्रकार का कोई परिवर्तन नहीं होगा। निर्वाचन आयोग से मांगी गई जानकारी पर धनबाद उपायुक्त ने जो रिपोर्ट भेजी है। उसमें बताया गया है कि पंचायत की सीमाओं को ही आधार बनाया गया है। जिला निर्वाचन कार्यालय की ओर से वोटर लिस्ट और मतदान केंद्रों को लेकर सूची भी जारी कर दिया गया है। जिस पर दावा आपत्ति की मांग किया गया है। बाघमारा में अधिक पंचायतें जिले के बाघमारा प्रखंड में सबसे अधिक 62 पंचायतें हैं और यहां मतदाताओं की भी संख्या सर्वाधिक 2,45,812 है। यहां सबसे अधिक 668 मतदान केंद्र भी हैं। जबकि सबसे कम केवल नौ पंचायतों वाला प्रखंड पूर्वी टुंडी है। यहां कुल मतदाता 39,229 हैं और मतदान केंद्र 112 हैं। प्रखंड – पंचायतें – मतदान केंद्र – कुल मतदाता बाघमारा – 62 – 668 – 2,45,812 बलियापुर – 23 – 283 – 99,844 धनबाद – 12 – 118 – 44,523 एग्यारकुंड – 23 – 231 – 90,735 गोविंदपुर – 39 – 479 – 1,77,966 कलियासोल – 20 – 226 – 79,115 निरसा – 27 – 293 – 1,08,611 पूर्वी टुंडी – 09 – 112 – 39,229 तोपचांची – 27 – 326 – 1,06,564 टुंडी – 17 – 203 – 69,205  

हाईकोर्ट की 31 जुलाई समयसीमा पर संकट, राजस्थान में चुनाव टलने के संकेत तेज

जयपुर  राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव तय समय पर कराना अब संभव नहीं लग रहा। राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से 31 जुलाई तक चुनाव कराने की समय-सीमा में अब सिर्फ 25 दिन बाकी है, लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग ने सरकार को साफ बता दिया है कि आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी चुनाव कराने के लिए कम से कम 90 दिन चाहिए। यानी, कोर्ट की मौजूदा समय-सीमा में चुनाव कराना लगभग असंभव है। दिलचस्प यह भी है कि इससे पहले राजस्थान हाईकोर्ट के 15 अप्रैल तक चुनाव कराने के आदेश का भी पालन नहीं हो पाया था और अब दूसरी बार अदालत की तय समय-सीमा पर संकट खड़ा हो गया है। हालांकि, कांग्रेस विधायक संयम लोढ़ा की अवमानना याचिका के बाद सरकार और आयोग दोनों सक्रिय हो गए हैं और हाईकोर्ट से समय-सीमा बढ़ाने की रणनीति पर मंथन शुरू हो गया है। 14 अगस्त तक ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का इंतजारः पंचायती राज विभाग ने निर्वाचन आयोग को बताया है कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग अपनी आरक्षण संबंधी रिपोर्ट 14 अगस्त तक सौंप सकता है। इसके बाद विभाग 31 अगस्त तक सभी वर्गों का आरक्षण तय करने की तैयारी में है। आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम जारी करेगा। दो चरण में निकाय, चार चरण में पंचायत चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायती राज विभाग और स्वायत्त शासन विभाग को भेजे पत्र में स्पष्ट किया है कि आरक्षण निर्धारण पूरा होने के बाद ही चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जा सकेगा। आयोग के अनुसार पंचायत चुनाव में करीब 50 दिन और नगरीय निकाय चुनाव में 40 दिन लगेंगे। नगरीय निकाय चुनाव 2 चरणों में और पंचायत चुनाव 4 चरणों में कराए जाएंगे। आयोग का तर्क है कि नई पंचायत समितियों, ग्राम पंचायतों और वार्डों की संख्या बढ़ने से चुनावी प्रबंधन पहले की तुलना में अधिक जटिल हो गया है। पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि 31 जुलाई की समय-सीमा का पालन व्यावहारिक रूप से संभव नहीं दिख रहा। ऐसे में हाईकोर्ट में समय सीमा बढ़ाने के लिए आवेदन करने की जरूरत है। मंगलवार को स्वायत्त शासन विभाग और विधि विभाग के अधिकारियों ने इसी मुद्दे पर बैठक कर अदालत में सरकार का पक्ष रखने की रणनीति पर चर्चा की।

प्रधानों की नियुक्ति बनाम अदालत का सवाल: पंचायत व्यवस्था पर असमंजस गहराया

जौनपुर ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के सरकार के निर्णय पर उच्च न्यायालय इलाहाबाद की शुक्रवार को आई सख्त टिप्पणी के बाद प्रधानों और पंचायत प्रतिनिधियों की धड़कन बढ़ गई हैं। अदालत ने इस व्यवस्था को असंवैधानिक बताते हुए सरकार से चुनाव की स्पष्ट समय सीमा पूछे जाने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या सरकार ने यह निर्णय पर्याप्त कानूनी और संवैधानिक विचार-विमर्श के बाद लिया था। यदि सरकार का फैसला न्यायिक कसौटी पर नहीं टिक पाया तो पंचायतों में चल रहे विकास कार्यों, नई योजनाओं की स्वीकृति और प्रशासनिक निर्णयों पर क्या असर पड़ेगा, इसे लेकर भी असमंजस की स्थिति है। अब सबकी नजर 13 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी है। बहरहाल इस मुद्दे पर जब प्रधानों से उनकी राय ली गई तो अलग-अलग मत सामने आए।     सरकार का निर्णय बिल्कुल ठीक था। प्रशासन को प्रशासक बनाए जाने के बाद उनकी जिम्मेदारी जनता के प्रति नहीं होती। हमारी समझ से जब तक सरकार पूरी चुनावी तैयारी नहीं कर लेती है, चुनाव का कोई औचित्य नहीं है। -विजय सिंह, प्रधान गैरवाह।     यह सरकार और कोर्ट के बीच गतिरोध में प्रधान व आम जनता परेशान है। अब इसे सरकार की तय करे कि उसे करना क्या है। हम चुनाव के लिए तब भी तैयार थे और अब भी हैं। -राम प्रकाश दुबे, अध्यक्ष प्रधान संघ, सुइथाकलां।     सरकार के समक्ष व्यावहारिक कठिनाई थी जिसके चलते यह निर्णय लेना पड़ा। सरकार ने जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए वर्तमान प्रधानों को ही प्रशासक बनाया। अब कोर्ट के निर्णय पर कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती है। -बलराम बिंद, प्रधान, ईशापुर।     पिछड़ा वर्ग आरक्षण तय न होने से सरकार को मजबूरी में यह कदम उठाना पड़ा, जो जनता के हित मे था। अब कोर्ट का क्या रुख है और उस पर सरकार क्या निर्णय लेती है इसे देखना होगा। -राम सकल वर्मा, प्रधान, सारी जहांगीर पट्टी।     सरकार का निर्णय आम जनता के हित में था। विकास कार्यों की गति प्रभावित न हो इसलिए सरकार द्वारा प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त किया गया, रही बात कोर्ट की तो उसका जवाब सरकार ही दे सकती है। -राजन यादव, प्रधान, समसुद्दीनपुर।  

गोंडा में वोटर लिस्ट शिकायतों पर कार्रवाई, दोहरे और मृतक मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया शुरू

लखनऊ उत्तर पंचायत चुनाव वोटर लिस्ट-2026 के अंतिम प्रकाशन के बाद गोंडा जिले में बड़ी संख्या में शिकायतें सामने आने पर डीएम प्रियंका निरंजन ने संज्ञान लिया है। डीएम ने सभी उपजिलाधिकारियों और तहसीलदारों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने कहा है कि हर शिकायत का गंभीरता से निस्तारण कर त्रुटिरहित मतदाता सूची तैयार की जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से पुनरीक्षण कार्यक्रम 2025-26 के तहत 10 जून को पंचायत मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया गया था। इसके बाद दोहरे नाम, मृतक मतदाताओं के नाम, विवाह के बाद दूसरी जगह रहने वाली महिलाओं के नाम और अन्य ग्राम पंचायतों के मतदाताओं के नाम सूची में शामिल होने की शिकायतें बड़ी संख्या में मिली हैं। डीएम ने निर्देश दिया है कि नए नाम जोड़ने के लिए निर्धारित आवेदन पत्र के साथ दावा प्रपत्र-2 और विधानसभा मतदाता सूची की एस-10, ए-10, आर-0 की प्रति अनिवार्य रूप से ली जाए। जिन पात्र व्यक्तियों के नाम विधानसभा मतदाता सूची में दर्ज हैं, उन्हें पंचायत मतदाता सूची में शामिल किया जाए। वहीं, दोहरे, मृतक, विवाहित और अन्य ग्राम पंचायतों के नाम हटाने के लिए प्रपत्र-4 पर आवेदन लिया जाएगा। सुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नाम हटाए जाएंगे। डीएम ने कहा कि सभी शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण कर शुद्ध और त्रुटिरहित मतदाता सूची तैयार की जाए। किसी भी प्रकार की उदासीनता या शिथिलता मिलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 2.03 करोड़ के नाम सूची से काटे गए आपको बता दें कि राज्य निर्वाचन आयोग ने 10 जून को बहुप्रतिक्षित त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी। इसमें कुल 12.58 करोड़ मतदाता हैं। पुनरीक्षण में 29 लाख के नाम बढ़े हैं और 2.03 करोड़ के नाम सूची से काटे गए हैं। जौनपुर में सबसे ज्यादा 36.97 लाख और गौतमबुद्धनगर में सबसे कम 2.09 लाख मतदाता हैं। पहली बार सभी मतदाताओं के स्टेट वोटर नंबर (एसवीएन) जारी किए गए हैं। चुनाव में फेस रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) की मदद से फर्जी वोटिंग रोकी जाएगी। राज्य निर्वाचन आयुक्त राज प्रताप सिंह ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की अंतिम मतदाता सूची जारी की। वर्ष 2021 की मतदाता सूची में 12.29 करोड़ मतदाताओं के नाम शामिल थे। वर्ष 2025-26 की मतदाता सूची में 12.58 करोड़ मतदाता हैं। नई मतदाता सूची में कुल 2.32 करोड़ मतदाताओं के नाम जोड़े गए हैं। मृतक व स्थानांतरित इत्यादि 2.03 करोड़ मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। ऐसे में 29.01 लाख वोटरों के नाम मतदाता सूची में बढ़े हैं। जौनपुर में सबसे अधिक 36.97 लाख वोटर जौनपुर में सबसे अधिक 36.97 लाख, दूसरे नंबर पर आजमगढ़ में 35.76 लाख व तीसरे नंबर पर प्रयागराज में 34.95 लाख मतदाता हैं। सबसे कम गौतमबुद्धनगर में 2.09 लाख मतदाता हैं। सबसे कम मतदाता वाले जिलों में दूसरे नंबर पर महोबा में 5.88 लाख व तीसरे नंबर पर चित्रकूट में 7 लाख मतदाता हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने 23 दिसंबर 2025 को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की थी, इसमें कुल 12.69 करोड़ मतदाता शामिल थे। इसके बाद मतदाताओं को दावे व आपत्तियों का समय दिया गया और अंतिम मतदाता सूची जारी की गई। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन सभी जिलों में जिला निर्वाचन अधिकारियों द्वारा किया गया है।

पंचायत चुनाव की तैयारियों को झटका, आरक्षण रोस्टर पर फैसला लंबित; 15 जून तक आएंगे निर्देश

पटना. बिहार पंचायत चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं, लेकिन आरक्षण रोस्टर जारी नहीं होने से संभावित उम्मीदवारों और आम लोगों के बीच अभी भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है. पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे लोग लगातार आरक्षण सूची का इंतजार कर रहे हैं. इसी बीच विभागीय सूत्रों से बड़ी जानकारी सामने आई है कि 15 जून तक पंचायत चुनाव को लेकर आरक्षण गाइडलाइन जारी की जा सकती है. प्रखंड से जिला स्तर तक तेज हुई चुनावी तैयारी पंचायत चुनाव को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं. विभाग द्वारा प्रखंड, अनुमंडल और जिला स्तर पर आवश्यक प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा किया जा रहा है. वहीं, ईवीएम मशीनों के सुरक्षित रख-रखाव के लिए स्टोर की व्यवस्था को लेकर भी जगहों का चयन किया जा रहा है. 2006 और 2016 के आरक्षण रोस्टर का हो रहा अध्ययन विभागीय जानकारी के अनुसार वर्ष 2006 और 2016 के पंचायत आरक्षण रोस्टर को राज्य निर्वाचन आयोग के पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है. वर्ष 2016 का रोस्टर 2011 की जनगणना के आधार पर तैयार किया गया था, जबकि 2006 का रोस्टर जनगणना से पहले का है. अब दोनों रोस्टर का तुलनात्मक अध्ययन कर नया पंचायत आरक्षण रोस्टर तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है. 15 जून तक हो सकती है बड़ी घोषणा सूत्रों की मानें तो राज्य स्तर से 15 जून तक आरक्षण संबंधी गाइडलाइन जारी होने की संभावना है. गाइडलाइन जारी होने के बाद सभी प्रखंडों से आरक्षण सूची मांगी जाएगी. इसके बाद जिला प्रशासन सूची को अंतिम रूप देकर राज्य निर्वाचन आयोग को भेजेगा. आयोग की स्वीकृति मिलने के बाद ही पंचायतों के लिए आरक्षण सूची आधिकारिक रूप से लागू होगी और उसी आधार पर चुनाव कराया जाएगा. दावा-आपत्ति की प्रक्रिया लगभग पूरी चुनावी तैयारियों के तहत दावा-आपत्ति के निपटारे का काम भी लगभग पूरा कर लिया गया है. प्रशासन का दावा है कि आरक्षण प्रक्रिया को जल्द अंतिम रूप देकर चुनाव संबंधी आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी. महाराजगंज प्रखंड की 16 पंचायतों में होगा चुनाव महाराजगंज प्रखंड की 16 पंचायतों में मुखिया, पंचायत समिति सदस्य, वार्ड सदस्य और जिला परिषद सदस्य पदों के लिए चुनाव कराया जाना है. चुनावी सरगर्मी के बीच संभावित प्रत्याशी अपने-अपने क्षेत्र में सक्रिय हो गए हैं, लेकिन आरक्षण स्पष्ट नहीं होने से अंतिम रणनीति तय नहीं कर पा रहे हैं. क्या बोले बीडीओ? महाराजगंज प्रखंड के बीडीओ बिंदु कुमार ने बताया कि प्रखंड की सभी 16 पंचायतों के लिए वर्ष 2006 और 2016 के आरक्षण रोस्टर को पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है. आगे की कार्रवाई राज्य स्तर से जारी होने वाली गाइडलाइन के अनुसार की जाएगी. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आरक्षण गाइडलाइन और रोस्टर जारी होते ही पंचायत चुनाव की तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी. इसके बाद संभावित उम्मीदवार खुलकर चुनावी मैदान में उतरेंगे और गांवों में चुनावी गतिविधियां तेज हो जाएंगी.

हाई कोर्ट की राज्य सरकार से जवाब-तलब, पंचायत चुनाव पर OBC आयोग की रिपोर्ट पेश करने के निर्देश

 लखनऊ  पंचायत चुनाव और वर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किए जाने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से महत्वपूर्ण जानकारी तलब की है।अदालत ने पंचायत चुनावों से संबंधित पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश राज्य सरकार को दिया है। साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग से संभावित चुनाव कार्यक्रम के बारे में स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति एके चौधरी की अवकाशकालीन पीठ ने स्थानीय अधिवक्ता ओम प्रकाश प्रजापति की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी। याचिका में राज्य सरकार के 25 मई के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत वर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम की धारा-12 के अनुसार ग्राम प्रधान का कार्यकाल शपथ ग्रहण की तिथि से केवल पांच वर्ष का होता है। इसके बावजूद समय पर पंचायत चुनाव न कराकर मौजूदा प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त कर दिया गया, जिससे उनका कार्यकाल अनिश्चितकाल तक बढ़ गया है। यह व्यवस्था कानून के विपरीत है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि यदि किसी कारण से समय पर पंचायत चुनाव नहीं कराए जा सकते, तो पूर्व व्यवस्था के अनुसार एडीओ पंचायत या किसी अन्य सरकारी अधिकारी को प्रशासक नियुक्त किया जाए। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने चुनाव तैयारियों और आरक्षण प्रक्रिया की स्थिति जानने के लिए ओबीसी आयोग की रिपोर्ट तलब की तथा निर्वाचन आयोग से संभावित चुनाव कार्यक्रम पर स्पष्ट जवाब मांगा है।

यूपी पंचायत चुनाव मामला: ग्राम प्रधानों की नियुक्ति पर हाईकोर्ट सख्त, ओबीसी रिपोर्ट पेश करने के निर्देश

इलाहाबाद इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में ग्राम प्रधानों को प्रदेश में पंचायत चुनाव होने और नए प्रधान चुने जाने तक प्रशासक नियुक्त करने संबधी राज्य सरकार के आदेश को चुनौती दी गई। ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के मामले में बुधवार हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में सुनवाई हुई। याची अमरेंद्र नाथ ने बताया कि सुनवाई के दौरान सरकार से सवाल किया कि उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव कब कराए जाएंगे। कोर्ट ने राज्य सरकार से उत्तर पनिर्वाचन आयोग को आदेश दिया कि अगली सुनवाई 10 जुलाई तक पंचायत चुनाव कराए जाने की संभावित डेट बताएं। इसके साथ ही सुनवाई के दौरान ओबीसी आयोग की रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर बी सराफ व न्यायमूर्ति एके चौधरी की अवकाशकालीन पीठ ने स्थानीय अधिवक्ता ओम प्रकाश प्रजापति की ओर से दाखिल याचिका पर पारित किया है। याचिका में ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने संबधी राज्य सरकार के 25 मई के आदेश को चुनौती दी गई है। कहा गया है कि उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम की धारा 12 के तहत प्रधानों का कार्यकाल उनके शपथ लेने के पश्चात से सिर्फ पांच वर्ष का ही हो सकता है। सरकार ने समय पर पंचायत चुनाव न करा के मौजूदा प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त कर दिया। इस प्रकार से उनका कार्यकाल अनिश्चितकाल तक के लिए बढ़ा दिया गया है जो कि विधि विरूद्ध है। याचिका में मांग की गई कि पूर्व व्यवस्था के तहत यदि पंचायत चुनाव समय पर नहीं हो पा रहे तो एडीओ पंचायत या किसी अन्य अधिकारी को प्रशासक नियुक्त किया जाय। प्रधानों ने प्रशासक के रूप में 27 मई से काम संभाला है यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव न हो पाने पर पहली बार 57694 निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक की जिम्मेदारी दिए जाने के बाद अब उनके काम के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिया गया है। प्रशासक की जिम्मेदारी संभालने के बाद अब नए काम वो डीएम की अनुमति से ही करा सकेंगे। ग्राम पंचायतों के निवर्तमान प्रधानों ने प्रशासक के रूप में 27 मई से काम संभाला है। ऐसे में अब इस तिथि से वह कोई भी नया काम कराने के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से डीएम को प्रस्ताव भेजेंगे। फिर डीएम की अनुमति से ही वह कोई नया काम करा सकेंगे। सिर्फ ग्राम पंचायतों के प्रशासक नियुक्त किए जाने से पूर्व की तिथि से स्वीकृत व अनुमोदित दैनिक, निर्माणाधीन, मरम्मत कार्य और पूर्ण हो चुके कामों का भौतिक व तकनीकी मूल्यांकन कराते हुए भुगतान प्रशासक पूर्व की भांति कर सकेंगे।