samacharsecretary.com

एलन मस्क सुलह के मूड में? स्टारलिंक विवाद के बीच रिलायंस की सराहना

मुंबई  भारत में स्टारलिंक की एंट्री को लेकर चल रहा विवाद अब नरम पड़ता दिख रहा है. स्टारलिंक विवाद पर एलन मस्क अब सुलह के मूड में नजर आ रहे हैं. जी हां, एलन मस्क ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के बयान पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है. रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) ने शुक्रवार को एक बयान जारी किया था. इस बयान में कंपनी ने भारत के सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में स्टारलिंक का स्वागत किया था. अब उस बयान पर एलन मस्क का जवाब आ गया है. एलन मस्क ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के बयान को खूब सराहा है. इससे स्टारलिंक विवाद पर एलन मस्क के तेवर नरम पड़ने के संकेत मिल रहे हैं।  दरअसल, रिलायंस इंडस्ट्रीज ने शुक्रवार को एक बयान जारी किया था. इस बयान में कंपनी ने कहा था कि उसे प्रतिस्पर्धा से कभी डर नहीं लगा. कंपनी ने कहा कि सैटेलाइट कम्युनिकेशन के क्षेत्र में स्टारलिंक समेत सभी कंपनियों का स्वागत है. हालांकि, भारत में कारोबार करने वाली हर कंपनी को देश के कानूनों और नीतियों का पालन करना होगा. इस बयान पर ही एलन मस्क ने एक्स पर जवाब दिया. एलन मस्क ने बयान को सराहनीय बताया और लिखा- मच अप्रिशिएटेड यानी बहुत सराहनीय।  रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपने बयान में क्या-क्या कहा था? रिलायंस इंडस्ट्रीज ने स्टारलिंक विवाद पर बयान में एलन मस्क के आरोपों का जवाब दिया था. रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) ने कहा, ‘हम सैटेलाइट कम्युनिकेशन क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा का स्वागत करते हैं, जिसमें स्टारलिंक भी शामिल है. जियो सहित हर कंपनी को भारत के लोगों की सेवा करनी है और देश के कानूनों तथा नीतियों का पालन करना है।      रिलायंस ने अपने बयान में कहा, ‘हाल के दिनों में रिलायंस और भारतीय बाजार को लेकर की गई टिप्पणियों के मद्देनजर हम तथ्यों को स्पष्ट करना चाहते हैं. हर भारतीय कंपनी की तरह रिलायंस भी ऐसे भारत में विकसित हुआ है, जो निवेश और नवाचार का स्वागत करता है, चाहे वह देश में विकसित हो या विदेश से आए, बशर्ते उससे लोगों के जीवन में सुधार हो।      कंपनी ने आगे कहा कि यह खुलापन कानून के शासन पर आधारित है. रिलायंस ने कहा, ‘भारत सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि वह भारतीय और विदेशी, सभी आवेदकों के लिए समान प्रक्रिया अपनाती है. जियो की अपनी सैटेलाइट सेवाएं भी अभी विभिन्न मंजूरियों का इंतजार कर रही हैं।      रिलायंस ने कहा कि उसने कभी प्रतिस्पर्धा से डर महसूस नहीं किया है. उसने कहा, ‘हम इसे इस बात की सबसे बड़ी परीक्षा मानते हैं कि ग्राहकों की बेहतर सेवा कौन दे सकता है. जियो ने भी वर्ष 2016 में भारत के अत्यंत प्रतिस्पर्धी दूरसंचार बाजार में एक नए खिलाड़ी के रूप में प्रवेश किया था, जब उसके पास एक भी ग्राहक नहीं था।      कंपनी ने आगे बताया कि केवल 10 वर्षों में जियो ने 53 करोड़ से अधिक ग्राहकों का विश्वास जीता है और भारतीयों को दुनिया के सबसे बेहतर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और सबसे किफायती डेटा सेवाओं में से एक उपलब्ध कराई हैं।  क्या है पूरा विवाद गौरतलब है कि स्टारलिंक को भारत में सैटेलाइट संचार सेवाएं उपलब्ध कराने का लाइसेंस मिल चुका है, लेकिन वाणिज्यिक सेवाएं शुरू करने से पहले कंपनी को सुरक्षा संबंधी मंजूरियों और अन्य स्वीकृतियों की आवश्यकता है. पिछले सप्ताह एलन मस्क ने स्टारलिंक के भारत में प्रवेश को लेकर सरकार और भारतीय कारोबारियों पर निशाना साधा था. हालांकि, भारत सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि सैटेलाइट संचार क्षेत्र में सभी कंपनियों के आवेदनों की समीक्षा निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण प्रक्रिया के तहत की जा रही है। 

Audi Q3 की भारतीय बाजार में एंट्री, शानदार डिजाइन के साथ मिलेगी लग्जरी SUV

मुंबई   लग्जरी कार निर्माता कंपनी Audi ने भारतीय बाजार में अपनी नई Audi Q3 एसयूवी को लॉन्च कर दिया है. इसके तीसरे जनरेशन मॉडल को कुल दो वेरिएंट्स – Nova और Zenith में पेश किया गया है. इनकी शुरुआती कीमत 51.99 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) रखी गई है।  इस नए जनरेशन मॉडल को अगस्त 2026 में भारतीय बाजार में पेश किया था. इसे महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में स्थित Skoda Auto Volkswagen India Pvt Ltd (SAVIPL) के प्लांट में असेंबल किया जा रहा है।  नई 2026 Audi Q3 का एक्सटीरियर नई Audi Q3 अपने पिछले मॉडल के मुकाबले ज़्यादा शार्प दिखाई देती है, जिसमें स्प्लिट-हेडलाइट सेटअप और एक चौड़ी फ्रंट ग्रिल लगाई गई है।  भारत में मिलने वाले वर्ज़न की ग्रिल का डिज़ाइन ग्लोबल मॉडल से अलग रखा गया है, हालांकि Audi के लोगो को उसी तरह से लगाया गया है, जैसा कि इसके इंटरनेशनल मॉडल में है. इसके निचले बंपर में हनीकॉम्ब पैटर्न वाला एयर इनटेक और एक सिल्वर स्किड प्लेट का इस्तेमाल किया गया है।  कार के किनारों की तरफ बदलाव थोड़े सूक्ष्म रखे गए हैं. इसका कुल आकार तो जाना-पहचाना ही रहता है, लेकिन नई Audi Q3 में बॉडी-कलर क्लैडिंग, डुअल-टोन अलॉय व्हील्स, रूफ रेल्स और विंडो लाइन के चारों ओर एक क्रोम स्ट्रिप लगाई गई है।  कार के रियर प्रोफाइल की बात करें तो यहां पर स्प्लिट टेल-लैंप एक LED लाइट बार से जोड़े गए हैं, जिसके बीच में ऑडी का चमकता हुआ लोगो लगाया गया है. इसमें एक बड़ा रूफ स्पॉइलर भी लगाया गया है, जबकि इसके आकर्षक बंपर में नकली एयर आउटलेट और एक सिल्वर स्किड प्लेट दी गई है।  कलर ऑप्शन्स की बात करें तो कंपनी ने इस कार को कुल पांच एक्सटीरियर कलर ऑप्शन्स में पेश किया है, जिनमें मिथोस ब्लैक, टैम्बोरा ग्रे, नवार्रा ब्लू, सेज ग्रीन और ग्लेशियर व्हाइट कलर शामिल हैं।  नई 2026 Audi Q3 का इंटीरियर कार के केबिन में पिछले मॉडल के मुकाबले काफी बड़ा बदलाव देखने को मिलता है. इसके डैशबोर्ड में अब एक पैनोरमिक डिस्प्ले सेटअप दिया गया है, जिसमें 11.9-इंच का डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर और 12.8-इंच की टचस्क्रीन लगाई गई है।  इसका इंफोटेनमेंट सिस्टम 'एंड्रॉइड ऑटोमोटिव OS' पर काम करता है और ड्राइवर की तरफ झुका हुआ है. Audi के कुछ बड़े मॉडल्स के विपरीत, इसमें आगे बैठे यात्री के लिए कोई अलग स्क्रीन नहीं दी गई है।  Audi ने इसके गियर सिलेक्टर को सेंटर कंसोल से हटाकर स्टीयरिंग व्हील के पीछे एक लीवर पर लगा दिया है, जिससे आगे की सीटों के बीच ज़्यादा जगह मिल गई है. वहीं लाइटिंग और वाइपर के कंट्रोल स्टीयरिंग व्हील के दूसरी तरफ दिए गए हैं।  नई 2026 Audi Q3 के फीचर्स इस कार के हायर-स्पेक Zenith वेरिएंट में 12-स्पीकर वाला 420W का SONOS साउंड सिस्टम, हेड-अप डिस्प्ले और दोनों पंक्ति के लिए फास्ट USB चार्जिंग का फीचर दिया गया है. कार में डिजिटल मैट्रिक्स LED हेडलाइट्स, लेन और ओरिएंटेशन लाइटिंग, और फ्रंट लाइट्स के लिए कस्टमाइज़ होने वाले डिजिटल लाइट सिग्नेचर भी दिए गए हैं।  ये 'कमिंग-होम' और 'लीविंग-होम' फंक्शन के दौरान काम आते हैं. इसके अलावा, इसमें ऊपर और नीचे से फ्लैट, ट्विन-स्पोक वाला स्पोर्टी लेदर स्टीयरिंग व्हील भी दिया गया है. इंटीरियर कलर विकल्पों में टैमरिंड ब्राउन और परगामेंट बेज कलर शामिल हैं।  नई 2026 Audi Q3 का इंजन कार में मिलने वाले इंजन की बात करें तो इसके दोनों वेरिएंट्स में 2.0-लीटर टर्बो-पेट्रोल इंजन इस्तेमाल किया गया है, जो 201 bhp की पावर और 320 Nm का टॉर्क उत्पन्न करता है. इस इंजन के साथ 7-स्पीड डुअल-क्लच ऑटोमैटिक गियरबॉक्स को जोड़ा गया है।  इंजन की पावर कंपनी के Quattro सिस्टम के जरिए इसके चारों व्हील्स तक पहुंचती है, जो इसमें स्टैंडर्ड तौर पर दिया जाता है. Audi का दावा है कि नई Audi Q3 महज 7.1 सेकंड में 0 से 100 kmph की रफ्तार पकड़ सकती है और इसकी टॉप स्पीड 229 kmph तक पहुंच सकती है। 

Honda की पहली इलेक्ट्रिक SUV की एंट्री तय, भारत में जल्द लॉन्च होगी 0 Alpha EV

 नई दिल्ली Honda 0 Alpha EV India Launch: जापानी कार कंपनी होंडा भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक कारों की दौड़ में उतरने की तैयारी कर रही है. कंपनी अपनी पहली ऑल-इलेक्ट्रिक कार के तौर पर Honda 0 Alpha के प्रोडक्शन मॉडल को 2 दिसंबर को भारत में पेश करेगी. इस SUV के कॉन्सेप्ट मॉडल से अक्टूबर 2025 में पर्दा उठाया गया था. अब इसका प्रोडक्शन मॉडल भारतीय सड़कों पर उतरने के लिए तैयार है।  मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी नवंबर में इस SUV के फाइनल नाम का खुलासा कर सकती है. हाल ही में इस इलेक्ट्रिक SUV को टेस्टिंग के दौरान स्पॉट किया गया था. इसके कॉप्सेप्ट मॉडल के डिज़ाइन को लोगों ने काफी पसंद किया था. अब इसके प्रोडक्शन रेडी वर्जन का इंतजार है. टाटा, मारुति, महिंद्रा, एमजी मोटर, हुंडई, विनफास्ट, बीवाईडी और किआ के बाद होंडा अगली कंपनी होगी जो भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री करेगी। कैसी होगी Honda 0 Alpha EV  Honda ने फिलहाल अपनी पहली इलेक्ट्रिक SUV की तकनीकी जानकारी पूरी तरह साझा नहीं की है. हालांकि, कंपनी ने पुष्टि की है कि इसमें दो बैटरी पैक के ऑप्शन मिलेंगे. दोनों बैटरी में LFP यानी लिथियम आयरन फॉस्फेट तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा. इनकी क्षमता 65kWh से 75kWh के बीच होने की उम्मीद है. लॉन्च के समय इस SUV में सिंगल इलेक्ट्रिक मोटर और फ्रंट-व्हील ड्राइव (FWD) सेटअप मिल सकता है. हालांकि, बैटरी कैपेसिटी, ड्राइविंग रेंज और मोटर की पावर से जुड़ी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।  टेस्टिंग के दौरान सामने आई तस्वीरों से यह साफ हो चुका है कि, Honda की ये इलेक्ट्रिक SUV अपने कॉन्सेप्ट मॉडल से काफी हद तक मिलती-जुलती होगी. इसका लुक कंपनी की मौजूदा कारों से काफी अलग है. SUV के पिछले हिस्से में स्ट्रेट टेलगेट और मोटा C-पिलर दिया जा सकता है, जो इसे MPV जैसा लुक देता है. पीछे की तरफ बड़ी विंडस्क्रीन और नीचे की ओर निकला हुआ बंपर नजर आता है. बंपर के निचले हिस्से में डिफ्यूजर जैसा डिजाइन एलिमेंट भी मिलने की उम्मीद है।  केबिन में बड़ी टचस्क्रीन Honda 0 Alpha के टेस्ट मॉडल की पहले सामने आई तस्वीरों में इसके केबिन की झलक भी देखने को मिली थी. इसमें बड़ी टचस्क्रीन दी जा सकती है, जबकि ड्राइवर के लिए इसके दाईं ओर थोड़ा छोटा डिजिटल डिस्प्ले नजर आया है. SUV में थ्री-स्पोक वाला फ्लैट-बॉटम स्टीयरिंग व्हील भी मिल सकता है, जिसके साथ पैडल शिफ्टर्स दिए गए हैं।  सेंटर कंसोल पर कई फिजिकल बटन दिखाई दिए हैं. इनका इस्तेमाल क्लाइमेट कंट्रोल और वेंटिलेटेड सीटों जैसे फीचर्स को ऑपरेट करने के लिए किया जा सकता है. हालांकि, इन फीचर्स और उनके फंक्शन की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है. इस एसयूवी का व्हीलबेस लगभग 2,700 मिमी से 2,800 मिमी के बीच होने की संभावना है. जिससे यूजर्स को केबिन में बेहतर स्पेस मिलेगा।  लॉन्च के बाद Honda 0 Alpha का मुकाबला भारतीय बाजार की मिडसाइज इलेक्ट्रिक SUV सेगमेंट में होगा. ये कार मूल रूप से महिंद्रा बीई 6, हुंडई क्रेटा इलेक्ट्रिक, टाटा सिएरा ईवी, मारुति ई विटारा और टोयोटा अर्बन क्रूजर जैसे मॉडलों को टक्कर देगी. हालांकि लॉन्च से पहले इसकी कीमत के बारे में कुछ भी कहना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन माना जा रहा है कि कंपनी इसे 15-16 लाख रुपये की शुरुआती कीमत में पेश कर सकती है।  राजस्थान में बनेगी कार Honda अपनी इस इलेक्ट्रिक SUV का निर्माण भारत में ही करेगी. राजस्थान के टपूकड़ा स्थित कंपनी के प्लांट को इसके प्रोडक्शन किया जाएगा. इससे Honda को भारतीय बाजार के हिसाब से अपनी इलेक्ट्रिक SUV तैयार करने में मदद मिल सकती है। 

स्टारलिंक विवाद पर रिलायंस का पलटवार, एलॉन मस्क के आरोपों पर दिया जवाब

मुंबई      अमेरिकी उद्योगपति एलॉन मस्क की कंपनी स्टारलिंक (Starlink) को भारत में मंजूरी मिलने को लेकर चल रही बहस के बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपना पक्ष रखा है. कंपनी ने कहा है कि वह भारत में सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा का स्वागत करती है. इसमें स्टारलिंक भी शामिल है. हालांकि, रिलायंस ने यह भी स्पष्ट किया कि इस क्षेत्र में काम करने वाली हर कंपनी को भारत के कानूनों और मौजूदा नियमों का पालन करना होगा।  रिलायंस का यह बयान स्पेसएक्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) एलॉन मस्क की उन टिप्पणियों के बाद आया है, जिनमें उन्होंने आरोप लगाया था कि भारत में कुछ कारोबारी हित स्टारलिंक की सेवाओं की शुरुआत में बाधा डाल रहे हैं. मस्क ने अंबानी और भारतीय टेलीकम्युनिकेशन इंडस्ट्री में प्रतिस्पर्धा को लेकर भी सवाल उठाए थे. रिलायंस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में कहा, 'हमने कभी प्रतिस्पर्धा से डर महसूस नहीं किया. हम इसे इस बात की सबसे बड़ी कसौटी मानते हैं कि ग्राहकों को सबसे अच्छी सेवा कौन देता है।  रिलायंस ने अपने टेलीकम्युनिकेशन बिजनेस 'जियो प्लेटफॉर्म्स' का उदाहरण देते हुए कहा कि कंपनी ने साल 2016 में भारत के टेलीकम्युनिकेशन मार्केट में कदम रखा था. उस समय उसके पास एक भी ग्राहक नहीं था. रिलायंस के मुताबिक, 10 साल में जियो के ग्राहकों की संख्या 53 करोड़ से अधिक हो गई है. कंपनी ने दावा किया कि जियो ने भारतीय नागरिकों को बेहतर डिजिटल सुविधाएं और दुनिया में सबसे सस्ते मोबाइल डेटा तक पहुंच उपलब्ध कराने में योगदान दिया है।  जियो को भी मंजूरी का है इंतजार रिलायंस ने कहा कि वह स्टारलिंक समेत सैटेलाइट बेस्ड कम्युनिकेशन के क्षेत्र में आने वाली सभी कंपनियों का स्वागत करती है. लेकिन जियो समेत हर कंपनी को भारत के लोगों के हित में काम करना होगा और देश के कानूनों तथा नीतियों का पालन करना होगा. कंपनी ने अपने बयान में यह भी कहा कि भारत में निवेश और नए प्रयोगों का स्वागत होता है, चाहे वे देशी कंपनियों की ओर से हों या विदेशी कंपनियों की ओर से. लेकिन यह व्यवस्था कानून के दायरे में ही चलती है।  कंपनी के मुताबिक, भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि सैटेलाइट बेस्ड कम्युनिकेशन सर्विसेज के लिए आवेदन करने वाली हर कंपनी पर समान प्रक्रिया लागू होती है. रिलायंस ने बताया कि उसकी अपनी सैटेलाइट सेवा जियो को भी जरूरी मंजूरियों का इंतजार है. यह बयान ऐसे समय आया है, जब स्टारलिंक भारत में अपनी व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने की तैयारी कर रही है. सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में स्टारलिंक की एंट्री से मौजूदा कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ने की उम्मीद है. सरकार ने भी कहा है कि सैटेलाइट संचार में एकाधिकार की गुंजाइश नहीं है।  एलॉन मस्क ने क्या आरोप लगाए? मस्क ने भारत के दूरसंचार क्षेत्र में एकाधिकार जैसी स्थिति का आरोप लगाया था और स्टारलिंक को जरूरी मंजूरियां मिलने में देरी पर सवाल उठाए थे. उन्होंने एक X पोस्ट में अंबानी को प्रधानमंत्री संबोधित करते हुए तंज कसा था कि उन्हें स्टारलिंक को भारत में अपने कंपनी के साथ प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति देने पर विचार करना चाहिए. उन्होंने एक अन्य सोशल मीडिया पोस्ट में यहां तक सवाल उठा दिया था कि क्या अंबानी ही भारत के असली बॉस हैं. मस्क के इस सोशल मीडिया पोस्ट पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी प्रतिक्रिया दी थी और उनसे सहमति जताई थी. इस पर काफी विवाद हुआ था।  एकाधिकार की गुंजाइश नहीं: सरकार इस विवाद के बीच सरकार ने मस्क के आरोपों को खारिज कर दिया था. केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था कि सैटेलाइट कम्युनिकेशन के क्षेत्र में किसी एक कंपनी का एकाधिकार होने देने का सवाल ही नहीं है. उन्होंने बताया कि तीन कंपनियां व्यावसायिक सेवाओं के लिए अंतिम मंजूरी मिलने की प्रक्रिया में हैं. सिंधिया के मुताबिक, भारत में सैटेलाइट संचार सेवाओं की कीमत तय करने के ढांचे पर भी जल्द अंतिम फैसला होने की उम्मीद है।  उन्होंने यह स्पष्ट किया कि स्टारलिंक समेत सभी लाइसेंस प्राप्त कंपनियों को व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने से पहले सुरक्षा संबंधी जरूरी शर्तें पूरी करनी होंगी. कुछ दिन पहले भारत की एक और बड़ी टेलीकम्युनिकेशन कंपनी भारती एयरटेल के फाउंडर सुनील भारती मित्तल ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने कहा था कि उनकी कंपनी यूटेलसैट वनवेब (Eutelsat OneWeb) ने भारत में सैटेलाइट बेस्ड इंटरनेट और कम्युनिकेशन सेवाएं शुरू करने के लिए 5 साल पहले आवेदन किया था. सुनील मित्तल ने कहा, 'तीन साल से हमारा ग्राउंड नेटवर्क तैयार है. हम सभी मंजूरियों का इंतजार कर रहे हैं और मुझे लगता है कि मैं कतार में एलॉन मस्क से काफी आगे हूं. अगर मेरी कंपनी को स्टारलिंक से कुछ दिन पहले मंजूरी मिल जाती है, तो मुझे खुशी होगी। 

केंद्र का बड़ा फैसला: पेट्रोल निर्यात शुल्क ₹2.50 और डीजल पर घटकर ₹8.50 प्रति लीटर

  नई दिल्ली   केंद्र सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाला विंडफॉल टैक्स (एक्सपोर्ट ड्यूटी) बढ़ा दिया है, जबकि डीजल के निर्यात पर टैक्स में बड़ी कटौती की है. नई दरें 16 अक्टूबर से लागू हो गई हैं. पेट्रोल निर्यात पर टैक्स 50 पैसे से बढ़ाकर 2.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. वहीं, डीजल निर्यात पर टैक्स 16 रुपये से घटाकर 8.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. आम उपभोक्ताओं के लिए अहम बात यह है कि इस फैसले से घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं होगा।  इस फैसले का मतलब घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ना नहीं है. सरकार ने निर्यात पर लगने वाले टैक्स में बदलाव किया है, न कि घरेलू इस्तेमाल के लिए बिकने वाले ईंधन पर लगने वाले टैक्स में. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों और तेल कंपनियों की लागत में बदलाव का असर आगे चलकर खुदरा कीमतों पर पड़ सकता है. सरकार के आदेश में इस बार पेट्रोल पर विंडफॉल टैक्स बढ़ाने और डीजल पर घटाने की अलग-अलग वजह स्पष्ट नहीं की गई है. हालांकि, निर्यात पर लगने वाली इन दरों की समीक्षा अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखकर की जाती है।  पेट्रोल-डीजल पर सरकार ने क्या बदला? सरकार ने गुरुवार देर रात जारी आदेश में पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर लगने वाली ड्यूटी में बदलाव किया. नई दरों के मुताबिक पेट्रोल निर्यात पर टैक्स 0.50 रुपये से बढ़ाकर 2.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. यानी टैक्स पांच गुना हो गया है. डीजल निर्यात पर टैक्स 16 रुपये से घटाकर 8.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. यानी हर लीटर पर 7.50 रुपये की कटौती हुई है।  ये दोनों बदलाव विदेश भेजे जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर लागू होंगे. इसका सीधा असर उन रिफाइनरी कंपनियों और कारोबारियों पर पड़ेगा जो पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करते हैं. पेट्रोल पर टैक्स बढ़ने से निर्यात पर मिलने वाले मुनाफे में कमी आ सकती है, जबकि डीजल पर टैक्स घटने से निर्यात करने वाली कंपनियों को पहले के मुकाबले राहत मिलेगी। अब पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है? सिर्फ निर्यात टैक्स में बदलाव के कारण घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल महंगा होना जरूरी नहीं है. सरकार ने घरेलू इस्तेमाल के लिए पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर लगने वाली ड्यूटी में इस आदेश के तहत कोई बदलाव नहीं किया है. इसलिए नई निर्यात दरें लागू होने से पेट्रोल पंप पर कीमतें अपने आप नहीं बढ़ेंगी. भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें तय करने में अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमत, रुपये और डॉलर की विनिमय दर, कर और अन्य लागतों की भूमिका होती है।  सरकारी तेल कंपनियां इन परिस्थितियों के आधार पर कीमतों में बदलाव का फैसला करती हैं. अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल या तैयार पेट्रोल-डीजल महंगा होता है, रुपये की कीमत गिरती है या तेल कंपनियों की लागत बढ़ती है, तो कीमतों पर दबाव बन सकता है. दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट से राहत की गुंजाइश भी बन सकती है. इसलिए इस समय यह कहना सही नहीं होगा कि सरकार के नए फैसले से पेट्रोल-डीजल के दाम जरूर बढ़ेंगे।  क्या है विंडफॉल टैक्स? विंडफॉल टैक्स का इस्तेमाल सरकार उन परिस्थितियों में अतिरिक्त कमाई पर कर लगाने के लिए करती है, जब कंपनियों को बाजार की असाधारण स्थितियों के कारण सामान्य से ज्यादा मुनाफा मिलने की संभावना होती है. ईंधन के मामले में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने पर रिफाइनरी कंपनियों को विदेश में पेट्रोल और डीजल बेचने से ज्यादा कमाई हो सकती है. ऐसे समय सरकार निर्यात पर टैक्स लगाकर उस अतिरिक्त लाभ का एक हिस्सा हासिल करने की कोशिश करती है।  भारत ने पहली बार जुलाई 2022 में पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स लगाया था. करीब दो साल बाद दिसंबर 2024 में इसे हटा दिया गया. मार्च 2026 में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच सरकार ने इसे फिर लागू किया. तब से इसकी दरों में बाजार की परिस्थितियों के हिसाब से बदलाव किया जा रहा है. सरकार पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर लगने वाले टैक्स की समीक्षा हर पखवाड़े यानी लगभग 15 दिन में करती है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और तैयार पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बदलाव के आधार पर दरें बढ़ाई या घटाई जा सकती हैं। 

Jio Platforms IPO: ₹1,119 तक होगा शेयर का प्राइस, 21 से 23 अक्टूबर तक लगा सकेंगे बोली

मुंबई  रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और टेलीकॉम कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ निवेशकों के बीच चर्चा में है. कंपनी ने आईपीओ से जुड़ा रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) दाखिल कर दिया है. इसके साथ ही इश्यू का प्राइस बैंड, शेयरों की डीटेल और आईपीओ से जुड़ी अहम जानकारी सामने आई है. कंपनी इस इश्यू के जरिए करीब 30,213 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है. यह देश का सबसे बड़ा आईपीओ माना जा रहा है।  जियो प्लेटफॉर्म्स का कारोबार सिर्फ मोबाइल इंटरनेट तक सीमित नहीं है. कंपनी के तहत रिलायंस जियो का टेलीकॉम बिजनेस और कई डिजिटल सर्विसेस आती हैं. ऐसे में निवेशकों की नजर आईपीओ पर रहेगी. हालांकि, निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, कारोबार और आईपीओ की शर्तों को समझना जरूरी है।  क्या है जियो आईपीओ का प्राइस बैंड? जियो प्लेटफॉर्म्स ने आईपीओ के लिए 1,065 रुपये से 1,119 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है. यानी निवेशकों को इसी दायरे में शेयरों के लिए बोली लगानी होगी. अंतिम कीमत तय होने के बाद शेयरों का अलॉट किया जाएगा।  कितने शेयर जारी करेगी कंपनी? इस आईपीओ में कुल 27 करोड़ शेयरों का इश्यू है. अपर प्राइस बैंड 1,119 रुपये के हिसाब से कंपनी करीब 30,213 करोड़ रुपये जुटा सकती है. वहीं, 1,065 रुपये के निचले प्राइस बैंड पर यह रकम करीब 28,755 करोड़ रुपये होगी।  देश के बड़े आईपीओ के बीच कहां होगी जियो की जगह? जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ अपर प्राइस बैंड पर करीब 30,213 करोड़ रुपये का होगा. इसके साथ यह देश का सबसे बड़ा आईपीओ बन सकता है. इससे पहले हुंडई मोटर इंडिया ने 27,870 करोड़ रुपये, एनएसई के प्रस्तावित आईपीओ का साइज करीब 22,569 करोड़ रुपये, एलआईसी ने 20,557 करोड़ रुपये और पेटीएम ने 18,300 करोड़ रुपये का आईपीओ पेश किया था।  कब खुलेगा और कब बंद होगा आईपीओ? जियो आईपीओ टाइमलाइन के मुताबिक, 19 अक्टूबर को एंकर निवेशकों के लिए अलॉट होगा. आम निवेशकों के लिए आईपीओ 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा. निवेश करने से पहले कंपनी के डॉक्यूमेंट्स में दी गई तारीखों को जरूर चेक कर लें।  कर्मचारियों को कितना मिलेगा फायदा? कंपनी ने एलिजिबल कर्मचारियों के लिए 500 करोड़ रुपये तक के शेयर रिजर्व रखे हैं. इन कर्मचारियों को प्रति शेयर 54 रुपये की छूट भी मिलेगी. हालांकि, इसका फायदा उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा जो कंपनी की तय पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं।  रिलायंस के शेयरधारकों के लिए क्या है खास? रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र मौजूदा शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये तक के शेयर रिजर्व रखे गए हैं. इसमें वे पात्र व्यक्ति और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) शामिल हैं, जिनके पास 14 अक्टूबर को रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर थे. यह तारीख आरएचपी दाखिल करने की तारीख है. इस कैटेगरी में आवेदन करने के लिए संबंधित नियमों और पात्रता शर्तों को पूरा करना जरूरी है।  जियो प्लेटफॉर्म्स का कारोबार क्या है? जियो प्लेटफॉर्म्स के तहत रिलायंस जियो का टेलीकॉम कारोबार और डिजिटल सर्विसेस देती आती हैं. कंपनी मोबाइल कनेक्टिविटी और इंटरनेट के अलावा डिजिटल प्लेटफॉर्म तथा अन्य तकनीकी सेवाओं के क्षेत्र में भी काम करती है. यह रिलायंस इंडस्ट्रीज की उपभोक्ता कारोबार से जुड़ी स्ट्रैटजी का अहम हिस्सा है।  आईपीओ से जुटाई रकम क्यों अहम है? आईपीओ से जुटाई जाने वाली रकम कंपनी के साइज और बाजार में उसकी स्थिति को लेकर निवेशकों का ध्यान खींच रही है. हालांकि, रकम का इस्तेमाल किस तरह होगा, इसकी सही जानकारी के लिए आरएचपी में दिए गए प्रस्ताव को जानना जरूरी है।  निवेश से पहले किन बातों को समझें? किसी भी आईपीओ में निवेश से पहले कंपनी की कमाई, कर्ज, कारोबार की वृद्धि, कॉम्टिटेविटी और भविष्य के प्लान को समझना चाहिए. जियो प्लेटफॉर्म्स के मामले में भी निवेशकों को आरएचपी में दिए गए वित्तीय आंकड़ों और कारोबार से जुड़ी जानकारियों का एनालिसिस करना चाहिए।  2008 के बाद रिलायंस ग्रुप का पहला IPO जियो प्लेटफॉर्म्स की शेयर बाजार में लिस्टिंग रिलायंस ग्रुप के लिए भी खास होगी, क्योंकि 2008 के बाद यह ग्रुप का पहला आईपीओ होगा. साथ ही, किसी कंज्यूमर-फोकस्ड कारोबार की यह पहली बड़ी पब्लिक पेशकश होगी. जियो प्लेटफॉर्म्स रिलायंस के डिजिटल कारोबार का प्रमुख हिस्सा है. कंपनी क्लाउड, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एंटरप्राइज नेटवर्क सर्विसेज जैसे सेक्टर्स में भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है। 

Stock Market: सेंसेक्स-निफ्टी की दमदार शुरुआत, खुलते ही 600 अंक चढ़ा सेंसेक्स

मुंबई  शेयर बाजार में तेजी जारी है. गुरुवार को मार्केट ओपन होने के साथ ही दोनों इंडेक्स सेंसेक्स-निफ्टी ग्रीन जोन में ओपन हुए. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स ओपनिंग के बाद कुछ ही देर में 600 अंक से ज्यादा की छलांग लगा गया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी इंडेक्स भी तेज शुरुआत करते हुए 22,700 के पार निकल गया. बाजार की तेजी के बीच आईटी शेयर गदर मचाते हुए नजर आए. टेक महिंद्रा से लेकर टीसीएस और इंफोसिस तक के स्टॉक्स में जोरदार तेजी देखने को मिली।  Sensex-Nifty की तेज शुरुआत  सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन गुरुवार को सेंसेक्स-निफ्टी ने तेज शुरुआत की और जैसे-जैसे कारोबार आगे बढ़ा ये तेज होती चली गई. बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले कारोबारी बंद 72,781 की तुलना में तेजी लेकर 72,965 पर ओपन हुआ और फिर करीब 650 अंकों की तेज उछाल के साथ 72,426 पर पहुंच गया।  एनएसई निफ्टी इंडेक्स की बात करें, तो ये भी सेंसेक्स के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए नजर आया और अपने पिछले बंद 22,622 की तुलना में तेजी लेकर 22,671 पर ओपन हुआ. ओपनिंग के बाद इसकी रफ्तार भी तेज होती चली गई और महज कुछ ही मिनटों में ये 22,800 के लेवल के पार कारोबार करता हुआ नजर आया।  ग्लोबल सिग्नल वीक, फिर भी तेजी बता दें कि गुरुवार को सुस्त वैश्विक संकेतों के बावजूद शेयर बाजार में तेजी देखने को मिल रही है. शुरुआती कारोबार के दौरान लगभग 1097 शेयरों ने अपने पिछले कारोबारी बंद की तुलना में उछाल के साथ तेज शुरुआत की, तो वहीं 1141 शेयरों ने गिरावट के साथ कारोबार शुरू किया. इसके अलावा 181 शेयरों की स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ।  निफ्टी पर ओपनिंग के साथ सबसे ज्यादा बढ़त दिखाने वाले शेयरों में TCS, HCL टेक्नोलॉजीज, टाटा कंज्यूमर, ICICI बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज शामिल थे, जबकि गिरावट दिखाने वाले स्टॉक्स में टाटा ट्रेंट, L&T, श्रीराम फाइनेंस और BSE लिमिटेड शामिल रहे।  IT शेयरों ने मचाया गदर शेयर बाजार में गुरुवार को आई तेजी को सपोर्ट करने में सबसे अहम रोल आईटी कंपनियों के शेयरों का रहा. बीएसई लार्जकैप में शामिल Tech Mahindra Share (3%), TCS Share (2.70%), Infosys Share (2.50%), HCL Tech Share (2%) की तेजी लेकर कारोबार करता दिखा. इसके अलावा मिडकैप कैटेगरी में Persistent Share (1.70%), KEI Share (1.36%) की उछाल में नजर आए।  अन्य शेयरों में Bharti Airtel Share (2.70%), ICICI Bank Share (1.70%), ITC Share (1.50%), Axis Bank Share (1.30%) की तेजी लिए हुए थे। 

स्टारलिंक विवाद में मुकेश अंबानी और मोदी सरकार पर उठे सवाल, सुनील मित्तल ने मस्क को दिया जवाब

मुंबई  अमेरिकी उद्योगपति एलॉन मस्क ने भारत में स्टारलिंक की एंट्री में देरी को लेकर मुकेश अंबानी के बहाने मोदी सरकार पर सवाल उठाए थे. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उन्होंने यहां तक पूछ लिया था कि क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं? मस्क का आरोप था कि जियो जैसी कंपनियों के दबदबे के कारण भारत में उनकी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा को मंजूरी नहीं दी जा रही. उनके इस पोस्ट पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी प्रतिक्रिया दी थी और उनकी हां में हां मिलाया था।  अब भारती एंटरप्राइजेज के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल ने इस पूरे विवाद के बीच अपनी कंपनी की तैयारी का हिसाब सामने रखा है. सुनील भारती मित्तल के जवाब से एलॉन मस्क के आरोपों और दावों की धज्जियां उड़ गई हैं. सुनील मित्तल का कहना है कि उनकी कंपनी एयरटेल ने 5 साल पहले सैटेलाइट बेस्ड इंटरनेट सर्विस शुरू करने के लिए आवेदन किया था और उसका जमीनी नेटवर्क तीन साल से तैयार है. उनके इस जवाब से स्पष्ट हो गया है कि भारत में सैटेलाइट बेस्ड इंटरनेट सर्विस शुरू करने के लिए मंजूरी के इंतजार में सिर्फ मस्क की स्टारलिंक ही नहीं, भारतीय कंपनियां भी खड़ी हैं।  बुधवार को मस्क ने आरोप लगाया कि कुछ बड़े उद्योगपतियों ने अपनी मोनोपॉली बनाए रखने के लिए भारत में स्टारलिंक को रोक दिया है। मस्क ने बिना नाम लिए किया था इशारा मस्क ने किसी कंपनी का नाम तो नहीं लिया, लेकिन कहा, 'आप अंदाजा लगा सकते हैं कि वे कौन हैं।' भारत के टेलीकॉम मार्केट में तीन प्राइवेट कंपनियां हैं- रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया। मस्क की स्टारलिंक, जियो सैटकॉम और यूटेलसैट वनवेब – ये तीन सैटेलाइट कम्युनिकेशन कंपनियां देश में सैटेलाइट सर्विस शुरू करने की होड़ में हैं। सरकार ने देश में कामकाज शुरू करने के लिए इन तीनों सैटेलाइट कम्युनिकेशन कंपनियों को लाइसेंस दे दिए हैं। हालांकि, सर्विस शुरू करने से पहले सभी कंपनियों को स्पेक्ट्रम और सिक्योरिटी मंजूरी की जरूरत है। सुनील मित्तल ने दी प्रतिक्रिया जब मस्क के आरोपों पर मित्तल की राय पूछी गई तो इंडिया मोबाइल कांग्रेस में उन्‍होंने कहा, 'हम अपनी मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं।' भारती ग्रुप की यूटेलसैट वनवेब और जियो सैटकॉम पहली दो सैटकॉम कंपनियां थीं जिन्हें सर्विस के लिए लाइसेंस मिला था। लेकिन, उन्हें अभी भी सर्विस शुरू करने के लिए स्पेक्ट्रम और सिक्योरिटी मंजूरी नहीं मिली है। जियो प्लेटफॉर्म्स के मैनेजिंग डायरेक्टर आकाश अंबानी ने इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया करने से इनकार कर दिया। भाजपा ने राहुल और मस्क को दिया जवाब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वह भारत में स्टारलिंक की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा को लाइसेंस मिलने में हो रही देरी को लेकर एलॉन मस्क का पक्ष ले रहे हैं. बीजेपी के उपाध्यक्ष राम माधव ने कहा कि स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया पारदर्शी और भेदभाव रहित होगी. उन्होंने मस्क को जवाब देते हुए कहा, 'आपको इस देश और उसके नेतृत्व के प्रति सम्मान भी रखना चाहिए. यहां स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए एक उचित व्यवस्था है, जो भेदभाव रहित है. जियो और एयरटेल भी स्टारलिंक के साथ इंतजार कर रहे हैं. भारत सरकार उचित समय पर पूरी तरह पारदर्शी और भेदभाव रहित तरीके से फैसला लेगी।  डेटा सेंटर कारोबार में भी एयरटेल की बड़ी तैयारी टेलीकॉम और सैटेलाइट इंटरनेट के अलावा भारती एयरटेल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है. कंपनी अपनी डेटा सेंटर क्षमता को करीब 300 मेगावाट से बढ़ाकर एक गीगावाट तक ले जाने की तैयारी में है. इसके लिए दक्षिण भारत, मुंबई और दिल्ली के आसपास विस्तार किया जा रहा है. कंपनी सॉवरेन क्लाउड सर्विस पर भी जोर दे रही है. इसका मकसद भारतीय कंपनियों, सरकारी एजेंसियों और रक्षा बलों को ऐसी सेवाएं देना है, जिनमें डेटा की सुरक्षा और उस पर देश का नियंत्रण अहम हो।  एआई के लिए बनाए जाएं वैश्विक सुरक्षा नियम: मित्तल सैटेलाइट इंटरनेट और डिजिटल कारोबार के साथ सुनील मित्तल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि इस तकनीक के लिए वैश्विक स्तर पर सुरक्षा नियम बनाए जाने चाहिए और सरकारों को किसी बड़े हादसे का इंतजार नहीं करना चाहिए. उनके मुताबिक, ऐसे नियमों का उद्देश्य यूजर्स की सुरक्षा करना होना चाहिए, न कि नई तकनीक के विकास को रोकना. फिलहाल, स्टारलिंक के साथ भारतीय कंपनियों के लिए भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने का रास्ता अंतिम सुरक्षा मंजूरियों और स्पेक्ट्रम से जुड़ी प्रक्रियाओं से होकर गुजरता है।  सरकार ने भी रुख किया साफ सरकार ने गुरुवार को अमेरिकी बिजनेस टाइकून एलन मस्क के इन आरोपों की आलोचना की कि स्टारलिंक की सैटकॉम सर्विस को रोका जा रहा है। यह साफ कर दिया कि देश में हर सैटकॉम लाइसेंसहोल्‍डर के लिए सिक्योरिटी नियमों का पालन करना जरूरी है। टेलीकॉम मिनिस्ट्री ने कहा, सरकार ने सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विस समेत सभी टेलीकम्युनिकेशन सर्विस के लिए एक निष्पक्ष और बिना भेदभाव वाला ऑथराइजेशन फ्रेमवर्क बनाया है। टेलीकॉम मिनिस्ट्री के अनुसार, लाइसेंस की शर्तों के तहत, ऐसे हर लाइसेंसहोल्‍डर को सिक्योरिटी शर्तों का पालन करना जरूरी है। मिनिस्ट्री ने कहा, 'इसका मकसद यह पक्का करना है कि दी जाने वाली सर्विस सभी यूजर्स और उनके डेटा की सुरक्षा के लिए जरूरी सिक्योरिटी जरूरतों को पूरा करें। इस प्रोसेस के तहत तीनों लाइसेंसहोल्‍डर्स के लिए सिक्योरिटी असेसमेंट अभी चल रहा है।' मंत्रालय ने कहा कि जब किसी लाइसेंस वाली कंपनी के लिए यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी तो वह स्पेक्ट्रम के आवंटन के लिए अगले कदम पर आगे बढ़ सकती है। बयान में कहा गया, 'फिलहाल, तीनों कंपनियां मोटे तौर पर एक ही रेगुलेटरी स्टेज पर हैं। इसलिए, यह सुझाव कि फ्रेमवर्क या उसका लागू होना अनुचित या भेदभावपूर्ण है, बेबुनियाद और गलतफहमी पर आधारित है।' भारत में सैटेलाइट इंटरनेट की जंग क्यों अहम? सैटेलाइट इंटरनेट उन इलाकों में कनेक्टिविटी पहुंचाने का जरिया बन सकता है, जहां मोबाइल टावर या फाइबर नेटवर्क बिछाना मुश्किल है. पहाड़ी क्षेत्रों, दूरदराज के गांवों और देश के ऐसे हिस्सों में, जहां इंटरनेट की पहुंच सीमित है, यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है।  इस मार्केट में स्टारलिंक के अलावा भारती एयरटेल ग्रुप की कंपनी यूटेलसैट वनवेब … Read more

होर्मुज जलडमरूमध्य से सप्लाई रुकी तो बढ़ेगी दुनिया की टेंशन, ब्रेंट क्रूड 106 डॉलर के पार

 नई दिल्ली पश्चिम एशिया में बढ़ते हमलों ने एक बार फिर इंटरनेशनल एनर्जी मार्केट की चिंता बढ़ा दी है. सऊदी अरब के ऊर्जा ढांचों पर हूती विद्रोहियों के हमलों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते तेल की ढुलाई को लेकर अनिश्चितता ने बाजार को सतर्क कर दिया है. तेल के कुओं से लेकर उसे दुनिया भर में पहुंचाने वाले समुद्री रास्तों तक, सप्लाई से जुड़ा कोई भी जोखिम कीमतों को ऊपर धकेल सकता है. 14 अक्टूबर को ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) की कीमतों पर भी इसका असर दिखा. ब्रेंट क्रूड $106.58 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड $94.94 पर था।  यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब के तेल ठिकानों पर हमले तेज होने की खबरों ने ऊर्जा बाजार की चिंता बढ़ाई है. 13 अक्टूबर को सऊदी अरब के ढहरान (Dhahran) में सरकारी स्वामित्व वाली पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस कंपनी सऊदी अरामको (Saudi Aramco) की एक प्रशासनिक इमारत पर संदिग्ध हूती हमले की खबर सामने आई. इससे सीमित आग लगने की सूचना मिली।  सऊदी अरब दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादकों में शामिल है. ऐसे में उसके ऊर्जा ढांचे पर किसी भी हमले का खतरा बाजार के लिए अहम हो जाता है. आशंका है कि संघर्ष बढ़ने पर तेल उत्पादन, भंडारण या निर्यात की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है. ध्यान देने वाली बात यह है कि कीमतें बढ़ने के लिए तेल की वास्तविक सप्लाई में कमी आना जरूरी नहीं है. अगर कारोबारियों को लगता है कि आने वाले दिनों में उत्पादन या निर्यात बाधित हो सकता है, तो वे पहले ही कीमतों में इस जोखिम को शामिल करने लगते हैं।  स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर क्यों टिकी हैं नजरें? कच्चे तेल की कीमतों के लिए सिर्फ उत्पादन ही नहीं, बल्कि उसकी ढुलाई भी बेहद अहम है. होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है. यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है. जहाजों पर हमलों और टैंकरों की आवाजाही को लेकर अनिश्चितता ने इस चिंता को और बढ़ाया है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस महीने की शुरुआत में टैंकरों पर हमलों के बाद इस मार्ग से तेल की ढुलाई प्रभावित हुई थी. अगर समुद्री रास्तों पर खतरा बढ़ता है, तो अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार तेल पहुंचने में देरी के साथ माल ढुलाई और बीमा की लागत भी बढ़ सकती है. इससे तेल खरीदने वाली कंपनियों का खर्च बढ़ता है और बाजार में कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।  दूसरे देशों से आने वाली सप्लाई देगी राहत? तेल बाजार में कीमतों का रुख इस बात पर भी निर्भर करेगा कि दूसरे उत्पादक देश कितनी अतिरिक्त सप्लाई उपलब्ध करा पाते हैं. रूस से डीजल का निर्यात बढ़ने की संभावना ईंधन बाजार को कुछ राहत दे सकती है. हालांकि, इससे पश्चिम एशिया में कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर पैदा हुई चिंताओं की पूरी भरपाई हो पाएगी या नहीं, यह अभी साफ नहीं है. अगर उत्पादन जारी रहता है, लेकिन सुरक्षा जोखिमों के कारण रिफाइनरियों तक तेल पहुंचने में देरी होती है, तो भी बाजार में उपलब्ध सप्लाई कम पड़ सकती है. यही वजह है कि कारोबारियों की नजर उत्पादन के आंकड़ों के साथ-साथ समुद्री मार्गों की स्थिति और संभावित निर्यात रुकावटों पर भी है।  भारत में पेट्रोल-डीजल पर क्या होगा असर? भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से कच्चा तेल खरीदकर पूरा करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो देश की तेल आयात लागत बढ़ सकती है. हालांकि, कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि पेट्रोल और डीजल के दाम तुरंत बढ़ जाएंगे. घरेलू कीमतों पर सरकार की कर नीति, तेल कंपनियों के फैसलों और लागत में होने वाले बदलावों का भी असर पड़ता है. महंगा कच्चा तेल सिर्फ ईंधन तक सीमित असर नहीं डालता. परिवहन और माल ढुलाई महंगी होने से विनिर्माण और दूसरी आर्थिक गतिविधियों की लागत भी बढ़ सकती है. इसका असर समय के साथ वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर पड़ने की आशंका रहती है।  रुपये और महंगाई पर बढ़ सकता है दबाव कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी भारत के व्यापार संतुलन पर दबाव बढ़ा सकती है. तेल आयात के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ने से डॉलर की मांग बढ़ सकती है, जिससे रुपये पर दबाव आने की आशंका रहती है. महंगे तेल का असर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की लागत और देश में महंगाई के रुख पर भी पड़ सकता है. हालांकि, इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अंतरराष्ट्रीय कीमतें कितनी बढ़ती हैं और कितने समय तक ऊंची बनी रहती हैं. फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की नजर पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, सऊदी अरब के ऊर्जा ढांचे की सुरक्षा, होर्मुज से टैंकरों की आवाजाही और दूसरे उत्पादकों से मिलने वाली अतिरिक्त सप्लाई पर है. आने वाले दिनों में यही कारक तय करेंगे कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी रहती है या बाजार को कुछ राहत मिलती है। 

टोयोटा की सबसे सस्ती कार का नया अवतार, Glanza Facelift में हुए बड़े बदलाव; इतनी है कीमत

मुंबई  Toyota Glanza Facelift Launch: नवरात्रि के साथ ही देश में फेस्टीव सीजन की शुरुआत हो चुकी है. इस दौरान कार कंपनियां भी लगातार नए मॉडलों को बाजार में उतारने में व्यस्त हैं. इस बीच जापानी कार निर्माता टोयोटा ने आज भारतीय बाजार में अपनी सबसे सस्ती कार टोयोटा ग्लांजा के नए फेसलिफ्ट मॉडल को लॉन्च किया है. आकर्षक लुक और दमदार इंजन से लैस इस हैचबैक की शुरुआती कीमत 6.99 लाख रुपये तय की गई है जो टॉप मॉडल के लिए 10.49 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) तक जाती है।  नई टोयोटा ग्लांजा अब कुल 5 वेरिएंट में आएगी. इसमें ई, एस, जी, वी और वी (ऑप्शनल) शामिल हैं. ख़ास बात ये है कि, कंपनी ने पहली बार टोयोटा ग्लांजा में एडवांस ड्राइविंग असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) को शामिल किया है. जो कि केवल हायर V (O) ग्रेड में मिलेगा. इस कार को कुल 7 कलर ऑप्शन में पेश किया गया है, जिसमें बिल्कुल नए ब्लूइश ब्लैक और डिजिटल टील कलर शामिल है।  कैसा है डिजाइन  Toyota Glanza के लुक और डिजाइन में भी कंपनी ने बदलाव किया है. इस कार को बिल्कुल नया फ्रंट फेस, नया ग्रिल और नए डिजाइन के अलॉय व्हील दिए गए हैं. कार में रडार मॉड्यूल भी दिया गया है, जो ADAS यानी एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम से जुड़े फीचर्स को सपोर्ट करता है. हालांकि, कंपनी ने हेडलाइट्स के डिजाइन में कोई बदलाव नहीं किया है, लेकिन LED फॉग लैंप्स को नया डिजाइन दिया गया है।   कार के फ्रंट में मिलने वाले टोयोटा लोगो की जगह भी बदली गई है. अब इसे बोनट के नीचे मौजूद प्लास्टिक ट्रिम पर लगाया गया है. इसके अलावा, नई Glanza में शार्क-फिन एंटीना दिया गया है. Glanza के साइड प्रोफाइल में पहले जैसा ही डिजाइन देखने को मिलता है. इसमें 16-इंच के अलॉय व्हील्स दिए गए हैं।  क्रोम डोर हैंडल और खिड़कियों के चारों ओर मिलने वाली क्रोम लाइन को भी बरकरार रखा गया है. यानी कार के साइड लुक में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है. पीछे की तरफ भी डिजाइन पहले जैसा ही है. इसमें रैपअराउंड LED टेललाइट्स, छत पर लगा स्पॉइलर और रियर वाइपर के साथ वॉशर मिलता है।  इंजन और परफॉर्मेंस Toyota Glanza का सबसे बड़ा बदलाव इसका नया Z12E 1.2-लीटर, 3-सिलेंडर नैचुरली एस्पिरेटेड इंजन है. यह इंजन पेट्रोल और CNG, दोनों फ्यूल ऑप्शन पर चलता है. पेट्रोल मोड में यह इंजन 83hp की पावर और 112Nm का टॉर्क जनरेट करता है. इसके साथ 5-स्पीड मैनुअल और 5-स्पीड ऑटोमेटेड मैनुअल ट्रांसमिशन (AMT) के विकल्प मिलते हैं।  पुराने मॉडल में 4-सिलेंडर इंजन दिया जाता था. इसकी तुलना में नए इंजन का पावर आउटपुट 7hp कम है, जबकि टॉर्क में 1Nm की कमी आई है. इसके बावजूद नए मॉडल में माइलेज को थोड़ा बेहतर बनाया गया है. पेट्रोल इंजन के साथ आइडल स्टार्ट-स्टॉप फीचर भी दिया गया है, जो गाड़ी के कुछ समय तक खड़े रहने पर इंजन को बंद करके फ्यूल की खपत कम करने में मदद करता है।  इसके अलाव कंपनी ने ऑटोमेटिक वेरिएंट के लिए इंटेलिजेंट गियर शिफ्ट (IGS) सिस्टम को शामिल किया है, जो ऑटोमेटिक वेरिएंट की ड्राइविंग को स्मूथ बनाने में मदद करता है. नया इंजन CNG मोड में 70hp की पावर और 102Nm का टॉर्क जनरेट करता है. इस विकल्प में भी 5-स्पीड मैनुअल और 5-स्पीड AMT ट्रांसमिशन दिए गए हैं. पुराने इंजन के मुकाबले CNG मोड में पावर 7hp कम हो गई है, लेकिन टॉर्क 4.5Nm बढ़ा है।  कैसा है कार का केबिन केबिन फीचर्स की बात करें तो इसमें वेंटिलेटेड फ्रंट सीट, टोयोटा आई कनेक्ट, हेड-अप-डिस्प्ले (HUD) और 360 डिग्री कैमरा भी दिया गया है. कंपनी ने इसमें नई लेदरेट सीट अपहोल्स्ट्री दी है, जिससे कार का इंटीरियर पहले से ज्यादा प्रीमियम महसूस हो सकता है. इसके अलावा, अब फ्रंट सीट वेंटिलेशन का फीचर भी दिया गया है, जो गर्म मौसम में सफर को ज्यादा आरामदायक बनाने में मदद करेगा।  नई Glanza में वायरलेस फोन चार्जर भी दिया गया है. खास बात यह है कि इसके नीचे कूलिंग वेंट मिलता है, जो चार्जिंग के दौरान फोन को ठंडा रखने में मदद कर सकता है. म्यूजिक के शौकीनों के लिए कार में Clarion का 4-स्पीकर और 2-ट्वीटर वाला साउंड सिस्टम दिया गया है. इसके अलावा, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम (TPMS) और लेवल-2 ADAS फीचर्स भी शामिल किए गए हैं।  पिछले मॉडल की तरह 9-इंच टचस्क्रीन और ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल दिया जा रहा है. इसके अलावा ड्राइवर के लिए मोनोक्रोम हेड-अप डिस्प्ले दिया गया है, जबकि इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर में एनालॉग डायल्स के साथ कलर मल्टी-इन्फॉर्मेशन डिस्प्ले (MID) मिलता है. कार में ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल और पीछे बैठने वाले पैसेंजर्स के लिए AC वेंट्स भी दिए गए हैं।  मिलते हैं ये धांसू सेफ्टी फीचर्स सेफ्टी की बात करें तो कंपनी ने इसमें 6 एयरबैग को बतौर स्टैंडर्ड दिया है. जो कार के सभी वेरिएंट में उपलब्ध होगा. इसके अलावा टॉप वेरिएंट में एडवांस ड्राइविंग असिस्टेंस सिस्टम (ADAS), टेक बॉडी स्ट्रक्चर, इलेक्ट्रॉनिक ब्रेकफोर्स डिस्ट्रीब्यूशन (EBD) के साथ एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS), व्हीकल स्टेबिलिटी कंट्रोल (VSC), थ्री-प्वाइंटेड ELR सीट बेल्ट और इमरजेंसी स्टॉप सिग्नल्स जैसे फीचर्स दिए गए हैं।  लेवल-2 एडवांस ड्राइविंग असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) पैकेज में कंपनी ने एडॉप्टिव क्रूज कंट्रोल, ऑटोमेटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग, लेन कीप असिस्ट और हाई-बीम असिस्ट जैसे फीचर्स को शामिल किया है. जो कि इस कार की ड्राइविंग को सेफ बनाने में मदद करते हैं।