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Regular, Premium या Racing Fuel? ₹82 से ₹170 तक बिक रहे 5 तरह के पेट्रोल का फर्क समझिए

नई दिल्ली इंडियन ऑटो मार्केट एक बड़े फ्यूल ट्रांजिशन के दौर से गुजर रहा है, जहां ट्रेडिशनल फॉसिल फ्यूल की जगह तेजी से इथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल को चलन में लाया गया है. प्रदूषण कम करने और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने के लिए सरकार ने देश में कई तरह के पेट्रोल ऑप्शन को बेचने शुरू कराया है. आज भारतीय मार्केट में नॉर्मल ऑक्टेन रेटिंग से लेकर हाई-परफॉर्मेंस और फ्लेक्स-फ्यूल कैटेगरी के कुल 5 पेट्रोल ऑप्शन बिक रहे हैं।  आपकी गाड़ी के इंजन, उसकी क्षमता और पर्यावरण के प्रति आपकी जिम्मेदारी के आधार पर इन फ्यूल्स को अलग-अलग कैटेगरी में रखा गया है और इनकी कीमतों में भी काफी ज्यादा अंदर है. आइए, भारत में उपलब्ध E20 से लेकर E85 तक के सभी प्रकार के पेट्रोल के बारे में जानते हैं. ये किस तरह की गाड़ियों के लिए हैं और इनकी फिलहाल कीमत क्या है? ये भी जानेंगे।  1. रेगुलर पेट्रोल (E20 – 91 Octane) ये भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाला सामान्य पेट्रोल है, जिसका इस्तेमाल हर आम बाइक, स्कूटर और कार में होता है. देश के सभी पेट्रोल पंपों पर अब ये फ्यूल 20% इथेनॉल मिश्रण यानी E20 स्टैंडर्ड के साथ ही मिल रहा है. 91 ऑक्टेन रेटिंग वाला ये पेट्रोल रोजमर्रा की शहर में ड्राइविंग और ईको-फ्रेंडली सफर के लिए सबसे सस्ता और व्यावहारिक विकल्प है. दिल्ली में इसकी कीमत फिलहाल ₹102.12/लीटर है।  2. प्रीमियम पेट्रोल (E20 – 95 Octane) इंडियन ऑयल का XP95 और हिंदुस्तान पेट्रोलियम का Power Petrol इस कैटेगरी में आते है. ये भी E20 स्टैंडर्ड (20% इथेनॉल) पर ही बेस्ड है, लेकिन इसकी ऑक्टेन रेटिंग 95 होती है. इसमें स्पेशल डिटर्जेंट एडिटिव्स मिले होते हैं जो इंजन के वाल्व को साफ रखते हैं. ये मॉडर्न टर्बो-पेट्रोल कारों और प्रीमियम स्कूटर्स के लिए बेहतरीन माइलेज और स्मूथ परफॉर्मेंस देता है. दिल्ली में इसकी कीमत फिलहाल ₹109.24/लीटर है।  3. सुपर-प्रीमियम पेट्रोल (0% Ethanol – 100 Octane) इंडियन ऑयल का XP100 इस कैटेगरी का सबसे बड़ा उदाहरण है. ये भारत का इकलौता पेट्रोल है, जो पूरी तरह से इथेनॉल-मुक्त (0% Ethanol) होता है और इसकी ऑक्टेन रेटिंग 100 होती है. ये फ्यूल बेहद महंगा है और इसे खासतौर पर सुपरकार्स, रेसिंग बाइक्स और विंटेज कारों के लिए तैयार किया गया है, ताकि उनके इंजनों को अधिकतम पावर मिल सके. दिल्ली में इसकी कीमत फिलहाल ₹170/लीटर है।  4. E85 पेट्रोल (Flex-Fuel) इसे फिलहाल फ्यूचर फ्यूल के हिसाब से देखा जा रहा है. E85 पेट्रोल केवल फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल्स (FFVs) के लिए पेश किया गया है. इसमें 85% तक इथेनॉल और सिर्फ 15% पेट्रोल होता है. टोयोटा, मारुति और हीरो मोटोकॉर्प ने मार्केट में E85 पर चलने वाले कुछ मॉडल्स उतारे हैं. ये पर्यावरण के लिए बेहद सुरक्षित और रेगुलर पेट्रोल से काफी सस्ता है, लेकिन इसे सिर्फ फ्लेक्स-फ्यूल इंजन वाली गाड़ियों में ही डाला जा सकता है. दिल्ली में इसकी कीमत फिलहाल ₹82.12/लीटर है।  5. E100 (प्योर इथेनॉल फ्यूल) केंद्रीय परिवहन मंत्रालय के सहयोग से भारत में E100 यानी 100% शुद्ध इथेनॉल ईंधन को भी हरी झंडी मिल चुकी है. ये पूरी तरह से गन्ने, मक्के और कृषि अपशिष्ट से बनने वाला बायोफ्यूल है, जिसमें पेट्रोल की एक बूंद भी नहीं होती. वर्तमान में चुनिंदा पायलट प्रोजेक्ट्स और विशेष रूप से डिजाइन की गई फ्लेक्स-फ्यूल बाइक्स और कारों में इसे इस्तेमाल किया जा रहा है. इसकी कीमत अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। 

शानदार तेजी के साथ खुला शेयर बाजार, सेंसेक्स 650 अंक और निफ्टी 200 अंक की छलांग

मुंबई  हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को शेयर मार्केट में खुलते ही उछाल देखा गया. 650 अंक या 0.84 प्रतिशत की उछाल के साथ 78,152.34 के स्तर पर खुला, जबकि निफ्टी लगभग 200 अंक या 0.83 प्रतिशत की बढ़त लेकर 24,375.65 पर ओपन हुआ. आईटी, मेटल, फार्मा और केमिकल शेयरों में जोरदार खरीदारी के दम पर बेंचमार्क सूचकांकों में करीब 1-1 फीसदी की तेजी दर्ज की गई. हालांकि कुछ मिनटों के भीतर बाजार थोड़ा स्थिर दिखा. सुबह 9:23 बजे निफ्टी 50 करीब 173 अंकों के उछाल के साथ 24,352 पर ट्रेड करता दिखा, जबकि सेंसेक्‍स 542 अंकों के उछाल के साथ 78,042 के लेवल पर कारोबार करता दिखा।  रुपये में भी लगातार मजबूती देखी जा रही है. शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय करेंसी रुपया डॉलर के मुकाबले 18 पैसे चढ़कर 95.17 के लेवल पर कारोबार करता दिखा।  बाजार की शुरुआती बड़ी बातें मुंबई शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स सुबह 650 अंक या 0.84 प्रतिशत की भारी उछाल के साथ 78,152.34 के स्तर पर खुला. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी लगभग 200 अंक या 0.83 प्रतिशत की मजबूती लेकर 24,375.65 के स्तर पर खुला. बाजार के इस शुरुआती उछाल से निवेशकों ने कुछ ही मिनटों में मोटी कमाई की।  सेक्टर्स का हाल: कहां रही तेजी, कहां मंदी? बाजार को ऊपर ले जाने में आज आईटी कंपनियों ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई।  आईटी और मेटल में धूम: निफ्टी आईटी इंडेक्स में करीब 2 प्रतिशत की बड़ी तेजी देखी गई. इसके साथ ही मेटल (धातु) इंडेक्स भी 1.66 प्रतिशत ऊपर चढ़ गया।  छोटे और फार्मा शेयर चमके: छोटे आईटी और टेलीकॉम शेयरों के साथ-साथ केमिकल इंडेक्स में 0.82 प्रतिशत और फार्मा इंडेक्स में 0.72 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई. छोटे और मझोले शेयरों में भी निवेशकों ने जमकर पैसा लगाया।  यहां दिखा दबाव: इस चौतरफा तेजी के बीच बैंकिंग सेक्टर में थोड़ी सुस्ती रही. सरकारी बैंकों का इंडेक्स (Nifty PSU Bank) 0.87 प्रतिशत गिर गया. इसके अलावा टाटा मोटर्स, एनटीपीसी, एसबीआई और एक्सिस बैंक जैसे बड़े शेयरों में गिरावट देखने को मिली।  उतार-चढ़ाव में आई कमी बाजार में जोखिम और डर को मापने वाला पैमाना यानी 'इंडिया विक्स' (India VIX) आज 1.62 प्रतिशत गिरकर 12.09 के स्तर पर आ गया. इसका घटना इस बात का संकेत है कि बाजार में अभी घबराहट कम है और स्थिरता बढ़ रही है।  बाजार के जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार का रुख सकारात्मक बना रहेगा, लेकिन निवेशकों को थोड़ा सावधान भी रहना चाहिए।  निफ्टी के लिए जरूरी स्तर: विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी का 24,000 के ऊपर बने रहना बहुत जरूरी है. अगर यह इसके ऊपर टिका रहता है, तो तेजी का दौर जारी रहेगा. बाजार के लिए पहला बड़ा अवरोध 24,300 और फिर 24,450 पर है।  गिरावट पर यहां है सहारा: अगर बाजार में कोई बड़ी गिरावट आती है, तो 24,050 का स्तर एक मजबूत सपोर्ट (सहारा) का काम करेगा. यदि यह स्तर भी टूटता है, तो निफ्टी 23,900 तक नीचे जा सकता है।  विशेषज्ञों ने यह भी सलाह दी है कि दुनिया भर के बाजारों में टेक और सेमीकंडक्टर शेयरों में चल रही बिकवाली पर नजर रखें, क्योंकि इसका असर भारतीय आईटी कंपनियों पर भी पड़ सकता है।  आईटी सेक्‍टर्स में ज्‍यादा उछाल  सेक्टर के लिहाज से बात करें तो निफ्टी आईटी (Nifty IT) में करीब 2 फीसदी का उछाल देखा गया, जबकि निफ्टी मेटल (Nifty Metal) 1.66 फीसदी मजबूत हुआ. इसके अलावा निफ्टी मिडस्मॉल आईटी एंड टेलीकॉम, केमिकल्स और फार्मा सूचकांकों में क्रमशः 1 फीसदी, 0.82 फीसदी और 0.72 फीसदी से अधिक की तेजी रही।  इसके विपरीत, निफ्टी पीएसयू बैंक (Nifty PSU Bank) इंडेक्स में 0.87 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. निफ्टी 50 के शेयरों में टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स (TMPV), एनटीपीसी (NTPC), एसबीआई (SBI) और एक्सिस बैंक (Axis Bank) सबसे ज्यादा नुकसान में रहने वाले शेयरों में शामिल थे।  व्यापक बाजार (Broader Market) में भी मजबूती बनी रही. निफ्टी स्मॉलकैप 50 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांकों में क्रमशः 0.48 प्रतिशत और 0.46 प्रतिशत की बढ़त देखी गई. वहीं, निफ्टी 100 में 0.46 प्रतिशत और निफ्टी 500 में 0.41 प्रतिशत की तेजी आई. बाजार में उतार-चढ़ाव को दर्शाने वाला सूचकांक 'इंडिया विक्स' (India VIX) 1.62 फीसदी गिरकर 12.09 के स्तर पर आ गया।  एक्‍सपर्ट्स का क्‍या कहना है?  मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, शॉर्ट टर्म के लिए बाजार का नजरिया सतर्कता के साथ सकारात्मक (Cautiously Optimistic) बना हुआ है. विशेषज्ञों का कहना है कि निफ्टी के लिए 24,000 के स्तर से ऊपर बने रहना व्यापक रूप से तेजी के ट्रेंड को सकारात्मक रखता है. बाजार के लिए तात्कालिक रुकावट (Immediate Resistance) 24,300 पर है, जिसके बाद अगला रेजिस्टेंस 24,450 पर देखा जा रहा है।  गिरावट की स्थिति में 24,050 एक महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल (Key Support Level) बना हुआ है. अगर यह स्तर टूटता है, तो बाजार में 23,900 की तरफ एक सुधारात्मक गिरावट (Correction) आ सकती है।  एक्सपर्ट्स ने यह भी सलाह दी है कि निवेशकों को वैश्विक स्तर पर तकनीकी शेयरों में चल रही बिकवाली (Global Technology Sell-off) पर नजर रखनी चाहिए. सेमीकंडक्टर शेयरों में दोबारा कमजोरी आने से घरेलू आईटी शेयरों में हालिया तेज रैली के बाद मुनाफावसूली (Profit Booking) देखने को मिल सकती है।  कमोडिटी और वैश्विक बाजारों के संकेत  अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) 0.77 प्रतिशत बढ़कर 72.36 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 0.68 प्रतिशत की बढ़त के साथ 70 डॉलर प्रति बैरल के नीचे बना रहा।  एशियाई बाजारों में भी आज ज्यादातर शेयर बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे, जहां निक्केई (Nikkei), हैंगसेंग (Hang Seng) और कोस्पी (KOSPI) में 3 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई।  इससे पहले, तकनीकी शेयरों में बिकवाली के कारण कल रात अमेरिकी बाजार (Wall Street) गिरावट के साथ बंद हुए थे. वहां नैस्डैक (Nasdaq) 0.80 प्रतिशत टूट गया था, जबकि एसएंडपी 500 (S&P 500) बिना किसी खास बदलाव के सपाट बंद हुआ था। 

‘भारत में रहती तो CEO नहीं बनती’… इंदिरा नूयी के बयान ने मचाया बवाल, चीन की जमकर की सराहना

 कैलिफोर्निया पेप्सिको की पूर्व सीईओ इंदिरा नूयी ने भारत को लेकर बेहद तीखे बयान दिए हैं। भारतीय मूल की इंदिरा नूयी ने एक इंटरव्यू में चीन को भारत की तुलना ज्यादा सुविधाजनक बताया है। उन्होंने भारत की कार्यसंस्कृति और सामाजिक व्यवस्था की भी तीखी आलोचना की है। इंदिरा नूयी ने 'हूवर इंस्टिट्यूशन' के एक विशेष इंटरव्यू में लीडरशिप, अपने अमेरिकी सफर और भारत को लेकर कई बेबाक और दिलचस्प टिप्पणियां की हैं। भारत में होती तो इतनी बड़ी कंपनी की CEO नहीं बन पाती नूयी ने अमेरिका के 'मेरिटोक्रेटिक' यानी योग्यता आधारित सिस्टम की तारीफ करते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि अगर वह अमेरिका नहीं आतीं, तो शायद इस मुकाम तक नहीं पहुंच पातीं। भारत की सामाजिक और कॉर्पोरेट व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल उठाते हुए नूयी ने दावा किया कि उनके जैसी सफलता भारत में रहकर हासिल करना मुमकिन नहीं था। उन्होंने कहा, "एक अप्रवासी अपनी जेब में बिना कुछ लिए आता है और एक प्रतिष्ठित अमेरिकी कंपनी का CEO बन जाता है… ऐसा दुनिया के किसी और देश में नहीं हो सकता। मैं दुनिया के किसी भी अन्य देश में, यहां तक कि भारत में भी कभी सीईओ नहीं बन सकती थी।" चीन की तारीफ, भारत को बताया 'गंदा' एक यात्री के तौर पर चीन और भारत की तुलना करते हुए नूयी ने कहा कि चीन बहुत 'सजातीय' और व्यवस्थित है, जबकि भारत पूरी तरह से 'अराजक' है। उन्होंने कहा, "चीन में काफी हद तक एक जैसी संस्कृति और लोग हैं। एक पर्यटक के तौर पर भारत की तुलना में चीन में समय बिताना आसान है। अगर आपको साफ-सुथरी और व्यवस्थित जिंदगी पसंद है, तो भारत में रहना आपके लिए नामुमकिन होगा। भारत की खूबसूरती उसकी अव्यवस्था में ही है। अगर आपको यह अव्यवस्था पसंद आती है, तो आप बार-बार यहां आना चाहेंगे।" उन्होंने सड़क पर कारों के बीच चलती गायों का उदाहरण देते हुए कहा कि जो लोग सिर्फ साफ-सफाई और व्यवस्था पसंद करते हैं, उनके लिए भारत को समझना मुश्किल होगा, लेकिन भारतीय लोग इसी तरह की अव्यवस्था के बीच रास्ते निकालना जानते हैं। 60 और 70 के दशक का भारत और महिलाओं की स्थिति अपने शुरुआती जीवन को याद करते हुए नूयी ने बताया कि औपनिवेशिक शासन के बाद का युवा भारत कैसा था। उनका जन्म भारत की आजादी के सात-आठ साल बाद हुआ था। उन्होंने बताया, "60 और 70 के दशक में भारत एक नया देश था और उस समय महिलाएं समाज में कोई बड़ी ताकत नहीं थीं। अधिकांश महिलाएं घर पर ही रहती थीं।" हालांकि, उन्होंने अपने परिवार का जिक्र करते हुए कहा कि उनके पिता और दादा ने उन्हें "दुनिया जीतने और बड़े सपने देखने" के लिए प्रेरित किया, जिसने उन्हें अमेरिका जाने का साहस दिया। भारतीय लोकतंत्र: धीमी प्रगति, लेकिन यही इसकी ताकत है नूयी ने चीन के सेंट्रलाइज्ड विकास मॉडल और भारतीय लोकतंत्र की तुलना करते हुए बेहद दिलचस्प विश्लेषण किया। उन्होंने माना कि चीन ने सेंट्रलाइज्ड व्यवस्था के कारण लाखों लोगों को गरीबी से निकाला और एक सुपरपावर बना। वहीं भारत को लेकर उन्होंने कहा, "भारत अभी भी एक विश्व शक्ति बनने के लिए संघर्ष कर रहा है क्योंकि वहां लोकतंत्र का शासन है और जब हर किसी के पास वोट और अपनी बात कहने का अधिकार होता है, तो प्रगति धीमी होती है।" हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें भारत के लोकतांत्रिक होने पर खुशी है क्योंकि सत्तावादी शासनों के पास 'सत्ता के शांतिपूर्ण हस्तांतरण' का कोई तंत्र नहीं होता है, जो उनका सबसे बड़ा नुकसान है। उन्होंने एक बेहतरीन उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका की तरह भारत के हर छोटे-बड़े कस्बे में एक 'कोर्टहाउस' होता है, जो लोगों को यह भरोसा देता है कि उनके पास अधिकार हैं। चीन में ऐसा नहीं है क्योंकि वहां सरकार ही नियम बनाती और फैसला करती है। भारत-अमेरिका संबंध: स्वाभाविक भागीदार भारत और अमेरिका के रिश्तों को लेकर नूयी ने दोनों देशों को एक-दूसरे का 'नेचुरल पार्टनर' बताया। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जिसकी 50% से अधिक आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है। इसके साथ ही यहां दुनिया की सबसे बड़ी अंग्रेजी बोलने वाली आबादी है। उनके अनुसार, सॉफ्टवेयर, इंजीनियरिंग और AI के क्षेत्र में भारतीय प्रतिभाएं दुनिया के भविष्य के लिए बेहद अहम होने जा रही हैं। दोनों देशों के संबंधों में उतार-चढ़ाव पर उन्होंने सलाह दी कि, "अमेरिका और भारत के नेताओं को कोई भी कड़ा कदम उठाने या ईगो में आने से पहले एक-दूसरे की जगह खुद को रखकर सोचना चाहिए।" भू-राजनीति और चीन के बढ़ते प्रभाव पर बात करते हुए नूयी ने भारत की सुरक्षा को अमेरिकी हितों के लिए जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि जब चीन के साथ जियो-पॉलिटिकल रेस की बात आती है, तो भारत एक धुरी बन जाता है। नूयी ने कहा, "यह देखते हुए कि भारत कितने 'खराब पड़ोस' में है, यह बेहद अहम है कि अमेरिका भारत की रक्षा करे और वहां लोकतंत्र को फलने-फूलने दे। कौन हैं इंदिरा नूयी? इंदिरा नूयी भारतीय मूल की एक बेहद प्रभावशाली अमेरिकी बिजनेस एग्जीक्यूटिव हैं। उन्हें मुख्य रूप से दुनिया की सबसे बड़ी फूड और बेवरेज कंपनियों में से एक, पेप्सिको की पूर्व सीईओ और चेयरपर्सन के रूप में उनके शानदार नेतृत्व के लिए जाना जाता है। शादी से पहले उनका नाम इंदिरा कृष्णमूर्ति था। उनका जन्म 28 अक्टूबर 1955 को तमिलनाडु के मद्रास (अब चेन्नई) में हुआ था। उन्होंने 1975 में मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स में ग्रेजुएशन किया। इसके बाद 1976 में भारत के प्रतिष्ठित IIM कलकत्ता से पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम (MBA) पूरा किया। 1978 में वह उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चली गईं। 1980 में उन्होंने प्रतिष्ठित Yale School of Management से पब्लिक और प्राइवेट मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री हासिल की। अपने शुरुआती दिनों में पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए उन्होंने रिसेप्शनिस्ट के तौर पर भी नाइट शिफ्ट में काम किया था। येल से पढ़ाई के बाद उन्होंने बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG), मोटोरोला और आसिया ब्राउन बोवेरी (ABB) जैसी दिग्गज कंपनियों में काम किया। उन्होंने रणनीतिक योजना के प्रमुख के रूप में 1994 में पेप्सिको जॉइन किया और कंपनी की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाई। 2006 … Read more

Antitrust Case: Google हारा बड़ा कानूनी मुकदमा, EU कोर्ट ने ₹4.1 लाख करोड़ के जुर्माने को बरकरार रखा

 नई दिल्ली गूगल को यूरोप में एक बड़ा कानूनी झटका लगा है. यूरोपीय संघ (EU) की सबसे बड़ी अदालत ने एंड्रॉयड से जुड़े एंटीट्रस्ट मामले में गूगल की अपील खारिज कर दी है। इसके साथ ही कंपनी पर लगाया गया 4.1 अरब यूरो (करीब 4.10 लाख करोड़ रुपये) का रिकॉर्ड जुर्माना बरकरार रहेगा. यह मामला पिछले आठ साल से चल रहा था।  यह जुर्माना पहली बार 2018 में यूरोपीय आयोग (European Commission) ने लगाया था. आयोग का आरोप था कि Google ने Android ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल करके अपने सर्च और क्रोम ब्राउज़र को बढ़ावा दिया और दूसरी कंपनियों के लिए कंपटीशन करना मुश्किल बना दिया।  उस समय कंपनी पर 4.34 अरब यूरो का जुर्माना लगाया गया था. बाद में 2022 में एक निचली अदालत ने इसे घटाकर 4.1 अरब यूरो कर दिया, लेकिन जुर्माना खत्म नहीं किया. अब EU की सर्वोच्च अदालत ने भी इसी फैसले को सही माना है।  अदालत ने कहा कि गूगलग और उसकी पैरेंट कंपनी Alphabet की अपील खारिज की जाती है. कोर्ट के मुताबिक, एंड्रॉयड से जुड़े समझौतों के जरिए गूगल ने अपने प्रभुत्व का गलत फायदा उठाया और बाजार में कंपटीशन को प्रभावित किया।  गूगल पर क्या आरोप हैं? यूरोपीयन यूनियन का कहना था कि गूगल स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों से ऐसी शर्तें रखता था, जिनके तहत गूगल प्ले स्टोर का लाइसेंस लेने के लिए गूगल सर्च और क्रोम को पहले से इंस्टॉल करना जरूरी होता था।  आयोग का मानना था कि इससे दूसरे सर्च इंजन और ब्राउज़र को बराबरी का मौका नहीं मिला और एंड्रॉयड बाजार में गूगल की पकड़ और मजबूत होती गई।  गूगल ने इस फैसले पर निराशा जताई है. कंपनी का कहना है कि एंड्रॉयड एक ओपन और फ्री प्लेटफॉर्म है, जिसने मोबाइल इंडस्ट्री में कंपटीशन बढ़ाने और हजारों कंपनियों को कारोबार करने का मौका दिया है।  गूगल का यह भी कहना है कि अदालत ने एंड्रॉयड को खुला और सभी के लिए उपलब्ध बनाए रखने में कंपनी के निवेश को पर्याप्त महत्व नहीं दिया। यह फैसला Google के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि पिछले कुछ सालों में यूरोप ने कंपनी पर कई एंटी ट्रस्ट मामलों में कार्रवाई की है. एंड्रॉयड केस के अलावा गूगल शॉपिंग और ऑनलाइन ऐड्स से जुड़े मामलों में भी कंपनी को अरबों यूरो के जुर्माने का सामना करना पड़ा है।  यूरोपीयन यूनियन लगातार बड़ी टेक कंपनियों पर कड़ी निगरानी रख रहा है और उनका मानना है कि बाजार में निष्पक्ष कंपटीशन बनाए रखने के लिए ऐसे कदम जरूरी हैं। इस फैसले के बाद Android मामले में Google की कानूनी लड़ाई लगभग खत्म हो गई है और कंपनी को 4.1 अरब यूरो का जुर्माना भरना होगा. यह अब भी यूरोप में किसी टेक कंपनी पर लगाए गए सबसे बड़े एंटीट्रस्ट जुर्मानों में से एक है। 

शेयर बाजार में जोरदार उछाल, इन 3 कारणों से Sensex-Nifty ने भरी उड़ान, IT शेयरों का जलवा

मुंबई   अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत और कच्चे तेल में गिरावट सेघरेलूशेयर बाजार में आज लगातार दूसरे दिन तेजी आई है। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 500 अंक उछल गया जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी50 इंडेक्स भी 24,150 के करीब पहुंच गया। सुबह 9.40 बजे सेंसेक्स 493.71 अंक यानी 0.64% तेजी के साथ 77,416.35 अंक पर ट्रेड कर रहा था। निफ्टी भी 143.85 अंक यानी 0.60% ऊपर 24,149.70 अंक पर ट्रेड कर रहा है। रुपया शुरुआती कारोबार में मजबूत होकर 94.95 पर पहुंच गया। सेंसेक्स के 30 में से 19 शेयर तेजी के साथ खुले। देश की दूसरी बड़ी आईटी कंपनी इन्फोसिस के शेयरों में सबसे ज्यादा 3% तेजी रही। इसके अलावा एचसीएल टेक, टीसीएस और टेक महिंद्रा के शेयर भी 2% तक उछल गए। दूसरी ओर, बजाज फाइनेंस के शेयरों में 1% से ज्यादा गिरावट आई और यह बेंचमार्क इंडेक्स में सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाला शेयर रहा। ब्रॉडर बाजार का हाल ब्रॉडर बाजार में भी तेजी रही। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में लगभग 0.3% की तेजी आई। सेक्टर के हिसाब से देखें तो निफ्टी आईटी में सबसे ज्यादा 3% तेजी रही। वहीं, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी मेटल में लगभग 1-1% की तेजी आई। एनएसई पर लगभग 1,818 शेयरों में तेजी रही जबकि 586 शेयरों में गिरावट आई और 99 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। शेयर बाजार में तेजी के तीन कारण  अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत को लेकर पॉजिटिव सिग्नल का शेयर बाजार में तेजी के पीछे अहम रोल रहा. कतर ने कहा कि ईरान और अमेरिका ने Hormuz Strait को लेकर बातचीत आगे बढ़ाई है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के करीब 20 फीसदी हिस्से को संभालता है. इसके चलते विदेशी बाजारों में भी तेजी आई, तो गिफ्ट निफ्टी भी रफ्तार में नजर आया. इससे बाजार का सेंटीमेंट सुधरा।  दूसरी ओर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार जारी गिरावट ने बाजार की रफ्तार बढ़ाने में योगदान किया. बता दें कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें गिरकर 70 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई हैं।  इनके अलावा आईटी कंपनियों के शेयर खुलने के साथ ही बाजार की हीरो साबित हुए. बीएसई की लार्जकैप कैटेगरी में शामिल Infosys Share (4.60%), HCL Tech Share (3.80%), TCS SHare (3.05%), Tech Mahindra Share (3%) की तेजी लेकर कारोबार कर रहे थे. मिडकैप कैटेगरी में देखें, तो Coforge Share (4.70%), MPhasis Share (4.50%), Presistent Share (3.60%) की तेजी के साथ ट्रेड कर रहे थे।   बैंकिंग शेयर भी चमके मार्केट में तेजी के बीच सिर्फ आईटी शेयर ही नहीं, बल्कि बैंकिंग स्टॉक्स भी चमके. लार्जकैप में शआमिल ICICI Bank Share, HDFC Bank Share, SBI Share करीब 1 फीसदी की तेजी में दिखे. इसके अलावा सनफार्मा, अडानी पोर्ट्स से लेकर ट्रेंट और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसे कंपनियों के स्टॉक्स भी ग्रीन जोन में नजर आए।  कच्चे तेल में गिरावट इस बीच ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता में तेजी से कच्चे तेल की कीमत में गिरावट आई है। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स अभी 1.06 फीसदी नीचे $70.81 प्रति बैरल पर आ ट्रेड कर रहा है। दोनों देशों के प्रतिनिधि पिछले दो दिनों से कतर की राजधानी दोहा में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने और ईरान के फ्रीज किए गए फंड को जारी करने के बारे में चर्चा कर रहे हैं।

Tech Layoffs: Microsoft में एक और जॉब कट की आशंका, 5,000 कर्मचारियों पर लटक रही तलवार

नई दिल्ली Microsoft एक बार फिर बड़े स्तर पर कर्मचारियों की छंटनी की तैयारी कर रही है. रॉयटर्स ने बिजनेस इंसाइडर की रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि कंपनी अगले कुछ दिनों में हजारों कर्मचारियों की नौकरी खत्म कर सकती है।  हालांकि इस बार छंटनी का असर कंपनी के कुल कर्मचारियों के 2.5 प्रतिशत से कम लोगों पर पड़ने की उम्मीद है. माइक्रोसॉफ्ट के दुनियाभर में करीब 2.2 लाख कर्मचारी हैं. ऐसे में यह संख्या करीब 5 हजार या उससे कम हो सकती है।  रिपोर्ट्स के अनुसार इस बार सबसे ज्यादा असर सेल्स, कंसल्टिंग और Xbox गेमिंग डिविजन पर पड़ सकता है. कंपनी की तरफ से अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन कई क्रेडिबल रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि नए फाइनांशियल ईयर की शुरुआत के साथ यह फैसला लिया जा सकता है।  आखिर Microsoft फिर कर्मचारियों की छंटनी क्यों कर रही है? पिछले कुछ सालों में माइक्रोसॉफ्ट ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर रिकॉर्ड निवेश किया है. कंपनी OpenAI के साथ साझेदारी बढ़ा रही है, नए AI डेटा सेंटर बना रही है और Copilot जैसे AI प्रोडक्ट्स पर अरबों डॉलर खर्च कर रही है. ऐसे में दूसरी तरफ ऑपरेटिंग खर्च कम करने के लिए कंपनी लगातार अपने कर्मचारियों की संख्या घटा रही है।  रिपोर्ट में कहा गया है कि माइक्रोसॉफ्ट लागत कम करने के साथ-साथ अपने बिजनेस को AI के हिसाब से दोबारा तैयार करना चाहती है. यही वजह है कि जिन टीमों में ऑटोमेशन या AI की मदद से काम हो सकता है, वहां कर्मचारियों की संख्या कम की जा रही है।  Xbox टीम पर भी असर पड़ सकता है माइक्रोसॉफ्ट के गेमिंग बिजनेस यानी Xbox में भी बदलाव की तैयारी चल रही है. पिछले कुछ समय से Xbox के अंदर बड़े स्तर पर रीस्ट्रक्चरिंग की चर्चा है. नई लीडरशिप के आने के बाद बिजनेस को रीसेट करने की योजना बनाई जा रही है. इसी वजह से गेमिंग डिविजन में भी कई पद खत्म किए जा सकते हैं और कुछ टीमों का पुनर्गठन हो सकता है।  पहले भी हो चुकी है बड़ी छंटनी यह पहली बार नहीं है जब माइक्रोसॉफ्ट कर्मचारियों की संख्या घटा रही है. पिछले साल भी कंपनी ने अलग-अलग चरणों में हजारों कर्मचारियों की छंटनी की थी. उस समय भी कंपनी ने AI में निवेश बढ़ाने और खर्च कम करने को इसकी बड़ी वजह बताया था।  माइक्रोसॉफ्ट अकेली कंपनी नहीं है. 2026 में मेटा, ऐमेजॉन, ओरैकल, लिंक्डइन, कॉइनबेस, गूपऑन और कई दूसरी बड़ी टेक कंपनियां भी कर्मचारियों की संख्या कम कर चुकी हैं या इसकी घोषणा कर चुकी हैं. कई कंपनियां खुलकर कह चुकी हैं कि AI की वजह से काम करने का तरीका बदल रहा है और फ्यूचर में कम कर्मचारियों के साथ ज्यादा काम किया जाएगा। 

AI शेयरों में निवेश करने वालों के लिए अलर्ट! RBI ने बताया क्यों बढ़ रहा है खतरा

 नई दिल्‍ली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ी चेतावनी दी है. यह वॉर्निंग ग्‍लोबल मार्केट में AI की वजह से आई बड़ी गिरावट को लेकर है. केंद्रीय बैंक का कहना है कि ग्‍लोबल मार्केट में कॉरपोरेट अर्निंग में ग्रोथ के रिवैल्‍यूएशन और AI रिलेटेड स्‍टॉक के वैल्‍यूएशन के कारण आई गिरावट भारतीय बाजार को भी प्रभावित कर सकती है।  RBI ने अपनी फाइनेंशियल स्‍टैबिलिटी रिपोर्ट (FSR) में कहा है कि AI से रिलेटेड निवेश अब बॉन्‍ड मार्केट्स समेत बाकी कैपिटल मार्केट के अन्‍य सेक्‍टर्स में भी फैल रहे हैं. साउथ कोरिया, ताइवान और जापान समेत कई मार्केट्स में हाल ही में AI से सबंधित शेयरों में तेजी और उच्‍च अस्थिरता देखी गई थी।  रिपोर्ट में कहा गया है कि AI से संबंधित टेक कंपनियों के एक छोटे ग्रुप के कारण फोकस ज्‍यादा बना हुआ है, जो एआई को अपनाने में टॉप इकोनॉमी देशों या इसकी सप्‍लाई चेन में भाग लेने वाली अर्थव्‍यवस्‍थाओं में शेयर मार्केट के प्रदर्शन को तेजी से प्रभावित कर रहा है।  अमेरिकी बाजार में आ सकती है बड़ी गिरावट हाल ही में कुछ उभरते बाजारों के बेहतर प्रदर्शन की खास वजह व्‍यापक मजबूती के बजाय एआई से जुड़ी कंपनियां रही हैं. केंद्रीय बैंक ने कहा कि ये दोनों ही वित्तीय अस्थिरता के सोर्स बने हुए हैं, क्‍योंकि इन कंपनियों में बिकवाली से अमेरिका में व्‍यापक बाजार में गिरावट आ सकती है और आय संबंधी प्रभावों के माध्‍यम से अन्‍य बाजारों में भी इसका असर फैल सकता है।   लोन देने वाली कंपनियां भी हो सकती हैं प्रभावित आरबीआई के रिपोर्ट में कहा गया है कि जैसे-जैसे हाइपरस्केल कंपनियां घटते फ्री कैश फ्लो के बीच एआई बिल्डआउट पर कैपिटल एक्‍सपेंडेचर बढ़ा रही हैं , उन्होंने इन निवेशों को फंडिंग जारी के लिए पिछले दो वर्षों में बड़ा लोन लिया है. खर्च में और अधिक विस्तार होने के साथ ही लोन फंड में भी बढ़ोतरी होने की उम्‍मीद है. आरबीआई ने कहा कि इसलिए, एआई बेस्‍ड असेट वैल्‍यू में गिरावट इस चैनल के माध्यम से जोखिम पैदा कर सकती है, क्योंकि बैंक पर्सनल लोन फर्मों और एआई बूम को फंडिंग करने वाले अन्य फर्म भी प्रभावित हो सकते हैं।  एआई बबल की फटने की आशंका बढ़ी गौरतलब है कि अमेरिका में कई पैमानों पर इक्विटी वैल्‍यूवेशन के मापदंड ऐतिहासिक सीमा के ऊपरी स्‍तर पर बने रहे. वहीं आरबीआई के अनुसार, अमेरिकी इक्विटी बाजारों में बाकी विश्व का निवेश उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है, और मार्च 2020 में 7.5 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर मार्च 2026 में अमेरिकी इक्विटी में सकल विदेशी हिस्सेदारी 21 ट्रिलियन डॉलर हो गई है।  जबकि दक्षिण कोरिया का शेयर बाजार एक सप्ताह पहले 10% गिर गया, जिससे लोअर सर्किट लग गया और ट्रेडिंग रुक गई. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि एआई बबल के फटने की आशंकाएं बढ़ गईं. भारतीय बाजार समेत अन्य एशियाई बाजारों में भी गिरावट आई। 

भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बीच चार भारतीय कंपनियां अमेरिकी पाबंदी सूची से बाहर।

नई दिल्ली  भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर जल्दी ही सहमति बन सकती है। बताया जा रहा है कि यह फाइनल स्टेज में है। इससे पहले अमेरिका की ओर से भारतीय उद्योग जगत के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर आई है। अमेरिका ने अपनी उस पाबंदी सूची से चार भारतीय कंपनियों के नाम हटा दिए हैं, जिन पर रूस के सैन्य-औद्योगिक क्षेत्र को उन्नत तकनीक और उपकरण सप्लाई करने के आरोप लगे थे। अमेरिकी वित्त विभाग ने मंगलवार को इस फैसले की घोषणा की। इन कंपनियों को अमेरिकी विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) की विशेष रूप से नामित नागरिकों और अवरुद्ध व्यक्तियों (SDN) की सूची से पूरी तरह बाहर कर दिया गया है। Navbharat TimesRussian Oil Imports: दुनिया देखती रह गई और भारत ने चल दिया बड़ा दांव, जून में टूटा कच्चे तेल आयात का रिकॉर्ड, रूस ने मारी बाजी कौन सी हैं ये 4 भारतीय कंपनियां? प्रतिबंधों की सूची से हटाए गए नामों में दो कंपनियां हैदराबाद की, एक अहमदाबाद की और एक नई दिल्ली की है। इन चारों के नाम इस प्रकार हैं:     आरआरजी इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (हैदराबाद)     लोकेश मशीन्स लिमिटेड (हैदराबाद)     गैलेक्सी बियरिंग्स लिमिटेड (अहमदाबाद)     शौर्य एयरोनॉटिक्स प्राइवेट लिमिटेड (नई दिल्ली) इन कंपनियों पर क्या थे आरोप? साल 2024 में अमेरिका ने रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों को दरकिनार करने के आरोप में इन कंपनियों पर पाबंदियां लगाई थीं। अमेरिकी प्रशासन का दावा था कि ये कंपनियां रूस को दोहरे उपयोग वाले सामान और तकनीक भेज रही थीं, जिनका इस्तेमाल नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। गैलेक्सी बियरिंग्स लिमिटेड: अक्टूबर 2024 में इस कंपनी पर आरोप लगा था कि उसने रूसी संस्थाओं को रोलर बियरिंग्स और रोलर असेंबली जैसे दर्जनों संवेदनशील सामान निर्यात किए थे। शौर्य एयरोनॉटिक्स प्राइवेट लिमिटेड: इस कंपनी पर रूस को रडार उपकरण, रेडियो नेविगेशन सहायता उपकरण, रेडियो रिमोट कंट्रोल सिस्टम और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भेजने का आरोप था। आरआरजी इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजीज: अमेरिका ने आरोप लगाया था कि इस कंपनी ने ब्लैकलिस्टेड रूसी फर्म आर्टेक्स लिमिटेड को माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक की 100 से अधिक खेप भेजी थीं। लोकेश मशीन्स लिमिटेड: इस कंपनी पर विभिन्न रूसी मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को दर्जनों मशीन टूल्स निर्यात करने का आरोप लगाया गया था। क्या हैं इस फैसले के मायने? अमेरिकी सरकार ने फिलहाल इन कंपनियों को सूची से हटाने की कोई आधिकारिक वजह स्पष्ट नहीं की है। हालांकि, माना जा रहा है कि भारत सरकार द्वारा लगातार अमेरिकी प्रशासन के साथ किए गए कूटनीतिक संवाद और भारतीय कंपनियों द्वारा निर्यात नियमों के कड़ाई से पालन के आश्वासनों के बाद यह कदम उठाया गया है। कंपनियों के लिए बड़ी राहत अमेरिकी प्रतिबंधों की सूची में होने के कारण इन कंपनियों के वैश्विक व्यापार, बैंक लेनदेन और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर पूरी तरह रोक लग गई थी। ऐसा इसलिए क्योंकि वैश्विक वित्तीय प्रणालियां काफी हद तक अमेरिकी डॉलर और वहां के नियमों से जुड़ी हैं। अब पाबंदियां हटने के बाद ये कंपनियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामान्य रूप से अपना बिजनेस दोबारा शुरू कर सकेंगी।

LPG Cylinder Price: महंगाई के बीच खुशखबरी! महीने की शुरुआत में घटे गैस सिलेंडर के दाम

 नई दिल्ली LPG Price Cut: जुलाई महीने की शुरुआत हो गई है और ये राहत भरी है. दरअसल, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बड़ी कटौती की है. LPG Cylinder Price Cut 19 किलोग्राम वाले सिलेंडर पर किए गए हैं. ताजा रेट्स की बात करें, तो दिल्ली में 3,113 रुपये का मिलने वाला कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर अब सस्ता होकर 2,930 रुपये का रह गया है. इस हिसाब से गैस सिलेंडर की कीमत 183 रुपये घटाई गई है. हालांकि, इस बार भी घर की रसोई में इस्तेमाल होने वाले 14 Kg LPG Cylinder Price को स्थिर रखा गया है।  राहत भरी जुलाई की शुरुआत  ऑयल मार्केटिंग कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में संशोधन करती हैं और जुलाई महीने की शुरुआत राहत भरी रही है. बीते कुछ समय में मिडिल ईस्ट टेंशन के चलते कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में ताबड़तोड़ इजाफा किया गया था. अब 1 जुलाई 2026 को दिल्ली समेत अन्य शहरों में 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर का रेट कम कर दिया गया है. बता दें कि साल 2026 में ये पहली बार है जबकि तेल कंपनियों ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम घटाए हैं।  19 Kg LPG Cylinder की कीमत पर इस साल लगभग हर महीने महंगाई का बम फूटा था. शुरुआती महीने जनवरी में इसी कीमत 1691 रुपये प्रति सिलेंडर थी, जो कि लगातार बढ़ोतरी के बाद महंगा होता चला गया. बीते दो महीनों में देखें, तो मई ये 993 रुपये महंगा होकर पहली बार 3000 रुपये के पार पहुंचा था और जून की शुरुआत में भी ये 42 रुपये महंगा हुआ था. इसके बाद कमर्शियल सिलेंडर की कीमत दिल्ली में 3113.50 रुपये पहुंच गई थी।  कोलकाता से लखनऊ तक अब ये रेट  राजधानी दिल्ली के अलावा अन्य शहरों में 19 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में किए गए बदलाव की बात करें, तो कोलकाता में अब ये कमर्शियल  सिलेंडर 3255.50 रुपये से घटकर 3,081.50 रुपये का हो गया है. इसके अलावा अन्य शहरों की बात करें, तो उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अब कमर्शियल सिलेंडर का दाम 3,052.50 रुपये रह गया है, जबकि बिहार की राजधानी पटना में नई कीमत 3,227 रुपये पर आ गई है. सिलेंडर की नई कीमतें 1 जुलाई से लागू कर दी गई हैं।  घरेलू गैस सिलेंडर के नहीं बदले दाम  जहां एक ओर तेल कंपनियों ने कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में बड़ी कटौती करते हुए राहत दी है. तो वहीं घरेलू एलपीजी सिलेंडर (14 Kg LPG Cylinder) के दाम यथावत बने हुए हैं, यानी इनमें कोई चेंज नहीं किया गया है. दिल्ली में एलपीजी सिलेंडर का दाम 942 रुपये, कोलकाता में 968 रुपये है. तो वहीं मुंबई में 14 किलो वाला सिलेंडर 941.50 रुपये, जबकि चेन्नई में ये 957.50 रुपये का मिल रहा है। 

Gold-Silver Price Today: सोना-चांदी अचानक हुए महंगे, कीमतों में ₹8500 तक की तेज बढ़ोतरी

नई दिल्ली  सोने और चांदी में लगातार तीन हफ्तों से जारी गिरावट के बाद मंगलवार, 30 जून को अचानक उछाल (gold silver price) आया। दोपहर दो बजे के आसपास गोल्ड-सिल्वर में तेजी आई, जो वैश्विक बाजार कॉमेक्स और भारतीय घरेलू बाजार MCX पर भी देखी गई। कॉमेक्स पर सोना 2.60 डॉलर उछलकर 4040 डॉलर प्रति औंस के ऊपर पहुंच गया। जबकि चांदी में 1.52 फीसदी की तेजी आई और कीमत 60 डॉलर के करीब पहुंच गई। MCX पर कहां पहुंचे गोल्ड-सिल्वर के दाम? वहीं एमसीएक्स पर अगस्त डिलीवरी वाला सोना 1952 रुपए उछलकर 1,42,402 रुपए के दिन के हाई लेवल पर पहुंच गया। इस दौरान सोना 1,42,384 रुपए (gold price today) प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड करता दिखा। पिछले कारोबारी सत्र में सोना 1,42,402 रुपए (gold rate today) पर क्लोज हुआ था। चांदी की बात करें जुलाई डिलीवरी वाली चांदी में 8500 रुपए का जोरदार उछाल आया। खबर लिखे जाने तक चांदी 2.05 फीसदी यानी 4493 रुपए उछलकर 2,23,899 रुपए प्रति किलोग्राम (silver rate today) पर ट्रेड कर रही थी। इस दौरान इसका हाई लेवल 2,27,980 रुपए और लो लेवल 2,17,333 रुपए (silver price today) रहा। पिछले दिन यह 2,19,406 रुपए पर क्लोज हुई थी। यानी पिछले क्लोज और आज के हाई लेवल की तुलना करें चांदी में 8,574 रुपए महंगी हो गई।