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पिछले हफ्ते की गिरावट के बाद बाजार में दमदार वापसी, सेंसेक्स 400 अंक से ज्यादा चढ़ा

मुंबई  घरेलू शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों—सेंसेक्स और निफ्टी—में सोमवार को शुरुआती कारोबार में शानदार रिकवरी देखने को मिली है. पिछले कारोबारी सत्र में आई भारी गिरावट के बाद आज बाजार में यह तेजी कच्चे तेल की कीमतों में आई कमी और सकारात्मक वैश्विक संकेतों के दम पर आई है. इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की ओर से दोबारा शुरू हुई लिवाली और रिलायंस इंडस्ट्रीज व एचडीएफसी बैंक जैसी दिग्गज कंपनियों (ब्लू-चिप शेयरों) में खरीदारी से बाजार का सेंटिमेंट मजबूत हुआ है।  सेंसेक्स और निफ्टी की मजबूत शुरुआत शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसई (BSE) सेंसेक्स 407.12 अंक यानी 0.53% की छलांग लगाकर 77,210.02 अंक पर पहुंच गया. इसी तरह, 50 शेयरों वाला एनएसई (NSE) निफ्टी भी 114.75 अंक यानी 0.48% की बढ़त दर्ज करते हुए 24,129.95 के स्तर पर कारोबार कर रहा है. इससे पिछले सत्र (शुक्रवार) में सेंसेक्स 607.08 अंक गिरकर 76,802.90 पर और निफ्टी 154.90 अंक फिसलकर 24,013.10 पर बंद हुआ था।  इन दिग्गज शेयरों में रही सबसे ज्यादा तेजी सेंसेक्स की शीर्ष 30 कंपनियों में आज चौतरफा खरीदारी देखी जा रही है. प्रमुख बढ़त बनाने वाले शेयरों में रिलायंस इंडस्ट्रीज, टेक महिंद्रा, इंफोसिस, बजाज फाइनेंस, एचडीएफसी बैंक और एचसीएल टेक्नोलॉजीज शामिल हैं. इन हेवीवेट शेयरों में तेजी ने इंडेक्स को ऊपर खींचने में मुख्य भूमिका निभाई है. दूसरी ओर, कुछ चुनिंदा शेयरों में मुनाफावसूली भी देखने को मिली. गिरावट दर्ज करने वाले प्रमुख शेयरों में टाइटन, इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो), अडानी पोर्ट्स और आईटीसी (ITC) शामिल रहे।  वैश्विक और भू-राजनीतिक मोर्चे से मिली बड़ी राहत बाजार में आई इस तेजी के पीछे दो बड़े वैश्विक कारण काम कर रहे हैं. पहला, कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय मानक 'ब्रेंट क्रूड' की कीमत में 1.50 फीसदी की बड़ी गिरावट आई है और यह घटकर 79.36 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है, जो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए सकारात्मक है. दूसरा, भू-राजनीतिक तनाव में कमी आई है. स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में दो दिनों की वार्ता के बाद अमेरिका और ईरान के बीच अगले 60 दिनों के भीतर एक अंतिम समझौते पर पहुंचने का रोडमैप तैयार हो गया है, जिसकी पुष्टि मध्यस्थ देश कतर और पाकिस्तान ने की है।  मार्केट एक्सपर्ट की राय एक्सिस डायरेक्ट के रिसर्च हेड राजेश पालवी ने बताया, "इस सप्ताह की शुरुआत में वैश्विक संकेत काफी सहायक हैं. हालांकि अमेरिकी बाजार शुक्रवार को 'जूनटींथ' की छुट्टी के कारण बंद थे, लेकिन गुरुवार को टेक और सेमीकंडक्टर शेयरों के दम पर नैस्डैक और एसएंडपी 500 में आई तेजी का सकारात्मक असर आज भारतीय बाजारों पर स्पष्ट रूप से दिख रहा है। 

RBI हॉलिडे कैलेंडर: मुहर्रम और वीकेंड के चलते जून में कई दिन बंद रहेंगे बैंक

नई दिल्ली अगर अगले सप्ताह बैक से जुड़े कामकाज करने के लिए ब्रांच जाने की योजना बना रहे हैं तो ये खबर आपके लिए है। दरअसल, आज 22 जून से 28 जून 2026 के बीच चार दिन बैंक बंद रहेंगे। बता दें कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने इस महीने राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और धार्मिक छुट्टियों के कारण कुल 11 छुट्टियों की लिस्ट जारी की है। इसमें दूसरे शनिवार, चौथे शनिवार और सभी रविवार की छुट्टियां भी शामिल हैं। हालांकि, कुछ बैंक की छुट्टियां राज्यों या क्षेत्रों के हिसाब से अलग होती हैं लेकिन सरकारी राष्ट्रीय छुट्टियों के दिन देश भर में बैंक की शाखाएं बंद रहेंगी। अगले हफ्ते कब-कब है छुट्टियां RBI के हॉलीडे कैलेंडर के मुताबिक अगले सप्ताह 25, 26, 27 और 28 जून को बैंक बंद रहेंगे। 25 और 26 जून को मुहर्रम के कारण देश के कई इलाकों में बैंक बंद रहेंगे। 25 जून को विजयवाड़ा में बैंक बंद रहेंगे। वहीं, 26 जून को अगरतला, आइजोल, बेलापुर, बेंगलुरु, भोपाल, चेन्नई, हैदराबाद, जम्मू, कानपुर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई, नागपुर, नई दिल्ली, पटना, रायपुर, रांची और श्रीनगर में बैंक बंद रहेंगे। 27 जून को पूरे देश में बैंक बंद रहेंगे क्योंकि यह चौथा शनिवार है और 28 जून को रविवार है। जून 2026 का छुट्टियों का कैलेंडर 15 जून को यंग मिजो एसोसिएशन (YMA) की स्थापना के उपलक्ष्य में आइजोल में बैंक बंद रहेंगे। राजा संक्रांति के कारण भुवनेश्वर में भी इस दिन बैंक बंद रहेंगे। वहीं, 25 जून को मुहर्रम के कारण विजयवाड़ा में बैंक बंद रहेंगे। इसके अलावा, 26 जून को मुहर्रम के कारण अगरतला, आइजोल, बेलापुर, बेंगलुरु, भोपाल, चेन्नई, हैदराबाद, जम्मू, कानपुर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई, नागपुर, नई दिल्ली, पटना, रायपुर, रांची और श्रीनगर में बैंक का कामकाज बंद रहेगा। वहीं, 29 जून को संत गुरु कबीर जयंती मनाने के लिए शिमला में बैंक बंद रहेंगे। इसी तरह, 30 जून को रेमना नी नामक क्षेत्रीय सार्वजनिक अवकाश के कारण आइजोल में बैंक बंद रहेंगे। शनिवार और रविवार को छुट्टियां रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों के अनुसार, सभी शेड्यूल्ड और नॉन-शेड्यूल्ड बैंक महीने के हर दूसरे और चौथे शनिवार और हर रविवार को अनिवार्य रूप से बंद रहते हैं। इसका मतलब है कि इन दिनों ग्राहक ब्रांच में मिलने वाली सेवाओं का लाभ नहीं उठा पाएंगे। बता दें कि इस महीने में कुल चार रविवार हैं, इसलिए बैंक 7, 14, 21 और 28 जून को बंद रहेंगे। रविवार के अलावा बैंक 13 जून (दूसरा शनिवार) और 27 जून (चौथा शनिवार) को भी बंद रहेंगे।

6 साल में 75 लाख से ज्यादा लाभार्थियों को मिला फायदा, डिजिटल लेन-देन को मिला बढ़ावा

 नई दिल्ली नरेंद्र मोदी सरकार की कई ऐसी योजनाएं हैं जिसके जरिए लोगों को आत्मनिर्भर बनाने की कवायद चल रही है। इसी के तहत सरकार ने एक योजना-प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (PM SVANidhi) को शुरू किया है। इस योजना के तहत लोगों को 50 हजार रुपये तक का लोन दिया जाता है। सरकार समय पर लोन चुकाने वाले लाभार्थियों को 7 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी भी देती है। आइए योजना के बारे में विस्तार से जान लेते हैं। योजना की खास बातें योजना के तहत बिना किसी गारंटी के 15000 रुपये, 25000 रुपये और 50000 रुपये के लोन दिए जाते हैं। ये लोन तीन चरणों में दिए जाते हैं। पहले चरण के तहत भुगतान करने वाले लाभार्थी को ही दूसरे चरण में 25 हजार और तीसरे चरण में 50 हजार रुपये मिलते हैं। इस योजना के तहत सरकार लाभार्थियों को यूपीआई -लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड की भी सुविधा दे रही है। जो विक्रेता दूसरे चरण का लोन सफलतापूर्वक चुका देते हैं, वे 30000 रुपये तक की सीमा वाले यूपीआई -लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड के लिए पात्र होते हैं। इसके अलावा, स्ट्रीट वेंडरों को खुदरा/थोक डिजिटल ट्रांजैक्शन के लिए 1,600 रुपये तक के कैशबैक प्रोत्‍साहन दिए जाते हैं। कोरोना के दौरान हुई थी शुरुआत सरकार ने PM SVANidhi योजना की शुरुआत कोरोना के पहले चरण के दौरान की थी। शुरुआत में इसका उद्देश्य कोविड-19 महामारी से प्रभावित स्ट्रीट वेंडर्स की आजीविका को फिर से पटरी पर लाना था लेकिन बाद में इसकी लोकप्रियता को देखते हुए योजना का विस्तार किया गया। सरकार ने इसे आगे बढ़ाते हुए लाखों अतिरिक्त लाभार्थियों को शामिल करने का फैसला किया है। मई 2026 में सरकार की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में 75.5 लाख से अधिक लाभार्थियों ने 1.12 करोड़ से ज्यादा लोन लिए हैं, जिनकी कुल रकम 17,800 करोड़ रुपये से अधिक है। इस योजना के तहत 55 लाख से ज्यादा लाभार्थियों को डिजिटल माध्यम से जोड़ा गया है। एक साथ मिलकर, उन्होंने लगभग 8.96 लाख करोड़ रुपये के 841 करोड़ से अधिक डिजिटल ट्रांजैक्शन किए हैं। पीएम स्‍वनिधि के तहत लाभार्थियों को डिजिटल कैशबैक प्रोत्‍साहन और ब्याज सब्सिडी के जरिए लगभग 800 करोड़ रुपये भी मिले हैं। 6 साल हो चुके पूरे बीते एक जून को ही प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि योजना के 6 साल पूरे हुए हैं। इस मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि PM स्वनिधि ने बिना किसी गारंटी के लोन, वित्तीय समावेश और विकास के नए मौकों तक पहुंच सुनिश्चित करके अनगिनत स्ट्रीट वेंडर्स (सड़क किनारे सामान बेचने वालों) की जिंदगी बदल दी है। बता दें कि इस योजना को मार्च 2030 तक बढ़ा दिया गया है। 75% या 100%, इमरजेंसी में PF की रकम निकालने की क्या है नई लिमिट? मुख्य बातें     EPFO 3.0 के तहत PF बैलेंस को निकालने की लिमिट पर बहस छिड़ गई है     बता दें कि EPFO 3.0 के तहत एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (EPFO) कई बड़े बदलाव करने वाला है 75% या 100%, इमरजेंसी में PF की रकम निकालने की क्या है नई लिमिट? EPFO news: किसी भी नौकरीपेशा शख्स के लिए उसके पीएफ की रकम काफी अहमियत रखती है। इस रकम का इस्तेमाल ज्यादातर लोग अपने किसी बड़े प्रोजेक्ट या इमरजेंसी में करते हैं। अब पीएफ की रकम को निकालने की लिमिट पर कई तरह की चर्चाएं चलने लगी हैं। दरअसल, EPFO 3.0 के तहत एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (EPFO) कई ऐसे सुधार लाने की योजना बना रहा है जो EPF सब्सक्राइबर्स के लिए फायदेमंद होगा। इसी कड़ी में पीएफ रकम निकाले जाने की लिमिट पर बहस छिड़ गई है। बता दें कि EPFO ने 15 अक्टूबर 2025 को जारी एक बयान में कहा था कि पात्र सदस्य अब अपने योग्य PF बैलेंस का 75% तक बिना किसी अतिरिक्त दस्तावेज के निकाल सकते हैं। इसके अलावा कुछ विशेष परिस्थितियों में 100% राशि निकालने की अनुमति भी जारी रहेगी। ऐसे में लोगों में भ्रम पैदा हो गया कि कहीं पूर्ण निकासी का विकल्प समाप्त तो नहीं हो गया।

LPG–PNG डुप्लीकेट कनेक्शन पर सख्ती, सरकार ने जारी किए नए नियम

नई दिल्ली अगर आप लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) सिलेंडर का इस्तेमाल करते हैं तो ये खबर आपके लिए है। दरअसल, केंद्र सरकार ने नया नियम लागू करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि जिन घरों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन लिया जाएगा, उन्हें 30 दिनों के भीतर अपना एलपीजी (LPG) कनेक्शन सरेंडर करना होगा। यह नियम इंडेन, भारत गैस और एचपी गैस के ग्राहकों पर लागू होगा। इसका मकसद डुप्लिकेट कनेक्शन खत्म करना, सब्सिडी को बेहतर बनाना और सिलेंडर की सप्लाई को उन ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में भेजना है जहां पाइप्ड गैस की सुविधा नहीं है। 30 दिन में कनेक्शन सरेंडर करने का नियम बीते मई महीने में सरकार ने LPG (सप्लाई और डिस्ट्रीब्यूशन का नियमन) संशोधन आदेश, 2026' को जारी किया था। इन संशोधित नियमों के तहत जो परिवार PNG कनेक्शन लेते हैं, उन्हें 30 दिनों के भीतर अपना मौजूदा LPG कनेक्शन सरेंडर करना होगा। अगर उदाहरण से समझें तो अगर कोई परिवार 1 जून को PNG कनेक्शन लेता तो उसे 1 जुलाई तक अपना LPG अकाउंट बंद करना होगा। अगर इस समय-सीमा का पालन नहीं किया जाता है, तो LPG रिफिल पर रोक लग सकती है और अकाउंट बंद भी किया जा सकता है। किसे मिलेगा ट्रांसफर वाउचर ? हालांकि, नौकरी या पढ़ाई के कारण एक शहर से दूसरे शहर जाने वाले लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने विशेष प्रावधान भी किया है। ऐसे उपभोक्ताओं को LPG कनेक्शन सरेंडर करने के बाद ट्रांसफर वाउचर दिया जाएगा। इसके तहत जहां PNG सुविधा नहीं होगी वहां पर एलपीजी कनेक्शन दोबारा हासिल करने में मदद करेगा। इससे किरायेदारों, छात्रों, प्रवासी कर्मचारियों और ट्रांसफरेबल जॉब करने वाले लोगों की बड़ी चिंता दूर होने की उम्मीद है। वर्तमान नियमों के तहत उपभोक्ता अपनी श्रेणी और क्षेत्र के अनुसार 25 दिन, 35 दिन या 45 दिन के अंतराल पर सिलेंडर बुक करा सकते हैं। इस बीच, खबर है कि तेल मार्केटिंग कंपनियां उन ग्राहकों की पहचान करने के लिए डेटाबेस की सक्रिय रूप से जांच कर रही हैं जिनके पास दोनों तरह के कनेक्शन हैं, ताकि उन्हें पूरी तरह से PNG पर स्विच करने के लिए कहा जा सके, जहां नेटवर्क मौजूद है। अधिकारियों का कहना है कि डुप्लीकेट कनेक्शन खत्म करने से कालाबाजारी रुकती है, सब्सिडी वाले कमर्शियल सिलेंडर के दुरुपयोग को रोका जा सकता है और पूरी तरह से LPG पर निर्भर घरों के लिए ईंधन वितरण को बेहतर बनाया जा सकता है। नए नियम के तहत अब डिलीवरी एजेंट के सिलेंडर सौंपने से पहले, ग्राहकों को अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजा गया वैलिड वन-टाइम पासवर्ड (OTP) बताना होगा।

GRSE बनी नवरत्न कंपनी, रेवेन्यू और प्रॉफिट में तेज़ उछाल से मजबूत प्रदर्शन

 नई दिल्ली गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (Garden Reach Shipbuilders & Engineers) को नवरत्न कंपनी का दर्जा मिला है। वित्त मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक एंटरप्राइजेज से यह स्टेटटस मिला है। स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी जानकारी के अनुसार कंपनी को 19 जून 2026 को यह दर्जा मिला था। बता दें, नवरत्न स्टेटस मिलने के बाद पब्लिक सेक्टर की कंपनी और स्वतंत्र तरीके से वित्तीय फैसले ले सकते हैं। इस कंपनी का प्रदर्शन कैसा रहा है? गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स का रेवन्यू वित्त वर्ष 2026 के दौरान 7002 करोड़ रुपये रहा था। वित्त वर्ष 2022 में कंपनी का रेवन्यू 1754 करोड़ रुपये रहा था। कंपनी का प्रॉफिट (टैक्स भुगतान के बाद) 190 करोड़ रुपये से बढ़कर 748 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। वित्त वर्ष 2026 के दौरान कंपनी ने 8 वारशिप की डिलीवरी की है। कंपनी ने अबतक 800 से अधिक मरिन प्लेटफॉर्म बनाए थे। इसके अलावा कंपनी 118 वारशिप इंडियन नेवी को दिए। जर्मनी के ग्राहक के लिए कंपनी ने 12 मल्टी पर्पज़ वेसेल्स बना रही है। कंपनी के शेयरों की स्थिति क्या है? शुक्रवार को Garden Reach Shipbuliders के शेयर बीएसई में 0.96 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2797.30 रुपये के स्तर पर बंद हुआ था। इस साल अबतक कंपनी के शेयरों का प्रदर्शन 14 प्रतिशत बढ़ा है। पिछले एक साल में स्टॉक 10 प्रतिशत गिरा है। बता दें, कंपनी का 52 वीक हाई 3535 रुपये और 52 वीक लो लेवल 1965 रुपये है। कंपनी का मार्केट कैप 32043 करोड़ रुपये का है। दो साल में गार्डन रीच शिपबिल्डर्स लिमिटेड के शेयरों की कीमतों में 57 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली है। वहीं, तीन साल में यह स्टॉक 367 प्रतिशत बढ़ा है। बता दें, 5 साल में गार्डन रीच शिपबिल्डर्स के शेयरों का भाव 1341 प्रतिशत बढ़ा है। लगातार डिविडेंड दे रही है कंपनी इसी साल के फरवरी के महीने में कंपनी ने 7.15 रुपये का डिविडेंड दिया था। 2025 में गार्डन रीच शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने तीन बार डिविडेंड दिया था। तीन बार में कंपनी ने एक शेयर पर 19 रुपये का डिविडेंड दिया था।

स्मॉलकैप स्टॉक में हलचल की तैयारी: इटली से भारत तक भारी माल ढुलाई का जिम्मा मिला टाइगर लॉजिस्टिक को

नई दिल्ली  स्मॉल कैप स्टॉक टाइगर लॉजिस्टिक (इंडिया) लिमिटेड के शेयर सोमवार को फोकस में रहेंगे। कंपनी को भारत हैवी इलेक्ट्रकिल्स लिमिटेड से एक बड़ा वर्क ऑर्डर मिला है। इस खबर के सामने आने के बाद अब सोमवार को कंपनी के शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है। क्या है वर्क ऑर्डर डीटेल्स (Tiger Logistics Work order details) टाइगर लॉजिस्टिक ने दी जानकारी में बताया है कि उन्हें 13 ओवर डाइमेंशनल कार्गो को ट्रांसपोर्ट करना है। कंपनी ने कहा है कि हर एक वजह 89 मैट्रिक टन है। इस ऑर्डर के अनुसार कंपनी को इटली से इंडिया सामान को लाना है। बता दें, वर्क ऑर्डर की कुल कीमत 4 करोड़ रुपये की है। शेयरों का प्रदर्शन पिछले एक साल मे कैसा है? टाइगर लॉजिस्टिक कंपनी के शेयर बीएसई में 0.14 प्रतिशत की तेजी के साथ 35.20 रुपये के स्तर पर शुक्रवार को पहुंच गए थे। पिछले तीन महीने में कंपनी के शेयरों की कीमतों में 41 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली है। हालांकि, इसके बाद भी 6 महीने यह स्टॉक 5 प्रतिशत लुढ़क चुका है। एक साल में कंपनी के शेयरों का भाव 38 प्रतिशत गिरा है। टाइगर लॉजिस्टिक (इंडिया) लिमिटेड का 52 वीक हाई 59.84 रुपये और 52 वीक लो लेवल 22.87 रुपये है। कंपनी का मार्केट कैप 372 करोड़ रुपये का है। लॉन्ग टर्म में कैसा है प्रदर्शन दो साल में कंपनी के शेयरों का भाव 14 प्रतिशत और तीन साल में 4 प्रतिशत गिरा है। हालांकि, 5 साल में स्टॉक का दाम 714 प्रतिशत का रिटर्न देने में सफल रहा है। 10 साल में यह स्टॉक 89 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। बोनस शेयर दे चुकी है कंपनी Tiger Logistics ने निवेशकों को एक बार बोनस शेयर दिया है। 2015 में कंपनी के शेयर एक्स-बोनस ट्रेड किए थे। तब कंपनी ने 2 पर 3 शेयर बोनस के तौर पर दिए थे। 2021 में इसके बाद कंपनी ने डिविडेंड दिया था। तब हर एक शेयर पर 1 रुपये का डिविडेंड बांटा गया था। बता दें, 2024 में कंपनी के शेयरों का बंटवारा हो चुका है। जिसके बाद टाइगर लॉजिस्टिक के शेयरों की फेस वैल्यू 10 रुपये से घटकर 1 रुपये प्रति शेयर हो गई थी। कंपनी के शेयरों को 10 हिस्सों में बांटा गया था। इस कंपनी में प्रमोटर्स की कुल हिस्सेदारी 57.30 प्रतिशत है। पब्लिक के पास 42.70 प्रतिशत हिस्सा है।

जेफरीज रिपोर्ट: ग्लोबल मार्केट पर बदले हालात, ईरान की बढ़ी ताकत

नई दिल्‍ली  हाल ही में हुए अमेरिका-ईरान सीजफायर फ्रेमवर्क से ईरान को सबसे ज्‍यादा फायदा हुआ है। जेफरीज की हालिया 'ग्रीड एंड फियर' रिपोर्ट में यह बात कही गई है। इसके अनुसार, प्रस्तावित समझौता जियोपॉलिटिकल हालात में एक बड़ा बदलाव है। इसके ग्लोबल मार्केट पर दूरगामी असर हो सकते हैं। ईरान मार ले गया मैदान रिपोर्ट के मुताबिक, इस ड्राफ्ट फ्रेमवर्क में ईरान के फ्रीज किए गए 24 अरब डॉलर जारी करने की बात कही गई है। साथ ही लंबे समय से चले आ रहे प्रतिबंधों को हटाए जाने की भी संभावना है। बातचीत औपचारिक रूप से शुरू होने से पहले ही आधी रकम मिलने की उम्‍मीद है। जेफरीज ने इस घटनाक्रम को इस बात का संकेत बताया है कि बातचीत में तेहरान का पलड़ा भारी रहा है। ट्रंप को ऐसे हुआ नुकसान ब्रोकरेज के अनुसार, यह युद्धविराम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर बढ़ते राजनीतिक दबाव को भी दिखाता है। उनकी अप्रूवल रेटिंग काफी कम हो गई है। रिपोर्ट में बताए गए रॉयटर्स/इप्सोस सर्वे में 62% लोगों ने उन्हें नापसंद किया। वहीं, 63% लोगों ने अर्थव्यवस्था को संभालने के उनके तरीके को नापसंद किया। मार्केट के नजरिए से जेफरीज का मानना है कि लंबे समय तक चलने वाला सीजफायर और तेल की कम कीमतें अमेरिका के बाहर के मार्केट, खासकर साइक्लिकल सेक्टर में बेहतर परफॉर्मेंस में मदद कर सकती हैं। इन चार बड़ी कंपनियों की बल्‍ले-बल्‍ले रिपोर्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में निवेश की भारी तेजी पर भी जोर दिया गया है। अमेरिका की चार बड़ी हाइपरस्केलर कंपनियों का कैपिटल एक्सपेंडिचर 2026 में 680 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। यह AI की होड़ की तीव्रता को दिखाता है। इन कंपनियों में अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट, अल्फाबेट और मेटा शामिल हैं। जापान में बैंक ऑफ जापान ने हाल ही में ब्याज दरें बढ़ाकर 1% कर दी हैं। ये तीन दशकों से ज्‍यादा समय में सबसे ज्‍यादा स्तर है। यील्ड बढ़ने के बावजूद जेफरीज का मानना है कि बेहतर होती नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ और महंगाई की स्थिति के कारण जापानी इक्विटी सरकारी बॉन्ड की तुलना में काफी ज्‍यादा आकर्षक बनी हुई है। अमेरिका में महंगाई की बढ़ती चिंता ब्रोकरेज के अनुसार, अमेरिका में महंगाई के जोखिमों को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। मनी मार्केट अब 2026 के अंत तक ब्याज दरों में लगभग 0.36 फीसदी की बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं। यह इस चिंता को दिखाती है कि महंगाई पहले की उम्मीद से ज्‍यादा समय तक बनी रह सकती है। जेफरीज का तर्क है कि बॉन्ड यील्ड का बढ़ना निवेशकों के लिए मुख्य जोखिमों में से एक बना हुआ है। साथ ही, कॉर्पोरेट कमाई की उम्मीदें भी मजबूत बनी हुई हैं। आम सहमति वाले अनुमानों के अनुसार, 2026 की दूसरी तिमाही में एसएंडपी 500 की कमाई में साल-दर-साल 22.8 फीसदी की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इसमें टेक्नोलॉजी कंपनियां इस बढ़त में सबसे आगे रहेंगी। इमर्जिंग मार्केट्स कंपनियों में कुछ को प्रॉफिट हालांकि, जेफरीज को इक्विटी मार्केट में सट्टेबाजी के बढ़ते संकेत दिख रहे हैं। उनका कहना है कि पिछले साल MSCI इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स में शामिल सिर्फ 24.6% शेयरों ने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन किया। यह एक रिकॉर्ड निचला स्तर है जो बताता है कि मार्केट का नेतृत्व कुछ ही शेयरों तक सीमित होता जा रहा है। रिपोर्ट में स्‍पेसएक्‍स को लेकर दिख रहे जबरदस्त उत्साह का भी जिक्र किया गया है। हाल ही में लॉन्च किए गए 11 लेवरेज्ड स्‍पेसक्‍स एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) ने सिर्फ तीन दिनों में 8.2 अरब डॉलर का ट्रेडिंग वॉल्यूम हासिल किया। वहीं, उनके पास मौजूद एसेट्स की कीमत सिर्फ 63.8 करोड़ डॉलर थी। जेफरीज इस घटनाक्रम को आम निवेशकों की तरफ से सट्टेबाजी के बढ़ते जोश का एक और संकेत मानता है। इजरायल रह गया खाली हाथ इजरायल का रिपोर्ट में जिक्र नहीं है। लेकिन, वह खाली हाथ ही रहा है। युद्धविराम से इजरायल नाराज है। ऐसा होने का मुख्य कारण यह है कि इस पूरी बातचीत में इजरायल को पूरी तरह साइडलाइन कर दिया गया। इससे उसके प्रमुख सुरक्षा हित दांव पर लग गए हैं। इजरायल का मानना है कि इस समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह नष्ट करने और लेबनान में सक्रिय हिजबुल्लाह व गाजा में हमास जैसे ईरान-समर्थित सशस्त्र समूहों के खतरों को खत्म करने का कोई ठोस रोडमैप नहीं है। इसके अलावा, ट्रंप प्रशासन की ओर से तय की गई शर्तों के तहत दक्षिणी लेबनान से इजरायली सेना की वापसी की मांग ने इजरायल के भीतर राजनीतिक और सुरक्षा स्तर पर भारी असंतोष पैदा कर दिया है। उसे डर है कि युद्ध रुकने से उसके दुश्मनों को फिर से मजबूत होने का मौका मिल जाएगा। चीन की घरेलू अर्थव्यवस्था इस बीच, चीन की घरेलू अर्थव्यवस्था संघर्ष कर रही है। रिटेल बिक्री कमजोर हुई है। क्रेडिट ग्रोथ धीमी है। प्रॉपर्टी में निवेश पर दबाव बना हुआ है। फिर भी निर्यात खासकर सेमीकंडक्टर शिपमेंट में तेजी से बढ़ोतरी जारी है। इससे आर्थिक तस्वीर काफी असमान होती जा रही है। कुल मिलाकर, जेफरीज का मानना है कि निवेशक एक ऐसी दुनिया में काम कर रहे हैं जो भू-राजनीतिक अनिश्चितता, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और AI-आधारित बाजार तेजी से आकार ले रही है। यह तेजी कुछ ही क्षेत्रों या शेयरों तक सीमित होती जा रही है।

PhonePe का नया नियम लागू, कुछ सेवाओं पर देना होगा अतिरिक्त शुल्क; चार्ज ₹100 तक पहुंच सकता है

 नई दिल्ली PhonePe चलाने वालों के लिए जरूरी खबर है. जल्द ही पेमेंट ऐप में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. कंपनी ने वॉलेट गाइडलाइंस को अपडेट किया है, जिसके बाद अगर आप लंबे समय तक वॉलेट का यूज करना छोड़ देते हैं, तो 100 की पेमेंट करनी पड़ सकती है।  कंपनी ने हाल ही में अपनी वॉलेट गाइडलाइंस को अपडेट किया है, जिसके तहत अगर कोई फोनपे यूजर 365 दिनों तक अपने PhonePe Wallet का उपयोग नहीं करता है, तो उसपर इनएक्टिविटी मेंटेनेंस फीस लगाई जाएगी. यह फीस 100 रुपये होगी।  फोनपे की नई गाइडलाइंस को लेकर कई लोगों ने नाराजगी जाहिर की है. इसको लेकर बहुत से लोगों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है।  X प्लेटफॉर्म (पुराना नाम Twitter) पर @yabhishekhd नाम के अकाउंट ने बताया कि कई यूजर्स PhonePe Wallet का इस्तेमाल नहीं करते और सीधे अपने बैंक अकाउंट से UPI पेमेंट करते हैं. कुछ  लोगों ने कहा कि ऐसे फीचर के लिए पैसे वसूलना, जो उसका इस्तेमाल नहीं करते हैं, गलत है।  आजकल लोग लोग Wallet में पैसे डालकर उसे लंबे समय तक बिना इस्तेमाल किए छोड़ देते हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि Inactive Wallet क्या होता है, किन यूजर्स पर यह शुल्क लागू हो सकता है और इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए। Inactive Wallet किसे माना जाएगा Inactive Wallet का मतलब ऐसे Wallet से है जिसका उपयोग लंबे समय तक नहीं किया गया हो। यदि कोई यूजर Wallet में पैसे रखकर उसे महीनों तक इस्तेमाल नहीं करता, न कोई ट्रांजैक्शन करता है और न ही कोई भुगतान करता है, तो उसे Inactive कैटेगरी में रखा जा सकता है। Inactive Wallet पर हर तीन महीने में 100 रुपए तक का शुल्क लगाया जा सकता है। हालांकि यह चार्ज Wallet में उपलब्ध बैलेंस और अन्य शर्तों के आधार पर भी तय किया जा सकता है। क्या सभी PhonePe यूजर्स पर लागू होगा नियम? नहीं, यह शुल्क केवल Wallet यूजर्स के लिए हो सकता है। जो लोग केवल UPI के जरिए सीधे बैंक अकाउंट से पेमेंट करते हैं, उन पर इसका असर नहीं पड़ने की संभावना है। यह मुख्य रूप से PhonePe Wallet से जुड़े अकाउंट्स के लिए हो सकता है। UPI और Wallet में क्या अंतर और शुल्क से बचने का तरीका कई लोग UPI और Wallet को एक जैसा समझते हैं, जबकि दोनों अलग-अलग सेवाएं हैं। UPI में भुगतान सीधे बैंक अकाउंट से होता है। वहीं Wallet में पहले पैसे जोड़ने पड़ते हैं और फिर उसी बैलेंस से भुगतान किया जाता है। अगर आप PhonePe Wallet का इस्तेमाल करते हैं, तो समय-समय पर उसमें कोई छोटा ट्रांजैक्शन कर सकते हैं। मोबाइल रिचार्ज, बिल भुगतान या किसी भी छोटे भुगतान के जरिए Wallet को एक्टिव रखा जा सकता है। इससे Wallet निष्क्रिय नहीं माना जाएगा। किन लोगों पर लगेगी 100 रुपये की फीस  100 रुपये की फीस सिर्फ उन लोगों पर लागू होगी, जिन्होंने एक साल तक अपने PhonePe Wallet से कोई ट्रांजैक्शन नहीं किया है. सिर्फ PhonePe ऐप खोलना या UPI के जरिए भुगतान करना वॉलेट गतिविधि नहीं माना जाएगा. शुल्क से बचने के लिए यूजर्स को वॉलेट के जरिए कम से कम एक ट्रांजैक्शन करना होगा, जिससे वॉलेट दोबारा एक्विट मान लिया जाएगा।  15 दिन पहले आएगा अलर्ट मैसेज  फोनपे की तरह से फीस काटने से पहले यूजर्स को 15 दिन पहले एक मैसेज भेजा जाएगा. अगर वॉलेट में बैलेंस है तो कंपनी सीधे 100 रुपये काट लेगी. वहीं, अगर वॉलेट में 100 रुपये से कम रकम है तो वह रकम पूरी काट ली जाएगी. हालांकि बैलेंस को नेगेटिव नहीं किया जाएगा।  क्या होता है PhonePe वॉलेट और इसका काम क्या है? जब आप पहली बार अपने मोबाइल में PhonePe ऐप डाउनलोड करते हैं, तो वॉलेट की सर्विस इसके साथ ही इन-बिल्ट (नत्थी होकर) आती है. यूजर इस वॉलेट को अपने बैंक खाते से रीचार्ज करके इसमें पैसे रख सकते हैं. वॉलेट का एकमात्र बड़ा फायदा यह है कि यह ऑफलाइन या कम नेटवर्क में भी काम कर जाता है।  अगर कभी आपके बैंक का सर्वर डाउन है और आप सीधे अकाउंट से पैसे नहीं भेज पा रहे हैं, तो वॉलेट में मौजूद पैसों से तुरंत भुगतान किया जा सकता है. आज के समय में शायद ही कोई वॉलेट में पैसे रखता है. अगर एक ऐप का यूपीआई काम नहीं करता, तो लोग तुरंत गूगल पे (Google Pay) या पेटीएम (Paytm) जैसे दूसरे ऐप का इस्तेमाल कर लेते हैं. इसलिए आम जनता के लिए यह वॉलेट लगभग बेकार ही पड़ा रहता है।  क्या PhonePe का ऐसा चार्ज वसूलना कानूनी है? कई यूजर्स के मन में यह सवाल है कि बिना इस्तेमाल किए पैसे काटना क्या बेईमानी नहीं है? लेकिन तकनीकी और कानूनी रूप से कंपनी ऐसा कर सकती है. जब हम पहली बार ऐप पर साइन-अप या लॉगिन करते हैं, तो हम बिना पढ़े ‘नियम और शर्तों’ (Terms and Conditions) को स्वीकार (Accept) कर लेते हैं. कंपनी इसी कानूनी दांवपेच का फायदा उठा रही है. हालांकि, आम उपभोक्ताओं के नजरिए से देखा जाए तो इसे एक तरह की ‘जबरदस्ती’ ही कहा जाएगा।  वॉलेट चार्ज से अपने ₹100 कैसे बचाएं ? अगर आप इस गैर-जरूरी चार्ज से बचना चाहते हैं, तो आपके पास दो आसान रास्ते हैं. अपने PhonePe वॉलेट में ₹10 या ₹50 डालकर उसे दोबारा एक्टिवेट कर लें और कभी-कभी उससे कोई छोटा-मोटा भुगतान कर दें. इससे आपका वॉलेट इनएक्टिव लिस्ट से बाहर हो जाएगा।  यदि आप इस वॉलेट झंझट को हमेशा के लिए खत्म करना चाहते हैं, तो ऐप के भीतर जाकर अपने वॉलेट की फुल केवाईसी प्रक्रिया को पूरा करें. इसके बाद आप वॉलेट को पूरी तरह बंद या हमेशा के लिए इनएक्टिवेट करने का विकल्प चुन सकते हैं।  ध्यान रहे कि इस वॉलेट चार्ज का आपकी सामान्य यूपीआई (UPI) सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा. यदि आप वॉलेट एक्टिव नहीं भी करते हैं, तो भी आप पहले की तरह बैंक-टू-बैंक यूपीआई ट्रांसफर (Scan & Pay) करते रह सकेंगे।  आखिर PhonePe ऐसा कर क्यों रहा है? बाजार के जानकारों का मानना है कि कंपनी यह कदम अपनी बैलेंस शीट को मजबूत और दमदार दिखाने के लिए उठा रही है. दरअसल, PhonePe आने वाले समय में अपना … Read more

दुनिया के टॉप-10 अमीरों की लिस्ट में उतार-चढ़ाव, बेजोस-जुकरबर्ग की कमाई बढ़ी

नई दिल्ली दुनिया के सबसे अमीर इंसानों की लिस्ट (World's Richest List) पर नजर डालें, तो उनकी नेटवर्थ में बड़ा चेंज देखने को मिला है. हाल ही में इतिहास रचते हुए दुनिया के पहले ट्रिलियनर बने एलन मस्क को नुकसान (Elon Musk Loss) हुआ है, तो वहीं टॉप-10 अमीरों की लिस्ट में शामिल कई अरबपतियों की संपत्ति (Top-10 Billionaires Networth) में उछाल आया है. एलन मस्क को लगा ये झटका दुनिया के सबसे अमीर इंसान टेस्ला और स्पेसएक्स कंपनी के मालिक एलन मस्क ने बीते दिनों दुनिया के पहले ट्रिलियनर का खिताब अपने नाम किया, अब तक ये कारनामा कोई न कर सका था. इस मुकाम को छूने के बाद उनकी संपत्ति में गिरावट देखने को मिली है, हालांकि Elon Musk Trillionaire बने हुए हैं. ब्लूमबर्ग बिलेनियर्स इंडेक्स के मुताबिक, मस्क की दौलत में 32.1 अरब डॉलर की कमी आई है और इसके साथ उनकी कुल संपत्ति 1.23 ट्रिलियन डॉलर पर आ गई है. टॉप-10 में शामिल इन रईसों को घाटा बिलेनियर्स नेटवर्थ के अपडेटेड आंकड़ों पर नजर डालें, तो दुनिया के सबसे अमीरों की लिस्ट में छठे पायदान पर शामिल माइकल डेस की नेटवर्थ 868 मिलियन डॉलर की गिरावट के साथ 221 अरब डॉलर पर आ गई है. इसके अलावा नौंवे सबसे अमीर बर्नार्ड अर्नाल्ट की नेटवर्थ 2.40 अरब डॉलर गिरकर 168 अरब डॉलर, जबकि 10वें सबसे रईस वॉरेन बफे की नेटवर्थ 749 मिलियन डॉलर की कमी के साथ 146 अरब डॉलर पर आ गई. इन अमीरों ने की जोरदार कमाई वहीं Top-10 Billionaire List  में जिन रईसों की दौलत में इजाफा हुआ, उनमें लैरी पेज 314 अरब डॉलर (बढ़त 3.54 अरब डॉलर) के साथ दूसरे पायदान पर हैं. सर्ग्रेई ब्रिन 291 अरब डॉलर (बढ़त 3.22 अरब डॉलर) के साथ तीसरे अमीर हैं. चौथे सबसे अमीर जेफ बेजोस की संपत्ति में 5.80 अरब डॉलर का उछाल आया और ये 266 अरब डॉलर हो गई, जबकि पांचवें नंबर पर मौजूद लैरी एलिसन की नेटवर्थ 722 मिलियन डॉलर बढ़कर 238 अरब डॉलर पर पहुंच गई. लिस्ट में सातवें पायदान पर काबिज फेसबुक के मार्क जुकरबर्ग की संपत्ति में 3.25 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई और ये उछलकर 206 अरब डॉलर पर पहुंच गई. इसके अलावा NVIDIA के सीईओ जेन्सेन हुआंग ने भी तगड़ी कमाई की और इनकी दौलत 4.90 अरब डॉलर के इजाफे के साथ 174 अरब डॉलर हो गई. हुआंग लिस्ट में आठवें सबसे अमीर इंसान हैं. अडानी-अंबानी की संपत्ति में बदलाव दुनिया के सबसे अमीरों की लिस्ट में शामिल भारतीय अरबपतियों गौतम अडानी और मुकेश अंबानी की संपत्ति में भी बदलाव हुआ है. Gautam Adani Networth देखें, तो इसमें 3.50 अरब डॉलर की वृद्धि हुई है और ये बढ़कर 119 अरब डॉलर पर आ गई है. संपत्ति के इस आंकड़े के साथ वे 17वें सबसे अमीर इंसान बन गए हैं. दूसरी ओर रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी की दौलत घटी है. Mukesh Ambani Networth में 63.6 मिलियन डॉलर की गिरावट देखने को मिली है और इस कमी के साथ ये घटकर 88.8 अरब डॉलर रह गई है. इस आंकड़े के साथ अब अंबानी दुनिया के 25वें सबसे अमीर इंसान हैं.

MCX पर धातुओं की कीमतों में भारी नरमी, निवेशकों के सामने बढ़ी दुविधा

नई दिल्ली  इस महीने सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होने के बाद निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश वाली धातुओं से थोड़ा कम हुआ, जिसका असर कीमतों पर पड़ा। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) के आंकड़ों के अनुसार, जून की शुरुआत से अब तक सोने की कीमत में करीब 6.50% और चांदी में 11.56% तक की गिरावट आई है। एमसीएक्स पर 1 जून को सोने का भाव 1,54,908 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो 19 जून तक गिरकर करीब 1,44,938 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। यानी सोने में 10,070 रुपये प्रति 10 ग्राम की कमी आई। वहीं, चांदी 2,63,458 रुपये प्रति किलो से गिरकर 2,33,010 रुपये प्रति किलो पर आ गई। चांदी में करीब 30,448 रुपये प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई। क्यों लुढ़की सोने-चांदी की कीमत?     विशेषज्ञों के मुताबिक सोने और चांदी में गिरावट के पीछे कई वैश्विक कारण हैं।     इनमें कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, महंगाई की चिंता, ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें, मजबूत अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी प्रमुख हैं।     इसके अलावा गोल्ड और सिल्वर ETF से निकासी ने भी निवेशकों की धारणा को कमजोर किया है।     हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि में सोने और चांदी की मांग बनी रह सकती है। क्या पुराने निवेशकों को घबराना चाहिए? पिछले डेढ़ साल में सोने और चांदी में तेज तेजी के कारण कई निवेशकों ने ऊंचे भाव पर खरीदारी की थी। ऐसे निवेशक अब असमंजस में हैं कि नुकसान में बेचें या इंतजार करें। विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को भावनात्मक फैसला लेने से बचना चाहिए। मास्टर कैपिटल सर्विसेज के निदेशक पुनीत सिंघानिया के अनुसार, तेजी के बाद आने वाली गिरावट हमेशा ट्रेंड बदलने का संकेत नहीं होती। उनका कहना है कि अगर लंबे समय के नजरिए से निवेश किया गया है, तो केवल कीमतों में गिरावट देखकर जल्दबाजी में निकलना सही फैसला नहीं हो सकता। नए निवेशकों के लिए क्या है सलाह? विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट नए निवेशकों के लिए मौका हो सकती है, लेकिन एक साथ बड़ी रकम लगाने से बचना चाहिए। रिद्धिसिद्धि बुलियंस के एमडी पृथ्वीराज कोठारी ने सलाह दी है कि निवेशक 6 से 12 महीने में धीरे-धीरे निवेश करें। गोल्ड ETF और सिल्वर ETF के जरिए SIP जैसा तरीका अपनाया जा सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो का करीब 10-15% हिस्सा ही सोने और चांदी में रखना चाहिए। साल की आखिरी तिमाही में सोना और चांदी फिर से रिकवरी कर सकते हैं। इसकी वजह केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और ETF निवेश में दोबारा बढ़ोतरी हो सकती है। खरीदारी का बेहतर तरीका कौन सा? विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय के निवेश के लिए फिजिकल सोना-चांदी खरीदने की बजाय डिजिटल विकल्प बेहतर हो सकते हैं। गोल्ड ETF, सिल्वर ETF और म्यूचुअल फंड जैसे विकल्पों में स्टोरेज की चिंता नहीं होती। साथ ही सुरक्षा और बीमा का खर्च बचता है और खरीद-बिक्री आसान होती है।कीमतों में भी पारदर्शिता रहती है। वहीं, ज्वेलरी या फिजिकल सोना मुख्य रूप से इस्तेमाल, शादी या गिफ्ट के लिए ज्यादा उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि इसमें मेकिंग चार्ज और अन्य खर्च जुड़े होते हैं। आगे क्या उम्मीद है? विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर वैश्विक तनाव कम होता है, महंगाई नियंत्रित होती है और ब्याज दरों में कटौती शुरू होती है तो सोना-चांदी फिर तेजी पकड़ सकते हैं। फिलहाल निवेशकों के लिए रणनीति यही है कि गिरावट में घबराने के बजाय धीरे-धीरे और सोच-समझकर निवेश किया जाए।