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cSupply Boost: मोदी सरकार का बड़ा दांव, रसोई गैस की उपलब्धता बढ़ाने को लिया अहम फैसला

नई दिल्ली भारत सरकार अब रसोई गैस (LPG) की सप्लाई को और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश की सरकारी तेल कंपनियां अब अमेरिका (US) से एलपीजी की खरीद को मौजूदा स्तर से लगभग दोगुना करने की तैयारी में हैं। इसका मुख्य उद्देश्य गल्फ देशों (मध्य पूर्व) पर निर्भरता कम करना और भविष्य में किसी भी वैश्विक संकट के दौरान देश में गैस की कमी न होने देना है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं। फिलहाल, भारत हर साल अमेरिका से करीब 22 लाख टन (2.2 मिलियन टन) एलपीजी खरीदता है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार अब इस मात्रा को लगभग दोगुना करने पर विचार कर रही है। इसके साथ ही भारत अल्जीरिया जैसे अन्य देशों से भी एलपीजी आयात बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रहा है, ताकि गैस सप्लाई के लिए किसी एक क्षेत्र पर अधिक निर्भर न रहना पड़े। दरअसल, इस साल पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़े तनाव और ईरान-इजरायल-अमेरिका से जुड़े घटनाक्रम के दौरान स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले कई एलपीजी जहाज प्रभावित हुए थे। उस समय भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता रसोई गैस की उपलब्धता थी। ऐसे मुश्किल समय में अमेरिका भारत का सबसे बड़ा वैकल्पिक एलपीजी सप्लायर बनकर सामने आया और उसने लगातार गैस की आपूर्ति जारी रखी। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि कच्चे तेल (Crude Oil) की उपलब्धता को लेकर उतनी चिंता नहीं थी, लेकिन एलपीजी की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा काफी बड़ा था। दुनिया में गल्फ देशों के अलावा बहुत कम देश बड़े पैमाने पर एलपीजी का उत्पादन करते हैं। ऐसे में अमेरिका से अतिरिक्त सप्लाई मिलने से भारत को काफी राहत मिली। अब सरकार सिर्फ आयात बढ़ाने तक सीमित नहीं रहना चाहती। पेट्रोलियम मंत्रालय ने तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को 30 दिनों का स्ट्रेटजिक LPG रिजर्व (Strategic Reserve) तैयार करने की योजना पर काम करने को कहा है। इसका मतलब है कि यदि भविष्य में किसी कारण से आयात कुछ समय के लिए रुक भी जाए, तब भी देश में कम से कम 30 दिनों तक रसोई गैस की सप्लाई बिना किसी परेशानी के जारी रखी जा सके। यह नया स्ट्रेटजिक रिजर्व पहले से मौजूद 45 दिनों के सामान्य स्टॉक के अतिरिक्त होगा, जिसे तेल कंपनियां घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडरों की मांग पूरी करने के लिए हमेशा बनाए रखती हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो 2025 में भारत के कुल एलपीजी आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 8% से भी कम थी। लेकिन, नवंबर 2025 में हुए एक साल के समझौते के बाद तस्वीर तेजी से बदल गई। जनवरी 2026 में यह हिस्सा बढ़कर 12% हुआ, फरवरी में 13% पहुंचा और पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने के बाद मार्च में यह 37% तक पहुंच गया। अप्रैल में अमेरिका की हिस्सेदारी 40% मई में 55% और जून में रिकॉर्ड 65% तक पहुंच गई। इसका मतलब है कि अब भारत की एलपीजी जरूरतों को पूरा करने में अमेरिका की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है। इसके अलावा भारत ने अर्जेंटीना, नाइजीरिया और मलेशिया जैसे देशों से भी गैस खरीदकर अपनी सप्लाई चेन को मजबूत किया है। एक्सपर्ट का मानना है कि सप्लाई के सोर्स में विविधता लाने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। अगर भविष्य में फिर से किसी क्षेत्र में युद्ध, राजनीतिक तनाव या समुद्री मार्ग बाधित होता है, तो देश को रसोई गैस की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। साथ ही अमेरिका से ऊर्जा आयात बढ़ने से भारत और अमेरिका के व्यापारिक संबंध भी और मजबूत हो सकते हैं। सरकार का यह कदम सिर्फ गैस खरीद बढ़ाने का फैसला नहीं है, बल्कि यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा, रणनीतिक तैयारी और आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा और दूरदर्शी कदम माना जा रहा है।  

LPG Cylinder Price: महंगाई के बीच खुशखबरी! महीने की शुरुआत में घटे गैस सिलेंडर के दाम

 नई दिल्ली LPG Price Cut: जुलाई महीने की शुरुआत हो गई है और ये राहत भरी है. दरअसल, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बड़ी कटौती की है. LPG Cylinder Price Cut 19 किलोग्राम वाले सिलेंडर पर किए गए हैं. ताजा रेट्स की बात करें, तो दिल्ली में 3,113 रुपये का मिलने वाला कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर अब सस्ता होकर 2,930 रुपये का रह गया है. इस हिसाब से गैस सिलेंडर की कीमत 183 रुपये घटाई गई है. हालांकि, इस बार भी घर की रसोई में इस्तेमाल होने वाले 14 Kg LPG Cylinder Price को स्थिर रखा गया है।  राहत भरी जुलाई की शुरुआत  ऑयल मार्केटिंग कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में संशोधन करती हैं और जुलाई महीने की शुरुआत राहत भरी रही है. बीते कुछ समय में मिडिल ईस्ट टेंशन के चलते कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में ताबड़तोड़ इजाफा किया गया था. अब 1 जुलाई 2026 को दिल्ली समेत अन्य शहरों में 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर का रेट कम कर दिया गया है. बता दें कि साल 2026 में ये पहली बार है जबकि तेल कंपनियों ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम घटाए हैं।  19 Kg LPG Cylinder की कीमत पर इस साल लगभग हर महीने महंगाई का बम फूटा था. शुरुआती महीने जनवरी में इसी कीमत 1691 रुपये प्रति सिलेंडर थी, जो कि लगातार बढ़ोतरी के बाद महंगा होता चला गया. बीते दो महीनों में देखें, तो मई ये 993 रुपये महंगा होकर पहली बार 3000 रुपये के पार पहुंचा था और जून की शुरुआत में भी ये 42 रुपये महंगा हुआ था. इसके बाद कमर्शियल सिलेंडर की कीमत दिल्ली में 3113.50 रुपये पहुंच गई थी।  कोलकाता से लखनऊ तक अब ये रेट  राजधानी दिल्ली के अलावा अन्य शहरों में 19 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में किए गए बदलाव की बात करें, तो कोलकाता में अब ये कमर्शियल  सिलेंडर 3255.50 रुपये से घटकर 3,081.50 रुपये का हो गया है. इसके अलावा अन्य शहरों की बात करें, तो उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अब कमर्शियल सिलेंडर का दाम 3,052.50 रुपये रह गया है, जबकि बिहार की राजधानी पटना में नई कीमत 3,227 रुपये पर आ गई है. सिलेंडर की नई कीमतें 1 जुलाई से लागू कर दी गई हैं।  घरेलू गैस सिलेंडर के नहीं बदले दाम  जहां एक ओर तेल कंपनियों ने कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में बड़ी कटौती करते हुए राहत दी है. तो वहीं घरेलू एलपीजी सिलेंडर (14 Kg LPG Cylinder) के दाम यथावत बने हुए हैं, यानी इनमें कोई चेंज नहीं किया गया है. दिल्ली में एलपीजी सिलेंडर का दाम 942 रुपये, कोलकाता में 968 रुपये है. तो वहीं मुंबई में 14 किलो वाला सिलेंडर 941.50 रुपये, जबकि चेन्नई में ये 957.50 रुपये का मिल रहा है। 

1 जुलाई से लागू हुए 10 बड़े बदलाव! LPG, पेट्रोल, आधार और आपकी जेब पर सीधा असर

 नई दिल्‍ली जुलाई महीने की पहली तारीख से ही देश में कई बदलाव लागू होने वाले हैं, जिसका असर आपकी जेब पर पड़ सकता है. ये बदलाव एलपीजी से लेकर पेट्रोल-डीजल के दाम तक हैं. एलपीजी के ढरों नियम में बदलाव हो रहा है तो उम्‍मीद की जा रही है कि केंद्र सरकार इसकी कीमतों में कुछ राहत दे सकती है. वहीं 1 जुलाई से पेट्रोल-डीजल से पाबंदियों को भी हटाया जा रहा है।  1. एलपीजी के नियमों में बदलाव  केंद्र सरकार ने 90 दिनों की डेडलाइन दिया था, ताकि जिनके पास एलपीजी और पीएनजी के दोनों कनेक्‍शन हैं, वो अपना LPG कनेक्‍शन सरेंडर कर दें. 30 जून को इसकी डेडलाइन खत्‍म हो रही है, जिसका मतलब है कि 1 जुलाई से आप नए एलपीजी स‍िलेंडर की बुकिंग नहीं कर पाएंगे. इसके साथ ही केवाईसी पूरा नहीं कराने वालों को भी गैस मिलने में दिक्‍कत आ सकती है. हालांकि, सरकार बुकिंग टाइम को लेकर ढील दे सकती है।  2. LPG के दाम में कटौती  मिडिल ईस्‍ट में जंग छिड़ने के बाद से एनर्जी का संकट पैदा हुआ था, जिस कारण कमर्शियल से लेकर रसोई गैस सिलेंडर के दाम में कटौती हुई थी, लेकिन अब जब जंग रुक गई है और होर्मुज से होते हुए तेल भारत आ रहे हैं तो ऐसे में सरकार से उम्‍मीद है कि LPG के दाम में कटौती कर स‍कती है।  3. आधार कार्ड अपडेट  Aadhaar बनाने वाली संस्‍था UIDAI नए महीने से आधार कार्ड अपडेट को लेकर एक खास सर्विस पेश की है, जिसके तहत अगर आप अपने आधार कार्ड पर ईमेल अपडेट करना चाहते हैं तो आप 1 जुलाई से आधार ऐप के जरिए फ्री में अपडेट कर पाएंगे. पहले इसे अपडेट करने के लिए 75 रुपये का शुल्‍क देना पड़ता था।  4. रेलवे के नियम भारतीय रेलवे में सफर करने वाले यात्रियों के लिए 1 जुलाई 2026 से नियम सख्‍त किए जा रहे हैं. केंद्र सरकार ने एक प्रस्‍ताव रखा है, जिसपर राष्‍ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी है और इसे जल्‍द ही लॉन्‍च किया जा सकता है. मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि बिना टिकट यात्रा करने वालों पर जुर्माने की राशि बढ़ाने की तैयारी चल रही है. इसके अलावा, रेलवे परिसर में स्थिति सामान्‍य रखने के लिए भी नियम सख्‍त किए जा रहे हैं।  5. ITR डेडलाइन  ITR-1 और ITR-2 फॉर्म भरने वाले टैक्सपेयर्स के लिए, फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए ITR भरने की डेडलाइन 31 जुलाई, 2026 है. अगर आप इस समय के तहत आईटीआर फाइल नहीं करते हैं तो जुर्माने का भुगतान करना पड़ सकता है. साथ ही कुछ टैक्स सिस्टम चुनने पर रोक लग सकती है।  6. पासपोर्ट फीस  अगर आप सामान्‍य या तत्‍काल, किसी भी तरह का पासपोर्ट बनवाने जा रहे हैं तो अब ये महंगा हो सकता है, क्‍योंकि विदेश मंत्रालय ने 1 जुलाई 2026 से नॉर्मल और तत्‍काल पासपोर्ट के लिए सर्विस फीस बढ़ा दी है. इसका मतलब है कि अगर आप पासपोर्ट अप्‍लाई करते हैं तो अब पहले से ज्‍यादा पेमेंट देना पड़ सकता है।  7. क्रेडिट कार्ड के नियम  SBI कार्ड ने चुनिंदा PhonePe SBI क्रेडिट कार्ड के लिए रिवॉर्ड पॉइंट में बदलाव कर रहा है. इस नियम के तहत रिवॉर्ड पॉइंट कमाने की नई सीमाएं और उन ट्रांज़ैक्शन की एक बड़ी लिस्ट तय की गई है जिन पर रिवॉर्ड पॉइंट नहीं मिलेंगे. इसके अलावा, 1 जुलाई, 2026 से, HDFC क्रेडिट कार्ड होल्डर्स हर कैलेंडर क्वार्टर में तीन बार मुफ़्त डोमेस्टिक एयरपोर्ट लाउंज का इस्तेमाल कर सकेंगे, बशर्ते उन्होंने पिछले कैलेंडर क्वार्टर में कम से कम ₹60,000 खर्च किए हों।  8. कारें हो रहीं महंगी  जुलाई के पहले दिन से कार के दाम बढ़ सकते हैं, क्‍योंकि KIA मोटर्स समेत कुछ ऑटोमोबाइल कंपनियां अपनी कारों के दाम बढ़ाने जा रही हैं. किआ ने अपनी कारों की कीमतों में 2 फीसदी और Tata Motors भी ICE (इंटरनल कंबशन इंजन) और EV मॉडल्स की कीमतों में 1.5% तक की कीमतों में बढ़ाने पर विचार कर रहा है।  9. पेट्रोल-डीजल के नियम  भारत में 1 जुलाई से पेट्रोल और डीजल खरीदने को लेकर एक बड़ा बदलाव हो गया है. केंद्र सरकार ने उन अस्थायी प्रतिबंधों को हटा दिया है, जिनके तहत बड़े व्यावसायिक उपभोक्ताओं (Commercial Buyers) की खुदरा पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीद पर सीमा तय की गई थी. अब ट्रांसपोर्ट कंपनियां, फैक्ट्रियां, इंडस्‍ट्री और अन्‍य व्‍यावसायिक कंज्‍यूमर्स पहले जैसे तेल खरीद सकते है।  10. ईपीएफओ अपडेट  सरकार ईपीएफओ 3.0 के लॉन्‍च करने पर काम कर रही है. ईपीएफओ की वेबसाइट पर 3 दिनों के लिए सभी सर्विस को बंद किया गया है. उम्‍मीद है कि इसके बाद ईपीएफओ 3.0 लॉन्‍च कर दिया जाएगा. हालांकि अभी तक कोई अधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है. अगर ईपीएफओ 3.0 लॉन्‍च होता है तो पीएफ यूजर्स UPI और एटीएम के जरिए पैसे विड्रॉल कर सकते हैं। 

आज से बदल गए LPG के नियम! कच्चे तेल की कीमत घटते ही सरकार का बड़ा ऐलान, जानिए क्या बदला

 नई दिल्‍ली एलपीजी को लेकर सरकार ने बड़ा ऐलान किया है. अभी तक जो भी नियम कायदे और पाबंदियां लागू थीं, उसे अब खत्‍म कर दिया गया है. लेकिन यह सिर्फ इंडस्ट्रियल और कमर्शियल LPG ग्राहकों के लिए ही है. सरकार ने नॉन-डोमेस्टिक पैक्ड LPG की सप्लाई पर लगी सभी सेक्टर-वाइज पाबंदियां हटा दी हैं और सप्लाई को वेस्ट एशिया संकट से पहले के स्तर पर बहाल कर दिया है।  पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि संकट की शुरुआत में रोकी गई बल्क LPG की सप्लाई में भी ढील दी गई है. इसे संकट से पहले की खपत के स्तर का 50% कर दिया गया है, जिससे कमर्शियल और इंडस्ट्रियल कस्‍टमर्स को काफी राहत मिली है. यह बहाली LPG सप्लाई की स्थिति में हाल ही में हुए सुधार के बाद की गई है.  सरल शब्‍दों में कहें तो 50 फीसदी एलपीजी की सप्‍लाई अब कमर्शियल और इंडस्‍ट्री कस्‍टमर्स को की जाएंगी।  वेस्ट एशिया संकट के दौरान, घरेलू LPG उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार ने 'आवश्यक वस्तु अधिनियम' के तहत आदेश जारी किए थे. इन आदेशों के तहत C3-C4 स्ट्रीम्स का इस्तेमाल सिर्फ़ LPG उत्पादन के लिए करना जरूरी कर दिया गया था और उन्हें पेट्रोकेमिकल व अन्य डाउनस्ट्रीम इस्तेमाल से हटाकर LPG उत्पादन में लगाया गया था।  C3-C4 स्ट्रीम्स को लेकर बदलाव पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि घरेलू LPG उत्पादन में सुधार और इम्पोर्टेड LPG कार्गो की अनुमानित उपलब्धता को देखते हुए, सरकार ने LPG पूल में C3/C4 स्ट्रीम्स के डायवर्जन को कम करने का भी फैसला किया है. नॉन-LPG इस्तेमाल के लिए C3-C4 स्ट्रीम्स का बढ़ा हुआ आवंटन लागू किया जाएगा, लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि घरेलू LPG की उपलब्धता पर कोई असर न पड़े।  घरेलू एलपीजी पर कोई असर नहीं सरकार ने साफ किया है कि पेट्रोकेमिकल सेक्टर के लिए C3-C4 गैसों का आवंटन बढ़ाने के बावजूद आम जनता के लिए घरेलू एलपीजी की उपलब्‍धता को कम नहीं किया जाएगा. सरकार यह तय करेगी कि घरेलू एलपीजी का उत्‍पादन कम से कम 40 टीएमटी हर दिन बना रहे. इसका मतलब है कि रसोई एलपीजी गैस की सप्‍लाई बनी रहेगी। कच्‍चे तेल के दाम में बड़ी गिरावट  जंग शुरू होने से पहले कच्‍चा तेल जिस लेवल पर पहुंचा था, अब उससे भी नीचे आ चुका है. ब्रेंट क्रूड की कीमत अब 72 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही है. तेल की कीमतों में यह गिरावट तब आई है, जब होर्मुज को फिर से खोल दिया गया है और जहाज तेजी से होर्मुज पार कर रहे हैं। 

गैस सिलेंडर इस्तेमाल करने वालों के लिए अहम अपडेट, 30 दिनों की डेडलाइन से पहले निपटाएं काम

नई दिल्ली मिडिल ईस्ट टेंशन के चलते देशभर में एलपीजी की सप्लाई पर असर पड़ते हुए नजर आया. इस बीच सरकार ने कई बड़े फैसले लिए जिसका सीधा असर एलपीजी उपभोक्ताओं पर पड़ा है. देश में एलपीजी सप्लाई को बढ़ावा देने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक अहम कदम उठाया है. अब जिन घरों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की सुविधा उपलब्ध है और उपभोक्ता PNG कनेक्शन ले चुके हैं, उन्हें निर्धारित समय के अंदर अपना LPG कनेक्शन सरेंडर करना होगा. सरकार का मानना है कि इससे गैस डिस्ट्रिबुशन प्रोसेस अधिक ट्रांसपरेंट बनेगा, डुप्लिकेट कनेक्शनों पर रोक लगेगी और जरूरतमंद परिवारों तक LPG की पहुंच बेहतर हो सकेगी।  हाल के सालों में कई शहरों में PNG नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है. इसके बावजूद कई ऐसे परिवार हैं जो PNG और LPG दोनों सुविधाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं. सरकार का कहना है कि इससे रिसोर्स और सब्सिडी व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. इसी को ध्यान में रखते हुए नए नियम लागू किए गए हैं।  क्या है नया 30 दिन वाला नियम? सरकार द्वारा जारी किए गए नियमों के अनुसार, अगर किसी घरेलू उपभोक्ता ने अपने घर में PNG कनेक्शन ले लिया है, तो उसे 30 दिनों के भीतर अपना LPG कनेक्शन सरेंडर करना होगा. यह नियम इंडेन, भारतगैस और एचपी गैस समेत सभी प्रमुख घरेलू LPG कनेक्शनों पर लागू होगा. जैसे- अगर किसी उपभोक्ता को 10 जून को PNG कनेक्शन मिला है, तो उसे अगले 30 दिनों के भीतर LPG कनेक्शन वापस करना होगा. फिक्स्ड अवधि के बाद ऐसे उपभोक्ताओं को LPG रिफिल या संबंधित सुविधाएं मिलने में दिक्कत आ सकती है. सरकार का फोकस है कि एक परिवार में एक ही घरेलू गैस व्यवस्था को बढ़ावा देना है।  सरकार ने क्यों उठाया यह कदम? सरकार की ‘वन हाउसहोल्ड, वन गैस कनेक्शन’ सोच के तहत यह कदम उठाया गया है. अधिकारियों का मानना है कि कई शहरी क्षेत्रों में PNG उपलब्ध होने के बावजूद लोग LPG कनेक्शन बनाए रखते हैं, जिससे गैस डिस्ट्रिबुशन पर अनावश्यक दबाव पड़ता है. नए नियम के जरिए डुप्लिकेट कनेक्शनों को कम करने, सब्सिडी के दुरुपयोग को रोकने और उन इलाकों में LPG की सप्लाई बढ़ाने को कोशिश की जा रही है जहां अभी PNG नेटवर्क नहीं पहुंचा है. इससे गैस डिस्ट्रिबुशन अधिक बेहतर और संतुलित बनने की उम्मीद है।  PNG अपनाने वालों के लिए क्या हैं सुविधाएं? सरकार ने उपभोक्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कुछ राहत भी दी है. यदि कोई परिवार भविष्य में ऐसे क्षेत्र में ट्रांसफर होता है जहां PNG की सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो उसके लिए LPG कनेक्शन दोबारा हासिल करना आसान बनाया गया है. LPG कनेक्शन सरेंडर करते समय उपभोक्ता ट्रांसफर वाउचर प्राप्त कर सकते हैं. इस डॉक्यूमेंट की मदद से वे नए स्थान पर आसान प्रोसेस के जरिए LPG कनेक्शन दोबारा शुरू करा सकते हैं. इससे उपभोक्ताओं को नए कनेक्शन के लिए लंबे प्रोसेस से नहीं गुजरना पड़ेगा।  OTP और e-KYC से बढ़ी निगरानी गैस डिस्ट्रिबुशन प्रोसेस को और सुरक्षित तथा ट्रांसपरेंट बनाने के लिए सरकार पहले ही OTP आधारित डिलीवरी सिस्टम लागू कर चुकी है. अब सिलेंडर की डिलीवरी के समय उपभोक्ता के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर OTP भेजा जाता है, जिसे वेरिफाई करने के लिए डिलीवरी एजेंट को बताना होता है. इसके अलावा, उज्ज्वला योजना समेत अलग-अलग लाभार्थियों के लिए e-KYC प्रोसेस भी जरूरी हो गई है. सरकार चाहती है कि सभी उपभोक्ताओं का डेटा अपडेट और वेरिफाइड रहे ताकि फायदा सही लोगों तक पहुंच सके और फर्जी कनेक्शनों पर रोक लगाई जा सके। 

ईंधन संकट से बड़ी राहत! भारत ने अगस्त तक का LPG और कच्चे तेल का इंतजाम कर लिया

नई दिल्ली  मिडिल ईस्ट में तनाव के चलते वैश्विक स्तर पर ईंधन की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है. लेकिन इस संकट के बावजूद भारत में रसोई गैस और पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं होने वाली है. इसका कारण यह है कि भारतीय रिफाइनरियों ने बेहद सूझबूझ के साथ देश में कम-से-कम अगस्त 2026 तक के लिए कच्चे तेल और एलपीजी (LPG) का इंतजाम कर लिया है।  उद्योग सूत्रों के अनुसार, भारतीय कंपनियों ने हाल के हफ्तों में अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) और अन्य वैश्विक विक्रेताओं से कच्चे तेल और एलपीजी की रिकॉर्ड खरीद की है. इस वजह से अगस्त तक की घरेलू जरूरतों को पूरा करने करने की व्‍यवस्‍था हो गई है।  ऐसे आ रहा है तेल सप्लाई को बिना किसी रुकावट के जारी रखने के लिए भारतीय रिफाइनरियां भारतीय कंपनियां फ्री-ऑन-बोर्ड (FOB) आधार पर समंदर के बीचों-बीच ही एक जहाज से दूसरे जहाज में क्रूड और एलपीजी ट्रांसफर करके खेप उठा रही हैं.इसे शिप-टू-शिप (Ship-to-Ship) ट्रांसफरकहते हैं. इसके लिए एडीएनओसी अपने फुजैराह स्टोरेज, जिर्कू और दास द्वीप (Das Island) से कच्चे तेल की खेप भारतीय रिफाइनरियों को उपलब्‍ध करा रहा है. इसके अलावा मलेशिया और ओमान के सोहार क्षेत्र में भी यह री-लोडिंग सुविधा दी जा रही है. भारत के लिए एलपीजी की मुख्य लोडिंग सोहार से की जा रही है।  भारतीय रिफाइनरी के एक अधिकारी ने पहचान उजागर न करने की शर्त पर बताया कि भारत के पास अब एलपीजी का कम-से-कम जुलाई के मध्य तक का पर्याप्त स्टॉक है और कच्चे तेल को लेकर भी अगस्त तक कोई समस्या नहीं होगी।  HPCL ने खरीदा 40 लाख बैरल मुरबान क्रूड सरकारी तेल कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) धड़ाधड़ तेल खरीद रही है. व्यापारिक सूत्रों के ने बताया कि एचपीसीएल ने अगस्त डिलीवरी के लिए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से 40 लाख बैरल मुरबान (Murban) क्रूड की बड़ी खेप खरीदी है. यह सौदा टोटलएनर्जीज की ट्रेडिंग शाखा टोट्सा और ‘मर्कुरिया’ के जरिए जुलाई के डेटेड ब्रेंट बेंचमार्क से करीब 40 सेंट प्रति बैरल प्रीमियम पर तय हुआ है. इससे ठीक एक हफ्ते पहले HPCL ने अपनी 1.80 लाख बैरल प्रतिदिन की क्षमता वाली राजस्थान रिफाइनरी के लिए ब्राजील और पश्चिम अफ्रीका से भी 20 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा था।  लैटिन अमेरिका और अफ्रीका से आ रहा तेल केवल एचपीसीएल ही नहीं, बल्कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और मैंगलोर रिफाइनरी (MRPL) जैसी अन्य दिग्गज भारतीय कंपनियों ने भी स्पॉट टेंडर के जरिए ताबड़तोड़ खरीदारी की है. मिडिल ईस्ट में युद्ध छिड़ने के बाद भारत ने समय रहते अपनी रणनीति बदलते हुए पारंपरिक खाड़ी देशों से निर्भरता घटाकर लैटिन अमेरिका और अफ्रीका से तेल का आयात बढ़ा दिया था. सऊदी अरब से भी भारत को लगातार बैकअप सपोर्ट मिलता रहा। 

LPG यूजर्स अलर्ट! इंडेन, HP और भारत गैस ने जारी की चेतावनी, 30 जून से पहले करें यह काम

नई दिल्ली सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में यह दावा किया जा रहा है कि 30 जून 2026 के बाद इंडेन, भारत गैस और HP गैस के एलपीजी कनेक्शन काट दिए जाएंगे। हालांकि, सरकार ने ऐसी कोई लास्ट डेट घोषित नहीं की है, लेकिन जिन इलाकों में PNG की सुविधा उपलब्ध है, वहां एलपीजी से PNG में शिफ्ट होने का दबाव जरूर बढ़ गया है। क्या है नया LPG-PNG नियम? केंद्र सरकार ने मार्च 2026 में एक आदेश जारी किया था, जिसके तहत जहां PNG नेटवर्क उपलब्ध है, वहां उपभोक्ताओं को धीरे-धीरे PNG अपनाने के लिए कहा गया है। साथ ही "नो ड्यूल कनेक्शन पॉलिसी" लागू की गई है। इसका मतलब है कि अगर किसी उपभोक्ता के घर में PNG कनेक्शन सक्रिय है, तो वह नया LPG कनेक्शन नहीं ले सकता और कई मामलों में LPG कनेक्शन सरेंडर करना पड़ सकता है। क्या 30 जून डेड लाइन है? मार्च 2026 के आदेश में PNG अपनाने के लिए 90 दिन का समय दिया गया था, जो जून के अंत में पूरा हो रहा है। हालांकि, अभी तक पेट्रोलियम मंत्रालय ने यह नहीं कहा है कि 30 जून के बाद सभी LPG कनेक्शन स्वतः बंद कर दिए जाएंगे। यानी 30 जून को देशभर में LPG कनेक्शन काटे जाने की खबर पूरी तरह सही नहीं है, लेकिन जिन क्षेत्रों में PNG उपलब्ध है, वहां भविष्य में LPG सप्लाई पर प्रतिबंध या सीमाएं लगाई जा सकती हैं। 10 लाख से ज्या परिवारों ने छोड़ा LPG पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार मार्च 2026 से अब तक 10.02 लाख PNG कनेक्शन एक्टिव किए गए और 3.22 लाख अतिरिक्त कनेक्शनों का इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हुआ। इस दौरान लगभग 9.94 लाख नए उपभोक्ताओं ने रजिस्ट्रेशन कराया है। इतना ही नहीं, करीब 1 लाख परिवार LPG छोड़कर PNG अपना चुके हैं। सरकार PNG को क्यों बढ़ावा दे रही है? सरकार का मानना है कि PNG लगातार गैस सप्लाई देता है और सिलेंडर बुकिंग की जरूरत नहीं होती। यह सुरक्षित और पर्यावरण के लिए बेहतर है साथ ही डिलीवरी और परिवहन लागत कम करता है। HPCL और Indian Oil की सलाह HPCL ने उपभोक्ताओं से कहा है कि PNG "सुविधाजनक और निर्बाध" ऊर्जा समाधान है। वहीं इंडियन ऑयल ने भी पेट्रोलियम मंत्रालय के संदेश को साझा करते हुए PNG को क्लीन और ग्रीन फ्यूल बताया है। उपभोक्ताओं को क्या करना चाहिए? अगर आपके क्षेत्र में PNG सुविधा उपलब्ध है स्थानीय गैस डिस्ट्रिब्यूटर कंपनी से संपर्क करें और PNG कनेक्शन के लिए आवेदन करें। LPG और PNG दोनों कनेक्शन एक साथ रखने के नियमों की जानकारी लें। किसी भी अफवाह पर भरोसा न करें और आधिकारिक सूचना का इंतजार करें। क्या अभी LPG सिलेंडर बंद हो जाएंगे? नहीं। फिलहाल इंडेन, भारत गैस और HP गैस के घरेलू सिलेंडर की आपूर्ति जारी है। सरकार ने सिर्फ PNG को बढ़ावा देने और दोहरे कनेक्शन को रोकने की नीति अपनाई है। किसी भी बड़े कदम से पहले आमतौर पर अलग से आधिकारिक सूचना जारी की जाएगी।

ऊर्जा सुरक्षा को बड़ी मजबूती, गैस से लदा LNG टैंकर ‘दिशा’ सुरक्षित गुजरात तट पर पहुंचा

अहमदाबाद  अमेरिका-ईरान के बीच पीस डील होते ही भारत को पहली खुशखबरी मिल गई है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार कर पहला एलएनजी जहाज भारत आ चुका है. जी हां, अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद पहला LNG कैरियर जहाज ‘दिशा’ आज यानी शुक्रवार को गुजरात में भरूच के दहेज पोर्ट पर पहुंचा. यह दहेज एलएनजी टर्मिनल पर आ गया है. इस तरह से तीन महीने का इंतजार खत्म हुआ. एनएनजी करियर दिशा ईरान युद्ध के चलते होर्मुज में फंसा हुआ था।  दरअसल, गुजरात के दहेज LNG टर्मिनल पर आज LNG कैरियर जहाज ‘दिशा’ सफलतापूर्वक पहुंच गया. इस जहाज ने 15 जून को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पार किया था. इस तरह से इस जहाज का तीन महीने से अधिक का इंतज़ार खत्म हुआ. इस जहाज ने 2 मार्च को कतर के रास लाफान टर्मिनल से 62,370 मीट्रिक टन LNG लोड किया था. मगर मध्य पूर्व में तनाव के कारण यह जहाज फारस की खाड़ी में फंस गया था।  दिशा जहाज पर कितना गैस इसक तरह से ‘दिशा’ जहाज में 62,370 मीट्रिक टन LNG है. ‘दिशा’ उन शुरुआती भारतीय LNG कैरियर जहाजों में से एक है, जिन्होंने अमेरिका-ईरान तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को पार किया है. इस कार्गो को भारत के सबसे बड़े LNG इंपोर्ट हब दहेज में स्टोर किया जाएगा और देश के अलग-अलग राज्यों में भेजा जाएगा।  दिशा दिखाएगा रास्ता दिशा का आना अपने आप में बड़ी खुशखबरी है. यह संकेत है कि अब भारत के जितने भी टैंकर और जहाज फंसे हैं, वो सब धीरे-धीरे भारत की ओर आ रहे हैं. इनमें कुछ एलपीजी टैंकर, कुछ ऑयल टैंकर और कुछ एलएनजी टैंकर हैं. ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से हॉर्मुज बंद हो गया था. इसके चलते ज्यादातर जहाज इस रास्ते में फंस गए थे. उन्हें गुजरने नहीं दिया जा रहा था. इसके चलते भारत के भी दर्जनों जहाज फंसे थे. ऐसे में भारत के लिए यह पहली बड़ी गैस खेप मानी जा रही है. दरअसल, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है. दुनिया की करीब 20 प्रतिशत एलएनजी सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है, लेकिन अमेरिका-ईरान संघर्ष और क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही काफी कम हो गई थी।  भारत के लिए बड़ी खुशखबरी होर्मुज बंद होने से भारत के लिए यह स्थिति चिंता की वजह बन गई थी. कारण कि भारत अपनी एलएनजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा कतर और यूएई जैसे खाड़ी देशों से आयात करता है. इसका रास्ता होर्मुज ही है. पिछले कुछ महीनों में सप्लाई कम होने के कारण भारत को महंगे स्पॉट मार्केट से गैस खरीदनी पड़ी और कुछ उद्योगों को गैस सप्लाई भी सीमित करनी पड़ी. हाालंकि, दिशा टैंकर का निकलना सामान्य स्थिति लौटने का संकेत जरूर है. दिशा टैंकर ने एक तरह से बाकी फंसे हुए जहाजों को एक नई दिशा दिखाई है. आने वाले समय में गैस और तेल की स्थित पहले की तरह नॉर्मल हो सकती है। 

15 करोड़ किसान परिवारों के लिए खुशखबरी, होर्मुज मार्ग से आ रहे 34 जहाज; ईंधन संकट की आशंका टली

नई दिल्ली अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते और होर्मुज स्ट्रेट पर दोहरी नाकेबंदी हटते ही भारत को बड़ी राहत मिली है. कतर से एलएलजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) भरकर भारत आ रहा जहाज ‘दिशा’ होर्मुज पार कर चुका है. यह सिर्फ एक जहाज की यात्रा नहीं, बल्कि उन दर्जनों जहाजों के लिए उम्मीद का संकेत है जो पिछले कई महीनों से फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं. इन जहाजों में पेट्रोल-गैस के साथ भारी संख्या में उर्वरकों से लदे जहाज भी शामिल है. ऐसे में अब भारत के करीब 15 करोड़ किसान परिवारों को भी जल्द बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।  भारत सरकार के अनुसार, शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम का एलएनजी कैरियर दिशा 62,370 मीट्रिक टन गैस लेकर भारत की तरफ तेजी से बढ़ रहा है और 18 जून तक इसके दाहेज पोर्ट पर पहुंचने की संभावना है. यह तीन महीने से अधिक समय बाद युद्धग्रस्त क्षेत्र से बाहर निकलने वाला पहला भारतीय ध्वज वाला एनएलजी जहाज है।  आखिर क्यों खास है ‘दिशा’? दिशा की सुरक्षित यात्रा इसलिए भी अहम है, क्योंकि इसके पीछे 34 अन्य भारतीय और विदेशी जहाजों की किस्मत जुड़ी हुई है. फारस की खाड़ी में फंसे इन जहाजों में बड़ी संख्या ऐसे पोतों की है, जो भारत के लिए जरूरी ऊर्जा और उर्वरक लेकर आने वाले हैं. दिशा के सुरक्षित निकलने से यह भरोसा बढ़ा है कि बाकी जहाज भी जल्द भारत की ओर रवाना हो सकेंगे।  किसानों के लिए आ रही गुड न्यूज जानकारी के मुताबिक फंसे हुए 34 जहाजों में से 16 जहाज फर्टिलाइजर लेकर आ रहे हैं. इनमें से 8 जहाज यूरिया से लदे हैं, 4 जहाजों पर DAP (डाय-अमोनियम फॉस्फेट), 3 जहाज सल्फर और एक जहाज अमोनिया लेकर आ रहा है. इसके अलावा 15 अन्य जहाज कच्चा तेल, एलएनजी और एलपीजी जैसी ऊर्जा सामग्री लेकर चल रहे हैं. यानी इन जहाजों का भारत पहुंचना सिर्फ पेट्रोलियम सेक्टर के लिए नहीं, बल्कि किसानों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।  भारत के लिए इतनी अहमियत क्यों रखता है होर्मुज? भारत अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है और उसका बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है. इसके अलावा भारत के आयातित एनएलजी का 60 प्रतिशत से ज्यादा और एलपीजी का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है. ऐसे में इस समुद्री मार्ग पर किसी भी तरह की बाधा सीधे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और कीमतों को प्रभावित करती है।  कब तक खत्म हो सकेगा संकट? एक्सपर्ट्स का कहना है कि जहाजों की आवाजाही शुरू होना अच्छी खबर है, लेकिन पेट्रोल-गैस संकट खत्म होने में अभी थोड़ा वक्त लगेगा. कतर के रास लाफान एनएलजी परिसर और यूएई के हबशन गैस प्लांट जैसी अहम ऊर्जा सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है. इससे उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है और सामान्य स्थिति बहाल होने में समय लग सकता है।  भारत के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी क्या है? अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम और होर्मुज को फिर से खोलने पर बनी सहमति के बाद समुद्री व्यापार में भरोसा लौटने लगा है. हालांकि वैश्विक शिपिंग कंपनियां अभी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं और कई ऑपरेटर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. फिर भी दिशा का सुरक्षित निकलना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि होर्मुज में सामान्य गतिविधियां धीरे-धीरे बहाल हो सकती हैं।  सबसे बड़ी राहत यह है कि तीन महीने से जकड़ी भारत की एनर्जी और फर्टिलाइजर सप्लाई चेन अब दोबारा से खुलने की उम्मीद जगी है. ‘दिशा’ ने सिर्फ LNG नहीं पहुंचाई, बल्कि यह संदेश भी दिया है कि होर्मुज के रास्ते फिर से खुल सकते हैं. अगर आने वाले दिनों में बाकी 34 जहाज भी सुरक्षित निकल जाते हैं तो भारत को ईंधन, गैस और खाद की आपूर्ति में बड़ी राहत मिल सकती है। 

सरकार का नया फैसला बना चर्चा का विषय, क्या बंद हो जाएंगी गैस एजेंसियां? जानिए पूरा मामला

 रामपुर  सरकार एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) के बजाय अब पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) को बढ़ावा दे रही है। जिले में भी तेजी से पीएनजी के उपभोक्ता बढ़ रहे हैं। अब शासन ने आदेश दिए हैं कि एलपीजी इस्तेमाल करने वाले शत-प्रतिशत उपभोक्ताओं के घरों तक पीएनजी पहुंचाई जाए। इसके बाद पीएनजी अपनाने वाले उपभोक्ताओं को एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना होगा। इससे भले ही उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी, लेकिन गैस एजेंसी पर बंदी का संकट आ जाएगा। साथ ही वहां काम करने वाले सैकड़ों स्टाफ और डिलीवरीमैन भी बेरोजगार हो जाएंगे। अमेरिका और इजरायल के बीच ईरान को लेकर चल रहे युद्ध का सबसे ज्यादा असर पेट्रोलियम पदार्थों पर पड़ा है। एलपीजी की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसके कारण सरकार का पूरा जोर अब पीएनजी पर है। मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन एसपी गोयल ने सभी जिलों के डीएम को पत्र भेजा है, जिसमें एलपीजी उपभोक्ताओं को पीएनजी में स्विच कराने के आदेश दिए गए हैं। पत्र में युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरु मध्य क्षेत्र में हाल की घटनाओं के कारण एलपीजी पर निर्भरता कम करने और खाना पकाने के ईंधन के रूप में पीएनजी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी आवश्यक कार्रवाई किए जाने के निर्देश भी दिए हैं। इसके लिए जिला प्रशासन को अपने जिले में संचालित गैस एजेंसियों संचालकों एवं प्रतिनिधियों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए उपलब्धता के आधार पर एलपीजी उपभोक्ताओं को शत-प्रतिशत पीएनजी पर स्विच कराने के लिए तत्काल कार्रवाई को कहा गया है। गैस एजेंसी संचालकों की पीड़ा गैस एजेंसी का काम अब फायदे वाला नहीं रह गया है। कई साल से एजेंसियों का कमीशन तक नहीं बढ़ा है। पीएनजी आने से एजेंसियों पर संकट मंडराने लगा है। हम इसका विरोध नहीं करते हैं, लेकिन एक एजेंसी से कई परिवार जुड़े हैं। सरकार को इस पर भी ध्यान देना चाहिए। – राजेंद्र प्रसाद, राजेंद्र गैस एजेंसी। धीरे-धीरे एलपीजी उपभोक्ता पीएनजी में तब्दील हो जाएंगे तो गैस एजेंसी संचालकों के पास आजीविका की समस्या खड़ी हो जाएगी। गैस एजेंसी से संचालक के अलावा 20 से 25 लोगों का परिवार पलता है। सरकार को इनके विषय में भी विचार करना चाहिए। – अमित दिवाकर, अध्यक्ष रामपुर एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन। पीएनजी की व्यवस्था महानगरों में पहले से व्यवहार में थी, लेकिन केंद्र सरकार ने 14 मार्च 2026 को अधिसूचना जारी कर इसे पूरे देश में स्पष्ट कानूनी प्रविधान के रूप में लागू कर दिया है। अब एलपीजी वालों को एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना होगा। – अंकित जैन, टांडा गैस सर्विस। सरकार का जोर अब पीएनजी पर है। जिले में हिंदुस्तान पेट्रोलियम कंपनी द्वारा पीएनजी का कार्य किया जा रहा है। प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप तेजी से काम किया जा रहा है। पीएनजी के करीब दो हजार कनेक्शन हो चुके हैं। – नीरज कुमार, एरिया मैनेजर एचपी।