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ऊर्जा सुरक्षा को बड़ी मजबूती, गैस से लदा LNG टैंकर ‘दिशा’ सुरक्षित गुजरात तट पर पहुंचा

अहमदाबाद  अमेरिका-ईरान के बीच पीस डील होते ही भारत को पहली खुशखबरी मिल गई है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार कर पहला एलएनजी जहाज भारत आ चुका है. जी हां, अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद पहला LNG कैरियर जहाज ‘दिशा’ आज यानी शुक्रवार को गुजरात में भरूच के दहेज पोर्ट पर पहुंचा. यह दहेज एलएनजी टर्मिनल पर आ गया है. इस तरह से तीन महीने का इंतजार खत्म हुआ. एनएनजी करियर दिशा ईरान युद्ध के चलते होर्मुज में फंसा हुआ था।  दरअसल, गुजरात के दहेज LNG टर्मिनल पर आज LNG कैरियर जहाज ‘दिशा’ सफलतापूर्वक पहुंच गया. इस जहाज ने 15 जून को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पार किया था. इस तरह से इस जहाज का तीन महीने से अधिक का इंतज़ार खत्म हुआ. इस जहाज ने 2 मार्च को कतर के रास लाफान टर्मिनल से 62,370 मीट्रिक टन LNG लोड किया था. मगर मध्य पूर्व में तनाव के कारण यह जहाज फारस की खाड़ी में फंस गया था।  दिशा जहाज पर कितना गैस इसक तरह से ‘दिशा’ जहाज में 62,370 मीट्रिक टन LNG है. ‘दिशा’ उन शुरुआती भारतीय LNG कैरियर जहाजों में से एक है, जिन्होंने अमेरिका-ईरान तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को पार किया है. इस कार्गो को भारत के सबसे बड़े LNG इंपोर्ट हब दहेज में स्टोर किया जाएगा और देश के अलग-अलग राज्यों में भेजा जाएगा।  दिशा दिखाएगा रास्ता दिशा का आना अपने आप में बड़ी खुशखबरी है. यह संकेत है कि अब भारत के जितने भी टैंकर और जहाज फंसे हैं, वो सब धीरे-धीरे भारत की ओर आ रहे हैं. इनमें कुछ एलपीजी टैंकर, कुछ ऑयल टैंकर और कुछ एलएनजी टैंकर हैं. ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से हॉर्मुज बंद हो गया था. इसके चलते ज्यादातर जहाज इस रास्ते में फंस गए थे. उन्हें गुजरने नहीं दिया जा रहा था. इसके चलते भारत के भी दर्जनों जहाज फंसे थे. ऐसे में भारत के लिए यह पहली बड़ी गैस खेप मानी जा रही है. दरअसल, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है. दुनिया की करीब 20 प्रतिशत एलएनजी सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है, लेकिन अमेरिका-ईरान संघर्ष और क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही काफी कम हो गई थी।  भारत के लिए बड़ी खुशखबरी होर्मुज बंद होने से भारत के लिए यह स्थिति चिंता की वजह बन गई थी. कारण कि भारत अपनी एलएनजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा कतर और यूएई जैसे खाड़ी देशों से आयात करता है. इसका रास्ता होर्मुज ही है. पिछले कुछ महीनों में सप्लाई कम होने के कारण भारत को महंगे स्पॉट मार्केट से गैस खरीदनी पड़ी और कुछ उद्योगों को गैस सप्लाई भी सीमित करनी पड़ी. हाालंकि, दिशा टैंकर का निकलना सामान्य स्थिति लौटने का संकेत जरूर है. दिशा टैंकर ने एक तरह से बाकी फंसे हुए जहाजों को एक नई दिशा दिखाई है. आने वाले समय में गैस और तेल की स्थित पहले की तरह नॉर्मल हो सकती है। 

15 करोड़ किसान परिवारों के लिए खुशखबरी, होर्मुज मार्ग से आ रहे 34 जहाज; ईंधन संकट की आशंका टली

नई दिल्ली अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते और होर्मुज स्ट्रेट पर दोहरी नाकेबंदी हटते ही भारत को बड़ी राहत मिली है. कतर से एलएलजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) भरकर भारत आ रहा जहाज ‘दिशा’ होर्मुज पार कर चुका है. यह सिर्फ एक जहाज की यात्रा नहीं, बल्कि उन दर्जनों जहाजों के लिए उम्मीद का संकेत है जो पिछले कई महीनों से फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं. इन जहाजों में पेट्रोल-गैस के साथ भारी संख्या में उर्वरकों से लदे जहाज भी शामिल है. ऐसे में अब भारत के करीब 15 करोड़ किसान परिवारों को भी जल्द बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।  भारत सरकार के अनुसार, शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम का एलएनजी कैरियर दिशा 62,370 मीट्रिक टन गैस लेकर भारत की तरफ तेजी से बढ़ रहा है और 18 जून तक इसके दाहेज पोर्ट पर पहुंचने की संभावना है. यह तीन महीने से अधिक समय बाद युद्धग्रस्त क्षेत्र से बाहर निकलने वाला पहला भारतीय ध्वज वाला एनएलजी जहाज है।  आखिर क्यों खास है ‘दिशा’? दिशा की सुरक्षित यात्रा इसलिए भी अहम है, क्योंकि इसके पीछे 34 अन्य भारतीय और विदेशी जहाजों की किस्मत जुड़ी हुई है. फारस की खाड़ी में फंसे इन जहाजों में बड़ी संख्या ऐसे पोतों की है, जो भारत के लिए जरूरी ऊर्जा और उर्वरक लेकर आने वाले हैं. दिशा के सुरक्षित निकलने से यह भरोसा बढ़ा है कि बाकी जहाज भी जल्द भारत की ओर रवाना हो सकेंगे।  किसानों के लिए आ रही गुड न्यूज जानकारी के मुताबिक फंसे हुए 34 जहाजों में से 16 जहाज फर्टिलाइजर लेकर आ रहे हैं. इनमें से 8 जहाज यूरिया से लदे हैं, 4 जहाजों पर DAP (डाय-अमोनियम फॉस्फेट), 3 जहाज सल्फर और एक जहाज अमोनिया लेकर आ रहा है. इसके अलावा 15 अन्य जहाज कच्चा तेल, एलएनजी और एलपीजी जैसी ऊर्जा सामग्री लेकर चल रहे हैं. यानी इन जहाजों का भारत पहुंचना सिर्फ पेट्रोलियम सेक्टर के लिए नहीं, बल्कि किसानों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।  भारत के लिए इतनी अहमियत क्यों रखता है होर्मुज? भारत अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है और उसका बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है. इसके अलावा भारत के आयातित एनएलजी का 60 प्रतिशत से ज्यादा और एलपीजी का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है. ऐसे में इस समुद्री मार्ग पर किसी भी तरह की बाधा सीधे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और कीमतों को प्रभावित करती है।  कब तक खत्म हो सकेगा संकट? एक्सपर्ट्स का कहना है कि जहाजों की आवाजाही शुरू होना अच्छी खबर है, लेकिन पेट्रोल-गैस संकट खत्म होने में अभी थोड़ा वक्त लगेगा. कतर के रास लाफान एनएलजी परिसर और यूएई के हबशन गैस प्लांट जैसी अहम ऊर्जा सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है. इससे उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है और सामान्य स्थिति बहाल होने में समय लग सकता है।  भारत के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी क्या है? अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम और होर्मुज को फिर से खोलने पर बनी सहमति के बाद समुद्री व्यापार में भरोसा लौटने लगा है. हालांकि वैश्विक शिपिंग कंपनियां अभी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं और कई ऑपरेटर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. फिर भी दिशा का सुरक्षित निकलना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि होर्मुज में सामान्य गतिविधियां धीरे-धीरे बहाल हो सकती हैं।  सबसे बड़ी राहत यह है कि तीन महीने से जकड़ी भारत की एनर्जी और फर्टिलाइजर सप्लाई चेन अब दोबारा से खुलने की उम्मीद जगी है. ‘दिशा’ ने सिर्फ LNG नहीं पहुंचाई, बल्कि यह संदेश भी दिया है कि होर्मुज के रास्ते फिर से खुल सकते हैं. अगर आने वाले दिनों में बाकी 34 जहाज भी सुरक्षित निकल जाते हैं तो भारत को ईंधन, गैस और खाद की आपूर्ति में बड़ी राहत मिल सकती है। 

सरकार का नया फैसला बना चर्चा का विषय, क्या बंद हो जाएंगी गैस एजेंसियां? जानिए पूरा मामला

 रामपुर  सरकार एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) के बजाय अब पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) को बढ़ावा दे रही है। जिले में भी तेजी से पीएनजी के उपभोक्ता बढ़ रहे हैं। अब शासन ने आदेश दिए हैं कि एलपीजी इस्तेमाल करने वाले शत-प्रतिशत उपभोक्ताओं के घरों तक पीएनजी पहुंचाई जाए। इसके बाद पीएनजी अपनाने वाले उपभोक्ताओं को एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना होगा। इससे भले ही उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी, लेकिन गैस एजेंसी पर बंदी का संकट आ जाएगा। साथ ही वहां काम करने वाले सैकड़ों स्टाफ और डिलीवरीमैन भी बेरोजगार हो जाएंगे। अमेरिका और इजरायल के बीच ईरान को लेकर चल रहे युद्ध का सबसे ज्यादा असर पेट्रोलियम पदार्थों पर पड़ा है। एलपीजी की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसके कारण सरकार का पूरा जोर अब पीएनजी पर है। मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन एसपी गोयल ने सभी जिलों के डीएम को पत्र भेजा है, जिसमें एलपीजी उपभोक्ताओं को पीएनजी में स्विच कराने के आदेश दिए गए हैं। पत्र में युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरु मध्य क्षेत्र में हाल की घटनाओं के कारण एलपीजी पर निर्भरता कम करने और खाना पकाने के ईंधन के रूप में पीएनजी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी आवश्यक कार्रवाई किए जाने के निर्देश भी दिए हैं। इसके लिए जिला प्रशासन को अपने जिले में संचालित गैस एजेंसियों संचालकों एवं प्रतिनिधियों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए उपलब्धता के आधार पर एलपीजी उपभोक्ताओं को शत-प्रतिशत पीएनजी पर स्विच कराने के लिए तत्काल कार्रवाई को कहा गया है। गैस एजेंसी संचालकों की पीड़ा गैस एजेंसी का काम अब फायदे वाला नहीं रह गया है। कई साल से एजेंसियों का कमीशन तक नहीं बढ़ा है। पीएनजी आने से एजेंसियों पर संकट मंडराने लगा है। हम इसका विरोध नहीं करते हैं, लेकिन एक एजेंसी से कई परिवार जुड़े हैं। सरकार को इस पर भी ध्यान देना चाहिए। – राजेंद्र प्रसाद, राजेंद्र गैस एजेंसी। धीरे-धीरे एलपीजी उपभोक्ता पीएनजी में तब्दील हो जाएंगे तो गैस एजेंसी संचालकों के पास आजीविका की समस्या खड़ी हो जाएगी। गैस एजेंसी से संचालक के अलावा 20 से 25 लोगों का परिवार पलता है। सरकार को इनके विषय में भी विचार करना चाहिए। – अमित दिवाकर, अध्यक्ष रामपुर एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन। पीएनजी की व्यवस्था महानगरों में पहले से व्यवहार में थी, लेकिन केंद्र सरकार ने 14 मार्च 2026 को अधिसूचना जारी कर इसे पूरे देश में स्पष्ट कानूनी प्रविधान के रूप में लागू कर दिया है। अब एलपीजी वालों को एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना होगा। – अंकित जैन, टांडा गैस सर्विस। सरकार का जोर अब पीएनजी पर है। जिले में हिंदुस्तान पेट्रोलियम कंपनी द्वारा पीएनजी का कार्य किया जा रहा है। प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप तेजी से काम किया जा रहा है। पीएनजी के करीब दो हजार कनेक्शन हो चुके हैं। – नीरज कुमार, एरिया मैनेजर एचपी।

गैस सिलेंडर में गड़बड़ी का खुलासा, संदिग्ध उपभोक्ताओं की सूची तैयार

लखनऊ घरेलू सिलेंडरों की हर रीफिल पर चेक लगाने के बाद तेल कंपनियों ने कॉमर्शियल की दिशा में कदम बढ़ाया है। सभी कनेक्शन धारकों का बीती अवधि का उपयोग का विवरण तैयार किया जा रहा है। जिन कनेक्शन धारकों ने नाम मात्र को रीफिल ली है, उनको संदिग्ध की सूची में डाला जा रहा है। वहीं अत्यधिक उपयोग वाले उपभोक्ता भी चिन्हित किए जा रहे हैं। इनका ऑडिट कराकर उपयोग की वास्तविक स्थिति जानी जाएगी। बीती अवधि में प्रबंधन के पास गैस कटिंग की शिकायतें पहुंची हैं। इसमें सस्ती घरेलू गैस से कॉमर्शियल की रीफिलिंग की शिकायत प्रमुख है। गैस कटिंग से तैयार किए गए इस सिलेंडर को कॉमर्शियल के उपयोगकर्ता को सरकारी रेट से कम पर उपलब्ध कराए जाने का आरोप है। इसको संज्ञान में लेकर तेल कंपनियों ने संबंधित कनेक्शन धारक का ब्योरा तलब कर उसके अधिकतम एवं न्यूनतम उपयोग का विवरण तैयार किया है। इस विवरण में इस बात का उल्लेख है कि एक रीफिल से दूसरी रीफिल के बीच कितना अंतर है। बीती अवधि में कितने अंतर से रीफिल ली गईं। इस समय यह अंतर कितना है। बिगड़ सकती है आपूर्ति वितरण से जुड़े लोगों ने बताया कि एक बड़ा वर्ग किसी भी तरह घरेलू गैस को हासिल करने की जुगत में लग गया है। किल्लत के समय में गैस की बुकिंग का स्तर लगातार बढ़ रहा है। ऐसे हालातों में वास्तविक जरूरतमंद घरों तक समय से गैस पहुंचाने की दिक्कत हो गई है। जो वितरक एक से दो दिन के अंदर अपने उपभोक्ताओं के यहां रीफिल पहुंचा देते थे, एक से अधिक का समय लेने लग गए हैं। वहीं तेल कंपनियां गैस की सीमित आपूर्ति दे रही हैं। जांच की वजह इस समय घरेलू उपयोग की एलपीजी खरीदार को 67.22 रुपये प्रति किलो पड़ रही है। जबकि कॉमर्शियल उपयोगकर्ता को एक किलो गैस के लिए 166.71 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। दोनों मदों में अंतर 99.69 रुपये किलो के स्तर तक पहुंच गया है। इस अंतर के चलते बड़े पैमाने पर कॉमर्शियल के 19 किलो के सिलेंडर में घरेलू गैस को भर कर बेचा जा रहा है। खरीदार को 300 रुपये की छूट देकर यह सिलेंडर 2800-2900 रुपये का दिया जा रहा है। आगरा संभाग, इंडेन वितरक संघ के अध्यक्ष, विपुल पुरोहित ने कहा कि कुछ ऐसे हलवाई चिन्हित किए गए हैं जिनका एलपीजी उपयोग सामान्य नहीं है। त्योहार के समय अधिक मांग की संभावना होने के बावजूद इनके द्वारा अपेक्षित रीफिल नहीं ली गई। कुछ रेस्टोरेंट भी चिन्हित किए गए हैं। इनका भी यही हाल है। पूरे एक महीने में नाममात्र की रीफिल ली गईं। जब कॉमर्शियल की किल्लत चल रही थी, उस समय इनकी तरफ से लगातार मांग थी। संदेह है कि इनके द्वारा अन्य स्रोतों से गैस हासिकल करने का प्रयास चल रहा है।

LPG उपभोक्ताओं के लिए बड़ा अपडेट! उज्ज्वला योजना में बदले नियम, करोड़ों लाभार्थियों की बढ़ी चिंता

  नई दिल्ली केंद्र सरकार ने  प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को बड़ा झटका (PM Ujjwala Yojna Rule Change) देते हुए सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर की संख्या में बड़ी कटौती की है. देश में हाल ही में तेल वितरण कंपनियों द्वारा 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी किए जाने के बाद, अब सरकार ने ये बड़ा फैसला लिया है।  उज्ज्वला योजना के नियमों में बदलाव के बाद अब PMUY के लाभार्थियों को पहले चार रिफिल पर प्रति सिलेंडर 300 रुपये का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) मिलेगा. उज्ज्वला योजना वाले एक आम परिवार में औसतन साल भर में लगभग चार रिफिल की खपत होती है, पहले PMUY लाभार्थियों को साल में 9 रिफिल पर सब्सिडी मिलती थी।  2016 से अब तक 10.5 करोड़ कनेक्शन  प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत मई 2016 में मोदी सरकार द्वारा की गई थी. पेट्रोलियम मिनिस्ट्री के मुताबिक, PMUY के जरिए खाना पकाने के लिए साफ-सुथरा ईंधन लाखों घरों तक पहुंचा है, जिससे महिलाओं को सशक्त बनाने और भारतीय परिवारों के जीवन स्तर में सुधार में मदद मिली. इस योजना का जरूरतमंदों को पूरा फायदा पहुंचा. इस सरकारी स्कीम की शुरुआत के बाद से अब तक गरीब परिवारों की महिलाओं को 10.5 करोड़ से ज्यादा मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिए गए।  सरकार देती ही 300 रुपये सब्सिडी उज्ज्वला योजना की शुरुआत के बाद सरकार ने एलपीजी को किफायती बनाए रखने के लिए मई 2022 में इस 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर 200 रुपये की सब्सिडी देने की शुरुआत की थी और इसे अक्टूबर 2023 में बढ़ाकर 300 रुपये प्रति सिलेंडर कर दिया था, जो लगातार लाभार्थियों को मिल रही हैं और LPG Subsidy का ये पैसा हर रिफिल के बाद लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे जमा किया जाता है. पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों को देखें, तो सरकार ने अब तक एलपीजी सब्सिडी के रूप में 52,000 करोड़ रुपये दिए हैं।  घाटे के बाद भी सब्सिडी राहत जारी मिडिल ईस्ट टेंशन और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से गहराए तेल-गैस संकट के बीच सरकारी तेल विपणन कंपनियां हर घरेलू गैस सिलेंडर पर करीब 700 रुपये का घाटा उठा रही हैं. इस बीच सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी भी की गई, लेकिन सरकार ने 300 रुपये प्रति सिलेंडर सब्सिडी देना जारी रखा है, जो उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए बड़ी राहत है. जहां आम ग्राहकों के लिए 14.2 किलो वाला सिलेंडर 942 रुपये का है, तो वहीं सब्सिडी के साथ उज्ज्वला योजना में पहले चार सिलेंडरों के लिए प्रति रिफिल 642 रुपये का भुगतान करना होता है।  12 से 9 और अब सिर्फ 4 सिलेंडर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत शुरुआत में लाभार्थियों को सालाना 12 रियायती सिलेंडर दिए जाते थे, जिनकी संख्या बीते साल घटाकर 9 कर दी गई थी और अब बड़ा फैसला लेते हुए इसे चार एलपीजी सिलेंडर तक सीमित कर दिया गया है. पेट्रोलियम मिनिस्ट्री की ओर से इस कदम को वित्तीय सहायता को वास्तविक औसत घरेलू खपत के स्तर के अनुरूप बनाने वाला बताया गया है।  लाभार्थियों को कितना घाटा?  तेल मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण मल खानूजा के मुताबिक, संशोधित पात्रता उज्ज्वला परिवारों की औसत सालाना गैस खपत को ध्यान में रखकर तय की गई है. हालांकि, प्रति रिफिल सब्सिडी की राशि अपरिवर्तित रखी गई है. ताजा बदलाव के बाद प्रति लाभार्थी वार्षिक सहायता की अधिकतम सीमा 1,200 रुपये हो गई है. लाभार्थियों पर असर की बात करें, तो अब तक 300 रुपये की सब्सिडी के साथ 9 एलपीजी सिलेंडर पर उन्हें सालाना 2700 रुपये की मदद मिलती थी, लेकिन अब इसमें एक झटके में 1500 रुपये की कमी कर दी गई है।  सरकार की ओर से ग्लोबल एलपीजी प्राइस हाइक का हवाला देते हुए LPG Cylinder Price Hike और उज्ज्वला योजना के तहत रियायती सिलेंडरों की संख्या में कटौती के फैसले का बचाव किया है. बयान में कहा गया कि संशोधित सब्सिडी स्ट्रक्चर से सरकार पर वित्तीय बोझ कम करने में मददगार होगा, साथ ही खाना पकाने के लिए एलपीजी पर निर्भर परिवारों को सहायता मिलती रहेगी। 

रसोई गैस 29 रुपये महंगी, हरपाल चीमा का केंद्र पर हमला; महंगाई को लेकर घेरा

चंडीगढ़  राज्य के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने घरेलू गैस सिलिंडर की कीमतों में 29 रुपये की वृद्धि को लेकर भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की।उन्होंने कहा कि तेल और जरूरी वस्तुओं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से आम लोगों की जिंदगी दिन-ब-दिन मुश्किल होती जा रही है। गरीब व मध्य वर्गीय परिवार पहले से ही महंगाई के बोझ तले दबे हैं।रसोई गैस में ताजा वृद्धि ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। एलपीजी की कीमतें तुरंत वापस लेने की मांग करते चीमा ने कहा कि केंद्र सरकार कीमतें बढ़ाने के बजाय महंगाई कम करने के लिए ठोस कदम उठाए। घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी पर आप के सीनियर नेता और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बार-बार बढ़ोतरी के बाद अब एक बार फिर घरेलू रसोई पर यह बोझ डाल दिया गया है। उन्होंने कहा कि आम नागरिक हर तरफ से महंगाई की मार झेल रहा है। डीजल, एलपीजी, सीएनजी और दूसरी ज़रूरी चीज़ों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे लाखों परिवारों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी और महंगी हो गई है।  आप के सीनियर नेता ने कहा कि भाजपा सरकार यूएस-ईरान युद्ध समेत अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम का बहाना बनाकर नागरिकों पर और आर्थिक बोझ डाल रही है। उन्होंने कहा कि महंगाई को कंट्रोल करने और तेल की ऊंची कीमतों से राहत देने के वादे पर सत्ता में आने के बावजूद भाजपा इन वादों को पूरा करने में लगातार नाकाम रही है। उन्होंने आगे कहा कि कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी का असर पहले ही छोटे व्यापारियों, रेहड़ी-पटरी वालों और लोकल ढाबों/होटलों पर पड़ चुका है। हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी का असर पहले ही छोटे व्यापारियों, रेहड़ी-पटरी वालों और लोकल खाने-पीने की दुकानों पर पड़ चुका है। अब घरेलू एलपीजी की कीमतों में भी बढ़ोतरी होने से परिवारों और छोटे कारोबारियों पर आर्थिक दबाव और बढ़ेगा। वित्त मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों ने देश की आर्थिक स्थिति को कमजोर किया है और आम लोगों की खरीदने की ताकत कम की है। उन्होंने मज़ाक में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर विदेश दौरे करते हैं, लेकिन उनकी सरकार की विदेश और आर्थिक नीतियां देश के नागरिकों को राहत देने में पूरी तरह से फेल रही हैं। बढ़ी हुई एलपीजी की कीमतों को तुरंत वापस लेने की मांग करते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि केंद्र सरकार को बार-बार तेल की कीमतें बढ़ाने के बजाय महंगाई को कंट्रोल करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि तेल और रसोई गैस की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देश को आर्थिक तंगी की ओर धकेल रही है। केंद्र को आम लोगों पर बोझ डालना बंद करना चाहिए और जनता को असली राहत देने पर ध्यान देना चाहिए।  

ईंधन संकट की चिंता खत्म! LPG और पेट्रोल-डीजल की भरपूर आपूर्ति के लिए तैयार हुआ बड़ा रोडमैप

नई दिल्ली  भारत लंबे समय से कच्चे तेल और गैस के लिए विदेशों पर निर्भर रहा है. हर साल अरबों डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार सिर्फ पेट्रोल, डीजल और एलपीजी खरीदने में खर्च हो जाता है. लेकिन अब तस्वीर बदलने की तैयारी शुरू हो चुकी है. अंडमान सागर में प्राकृतिक गैस मिलने के बाद मोदी सरकार ने पूर्वी तट पर ऐसा मेगाप्लान शुरू किया है, जो आने वाले सालों में देश की ऊर्जा कहानी बदल सकता है. सरकार अब समुद्र की गहराई में छिपे तेल और गैस भंडार खोजने के लिए बड़े स्तर पर सर्वे करा रही है. अगर यह मिशन सफल हुआ तो भारत को न सिर्फ एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की सप्लाई में मजबूती मिलेगी, बल्कि विदेशी तेल कंपनियों पर निर्भरता भी कम होगी. यही वजह है कि ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञ इसे भारत का ‘एनर्जी फ्रीडम मिशन’ बता रहे हैं. सरकार की नजर अब उन इलाकों पर है जहां पहले तकनीक की कमी के कारण पूरी तरह खोज नहीं हो पाई थी. अब एडवांस्ड सिस्मिक इमेजिंग टेक्नोलॉजी के जरिए समुद्र के नीचे छिपे बड़े हाइड्रोकार्बन भंडार तलाशे जाएंगे।   जानकारी के अनुसार सरकार की यह पूरी योजना सिर्फ तेल खोजने तक सीमित नहीं है. इसके पीछे आर्थिक और रणनीतिक दोनों सोच काम कर रही है. भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता देश है. घरेलू उत्पादन कम होने के कारण देश को अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करना पड़ता है. इससे वैश्विक संकट का असर सीधे भारतीय बाजार पर दिखता है. रूस-यूक्रेन युद्ध और मिडिल ईस्ट तनाव के दौरान इसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में साफ दिखा था. अब सरकार चाहती है कि देश के भीतर ही ऐसे बड़े भंडार खोजे जाएं, जिससे आने वाले दशकों तक ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो सके. इसी दिशा में महानदी, बंगाल-पुर्णिया, कृष्णा-गोदावरी और कावेरी बेसिन जैसे क्षेत्रों में बड़े स्तर पर सर्वे शुरू किए जा रहे हैं. माना जा रहा है कि इन इलाकों में भारी मात्रा में तेल और गैस छिपी हो सकती है।  पूर्वी तट पर शुरू हुआ भारत का सबसे बड़ा ऊर्जा मिशन     अंडमान सागर में ऑयल इंडिया को प्राकृतिक गैस मिलने के बाद सरकार का फोकस अब पूरी तरह पूर्वी तट पर आ गया है. सरकार ने वैश्विक जियोफिजिकल कंपनियों से निविदाएं मांगी हैं ताकि पुराने सिस्मिक डेटा को दोबारा प्रोसेस किया जा सके और नए ब्रॉडबैंड 3D सर्वे किए जा सकें. यह मिशन करीब 36 महीने तक चलेगा. इसके तहत समुद्र के नीचे की चट्टानों और संरचनाओं का हाई-टेक नक्शा तैयार किया जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे उन क्षेत्रों की पहचान हो सकेगी जिन्हें पहले नजरअंदाज कर दिया गया था।      सरकार इस बार सिर्फ पुराने तरीकों पर भरोसा नहीं कर रही. नई तकनीकों का इस्तेमाल करके समुद्र के नीचे कई किलोमीटर गहराई तक की स्पष्ट तस्वीर बनाई जाएगी. सर्वेक्षण जहाज समुद्र में लंबी केबल यानी स्ट्रीमर छोड़ेंगे. ये उपकरण साउंड वेव भेजकर नीचे की चट्टानों से लौटने वाली गूंज रिकॉर्ड करेंगे. वैज्ञानिक इस डेटा को प्रोसेस करके पता लगाएंगे कि कहां तेल और गैस फंसी हो सकती है. यही तकनीक दुनिया के बड़े ऑफशोर तेल क्षेत्रों की खोज में इस्तेमाल होती है।      भारत का सबसे बड़ा दांव कृष्णा-गोदावरी यानी KG बेसिन पर माना जा रहा है. यह क्षेत्र पहले से ही देश का प्रमुख गैस उत्पादन केंद्र है. यहां कई बड़े गैस फील्ड मौजूद हैं. लेकिन सरकार का मानना है कि एडवांस्ड सिस्मिक इमेजिंग से यहां और गहरे हिस्सों में नए भंडार मिल सकते हैं. KG बेसिन में गैस हाइड्रेट्स, डीप वॉटर रिजर्वायर और जटिल पेट्रोलियम सिस्टम मौजूद हैं. अगर यहां नई खोज होती है तो भारत की गैस सप्लाई में बड़ा उछाल आ सकता है।  महानदी बेसिन में छिपा बड़ा खजाना? ओडिशा तट के पास मौजूद महानदी बेसिन को भारत के सबसे संभावित डीप-वॉटर क्षेत्रों में माना जा रहा है. यहां पहले भी हाइड्रोकार्बन मिलने के संकेत मिल चुके हैं, लेकिन व्यावसायिक उत्पादन सीमित रहा. अब नई तकनीक के जरिए यहां की गहरी सिडिमेंटरी परतों की जांच होगी. वैज्ञानिकों का मानना है कि यहां 8 किलोमीटर से ज्यादा गहराई तक तेल और गैस मौजूद हो सकते हैं।  बंगाल-पुर्णिया बेसिन पर क्यों टिकी नजर? बंगाल-पुर्णिया बेसिन को भी सरकार बड़ा फ्रंटियर अवसर मान रही है. यहां 10 किलोमीटर तक मोटी सिडिमेंटरी परतें मौजूद हैं. भूवैज्ञानिक अध्ययनों में संकेत मिले हैं कि यहां मियोसीन युग के हाइड्रोकार्बन भंडार हो सकते हैं. पहले यहां बायोजेनिक गैस के संकेत भी मिल चुके हैं. अगर यह क्षेत्र सफल रहा तो पूर्वी भारत की ऊर्जा तस्वीर बदल सकती है।  कावेरी बेसिन से मिल सकती है नई ताकत तमिलनाडु से लेकर बंगाल की खाड़ी तक फैला कावेरी बेसिन पहले से तेल उत्पादन क्षेत्र रहा है. लेकिन सरकार का मानना है कि यहां अभी भी बड़े भंडार छिपे हुए हैं. खासकर ऑफशोर कार्बोनेट सिस्टम और जुरासिक सिं-रिफ्ट प्ले में भारी संभावनाएं बताई जा रही हैं. इस क्षेत्र में सिडिमेंटरी परतें करीब 8 किलोमीटर तक गहरी हैं. यानी यहां भविष्य में बड़े स्तर पर ड्रिलिंग की संभावना है।  विदेशी तेल पर निर्भरता घटाने की तैयारी भारत अभी अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है. कच्चे तेल का आयात बिल हर साल लाखों करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है. अगर घरेलू उत्पादन बढ़ता है तो विदेशी मुद्रा की बचत होगी. साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों का असर भी कम होगा. यही वजह है कि सरकार इसे सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक मिशन मान रही है।  मल्टी-क्लाइंट मॉडल से कैसे बदलेगा खेल? सरकार इस मिशन में मल्टी-क्लाइंट मॉडल का इस्तेमाल कर रही है. इसका मतलब है कि जियोफिजिकल कंपनियां खुद डेटा जुटाएंगी और बाद में उसे कई ऊर्जा कंपनियों को बेच सकेंगी. इससे सरकार पर शुरुआती आर्थिक बोझ कम होगा. साथ ही निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ेगी. इससे खोज का काम तेजी से आगे बढ़ सकता है।  सरकार पूर्वी तट पर नया सर्वे क्यों करा रही है? सरकार का उद्देश्य समुद्र के नीचे छिपे तेल और प्राकृतिक गैस भंडार की खोज करना है. भारत अभी बड़ी मात्रा में तेल आयात करता है. अगर घरेलू भंडार मिलते हैं तो एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की सप्लाई मजबूत होगी और आयात पर निर्भरता … Read more

रसोई गैस पर बड़ी बचत, जानिए LPG सिलेंडर पर ₹300 की छूट पाने का तरीका

भोपाल  एलपीजी सिलेंडर के दाम आपके शहर में चाहे जिस रेट पर मिल रहा हो, लेकिन उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को 300 रुपये सस्ता मिल रहा है। वैसे निराश तो आपको भी नहीं होना चाहिए, क्योंकि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई लागत से काफी सस्ता सिलेंडर आपको भी मिल रहा है। अगर दिल्ली का उदाहरण लें तो यहां उज्ज्वला योजना के लाभार्थी को 14.2 किलो वाला घरेलू सिलेंडर केवल ₹613 में मिल रहा है, जबकि बिना सब्सिडी वाले सामान्य उपभोक्ता को इसके लिए ₹913 देने पड़ते हैं। यह सप्लाई लागत ₹1,200 से काफी कम है। देश में 10.55 करोड़ से अधिक महिलाओं को मार्केट रेट से 300 और सप्लाई लागत से करीब 587 रुपये सस्ता सिलेंडर मिल रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में करीब 33 करोड़ कस्टमर घरेलू एलपीजी के हैं। 2014 में यह संख्या करीब 14.52 करोड़ थी। नुकसान की कौन कर रहा भरपाई एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई लागत और मार्केट प्राइस में अंतर तथा उज्ज्वला सब्सिडी के कारण ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। पिछले साल इन कंपनियों को ₹41,338 करोड़ का नुकसान हुआ था, जो इस साल बढ़कर लगभग ₹60,000 करोड़ हो सकता है। इस नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने इस साल लगभग ₹30,000 करोड़ के मुआवजे का प्रावधान किया है। आपको भी मिल सकता है 300 रुपये सस्ता सिलेंडर, जानें कैसे उज्ज्वला योजना के कनेक्शन के लिए अपने नजदीकी डिस्ट्रीब्यूटर से मिलें। इसके तहत गैस कनेक्शन लेने के लिए 18 वर्ष या उससे अधिक आयु की गरीब महिला होनी चाहिए, जिसके परिवार में पहले से LPG कनेक्शन नहीं है। ऐसी महिला आधार कार्ड, राशन कार्ड, बैंक खाते की जानकारी और आवश्यक घोषणा पत्र जमा करके आवेदन कर सकती है। बता दें उज्ज्वला योजना के तहत पात्र महिलाओं को बिना सिक्योरिटी मनी के गैस कनेक्शन दिया जाता है। साथ ही पहला भरा हुआ सिलेंडर और गैस चूल्हा भी मुफ्त मिलता है। उज्ज्वला योजना के लिए जरूरी दस्तावेज केवाईसी (KYC) आवेदन फॉर्म। पहचान प्रमाण के लिए आवेदक के आधार कार्ड की फोटोकॉपी। एड्रेस प्रूफ (अगर वर्तमान पता आधार कार्ड में दर्ज पते से अलग है)। प्रवासी (माइग्रेंट) आवेदकों के लिए स्व-घोषणा पत्र। जिस राज्य में आवेदन किया जा रहा है, वहां का राशन कार्ड या परिवार के सदस्यों की जानकारी प्रमाणित करने वाला राज्य सरकार का कोई अन्य दस्तावेज। आवेदक तथा परिवार के वयस्क सदस्यों के आधार कार्ड की फोटोकॉपी (जिनके नाम राशन कार्ड/पारिवारिक दस्तावेज में दर्ज हों)। बैंक पासबुक की फोटाकॉपी या कैंसिल चेक। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत क्या-क्या देती है सरकार सरकार 14.2 किलोग्राम सिलेंडर वाले कनेक्शन के लिए 2,050 रुपये और 5 किलोग्राम सिलेंडर वाले कनेक्शन के लिए 1,300 रुपये की आर्थिक सहायता देती है। यह सहायता राशि निम्न खर्चों को कवर करती है, जैसे… सिलेंडर की सिक्योरिटी डिपॉजिट, जो 14.2 किलोग्राम सिलेंडर के लिए 1,700 रुपये और 5 किलोग्राम सिलेंडर के लिए 950 रुपये है। प्रेशर रेगुलेटर के लिए 150 रुपये, एलपीजी पाइप के लिए100 रुपये और घरेलू गैस उपभोक्ता कार्ड के लिए 25 रुपये। निरीक्षण, स्थापना और यूज करने का प्रदर्शन शुल्क 75 रुपये है। इसके अलावा, सभी उज्ज्वला योजना लाभार्थियों को ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की ओर से पहला LPG रिफिल (सिलेंडर भरवाना) और गैस चूल्हा (हॉट प्लेट) बिल्कुल मुफ्त दिया जाता है।

LPG बाजार में बड़ा बदलाव, अमेरिका बना भारत का बड़ा सप्लायर; खाड़ी देशों की बढ़ी टेंशन

  नई दिल्ली पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने भारत की ऊर्जा खरीद व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है. इसी बदलाव का असर है कि मध्य-पूर्वी देशों से भारी मात्रा में लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) आयात करने वाला भारत अमेरिका से यह पेट्रोलियम उत्पाद खरीद रहा है. अब अमेरिका पारंपरिक खाड़ी देशों को पीछे छोड़ते हुए भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर बन गया है. वहीं, रूस भू-राजनीतिक तनाव और प्रतिबंधों के बावजूद, भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है।  डेटा एनालिटिक्स फर्म केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में भारत के कुल LPG आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 55% रही, जबकि फरवरी में यह केवल 14% थी. इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह अमेरिका इजरायल का ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करना है।  28 फरवरी को दोनों देशों ने ईरान पर हमला कर दिया था जिसके बाद शुरू हुए युद्ध ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में भारी तबाही मचाई. इस युद्ध ने एनर्जी सप्लाई चेन पर बहुत बुरा असर डाला क्योंकि ईरान ने तेल-गैस की सप्लाई के लिए अहम समुद्री रास्ते होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया. फिलहाल दोनों पक्षों के बीच बेहद नाजुक युद्धविराम कायम है और युद्ध खत्म करने के लिए कोई भी बातचीत अपने आखिरी मुकाम तक नहीं पहुंच पा रही है।  LPG के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर भारत अब अमेरिका की तरफ मुड़ा  भारत पारंपरिक रूप से अपनी अधिकांश LPG जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर रहा है. लेकिन युद्ध के कारण संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, कुवैत और कतर जैसे देशों से आयात बहुत कम हुआ है. भारत के LPG आयात में इन देशों की संयुक्त हिस्सेदारी फरवरी में 81% से घटकर मई में केवल 16% रह गई।  मई में अमेरिका से भारत को LPG निर्यात 73% बढ़कर लगभग 6.66 लाख मीट्रिक टन पहुंच गया. इससे खाड़ी क्षेत्र से आने वाले कार्गो में आई भारी गिरावट की भरपाई करने में मदद मिली।    सप्लाई में आई रुकावट के चलते भारत को घरेलू स्तर पर भी सख्त कदम उठाने पड़े. सरकार ने हाल ही में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं के लिए LPG सिलेंडर खरीदने पर रोक लगा दी और कुछ उद्योगों को LPG की सप्लाई कम कर दी ताकि घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दी जा सके।  घरेलू उत्पादन में बढ़ोतरी ने भी स्थिति को कुछ हद तक संभालने में मदद की है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत का LPG उत्पादन संघर्ष से पहले लगभग 35,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन था जो बढ़कर 50,000-52,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन तक पहुंच गया है. इससे आयात पर निर्भरता कुछ कम हुई है लेकिन देश की कुल मांग का लगभग 60% हिस्सा अब भी आयात से पूरा होता है।  तेल आयात पर भी ईरान संघर्ष का असर भारत के तेल आयात में भी संघर्ष का असर देखने को मिला है. मई में रूस से कच्चे तेल का आयात 24% बढ़कर 19.5 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गया, जो भारत के कुल लगभग 49 लाख बैरल प्रतिदिन के कच्चे तेल आयात का बड़ा हिस्सा है।  केप्लर के विश्लेषकों का कहना है कि रूस से मिलने वाला तेल भारतीय रिफाइनरियों को सही कीमत पर मिल रहा है. भारत को यह तेल ऐसे वक्त में मिल रहा है जब खाड़ी देशों से सप्लाई लगभग रुकी हुई है।  इसके साथ ही भारत ने वेनेजुएला और ओमान से भी खरीद बढ़ाई है. मई में ओमान से कच्चे तेल का आयात 179% बढ़ा, जो यह दिखाता है कि भारतीय रिफाइनरियां ऐसे सप्लायरों की ओर रुख कर रही हैं जिन्हें समंदर के जरिए देश में लाना आसान हो। 

गैस सिलेंडर उपभोक्ताओं के लिए अलर्ट, LPG को लेकर बदले नियम; 30 दिन का मिला समय

 नई दिल्ली देश में जून महीने की शुरुआत कई बड़े बदलावों (Rule Change From 1st June) के साथ हुई है और इसमें एलपीजी सिलेंडर से जुड़े नियम में चेंज सबसे अहम है. वेस्ट एशिया संघर्ष के चलते देश में पैदा हुए गैस संकट से निपटने के लिए मोदी सरकार ने पहले ही कई बड़े कदम उठाए हैं. वहीं अब 1 जून 2026 के एलपीजी को लेकर नया नियम लागू किया जा रहा है, जो घरेलू उपभोग के लिए सिलेंडर की पर्याप्त आपूर्ति जारी रखने के उद्देश्य से लाया गया है।  दरअसल, देश में पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG कनेक्शन बढ़ाए जा रही है, लेकिन इसके बाद भी एलपीजी का इस्तेमाल कम नहीं हो रहा है. इसे देखते हुए अब सरकार ने दोहरे गैस कनेक्शन को खत्म करने के लिए कमर कसी है. पहली तारीख से पीएनजी कनेक्शन रखने वाले उपभोक्ताओं के लिए 30 दिन की डेडलाइन तय की गई है, अगर इस समयसीमा में एलपीजी सिलेंडर सरेंडर नहीं किया जाता है, तो फिर उसे कैंसिल किया जा सकता है।  PNG कनेक्शन के साथ LPG  अमेरिका-ईरान में युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से गहराई एलपीजी किल्लत के बीच सरकार ने पीएनजी कनेक्शन बढ़ाने पर जोर दिया और इसका आंकड़ा बढ़ता जा रहा है. मार्च तक 6.5 लाख नए पीएनजी कनेक्‍शन दिए गए हैं, लेकिन इसके बाद भी LPG सिलेंडर का उपयोग कम नहीं हो रहा है. इससे साफ है कि कई परिवारों ने स्विच किए बिना ही नया पीएनजी कनेक्‍शन ले लिया है, जबकि सरकार ने साफ कहा था कि अगर पीएनजी और एलपीजी दोनों कनेक्‍शन हैं, तो एलपीजी को सरेंडर करना होगा. इसके बावजूद भी लोग इसे सरेंडर नहीं कर रहे हैं।  30 दिन की डेडलाइन, फिर सिलेंडर कैंसिल  इस समस्या को देखते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय एक बड़ा बदलाव कर रहा है. इसका उद्देश्य उन इलाकों में दोहरे-ईंधन (dual-fuel) कनेक्शन को धीरे-धीरे खत्म करना है, जहाँ गैस ग्रिड चालू हैं यानी पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध हैं. LPG रेगुलेशन ऑर्डर में हाल ही में हुए संशोधनों के बाद, जिन उपभोक्ताओं को PNG का कनेक्शन मिलता है, उनके लिए अब 30 दिनों की अनिवार्य टाइमलाइन तय कर दी गई है. 1 जून 2026 से, परिवारों को PNG कनेक्शन चालू होने के 30 दिनों के अंदर अपने मौजूदा LPG Cylinder ks कनेक्शन को आधिकारिक तौर पर खत्म करके सरेंडर  करना होगा. ऐसा न किए जाने की स्थिति में इस कनेक्शन को कैंसिल किया जा सकता है।  नई प्रणाली के तहत होगा सरेंडर 'एक घर एक कनेक्शन' के टारगेट के साथ किए जाने वाले इस बदलाव को आसान बनाने में मदद के लिए, Indane, Bharat Gas और HP Gas जैसी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों यानी OMCs एक कनेक्शन ट्रांसफर वाउचर सिस्टम शुरू कर रही हैं. यह पॉलिसी शहरी निवासियों को अपने एलपीजी सिलेंडर सुरक्षित रूप से अभी वापस करने की अनुमति देती है, साथ ही उन्हें बाद में अपना LPG कनेक्शन फिर से शुरू करने का कानूनी अधिकार भी इसके तहत दिया जाता है. इसका मतलब है कि अगरे वे आगे किसी ऐसे इलाके में चले जाते हैं जहां पर PNG की सुविधा नहीं है, तो वे अपने इस एलपीजी कनेक्शन को वापस पा सकते हैं।  जून के पहले दिन LPG सिलेंडर महंगा यहां बता दें कि जून महीने की शुरुआत होते ही पहले दिन एलपीजी सिलेंडर पर महंगाई का बम फूटा है. हालांकि, LPG Cylinder Price Hike कमर्शियल यूज वाले 19 किलोग्राम के सिलेंडर पर किया गया है, जबकि 14 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों को यथावत रखा गया है. दिल्ली में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर (Delhi LPG Cylinder Price) 42 रुपये महंगा होकर 3113.50 रुपये का हो गया है. जबकि घरेलू एलपीजी सिलेंडर 7 मार्च के दाम 913 रुपये पर मिल रहा है।