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एथेनॉल फ्यूल से होगी बचत या बढ़ेगा खर्च? E85 और E100 का पूरा गणित समझें

नई दिल्ली  भारत में अब E85 पेट्रोल मिलना शुरू हो गया है. E85 का मतलब है ऐसा ईंधन जिसमें 85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल होता है. फिलहाल यह कुछ चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध है, जिनमें दिल्ली जैसे शहर भी शामिल हैं. सरकार का लक्ष्य अगले साल तक इसे देशभर के करीब 5,000 पेट्रोल पंपों तक पहुंचाने का है. दिल्ली में जहां सामान्य पेट्रोल की कीमत करीब 102 रुपये प्रति लीटर है, वहीं E85 करीब 82 रुपये प्रति लीटर में बेचा जा रहा है. यानी इसकी कीमत लगभग 20 रुपये कम रखी गई है. हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि आज देश में मिलने वाले सामान्य पेट्रोल में भी लगभग 20 प्रतिशत एथेनॉल पहले से मिलाया जा रहा है, जिसे E20 कहा जाता है।  E20 पेट्रोल लगभग सभी पेट्रोल वाहनों के लिए उपलब्ध है, लेकिन E85 हर गाड़ी में नहीं डाला जा सकता. इसके लिए फ्लेक्स फ्यूल इंजन वाली कार या मोटरसाइकिल होना जरूरी है. ऐसी गाड़ियों की खासियत यह है कि इनमें E20, E85 या भविष्य में आने वाला E100 यानी 100 प्रतिशत एथेनॉल वाला ईंधन भी इस्तेमाल किया जा सकता है. भारत में अब फ्लेक्स फ्यूल तकनीक वाली कारें और दोपहिया वाहन बाजार में आने लगे हैं. सरकार का उद्देश्य लोगों को धीरे धीरे ऐसे वाहनों की ओर प्रोत्साहित करना है ताकि पेट्रोल पर निर्भरता कम हो और देश का आयात बिल घट सके।  सरकार एथेनॉल को बढ़ावा क्यों दे रही है एथेनॉल का उत्पादन भारत में ही किया जाता है, जबकि कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करना पड़ता है. अगर अधिक लोग एथेनॉल आधारित ईंधन अपनाते हैं तो देश को कम कच्चा तेल खरीदना पड़ेगा और विदेशी मुद्रा की बचत होगी. इसी सोच के तहत सरकार ने तेल कंपनियों से E85 की कीमत सामान्य पेट्रोल से कम रखने को कहा है।  क्या 20 रुपये सस्ता ईंधन सच में सस्ता साबित होगा पहली नजर में 20 रुपये प्रति लीटर कम कीमत काफी आकर्षक लगती है, लेकिन असली सवाल माइलेज का है. एथेनॉल में पेट्रोल की तुलना में ऊर्जा कम होती है, इसलिए एक लीटर एथेनॉल पर गाड़ी उतनी दूरी तय नहीं कर पाती जितनी एक लीटर पेट्रोल पर करती है. यही वजह है कि केवल प्रति लीटर कीमत देखकर फैसला करना सही नहीं होगा. वास्तविक खर्च इस बात पर निर्भर करेगा कि गाड़ी एक लीटर ईंधन में कितने किलोमीटर चलती है।  ब्राजील का अनुभव क्या कहता है एथेनॉल आधारित परिवहन की बात करें तो ब्राजील दुनिया के सबसे पुराने और सफल उदाहरणों में शामिल है. वहां 1975 से एथेनॉल को बढ़ावा देने की नीति लागू है और 2003 के बाद फ्लेक्स फ्यूल वाहनों का तेजी से विस्तार हुआ. आज वहां अधिकांश गाड़ियां ऐसी हैं जिनमें पेट्रोल और एथेनॉल दोनों का इस्तेमाल किया जा सकता है।  ब्राजील में एक मशहूर सिद्धांत है जिसे 70 प्रतिशत नियम कहा जाता है. इसका मतलब यह है कि एथेनॉल वाला ईंधन तभी आर्थिक रूप से फायदेमंद माना जाता है जब उसकी कीमत सामान्य पेट्रोल की कीमत के लगभग 70 प्रतिशत या उससे कम हो, यानी करीब 30 प्रतिशत सस्ती हो. इसका कारण यह है कि वहां के अनुभव के अनुसार एथेनॉल पर माइलेज पेट्रोल की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत कम मिलती है. अगर कोई गाड़ी एक लीटर शुद्ध पेट्रोल पर 10 किलोमीटर चलती है तो वही गाड़ी एक लीटर शुद्ध एथेनॉल पर लगभग 7 किलोमीटर चलती है।  भारत के E20 और E85 का गणित अगर मान लिया जाए कि कोई वाहन 100 प्रतिशत पेट्रोल पर 10 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देता है, तो E20 में मौजूद 80 प्रतिशत पेट्रोल और 20 प्रतिशत एथेनॉल के आधार पर उसकी अनुमानित माइलेज करीब 9.4 किलोमीटर प्रति लीटर बैठती है. इसी तरह E85 में 85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल होता है. उसी गणना के आधार पर इसकी अनुमानित माइलेज करीब 7.5 किलोमीटर प्रति लीटर हो सकती है. इसका मतलब यह हुआ कि E20 की तुलना में E85 पर माइलेज लगभग 20 प्रतिशत कम हो सकती है. इसी अंतर को ध्यान में रखते हुए E85 की कीमत सामान्य पेट्रोल से लगभग 20 रुपये प्रति लीटर कम रखी गई है।  क्या उपभोक्ता को फायदा होगा मौजूदा गणना के आधार पर ऐसा लगता है कि कम कीमत और कम माइलेज लगभग एक दूसरे को संतुलित कर देते हैं. यानी E85 इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ता को कोई बड़ा अतिरिक्त आर्थिक फायदा नहीं मिलेगा, लेकिन उसे कोई खास नुकसान भी नहीं होना चाहिए।  देश को हो सकता है बड़ा लाभ अगर बड़ी संख्या में लोग फ्लेक्स फ्यूल इंजन वाली गाड़ियां अपनाते हैं और E85 या भविष्य में E100 जैसे ईंधनों का इस्तेमाल बढ़ता है तो इसका सबसे बड़ा फायदा देश को होगा. इससे पेट्रोल और कच्चे तेल के आयात में कमी आ सकती है, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और डॉलर पर निर्भरता घट सकती है. लंबे समय में इससे भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये की स्थिति को भी मजबूती मिल सकती है. कुल मिलाकर, मौजूदा आंकड़ों के आधार पर E85 उपभोक्ता के लिए कोई चमत्कारी बचत का साधन नहीं दिखता, लेकिन ऊर्जा सुरक्षा और आयातित तेल पर निर्भरता कम करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम जरूर साबित हो सकता है।   

ईंधन संकट रोकने की तैयारी, केंद्र ने तेल कंपनियों पर विंडफॉल टैक्स बढ़ाया

नई दिल्ली ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है. इसी बीच भारत में सरकार ने डीजल और हवाई ईंधन के एक्सपोर्ट पर लगने वाले विंडफाल टैक्स को बढ़ा दिया है. हालांकि आम नागरिकों के लिए राहत की बात ये है कि मार्केट में पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार स्थिर बने हुए हैं. वित्त मंत्रालय के नोटिफिकेश के अनुसार ये नए रेट्स मंगलवार से लागू हो चुके हैं।  सरकार हर 15 दिन में विंडफाल टैक्स रेट का रिव्यू करती है. अब इन बदलाव के बाद डीजल के एक्सपोर्ट पर स्पेशन एडिशनल एक्साइज ड्यूटी को 13.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 14 रुपये प्रति लीटर कर दिया है. वहीं दूसरी तरफ हवाई ईंधन के एक्सपोर्ट पर ड्यूटी 9.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 12.5 रुपये रुपये प्रति लीटर हो गई है. हालांकि पेट्रोल के एक्सपोर्ट ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं हुआ।  ड्यूटी बढ़ाने का फैसला क्यों? दरअसल मिडिल ईस्ट क्राइसिस से वैश्विक मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें महंगी हो गईं. जब इंटरनेशनल मार्केट में तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो लोकल तेल कंपनियां मुनाफा कमाने के लिए ऑयल को देश के बाहर एक्सपोर्ट करने लगती हैं. इसे रोकने के लिए सरकार विंडफाल टैक्स लगाती है. इस टैक्स के जरिए देश के अंदर पेट्रोल-डीजल की सप्लाई को कंट्रोल किया जाता है।  आम आदमी पर इसका क्या असर? देखिए, अगर आप सोच रहे हैं कि ये टैक्स बढ़ जाने की वजह से आपके लिए फ्यूल महंगा हो जाएगा, तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. सरकार ने साफ किया है कि देश के अंदर बिकने वाले पेट्रोल-डीजल की ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं हुआ. यानी आपकी जेब पर इसका सीधा कोई असर नहीं पड़ेगा. हां, हवाई ईंधन पर टैक्स बढ़ने से एयरलाइन कंपनियों के खर्च जरूर बढ़ सकते हैं।  देश में पेट्रोल-डीजल के दामों में कोई बदलाव नहीं महीनो से चल रहे अमेरिका-ईरान के बीज जंग पर आखिरकार विराम लगता दिखा रहा है. इसी वजह से कच्चे तेल की कीमतें लगातार नीचे आ रही हैं. सप्लाई सुधरने की उम्मीद से मंगलवाल को ब्रेंट क्रूड पुराने सेशन से 5% टूटकर 81 डॉलर प्रति बैरल के लेवल पर आया गया. ऐसे में भारतीय तेल कंपनियों ने 16 जून को पेट्रोल-डीजल के दामों में कोई बदलाव नहीं किया है. देश के बड़े शहरों में ईंधन के दाम पुराने लेवल पर ही स्टेबल बने हुए हैं।  देश में ईंधन की कोई कमी नहीं पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और प्राकृतिक गैस की पर्याप्त उपलब्धता है तथा किसी प्रकार की ईंधन कमी की स्थिति नहीं है। मंत्रालय ने नागरिकों और उद्योगों से ऊर्जा का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने की अपील की है। अंतर-मंत्रालयी प्रेस ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि, औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्र के बड़े उपभोक्ता डीजल की खरीद अपने उपभोक्ता पंपों (कंज्यूमर पंप) से करें, ताकि खुदरा पेट्रोल पंपों पर दबाव कम किया जा सके। ईंधन आपूर्ति पूरी तरह सामान्य… सुजाता शर्मा ने बताया कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की आपूर्ति पूरी तरह स्थिर है। सभी रिफाइनरियां अपनी क्षमता के अनुसार सुचारू रूप से संचालित हो रही हैं और कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) का पर्याप्त भंडार भी उपलब्ध है।उन्होंने कहा कि, हाल में कुछ स्थानों पर आपूर्ति संबंधी दबाव इसलिए देखा गया क्योंकि मई महीने में लगभग 42 करोड़ लीटर डीजल, जो पहले बड़े उपभोक्ताओं या कंज्यूमर पंपों के माध्यम से वितरित होता था, वह खुदरा पेट्रोल पंपों से उठाया जाने लगा। इससे कुछ क्षेत्रों में अस्थायी दबाव की स्थिति बनी। खुदरा बिक्री पर अस्थायी सीमा लागू… सामान्य उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए सरकार ने 11 जून को एक अस्थायी अधिसूचना जारी की है। इसके तहत खुदरा पेट्रोल पंपों पर डीजल की बिक्री प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 200 लीटर तक सीमित कर दी गई है। औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति सीधे अपने उपभोक्ता पंपों से करें।सुजाता शर्मा ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था लगभग 90 दिनों के लिए लागू की गई है और इसका उद्देश्य केवल आम उपभोक्ताओं को परेशानी से बचाना है। उन्होंने दोहराया कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है। एलपीजी आपूर्ति भी हुई सामान्य… मंत्रालय के अनुसार, एलपीजी आपूर्ति की स्थिति भी अब पूरी तरह संतुलित हो गई है। पिछले चार दिनों के दौरान देशभर में 1.66 करोड़ एलपीजी बुकिंग प्राप्त हुईं, जबकि 1.84 करोड़ सिलेंडरों की डिलीवरी की गई। इससे लंबित बुकिंग का समय घटकर केवल 3.3 दिन रह गया है।इसी अवधि में 24,184 टन वाणिज्यिक एलपीजी की बिक्री हुई। इसके अलावा 2.18 लाख पांच किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर बेचे गए, जिनमें से 14,500 सिलेंडर विशेष शिविरों के माध्यम से वितरित किए गए। पीएनजी नेटवर्क का तेजी से विस्तार… मंत्रालय ने बताया कि, मार्च से अब तक 9.76 लाख घरेलू पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) कनेक्शनों में गैस आपूर्ति शुरू की जा चुकी है। इसके अलावा 3.19 लाख नए कनेक्शनों के लिए बुनियादी ढांचा तैयार किया गया है और 9.72 लाख नए उपभोक्ताओं का पंजीकरण किया गया है। अवैध गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई… पेट्रोलियम मंत्रालय ने ईंधन और एलपीजी से जुड़ी अवैध गतिविधियों के खिलाफ भी अभियान तेज कर दिया है। मार्च से अब तक एलपीजी से जुड़े मामलों में 1,330 एफआईआर दर्ज की गई हैं, 311 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 75,960 सिलेंडर जब्त किए गए हैं।वहीं, 27 मई से अब तक 12,303 लीटर पेट्रोल और 91,263 लीटर डीजल जब्त किया गया है। इस संबंध में 50 एफआईआर दर्ज की गईं और 49 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। उद्योगों को सीधे आपूर्ति की सलाह… सुजाता शर्मा ने कहा कि यह कदम पूरी तरह अस्थायी है और इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दोपहिया वाहन चालकों, कार मालिकों और किसानों को खुदरा पंपों पर आसानी से ईंधन उपलब्ध हो सके।उन्होंने बड़े औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं से अपील की कि वे फिर से सीधे आपूर्ति व्यवस्था का उपयोग करें, जिससे खुदरा ईंधन केंद्रों पर भीड़ और दबाव कम हो सके।

होर्मुज से आगे की कहानी: US-Iran समझौते से भारत को मिल सकते हैं दो बड़े आर्थिक फायदे

 नई दिल्ली  अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो गया है और स्विट्जरलैंड में इस डील पर साइन होंगे। इसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने और व्यापार फिर से शुरू करने का एलान भी शामिल है। होर्मुज से शिपिंग फिर से शुरू होने या सामान्य होने से भारत को बड़ी राहत मिलेगी। भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल के आयातकों में से एक है। ऐसे में तेल की सप्लाई को लेकर चिंता कम होने, माल ढुलाई का खर्च घटने और महंगाई का दबाव कम होने से उसे फायदा होगा। क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट? ईरान और ओमान के बीच के इस संकरे जलमार्ग से दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले तेल का लगभग पांचवां हिस्सा सप्लाई होता है और खाड़ी के प्रमुख उत्पादक देशों जैसे सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर के लिए निर्यात का मुख्य रास्ता है। ये सभी देश भारत को ऊर्जा की सप्लाई करने वाले अहम देश हैं। फरवरी के आखिर में अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध की वजह से इस स्ट्रेट से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई में रुकावट आई। इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों और एनालिस्ट्स का कहना है कि दोबारा खुलने और तनाव कम होने से ग्लोबल एनर्जी मार्केट में स्थिरता आने और भारत जैसे एनर्जी इम्पोर्ट करने वाले देशों के लिए हालात बेहतर होने की संभावना है। तेल की कीमतों में आई गिरावट अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के एलान के बाद तेल की कीमतों में गिरावट आई। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान के साथ युद्धविराम समझौता कर लिया है और होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की टोल-फ्री आवाजाही हो सकेगी। डोनल्ड ट्रंप ने पोस्ट किया, "मैं इसके जरिए होर्मुज स्ट्रेट को बिना किसी रोक-टोक के खोलने की पूरी मंजूरी देता हूं और साथ ही अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को तुरंत हटाने का भी आदेश देता हूं। दुनिया भर के जहाजों अपने इंजन चालू करो। तेल का प्रवाह शुरू होने दो!" युद्धविराम की खबर से तेल की कीमतों में गिरावट आई। तेल के लिए ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 4 प्रतिशत गिरकर लगभग 84 डॉलर प्रति बैरल हो गई। युद्ध की वजह से आई रुकावटों के बाद ग्लोबल ऑयल की कीमतें फरवरी में 70-72 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। भारत को सबसे बड़ा फायदा तेल में भारत अपनी जरूरत का करीब 80-85 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. इसमें खाड़ी क्षेत्र की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समझौता लागू होता है और ईरानी तेल फिर से बाजार में आता है तो ब्रेंट क्रूड की कीमतों में बड़ी गिरावट आ सकती है. इसका सीधा असर दुनिया के बाकी देशों के साथ-साथ भारत पर पड़ेगा. पहले समझें की भारत को क्या फायदा होगा।      पेट्रोल और डीजल के दामों पर दबाव कम होगा.     महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी.     भारत का तेल आयात बिल घटेगा.     देशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा और रुपये को भी मजबूती मिलेगी. भारत के लिए सबसे अच्छी खबर क्या है? रिपोर्ट के मुताबिक ड्राफ्ट में ईरान के तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी छूट मिलेगी. साथ ही 25 अरब डॉलर की फ्रीज ईरानी संपत्तियां जारी करने पर भी सहमति बनी है. भारत पहले ईरान से बड़ी मात्रा में सस्ता तेल खरीदता था, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद यह व्यापार लगभग बंद हो गया था. खास बात ये है कि ईरान से तेल का व्यापार डॉलर में न होकर रुपये में होता था. अब अगर प्रतिबंध धीरे-धीरे हटते हैं तो भारत फिर से ईरानी क्रूड खरीद सकता है. इससे भारत को सस्ता तेल मिल सकता है।  चाबहार पोर्ट को मिलेगी नई जान इस डील का दूसरा बड़ा असर भारत के रणनीतिक चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट पर पड़ सकता है. ईरान के चाबहार बंदरगाह में भारत ने भारी निवेश किया है. यह प्रोजेक्ट भारत को पाकिस्तान को बायपास करके अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच देती है. अमेरिका और ईरान के रिश्तों में नरमी आने से चाबहार पर अमेरिकी दबाव कम हो सकता है. इससे भारत को पोर्ट के विस्तार, नए निवेश और व्यापार बढ़ाने में आसानी होगी. इसके साथ ही इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) में भी तेजी आने की उम्मीद है।  समझौते में क्या-क्या हुआ?     रॉयटर्स के मुताबिक अंतिम ड्राफ्ट में कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं.     ईरान तुरंत होर्मुज जलडमरूमध्य खोलेगा.     अमेरिका 30 दिनों के भीतर नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा.     अमेरिका नए प्रतिबंध नहीं लगाएगा.     ईरान को तेल बेचने की अनुमति मिलेगी.     25 अरब डॉलर की फ्रीज संपत्तियां जारी की जाएंगी.     ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा.     यूरेनियम एनरिचमेंट और परमाणु कार्यक्रम पर अगले 60 दिनों तक विस्तृत बातचीत होगी.   मई के मध्य तक सरकार ने रिटेल कीमतों में नहीं किया था बदलाव इससे पेट्रोल और डीजल बनाने की लागत बढ़ गई, लेकिन सरकार ने मई के मध्य तक रिटेल कीमतों में बदलाव नहीं किया। सरकार ने 27 मार्च को पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की, ताकि पश्चिम बंगाल समेत पांच अहम राज्यों में चुनाव के दौरान रिटेल कीमतों में बढ़ोतरी से बचा जा सके। विधानसभा चुनावों के बाद बढ़े तेल के दाम विधानसभा चुनावों के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में प्रति लीटर लगभग 7.50 रुपये की बढ़ोतरी की गई, जबकि सीएनजी के दाम 6 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ाए गए। एलपीजी की कीमतों में भी दो किस्तों में 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर पर 89 रुपये की बढ़ोतरी की गई। कीमतें बढ़ने के बावजूद, सरकारी तेल कंपनियों को रोजाना लगभग 650 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है क्योंकि रिटेल कीमतें लागत से कम हैं। इंडस्ट्री के सूत्रों और एनालिस्ट्स का कहना है कि तेल की कीमतों में नरमी और स्ट्रेट के फिर से खुलने के साथ, ये धीरे-धीरे कम हो जाएंगी।

जेब पर बढ़ा बोझ: पेट्रोल-डीजल से लेकर घरेलू LPG और CNG तक महंगी, आम जनता परेशान

नई दिल्ली ईरान-अमेरिका युद्ध की मार सड़क से लेकर हमारे किचन तक पड़ रही है। पेट्रोल-डीजल के रेट बढ़ने से एक ओर महंगाई बढ़ रही है तो सड़क का सफर भी महंगा हो गया है। सीएनजी से भी राहत नहीं है और एलपीजी सिलेंडर की बढ़ती कीमतें कोढ़ में खाज का काम कर रही है। किचन का बजट बिगड़ रहा है। रुस-युक्रेन युद्ध के दौरान भी कच्चे तेलल के दाम आसमान छू रहे थे, इसके बावजूद पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े। चार साल तक शांत रहने के बाद मई 2026 में पेट्रोल और डीजल के दाम ताबड़तोड़ बढ़े। चार बार की बढ़ोतरी में अबतक ये करीब 7.50 रुपये लीटर महंगे हो चुके हैं। इसके अलावा सीएनजी और एलपीजी के दाम में भारी बढ़ोतरी हुई है। घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बात करें तो युद्ध से करीब एक साल से अधिक समय पहले से 14.2 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ था। बड़े आराम से दिल्ली में घरेलू एलपीजी सिलेंडर 853 रुपये में मिल रहा था। सबकुछ अच्छा चल ही रहा था कि फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला कर दिया। पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट गहरा गया। कच्चे तेल के दाम 125 डॉलर प्रति बैरल के पार चले गए। अक्सर एलपीजी के रेट महीने की पहली तारीख को होते हैं। घरेलू सिलेंडर के दाम 89 रुपये बढ़े 1 मार्च को रेट तो जारी हुए, लेकिन घरेलू सिलेंडर के दाम नहीं बढ़े। युद्ध के चलते ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 7 मार्च को घरेलू एलपीजी सिलेंडर के नए रेट का ऐलान कर दिया। इसके तहत एलपीजी सिलेंडर के दाम में 60 रुपये का इजाफा कर दिया। इसके साथ ही दिल्ली में घरेलू सिलेंडर महंगा होकर 913 रुपये पर पहुंच गया। ठीक 3 महीने बाद दाम फिर 29 रुपये और बढ़ गए। अब दिल्ली में घरेलू एलपीजी सिलेंडर 942 रुपये का हो गया है। कमर्शियल सिलेंडर के दाम 1773 रुपये बढ़े ये 3 महीने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर उपभोक्ताओं के लिए अब तक झटका वाला रहा। महज 3 महीने में 19 किलो वाला एलपीजी सिलेंडर 1740.50 रुपये से ₹3,113.50 पर पहुंच गया। यानी सिलेंडर कुल 1373 रुपये महंगा हो गया। यही सिलेंडर फरवरी में 1740.50 रुपये का था। इसके बाद मार्च में डबल झटके लगे। 1 मार्च 2026 को कमर्शियल सिलेंडर के दाम 28 रुपये और बढ़कर 1768.50 रुपये पर पहुंच गए। इसके बाद 7 मार्च को 114.50 रुपये का झटका लगा और 19 किलो वाला एलपीजी सिलेंडर दिल्ली में 1883 रुपये पर पहुंच गया। इसके बाद 1 अप्रैल 2026 को कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम 2078.50 रुपये पर पहुंच गए। सबसे बड़ा झटका लगा मई में। इस महीने सिलेंडर के दाम में ऐतिहासिक 993 रुपये की बढ़ोतरी हुई और दिल्ली में कीमत सीधे पहुंच गई 3071.50 रुपये पर। 1 जून को भी इसमें 42 रुपये का इजाफा हुआ और दिल्ली में 19 किलो वाला सिलेंडर 1 जून से ₹3,113.50 का हो गया है। सीएनजी की कीमतें भी 3 बार बढ़ीं युद्ध के दौरान पेट्रोल-डीजल और एलपीजी के दाम तो बढ़े ही, सीएनजी की कीमतें भी आसमान छूने लगी हैं। अभी कीमतों में शनिवार को 1 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी जो 10 दिनों से भी कम समय में तीसरी बढ़ोतरी है। दिल्ली में सीएनजी की कीमत अब 81.09 रुपये प्रति किलोग्राम होगी। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में कीमतें बढ़कर 89.70 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई हैं, जबकि गुरुग्राम में सीएनजी की कीमत 86.12 रुपये प्रति किलोग्राम होगी। यह बढ़ोतरी 15 मई को घोषित 2 रुपये प्रति किलोग्राम और 17 मई को 1 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी के बाद हुई है।

ईंधन संकट की चिंता खत्म! LPG और पेट्रोल-डीजल की भरपूर आपूर्ति के लिए तैयार हुआ बड़ा रोडमैप

नई दिल्ली  भारत लंबे समय से कच्चे तेल और गैस के लिए विदेशों पर निर्भर रहा है. हर साल अरबों डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार सिर्फ पेट्रोल, डीजल और एलपीजी खरीदने में खर्च हो जाता है. लेकिन अब तस्वीर बदलने की तैयारी शुरू हो चुकी है. अंडमान सागर में प्राकृतिक गैस मिलने के बाद मोदी सरकार ने पूर्वी तट पर ऐसा मेगाप्लान शुरू किया है, जो आने वाले सालों में देश की ऊर्जा कहानी बदल सकता है. सरकार अब समुद्र की गहराई में छिपे तेल और गैस भंडार खोजने के लिए बड़े स्तर पर सर्वे करा रही है. अगर यह मिशन सफल हुआ तो भारत को न सिर्फ एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की सप्लाई में मजबूती मिलेगी, बल्कि विदेशी तेल कंपनियों पर निर्भरता भी कम होगी. यही वजह है कि ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञ इसे भारत का ‘एनर्जी फ्रीडम मिशन’ बता रहे हैं. सरकार की नजर अब उन इलाकों पर है जहां पहले तकनीक की कमी के कारण पूरी तरह खोज नहीं हो पाई थी. अब एडवांस्ड सिस्मिक इमेजिंग टेक्नोलॉजी के जरिए समुद्र के नीचे छिपे बड़े हाइड्रोकार्बन भंडार तलाशे जाएंगे।   जानकारी के अनुसार सरकार की यह पूरी योजना सिर्फ तेल खोजने तक सीमित नहीं है. इसके पीछे आर्थिक और रणनीतिक दोनों सोच काम कर रही है. भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता देश है. घरेलू उत्पादन कम होने के कारण देश को अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करना पड़ता है. इससे वैश्विक संकट का असर सीधे भारतीय बाजार पर दिखता है. रूस-यूक्रेन युद्ध और मिडिल ईस्ट तनाव के दौरान इसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में साफ दिखा था. अब सरकार चाहती है कि देश के भीतर ही ऐसे बड़े भंडार खोजे जाएं, जिससे आने वाले दशकों तक ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो सके. इसी दिशा में महानदी, बंगाल-पुर्णिया, कृष्णा-गोदावरी और कावेरी बेसिन जैसे क्षेत्रों में बड़े स्तर पर सर्वे शुरू किए जा रहे हैं. माना जा रहा है कि इन इलाकों में भारी मात्रा में तेल और गैस छिपी हो सकती है।  पूर्वी तट पर शुरू हुआ भारत का सबसे बड़ा ऊर्जा मिशन     अंडमान सागर में ऑयल इंडिया को प्राकृतिक गैस मिलने के बाद सरकार का फोकस अब पूरी तरह पूर्वी तट पर आ गया है. सरकार ने वैश्विक जियोफिजिकल कंपनियों से निविदाएं मांगी हैं ताकि पुराने सिस्मिक डेटा को दोबारा प्रोसेस किया जा सके और नए ब्रॉडबैंड 3D सर्वे किए जा सकें. यह मिशन करीब 36 महीने तक चलेगा. इसके तहत समुद्र के नीचे की चट्टानों और संरचनाओं का हाई-टेक नक्शा तैयार किया जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे उन क्षेत्रों की पहचान हो सकेगी जिन्हें पहले नजरअंदाज कर दिया गया था।      सरकार इस बार सिर्फ पुराने तरीकों पर भरोसा नहीं कर रही. नई तकनीकों का इस्तेमाल करके समुद्र के नीचे कई किलोमीटर गहराई तक की स्पष्ट तस्वीर बनाई जाएगी. सर्वेक्षण जहाज समुद्र में लंबी केबल यानी स्ट्रीमर छोड़ेंगे. ये उपकरण साउंड वेव भेजकर नीचे की चट्टानों से लौटने वाली गूंज रिकॉर्ड करेंगे. वैज्ञानिक इस डेटा को प्रोसेस करके पता लगाएंगे कि कहां तेल और गैस फंसी हो सकती है. यही तकनीक दुनिया के बड़े ऑफशोर तेल क्षेत्रों की खोज में इस्तेमाल होती है।      भारत का सबसे बड़ा दांव कृष्णा-गोदावरी यानी KG बेसिन पर माना जा रहा है. यह क्षेत्र पहले से ही देश का प्रमुख गैस उत्पादन केंद्र है. यहां कई बड़े गैस फील्ड मौजूद हैं. लेकिन सरकार का मानना है कि एडवांस्ड सिस्मिक इमेजिंग से यहां और गहरे हिस्सों में नए भंडार मिल सकते हैं. KG बेसिन में गैस हाइड्रेट्स, डीप वॉटर रिजर्वायर और जटिल पेट्रोलियम सिस्टम मौजूद हैं. अगर यहां नई खोज होती है तो भारत की गैस सप्लाई में बड़ा उछाल आ सकता है।  महानदी बेसिन में छिपा बड़ा खजाना? ओडिशा तट के पास मौजूद महानदी बेसिन को भारत के सबसे संभावित डीप-वॉटर क्षेत्रों में माना जा रहा है. यहां पहले भी हाइड्रोकार्बन मिलने के संकेत मिल चुके हैं, लेकिन व्यावसायिक उत्पादन सीमित रहा. अब नई तकनीक के जरिए यहां की गहरी सिडिमेंटरी परतों की जांच होगी. वैज्ञानिकों का मानना है कि यहां 8 किलोमीटर से ज्यादा गहराई तक तेल और गैस मौजूद हो सकते हैं।  बंगाल-पुर्णिया बेसिन पर क्यों टिकी नजर? बंगाल-पुर्णिया बेसिन को भी सरकार बड़ा फ्रंटियर अवसर मान रही है. यहां 10 किलोमीटर तक मोटी सिडिमेंटरी परतें मौजूद हैं. भूवैज्ञानिक अध्ययनों में संकेत मिले हैं कि यहां मियोसीन युग के हाइड्रोकार्बन भंडार हो सकते हैं. पहले यहां बायोजेनिक गैस के संकेत भी मिल चुके हैं. अगर यह क्षेत्र सफल रहा तो पूर्वी भारत की ऊर्जा तस्वीर बदल सकती है।  कावेरी बेसिन से मिल सकती है नई ताकत तमिलनाडु से लेकर बंगाल की खाड़ी तक फैला कावेरी बेसिन पहले से तेल उत्पादन क्षेत्र रहा है. लेकिन सरकार का मानना है कि यहां अभी भी बड़े भंडार छिपे हुए हैं. खासकर ऑफशोर कार्बोनेट सिस्टम और जुरासिक सिं-रिफ्ट प्ले में भारी संभावनाएं बताई जा रही हैं. इस क्षेत्र में सिडिमेंटरी परतें करीब 8 किलोमीटर तक गहरी हैं. यानी यहां भविष्य में बड़े स्तर पर ड्रिलिंग की संभावना है।  विदेशी तेल पर निर्भरता घटाने की तैयारी भारत अभी अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है. कच्चे तेल का आयात बिल हर साल लाखों करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है. अगर घरेलू उत्पादन बढ़ता है तो विदेशी मुद्रा की बचत होगी. साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों का असर भी कम होगा. यही वजह है कि सरकार इसे सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक मिशन मान रही है।  मल्टी-क्लाइंट मॉडल से कैसे बदलेगा खेल? सरकार इस मिशन में मल्टी-क्लाइंट मॉडल का इस्तेमाल कर रही है. इसका मतलब है कि जियोफिजिकल कंपनियां खुद डेटा जुटाएंगी और बाद में उसे कई ऊर्जा कंपनियों को बेच सकेंगी. इससे सरकार पर शुरुआती आर्थिक बोझ कम होगा. साथ ही निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ेगी. इससे खोज का काम तेजी से आगे बढ़ सकता है।  सरकार पूर्वी तट पर नया सर्वे क्यों करा रही है? सरकार का उद्देश्य समुद्र के नीचे छिपे तेल और प्राकृतिक गैस भंडार की खोज करना है. भारत अभी बड़ी मात्रा में तेल आयात करता है. अगर घरेलू भंडार मिलते हैं तो एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की सप्लाई मजबूत होगी और आयात पर निर्भरता … Read more

रायपुर में पेट्रोल ₹107.96 पहुंचा, महीने में चौथी बार बढ़े तेल के दाम

रायपुर  देशभर में तेल कंपनियों ने फिर पेट्रोल डीजल के रेट बढ़ा दिए हैं। आज, 25 मई को पेट्रोल ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल ₹2.71 प्रति लीटर महंगा कर दिया है। इस बढ़ोतरी के बाद छत्तीसगढ़ के कई जिलों में पेट्रोल का प्राइस 109 रुपए प्रति लीटर के पार पहुंच गया है। राजधानी रायपुर में अब 1 लीटर पेट्रोल की कीमत ₹107.96 हो गई है। इससे पहले 15 मई को 3-3 रुपए, 19 मई को 90-90 पैसे और 23 मई को भी 90 पैसे प्रति लीटर रेट बढ़ाए गए थे। इस महीने ये चौथी बार दाम बढ़ा है। ब्लैक मार्केटिंग पर नजर, शिकायत के लिए नंबर जारी फ्यूल संकट और बढ़ती कीमतों के बीच प्रशासन भी अलर्ट मोड पर है। रायपुर कलेक्टर ने पेट्रोल-डीजल की ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। शहर में कहीं भी अधिक कीमत वसूली या अवैध बिक्री की जानकारी मिलने पर लोग 9977222564, 9977222574, 9977222584 और 9977222594 नंबर पर शिकायत कर सकते हैं। इस महीने चौथी बार फ्यूल के रेट बढ़ें ताजा रेट के मुताबिक, बस्तर और सरगुजा संभाग के जिलों में ज्यादा कीमत बढ़ी है। वहीं, रायपुर और कोरबा जैसे शहरों में बाकी जिलों की तुलना में थोड़ी राहत है। नारायणपुर में पेट्रोल ₹109.65 प्रति लीटर, जगदलपुर में ₹109.64, दंतेवाड़ा में ₹109.60 और बीजापुर में ₹109.59 लीटर बिक रहा है। जशपुर में पेट्रोल ₹109.52, सूरजपुर में ₹109.39 और अंबिकापुर में ₹109.09 प्रति लीटर, रायगढ़ में 109.3 रुपए दर्ज किया गया। बता दें कि इस महीने चौथी बार फ्यूल के रेट में इजाफा हुआ है। दुर्ग में पेट्रोल ₹108.29, धमतरी में ₹108.45, महासमुंद में ₹108.64 और बिलासपुर में ₹108.65 प्रति लीटर पहुंच गया है। रायपुर में 108 रुपए से नीचे, लेकिन राहत सीमित राजधानी रायपुर में पेट्रोल की कीमत ₹107.96 प्रति लीटर रिकॉर्ड है। प्रदेश के बड़े शहरों में यह दर अपेक्षाकृत कम है, लेकिन हालिया बढ़ोतरी के बाद यहां भी वाहन चालकों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ा है। कोरबा में सबसे कम कीमत प्रदेश में सबसे कम पेट्रोल कीमत कोरबा में दर्ज की गई, जहां पेट्रोल ₹107.63 प्रति लीटर बिक रहा है। इसके अलावा जांजगीर में ₹108.21 और कवर्धा व रायगढ़ में ₹108.86 प्रति लीटर रेट सामने आया है। दूर के जिलों में ज्यादा कीमत की वजह जानकारों के मुताबिक, बस्तर और सरगुजा संभाग में ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट ज्यादा होने के कारण पेट्रोल की कीमतें ज्यादा रहती है। वहीं बड़े शहरों और औद्योगिक जिलों में सप्लाई बेहतर होने से कीमतों में थोड़ा अंतर देखने को मिलता है। आम लोगों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर असर लगातार बढ़ती पेट्रोल कीमतों का असर अब रोजमर्रा के खर्च पर भी दिखाई देने लगा है। ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का कहना है कि डीजल और पेट्रोल महंगा होने से माल ढुलाई और यात्री किराए पर भी असर पड़ सकता है। वहीं आम लोग भी लगातार बढ़ते ईंधन खर्च से परेशान नजर आ रहे हैं। ऐसे तय होती है पेट्रोल-डीजल की कीमत भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, रिफाइनिंग खर्च, केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और राज्य सरकार के वैट को जोड़ने के बाद पेट्रोल-डीजल की अंतिम कीमत तय होती है। अलग-अलग राज्यों में टैक्स की दरें अलग होने के कारण हर शहर में ईंधन के रेट भी अलग-अलग रहते हैं। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में क्यों हुई बढ़ोतरी? इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। क्रूड की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं। बेस प्राइस से चार गुना तक बढ़ जाती है कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति के आधार पर देश में ईंधन के दाम तय किए जाते हैं। सरकारी तेल कंपनियां 'डेली प्राइस रिवीजन' यानी डायनेमिक प्राइसिंग सिस्टम के तहत हर दिन सुबह 6 बजे नए रेट अपडेट करती हैं। उपभोक्ता तक पहुंचने से पहले तेल की कीमतों में कई तरह के टैक्स और खर्च जुड़ते हैं, जिसे हम आसान भाषा में समझ सकते हैं:     कच्चे तेल की कीमत (बेस प्राइस): भारत अपनी जरूरत का करीब 90% क्रूड विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदे गए बैरल के हिसाब से प्रति लीटर तेल की कीमत तय होती है।     रिफाइनिंग और कंपनियों का चार्ज: कच्चे तेल को देश की रिफाइनरियों में साफ करके पेट्रोल-डीजल बनाया जाता है। इसमें रिफाइनिंग लागत और कंपनियों का मार्जिन शामिल होता है।     केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी: रिफाइनरी से निकलने के बाद केंद्र सरकार इस पर एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) और रोड सेस लगाती है। यह देशभर में सभी राज्यों के लिए समान होती है।     डीलर कमीशन: तेल कंपनियां जिस रेट पर पेट्रोल पंप मालिकों (डीलर्स) को ईंधन बेचती हैं, उसमें डीलर्स का अपना निश्चित कमीशन जोड़ा जाता है, जो पेट्रोल और डीजल के लिए अलग-अलग होता है।     राज्य सरकार का वैट (VAT): सबसे आखिर में राज्य सरकारें अपने हिसाब से वैट या लोकल सेल्स टैक्स लगाती हैं। चूंकि हर राज्य की वैट दरें अलग होती हैं, इसीलिए दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे अलग-अलग शहरों में ईंधन की कीमतें भी अलग-अलग हो जाती हैं।

जनता पर महंगाई की मार जारी, पंजाब-चंडीगढ़ में फिर बढ़े तेल के दाम

पटियाला  पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार भारी बढ़ोतरी हुई है। सोमवार को पेट्रोल के दाम में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर तक इजाफा हुआ। चंडीगढ़ में अब पेट्रोल 101.50 रुपये प्रति लीटर मिलेगा। वहीं डीजल का दाम 89 रुपये हो गया है।   पिछले 10 दिनों में चौथी बार ईंधन की कीमतें बढ़ाई गई हैं। बढ़ोतरी के बाद मोगा में पेट्रोल 105.67 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। वहीं डीजल 95.58 रुपये प्रति लीटर हो गया है। लगातार बढ़ते दामों से परेशान लोगों का कहना हे कि इस बढ़ोतरी से आम जनता पर सीधा असर पड़ रहा है। अब हर चीज महंगी हो जाएगी।  बढ़ोतरी के बाद जालंधर में पेट्रोल 104.80 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। वहीं डीजल के दाम 2.71 बढ़कर 94.75 रुपये प्रति लीटर हो गए हैं। पहली बार पेट्रोल ने 100 रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है।   जालंधर के पेट्रोल पंप पर पहुंचे लोगों ने बढ़ती कीमतों पर नाराजगी जताई। सुखजीत सिंह ने कहा कि मजदूरी कर घर का पेट पालते हैं। लगातार बढ़ती कीमतों का सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यम वर्ग पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल महंगा होने से सब्जियां, दूध और रोजमर्रा का सामान भी महंगा हो जाएगा। लोगों ने सरकार से आम जनता की परेशानियों को देखते हुए राहत देने की मांग की। उन्होंने कहा कि जितनी दिहाड़ी मिलती है उतने का तो पेट्रोल लग जाता है। सुनील कुमार और बिजली का काम करने वाले साहिब प्रीत सिंह ने भी कहा कि ईंधन की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी से महंगाई तेजी से बढ़ रही है और इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है।   वहीं पंजाब के पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल-डीजल खत्म होने का खतरा मंडरा रहा है। पंजाब पेट्रोल डीलर एसोसिएशन ने मुख्य सचिव को इस संबध में पत्र लिखा है और मांग की है कि सप्लाई सही करने के लिए तेल कंपनियों को निर्देश जारी किए जाने चाहिए। अगर सप्लाई न हुई तो आगे स्थिति बिगड़ सकती है। साथ ही मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को भी पत्र भी की कॉपी भेजी है। क्यों बढ़ रहे हैं दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, कमजोर होता रुपया और आयात लागत बढ़ने की वजह से तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ा है। रिफाइनिंग मार्जिन में बदलाव का असर भी ईंधन की कीमतों पर पड़ रहा है। लंबे समय तक कीमतें स्थिर रखने के बाद अब सरकारी तेल कंपनियां धीरे-धीरे बढ़ी हुई लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डाल रही हैं।    

फिर बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, मध्यप्रदेश में तेल कीमतों ने तोड़े रिकॉर्ड

भोपाल   ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के हालातों के चलते देश में एक बार फिर पेट्रोल – डीजल के दामों में बड़ी बढ़ोतरी की गई है। मध्य प्रदेश की बात करें तो यहां पेट्रोल – डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। तेल कंपनियों ने 25 मई को फिर ईंधन के दाम बढ़ा दिए। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पेट्रोल पर 2.61 रुपए और डीजल में 2.71 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है, जिसे आम लोगों के जेब पर बड़ा झटका माना जा रहा है। पेट्रोलियम कंपनी की ओर से जारी पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों पर गौर करें तो एमपी के कई शहरों में पेट्रोल के दाम 115 रुपए के करीब पहुंच गए हैं, जबकि डीजल 100 रुपए के पार निकल गया है। भोपाल में सोमवार सुबह 6 बजे से पेट्रोल की प्रति लीटर दर से कीमत 114.65 रुपए और डीजल 99.74 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। उज्जैन में सबसे महंगा पेट्रोल प्रदेश के बड़े शहरों में उज्जैन सबसे महंगा हो गया है, जहां पेट्रोल 115.03 रुपए और डीजल 100.11 रुपए प्रति लीटर पहुंच गया। इंदौर में पेट्रोल 114.54 रुपए और डीजल 99.57 रुपए हो गया है। जबलपुर और ग्वालियर में भी तेल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 11 दिन में चौथी बार बढ़े दाम मई महीने में यह चौथी बार है जब तेल कंपनियों ने कीमतें बढ़ाई हैं। 15 मई से शुरू हुई बढ़ोतरी के बाद अब तक पेट्रोल-डीजल करीब 8 रुपए प्रति लीटर तक महंगे हो चुके हैं। इस महीने कब-कब बढ़े रेट -15 मई को पहली बार 3.14 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 3.11 रूपए प्ति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। -19 मई को पेट्रोल और डीजल के दामों में लगभग 90 पैसे की बढ़ोतरी हुई। -23 मई को 87 रूपए पेट्रोल पर तो वहीं, 91 पैसे डीजल पर बढ़ाए गए। -25 मई यानी आज एक बार फिर पेट्रोल पर 2.61 रूपए और डीजल पर 2.71 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। बढ़ेगा मालभाड़ा, महंगी होंगी रोजमर्रा की चीजें डीजल महंगा होने का सीधा असर परिवहन पर पड़ेगा। ट्रक और मालवाहक वाहनों का किराया बढ़ने से सब्जियां, फल, राशन और दूसरे जरूरी सामान महंगे हो सकते हैं। स्कूल बस, ऑटो और सार्वजनिक परिवहन का किराया भी बढ़ने के संकेत हैं। खेती-किसानी पर भी असर पड़ेगा। ट्रैक्टर और पंपिंग सेट चलाने का खर्च बढ़ने से किसानों की लागत बढ़ेगी, जिसका असर अनाज और खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है। कच्चे तेल की कीमतें बनी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह बताया जा रहा है। ईरान-अमेरिका तनाव के बाद क्रूड ऑयल 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। तेल कंपनियों का कहना है कि बढ़ती लागत के कारण दाम बढ़ाना जरूरी हो गया था। कमलनाथ का सरकार पर निशाना पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोशल मीडिया पर सरकार को घेरते हुए कहा कि सरकार महंगाई रोकने के बजाय पूरा बोझ जनता पर डाल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब कच्चे तेल के दाम कम थे तब जनता को राहत नहीं दी गई और अब लगातार कीमतें बढ़ाई जा रही हैं।

सोमवार को महंगाई का डबल अटैक, पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े; दिल्ली-कोलकाता में नई कीमतें लागू

नई दिल्ली  सोमवार को ईंधन की कीमतों में फिर से बढ़ोतरी की गई, जिससे पेट्रोल की कीमत में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 2.71 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई, जो दो सप्ताह से भी कम समय में चौथी बढ़ोतरी है। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर हो गई है। प्रमुख शहरों में अब क्या है पेट्रोल की कीमत? अगर बात करें भारत के प्रमुख शहरों में तेल की कीमतों की तो दिल्ली में 102.12 रुपये, कोलकाता में 113.51, मुंबई में 111.21, नोएडा में 101.9 रुपये, बेंगलुरु में 110.6 रुपये, भूवनेश्वर में 108.8 रुपये, चंडीगढ़ में 101.5 रुपये, जयपुर में 113.4 रुपये, लखनऊ में 101.9 रुपये, पटना में 113.5 रुपये प्रति लीटर है। प्रमुख शहरों में अब क्या है डीजल की कीमत? अगर बात करें भारत के प्रमुख शहरों में डीजल के कीमत की तो नई दिल्ली में 95.2 रुपये, कोलकाता में 99.8 रुपये, मुंबई में 97.8 रुपये, चेन्नई में 99.6 रुपये, गुड़गांव में 95.4 रुपये, नोएडा में 95.4 रुपये, बेंगलुरु में 98.5 रुपये, भुवनेश्वर में 100.6 रुपये, चंडीगढ़ में 89.5 रुपये, हैदराबाद में 103.8 रुपये, जयपुर में 98.4 रुपये, लखनऊ में 95.4 रुपये, पटना में 99.5 रुपेय प्रति लीटर है। इस महीने यह चौथी बढ़ोतरी ईंधन की कीमतों में इस महीने में यह चौथी बढ़ोतरी है। 25 मई को पेट्रोल ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल ₹2.71 प्रति लीटर महंगा हो गया। इससे पहले 23 मई को पेट्रोल 87 पैसे, डीजल 91 पैसे महंगा किया गया था। जबकि, 19 मई को पेट्रोल और डीजल के दामों में एवरेज 90 पैसे की बढ़ोतरी की गई थी। 15 मई को भी कीमतों में ₹3 प्रति लीटर का भारी इजाफा किया गया था। अधिकतर राज्यों में पेट्रोल 100 के पार उत्तर प्रदेश में 1 लीटर पेट्रोल की कीमत ₹102.76 और पश्चिम बंगाल में ₹114.20 पर पहुंच गई है। आंध्र प्रदेश में पेट्रोल ₹117.35 वहीं, असम में ₹106.21, मध्य प्रदेश में ₹115.77,बिहार में ₹114.79, राजस्थान में ₹113.93 प्रति लीटर पर पहुंच गया है। महाराष्ट्र में एक लीटर पेट्रोल की कीमत ₹113.05, दिल्ली में ₹102.11, छत्तीसगढ़ में ₹109.59, गुजरात में ₹102.92, हरियाणा में ₹103.57, हिमाचल प्रदेश में ₹101.64 और जम्मू और कश्मीर में ₹108.47 प्रति लीटर हो गई है। झारखंड में 1 लीटर पेट्रोल का दाम आज से ₹107.02, केरल में ₹114.31, मणिपुर में ₹114.76, मिजोरम में ₹104.74,ओडिशा में ₹110.30, पंजाब में ₹105.90, सिक्किम में ₹109.88 हो गया है। वहीं, तेलंगाना में ₹116.78, त्रिपुरा में ₹104.89, उत्तराखंड में ₹100.96 एक लीटर पेट्रोल का दाम अब इस रेट पर है। इन राज्यों में डीजल भी 100 के पार mypetrolprice के मुताबिक आंध्र प्रदेश में डीजल की कीमत ₹105.92 पर पहुंच गई है। बिहार में भी कई शहरों में डीजल के दाम 100 रुपये लीटर के पार पहुंच गए हैं। अररिया में, औरंगाबाद, बांका, भागलपुर में डीजल 100 के पार है। छत्तीसगढ़ में डीजल के रेट 100 के पार पहुंच गया है। गुजरात के राजकोट में डीजल 100.01 रुपये लीटर है। झारखंड, केरल, मध्यप्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल के कुछ शहरों में डीजल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गई है। क्यों बढ़ रहे पेट्रोल-डीजल के दाम ईरान युद्ध के चलते तेल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। सरकार के मुताबिक, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण घाटे में चल रही थीं। पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा के अनुसार, कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर हर महीने करीब ₹30,000 करोड़ का नुकसान हो रहा था। चुनाव से पहले सरकार की कोशिशें कीमतें स्थिर रखने के लिए सरकार ने पहले ही पेट्रोल और डीजल पर स्पेशल एक्साइज ड्यूटी में ₹10-10 प्रति लीटर की कटौती कर दी थी। पेट्रोल पर यह ड्यूटी ₹13 से घटाकर ₹3, जबकि डीजल पर ₹10 से शून्य कर दी गई थी। केंद्र सरकार की ओर से पहले एक लीटर पेट्रोल पर कुल ₹21.90 एक्साइज ड्यूटी वसूली जाती थी, जो घटकर ₹11.90 रह गई। इसी तरह, डीजल पर कुल केंद्रीय उत्पाद शुल्क ₹17.8 से घटकर ₹7.8 पर आ गया। इसी निर्णय की वजह से पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े थे। पिछले शनिवार को बढ़ी थी कीमतें पेट्रोल-डीजल की कीमतें पिछले शनिवार को बढ़ी थी, जब पेट्रोल की कीमत में 87 पैसे और डीजल की कीमत में 91 पैसे की वृद्धि की गई थी। शनिवार को ही दिल्ली में सीएनजी की कीमत में भी 1 रुपया प्रति किलोग्राम की वृद्धि के साथ 81.09 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। क्यों दोबारा बढ़ी ईंधन की कीमतें? अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध के दौरान ईरान ने होर्मुज पर नियंत्रण कर लिया। जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हो रही है। होर्मुज स्ट्रेट में ईरान द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। पिछले कई हफ्तों से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद भारत की तेल विपणन कंपनियां पेट्रोल और डीजल को पुरानी कीमतों पर ही बेच रही थी। लेकिन पिछले दो हफ्तों से तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है। अनुमानों के अनुसार, तीनों तेल और गैस कंपनियां – इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसीएल), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) – प्रतिदिन सामूहिक रूप से 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का घाटा उठा रही थीं। इसलिए, सरकार को कीमतें बढ़ानी पड़ीं।

तेल कीमतों में बढ़ोतरी पर सरकार का बड़ा दावा, कहा- वैश्विक संकट के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल सबसे कम महंगा

नई दिल्ली देश में मई 2026 में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तीन बार संशोधन किया गया- 15 मई, 19 मई और 23 मई को. सरकारी सूत्रों के अनुसार, इन तीनों चरणों के बाद कुल मिलाकर पेट्रोल 4 रुपये 74 पैसे और डीजल 4 रुपये 82 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ. CNG की कीमत भी 1 रुपये प्रति किलो बढ़ाई गई. यह लगभग चार वर्षों में पहली बड़ी बढ़ोतरी मानी जा रही है. लेकिन इस बढ़ोतरी को समझने के लिए उसका पूरा संदर्भ देखना जरूरी है।  कंज्यूमर्स ने नहीं सरकार ने खुद उठाया बोझ 28 फरवरी 2026 को होर्मुज संकट के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. इतनी बड़ी वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद भारत में 76 दिनों तक पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़ाए गए. इस दौरान तेल कंपनियां रोजाना करीब 1000 करोड़ रुपये का घाटा खुद वहन करती रहीं. 27 मार्च 2026 को केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल दोनों पर SAED यानी एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की. डीजल पर केंद्रीय ड्यूटी शून्य हो गई. इस फैसले से सरकार को इस वित्त वर्ष में लगभग 30,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ. यानी यह बोझ सीधे उपभोक्ता पर नहीं डाला गया, बल्कि सरकार ने खुद उठाया।  साथ ही सरकार ने डीजल पर 21 रुपये 50 पैसे और ATF पर 29 रुपये 50 पैसे प्रति लीटर एक्सपोर्ट लेवी लगाई, ताकि देश में तैयार तेल विदेश न जाए और घरेलू बाजार में आपूर्ति बनी रहे।  19 मई को सरकार ने माना कि दो चरणों की बढ़ोतरी के बाद भी तेल कंपनियों का दैनिक घाटा 1000 करोड़ से घटकर 750 करोड़ रुपये रह गया था. 23 मई की तीसरी बढ़ोतरी के बाद भी बड़ा हिस्सा तेल कंपनियां खुद वहन कर रही हैं।  अब वैश्विक तुलना देखिए. होर्मुज संकट के बाद म्यांमार में पेट्रोल लगभग 90%, मलेशिया में 56%, पाकिस्तान में 55%, अमेरिका में 44%, फिलीपींस में 40%, श्रीलंका में 38%, फ्रांस में 21% और ब्रिटेन में 19% तक महंगा हुआ. भारत में यह बढ़ोतरी केवल लगभग 5% रही।  सऊदी अरब ने दाम नहीं बढ़ाए क्योंकि वह स्वयं बड़ा तेल उत्पादक देश है और सीधे सब्सिडी देता है. उसे छोड़ दिया जाए तो भारत दुनिया में सबसे कम बढ़ोतरी करने वाले देशों में रहा. यह पहली बार नहीं है जब वैश्विक संकट के दौरान भारत ने उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश की हो।  रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान, जब पूरी दुनिया में ईंधन महंगा हो रहा था, तब भारत ने नवंबर 2021 और मई 2022 में पेट्रोल 8 रुपये और डीजल 6 रुपये प्रति लीटर सस्ता किया था. G20 देशों में भारत अकेला देश था जिसने उस दौर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें घटाई थीं।  अब सवाल आता है कि अलग-अलग राज्यों में कीमतें अलग क्यों हैं? केंद्र की एक्साइज ड्यूटी पूरे देश में समान रहती है, लेकिन हर राज्य अपनी तरफ से अलग VAT लगाता है. यही वजह है कि पंप पर कीमतें अलग दिखती हैं. 23 मई 2026 के बाद आंध्र प्रदेश में पेट्रोल लगभग 117.80 रुपये, तेलंगाना में 115.70 रुपये और केरल में 112.30 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया, जबकि गुजरात, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में यह करीब 99.50 रुपये के आसपास रहा. आंध्र प्रदेश में VAT लगभग 31% है, जिसके साथ अतिरिक्त रोड डेवलपमेंट सेस भी लगाया जाता है. इससे प्रभावी कर दर करीब 35% तक पहुंच जाती है।  सरकारी पक्ष का दावा है कि जिन दलों ने केंद्र से एक्साइज कम करने की मांग की, उनके शासन वाले कई राज्यों में VAT सबसे अधिक बना रहा. 27 मार्च की एक्साइज कटौती के बाद BJP शासित राज्यों ने पूरी राहत उपभोक्ताओं तक पहुंचाई, जबकि कांग्रेस और INDIA ब्लॉक शासित राज्यों ने VAT में समान कटौती नहीं की. इसलिए इन राज्यों में अंतिम कीमतें अपेक्षाकृत अधिक बनी रहीं।  अब 2014 के '71 रुपये वाले पेट्रोल' की चर्चा. कांग्रेस अक्सर कहती है कि 2014 में पेट्रोल 71 रुपये था और अब लगभग 98 रुपये है. लेकिन सरकारी पक्ष के अनुसार उस समय कीमतें कम रखने के लिए 2005 से 2010 के बीच लगभग 1.34 लाख करोड़ रुपये के ऑयल बॉन्ड जारी किए गए थे।  यह सीधे सरकारी उधार थे, जिनका भुगतान बाद की सरकारों और करदाताओं को करना पड़ा।  सरकारी आंकड़ों के अनुसार: FY 2021-22 में 10,000 करोड़ रुपये, FY 2023-24 में 31,150 करोड़ रुपये, FY 2024-25 में 52,860 करोड़ रुपये, और FY 2025-26 में 36,913 करोड़ रुपये ऑयल बॉन्ड भुगतान में खर्च किए गए. इसके ऊपर ब्याज अलग है. सरकारी तर्क यह है कि 2014 का सस्ता पेट्रोल वास्तव में उधारी पर आधारित था, जिसकी कीमत बाद की पीढ़ियां चुका रही हैं।  चार साल का पूरा हिसाब 2022 से 2026 के बीच भारत में पेट्रोल चार बार सस्ता हुआ और एक बार बढ़ा. केंद्र सरकार ने इस पूरे दौर में एक्साइज कटौती के जरिए करीब 30,000 करोड़ रुपये का राजस्व छोड़ा तेल कंपनियों ने रूस-यूक्रेन दौर में 24,500 करोड़ और LPG संरक्षण में 40,000 करोड़ का घाटा उठाया. कोई बॉन्ड नहीं, कोई उधारी नहीं, कोई अगली पीढ़ी पर बोझ नहीं।