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हफ्ते में सिर्फ 5 लीटर तेल! क्या भारत में भी लागू हो सकता है फ्यूल राशनिंग नियम?

नई दिल्ली ईरान युद्ध और मध्य पूर्व (Middle East) में तेल आपूर्ति मार्गों में आई रुकावट के कारण पूरी दुनिया एक गंभीर ऊर्जा संकट से जूझ रही है। इस संकट के बीच कई देशों में फ्यूल राशनिंग लागू की जा चुकी है। भारत में भी न‍िजी वाहनों के ल‍िए एक ल‍िमिट में पेट्रोल-डीजल और गैस खरीदने का कोटा तय करना एक उपाय हो सकता है। फिलहाल, भारत सरकार ने अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं किया है। अगर देश में कोटा सिस्टम लागू होता है, तो लोग अपने मन के मुताबिक पेट्रोल, डीजल या गैस नहीं खरीद पाएंगे। बता दें कि श्रीलंका, पाकिस्तान, फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों में QR Code, ऑड-ईवन नियम और साप्ताहिक फ्यूल लिमिट लागू हो चुकी है। अगर भविष्य में हालात और बिगड़ते हैं, तो भारत समेत कई देशों में भी ऐसे कदम उठाए जा सकते हैं। सरल शब्दों में कहें तो 'फ्यूल राशनिंग' सरकार द्वारा लगाया गया वह प्रतिबंध है, जिसके तहत आप अपनी मर्जी के मुताबिक जितना चाहें उतना पेट्रोल या डीजल नहीं खरीद सकते हैं। सरकार प्रत्येक नागरिक या वाहन के लिए एक 'कोटा' तय कर देती है। एक निश्चित समय सीमा (जैसे एक हफ्ता) में आप केवल लिमिट में ही ईंधन खरीद पाएंगे। इसके लिए सरकार QR-कोड, कूपन या गाड़ियों के नंबर के हिसाब से 'ऑड-ईवन' (Odd-Even) जैसे तरीके अपनाती है। 2026 के इस वैश्विक संकट में कई देशों ने अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए ईंधन की बिक्री पर सीमा लगा दी है। श्रीलंका: यहां 'नेशनल फ्यूल पास' (QR कोड) सिस्टम लागू है। कारों के लिए हफ्ते में केवल 15-25 लीटर और मोटरसाइकिलों के लिए सिर्फ 5 लीटर पेट्रोल तय किया गया है। पाकिस्तान: यहां स्थिति इतनी गंभीर है कि एक बार में वाहन को केवल 5 लीटर तेल मिल रहा है। साथ ही सरकारी कर्मचारियों के लिए हफ्ते में केवल 4 दिन काम का नियम बनाया गया है। फ्रांस और जर्मनी: यूरोप के संपन्न देश भी अब राशनिंग की कगार पर हैं। फ्रांस के कुछ इलाकों में QR कोड के जरिए हफ्ते में 15-20 लीटर की सीमा तय की गई है, जबकि जर्मनी में कुछ जगहों पर एक बार में केवल 10 लीटर पेट्रोल मिल रहा है। बांग्लादेश और म्यांमार: बांग्लादेश ने ऊर्जा बचाने के लिए स्कूलों को ऑनलाइन कर दिया है और बिजली की रोटेशनल कटौती (Load Shedding) शुरू कर दी है। म्यांमार में 'ऑड-ईवन' सिस्टम से पेट्रोल दिया जा रहा है। स्लोवेनिया और केन्या: स्लोवेनिया ने प्राइवेट ड्राइवरों के लिए हफ्ते में 50 लीटर का कोटा तय किया है, वहीं केन्या ने घरेलू सप्लाई बचाने के लिए तेल के निर्यात पर ही पाबंदी लगा दी है। ईंधन की किल्लत का असर भारत पर भी पड़ा है। लाइव हिंदुस्तान की बिजनेस टीम ने हाल ही में कुछ शहरों में एक सर्वे किया, जिसमें पाया गया कि पेट्रोल पंप संचालकों ने खुद से ही पेट्रोल-डीजल खरीदने की एक सीमा तय कर रखी है। पूछने पर पता लगा कि कुछ दिनों पहले बाइक सवार ग्राहकों को 200 रुपये और कार चालकों को 2,000 रुपये से ज्यादा का तेल नहीं दिया जा रहा था। अभी भी कई शहरों में पेट्रोल पंप पर अपनी गाड़ी की टंकी फुल कराने पहुंच रहे ग्राहकों को निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा है। इससे पता चलता है कि बिना किसी आदेश के पहले ही पेट्रोल पंप संचालकों ने अपनी कार्यशैली बदलकर कोटा सिस्टम शुरू कर दिया है। वर्क फ्रॉम होम और 4-डेज वर्किंग:– फिलीपींस, लाओस और पाकिस्तान ने विदेशी मुद्रा बचाने के लिए सरकारी कर्मचारियों को घर से काम करने या हफ्ते में कम दिन ऑफिस आने का आदेश दिया है। कार-लेस-डेज:– न्यूजीलैंड जैसे देश 'कार-लेस-डेज' (हफ्ते में एक दिन गाड़ी न चलाना) को फिर से शुरू करने पर विचार कर रहे हैं। पब्लिक ट्रांसपोर्ट:- वियतनाम और कंबोडिया जैसे देशों में लोगों को कारपूलिंग और बस-मेट्रो का उपयोग करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है क्योंकि लगभग 30% पेट्रोल पंप बंद हो चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले ही देशवासियों से ईंधन और यात्रा में कटौती करने की भावुक अपील की है। हालांकि, भारत में अभी तक औपचारिक रूप से राशनिंग लागू नहीं हुई है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा खिंचता है, तो भविष्य में 'कोटा सिस्टम' या 'QR कोड आधारित खरीद' की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फ्यूल राशनिंग का विचार डरावना लग सकता है, लेकिन यह संकट के समय तेल के समान वितरण को सुनिश्चित करने का एक तरीका है। फिलहाल, बचाव का सबसे अच्छा तरीका यही है कि हम निजी वाहनों का कम से कम उपयोग करें और ईंधन की बर्बादी रोकें।

ईंधन के दाम में इजाफा संभव, सरकार को हर दिन उठाना पड़ रहा 1000 करोड़ का भार

 नई दिल्‍ली ईरान अमेरिका तनाव और होर्मुज के बंद होने से ग्‍लोबल स्‍तर पर कच्चे तेल के दाम में भारी उछाल देखने को मिली है. कुछ ही समय में कच्‍चे तेल के दाम 70 डॉलर प्रति बैरल से 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए हैं, जिसके बाद भी देश में पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रहे हैं, लेकिन अब संभावना जताई जा रही है कि ईंधन की कीमतें जल्‍द बढ़ सकती हैं।  क्‍यों सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) को हर दिन भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिसका पूरा भार या तो कंपनी के ऊपर या सरकार के खजाने पर पड़ रहा है. इस कारण, पेट्रोल-डीजल के दाम में हफ्ते भर के दौरान बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है।  सूत्रों ने बिजनेस टुडे को बताया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 15 मई से पहले बढ़ोतरी की जा सकती है, क्योंकि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों  को प्रति माह लगभग 30,000 करोड़ रुपये के भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।  स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज ने बढ़ाई टेंशन  स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज, जिससे होकर दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति गुजरती है, पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण हफ्तों से बुरी तरह प्रभावित है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा हो गया है. कई देशों में ईंधन की समस्‍या आई है और कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है।  हांगकांग में पेट्रोल की कीमत लगभग 295 रुपये प्रति लीटर है, सिंगापुर में लगभग 240 रुपये, नीदरलैंड में 225 रुपये, इटली में 210 रुपये और ब्रिटेन में लगभग 195 रुपये प्रति लीटर है. वहीं, भारत में कई शहरों में पेट्रोल की कीमतें बिना किसी बड़े संशोधन के लगभग 95 रुपये प्रति लीटर के आसपास बनी हुई हैं।  कई देशों में इमरजेंसी लागू  कई देशों ने एनर्जी संकट से निपटने के लिए पहले ही आपातकालीन उपाय लागू कर दिए हैं. बांग्लादेश ने ईंधन की राशनिंग लागू की गई है, श्रीलंका ने चार दिन का कार्य सप्ताह शुरू किया, पाकिस्तान ने सरकारी कार्यालयों के कार्य दिवस कम किए, जबकि दक्षिण कोरिया ने दशकों में पहली बार ईंधन की कीमतों पर सीमा लागू की. हालांकि, भारत में ईंधन की कमी, लंबी कतारें या राशनिंग जैसी समस्याएं नहीं हुईं।  भारत ने उठाए सख्‍त कदम  सरकारी और उद्योग जगत के सूत्रों के अनुसार, संकट शुरू होते ही भारत ने तेजी से कदम उठाए. घरेलू एलपीजी उत्पादन को कुछ ही दिनों में 36,000 टन प्रतिदिन से बढ़ाकर 54,000 टन प्रतिदिन कर दिया गया है. सरकार ने वैश्विक स्तर पर बढ़ती कीमतों से लोगों को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में भी भारी कमी की।  सरकार और तेल कंपनियां उठा रहीं भार  उद्योग जगत के अनुमानों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों के चरम पर, सरकार और तेल उत्पादक कंपनियां मिलकर पेट्रोल पर लगभग 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 30 रुपये प्रति लीटर का भार प्रभावी रूप से वहन कर रही थीं।  उत्पाद शुल्क में कटौती के बाद भी, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम को मिलाकर हर महीने लगभग ₹30,000 करोड़ का नुकसान होने का अनुमान है।  100 फीसदी अधिक क्षमता पर काम  भारत ने रूस, अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका और अन्य क्षेत्रों से कच्चे तेल का आयात बढ़ाकर आपूर्ति को स्थिर करने में भी कामयाबी हासिल की है. खबरों के मुताबिक, ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए रिफाइनरियां 100% से अधिक क्षमता पर काम कर रही हैं. हालांकि, वेस्‍ट एशिया में जारी संघर्ष और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण पब्लिक सेक्‍टर की तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। 

युद्ध के चलते अमेरिका में पेट्रोल महंगा, 44% की बड़ी बढ़ोतरी; भारत में स्थिरता

वाशिंगटन/ नई दिल्ली ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से दुनियाभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी उथल-पुथल देखने को मिली है। लेटेस्ट आंकड़ों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत 71 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 107 डॉलर पर पहुंच गई, जिसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ा है। ग्लोबल पेट्र्रोल प्राइस डॉट कॉम के ताजा अपडेट के मुताबिक लाओस में डीजल 149.7% और पेट्रोल की कीमतों में 35.8% की उछाल दर्ज की गई है। म्यांमार में पेट्रोल की कीमतें 89.7% और डीजल 112.7% तक बढ़ गईं। न्यूजीलैंड में डीजल 88.6 प्रतिशत और पेट्रोल 30.7 प्रतिशत महंगा हुआ है। यूएई में पेट्रोल में 52.4% और डीजल में 86 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। ग्लोबल पेट्र्रोल प्राइस डॉट कॉम के ताजा अपडेट के मुताबिक दुनिया में सबसे महंगा पेट्रोल हांगकांग में 394.95 रुपये लीटर है। वहीं, इजरायल में 269.19 रुपये। अमेरिका और यूरोप में भी बढ़ी तेल की कीमतें जिन देशों में फ्यूल मार्केट पूरी तरह से खुला है, वहां कीमतें आसमान छू रही हैं। अमेरिका में पेट्रोल की कीमत में 44.5% की भारी बढ़ोतरी हुई है। यहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत 119.55 रुपये है। यूरोपीय देशों में फ्रांस (20.9%), बेल्जियम (25.3%) और यूके (19.2%) में बढ़ोतरी हुई है। यूके में 1 लीटर पेट्रोल की कीमत 202.15 रुपये है। एक लीटर पेट्रोल की कीमत आयरलैंड में 202.35 रुपये, इटली में 213.49 रुपये, फ्रांस में 223.36 रुपये, जर्मनी में 223.67 रुपये लीटर है। भारत में क्यों नहीं बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम पाकिस्तान में भी पेट्रोल 54.9% और श्रीलंका में 38.2% महंगा हुआ है। जहां दुनिया जल रही है, वहीं भारत में स्थिति बिल्कुल विपरीत रही। भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। भारत में कीमतें स्थिर रहने के पीछे सरकार का हस्तक्षेप है। केंद्र सरकार ने साफ कहा है कि देश में पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी सिलेंडरों के दाम फिलहाल नहीं बढ़ाए जाएंगे। आमतौर पर भारत में कीमतें युद्ध या संकट के तुरंत बाद नहीं बढ़ाई जातीं। सरकार और तेल कंपनियां कुछ हफ्तों तक इंतजार करती हैं कि कहीं कीमतें वापस गिर तो नहीं रही हैं। इसके अलावा, चुनाव या जनता के दबाव में सरकारें एक्साइज ड्यूटी में कटौती करके कीमतों को नियंत्रित रखती हैं। हालांकि, अगर क्रूड की कीमतें 110 डॉलर पर टिकी रहीं, तो यह राहत लंबे समय तक नहीं टिकेगी। आगे का रास्ता एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरान युद्ध जारी रहने तक तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। अमेरिका और यूरोप में महंगाई बढ़ना तय है। जिन देशों ने अब तक कीमतें नहीं बढ़ाई हैं (जैसे भारत), वहां सरकारों के पास दो विकल्प हैं या तो सब्सिडी देकर खजाना खाली करें, या फिर कीमतें बढ़ाकर जनता पर बोझ डालें।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 25-28 रुपए तक बढ़ोतरी का अनुमान, आम जनता को होगा बड़ा असर

मुंबई   पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर बड़ी अपडेट सामने आ रही है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट के मुताबिक, विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद ईंधन की कीमतों में बड़ा इजाफा हो सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, पेट्रोल और डीजल के दाम 25 से 28 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ाए जा सकते हैं। यह अनुमान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के आधार पर लगाया गया है, जो फिलहाल करीब 120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। तमिलनाडु में आज सभी सीटों के लिए मतदान हो रहा है जबकि पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 152 सीटों के लिए वोटिंग हो रही है। केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने वाली रिपोर्ट्स को खारिज किया केंद्र सरकार ने गुरुवार को उन रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि वर्तमान में चल रहे विधानसभा चुनावों के बाद, देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 25-28 रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इसे फेक न्यूज बताते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट किया, "कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की बात कही जा रही है। यह स्पष्ट किया जाता है कि सरकार के समक्ष ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।" इस तरह की खबरें नागरिकों में भय और दहशत पैदा करने के उद्देश्य से फैलाई जाती हैं और ये शरारतपूर्ण और भ्रामक होती हैं। पोस्ट में अंत में लिखा, "भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां पिछले चार वर्षों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि नहीं हुई है। भारत सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने भारतीय नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय कीमतों में होने वाली तीव्र वृद्धि से बचाने के लिए लगातार कदम उठाए हैं।" इससे पहले दैनिक प्रेस ब्रीफिंग में बुधवार को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि देश में पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है और लोगों से अपील की है कि पेट्रोल-डीजल या गैस की जल्दबादी में खरीदारी न करें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें। सरकार के मुताबिक, देश भर में घरेलू एलपीजी, पीएनजी और सीएनजी की 100 प्रतिशत सप्लाई सुनिश्चित की जा रही है। 23 मार्च 2026 से अब तक 20 लाख से ज्यादा 5 किलो वाले छोटे गैस सिलेंडर (एफटीएल) बेचे जा चुके हैं, जो खासकर प्रवासी मजदूरों के लिए राहत का काम कर रहे हैं। सरकार ने इन सिलेंडरों की सप्लाई भी दोगुनी कर दी है ताकि जरूरतमंदों तक आसानी से गैस पहुंच सके। क्यों बढ़ सकते हैं दाम? अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं, जबकि भारत में उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत कम कीमत पर ईंधन मिल रहा है। इस अंतर का बोझ तेल कंपनियां उठा रही हैं। ऐसे में नुकसान की भरपाई के लिए कंपनियां कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं। अगर अनुमान के मुताबिक बढ़ोतरी होती है, तो पेट्रोल की कीमत कई शहरों में 120 रुपए प्रति लीटर के करीब पहुंच सकती है। इसका असर ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और रोजमर्रा के सामानों की कीमतों पर भी पड़ सकता है। कंपनियों पर बढ़ता दबाव रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी तेल कंपनियों को हर महीने करीब 27,000 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। यह नुकसान कच्चे तेल की ऊंची कीमत और कम रिटेल कीमत के बीच के अंतर की वजह से हो रहा है। लंबे समय तक इस स्थिति को बनाए रखना कंपनियों के लिए मुश्किल होता जा रहा है। सरकार के राहत कदम सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपए प्रति लीटर की कटौती और विंडफॉल टैक्स जैसे कदम उठाए हैं। हालांकि, ये उपाय आंशिक राहत ही दे पा रहे हैं और मूल समस्या अब भी बनी हुई है। अभी क्या है भाव? फिलहाल राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपए प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपए प्रति लीटर पर मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो ब्रेंट क्रूड करीब 102.4 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है, जबकि WTI क्रूड लगभग 93.56 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर है।

पाकिस्तान में पेट्रोल 458 रुपए और डीजल 520 के पार, तेल की बढ़ी कीमतों से आम जनता परेशान

लाहौर   पाकिस्तान ने  डीजल और पेट्रोल की कीमतें 50% से ज्यादा बढ़ा दीं। एक महीने से भी कम समय में यह दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है। यह बढ़ोतरी मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक तेल कीमतों में हो रही तेज वृद्धि के चलते की गई है। डीजल की कीमत 55% से ज्यादा बढ़ाकर 520.35 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है, जबकि पेट्रोल की कीमत लगभग 55% बढ़ाकर 458.40 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। अमेरिकी तेल कीमतों में 11% से ज्यादा की उछाल आई, जबकि ब्रेंट क्रूड की कीमतें 7% से ज्यादा बढ़ गईं। यह बढ़ोतरी तब हुई जब एक दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि सैन्य अभियान और तेज किए जाएंगे। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार पेट्रोलियम मंत्री मलिक ने कहा कि नई कीमतें शुक्रवार से प्रभावी होंगी. दरअसल ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध के बाद से पाकिस्तान ईंधन संकट में डूबा हुआ है और ऐसा पहली बार नहीं है जब 28 फरवरी को शुरू जंग के बाद पाकिस्तान में तेल के दाम बढ़ाए गए हैं।  अपनी ही बात से पलटे शहबाज डॉन की रिपोर्ट के अनुसार एक सप्ताह पहले ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि उन्होंने युद्ध शुरू होने के बाद से पेट्रोल की कीमत में 95 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 203 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की तीसरी सिफारिश को खारिज कर दिया है. इससे पहले, पीएम ने कहा था कि उन्होंने डीजल की कीमत में 177 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल की कीमत में 76 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी को खारिज कर दिया है. प्रधानमंत्री ने यह भी कहा था कि 13 मार्च को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद उन्होंने पहले भी इसी तरह की सिफारिश को खारिज कर दिया था. लेकिन अब पहले से ही आर्थिक संकट से जूझती पाक सरकार बेबस दिख रही है।  युद्ध शुरू होने के बाद, पाकिस्तान सरकार ने शुरुआत में 6 मार्च को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 55 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी. अब एक बार फिर यह बढ़ोतरी की गई है।   आखिर क्यों लगी पाकिस्तान में 'महंगाई की आग'? पाकिस्तान इस वक्त चौतरफा संकट से घिरा है। इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं:     वैश्विक तनाव : ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों को आग लगा दी है। दुबई क्रूड $128.52 प्रति बैरल तक पहुंच गया है।     रुपए की बदहाली : डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपया लगातार गिर रहा है, जिससे तेल का आयात करना बेहद महंगा हो गया है।     IMF की शर्तें : कर्ज के बोझ तले दबे पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की कड़ी शर्तों को मानना पड़ रहा है, जिसके कारण सरकार चाहकर भी सब्सिडी नहीं दे पा रही। आम आदमी पर क्या होगा असर? यह सिर्फ पेट्रोल की कीमत नहीं है, यह एक 'महंगाई का चक्रवात' है जो हर चीज को निगल जाएगा:     किराया आसमान पर : बस, रिक्शा और ट्रक का भाड़ा बढ़ने से दफ्तर जाने वाले और छात्रों की जेब खाली हो जाएगी।     थाली से गायब होगी रोटी : जब ट्रांसपोर्टेशन महंगा होगा, तो आटा, दाल, दूध और सब्जियों की कीमतें भी दोगुनी हो जाएंगी।     धंधा चौपट : डिलीवरी बॉय, टैक्सी ड्राइवर और छोटे व्यापारियों के लिए अब अपना काम जारी रखना नामुमकिन सा हो गया है। भारत vs पाकिस्तान : एक बड़ी तुलना जहां भारत में आज पेट्रोल औसतन ₹100-₹110 के बीच स्थिर है, वहीं पाकिस्तान में यह 4 गुना ज्यादा महंगा हो चुका है। भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीदने की रणनीति और मजबूत पेट्रोलियम रिजर्व के दम पर अपनी जनता को इस वैश्विक संकट से बचा लिया। दूसरी ओर, पाकिस्तान की राजनीतिक अस्थिरता और कर्ज पर निर्भरता ने उसे इस मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। आगे क्या? विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल-ईस्ट में युद्ध के हालात नहीं सुधरे, तो अगली समीक्षा में पेट्रोल ₹500 का आंकड़ा भी पार कर सकता है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का कहना है कि लागत तो ₹544 होनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने 'थोड़ी राहत' दी है। मगर जनता पूछ रही है कि ऐसी राहत का क्या करें जिससे चूल्हा जलाना ही मुश्किल हो जाए?  

प्रदेश में पेट्रोल पंपों की जांच शुरू, अनावश्यक बंदी पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी

 भोपाल प्रदेश में पेट्रोल, डीजल और गैस की उपलब्धता को लेकर सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि किसी भी प्रकार की कमी नहीं है, लेकिन कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में अब पेट्रोल पंपों को भी जांच के दायरे में लाया गया है और बिना कारण बंद रखने पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत अब तक 2,110 स्थानों पर जांच की जा चुकी है। इस दौरान 2,933 गैस सिलिंडर जब्त किए गए हैं और नौ मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है। वहीं 391 पेट्रोल पंपों की जांच में एक प्रकरण दर्ज किया गया है। पेट्रोल पंप बंद रखने पर सख्ती मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी पेट्रोल पंपों की नियमित निगरानी की जाए। यदि कोई पंप बिना उचित कारण बंद पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जिला आपूर्ति नियंत्रकों और ऑयल कंपनियों को विशेष रूप से इस पर नजर रखने को कहा गया है। ईंधन का पर्याप्त भंडार सरकार के अनुसार प्रदेश में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। देश में कच्चे तेल का भंडार भी पर्याप्त है और सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं। प्रदेश के बॉटलिंग प्लांट घरेलू और व्यावसायिक गैस की मांग को पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय तक संचालन कर रहे हैं। पीएनजी कनेक्शन के लिए कंट्रोल रूम प्रदेश में पीएनजी कनेक्शन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न सिटी गैस कंपनियों ने कंट्रोल रूम स्थापित किए हैं। यहां उपभोक्ता अपनी शिकायतें और मांग दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा सिंगल विंडो पोर्टल के माध्यम से कंपनियों को आवश्यक अनुमति प्राप्त करने की सुविधा भी दी गई है। उपभोक्ताओं को राहत का दावा सरकार का कहना है कि सख्त निगरानी और बेहतर प्रबंधन से उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। साथ ही कालाबाजारी पर लगाम लगाने के लिए लगातार कार्रवाई जारी रहेगी।

US-ईरान जंग के बीच पेट्रोल के दाम घटने की संभावना, जेडी वेंस ने शेयर किया प्लान

वॉशिंगटन  मिडिल ईस्ट में बरसते बारूद ने पूरी दुनिया का तेल पी लिया है. कई देशों में तेल को लेकर हाहाकार मचा हुआ है और अमेरिका जैसे देशों में भी पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं. हर कोई सिर्फ एक सवाल पूछ रहा है कि ये जंग कब खत्म होगी और कब ईंधन के दाम गिरेंगे? इस सवाल का जवाब हाल ही में अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने दे दिया है. उन्होंने बताया है कि गैस के दाम कब गिरेंगे और जंग को लेकर उनका प्लान आखिर क्या है? वेंस ने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर क्या कहा? वेंस का कहना है कि अमेरिका का मकसद ईरान पर कब्जा करना नहीं, बल्कि उसे इतना ‘शक्तिहीन’ कर देना है कि वह दोबारा कभी चुनौती न बन सके. जेडी वेंस ने एक हालिया इंटरव्यू में अमेरिकी जनता को बड़ी राहत देने की कोशिश की।  उन्होंने कहा कि अमेरिका, ईरान में एक या दो साल तक नहीं रुकने वाला है. राष्ट्रपति ट्रंप का मिशन साफ है, काम खत्म करो और बाहर निकलो. उन्होंने यह भी दावा किया कि पेट्रोल की बढ़ती कीमतों की समस्या सिर्फ कुछ समय के लिए है और जैसे ही ऑपरेशन सफल होगा, गैस के दाम फिर से नीचे आ जाएंगे।  ईरानी नौसेना पर आखिरी अटैक अमेरिका की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कुछ ऐसे वीडियो और तस्वीरें जारी की हैं, जिनमें ईरानी नौसेना के जहाजों को निशाना बनाया जा रहा है. अमेरिका का कहना है कि दशकों से ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में जो दादागिरी मचा रखी थी, अब उसका अंत हो चुका है. अमेरिकी मिसाइलों ने ईरान के उन सैन्य ठिकानों को खंडहर बना दिया है जो व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा बने हुए थे।  जहां अमेरिका अपनी जीत के दावे कर रहा है, वहीं ईरान की तरफ से आने वाली खबरें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं. ईरानी मीडिया आउटलेट्स ने दावा किया है कि उन्होंने दुबई में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों से जोरदार हमला किया है. रिपोर्टों के अनुसार, इस हमले में ‘सैकड़ों’ अमेरिकी सैनिक हताहत हुए हैं और घंटों तक एम्बुलेंस और राहत दल शवों और घायलों को ढोते रहे। 

MP में पेट्रोल-डीजल की पर्याप्त आपूर्ति, रसोई गैस पर पैनिक: भोपाल में दो दिनों में 28,000 सिलेंडर बुक, सप्लाई 70% हुई

भोपाल  मध्य प्रदेश में LPG सिलेंडर को लेकर 'पैनिक' जैसा माहौल है। कई शहरों में सिलेंडर की बुकिंग बढ़ गई है। अकेले भोपाल में ही 20 से ज्यादा गैस एजेंसियों पर सिलेंडर की बुकिंग दो से तीन गुनी तक बढ़ी है। यहां सुबह से दोपहर तक लोगों की भीड़ लग रही है। पिछले 2 दिन में ही भोपाल में 28 से 30 हजार तक बुकिंग हो गई, जबकि सप्लाई 22 हजार तक ही है। इससे पेंडिंग बुकिंग का आंकड़ा 40 हजार तक पहुंच गया है। वहीं, घरों में सप्लाई भी 4 से 5 दिन में हो रही है। भोपाल में पहले से दोगुनी हो रही बुकिंग फूड कंट्रोलर चंद्रभान सिंह जादौन ने बताया कि भोपाल में रसोई गैस को लेकर कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन पिछले 2-3 दिन में बुकिंग काफी बढ़ गई है। पहले से लगभग दोगुनी बुकिंग हो रही है। वहीं, सप्लाई 11 हजार सिलेंडर की है। इस कारण हर रोज 3 हजार तक पेंडिंग बुकिंग चल रही है। हालांकि, गैस पर्याप्त है। भोपाल में ही एजेंसियों के पास 5 से 6 दिन का स्टॉक है। भौंरी स्थित ऑयल डिपो से सिलेंडर की सप्लाई भी जारी है। स्टॉक खत्म होने की वजह से ईंधन खत्म नहीं, कम ड्राई हुए पंप मध्य प्रदेश पेट्रोल पंप ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह ने बताया कि भोपाल में पिछले दो-तीन दिन से पंप ड्राई हो रहे थे। यह स्टॉक की कमी की बजाय से नहीं, बल्कि कंपनियों को एडवांस राशि नहीं देने की वजह से था। कंपनियां अब क्रेडिट दे रही है। इसलिए पर्याप्त मात्रा में ईंधन पंपों पर आ रहा है। शनिवार को कहीं से भी पंप ड्राई होने की खबरें नहीं आई। भोपाल में 192 पंप पर पर्याप्त ईंधन रहा। उन्होंने बताया कि अफवाहों के चलते ईंधन की खपत में तेजी जरूर आई है। भोपाल, इंदौर और उज्जैन में भीड़ अपेक्षाकृत कम है, लेकिन खपत करीब 25% तक बढ़ गई है। लोग जरूरत से ज्यादा ईंधन भरवा रहे हैं, जिससे दबाव बढ़ रहा है। इस वजह से पेट्रोल की ही रोज की खपत 15 से 20 लाख लीटर तक पहुंच गई है, जबकि सामान्य दिनों में यह 9 लाख लीटर तक है। MP में पेट्रोल-डीजल पर्याप्त ईरान, अमेरिका और इजराइल युद्ध का असर विश्व के बाकी देशों की तरह भारत पर भी पड़ रहा है. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर हर देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को प्रभावित कर रहा है. इसी बीच बार-बार उड़ रही पेट्रोल-डीजल की कमी की अफवाहों के चलते लोग जरूरत से ज्यादा ईंधन अपने वाहनों में भरवा रहे हैं, इसी की वजह से पेट्रोल पंप में पेट्रोल-डीजल खत्म हो रहा है और अफवाहों को और हवा मिल रही है. नरसिंहपुर से ऐसा ही एक हैरान करने वाला वीडियो सामने आया है जहां कई लोग किसानों के नाम पर बड़ी-बड़ी कैन लेकर पेट्रोल-डीजल भरवाने पहुंच रहे हैं. ऐसी जमाखोरी से असली अन्नदाताओं के लिए परेशानी खड़ी हो रही है।  ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा फैलाई जा रही अफवाहें अफवाहों का असर अब मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में ज्यादा दिख रहा है. नरसिंहपुर के ग्रामीण इलाकों में अधिकांश पेट्रोल पंप आउट ऑफ स्टॉक हो रहे हैं. यहां भी लोगों द्वारा जरूरत से ज्यादा ईधन लेने के मामले सामने आ रहे हैं. वीडियो में देखा जा सकता है कि सैकड़ों की तादाद में लोग 45 लीटर तक की कैन लेकर पंपों पर पहुंच रहे हैं. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या ये सारे के सारे किसान हैं या किसानों की आड़ में जमाखोर? ग्रामीण क्षेत्रों में जो गिनती के पंप मौजूद हैं वहां भी जमाखोरों की वजह से असली किसानों को जरूरत के मुताबिक डीजल नहीं मिल पा रहा। 

CM का बयान: पंजाब में पेट्रोल का 12, डीजल का 14 और सिलेंडर का 6 दिन का स्टॉक, स्टोर न करें

अमृतसर  फगवाड़ा में आम जनता को लगभग सभी पैट्रोल पंपों पर सामान्य दिनों की भांति ही पैट्रोल और डीजल मिल रहा है।  आज जब शहर के प्रमुख पैट्रोल पंपों का दौरा किया गया तो सभी पंपों पर लोगों को सरलता के साथ पैट्रोल और डीजल वाहनों में भरवाते हुए पाया। लोगों ने भी पैट्रोल पंपों पर मिल रहे तेल पर संतोष जताया हैं। हालांकि कुछ लोगों ने कहा कि पैट्रोल पंपों पर जारी हालात के मध्य वाहनों की लंबी कतारें जरूर लग रही हैं लेकिन यह तो अनेक मौकों पर पहले भी लगती रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कल (27 मार्च) को हुई मीटिंग के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शनिवार को चंडीगढ़ में मीडिया से बात की। उन्होंने मीटिंग के बारे में कहा कि देश में लॉकडाउन लगने की कोई संभावना नहीं है।  लोगों ने कहा कि सोशल मीडिया पर आए दिन पैट्रोल और डीजल को लेकर कई तरह की चर्चाओं का दौर सरगर्म रहने और भांति प्रकार की उठ रही अफवाहों के कारण हालात को कुछ का कुछ बनाया जा रहा है। ऐसे में जरूरत है कि हम सभी सजग और सर्तक रहे और सच्चाई पर पहरा देते हुए अफवाहों से बचें। जनता ने जिला कपूरथला पुलिस और प्रशासन से भी पुरजोर मांग की हैं कि वह सोशल मीडिया पर जनता के मुद्दों संबंधी बारीकी से फैक्ट चैक करें जिससे सही और सटीक सूचना आम लोगों तक पहुंच सके।  पंजाब के हालात के बारे में CM भगवंत मान ने कहा कि पंजाब में पेट्रोल का 12 दिन और डीजल का 14 दिन का स्टॉक बचा हुआ है। LPG गैस का भी 6 दिन का स्टॉक है। सीएम ने स्पष्ट किया कि 2 महीने पहले भी यही स्थिति थी, इसलिए लोगों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है। सीएम ने कहा कि अफवाहों की वजह से तेल की डिमांड ज्यादा बढ़ गई है। मैंने चीफ सेक्रेटरी को कहा है कि डीसी से संपर्क करो और जिस पेट्रोल पंप पर लाइनें लगी हैं, उसे चेक करो। ऐसे कोई हालात नहीं हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र ने 41 देशों के साथ समझौते किए हैं। देश में 60 दिन का तेल का स्टॉक है। अफवाहों से बचने की जरूरत है। हम पल-पल की जानकारी ले रहे हैं। चीफ सेक्रेटरी और DC से बात कर रहे हैं। केंद्रीय गृह और पेट्रोलियम मंत्रालय के साथ संपर्क में हैं। लॉकडाउन लगने की कोई संभावना नहीं है। कुछ भी स्टोर करनें की जरूरत नहीं हैं। हमने हर तरह की कंडीशन हटाने को कहा है ताकि फैक्ट्री को 2 दिन बंद करना पड़े, ऐसी नौबत न आए क्योंकि वहां कर्मचारियों का रोजगार चलता है। सीएम ने कहा कि कल प्रधानमंत्री के साथ मीटिंग हुई थी, जिसमें यह मांगें रखी गई हैं। मैंने कहा कि हमारी गेहूं की फसल आ रही है। ट्रैक्टर, कंबाइन और मंडियों में ट्रक भी चलेंगे। हमें डीजल-पेट्रोल की कमी नहीं होनी चाहिए। हमारी फसल मंडी में आए, तुलाई हो जाए और साथ के साथ गोदाम में जाए। हमें इसके लिए तेल की दिक्कत नहीं होनी चाहिए। मैंने PM को यही विनती की कि आपके दूसरे देशों से अच्छे संबंध हैं। हमने विज्ञापन भी देखा कि आपने युद्ध रुकवा दिए। भारतीयों को सुरक्षित रखा। यह वक्त भारत के 140 करोड़ लोगों के लिए दोस्ती निभाने का वक्त है। लोगों के लिए पेट्रोलियम उत्पादों और दूसरी चीजों की दिक्कत न हो, इसका ध्यान रखिएगा। हमें व्हाइट हाउस से ऑर्डर आता है कि हम तुम्हें एक महीने के लिए रूस से कच्चा तेल खरीदने की इजाजत मिलती है। हम तो विश्वगुरू बनने चले थे, विश्वचेले कब से बन गए। वहीं ताजा हालात की बात करें तो अमेरिका-इजराइल और ईरान की जंग के बीच पंजाब में पेट्रोल-डीजल को लेकर मारामारी मची हुई है। कल जालंधर और लुधियाना के 2 पेट्रोल पंप ड्राई हो गए थे। आज, शनिवार को अमृतसर में भी रानी के बाग वाले पेट्रोल पंप पर पेट्रोल खत्म हो गया। जिसके बाद पंप मालिकों ने वहां नोटिस लगा दिया। वहीं जालंधर में कल बंद हुआ BMC चौक के पास वाले पंप में तेल आने के बाद इसो फिर खोल दिया गया है। लुधियाना में भारत नगर चौक वाला पंप अभी भी बंद है। इसी बीच मोगा में फूड एंड सिविल सप्लाई डिपार्टमेंट ने पेट्रोल पंप मालिकों को एडवाइजरी जारी कर ड्रमों और कैनियों में डीजल भरने पर रोक लगाने को कहा है। डिपार्टमेंट का कहना है कि इससे स्टोरेज और ब्लैकमार्केटिंग पर रोक लगेगी। वहीं पेट्रोल पंप एसोसिएशन ने इसका विरोध किया। एसोसिएशन ने साफ किया कि यह गलत है। डीजल का उपयोग मोटर, पंपों, जनरेटरों, आदि में होता है। इन्हें पेट्रोल पंप पर लाना संभव नहीं है। इससे लोगों में पैनिक बढ़ेगा और परेशानी भी बढ़ेगी। लुधियाना में भारत नगर चौक के पास पेट्रोल पंप में कल बंद कर दिया गया। लुधियाना में अब सिर्फ गाड़ियों में तेल मिलेगा। कैनी वगैरह में पेट्रोल-डीजल देना बंद कर दिया गया है। चंडीगढ़ में ड्रम में डीजल बेचना बंद कर दिया गया है। पठानकोट में हालात फिलहाल नॉर्मल हैं। मोहाली में भी पेट्रोल-डीजल को लेकर कोई दिक्कत नहीं है। वहीं लुधियाना के आजाद पंप के मैनेजर अजय ने बताया कि अभी लोगों को तेल की दिक्कत नहीं है लेकिन हमें पहले जो 2 गाड़ियां क्रेडिट पर यानी उधार मिलती थीं, वह सरकार की तरफ से बंद कर दी गई हैं। अब हमें एडवांस पेमेंट देनी पड़ती है, तभी गाड़ी वहां से चलती है। मंत्री बोले- पैनिक क्रिएट न करें मंत्री संजीव अरोड़ा ने कहा कि लोगों से अनुरोध है कि पैनिक क्रिएट ना करें। पेट्रोल-डीजल को लेकर कोई कमी नहीं है। एलपीजी का रुट जरूर डिस्टर्ब हुआ है। अभी तक के हालात के मुताबिक कॉमर्शियल एलपीजी की कमी जरूर है। इस समय 20 प्रतिशत अवेलेबल है। हमारी कोशिश है की होस्टल, अस्पताल व अन्य जरूरी स्थानों पर इसका इस्तेमाल हो। पाइप गैस की कोई कमी नहीं है।

भोपाल, इंदौर, उज्जैन में पेट्रोल की बिक्री 25% बढ़ी, LPG सिलेंडर के लिए भी लंबी लाइनें; सरकार का दावा- MP में भरपूर ईंधन

भोपाल  मध्य प्रदेश के कई जिलों में  रात अचानक तेल का हाहाकार मच गया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान और इजराइल के बीच बढते तनाव और युद्ध की चर्चाओं ने सोशल मीडिया के जरिए आम जनता में ऐसा खौफ पैदा किया कि लोग आधी रात को अपने वाहनों के साथ पेट्रोल पंपों पर टूट पडे। नीमच, उज्जैन और पांढुर्णा जैसे शहरों में हालात बेकाबू हो गए, जहां पेट्रोल भरवाने की होड में लोगों के बीच तीखी झडपें और हाथापाई तक हुई। प्रशासन के तमाम दावों के बावजूद, जमीनी हकीकत यह रही कि रात होते-होते अधिकांश पंपों पर 'स्टॉक खत्म' के बोर्ड लटक गए और हजारों लोग खाली हाथ घर लौटने को मजबूर हुए। अमेरिका, इजराइल और ईरान में तनाव की खबरों के बीच मध्य प्रदेश में पेट्रोल पंपों पर तीन दिनों से भीड़ बढ़ गई है। कई शहरों में लोग सुबह 5 बजे से ही गाड़ियों के साथ लाइन में लग रहे हैं और देर रात तक पंपों पर दबाव बना हुआ है। हालांकि, सरकार और प्रशासन ने साफ किया है कि प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है और पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। मध्य प्रदेश पेट्रोल पंप ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह के मुताबिक, अफवाहों के चलते ईंधन की खपत में तेजी आई है। भोपाल, इंदौर और उज्जैन में भीड़ अपेक्षाकृत कम है, लेकिन खपत करीब 25% तक बढ़ गई है। लोग जरूरत से ज्यादा ईंधन भरवा रहे हैं, जिससे दबाव बढ़ रहा है। भोपाल के फूड कंट्रोलर चंद्रभान सिंह जादौन ने बताया कि शहर में 192 पेट्रोल पंपों पर सप्लाई सामान्य बनी हुई है। खाद्य विभाग की टीमें लगातार मॉनिटरिंग कर रही हैं और जहां कमी की सूचना मिली, वहां तुरंत आपूर्ति सुनिश्चित की गई। इंदौर और उज्जैन के डिपो में भी पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और टैंकरों के जरिए नियमित सप्लाई जारी है। इधर, घरेलू गैस सिलेंडर को लेकर भी शहरों में लोगों की लाइनें देखने को मिल रही हैं। कई जगह बुकिंग के बाद 6 से 8 दिन में डिलीवरी हो रही है, जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई है। इंदौर में टीमें तैनात, डिपो में पर्याप्त स्टॉक इंदौर और उज्जैन में भी पर्याप्त स्टॉक है। इंदौर के मांगलिया स्थित एचपीसीएल, भारत पेट्रोलियम और इंडियन ऑयल के डिपो पर टैंकरों में ईंधन भरा जा रहा है, जो पंपों तक पहुंच रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि डिपो में पर्याप्त मात्रा में पेट्रोल और डीजल उपलब्ध है। इसके लिए खाद्य विभाग की टीमें तैनात की गई हैं। छोटे जिलों में अफवाह का ज्यादा असर अफवाहों का ज्यादा असर छोटे जिलों में देखने को मिल रहा है, जहां किसान फसल कटाई को देखते हुए बड़ी मात्रा में डीजल लेने पहुंच रहे हैं। रीवा में अफवाह फैलने के बाद प्रशासन ने स्पष्ट किया कि ईंधन की कमी नहीं है और अफवाह फैलाने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। रायसेन में बढ़ती मांग को देखते हुए बिक्री पर सीमा तय कर दी गई है। यहां पेट्रोल की खपत लगभग दोगुनी हो गई है, जबकि डीजल की मांग भी तेजी से बढ़ी है। दमोह में भी पंपों पर भीड़ बनी हुई है, जहां लोग टैंक फुल कराने में जुटे हैं। पंप संचालकों का कहना है कि स्टॉक पर्याप्त है, लेकिन अफवाहों के कारण अनावश्यक दबाव बन रहा है।