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महंगाई के बीच पाकिस्तान सरकार का बड़ा फैसला, पेट्रोल-डीजल कीमतों में कटौती

इस्लामाबाद  अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के बाद से दुनियाभर में तेल का संकट मंडरा रहा है। इस माहौल के बीच पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 5 रुपये की कटौती की है। इस कटौती के बाद पेट्रोल की कीमत 409.78 रुपये प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल की कीमत 409.58 रुपये प्रति लीटर हो गई है। बता दें कि पाकिस्तान की सरकार 28 फरवरी को शुरू हुए अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के बाद से हर हफ्ते  रात को पेट्रोलियम की कीमतों में बदलाव कर रही है। पिछले हफ्ते, सरकार ने पेट्रोल की कीमतों में 14.92 रुपये प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल की कीमतों में 15 रुपये की बढ़ोतरी को मंजूरी दी थी। ईरान पर अमेरिका-इजरायल युद्ध शुरू होने के बाद सरकार ने सबसे पहले 6 मार्च को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 55 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी और 9 मार्च को खर्च में कटौती के कुछ ऐसे उपाय घोषित किए थे, जो पहले कभी नहीं किए गए थे। भारत में 3 रुपये महंगा हुआ है पेट्रोल-डीजल सरकारी तेल कंपनियों ने चार वर्षों के लंबे अंतराल के बाद  पेट्रोल और डीजल की कीमतों में संशोधन करते हुए दोनों ईंधनों के दाम में तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की। पेट्रोल और डीजल की कीमतें अप्रैल 2022 से स्थिर थीं। हालांकि, मार्च 2024 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले दोनों ईंधनों के दाम में दो रुपये प्रति लीटर की एकमुश्त कटौती की गई थी। वहीं, चार राज्यों-असम, केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव समाप्त होने के 16 दिन बाद यह बढ़ोतरी हुई है। मतदान अवधि के दौरान ईंधन कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया था जबकि पश्चिम एशिया संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में तेज वृद्धि हुई थी। तेल कंपनियां चुनाव से पहले पेट्रोल पर 14 रुपये प्रति लीटर, डीजल पर 42 रुपये प्रति लीटर और एलपीजी पर 674 रुपये प्रति लीटर का घाटा उठा रही थीं। दूसरे देशों से अब भी भारत में सस्ती कीमत वैश्विक तेल संकट के बीच जारी एक आंकड़े के मुताबिक भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में सबसे कम रही है। रिपोर्ट के अनुसार म्यांमार में पेट्रोल 89.7% और डीजल 112.7% तक महंगा हुआ, जबकि मलेशिया, पाकिस्तान, यूएई और अमेरिका में भी ईंधन कीमतों में 40 से 80 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। श्रीलंका, कनाडा, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों में भी पेट्रोल-डीजल के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसके मुकाबले भारत में पेट्रोल केवल 3.2% और डीजल 3.4% महंगा हुआ है, जिसे प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कम वृद्धि बताया गया है। सरकार का दावा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी उछाल के बावजूद आम लोगों पर बोझ कम रखने के लिए कीमतों को लंबे समय तक नियंत्रित रखा गया।

पेट्रोल-डीजल पर नई चेतावनी: अभी बढ़े सिर्फ 3 रुपये, आगे लग सकता है बड़ा झटका

 नई दिल्‍ली शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल के दाम में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी गई, लेकिन ये सिलसिला अब आगे भी जारी रह सकता है. पेट्रोल और डीजल के दाम को लेकर एक्‍सपर्ट्स बड़ी चेतावनी दे दी है. अगर कच्‍चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहत हैं तो अगले 3 से 4 महीनों में ईंधन की कीमतें बढ़ती रह सकती हैं।  यह वॉर्निंग ऐसे समय में आई है, जब वेस्‍ट एशिया में बढ़ते तनाव और ग्‍लोबल तेल आपूर्ति में रुकावट को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल प्राइस 110 डॉलर प्रति बैर के करीब पहुंच गईं।  भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम में करीब 4 साल में पहली बार 15 मई को बढ़ोतरी की गई, क्‍योंकि कच्‍चे तेल की बढ़ती लागत के कारण सरकार तेल डिस्‍ट्रीब्‍यूटर कंपनियों (OMC) पर दबाव बढ़ा जा रहा था. एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि अगर कच्‍चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो हालिया बढ़़ोतरी से तेल और अन्‍य कारोबारी कंपनियों को हो रहे नुकसान की आंशिक तौर से भरपाई हो पाएगी।  क्‍यों 3 से 4 महीने तक बढ़ोतरी रह सकती है जारी?  मास्टर पोर्टफोलियो सर्विसेज लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्‍टर गुरमीत सिंह चावला ने इंडिया टुडे डॉट इन को बताया कि ईंधन की कीमतों में संशोधन कुछ हद तक अपेक्षित था क्योंकि तेल डिस्‍ट्रीब्‍यूशन कंपनियां हाई एनर्जी प्राइस को वहन करते हुए अपनी सीमाओं को बढ़ा रही हैं।  उन्होंने आगे कहा कि ब्रेंट क्रूड की कीमत पहले ही 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच चुकी है, ऐसे में अगर कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक 90-100 डॉलर प्रति बैरल के दायरे से ऊपर बनी रहती है, तो अगले तीन से चार महीनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और भी बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है।  फ्यूल प्राइस में कितनी हो सकती है बढ़ोतरी?  चॉइस के ऊर्जा विश्लेषक धवल पोपट ने भी कहा कि मौजूदा बढ़ोतरी से सरकारी तेल कंपनियों को केवल आंशिक राहत ही मिलती है. इंडिया टुडे को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीर तक की मौजूदा बढ़ोतरी से सरकारी स्‍वामित्‍व वाली तेल और डीजल कंपनियों पर पड़ रहे मुनाफे के दबाव से कुछ हद तक राहत मिली है, लेकिन मौजूदा घाटे की भरपाई की मात्रा काफी ज्‍यादा बनी हुई है।  पोपट के अनुसार, ईंधन की कीमतों में प्रति लीटर 1 रुपये की बढ़ोतरी से तीनों सरकारी तेल विपणन कंपनियों के कुल सालाना EBITDA में लगभग 15,000-16,000 करोड़ रुपये का सुधार हो सकता है. उन्‍होंने कहा कि इसका मतलब यह है कि हालिया बढ़ोतरी से सरकारी तेल कंपनियों को सालाना करीब 45,000-48,000 करोड़ रुपये की कमाई का लाभ मिल सकता है. हालांकि, पोपट ने चेतावनी दी कि अगर ग्‍लोबल स्‍तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती रहीं तो और ज्‍यादा प्राइस बढ़ोतरी की आवश्यकता हो सकती है।  नुकसान की भरपाई के लिए कितने रुपये की बढ़ोतरी संभव  उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में, अगर ग्‍लोबल नजरिए में कोई बदलाव नहीं होता है और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती रहती हैं, तो नुकसान की भरपाई के लिए कुल मिलाकर लगभग 10 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की जरूरत होगी. भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85% आयात करता है, जिससे घरेलू ईंधन की कीमतें वैश्विक कच्चे तेल की गतिविधियों और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो जाती हैं।  तेल कंपनियों के मुनाफे पर दबाव  पश्चिम एशिया में जारी तनाव, खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंताओं ने आपूर्ति में रुकावट की आशंकाओं को तेजी से बढ़ा दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं. एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि कच्‍चे तेल की कीमतों में लगातार मजबूती से तेल कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बना रह सकता है, जबतक की रिटेल फ्यूल की कीमतों में और बदलाव नहीं किया जाता है।  इकोनॉमिस्‍ट ने भी चेतावनी दी है कि ईंधन की कीमतों में बार-बार होने वाली बढ़ोतरी धीरे-धीरे महंगाई और घरेलू बजट पर असर डाल सकती है, क्योंकि इससे सभी क्षेत्रों में परिवहन और रसद की लागत बढ़ जाएगी. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में ईंधन की कीमतों में होने वाली बढ़ोतरी को सीमित करने में सरकारी हस्तक्षेप महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। 

रूसी तेल सप्लाई थमने का खतरा, देश में पेट्रोल-डीजल की किल्लत के आसार

मुंबई  स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में पिछले 75 दिनों से जारी व्यवधान और वैश्विक तेल आपूर्ति पर बढ़ते दबाव के बीच भारत ने एक बार फिर अमेरिका से संपर्क किया है। भारत ने रूसी तेल आयात पर मौजूदा प्रतिबंधों से छूट की अवधि को आगे बढ़ाने का आग्रह किया है। अमेरिका ने इस साल मार्च में पहली बार इस विशेष व्यवस्था को मंजूरी दी थी, जिसे बाद में विस्तारित किया गया। वर्तमान छूट की समय सीमा 16 मई रात 12:01 बजे तक निर्धारित है। इस छूट का प्राथमिक उद्देश्य अतिरिक्त कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित कर वैश्विक बाजारों को स्थिर करना था। रूसी तेल पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, लेकिन ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, वॉशिंगटन लगातार भारत पर दबाव बना रहा है कि वह यूक्रेन युद्ध के कारण मॉस्को से रियायती दरों पर की जा रही खरीदारी को कम करे। 28 फरवरी से मिडिल ईस्ट में शुरू हुए संकट के लगातार गहराने के कारण भारतीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि देश के लिए स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारत ने चेतावनी दी है कि तेल बाजारों में निरंतर अस्थिरता के व्यापक आर्थिक परिणाम हो सकते हैं। अप्रैल में जारी किए गए ताजा लाइसेंस के तहत उन रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद की अनुमति दी गई थी, जो उस तारीख तक जहाजों पर लोड किए जा चुके थे। आयात में रिकॉर्ड इजाफा छूट की समय सीमा समाप्त होने से पहले भारतीय रिफाइनरी कंपनियां तेजी से खरीदारी कर रही हैं। केप्लर (Kpler) के आंकड़ों के अनुसार, मई में अब तक रूस से कच्चे तेल का आयात रिकॉर्ड 23 लाख बैरल प्रति दिन तक पहुंच गया है। पूरे महीने का औसत 19 लाख बैरल प्रति दिन रहने का अनुमान है। रूसी कच्चे तेल की रिकॉर्ड खरीदारी के बावजूद, रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार भारत ने उन रूसी LNG (तरल प्राकृतिक गैस) कार्गो को लेने से इनकार कर दिया है जो अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आते हैं। इस फैसले के कारण रूस से जुड़ा कम से कम एक LNG शिपमेंट फिलहाल सिंगापुर के पास अटका हुआ है। इस विषय पर 30 अप्रैल को रूसी उप ऊर्जा मंत्री पावेल सोरोकिन ने नई दिल्ली में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी से मुलाकात की थी। वे जून में फिर से वार्ता के लिए आ सकते हैं। भारत के पास कितना है सुरक्षित स्टॉक? केंद्र सरकार ने देशवासियों को आश्वस्त किया है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है। सीआईआई (CII) के वार्षिक व्यापार शिखर सम्मेलन में बोलते हुए केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भारत के ऊर्जा भंडार की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारत में 69 दिनों का एलएनजी और 45 दिनों का एलपीजी स्टॉक उपलब्ध है। पुरी ने कहा कि इन स्टॉक स्तरों के कारण तत्काल आपूर्ति बाधित होने का कोई खतरा नहीं है। तनाव को देखते हुए सरकार ने LPG के दैनिक उत्पादन को 36,000 टन से बढ़ाकर 54,000 टन कर दिया है ताकि घरेलू आपूर्ति सुरक्षित रहे।

आम आदमी पर फिर बढ़ा बोझ, MP में पेट्रोल-डीजल महंगा; भोपाल-इंदौर के ताजा भाव जारी

भोपाल  विश्व संकट और ईरान-अमेरिका के बीच युद्द के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हुई है। लेकिन, अब इसका असर  भारत में भी दिखना शुरू हो गया है। दरअसल, आज यानी 15 मई से देशभर में पेट्रोल व डीजल की कीमतों में इजाफा हुआ है। पेट्रोल पर 3.14 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 3.11 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। वहीं, इंदोर और भोपाल में पेट्रोल व डीजल 3-3 रूपए मंहगा हुआ है। इसके चलते आमजनजीवन को एक बार फिर मंहगाई की मार झेलनी पड़ रही है। इंदौर और भोपाल में पेट्रोल-डीजल की कीमतें एमपी के भोपाल और इंदौर में भी पेट्रोल व डीजल के दामों में बढ़ोतरी की गई है। यहां 3-3 रूपए की कीमत से पेट्रोल और डीजल मंहगा हुआ है। इंदौर में पेट्रोल की कीमत ₹106.58 प्रति लीटर से बढ़ाकर ₹109.58 प्रति लीटर कर दी गई है। वहीं, डीजल की कीमत ₹91.97 प्रति लीटर से बढ़ाकर ₹94.97 प्रति लीटर की गई है। भोपाल में पेट्रोल 106.68 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 109.82 रुपये प्रति लीटर हो गया है। वहीं, डीजल की कीमत 91.87 रुपये प्रति लीटर थी, जो अब 94.98 रुपये हो गई है। क्यों बढ़ रहे हैं दाम? ईंधन की कीमतों में इस अचानक उछाल की मुख्य वजह मिडिल ईस्ट संकट के कारण सप्लाई चेन में आई बाधा को माना जा रहा है। कच्चा तेल (Crude Oil) महंगा होने की वजह से घरेलू तेल कंपनियों ने इस बढ़े हुए बोझ को उपभोक्ताओं पर डालना शुरू कर दिया है। 15 मई से लागू हुए इन दामों ने आम जनता के घर का बजट बिगाड़ दिया है, खासकर उन लोगों के लिए जो रोजाना लंबी दूरी का सफर तय करते हैं।

ट्रिपल झटका: पेट्रोल-डीजल के बाद अब CNG ने भी बढ़ाई लोगों की टेंशन

नई दिल्ली एलपीजी सिलेंडर के दामों में इजाफा होने के बाद अब तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दामों में भी इजाफा किया गया है. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, देश भर में ईंधन (पेट्रोल, डीजल और सीएनजी) की कीमतें बढ़ गई हैं. एक ओर जहां पेट्रोल की कीमतें 94.77 रुपये से बढ़कर 97.77 रुपये प्रति लीटर हो गई हैं, जबकि डीज़ल की कीमतें 87.67 रुपये से बढ़कर 90.67 रुपये प्रति लीटर हो गई हैं. पेट्रोल के साथ ही सीएनजी से चलने वाली गाड़ियों में चलना भी महंगा होने जा रहा है।  जानकारों का कहना है कि म‍िड‍िल ईस्‍ट में जारी संकट के बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तेल विपणन कंपनियों ने 3-3 रुपये लीटर का इजाफा कर द‍िया. तेल की कीमत में यह बढ़ोतरी 15 मई यानी शुक्रवार सुबह 6 बजे से देशभर में लागू हो गई है.  देश की राजधानी द‍िल्‍ली की बात करें तो पेट्रोल 94.77 रुपये से बढ़कर 97.77 रुपये प्रत‍ि लीटर हो गया. वहीं, डीजल 87.67 रुपये लीटर से बढ़कर 90.67 रुपये लीटर पर पहुंच गया।  किराए में हो सकती है बढ़ोतरी  मुंबई में जब दो रुपये प्रति किलो सीएनजी के दाम में बढ़ने के साथ यूनियनों ने किराए में बढ़ोतरी की मांग की है. ऑटो रिक्शा संगठनों ने न्यूनतम किराए में कम से कम 1 रुपये की बढ़ोतरी की डिमांड रखी है. यूनियन नेताओं के अनुसार, मौजूदा किराए में वाहन चलाना आर्थिक रूप से कठिन हो गया है. अब दिल्ली में भी सीएनजी के दाम बढ़ाए गए हैं. इसका सीधा असर कैब ड्राइवरों पर पड़ेगा. ऑटो-टैक्सी के किराए में बढ़ोतरी संभव है. डिलीवरी और ट्रांसपोर्ट लागत में बढ़ोतरी हो सकती है. इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला है।  CNG Price Hike कितनी महंगी गई सीएनजी पेट्रोल और डीजल के साथ ही दिल्ली-एनसीआर में इंद्रप्रस्‍थ गैस ल‍िम‍िटेड (IGL) ने सीएनजी की कीमत में 2 रुपये क‍िलो का इजाफा कर द‍िया है. इससे कुछ देर पहले ही तेल कंपन‍ियों ने पेट्रोल-डीजल दो रुपये महंगा कर द‍िया. नई दरों को शुक्रवार सुबह 6 बजे से लागू कर द‍िया गया है. ऐसे में पिछले एक पखवाड़े के दौरान महंगाई का ट्रिपल अटैक हुआ है।  पेट्रोल, डीजल और CNG महंगा करने पर सरकार का घेराव कांग्रेस ने पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के दाम बढ़ने को लेकर सरकार का घेराव किया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कांग्रेस ने लिखा-  'महंगाई मैन मोदी ने आज फिर जनता पर हंटर चलाया. पेट्रोल और डीजल 3-3 रुपए महंगा कर दिया गया. वहीं, CNG के दाम भी 2 रुपए बढ़ा दिए गए. चुनाव खत्म, मोदी की वसूली शुरू।  कांग्रेस नेता कुमारी सेलजा ने आरोप लगाते हुए कहा, 'चुनाव खत्म होते ही बीजेपी सरकार ने जनता को महंगाई का तोहफा दे दिया. अब पेट्रोल और डीजल पर 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर आम आदमी की जेब पर सीधा हमला किया गया है. चुनाव तक राहत का दिखावा. चुनाव के बाद जनता पर बोझ डालना बीजेपी सरकार की पहचान बन चुका है।  TMC नेता डेरेक ओ'ब्रायन ने भी बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा, 'पहले वो आपका वोट लूटते हैं, फिर आपको वहां लात मारते हैं जहां दर्द होता है. इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है. डीजल और पेट्रोल के दाम बढ़ गए हैं. क्या बंगाल सरकार पेट्रोल और डीजल पर VAT कम करेगी, अब जब दिल्ली के कंट्रोल वाली सरकार है जिसे केंद्र के फंड रोके जाने की चिंता नहीं करनी पड़ती?' वहीं, पेट्रोल-डीजल महंगा होने पर बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने प्रतिक्रया दी. उन्होंने कहा, 'पिछले 3 साल से दुनिया में जंग चल रही है. इसकी वजह से दूसरे देशों में कई तरह के संकट पैदा हुए हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने हमारा कुछ नहीं बिगड़ने दिया. सिर्फ गैस के दाम बढ़े हैं. कम से कम दाम तो कम से कम बढ़ाए हैं। 

48 घंटे में 3 बड़े फैसले, क्या अब महंगा होने वाला है पेट्रोल? RBI ने दिए संकेत

नई दिल्ली भारत में पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों की आशंकाओं को लेकर चिंता का दौर जारी है। हालांकि, सरकार ने अब तक ऐसा ऐलान नहीं किया है। इसी बीच महज दो दिनों के अंदर ही तीन बड़े फैसले सामने आ चुके हैं। इनमें गोल्ड इम्पोर्ड ड्यूटी से लेकर शक्कर एक्सपोर्ट बैन तक शामिल है। इधर, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर ने भी दाम बढ़ने की आशंका जताई है। खास बात है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही दफ्तरों से WFH यानी वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन क्लासेज की अपील कर चुके हैं।  पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि एक स्तर पर इस बात का आकलन करना होगा कि पेट्रोलियम कंपनियां लागत से कम कीमत पर पेट्रोल, डीजल और LPG कब तक बेच सकती हैं। हालांकि, उन्होंने कीमतों में बढ़ोतरी की किसी भी संभावना पर कुछ कहने से इनकार कर दिया। उन्होंने बताया कि भारत के पास इस वक्त लगभग 60 दिन का कच्चे तेल का भंडार, 60 दिन का LNG भंडार और 45 दिन का LPG भंडार है। RBI गवर्नर क्या बोले गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने  स्विट्जरलैंड में कहा है कि अगर पश्चिम एशिया संकट लंबे समय तक जारी रहता है, तो सरकार को पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि भारत ऊर्जा और उर्वरकों के इम्पोर्ट पर खासा निर्भर है और मौजूदा रुकावटों का असर भारत पर पड़ना शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि अगर यह लंबे समय तक जारी रहता है तो 'सरकार वास्तव में इन मूल्य वृद्धि का कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं पर डाल सकती है। यह सिर्फ समय की बात है।' सरकार ने 28 फरवरी को शुरू हुए पश्चिम एशिया संघर्ष के बावजूद पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में वृद्धि नहीं की है। दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध में सबसे ज्यादा प्रभावित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज हुआ है, जिसके चलते जहाजों की आवाजाही धीमी या ठप हो गई है। गोल्ड महंगा हुआ विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ रहे दबाव को रोकने और गैर-जरूरी आयात पर रोक लगाने के लिए सोने तथा चांदी पर आयात शुल्क  बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया। खास बात है कि भारत महंगी धातुओं का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। कच्चे तेल के बाद सोने का भारत के आयात में दूसरा बड़ा हिस्सा है और बढ़ती खरीद से विदेशी मुद्रा का इस्तेमाल बढ़ा है, जिससे रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया है। सोने और चांदी पर आयात शुल्क छह प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है जबकि प्लैटिनम पर इसे 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 15.4 प्रतिशत किया गया है। यह 13 मई से प्रभावी माना जाएगा। सोने/चांदी के डोरे, सिक्के, अन्य वस्तुएं आदि पर भी टैक्स में बदलाव किए गए हैं। अमूल दूध के दाम बढ़े अमूल ने बढ़ती लागत के कारण पूरे भारत में दूध की कीमतें दो रुपये प्रति लीटर बढ़ाने की घोषणा की। नई दरें आज यानी 14 मई, गुरुवार से लागू हो गईं हैं। इससे पहले अमूल दूध के दाम बीते साल 1 मई को बढ़ाए गए थे। GCMMF यानी गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन का कहना है कि दूध की कीमतें इसलिए बढ़ाई जा रही हैं क्योंकि दूध तैयार करने और उसे बाजार तक पहुंचाने का खर्चा बढ़ गया है। साथ ही कहा, 'इस साल पशु आहार, दूध की पैकेजिंग सामग्री और ईंधन की लागत में काफी बढ़ोतरी हुई है।' चीनी का निर्यात बंद देश ने चीनी के निर्यात पर 30 सितंबर तक तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। घरेलू उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 13 मई को जारी अधिसूचना में कहा, 'चीनी की निर्यात नीति को तत्काल प्रभाव से 30 सितंबर, 2026 तक या अगले आदेश तक (जो भी पहले हो) 'प्रतिबंधित' से 'निषिद्ध' कर दिया गया है।'

हफ्ते में सिर्फ 5 लीटर तेल! क्या भारत में भी लागू हो सकता है फ्यूल राशनिंग नियम?

नई दिल्ली ईरान युद्ध और मध्य पूर्व (Middle East) में तेल आपूर्ति मार्गों में आई रुकावट के कारण पूरी दुनिया एक गंभीर ऊर्जा संकट से जूझ रही है। इस संकट के बीच कई देशों में फ्यूल राशनिंग लागू की जा चुकी है। भारत में भी न‍िजी वाहनों के ल‍िए एक ल‍िमिट में पेट्रोल-डीजल और गैस खरीदने का कोटा तय करना एक उपाय हो सकता है। फिलहाल, भारत सरकार ने अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं किया है। अगर देश में कोटा सिस्टम लागू होता है, तो लोग अपने मन के मुताबिक पेट्रोल, डीजल या गैस नहीं खरीद पाएंगे। बता दें कि श्रीलंका, पाकिस्तान, फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों में QR Code, ऑड-ईवन नियम और साप्ताहिक फ्यूल लिमिट लागू हो चुकी है। अगर भविष्य में हालात और बिगड़ते हैं, तो भारत समेत कई देशों में भी ऐसे कदम उठाए जा सकते हैं। सरल शब्दों में कहें तो 'फ्यूल राशनिंग' सरकार द्वारा लगाया गया वह प्रतिबंध है, जिसके तहत आप अपनी मर्जी के मुताबिक जितना चाहें उतना पेट्रोल या डीजल नहीं खरीद सकते हैं। सरकार प्रत्येक नागरिक या वाहन के लिए एक 'कोटा' तय कर देती है। एक निश्चित समय सीमा (जैसे एक हफ्ता) में आप केवल लिमिट में ही ईंधन खरीद पाएंगे। इसके लिए सरकार QR-कोड, कूपन या गाड़ियों के नंबर के हिसाब से 'ऑड-ईवन' (Odd-Even) जैसे तरीके अपनाती है। 2026 के इस वैश्विक संकट में कई देशों ने अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए ईंधन की बिक्री पर सीमा लगा दी है। श्रीलंका: यहां 'नेशनल फ्यूल पास' (QR कोड) सिस्टम लागू है। कारों के लिए हफ्ते में केवल 15-25 लीटर और मोटरसाइकिलों के लिए सिर्फ 5 लीटर पेट्रोल तय किया गया है। पाकिस्तान: यहां स्थिति इतनी गंभीर है कि एक बार में वाहन को केवल 5 लीटर तेल मिल रहा है। साथ ही सरकारी कर्मचारियों के लिए हफ्ते में केवल 4 दिन काम का नियम बनाया गया है। फ्रांस और जर्मनी: यूरोप के संपन्न देश भी अब राशनिंग की कगार पर हैं। फ्रांस के कुछ इलाकों में QR कोड के जरिए हफ्ते में 15-20 लीटर की सीमा तय की गई है, जबकि जर्मनी में कुछ जगहों पर एक बार में केवल 10 लीटर पेट्रोल मिल रहा है। बांग्लादेश और म्यांमार: बांग्लादेश ने ऊर्जा बचाने के लिए स्कूलों को ऑनलाइन कर दिया है और बिजली की रोटेशनल कटौती (Load Shedding) शुरू कर दी है। म्यांमार में 'ऑड-ईवन' सिस्टम से पेट्रोल दिया जा रहा है। स्लोवेनिया और केन्या: स्लोवेनिया ने प्राइवेट ड्राइवरों के लिए हफ्ते में 50 लीटर का कोटा तय किया है, वहीं केन्या ने घरेलू सप्लाई बचाने के लिए तेल के निर्यात पर ही पाबंदी लगा दी है। ईंधन की किल्लत का असर भारत पर भी पड़ा है। लाइव हिंदुस्तान की बिजनेस टीम ने हाल ही में कुछ शहरों में एक सर्वे किया, जिसमें पाया गया कि पेट्रोल पंप संचालकों ने खुद से ही पेट्रोल-डीजल खरीदने की एक सीमा तय कर रखी है। पूछने पर पता लगा कि कुछ दिनों पहले बाइक सवार ग्राहकों को 200 रुपये और कार चालकों को 2,000 रुपये से ज्यादा का तेल नहीं दिया जा रहा था। अभी भी कई शहरों में पेट्रोल पंप पर अपनी गाड़ी की टंकी फुल कराने पहुंच रहे ग्राहकों को निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा है। इससे पता चलता है कि बिना किसी आदेश के पहले ही पेट्रोल पंप संचालकों ने अपनी कार्यशैली बदलकर कोटा सिस्टम शुरू कर दिया है। वर्क फ्रॉम होम और 4-डेज वर्किंग:– फिलीपींस, लाओस और पाकिस्तान ने विदेशी मुद्रा बचाने के लिए सरकारी कर्मचारियों को घर से काम करने या हफ्ते में कम दिन ऑफिस आने का आदेश दिया है। कार-लेस-डेज:– न्यूजीलैंड जैसे देश 'कार-लेस-डेज' (हफ्ते में एक दिन गाड़ी न चलाना) को फिर से शुरू करने पर विचार कर रहे हैं। पब्लिक ट्रांसपोर्ट:- वियतनाम और कंबोडिया जैसे देशों में लोगों को कारपूलिंग और बस-मेट्रो का उपयोग करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है क्योंकि लगभग 30% पेट्रोल पंप बंद हो चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले ही देशवासियों से ईंधन और यात्रा में कटौती करने की भावुक अपील की है। हालांकि, भारत में अभी तक औपचारिक रूप से राशनिंग लागू नहीं हुई है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा खिंचता है, तो भविष्य में 'कोटा सिस्टम' या 'QR कोड आधारित खरीद' की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फ्यूल राशनिंग का विचार डरावना लग सकता है, लेकिन यह संकट के समय तेल के समान वितरण को सुनिश्चित करने का एक तरीका है। फिलहाल, बचाव का सबसे अच्छा तरीका यही है कि हम निजी वाहनों का कम से कम उपयोग करें और ईंधन की बर्बादी रोकें।

ईंधन के दाम में इजाफा संभव, सरकार को हर दिन उठाना पड़ रहा 1000 करोड़ का भार

 नई दिल्‍ली ईरान अमेरिका तनाव और होर्मुज के बंद होने से ग्‍लोबल स्‍तर पर कच्चे तेल के दाम में भारी उछाल देखने को मिली है. कुछ ही समय में कच्‍चे तेल के दाम 70 डॉलर प्रति बैरल से 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए हैं, जिसके बाद भी देश में पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रहे हैं, लेकिन अब संभावना जताई जा रही है कि ईंधन की कीमतें जल्‍द बढ़ सकती हैं।  क्‍यों सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) को हर दिन भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिसका पूरा भार या तो कंपनी के ऊपर या सरकार के खजाने पर पड़ रहा है. इस कारण, पेट्रोल-डीजल के दाम में हफ्ते भर के दौरान बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है।  सूत्रों ने बिजनेस टुडे को बताया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 15 मई से पहले बढ़ोतरी की जा सकती है, क्योंकि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों  को प्रति माह लगभग 30,000 करोड़ रुपये के भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।  स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज ने बढ़ाई टेंशन  स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज, जिससे होकर दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति गुजरती है, पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण हफ्तों से बुरी तरह प्रभावित है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा हो गया है. कई देशों में ईंधन की समस्‍या आई है और कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है।  हांगकांग में पेट्रोल की कीमत लगभग 295 रुपये प्रति लीटर है, सिंगापुर में लगभग 240 रुपये, नीदरलैंड में 225 रुपये, इटली में 210 रुपये और ब्रिटेन में लगभग 195 रुपये प्रति लीटर है. वहीं, भारत में कई शहरों में पेट्रोल की कीमतें बिना किसी बड़े संशोधन के लगभग 95 रुपये प्रति लीटर के आसपास बनी हुई हैं।  कई देशों में इमरजेंसी लागू  कई देशों ने एनर्जी संकट से निपटने के लिए पहले ही आपातकालीन उपाय लागू कर दिए हैं. बांग्लादेश ने ईंधन की राशनिंग लागू की गई है, श्रीलंका ने चार दिन का कार्य सप्ताह शुरू किया, पाकिस्तान ने सरकारी कार्यालयों के कार्य दिवस कम किए, जबकि दक्षिण कोरिया ने दशकों में पहली बार ईंधन की कीमतों पर सीमा लागू की. हालांकि, भारत में ईंधन की कमी, लंबी कतारें या राशनिंग जैसी समस्याएं नहीं हुईं।  भारत ने उठाए सख्‍त कदम  सरकारी और उद्योग जगत के सूत्रों के अनुसार, संकट शुरू होते ही भारत ने तेजी से कदम उठाए. घरेलू एलपीजी उत्पादन को कुछ ही दिनों में 36,000 टन प्रतिदिन से बढ़ाकर 54,000 टन प्रतिदिन कर दिया गया है. सरकार ने वैश्विक स्तर पर बढ़ती कीमतों से लोगों को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में भी भारी कमी की।  सरकार और तेल कंपनियां उठा रहीं भार  उद्योग जगत के अनुमानों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों के चरम पर, सरकार और तेल उत्पादक कंपनियां मिलकर पेट्रोल पर लगभग 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 30 रुपये प्रति लीटर का भार प्रभावी रूप से वहन कर रही थीं।  उत्पाद शुल्क में कटौती के बाद भी, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम को मिलाकर हर महीने लगभग ₹30,000 करोड़ का नुकसान होने का अनुमान है।  100 फीसदी अधिक क्षमता पर काम  भारत ने रूस, अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका और अन्य क्षेत्रों से कच्चे तेल का आयात बढ़ाकर आपूर्ति को स्थिर करने में भी कामयाबी हासिल की है. खबरों के मुताबिक, ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए रिफाइनरियां 100% से अधिक क्षमता पर काम कर रही हैं. हालांकि, वेस्‍ट एशिया में जारी संघर्ष और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण पब्लिक सेक्‍टर की तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। 

युद्ध के चलते अमेरिका में पेट्रोल महंगा, 44% की बड़ी बढ़ोतरी; भारत में स्थिरता

वाशिंगटन/ नई दिल्ली ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से दुनियाभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी उथल-पुथल देखने को मिली है। लेटेस्ट आंकड़ों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत 71 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 107 डॉलर पर पहुंच गई, जिसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ा है। ग्लोबल पेट्र्रोल प्राइस डॉट कॉम के ताजा अपडेट के मुताबिक लाओस में डीजल 149.7% और पेट्रोल की कीमतों में 35.8% की उछाल दर्ज की गई है। म्यांमार में पेट्रोल की कीमतें 89.7% और डीजल 112.7% तक बढ़ गईं। न्यूजीलैंड में डीजल 88.6 प्रतिशत और पेट्रोल 30.7 प्रतिशत महंगा हुआ है। यूएई में पेट्रोल में 52.4% और डीजल में 86 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। ग्लोबल पेट्र्रोल प्राइस डॉट कॉम के ताजा अपडेट के मुताबिक दुनिया में सबसे महंगा पेट्रोल हांगकांग में 394.95 रुपये लीटर है। वहीं, इजरायल में 269.19 रुपये। अमेरिका और यूरोप में भी बढ़ी तेल की कीमतें जिन देशों में फ्यूल मार्केट पूरी तरह से खुला है, वहां कीमतें आसमान छू रही हैं। अमेरिका में पेट्रोल की कीमत में 44.5% की भारी बढ़ोतरी हुई है। यहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत 119.55 रुपये है। यूरोपीय देशों में फ्रांस (20.9%), बेल्जियम (25.3%) और यूके (19.2%) में बढ़ोतरी हुई है। यूके में 1 लीटर पेट्रोल की कीमत 202.15 रुपये है। एक लीटर पेट्रोल की कीमत आयरलैंड में 202.35 रुपये, इटली में 213.49 रुपये, फ्रांस में 223.36 रुपये, जर्मनी में 223.67 रुपये लीटर है। भारत में क्यों नहीं बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम पाकिस्तान में भी पेट्रोल 54.9% और श्रीलंका में 38.2% महंगा हुआ है। जहां दुनिया जल रही है, वहीं भारत में स्थिति बिल्कुल विपरीत रही। भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। भारत में कीमतें स्थिर रहने के पीछे सरकार का हस्तक्षेप है। केंद्र सरकार ने साफ कहा है कि देश में पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी सिलेंडरों के दाम फिलहाल नहीं बढ़ाए जाएंगे। आमतौर पर भारत में कीमतें युद्ध या संकट के तुरंत बाद नहीं बढ़ाई जातीं। सरकार और तेल कंपनियां कुछ हफ्तों तक इंतजार करती हैं कि कहीं कीमतें वापस गिर तो नहीं रही हैं। इसके अलावा, चुनाव या जनता के दबाव में सरकारें एक्साइज ड्यूटी में कटौती करके कीमतों को नियंत्रित रखती हैं। हालांकि, अगर क्रूड की कीमतें 110 डॉलर पर टिकी रहीं, तो यह राहत लंबे समय तक नहीं टिकेगी। आगे का रास्ता एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरान युद्ध जारी रहने तक तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। अमेरिका और यूरोप में महंगाई बढ़ना तय है। जिन देशों ने अब तक कीमतें नहीं बढ़ाई हैं (जैसे भारत), वहां सरकारों के पास दो विकल्प हैं या तो सब्सिडी देकर खजाना खाली करें, या फिर कीमतें बढ़ाकर जनता पर बोझ डालें।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 25-28 रुपए तक बढ़ोतरी का अनुमान, आम जनता को होगा बड़ा असर

मुंबई   पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर बड़ी अपडेट सामने आ रही है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट के मुताबिक, विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद ईंधन की कीमतों में बड़ा इजाफा हो सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, पेट्रोल और डीजल के दाम 25 से 28 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ाए जा सकते हैं। यह अनुमान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के आधार पर लगाया गया है, जो फिलहाल करीब 120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। तमिलनाडु में आज सभी सीटों के लिए मतदान हो रहा है जबकि पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 152 सीटों के लिए वोटिंग हो रही है। केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने वाली रिपोर्ट्स को खारिज किया केंद्र सरकार ने गुरुवार को उन रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि वर्तमान में चल रहे विधानसभा चुनावों के बाद, देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 25-28 रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इसे फेक न्यूज बताते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट किया, "कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की बात कही जा रही है। यह स्पष्ट किया जाता है कि सरकार के समक्ष ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।" इस तरह की खबरें नागरिकों में भय और दहशत पैदा करने के उद्देश्य से फैलाई जाती हैं और ये शरारतपूर्ण और भ्रामक होती हैं। पोस्ट में अंत में लिखा, "भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां पिछले चार वर्षों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि नहीं हुई है। भारत सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने भारतीय नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय कीमतों में होने वाली तीव्र वृद्धि से बचाने के लिए लगातार कदम उठाए हैं।" इससे पहले दैनिक प्रेस ब्रीफिंग में बुधवार को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि देश में पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है और लोगों से अपील की है कि पेट्रोल-डीजल या गैस की जल्दबादी में खरीदारी न करें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें। सरकार के मुताबिक, देश भर में घरेलू एलपीजी, पीएनजी और सीएनजी की 100 प्रतिशत सप्लाई सुनिश्चित की जा रही है। 23 मार्च 2026 से अब तक 20 लाख से ज्यादा 5 किलो वाले छोटे गैस सिलेंडर (एफटीएल) बेचे जा चुके हैं, जो खासकर प्रवासी मजदूरों के लिए राहत का काम कर रहे हैं। सरकार ने इन सिलेंडरों की सप्लाई भी दोगुनी कर दी है ताकि जरूरतमंदों तक आसानी से गैस पहुंच सके। क्यों बढ़ सकते हैं दाम? अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं, जबकि भारत में उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत कम कीमत पर ईंधन मिल रहा है। इस अंतर का बोझ तेल कंपनियां उठा रही हैं। ऐसे में नुकसान की भरपाई के लिए कंपनियां कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं। अगर अनुमान के मुताबिक बढ़ोतरी होती है, तो पेट्रोल की कीमत कई शहरों में 120 रुपए प्रति लीटर के करीब पहुंच सकती है। इसका असर ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और रोजमर्रा के सामानों की कीमतों पर भी पड़ सकता है। कंपनियों पर बढ़ता दबाव रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी तेल कंपनियों को हर महीने करीब 27,000 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। यह नुकसान कच्चे तेल की ऊंची कीमत और कम रिटेल कीमत के बीच के अंतर की वजह से हो रहा है। लंबे समय तक इस स्थिति को बनाए रखना कंपनियों के लिए मुश्किल होता जा रहा है। सरकार के राहत कदम सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपए प्रति लीटर की कटौती और विंडफॉल टैक्स जैसे कदम उठाए हैं। हालांकि, ये उपाय आंशिक राहत ही दे पा रहे हैं और मूल समस्या अब भी बनी हुई है। अभी क्या है भाव? फिलहाल राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपए प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपए प्रति लीटर पर मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो ब्रेंट क्रूड करीब 102.4 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है, जबकि WTI क्रूड लगभग 93.56 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर है।