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इंदौर में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं, प्रशासन का भरोसा, पंपों पर होगा अनाउंसमेंट

इंदौर पेट्रोल-डीजल को लेकर बीते दिन भी अफरा-तफरी जारी रही। सुबह लगभग 5 बजे से ही पेट्रोल पंपों पर भीड़ लगने लगी, जो शाम तक वैसी ही बनी रही। दिन में पेट्रोल के दाम बढऩे की अफवाह को लेकर सोशल मीडिया पर वीडियो भी वायरल हुआ। सामान्य पेट्रोल नहीं होने को लेकर प्रशासन ने पुष्टि की तो दाम बढऩे जैसी बातों को अफवाह बताया। सुबह से शाम तक प्रशासन के कई अधिकारी लोगों से स्थिति सामान्य होने व घबराहट में भीड़ नहीं लगाने को लेकर अपील करते रहे। यह भी कहा गया कि जिले में पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त स्टॉक है। प्रशासन ने कई पंपों को देर रात तक खुले रखने के निर्देश दिए। बुधवार सुबह 6 बजे से डिपो पर टैंकर पहुंचे व 8 बजे से सप्लाई शुरू कराई गई। मांगलिया डिपो से लगातार आपूर्ति जारी मांगलिया डिपो से ईंधन आपूर्ति जारी है। हिंदुस्तान पेट्रोलियम, भारत पेट्रोलियम और इंडियन ऑयल के डिपो पर ईंधन भरने का कार्य तेज गति से कराया। सुबह 8 बजे तक हिंदुस्तान पेट्रोलियम के 25, भारत पेट्रोलियम के 17 और इंडियन ऑयल के 19 टैंकर पेट्रोल पंपों के लिए रवाना कराए गए थे। रोज 10 लाख लीटर पेट्रोल खपत, पर्याप्त स्टॉक जिला आपूर्ति नियंत्रक एमएल मारू ने बताया, इंदौर जिले में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक है। वर्तमान में जिले में प्रतिदिन लगभग 10 लाख लीटर पेट्रोल और 15 लाख लीटर डीजल की खपत हो रही है। पंपों पर करीब 42 लाख लीटर पेट्रोल और 65 लाख लीटर डीजल का भंडारण है। 3-4 घंटे में कई पंप पर हुआ खत्म पेट्रोल जिले में 270 पेट्रोल पंप हैं। सुबह से प्रशासन की तरफ से लगातार टैंकरों से सप्लाई जारी रखी गई, लेकिन लोगों की भीड़ इतनी अधिक रही कि दो से तीन घंटे में ही पंप पर पेट्रोल खत्म होने लगा। तीन दिन की खपत एक दिन में हुई जितनी खपत तीन दिन में होती है उतनी एक दिन में हुईै। कई पंप में पेट्रोल-डीजल की लिमिट तक तय कर दी। किसी ने 300 तो किसी ने 500 से अधिक का पेट्रोल नहीं दिया। भीड़ कम होने पर भी लिमिट हटा ली। पुलिस ने संभाली व्यवस्था अलग-अलग थाना क्षेत्रों में स्थित पंपों पर पुलिस ने व्यवस्था संभाली। एयरपोर्ट रोड स्थित पंप पर रात को विवाद की स्थिति बनी जिसे पुलिस ने नियंत्रण में लिया। बुधवार को भी अधिकतर पंप पर भीड़ को नियंत्रित करते हुए व्यवस्था बनाई। पेट्रोल-डीजल की कमी नहीं, अफवाहों से दूर रहें इंदौर संभाग में पेट्रोल-डीजल की कमी को लेकर फैल रही अफवाहों के बीच प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि कहीं भी ईंधन की कमी नहीं है। संभागायुक्त सुदामा खाड़े ने सभी जिलों के कलेक्टर और तेल कंपनियों के वितरकों के साथ बैठक कर आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा की। प्रतिनिधियों ने बताया, वर्तमान में उनके पास पर्याप्त स्टॉक है और आगे की जरूरतों के लिए भी भंडार सुरक्षित है। संभागायुक्त ने निर्देश दिए कि जिलों में पेट्रोल-डीजल की सप्लाई बिना रुकावट जारी रहे। बढ़ती मांग को देखते हुए सप्लाई चेन को और मजबूत करने पर जोर दिया है। कंपनियां साझा करेंगी स्टॉक की जानकारी बैठक में तय किया गया कि तेल कंपनियां जिलों में उपलब्ध स्टॉक की जानकारी नियमित रूप से जिला प्रशासन से साझा करेंगी। ग्रामीण क्षेत्रों के पंपों पर भी पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराया जाए। सभी पंपों पर अनाउंसमेंट सिस्टम के जरिए उपभोक्ताओं को सही जानकारी देने का कहा है। प्रशासन ने साफ किया है कि यदि किसी भी डीलर ने ब्लैक मार्केटिंग की तो उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

आगर मालवा, इंदौर और मंदसौर में तेल शॉर्टेज की अफवाहें, पेट्रोल पंपों पर लोगों की भारी भीड़

 इंदौर /मंदसौर  मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बाधित होने के बाद से सोशल मीडिया पर पेट्रोल और डीजल की कमी को लेकर अफवाहें फैल रही है. इन्हीं अफवाहों के बीच मध्य प्रदेश और गुजरात के कई जिलों में अफरा-तफरी मच गई. इंदौर, आगर मालवा, मंदसौर, नीमच समेत गुजरात के अहमदाबाद, वडोदरा, गांधीनगर, सूरत और राजकोट में मंगलवार से पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी कतारें लग गईं. लोग ड्रम, केन, बोतल और कुप्पियों में ईंधन भरकर ले जाने लगे. जिससे कुछ पंपों पर पेट्रोल-डीजल खत्म हो गया, जिसके बाद पंप बंद कर दिए गए. प्रशासन का साफ कहना है कि किसी भी तरह की कमी नहीं है, फिर भी लोग घबराकर पेट्रोल-डीजल के लिए घंटों लाइन में लगे हुए हैं।  इंदौर में मंगलवार को करीब तीन दर्जन से ज्यादा पेट्रोल पंपों पर सुबह से ही भीड़ जुट गई. वाहन चालकों को घंटों इंतजार करना पड़ा. कई जगह पंप कर्मचारी और ग्राहकों के बीच बहस भी हुई. कुछ पंपों पर पेट्रोल खत्म होने के बाद बोर्ड लगा दिया गया और बाहर हुजूम जमा हो गया. पंप संचालकों ने बताया कि रात में टैंकर आने के बाद सुबह से सप्लाई फिर सुचारू हो जाएगी   । जिला आपूर्ति नियंत्रक एम.एल. मारू ने स्पष्ट जानकारी देते हुए कहा,'इंदौर जिले में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कोई कमी नहीं है. सभी पंपों पर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और डिपो से लगातार सप्लाई हो रही है. अफवाहों पर ध्यान न दें, अनावश्यक घबराहट में ईंधन का संग्रह न करें. अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।  इंदौर कलेक्टर ने भी नागरिकों से अपील की कि पैनिक खरीदारी न करें. उन्होंने कहा कि बेवजह की भीड़ से सिर्फ अव्यवस्था बढ़ रही है और आम लोगों को परेशानी हो रही है।  मालवा में भी हालात बेकाबू इसी तरह आगर मालवा जिले में दोपहर बाद से पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ देखी गई. ट्रैक्टरों पर बड़े-बड़े ड्रम और केन लेकर किसान पहुंचे, तो कुछ लोग मोटरसाइकिल, कार और यहां तक कि एम्बुलेंस लेकर कतार में लग गए. सोशल मीडिया पर 'पंप बंद होने वाले हैं, पेट्रोल-डीजल नहीं मिलेगा' वाली अफवाह ने पूरे जिले में घबराहट फैला दी।  आगर मालवा की कलेक्टर प्रीति यादव ने खुद वीडियो जारी कर लोगों को आश्वस्त किया, 'जिले में ईंधन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है. कोई दिक्कत नहीं है, घबराएं नहीं।  मंदसौर में पंपों पर स्टॉक खत्म? वहीं, मंदसौर और नीमच में भी सैकड़ों लोग गाड़ियां लेकर पंपों पर पहुंच गए. जरूरत से ज्यादा पेट्रोल-डीजल भरवाने की वजह से कुछ पंपों पर स्टॉक खत्म हो गया. स्कूल छोड़ने वाले ऑटो, दूध बांटने वाले वाहन और किसान डीजल स्टॉक करने लगे हैं. पेट्रोल खत्म होने के बाद कुछ पंपों के डिस्प्ले को काले कपड़े से ढक दिया गया, ताकि और लोग न आएं।  गुजरात के बड़े शहरों में अफरा-तफरी गुजरात में अहमदाबाद से शुरू हुई अफवाह शाम तक देखते ही देखते वडोदरा, गांधीनगर, सूरत और राजकोट तक फैल गई. ऑफिस टाइम के बाद लोग सीधे पेट्रोल पंपों पर पहुंच गए, जिससे देर रात तक अफरातफरी मची रही. सरकार और तेल कंपनियों द्वारा लिखित आश्वासन दिए जाने के बावजूद सोशल मीडिया के मैसेज ने लोगों में डर पैदा कर दिया।  कई लोगों ने बताया, 'सोशल मीडिया पर मैसेज देखा तो एहतियातन आ गए.' कुछ की गाड़ी में डीजल खत्म हो गया था, लेकिन लंबी लाइन का सामना करना पड़ा।  पेट्रोल डीलर एसोसिएशन ने दर्ज कराई शिकायत इसी बीच राजकोट में तो पेट्रोल डीलर एसोसिएशन के अध्यक्ष गोपाल चुडासमा के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है. इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के सेल्स हेड अमित जायसवाल ने शिकायत में कहा कि चुडासमा ने सार्वजनिक रूप से झूठा बयान दिया कि पंपों पर स्टॉक खत्म हो गया है. इससे जनता में दहशत फैली और कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा पैदा हो गया।  इस घटना के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है, ताकि भविष्य में कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति अफवाहें फैलाकर अराजकता न फैलाए. सरकारने पहले ही साफ कर दिया था कि अगर किसी भी व्यक्ति ने अफवाह फैलाई या फिर काला बाजारी की तो उनके खिलाफ कानूनी कारवाई की जाएगी. राज्य सरकार की ओर से उपमुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री ने भी अफवाहों से दूर रहने की अपील की थी। 

क्या बढ़ने वाले हैं पेट्रोल-डीजल के दाम? LPG के बाद सरकार का नया बयान

नई दिल्ली हाल ही में LPG गैस की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। गैस की इन कीमतों में वृद्धि के बाद अब ऐसा कहा जा रहा था कि पेट्रोल और डीज़ल के दाम भी बढ़ सकते हैं। आपको बता दें कि सरकारी गलियारों से ऐसी जानकारी सामने आ रही है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी अभी नहीं होगी।   पेट्रोल-डीजल के दाम पर सरकार का रुख पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद, भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रहेंगी। सूत्रों का कहना है कि Strait of Hormuz से कार्गो जहाजों की आवाजाही जल्द ही सुचारू रूप से शुरू होने की उम्मीद है, जिससे आपूर्ति बाधित नहीं होगी। ऐसे में कीमतों में इजाफे की संभावना न के बराबर है। LPG की कीमतों में क्यों हुआ इजाफा? लगभग 11 महीने के अंतराल के बाद सरकार ने रसोई गैस के दामों में बदलाव किया है। घरेलू उपयोग वाले 14.2 किलो के सिलेंडर पर 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, वहीं 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 115 रुपये का इजाफा हुआ है। आंकड़ों की मानें तो पिछले 12 वर्षों में एलपीजी के दाम कुल 110 रुपये बढ़े हैं। सरकार ने अब तेल कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे अपना पूरा ध्यान एलपीजी के उत्पादन को अधिकतम करने पर लगाएं ताकि भविष्य में कीमतों को नियंत्रित रखा जा सके। भारत के पास सुरक्षित भंडार: हरदीप सिंह पुरी केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने देश को विश्वास किया है कि ईंधन की कमी को लेकर घबराने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत के पास कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एटीएफ (हवाई ईंधन) का भरपूर भंडार है। देश के पास अगले 50 से 60 दिनों के लिए पर्याप्त बैकअप मौजूद है। सप्लाई चेन और रसद के मोर्चे पर स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की स्थिति पश्चिम एशिया के संघर्ष ने वैश्विक बाजार को हिलाकर रख दिया है। पिछले एक सप्ताह में ही कच्चे तेल की कीमतों में 39% का जबरदस्त उछाल आया है। शुक्रवार को कीमतें अपने एक साल के उच्चतम स्तर (52-week high) पर पहुंच गईं, जिसमें एक ही दिन में 3.50% की तेजी देखी गई। इसके बावजूद, भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता के बल पर घरेलू कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश कर रहा है।

यूपी में तेल खत्म होने की अफवाह के बाद पंपों पर लंबी कतारें, लोग गैलन में पेट्रोल-डीजल भरवाकर रख रहे हैं

बाराबंकी/लखीमपुर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव और युद्ध की खबरों का असर अब आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी दिखाई देने लगा है. इज़राइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को लेकर फैल रही चर्चाओं और अफवाहों ने यूपी के कई जिलों में अजीब सा माहौल बना दिया है. कहीं पेट्रोल पंपों पर अचानक भीड़ बढ़ गई है तो कहीं लोग गाड़ियों के साथ-साथ ड्रम, कैन और गैलन लेकर डीजल-पेट्रोल भरवाने पहुंच रहे हैं।  हालात ऐसे बन गए हैं कि सामान्य दिनों में शांत दिखने वाले पेट्रोल पंपों पर अचानक लंबी-लंबी कतारें लग गईं. कई जगहों पर लोगों के बीच जल्द से जल्द तेल भरवाने की होड़ सी लग गई है. सोशल मीडिया पर भी इसके कई वीडियो वायरल हो रहे है. जिसमें देखा जा सकता है कि पेट्रोल पंपों के बाहर वाहनों की लाइन सड़क तक लग गई . लोग अपनी बारी का इंतजार करते हुए घंटों खड़े नजर आ रहे हैं।  युद्ध की खबरों से फैली आशंका दरअसल पिछले कुछ दिनों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इज़राइल और ईरान के बीच तनाव और सैन्य कार्रवाई की खबरें लगातार सामने आ रही हैं. सोशल मीडिया पर इन खबरों के प्रसारण के बाद आम लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई कि अगर युद्ध लंबा खिंच गया तो पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. इसी आशंका ने धीरे-धीरे अफवाह का रूप ले लिया. कई इलाकों में यह बात फैलने लगी कि जल्द ही पेट्रोल और डीजल की कमी हो सकती है या फिर इनके दाम अचानक बढ़ सकते हैं. यही कारण है कि लोग पहले से ही तेल जमा करने की कोशिश में जुट गए हैं।  लखीमपुर खीरी में पंपों पर उमड़ी भीड़ उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में यह अफवाह सबसे ज्यादा असर दिखा रही है. जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में गुरुवार को कई पेट्रोल पंपों पर अचानक भारी भीड़ जमा हो गई. सबसे ज्यादा भीड़ निघासन और भीरा थाना क्षेत्र के इलाकों में देखी गई. यहां लोग अपनी मोटरसाइकिल, कार और ट्रैक्टर लेकर पेट्रोल पंपों पर पहुंचने लगे. कई लोग तो केवल गाड़ियों में ही नहीं बल्कि प्लास्टिक के कैन, ड्रम और गैलन लेकर भी पहुंचे, ताकि ज्यादा से ज्यादा डीजल-पेट्रोल भरवाकर घर में स्टॉक कर सकें. पंपों के बाहर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं. कई जगहों पर लाइन इतनी लंबी हो गई कि सड़क पर जाम जैसी स्थिति बन गई. लोगों के चेहरों पर जल्द से जल्द तेल भरवाने की बेचैनी साफ दिखाई दे रही थी।  सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो इन हालातों के वीडियो भी तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे. वीडियो में देखा जा सकता है कि पेट्रोल पंपों पर भीड़ को नियंत्रित करना कर्मचारियों के लिए मुश्किल हो रहा है. कुछ जगहों पर लोग एक-दूसरे से आगे निकलने की कोशिश करते नजर आए, जबकि कई लोग अपनी बारी के इंतजार में धूप में खड़े रहे. सोशल मीडिया पर इन वीडियो के साथ तरह-तरह की बातें भी लिखी जा रही हैं, जिससे अफवाह और तेजी से फैल रही है।  लोगों में डर का माहौल पेट्रोल पंप पर मौजूद एक चश्मदीद ने बताया कि भीड़ का मुख्य कारण लोगों में फैला डर है. उनके मुताबिक, “भीड़ यहां पर इसलिए है कि अभी जो पश्चिमी देशों में युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं, उसी वजह से लोगों में थोड़ा डर सा फैल गया है. लोगों को लग रहा है कि कहीं ऐसा न हो कि तेल खत्म हो जाए, इसलिए लोग ज्यादा से ज्यादा पेट्रोल और डीजल भरवा रहे हैं. माहौल में एक तरह का डर दिखाई दे रहा है. उन्होंने आगे कहा कि पहले भी नमक को लेकर इसी तरह की अफवाह फैल चुकी है. उस समय भी लोग बड़ी मात्रा में नमक खरीदने लगे थे. उनका मानना है कि प्रशासन और सरकार को आगे आकर लोगों को भरोसा दिलाना चाहिए कि पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है।  बाराबंकी में भी दिखा असर सिर्फ लखीमपुर खीरी ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिली. यहां भी पेट्रोल और डीजल की संभावित कमी और कीमतों में बढ़ोतरी की चर्चा ने लोगों को बेचैन कर दिया. बाराबंकी के कई पेट्रोल पंपों पर गुरुवार को भारी भीड़ देखने को मिली. श्री विष्णु नारायण फिलिंग सेंटर आजगना, सद्दीपुर थाना जहांगीराबाद और तहसील फतेहपुर स्थित नेशनल ट्रेडिंग कंपनी पेट्रोल पंप पर सैकड़ों लोग डीजल भरवाने के लिए पहुंच गए. जानकारी के अनुसार करीब डेढ़ सौ से अधिक किसान अपने-अपने ड्रम और कैन लेकर लाइन में खड़े दिखाई दिए. कई किसान ट्रैक्टर लेकर भी पहुंचे, ताकि एक बार में ज्यादा मात्रा में डीजल भरवा सकें. खेती के सीजन ने बढ़ाई चिंता किसानों का कहना है कि इस समय खेती का मौसम चल रहा है और खेतों में काम के लिए डीजल बेहद जरूरी है. अगर अचानक डीजल की कमी हो गई या दाम बढ़ गए तो खेती पर सीधा असर पड़ सकता है. इसी वजह से किसान पहले से ही डीजल जमा करने की कोशिश कर रहे हैं. कई किसानों ने बताया कि वे पिछले डेढ़ से दो घंटे से लाइन में खड़े हैं, लेकिन अभी तक उनकी बारी नहीं आई. एक किसान ने कहा, हम डीजल भरवाने आए हैं, भीड़ बहुत ज्यादा है. करीब डेढ़ घंटे से लाइन में खड़े हैं. खेती का काम है, इसलिए डीजल जरूरी है।  स्थानीय लोग भी परेशान पेट्रोल पंपों पर लगी लंबी लाइनों की वजह से आम लोगों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. कई लोग केवल अपनी गाड़ी में थोड़ा सा पेट्रोल भरवाने आए थे, लेकिन उन्हें भी घंटों इंतजार करना पड़ा. एक स्थानीय निवासी ने बताया कि वे काफी देर से लाइन में खड़े हैं, लेकिन अभी तक उनका नंबर नहीं आया है. उनका कहना था कि अचानक इतनी भीड़ बढ़ जाने से सामान्य व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ गई है।  पंपकर्मियों के लिए भी चुनौती पेट्रोल पंप कर्मचारियों के लिए भी यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बन गई है. अचानक बढ़ी भीड़ को संभालना उनके लिए आसान नहीं है. बाराबंकी के फतेहपुर स्थित नेशनल ट्रेडिंग कंपनी इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप के मालिक मोहम्मद आरिफ ने बताया कि उन्हें … Read more

ईरान-इजरायल तनाव का असर: फरीदकोट में पेट्रोल पंपों पर किसानों की भीड़, डीजल स्टॉकिंग बढ़ी

फरीदकोट  फरीदकोट में पेट्रोल पंपों पर अचानक से किसानों की भीड़ उमड़ गई है। वह ड्रम लेकर पेट्रोल-डीजल लेने के लिए पहुंच रहे हैं। ईरान और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध के चलते पंजाब में फरीदकोट जिले के कोटकपूरा शहर में पेट्रोल पंपों पर किसानों की भीड़ उमड़ पड़ी। वीरवार को शहर के कई पेट्रोल पंपों पर डीजल भरवाने के लिए लंबी कतारें देखने को मिलीं। खासकर किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में ड्रम और कैन लेकर पहुंचे और बड़ी मात्रा में डीजल भरवाकर स्टोर करते नजर आए। दरअसल, गेहूं की कटाई का सीजन करीब एक महीने बाद शुरू होने वाला है। ऐसे में किसानों को डर है कि अगर अंतरराष्ट्रीय हालात बिगड़ते हैं तो तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसी आशंका के चलते किसान अभी से डीजल जमा करने में जुट गए हैं ताकि कटाई के समय उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। किसान बोले- युद्ध की वजह से तेल की कमी होने की चर्चा पेट्रोल पंपों पर पहुंचे किसानों का कहना है कि युद्ध की खबरों के कारण तेल की कीमतें बढ़ने और कमी होने की चर्चा चल रही है। इसी वजह से वे एहतियात के तौर पर डीजल स्टोर कर रहे हैं। किसानों ने बताया कि कटाई के दौरान ट्रैक्टर, कंबाइन और अन्य कृषि मशीनों के लिए बड़ी मात्रा में डीजल की जरूरत पड़ती है, इसलिए वे पहले से तैयारी कर रहे हैं। वहीं, पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि तेल की सप्लाई नियमित रूप से आ रही है, लेकिन अचानक बढ़ी मांग के कारण कुछ जगहों पर भीड़ और लंबी कतारें लग रही हैं। प्रशासन भी लोगों से संयम बरतने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील कर रहा है। भाजपा नेता ने की अफवाहों से बचने की अपील इस मामले में भाजपा नेता प्रदीप शर्मा ने लोगों से अफवाहों से बचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि देश में तेल की कोई कमी नहीं है और केंद्र सरकार ने भी स्पष्ट कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय हालात चाहे जैसे हों, भारत में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ने दिया जाएगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि घबराकर तेल जमा करने की बजाय सामान्य तरीके से ही खरीदारी करें।

प्रदेश में पर्याप्त मात्रा में है पेट्रोल, डीजल एवं एलपीजी अपर मुख्य सचिव खाद्य शमी ने की समीक्षा

भोपाल  प्रदेश में पेट्रोल,डीजल एवं एलपीजी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। यह जानकारी ऑयल कम्पनियों के प्रतिनिधियों ने अपर मुख्य सचिव खाद्य  रश्मि अरुण शमी द्वारा गुरुवार को मंत्रालय में की गयी पेट्रोलियम पदार्थों की उपलब्धता की समीक्षा के दौरान दी। उल्लेखनीय है कि वर्तमान अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने पेट्रोलियम पदार्थों की उपलब्धता की समीक्षा के निर्देश दिये थे। समीक्षा बैठक में ऑयल कम्पनियों के प्रतिनिधियों ने बताया कि वर्तमान खपत को देखते हुए पेट्रोलियम पदार्थों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। अपर मुख्य सचिव ने ऑयल कम्पनियों को जिलावार अपने फील्ड ऑफिसर तथा डिपो प्रभारी को संभागायुक्त एवं कलेक्टर से सम्पर्क करने तथा नियमित रूप से स्टॉक की जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिये। उन्होंने यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिये कि डीजल, पेट्रोल एवं एलपीजी की जमाखोरी एवं कालाबाजारी किसी भी स्थिति में न हो। डीलर स्तर पर प्रतिदिन स्टॉक की समीक्षा की जाए। बैठक में कमिश्नर खाद्य  कर्मवीर शर्मा, एमडी नागरिक आपूर्ति निगम  अनुराग वर्मा और ऑयल कम्पनियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।  

वाहन चालकों के लिए अलर्ट! दिल्ली में बिना PUCC नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल

नई दिल्ली जब भी गाड़ी चलाते हैं तो हमें सड़क एवं यातायात नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। अगर हम ऐसा नहीं करते हैं, तो हमारी गाड़ी का चालान कट सकता है। इसमें कई नियम होते हैं जिनका पालन करना जरूरी है। इसी क्रम में दिल्ली में आज से PUCC सर्टिफिकेट अनिवार्य होगा। अगर आपकी गाड़ी की PUCC नहीं है तो आपको दिल्ली में पेट्रोल-डीजल नहीं मिलेगा। इसको लेकर सरकार ने न सिर्फ नियम जारी किया है बल्कि, इसका सख्ती से पालन करने को भी कहा गया है। इसलिए अगर आपकी गाड़ी की PUCC (NO PUCC NO Fuel) नहीं हुई है तो आप इसे तुरंत करवा लें। आप यहां आखिरी तारीख से लेकर नए नियम के बारे में और PUCC करवाने का तरीके के बारे में भी जान सकते हैं। अगली स्लाइड्स में आप इस बारे में सबकुछ जान सकते हैं… क्या है नया नियम?     दरअसल, अगर आप दिल्ली में रहते हैं या दिल्ली में अपनी गाड़ी लेकर जाते हैं और आप दिल्ली के पेट्रोल पंप से पेट्रोल-डीजल लेते हैं, तो आपको बिना PUCC पेट्रोल-डीजल नहीं दिया जाएगा। दिल्ली में वायु प्रदूषण को लेकर सरकार ने ये सख्त कदम उठाने का फैसला किया। बस आज और कल का समय     अगर आपकी गाड़ी PUCC सर्टिफिकेट नहीं है, तो आपके लिए आज से पेट्रोल-डीजल लेने में दिक्कत होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि ये नया नियम दिल्ली में आज यानी 18 दिसंबर 2025 से लागू हो गया है जिसके बाद आपको बिना PUCC पेट्रोल-डीजल नहीं मिलेगा। कैसे करवाएं PUCC? स्टेप 1     अगर आपकी गाड़ी की PUCC यानी प्रदूषण नियंत्रण (पोल्यूशन अंडर कंट्रोल) नहीं है, तो आपको अब ये करवाना अनिवार्य होगा     इसके लिए आपको सबसे पहले पेट्रोल पंप या अन्य जगहों पर बने हुए PUCC सेंटर पर जाना होगा     यहां पर जाकर आपको अपनी गाड़ी की आरसी दिखानी होती है स्टेप 2     इसके बाद आपकी आरसी से आपकी गाड़ी की जानकारी सिस्टम में फीड की जाती है     फिर आपकी गाड़ी की टेस्टिंग होती है यानी उसका प्रदूषण नियंत्रण चेक होता है     सबकुछ सही पाए जाने पर आपकी गाड़ी की PUCC कर दी जाती है जिसके लिए आपसे निर्धारित शुल्क लिया जाता है     इसके बाद आपको प्रदूषण नियंत्रण का सर्टिफिकेट दिया जाता है  

बढ़ते प्रदूषण पर सख्ती: दिल्ली में बिना वैध PUCC वाहनों को पेट्रोल पर रोक

 नई दिल्ली दिल्ली में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है. प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए बीजेपी सरकार ने कई सख्त फैसलों का ऐलान किया है, जिनका असर आम लोगों से लेकर वाहन चालकों और निर्माण क्षेत्र तक पड़ेगा. दिल्ली के पर्यावरण संरक्षण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि इन कदमों का मकसद राजधानी की हवा को साफ करना और लोगों के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखना है. पर्यावरण मंत्री मनजींदर सिंह सिरसा ने घोषणा की है कि 18 दिसंबर से पेट्रोल पंपों पर उन वाहनों को ईंधन नहीं मिलेगा, जिनके पास वैध पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट (PUCC) सर्टिफिकेट नहीं होगा. इस नियम की निगरानी कैमरों के जरिए की जाएगी, ताकि कोई उल्लंघन ना हो सके. नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित वाहन मालिकों और पेट्रोल पंप संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. सरकार का मानना है कि इस कदम से सड़कों पर प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की संख्या में कमी आएगी. इसके अलावा दिल्ली के बाहर से आने वाले निजी वाहनों को लेकर भी सख्त नियम लागू किए गए हैं. दूसरे राज्यों में रजिस्टर, बीएस-VI उत्सर्जन मानकों से नीचे के निजी वाहनों को राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी. यह फैसला खासतौर पर उन वाहनों पर लागू होगा, जो अधिक धुआं छोड़कर वायु प्रदूषण बढ़ाते हैं. दिल्ली की सीमाओं पर तैनात एजेंसियों को इस नियम को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं. निर्माण गतिविधियों से होने वाले धूल प्रदूषण पर भी सरकार ने सख्ती दिखाई है. दिल्ली में ईंट, रेत, सीमेंट और अन्य निर्माण सामग्रियों के ​परिवहन पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई है. नियम तोड़ने वालों के खिलाफ भारी जुर्माना लगाया जाएगा और अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी. पर्यावरण मंत्री सिरसा ने दिल्ली वालों से मांगी माफी पूर्ववर्ती आम आदमी पार्टी सरकार और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए मंत्री सिरसा ने कहा कि मौजूदा सरकार को 'प्रदूषण की बीमारी विरासत में मिली है'. उन्होंने कहा, 'जिन लोगों ने दिल्ली में प्रदूषण फैलाया, वही आज विरोध कर रहे हैं.' बीजेपी सरकार द्वारा दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि राजधानी के लैंडफिल साइट्स की ऊंचाई में करीब 15 मीटर की कमी आई है और लगभग 8,000 उद्योगों को कड़े प्रदूषण नियंत्रण मानकों के दायरे में लाया गया है. प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर अब तक 9 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है. उन्होंने कहा कि लकड़ी जलाने से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार ने 10,000 हीटर वितरित किए हैं. इसके अलावा, बैंक्वेट हॉल्स में डीजे के उपयोग को नियंत्रित करने के निर्देश दिए गए हैं. मंत्री सिरसा ने स्वीकार किया कि दिल्ली में प्रदूषण पर पूरी तरह काबू पाना इतने कम समय में संभव नहीं है. उन्होंने कहा, 'मैं दिल्ली के लोगों से माफी मांगता हूं, लेकिन सात-आठ महीनों में प्रदूषण को पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है.' साथ ही उन्होंने कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पर भी तंज कसते हुए आरोप लगाया कि पिछले वर्ष इसी अवधि में उन्होंने मास्क नहीं पहने थे, लेकिन अब मास्क पहनकर घूम रहे हैं. प्रदूषण नियंत्रण के लिए सरकार ने उठाए कई कदम पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि शहर में 62 पॉल्यूशन हॉटस्पॉट की पहचान की है, जिनमें से 13 क्षेत्रों में पिछले साल की तुलना में प्रदूषण का स्तर कम दर्ज किया गया है. इसके अलावा, 3,427 इलेक्ट्रिक बसों को डीटीसी में शामिल किया गया है ताकि वाहनों से होने वाले ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन को कम किया जा सके. सिरसा ने यह भी बताया कि वैज्ञानिकों की एक समिति गठित की गई है, जो नियमित रूप से बैठक कर प्रदूषण के रुझानों का अध्ययन कर रही है और आगे के उपायों की सिफारिश कर रही है. दिल्ली में इस समय वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 'बहुत खराब' श्रेणी में बना हुआ है. 16 दिसंबर 2025 को सुबह के समय AQI 380 से ऊपर दर्ज किया गया, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है. सर्दियों का मौसम आते ही धुंध और स्मॉग की मोटी चादर छा जाने से लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है. वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण स्थलों से उड़ती धूल प्रदूषण को बढ़ाने में सहयोग कर रही है. सरकार का मानना है कि वाहनों से होने वाला प्रदूषण दिल्ली की हवा को खराब करने में सबसे बड़ी भूमिका निभा रहा है. इसलिए PUCC चेक को अनिवार्य बनाकर पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर लगाम लगाई जा रही है. लोगों से पब्लिक ट्रांसपोर्ट उपयोग करने की अपील दिल्ली सरकार ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे प्रदूषण नियंत्रण में सहयोग करें, सार्वजनिक परिवहन का अधिक से अधिक उपयोग करें और अनावश्यक वाहन उपयोग से बचें. दिल्ली सरकार का कहना है कि ये कदम अस्थायी जरूर हैं, लेकिन जनता के स्वास्थ्य को देखते हुए बेहद जरूरी हैं. आने वाले दिनों में प्रदूषण की स्थिति की समीक्षा कर आगे और कड़े फैसले लिए जा सकते हैं. पर्यावरण मंत्री सिरसा ने कहा कि ये कदम दिल्ली को स्वच्छ हवा देने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं. उन्होंने कहा कि ये उपाय 18 दिसंबर से लागू हो रहे हैं. उन्होंने नगारिकों से नियमों का पालन करने का अनुरोध किया.

हेलमेट नियम : इंदौर में बिना हेलमेट मिलने लगा पेट्रोल, आदेश की अवधि पूरी

इंदौर इंदौर जिले में दोपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट की अनिवार्यता का आदेश अब समाप्त हो गया है। यह आदेश 30 जुलाई को जारी किया गया था और एक अगस्त से 29 सितंबर के लिए लागू किया गया था, लेकिन अब इसे आगे नहीं बढ़ाया गया है। नए कलेक्टर ने इस आदेश को समाप्त करने का निर्णय लिया है, जिसके चलते अब प्रशासन हेलमेट पहनने के लिए जागरूकता फैलाने पर जोर देगा। पेट्रोल पंपों पर हेलमेट न पहनने वालों को ईंधन देने की सख्ती अब समाप्त हो गई है। पहले, जब यह आदेश लागू था, तो पेट्रोल पंपों पर हेलमेट न पहनने वाले चालकों की कतारें लग गई थीं। लोग हेलमेट मांगकर या खरीदकर ईंधन लेने आते थे। इस आदेश का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में दोपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था, क्योंकि सड़क हादसों में सिर में चोट लगने से मृत्यु का मुख्य कारण बनता है। सुप्रीम कोर्ट की समिति ने दिया था सुझाव सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष पूर्व न्यायाधीश अभय मनोहर सप्रे ने 29 जुलाई को इंदौर में आयोजित एक बैठक में हेलमेट की अनिवार्यता की बात की थी। इसके बाद तत्कालीन कलेक्टर आशीष सिंह ने पेट्रोल पंप संचालकों के लिए आदेश जारी किया था कि वे हेलमेट न पहनने वाले चालकों को ईंधन न दें। इस आदेश के बाद कई पंपों पर कार्रवाई की गई और बगैर हेलमेट के पेट्रोल देने पर पांच पंपों को सील किया गया था। हालांकि अब प्रशासन ने इस सख्ती को समाप्त कर दिया है। कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि अब लोगों को हेलमेट पहनने के लिए जागरूक करने के उद्देश्य से कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके तहत लोगों को हेलमेट पहनने के लाभ और इसका महत्व बताया जाएगा। हेलमेट को लेकर विवाद भी हुए सरकारी आदेश की अवधि के दौरान हेलमेट की अनिवार्यता को लेकर कुछ विवाद भी हुए हैं। चंदन नगर क्षेत्र में लक्की पेट्रोल पंप पर बिना हेलमेट पेट्रोल न देने पर एक युवक ने पंप कर्मचारी के साथ मारपीट की थी। इसी तरह छोटा बांगड़दा क्षेत्र में भी एक युवक ने कर्मचारियों से हाथापाई की और माचिस की जलती हुई तीली फेंकी थी। इन घटनाओं के बाद पुलिस में शिकायतें दर्ज की गई थीं। सरकारी कार्यालयों में भी की गई थी सख्ती सरकारी कार्यालयों में भी हेलमेट की अनिवार्यता को लेकर सख्ती की गई थी। कलेक्ट्रेट और अन्य सरकारी कार्यालयों में हेलमेट पहनकर आने वाले कर्मचारियों को गुलाब के फूल दिए जाते थे, जबकि बिना हेलमेट आने वालों को कार्यालय परिसर में प्रवेश नहीं दिया जाता था। हालांकि, अब इस सख्ती को भी समाप्त कर दिया गया है। इस प्रकार, इंदौर में हेलमेट की अनिवार्यता समाप्त होने के बाद अब प्रशासन ने जागरूकता फैलाने का निर्णय लिया है। यह कदम सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन यह भी आवश्यक है कि लोग अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक रहें और हेलमेट पहनने को अपनी आदत बना लें। इस बदलाव के साथ यह देखना होगा कि क्या लोग अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक होंगे या फिर प्रशासन को फिर से सख्ती बरतने की आवश्यकता पड़ेगी। सड़क पर सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक की भी जिम्मेदारी है। जागरुक किया जाएगा     पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल भरवाने के लिए हेलमेट होने की अनिवार्यता खत्म कर दी है। सभी पंपों पर अब लोगों को हेलमेट पहनने के लिए जागरूक किया जाएगा। इसके लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। – शिवम वर्मा, कलेक्टर

अब इंदौर में बिना हेलमेट भी मिलेगा पेट्रोल, कलेक्टर बोले – सख्ती नहीं, समझदारी जरूरी

इंदौर क्लीन सिटी इंदौर में अब हेलमेट पहनकर गाड़ियों में पेट्रोल डलवाना जरूरी नहीं है, बल्कि हेलमेट को लेकर जागरूकता ज्यादा जरूरी है. इसी तरह के एक आदेश के बाद क्लीन सिटी इंदौर में अब हेलमेट लगाना स्वैच्छिक कर दिया गया है. बीते 1 अगस्त को इंदौर जिला प्रशासन ने दुपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट लगाना जरूरी किया था. इस आदेश को वर्तमान कलेक्टर शिवम वर्मा ने जारी रखने से इनकार कर दिया है. पूर्व कलेक्टर ने अनिवार्य किया था हेलमेट इंदौर में आए दिन होने वाले टू व्हीलर गाड़ियों के एक्सीडेंट में लोगों की सर पर चोट लगने से मौत एक बड़ी वजह है. लिहाजा पूर्व कलेक्टर आशीष सिंह ने पिछले महीने एक आदेश निकालकर शहर में दुपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट लगाना अनिवार्य किया था. इतना ही नहीं बिना हेलमेट के पेट्रोल पंपों पर वाहन चालकों को पेट्रोल नहीं देने के भी आदेश दिए थे. नए कलेक्टर ने स्वैच्छिक किया हेलमेट लगाना उस दौरान इसी आदेश के उल्लंघन के कारण कई पेट्रोल पंप को सील भी किया गया था. 1 अक्टूबर को फिर इस आदेश को सुचारू रखने के लिए नया आदेश किया जाना था, लेकिन वर्तमान कलेक्टर शिवम वर्मा ने उसे सुचारू नहीं रखते हुए शहर में हेलमेट लगाना एक बार फिर स्वैच्छिक कर दिया है. इतना ही नहीं अब बिना हेलमेट के भी वाहन चालक पेट्रोल पंपों पर अपने वाहनों में पेट्रोल डलवा पाएंगे. हालांकि नए कलेक्टर के इस फैसले से शहर के उन वाहन चालकों ने राहत की सांस ली है जिन्हें ट्रैफिक पुलिस द्वारा हेलमेट के नाम पर लगातार परेशान किया जा रहा था. पेट्रोल डलवाने के लिए भी पहनना पड़ता था हेलमेट वहीं, वाहनों में पेट्रोल डलवाने के लिए भी लोगों को हेलमेट लेकर पेट्रोल पंप पर पहुंचना पड़ता था. इधर इस आदेश को सुचारू नहीं रखने के पीछे एक बड़ा कारण यह भी है कि अधिकांश वाहन चालक पेट्रोल डलवाते समय ही हेलमेट लगा रहे थे. जबकि वाहन चलाते समय हेलमेट लगाने वाले लोगों की संख्या में कोई खास वृद्धि नहीं हुई थी. इधर इस आदेश का स्थानीय भाजपा नेताओं ने भी विरोध किया था. मध्य प्रदेश में सड़क हादसों में इंदौर अव्वल लोगों को हेलमेट न लगाना पड़े इसको लेकर एक जनहित याचिका भी कोर्ट में प्रस्तुत की थी, लेकिन कोर्ट से भी हेलमेट लगाने संबंधी फैसले पर लोगों को राहत नहीं मिल पाई थी. अब जबकि खुद जिला प्रशासन ने ही अपने आदेश को सुचारू नहीं रखा तो पेट्रोल पंपों पर बिना हेलमेट के पेट्रोल दिए जाने की पुरानी व्यवस्था फिर शुरू हो गई है. एक्सीडेंट के मामले में इंदौर पहले नंबर पर है, जहां पिछले साल ही करीब 6075 सड़क दुर्घटनाएं हुई थीं जो तुलनात्मक रूप से भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर से सर्वाधिक थी. इन दुर्घटनाओं में अधिकांश वाहन चालक टू व्हीलर थे, जो हेलमेट नहीं लगाए थे.