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नर्सरी से लाने के बाद सूखने लगती है तुलसी? जानें एक्सपर्ट के बताए रिपोटिंग टिप्स और काले कीड़ों का रामबाण इलाज

लोग शिकायत करते हैं कि नर्सरी से लाने के बाद हरा-भरा तुलसी का पौधा सूखने लगता है या उसमें काले कीड़े लग जाते हैं। ऐसे में गार्डनिंग एक्सपर्ट ने तुलसी को सही तरीके से उगाने और उसे लंबे समय तक हरा-भरा रखने के कुछ खास सीक्रेट्स बताए हैं। जो आपके काम आएंगे। अक्सर लोगों का सवाल होता है कि नर्सरी से लाया हुआ हरा-भरा तुलसी का पौधा घर आते ही कुछ दिनों में सूख जाता है। अगर आप भी इस समस्या का सामना करते हैं तो यह जानकारी आपके काम आएगी। दरअसल, पौधे को लगाने के गलत तरीके और वातावरण में अचानक बदलाव के कारण वह शॉक में चला जाता है। एवर ग्रीन गार्डन की एक्सपर्ट ने तुलसी को हरा-भरा रखने और उसे काले कीड़ों से बचाने के कुछ खास सीक्रेट्स शेयर किए हैं। सभी जानते हैं कि तुलसी का पौधा हिंदू धर्म में न केवल पूजनीय है, बल्कि इसके औषधीय गुण भी बेमिसाल हैं। अब अगर आप पौधे की अच्छी ग्रोथ देखना चाहते हैं तो सबसे पहले उगाने का सही तरीका जानें। जब आप नर्सरी से पौधा लाते हैं, तो वह वहां के वातावरण का आदी होता है। अगर आप दोपहर की तेज धूप में पौधा लाए हैं, तो उसे तुरंत दूसरे गमले में न लगाएं। सबसे पहले उस पर थोड़ा सा पानी छिड़कें और उसे घर के वातावरण में सेट होने के लिए एक-दो दिन का समय दें। तुरंत मिट्टी बदलने से पौधे की जड़ें कमजोर हो सकती हैं। सही गमला और मिट्टी का चुनाव तुलसी के लिए 6 से 8 इंच का गमला सबसे अच्छा होता है। ध्यान रहे कि गमले के नीचे पानी निकलने के लिए छेद जरूर हो। मिट्टी तैयार करते समय 60% गार्डन सॉइल, 20% कोकोपीट और 20% वर्मीकंपोस्ट का मिश्रण बनाएं। कोकोपीट मिट्टी में नमी बनाए रखता है और वर्मीकंपोस्ट पौधे को जरूरी पोषण देता है। पौधा लगाने का सही तरीका गमले को पहले 3 से 4 इंच तैयार मिट्टी से भरें। अब तुलसी के पौधे को बीच में रखें और चारों तरफ से मिट्टी भरकर हल्के हाथों से दबाएं। गमले को ऊपर तक न भरें, बल्कि ऊपर से 2 इंच खाली रहने दें ताकि पानी और खाद देने की जगह बनी रहे। मिट्टी को दबाना इसलिए जरूरी है ताकि जड़ों के पास हवा के बुलबुले न रहें। एप्सम सॉल्ट और ह्मयूमिक एसिड पौधा लगाने के तुरंत बाद आधा चम्मच एप्सम सॉल्ट और आधा चम्मच ह्यूमिक एसिड डालें। एप्सम सॉल्ट पौधे को रिपोटिंग शॉक से बचाता है और पत्तियों को हरा रखता है, जबकि ह्यूमिक एसिड जड़ों के विकास में मदद करता है। ध्यान रहे कि इस प्रक्रिया को हर महीने केवल एक बार ही दोहराना है। पानी देने का नियम और सही जगह पौधा लगाने के बाद उसे भरपूर पानी दें। शुरुआत में इसे सेमी-शेड वाली जगह पर रखें, जहां सीधी तेज धूप न आती हो। दोबारा पानी तभी दें जब गमले की ऊपरी मिट्टी सूखी नजर आए। तुलसी की जड़ों में बहुत ज्यादा पानी जमा होने से वे सड़ने लगती हैं, जिसे 'रूट रॉट' कहते हैं। काले कीड़ों से छुटकारा पाने का उपाय अगर तुलसी पर काले कीड़े लग गए हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आधा चम्मच हल्दी और थोड़ा सा डिशवॉश लिक्विड पानी में मिलाकर स्प्रे बोतल में भर लें। इसका छिड़काव पौधे पर करें। हल्दी एंटी-बैक्टीरियल होती है और कीड़ों को जड़ से खत्म कर देती है। छिड़काव के बाद अगले 24 घंटों तक पौधे पर सादा पानी न डालें।

उज्जैन जिले में जल संरक्षण और जनजागरूकता पर आधारित प्रतियोगिताओं का आयोजन

जल गंगा संवर्धन अभियान उज्जैन जिले में जल संरक्षण एवं जनजागरूकता के लिए आयोजित हुई विभिन्न प्रतियोगिताएं उज्जैन उज्जैन जिले में जल संरक्षण एवं पर्यावरण संवर्धन के उद्देश्य से “जल गंगा संवर्धन अभियान 2026” का वृहद स्तर पर संचालन किया जा रहा है। शासकीय कालिदास कन्या महाविद्यालय के मार्गदर्शन में जिले के शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों द्वारा विभिन्न जनजागरूकता एवं सामाजिक गतिविधियों का आयोजन कर विद्यार्थियों एवं आमजन को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है। अभियान से जल स्रोतों के संरक्षण, वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण तथा भू-जल संवर्धन के प्रति सकारात्मक संदेश प्रसारित किया जा रहा है। शासकीय कालिदास कन्या महाविद्यालय के नेतृत्व में “जल गंगा संवर्धन अभियान-2026” के अंतर्गत उज्जैन जिले के 15 शासकीय एवं 07 अशासकीय महाविद्यालयों में विभिन्न जनजागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया। इन गतिविधियों में निबंध, पोस्टर, स्लोगन, वाद-विवाद, भाषण प्रतियोगिता, व्याख्यान तथा रैली शामिल थीं। इन कार्यक्रमों में 1866 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। अभियान अंतर्गत विद्यार्थियों एवं महाविद्यालयों द्वारा मानव श्रृंखला, रंगोली, वृक्षारोपण, तालाबों की सफाई, पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम तथा जल स्रोतों के संरक्षण जैसे रचनात्मक एवं सामाजिक कार्य भी किए गए। इसके माध्यम से जल संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया। उज्जैन जिले के 13 महाविद्यालयों में रैन वॉटर हार्वेस्टिंग की सुविधा उपलब्ध है। यह भू-जल स्तर बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसके अतिरिक्त जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जिले के 17 महाविद्यालयों द्वारा कार्य योजना तैयार की गई है, जिसके तहत 1086 वृक्षारोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। योजना से पर्यावरण संरक्षण एवं जल संवर्धन को बढ़ावा दिया जाएगा। जल गंगा संवर्धन योजना के अंतर्गत आयोजित रैलियों में विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया तथा जल संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुँचाने का पुरजोर प्रयास किया।  

डोरेमॉन के नोबिता का असली शहर जापान में मिला, फैंस ने की भावनाओं की झलक

टोक्यो   आप सभी अपने घर में कभी न कभी डोरेमॉन कार्टून तो देखा ही होगा। वही डोरेमॉन जो अपने गैजेट्स के लिए काफी फेमस है और उनसे अपने दोस्त नोबिता की मदद करता है। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसा वीडियो वायरल हुआ है जिसमें डोरेमॉन के असली शहर को जिसमें स्कूल और बिल्डिंगों को हूबहू वैसा ही दिखाया गया है जैसा वे कार्टून की काल्पनिक दुनिया में हैं। एक भारतीय कंटेंट क्रिएटर ने सार्थक सचदेवा ने जापान की लगभग 6,000 किलोमीटर की यात्रा करके ये जगह ढूंढ़ी है। वीडियो में जापान के एक शांत आवासीय इलाके की उनकी यात्रा को दिखाया गया है, जो लोकप्रिय कार्टून के नोबिता और डोरेमोन की दुनिया से काफी मिलता-जुलता है।   इंस्टाग्राम पर शेयर किया वीडियो  इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @sarthaksachdevva नामक हैंडल से शेयर किया गया है। इसमें सार्थक कैमरा अपनी ओर घुमाते हुए उत्साह से कहा कि वह इस घर को देखने के लिए भारत से जापान तक का लंबा सफर तय करके आए हैं। इसके बाद वीडियो में संकरी गलियों, छोटे घरों और शांत सड़कों के मनोरम दृश्य दिखाए गए, जिन्हें देखकर दर्शकों को तुरंत डोरेमॉन के जाने-पहचाने दृश्यों की याद आ गई।मोहल्ले से गुज़रते हुए, सार्थक ने उन बारीकियों की ओर इशारा किया जिन्हें पुराने प्रशंसक तुरंत पहचान गए। एक सड़क की ओर इशारा करते हुए उन्होंने समझाया कि दर्शकों ने नोबिता को श्रृंखला में अनगिनत बार "ठीक इसी सड़क" से स्कूल जाते, दोस्तों से मिलते या खेल के मैदान की ओर भागते हुए देखा है। हूबहू वैस ही दिखा नजारा  मोहल्ले का शांत वातावरण, साफ-सुथरी सड़कें और सादगीपूर्ण घर उस सौम्य, रोजमर्रा की सुंदरता को दर्शाते थे जिसने डोरेमॉन को पीढ़ियों से दर्शकों के लिए इतना सुकून भरा बना दिया था। वीडियो के कई दृश्य कार्टून के दृश्यों से हूबहू मिलते-जुलते थे, जिससे यह दौरा पर्यटन की बजाय बचपन की यादों में खो जाने जैसा महसूस हुआ। वीडियो के कैप्शन में लिखा था, "वास्तविक जीवन में डोरेमोन के ठिकाने।" हालांकि डोरेमॉन की कहानी टोक्यो में घटित होती है, लेकिन कई प्रशंसक इसकी दृश्य शैली को श्रृंखला की निर्माता फुजिको एफ. फुजियो से जुड़े वास्तविक जीवन के स्थानों से जोड़ते हैं, जिनका जन्म ताकाओका में हुआ था। यूजर्स को भी पसंद आया वीडियो  यह वीडियो स्कूल के बाद डोरेमॉन देखते हुए बड़े हुए लोगों के बीच तेज़ी से ऑनलाइन वायरल हो गया। कई दर्शकों ने माना कि मोहल्ले को असल ज़िंदगी में देखकर वे भावुक हो गए, और कई लोगों ने इसे बचपन का सपना सच होने जैसा बताया। कई लोगों ने कहा कि यह क्लिप उन्हें डोरेमोन के गैजेट्स, नोबिता के कारनामों और उस दुनिया की सादगी भरे एहसास की याद दिलाती है जो आज भी सालों बाद भी बेहद जानी-पहचानी लगती है। एक यूजर ने सिर्फ "रोंगटे खड़े हो गए" लिखा, जबकि दूसरे ने कहा, "सुनहरे दिन।" एक तीसरे व्यक्ति ने कहा, "डोरेमॉन से जुड़ी हमारी बचपन की भावनाएं," जबकि चौथे व्यक्ति ने कहा, "इस वीडियो ने मेरा दिन बना दिया।"

QR कोड अनिवार्य! Google ने वेबसाइट एक्सेस में किया नया नियम लागू

नई दिल्ली इंटरनेट इस्तेमाल करते समय आपने कई बार “I’m Not a Robot” वाला Captcha जरूर देखा होगा। यह सिस्टम वेबसाइट्स को बॉट्स और फर्जी ट्रैफिक से बचाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन अब Google इस पुराने सिस्टम को बदलने की तैयारी में है। गूगल एक नया QR Code बेस्ड ह्यूमन वेरिफिकेशन सिस्टम टेस्ट कर रही है, जिसमें यूजर्स को वेबसाइट इस्तेमाल करने से पहले अपने फोन को लिंक करना पड़ सकता है। इस नए सिस्टम में यूजर को वेबसाइट पर दिख रहे QR Code को अपने स्मार्टफोन से स्कैन करना होगा। इसके बाद फोन के जरिए यह पुष्टि की जाएगी कि वेबसाइट इस्तेमाल करने वाला इंसान है या कोई बॉट। आज के समय में AI और ऑटोमेटेड बॉट्स पहले से ज्यादा स्मार्ट हो चुके हैं। यही वजह है कि Google अब नया तरीका तलाश रहा है जिससे असली यूजर्स और बॉट्स के बीच फर्क करना आसान हो सके। फिलहाल यह फीचर शुरुआती चरण में बताया जा रहा है और Google ने आधिकारिक तौर पर इसकी पूरी जानकारी शेयर नहीं की है। आने वाले समय में कंपनी इसे कुछ वेबसाइट्स और सेवाओं पर टेस्ट कर सकती है। अगर यह फीचर सफल रहता है, तो इंटरनेट इस्तेमाल करने का तरीका आने वाले वर्षों में काफी बदल सकता है। Google का नया QR Code Verification सिस्टम गूगल ऐसा सिस्टम विकसित कर रहा है जिसमें वेबसाइट खोलने पर यूजर को QR Code दिखाई देगा। यूजर को यह QR Code अपने स्मार्टफोन से स्कैन करना होगा। इसके बाद फोन के जरिए वेबसाइट को यह सिग्नल मिलेगा कि सामने असली इंसान है, कोई ऑटोमेटेड बॉट नहीं। यह सिस्टम मौजूदा Captcha की जगह ले सकता है। अभी ज्यादातर वेबसाइट्स पर तस्वीर पहचानना, ट्रैफिक लाइट चुनना या टेक्स्ट टाइप करना पड़ता है। लेकिन नए सिस्टम में यह प्रक्रिया काफी अलग हो सकती है। Google क्यों बदलना चाहता है Google Captcha सिस्टम गूगल लंबे समय से reCAPTCHA सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा है। शुरुआत में यह काफी असरदार माना जाता था, लेकिन अब AI तकनीक इतनी आगे बढ़ चुकी है कि कई बॉट्स Captcha टेस्ट को आसानी से पास कर लेते हैं। गूगल का मानना है कि फोन लिंक्ड वेरिफिकेशन ज्यादा सुरक्षित हो सकता है क्योंकि इसमें असली डिवाइस और यूजर की पहचान को ट्रैक करना आसान होगा। इससे फर्जी अकाउंट, स्पैम और बॉट एक्टिविटी को कम करने में मदद मिल सकती है। ऐसे काम करेगा यह नया फीचर इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक यूजर जब किसी वेबसाइट पर जाएगा तो वहां QR Code दिखाई देगा। इसके बाद यूजर अपने फोन से QR Code स्कैन करेगा। स्कैन करने के बाद फोन एक तरह का डिजिटल सिग्नल वेबसाइट को भेजेगा, जिससे यह पुष्टि होगी कि सामने असली यूजर मौजूद है। प्राइवेसी को लेकर उठ रहे सवाल Google के इस नए सिस्टम को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा प्राइवेसी पर हो रही है। कई लोगों का कहना है कि अगर हर वेबसाइट के साथ फोन लिंक किया जाएगा, तो यूजर की ऑनलाइन एक्टिविटी को ज्यादा आसानी से ट्रैक किया जा सकेगा।

दुनिया की लग्जरी का जलवा: लेंबॉर्गिनी फेनोमेनो रोडस्टर, 7 सेकेंड में 200 किमी/घंटा, लिमिटेड 15 यूनिट

मुंबई  इटली की दिग्गज सुपरकार निर्माता कंपनी लेंबॉर्गिनी ने अपनी नई और बेहद खास सुपरकार फेनोमेनो रोडस्टर से पर्दा उठा दिया है। यह कार केवल तेज रफ्तार का ही प्रतीक नहीं है, बल्कि इसे आधुनिक तकनीक, आक्रामक डिजाइन और सीमित उत्पादन के कारण ऑटोमोबाइल दुनिया की सबसे खास कारों में गिना जा रहा है। कंपनी इस सुपरकार की दुनिया भर में केवल 15 इकाइयां ही तैयार करेगी, जिससे इसकी विशिष्टता और भी बढ़ गई है। लेंबॉर्गिनी लंबे समय से ऐसी कारें बनाने के लिए जानी जाती है जो केवल वाहन नहीं बल्कि प्रदर्शन, तकनीक और विलासिता का प्रतीक होती हैं। फेनोमेनो रोडस्टर भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाती दिखाई देती है। यह कार महज 6.8 सेकेंड में 0 से 200 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पकड़ सकती है, जबकि इसकी अधिकतम गति 340 किलोमीटर प्रति घंटा से भी ज्यादा बताई जा रही है। बेहद आक्रामक और आकर्षक डिजाइन नई फेनोमेनो रोडस्टर का डिजाइन पहली नजर में ही लोगों को आकर्षित कर देता है। कंपनी ने इसे ‘ब्लू सेफियस’ रंग में पेश किया है, जिसमें लाल रंग के विशेष एक्सेंट दिए गए हैं। यह रंग संयोजन लेंबॉर्गिनी की ऐतिहासिक कारों और इटली के बोलोग्ना शहर को सम्मान देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। कार का अगला हिस्सा बेहद आक्रामक दिखाई देता है। इसमें तीखे कट्स और धारदार रेखाओं का उपयोग किया गया है, जो इसे भविष्य की सुपरकार जैसा रूप देते हैं। आकर्षक एलईडी हेडलाइट्स, चौड़े एयर इनटेक और षट्कोणीय डिजाइन एलिमेंट इसकी स्पोर्टी पहचान को और मजबूत बनाते हैं। कंपनी का दावा है कि इस कार को केवल खूबसूरत बनाने पर ही ध्यान नहीं दिया गया, बल्कि उच्च गति पर बेहतर संतुलन और दबाव नियंत्रण के लिए एयरोडायनामिक तकनीक का भी विशेष इस्तेमाल किया गया है। इसमें नया फ्लैट विंडशील्ड दिया गया है, जिसके ऊपर लगा स्पॉइलर हवा को केबिन से हटाकर इंजन की ओर मोड़ देता है। इससे इंजन को ठंडा रखने में मदद मिलती है। उच्च गति पर भी शानदार संतुलन फेनोमेनो रोडस्टर के साइड प्रोफाइल में आकर्षक रेखाएं और बड़े एयर इनटेक दिए गए हैं। पीछे की ओर इसका लंबा डिजाइन प्रसिद्ध एसेंजा एससीवी12 की याद दिलाता है। इस सुपरकार में खास तौर पर विकसित किए गए ब्रिजस्टोन पोटेंजा स्पोर्ट सेमी-स्लिक टायर लगाए गए हैं। आगे की तरफ 21 इंच और पीछे 22 इंच के बड़े पहिए दिए गए हैं, जो सड़क पर बेहतर पकड़ सुनिश्चित करते हैं। कार के पिछले हिस्से में वर्टिकल लाल पट्टी, षट्कोणीय एग्जॉस्ट और विशेष एयरो डिफ्यूजर दिया गया है। इसके अलावा इसमें एक्टिव विंग भी लगाया गया है, जो तेज रफ्तार के दौरान अतिरिक्त डाउनफोर्स और स्थिरता प्रदान करता है। यही वजह है कि इतनी तेज गति पर भी यह सुपरकार संतुलन बनाए रखने में सक्षम है। विमान जैसे केबिन का अनुभव फेनोमेनो रोडस्टर का इंटीरियर भी उतना ही शानदार है जितना इसका बाहरी डिजाइन। कंपनी ने इसमें “पायलट जैसा अनुभव” डिजाइन थीम का इस्तेमाल किया है। इसका केबिन लड़ाकू विमान से प्रेरित दिखाई देता है। इसमें विशेष स्विचगियर, कार्बन फाइबर ट्रिम और स्पोर्टी बकेट सीटें दी गई हैं। डैशबोर्ड में त्रिआयामी प्रिंट तकनीक से तैयार एयर वेंट लगाए गए हैं। सीटों पर लाल रंग की कॉन्ट्रास्ट सिलाई की गई है, जो केबिन को और प्रीमियम बनाती है। तकनीक के मामले में भी यह सुपरकार बेहद आधुनिक है। इसमें तीन डिजिटल डिस्प्ले दिए गए हैं, जिनमें चालक के लिए 12.3 इंच का डिजिटल डिस्प्ले, 8.4 इंच का टचस्क्रीन और सहयात्री के लिए अलग स्क्रीन शामिल है। 1080 हॉर्सपावर की जबरदस्त ताकत लेंबॉर्गिनी ने इस सुपरकार में 6.5 लीटर का नैचुरली एस्पिरेटेड वी12 इंजन दिया है। इसके साथ तीन इलेक्ट्रिक मोटर भी जोड़ी गई हैं। यह पूरा सिस्टम मिलकर 1080 हॉर्सपावर की जबरदस्त ताकत उत्पन्न करता है। सुपरकार में 8-स्पीड ड्यूल क्लच गियरबॉक्स दिया गया है, जो बेहद तेज और स्मूद गियर बदलाव सुनिश्चित करता है। इसमें 7 किलोवाट घंटे की बैटरी भी दी गई है, जो इलेक्ट्रिक मोटरों को ऊर्जा प्रदान करती है। इतनी ताकतवर प्रणाली के बावजूद कार का प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली है। यह सुपरकार केवल 2.4 सेकेंड में 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पकड़ सकती है, जबकि 200 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने में इसे सिर्फ 6.8 सेकेंड का समय लगता है। दुनिया के चुनिंदा लोगों के लिए बनेगी यह सुपरकार फेनोमेनो रोडस्टर का सबसे खास पहलू इसकी सीमित उपलब्धता है। कंपनी केवल 15 इकाइयों का ही निर्माण करेगी। इसका मतलब यह है कि दुनिया भर में केवल चुनिंदा ग्राहकों के पास ही यह सुपरकार देखने को मिलेगी। ऑटोमोबाइल जगत में सीमित संख्या में बनने वाली कारों की मांग हमेशा बेहद अधिक रहती है और समय के साथ उनकी कीमत भी कई गुना बढ़ जाती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि फेनोमेनो रोडस्टर केवल एक सुपरकार नहीं बल्कि संग्रहणीय विरासत बनने जा रही है। इसकी तकनीक, प्रदर्शन और दुर्लभता इसे आने वाले वर्षों में बेहद खास बना सकती है।

योगी कैबिनेट फुल होने के बाद, BJP की 2024 की तैयारी और चुनावी स्थिति पर सवाल

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल में दूसरा कैबिनेट विस्तार रविवार किया गया है. 6 नए मंत्रियों को शपथ दिलाई गई तो दो राज्य मंत्रियों को प्रमोशन दिया गया. मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक संदेश देने कवायद की गई है, क्योंकि 2024 में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 'पीडीए' फॉर्मूले से बीजेपी को पीछे धकेल दिया था।  राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कुल आठ नेताओं को मंत्री पद की शपथ दिलाई, जिनमें छह नए चेहरे शामिल हैं. बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी और सपा के बागी विधायक मनोज कुमार पांडे को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है तो कृष्णा पासवान, कैलाश सिंह राजपूत, सुरेंद्र दिलेर और हंसराज विश्वकर्मा ने राज्यमंत्री के तौर पर शपथ ली।  योगी मंत्रिमंडल विस्तार में अजीत सिंह पाल और सोमेंद्र तोमर ने राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में शपथ ली. ये दोनों ही नेता पहले से योगी सरकार में राज्यमंत्री थे, जिन्हें अब प्रमोशन देकर अब स्वतंत्र प्रभार मंत्री बनाया गया है. इस तरह से योगी मंत्रिमंडल अब पूरी तरह फुल हो चुका है, लेकिन सवाल यह है कि कैबिनेट विस्तार से बीजेपी के बिगड़े सियासी समीकरण को कितनी मजबूती मिल पाएगी?  कैबिनेट के जरिए बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग योगी मंत्रिमंडल का विस्तार कर बीजेपी ने दलित, पिछड़े और ब्राह्मण समाज केतबकों को बड़ा संदेश दे दिया है. योगी सरकार से नाराज माने जा रहे ब्राह्मण समाज से मनोज पांडेय को मंत्री बना कर बीजेपी ने उन्हें लुभाने का प्रयास किया है. इसी तरह भूपेंद्र चौधरी को पश्चिमी यूपी के जाट समाज को जोड़े रखने का दांव है तो सोमेंद्र तोमर को राज्यमंत्री पद से प्रमोशन स्वतंत्र प्रभार देकर गुर्जर समाज को सियासी संदेश दिया है।  कैबिनेट विस्तार में दलित चेहरे को तौर पर कृष्णा पासवान और सुरेंद्र दिलेर को राज्यमंत्री बनाया गया, जिनके जरिए गैर जाटव दलित वोटों को साधने की कवायद की है. कृष्णा पासवान पासी समुदाय से हैं तो सुरेंद्र दिलेर वाल्मीकि समुदाय से आते हैं. इन दोनों ही नेताओं दलित प्रतिनिधित्व के रूप में कैबिनेट में जगह दी है ताकि दलित समाज के विश्वास को बनाए रखा जा सके।  वहीं, लोधी, पाल और विश्वकर्मा जैसी पिछड़ी जातियों पर भी फोकस किया गया. पाल समुदाय से आने वाले अजीत सिंह पाल को राज्यमंत्री से प्रमोशन कर स्वतंत्र प्रभार मंत्री बना दिया गया है. इसी तरह लोधी जाति से आने वाले कैलाश सिंह राजपूत बनाए गए हैं. हंसराज विश्वकर्मा को राज्यमंत्री के तौर पर शामिल कर ओबीसी की लोहार जाति को सियासी संदेश दिया है।  बीजेपी ने दिया सियासी संदेश,  राह में कांटे ही कांटे?  योगी कैबिनेट विस्तार के जरिए बीजेपी ने राजनीतिक रूप से इसका सबसे बड़ा संदेश दिया है. बीजेपी ने जिस तरह से मंत्रिमंडल में ब्राह्मण, जाट, गुर्जर, लोध, पासवान और पाल समाज की नुमाइंदगी दी है, उसके जरिए ओबीसी की उन्हीं जातियों पर फोकस किया है, जो पहले से ही बीजेपी के साथ जुड़ी हुई हैं. सपा के पीडीए फॉर्मूले के साथ 2024 में नहीं गई थी।  बीजेपी गैर-यादव OBC की राजनीति से आगे बढ़कर अन्य पिछड़ी जाति पर काम कर रही है. 2024 लोकसभा चुनाव में यूपी में बीजेपी को जिन इलाकों और जातियों में नुकसान हुआ था, पार्टी अब उसी गैप को भरने की कोशिश कर रही है. पश्चिम यूपी में जाट समीकरण लोकसभा में पूरी तरह स्थिर नहीं दिखे थे. इसी तरह मायावती के कमजोर से होने से दलित वोट का एक हिस्सा समाजवादी पार्टी की ओर गया था।  अखिलेश यादव ने पीडीए के जरिए पिछड़ी जातियों को भी साथ जोड़ने में कामयाब रहे. इसलिए इस विस्तार के जरिए इन सभी तबकों को संदेश दिया जा रहा है कि सत्ता में उनकी हिस्सेदारी है, लेकिन सवाल यही है कि अखिलेश यादव के 'पीडीए फॉर्मूले' को बीजेपी क्या काउंटर कर पाएगी।  2024 के बिगड़े समीकरण कितना दुरुस्त होगा?  बीजेपी ने योगी मंत्रिमंडल विस्तार में जिस तरह ब्राह्मण, जाट, गुर्जर, लोध, पासवान और पाल समाज की नुमाइंदगी दी है, उससे 2024 में बीजेपी के अलग होने वाली जातियों को क्या फिर से बीजेपी जोड़ पाएगी? ये इसीलिए भी कहा जा रहा है कि 2019 की तुलना में बीजेपी 2024 में 62 सीटों से घटकर 33 सीट पर सिमट गई थी।  सपा 37 लोकसभा सीटें जीतने में कामयाब रही तो उसकी सहयोगी कांग्रेस को 6 सीटें मिली थी. 2024 के चुनाव नतीजे को विधानसभा क्षेत्र के लिहाज से देखें तो सपा और कांग्रेस को करीब 128  विधानसभा सीटों पर बढ़त मिली थी. बीजेपी के साथ जुड़ा रहा कुर्मी, मौर्य जैसे ओबीसी वोटर के साथ-साथ राजपूत और दलित वोटर भी छिटक गए थे. इसके चलते ही बीजेपी लोकसभा चुनाव में सपा से पीछे रह गई थी।  बीजेपी ने कुर्मी समाज के विश्वास को जीतने के लिए पकंज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है, लेकिन मौर्य और राजपूत समाज को साधने की कवायद कैबिनेट के जरिए नहीं हो सकी. इसीलिए बृजभूषण शरण सिंह और विधायक आशा मौर्य का दर्द छलक उठा. आशा मौर्य ने कहा कि लगता है पार्टी को अब मौर्य समाज की आवश्यकता नहीं रह गई और बाहर से आए दलबदलुओं को प्राथमिकता दी गई है।  वहीं, बृजभूषण सिंह कैबिनेट विस्तार से नाखुश दिखे. माना जा रहा था कि वे अपने बेटे प्रतीक भूषण के लिए मंत्री पद चाहते थे. किसी ठाकुर चेहरे को जगह न मिलने पर उन्होंने 'X' पर शायराना अंदाज में निशाना साधा कि शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है, जिस शाख पर बैठे हो वह टूट भी सकती है. उनके इस पोस्ट को लेकर साफ समझा जा सकता है कि किस तरह से नाराज हैं. मौर्य और ठाकुर वोटों को साधे रखने के लिए बीजेपी ने कोई सियासी दांव नहीं चल रही है।  पांडेय और चौधरी बीजेपी के कितन काम आएंगे?  ब्राह्मण बीजेपी के साथ पहले ही मजबूती से खड़ा है और मनोज पांडेय मंत्री बनकर क्या खिसकते हुए ब्राह्मण समाज को जोड़े रख पाएंगे, ये सवाल इसीलिए है कि सपा में रहते हुए ब्राह्मणों को अखिलेश के करीब नहीं ला सके थे. अखिलेश से बगावत करने का भले ही उन्हें इनाम मिल गया है, लेकिन ब्राह्मण चेहरे के तौर पर उनकी स्वीकार्यता अपने क्षेत्र से बाहर नहीं है।  पश्चिम … Read more

बाहर ATM, अंदर नाई की दुकान! कैश लेने गए लोग वीडियो देखकर चौंके

 पटना  पटना के दानापुर में एक ऐसा नजारा देखने को मिल रहा है, जिसे देखकर लोग चौंक जा रहे हैं. यहां एक पुराने SBI ATM के अंदर अब कैश नहीं, बल्कि हेयर कटिंग और शेविंग का काम हो रहा है. बाहर से पूरा सेटअप अब भी बैंक ATM जैसा ही दिखाई देता है, लेकिन अंदर घुसते ही लोगों को कुर्सी, शीशा और हेयर ड्रायर नजर आते हैं।  मामला दानापुर के रूपसपुर इलाके स्थित उषा विला का है. स्थानीय लोगों के मुताबिक यहां कई सालों तक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का ATM संचालित होता था. आसपास रहने वाले लोग यहीं से से कैश निकालते थे. लेकिन कुछ महीने पहले ATM को वहां से हटा दिया गया. हैरानी की बात यह है कि ATM हटने के बाद भी उसका बोर्ड, बाहरी डिजाइन और पूरा ढांचा वैसे का वैसा ही छोड़ दिया गया. इसी खाली जगह को बाद में किराये पर दे दिया गया और अब वहां एक सैलून चल रहा है. बाहर से गुजरने वाले लोग आज भी इसे ATM समझ लेते हैं. कई बार तो लोग सीधे कैश निकालने के लिए अंदर पहुंच जाते हैं।  स्थानीय लोगों का कहना है कि शुरुआत में उन्हें भी समझ नहीं आया कि आखिर ATM के अंदर सैलून कैसे खुल गया. अब यह जगह इलाके में चर्चा का विषय बन चुकी है. आसपास के लोग अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को भी यह 'अनोखा ATM' दिखाने ले जाते हैं. कुछ लोग मजाक में कहते हैं कि यहां कैश नहीं, हेयरकट मिलता है. वहीं सोशल मीडिया पर भी इस जगह की तस्वीरें और वीडियो तेजी से शेयर किए जा रहे हैं. लोग इस पर तरह-तरह के मजेदार कमेंट कर रहे हैं।  इलाके के एक युवक ने बताया कि कई बार रात को बाहर से आने वाले लोग जल्दी में ATM समझकर अंदर चले जाते हैं. उन्हें लगता है कि मशीन अंदर होगी, लेकिन सामने सैलून देखकर पहले हैरान होते हैं और फिर हंसने लगते हैं. दरअसल, ATM हटने के बाद बैंक की तरफ से बोर्ड या बाहरी पहचान नहीं हटाई गई. यही वजह है कि लोगों का भ्रम अब भी बना हुआ है. हालांकि स्थानीय लोग अब इस जगह को 'ATM वाला सैलून' कहकर बुलाने लगे हैं। 

ईमेल और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से NRI समस्याओं का समाधान, 13 मई को पंजाब सरकार का ऑनलाइन मिलनी

चंडीगढ़  विदेशों में बसे पंजाबियों की समस्याओं और शिकायतों को सुनने तथा उनके समयबद्ध निपटारे को सुनिश्चित करने के लिए पंजाब सरकार द्वारा 13 मई 2026, बुधवार को सुबह 11:00 बजे (भारतीय समयानुसार) “ऑनलाइन मिलनी” का आयोजन किया जा रहा है। इस संबंध में जानकारी देते हुए पंजाब के एन.आर.आई. मामलों के मंत्री डॉ. रवजोत सिंह ने बताया कि इस ऑनलाइन मिलनी के दौरान वे विदेशों में रह रहे पंजाबियों के साथ सीधा संवाद कर उनकी समस्याओं, शिकायतों और सुझावों को सुनेंगे। उन्होंने कहा कि इस दौरान प्राप्त होने वाली शिकायतों के त्वरित और प्रभावी समाधान के लिए संबंधित विभागों और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। डॉ. रवजोत सिंह ने बताया कि संबंधित व्यक्ति अपनी शिकायतें minister.pa@punjab.gov.in ईमेल पर भेज सकते हैं। इसके अलावा, ऑनलाइन मिलनी में भाग लेने के लिए रजिस्ट्रेशन https://forms.gle/KKUutEpVTeccLSta6⁠लिंक के माध्यम से करवाया जा सकता है। उन्होंने आगे बताया कि निर्धारित दिन और समय के अनुसार “ऑनलाइन मिलनी” में शामिल होने के लिए https://new.bharatvc.nic.in/join/8833894922⁠ लिंक का उपयोग किया जा सकता है। जॉइन करने के लिए आई.डी. 8833894922 तथा पासवर्ड 742627 होगा। एन.आर.आई. मंत्री ने विदेशों में बसे समस्त पंजाबियों से इस “ऑनलाइन मिलनी” में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की है ताकि उनकी समस्याओं का प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जा सके। संगरूर सहित कई जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए इसके बाद वर्ष 2024 में फरवरी महीने के दौरान पठानकोट, शहीद भगत सिंह नगर, फिरोजपुर और संगरूर सहित कई जिलों में भी कार्यक्रम आयोजित किए गए। अब पंजाब सरकार ने इस व्यवस्था को और व्यवस्थित करते हुए मई 2026 से महीने में दो बार एनआरआई मिलनी आयोजित करने का फैसला लिया है। इनमें एक मिलनी ऑनलाइन और दूसरी व्यक्तिगत अथवा डिवीजन स्तर पर आयोजित की जाएगी। पहली बार 609 शिकायतें आई थी सरकार की तरफ से दिसंबर 2022 में हुई पहली एनआरआई मिलनी के दौरान करीब 609 शिकायतें आई थीं। फरवरी 2024 में हुई मिलनियों में 309 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से 256 का समाधान कर दिया गया। वहीं, जनवरी 2025 तक ऑनलाइन सत्रों के जरिए 542 से ज्यादा शिकायतें मिलीं, जिनमें से 488 मामलों का निपटारा हो चुका है।  

UCC को लेकर MP में सक्रियता: जनसुनवाई जिलों में, दिल्ली में समिति की बैठक और आदिवासी प्रावधानों का मंथन

भोपाल  मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। राज्य सरकार द्वारा गठित समिति के गठन के बाद अब उसके कामकाज की रूपरेखा तैयार की जा रही है। समिति की अध्यक्ष पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई और अन्य सदस्यों की सेवा शर्तों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसके साथ ही मंगलवार को दिल्ली में समिति की पहली बैठक आयोजित होने की संभावना है। सरकार प्रदेशभर में लोगों की राय जानने के लिए जिला स्तर और भोपाल में जनसुनवाई आयोजित करने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही एक विशेष वेबसाइट भी बनाई जा रही है, जहां नागरिक अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। समिति का कार्यालय दिल्ली में स्थापित किए जाने की तैयारी है।   आदिवासी समुदाय को दायरे से बाहर रखने पर मंथन जानकारी के अनुसार, प्रदेश के आदिवासी समुदायों को यूसीसी के कुछ प्रावधानों से अलग रखने पर भी विचार किया जा रहा है। मध्य प्रदेश में बड़ी आदिवासी आबादी निवास करती है और उनके पारंपरिक रीति-रिवाज व सामाजिक कानून लंबे समय से प्रचलित हैं। ऐसे में सरकार उत्तराखंड और गुजरात की तर्ज पर आदिवासी परंपराओं को संरक्षित रखने के विकल्प पर मंथन कर रही है, ताकि किसी प्रकार का सामाजिक विवाद न उत्पन्न हो। यूसीसी के मसौदे में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी विशेष प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं। समिति को ऐसे संबंधों के पंजीयन, अधिकारों और जिम्मेदारियों पर सुझाव देने को कहा गया है। माना जा रहा है कि मध्य प्रदेश सरकार इस मुद्दे पर उत्तराखंड और गुजरात की तुलना में अधिक सख्त रुख अपना सकती है।  

छत्तीसगढ़ के लाल अजय गुप्ता: तेंदूपत्ता से लेकर IFS तक का सफर

रायपुर छत्तीसगढ़ के वनांचलों से अक्सर संघर्ष की खबरें आती हैं, लेकिन इस बार रायगढ़ से एक ऐसी कहानी निकली है जो उम्मीदों को नई उड़ान दे रही है। संबलपुरी गांव के अजय गुप्ता, जिनका बचपन जंगलों में तेंदूपत्ता और महुआ बीनते हुए बीता, अब देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवाओं में से एक भारतीय वन सेवा के अधिकारी बनने जा रहे हैं। अजय ने IFS परीक्षा में ऑल इंडिया 91वीं रैंक हासिल की है। UPSC में भी गाड़े झंडे अजय की कामयाबी केवल IFS तक सीमित नहीं है। उन्होंने इस साल सिविल सेवा परीक्षा यानी UPSC में भी 452वीं रैंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले अजय ने अपनी स्कूली शिक्षा में भी मेधावी होने का प्रमाण दिया था; उन्होंने 10वीं में 92.66% और 12वीं में 91.40% अंक प्राप्त किए थे। NIT रायपुर ने दिया बड़ा विजन अपनी सफलता का श्रेय अजय एनआईटी रायपुर को देते हैं। अजय का कहना है कि कॉलेज जाने से पहले उनके सपने सिर्फ गांव तक सीमित थे, लेकिन एनआईटी के माहौल ने उन्हें बड़े लक्ष्य तय करने की प्रेरणा दी। आर्थिक तंगी के बावजूद स्कॉलरशिप और सरकारी योजनाओं के सहारे उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। छुट्टियों के दौरान वे घर लौटकर परिवार के साथ आज भी आजीविका के कामों में हाथ बंटाते थे। बस्तर के अनुभव ने दिखाया रास्ता अजय ने बताया कि बस्तर में ग्रामीण विकास के कार्यों से जुड़ने और वनों के साथ उनके पुराने जुड़ाव ने ही उन्हें वन सेवा चुनने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अजय की सफलता को वनवासी परिवारों के संघर्ष की जीत बताया है, वहीं वन मंत्री केदार कश्यप ने इसे दूरस्थ क्षेत्रों की आकांक्षाओं का प्रतीक कहा है। आर्थिक संघर्ष के बीच शिक्षा को बनाया हथियार अजय ने इस साल सिविल सेवा परीक्षा भी 452वीं रैंक के साथ पास की है। NIT ने अजय को बड़े लक्ष्य रखने की नई सोच दी। आर्थिक तंगी के बावजूद, उन्होंने अपनी पढ़ाई में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया, 10वीं कक्षा में 92.66% और 12वीं कक्षा में 91.40% अंक हासिल किए। अजय के इस बेहतरीन प्रदर्शन की बदौलत उन्हें नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, रायपुर में दाखिला मिला, जहां स्कॉलरशिप ने तीन साल तक उनकी पढ़ाई में आर्थिक मदद की। अजय ने पहले उनके सपने सिर्फ उनके गांव तक ही सीमित थे, लेकिन NIT ने उनकी सोच का दायरा बढ़ा दिया। NIT ने बदली सोच उन्होंने कहा कि NIT में दाखिला लेने के बाद ही मुझे यह एहसास हुआ कि मैं और भी बड़े लक्ष्य हासिल कर सकता हूं। उन्होंने आगे बताया कि जंगल से उनका जुड़ाव और बस्तर में ग्रामीण विकास के लिए किए गए कामों ने ही उन्हें सिविल सेवाओं में जाने का लक्ष्य तय करने में मदद की। पढ़ाई के साथ-साथ अपने परिवार की मदद करने के बीच तालमेल बिठाते हुए, वह छुट्टियों के दौरान घर लौटकर रोज़ी-रोटी से जुड़े कामों में हाथ बंटाते थे। राज्य सरकार की छात्रवृत्तियों और वनोपज से जुड़ी सहायता योजनाओं ने उन्हें अपनी परीक्षाओं पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करने में मदद की। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि अजय की यह सफलता जंगल में रहने वाले परिवारों के मजबूत हौसले को दर्शाती है, जबकि वन मंत्री केदार कश्यप ने इसे दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों की ऊंची आकांक्षाओं का प्रतीक बताया। सरकारी योजनाओं ने पंखों को दी मजबूती अजय की इस लंबी उड़ान में छत्तीसगढ़ सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं ने कैशलेस सपोर्ट और आर्थिक संबल प्रदान किया। लघु वनोपज संघ की छात्रवृत्ति ने स्कूल से कॉलेज तक की पढ़ाई के दौरान इस छात्रवृत्ति ने आर्थिक बोझ को कम किया। राज्य शासन की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना से उन्हें निरंतर वित्तीय सहायता मिली, जिससे वे अपनी तैयारी पर ध्यान केंद्रित कर सके। अजय की सफलता छत्तीसगढ़ के वनाश्रित परिवारों के अटूट विश्वास की जीत: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने रायगढ़ जिले के अजय गुप्ता को भारतीय वन सेवा में चयनित होने पर बधाई देते हुए कहा कि अजय ने न केवल अपने माता-पिता का मान बढ़ाया है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि एक ऐसा युवा जिसने स्वयं जंगलों में तेंदूपत्ता और महुआ संग्रहित किया, आज उन्हीं वनों के संरक्षण की जिम्मेदारी संभालने जा रहा है। हमारी सरकार की लघु वनोपज संघ छात्रवृत्ति और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं ने अजय जैसे प्रतिभाशाली युवाओं की राह आसान की है। अजय की उपलब्धि यह दर्शाती है कि सही अवसर मिलने पर हमारे ग्रामीण अंचल के युवा भी देश की सर्वोच्च सेवाओं में अपना स्थान सुनिश्चित कर सकते हैं। वन मंत्री ने जताया गौरव, हजारों परिवारों के सपनों का प्रतीक वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने अजय गुप्ता को फोन कर बधाई दी और उनकी उपलब्धि को ऐतिहासिक बताया। मंत्री जी ने कहा कि अजय की सफलता छत्तीसगढ़ के उन हजारों वनाश्रित परिवारों की जीत है जो जंगलों के बीच रहकर बड़े सपने देखते हैं। यह साबित करता है कि हमारी योजनाओं का उद्देश्य केवल आर्थिक मदद देना नहीं, बल्कि ऐसे ही सशक्त भविष्य का निर्माण करना है। युवाओं के लिए नया आदर्श अजय गुप्ता आज उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनकर उभरे हैं जो सीमित संसाधनों में IFS जैसी कठिन परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि यदि मेहनत सच्ची हो और शासन का साथ मिले, तो वनांचल का कोई भी युवा देश के शीर्ष पद तक पहुँच सकता है।