samacharsecretary.com

‘हर दावे के पीछे तथ्य, साक्ष्य और तर्क जरूरी’, लॉ स्टूडेंट्स से बोले CM योगी

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (RMLNLU) के पांचवें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने विकसित भारत की परिकल्पना को एक मुकदमे के उदाहरण से समझाया. इस दौरान उन्होंने कहा कि अगर केस नंबर 2047 हो और उसका विषय विकसित भारत हो, तो इस मामले में 140 करोड़ भारतीय याचिकाकर्ता होंगे. उनकी ओर से दलील रखने वाले अधिवक्ता को हर दावे के समर्थन में तथ्य, साक्ष्य और तर्क पेश करने होंगे।  मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत की बात करते समय यह बात ध्यान में जरूर रखना होगा कि देश के भविष्य से जुड़े हर दावे को तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर साबित किया जाना भी जरूरी है. इसके लिए ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी निभाना भी जरूरी है।  सच बोलना और लगातार अध्ययन करना जरूरी इस दौरान योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में प्राचीन भारतीय शिक्षा परंपरा के बारे में बोलते हुए कहा कि सत्यं वद: धर्मं चर: स्वाध्यायान्मा प्रमदः. इसका अर्थ है सत्य बोलना, धर्म का आचरण करना और अध्ययन में कभी आलस्य नहीं करना. उन्होंने कहा कि किसी अधिवक्ता के लिए इससे बेहतर कार्य-निर्देश नहीं हो सकता. मुख्यमंत्री ने दीक्षांत समारोह की परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि उपाधि प्राप्त करने वाले छात्र भले ही नए गाउन पहनते हों, लेकिन भारत का दीक्षांत उपदेश हजारों वर्ष पुराना है. उन्होंने कहा कि गुरुकुलों और विश्वविद्यालयों में इस शिक्षा को लंबे समय से जीवन का हिस्सा बनाया जाता रहा है।  आपातकाल और न्यायपालिका की भूमिका का किया जिक्र मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में देश के लोकतांत्रिक इतिहास और न्यायपालिका की भूमिका का भी उल्लेख किया. उन्होंने 12 जून 1975 को इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले का जिक्र किया, जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के चुनाव को रद्द कर दिया गया था. इसके 13 दिन बाद, 25 जून 1975 को देश में आपातकाल लागू किया गया था. उन्होंने न्यायमूर्ति एचआर खन्ना की असहमति का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ी, लेकिन इतिहास में उनकी असहमति का महत्व बना रहा. योगी आदित्यनाथ ने साल 2017 में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का भी जिक्र किया, जिसमें न्यायमूर्ति खन्ना की असहमति को सही माना गया था।  मुख्यमंत्री ने कहा कि 1975 के दौर ने देश को यह समझाया कि ‘रूल ऑफ लॉ’ यानी कानून का शासन और ‘रूलर ऑफ लॉ’ यानी शासक का कानून अलग-अलग अवधारणाएं हैं. उनके मुताबिक, लोकतंत्र में कानून का शासन सर्वोपरि होना चाहिए।  उत्तर प्रदेश की छवि और निवेश पर भी बोले योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की पहले की छवि का जिक्र करते हुए कहा कि करीब 10 साल पहले राज्य में निवेश की बात करने पर लोग सवाल उठाते थे. उस समय कानून-व्यवस्था, कनेक्टिविटी, निर्यात और स्पष्ट नीतियों को लेकर चिंताएं जताई जाती थीं. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को कभी बीमारू राज्यों की श्रेणी में रखा जाता था और लोगों के मन में यह धारणा बन गई थी कि राज्य में सुधार नहीं हो सकता. मुख्यमंत्री ने कहा कि संसद में भी उन्होंने ऐसी सोच देखी थी, जहां उत्तर प्रदेश की स्थिति को लेकर निराशा जताई जाती थी। 

UP Election 2027: BJP की वापसी या सत्ता परिवर्तन? चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की सियासत में साल 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर अभी से जोड़-तोड़ और सियासी बयानबाजी का दौर तेज हो गया है. चुनाव से ठीक पहले सूबे की हवा किस तरफ बह रही है और जनता के मन में क्या चल रहा है, इसे जानने के लिए न्यूज18 ने मेगा सर्वे किया है. इस मेगा सर्वे के आंकड़े राजनीतिक दलों की धड़कनें बढ़ाने वाले हैं. सर्वे में जनता से सीधा सवाल किया गया कि उत्तर प्रदेश में अगली सरकार किसकी बनेगी, जिसके नतीजों ने तस्वीर काफी हद तक साफ कर दी है।  जनता के बीच जाकर किए गए इस सबसे बड़े ओपिनियन पोल में जब यह पूछा गया कि आगामी चुनाव में किसकी सरकार बनेगी, तो मतदाताओं ने खुलकर अपनी राय रखी. सर्वे के आंकड़े इस प्रकार हैं:     बीजेपी गठबंधन: राज्य के 67 प्रतिशत लोगों ने भरोसा जताया है कि उत्तर प्रदेश में एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) गठबंधन की सरकार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करेगी।      सपा-कांग्रेस गठबंधन: मुख्य विपक्षी दल के रूप में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन को 26 प्रतिशत लोगों का समर्थन मिलता नजर आ रहा है.     बहुजन समाज पार्टी (BSP): मायावती के नेतृत्व वाली बसपा को इस सर्वे में 5 प्रतिशत लोगों का साथ मिला है।      अन्य और कह नहीं सकते: अन्य दलों के खाते में 1 प्रतिशत और कोई भी स्पष्ट राय न रखने वाले ‘कह नहीं सकते’ वर्ग में भी 1 प्रतिशत लोग शामिल रहे।  युवाओं की भागीदारी सबसे ज्यादा सर्वे में उम्र के हिसाब से 26 से 35 साल के लोगों की हिस्सेदारी सबसे अधिक 36% रही. 36 से 45 वर्ष के आयु वर्ग के 29% और 18 से 25 साल के 17% लोगों से बातचीत की गई. 46 से 55 वर्ष के लोगों की हिस्सेदारी 11%, 56 से 65 वर्ष की 5% और 66 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों की हिस्सेदारी 1% बताई गई. लिंग के आधार पर सर्वे में 76% पुरुष और 24% महिलाएं शामिल थीं. इस अनुपात को ध्यान में रखना जरूरी है, क्योंकि सर्वे में दोनों समूहों की भागीदारी बराबर नहीं थी।  क्यों विश्वसनीय है यह सर्वे? इस मेगा सर्वे के दायरे और इसकी पारदर्शिता का अंदाजा इसके सैंपल साइज से लगाया जा सकता है. यह सर्वे उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में किया गया।  भागीदारी: सर्वे टीमों ने घर-घर जाकर कुल 30,925 लोगों से आमने-सामने बात की, जिसमें गांव और शहर दोनों के 18 वर्ष से अधिक आयु के लोग शामिल रहे।  डेमोग्राफिक्स: इसमें 18 से 66+ वर्ष तक के आयु वर्ग, 76% पुरुष और 24% महिलाओं के साथ-साथ व्यापारी, किसान, छात्र, कामगार, बेरोजगार और नौकरीपेशा हर वर्ग की राय ली गई।  सामाजिक समीकरण: सर्वे में विभिन्न जातियों (OBC 45.8%, सामान्य 35.8%, SC 14.7%, ST 2.4%) और प्रमुख धर्मों के मतदाताओं को शामिल कर पूरी तरह संतुलित ओपिनियन पोल तैयार किया गया। 

यूपी के 75 जिलों में 124 वन स्टॉप सेंटर, 3.18 लाख मामलों में महिलाओं को मिली मदद

बंदिशों से बेखौफ उड़ान तक वन स्टॉप सेंटर से संवर रही महिलाओं की जिंदगी, मुश्किलों को मात देकर आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़ रहीं बेटियां लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण को मजबूत करने के लिए संचालित वन स्टॉप सेंटर संकटग्रस्त महिलाओं को सुरक्षा, परामर्श और पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। लखनऊ की तीन महिलाओं की कहानियां इस पहल के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाती हैं। पारिवारिक बंदिशों से जूझ रही एक युवती ने काउंसलिंग के बाद पढ़ाई जारी रखी और आज उच्च पद पर सेवाएं देकर जिम्मेदारी निभा रही है। वहीं, शोषण की शिकार एक बालिका ने मुश्किलों से उबरकर प्रतिष्ठित होटल में नौकरी हासिल की। घरेलू प्रताड़ना से प्रभावित एक अन्य महिला भी शिक्षा और रोजगार के सहारे आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ रही है। काउंसलिंग से बदली परिवार की सोच महिला कल्याण विभाग की निदेशक सी. इंदुमति ने बताया कि लखनऊ की 31 वर्षीय युवती ने वन स्टॉप सेंटर को ईमेल भेजकर जानकारी दी कि परिजन उन्हें उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से रोक रहे हैं। पारिवारिक तनाव के बीच सेंटर की टीम ने उनके घर पहुंचकर परिजनों से बातचीत की। इसके बाद सुरक्षित और गोपनीय माहौल में काउंसलिंग कराई गई। टीम के समझाने पर परिवार ने युवती को पढ़ाई जारी रखने की स्वतंत्रता दी। वन स्टॉप सेंटर पर काउंसलिंग से युवती को मुश्किल परिस्थितियों से उबरकर आगे बढ़ने का हौसला मिला। उसने अपनी पढ़ाई पूरी की और प्रतिष्ठित पद पर सेवाएं देकर नई मिसाल पेश कर रही है। शोषण से निकलकर होटल में बनाई पहचान लखनऊ की एक बालिका ने 16 वर्ष की उम्र में वन स्टॉप सेंटर पहुंचकर बचपन से हो रहे पारिवारिक शोषण की जानकारी दी। सेंटर ने उसे काउंसलिंग और संरक्षण उपलब्ध कराने के साथ कानूनी कार्रवाई में सहयोग किया। बाल कल्याण समिति के आदेश पर उसे राजकीय संरक्षण में रखा गया और शिक्षा जारी रही। 12वीं उत्तीर्ण करने के बाद उसे बेंगलुरु के इको संस्थान में होटल मैनेजमेंट का प्रशिक्षण दिलाया गया। आज वह लखनऊ के होटल में नौकरी कर रही है। घरेलू प्रताड़ना से मुक्ति, अब पढ़ाई और नौकरी लखनऊ की एक अन्य 31 वर्षीय महिला ने शिकायत की कि पति उसे बंधक बनाकर शारीरिक, मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना दे रहा है। वन स्टॉप सेंटर की टीम पुलिस के साथ मौके पर पहुंची और महिला को सुरक्षित निकाला। सेंटर में 12 दिन के अस्थायी आश्रय के दौरान काउंसलिंग की गई। महिला को उसका विवाह संबंधी सामान वापस दिलाने और सुरक्षित मायके पहुंचाने में भी मदद मिली। अब वह स्वतंत्र रूप से रहकर पढ़ाई और नौकरी कर रही है। प्रदेश के 75 जिलों में 124 केंद्र, 3.18 लाख मामलों में मदद महिला कल्याण विभाग की निदेशक सी. इंदुमति ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित वन स्टॉप सेंटर योजना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश के सभी 75 जिलों में 124 केंद्र संचालित हैं। इनके माध्यम से अब तक करीब 3,18,500 मामलों में महिलाओं और बालिकाओं को सहायता दी गई है। केंद्रों पर अस्थायी आश्रय, चिकित्सकीय सहायता, परामर्श, विधिक मदद और पुलिस सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

समाजवादी पार्टी शिक्षा की घोषित दुश्मन: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

बैलेट पेपर से हो रहा है चुनाव, न्याय के पक्ष में परिणाम देने का काम जनता-जनार्दन का: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश विधान परिषद के लखनऊ खंड स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के भाजपा सम्मेलन को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया संबोधित। समाजवादी पार्टी शिक्षा की घोषित दुश्मन: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शिक्षकों का अपमान और शिक्षा व्यवस्था की उपेक्षा सपा की राजनीति का आधार: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ‘सपा ने वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया दिया, हमने वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट और वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज दिया’ परिवारवाद और वंशवाद की विषबेल को उखाड़ फेंकें, आपका प्रतिनिधि वह बने जिसमें जज्बा और सामर्थ्य हो : मुख्यमंत्री योगी संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करने की प्रवृत्ति का जवाब बनेगा यह चुनाव : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शिक्षकों को पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज, दुर्घटना पर 40 लाख से 1.5 करोड़ रुपये तक बीमा सुरक्षा अधिवक्ताओं को भी पांच लाख रुपये तक कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा, मृत्यु पर परिवार को पांच लाख रुपये की सहायता का प्रावधान लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह शिक्षा की घोषित दुश्मन है। शिक्षा व्यवस्था की उपेक्षा और शिक्षकों का अपमान उसकी राजनीति का आधार रहा है। उन्होंने कहा कि सपा सरकार के समय शिक्षण संस्थानों पर पेशेवर गुंडों का दबदबा था और युवाओं के सामने पहचान का संकट खड़ा हुआ। इसके विपरीत, भाजपा सरकार ने शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए काम किया है। मुख्यमंत्री ने शिक्षक एवं स्नातक मतदाताओं से अपील की कि वे इस चुनाव में परिवारवाद और वंशवाद को नकारते हुए योग्य और सक्षम प्रतिनिधि चुनें। 'शिक्षक-स्नातक सम्मेलन' में जनता को किया संबोधित उत्तर  प्रदेश विधान परिषद के आगामी लखनऊ खंड स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर लखनऊ में  'शिक्षक-स्नातक सम्मेलन' का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल हुए एवं कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। यह सम्मेलन लखनऊ स्नातक क्षेत्र से भाजपा के प्रत्याशी इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह और लखनऊ शिक्षक क्षेत्र से प्रत्याशी उमेश द्विवेदी के समर्थन में आयोजित किया गया था।  कार्यक्रम में पहुंचने पर क्षेत्रीय अध्यक्ष अवधेश द्विवेदी, भाजपा प्रदेश महामंत्री दिलीप पटेल और दोनों प्रत्याशियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का  बुके भेंट कर भव्य स्वागत व अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री को अंगवस्त्र ,पुष्पगुच्छ भेंट किया गया और स्मृति चिह्न के रूप में भगवान श्रीराम की प्रतिमा भेंट की गई। मुख्यमंत्री ने लखनऊ खंड के मतदाता महासम्मेलन को संबोधित करते हुए सपा की नीतियों पर सवाल उठाए और शिक्षकों, युवाओं तथा अधिवक्ताओं के हित में सरकार की ओर से किए गए कार्यों का उल्लेख किया। ‘समाजवादी पार्टी शिक्षा की घोषित दुश्मन’ मुख्यमंत्री ने कहा, “शिक्षा की व्यवस्था की उपेक्षा, शिक्षकों का अपमान, यहीं से समाजवादी पार्टी ने अपनी राजनीति की थी।” उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के समय शिक्षण संस्थानों में पेशेवर गुंडे हावी हो जाते थे और शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। उनके अनुसार, शिक्षा और युवा पिछली सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल नहीं थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा की व्यवस्था कमजोर होने का असर केवल शिक्षकों और विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे समाज, प्रदेश और देश का भविष्य भी प्रभावित होता है। उन्होंने शिक्षकों के सम्मान, विद्यालयों की सुविधाओं और युवाओं के अवसरों को बेहतर बनाने की जरूरत पर जोर दिया। ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया’ के मुकाबले वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट मुख्यमंत्री ने सपा सरकार पर माफिया के प्रभाव को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा, “समाजवादी पार्टी ने 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया' दिया, हमने 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट' दिया, 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज' दिया।” उन्होंने कहा कि पहले प्रदेश में माफिया जमीनों पर कब्जा कर लेते थे और आम लोगों, शिक्षकों तथा सरकारी संपत्तियों की जमीनों को भी निशाना बनाया जाता था। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि भाजपा सरकार ने कानून-व्यवस्था में सुधार के साथ विकास को प्राथमिकता दी है। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों के विस्तार, बेहतर कनेक्टिविटी और निवेश से रोजगार के अवसर बढ़ने का भी उल्लेख किया। ‘परिवारवाद और वंशवाद की विषबेल हटाइए’ मुख्यमंत्री ने शिक्षक एवं स्नातक विधान परिषद चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह और उमेश द्विवेदी के समर्थन में मतदान की अपील की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के मतदाताओं को ऐसा प्रतिनिधि चुनना चाहिए, जो उनकी समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठा सके और जिम्मेदारी के साथ काम करे। उन्होंने कहा, “आपका प्रतिनिधि वह बनेगा जिसमें जज्बा हो और जिसमें सामर्थ्य हो।” परिवारवाद और वंशवाद पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने मतदाताओं से इसे बढ़ावा देने वाली राजनीति को नकारने का आह्वान किया। उन्होंने दोनों प्रत्याशियों को शिक्षकों और स्नातकों की आवाज उठाने में सक्षम बताया। बैलेट पेपर से चुनाव, न्याय के पक्ष में परिणाम देने की अपील मुख्यमंत्री ने कहा, एमएलसी चुनाव “ईवीएम से नहीं, बैलेट पेपर से हो रहा है और परिणाम न्याय के पक्ष में देने का काम आपको करना है।” उन्होंने संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करने की प्रवृत्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि यह चुनाव उसका भी जवाब होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने मतदाताओं से सतर्क रहकर मतदान करने और अति-आत्मविश्वास से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि चुनाव में प्रत्येक मत महत्वपूर्ण है और कार्यकर्ताओं को मतदाताओं तक पहुंचने के लिए लगातार प्रयास करना चाहिए। शिक्षकों को पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज मुख्यमंत्री ने शिक्षकों और उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सुविधाओं का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि बेसिक, माध्यमिक, उच्च शिक्षा, विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग कॉलेजों और स्ववित्तपोषित संस्थानों सहित विभिन्न श्रेणियों के शिक्षकों तथा उनके परिवारों को प्रति वर्ष पांच लाख रुपये तक कैशलेस उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने कहा कि सरकारी और सहायता प्राप्त संस्थानों से जुड़े शिक्षकों, शिक्षामित्रों तथा अनुदेशकों के साथ किसी अनहोनी या दुर्घटना की स्थिति में परिवार को बीमा कवर के माध्यम से 40 लाख रुपये से लेकर 1.5 करोड़ रुपये तक की आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था है। रसोइयों के लिए भी दो लाख रुपये का सुरक्षा बीमा कवर उपलब्ध कराने का उल्लेख किया। ऑपरेशन कायाकल्प से स्कूलों में बेहतर सुविधाएं, ड्रॉपआउट दर 20 से घटकर तीन … Read more

सारंगपुर कला में 47.85 लाख, कारेसरा में 59.63 लाख और मड़मड़ा में 48.19 लाख रुपए से बनेगा गौरव पथ

रायपुर नवरात्रि के पावन अवसर पर उप मुख्यमंत्री कवर्धा विधायक  विजय शर्मा ने कबीरधाम जिले के ग्राम सारंगपुर कला, कारेसरा और मड़मड़ा में कुल 1 करोड़ 55 लाख 67 हजार रुपए की लागत से गौरव पथ निर्माण का भूमिपूजन कर ग्रामीणों को विकास की सौगात दी। इसमें ग्राम सारंगपुर कला में 47.85 लाख रुपए, कारेसरा में 59.63 लाख रुपए और मड़मड़ा में 48.19 लाख रुपए की लागत से गौरव पथ का निर्माण किया जाएगा। इन निर्माण कार्यों से तीनों गांवों में सड़क सुविधा बेहतर होगी और ग्रामीणों को आवागमन में सहूलियत मिलेगी। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने मां दुर्गा की पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। उन्होंने ग्राम सारंगपुर कला में 5.20 लाख रुपए की लागत से सीसी रोड निर्माण की घोषणा भी की। गुणवत्ता से समझौता नहीं, टिकाऊ सड़क निर्माण पर जोर उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने अधिकारियों को गौरव पथ निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और टिकाऊपन का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सड़कें ऐसी बननी चाहिए, जो लंबे समय तक चलें और ग्रामीणों को बेहतर आवागमन की सुविधा दें। निर्माण कार्यों में लापरवाही किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने ग्राम बंदौरा की सड़क का उदाहरण देते हुए बताया कि सड़क की खराब स्थिति की शिकायत मिलने पर उन्होंने तत्काल उसे उखाड़कर दोबारा बनाने के निर्देश दिए थे। अगले ही दिन सड़क उखाड़ने की कार्रवाई शुरू हो गई। उन्होंने कहा कि गांव की सड़कों का उपयोग ग्रामीण ही करते हैं, इसलिए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर नजर रखने और किसी भी कमी की जानकारी देने में स्थानीय लोगों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष  ईश्वरी साहू, जिला पंचायत सदस्य  मनीराम साहू, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष  विदेशीराम धुर्वे, जनपद अध्यक्ष   रामकिंकर वर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठकर सुनीं समस्याएं कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने अपने सहज अंदाज में ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठकर उनसे सीधा संवाद किया। उन्होंने लोगों की समस्याएं और मांगें सुनीं तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों को उनके निराकरण के लिए त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने ग्राम सारंगपुर कला में 5.20 लाख रुपये की लागत से सीसी रोड निर्माण की घोषणा की। ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी जरूरतों को सुनने और संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश देने से जनसमस्याओं के समाधान पर जोर दिया गया। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि नई सरकार के गठन के बाद प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 12 लाख से अधिक आवासों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। इसके साथ ही पात्र परिवारों को आवास का लाभ दिलाने के लिए सर्वे सूची के अनुसार आगे की प्रक्रिया जारी रहेगी। बस्तर में विकास और पर्यावरण संरक्षण पर जोर उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने बस्तर के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह के मार्गदर्शन में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान चलाया गया, जिसमें सफलता मिली है। बस्तर में पेड़ों की कटाई और बड़ी खनन परियोजनाओं को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं पर उन्होंने कहा कि इन विषयों पर लोगों के बीच भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति देखें। साथ ही उन्होंने जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।

कासगंज पुलिस ने 7 दिन में बरामद किए 120 मोबाइल

कासगंज पुलिस ने सात दिन में बरामद किए 120 लोगों के मोबाइल, तकनीक के सहारे मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा तक पहुंची पुलिस योगी सरकार में डिजिटल पुलिसिंग का दिखा असर, गुम मोबाइलों की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई से आमजन को मिली बड़ी राहत प्रदेश के थानों पर साइबर हेल्प डेस्क के जरिए शिकायतों के निस्तारण पर जोर, तकनीक बन रही पुलिस और जनता के बीच भरोसे की कड़ी लखनऊ योगी सरकार के मिशन शक्ति 6.0 अभियान के पहले ही सप्ताह में उत्तर प्रदेश पुलिस ने तकनीक आधारित पुलिसिंग और जनशिकायतों के निस्तारण में बड़ी कामयाबी हासिल की है। इसी क्रम में कासगंज पुलिस ने महज सात दिनों के भीतर करीब 32 लाख रुपये कीमत के गुम मोबाइल फोन बरामद कर 120 लोगों को बड़ी राहत पहुंचाई है। खास बात यह है कि इन मोबाइलों की तलाश केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रही। पुलिस ने तकनीकी संसाधनों की मदद से मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा तक गुम मोबाइलों का पता लगाया और उन्हें बरामद कर उनके वास्तविक स्वामियों को सौंप दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पुलिसिंग को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और आमजन की शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में कासगंज पुलिस की यह उपलब्धि मिशन शक्ति 6.0 के शुरुआती सप्ताह की महत्वपूर्ण सफलता बनकर सामने आई है। सात दिन में 32 लाख के मोबाइल बरामद, दूसरे राज्यों तक पहुंची पुलिस मिशन शक्ति 6.0 की शुरुआत 11 अक्टूबर को हुई थी। अभियान के पहले सप्ताह में कासगंज पुलिस ने गुम मोबाइल फोन की बरामदगी के लिए विशेष अभियान चलाया। पुलिस ने प्राप्त शिकायतों के आधार पर तकनीकी माध्यमों से मोबाइल फोन की लोकेशन ट्रेस करनी शुरू की। इस दौरान कई मोबाइल फोन की लोकेशन उत्तर प्रदेश से बाहर मिली। इसके बाद पुलिस ने अपनी कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा तक संपर्क एवं समन्वय स्थापित किया। तकनीकी सहायता से मोबाइल फोन का पता लगाकर उन्हें बरामद किया गया। सात दिनों के भीतर करीब 32 लाख रुपये कीमत के मोबाइल बरामद कर 120 लोगों को वापस सौंपे गए। मोबाइल के साथ वापस मिली लोगों की ‘डिजिटल दुनिया' आज मोबाइल फोन केवल बातचीत का साधन नहीं, बल्कि व्यक्ति की पूरी डिजिटल दुनिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। बैंकिंग, यूपीआई भुगतान, जरूरी दस्तावेज, कारोबार से जुड़ी जानकारियां, पारिवारिक तस्वीरें और महत्वपूर्ण संपर्क मोबाइल में ही सुरक्षित रहते हैं। ऐसे में फोन खोने पर व्यक्ति को केवल आर्थिक नुकसान नहीं होता, बल्कि उसकी रोजमर्रा की कई जरूरी गतिविधियां भी प्रभावित हो जाती हैं। कासगंज पुलिस की कार्रवाई से ऐसे ही 120 लोगों को राहत मिली। जिन लोगों को अपने मोबाइल वापस मिलने की उम्मीद कम रह गई थी, उनके हाथों में दोबारा फोन पहुंचने से उनके चेहरे खिल उठे। पुलिस की इस पहल ने आमजन के बीच भरोसे को भी मजबूत किया है। शिकायत दर्ज करने से लेकर मोबाइल लौटाने तक पुलिस ने की कार्रवाई कासगंज के पुलिस अधीक्षक ओपी सिंह ने बताया कि गुम मोबाइलों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तकनीकी संसाधनों के माध्यम से उनकी तलाश शुरू की। मोबाइल फोन ट्रेस होने के बाद उनकी बरामदगी सुनिश्चित की गई। इसके बाद स्वामित्व और पहचान का सत्यापन कर संबंधित व्यक्तियों को मोबाइल सौंप दिए गए। उन्होंने बताया कि अभियान में इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया कि शिकायतों का निस्तारण केवल कागजी औपचारिकता बनकर न रह जाए, बल्कि शिकायतकर्ता को वास्तविक राहत मिले। इसी उद्देश्य से पुलिस टीमों ने दूसरे राज्यों तक संपर्क स्थापित कर गुम मोबाइलों की बरामदगी सुनिश्चित की। योगी सरकार में तकनीक आधारित पुलिसिंग को मिल रहा बढ़ावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और जनशिकायतों के प्रभावी निस्तारण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रदेश के थानों में साइबर हेल्प डेस्क की व्यवस्था के माध्यम से साइबर अपराध और डिजिटल माध्यमों से जुड़ी शिकायतों में लोगों को सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। डिजिटल लेनदेन, ऑनलाइन बैंकिंग और मोबाइल आधारित सेवाओं के बढ़ते उपयोग के बीच तकनीकी संसाधनों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है। कासगंज पुलिस की यह कार्रवाई इसका उदाहरण है कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल केवल साइबर अपराधियों की पहचान और कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिकों की रोजमर्रा की परेशानियों को दूर करने में भी उपयोगी साबित हो रहा है। मिशन शक्ति 6.0 में जनसेवा और जवाबदेही का संदेश मिशन शक्ति 6.0 के पहले सप्ताह में कासगंज पुलिस की इस उपलब्धि का महत्व केवल 32 लाख रुपये के मोबाइल फोन बरामद करने तक सीमित नहीं है। इससे 120 लोगों को उनकी महत्वपूर्ण डिजिटल जानकारियों और संपर्कों तक दोबारा पहुंच मिली है। साथ ही यह संदेश भी गया है कि गुम मोबाइल की शिकायत पर पुलिस तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए दूसरे राज्यों तक भी तलाश कर सकती है। योगी सरकार के अभियान के शुरुआती सप्ताह में सामने आई यह उपलब्धि पुलिस की सक्रियता, तकनीकी दक्षता और शिकायतों के बेहतर निस्तारण का उदाहरण है। मोबाइल की बरामदगी से जहां लोगों को उनकी खोई हुई डिजिटल दुनिया वापस मिली, वहीं पुलिस के प्रति उनका विश्वास भी मजबूत हुआ है।

मोहन भागवत का तीन दिवसीय जबलपुर दौरा, कॉलेज के युवाओं और RSS पदाधिकारियों से करेंगे चर्चा

 जबलपुर युवाओं के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने और उनसे सीधे संवाद करने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत मध्य प्रदेश के जबलपुर पहुंचेंगे. उनका यह दौरा 24 अक्टूबर से शुरू होकर तीन दिन चलेगा. इस दौरान भागवत कॉलेज में पढ़ने वाले युवा स्वयंसेवकों से मुलाकात करेंगे. 25 अक्टूबर को होने वाले एक विशेष शिविर में उनका संबोधन भी प्रस्तावित है.इसके अलावा वे स्थानीय पदाधिकारियों और प्रांतीय कार्यकारिणी के सदस्यों के साथ बैठकें करेंगे।  RSS के महाकौशल प्रांत के प्रचार प्रमुख विनोद कुमार ने शनिवार को एक न्यूज एजेंसी को इसकी जानकारी दी. मोहन भागवत 25 अक्टूबर को महाकौशल प्रांत के Gen-Z स्वयंसेवकों के शिविर में शामिल होंगे. यहां वे कॉलेज में पढ़ने वाले स्वयंसेवकों से बातचीत करेंगे और उन्हें संबोधित करेंगे।  हालांकि, इस संवाद में किन मुद्दों पर चर्चा होगी, इसे लेकर अभी कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है. भागवत के कार्यक्रम में संगठन के स्थानीय पदाधिकारियों और प्रांतीय कार्यकारिणी की टीमों के साथ बैठकें भी शामिल हैं. इन बैठकों में संगठन से जुड़े विषयों पर चर्चा की जाएगी।  38 जिलों तक फैला है महाकौशल प्रांत RSS का महाकौशल प्रांत संगठन के मध्य क्षेत्र के अंतर्गत आता है. इसमें मध्य प्रदेश के 38  जिले शामिल हैं. जबलपुर, सागर और रीवा यहां के संभागीय मुख्यालय हैं. इस लिहाज से जबलपुर का दौरा संघ के लिए क्षेत्रीय स्तर पर भी अहम है।  युवा स्वयंसेवकों के शिविर में भागवत की मौजूदगी ऐसे समय में हो रही है, जब संगठन इस क्षेत्र में युवाओं से संपर्क बढ़ाने पर जोर दे रहा है. अब देखना यह होगा कि 25 अक्टूबर को होने वाले शिविर में भागवत युवाओं से किन मुद्दों पर बात करते हैं और उनके संबोधन में किन विषयों पर जोर रहता है। 

अरुंधति को बचपन में सीएम योगी के वीडियो से मिली सीख

योगी आदित्यनाथ को बड़ा भाई मानती हैं अरुंधति, विवाह पर आशीर्वाद का आग्रह दिसंबर में होनी है शादी,  मुख्यमंत्री के शुभकामना संदेश को भी बताया अनमोल लखनऊ कभी अपनी आंखों में आने वाले आंसुओं को कमजोरी समझने वाली केरल की अरुंधति के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक सीख जिंदगी का नजरिया बदलने वाली बन गई। बचपन में योगी के एक वीडियो से उन्होंने समझा कि भावुक होना कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी भावनाओं को स्वीकार करने का साहस है। वर्षों बाद भी यह सीख उनके जीवन का हिस्सा बनी हुई है। अब जब अरुंधति विवाह कर अपने जीवन के नए अध्याय की शुरुआत करने जा रही हैं, तो उन्होंने अपने प्रेरणास्रोत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हाथ से लिखकर दो पेज का पत्र भेजा है और विवाह में शामिल होकर नवदंपती को आशीर्वाद देने का आग्रह किया है। पत्र में शादी का न्योता है, पर उससे भी ज्यादा है- सीएम के प्रति कृतज्ञता का भाव। जब आंसुओं को कमजोरी मानने लगी थीं अरुंधति अरुंधति ने सीएम योगी को भेजे अपने पत्र में बचपन की उस मनःस्थिति को साझा किया है, जब छोटी-छोटी बातों पर भावुक होकर रो पड़ना उन्हें खुद अपनी कमजोरी लगने लगा था। उनके कुछ दोस्त उन्हें समझाते थे कि मजबूत बनने के लिए भावनाओं पर काबू रखना जरूरी है। धीरे-धीरे उनके मन में भी यह सवाल घर करने लगा कि क्या आसानी से रो पड़ने वाला व्यक्ति कभी मजबूत बन सकता है? क्या अपनी भावनाएं जाहिर करना शर्मिंदगी की बात है? इसी दौरान उनके चचेरे भाई ने उन्हें योगी आदित्यनाथ का एक वीडियो दिखाया। वीडियो में योगी काफी भावुक थे। चचेरे भाई ने समझाया कि योगी जैसा बनो, भावुक होते हुए भी अत्यंत मजबूत। इससे अरुंधति को एक नई दृष्टि मिली। उन्हें यह समझने में मदद मिली कि आंसू किसी व्यक्ति की कमजोरी का प्रमाण नहीं होते। इस अनुभव ने उनके भीतर चल रहे द्वंद्व को बदलने में अहम भूमिका निभाई। जिस भावुकता को वह अपनी कमी मानने लगी थीं, उसे अब वह अपनी सहज मानवीय संवेदना के रूप में देखने लगीं। योगी की सीख से समझा, मजबूत होने का असली अर्थ अरुंधति के लिए इस अनुभव का महत्व केवल उस पल तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने समझा कि मजबूत होने का अर्थ हर परिस्थिति में भावनाओं को छिपाना नहीं, बल्कि मुश्किलों का सामना करते हुए खुद पर भरोसा बनाए रखना है। गिरने के बाद दोबारा खड़े होना, चुनौतियों के बीच आगे बढ़ना और अपनी जिम्मेदारियों को निभाना ही वास्तविक साहस है। अरुंधति ने पत्र में लिखा है-‘ जब भी मैं खुद पर संदेह करती हूं,  आपसे मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।‘ अरुंधती का योगी आदित्यनाथ के प्रति सम्मान उनकी सार्वजनिक भूमिका से भी जुड़ा है। उनके लिए उनकी यात्रा मेहनत, दृढ़ निश्चय और निरंतर प्रयास का संदेश देती है। इस तरह बचपन में देखे गए एक वीडियो से मिली सीख अरुंधती के लिए आत्मविश्वास का ऐसा आधार बन गई, जिसे वह आज भी अपने जीवन में महसूस करती हैं। जीवन के सबसे खास मौके पर याद आए प्रेरणास्रोत अरुंधति और राहुल का विवाह 20 दिसंबर 2026 में केरल के अलुवा स्थित ग्रीन पार्क कन्वेंशन सेंटर में होना है। जीवन के इस खास अवसर पर अरुंधति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से समारोह में शामिल होने का आग्रह किया है। लिखा है-‘ मेरे लिए आप एक नेता से कहीं बढ़कर हैं। मैंने आपको हमेशा एक बड़े भाई की तरह देखा है, जिसकी यात्रा ने मुझे हिम्मत और प्रेरणा दी है।‘अरुंधति ने पत्र में मुख्यमंत्री की व्यस्तताओं का उल्लेख करते हुए यह भी लिखा है कि यदि उनके लिए समारोह में पहुंचना संभव न हो, तो उनका शुभकामना संदेश और आशीर्वाद भी उनके लिए बेहद अनमोल होगा। उन्होंने इस बात के लिए आभार जताया कि सीएम योगी की एक सीख ने उन्हें अपनी भावनाओं को कमजोरी मानने के बजाय स्वीकार करना सिखाया।

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना से आकाश जायसवाल को मिला स्वरोजगार

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विगत दिनों उमरिया जिले के गुरूवाही ग्राम में आयोजित लाडली बहना कार्यक्रम में आकाश जायसवाल को प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना अंतर्गत राइस मिल स्थापना की स्वीकृति के बाद प्रमाण पत्र प्रदान किया। शासन की योजनाएं युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उद्यानिकी विभाग अंतर्गत प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना से लाभान्वित ग्राम बचहा, विकासखंड मानपुर निवासी आकाश जायसवाल इसका उदाहरण हैं। आकाश जायसवाल पिता श्री सुरेश जायसवाल ने पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद स्वयं का व्यवसाय स्थापित करने का निर्णय लिया। उन्होंने नौकरी की जगह स्वरोजगार को प्राथमिकता देते हुए राइस मिल स्थापित करने की योजना बनाई। इसके लिए उन्होंने उद्यानिकी विभाग द्वारा संचालित प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना में आकाश को सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की इंदवार शाखा से 29 लाख 89 हजार 296 रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। इसके साथ ही उन्हें 35 प्रतिशत अनुदान के प्रावधान के अंतर्गत लगभग 10 लाख रुपये की सब्सिडी का लाभ मिलेगा। इससे उन्हें अपना उद्यम स्थापित करने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी। आकाश जायसवाल के पिता टेंट व्यवसाय करते हैं। आकाश का मानना है कि शासन की इस योजना से उन्हें अपने सपनों को साकार करने का अवसर मिला है। उनका प्रयास है कि राइस मिल के माध्यम से व्यवसाय को आगे बढ़ाने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित किए जा सकें।  

तकनीक से सुगम होगा न्याय, विधि से सुनिश्चित होगी निष्पक्षता; दुर्ग कोर्ट में विधिक संगोष्ठी आयोजित

रायपुर : तकनीक से सुगम न्याय, विधि से सुनिश्चित निष्पक्षता: दुर्ग जिला न्यायालय में ‘न्याय श्रुति नियम, 2025’ पर विधिक संगोष्ठी एवं डिजिटल साक्ष्य प्रदर्शनी आयोजित तकनीक से सुगम न्याय, विधि से सुनिश्चित निष्पक्षता: दुर्ग जिला न्यायालय में ‘न्याय श्रुति नियम, 2025’ पर विधिक संगोष्ठी एवं डिजिटल साक्ष्य प्रदर्शनी आयोजित रायपुर  न्याय की राह में दूरियाँ कम हो रही हैं और तकनीक न्यायिक प्रक्रिया को नए आयाम दे रही है। अब ऑडियो-वीडियो माध्यमों से साक्ष्य दर्ज करने से लेकर डिजिटल साक्ष्यों के महत्व को समझने तक, न्याय व्यवस्था में तकनीक की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। ऐसे में तकनीक का उपयोग केवल सुविधाजनक ही नहीं, बल्कि विधिसम्मत, निष्पक्ष और विश्वसनीय होना भी आवश्यक है।        इसी दृष्टिकोण को केंद्र में रखते हुए जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग में 16 अक्टूबर को “ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से न्यायिक कार्यवाही एवं न्याय श्रुति नियम, 2025 का विधिक एवं व्यावहारिक परिप्रेक्ष्य” विषय पर विधिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में न्यायिक कार्यवाही के आधुनिक स्वरूप, साक्ष्य की प्रक्रिया और तकनीकी साधनों के विधिसम्मत उपयोग पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम के साथ ई-साक्ष्य एवं डिजिटल साक्ष्यों से संबंधित प्रदर्शनी भी आयोजित की गई, जिसने आयोजन को व्यावहारिक और ज्ञानवर्धक स्वरूप प्रदान किया। ’न्यायालय की सीमाओं से परे साक्ष्य, लेकिन विधि के दायरे में’      प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री के. विनोद कुजूर तथा प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय, दुर्ग श्रीमती सुमन एक्का की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित संगोष्ठी में द्वितीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश श्री प्रशांत पराशर ने ‘न्याय श्रुति नियम, 2025’ के प्रमुख प्रावधानों और उनके व्यावहारिक क्रियान्वयन पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम का अभिभाषण प्रथम व्यवहार न्यायाधीश, कनिष्ठ श्रेणी, दुर्ग कु. दीपांशी जैन द्वारा प्रस्तुत किया गया। संगोष्ठी में इस बात पर बल दिया गया कि आधुनिक तकनीक न्यायिक कार्यवाही को अधिक सुगम और समयबद्ध बनाने में सहायक हो सकती है, लेकिन इसका प्रभावी उपयोग तभी संभव है, जब विधिक प्रावधानों का पालन करते हुए साक्ष्य की विश्वसनीयता और न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए। ’ई-साक्ष्य एवं डिजिटल साक्ष्यों की प्रदर्शनी : तकनीक को समझने का व्यावहारिक माध्यम’       संगोष्ठी का एक महत्वपूर्ण आकर्षण प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा आयोजित ई-साक्ष्य की प्रक्रिया एवं डिजिटल साक्ष्यों से संबंधित प्रदर्शनी रही। प्रदर्शनी का उद्देश्य डिजिटल साक्ष्यों की प्रक्रिया, उनके महत्व और न्यायिक कार्यवाही में उनकी प्रासंगिकता के प्रति समझ विकसित करना था। इस पहल ने संगोष्ठी की विषयवस्तु को व्यावहारिक आयाम प्रदान किया। जहाँ संगोष्ठी में नियमों और प्रक्रियाओं की विधिक व्याख्या की गई, वहीं प्रदर्शनी के माध्यम से ई-साक्ष्य एवं डिजिटल साक्ष्यों से संबंधित जानकारी को एक अलग और सहज स्वरूप में प्रस्तुत किया गया। इस प्रकार न्यायिक तकनीक से जुड़े विषयों को केवल सैद्धांतिक चर्चा तक सीमित न रखते हुए, उन्हें प्रत्यक्ष जानकारी और जागरूकता से जोड़ने का प्रयास किया गया। ’विधिक जागरूकता में नवाचार: रंगोली ने भी बढ़ाई आयोजन की गरिमा’      कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा आकर्षक रंगोली का निर्माण कराया गया। रंगोली ने आयोजन को रचनात्मक स्वरूप प्रदान करने के साथ उसकी शोभा भी बढ़ाई। विधिक संगोष्ठी, डिजिटल साक्ष्य प्रदर्शनी और कलात्मक प्रस्तुति का यह समन्वय दर्शाता है कि विधिक जागरूकता को प्रभावी बनाने के लिए पारंपरिक और आधुनिक, दोनों प्रकार के माध्यम उपयोगी हो सकते हैं। ’न्यायिक प्रक्रिया में तकनीक और संस्थागत समन्वय पर जोर’      कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारीगण के अतिरिक्त उप संचालक अभियोजन श्री भीम सिंह राजपूत, दुर्ग बार एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री रमेश शर्मा, सचिव श्री रविशंकर सिंह तथा जेल अधीक्षक श्री मनीष संभाकर सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों की सहभागिता ने न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े पक्षों के बीच समन्वय और साझा समझ के महत्व को रेखांकित किया। संगोष्ठी का उद्देश्य न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, अभियोजन पक्ष तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों को ‘न्याय श्रुति नियम, 2025’ के प्रावधानों और ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से न्यायिक कार्यवाही के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराना था।