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6 फ्लैग स्टाफ रोड बनेगा दिल्ली का पहला स्टेट गेस्ट हाउस और कल्चरल सेंटर

नई दिल्ली दिल्ली में 'शीशमहल' के नाम से चर्चित पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल के सरकारी बंगले को अब रेखा गुप्ता सरकार ने नया रूप में देने का फैसला लिया है। अरविंद केजरीवाल के सरकारी आवास 6, फ्लैग स्टाफ रोड सिविल लाइंस स्थित सरकारी बंगले को दिल्ली गेस्ट हाउस और कल्चरल सेंटर बनाने का फैसला लिया गया है। विवादों में रहे इस बंगले में राज्य के CIP गेस्ट के ठहरने की व्यवस्था होने के साथ-साथ सांस्कृतिक आयोजनों के लिए भी जगह उपलब्ध कराएगी। 2023 में भाजपा ने बंगले के कथित 45 करोड़ रुपये के सौंदर्यीकरण और लग्जरी सुविधाओं को लेकर इसे 'शीशमहल' करार किया था। सरकार जल्द ही इसे लेकर औपचारिक घोषणा कर सकती है।     केजरीवाल के इस्तीफे और बंगले के निर्माण को लेकर शुरू हुई जांच के बाद से ही यह बंगला खाली पड़ा है।     खाली पड़े इस बंगले का इस्तेमाल कैसे हो, इसे लेकर सरकार में लंबे समय से चर्चा चल रही थी।     पहले चर्चा थी कि इसे आधिकारिक तौर पर सीएम आवास घोषित किया जाएगा, लेकिन सीएम रेखा गुप्ता ने इसमें रहने से इनकार कर दिया।     उसके बाद इसे म्यूजियम बनाने को लेकर भी योजना बनाई गई, लेकिन अब उस योजना को भी खारिज कर करके दिल्ली सरकार ने गेस्ट हाउस बनाने का फैसला किया है दिल्ली को मिलेगा पहला स्टेट गेस्ट हाउस     दिल्ली में सरकार का अभी तक अपना कोई स्टेट गेस्ट हाउस नहीं है।     द्वारका में एक स्टेट गेस्ट हाउस बनाने की योजना है, लेकिन अभी तक उस पर काम शुरू नहीं हो पाया है।     इसलिए सरकार ने फैसला किया है कि राज्य के जो भी VVIP गेस्ट होंगे वह इस बंगले में रुकेंगे।     देश-विदेश से आने वाले प्रतिनिधिमंडल, विशिष्ट अतिथियों और उच्चस्तरीय अधिकारियों की मेजबानी इस बंगले में की जाएगी।     सरकारी बंगले को VIP मेहमानों के लिए गेस्ट हाउस के साथ-साथ कला और संस्कृति केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाएगा।     यहां एक सभागार और आधुनिक कॉन्फ्रेंस रूम भी विकसित किया जाएगा।     परिसर में प्रदर्शनी, सांस्कृतिक कार्यक्रम, साहित्यिक आयोजन और सरकारी समारोह का भी आयोजन किया जाएगा। क्योंकि इसके अंदर एक बड़ा परिसर भी है जहां इस तरह के आयोजन किए जा सकते हैं।

बाबा मक्खन शाह और लक्खी शाह जयंती पर सीएम की बड़ी घोषणा, धर्मशाला को मिलेंगे 31 लाख

 चंडीगढ़ हरियाणा में बंजारा समाज की सभी छह मांगों को सरकार पूरा करेगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंगलवार को संत कबीर कुटीर में संत-महापुरुष सम्मान एवं विचार प्रसार योजना के तहत आयोजित बाबा मक्खन शाह लुबाना और बाबा लक्खी शाह बंजारा के राज्य स्तरीय जयंती समारोह में यह भरोसा दिलाया। साथ ही पेहवा में मक्खन शाह लुबाना धर्मशाला और दतौली के सामुदायिक केंद्र के लिए 31-31 लाख रुपये देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा मक्खन शाह लुबाना और बाबा लक्खी शाह बंजारा इतिहास के दो अमर अध्याय हैं। उन्होंने त्याग को धर्म, सेवा को संस्कार और बलिदान को अपनी पहचान बनाया। ऐसी दोनों महान विभूतियों के चरणों में वे श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं। उन्होंने पेहवा में मक्खन शाह लुबाना धर्मशाला के लिए दी गई जमीन से संबंधित कार्रवाई तेजी से पूरी करने का वादा करते हुए कहा कि बाबा मक्खन शाह लुबाना के नाम पर किसी संस्थान का नाम भी रखा जाएगा।  6300 परिवारों को 100-100 गज के प्लॉट नायब ने कहा कि बाबा मक्खन शाह और बाबा लक्खी शाह का जीवन सेवा, समानता और समर्पण का संदेश देता है। इसी भावना के साथ प्रदेश सरकार अंत्योदय के सिद्धांत पर कार्य कर रही है। परिवार पहचान पत्र के माध्यम से प्रत्येक परिवार को पहचान दी गई है। मुख्यमंत्री शहरी आवास योजना के तहत 14 शहरों में 15 हजार 250 परिवारों को आवास तथा मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना के अंतर्गत 6300 परिवारों को 100-100 गज के प्लाट तथा घर निर्माण के लिए एक लाख रुपये की सहायता दी गई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत एक लाख 56 हजार गरीब परिवारों को पक्के घर उपलब्ध कराए गए हैं। डा. भीमराव आंबेडकर आवास नवीनीकरण योजना के अंतर्गत सहायता राशि 30 हजार रुपये से बढ़ाकर 80 हजार रुपये की गई है। अब तक 85 हजार 815 परिवारों को 416 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री अंत्योदय परिवार उत्थान योजना के तहत 55 हजार से अधिक जरूरतमंदों को स्वरोजगार के लिए बैंक ऋण उपलब्ध कराया गया है। 13 लाख 43 हजार परिवारों को प्रतिमाह 500 रुपये में गैस सिलिंडर दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय परिवार सुरक्षा योजना के माध्यम से परिवार के कमाने वाले सदस्य की मृत्यु होने पर 74 हजार 245 परिवारों को 2,800 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है। इसके अलावा 13 लाख 43 हजार परिवारों को प्रतिमाह 500 रुपये में गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है। विद्यार्थियों को 12वीं तक मुफ्त किताबें, वर्दी और स्टेशनरी उपलब्ध कराई जा रही है। प्रतियोगी परीक्षाओं की निशुल्क कोचिंग के साथ-साथ डा. आंबेडकर मेधावी छात्रवृत्ति योजना के तहत आठ हजार से 12 हजार रुपये तक की वार्षिक छात्रवृत्ति भी दी जा रही है। कार्यक्रम में बंजारा समाज के पुरोहित हुकुम सिंह, सूचना जनसंपर्क एवं भाषा विभाग के महानिदेशक के. मकरंद पांडुरंग और अतिरिक्त निदेशक मनीष लोहान सहित प्रदेशभर से आए लुबाना और बंजारा समाज के गण्यमान्य लोग मौजूद थे।

वन भूमि विवाद पर हाई कोर्ट सख्त, सबूतों के अभाव में CBI जांच की मांग खारिज

 रांची झारखंड हाई कोर्ट ने कथित 450 एकड़ वन भूमि की अवैध बिक्री और कब्जे के मामले में दायर जनहित याचिका का निपटारा करते हुए सीबीआइ और ईडी से जांच कराने की मांग ठुकरा दी। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता शिव शंकर शर्मा के आरोप अधिकांशतः अतिरंजित और अपुष्ट है। साथ ही उनकी विश्वसनीयता पर भी पहले से सवाल उठ चुका है। इसलिए केवल आरोपों के आधार पर सीबीआई या ईडी जांच का आदेश नहीं दिया जा सकता। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि वन विभाग और अन्य सक्षम प्राधिकारियों ने याचिका दायर होने से पहले ही कथित अतिक्रमण और वन भूमि के हस्तांतरण की जांच शुरू कर दी थी तथा जहां अनियमितताएं मिली, वहां कार्रवाई भी की जा रही है। जांच में यह भी सामने आया कि याचिकाकर्ता द्वारा 450 एकड़ वन भूमि के अवैध हस्तांतरण का दावा सही नहीं है। खंडपीठ ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता वन अधिकारियों और अन्य उच्च पदस्थ अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोपों का कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। रिकॉर्ड से यह भी स्पष्ट हुआ कि कथित बिक्री विलेखों में वन विभाग द्वारा कोई एनओसी जारी नहीं किया गया था। अदालत ने कहा कि इस मामले में जांच एजेंसियों की निष्क्रियता या पक्षपात का कोई प्रमाण नहीं है, इसलिए सीबीआइ या ईडी जांच का कोई औचित्य नहीं बनता। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि यह आदेश किसी भी आरोपित को क्लीन चिट नहीं है और लंबित कानूनी कार्रवाई कानून के अनुसार जारी रहेगी। हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता की साख और मंशा पर गंभीर सवाल उठाया है। सेवानिवृत्ति लाभ का भुगतान नहीं होने पर मांडर कालेज के प्राचार्य तलब झारखंड हाई कोर्ट ने व्याख्याता की मृत्यु के पांच वर्ष बाद भी मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति लाभ का भुगतान नहीं किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने मांडर कालेज की ओर से लगातार दो सुनवाई में कोई पक्ष नहीं रखे जाने और भुगतान संबंधी जानकारी नहीं देने पर कॉलेज के प्राचार्य को सात अगस्त को अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि उनके पति मांडर कालेज में व्याख्याता थे और वर्ष 2021 में उनका निधन हो गया था। हाई कोर्ट ने वर्ष 2024 में पंचम, छठे और सप्तम वेतनमान सहित सभी बकाया लाभ देने का आदेश दिया था। बाद में उच्च शिक्षा विभाग ने वेतनमान संबंधी बकाया राशि का भुगतान कर दिया, लेकिन मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति लाभ अब तक नहीं दिया गया। इस पर अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए प्राचार्य की व्यक्तिगत उपस्थिति सुनिश्चित करने का आदेश दिया।

CM योगी ने मां विंध्यवासिनी के दरबार में की पूजा-अर्चना, प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना

मुख्यमंत्री योगी ने मां विंध्यवासिनी के दरबार में की पूजा-अर्चना प्रवेश द्वार पर सदर विधायक रत्नाकर मिश्रा ने चुनरी ओढ़ाकर किया सीएम का स्वागत मीरजापुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को मां विंध्यवासिनी के दरबार में पहुंचे। उन्होंने मंत्रोच्चार के बीच मां विंध्यवासिनी का विधिवत दर्शन पूजन किया और उनकी आरती उतारी। सीएम करीब 10 मिनट मंदिर में रहे।  मुख्यमंत्री माता के दर्शन के लिए करीब सवा बारह बजे पहुंचे। मंदिर के प्रवेश द्वार पर सदर विधायक रत्नाकर मिश्रा ने चुनरी ओढ़ाकर उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में सभी देवी-देवताओं के दर्शन करने के बाद हवन कुंड की परिक्रमा की और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। सीएम को देखने के लिए मंदिर परिसर के आसपास गलियों में लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। सीएम ने हाथ उठाकर सभी का अभिवादन किया।

बिहार में MSME को बड़ा बढ़ावा, निवेशकों को 5 करोड़ तक सब्सिडी मिलेगी

पटना  बिहार एमएसएमई नीति-2026 का प्रारूप (मसौदा) जारी कर दिया गया है। इसके अंतर्गत अगले पांच वर्षों में एक करोड़ एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योग) इकाइयों का पंजीकरण, एक करोड़ से अधिक रोजगार सृजन के साथ 500 एमएसएमई इकाइयों को वैश्विक वैल्यू चेन से जोड़ने का लक्ष्य है। कोसी, भागलपुर, मुंगेर और पूर्णिया परिक्षेत्र में चार टेक्नोलॉजी एवं एक्सटेंशन सेंटर स्थापित होंगे। इसके साथ ही प्रतिवर्ष एक लाख उद्यमियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इच्छुक व्यक्ति इस मसौदा पर 15 दिनों के भीतर अपना सुझाव ई-मेल से दे सकते हैं। सुझावों के आधार पर नीति को अंतिम रूप दिया जाएगा। बिहार को पूर्वी भारत का प्रमुख औद्योगिक केंद्र बनाना उद्देश्य इस नीति का मूल उद्देश्य बिहार को पूर्वी भारत का प्रमुख औद्योगिक और विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) केंद्र बनाना है। इसमें निवेशकों के लिए अनुदान का विशेष प्रविधान है। उद्यमियों को ए श्रेणी के जिलों में 25 प्रतिशत और बी श्रेणी के जिलों में 30 प्रतिशत पूंजी सब्सिडी मिलेगी। सूक्ष्म उद्यमों को अधिकतम 25 लाख, लघु उद्यमों को 1.5 करोड़ और मध्यम उद्यमों को अधिकतम पांच करोड़ रुपये तक की पूंजी सब्सिडी मिलेगी। महिला, अनुसूचित जाति-जनजाति, पिछड़ा, अति-पिछड़ा, दिव्यांग और मंगलामुखी उद्यमियों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त पूंजी अनुदान मिलेगा। नैनो और मेगा एमएसएमई पार्क बनेंगे   प्रत्येक जिले में नैनो और मेगा एमएसएमई पार्क बनाए जाएंगे। 10 से 20 एकड़ क्षेत्र में नैनो पार्क तथा 20 एकड़ से अधिक क्षेत्र में मेगा पार्क होंगे। इसके अलावा कामन फैसिलिटी सेंटर, हेरिटेज क्लस्टर, परीक्षण प्रयोगशालाएं और प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक ढांचा विकसित किया जाएगा। एक्सपोर्ट सेल बनेगा   बिहार के उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए एक्सपोर्ट सेल, खरीदार-विक्रेता सम्मेलन और ई-कॉमर्स नेटवर्क भी मजबूत होगा। एमएसएमई मित्र और उद्योग सलाहकार नियुक्त होंगे प्रत्येक जिला उद्योग केंद्र (डीआईसी) में एमएसएमई केंद्र स्थापित होंगे। प्रखंड स्तर पर एमएसएमई मित्र और पंचायत स्तर पर उद्योग सलाहकार नियुक्त होंगे। ये उद्यमियों को उद्योग स्थापना, वित्तीय सहायता और सरकारी योजनाओं की जानकारी देंगे। एमएसएमई हेल्पलाइन, डिजिटल पोर्टल, मोबाइल ऐप और चैटबॉट डेवलप होंगे। महत्वपूर्ण प्रविधान     नई इकाइयों को पहले तीन वर्षों तक कर्मचारियों के ईपीएफ में नियोक्ता अंशदान की प्रतिपूर्ति     तीन वर्ष तक बिजली शुल्क पर 20 प्रतिशत अनुदान     रूफटॉप सोलर संयंत्र पर 25 प्रतिशत (अधिकतम पांच लाख रुपये), ऊर्जा एवं जल आडिट पर 75 प्रतिशत (अधिकतम एक लाख रुपये) तथा स्टाम्प ड्यूटी की शत प्रतिशत प्रतिपूर्ति     एसजीएसटी की 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति छह वर्षों तक     निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्रति वर्ष अधिकतम 20 लाख रुपये की सहायता  

हाईकोर्ट का बड़ा आदेश! DGP को सर्कुलर जारी करने के निर्देश, पुलिस अधिकारियों पर की कड़ी टिप्पणी

ग्वालियर मध्य प्रदेश में अपराधियों को कानूनी लूपहोल (कमियों) का फायदा पहुंचाकर कोर्ट से छुड़ाने वाले और अपनी ड्यूटी में घोर लापरवाही बरतने वाले पुलिस अफसरों पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने बड़ा और कड़ा प्रहार किया है। हाई कोर्ट की डबल बेंच ने तल्ख लहजे में टिप्पणी करते हुए कहा है कि "कुछ पुलिस अधिकारी वर्दी तो कानून की पहनते हैं, लेकिन उनका दिल अपराधियों के साथ धड़कता है।" न्यायालय ने साफ कर दिया है कि अगर कोई पुलिस अधिकारी किसी आरोपी को गिरफ्तार करते समय उसकी गिरफ्तारी का लिखित आधार नहीं सौंपता है, तो यह माना जाएगा कि उसने आरोपी को कोर्ट से रिहा कराने के उद्देश्य से 'जानबूझकर' ऐसा किया है। कोर्ट ने प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को एक महीने के भीतर सभी थाना प्रभारियों और जांच अधिकारियों के लिए 'सख्त चेतावनी सर्कुलर' जारी करने का अल्टीमेटम दिया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ठेंगा दिखा रहे मैदानी अफसर हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पुलिस मुख्यालय (PHQ) भोपाल की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर नाराजगी जताई। कोर्ट ने आदेश में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्देशों (मिहिर राजेश शाह मामला) के पालन में पुलिस मुख्यालय भोपाल द्वारा इसी साल 13 फरवरी 2026 को एक सर्कुलर जारी किया जा चुका है। इस सर्कुलर के बावजूद जमीनी स्तर पर थानों में पदस्थ जांच अधिकारी नियमों को सरेआम ठेंगा दिखा रहे हैं और आरोपियों को बिना लिखित कारण बताए गिरफ्तार कर रहे हैं, जिससे शातिर अपराधी तकनीकी आधार पर कोर्ट से बच निकलते हैं। कोर्ट ने कहा कि यह स्थिति समाज के लिए बेहद खतरनाक है। पुलिस विभाग का काम अपराधियों पर मुकदमा चलाना और निर्दोषों की रक्षा करना है, न कि अपराधियों को कानूनी चोर रास्तों से बचाना। गांजा तस्करी के आरोपी भाई को बचाने लगाई थी याचिका जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने यह तल्ख आदेश धर्मेंद्र लोधी द्वारा दायर एक बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। याचिकाकर्ता धर्मेंद्र ने दतिया जिले के बसई थाने में दर्ज एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के एक मामले में अपने भाई की गिरफ्तारी को इस आधार पर चुनौती दी थी कि पुलिस ने उसे गिरफ्तारी के कारण लिखित में नहीं दिए थे, इसलिए उसकी गिरफ्तारी अवैध है। हालांकि, जब कोर्ट ने रिकॉर्ड खंगाला तो पाया कि पुलिस ने आरोपी को एनडीपीएस एक्ट की धारा 50 का लिखित नोटिस दिया था और उसके पास से 86.850 किलोग्राम गांजा जब्त हुआ था। कोर्ट ने इसे कानूनी रूप से पर्याप्त मानते हुए तस्कर भाई को राहत देने से इनकार कर दिया और याचिका खारिज कर दी, लेकिन पुलिस की इस आम ढर्रे वाली कार्यप्रणाली पर गहरा रोष जताया। हाईकोर्ट के आदेश की मुख्य बातें · नियम: किसी भी आरोपी को कस्टडी में लेते समय उसे उसकी गिरफ्तारी के पुख्ता कारण लिखित में देना अनिवार्य है। · लापरवाही का मतलब: लिखित आधार न देना अब सिर्फ 'लापरवाही' नहीं, बल्कि अपराधी को फायदा पहुंचाने की 'जानबूझकर की गई साजिश' माना जाएगा। · निशाना: वर्दी की आड़ में अपराधियों से साठगांठ करने वाले पुलिसकर्मियों को विभाग से बाहर का रास्ता दिखाया जाए।

सेवानिवृत्ति आदेश रद्द! हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, CMHO डॉ. माधव प्रसाद हसानी अब 65 वर्ष तक देंगे सेवा

इंदौर  मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी को बड़ी राहत देते हुए उनके 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त किए जाने के आदेश को निरस्त कर दिया है। न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि डॉ. हसानी 65 वर्ष की आयु तक सेवा जारी रखने के पात्र हैं। डॉ. हसानी ने याचिका दायर कर 30 जनवरी 2026 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें 31 जुलाई 2026 को 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त करने के निर्देश दिए गए थे। याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि उन्होंने वर्ष 1999 में संविदा ग्रामीण चिकित्सा अधिकारी के रूप में सेवा प्रारंभ की थी और वर्ष 2005 में उनकी सेवाएं नियमित हुई थीं। इसके बाद उन्होंने लंबे समय तक क्लीनिकल सेवाएं दीं और बाद में मुख्य ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी तथा CMHO जैसे प्रशासनिक पदों पर कार्य किया।  याचिका में तर्क दिया गया कि मध्यप्रदेश शासन द्वारा मेडिकल अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष निर्धारित की गई है तथा पूर्व में डॉ. कांतिलाल साहू सहित कई मामलों में हाईकोर्ट इसी प्रकार का निर्णय दे चुका है। वहीं राज्य सरकार ने दलील दी कि 65 वर्ष तक सेवा का लाभ पाने के लिए नियमों में निर्धारित शर्तों का पालन आवश्यक है और याचिकाकर्ता उन शर्तों को पूरा नहीं करते। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि डॉ. हसानी वर्ष 1999 से लगातार चिकित्सा सेवाएं देते रहे हैं तथा उनके मामले के तथ्य पूर्व में दिए गए न्यायिक निर्णयों से मेल खाते हैं।  अदालत ने यह भी कहा कि मेडिकल अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं में अनुभवी डॉक्टरों की उपलब्धता बनाए रखना था। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि 30 जनवरी 2026 का सेवानिवृत्ति आदेश विधिसम्मत नहीं है और इसे निरस्त किया जाता है। साथ ही डॉ. माधव प्रसाद हसानी को 65 वर्ष की आयु तक सेवा में बने रहने की अनुमति प्रदान की जाती है। हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।  

Haryana News: BPL राशन कार्ड धारकों को अगले महीने से नहीं मिलेगा मुफ्त तेल, सरकार का बड़ा फैसला

चंडीगढ़. हरियाणा में बीपीएल परिवारों को गेहूं के साथ मिलने गले एक लीटर सरसों का तेल अगले माह से नहीं मिलेगा। उसकी जगह उन्हें तेल की राशि देने पर प्रदेश सरकार विचार कर रही है। हालांकि अभी तय नहीं हुआ है कि राशि दी जाए के उसकी जगह कुछ अन्य खाद्य पदार्थ दिया जाए। एक सप्ताह के अंदर यह तय कर लिया जाएगा। अगर तेल दिया गया तो उसकी राशि सीधे लाभार्थी के खाते में डाली जाएगी। बता दें कि पश्चिम एशिया में युद्ध संकट के चलते पाम तथा सोयाबीन तेल का आयात प्रभावित होने से सरसों में उछाल आया था। इसके चलते मंडियों में सरसों की सरकारी खरीद कम हुई थी। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से अधिक अधिक रेट मिलने से किसानों ने बाजार में सरसों बेच दी थी। सरकारी एजेंसियों को तय लक्ष्य से कम सरसों मिला था। हालांकि सरकार ने इस वर्ष 6200 रुपये प्रति क्विंटल सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया था, जो पिछले साल के मुकाबले 250 रुपये प्रति क्विंटल अधिक था। लेकिन बाजार में सरसों न्यूनतम समर्थन मूल्य से डेढ़ से दो हजार रुपये प्रति क्विंटल अधिक में बिक रही थी। पश्चिम एशिया में युद्ध संकट के चलते पाम तथा सोयाबीन तेल का दूसरे देशों से होने वाला आयात बुरी तरह से प्रभावित होने के चलते सरसों की मांग बढ़ गई थी। किसानों ने फायदा होते देख सरकारी एजेंसियों के पास जाने के बजाय प्राइवेट खरीदारों को फसल बेच दी थी। अंत्योदय अन्न योजना में होगा बदलाव हरियाणा सरकार अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) यानी गुलाबी राशन कार्ड धारकों के लिए गेहूं वितरण का नियम बदलने जा रही है। अभी तक एक राशन कार्ड पर हर महीने 35 किलो गेहूं मिलता है। अब नई व्यवस्था में हर पात्र सदस्य को 7 किलो गेहूं दिया जाएगा। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने इसकी तैयारी पूरी कर ली है। संभव है कि अगले महीने से नया नियम लागू कर दिया जाएगा। इस बदलाव से बड़े परिवारों को फायदा होगा जबकि पांच से कम सदस्यों वाले परिवारों को पहले की तुलना में कम गेहूं मिलेगा।

पूर्वी चंपारण में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, नकली नोट गिरोह का पर्दाफाश

पूर्वी चंपारण बिहार के पूर्वी चंपारण में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस ने जिल में एक करोड़ रुपये के जाली नोट बरामद किए हैं। जाली नोट मिलने से पुलिस के कान खड़े हो गए हैं। दरअसल पुलिस ने यहां कोटपा प्रखंड में भोपतपुर थाने के वीरती टोला गांव में छापा मारा था। इस रेड में डीआईयू टीम के साथ पांच थानों की पुलिस शामिल थी। पुलिस की दबिश के बाद यहां से भारी मात्रा में जाली नोट मिले। छापेमारी में जाली नोट के साथ-साथ सोना के 38 बिस्किट और 13 लाख रुपए नकदी भी बरामद कि है। बताया जा रहा है कि पुलिस ने मौके से अवैध हथियार, कारतूस और गाड़ी भी जब्त की है। पुलिस की इस रेड से इलाके में हड़कंप मच गया है। कुछ मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, रेड से पहले भोपतपुर कल्याणपुर इलाके की पुलिस ने घेराबंदी कर दी थी ताकि कोई भी वहां से भाग नहीं सके। इसके बाद पुलिस ने 5 संदिग्ध लोगों को हिरासत में भी लिया। इन सभी से पुलिस फिलहाल पूछताछ कर रही है। कुछ मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस रेड के बाद पुलिस ने जाली नोट के मुख्य सरगना सुलेमान अंसारी को भी पकड़ा है। इस बात की आशंका जताई जा रही है कि वो जाली नोट के धंधे के साथ-साथ असली और नकली सोने के फेरबदल के धंधे में भी शामिल था। यह भी कहा जा रहा है कि जांच टीम इस मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर भी जांच कर रही है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि जाली नोट का सोर्स क्या है? मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से यह भी बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई SDPO सदर-1 एवं सदर-2 जितेश पांडेय के नेतृत्व में की गई थी। अभियान में दो प्रशिक्षु डीएसपी, पांच थानों की पुलिस, जिला आसूचना इकाई (DIU) और अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे। पुलिस टीम ने कई घंटों तक अलग-अलग स्थानों पर तलाशी ली और संदिग्ध सामान को अपने कब्जे में लिया। पुलिस इसकी जांच-पड़ताल मेें जुटी है। यह भी कहा जा रहा है कि जाली नोट के धंधे से जुड़े लोग आम तौर पर लोगों का भरोसा पहले जीतते थे। इसके बाद वो कथित तौर पर पहली बार लोगों को नकली की जगह असली नोट दिया करते थे। जब कोई शख्स इन शातिरों पर भरोसा कर लेता था तब वो उसे असली नोट के बदले जाली नोट दे दिया करते थे। हालांकि, पुलिस अभी इसकी जांच-पड़ताल में जुटी हुई है।

Punjab Ration News: लाखों कार्डधारकों के लिए खुशखबरी, PM गरीब कल्याण अन्न योजना से मिलेगी राहत

लुधियाना. खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के कंट्रोलर लखबीर सिंह संधू और कंट्रोलर सरताज सिंह चीमा की अगुवाई में गठित विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों की विभिन्न टीमों द्वारा “प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना” के तहत लुधियाना जिले से संबंधित कुल 4,54,137 राशन कार्ड धारकों में से 4,24,132 परिवारों को उनके हिस्से का गेहूं बांटने का काम मुकम्मल कर लिया गया है। केंद्र सरकार द्वारा लुधियाना जिले से संबंधित साढ़े 4 लाख से अधिक लाभपात्र परिवारों के लिए जारी किए गए 25159 मीट्रिक टन अनाज के कोटे को 1602 राशन डिपुओं के मार्फत बांटने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। विभाग द्वारा योजना के मुताबिक राशन कार्ड धारकों को प्रति महीना 5 किलो के हिसाब से 3 महीने की कुल 15 किलोग्राम गेहूं फ्री मुहैया करवाई जा रही है, जो कि 1 अप्रैल से लेकर 30 जून तक के 3 महीनों का कोटा है। विभागीय अधिकारियों द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक गेहूं बांटने का काम 93.39 प्रतिशत मुकम्मल कर लिया गया है जबकि बाकी रहते परिवारों को गेहूं बांटने का काम भी युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। वहीं, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा लाभ पात्र परिवारों को बांटी जा रही राशन किटों संबंधी जानकारी देते हुए कंट्रोलर लखबीर सिंह संधू और कंट्रोलर सरताज सिंह चीमा ने बताया कि विभाग को अभी तक 2,80000 राशन किटें प्राप्त हुई हैं जिनमें दाल, नमक, चीनी, हल्दी पाउडर और सरसों का तेल शामिल है। उन्होंने बताया कि योजना से संबंधित 2,51000 परिवारों को उक्त राशन किटें भेंट की जा चुकी हैं। एक सवाल के जवाब में अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल लुधियाना ईस्ट इलाके में 923 और वैस्ट इलाके में 679 राशन डिपो चल रहे हैं।