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उज्जैन जिले में जल संरक्षण और जनजागरूकता पर आधारित प्रतियोगिताओं का आयोजन

जल गंगा संवर्धन अभियान उज्जैन जिले में जल संरक्षण एवं जनजागरूकता के लिए आयोजित हुई विभिन्न प्रतियोगिताएं उज्जैन उज्जैन जिले में जल संरक्षण एवं पर्यावरण संवर्धन के उद्देश्य से “जल गंगा संवर्धन अभियान 2026” का वृहद स्तर पर संचालन किया जा रहा है। शासकीय कालिदास कन्या महाविद्यालय के मार्गदर्शन में जिले के शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों द्वारा विभिन्न जनजागरूकता एवं सामाजिक गतिविधियों का आयोजन कर विद्यार्थियों एवं आमजन को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है। अभियान से जल स्रोतों के संरक्षण, वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण तथा भू-जल संवर्धन के प्रति सकारात्मक संदेश प्रसारित किया जा रहा है। शासकीय कालिदास कन्या महाविद्यालय के नेतृत्व में “जल गंगा संवर्धन अभियान-2026” के अंतर्गत उज्जैन जिले के 15 शासकीय एवं 07 अशासकीय महाविद्यालयों में विभिन्न जनजागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया। इन गतिविधियों में निबंध, पोस्टर, स्लोगन, वाद-विवाद, भाषण प्रतियोगिता, व्याख्यान तथा रैली शामिल थीं। इन कार्यक्रमों में 1866 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। अभियान अंतर्गत विद्यार्थियों एवं महाविद्यालयों द्वारा मानव श्रृंखला, रंगोली, वृक्षारोपण, तालाबों की सफाई, पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम तथा जल स्रोतों के संरक्षण जैसे रचनात्मक एवं सामाजिक कार्य भी किए गए। इसके माध्यम से जल संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया। उज्जैन जिले के 13 महाविद्यालयों में रैन वॉटर हार्वेस्टिंग की सुविधा उपलब्ध है। यह भू-जल स्तर बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसके अतिरिक्त जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जिले के 17 महाविद्यालयों द्वारा कार्य योजना तैयार की गई है, जिसके तहत 1086 वृक्षारोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। योजना से पर्यावरण संरक्षण एवं जल संवर्धन को बढ़ावा दिया जाएगा। जल गंगा संवर्धन योजना के अंतर्गत आयोजित रैलियों में विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया तथा जल संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुँचाने का पुरजोर प्रयास किया।  

योगी कैबिनेट फुल होने के बाद, BJP की 2024 की तैयारी और चुनावी स्थिति पर सवाल

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल में दूसरा कैबिनेट विस्तार रविवार किया गया है. 6 नए मंत्रियों को शपथ दिलाई गई तो दो राज्य मंत्रियों को प्रमोशन दिया गया. मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक संदेश देने कवायद की गई है, क्योंकि 2024 में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 'पीडीए' फॉर्मूले से बीजेपी को पीछे धकेल दिया था।  राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कुल आठ नेताओं को मंत्री पद की शपथ दिलाई, जिनमें छह नए चेहरे शामिल हैं. बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी और सपा के बागी विधायक मनोज कुमार पांडे को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है तो कृष्णा पासवान, कैलाश सिंह राजपूत, सुरेंद्र दिलेर और हंसराज विश्वकर्मा ने राज्यमंत्री के तौर पर शपथ ली।  योगी मंत्रिमंडल विस्तार में अजीत सिंह पाल और सोमेंद्र तोमर ने राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में शपथ ली. ये दोनों ही नेता पहले से योगी सरकार में राज्यमंत्री थे, जिन्हें अब प्रमोशन देकर अब स्वतंत्र प्रभार मंत्री बनाया गया है. इस तरह से योगी मंत्रिमंडल अब पूरी तरह फुल हो चुका है, लेकिन सवाल यह है कि कैबिनेट विस्तार से बीजेपी के बिगड़े सियासी समीकरण को कितनी मजबूती मिल पाएगी?  कैबिनेट के जरिए बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग योगी मंत्रिमंडल का विस्तार कर बीजेपी ने दलित, पिछड़े और ब्राह्मण समाज केतबकों को बड़ा संदेश दे दिया है. योगी सरकार से नाराज माने जा रहे ब्राह्मण समाज से मनोज पांडेय को मंत्री बना कर बीजेपी ने उन्हें लुभाने का प्रयास किया है. इसी तरह भूपेंद्र चौधरी को पश्चिमी यूपी के जाट समाज को जोड़े रखने का दांव है तो सोमेंद्र तोमर को राज्यमंत्री पद से प्रमोशन स्वतंत्र प्रभार देकर गुर्जर समाज को सियासी संदेश दिया है।  कैबिनेट विस्तार में दलित चेहरे को तौर पर कृष्णा पासवान और सुरेंद्र दिलेर को राज्यमंत्री बनाया गया, जिनके जरिए गैर जाटव दलित वोटों को साधने की कवायद की है. कृष्णा पासवान पासी समुदाय से हैं तो सुरेंद्र दिलेर वाल्मीकि समुदाय से आते हैं. इन दोनों ही नेताओं दलित प्रतिनिधित्व के रूप में कैबिनेट में जगह दी है ताकि दलित समाज के विश्वास को बनाए रखा जा सके।  वहीं, लोधी, पाल और विश्वकर्मा जैसी पिछड़ी जातियों पर भी फोकस किया गया. पाल समुदाय से आने वाले अजीत सिंह पाल को राज्यमंत्री से प्रमोशन कर स्वतंत्र प्रभार मंत्री बना दिया गया है. इसी तरह लोधी जाति से आने वाले कैलाश सिंह राजपूत बनाए गए हैं. हंसराज विश्वकर्मा को राज्यमंत्री के तौर पर शामिल कर ओबीसी की लोहार जाति को सियासी संदेश दिया है।  बीजेपी ने दिया सियासी संदेश,  राह में कांटे ही कांटे?  योगी कैबिनेट विस्तार के जरिए बीजेपी ने राजनीतिक रूप से इसका सबसे बड़ा संदेश दिया है. बीजेपी ने जिस तरह से मंत्रिमंडल में ब्राह्मण, जाट, गुर्जर, लोध, पासवान और पाल समाज की नुमाइंदगी दी है, उसके जरिए ओबीसी की उन्हीं जातियों पर फोकस किया है, जो पहले से ही बीजेपी के साथ जुड़ी हुई हैं. सपा के पीडीए फॉर्मूले के साथ 2024 में नहीं गई थी।  बीजेपी गैर-यादव OBC की राजनीति से आगे बढ़कर अन्य पिछड़ी जाति पर काम कर रही है. 2024 लोकसभा चुनाव में यूपी में बीजेपी को जिन इलाकों और जातियों में नुकसान हुआ था, पार्टी अब उसी गैप को भरने की कोशिश कर रही है. पश्चिम यूपी में जाट समीकरण लोकसभा में पूरी तरह स्थिर नहीं दिखे थे. इसी तरह मायावती के कमजोर से होने से दलित वोट का एक हिस्सा समाजवादी पार्टी की ओर गया था।  अखिलेश यादव ने पीडीए के जरिए पिछड़ी जातियों को भी साथ जोड़ने में कामयाब रहे. इसलिए इस विस्तार के जरिए इन सभी तबकों को संदेश दिया जा रहा है कि सत्ता में उनकी हिस्सेदारी है, लेकिन सवाल यही है कि अखिलेश यादव के 'पीडीए फॉर्मूले' को बीजेपी क्या काउंटर कर पाएगी।  2024 के बिगड़े समीकरण कितना दुरुस्त होगा?  बीजेपी ने योगी मंत्रिमंडल विस्तार में जिस तरह ब्राह्मण, जाट, गुर्जर, लोध, पासवान और पाल समाज की नुमाइंदगी दी है, उससे 2024 में बीजेपी के अलग होने वाली जातियों को क्या फिर से बीजेपी जोड़ पाएगी? ये इसीलिए भी कहा जा रहा है कि 2019 की तुलना में बीजेपी 2024 में 62 सीटों से घटकर 33 सीट पर सिमट गई थी।  सपा 37 लोकसभा सीटें जीतने में कामयाब रही तो उसकी सहयोगी कांग्रेस को 6 सीटें मिली थी. 2024 के चुनाव नतीजे को विधानसभा क्षेत्र के लिहाज से देखें तो सपा और कांग्रेस को करीब 128  विधानसभा सीटों पर बढ़त मिली थी. बीजेपी के साथ जुड़ा रहा कुर्मी, मौर्य जैसे ओबीसी वोटर के साथ-साथ राजपूत और दलित वोटर भी छिटक गए थे. इसके चलते ही बीजेपी लोकसभा चुनाव में सपा से पीछे रह गई थी।  बीजेपी ने कुर्मी समाज के विश्वास को जीतने के लिए पकंज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है, लेकिन मौर्य और राजपूत समाज को साधने की कवायद कैबिनेट के जरिए नहीं हो सकी. इसीलिए बृजभूषण शरण सिंह और विधायक आशा मौर्य का दर्द छलक उठा. आशा मौर्य ने कहा कि लगता है पार्टी को अब मौर्य समाज की आवश्यकता नहीं रह गई और बाहर से आए दलबदलुओं को प्राथमिकता दी गई है।  वहीं, बृजभूषण सिंह कैबिनेट विस्तार से नाखुश दिखे. माना जा रहा था कि वे अपने बेटे प्रतीक भूषण के लिए मंत्री पद चाहते थे. किसी ठाकुर चेहरे को जगह न मिलने पर उन्होंने 'X' पर शायराना अंदाज में निशाना साधा कि शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है, जिस शाख पर बैठे हो वह टूट भी सकती है. उनके इस पोस्ट को लेकर साफ समझा जा सकता है कि किस तरह से नाराज हैं. मौर्य और ठाकुर वोटों को साधे रखने के लिए बीजेपी ने कोई सियासी दांव नहीं चल रही है।  पांडेय और चौधरी बीजेपी के कितन काम आएंगे?  ब्राह्मण बीजेपी के साथ पहले ही मजबूती से खड़ा है और मनोज पांडेय मंत्री बनकर क्या खिसकते हुए ब्राह्मण समाज को जोड़े रख पाएंगे, ये सवाल इसीलिए है कि सपा में रहते हुए ब्राह्मणों को अखिलेश के करीब नहीं ला सके थे. अखिलेश से बगावत करने का भले ही उन्हें इनाम मिल गया है, लेकिन ब्राह्मण चेहरे के तौर पर उनकी स्वीकार्यता अपने क्षेत्र से बाहर नहीं है।  पश्चिम … Read more

बाहर ATM, अंदर नाई की दुकान! कैश लेने गए लोग वीडियो देखकर चौंके

 पटना  पटना के दानापुर में एक ऐसा नजारा देखने को मिल रहा है, जिसे देखकर लोग चौंक जा रहे हैं. यहां एक पुराने SBI ATM के अंदर अब कैश नहीं, बल्कि हेयर कटिंग और शेविंग का काम हो रहा है. बाहर से पूरा सेटअप अब भी बैंक ATM जैसा ही दिखाई देता है, लेकिन अंदर घुसते ही लोगों को कुर्सी, शीशा और हेयर ड्रायर नजर आते हैं।  मामला दानापुर के रूपसपुर इलाके स्थित उषा विला का है. स्थानीय लोगों के मुताबिक यहां कई सालों तक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का ATM संचालित होता था. आसपास रहने वाले लोग यहीं से से कैश निकालते थे. लेकिन कुछ महीने पहले ATM को वहां से हटा दिया गया. हैरानी की बात यह है कि ATM हटने के बाद भी उसका बोर्ड, बाहरी डिजाइन और पूरा ढांचा वैसे का वैसा ही छोड़ दिया गया. इसी खाली जगह को बाद में किराये पर दे दिया गया और अब वहां एक सैलून चल रहा है. बाहर से गुजरने वाले लोग आज भी इसे ATM समझ लेते हैं. कई बार तो लोग सीधे कैश निकालने के लिए अंदर पहुंच जाते हैं।  स्थानीय लोगों का कहना है कि शुरुआत में उन्हें भी समझ नहीं आया कि आखिर ATM के अंदर सैलून कैसे खुल गया. अब यह जगह इलाके में चर्चा का विषय बन चुकी है. आसपास के लोग अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को भी यह 'अनोखा ATM' दिखाने ले जाते हैं. कुछ लोग मजाक में कहते हैं कि यहां कैश नहीं, हेयरकट मिलता है. वहीं सोशल मीडिया पर भी इस जगह की तस्वीरें और वीडियो तेजी से शेयर किए जा रहे हैं. लोग इस पर तरह-तरह के मजेदार कमेंट कर रहे हैं।  इलाके के एक युवक ने बताया कि कई बार रात को बाहर से आने वाले लोग जल्दी में ATM समझकर अंदर चले जाते हैं. उन्हें लगता है कि मशीन अंदर होगी, लेकिन सामने सैलून देखकर पहले हैरान होते हैं और फिर हंसने लगते हैं. दरअसल, ATM हटने के बाद बैंक की तरफ से बोर्ड या बाहरी पहचान नहीं हटाई गई. यही वजह है कि लोगों का भ्रम अब भी बना हुआ है. हालांकि स्थानीय लोग अब इस जगह को 'ATM वाला सैलून' कहकर बुलाने लगे हैं। 

ईमेल और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से NRI समस्याओं का समाधान, 13 मई को पंजाब सरकार का ऑनलाइन मिलनी

चंडीगढ़  विदेशों में बसे पंजाबियों की समस्याओं और शिकायतों को सुनने तथा उनके समयबद्ध निपटारे को सुनिश्चित करने के लिए पंजाब सरकार द्वारा 13 मई 2026, बुधवार को सुबह 11:00 बजे (भारतीय समयानुसार) “ऑनलाइन मिलनी” का आयोजन किया जा रहा है। इस संबंध में जानकारी देते हुए पंजाब के एन.आर.आई. मामलों के मंत्री डॉ. रवजोत सिंह ने बताया कि इस ऑनलाइन मिलनी के दौरान वे विदेशों में रह रहे पंजाबियों के साथ सीधा संवाद कर उनकी समस्याओं, शिकायतों और सुझावों को सुनेंगे। उन्होंने कहा कि इस दौरान प्राप्त होने वाली शिकायतों के त्वरित और प्रभावी समाधान के लिए संबंधित विभागों और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। डॉ. रवजोत सिंह ने बताया कि संबंधित व्यक्ति अपनी शिकायतें minister.pa@punjab.gov.in ईमेल पर भेज सकते हैं। इसके अलावा, ऑनलाइन मिलनी में भाग लेने के लिए रजिस्ट्रेशन https://forms.gle/KKUutEpVTeccLSta6⁠लिंक के माध्यम से करवाया जा सकता है। उन्होंने आगे बताया कि निर्धारित दिन और समय के अनुसार “ऑनलाइन मिलनी” में शामिल होने के लिए https://new.bharatvc.nic.in/join/8833894922⁠ लिंक का उपयोग किया जा सकता है। जॉइन करने के लिए आई.डी. 8833894922 तथा पासवर्ड 742627 होगा। एन.आर.आई. मंत्री ने विदेशों में बसे समस्त पंजाबियों से इस “ऑनलाइन मिलनी” में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की है ताकि उनकी समस्याओं का प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जा सके। संगरूर सहित कई जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए इसके बाद वर्ष 2024 में फरवरी महीने के दौरान पठानकोट, शहीद भगत सिंह नगर, फिरोजपुर और संगरूर सहित कई जिलों में भी कार्यक्रम आयोजित किए गए। अब पंजाब सरकार ने इस व्यवस्था को और व्यवस्थित करते हुए मई 2026 से महीने में दो बार एनआरआई मिलनी आयोजित करने का फैसला लिया है। इनमें एक मिलनी ऑनलाइन और दूसरी व्यक्तिगत अथवा डिवीजन स्तर पर आयोजित की जाएगी। पहली बार 609 शिकायतें आई थी सरकार की तरफ से दिसंबर 2022 में हुई पहली एनआरआई मिलनी के दौरान करीब 609 शिकायतें आई थीं। फरवरी 2024 में हुई मिलनियों में 309 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से 256 का समाधान कर दिया गया। वहीं, जनवरी 2025 तक ऑनलाइन सत्रों के जरिए 542 से ज्यादा शिकायतें मिलीं, जिनमें से 488 मामलों का निपटारा हो चुका है।  

UCC को लेकर MP में सक्रियता: जनसुनवाई जिलों में, दिल्ली में समिति की बैठक और आदिवासी प्रावधानों का मंथन

भोपाल  मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। राज्य सरकार द्वारा गठित समिति के गठन के बाद अब उसके कामकाज की रूपरेखा तैयार की जा रही है। समिति की अध्यक्ष पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई और अन्य सदस्यों की सेवा शर्तों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसके साथ ही मंगलवार को दिल्ली में समिति की पहली बैठक आयोजित होने की संभावना है। सरकार प्रदेशभर में लोगों की राय जानने के लिए जिला स्तर और भोपाल में जनसुनवाई आयोजित करने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही एक विशेष वेबसाइट भी बनाई जा रही है, जहां नागरिक अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। समिति का कार्यालय दिल्ली में स्थापित किए जाने की तैयारी है।   आदिवासी समुदाय को दायरे से बाहर रखने पर मंथन जानकारी के अनुसार, प्रदेश के आदिवासी समुदायों को यूसीसी के कुछ प्रावधानों से अलग रखने पर भी विचार किया जा रहा है। मध्य प्रदेश में बड़ी आदिवासी आबादी निवास करती है और उनके पारंपरिक रीति-रिवाज व सामाजिक कानून लंबे समय से प्रचलित हैं। ऐसे में सरकार उत्तराखंड और गुजरात की तर्ज पर आदिवासी परंपराओं को संरक्षित रखने के विकल्प पर मंथन कर रही है, ताकि किसी प्रकार का सामाजिक विवाद न उत्पन्न हो। यूसीसी के मसौदे में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी विशेष प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं। समिति को ऐसे संबंधों के पंजीयन, अधिकारों और जिम्मेदारियों पर सुझाव देने को कहा गया है। माना जा रहा है कि मध्य प्रदेश सरकार इस मुद्दे पर उत्तराखंड और गुजरात की तुलना में अधिक सख्त रुख अपना सकती है।  

छत्तीसगढ़ के लाल अजय गुप्ता: तेंदूपत्ता से लेकर IFS तक का सफर

रायपुर छत्तीसगढ़ के वनांचलों से अक्सर संघर्ष की खबरें आती हैं, लेकिन इस बार रायगढ़ से एक ऐसी कहानी निकली है जो उम्मीदों को नई उड़ान दे रही है। संबलपुरी गांव के अजय गुप्ता, जिनका बचपन जंगलों में तेंदूपत्ता और महुआ बीनते हुए बीता, अब देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवाओं में से एक भारतीय वन सेवा के अधिकारी बनने जा रहे हैं। अजय ने IFS परीक्षा में ऑल इंडिया 91वीं रैंक हासिल की है। UPSC में भी गाड़े झंडे अजय की कामयाबी केवल IFS तक सीमित नहीं है। उन्होंने इस साल सिविल सेवा परीक्षा यानी UPSC में भी 452वीं रैंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले अजय ने अपनी स्कूली शिक्षा में भी मेधावी होने का प्रमाण दिया था; उन्होंने 10वीं में 92.66% और 12वीं में 91.40% अंक प्राप्त किए थे। NIT रायपुर ने दिया बड़ा विजन अपनी सफलता का श्रेय अजय एनआईटी रायपुर को देते हैं। अजय का कहना है कि कॉलेज जाने से पहले उनके सपने सिर्फ गांव तक सीमित थे, लेकिन एनआईटी के माहौल ने उन्हें बड़े लक्ष्य तय करने की प्रेरणा दी। आर्थिक तंगी के बावजूद स्कॉलरशिप और सरकारी योजनाओं के सहारे उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। छुट्टियों के दौरान वे घर लौटकर परिवार के साथ आज भी आजीविका के कामों में हाथ बंटाते थे। बस्तर के अनुभव ने दिखाया रास्ता अजय ने बताया कि बस्तर में ग्रामीण विकास के कार्यों से जुड़ने और वनों के साथ उनके पुराने जुड़ाव ने ही उन्हें वन सेवा चुनने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अजय की सफलता को वनवासी परिवारों के संघर्ष की जीत बताया है, वहीं वन मंत्री केदार कश्यप ने इसे दूरस्थ क्षेत्रों की आकांक्षाओं का प्रतीक कहा है। आर्थिक संघर्ष के बीच शिक्षा को बनाया हथियार अजय ने इस साल सिविल सेवा परीक्षा भी 452वीं रैंक के साथ पास की है। NIT ने अजय को बड़े लक्ष्य रखने की नई सोच दी। आर्थिक तंगी के बावजूद, उन्होंने अपनी पढ़ाई में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया, 10वीं कक्षा में 92.66% और 12वीं कक्षा में 91.40% अंक हासिल किए। अजय के इस बेहतरीन प्रदर्शन की बदौलत उन्हें नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, रायपुर में दाखिला मिला, जहां स्कॉलरशिप ने तीन साल तक उनकी पढ़ाई में आर्थिक मदद की। अजय ने पहले उनके सपने सिर्फ उनके गांव तक ही सीमित थे, लेकिन NIT ने उनकी सोच का दायरा बढ़ा दिया। NIT ने बदली सोच उन्होंने कहा कि NIT में दाखिला लेने के बाद ही मुझे यह एहसास हुआ कि मैं और भी बड़े लक्ष्य हासिल कर सकता हूं। उन्होंने आगे बताया कि जंगल से उनका जुड़ाव और बस्तर में ग्रामीण विकास के लिए किए गए कामों ने ही उन्हें सिविल सेवाओं में जाने का लक्ष्य तय करने में मदद की। पढ़ाई के साथ-साथ अपने परिवार की मदद करने के बीच तालमेल बिठाते हुए, वह छुट्टियों के दौरान घर लौटकर रोज़ी-रोटी से जुड़े कामों में हाथ बंटाते थे। राज्य सरकार की छात्रवृत्तियों और वनोपज से जुड़ी सहायता योजनाओं ने उन्हें अपनी परीक्षाओं पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करने में मदद की। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि अजय की यह सफलता जंगल में रहने वाले परिवारों के मजबूत हौसले को दर्शाती है, जबकि वन मंत्री केदार कश्यप ने इसे दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों की ऊंची आकांक्षाओं का प्रतीक बताया। सरकारी योजनाओं ने पंखों को दी मजबूती अजय की इस लंबी उड़ान में छत्तीसगढ़ सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं ने कैशलेस सपोर्ट और आर्थिक संबल प्रदान किया। लघु वनोपज संघ की छात्रवृत्ति ने स्कूल से कॉलेज तक की पढ़ाई के दौरान इस छात्रवृत्ति ने आर्थिक बोझ को कम किया। राज्य शासन की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना से उन्हें निरंतर वित्तीय सहायता मिली, जिससे वे अपनी तैयारी पर ध्यान केंद्रित कर सके। अजय की सफलता छत्तीसगढ़ के वनाश्रित परिवारों के अटूट विश्वास की जीत: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने रायगढ़ जिले के अजय गुप्ता को भारतीय वन सेवा में चयनित होने पर बधाई देते हुए कहा कि अजय ने न केवल अपने माता-पिता का मान बढ़ाया है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि एक ऐसा युवा जिसने स्वयं जंगलों में तेंदूपत्ता और महुआ संग्रहित किया, आज उन्हीं वनों के संरक्षण की जिम्मेदारी संभालने जा रहा है। हमारी सरकार की लघु वनोपज संघ छात्रवृत्ति और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं ने अजय जैसे प्रतिभाशाली युवाओं की राह आसान की है। अजय की उपलब्धि यह दर्शाती है कि सही अवसर मिलने पर हमारे ग्रामीण अंचल के युवा भी देश की सर्वोच्च सेवाओं में अपना स्थान सुनिश्चित कर सकते हैं। वन मंत्री ने जताया गौरव, हजारों परिवारों के सपनों का प्रतीक वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने अजय गुप्ता को फोन कर बधाई दी और उनकी उपलब्धि को ऐतिहासिक बताया। मंत्री जी ने कहा कि अजय की सफलता छत्तीसगढ़ के उन हजारों वनाश्रित परिवारों की जीत है जो जंगलों के बीच रहकर बड़े सपने देखते हैं। यह साबित करता है कि हमारी योजनाओं का उद्देश्य केवल आर्थिक मदद देना नहीं, बल्कि ऐसे ही सशक्त भविष्य का निर्माण करना है। युवाओं के लिए नया आदर्श अजय गुप्ता आज उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनकर उभरे हैं जो सीमित संसाधनों में IFS जैसी कठिन परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि यदि मेहनत सच्ची हो और शासन का साथ मिले, तो वनांचल का कोई भी युवा देश के शीर्ष पद तक पहुँच सकता है।    

BJP में राष्ट्रीय कार्यकारिणी के लिए छत्तीसगढ़ से पांच नामों पर नजर, 12 मई को होगी बैठक

रायपुर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन इस महीने के आखिरी सप्ताह तक होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, छत्तीसगढ़ से पांच नेताओं को राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल किया जा सकता है। भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश 12 मई को प्रदेश दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरान वे मुख्यमंत्री सहित प्रदेश के शीर्ष नेताओं से बैठक कर इस विषय पर चर्चा कर सकते हैं। कई नेताओं के नाम चर्चा में जानकारी के मुताबिक, छत्तीसगढ़ के क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल और भाजपा संगठन महामंत्री पवन साय कार्यकारिणी के पदेन सदस्य रहेंगे। इसके अलावा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन अन्य पांच सदस्यों के नाम तय करेंगे। कोंडागांव विधायक और पूर्व मंत्री लता उसेंडी को राष्ट्रीय कार्यकारिणी में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की चर्चा है। वहीं खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह, बस्तर सांसद महेश कश्यप, रेणुका सिंह और भावना बोहरा के नाम भी संभावित सूची में बताए जा रहे हैं। उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा को भी कार्यकारिणी में शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है। 12 और 13 मई को अहम बैठकें छत्तीसगढ़ भाजपा की महत्वपूर्ण बैठकें 12 और 13 मई को रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में आयोजित होंगी। 12 मई को शाम छह बजे कोर कमेटी की बैठक होगी, जबकि शाम 7:30 बजे प्रदेश पदाधिकारियों की चर्चा आयोजित की जाएगी। 13 मई को सुबह 10 बजे प्रदेश कार्यसमिति की बैठक होगी। भाजपा प्रदेश महामंत्री डॉ. नवीन मार्कंडेय ने बताया कि बैठकों में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, प्रदेश अध्यक्ष किरण देव और राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश वरिष्ठ नेताओं का मार्गदर्शन मिलेगा।

1.25 करोड़ लाड़ली बहनों को मिलेगी 36वीं किश्त, CM यादव करेंगे अंतरण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 13 मई को नरसिंहपुर से 1835 करोड़ की राशि का अंतरण 1.25 करोड़ लाड़ली बहनों को मिलेगी 36वीं किश्त नरसिंहपुर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 13 मई को मध्यप्रदेश की करोड़ों महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और सम्मान के लिये नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव में ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’ की 36वीं किश्त जारी करेंगे। प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख 22 हजार 542 लाड़ली बहनों के बैंक खातों में 1,835 करोड़ 67 लाख 29 हजार 250 रूपये की राशि सिंगल क्लिक से अंतरित की जाएगी। लाड़ली बहना योजना महिलाओं के जीवन में आर्थिक सुरक्षा, आत्मविश्वास और सम्मान का आधार बन चुकी है। नियमित आर्थिक सहायता से महिलाओं की परिवार के निर्णयों में भागीदारी बढ़ी है, पोषण एवं स्वास्थ्य स्तर में सुधार हुआ है और ग्रामीण तथा शहरी दोनों क्षेत्रों में महिलाओं की आर्थिक भूमिका मजबूत हुई है। योजना की शुरुआत से अब तक सशक्तिकरण की यात्रा निरंतर जारी वर्ष 2023 जून में शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी लाड़ली बहना योजना में अप्रैल 2026 तक 35 मासिक किस्तों का सफलतापूर्वक अंतरण किया जा चुका है। मई 2026 में जारी की जा रही राशि योजना की 36वीं किश्त जारी होगी। जून 2023 से अप्रैल 2026 तक महिलाओं के खातों में कुल 55,926.51 करोड़ रूपये की राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से जमा की जा चुकी है। राशि में क्रमिक वृद्धि: 1,000 से बढ़कर 1,500 रूपये प्रतिमाह योजना के प्रारंभ में प्रत्येक पात्र महिला को 1,000 रूपये प्रतिमाह प्रदान किए जाते थे। अक्टूबर 2023 में इसे बढ़ाकर 1,250 रूपये प्रतिमाह किया गया। इसके बाद नवंबर 2025 से राशि में पुनः वृद्धि कर इसे 1,500 रूपये प्रतिमाह कर दिया गया। सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के अंतर्गत कम राशि प्राप्त करने वाली महिलाओं को भी इस योजना के माध्यम से अतिरिक्त सहायता देकर कुल देय राशि सुनिश्चित की जा रही है। महिला कल्याण के लिए वित्तीय प्रतिबद्धता लाड़ली बहना योजना पर राज्य सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 में 14,726.05 करोड़ रूपये, वर्ष 2024-25 में 19,051.39 करोड़ रूपये तथा वर्ष 2025-26 में 20,318.53 करोड़ रूपये की राशि व्यय की गई। वर्ष 2026-27 में अप्रैल 2026 तक 1830.54 करोड़ रूपये की राशि की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लाडली बहना योजना में 23,882.81 करोड़ रूपये का बजट प्रावधान किया गया है, जो महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के प्रति सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है। करोड़ों महिलाओं के जीवन में आया व्यापक परिवर्तन मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने मध्यप्रदेश में महिला कल्याण के क्षेत्र में एक नई मिसाल स्थापित की है। यह केवल आर्थिक सहायता योजना नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बन गई है। योजना से प्रदेश की महिलाओं के जीवन में व्यापक और सकरात्मक परिवर्तन आए है। नियमित आर्थिक सहायता ने महिलाओं को घरेलू खर्चों के प्रबंधन ने अधिक आत्मनिर्भर बनाया है, जिससे वे अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ बच्चों के पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य पर अधिक प्रभावी ढंग से खर्च कर पा रही है। योजना से प्राप्त राशि ने अनेक महिलाओं को स्व-सहायता समूहों, लघु उद्योगों और स्व-रोजगार गतिविधियों से जुड़ने के लिये प्रेरित किया है। इससे उनकी आय के अतिरिक्त स्त्रोत विकसित हुए है। आर्थिक रूप से सशक्त होने के साथ महिलाओं के परिवार के महत्वपूर्ण निर्णयों में भागीदारी बढ़ी है और उनकी राय को अधिक महत्व मिलने लगा है। बैंक खातों में सीधे राशि अंतरण की व्यवस्था ने महिलाओं को औपचारिक बैंकिग और वित्तीय सेवाओं से जोड़ा है। इससे उनमें वित्तीय साक्षरता और आर्थिक आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ग्रामीण और शहरी महिलाओं के लिए समान रूप से उपयोगी योजना का लाभ ग्रामीण, आदिवासी, शहरी, कल्याणी, तलाकशुदा और परित्यक्त महिलाओं सहित व्यापक वर्ग को मिल रहा है। पात्र महिलाओं के सक्रिय और आधार-लिंक्ड बैंक खातों में राशि सीधे जमा होने से प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और त्वरित बनी है। राज्य सरकार ने विभिन्न विशेष अवसरों और त्योहारों पर अतिरिक्त आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर महिलाओं के जीवन में उत्साह और खुशियों का संचार किया है। इससे योजना केवल नियमित सहायता तक सीमित न रहकर भावनात्मक संबल का भी माध्यम बनी है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में भोपाल में होगा इंडो-फ्रेंच निवेश सम्मेलन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल पर भोपाल में होगा इंडो-फ्रेंच इन्वेस्टमेंट कॉन्क्लेव भोपाल में जुटेंगे फ्रांस की प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधि मध्यप्रदेश में निवेश संभावनाओं को लेकर फ्रांसीसी उद्योग जगत के साथ होगा मंथन एग्री, ईवी, टेक्नोलॉजी, रिन्यूएबल एनर्जी और स्किल सेक्टर्स पर रहेगा फोकस कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में होगा 12 मई को कॉन्क्लेव मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे वैश्विक निवेशकों से संवाद भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने उद्योग, अधोसंरचना, नीति सुधार, लॉजिस्टिक्स, स्किल डेवलपमेंट और निवेश सुविधा के क्षेत्र में जिस तेज गति से कार्य किया है, उसने दुनिया की बड़ी कंपनियों का ध्यान राज्य की ओर आकर्षित किया है। फ्रांस की प्रतिष्ठित कंपनियों और उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल की भोपाल में मौजूदगी इसी बढ़ते विश्वास का संकेत मानी जा रही है। भोपाल में 12 मई को होने जा रहे इंडो-फ्रेंच इन्वेस्टमेंट कॉन्क्लेव ऐसे समय में हो रहा है, जब मध्यप्रदेश वैश्विक निवेश मानचित्र पर लगातार मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। कुशाभाऊ अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में यह आयोजन केवल एक निवेश बैठक नहीं, बल्कि उस बदलती औद्योगिक सोच और वैश्विक संवाद का विस्तार है। इसमें मध्यप्रदेश अब निवेश प्राप्त करने वाले राज्य की भूमिका से आगे बढ़कर अंतर्राष्ट्रीय औद्योगिक साझेदारियों का सक्रिय केंद्र बन रहा है। इंडो-फ्रेंच चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री और मध्यप्रदेश शासन के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में फ्रांस के राजदूत, फ्रांसीसी उद्योग जगत के प्रतिनिधि, वैश्विक कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी, मध्यप्रदेश शासन के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और प्रदेश के उद्योग प्रतिनिधि शामिल होंगे। कॉन्क्लेव से मध्यप्रदेश और फ्रांस के बीच दीर्घकालिक औद्योगिक, तकनीकी और संस्थागत साझेदारी होगी। इससे राज्य सरकार फ्रांसीसी कंपनियों को मध्यप्रदेश के औद्योगिक वातावरण, निवेश संभावनाओं, नीति समर्थन और तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक इको-सिस्टम से अवगत कराएगी। कार्यक्रम में एग्रो एवं फूड प्रोसेसिंग, ऑटोमोबाइल एवं ईवी, कंज्यूमर गुड्स एवं रिटेल, डिफेंस एवं एविएशन, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स, फार्मा एवं मेडिकल डिवाइसेस, रिन्यूएबल एनर्जी, टेक्सटाइल, पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों पर विशेष फोकस रहेगा। इन सेक्टर्स में मध्यप्रदेश को उभरते औद्योगिक केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। राज्य सरकार का प्रयास केवल निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश को तकनीक, नवाचार, अनुसंधान, कौशल विकास और सतत औद्योगिक विकास आधारित साझेदारी के मॉडल के रूप में स्थापित करना है। कॉन्क्लेव में पारंपरिक निवेश चर्चा के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, लोकल मैन्युफैक्चरिंग, स्किलिंग, रिसर्च कोलैबोरेशन और संस्थागत भागीदारी पर भी विशेष ध्यान रहेगा। फ्रांस की कई प्रतिष्ठित कंपनियां पहले से मध्यप्रदेश में संभावनाएं तलाश रही हैं। 'सनोफी' द्वारा एम्स भोपाल के साथ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित करने की दिशा में चर्चा की जा रही है। 'डसॉल्ट सिस्टम्स' राज्य में वर्चुअल ट्विन टेक्नोलॉजी के माध्यम से शहरी विकास, तकनीकी शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, स्किल डेवलपमेंट और पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं दिख रही है। 'डेकाथलॉन' राज्य में सोर्सिंग, रिटेल विस्तार, सप्लाई चेन और स्पोर्ट्स आधारित स्किलिंग मॉडल विकसित करने में रुचि दिखा रही है। सिस्ट्रा द्वारा सड़क, मेट्रो, रेलवे, जल प्रबंधन, अर्बन प्लानिंग, डेटा सेंटर और केबल कार सिस्टम जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की जा रही है। वहीं सूफलेट माल्ट द्वारा माल्टिंग बार्ली आधारित कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग, किसान क्षमता विकास और सप्लाई चेन इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर प्रस्ताव साझा किया गया है। 'डुनासिस' द्वारा भारत में मैन्युफैक्चरिंग लोकलाइजेशन पर केंद्रित निवेश प्रस्ताव पर भी विचार चल रहा है। कॉन्क्लेव में सनोफी, डसॉल्ट सिस्टम्स, सूफलेट माल्ट, सिस्ट्रा, ईडीएफ, एंजी, मोनिन, रॉयल कैनिन, लैक्टालिस, वर्टो मोबिलिटी, टेक्नीक सोलैर, जियोडिस इंडिया और अन्य प्रतिष्ठित फ्रांसीसी कंपनियों की भागीदारी प्रस्तावित है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 के लिए फ्रांस के साथ दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना भी है। इंडो-फ्रेंच कॉन्क्लेव के जरिए जीआईएस 2027 में फ्रांस की प्रभावी भागीदारी और फ्रांसीसी निवेश को लेकर सकारात्मक माहौल तैयार करना है। कॉन्क्लेव से मध्यप्रदेश को कई स्तरों पर लाभ मिलने की संभावना है। इससे निवेश प्रस्तावों की नई संभावनाएं तैयार होंगी, फ्रांसीसी कंपनियों और मध्यप्रदेश आधारित उद्योगों के बीच साझेदारी को गति मिलेगी, तकनीकी सहयोग और स्किल डेवलपमेंट के नए अवसर बनेंगे तथा राज्य में भविष्य के लिए सेक्टर आधारित औद्योगिक सहयोग का मजबूत आधार तैयार होगा। प्रदेश के लगभग 60 से 80 उद्योग प्रतिनिधियों की भागीदारी भी कार्यक्रम में प्रस्तावित है। इनके और फ्रांसीसी कंपनियों के बीच बी-2-बी और बी-2-जी बैठकें आयोजित होंगी, जिनमें संभावित निवेश, संयुक्त उपक्रम, तकनीकी सहयोग और औद्योगिक विस्तार को लेकर विस्तृत चर्चा होगी। इसकी शुरुआत 11 मई को फ्रांसीसी प्रतिनिधिमंडल के मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय भ्रमण से हुई, जहां प्रतिनिधियों को प्रदेश की जनजातीय कला, संस्कृति और विरासत से परिचित कराया गया। दूसरे दिन 12 मई को फ्रांसीसी प्रतिनिधिमंडल यूनेस्को विश्व धरोहर भीमबेठका रॉक शेल्टर्स का भ्रमण करेगा। यह भ्रमण मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर बनेगा। कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में 12 मई को आयोजित होने वाले मुख्य सत्र में मध्यप्रदेश की औद्योगिक नीतियों, निवेश प्रोत्साहन, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और निवेश सुविधा सिस्टम पर विस्तृत प्रस्तुति दी जाएगी। “अनलॉकिंग मध्यप्रदेश: पॉलिसी, पार्टनरशिप्स एंड पाथवेज फॉर सस्टेनेबल इन्वेस्टमेंट” विषय पर विशेष पैनल चर्चा भी आयोजित होगी, जिसमें फ्रांस की प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कार्यक्रम के मुख्य सत्र को संबोधित करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव फ्रांसीसी प्रतिनिधिमंडल के समक्ष मध्यप्रदेश की औद्योगिक दृष्टि, निवेश संभावनाओं, अधोसंरचना विकास और भविष्य की विकास रणनीति को प्रस्तुत करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में विभिन्न फ्रांसीसी कंपनियों द्वारा एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट प्रस्तुत किए जाएंगे तथा महत्वपूर्ण एमओयू का आदान-प्रदान भी होगा। कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री डॉ. यादव और फ्रांसीसी कंपनियों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के बीच विशेष वन-टू-वन बैठकें भी प्रस्तावित हैं। इन बैठकों में संभावित निवेश, तकनीकी सहयोग और दीर्घकालिक औद्योगिक साझेदारी पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। यह कॉन्क्लेव इस बात का संकेत है कि मध्यप्रदेश अब केवल निवेश आमंत्रित करने वाला राज्य नहीं, बल्कि वैश्विक औद्योगिक सहयोग, तकनीकी साझेदारी और भविष्य आधारित विकास मॉडल का उभरता हुआ केंद्र बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश लगातार ऐसे नए अंतर्राष्ट्रीय संवाद स्थापित कर रहा है, जो राज्य को भारत के सबसे सक्रिय और विश्वसनीय निवेश गंतव्यों में मजबूत पहचान दिला रहे हैं।  

वीडी और मुख्यमंत्री के सामने चुनौतियां, एमपी में राजनीतिक नियुक्तियों पर ब्रेक

भोपाल मध्यप्रदेश भाजपा के भीतर इन दिनों निगम-मंडलों, बोर्डों और विकास प्राधिकरणों के खाली पदों को भरने को लेकर भारी कशमकश देखी जा रही है। राजनीतिक नियुक्तियों की प्रतीक्षा लंबी होती जा रही है, क्योंकि पार्टी के अंदर प्रभावशाली पदों पर काबिज होने के लिए अलग-अलग गुटों में खींचतान चरम पर है। स्थिति यह है कि प्रदेश के 31 से अधिक महत्वपूर्ण संस्थानों में अध्यक्ष और उपाध्यक्षों की नियुक्ति का मामला ठंडे बस्ते में चला गया है, जिससे संगठन और सरकार के बीच सामंजस्य बैठाना चुनौती बन गया है। भोपाल विकास प्राधिकरण पर वर्चस्व की लड़ाई राजधानी (MP) के सबसे महत्वपूर्ण संस्थानों में से एक, भोपाल विकास प्राधिकरण (BDA) के अध्यक्ष पद को लेकर सबसे ज्यादा खींचतान मची हुई है। हालांकि पहले चेतन सिंह का नाम लगभग तय माना जा रहा था, लेकिन मंत्रियों और विधायकों की निजी महत्वाकांक्षाओं ने इस प्रक्रिया को उलझा दिया है। हर गुट चाहता है कि इस प्रभावशाली पद पर उनका अपना व्यक्ति बैठे ताकि शहर के बुनियादी ढांचे और विकास कार्यों पर उनका नियंत्रण बना रहे। इंदौर की नियुक्ति में दिल्ली का हस्तक्षेप इंदौर विकास प्राधिकरण के मामले में पेच और भी पेचीदा हो गया है। बताया जा रहा है कि हरिनारायण यादव का नाम चयन के बेहद करीब था, लेकिन ऐन वक्त पर इंदौर के ही एक रसूखदार नेता ने दिल्ली दरबार में अपनी पहुंच का इस्तेमाल करते हुए इस पर रोक लगवा दी। इस ‘वीटो’ के बाद अब नए समीकरण तलाशे जा रहे हैं, जिससे कार्यकर्ताओं और दावेदारों में बेचैनी बढ़ गई है। 50 दिग्गज नेताओं की सक्रिय लॉबिंग पार्टी के भीतर लगभग 50 से ज्यादा कद्दावर नेता ऐसे हैं जो अब तक सत्ता की मुख्यधारा में कोई पद हासिल नहीं कर पाए हैं। ये सभी नेता अब बचे हुए निगमों और आयोगों में अपनी जगह सुनिश्चित करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। नेताओं का यह दबाव ही है कि सरकार और संगठन चाहकर भी अंतिम सूची पर मुहर नहीं लगा पा रहे हैं। इन प्रमुख संस्थानों में खाली पड़ी हैं कुर्सियां प्रदेश (MP) के कई बड़े और प्रभावकारी संस्थानों में नेतृत्व का अभाव है। इनमें नीति एवं योजना आयोग, खनिज विकास निगम, पर्यटन बोर्ड, कृषि विपणन बोर्ड, और पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग जैसे महत्वपूर्ण नाम शामिल हैं। इसके साथ ही गौपालन एवं पशु संवर्धन बोर्ड, मदरसा बोर्ड, और विभिन्न क्षेत्रीय विकास प्राधिकरणों (जैसे महाकौशल और बुंदेलखंड) में भी नियुक्तियां न होने से कामकाज प्रभावित हो रहा है। राजस्व पर बढ़ता अतिरिक्त वित्तीय भार इन राजनीतिक नियुक्तियों का एक पहलू सरकारी खजाने पर पड़ने वाला बोझ भी है। एक अध्यक्ष या उपाध्यक्ष की नियुक्ति के साथ ही आलीशान कार्यालय, सरकारी वाहन, ड्राइवर और स्टाफ का लंबा-चौड़ा अमला जुड़ जाता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि एक राजनीतिक नियुक्ति से सरकारी खजाने पर हर महीने औसतन 3 से 5 लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च आता है, जो अंततः जनता के टैक्स के पैसे से ही वहन किया जाता है। पुराने चेहरों की वापसी ? हाल की कुछ नियुक्तियों ने पार्टी के भीतर असंतोष की आग को और हवा दी है। विनोद गोटिया, सत्येंद्र भूषण सिंह और महेंद्र सिंह यादव जैसे नेताओं को दोबारा अहम जिम्मेदारियां मिलने से नए और ऊर्जावान कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। फिलहाल मध्यप्रदेश भाजपा में नियुक्तियों का पूरा मामला सत्ता और संगठन के बीच संतुलन बनाने की कोशिशों में उलझा हुआ है।