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भोपाल की शत्रु संपत्ति पर नया खुलासा! पाकिस्तान में रहते हुए बेची गई 30.55 एकड़ जमीन, EOW ने शुरू की जांच

भोपाल
तत्कालीन भोपाल रियासत के अंतिम नवाब हमीदुल्ला खां की दूसरी पत्नी आफताब जहां बेगम ने पाकिस्तान में रहते हुए 1994 में भोपाल के बेहटा क्षेत्र की 30.55 एकड़ भूमि बेच दी थी।समाजसेवी अमिताभ अग्निहोत्री ने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) को साक्ष्यों सहित शिकायत देकर पूरे प्रकरण की जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि शत्रु संपत्ति अधिनियम लागू होने के बावजूद पाकिस्तान निवासी होने का तथ्य छिपाकर करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि का सौदा किया गया, जिससे सरकार को भारी राजस्व हानि भी हो सकती है।

सहकारी आवासीय संस्था को बेची जमीन
शिकायत में दावा किया है कि 31 मई 1994 को आफताब जहां बेगम ने बेहटा क्षेत्र की 30.55 एकड़ भूमि एक सहकारी गृहनिर्माण संस्था को मात्र 30.55 लाख रुपये में बेच दी। सौदे के समय केवल 1.55 लाख रुपये चेक से लिए गए, जबकि शेष 29 लाख रुपये चार किस्तों में लेने का अनुबंध किया गया था।वर्ष 1959 के राजस्व अभिलेखों के अनुसार आफताब जहां बेगम के नाम बेहटा में लगभग 655 एकड़ और बोरबन क्षेत्र में करीब 102 एकड़ भूमि दर्ज थी।

चार किश्तों में लेने का अनुबंध किया गया था
अमिताभ अग्निहोत्री ने दावा किया है कि 31 मई 1994 को आफताब जहां बेगम ने बेहटा क्षेत्र की 30.55 एकड़ भूमि एक सहकारी गृहनिर्माण संस्था को 30.55 लाख रुपये में बेच दी। शिकायत के अनुसार सौदे के समय केवल 1.55 लाख रुपये चेक से लिए गए, जबकि शेष 29 लाख रुपये चार किश्तों में लेने का अनुबंध किया गया था।

स्वीकृतियों की वैधता की जांच की जानी चाहिए
वर्ष 1959 के राजस्व अभिलेखों के अनुसार आफताब जहां बेगम के नाम बेहटा में लगभग 655 एकड़ और बोरबन क्षेत्र में करीब 102 एकड़ भूमि दर्ज थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पाकिस्तान निवासी होने के कारण यह संपत्ति शत्रु संपत्ति की श्रेणी में आ सकती थी। इसलिए इसकी खरीद-बिक्री, नामांतरण, भवन अनुमति और अन्य प्रशासनिक स्वीकृतियों की वैधता की जांच की जानी चाहिए।

शिकायत में यह भी मांग की गई है कि बिक्री के समय आफताब जहां बेगम भारत में मौजूद थीं या नहीं, उनके पासपोर्ट और यात्रा अभिलेखों का सत्यापन किया जाए। साथ ही यह भी जांच की जाए कि भूमि सौदे में काले धन का इस्तेमाल या स्टाम्प ड्यूटी की चोरी तो नहीं हुई।

शिकायत की प्रतिलिपि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्रालय, कस्टोडियन विभाग, प्रमुख सचिव राजस्व, कलेक्टर और एडीएम भोपाल को भी भेजी गई है।

शिकायत में उठाए गए प्रमुख सवाल
    क्या पाकिस्तान निवासी होने के बावजूद भूमि की बिक्री वैध थी?
    क्या संबंधित जमीन शत्रु संपत्ति घोषित की जानी चाहिए थी?
    क्या नामांतरण और भवन अनुमति नियमों के अनुरूप जारी हुई?
    क्या सरकार को स्टाम्प ड्यूटी का नुकसान हुआ?
    क्या भूमि सौदे में ब्लैक मनी का इस्तेमाल हुआ?

क्या है शत्रु संपत्ति कानून?
भारत में शत्रु संपत्ति अधिनियम, 1968 के तहत उन व्यक्तियों की संपत्तियां, जिन्होंने शत्रु देश की नागरिकता ग्रहण कर ली, केंद्र सरकार के कस्टोडियन के नियंत्रण में लाई जा सकती हैं। हालांकि किसी विशेष संपत्ति पर यह कानून लागू होता है या नहीं, इसका अंतिम निर्णय सक्षम प्राधिकारी और न्यायालय उपलब्ध अभिलेखों तथा कानूनी प्रक्रिया के आधार पर करते हैं।

शिकायत में यह आरोप
उनका आरोप है कि पाकिस्तान निवासी होने के कारण यह संपत्ति शत्रु संपत्ति की श्रेणी में आ सकती थी, इसलिए इसकी खरीद-बिक्री, नामांतरण, भवन अनुमति और अन्य प्रशासनिक स्वीकृतियों की वैधता की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की है कि जांच में यह स्पष्ट किया जाए कि बिक्री के समय आफताब जहां बेगम भारत में मौजूद थीं या नहीं, उनके पासपोर्ट और यात्रा अभिलेखों का सत्यापन किया जाए।

यह भी देखा जाए कि भूमि सौदे में काले धन का इस्तेमाल या स्टांप ड्यूटी की चोरी तो नहीं हुई। शिकायत की प्रतिलिपि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्रालय, कस्टोडियन विभाग, प्रमुख सचिव राजस्व, कलेक्टर और एडीएम भोपाल को भी भेजी गई है।

यह है शत्रु संपत्ति कानून
भारत में शत्रु संपत्ति अधिनियम, 1968 के तहत उन व्यक्तियों की संपत्तियां, जिन्होंने शत्रु देश की नागरिकता ग्रहण कर ली, केंद्र सरकार के कस्टोडियन के नियंत्रण में लाई जा सकती है। हालांकि, किसी विशेष संपत्ति पर यह कानून लागू होता है या नहीं, इसका अंतिम निर्णय सक्षम प्राधिकारी और न्यायालयों द्वारा उपलब्ध अभिलेखों एवं कानूनी प्रक्रिया के आधार पर किया जाता है।

 

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