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तेज गर्मी और चिपचिपी उमस से बेहाल दिल्ली, अगले 7 दिन मौसम में बड़े बदलाव के आसार नहीं

नई दिल्ली  राजधानी दिल्ली में लोगों को इन दिनों तेज गर्मी के साथ भारी उमस का सामना करना पड़ रहा है। रविवार को तापमान सामान्य के आसपास रहने के बावजूद हवा में नमी अधिक होने से लोगों को ज्यादा गर्मी महसूस हुई। दोपहर के समय घर से बाहर निकलने वालों को चिपचिपी गर्मी ने काफी परेशान किया। मौसम विभाग के अनुसार अगले सात दिनों तक मौसम में कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना नहीं है। हालांकि रविवार रात और सोमवार को हल्की बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है, जिससे लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है। महसूस हुआ 43.4 डिग्री तापमान     रविवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान 38.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।     दोपहर 2:30 बजे वास्तविक तापमान 37.2 डिग्री था, लेकिन उमस के कारण यह 43.4 डिग्री जैसा महसूस हुआ।     इसे हीट इंडेक्स या "फील लाइक" तापमान कहा जाता है। अगले कुछ दिनों का मौसम     सोमवार को अधिकतम तापमान 37 से 39 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है।     26 जून तक तापमान फिर से 40 डिग्री के करीब पहुंच सकता है।     रविवार का न्यूनतम तापमान 28.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से एक डिग्री अधिक था।     मौसम विभाग ने फिलहाल कोई रंग-आधारित चेतावनी जारी नहीं की है। बारिश अभी भी सामान्य से कम     जून महीने में अब तक सफदरजंग मौसम केंद्र पर 31.2 मिमी बारिश दर्ज की गई है     पूरे जून महीने की सामान्य वर्षा 74.1 मिमी मानी जाती है।     इससे साफ है कि इस महीने अब तक बारिश सामान्य से काफी कम रही है। हवा की गुणवत्ता रही मध्यम     दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) रविवार को 127 दर्ज किया गया।     यह "मध्यम" श्रेणी में आता है।     जून में अब तक 18 दिन हवा की गुणवत्ता मध्यम और 3 दिन संतोषजनक श्रेणी में रही है।

भारत में बुलेट ट्रेन का विस्तार, 7 नए हाई-स्पीड कॉरिडोर को मंजूरी

 नई दिल्ली देश को अगले साल के मध्य में पहली बुलेट ट्रेन मिल जाएगी। मुंबई से अहमदाबाद के बीच चलने वाली इस बुलेट ट्रेन के लिए काम कई सालों से जारी है। इस बीच, देश के सात नए बुलेट ट्रेन हाई स्पीड कॉरिडोर को मंजूरी मिल गई है। इसके तहत, दिल्ली से वाराणसी एक हाई स्पीड रेल कॉरिडोर बनेगा, जिसमें बुलेट ट्रेन महज दो घंटे में ही दिल्ली से लखनऊ पहुंचा देगी। वहीं, दिल्ली से वाराणसी के लिए महज तीन घंटे 15 मिनट का ही समय लेगा। ट्रेन की अधिकतम स्पीड 350 किलोमीटर प्रति घंटे होगी और यह हवा से बातें करेगी। मुंबई से अहमदाबाद ( एक घंटे 57 मिनट), मुंबई से पुणे (48 मिनट), बेंगलुरु से चेन्नई (73 मिनट्स), बेंगलुरु से हैदराबाद (2 घंटे 10 मिनट), पुणे से हैदराबाद (2 घंटे 8 मिनट), दिल्ली से लखनऊ (2 घंटे), दिल्ली से वाराणसी (3 घंटे 15 मिनट), दिल्ली से सिलिगुड़ी (6 घंटे) का समय लेगा। इन सात रूट्स पर हाई स्पीड बुलेट ट्रेन चलेगी। दिल्ली से वाराणसी तक लगभग 812 किलोमीटर लंबा रूट होगा। इस पर हाईस्पीड बुलेट ट्रेन की मैक्सिमम स्पीड 350 किलोमीटर प्रति घंटे होगी, जबकि संचालन की स्पीड 320 किलोमीटर प्रति घंटे होगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्ण्व ने कहा, ''पीएम मोदी ने सात नए कॉरिडोर का फैसला लिया है। इसके तहत मुंबई से पुणे 170 किलोमीटर के कॉरिडोर पर सफर सिर्फ 48 मिनट में पूरा होगा। अच्छा इकनॉमिक कॉरिडोर बन जाएगा। पुणे से हैदराबाद जोकि 500 किलोमीटर है लगभग, दो घंटे 8 मिनट में पूरा हो जाएगा। महाराष्ट्र में दो लाख करोड़ का निवेश हो रहा है।'' वहीं, लखनऊ से अयोध्या हाईस्पीड रूट की लंबाई 124 किलोमीटर होगी। दिल्ली से वाराणसी रूट पर चलने वाली बुलेट ट्रेन के लिए राज्य में कई शहरों में स्टेशन रखे गए हैं, ताकि आसपास के रहने वाले लोगों को फायदा मिल सके। दिल्ली, नोएडा, मथुरा, आगरा, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, अयोध्या, रायबरेली, प्रयागराज, वाराणसी में स्टेशन का प्रस्ताव दिया गया है। हालांकि, आखिरी फैसला बाद में लिया जाएगा। जापान की मदद से बन रही बुलेट ट्रेन बता दें कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट भारत की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना है। 508 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट की आधारशिला सितंबर 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने रखी थी। यह परियोजना जापान की शिंकान्सेन तकनीक और आर्थिक मदद से बनाई जा रही है। शुरुआत में इसे 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन महाराष्ट्र में भूमि अधिग्रहण और अन्य मंजूरियों में देरी की वजह से इसमें तय समय से ज्यादा लग गया। वर्तमान में निर्माण तेजी से चल रहा है और अधिकांश भूमि अधिग्रहण तथा वैधानिक मंजूरियां पूरी हो चुकी हैं। अगले साल अगस्त में शुरू हो सकती है बुलेट ट्रेन रेल मंत्रालय के अनुसार, गुजरात में कई हिस्सों पर ट्रैक, स्टेशन और वायाडक्ट का काम तेजी से चल रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया है कि भारत को 15 अगस्त 2027 को अपनी पहली बुलेट ट्रेन मिलने की संभावना है। पहला सेक्शन सूरत से बिलिमोरा तक होगा, उसके बाद वापी से सूरत तक का सेक्शन होगा। वहीं, मुंबई तक पूरी लाइन 2028-29 तक चालू किए जाने की संभावना है। पूरी तरह शुरू होने पर मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय करीब 2 से 3 घंटे रह जाएगा, जो अभी 6-7 घंटे से अधिक है।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस: AIIMS दिल्ली में सुबह 5:30 बजे विशेष सत्र

नई दिल्ली  अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर आज एम्स में आयोजित एक विशेष योग सत्र में काफी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। यह सत्र आज 21 जून रविवार की सुबह 5:30 बजे से आयोजित किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य आम लोगों के बीच योग और अच्छे स्वास्थ्य के संदेश को पहुंचाना था। इस सत्र में एम्स के डायरेक्टर, सीनियर डॉक्टर, फेकल्टी मेंबर, नर्सेस, मरीज और तीमारदारों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। सेहतमंद जीवनशैली अपनाने पर दिया जोर एम्स परिसर में सुबह से ही सभी लोग जुटना शुरू हो गए थे। स्वास्थ्य को लेकर संदेश देने वाले इस युग सत्र में मौजूद लोगों के साथ मिलकर डायरेक्टर ने विभिन्न योगासन किया और सेहतमंद जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया। एम्स दिल्ली में हुआ आयोजन 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर आज इस विशेष योग सत्र का आयोजन किया गया था। इस वर्ष योग दिवस की थीम Start Your Day with Yoga रखी गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य लोगों को दैनिक जीवन में स्वास्थ्य और योग के प्रति जागरूक करना था। इस खास कार्यक्रम के दौरान लोगों में भारी उत्साह देखने को मिला। कब से मनाया जा रहा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस आपको बता दें कि साल 2015 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का आह्वान किया और देखते ही देखते दुनिया के कई देश इस मुहिम में शामिल हो गए। आज भी दुनिया के ज्यादातर देशों में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मु, पीएम मोदी, उप राष्ट्रपति सहित देश के बड़े नेताओं ने आम लोगों के साथ योग किया।  

राजनीतिक विज्ञापनों पर पाबंदी से संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

नई दिल्ली दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि राजनीतिक विज्ञापनों पर रोक लगाने से संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं होता। कोर्ट ने चुनाव आयोग (ECI) के 2019 के उस फैसले को सही ठहराया, जिसमें आदर्श आचार संहिता (MCC) के दौरान दिल्ली मेट्रो में ऐसे विज्ञापनों पर रोक लगाई गई थी। हाई कोर्ट उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जो उन कंपनियों के समूह ने दायर की थीं जिनके पास दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) के साथ विज्ञापन के अधिकार हैं। इन अधिकारों में ट्रेनों के अंदर और बाहर, साथ ही सिविल स्ट्रक्चर पर विज्ञापन लगाने के कॉन्ट्रैक्ट शामिल हैं। DMRC के फैसले को सही ठहराया इन याचिकाओं में एक सिंगल जज के जनवरी 2020 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें MCC (आदर्श आचार संहिता) लागू रहने के दौरान मेट्रो स्टेशनों और ट्रेनों में राजनीतिक विज्ञापनों पर रोक लगाने के DMRC के फैसले को सही ठहराया गया था। याचिकाकर्ताओं ने जून 2019 में ECI की ओर से DMRC को भेजे गए एक संदेश का जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि आदर्श आचार संहिता लागू रहने के दौरान कमर्शियल विज्ञापनों के लिए लीज पर दी गई जगह पर कोई भी राजनीतिक विज्ञापन नहीं लगाया जाएगा। अचार संहिता में तुरंत हटेगा विज्ञापन अगर दी गई जगह पर कोई राजनीतिक विज्ञापन है, तो आदर्श आचार संहिता लागू होते ही उसे तुरंत हटा दिया जाएगा। उन्होंने तर्क दिया कि यह निर्देश संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करता है, क्योंकि MCC के दौरान राजनीतिक प्रचार के लिए बस शेल्टर जैसी जगहों के इस्तेमाल पर ऐसी कोई पाबंदी नहीं थी। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि अपील करने वालों पर अपना बिजनेस करने को लेकर 'कोई पूरी रोक नहीं' थी। कोर्ट ने कहा कि MCC लागू होने के दौरान भी वे ऐसे विज्ञापन दिखाने के लिए आजाद थे जो राजनीतिक नहीं थे। बेंच ने कहा कि राजनीतिक विज्ञापनों पर सीमित रोक का मतलब विज्ञापनों पर पूरी तरह से रोक लगाना नहीं है। संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन नहीं कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक विज्ञापनों को दिखाने पर रोक (वह भी सीमित समय के लिए) का मतलब यह नहीं है कि कंपनियों को कोई भी विज्ञापन दिखाने से रोका गया था। इसलिए, यह दलील कि इससे संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) (बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी) और (g) (किसी भी पेशे को अपनाने का अधिकार) का उल्लंघन हुआ है, बेबुनियाद है।  

नवंबर से नए नियम: पार्किंग महंगी, बिना PUCC नहीं मिलेगा ईंधन

नई दिल्ली  दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को 'प्रोएक्टिव विंटर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट फ्रेमवर्क' का ऐलान करते हुए कई बड़े फैसलों की घोषणा की। इसके तहत नवंबर से सरकारी पार्किंग का शुल्क दोगुना किया जाएगा। साथ ही नवंबर 2026 से जनवरी 2027 तक दिल्ली में बाहर से पंजीकृत नॉन-बीएस-4 कमर्शियल वाहनों के राजधानी में प्रवेश पर पूरी तरह रोक रहेगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि नए फ्रेमवर्क के तहत केवल वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र (PUCC) वाले वाहनों को ही दिल्ली के पेट्रोल पंपों से पेट्रोल और डीजल मिलेगा। यानी जिन वाहनों के पास वैध PUCC नहीं होगा, उन्हें ईंधन नहीं दिया जाएगा। क्या हैं नए नियम?     वैध PUCC वाले वाहनों को ही पेट्रोल पंपों पर ईंधन मिलेगा।   1 नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली के बाहर पंजीकृत गैर-BS VI वाणिज्यिक वाहनों के प्रवेश पर रोक रहेगी। CNG, EV, आपातकालीन सेवाओं और सरकारी कार्यों से जुड़े वाहनों को छूट मिलेगी।     1 नवंबर से 28 फरवरी तक अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग शुल्क दोगुना रहेगा।     आवश्यकता पड़ने पर कार्यालयों के समय में बदलाव और सरकारी-निजी कार्यालयों में 50% तक भौतिक उपस्थिति की व्यवस्था लागू की जा सकेगी।     1 नवंबर से 31 जनवरी तक निर्माण और ध्वस्तीकरण कार्यों में धूल नियंत्रण के नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।     10 दिसंबर से 20 जनवरी के बीच आवश्यकता पड़ने पर निर्माण कार्यों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए जा सकेंगे।     बड़े निर्माण स्थलों और बड़ी बिल्डिंग्स पर एंटी-स्मॉग गन और मिस्ट सप्रेशन सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा।     खुले में कचरा या अन्य सामग्री जलाने पर सख्त निगरानी और कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए ड्रोन और फील्ड मॉनिटरिंग का उपयोग किया जाएगा। प्रदूषण के खिलाफ बड़ा एक्शन दिल्ली सरकार का कहना है कि प्रदूषण से लड़ाई का सबसे अच्छा तरीका है समय रहते तैयारी। दिल्ली सरकार इसी संकल्प के साथ सर्दियों से पहले हर जरूरी तैयारी को मिशन मोड में आगे बढ़ा रही है।

दिल्ली सरकार का स्वास्थ्य विभाग में सुधार अभियान, लंबे समय से तैनात डॉक्टरों का होगा तबादला

नई दिल्ली सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA) में कथित भ्रष्टाचार के मामले में 40 से अधिक मेडिकल स्टाफ और प्रशासनिक अधिकारियों के ट्रांसफर के साथ डॉक्टर वत्सला अग्रवाल और डॉक्टर विजय कुमार रंगा को सस्पेंड किया गया था। अब दिल्ली सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं में प्रशासनिक सुधार और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में बढ़ा कदम उठाते हुए तिहाड़ और मंडोली जेलों में लंबे समय से तैनात डॉक्टरों की सिफारिश एलजी से की है। 39 डॉक्टरों का किया जा सकता है तबादला प्रस्ताव के मुताबिक 5 साल या उससे अधिक समय से एक ही जगह कार्यरत 39 डॉक्टरों का तबादला किया जा सकता है। इनमें कई डॉक्टर ऐसे भी है, जो 2014 से लगातार एक ही स्थान पर तैनात है। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, तिहाड़ और मंडोली जेलों में कार्यरत स्पेशलिस्ट डॉक्टरों और जनरल ड्यूटी मेडिकल अधिकारियों (जीडीएमओ) को मिलाकर 39 डॉक्टरों के ट्रांसफर का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इनके स्थान पर करीब 35 अन्य डॉक्टरों की तैनाती भी प्रस्तावित है। इस तरह कुल 74 ट्रांसफर किए जाने की योजना है। ह्यूमन रिसोर्स का संतुलित उपयोग जरूरी सरकार का कहना है कि किसी भी विभाग में लंबे समय तक एक ही स्थान पर तैनाती रहने से कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है। ऐसे में समय-समय पर पोस्टिंग की समीक्षा और ह्यूमन रिसोर्स का संतुलित उपयोग जरूरी है। इसी सोच के तहत जेल अस्पतालों में तैनात डॉक्टरों के ट्रांसफर की सिफारिश की गई है। तैनात कर्मचारियों की समीक्षा की जा रही मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न इकाइयों को अधिक सक्षम, जवाबदेह और जनहित केंद्रित बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। इसी कारण विभिन्न संस्थानों में तैनात कर्मचारियों और अधिकारियों की समीक्षा की जा रही है और जरूरत के अनुसार बदलाव किए जा रहे हैं। तिहाड़ और मंडोली जेलों में लंबे समय से तैनात डॉक्टरों के ट्रांसफर की सिफारिशें भी इसी प्रशासनिक सुधार अभियान का हिस्सा है।  

लंदन बैडमिंटन टूर्नामेंट में जजों की भागीदारी वाले वायरल दावे को लेकर विवाद

नई दिल्ली  भारतीय बैडमिंटन संघ (बीएआई) ने ऑनलाइन वायरल हो रही फेक न्यूज के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। फेक खबर में दावा किया जा रहा था कि इस महीने लंदन में हुए बैडमिंटन टूर्नामेंट में कई दर्जन भारतीय जजों ने भाग लिया।दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले को शुक्रवार को ही तत्काल सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। क्या है लंदन में जजों के खेलने का पूरा मामला खबरों के मुताबिक, काफी संख्या में न्यायाधीश और वकील दूसरे अंतरराष्ट्रीय बार एंड बेंच बैडमिंटन चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए ब्रिटेन गए थे। 7 जून को लंदन के साउथॉल में भारत और ब्रिटेन के वकीलों के लिए एक 'अंतरराष्ट्रीय' बैडमिंटन टूर्नामेंट का आयोजन किया गया। बताया जा रहा है कि इसका आयोजन पूर्व अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी और डेका इवेंट्स की संस्थापक अबंतिका डेका ने किया था। इस कार्यक्रम को भारत के केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय के साथ-साथ कुछ कॉर्पोरेट कंपनियों ने भी प्रायोजित किया था। देखते ही देश में शुरू हो गई बहस हालांकि, इस आयोजन की आलोचना के साथ ही देश में एक नया मुद्दा सामने आ गया। वकील प्रशांत भूषण ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी सवालों की बौछार कर दी थी। उन्होंने एक्स पर लिखा था, 'कानून मंत्रालय द्वारा लंदन में आज भारतीय न्यायाधीशों और वकीलों के बीच एक अद्भुत बैडमिंटन टूर्नामेंट प्रायोजित किया जा रहा है! अन्य प्रायोजक विभिन्न कॉर्पोरेट कंपनियां हैं। मुख्य न्यायाधीश और कानून मंत्री द्वारा उद्घाटन किया जा रहा है! 150 न्यायाधीश और वकील भाग ले रहे हैं! प्रधानमंत्री की मितव्ययिता की अपील का क्या हुआ? न्यायाधीशों के लिए आचार संहिता का क्या हुआ? न्यायपालिका की स्वतंत्रता का क्या हुआ? घिनौना!' वहीं, सोशल मीडिया पर फिजूलखर्ची को लेकर केंद्र सरकार पर एक से बढ़कर एक आरोप लगने लगे। आज ही होगी सुनवाई शुक्रवार को अब इस मामले में नया मोड़ आ गया है। भारतीय बैडमिंटन संघ ने इस वायरल खबर को ही नकार दिया है। इसी मामले की सुनवाई के निए उसने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कोर्ट ने भी केस की गंभीरता और न्यायाधीशों की शुचिता का ख्याल रखते हुए इस मुकदमे की तत्काल सुनवाई करना तय किया है।  

शादीपुर चौक से आश्रम चौक तक, जानिए दिल्ली की टॉप-10 ट्रैफिक जाम वाली लोकेशन

नई दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने दिल्ली में जाम के टॉप-10 लोकेशन की पहचान की है और लिस्ट दिल्ली सरकार को भेजी है। पुलिस ने कहा है कि इन 10 जगहों पर पिछले डेढ़ दशक से अधिक समय से ट्रैफिक जाम की गंभीर समस्या है और इसका समाधान जरूरी है। सभी लोकेशन दिल्ली के महत्वपूर्ण जंक्शन में से एक स्थानों पर जाम की समस्या है, उसकी वजह भी पुलिस ने बताई है। नो एंट्री लागू करने का सुझाव दिल्ली सरकार के अफसरों के अनुसार दिल्ली में 10 ऐसी लोकेशन हैं, जो काफी प्रमुख हैं। हर जगह जाम के अलग-अलग कारण ट्रैफिक पुलिस ने बताए हैं। ट्रैफिक पुलिस ने सरकार को लिखे पत्र में कहा है कि कोंडली ब्रिज पर गाजीपुर रोड से सामान्य से अधिक ट्रैफिक भार का आना जाम की वजह है। पुलिस का सुझाव है कि पीक आवर के दौरान गाजीपुर रोड पर नो-एंट्री लागू किया जाना चाहिए। लंबे समय से रोड जाम की समस्या महरौली-बदरपुर रोड (एमबी रोड) पर पुलिस ने मेट्रो कंस्ट्रक्शन वर्क की वजह से जाम बताया है। पुलिस ने कहा है कि एमबी रोड एमजी रोड (महरौली-गुड़गांव रोड) रोड को सैलाब के पास कनेक्ट करती है। इससे पहले तक मेट्रो का काम चल रहा है। कंस्ट्रक्शन वर्क के चलते रोड के आधे से अधिक हिस्से की बैरिकेडिंग की गई है, जिससे गाड़ियों को चलने के लिए जगह काफी कम हो गई है, जिससे लंबे समय से इस रोड पर जाम की समस्या है। जाम की टॉप-10 लोकेशन     शादीपुर चौक     कोंडली ब्रिज     आनंद विहार बस अड्डा     आजादपुर मंडी     बवाना चौक     एमबी रोड     आश्रम चौक     मथुरा रोड     जैतपुर मोड़     भैरा एनक्लेव  

दिल्ली कैबिनेट का बड़ा फैसला, ग्रुप-C भर्ती में पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षण लागू

नई दिल्ली दिल्ली में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक बड़ी और अच्छी खबर है. दिल्ली सरकार ने ग्रुप 'C' के खाली सरकारी पदों पर सीधी भर्ती में पूर्व-अग्निवीरों के लिए 20% आरक्षण को मंजूरी दे दी है. इस फैसले के बाद अब पूर्व-अग्निवीरों के लिए सरकारी नौकरी पाना काफी आसान हो जाएगा।  किन-किन पदों पर मिलेगा फायदा? इस नई आरक्षण नीति के तहत पूर्व-अग्निवीरों को कई महत्वपूर्ण विभागों में सीधी भर्ती का मौका मिलेगा. इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:     दिल्ली पुलिस कॉन्स्टेबल     फायरमैन     जेल वार्डन     फॉरेस्ट गार्ड (वन रक्षक)     वाइल्डलाइफ गार्ड उपराज्यपाल ने की समीक्षा इस योजना को जल्द से जल्द और सही तरीके से जमीन पर उतारने के लिए उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने एक अहम बैठक की. उन्होंने मुख्य सचिव, दिल्ली पुलिस कमिश्नर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर इस आरक्षण नीति को लागू करने की पूरी योजना की समीक्षा की है. अच्छी बात यह है कि इस कोटे के तहत भर्ती देश के सभी योग्य पूर्व-अग्निवीरों के लिए खुली होगी।  आरक्षण का उद्देश्य उपराज्यपाल ने कहा कि सभी योग्य पूर्व-अग्निवीरों के लिए भर्ती खुली रहेगी। इससे उन्हें समान अवसर मिल सकेंगे। यह देश के लिए उनकी सेवा को मान्यता देने का एक तरीका है। यह कदम उनके अनुभव का लाभ उठाने के लिए उठाया गया है। किन-किन पदों पर मिलेगा लाभ? इसके तहत दिल्ली पुलिस, फायर सर्विस, जेल और वन एवं वन्यजीव विभागों में ग्रुप 'C' के सीधी भर्ती वाले पदों पर पूर्व-अग्निवीरों को 20 प्रतिशत रिजर्वेशन दिया जाएगा। इसमें दिल्ली पुलिस में कॉन्स्टेबल, फायर सर्विस में फायरमैन, जेल विभाग में जेल वार्डन और वन विभाग में फॉरेस्ट गार्ड व वाइल्डलाइफ गार्ड के पद शामिल होंगे। सरकार के इस कदम से पूर्व-अग्निवीरों के लिए सरकारी नौकरी पाना आसान हो जाएगा।    क्रियान्वयन की समय-सीमा सभी संबंधित विभागों के लिए भर्ती नियमों में बदलाव की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इन जरूरी बदलावों को पूरा करने की समय-सीमा 30 जून तय की गई है। विभागों को इन भर्ती किए गए लोगों की विशेष क्षमताओं का उपयोग करने का अधिकार होगा। यह उपयोग उनकी ऑपरेशनल आवश्यकताओं के अनुसार किया जाएगा। एलजी का पोस्ट दिल्ली के एलजी तरणजीत सिंह संधू के एक्स पोस्ट में लिखा गया, "दिल्ली में चीफ सेक्रेटरी, दिल्ली पुलिस कमिश्नर और दूसरे सीनियर अधिकारियों के साथ मीटिंग के दौरान, अलग-अलग सरकारी डिपार्टमेंट और एजेंसियों में एक्स-अग्निवीरों को रिजर्वेशन का फायदा देने की स्ट्रेटेजी का रिव्यू किया। यह जरूरी पहल भारत सरकार के गाइडिंग विजन के हिसाब से लागू की जा रही है। इन नौजवानों और औरतों के डिसिप्लिन, स्किल्स और ट्रेनिंग का अच्छे से इस्तेमाल करने के लिए, पुलिस कांस्टेबल, फायरमैन, जेल वार्डर, फॉरेस्ट गार्ड और वाइल्डलाइफ गार्ड सहित खाली ग्रुप ‘सी’ पोस्ट पर सीधी भर्ती में 20% रिजर्वेशन लागू करने का निर्देश दिया गया।" नियमों में बदलाव के लिए 30 जून की डेडलाइन एलजी के एक्स हैंडल से किए गए पोस्ट में बताया गया कि सभी विभागों को अपनी ऑपरेशनल जरूरतों के हिसाब से इन भर्तियों की खास काबिलियत को डिप्लॉय करने और इस्तेमाल करने का अधिकार भी दिया गया है। बराबर मौके पक्का करने और देश के लिए उनकी सेवा को पहचान देने के लिए, इस नियम के तहत सभी एलिजिबल एक्स-अग्निवीरों के लिए भर्ती खुली होगी। सभी संबंधित डिपार्टमेंट के लिए ज़रूरी प्रोसेस और भर्ती नियमों में बदलाव पूरे करने के लिए 30 जून की डेडलाइन तय की गई है। आगे बढ़ेगा विकसित दिल्ली का विजन दिल्ली के एलजी की तरफ से किए गए पोस्ट में कहा गया, "इन डेडिकेटेड और बहुत ट्रेंड लोगों को हमारे सिविक फ्रेमवर्क में आसानी से शामिल करके, हम इंस्टीट्यूशनल रेजिलिएंस को मजबूत करेंगे, पब्लिक सर्विस डिलीवरी को बेहतर बनाएंगे, और एक प्रोग्रेसिव और सुरक्षित विकसित दिल्ली के हमारे कलेक्टिव विजन को आगे बढ़ाएंगे।" इन पदों पर मिलेगी नौकरी पूर्व अग्निवीरों को 20 फीसदी आरक्षण के तहत फायरमैन, जेल वार्डर, फॉरेस्ट गार्ड, वाइल्डलाइफ गार्ड, और ग्रुप सी के अन्य सरकारी पदों में नौकरी मिलेगी। इसका उद्देश्य पूर्व अग्निवीरों के अनुशासित जीवन, स्किल्स और ट्रेनिंग का पूरा फायदा उठाना है। विभागों को छूट दी गई है कि वे इन युवाओं को उनकी विशेष क्षमताओं के अनुसार तैनात करें। दिल्ली सरकार की भर्तियों में पूरे देश के अग्निवीर आवेदन कर सकेंगे।  

दिल्ली से मिनटों में पहुंचेंगे सोनीपत-पलवल, मेट्रो और नमो भारत विस्तार योजना को मिली रफ्तार

नई दिल्ली दिल्ली-एनसीआर में ट्रांसपोर्ट का सबसे प्रमुख जरिया मेट्रो को माना जाता है. दिल्ली मेट्रो देश का सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क है. दिल्ली के अलावा नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम में भी मेट्रो रोजाना लाखों लोगों के सफर का साथी बनती है. दिल्ली-एनसीआर के इलाकों में मेट्रो बिना किसी ट्रैफिक के झंझट के लोगों को अपनी मंजिल तक पहुंचाती है. सरकार लगातार मेट्रो के विस्तार पर काम कर रही है. एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक में भविष्य में दिल्ली और हरियाणा को कनेक्ट करने वाले 6 प्रमुख कॉरिडोर को विकसित करने पर चर्चा हुई है. सरकार इन रूट्स पर नमो भारत के साथ-साथ मेट्रो को भी चलाने की तैयारी कर रही है।  इन रूट्स पर मेट्रो चलाने की तैयारी 1. सोनीपत-पानीपत  यह नमो भारत के दिल्ली-पानीपत-करनाल कॉरिडोर का हिस्सा है. यहां सरकार मेट्रो भी चलाने की तैयारी कर रही है.  सोनीपत को दिल्ली मेट्रो की रेड लाइन (रिठाला-नरेला-सोनीपत कॉरिडोर) के जरिए भी मेट्रो से जोड़ने की योजना है।  2. गाजियाबाद-मेरठ यह देश का पहला ऐसा रूट है जहां मेट्रो और नमो भारत दोनों ट्रेनें एक साथ चलेंगी. मेरठ शहर के अंदरूनी हिस्सों के लिए स्थानीय मेट्रो सेवा शुरू हो चुकी है, जो RRTS के ही ट्रैक और स्टेशनों का इस्तेमाल करेगी।  3. फरीदाबाद-पलवल दिल्ली मेट्रो की वॉयलेट लाइन जो अभी राजा नाहर सिंह (बल्लभगढ़) तक आती है, उसे आगे पलवल तक बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।  4. फरीदाबाद-गुरुग्राम इस रूट पर मुख्य रूप से हरियाणा मास रैपिड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (HMRTC) द्वारा एक स्वतंत्र मेट्रो लाइन बनाने का प्रस्ताव है. यह लगभग 52 से 60 किमी लंबा रूट पूरी तरह से मेट्रो कॉरिडोर होगा जो फरीदाबाद और गुरुग्राम के मौजूदा मेट्रो स्टेशनों को आपस में जोड़ेगा।  5. बहादुरगढ़-रोहतक फिलहाल दिल्ली मेट्रो की ग्रीन लाइन (ब्रिगेडियर होशियार सिंह स्टेशन, बहादुरगढ़) को आगे आसौदा तक बढ़ाने के लिए फिजिकल सर्वे और DPR का काम चल रहा है. इसे भविष्य में रोहतक तक और रैपिड रेल से इंटरचेंज के जरिए कनेक्ट किया जाएगा।  6. गुरुग्राम-मानेसर-रेवाड़ी गुरुग्राम (सेक्टर-56) से लेकर मानेसर तक गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड द्वारा एक नई मेट्रो लाइन का निर्माण शुरू हो चुका है. इसके साथ ही, इस रूट पर दिल्ली-अलवर रैपिड रेल (RRTS) का काम भी चल रहा है।  हाल ही में एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक हुई. इस बैठक में फैसला लिया गया कि एनसीआर की मौजूदा क्षेत्रीय सीमाओं में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. एनसीआर में संतुलित विकास को बढ़ावा देने के लिए अगले पांच वर्षों में 5,000 करोड़ रुपये की लागत से चार नए ‘नमो' ग्रीनफील्ड शहर विकसित किए जाएंगे. इनमें हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में एक-एक शहर स्थापित किया जाएगा।