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चुनावी नतीजों के बाद शेयर बाजार में उछाल, सेंसेक्स में 900 अंक की बढ़त

मुंबई   मजबूत ग्लोबल सेंटिमेंट और पश्चिम बंगाल (West Bengal Election Result, 2026) सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजों के बीचआज बाजार रफ्तार में है। खासतौर पर पश्चिम बंगाल में BJP की जीत की उम्मीद को बाजार घरेलू पॉलिटिकल डायनेमिक्स के हिसाब से एक पॉजिटिव संकेत मान रहा है। इसके चलते Sensex जहां, 900 अंक से ज्यादा की तेजी के साथ 77,910.75 पार चला गया है। वहीं, निफ्टी करीब 300 अंक के उछाल के साथ 24,290.20 तक पहुंच गया है। शुरुआती गैप-अप के बाद से ही बाजार में तेजी बरकरार है, जिससे साफ है कि ग्लोबल संकेतों के सपोर्ट से निवेशकों का सेंटीमेंट पॉजिटिव बना हुआ है और खरीदारी का दायरा बढ़ रहा है। गैप अप हुई ओपनिंग आज घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत पॉजिटिव लेकिन सतर्कता के साथ हुई है। Sensex जहां 343.77 अंकों की बढ़त के साथ 77,257.27 पर खुला, वहीं Nifty 66 अंकों की तेजी के साथ 24,063.55 पर ओपन हुआ है। हालांकि, आज ग्लोबल संकेत पॉजिटिव हैं। लेकिन, पश्चिम बंगाल सहित 5 राज्यों के चुनाव नतीजों को लेकर निवेशक सतर्क नजर आ रहे हैं। हालांकि, ओवरऑल अब भी क्रूड और यूएस-ईरान युद्ध ही बाजार के प्रमुख ड्राइविंग फैक्टर बने हुए हैं। ब्रॉड मार्केट में चौतरफा खरीदारी ब्रॉड मार्केट में आज मजबूती का व्यापक संकेत दिखा, जहां Nifty 500 करीब 0.44% और Nifty 200 0.40% की बढ़त के साथ ट्रेड कर रहे हैं। खास बात यह रही कि मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में ज्यादा तेजी दिखी, जहां Nifty Midcap 100 लगभग 0.75% और Nifty Smallcap 100 करीब 0.78% ऊपर हैं। यह संकेत देता है कि बाजार में जोखिम लेने की क्षमता बढ़ी है और निवेशक बड़े शेयरों के साथ-साथ ब्रॉड-बेस्ड खरीदारी कर रहे हैं। हालांकि India VIX में उछाल (करीब 5.8%) यह भी दिखाता है कि वोलैटिलिटी अभी बनी हुई है। सेक्टोरल मार्केट में IT, Auto में तेजी सेक्टोरल इंडेक्स में आज मिलाजुला लेकिन पॉजिटिव रुख देखने को मिला, जहां Nifty IT (0.86%), Nifty Auto (0.83%) और Nifty Realty (0.87%) ने बाजार को सपोर्ट दिया। इसके अलावा FMCG, मेटल और फार्मा सेक्टर में भी हल्की खरीदारी देखने को मिली। हालांकि बैंकिंग स्पेस में कमजोरी दिखी, जहां Nifty Private Bank हल्की गिरावट में रहा और Nifty Bank में सीमित बढ़त दर्ज हुई। इससे साफ है कि बाजार की तेजी फिलहाल सेक्टर-विशिष्ट है, जिसमें IT और रियल्टी जैसे सेक्टर लीड कर रहे हैं, जबकि बैंकिंग अभी भी दबाव में है। निवेशकों की संपत्ति में ₹6 लाख करोड़ का इजाफा निफ्टी मिडकैप 150 और स्मॉलकैप 250 में भी 1-1% से ज्यादा का उछाल देखा गया. इस शानदार रैली के कारण निवेशकों की संपत्ति में एक ही सत्र में लगभग ₹6 लाख करोड़ का इजाफा हुआ, जिससे बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹463 लाख करोड़ से बढ़कर ₹469 लाख करोड़ के पार पहुंच गया. पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी के रुझान जैसे-जैसे साफ होंगे, बाजार  में हलचल और तेज होने की उम्मीद है।  रियल्टी और आईटी शेयरों में बंपर तेजी सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो शुरुआती कारोबार में रियल्टी और आईटी शेयरों में खरीदारी देखी गई.निफ्टी रियल्टी और निफ्टी आईटी टॉप गेनर था. निफ्टी ऑटो, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी मेटल, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और निफ्टी फार्मा के साथ करीब सभी इंडेक्स हरे निशान में थे।  विदेशों से मिले थे अच्छे संकेत  भारतीय शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत से पहले ही विदेशों से सेंसेक्स निफ्टी के लिए अच्छे संकेत मिल रहे थे, ज्यादातर एशियाई शेयर बाजारों में तेजी के साथ कारोबार हो रहा था, तो वहीं Gift Nifty भी ग्रीन जोन में नजर आया।  सभी सेक्टर ग्रीन-ग्रीन  शेयर बाजार में तेजी के बीच लगभग सभी सेक्टर ग्रीन जोन में नजर आए. निफ्टी ऑटो, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी मेटल्स और निफ्टी पीएसयू बैंक में तेजी के साथ कोराबार हो रहा था।  दिग्गज कंपनियों के शेयर दौड़े शेयर बाजार में तेजी के बीच बीएसई लार्जकैप में शामिल Maruti Share (4.10%), HUL Share (3.95%), LT Share (2.50%), Asian Paints Share (2.40%), Adani Ports Share (2.35%) की तेजी लेकर कारोबार कर रहे थे. तो वहीं बैंकिंग शेयरों में भी उछाल देखने को मिला. Axis Bank Share (1.80%), HDFC Bank Share (1.60%) और SBI Share (1.30%) की तेजी में नजर आया। 

शादी के मौसम में सोने की कीमत में 26,778 रुपये की गिरावट, चांदी भी सस्ती हुई

इंदौर  शादियों के इस सीजन में सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिली है। आल टाइम हाई से सोने का रेट 26778 रुपये के स्तर पर लुढ़क चुका है। वहीं, चांदी 143106 रुपये सस्ता हो गया है। आइए डीटेल्स में जानते हैं कि सोने और चांदी का क्या रेट चल रहा है? आज सोने का क्या है रेट? (Gold price today) इंडियन बुलियंस ज्वैलर्स एसोसिएशन की रिपोर्ट के अनुसार गुरुवार को 24 कैरेट 148652 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। 23 कैरेट गोल्ड का रेट 148057 रुपये प्रति 10 ग्राम, 22 कैरेट गोल्ड का रेट 136165 रुपये प्रति 10 ग्राम और 18 कैरेट गोल्ड का रेट 111489 रुपये 10 ग्राम के स्तर पर था। वहीं, 14 कैरेट गोल्ड का रेट 86961 रुपये प्रति 10 ग्राम था। चांदी दाम कितना गिरा? (Silver Rate Today) ibjarates के अनुसार गुरुवार को चांदी का रेट 236882 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर था। बता दें, शुक्रवार को छुट्टी थी। इस वजह से नए रेट जारी नहीं किए गए थे। वहीं, शनिवार और रविवार को सप्ताहिक की होने की वजह से अब सोमवार को नए रेट जारी किए जाएंगे। सोने की कीमतों में गिरावट की क्या वजह? (Why Gold price falling) मौजूदा समय में वैश्विक स्तर ईरान युद्ध की वजह से काफी उथल-पुथल मचा हुआ है। जिसकी वजह से निवेशक सोने की जगह डॉलर में इनवेस्टमेंट कर रहे हैं। मौजूदा समय में डॉलर काफी मजबूत हो चुका है। डॉलर की कीमतों में जारी तेजी की वजह से भी सोने पर बुरा असर पड़ा है। बढ़ती महंगाई ने भी स्थिति को बिगाड़ा सोने के रेट में गिरावट के पीछे की वजह महंगाई को भी माना जा रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में जारी बढ़ोतरी की वजह से दुनिया भर में महंगाई बढ़ रही है। इसकी वजह से भी कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। महंगा होने की वजह से भी बनाई दूरी सोने की कीमतों में अचानक से एक साल के दौरान बहुत तेजी आई है। जिसके बाद आम-आदमी की पहुंच से सोना दूर होने लगा। निवेशकों ने इसकी वजह से भी दूरी बनाई है। गिरावट के पीछे एक वजह यह भी है। (यह निवेश की सलाह नहीं है। सोने और चांदी की कीमतों में जारी तेजी के पीछे कई कारण होते हैं। यहां प्रस्तुत जानकारी के आधार पर लाइव हिन्दुस्तान गोल्ड और सिल्वर में इनवेस्टमेंट की सलाह नहीं देता है।)

फ्लाइट्स में कटौती की तैयारी, एयर इंडिया घटाएगी सुविधाएं – यात्रियों को मिलेगी राहत

नई दिल्ली मौजूदा संकट के बीच एयर इंडिया की तरफ से ग्राहकों को बड़ी राहत दी जा सकती है। एयर इंडिया छोटी घरेलू और इंटरनेशनल फ्लाइट्स में भोजन की व्यवस्था वैकल्पिक बनाने का विचार करने जा रहा है। ऐसे में अगर कोई पैसेंजर खाना का विकल्प नहीं चुनता है तब की स्थिति में टिकट का किराया 250 रुपये तक कम हो सकता है। दी टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार एयर इंडिया मौजूदा परिस्थितियों से निपटने के लिए अन्य कई फैसले ले सकती है। कंपनी में इसको लेकर काफी मंथन चल रहा है। एक सुविधा देने पर विचार कर रही है कंपनी रिपोर्ट के अनुसार खाना का चयन ना करने पर पैसेंजर्स को सस्ता एयर इंडिया का टिकट मिल जाएगा। कंपनी इसके अलावा बिजनेस क्लास के पैसेंजर्स के लिए लाउंज एक्सेस अनबंडलिंग करने की तैयारी भी कर रही है। मौजूदा समय में लाउंज ऑपरेटर्स मेट्रो सिटी में 1100 रुपये से 1400 रुपये तक और नॉन मेट्रो शहर में 600 रुपये से 700 रुपये तक वसूल रहे हैं। औसतन 1000 रुपये एक लाउंज एक्सेस पर खर्च होता है। बहुत से बिजनेस क्लाइस की फ्लाइट्स काफी तेजी के ऑपरेट होती हैं। ऐसे में कई बार पैसेंजर एयरपोर्ट पर लाउंज एक्सेस नहीं कर पाते हैं। ऐसे में यह सुविधा अगर हटती है तो टिकट का किराया कम हो जाएगा। मामले की जानकारी रखने वाले व्यक्ति के अनुसार, “एयर इंडिया पहले दिन से ही भोजन को टिकट में जोड़ती आ रही है। लेकिन अब एविएशन टरबाइन फ्यूल का रेट बढ़ने और रुपये की कीमत घटने की वजह से हवाई जहाज का रेट बढ़ गया है। भारत एक प्राइस सेसंटिव देश है। ऐसे में कीमतें अधिक होने की स्थिति में पैसेंजर्स ट्रेन या रोड का विकल्प चुन सकते हैं। जिसकी वजह से कंपनी इस भोजन की व्यवस्था पर विचार कर रही है।” जुलाई से एयर इंडिया की इंटरनेशनल फ्लाइट्स में होगी कटौती पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार एयर इंडिया जुलाई के महीने से इंटरनेशनल फ्लाइट्स में कटौती करेगा। कंपनी बढ़ते तेल के खर्च और हवाई पाबंदियों की वजह से यह फैसला लेने के लिए मजबूर है। मौजूदा समय में एयर इंडिया घाटे में चल रही है। वित्त वर्ष 2026 में एयर इंडिया को 22000 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। शुक्रवार को कंपनी के चीफ एग्जीक्यूटिव और एमडी Campbell Wilson ने कहा, “हमने ने अप्रैल और मई के महीने में कुछ फ्लाइट्स की कटौती की है। इसके पीछे की वजह बढ़ता तेल का खर्च और एयरस्पेस की पाबंदियां हैं। जिसके कारण हमारी इंटरनेशनल फ्लाइट्स मुनाफा नहीं कमा पा रही हैं।”

SBI से 40 लाख का घर लोन: आपकी इनकम कितनी होनी जरूरी, EMI का पूरा हिसाब

नई दिल्ली एक आम आदमी के लिए होम लोन सबसे अधिक रकम का और सबसे अधिक अवधि वाला लोन होता है। ऐसे में कभी भी जल्दबाजी में होम लोन नहीं लेना चाहिए। होम लोन लेने से पहले सभी बैंकों द्वारा ऑफर की जा रही ब्याज दर और दूसरे चार्जेज की तुलना कर लें। जहां आपको सबसे सस्ता पड़ रहा हो, वहां से होम लोन लें। अगर आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा नहीं है, तो होम लोन लेने से पहले इसे जरूर ठीक कर लें। इससे आपको कर्ज पर कम ब्याज दर पाने में मदद मिलेगी। SBI की होम लोन पर ब्याज दरें देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक एसबीआई होम लोन पर 7.25 फीसदी से 8.45 फीसदी ब्याज दर ऑफर कर रहा है। होम लोन मैक्सगेन (OD) में ब्याज दर 7.75 फीसदी से 8.95 फीसदी है। टॉप अप लोन पर 7.75 फीसदी से 10.50 फीसदी ब्याज दर मिल रही है। वहीं, योनो इंस्टा होम टॉप अप लोन पर बैंक 8.10 फीसदी ब्याज दर ऑफर कर रहा है।   40 लाख के होम लोन पर कितना बनेगा ब्याज अगर आप एसबीआई से 40 लाख रुपये का होम लोन 7.25 फीसदी ब्याज दर पर 30 साल के लिए लेते हैं, तो मंथली ईएमआई 27,287 रुपये की बनेगी। यहां आप 30 साल में कुल ब्याज 58,23,338 रुपये चुकाएंगे। अगर आप यह लोन 25 साल के लिए लेते हैं, तो मंथली ईएमआई 28,912 रुपये की बनेगी। यहां आप कुल ब्याज 46,73,682 रुपये चुकाएंगे। अगर आप यह लोन 20 साल के लिए लेते हैं, तो मंथली ईएमआई 31,615 रुपये की बनेगी। इस लोन में आप कुल ब्याज 35,87,609 रुपये चुकाएंगे। अवधि (Tenure)    मासिक EMI    कुल ब्याज 30 साल    ₹27,287    ₹58,23,338 25 साल    ₹28,912    ₹46,73,682 20 साल    ₹31,615    ₹35,87,609 अवधि (Tenure)    ब्याज दर    न्यूनतम मंथली सैलरी 30 साल    7.25%    ₹54,574 25 साल    7.25%    ₹57,824 कितनी होनी चाहिए आपकी सैलरी? बैंक आपकी मंथली सैलरी के 50 फीसदी तक की रकम के बराबर ईएमआई वाला लोन आसानी से दे देते हैं। एसबीआई से 40 लाख रुपये का होम लोन 7.25 फीसदी ब्याज दर पर 30 साल के लिए लेने के लिए न्यूनतम मंथली सैलरी 54,574 रुपये होनी चाहिए। इसमें एक शर्त यह है कि आपके ऊपर पहले से कोई दूसरा लोन नहीं होना चाहिए। अगर आप यह लोन 25 साल के लिए लेते हैं, तो न्यूनतम मंथली सैलरी 57,824 रुपये होनी चाहिए।

April 2026 Car Sales: Hyundai, Tata और Mahindra की बिक्री में उछाल, Kia ने भी बढ़ाया ग्राफ

मुंबई  अप्रैल 2026 के खत्म होने के साथ ही कार बनाने वाली कंपनियों ने वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत के साथ बिक्री में एक पॉज़िटिव नोट हासिल किया है. बीते माह के दौरान, लगभग सभी कार ब्रांड्स ने वित्त वर्ष 2026 की तुलना में बिक्री में साल-दर-साल अच्छी बढ़त दर्ज की है. घरेलू बाज़ार में Tata Motors और Mahindra दूसरे और तीसरे स्थान पर मज़बूती से बने रहे।  हालांकि Hyundai ने इस महीने अपने अब तक के सबसे बेहतरीन प्रदर्शन के साथ Mahindra के साथ का फ़ासला कम कर दिया. वहीं Kia India की बात करें तो दूसरी जनरेस की Kia Seltos और Sonet की ज़बरदस्त मांग के चलते अप्रैल महीने में कंपनी ने अपने अब तक के सबसे अच्छे होलसेल आंकड़े को छू लिया. यहां हम टॉप-6 कार निर्माताओं की बिक्री के बारे में बता रहे हैं।  1. Maruti Suzuki की बिक्री सबसे पहले Maruti Suzuki की बात करें तो अप्रैल 2026 में कंपनी ने 1,87,704 यूनिट्स की घरेलू बिक्री दर्ज की, जो इसकी अब तक की सबसे ज़्यादा मासिक बिक्री है. यह कार निर्माता कंपनी हैचबैक, सेडान और SUV के विस्तृत मिश्रण की बदौलत बिक्री के मामले में बाज़ार में काफ़ी बड़े अंतर से अपनी बढ़त बनाए हुए है।  कंपनी के कॉम्पैक्ट और मिड-साइज़ सेगमेंट की बिक्री 80,659 यूनिट्स की रही, जबकि Maruti Alto K10, WagonR और S-Presso जैसी छोटी कारों का योगदान 16,066 यूनिट्स का रहा. वहीं, इस महीने Maruti eVitara का योगदान भी 2,006 यूनिट्स का रहा, जिसमें से लगभग 85 प्रतिशत बिक्री इसकी बड़ी 61kWh बैटरी वाले वेरिएंट से हुई।  2. Tata Motors की बिक्री स्वदेशी कार निर्माता Tata Motors की बात करें तो अप्रैल 2026 में यह कंपनी दूसरे स्थान पर बनी रही. इस दौरान कंपनी के वाहनों की बिक्री में साल-दर-साल 30.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह अप्रैल 2025 के 45,199 यूनिट्स से बढ़कर लगभग 59,000 यूनिट्स तक पहुंच गई।  Tata Motors की बिक्री को Nexon और Punch जैसे मॉडल्स की मज़बूत मांग के साथ लगातार समर्थन मिल रहा है, जो इसकी बिक्री में अहम योगदान दे रहे हैं. इसके अलावा, कंपनी के इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की बिक्री में भी ज़बरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसमें साल-दर-साल 72.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई।  3. Mahindra & Mahindra की बिक्री Mahindra & Mahindra ने अप्रैल 2026 में 56,331 यूनिट्स की घरेलू बिक्री दर्ज की, जो अप्रैल 2025 की 52,330 यूनिट्स की तुलना में साल-दर-साल 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. हालांकि, मार्च 2026 की 60,272 यूनिट्स की तुलना में कंपनी की बिक्री में 6.5 प्रतिशत की गिरावट आई है।  बीते माह भी कार निर्माता कंपनी ने अपना तीसरा स्थान बरकरार रखा है, और Tata Motors के साथ उसका अंतर कम बना हुआ है, जिससे हाल के महीनों में देखने को मिली कड़ी टक्कर जारी है. कंपनी की बिक्री मुख्य रूप से उसकी SUV लाइन-अप से ही बढ़ रही है, जिसमें Mahindra Scorpio, Thar और XUV रेंज जैसे मॉडल्स बिक्री को आगे बढ़ा रहे हैं।  4. Hyundai Motors की बिक्री साउथ कोरियन कार निर्माता कंपनी Hyundai ने अप्रैल 2026 में 51,902 यूनिट्स की घरेलू बिक्री दर्ज की, और चौथे स्थान पर बनी रही. कंपनी की इस बिक्री में मुख्य योगदान Hyundai Creta, Venue और Exter जैसे मुख्य मॉडल्स का रहा. इसके साथ ही Hyundai Grand i10 Nios और i20 जैसी हैचबैक कारों की मांग भी लगातार बनी रही।  बाते माह Hyundai Venue का प्रदर्शन खास तौर पर अच्छा रहा, और कंपनी ने 12,420 यूनिट्स की बिक्री के साथ अपनी अब तक की सबसे ज़्यादा मासिक घरेलू बिक्री दर्ज की. Hyundai Motor ने इस बेहतरीन प्रदर्शन का श्रेय काफी हद तक इस मॉडल को हाल ही में मिली पांच-स्टार Bharat NCAP सुरक्षा रेटिंग को दिया है।  5. Toyota Kirloskar Motor की बिक्री Toyota की बिक्री पर नजर डालें तो कंपनी ने अप्रैल 2026 में 30,159 यूनिट्स की घरेलू बिक्री दर्ज की, जिससे यह पांचवें स्थान पर रही. अप्रैल 2025 में 24,833 यूनिट्स की तुलना में बिक्री में साल-दर-साल 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. इसकी मुख्य वजह Innova HyCross, Urban Cruiser Hyryder और Fortuner जैसे मॉडल्स की लगातार बनी रही मांग थी।  इस महीने की एक अहम उपलब्धि कंपनी की Innova HyCross का 2 लाख यूनिट्स की कुल बिक्री का आंकड़ा पार करना रही. Toyota Kirloskar ने भारत के लिए अपनी पहली EV, Urban Cruiser EBella से भी पर्दा उठा दिया है, और इसकी कीमत की घोषणा जल्द ही की जा सकती है।  6. Kia India की बिक्री Hyundai के स्मामित्व वाली कंपनी Kia India ने अप्रैल 2026 में 27,286 यूनिट्स की घरेलू बिक्री दर्ज की, और Toyota के बाद अपनी दूसरी जगह बनाए रखी. कार बनाने वाली इस कंपनी ने अप्रैल महीने में अपनी अब तक की सबसे ज़्यादा बिक्री भी दर्ज की, जिसमें उसके मुख्य मॉडल्स की ज़बरदस्त मांग का अहम योगदान रहा।  कंपनी की Kia Seltos और Sonet इस बिक्री में मुख्य योगदान देने वाले मॉडल्स रहे. इस महीने के दौरान दोनों ही मॉडल्स ने 10,000 यूनिट्स की बिक्री का आंकड़ा पार कर लिया, जबकि Kia Carens Clavis ने भी कुल बिक्री को बढ़ाने में अपना योगदान जारी रखा। 

UPI पेमेंट में पिन डालने की परेशानी खत्म, अब ऐसे करें पेमेंट—पूरी जानकारी जानें

  नई दिल्‍ली  भारत के यूपीआई इकोसिस्‍टम में आए दिन बदलाव होता रहा है, जिस कारण यूपीआई का दायरा बढ़ता जा रहा है. अब एक और बड़ा बदलाव देखने को मिला है. ICICI बैंक, फोनपे और क्रेड जैसे फिनटेक प्लेटफॉर्म ऐसे फीचर्स पेश कर रहे हैं, जिसके तहत यूजर्स बिना यूपीआई पिन डाले UPI पेमेंट कर सकते हैं।  नए फीचर्स यूजर्स को यूपीआई पिन की जगह फिंगरप्रिंट या फेस की पहचान का उपयोग करके पेमेंट करने की मंजूरी देते हैं. इस बदलाव का उद्देश्य डिजिटल लेनदेन को तेज, अधिक आसान और सुरक्षित बनाना है. खासकर डेली पेमेंट के लिए।  क्‍या है ये नया फीचर?  बायोमेट्रिक UPI अथेंटिफिकेशन से छोटे लेन-देन के लिए यूपीआई पिन दर्ज करने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है. इसके बजाय, यूजर्स फिंगरप्रिंट स्कैन या चेहरे की पहचान जैसी चीजों का उपयोग करके पेमेंट कर सकते हैं. हालांकि, नियामक मानदंडों के अनुसार, यह सुविधा ₹5,000 तक के लेनदेन के लिए सीमित है. इससे अधिक राशि के लिए, पिन-दर्ज करना अनिवार्य होगा।  ICICI बैंक ने किया रोलआउट ICICI बैंक ने अपने iMobile ऐप पर यह फीचर शुरू कर दिया है, जिससे कस्‍टमर्स बायोमेट्रिक्स का इस्तेमाल करके पर्सनल लेन-देन, QR कोड बेस्‍ड पेमेंट और ऑनलाइन खरीदारी कर सकते हैं. यह फ़ीचर ऐप के अपडेटेड वर्ज़न (Android वर्ज़न 30+ और iOS 28.2+) पर उपलब्ध है और यह नए डेटा को इकट्ठा करने के बजाय यूज़र के डिवाइस पर पहले से सेफ स्टोर किए गए बायोमेट्रिक डेटा पर निर्भर करता है. ये फीचर ऐसा है, जिसके तहत आप जब चाहे बायोमेट्रिक अथेंटिफिकेशन को चालू या बंद कर सकते हैं. जरूरत पड़ी तो पिन अथेंटिफिकेशन फिर से शुरू कर सकते हैं।  PhonePe और CRED PhonePe ने UPI पेमेंट के लिए बायोमेट्रिक अथेंटिफिकेशन भी शुरू किया है, जिससे एक टच में पेमेंट का अनुभव मिलता है. यह सुविधा पिन भूल जाने और गलत इनपुट जैसी आम समस्याओं में काम आती है. स्मार्टफोन की अंतर्निहित सुरक्षा का लाभ उठाते हुए, यह भीड़भाड़ वाले स्थानों में पिन लीक होने जैसे रिस्‍क को कम करता है।  महत्वपूर्ण बात यह है कि PhonePe यूजर्स को बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन फेल होने की स्थिति में पिन अथेंटिफिकेशन का विकल्प देता है. यह सुविधा व्यापारी भुगतान, क्यूआर स्कैन और यहां तक ​​कि बैलेंस चेक समेत कई उपयोगों में काम करती है. CRED ने NPCI के साथ साझेदारी में इसी तरह की बायोमेट्रिक UPI सुविधा शुरू की है, जो निर्बाध और सुरक्षित भुगतान की दिशा में व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र के विस्तार का संकेत देती है। 

ट्रंप के बयान से बाजार की गिरावट, ब्रेंट क्रूड 4% चढ़ा, पॉवेल बने नफरत का कारण

मुंबई  शेयर बाजार में कमजोरी के साथ 30 अप्रैल को कारोबार की शुरुआत हुई है. सुबह 9:30 बजे पर सेंसेक्स 902.35 अंक गिरकर 76,594 पर ट्रेड करते हुए नजर आया. निफ्टी 277 अंक उछलकर 23,900 पर कारोबार करते हुए दिखा. सभी सेक्टर्स में बिकवाली देखी जा रही है. मेटल, ऑटो और बैंकिंग सेक्टर्स में सबसे ज्यादा गिरावट आई है. इस गिरावट के पीछे कई वजह शामिल हैं।  सबसे पहली वजह मानी जा रही है कि डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ा बयान देते हुए कहा कि वह अपनी स्थिति संभाल नहीं पा रहा और बिना परमाणु हथियार वाले समझौते पर फैसला लेने में भी असमंजस में है. सीएनबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने साफ चेतावनी दी कि ईरान को जल्द समझदारी दिखानी होगी, वरना हालात और बिगड़ सकते हैं. उनके इस सख्त रुख के बाद ग्लोबल मार्केट में असर दिखा और कच्चे तेल की कीमत बढ़कर करीब 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।  डोनाल्ड ट्रंप का बयान डोनाल्ड ट्रंप का ‘नो मोर मिस्टर नाइस गाय’ बयान सिर्फ एक सामान्य कमेंट नहीं, बल्कि उनकी रणनीति का संकेत माना जा रहा है. इसका मतलब है कि अब वह कूटनीतिक नरमी छोड़कर ज्यादा आक्रामक रुख अपनाने के पक्ष में हैं. यूएस और ईरान के बीच बढ़ता टेंशन और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सप्लाई बाधित होने का खतरा, ग्लोबल डर बढ़ा रहा है।  डोनाल्ड ट्रंप के कट्टर दुश्मन माने जाने वाले फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने US Fed की अपनी आखिरी बैठक में एक बार फिर से अमेरिकी पॉलिसी रेट्स को स्थिर रखने को फैसला किया है. यानी इनमें किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया है. वेस्ट एशिया संषर्ष और इससे महंगाई के खतरे का हवाला देते हुए फेड ने US Policy Rates Unchanged रखे हैं. इसका असर अमेरिकी शेयर बाजारों में गिरावट के रूप में दिखा, तो भारत समेत एशियाई शेयर मार्केट क्रैश हो गए।  Sensex-Nifty खुलते ही बिखरे ग्लोबल शेयर बाजारों में मचे कोहराम के बीच भारतीय शेयर मार्केट में आई इस बड़ी गिरावट के बीच BSE Sensex ने अपने पिछले बंद 77,496 के मुकाबले तेज गिरावट लेकर 77,014 पर ओपन हुआ और फिर ये लगातार फिसलता चला गया. कुछ ही मिनटों में सेंसेक्स 900 अंक से ज्यादा का गोता लगाकर 76,502 के लेवल पर आ गिरा।  भारतीय रुपया में गिरावट डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होकर करीब 95.21 प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच गया है, जो रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब माना जा रहा है. रुपये में यह गिरावट विदेशी निवेशकों (FII) के लिए चिंता बढ़ाती है, क्योंकि इससे निवेश का रिटर्न कम हो सकता है, और इसी वजह से शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ जाता है।  यूएस फेड का फैसला ग्लोबल संकेत भी फिलहाल नेगेटिव बने हुए हैं. यूएस फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को भले ही स्थिर रखा है, लेकिन बढ़ती महंगाई और जियो-पॉलिटिकल टेंशन के कारण 2026 में रेट कट की उम्मीदें कम हो गई हैं. वहीं, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड खासकर 10 साल की करीब 4.4% पर पहुंचने से अमेरिका में निवेश ज्यादा आकर्षक हो गया है, जिससे भारत जैसे उभरते बाजारों से कैपिटल आउटफ्लो का खतरा बढ़ सकता है।  निफ्टी लगातार गिरते हुए करीब 23,900 के स्तर पर पहुंच गया है और बाजार में पैनिक सेलिंग जैसा माहौल देखने को मिल रहा है. India VIX करीब 4% उछलकर कारोबार कर रहा है, जो इस बात का संकेत है कि भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव (वॉलिटिलिटी) बढ़ रहा है और निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है. अब निवेशकों की नजर Q4 नतीजों पर टिकी है, जहां ACC, Adani Ports, Hindustan Unilever और Bajaj Finserv जैसी बड़ी कंपनियां अपने रिजल्ट्स जारी करेंगी, जो बाजार की आगे की दिशा तय करने में अहम फैक्टर रहेगा। 

क्रूड ऑयल के दाम 111 डॉलर पार, पेट्रोल 393 रुपये पर, कई देशों में तेल संकट बढ़ा

मुंबई यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) के फैसले से दुनिया भर में तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है. ब्रेंट क्रूड करीब 2.8% बढ़कर 111 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि WTI भी लगभग 100 डॉलर के आसपास है. इसी बीच UAE ने 1 मई से OPEC और OPEC+ छोड़ने का बड़ा फैसला लिया है.इससे पूरी दुनिया के तेल बाजार, कीमतों और सप्लाई सिस्टम पर असर पड़ सकता है।  OPEC और OPEC+ क्या है? ओपेक यानी ऑर्गनाइजेशन ऑफ पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (OPEC) एक ऐसा ग्रुप है जिसमें बड़े तेल उत्पादक देश शामिल हैं. इसमें सऊदी अरब, इराक, ईरान, कुवैत जैसे देश शामिल हैं और हाल तक यूएई भी इसका हिस्सा था.इसका मुख्य काम तेल उत्पादन को कंट्रोल करके कीमतों को मैनेज करना है।  OPEC कैसे काम करता है?  ओपेक तरराष्ट्रीय तेल बाजार  में बैलेंस बनाए रखने की कोशिश करता है.जब वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें गिरने लगती हैं, तो ओपेक देश मिलकर तेल की सप्लाई (उत्पादन) में कटौती कर देते हैं, ताकि मांग के मुकाबले आपूर्ति कम होने से कीमतें फिर से स्थिर हो सकें.इसके विपरीत, जब तेल की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं और दुनिया भर में ऊर्जा संकट का खतरा मंडराने लगता है, तो ओपेक उत्पादन बढ़ाकर बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ा देता है.इससे सदस्य देशों की कमाई  सुरक्षित बनी रहती है और और ग्लोबल मार्केट में कीमतों में  ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं होता।  OPEC क्या है और क्यों इतना ताकतवर है? ओपेक+ में ओपेक के साथ कुछ और देश भी जुड़े हैं, जैसे रूस.यह 2016 में तब बना जब तेल की कीमतें गिर गई थीं और ओपेक अकेले बाजार को संभाल नहीं पा रहा था.आज ओपेक+ दुनिया के करीब 40-50% तेल उत्पादन को कंट्रोल करता है।  ओपेक+ (OPEC+) की असली ताकत इस बात में छिपी है कि यह संगठन दुनिया के तेल सप्लाई के एक बहुत बड़े हिस्से को कंट्रोल करता है.जब भी ओपेक+ के सदस्य देश कोई फैसला लेते हैं, तो उसका असर तुरंत अंतरराष्ट्रीय बाजार पर दिखाई देता है और तेल की कीमतें पलक झपकते ही ऊपर-नीचे होने लगती हैं.चूंकि दुनिया की इकोनॉमी तेल पर टिकी है, इसलिए इनके फैसलों का सीधा असर हर देश की महंगाई, ट्रांसपोर्ट की लागत और पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है.यही वजह है कि ओपेक+ को इतना ताकतवर माना जाता है, क्योंकि यह पूरी दुनिया की जेब और बाजार की दिशा बदल सकती है।  यूएई ने ओपेक क्यों छोड़ा? जान लें वजह इसके अलावा, यूएई को भविष्य की भी चिंता है क्योंकि रिन्यूएबल एनर्जी(Renewable Energy) के बढ़ते चलन के कारण आने वाले समय में तेल की मांग घट सकती है. ऐसे में यूएई की सोच यह है कि आज का तेल भविष्य की तुलना में ज्यादा कीमती हो सकता है, इसलिए वह अभी अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल करके ज्यादा से ज्यादा कमाई करना चाहता है. ओपेक की पाबंदियों से बाहर निकलकर वह अपनी इकोनॉमी को और मजबूत करने और भविष्य के जोखिमों से निपटने की तैयारी कर रहा है।  घरेलू वायदा बाजार में गिरावट जहां अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी दिखी, वहीं घरेलू स्तर पर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। क्रूड ऑयल करीब 0.88% यानी 84 रुपये गिरकर 9,401 रुपये पर कारोबार करता दिखा।  होरमुज जलडमरूमध्य बना चिंता का कारण Strait of Hormuz को लेकर बनी अनिश्चितता भी कीमतों में तेजी की बड़ी वजह है। यह अहम समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और LNG सप्लाई का लगभग 20% संभालता है, और यहां किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर बाजार पर पड़ सकता है। भारत पर पड़ सकता है असर विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहती हैं, तो भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है। इससे महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यूएई और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से उत्पादन को लेकर मतभेद थे.इसके अलावा कोटा सिस्टम से यूएई संतुष्ट नहीं था.वह अपनी मार्केट शेयर बढ़ाना चाहता है।  यूएई के बाहर निकलने का असर क्या होगा? यूएई के ओपेक से बाहर निकलने का असर काफी गहरा हो सकता है, जिससे सबसे पहले ओपेक की वैश्विक ताकत कमजोर पड़ सकती है.यूएई उन गिने-चुने देशों में शामिल था जिसके पास जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त तेल उत्पादन करने की बड़ी क्षमता थी, और उसके जाने से संगठन का दबदबा कम होना तय है.दूसरा बड़ा असर तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के रूप में दिख सकता है. चूंकि अब सप्लाई को एक सुर में कंट्रोल करना मुश्किल होगा, इसलिए बाजार पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा वोलाटाइल हो सकता है. अंत में, इससे तेल बाजार पूरी तरह बिखर सकता है. जब हर देश संगठन की एकजुटता के बजाय अपने निजी फायदे और रणनीति के हिसाब से फैसले लेने लगेगा, तो इससे एकजुटता कम होगी और भविष्य में ग्लोबल मार्केट को संतुलित करना एक बड़ी चुनौती बन जाएगा।  क्यों बढ़ रही हैं तेल की कीमतें? क्या आगे भी जारी रहेगी तेजी इस समय सबसे बड़ा कारण है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना, जहां से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है.ईरान युद्ध के कारण सप्लाई बाधित है और निर्यात कम हो गया है.इसी वजह से कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं.अगर हालात सामान्य होते हैं और यूएई ज्यादा उत्पादन शुरू करता है:सप्लाई बढ़ सकती है कीमतें फिर नीचे आ सकती हैं.लेकिन अभी बाजार अनिश्चित है कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं।  भारत पर क्या असर पड़ेगा? क्या पेट्रोल-डीजल होगा महंगा?  ग्लोबल ऑयल मार्केट में होने वाली इस हलचल का भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश पर सीधा और बड़ा असर पड़ता है. कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से न केवल पेट्रोल-डीजल महंगा होने का डर रहता है, बल्कि इससे माल ढुलाई की लागत बढ़ती है, जिससे सीधे तौर पर महंगाई में इजाफा होता है और देश का व्यापार घाटा भी बढ़ सकता है।  हालांकि, आम जनता के लिए राहत की बात यह है कि केंद्र सरकार ने फिलहाल कीमतों में बढ़ोतरी की किसी भी संभावना से इनकार किया है. पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने साफ किया है कि पेट्रोल … Read more

शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स 609 अंक चढ़ा, निफ्टी 24,177 पर बंद

मुंबई   बुधवार (29 अप्रैल) को शेयर बाजार में दिनभर तेजी का माहौल रहा। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 1,056 अंक उछला, वहीं निफ्टी 24,329.30 के स्तर पर था। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 609.45 अंक की तेजी के साथ 77,496.36 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी 181.95 अंक की बढ़त के साथ 24,177.65 के स्तर पर बंद हुआ।    शेयर बाजार में तेजी के कारण…. कच्चे तेल की कीमत में गिरावट वैश्विक बाजारों से मिले संकेतों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में भी हल्की नरमी दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड 0.21% की गिरावट के साथ 111 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। इससे महंगाई को लेकर चिंता कुछ कम हुई है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। तेल सस्ता होने से इंपोर्ट बिल घटता है, व्यापार घाटा कम करने में मदद मिलती है और रुपए पर दबाव भी कम होता है। साथ ही ट्रांसपोर्ट, एविएशन और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर्स की लागत भी घटती है। ग्लोबल मार्केट्स का हाल एशियाई बाजारों में मजबूती का असर भी भारतीय बाजारों पर देखने को मिला है। हेंग सेंग, कोस्पी, सेट कंपोजिट, शंघाई कंपोजिट और जकार्ता कंपोजिट में बढ़त रही, जबकि निक्केई 225 और ताइवान वेटेड में गिरावट दर्ज हुई। अमेरिकी बाजार मंगलवार को कमजोरी के साथ बंद हुए थे। घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने भी बाजार को सहारा दिया है। विदेशी निवेशकों (FII) ने मंगलवार को 2,103.74 करोड़ रुपए की बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 1,712.01 करोड़ रुपए की खरीदारी की, जिससे बाजार में गिरावट सीमित रही।  

Honda City का नया फेसलिफ्ट मॉडल और नई SUV भारत में होगी लॉन्च, तारीख जानें

मुंबई  कार निर्माता कंपनी Honda Cars India आगामी 22 मई 2026 को अपनी फेसलिफ़्टेड Honda City और एकदम नई Honda ZR-V SUV को लॉन्च करने वाली है. जहां Honda City को अपनी मौजूदा पांचवीं जेनरेशन में दूसरा फेसलिफ़्ट मिलेगा, वहीं Honda ZR-V की बात करें तो इसके साथ भारत में एक नई नेमप्लेट की एंट्री होगी. खास बात यह है कि इस कार को कम्प्लीटली बिल्ट यूनिट (CBU) के तौर पर लाया जाएगा और उम्मीद है कि यह Honda की लाइनअप में ज़्यादा प्रीमियम सेगमेंट में अपनी जगह बनाएगी।  नई Honda ZR-V SUV का डिजाइन दुनिया भर में, Honda ZR-V को Honda HR-V और Honda CR-V के बीच रखा गया है. डिजाइन की बात करें तो इसमें पतले LED हेडलैंप दिए गए हैं, जिनके साथ एक बड़ी ग्लॉस ब्लैक ग्रिल दी गई है. वहीं पीछे की तरफ, इसमें हॉरिजॉन्टल तरीके से लगे टेल-लैंप दिए गए हैं, जो टेलगेट में ही इंटीग्रेटेड हैं।  आकार की बात करें तो, Honda ZR-V की लंबाई 4,568 mm, चौड़ाई 1,840 mm और ऊंचाई 1,620 mm रखी गई है, और इसका व्हीलबेस 2,657 mm मिलता है।  नई Honda ZR-V SUV का इंटीरियर इसके इंटीरियर की बात करें तो, इसमें Apple CarPlay और Android Auto के साथ एक 9-इंच की फ्री-स्टैंडिंग टचस्क्रीन और एक डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर मिलता है. इसके अलावा, कार में हेड-अप डिस्प्ले, वायरलेस चार्जिंग और पावर्ड टेलगेट जैसी अन्य दिलचस्प फीचर भी इसमें शामिल हैं. दूसरी पंक्ति की सीटें लगी होने पर, इसकी बूट कैपेसिटी 370 लीटर है।  सेफ्टी फीचर्स की बात करें तो Honda ZR-V में Honda का Sensing suite दिया गया है, जिसमें कोलिजन मिटिगेशन ब्रेकिंग, लेन कीप असिस्ट, अडैप्टिव क्रूज़ कंट्रोल और ऐसे ही कई फ़ीचर्स शामिल हैं।  नई Honda ZR-V SUV का पावरट्रेन Honda ZR-V को दुनिया भर में Honda के e:HEV हाइब्रिड सिस्टम के साथ पेश किया गया है. इसमें 2.0-लीटर पेट्रोल इंजन के साथ दो इलेक्ट्रिक मोटर लगाई गई हैं, जो मिलकर 181 bhp की पावर और 315 Nm का टॉर्क जेनरेट करते हैं. यह सिस्टम इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और इंजन ड्राइव मोड के बीच स्विच कर सकता है।  Honda City फेसलिफ्ट वहीं, Honda City की बात करें तो यह इसके मौजूदा पांचवीं जनरेशन के मॉडल का दूसरा अपडेट होगा, जिसे पहली बार 2023 में फ़ेसलिफ़्ट मिला था. इस बार, बाहरी हिस्से में होने वाले बदलावों के सीमित रहने की उम्मीद है. ये बदलाव शायद हेडलाइट्स, टेल-लैंप्स, बंपर्स और अलॉय व्हील्स जैसे हिस्सों में किए गए छोटे-मोटे सुधारों तक ही सीमित रहेंगे।  ज़्यादा ध्यान इसके अंदरूनी हिस्से पर दिया जा सकता है. इसमें ड्राइवर की सीट को पावर से एडजस्ट करने का फीचर, आगे की सीटों में वेंटिलेशन, एक बड़ा इंफोटेनमेंट सिस्टम और पूरी तरह से डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर जैसे फीचर्स शामिल किए जा सकते हैं।  इसके अलावा, पावरट्रेन की बात करें तो यहां पर कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा. Honda City फेसलिफ्ट में मौजूदा 1.5-लीटर पेट्रोल इंजन ही बरकरार रखा जाएगा, जो 6-स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन और CVT ऑटोमैटिक, दोनों विकल्पों के साथ उपलब्ध है।  वहीं कीमत पर नजर डालें तो, मौजूदा मॉडल की कीमतें 12 लाख रुपये से 16.07 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) के बीच रखी गई हैं, जबकि इसके हाइब्रिड वर्जन की कीमत 20 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है. ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि फेसलिफ्ट की कीमत इससे थोड़ी ज़्यादा होगी।