samacharsecretary.com

पेट्रोल को रिप्लेस करेगा E100 Fuel? किसानों के लिए वरदान, लेकिन राह में कई बड़ी चुनौतियां

  नई दिल्ली E100 Fuel Explained- Pros & Cons: पेट्रोल महंगा है, डीजल का भविष्य धुंधला है और इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर अभी भी रेंज एंजायटी का साया मंडरा रहा है. ऐसे में सरकार ने अब एक नया दांव चला है. E100 फ्यूल को मंजूरी मिल गई है और दावा किया जा रहा है कि यह भारत की तेल आयात पर निर्भरता कम कर सकता है. लेकिन सवाल यह है कि क्या वाकई प्योर इथेनॉल पर चलने वाली गाड़ियां पेट्रोल को रिप्लेस कर पाएंगी, या फिर यह भी लंबा प्रयोग साबित होगा? आइए समझते हैं कि E100 फ्यूल आखिर है क्या, इसके फायदे क्या हैं और इसकी राह में कौन-कौन सी बड़ी चुनौतियां खड़ी हैं।  केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में बड़ी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि, E100 फ्यूल के लिए नियमों को मंजूरी दे दी गई है. इसके लिए उन्होंने रात 8 बजे फाइल पर हस्ताक्षर किए और अब E100 फ्यूल कानूनी रूप से देश में इस्तेमाल होने के लिए तैयार है।  सरकार के इस फैसले के बाद एक बार फिर इथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल चर्चा में है. केंद्रीय मंत्री का कहना है कि, आने वाले डेढ़-दो महीनों में हुंडई, टोयोटा और एमजी मोटर जैसी कंपनियां भी अपनी फ्लेक्स फ्यूल कारों को पेश करेंगी. हाल ही में उन्होंने मारुति सुजुकी की लोकप्रिय कार वैनगआर के फ्लेक्स फ्यूल वर्जन को पेश किया था. जिसे शुरुआत में फ्लीट ऑपरेटर्स (कैब सर्विस प्रोवाइडर्स) के लिए उपलब्ध कराया जाएगा. आगे चलकर कंपनी इसे प्राइवेट व्हीकल के तौर पर भी पेश कर सकती है।  क्या है E100 फ्यूल? E100 एक ऐसा फ्यूल है जिसमें लगभग 100 प्रतिशत इथेनॉल होता है और इसमें पारंपरिक पेट्रोल नहीं मिलाया जाता. इथेनॉल एक ऐसा फ्यूल है, जिसे गन्ना, मक्का, चावल और और कृषि अपशिष्ट जैसी चीजों से तैयार किया जाता है. भारत में अभी E20 पेट्रोल का इस्तेमाल पहले से ही हो रहा है. जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है. E100 इसी दिशा में अगला कदम है, जिसे पूरी तरह इथेनॉल पर चलने के लिए तैयार किया गया है।  E20 फ्यूल के इस्तेमाल को लेकर पहले ही तमाम शिकायतें सामने आ चुकी हैं. कई वाहन मालिकों ने कहा है कि, E20 फ्यूल के इस्तेमाल के बाद उनके वाहनों का माइलेज गिरा है और साथ ही मेंटनेंस कॉस्ट भी बढ़ी है. इस बात से सरकार भी इंकार नहीं कर रही है, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) ने सोशल नेटवर्किंग साइट 'X' पर अपने एक बयान में कहा है कि, "रेगुलर पेट्रोल की तुलना में इथेनॉल की एनर्जी डेंसिटी कम होने के कारण, माइलेज में मामूली कमी आती है. जो E10 के लिए डिज़ाइन किए गए और E20 के लिए कैलिब्रेट किए गए चार पहिया वाहनों के लिए अनुमानित 1-2%, और अन्य वाहनों के लिए लगभग 3-6% है।  E100 फ्यूल पर इतना जोर क्यों? सरकार की मानें तो भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के रूप में विदेशों से आयात करता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. ऐसे में सरकार E100 फ्यूल के जरिए इंपोर्टेड तेल पर निर्भरता कम करना चाहती है. देश में तैयार होने वाला इथेनॉल के जरिए तेल आयात पर होने वाला खर्च भी घट सकता है।  बताया जा रहा है कि, इसका एक बड़ा फायदा किसानों को भी मिलेगा. इथेनॉल उत्पादन बढ़ने से गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों की मांग बढ़ेगी, जिससे किसानों की आय में बढ़ोतरी हो सकती है. सरकार के अनुसार इथेनॉल प्रोग्राम की वजह से अब तक कच्चे तेल के आयात में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई है और किसानों को करीब 80,000 करोड़ रुपये की एक्स्ट्रा इनकम हुई है।  क्या E100 फ्यूल पेट्रोल की जगह ले सकता है? अब एक बड़ा सवाल ये है कि, क्या E100 फ्यूल पूरी तरह से पेट्रोल को रिप्लेस कर सकता है. सैद्धांतिक रूप से E100 फ्यूल पेट्रोल की जगह ले सकता है, लेकिन यह बदलाव तुरंत संभव नहीं है. इसके लिए स्पेशली डिजाइन किए गए वाहनों की जरूरत होगी. मौजूदा समय में भारत की सड़कों पर चल रही करोड़ों पेट्रोल कारें, बाइक और स्कूटर E100 फ्यूल पर चलने के लिए तैयार नहीं हैं. ये वाहन रेगुलर पेट्रोल या E20 फ्यूल के लिए बनाए गए हैं।  इन वाहनों में एक बड़ी संख्या उनकी भी है, जो पूरी तरह से E20 फ्यूल के लिए भी तैयार नहीं है. यही कारण है कि, पुराने वाहन मालिकों को नए फ्यूल के इस्तेमाल के बाद तमाम तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. एक अनुमान है कि, आने वाले सालों में E20 और E100 फ्यूल दोनों साथ-साथ मौजूद रहेंगे. धीरे-धीरे फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की संख्या बढ़ने के बाद ही E100 का इस्तेमाल बड़े स्तर पर संभव हो पाएगा।  किन वाहनों में इस्तेमाल होगा E100? E100 फ्यूल हर वाहन में नहीं डाला जा सकता. इथेनॉल का गुण और व्यवहार पेट्रोल से बिल्कुल अलग होता है, इसलिए इंजन, फ्यूल पंप, इंजेक्टर और फ्यूल लाइन में विशेष बदलाव करने पड़ते हैं. इसके लिए फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक वाले वाहन जरूरी होते हैं. मारुति सुजुकी ने वैगनआर फ्लेक्स-फ्यूल प्रोटोटाइप पेश किया है, जिसे E100 जैसे हाई इथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल पर चलाया जा सकता है. दोपहिया सेगमेंट में हीरो मोटोकॉर्प ने स्प्लेंडर और HF डीलक्स के फ्लेक्स-फ्यूल वर्जन भी पेश किए हैं. इसके अलावा सुजुकी के पोर्टफोलियो में भी एक मॉडल है और होंडा ने भी अपनी सीबी 350 के फ्लेक्स फ्यूल मॉडल को पेश किया था, जिसे अब डिस्कंटीन्यू किया जा चुका है।  फ्लेक्स-फ्यू वाले वाहन और उनकी कीमत वाहन     कीमत (एक्स-शोरूम) HF Deluxe Flex Fuel     72,792 रुपये  Splendor+ Flex Fuel     82,710 रुपये  Suzuki Gixxer SF 250 Flex Fuel     2,26,382 रुपये Maruti Wagon R Flex Fuel     बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं  E100 फ्यूल के बड़े फायदे E100 फ्यूल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे भारत की विदेशी कच्चे तेल पर निर्भरता कम हो सकती है. चूंकि इथेनॉल देश में ही तैयार किया जा सकता है, इसलिए इसका इसका इस्तेमाल बढ़ा कर पेट्रोल की कीमतों में भी कमी आने की उम्मीद की जा रही … Read more

अनिल अग्रवाल का मेगा प्लान, वेदांता के विभाजन से बनीं 4 नई कंपनियां; निवेशकों के लिए क्या है मतलब?

 नई दिल्ली अरबपति अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाली वेदांता लिमिटेड के डिमर्जर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. इसके तहत अब चार नई कंपनियां बनी हैं, इनमें वेदांता एल्युमिनियम, वेदांता आयरन एंड स्टील, वेदांता ऑयल एंड गैस और वेदांता पावर शामिल हैं, जिन्हें लिस्ट किया गया है. इस तहत वेदांता लिमिटेड को मिलाकर ग्रुप की पांच लिस्टेड कंपनियां हो गई हैं. इस मौके पर Anil Agarwal ने कहा कि भारत में बड़े अवसर मौजूद हैं और इन कंपनियों आगे बढ़कर और भी बहुत कुछ करना होगा।  वेदांता रिसोर्सेज के चेयरमैन अनिल अग्रवाल का कहना है कि ये सभी सेक्टर्स रोमांचक हैं और इनमें अपार संभावनाएं हैं. हम डिविडेंड देने वाली कंपनी होने और कंपनियों के लिए वैल्यू क्रिएशन को लेकर बहुत सचेत हैं।  हर कंपनी में इतनी क्षमता Anil Agarwal ने भारत में मौजूद संभावनाओं पर जोर दिया. उन्होंने अगले पांच सालों में 20 अरब डॉलर के निवेश की रूपरेखा बताई. अग्रवाल ने कहा कि हमारी हर एक कंपनी में 100 अरब डॉलर का रेवेन्यू हासिल करने की क्षमता है. शेयरधारकों को लेकर वेदांता चेयरमैन ने आगे कहा कि उनके हित से बढ़कर कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है और पिछले पांच सालों में वेदांता ने 300% का रिटर्न दिया है।   आयात पर निर्भरता कम करना जरूरी  Vedanta Chairman के मुताबिक, भारत अपने नेचुरल रिसोर्सेज की 50% जरूरतों का आयात करता है, इसे कम करना जरूरी है. उन्होंने बताया कि भारत में थोरियम के विशाल भंडार हैं, और हमें आत्मनिर्भर बनने के लिए इस अवसर का लाभ उठाने पर काम करना चाहिए।  उन्होंने कहा कि वेदांता के सभी बिजनेस ग्रोथ के लिए तैयार हैं. मैंगनीज, निकेल, फेरोक्रोम और तांबे में मौजूद संभावनाओं को देखकर यह साफ संकेत मिलता है कि कितना कुछ किया जा सकता है।  'हम ग्रोथ के लिए तैयार' नई कंपनियों की लिस्टिंग के मौके पर अनिल अग्रवाल ने स्ट्रेटजी में टेक की अहम भूमिका भूमिका का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा, AI हमारी रगों में बसा है और हम इसका इस्तेमाल अपने सभी व्यवसायों में करते हैं.  योजना के तहत वेदांता रिसोर्सेज को भविष्य में दोबारा लिस्ट किया जाएगा और ग्रुप और इससे जुड़े व्यवसायों को आगे बढ़ना है, वे विकास के लिए पूरी तरह तैयार हैं।  अनिल अग्रवाल का दिलचस्प सफर  अपने दम पर कारोबारी साम्राज्य खड़ा करने वाले कारोबारियों का जिक्र होता है, तो फिर वेदांता (Vedanta Ltd) के अनिल अग्रवाल (Anil Agawal) का नाम लिस्ट में शामिल रहता है. साधारण परिवार में पैदा होने के बाद अनिल अग्रवाल ने अपनी मेहनत से माइनिंग व मेटल बिजनेस (Mining And Metal Business) का साम्राज्य खड़ा किया।  बिहार से शुरू हुआ उनका सफर मुंबई से होते हुए लंदन तक पहुंच गया. इतना ही नहीं, इस सफर के दरम्यान कई शानदार मुकाम हासिल हुए और लंदन स्टॉक एक्सचेंज (London Stock Exchange) पर पहली भारतीय कंपनी वेदांता की लिस्टिंग उनमें से एक है. संपत्ति की बात करें, तो अनिल अग्रवाल की नेटवर्थ (Anil Agarwal Networth) फोर्ब्स बिलेनियर्स इंडेक्स के मुताबिक, 4.6 अरब डॉलर है। 

बाजार में जश्न का माहौल! लगातार 4 पॉजिटिव संकेतों से आई जबरदस्त उछाल, अब नजर अगली बड़ी खबर पर

 नई दिल्ली कारोबारी हफ्ते के पहले दिन शेयर बाजार में जश्न का माहौल है, सेंसेक्स 860 अंक और निफ्टी 260 अंक उछलकर कारोबार कर रहा है. दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच पिछले साढ़े तीन महीने से जारी संघर्ष आखिरकार समाप्त होने जा रहा है. दोनों देशों के बीच एक शांति समझौता हो गया है. फिलहाल बाजार में तेजी के पीछे ये 4 बड़े कारण हैं, जिसने निवेशकों के सेंटिमेंट को सुधार दिया है. वहीं, बाजार अब 5वीं बड़ी खबर का इंतजार कर रहा है।  आइए एक-एक कर जानते हैं कि बाजार में तेजी के पीछे क्या कारण हैं.. 1. होर्मुज का खुलना पिछले तीन महीनों से पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण होर्मुज रूट बाधित चल रहा था. रविवार को अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक ऐतिहासिक शांति समझौते और नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने की घोषणा के बाद, इस रूट को पूरी तरह से व्यापार के लिए खोल दिया गया है. वैश्विक व्यापार के लिए यह इस साल की सबसे बड़ी राहत है. दुनिया का 20% से अधिक कच्चा तेल और LNG इसी रास्ते से गुजरता है, इसके खुलने से सप्लाई चेन ठप होने का डर पूरी तरह खत्म हो गया है. जिसने भारतीय बाजार में चौतरफा लिवाली को बढ़ावा दिया है।  2. कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट होर्मुज संकट टलने का सीधा असर कमोडिटी मार्केट पर देखने को मिला है. अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमतें 5% से अधिक टूटकर $83 प्रति बैरल के पास आ गई हैं. भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है. ऐसे में तेल का सस्ता होना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए किसी बूस्टर डोज से कम नहीं है. इससे देश का आयात बिल घटेगा, चालू खाता घाटा (CAD) नियंत्रण में आएगा।  3. डॉलर के मुकाबले रुपये की रिकॉर्ड मजबूती कच्चे तेल में गिरावट और वैश्विक बाजार में डॉलर इंडेक्स के सुस्त पड़ने से भारतीय रुपया (INR) अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जबरदस्त मजबूती का प्रदर्शन कर रहा है. रुपया मजबूत होकर 94.50 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है. रुपये की इस मजबूती से विदेशी निवेशकों (FIIs) का भरोसा भारतीय बाजार में फिर से लौट आया है, क्योंकि इससे उन्हें करेंसी डेप्रिसिएशन (मुद्रा के अवमूल्यन) का जोखिम कम हो जाता है. साथ ही, आयात होने वाली जरूरी वस्तुओं की लागत घटने से घरेलू स्तर पर महंगाई को रोकने में मदद मिलेगी।  4. बॉन्ड टैक्स कटौती से FII की बिकवाली थमी घरेलू मोर्चे पर सरकार और नीति निर्माताओं द्वारा बॉन्ड मार्केट पर टैक्स ढांचे में किए गए हालिया सुधार और कटौती का बड़ा असर दिख रहा है. पिछले कुछ महीनों से विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से लगातार पैसे निकाल रहे थे, लेकिन बॉन्ड टैक्स में राहत मिलने के बाद फिक्स्ड इनकम और इक्विटी मार्केट दोनों में विदेशी फंड्स का आउटफ्लो न के बराबर रह गया है. FIIs अब आक्रामक शॉर्ट-कवरिंग कर रहे हैं।  अब इस एक खबर का इंतजार (भारत-अमेरिका ऐतिहासिक ट्रेड डील) बाजार में आई इस शुरुआती तेजी के बीच अब निवेशकों की नजरें उस पांचवें और सबसे निर्णायक ट्रिगर पर टिकी हैं, जो इस रैली को एक नई ऊंचाई पर ले जा सकता है. भारत और अमेरिका के बीच एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Pact) के अंतिम मसौदे को लेकर बातचीत अंतिम चरण में है।  ट्रेड डील से बाजार को क्या उम्मीद? इस समझौते के तहत अमेरिका में भारतीय निर्यात खासकर टेक्सटाइल, फार्मा, आईटी सर्विसेज और इंजीनियरिंग सामान पर लगने वाली भारी ड्यूटी को कम किया जाना है, जिससे भारतीय कंपनियों को वियतनाम और मेक्सिको जैसे प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले बड़ा एडवांटेज मिलेगा। 

Gold Price Today: सोने-चांदी में जबरदस्त उछाल, 24 कैरेट गोल्ड 1.50 लाख के पार पहुंचा

इंदौर  भारतीय सर्राफा बाजार में सोना-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है. इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के मुताबिक, आज फिर 24 कैरेट वाले 10 ग्राम सोने की कीमत 1 लाख 50 हजार रुपये के पार पहुंच गई है, जो बीते कारोबारी दिन शुक्रवाक यानी 12 जून की शाम को 147800 रुपये प्रति 10 ग्राम थी।  ibjarates.com पर 15 जून 2026 की सुबह जारी किए गए रेट के मुताबिक, 995 शुद्धता वाले यानी 23 कैरेट सोने का रेट 149568 रुपये प्रति 10 ग्राम है, जबकि 916 शुद्धता वाले यानी 22 कैरेट गोल्ड का रेट 137555 रुपये प्रति 10 ग्राम है. वहीं, बीते कारोबारी दिन की तुलना में चांदी की कीमत में भी भारी उछाल आया है।  बता दें कि इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन की अधिकारिक वेबसाइट ibjarates.com पर सोमवार से शुक्रवार रोज सुबह और शाम गोल्ड और सिल्वर के रेट जारी होते हैं. आइए जानते हैं बीते कारोबारी दिन यानी शुक्रवार (12 जून) शाम की तुलना में आज कितना महंगा हुआ 22-24 कैरेट सोना।  15 June Gold-Silver Prices: सोना-चांदी आज कितने रुपये हुआ महंगा?   शुद्धता शुक्रवार सुबह का रेट शुक्रवार शाम का रेट सोमवार सुबह का भाव कितने बदले रेट सोना (प्रति 10 ग्राम) 999     147609 147800 150169  2369 रुपये महंगा सोना (प्रति 10 ग्राम) 995      147018 147208 149568  2360 रुपये महंगा सोना (प्रति 10 ग्राम) 916      135210 135385 137555  2170 रुपये महंगा सोना (प्रति 10 ग्राम) 750      110707 110850 112627  1777 रुपये महंगा सोना (प्रति 10 ग्राम) 585      86351 86463 87849  1386 रुपये महंगा चांदी (प्रति 10 ग्राम) 999      242295 242582 251011   8429 रुपये महंगी चांदी का रेट क्या है? चांदी की कीमत आज 251011 रुपये किलो है, जो बीते कारोबारी दिन यानी शुक्रवार शाम को 242582 रुपये किलो थी. बता दें कि इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन की अधिकारिक वेबसाइट ibjarates.com पर जारी कीमतों में जीएसटी एड नहीं होता और ज्वैलरी खरीदने पर मेकिंग चार्ज अलग से देने होते हैं. 

वैश्विक तनाव घटते ही बाजार में लौटी रौनक, सेंसेक्स में तूफानी तेजी, निवेशकों की हुई चांदी

मुंबई  अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म होने की खबर का असर अब दुनिया भर के बाजारों में साफ दिखाई देने लगा है. कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट के बाद निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और भारतीय शेयर बाजार ने भी आज यानी 15 जून को दमदार शुरुआत की है. शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 1100 अंकों से ज्यादा चढ़ गया, जबकि निफ्टी में भी शानदार तेजी देखने को मिली. ग्लोबल मार्केट से मिल रहे मजबूत संकेतों ने निवेशकों का जोश हाई कर दिया है।  सेंसेक्स-निफ्टी में जोरदार तेजी ग्लोबल मार्केट से मिले मजबूत संकेतों के बीच आज सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत शुरुआत की.सुबह करीब 9:17 बजे BSE सेंसेक्स 1,154.98 अंक यानी 1.53 फीसदी की तेजी के साथ 76,682.94 के स्तर पर कारोबार करता दिखा.वहीं 9:18 बजे NSE निफ्टी 50 इंडेक्स 341.30 अंक यानी 1.44 फीसदी चढ़कर 23,964.20 के स्तर पर पहुंच गया.बाजार में शुरुआती घंटों से ही खरीदारी का माहौल देखने को मिला।  चौतरफा खरीदारी से बाजार में रौनक, सभी सेक्टर्स में छाई हरियाली भारतीय शेयर बाजार के ब्रॉडर मार्केट्स में शानदार तेजी देखने को मिल रही है. बाजार खुलने के साथ ही हर तरफ खरीदारी का माहौल है, जिसके चलते निफ्टी मिडकैप 100 (Nifty Midcap 100) और निफ्टी स्मॉलकैप 100 (Nifty Smallcap 100) इंडेक्स 1.3-1.3 फीसदी की बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं. बीएसई (BSE) के तमाम सेक्टोरल इंडेक्स पूरी तरह हरे निशान में रंगे हुए हैं. सेंसेक्स, मिडकैप, स्मॉलकैप से लेकर बैंकिंग इंडेक्स तक में 1.3% से लेकर 2% से ज्यादा का तूफानी उछाल दर्ज किया जा रहा है, जो बाजार में निवेशकों के तगड़े भरोसे और चौतरफा हरियाली को दिखाता है।        निफ्टी रियल्टी (Nifty Realty) में सबसे ज्यादा 2.59 प्रतिशत का उछाल आया.     निफ्टी सीमेंट (Nifty Cement) 2.46 प्रतिशत की मजबूती के साथ दूसरे स्थान पर रहा.     निफ्टी ऑटो (Nifty Auto) में 1.92 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई.     इसके अलावा निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (1.85% ), निफ्टी ऑयल एंड गैस (1.83%) और निफ्टी पीएसयू बैंक (1.77% )  बढ़त के साथ हरे निशान में कारोबार कर रहे हैं. दूसरी ओर, आज हेल्थकेयर शेयरों पर थोड़ा दबाव दिखा, जिसमें निफ्टी फार्मा (Nifty Pharma) 0.17 प्रतिशत और निफ्टी हेल्थकेयर 0.05 प्रतिशत टूटकर कारोबार करते दिखे. अमेरिका-ईरान समझौते से निवेशकों का बढ़ा भरोसा बाजार में यह तेजी ऐसे समय आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने को लेकर समझौते की घोषणा हुई है.निवेशकों का मानना है कि इस समझौते से ग्लोबल टेंशन कम होगी और एनर्जी मार्केट पर दबाव घटेगा. यही वजह है कि दुनियाभर के शेयर बाजारों में राहत की लहर देखने को मिल रही है।  पहले दिए संकेत, अब किया ऐलान  डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही ईरान के साथ जल्द शांति समझौता होने के संकेत दे दिए थे और अब इसका ऐलान भी कर दिया है. Donald Trump ने यूएस-ईरान शांति समझौते का ये ऐलान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर अपने अकाउंट पर पोस्ट के जरिए किया।      उन्होंने कहा कि, 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ डील अब पूरी हो गई है, सभी को बधाई! मैं इसके जरिए होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को बिना किसी रोक-टोक के खोलने और साथ ही अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को तुरंत हटाने की मंजूरी देता हूं.' उन्होंने आगे कहा कि, 'दुनिया भर के जहाजों, अपने इंजन चालू करो, तेल की सप्लाई शुरू होने दो!' एशियाई बाजारों में भी दिखा जबरदस्त जोश अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की खबर के बाद एशियाई शेयर बाजारों में भी जोरदार खरीदारी देखने को मिली।      जापान का निक्केई इंडेक्स 4.68 फीसदी बढ़कर 69,108.03 पर पहुंच गया।      दक्षिण कोरिया का कोस्पी 5.64 फीसदी की तेजी के साथ 8,581.47 पर कारोबार करता दिखा।      ऑस्ट्रेलिया का ASX 200 इंडेक्स 1.44 फीसदी चढ़कर 8,930.6 पर पहुंच गया।      न्यूजीलैंड का NZX 50 इंडेक्स 0.28 फीसदी बढ़कर 13,431.14 पर पहुंचा, जबकि सिंगापुर का STI 0.76 फीसदी मजबूत होकर 5,025.8 के स्तर पर कारोबार करता दिखा।  ट्रंप के ऐलान के बाद WTI और ब्रेंट क्रूड में बड़ी गिरावट अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार देर रात सोशल मीडिया पर कहा कि ईरान के साथ समझौता अब पूरा हो चुका है.वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी कहा कि इस समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होंगे.इस घोषणा के बाद तेल बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई।  युद्ध खत्म होने और तेल सप्लाई को लेकर चिंताएं कम होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली.जुलाई डिलीवरी वाले WTI क्रूड फ्यूचर्स 4.77 फीसदी गिरकर 80.83 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए.वहीं अगस्त डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड करीब 4 फीसदी टूटकर 83.77 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा.ब्रेंट क्रूड 84 डॉलर प्रति बैरल के अहम स्तर से नीचे फिसल गया, जिसे बाजार के लिए राहत भरा संकेत माना जा रहा है। 

भारत में मेमोरी चिप निर्माण को मिलेगा बढ़ावा, नई कंपनियों के निवेश के संकेत: अश्विनी वैष्णव

नई दिल्ली AI, डेटा सेंटर और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की बढ़ती जरूरतों के बीच दुनिया भर में मेमोरी चिप्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसी को देखते हुए भारत भी सेमीकंडक्टर और मेमोरी चिप निर्माण के क्षेत्र में बड़े निवेश आकर्षित करने की तैयारी कर रहा है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में भारत में मेमोरी चिप निर्माण से जुड़ी नई कंपनियां निवेश कर सकती हैं, जबकि पहले से मौजूद कंपनियां भी अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर काम कर रही हैं। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं। मंत्री के अनुसार, वैश्विक स्तर पर मेमोरी चिप्स की मांग और आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया है। खासकर AI डेटा सेंटर, क्लाउड कंप्यूटिंग, सुपरकंप्यूटर और हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) चिप्स की बढ़ती जरूरत ने उद्योग पर दबाव बढ़ा दिया है। यही कारण है कि पिछले कुछ तिमाहियों में मेमोरी चिप्स की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। इसका असर स्मार्टफोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की लागत पर भी पड़ा है अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सेमीकंडक्टर उद्योग के इतिहास में पहली बार कुछ विशेष प्रकार की मेमोरी चिप्स की इतनी अधिक कमी महसूस की जा रही है। AI आधारित तकनीकों के विस्तार के कारण डेटा प्रोसेसिंग और स्टोरेज की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है। ऐसे में दुनिया भर की कंपनियां नई उत्पादन इकाइयां स्थापित करने और मौजूदा प्लांट्स का विस्तार करने में जुटी हुई हैं। उन्होंने कहा कि भारत में डेटा सेंटर सेक्टर का साइज आने वाले सालों में 200 अरब डॉलर से भी अधिक हो सकता है। इतनी बड़ी डिजिटल अर्थव्यवस्था को सपोर्ट करने के लिए विशाल स्टोरेज और हाई-स्पीड मेमोरी इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी। यही वजह है कि मेमोरी चिप निर्माण भारत के लिए एक रणनीतिक क्षेत्र बनता जा रहा है। मंत्री ने यह भी बताया कि हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) चिप्स का इस्तेमाल मुख्य रूप से AI सिस्टम, डेटा सेंटर, सुपरकंप्यूटर और एडवांस ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स में किया जाता है। वर्तमान में इन चिप्स की वैश्विक मांग इतनी तेज है कि कई कंपनियां नई फैक्ट्रियां शुरू कर रही हैं। कुछ नई उत्पादन यूनिट ने हाल ही में व्यावसायिक उत्पादन भी शुरू कर दिया है, जिससे भविष्य में सप्लाई की स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है। भारत सरकार का ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ भी इस दिशा में अहम भूमिका निभा रहा है। मिशन 1.0 के तहत देश में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की मजबूत नींव रखी जा रही है, जबकि मिशन 2.0 में चिप डिजाइन और सेमीकंडक्टर निर्माण में उपयोग होने वाली मशीनों के विकास पर विशेष जोर दिया जाएगा। सरकार चाहती है कि वैश्विक उपकरण निर्माता भारत में आकर केवल निर्माण ही नहीं, बल्कि डिजाइन और रिसर्च का काम भी करें। वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने दशकों बाद चिप निर्माण कंपनियों का भरोसा जीतने में सफलता हासिल की है। आज भारत केवल चिप उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। एक्सपर्ट का मानना है कि यदि भारत इस मौके का सही लाभ उठाता है, तो आने वाले वर्षों में देश इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में दुनिया के प्रमुख केंद्रों में शामिल हो सकता है। इससे न केवल निवेश और रोजगार बढ़ेंगे, बल्कि भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता भी मजबूत होगी।  

केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन पर बड़ा अपडेट, 8वें पे कमीशन से बढ़ी उम्मीदें

नई दिल्ली 8वें पे कमीशन को लेकर अब प्रक्रिया काफी तेज हो गई है। वित्त आयोग देश के अलग-अलग हिस्सों में बैठकें कर रहा है। कर्मचारी संगठनों से लगातार राय मांगी जा रही है। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की निगाह वित्त आयोग की बैठकों और इससे जुड़ी जानकारी पर बनी हुई है। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की फिटमेंट फैक्टर पर सबसे अधिक निगाह है। 6वें और 7वें वित्त आयोग के दौरान फिटमेंट फैक्टर ही केंद्र में रहा था। इसी से सैलरी संशोधन, डीए अन्य सभी कैलकुलेट किया जाएगा। बता दें, 28 फरवरी 2014 को 7वें वित्त आयोग का गठन किया गया था। लेकिन इसके लागू होने में 21 महीने का समय लगा था। 19 नवंबर 2015 को 7वें वित्त आयोग ने अपनी रिपोर्ट जमा की थी। 8वें वित्त आयोग की बात करें तो इसका गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था। आयोग के पास रिपोर्ट जमा करने के लिए 18 महीने का समय है। रिपोर्ट्स के अनुसार पे कमीशन 25 जुलाई 2027 तक सभी पक्षों से बातचीत के आधार पर तय रिपोर्ट को जमा कर सकता है। जिसपर अंतिम फैसला सरकार की तरफ से लिया जाएगा। क्या होता है फिटमेंट फैक्टर? एक तरह से फॉर्मूला होता है जिसके कैलकुलेशन के आधार पर कर्मचारियों की नई बेसिक सैलरी का पता चलता है। इसी फॉर्मूला के जरिए पुराने बेसिक पे की जगह नया रिवाइज बेसिक सैलरी तय किया जाता है। कैसे प्रयोग होता है फॉर्मूला? मौजूदा बेसिक पे x फिटमेंट फैक्टर = नया बेसिक पे सातवें बेसिक पे के वक्त पर फिटमेंट फैक्टर 2.57 था। जिसके बाद मिनिमम बेसिक सैलरी केंद्रीय कर्मचारियों की 7000 रुपये से बढ़कर 18000 रुपये के स्तर पर पहुचं गया। बता दें, केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी में हर 10 साल में एक बार इजाफा होता है। इस बार कितना फिटमेंट फैक्टर रह सकता है? अभी तक 8वें पे कमीशन के लिए कोई आधिकारिक फिटमेंट फैक्टर का ऐलान नहीं किया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार 2.28 से 3.83 फिटमेंट फैक्टर इस बार तय किया जा सकता है। पहले के समय में फिटमेंट फैक्टर नहीं हुआ करता था। जिसकी वजह से पे कमीशन की तरफ से सैलरी रिवीजन के लिए अलग-अलग फैक्टर्स को आधार बनाया जाता था। जिसके बाद कोई फैसला होता था। हालांकि, तब भी मूल में कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी और भत्ता ही होते थे। जिसे मार्केट के अनुसार बढ़ाया जाता था। बता दें, 8वें पे कमीशन के फैसलों का असर 1.1 केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को होगा।

कार खरीदने की सोच रहे हैं? Tata ने किया प्राइस हाइक का ऐलान, 1 जुलाई से बढ़ेंगे दाम

 नई दिल्ली देश की दूसरी सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल लिमिटेड (TMPV) ने बड़ा ऐलान किया है. कंपनी ने जानकारी दी है कि उनकी गाड़ियां 1 जुलाई 2026 से महंगी होने वाली है. इसका असर पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और ईवी सभी सेगमेंट की गाड़ियों पर पड़ेगा. कंपनी ने बताया कि उनकी कारों की कीमत 1.5 फीसदी तक बढ़ेगी।   कंपनी ने कार और एसयूवीज की कीमतों में इस इजाफे की वजह बढ़ते इनपुट कॉस्ट को बताया है. टाटा मोटर्स के मुताबिक, 'कीमतों में ये बदलाव इनपुट कॉस्ट में बढ़ोतरी और महंगाई के दबाव को कुछ हद तक कम करने के लिए किया जा रहा है. हालांकि TMPV इन बढ़ी हुई लागतों का एक बड़ा हिस्सा खुद उठा रही है, लेकिन इस बदलाव के जरिए असर का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डाला जा रहा है।  कंपनी ने कारों की नई कीमतों की जानकारी नहीं दी है. ब्रांड ने बताया कि सभी मॉडल और वेरिएंट्स की कीमतें अलग-अलग बढ़ाई जाएंगी, जिससे उनका वैल्यू प्रपोर्शन बना रहे. अगर आप 30 जून से पहले कार खरीदते हैं, तो आप बढ़ी हुई कीमतों के असर से बच सकते हैं।  दूसरी कंपनियों ने भी किया बढ़ोतरी का ऐलान हाल में ही बीएमडब्लू ने भी अपनी कारों की कीमत बढ़ाने का ऐलान किया है. कंपनी भारत में बिकने वाली अपनी बीएमडब्लू और मिनी ब्रांड की कारों की कीमतों को 2 फीसदी तक बढ़ा रही है. वहीं चीनी कार निर्माता कंपनी बीवाईडी ने भी अपनी कारों की कीमतों का बढ़ाने का ऐलान किया है. बीवाईडी की गाड़ियां भी 2 फीसदी तक महंगी होंगी।  Tata Motors ने साफ किया है कि उनकी इलेक्ट्रिक और ICE (इंटरनल कंबस्चन इंजन) दोनों ही कारों की कीमतें बढ़ेंगी. यानी टाटा टियागो, टिगोर, अल्ट्रोज, पंच, नेक्सन, कर्व, सिएरा, हैरियर और सफारी सभी के लिए अब आपको ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे. वहीं ईवी कारों की बात करें, तो टाटा टियागो ईवी, टिगोर ईवी, पंच ईवी, नेक्सन ईवी और हैरियर ईवी की कीमतें बढ़ेंगी।  अगर कंपनी की सभी कारों की कीमत बढ़ रही है, तो इसका असर हाल में लॉन्च हुई टियागो पर भी पड़ेगा. टाटा ने इस महीने ही टाटा टियागो ईवी, सीएनजी और पेट्रोल को लॉन्च किया है. इस कार की कीमत 4.69 लाख रुपये एक्स शोरूम से शुरू होती है। 

Elon Musk का SpaceX IPO बदलेगा हजारों की किस्मत, 4400 कर्मचारियों को मिल सकता है करोड़ों का फायदा

 नई दिल्ली दुनिया के सबसे अमीर इंसान एलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के आईपीओ की 12 जून को लॉन्चिंग हो रही है. ये दुनिया का सबसे बड़ा IPO है और रिपोर्ट की मानें, तो इसके शेयर मार्केट में SpaceX Share लिस्ट होते ही कंपनी के 4400 से ज्यादा कर्मचारी झटके में करोड़पति बन सकते हैं।  SpaceX IPO के तहत प्रति शेयर प्राइस बैंड 135 डॉलर तय किया गया है और इस स्तर पर, मस्क की कंपनी की वैल्यूएशन करीब 1.77 ट्रिलियन डॉलर होगी. जो इसे दुनिया के सबसे बड़े आईपीओ की लिस्ट में टॉप रैंकिंग पर पहुंचा देगा. कंपनी की योजना आईपीओ के जरिए 75 अरब डॉलर तक जुटाने की है।  SpaceX के कर्मचारियों की होगी बल्ले-बल्ले Elon Musk की ये रॉकेट कंपनी इतिहास के सबसे बड़े स्टॉक मार्केट डेब्यू के लिए तैयार है और इससे कंपनी के हजारों मौजूदा और पूर्व कर्मचारियों को भारी लाभ मिलने की उम्मीद है. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट की मानें, तो अगर SpaceX अनुमानित वैल्यूएशन पर पब्लिक होती है, तो फिर कंपनी के 4,400 से ज्यादा वर्तमान और पूर्व कर्मचारी करोड़पतियों की लिस्ट में शामिल हो सकते हैं। . रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व कर्मचारियों के पास कम से कम 1 मिलियन डॉलर मूल्य के शेयर हो सकते हैं. इससे भी खास बात ये है कि लगभग 400 कर्मचारियों के पास 100 मिलियन डॉलर से अधिक मूल्य की संपत्ति हो सकती है।  सैलरी के साथ कंपनी में हिस्सेदारी भी दूसरी बड़ी कंपनियां जहां कर्मचारियों के वेतन पर बहुत अधिक निर्भर करती हैं, तो वहीं स्पेसएक्स इससे अलग है और ऐतिहासिक रूप से कर्मचारियों को कंपनी में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी का तोहफा दिया है. साफ शब्दों में कहें तो, कर्मचारियों को वेतन के साथ-साथ कंपनी में हिस्सेदारी भी प्राप्त है।  जैसे-जैसे वर्षों में कंपनी का मूल्यांकन बढ़ता गया, उनके पास मौजूद शेयरों की वैल्यू में भी तेज इजाफा होता गया. जो कर्मचारी स्पेसएक्स की शुरुआत में ही कंपनी में शामिल हो गए थे, उनके लिए तो ये जीवन बदलने वाली कंपनी साबित हुई है।  ऐसे समझें स्पेसएक्स का कमाल ट्रेवर हाइस, जो 2011 में स्पेसएक्स में शामिल हुए थे, इस बात का एक अच्छा उदाहरण पेश करते हैं कि उनके शेयरों का मूल्य कितना बढ़ गया है. वे कहते हैं कि जब स्पेसएक्स एक बहुत छोटी कंपनी थी और आज की तरह ग्लोबल बनने से बहुत दूर थी. तब उन्हें कंपनी में 1,00,000 से अधिक शेयर मिले. अब आईपीओ की कीमत 135 डॉलर प्रति शेयर के हिसाब से कैलकुलेशन करें, तो उनके शेयरों की कीमत कम से कम 13.5 मिलियन डॉलर हो सकती है। 

हैदराबाद में MEAI Mining 4.0 राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ, अमिताभ मुखर्जी ने स्मार्ट और सस्टेनेबल खनन पर दिया जोर

हैदराबाद.  माइनिंग इंजीनियर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एमईएआई ) ने आज हैदराबाद में “माइनिंग 4.0: सुरक्षित और सस्टेनेबल खनन कार्यों के लिए उन्नत प्रौद्योगिकी” विषय पर अपने दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन की शुभारंभ की । इस सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि अमिताभ मुखर्जी, अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक, एनएमडीसी ने उद्योग जगत के प्रमुख, खनन पेशेवरों, शिक्षाविदों तथा वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में किया । कार्यक्रम की अध्यक्षता एनएमडीसी के निदेशक, तकनीकी एवं एमईएआई हैदराबाद चैप्टर के अध्यक्ष विनय कुमार ने की, इस शुभ अवसर पर जॉयदीप दासगुप्ता, निदेशक (उत्पादन) ,एनएमडीसी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे । सम्मेलन के प्रथम दिन इस बात पर विस्तार से चर्चा हुई कि किस प्रकार तकनीक खनन कार्यों को लगातार एक नया रूप दे रही है । विभिन्न सत्रों में खनन सुरक्षा, प्रचालन दक्षता तथा पर्यावरण प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए डिजिटलीकरण, ऑटोमेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), जियोस्पेशियल सिस्टम तथा स्मार्ट मॉनिटरिंग तकनीकों के बढ़ते उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया । कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमिताभ मुखर्जी ने अपने संबोधन में कहा: “खनन में सुरक्षा का एकमात्र स्वीकार्य आंकड़ा 'शून्य' (जीरो) है । सुरक्षा और सस्टेनेबिलिटी दोनों एक साथ चलने चाहिए तथा तकनीक इन्हें मजबूत करने में हमारी सहयोग कर रही है । आज डिजिटलीकरण एवं ऑटोमेशन खनन कार्यों को बदल रहे हैं, जिससे वे अधिक सुरक्षित, कुशल एवं जिम्मेदार बन रहे हैं । जिस प्रकार से लौह अयस्क, स्टील तथा महत्वपूर्ण खनिजों व क्रिटिकल मिनरल्स की मांग बढ़ रही है, खनन उद्योग के सामने एक बड़ा अवसर प्राप्‍त हो रहा है । इसके साथ ही, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि यह विकास जिम्मेदार खनन, निरंतर नवाचार (इन्नोवेशन) तथा सभी हितधारकों के लिए मूल्य सृजन व वैल्यू क्रिएशन द्वारा संचालित हो । एमईएआई जैसे सम्मेलन हमें एक-दूसरे से सीखने, नए दृष्टिकोण हासिल करने तथा भविष्य के लिए बेहतर तरीके से तैयार होने में सहयोग करते हैं ।” इस सम्मेलन का मुख्य विषय यह भी था कि अनुसंधान और नवाचार को केवल प्रस्तुतियों तक सीमित न रखकर व्यावहारिक खनन कार्यों में लागू किया जाए, ताकि जमीनी पर वास्तविक बदलाव लाया जा सके । उद्घाटन समारोह के समापन पर खनन क्षेत्र और इसके बदलते तकनीकी परिदृश्य में बहुमूल्य योगदान देने वाले पेशेवरों और विशेषज्ञों को सम्मानित किया गया । सम्मानित होने वाले दिग्गजों में निम्‍नांकित शामिल थे एस. कृष्णमूर्ति ,पूर्व अधिशासी निदेशक, एनएमडीसी तथा पूर्व महासचिव, एमईएआई, अक्षय दत्त त्रिपाठी, पूर्व अधिशासी निदेशक, एनएमडीसी डॉ. के. श्रीनिवास, सेवानिवृत्त प्रतिष्ठित प्रोफेसर, खनन इंजीनियरिंग विभाग, कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, गिंडी, अन्ना विश्वविद्यालय, डॉ. के. वी. शंकर, सेवानिवृत्त प्रतिष्ठित प्रोफेसर, खनन इंजीनियरिंग विभाग, कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, गिंडी, अन्ना विश्वविद्यालय इस सम्मेलन में अपनी भागीदारी के माध्यम से, एनएमडीसी ने सुरक्षित और अधिक सस्टेनेबल संचालन के लिए नई तकनीकों के उपयोग, नवाचार को बढ़ावा देने तथा जिम्मेदार खनन पद्धतियों को मजबूत करने पर अपना ध्यान केंद्रित किया ।  एनएमडीसी में खानों के प्रबंधन और प्रचालन के उपायों को सुगम व बेहतर बनाने के लिए ऑटोमेटेड ड्रिल, रिमोट सेंसिंग, डिजिटल मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म और रियल-टाइम एनालिटिक्स जैसी आधुनिक प्रणालियाँ लागू की जा रही हैं । यह सम्मेलन 13 जून तक भी जारी रहेगा, जिसमें तकनीकी सत्र, विशेषज्ञों के साथ आपसी संवाद तथा खनन के भविष्य को आकार देने वाले उभरते रुझानों व प्रवृत्ति पर चर्चा की जाएगी ।