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Gold-Silver Rate: धनतेरस पर सोना हुआ महंगा, चांदी की कीमत में भी बढ़ोतरी, जानें शहरों के भाव

मुंबई  धनतेरस के दिन सोने-चांदी के भाव में बदलाव देखा गया है. लगातार पांचवें दिन सर्राफा बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है. इन पांच दिनों में 24 कैरट वाला 10 ग्राम गोल्ड ₹7150 और 22 कैरट वाला ₹6560 महंगा हुआ है।  आज भी राजधानी दिल्ली में 24 कैरट वाला 10 ग्राम गोल्ड ₹10 और 22 कैरट वाला ₹10 ऊपर चढ़ा है. वहीं चांदी की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली है, जो 100 रुपये चढ़ी है. आइए जानते हैं दिल्‍ली से लेकर पटना तक सोने-चांदी की कीमत क्‍या है…  दिल्‍ली से पटना तक सोने-चांदी का भाव     दिल्ली में 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,46,180 और 22 कैरेट सोने का भाव ₹1,34,010 है, जबकि 18 कैरेट सोने की कीमत ₹1,09,680 है.      आर्थिक राजधानी मुंबई में 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,46,030 और 22 कैरेट सोने की कीमत ₹1,33,860, जबकि 18 कैरेट गोल्‍ड रेट ₹1,09,530 है.      कोलकाता    में 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,46,030 और 22 कैरेट सोने का भाव ₹1,33,860 और 18 कैरेट गोल्‍ड रेट ₹1,09,530 है.      चेन्नई में 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,46,030  और 22 कैरैट सोने की कीमत ₹1,33,860 और 18 कैरेट गोल्‍ड रेट ₹1,09,560 है.       बेंगलुरू में 24 कैरेट  सोने का भाव ₹1,46,030 और 22 कैरेट सोने की कीमत ₹1,33,860 है, जबकि 18 कैरेट सोने की कीमत ₹1,09,530 है.      हैदराबाद में 24K गोल्‍ड रेट ₹1,46,030 और 22K गोल्‍ड रेट ₹1,33,860 है, जबकि 18 कैरेट गोल्‍ड रेट ₹1,09,530 है.      लखनऊ में 24 कैरेट गोल्‍ड रेट ₹1,46,180 और 22 कैरेट सोने का भाव ₹1,34,010 है, जबकि 18 कैरेट सोने का भाव ₹1,09,680 है.      पटना     में 24 करैट सोने की कीमत ₹1,46,080 और 22 कैरेट सोने का भाव ₹1,33,910, जबकि 18 कैरेट सोने की कीमत ₹1,09,580 है.      जयपुर में 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,46,180 और 22 कैरेट गोल्‍ड रेट    ₹1,34,010, जबकि 18 कैरेट सोने का भाव ₹1,09,680 है.      अहमदाबाद में 24K गोल्‍ड रेट ₹1,46,080 और 22K सोने का भाव ₹1,33,910 है, जबकि 18 कैरेट गोल्‍ड रेट ₹1,09,580 है.  चांदी का भाव  चांदी की कीमतों में लगातार दूसरे दिन तेजी देखी जा रही है. इससे पहले लगातार तीन दिनों में 29-31 अक्टूबर तक एक किलो चांदी ₹20000 गिरी थी, फिर चार दिनों तक इसके भाव स्थिर थे और अब दो दिनों में यह ₹10100 ऊपर चढ़ी है. इसमें से आज दिल्ली में एक किलो चांदी ₹100 उछलकर ₹2,10,100 के भाव में बिक रही है. बाकी शहरों में भी यही भाव है, सिर्फ चेन्‍नई में ₹2,09,000 के भाव पर एक किलो चांदी मिल रही है।   

दिवाली से पहले सोना-चांदी खरीदने का मौका? चांदी ₹8,000 टूटी, गोल्ड के भाव भी गिरे

नई दिल्ली धनतेरस और दिवाली से चंद दिन पहले सोने-चांदी की कीमतें लगातार घटती जा रही हैं, एक तरह से मंगलवार को फिर से सोने-चांदी के भाव बिखर गए हैं. ये गिरावट मंगलवार दोपहर को अचानक बढ़ गई।  मंगलवार को MCX पर चांदी की कीमत गिरकर 1.75 लाख रुपये किलो तक पहुंच गई है, जबकि सोना प्रति 10 ग्राम 1.38 लाख रुपये से नीचे फिसल गया है. चांदी में करीब 5 फीसदी और सोने में 2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. त्योहारों से पहले खरीदारों के लिए ये एक बेहतरीन मौका भी हो सकता है. क्योंकि हमारे देश में लोग धनतेसर पर सोना-चांदी खरीदते हैं, और पिछले एक हफ्ते से लगातार कीमतें घटती जा रही हैं।  बता दें, सोना अपने जनवरी के हाई से 53 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हो चुका है, इसी साल जनवरी में सोने का भाव बढ़कर 1.91 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गया था. चांदी की तो और भी बुरी स्थिति हो गई है, कहां जनवरी में एक किलो चांदी की कीमत MCX पर बढ़कर 4.21 लाख रुपये हो गई थी, वही चांदी आज करीब 2.43 लाख रुपये प्रति किलो गिरकर 1.78 लाख रुपये तक पहुंच गई है।  क्यों हो रही है सोने-चांदी की 'पिटाई'? ग्लोबल मार्केट (कॉमेक्स और LBMA) में पिछले कुछ हफ्तों से सोने और चांदी के भावों में तेज गिरावट दर्ज की गई है.  इसके पीछे वैश्विक बाजारों में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स में मजबूती के कारण निवेशकों का रुझान सुरक्षित माने जाने वाले सोने से हटकर अन्य परिसंपत्तियों की तरफ बढ़ा है. सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता, इसलिए बढ़ती यील्ड के माहौल में इसकी चमक कुछ फीकी पड़ी है।  अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमोडिटी मार्केट में बहुमूल्य धातुओं पर लगातार दबाव बना हुआ है, जिसके कारण घरेलू स्तर पर भी कीमतें फिसलकर नीचे आ गई हैं।  महंगाई और केंद्रीय बैंकों की नीतियां  अमेरिका के केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाने की आशंकाओं ने कमोडिटी निवेशकों को सतर्क कर दिया है, जिससे बिकवाली का दबाव बढ़ गया है. वहीं चांदी के मामले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर औद्योगिक मांग खासकर सोलर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के सुस्त रहने के कारण कीमतों में भारी गिरावट आई है, वैश्विक मंदी की आहट और चीन से सुस्त मांग ने चांदी की रिकवरी को तगड़ा झटका दिया है।  वैश्विक इक्विटी बाजारों में पिछले उतार-चढ़ाव के बाद बड़े निवेशकों और फंड हाउसों द्वारा लिक्विडिटी जुटाने के लिए सोने-चांदी में जमकर प्रॉफिट बुकिंग की गई, जिससे कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिली।  संभलकर करें खरीदारी अंतरराष्ट्रीय मंदी का असर भारत के सर्राफा बाजार पर भी साफ तौर पर दिखाई दे रहा है. हालांकि धनतेरस और दिवाली के इस अवसर पर भारतीय बाजारों में पारंपरिक खरीदारी का उत्साह हमेशा की तरह बना रहता है, लेकिन ऊंचे दामों के बाद आई इस गिरावट ने खरीदारों और निवेशकों को चौंका दिया है।  जानकारों का मानना है कि त्योहारी सीजन से ठीक पहले कीमतों में आया यह करेक्शन उन मध्यमवर्गीय परिवारों और निवेशकों के लिए एक सुनहरा अवसर साबित हो सकता है, जो लंबे समय से सोने और चांदी में निवेश करने की सोच रहे थे. हालांकि, बाजार की अत्यधिक अस्थिरता को देखते हुए निवेशकों को बहुत सावधानी से खरीदारी करने की सलाह दी जा रही है।  क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों के भारी दबाव और बिकवाली के बीच सोने और चांदी की चाल इस समय पूरी तरह से वैश्विक आर्थिक संकेतों और डॉलर की चाल पर टिकी हुई है. त्योहारी मांग इस गिरावट को कुछ हद तक थामने की कोशिश जरूर कर रही है, लेकिन निवेशकों की नजरें अब आगे आने वाले वैश्विक आर्थिक आंकड़ों पर टिकी हैं। 

Gold-Silver Price Crash: 10 महीने में सोने-चांदी के भाव में बड़ी गिरावट, क्या दिवाली पर निवेश का सही समय है?

 नई दिल्ली 'जब घर में पड़ा हो सोना, तो फिर काहे का रोना', भले ही ये एक विज्ञापन की लाइन है. लेकिन इसके मायने संकट में सहारे को दर्शाते हैं. वैसे भी जब-जब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल मंडराते हैं, महंगाई आसमान छूने लगती है, शेयर बाजारों में बिकवाली से हाहाकार मचता है, तब आम निवेशकों से लेकर बड़े-बड़े वित्तीय संस्थानों की निगाहें सोने-चांदी पर टिक जाती हैं।  दरअसल, मौजूदा दौर ने निवेशकों को गहरी सोच में डाल दिया है. एक तरफ जहां महंगाई चरम पर है और दुनिया भर के केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सुरक्षित निवेशमाने जाने वाले सोने और चांदी की कीमतों में पिछले 10 महीनों से लगातार गिरावट और करेक्शन का सिलसिला जारी है. इसी साल जनवरी महीने में जो चांदी 4.20 लाख रुपये प्रति किलो और सोना 1.91 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर था, आज वही चांदी गिरकर 1.91 लाख रुपये के आसपास आ चुकी है. जबकि सोना 1.42 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास बना हुआ है।  पिछले साल सोने-चांदी में एकतरफा रैली देखने को मिली थी. लेकिन पिछले 10 महीनों से जारी भारी गिरावट ने उन तमाम छोटे और बड़े निवेशकों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं, जिन्होंने हाल के दिनों में सोने-चांदी को सुरक्षित निवेश मानकर इनमें अपनी गाढ़ी कमाई झोंक दी. लेकिन अब लगातार गिरावट से निवेशक यह सोचने पर मजबूर हैं कि क्या इस संकट के दौर में सोना-चांदी फिर से सहारा बनेगा या दूरी बनाना ही बेहतर है? इतिहास के पन्नों से… इतिहास इस बात का गवाह है कि जब-जब दुनिया में कागजी मुद्रा, शेयर बाजार या जमीन-जायदाद के भाव गिरे हैं, तब-तब कीमती धातुओं ने निवेशकों की संपत्तियों को डूबने से बचाया है. 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान जब दुनिया भर के शेयर बाजार 50% तक टूट गए थे, तब सोने ने अगले 3 सालों में निवेशकों को 100 फीसदी से अधिक का धमाकेदार रिटर्न दिया था. साल 2020 में कोविड महामारी से जब वैश्विक अर्थव्यवस्थाएं ठप पड़ गई थीं, तब भी सोने और चांदी ने नए कीर्तिमान रचे और पोर्टफोलियो को मजबूती दी।  जनवरी से अब तक इतनी बड़ी गिरावट क्यों? अब सवाल उठता है कि अगर सोना और चांदी संकट के साथी हैं, तो पिछले 10 महीनों से इनमें गिरावट क्यों आ रही है? इसके पीछे मुख्य तौर पर दो कारण दिख रहे हैं।   1. केंद्रीय बैंकों की सख्त नीतियां दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने महंगाई को काबू में करने के लिए ब्याज दरों में लगातार बढ़ोतरी की है. जब बॉन्ड यील्ड और बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट में ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो बिना ब्याज देने वाली धातुओं की मांग में अस्थाई सुस्ती आ जाती है. खासकर अमेरिका और यूरोप में महंगाई बढ़ने से केंद्रीय बैंक सख्त फैसले ले रहे हैं।  2. मुनाफावसूली भी अहम कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना और चांदी का कारोबार अमेरिकी डॉलर में होता है. डॉलर के मजबूत होने से अन्य देशों की मुद्राओं में कीमती धातुओं की खरीदारी महंगी और मांग सुस्त हो जाती है. जनवरी 2026 में जब कीमतें अपने रिकॉर्ड स्तर पर थीं, तब बड़े संस्थागत निवेशकों ने भारी मुनाफावसूली की, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ा. हालिया करेक्शन ने यह साबित कर दिया है कि बाजार चाहे कोई भी हो, एकतरफा तेजी कभी नहीं चलता. क्योंकि पिछले साल देखते ही देखते चंद महीनों में ही सोने-चांदी के भाव डबल हो गए थे।  क्या ये गिरावट खरीदारी का मौका? बाजार के जानकारों का मानना है कि सोने-चांदी में आई यह गिरावट कोई संकट का संकेत नहीं है, बल्कि यह एक तकनीकी करेक्शन है. ऑल-टाइम हाई से चांदी में करीब 54% तक का करेक्शन हो चुका है. तकनीकी रूप से बाजार इस समय अत्यधिक बिकवाली की स्थिति में है. चांदी सिर्फ गहनों या सिक्कों की चीज नहीं है. यह सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री की रीढ़ है. आने वाले समय में ग्रीन एनर्जी और ई-व्हीकल्स की बढ़ती मांग के कारण चांदी में लंबी अवधि का ढांचागत उभार तय माना जा रहा है।  वर्तमान दौर में फिर निवेशक क्या करें? कीमतों में बॉटम पकड़ना लगभग असंभव है. अगर आप इस आर्थिक अनिश्चितता के दौर में सोना और चांदी को अपने पोर्टफोलियो का सहारा बनाना चाहते हैं, तो एकमुश्त पैसा लगाने के बजाय व्यवस्थित रणनीति को अपनाएं. अपने पोर्टफोलियो में 15% हिस्सा कीमती धातुओं में रखें. इसमें 70% हिस्सा सोने में और 30% हिस्सा चांदी में रखना एक संतुलित रणनीति मानी जाती है।  एकमुश्त निवेश से बचें. हर महीने या हर बड़ी गिरावट पर सिल्वर ETF या गोल्ड म्यूचुअल फंड में SIP के जरिए खरीदारी करें. अगर आपको 1 लाख रुपये निवेश करना है, तो अभी 25% लगाएं, और बाकी 75% रकम को अगले 6 से 8 महीनों की किस्तों में विभाजित करें।  क्या सोना-चांदी फिर सहारा बनेगा? इतिहास अपने आप को दोहराता है. इस गिरावट के बीच चीन समेत दुनिया के तमाम बड़े देश सोना खरीद रहे हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि मौजूदा गिरावट एक मौका भी है. आर्थिक अनिश्चितता, शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव और महंगाई के इस दौर में सोना पोर्टफोलियो को स्थिरता प्रदान करेगा, वहीं चांदी सही समय पर तेज रिकवरी करके आपके पोर्टफोलियो को बेहतर रिटर्न देने का काम करेगी।  हालांकि इतिहास केवल दिलासा दे सकता है, मौजूदा पोर्टफोलियो के नुकसान की भरपाई नहीं कर सकता. फिलहाल निवेशक डरे हुए हैं, क्योंकि वैश्विक हालात थोड़े अलग हैं. परंतु इस गिरावट में घबराकर  अपनी होल्डिंग बेचना या इनसे तौबा करना एक बड़ी भूल होगी. क्योंकि महंगाई की मार से बचने का इससे बेहतर और पुराना कोई हथियार आज भी नहीं है।  कुछ वित्तीय जानकार कहते हैं कि सोने-चांदी में पिछले 10 महीनों से जारी गिरावट कोई आपदा नहीं, बल्कि बाजार की तरफ से समझदार निवेशकों के लिए दिया गया एक डिस्काउंट ऑफर है, बस जरूरत है तो डरने के बजाय धैर्य रखने और सही रणनीति के साथ कदम बढ़ाने की। 

Gold-Silver Price: कमजोर वैश्विक संकेतों का असर, सोने में गिरावट से चांदी भी धड़ाम

नई दिल्ली   कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन गुरुवार को एक बार फिर वैश्विक और घरेलू दोनों बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोर रुझान, रुपए की मजबूती और ब्याज दरों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स में गुरुवार सुबह सोने और चांदी दोनों में गिरावट दर्ज की गई। दिन के शुरुआती कारोबार में सोना 1.05 प्रतिशत गिरकर 4,106.40 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता नजर आया, तो वहीं चांदी 2.24 प्रतिशत टूटकर 56.42 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। इस बीच बोफा यानी बैंक ऑफ अमेरिका (बीओएफए) ने अनुमान जताया है कि मौजूदा दबाव जारी रहने पर सोना आगे चलकर 3,700 डॉलर प्रति औंस तक फिसल सकता है। भारतीय मुद्रा में यह स्तर लगभग 1.12 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के बराबर बैठता है। इस अनुमान ने भी निवेशकों की सतर्कता बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय कमजोरी का असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। घरेलू बाजार में सोना गिरकर 1.44 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच गया, जबकि चांदी का भाव 2.03 लाख रुपए प्रति किलोग्राम के करीब आ गया। खबर लिखे जाने तक (सुबह करीब 11 बजे), मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना 1,771 रुपए यानी 1.21 प्रतिशत गिरकर 1,44,308 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा। वहीं चांदी में और बड़ी गिरावट देखी गई और यह 5,521 रुपए यानी 2.64 प्रतिशत टूटकर 2,03,647 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। दिन के कारोबार में दिसंबर डिलीवरी वाला सोना अपने पिछले बंद भाव 1,46,079 रुपए से 1,087 रुपए यानी 0.74 प्रतिशत टूटकर 1,44,992 रुपए पर खुला, और एक समय यह 1,883 रुपए यानी 1.28 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,44,196 रुपए प्रति 10 ग्राम के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया। वहीं दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी अपने पिछले बंद भाव 2,09,168 रुपए से 3,168 रुपए यानी 1.51 प्रतिशत गिरकर 2,06,000 रुपए प्रति किलोग्राम पर खुली, और एक समय इसने 5,648 रुपए यानी 2.70 प्रतिशत टूटकर 2,03,520 का दिन का निम्नतम स्तर छुआ। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल निवेशक अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की आगामी नीतिगत दिशा पर नजर बनाए हुए हैं, जिससे कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है। विश्लेषकों के मुताबिक, अमेरिकी आर्थिक संकेतकों और ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता के चलते निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं। यही कारण है कि सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने में भी बिकवाली का दबाव देखने को मिल रहा है। पिछले सप्ताह एमसीएक्स पर सोने की कीमतों में 3,581 रुपए यानी 2.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी, जबकि चांदी 14,568 रुपए यानी 6.4 प्रतिशत तक टूट गई थी। जानकारों का मानना है कि घरेलू कीमतों में यह कमजोरी बड़े पैमाने पर मुद्रा विनिमय दर के प्रभाव से जुड़ी हुई है। बाजार के जानकारों का कहना है कि घरेलू बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह भारतीय रुपए की मजबूती भी है। मजबूत रुपया आयातित सोने और चांदी की लागत को कम करता है, जिससे स्थानीय कीमतों पर दबाव बनता है। विशेषज्ञों के मुताबिक सोने की चाल पर पश्चिम एशिया की स्थिति भी असर डाल रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते तनाव और सप्लाई चिंताओं के बीच ब्रेंट क्रूड करीब 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। ऊर्जा की ऊंची कीमतें महंगाई को बढ़ा सकती हैं, जिससे केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकते हैं। यह स्थिति सामान्य तौर पर सोने के लिए नकारात्मक मानी जाती है। हालांकि दूसरी तरफ अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी और डॉलर में कमजोरी जैसी स्थितियां सोने को कुछ समर्थन भी दे सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में निवेशकों का फोकस अमेरिका के आवास संबंधी आंकड़ों, उपभोक्ता भावना, महंगाई उम्मीदों और पीसीई मुद्रास्फीति आंकड़ों पर रहेगा। इसके अलावा, भारत, ब्रिटेन और अमेरिका के पीएमआई आंकड़े, रूस से कच्चे तेल की आपूर्ति और प्रमुख केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

900 किलो सोने के गहने पहन गरबा करने पहुंचीं 15 हजार महिलाएं, दिखी अनोखी परंपरा

राजकोट गुजरात में नवरात्रि के दौरान भक्ति, शक्ति और संस्कृति के अनोखे रंग देखने को मिल रहे हैं. कहीं पारंपरिक गरबा की धूम है, तो कहीं सदियों पुरानी परंपराएं लोगों का ध्यान खींच रही हैं. इसी बीच राजकोट में आयोजित अहीर गरबा महोत्सव का एक नजारा चर्चा का विषय बन गया. यहां 15 हजार से ज्यादा अहीर समाज की महिलाएं पारंपरिक परिधानों और सोने के आभूषणों से सजकर रास-गरबा करने पहुंचीं. आयोजन में शामिल महिलाओं के आभूषणों का कुल वजन करीब 900 किलो और उनकी अनुमानित कीमत 1300 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है. सोने के गहनों से सजी महिलाओं का सामूहिक गरबा इस महोत्सव का खास आकर्षण रहा।  900 किलो सोना और पारंपरिक गरबा, देखने उमड़ी लोगों की नजरें राजकोट में आहिर सेना की ओर से नौ दिवसीय अहीर गरबा महोत्सव का आयोजन किया गया है. इसका उद्देश्य समाज की संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक आस्था को जीवंत बनाए रखना है. महोत्सव में अहीर समाज के भाई-बहन पारंपरिक अंदाज में रास-गरबा कर रहे हैं।  नवरात्रि के सातवें दिन इस आयोजन की भव्यता देखते ही बनी. हजारों की संख्या में अहीर समाज की महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा पहनकर गरबा मैदान पहुंचीं. उनके गले में सोने के हार, हाथों में कंगन और शरीर पर सजे दूसरे पारंपरिक आभूषण आकर्षण का केंद्र रहे. इन आभूषणों की चमक के बीच जब हजारों महिलाओं ने एक साथ पारंपरिक रास खेलना शुरू किया, तो पूरा मैदान उत्सव के रंग में रंग गया।  इस आयोजन की खासियत सिर्फ सोने के गहने और उनकी कीमत नहीं थी. महिलाओं की पारंपरिक वेशभूषा, रास खेलने की शैली और सामूहिक भागीदारी ने अहीर समाज की सांस्कृतिक विरासत की झलक पेश की।  गरबा के साथ भगवान द्वारकाधीश की महाआरती अहीर गरबा महोत्सव में भक्ति का रंग भी खास रहा. आयोजन के दौरान भगवान श्री द्वारकाधीश की महाआरती की गई. पारंपरिक रास-गरबा और महाआरती के संगम ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया. नवरात्रि के इस उत्सव में धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा एक साथ नजर आईं।  अहीर समाज के लिए गरबा महज नृत्य नहीं, बल्कि अपनी पहचान और विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम भी है. पारंपरिक पोशाकों में सजी महिलाओं का एक साथ रास करना सामूहिक एकता और सांस्कृतिक जुड़ाव को भी दर्शाता है।  परंपरा, आस्था और एकता का संगम गुजरात में नवरात्रि के दौरान गरबा का विशेष महत्व है. इस दौरान लोग पारंपरिक नृत्य, पूजा-पाठ और धार्मिक आयोजनों के जरिए त्योहार मनाते हैं. राजकोट का अहीर गरबा महोत्सव भी इसी सांस्कृतिक परंपरा का एक भव्य उदाहरण बनकर सामने आया है।  करीब 900 किलो सोने के आभूषणों और 1300 करोड़ रुपये से अधिक की अनुमानित कीमत की चर्चा ने इस आयोजन को खास पहचान दी है. वहीं, भगवान द्वारकाधीश की महाआरती और हजारों महिलाओं की सामूहिक भागीदारी ने इसे आस्था और परंपरा से जुड़ा यादगार उत्सव बना दिया। 

Gold-Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव, भारत में दाम गिरे तो विदेशी बाजार में आई तेजी

 नई दिल्ली सोने-चांदी (gold silver) के दाम में लगातार उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। ऐसे में आज यानी 12 अक्टूबर को सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भी घरेलू बाजार में सोने-चांदी के दाम गिरे हुए नजर आए। लेकिन इंटरनेशनल मार्केट में कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। आइए आज के ताजा रेट्स पर एक नजर डालते हैं। इंटरनेशनल मार्केट में चढ़े दाम इंटरनेशनल मार्केट यानी Comex पर आज सोने और चांदी दोनों की कीमतों में तेजी आई है। खबर लिखे जाने तक Comex पर सोना 0य24% तक चढ़ गया (Gold Price on Comex) और कीमत 4,226.40 डॉलर प्रति औस पर पहुंच गई हैं। वहीं चांदी (Silver Price on Comex) के दाम 0.37% तक चढ़े और ऐसे में कीमत 61.275 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करती दिखी। घरेलू बाजार में गिरीं कीमतें बुलियन मार्केट यानी घरेलू बाजार में सोने-चांदी दोनों के दाम गिर गए। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोना गिरकर करीब ₹1.50 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड करता दिखा है। वहीं चांदी के भाव (Silver Price) भी गिरकर ₹2.25 लाख प्रति किलोग्राम के आसपास ट्रेड करता दिखा। MCX पर कहां ट्रेड कर रहा सोना? मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज की बात करें तो MCX पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना 800 रुपए गिरा और कीमत ₹1,50,706 (gold price today) प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड करता नजर आया है। वहीं चांदी की बात करें तो यह 500 रुपए तक गिरी और कीमत ₹2,25,270 प्रति किलोग्राम (silver price today) पर पहुंच गई। खरीदने से पहले चेक करें रेट्स आज बाजार खुलते ही सोने और चांदी दोनों के दाम में गिरावट आई है। ऐसे में 24 कैरेट सोना (Gold Rates today) करीब ₹1,51,270 प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा है, जबकि 22 कैरेट सोना लगभग ₹1,39,077 प्रति 10 ग्राम के आसपास बना हुआ है। वहीं 18 कैरेट गोल्ड ₹1,13,790 प्रति 10 ग्राम के करीब ट्रेड कर रहा है। वहीं बुलियन मार्केट में चांदी का भाव लगभग ₹2,26,140 प्रति किलोग्राम के आसपास ट्रेड करता दिखा।  

सोने के दाम लगातार क्यों गिर रहे हैं? ₹1 लाख तक पहुंच सकता है Gold, जानें 4 वजहें

मुंबई  सोने की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी के बाद अब तेज करेक्शन देखने को मिल रहा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में जनवरी के रिकॉर्ड हाई से सोना करीब 27 फीसदी नीचे आ चुका है, जबकि भारतीय बाजार में जनवरी के शिखर से करीब 23 फीसदी की गिरावट आई है. वहीं अगस्त के MCX हाई से देखें तो घरेलू बाजार में सोना 10 फीसदी से ज्यादा नीचे आ चुका है. ऐसे में त्योहारों और वेडिंग सीजन से पहले सोना खरीदने वालों के सामने सवाल है कि क्या कीमतों में अभी और गिरावट बाकी है। अगस्त के हाई से कितना सस्ता हुआ सोना? MCX पर गोल्ड फ्यूचर्स अगस्त के आखिरी हफ्ते में 1,64,773 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर तक पहुंचा था. इसके बाद कीमतों में तेज गिरावट आई और पिछले हफ्ते भाव 1,45,991 रुपये प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर तक आ गया यानी अगस्त के रिकॉर्ड स्तर से कीमत करीब 11 फीसदी नीचे आ चुकी है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने में बड़ी गिरावट आई है. स्पॉट गोल्ड अगस्त के करीब 4,698 डॉलर प्रति औंस के हाई से गिरकर पिछले हफ्ते करीब 4,130 डॉलर प्रति औंस पर आ गया।  सोने में गिरावट की 4 बड़ी वजहें सोने में हाल की गिरावट के पीछे कई ग्लोबल फैक्टर हैं. रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद निवेशकों की मुनाफावसूली से शुरुआत में कीमतों पर दबाव आया. इसके बाद अमेरिकी महंगाई और ब्याज दरों को लेकर बढ़ी चिंता ने भी सोने की तेजी को कमजोर किया. अमेरिकी बॉन्ड की रियल यील्ड में तेज बढ़ोतरी से बिना ब्याज देने वाला सोना निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत कम आकर्षक हुआ है. वहीं डॉलर में मजबूती ने भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने पर दबाव बढ़ाया है. इसके अलावा ऊंची महंगाई और अमेरिका की ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख की आशंका ने भी सोने की कीमतों को प्रभावित किया है।   क्या 1.25 लाख तक गिरेगा सोना? एक्सपर्ट्स के मुताबिक शॉर्ट टर्म में सोने में और करेक्शन संभव है. लेकिन 1.25 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर अभी बेस केस नहीं है. जानकारों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्पॉट गोल्ड में 4,025-3,950 डॉलर प्रति औंस तक गिरावट की गुंजाइश है. इसका असर MCX गोल्ड फ्यूचर्स पर पड़ने पर कीमत करीब 1,46,200-1,44,500 रुपये प्रति 10 ग्राम तक आ सकती है. उनके मुताबिक 1.25 लाख रुपये का स्तर तभी देखने को मिल सकता है, जब अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में और तेजी आए और अक्टूबर में अमेरिकी CPI महंगाई का आंकड़ा अनुमान से काफी ज्यादा रहे. फिलहाल उन्हें ऐसी स्थिति की संभावना कम लगती है। 1.34 लाख रुपये तक गिर सकता है सोना? जानकारों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय सोने के लिए 3,930-4,000 डॉलर प्रति औंस का सपोर्ट जोन अहम है. अगर ये सपोर्ट टूटता है तो अगला सपोर्ट 3,600-3,750 डॉलर प्रति औंस का हो सकता है. उनके मुताबिक इस सपोर्ट जोन तक पहुंचने की संभावना करीब 25 फीसदी है. ऐसी स्थिति में भारतीय बाजार में सोना करीब 1,34,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक आ सकता है. हालांकि ये कोई बेस केस अनुमान नहीं है, बल्कि उस स्थिति का आकलन है जब अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतें मौजूदा सपोर्ट से और नीचे जाती हैं।       1 लाख रुपये तक गिरने की कितनी संभावना? 1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक गिरावट को एक्सपर्ट्स फिलहाल बेहद असंभावित मान रहे हैं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक घरेलू सोने को इस स्तर तक पहुंचने के लिए अंतरराष्ट्रीय कीमत करीब 2,800 डॉलर प्रति औंस तक गिरनी होगी. उनके मुताबिक सोने को अभी भी कई स्ट्रक्चरल फैक्टर से सपोर्ट मिल रहा है. इनमें डी-डॉलराइजेशन, जियोपॉलिटिकल तनाव, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और महंगाई को लेकर लंबी अवधि की चिंताएं शामिल हैं यानी 1 लाख रुपये का स्तर देखने के लिए मौजूदा परिस्थितियों में काफी बड़ा बदलाव जरूरी होगा।         भारत में गिरावट कितनी सीमित रह सकती है? भारत में अंतरराष्ट्रीय बाजार के मुकाबले सोने की गिरावट कुछ हद तक सीमित रह सकती है. इसकी एक बड़ी वजह रुपये की चाल है. डॉलर में कीमत तय होने वाले सोने का घरेलू भाव रुपये की मजबूती या कमजोरी से भी प्रभावित होता है. इसके अलावा भारत में फेस्टिव और वेडिंग सीजन शुरू हो रहा है, जिससे सोने की डिमांड बढ़ने की उम्मीद है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक ये डिमांड कीमतों में गिरावट को कुछ हद तक सीमित कर सकती है. हालांकि ऊंची कीमतों का असर ज्वैलरी खरीदारी पर भी दिख रहा है. ग्राहक ज्यादा हल्की ज्वैलरी खरीदने पर जोर दे रहे हैं। क्या अभी सोना खरीदना चाहिए? मौजूदा संकेत बताते हैं कि शॉर्ट टर्म में सोने में और करेक्शन संभव है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4,000 डॉलर के आसपास का सपोर्ट और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड आगे की दिशा के लिए अहम रहेंगे. विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा करेक्शन तत्काल अवधि में जारी रह सकता है, लेकिन इसे लंबी अवधि की तेजी के बीच एक कंसोलिडेशन फेज के तौर पर भी देखा जा सकता है. केंद्रीय बैंकों की खरीदारी, ETF में निवेश और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता जैसे फैक्टर सोने को लंबे समय में सपोर्ट दे सकते हैं। विदेशी कनेक्शन  वहीं 1.25 लाख रुपये तक की गिरावट संभव जरूर है, लेकिन इसके लिए अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में और तेज बढ़ोतरी और अक्टूबर की महंगाई के अनुमान से काफी ऊपर आने जैसी परिस्थितियां बननी होंगी. फिलहाल एक्सपर्ट्स इसकी संभावना कम मान रहे हैं. इसलिए मौजूदा स्थिति में सोने की कीमतों को लेकर तस्वीर दोतरफा है. शॉर्ट टर्म में और गिरावट का जोखिम बना हुआ है, लेकिन 1 लाख रुपये जैसे बहुत निचले स्तर की संभावना फिलहाल बेहद कम मानी जा रही है।  

जनसेवा के 25 साल पूरे, PM मोदी ने गिनाईं उपलब्धियां; महंगाई पर भी कसा तंज

 नई दिल्ली प्रधानमंत्री मोदी ने जनसेवा में 25 साल पूरे कर लिए हैं. इस मौके पर उन्होंने विकसित भारत संकल्प सभा को संबोधित किया. पीएम मोदी ने 2014 से पहले के दौर का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय लोग महंगाई को गॉन केस कहते थे. उन्होंने कहा कि देश को नए उत्साह और नई ऊर्जा की जरूरत थी।  पीएम मोदी ने कहा कि जब उन्होंने सेवा की शुरुआत की, तब संकल्प लिया कि हम करके रहेंगे. आज देश की तस्वीर बदल गई है. उन्होंने कहा कि पहले कोई संकट आता था तो भारत की अर्थव्यवस्था हिल जाती थी लेकिन आज संकट के समय भारत के सामर्थ्य की चर्चा होती है।  उन्होंने कहा कि पहले पॉलिसी पैरालिसिस की चर्चा होती थी, जबकि आज रिफॉर्म एक्सप्रेस की बात होती है. पहले देश में इम्पोर्ट बढ़ाने के रास्ते बनाए जाते थे, लेकिन आ भारत चीज़ों को एक्सपोर्ट कर रहा है।  पीएम मोदी ने खेती में आए बदलाव का भी उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से अब तक 2015 से 2025 तक का दशक क खेती की ग्रोथ के कई रिकॉर्ड तोड़ने वाला रहा है. उन्होंने कहा कि यह तभी संभव होता है जब नीयत साफ हो और नीति स्पष्ट हो. पीएम मोदी ने सबका साथ, सबका विकास को सुशासन का आधार बताया और कहा कि देश को लंबे समय तक राजनीति के हिसाब से बांटा गया।  'भारत अब रुकने वाला नहीं' उन्होंने कहा कि भारत अब रुकने वाला नहीं है. पीएम मोदी ने भारत के प्राचीन गौरव का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि कभी भारत दुनिया की अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करता था, लेकिन गुलामी के दौर में लुटेरों ने देशो को लूटा. जो भारत दुनिया को दिशा दिखाता था, उसके पुस्तकालय तक जला दिए गए. पीएम मोदी ने स्वामी विवेकानंद का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि 'एक दिन एक महान भारत का जन्म होगा।  गौरतलब है कि पीएम मोदी ने सरकार के प्रमुख के तौर पर 25 साल पूरे कर लिए हैं. उन्होंने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी. इसके बाद 26 मई 2014 को उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. इस तरह मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के तौर पर उन्हें जनसेवा में 25 साल पूरे हो गए हैं। 

Gold Price Today: ग्लोबल बाजार में सोना 3.4% फिसला, भारत में 22 और 24 कैरेट के नए रेट जारी

मुंबई  सोने की कीमतों में इन दिनों एक दिलचस्प तस्वीर देखने को मिल रही है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत इस हफ्ते करीब 3.4% नीचे आ चुकी है, लेकिन भारत के कई बड़े शहरों में 3 अक्टूबर की सुबह सोने के भाव अब भी ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं. दिल्ली में 24 कैरेट सोना ₹1,50,460 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट ₹1,37,910 प्रति 10 ग्राम पर है।  मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में 3 अक्टूबर को 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,50,290 प्रति 10 ग्राम रहा, जबकि 22 कैरेट सोना ₹1,37,760 प्रति 10 ग्राम पर रहा. बड़े शहरों में सोने के भाव में बहुत ज्यादा अंतर नहीं दिख रहा है, लेकिन दिल्ली समेत कुछ शहरों में रेट थोड़ा ऊपर है।  पुणे, बेंगलुरु और हैदराबाद में भाव पुणे, बेंगलुरु और हैदराबाद में 24 कैरेट सोना ₹1,50,290 प्रति 10 ग्राम पर रहा. वहीं 22 कैरेट का भाव ₹1,37,760 प्रति 10 ग्राम रहा।  अहमदाबाद और भोपाल में क्या भाव अहमदाबाद में 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,50,360 प्रति 10 ग्राम रहा. 22 कैरेट सोना ₹1,37,810 प्रति 10 ग्राम पर रहा. भोपाल में भी 24 कैरेट सोना ₹1,50,360 और 22 कैरेट ₹1,37,810 प्रति 10 ग्राम रहा।  जयपुर, लखनऊ और चंडीगढ़ में रेट जयपुर, लखनऊ और चंडीगढ़ में 24 कैरेट सोना ₹1,50,460 प्रति 10 ग्राम पर रहा. वहीं 22 कैरेट का भाव ₹1,37,910 प्रति 10 ग्राम रहा।  ग्लोबल बाजार में सोना 3.4% नीचे अब अंतरराष्ट्रीय बाजार पर नजर डालें तो यहां तस्वीर थोड़ी अलग है. 3 अक्टूबर की सुबह हाजिर सोना (Spot Gold) 4,140.06 डॉलर प्रति औंस पर रहा. इस हफ्ते अब तक इसकी वैश्विक कीमत करीब 3.4% गिर चुकी है. ग्लोबल बाजार में सोने पर दबाव है, लेकिन भारत में भाव अभी भी काफी ऊंचे हैं. इसकी वजह यह है कि घरेलू सोने की कीमत सिर्फ अंतरराष्ट्रीय भाव से तय नहीं होती. डॉलर-रुपया एक्सचेंज रेट, आयात लागत, टैक्स और स्थानीय मांग जैसे कई दूसरे कारक भी घरेलू रेट को प्रभावित करते हैं।  HSBC ने घटाया सोने का अनुमान न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, HSBC ने 2026 और 2027 के लिए सोने की औसत कीमत के अपने अनुमान में कटौती की है. बैंक ने 2026 के लिए औसत कीमत का अनुमान 4,490 डॉलर प्रति औंस और 2027 के लिए 4,825 डॉलर प्रति औंस रखा है. HSBC का मानना है कि निकट भविष्य में सोने की कीमत पर और दबाव आ सकता है. हालांकि, अगर कीमतें नीचे आती हैं तो खरीदारी भी लौट सकती है।  HSBC के मुताबिक, अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत करीब 4,000 डॉलर प्रति औंस या उससे नीचे आती है, तो केंद्रीय बैंकों की तरफ से सोने की खरीदारी फिर बढ़ सकती है. यानी बाजार के लिए 4,000 डॉलर का स्तर आगे महत्वपूर्ण रह सकता है. कीमत वहां तक जाती है या नहीं और अगर जाती है तो खरीदारी कितनी लौटती है, इस पर नजर रहेगी।  चांदी का क्या हाल है? सोने के साथ चांदी के भाव में भी बदलाव देखने को मिल रहा है. 3 अक्टूबर की सुबह देश में चांदी का भाव ₹2,34,900 प्रति किलोग्राम रहा. अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी करीब 60.36 डॉलर प्रति औंस पर रही. इसी साल जनवरी में देश में चांदी ₹4 लाख प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंची थी. मौजूदा भाव उस रिकॉर्ड ऊंचाई से काफी नीचे है। 

पिता ने कर्ज लेकर दिलाया धनुष, बेटी कीर्ति शर्मा ने गोल्ड जीतकर बढ़ाया जींद का मान

जींद. हरियाणा के जींद जिले का छोटा सा गांव रिटोली उस समय ख़ुशी से सराबोर हो उठा, जब एशियन गेम्स 2026 से तीरंदाजी में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतने की खबर आई. गांव की बेटी कीर्ति शर्मा ने महिला रिकर्व टीम इवेंट में अपनी साथियों अंकिता भकत और कुमकुम अनिल मोहोद के साथ मिलकर फाइनल में दक्षिण कोरिया को पराजित कर यह स्वर्णिम इतिहास रचा है. जैसे ही कीर्ति के स्वर्ण पदक जीतने की सूचना गांव पहुंची, उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया. बता दें, भारतीय महिला रिकर्व तीरंदाजी टीम ने शुक्रवार को दबाव के बीच शानदार प्रदर्शन करते हुए 10 बार की ओलंपिक चैंपियन दक्षिण कोरिया को 5-3 से हराकर एशियाई खेलों में अपना पहला स्वर्ण पदक जीता. अनुभवी अंकिता भकत, कीर्ति शर्मा और 17 वर्षीय कुमकुम मोहोड़ ने तेज हवा के कारण चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच धैर्य बनाए रखते हुए मौजूदा चैंपियन दक्षिण कोरिया को पछाड़कर ऐतिहासिक जीत दर्ज की. प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी सोशल मीडिया के जरिए बधाई देते हुए कहा कि हमारी बेटियां लगातार स्वर्णिम प्रदर्शन कर देश का मान बढ़ा रही हैं. कीर्ति की इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे उनके परिवार का वर्षों का संघर्ष और त्याग छिपा है. माता गुड्डी देवी ने नम आंखों से यादों के पन्ने पलटते हुए बताया कि कीर्ति की प्रतिभा की पहचान पिल्लूखेड़ा मंडी के एफएस स्कूल में हुई थी. शुरुआत में वह एथलेटिक्स में दौड़ लगाया करती थी. कोच ऊधम सिंह ने जब उनके स्टैमिना और एकाग्रता को देखा, तो उसे तीरंदाजी में किस्मत आजमाने की सलाह दी. बेटी के गोल्ड जीतने  के बाद उनकी मां गुड्डी देवी बताती हैं,"हमारे पास तो इतने पैसे भी नहीं थे. हमने सोचा छोटा-मोटा खेल होगा. पहली बार ₹5,000 का लकड़ी का धनुष उधार पैसे लेकर खरीदकर दिया था. जब उसकी कला में निखार आया तो कोच के कहने पर ₹55,000 का प्रोफेशनल धनुष आढ़ती से कर्ज लेकर लाए." कीर्ति के पिता विजय कुमार, जो महज तीन एकड़ जमीन पर खेती करके परिवार का गुजर-बसर करते हैं, बताते हैं कि जब बच्ची का चयन भारतीय खेल प्राधिकरण के पद्मा हजारीबाग (झारखंड) केंद्र में हुआ, तब उसके अभ्यास के लिए ₹55,000 का नया धनुष भी आढ़ती से ब्याज पर पैसे उठाकर दिलाना पड़ा. पिता ने भावुक होते हुए कहा,"जब बेटी का फोन आया कि 'पापा, हमने कोरिया को हराकर गोल्ड जीत लिया है', तो एक पल के लिए यकीन ही नहीं हुआ. उस वक्त मैं खेत में धान की कटाई की तैयारी कर रहा था. 3 एकड़ जमीन में बच्चों को पढ़ाया और इस मुकाम तक पहुंचाया. आज बेटी ने सारा कर्ज चुकता कर दिया."  कीर्ति बीते 4 सालों से परिवार और घर त्यागकर झारखंड में इंटरनेशनल कोच ऊधम सिंह के मार्गदर्शन में दिन-रात कड़ा अभ्यास कर रही थी. घर पर पोती की जीत की सूचना सबसे पहले उनके भाई ने हरिद्वार से दी, जो वहां रहकर जेईई की पढ़ाई कर रहे हैं. दादा रामजवारी और दादी लखपति देवी ने खुशी जताते हुए कहा,"बेटी ने पूरे देश और हरियाणा का नाम पूरे विश्व में ऊंचा कर दिया है. हमारी पोती ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे बुलंद हों तो गांव की गलियों से निकलकर भी दुनिया जीती जा सकती है." गौरतलब है कि एशियन गेम्स 2026 में जींद जिले के खिलाड़ियों का दबदबा कायम है. कीर्ति शर्मा से पहले निशानेबाज नीरू ढांढा दो स्वर्ण पदक, जुलाना की पूजा कबड्डी में स्वर्ण पदक और अलेवा के हिमांशु रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन कर चुके हैं.