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अप्रैल में यूपीआई लेनदेन में 25% की बढ़त, 22 अरब के पार हुई संख्या, वैल्यू 29 लाख करोड़ रुपए से अधिक

नई दिल्ली   यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) लेनदेन की संख्या अप्रैल में सालाना आधार पर 25 प्रतिशत बढ़कर 22.35 अरब हो गई है। वहीं, इनकी वैल्यू सालाना आधार पर 21 प्रतिशत बढ़कर 29.03 लाख करोड़ रुपए हो गई है। यह जानकारी नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की ओर से शुक्रवार को दी गई। दैनिक आधार पर अप्रैल में यूपीआई के औसत लेनदेन की संख्या बढ़कर 74.5 करोड़ हो गई है, जो कि मार्च में 73 करोड़ थी। औसत दैनिक यूपीआई लेनदेन की वैल्यू बढ़कर 96,766 करोड़ रुपए हो गई है, जो कि मार्च में 95,243 करोड़ रुपए थी। आईएमपीएस पर मासिक लेनदेन की संख्या अप्रैल में 36.2 करोड़ रही है, जिसमें 7.01 लाख करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में तुलना में 13 प्रतिशत की वृद्धि को दिखाता है। दैनिक औसत लेन-देन की संख्या 1.2 करोड़ रही, जो मजबूत वृद्धि दर्शाता है। मार्च में, यूपीआई ने 2016 में लॉन्च होने के बाद से अब तक का सबसे अधिक मासिक लेनदेन 22.64 अरब दर्ज किया है। यूपीआई अब संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस, मॉरीशस और कतर सहित आठ से अधिक देशों में उपलब्ध है, जिससे भारत डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी बन गया है। यूपीआई की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय पहुंच से प्रेषण में वृद्धि हो रही है, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिल रहा है और वैश्विक फिनटेक परिदृश्य में भारत की स्थिति मजबूत हो रही है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, भारत के प्रमुख डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म ने पिछले एक दशक में लेनदेन की मात्रा में लगभग 12,000 गुना की असाधारण वृद्धि दर्ज की है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की नियामक निगरानी में एनपीसीआई द्वारा 11 अप्रैल, 2016 को लॉन्च किया गया यूपीआई, भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की रीढ़ बन गया है। मंत्रालय ने बताया कि वित्त वर्ष 2016-17 में मात्र 2 करोड़ लेनदेन के मामूली आधार से शुरू होकर, इस प्लेटफॉर्म ने वित्त वर्ष 2025-26 में 24,162 करोड़ से अधिक लेनदेन प्रोसेस किए। वैल्यू में भी यूपीआई की वृद्धि उतनी ही मजबूत रही है। लेनदेन का मूल्य परिचालन के पहले वर्ष में 0.07 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 314 लाख करोड़ रुपए हो गया, जो 4,000 गुना से अधिक की वृद्धि दर्शाता है।

UPI पेमेंट में पिन डालने की परेशानी खत्म, अब ऐसे करें पेमेंट—पूरी जानकारी जानें

  नई दिल्‍ली  भारत के यूपीआई इकोसिस्‍टम में आए दिन बदलाव होता रहा है, जिस कारण यूपीआई का दायरा बढ़ता जा रहा है. अब एक और बड़ा बदलाव देखने को मिला है. ICICI बैंक, फोनपे और क्रेड जैसे फिनटेक प्लेटफॉर्म ऐसे फीचर्स पेश कर रहे हैं, जिसके तहत यूजर्स बिना यूपीआई पिन डाले UPI पेमेंट कर सकते हैं।  नए फीचर्स यूजर्स को यूपीआई पिन की जगह फिंगरप्रिंट या फेस की पहचान का उपयोग करके पेमेंट करने की मंजूरी देते हैं. इस बदलाव का उद्देश्य डिजिटल लेनदेन को तेज, अधिक आसान और सुरक्षित बनाना है. खासकर डेली पेमेंट के लिए।  क्‍या है ये नया फीचर?  बायोमेट्रिक UPI अथेंटिफिकेशन से छोटे लेन-देन के लिए यूपीआई पिन दर्ज करने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है. इसके बजाय, यूजर्स फिंगरप्रिंट स्कैन या चेहरे की पहचान जैसी चीजों का उपयोग करके पेमेंट कर सकते हैं. हालांकि, नियामक मानदंडों के अनुसार, यह सुविधा ₹5,000 तक के लेनदेन के लिए सीमित है. इससे अधिक राशि के लिए, पिन-दर्ज करना अनिवार्य होगा।  ICICI बैंक ने किया रोलआउट ICICI बैंक ने अपने iMobile ऐप पर यह फीचर शुरू कर दिया है, जिससे कस्‍टमर्स बायोमेट्रिक्स का इस्तेमाल करके पर्सनल लेन-देन, QR कोड बेस्‍ड पेमेंट और ऑनलाइन खरीदारी कर सकते हैं. यह फ़ीचर ऐप के अपडेटेड वर्ज़न (Android वर्ज़न 30+ और iOS 28.2+) पर उपलब्ध है और यह नए डेटा को इकट्ठा करने के बजाय यूज़र के डिवाइस पर पहले से सेफ स्टोर किए गए बायोमेट्रिक डेटा पर निर्भर करता है. ये फीचर ऐसा है, जिसके तहत आप जब चाहे बायोमेट्रिक अथेंटिफिकेशन को चालू या बंद कर सकते हैं. जरूरत पड़ी तो पिन अथेंटिफिकेशन फिर से शुरू कर सकते हैं।  PhonePe और CRED PhonePe ने UPI पेमेंट के लिए बायोमेट्रिक अथेंटिफिकेशन भी शुरू किया है, जिससे एक टच में पेमेंट का अनुभव मिलता है. यह सुविधा पिन भूल जाने और गलत इनपुट जैसी आम समस्याओं में काम आती है. स्मार्टफोन की अंतर्निहित सुरक्षा का लाभ उठाते हुए, यह भीड़भाड़ वाले स्थानों में पिन लीक होने जैसे रिस्‍क को कम करता है।  महत्वपूर्ण बात यह है कि PhonePe यूजर्स को बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन फेल होने की स्थिति में पिन अथेंटिफिकेशन का विकल्प देता है. यह सुविधा व्यापारी भुगतान, क्यूआर स्कैन और यहां तक ​​कि बैलेंस चेक समेत कई उपयोगों में काम करती है. CRED ने NPCI के साथ साझेदारी में इसी तरह की बायोमेट्रिक UPI सुविधा शुरू की है, जो निर्बाध और सुरक्षित भुगतान की दिशा में व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र के विस्तार का संकेत देती है। 

RBI की नई तैयारी, UPI पेमेंट्स में 1 घंटे की देरी, जानें क्यों बदल रहे हैं ये नियम

 नई दिल्ली  भारत में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) डिजिटल पेमेंट्स की पॉपुलैरिटी किसी से छिपी नहीं है. इंस्टैंट पेमेंट्स की वजह से UPI को मनी ट्रांसफर और किराने की दुकान तक पर यूज किया जा रहा है. अब इसी खूबी को कुछ समय के लिए बदला जा सकता है।  भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इसको लेकर चर्चा पत्र जारी किया है, जिसमें डिजिटल फ्रॉड पर लगाम लगाने के लिए ट्रांजैक्शन पर कुछ घंटे की देरी का नियम लाने का प्रस्ताव दिया है. पेमेंट्स में करीब 1 घंटे तक की देरी होगी।  RBI का यह प्रपोजल कुछ पेमेंट्स के प्रोसेस के तरीकों को बदलने के लिए है. अगर ये नियम लागू होता है तो 10 हजार रुपये से अधिक रुपये वाली पेमेंट्स तुरंत कंप्लीट नहीं होगी. इस पेमेंट्स को कंप्लीट होने में कुछ समय लगेगा।  रुपये भेजने वाले के बैंक खाते से रकम तुरंत कट जाएंगी लेकिन जिसके बैंक खाते में रुपये पहुंचने हैं, उसको 1 घंटे के बाद रिसीव होंगे. यह बदलाव सुरक्षा के मद्देनजर लाया जा रहा है. इस दौरान सेंडर्स चाहें तो पेमेंट्स को 1 घंटे के अंदर कैंसिल भी कर सकते हैं।  इस कड़े कदम के पीछे की सबसे बड़ी वजह ऑनलाइन धोखाधड़ी से होने वाला भारी नुकसान है। साल 2025 में ही भारत में डिजिटल फ्रॉड के कारण लोगों ने 22,000 करोड़ रुपये से ज्यादा गंवा दिए हैं। आंकड़े बताते हैं कि भले ही 10,000 रुपये से बड़े ट्रांजेक्शन संख्या में कम हों, लेकिन फ्रॉड की कुल वैल्यू का करीब 98.5% हिस्सा इसी कैटेगरी से आता है। अक्सर ठग 'सोशल इंजीनियरिंग' यानी लोगों को डराकर या लालच देकर तुरंत पैसे ट्रांसफर करवा लेते हैं। 1 घंटे की इस देरी (Holding Period) का मकसद पीड़ित व्यक्ति को सोचने और समझने का समय देना है। अगर किसी को पता चलता है कि उसके साथ धोखा हुआ है, तो वह उस एक घंटे के भीतर अपना ट्रांजेक्शन कैंसिल कर सकेगा और अपनी मेहनत की कमाई को डूबने से बचा पाएगा। सिर्फ 1 घंटे का ब्रेक ही नहीं, RBI सुरक्षा के लिए कुछ और भी बड़े बदलाव करने जा रहा है। बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए नियम बनाया जा रहा है कि 70 साल से अधिक उम्र के लोग अगर 50,000 रुपये से ज्यादा ट्रांसफर करते हैं, तो उनके किसी भरोसेमंद व्यक्ति (Trusted Person) की अनुमति जरूरी होगी। साथ ही, बैंकों को निर्देश दिया जा सकता है कि अगर किसी व्यक्तिगत या छोटे बिजनेस खाते में अचानक 25 लाख रुपये से ज्यादा जमा होते हैं, तो बैंक पूरी पुष्टि के बाद ही उसे क्रेडिट करे। इसके अलावा, एक 'किल स्विच' (Kill Switch) का विकल्प भी दिया जाएगा, जिससे कोई भी ग्राहक फ्रॉड का शक होने पर एक ही बटन दबाकर अपनी UPI, नेट बैंकिंग और कार्ड जैसी सभी डिजिटल सेवाओं को तुरंत बंद कर सकेगा। हालांकि इससे कुछ लोगों को तात्कालिक असुविधा हो सकती है, लेकिन आपकी जमापूंजी को सुरक्षित रखने के लिए यह एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकता है। 1 घंटे देरी का नियम P2P ट्रांसफर पर लागू होगा  ध्यान देने वाली बात यह है कि ये नियम सिर्फ पर्सन टू पर्सन (P2P) ट्रांसफर पर लागू होगा. दुकान पर QR कोड के जरिए होने वाले पेमेंट्स पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।  साइबर ठगी पर नकेल कसने की तैयारी   RBI इस लिए ये बदलाव लाना चाहता है ताकि का साइबर ठगी पर नकेल कसी जा सके. साइबर ठगी के केस में रुपये कुछ मिनट के अंदर ना जाने कितने सारे अकाउंट से होकर गुजर जाते हैं और कैश के रूप में निकाल लिए जाते हैं. इसके बाद रिकवरी में परेशानी आती है।  1 घंटे की देरी का फॉर्मुला कैसे आएगा काम?    RBI की सलाह है कि 1 घंटे की देरी मददगार साबित होगी. रिजर्व बैंक इस देरी को गोल्डन आवर के रूप में मानता है, जहां यूजर्स को खुद सोचने का समय मिलेगा और इससे ठगी से बाहर निकलने का मौका मिलेगा. खाता धारक चाहे तो ट्रांजैक्शन को 1 घंटे के अंदर कैंसिल भी कर सकेंगे।  यहां गौर करने वाली बात यह है कि डेली पेमेंट्स पर कोई असर नहीं पड़ेगा. ऑटो डेबिट और सब्सक्रिप्शन वाली पेमेंट्स पर कोई असर नहीं दिखाई देगा. अगर शख्स किसी अनजान व्यक्ति को रुपये ट्रांसफर करते हैं, तो उसको ज्यादा सेफ्टी मिलेगी। 

UPI पेमेंट में बड़ा बदलाव संभव, 10 हजार से ऊपर ट्रांजैक्शन में लग सकती है 1 घंटे की देरी

भारत में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) डिजिटल पेमेंट्स की पॉपुलैरिटी किसी से छिपी नहीं है. इंस्टैंट पेमेंट्स की वजह से UPI को मनी ट्रांसफर और किराने की दुकान तक पर यूज किया जा रहा है. अब इसी खूबी को कुछ समय के लिए बदला जा सकता है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इसको लेकर चर्चा पत्र जारी किया है, जिसमें डिजिटल फ्रॉड पर लगाम लगाने के लिए ट्रांजैक्शन पर कुछ घंटे की देरी का नियम लाने का प्रस्ताव दिया है. पेमेंट्स में करीब 1 घंटे तक की देरी होगी. RBI का यह प्रपोजल कुछ पेमेंट्स के प्रोसेस के तरीकों को बदलने के लिए है. अगर ये नियम लागू होता है तो 10 हजार रुपये से अधिक रुपये वाली पेमेंट्स तुरंत कंप्लीट नहीं होगी. इस पेमेंट्स को कंप्लीट होने में कुछ समय लगेगा. रुपये भेजने वाले के बैंक खाते से रकम तुरंत कट जाएंगी लेकिन जिसके बैंक खाते में रुपये पहुंचने हैं, उसको 1 घंटे के बाद रिसीव होंगे. यह बदलाव सुरक्षा के मद्देनजर लाया जा रहा है. इस दौरान सेंडर्स चाहें तो पेमेंट्स को 1 घंटे के अंदर कैंसिल भी कर सकते हैं. 1 घंटे देरी का नियम P2P ट्रांसफर पर लागू होगा ध्यान देने वाली बात यह है कि ये नियम सिर्फ पर्सन टू पर्सन (P2P) ट्रांसफर पर लागू होगा. दुकान पर QR कोड के जरिए होने वाले पेमेंट्स पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा. साइबर ठगी पर नकेल कसने की तैयारी   RBI इस लिए ये बदलाव लाना चाहता है ताकि का साइबर ठगी पर नकेल कसी जा सके. साइबर ठगी के केस में रुपये कुछ मिनट के अंदर ना जाने कितने सारे अकाउंट से होकर गुजर जाते हैं और कैश के रूप में निकाल लिए जाते हैं. इसके बाद रिकवरी में परेशानी आती है. 1 घंटे की देरी का फॉर्मुला कैसे आएगा काम?    RBI की सलाह है कि 1 घंटे की देरी मददगार साबित होगी. रिजर्व बैंक इस देरी को गोल्डन आवर के रूप में मानता है, जहां यूजर्स को खुद सोचने का समय मिलेगा और इससे ठगी से बाहर निकलने का मौका मिलेगा. खाता धारक चाहे तो ट्रांजैक्शन को 1 घंटे के अंदर कैंसिल भी कर सकेंगे.   यहां गौर करने वाली बात यह है कि डेली पेमेंट्स पर कोई असर नहीं पड़ेगा. ऑटो डेबिट और सब्सक्रिप्शन वाली पेमेंट्स पर कोई असर नहीं दिखाई देगा. अगर शख्स किसी अनजान व्यक्ति को रुपये ट्रांसफर करते हैं, तो उसको ज्यादा सेफ्टी मिलेगी.  

बिना ATM कार्ड के भी मिल जाएगा कैश! UPI से पैसे निकालने का नया तरीका समझें

नई दिल्ली आपको पता है कि आप ATM से UPI के जरिए भी पैसे निकाले जा सकते हैं। इसका मतलब है कि ATM से पैसे निकालने के लिए डेबिट कार्ड का पास होना जरूरी नहीं है। दरअसल अब ज्यादातर बैंकों ने अपने ATM में QR Code Scan या UPI Money का ऑप्शन देना शुरू कर दिया है। UPI के जरिए ATM से पैसा निकालना न सिर्फ आसान है बल्कि यह कार्ड क्लोनिंग और स्किमिंग जैसे बड़े साइबर खतरों से भी सुरक्षित रखता है। ऐसे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसका पता होना चाहिए। UPI से कैश निकालने के फायदे UPI से कैश निकालने के कई फायदे हैं। अगर आपके पास कार्ड न हो या आप उसे घर भूल गए हों, तो भी आप जरूरत पड़ने पर आसानी से ATM से कैश निकाल सकते हैं। यह प्रोसेस न सिर्फ तेज है बल्कि आसान भी है, क्योंकि आपको बार-बार कार्ड डालने या पिन छुपाकर टाइप करने का झंझट नहीं रहता। बस एक QR कोड स्कैन करते ही आपका काम हो जाता है। इसकी वजह से आपको फिजिकल डेबिट कार्ड साथ रखने की जरूरत नहीं रहती। इससे कार्ड के खोने या चोरी होने का डर भी खत्म हो जाता है। यह नई तकनीक आपको 'कार्ड क्लोनिंग' और 'स्किमिंग' जैसे खतरनाक साइबर फ्रॉड से भी बचाती है। कैसे निकालें UPI से कैश     इसके लिए सबसे पहले एटीएम मशीन के पास जाएं और वहां स्क्रीन पर दिख रहे 'UPI Cash Withdrawal' के ऑप्शन को चुनें।     अब ATM मशीन पर वह राशि टाइप करें जिसे आप निकालना चाहते हैं।     इसके बाद ATM मशीन पर एक QR कोड दिखाई देगा, उसे UPI ऐप के जरिए स्कैन करें। याद रहे कि इस QR कोड का इस्तेमाल एक ही बार किया जा सकता है।     अपब अपने फोन पर UPI PIN डालें।     PIN डालते ही आपको ATM मशीन से पैसे मिल जाएंगे। ध्यान रखने वाली बातें ATM से UPI के जरिए कैश निकालते समय कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है:     ATM में UPI फीचर उपलब्ध हो। इसे आप मशीन में कैश निकालने के लिए दिए गए ऑप्शन से समझ सकते हैं।     इसके अलावा, आपके पास अपना फोन और फोन में कोई चालू UPI ऐप होनी चाहिए। इसके साथ ही ऐप अपडेटेड भी हो।     आपके फोन का इंटरनेट काम कर रहा हो।     आपको अपना UPI PIN याद हो।     इस फीचर का इस्तेमाल कर आप 5000 से 10000 रुपये तक ही निकाल सकते हैं।

UPI का खास फीचर हुआ बंद! अब मोबाइल नंबर या UPI ID से पेमेंट नहीं होगी – क्या है नया नियम?

नई दिल्ली अब आप UPI ID या मोबाइल नंबर डालकर UPI पेमेंट्स नहीं कर पाएंगे। डिजिटल पेमेंट्स को ज्यादा सुरक्षित और तेज बनाने के लिए NPCI ने एक बड़ा बदलाव किया है। अभी तक ऑनलाइन भुगतान करते समय UPI ID या मोबाइल नंबर मैन्युअल तरीके से टाइप करना पड़ता था, जिसे कि ‘UPI Collect’ कहा जाता था। अब इस तरीके को ज्यादातर जगहों के लिए बंद किया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार अब आपको इस ऑप्शन की जगह सीधे पेमेंट ऐप्स के आइकन पर क्लिक करने का ऑप्शन या फिर QR Code स्कैन करने की सुविधा मिलेगी। इससे न सिर्फ पेमेंट करना ज्यादा आसान हो जाएगा बल्कि ऑनलाइन पेमेंट्स ज्यादा सुरक्षित भी हो जाएंगी। यह बदलाव 28 फरवरी 2026 से लागू होना था। क्या होता है UPI Collect? यह ऑनलाइन भुगतान करने का एक तरीका था, जिसमें खरीददार अपनी UPI ID या मोबाइल नंबर (अगर वही UPI ID के तौर पर इस्तेमाल हो रहा हो) खुद टाइप करता था। इसके बाद वह ऐप या वेबसाइट पेमेंट ऐप को पैसे काटने की रिक्वेस्ट भेजती थी। इसके बाद यूजर पेमेंट ऐप में अपना पिन डालकर भुगतान करता था। इसी वजह से इस तरीके को UPI कलेक्ट कहा जाता था क्योंकि इसमें पेमेंट लेने वाली ऐप या वेबसाइट, पेमेंट पाने के लिए पेमेंट ऐप को मैसेज भेजती थी। अब कैसे कर पाएंगे पेमेंट अब इस तरीके को बहुत आसान बनाया जा रहा है। 28 फरवरी 2026 के बाद से ज्यादातर जगहों पर आपको पेमेंट करने के लिए UPI ऐप का आइकन या QR कोड मिलेगा। अगर आप पेमेंट करने के लिए ऐप के आइकन पर क्लिक करेंगे, तो सीधा फोन पर ऐप खुल जाएगी और वहीं अगर आप QR Code को चुनेंगे तो आपके सामन एक QR Code आजाएगा और आप उसे स्कैन कर पेमेंट कर पाएंगे। इन जगहों पर चलेगा पुराना तरीका गौर करने वाली बात है कि 28 फरवरी 2026 के बाद से UPI कलेक्ट को पूरी तरह बंद नहीं किया जाएगा। कुछ खास परिस्थितियों और कामों के लिए इसका इस्तेमाल जारी रहेगा। जैसे कि:     शेयर बाजार और IPO के लिए: अगर आप स्टॉक मार्केट में निवेश करते हैं या किसी कंपनी के IPO के लिए अप्लाई करना चाहते हैं, तो वहां आपको UPI ID या मोबाइल नंबर टाइप करके ही पेेमेंट करनी होगी।     Apple और iPhone यूजर्स: अगर आप आईफोन या किसी iOS डिवाइस पर मोबाइल ऐप या ब्राउजर के जरिए खरीदारी करेंगे, तो वहां भी यही पुराना सिस्टम आपको काम करता दिखेगा।     पुराने पेमेंट को मैनेज करने के लिए: अगर आपने पहले से कोई ऑटो-पेमेंट सेट किया है, तो उसे बदलने या रोकने के लिए पुराने हाथ से UPI ID या मोबाइल नंबर टाइप करना होगा।     विदेशी पेमेंट्स के लिए: यदि आप किसी अंतरराष्ट्रीय वेबसाइट या अपने देश से बाहर किसी बिजनेस को पेमेंट करेंगे, तो भी UPI कलेक्ट वाला पुराना तरीका ही काम करेगा।

देश में मुद्रा सर्कुलेशन 40 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचा, यूपीआई बढ़ने के बावजूद नकदी का चलन बना तेज

मुंबई   देश में करेंसी सर्कुलेशन जनवरी 2026 के अंत तक बढ़कर रिकॉर्ड 40 लाख करोड़ रुपए के करीब पहुंच गया है। इसमें सालाना आधार पर 11.1 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है, जो कि पिछले साल समान अवधि में 5.3 प्रतिशत थी। यह जानकारी सोमवार को जारी हुई एक रिपोर्ट में दी गई।  एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में बताया गया कि जनता के पास करेंसी (सीडब्ल्यूपी) की हिस्सेदारी कुल करेंसी सर्कुलेशन में 97.6 प्रतिशत (करीब 39 लाख करोड़ रुपए ) हो गई है। रिपोर्ट में बताया गया कि देश में यूपीआई के कारण डिजिटल लेनदेन तेजी से बढ़ा है और इससे कैश-टू-जीडीपी रेश्यो में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। रिपोर्ट के मुताबिक,"देश में एक महीने में होने वाले यूपीआई लेनदेन की वैल्यू करीब 28 लाख करोड़ रुपए है, जो कि देश के कुल करेंसी स्टॉक का करीब 70 प्रतिशत है, जो कि दिखाता है कि देश में बड़ी संख्या में लोग डिजिटल पेमेंट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं।" वहीं, देश का कैश-टू-जीडीपी रेश्यो वित्त वर्ष 26 में कम होकर 11 प्रतिशत हो गया है, जो कि वित्त वर्ष 21 में 14.4 प्रतिशत पर था। रिपोर्ट में कहा गया है, "करेंसी और जीडीपी में परिवर्तन की दिशा भले ही एक जैसी हो, लेकिन जीडीपी की वृद्धि को अब नकदी के बजाय यूपीआई के माध्यम से अधिक हो रही है।" सीआरआर में कटौती के कारण चालू वित्त वर्ष में 'आरबीआई के पास बैंकर्स डिपॉजिट' में 1.86 लाख करोड़ रुपए की कमी आई, जिसके परिणामस्वरूप रिजर्व मनी की वृद्धि घटकर 5.8 प्रतिशत रह गई। एसबीआई रिसर्च की एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2015 से वित्त वर्ष 2025 के बीच बैंकों में जमा और ऋण लगभग तीन गुना बढ़ गए, जो बैंकिंग प्रणाली के सुदृढ़ीकरण और ऋण मध्यस्थता में सुधार का संकेत है। वित्त वर्ष 2015 से वित्त वर्ष 2025 के दौरान जमा राशि 85.3 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 241.5 लाख करोड़ रुपए हो गई और ऋण 67.4 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 191.2 लाख करोड़ रुपए हो गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंकों की परिसंपत्ति वृद्धि दर वित्त वर्ष 2025 तक जीडीपी के 77 प्रतिशत से बढ़कर 94 प्रतिशत हो गई, जो वित्तीय सुदृढ़ीकरण में सुधार को दर्शाती है।

UPI ट्रांजेक्शन में बदलाव, फरवरी से लागू होंगे नए नियम; जानें इसके प्रभाव

नई दिल्ली भारत में डिजिटल पेमेंट अब हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. सब्जी खरीदने से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग, बिजली का बिल भरने और दोस्तों को पैसे भेजने तक, हर जगह यूपीआई (UPI) का यूज हो रहा है. ऐसे में अगर यूपीआई के नियमों में कोई बदलाव होता है, तो उसका असर करोड़ों लोगों पर पड़ता है. इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और NPCI ने फरवरी 2026 से यूपीआई के नए नियम लागू करने का फैसला किया है. इन नए नियमों का मकसद लेनदेन को और तेज बनाना, धोखाधड़ी से सुरक्षा बढ़ाना, यूजर्स को अपने पैसों और भुगतान पर ज्यादा नियंत्रण देना है. अगर आप Google Pay, PhonePe, Paytm या किसी भी UPI ऐप का यूज करते हैं, तो आइए आज हम आपको UPI के कौन से नए नियम फरवरी से लागू हो रहे हैं.  अब UPI पेमेंट होगा और भी तेज नए नियमों के तहत UPI लेनदेन और API रिस्पॉन्स को 10 सेकंड के भीतर पूरा करना जरूर होगा. पहले यह समय सीमा 30 सेकंड थी, जिसकी वजह से कई बार पेमेंट अटक जाता था या देर से पूरा होता था. अब फायदा यह होगा कि पेमेंट जल्दी पूरा होगा, Pending या Processing में फंसे ट्रांजैक्शन कम होंगे, भीड़-भाड़ वाले समय (जैसे सेल या महीने के आखिर में) भी सिस्टम बेहतर काम करेगा. इससे ग्राहकों के साथ-साथ दुकानदारों को भी राहत मिलेगी.  API क्या होता है API यानी एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस, इसे आप दो एप्स या सिस्टम के बीच बात करने का जरिया समझ सकते हैं. जब आप UPI से भुगतान करते हैं तो आपका UPI ऐप आपके बैंक से पूछता है क्या खाते में पैसे हैं फिर वह सामने वाले के बैंक से कहता है पैसे स्वीकार करो. यह पूरी बातचीत API के जरिए होती है. अब API तेज होगी, तो पूरा भुगतान भी जल्दी और स्मूथ होगा.  सुरक्षा पर खास जोर और यूजर्स को मिलेगा ज्यादा कंट्रोल 2026 के नए UPI नियमों में सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी, खासकर बड़े अमाउंट वाले लेनदेन के लिए. इसमें मुख्य बदलाव भुगतान से पहले स्पष्ट कन्फर्मेशन मैसेज, ऑटो पेमेंट और सब्सक्रिप्शन के लिए बेहतर सुरक्षा, यूजर्स आसानी से अपनी सब्सक्रिप्शन को देख, मैनेज और कैंसल कर पाएंगे. इससे गलत कटौती और धोखाधड़ी की संभावना कम होगी.  लंबे समय से यूज न हुई UPI ID पर रोक लग सकती है अगर आपकी कोई UPI ID लंबे समय से यूज नहीं हुई है, तो उसे अस्थायी रूप से बंद किया जा सकता है. इसे डॉरमेंट UPI ID कहा जाएगा. इसे दोबारा चालू करने के लिए यूजर को री-वेरिफिकेशन करना होगा. इस नियम का उद्देश्य है पुराने और भूले हुए अकाउंट्स का गलत यूज रोकना है. अब अगर कोई UPI पेमेंट फेल हो जाता है या अटक जाता है, तो बैंक और ऐप्स को कुछ घंटों के भीतर समस्या सुलझानी होगी, यूजर को साफ-साफ बताया जाएगा कि पैसा कटा या नहीं, कहां अटका, कब वापस मिलेगा, इससे यूजर्स की परेशानी और भ्रम दोनों कम होंगे.  UPI का रिकॉर्ड प्रदर्शन सरकार ने संसद में बताया कि चालू वित्त वर्ष में दिसंबर तक UPI के जरिए 230 लाख करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ. यह आंकड़ा 2022-23 के 139 लाख करोड़ रुपये से कहीं ज्यादा है. इससे साफ है कि UPI पर लोगों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है. UPI अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है. वर्तमान में यह 8 देशों में यूज हो रहा है. जिसमें भूटान, फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, कतर, सिंगापुर, श्रीलंका, संयुक्त अरब अमीरात शामिल है. सरकार और NPCI मिलकर विदेशों में व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) और व्यक्ति से व्यापारी (P2M) भुगतान को आसान बना रहे हैं. IMF की रिपोर्ट (जून 2025) के अनुसार, UPI दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम रिटेल पेमेंट सिस्टम है. ACI Worldwide रिपोर्ट 2024 के मुताबिक, दुनिया के कुल रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट्स में करीब 49 प्रतिशत  हिस्सा UPI का है. 

यूपीआई टेक्स में मध्यप्रदेश के 12 उद्यमों ने की सहभागिता

भोपाल उ.प्र. की राजधानी लखनऊ में आयोजित उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड एक्सपो यूपीआई टेक्स में एमएसएमई विभाग के सहयोग से मध्यप्रदेश की 12 चयनित एमएसएमई इकाइयों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इन इकाइयों द्वारा फैब्रिक्स, पर्ल (मोती) निर्माण, पैकेजिंग, बांस आधारित उत्पाद तथा मसाला उद्योग सहित विभिन्न उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। मध्यप्रदेश के इन मंडपों की आगंतुकों एवं व्यापारिक प्रतिनिधियों द्वारा सराहना की गयी। सहभागी 12 एमएसएमई इकाइयों में से 2 महिला उद्यमियों की उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही, जो महिला उद्यमिता को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल है। एमएसएमई विभाग, मध्यप्रदेश द्वारा एक्सपो में भाग लेने वाली सभी इकाइयों के लिए स्टॉल स्थापना सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की गईं। इस प्रकार की प्रदर्शनियों में सहभागिता से प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को नए बाजार, व्यापारिक संपर्क तथा निर्यात के अवसर प्राप्त होते हैं। मध्यप्रदेश एमएसएमई विभाग भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से उद्यमियों को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।  

अब UPI से मिलेगा PF का पैसा, सरकार का बड़ा ऐलान: जानिए कितनी राशि और कब तक

नई दिल्ली  कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपने 8 करोड़ मेंबर्स के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाने की तैयारी कर ली है। अप्रैल 2026 तक इसके सदस्य UPI के जरिए अपनी कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) से पात्र राशि सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर कर सकेंगे। PF निलकने का बदल जाएगा नियम  रिपोर्ट्स के अनुसार, नई व्यवस्था में PF मेम्बेर्स अपने UPI पिन का उपयोग करके सुरक्षित लेनदेन पूरा कर सकेंगे। खाते में एक न्यूनतम हिस्सा (25 प्रतिशत) सुरक्षित रहेगा ताकि मेम्बेर्स को वर्तमान 8.25 प्रतिशत ब्याज दर और चक्रवृद्धि ब्याज का लाभ मिलता रहे। बचा हुआ पैसा तुरंत बैंक खाते में पहुंच जाएगा, जिसके बाद इसे डिजिटल पेमेंट, एटीएम से नकद निकासी या डेबिट कार्ड के जरिए इस्तेमाल किया जा सकेगा। खामियां को दूर करने में जुटा EPFO EPFO वर्तमान में इस सिस्टम को सुचारू रूप से लागू करने के लिए तकनीकी चुनौतियों और सॉफ्टवेयर संबंधी खामियों को दूर करने का काम तेजी से कर रहा है। फिलहाल सदस्यों को निकासी के लिए क्लेम फाइल करना पड़ता है, जो समय लेने वाला प्रोसेस है। ऑटोमैटिक सेटलमेंट में भी तीन दिन लगते हैं। नई व्यवस्था से यह प्रक्रिया और तेज हो जाएगी। ऑटो-सेटलमेंट की शुरू हुई सेवा  ईपीएफओ ने कोविड-19 महामारी के दौरान वित्तीय संकट में फंसे लोगों को तुरंत मदद के लिए ऑनलाइन ऑटो-सेटलमेंट की शुरुआत की थी। बता दें हर साल 5 करोड़ से अधिक दावों का निपटारा होता है, जिनमें ज्यादातर निकासी से जुड़े होते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार ईपीएफओ अपने सदस्यों को सीधे ईपीएफ खातों से पैसे निकालने की अनुमति नहीं दे सकता क्योंकि उसके पास कोई बैंकिंग लाइसेंस नहीं है। हालांकि, सरकार ईपीएफओ की सेवाओं को बैंकों जैसा बेहतर और सुविधाजनक बनाने पर जोर दे रही है। अक्टूबर में सरल हुए नियम  अक्टूबर 2025 में ईपीएफओ के केंद्रीय न्यासी मंडल ने आंशिक निकासी के प्रावधानों को सरल बनाने को मंजूरी दी। पहले के 13 शर्तों को घटाकर तीन मुख्य श्रेणियों में समेट दिया गया है 1. आवश्यक जरूरतें (बीमारी, शिक्षा, शादी) 2. आवासीय जरूरतें। 3. विशेष परिस्थितियां। अब सदस्य पात्र राशि का 100 प्रतिशत तक निकाल सकेंगे, जबकि न्यूनतम हिस्सा सुरक्षित रहेगा। निकासी की सीमा भी बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है। क्या पूरा PF निकाला जा सकेगा? हां। नए प्रावधानों के तहत सदस्य अपने EPF खाते में उपलब्ध 100% योग्य राशि, जिसमें कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का अंश निकाल सकेंगे। हालांकि, योजना में यह भी प्रावधान किया गया है कि खाते में कम से कम 25% योगदान हमेशा न्यूनतम बैलेंस के रूप में बना रहेगा, ताकि 8.25% सालाना ब्याज और कंपाउंडिंग का फायदा मिलता रहे और रिटायरमेंट कॉर्पस सुरक्षित रहे। इस बदलाव से सदस्यों को क्या फायदा होगा?     क्लेम फाइल करने की जरूरत लगभग खत्म     तेज, सुरक्षित और आसान निकासी     EPFO पर प्रशासनिक बोझ कम डिजिटल इंडिया के अनुरूप PF सेवाएं कुल मिलाकर, EPFO की UPI-आधारित निकासी सुविधा PF को एक “लॉक्ड रिटायरमेंट फंड” से बदलकर जरूरत के समय तुरंत उपलब्ध वित्तीय सहारा बना देगी वह भी बिना लंबी प्रक्रिया और कागजी झंझट के होगा।