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खुशखबरी: भारत की ट्रेड डील में संशोधन, दाल हटाई गई सूची से और अन्य बदलाव भी हुए लागू

नई दिल्ली India-US Trade Deal: भारत-अमेरिका ट्रेड डील में एक नया अपडेट हुआ है. अमेरिका ने भङारत के साथ हुई ट्रेड डील के फैक्टशीट में बड़ा बदलाव किया है. इस बदलाव से भारत को बड़ा फायदा होगा. दरअसल, वाइट हाउस ने फैक्टशीट में जो बदलाव किया है, उसके मुताबिक ट्रेड डील वाली लिस्ट से अब दाल हट गई है. पिछले हफ्ते भारत और अमेरिका ने अंतरिम व्यापार समझौते की घोषणा की थी. उस समय वाइट हाउस ने एक फैक्टशीट जारी की थी. उसमें कुछ बातें ऐसी थीं, जिनसे भारत को थोड़ी परेशानी हो सकती थी. इसे लेकर सवाल उठ रहे थे. लेकिन अब अमेरिका ने उस फैक्टशीट को अपडेट कर दिया है. ट्रेड डील वाली फैक्टशीट से कई चीजें हटा दी गई हैं या शब्द बदले गए हैं. इसमें सबसे अहम है दाल. जी हां, सबसे बड़ी खुशखबरी यह है कि दाल का जिक्र पूरी तरह हटा दिया गया है. पहले फैक्टशीट में साफ लिखा था कि भारत अमेरिकी दालों पर टैरिफ कम या खत्म करेगा. अब उस लिस्ट से ‘certain pulses’ शब्द निकाल दिए गए हैं. इसका मतलब साफ है कि भारत को अब अमेरिकी दालों पर टैरिफ घटाने की जरूरत नहीं है. भारतीय किसानों और दाल उत्पादकों के लिए यह बहुत अच्छी खबर है. पहला बड़ा बदलाव दाल दरअसल, बीते दिनों ही पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत हुई थी. इसके बाद अमेरिका और भारत के बीच ड्रेड डील पर सहमति बनी थी. इसके बाद एक फैक्टशीट जारी किया गया था. अब वाइट हाउस ने भारत के साथ हुए व्यापार समझौते का फैक्टशीट थोड़ा बदल दिया है. पहले की फैक्ट शीट में जो बातें लिखी गई थीं, अब उनमें से कुछ हिस्से हटा दिए गए हैं और कुछ शब्द भी बदल दिए गए हैं. पहला सबसे बड़ा बदलाव दाल ही है. दूसरा बड़ा बदलाव क्या? दूसरा बड़ा बदलाव है 500 अरब डॉलर खरीद का वादा. जी हां, भारत-अमेरिका ट्रेड डील के फैक्टशीट में पहले लिखा था कि भारत ‘committed’ है यानी वादा कर चुका है कि वह अमेरिका से 500 अरब डॉलर के सामान खरीदेगा. अब शब्द बदलकर ‘intend’ कर दिया गया है यानी ‘इरादा है’. मतलब कि भारत ने कोई वादा नहीं किया है, बल्कि भारत इरादा रखता है. इरादा डील के हिसाब से बदल भी सकता है, मगर वादा नहीं. यहां भी राहत ही राहत इसके अलावा खरीद की लिस्ट से ‘Agricultural products’ भी हटा दिए गए हैं. अब सिर्फ एनर्जी, आईसीटी, कोयला और दूसरे उत्पादों का जिक्र है. यानी कृषि उत्पादों को खरीदने का कोई दबाव नहीं रहा. बदले हुए वर्जन में टेक्स्ट से खेती के सामान का ज़िक्र हटा दिया गया है. अब इसमें लिखा है, ‘भारत ज़्यादा अमेरिकी प्रोडक्ट खरीदने और $500 बिलियन से ज़्यादा की US एनर्जी, इन्फॉर्मेशन और कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी, कोयला और दूसरे प्रोडक्ट खरीदने का इरादा रखता है.’ और क्या बदलाव हुए? इसके अलावा, व्हाइट हाउस की अपडेटेड फैक्टशीट में भारत के अपने डिजिटल सर्विस टैक्स हटाने से जुड़ा टेक्स्ट भी हटा दिया गया है. पहले के टेक्स्ट में कहा गया था, ‘भारत अपने डिजिटल सर्विस टैक्स हटा देगा और डिजिटल ट्रेड में भेदभाव वाले या बोझिल तरीकों और दूसरी रुकावटों को दूर करने वाले मज़बूत बाइलेटरल डिजिटल ट्रेड नियमों पर बातचीत करने के लिए कमिटेड है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन पर कस्टम ड्यूटी लगाने पर रोक लगाने वाले नियम भी शामिल हैं. इसमें अब कहा गया है, ‘भारत ने डिजिटल ट्रेड के लिए भेदभाव वाले या बोझिल तरीकों और दूसरी रुकावटों को दूर करने वाले मज़बूत बाइलेटरल डिजिटल ट्रेड नियमों पर बातचीत करने का वादा किया है.’ राहत देने वाले हैं ये यूटर्न ये सारे बदलाव भारत के लिए राहत देने वाले हैं. अगर टैरिफ की बात करें तो भारत पर अब 18 फीसदी टैरिफ लग रहा है. यह पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन से कम है. यह समझौता लगभग एक साल की बातचीत के बाद हुआ. फरवरी 2025 से बातें चल रही थीं. पहले ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ लगा दिए थे. बाद में यह 18 फीसदी कर दिया गया. अब जब अमेरिका ने फैक्टशीट में ये बदलाव किए हैं तो लगता है कि भारत ने अपनी बात काफी मजबूती से रखी. भारत की दलीलों के कारण ही अमेरिका को कुछ बातें माननी पड़ीं. फैक्टशीट में बदलाव का क्या मतलब     दाल पर टैरिफ न घटाने का फैसला भारतीय किसानों के लिए बहुत बड़ा है. दाल हमारे देश में बहुत महत्वपूर्ण फसल है. अगर अमेरिकी दाल सस्ती होकर आती तो किसानों को नुकसान होता. अब वह खतरा टल गया.     500 अरब डॉलर की खरीद को भी ‘वादा’ से ‘इरादा’ बना दिया गया. इससे भारत पर कोई कानूनी बाध्यता नहीं रहेगी.     डिजिटल टैक्स पर भी भारत को तुरंत कुछ करने की जरूरत नहीं पड़ेगी.  सिर्फ भविष्य में नियमों पर बात होगी. भारत का हित सर्वोपरि पहले समझौते की घोषणा के समय कुछ बातें थोड़ी सख्त लग रही थीं. लेकिन अब अमेरिका ने खुद अपनी लिस्ट को नरम कर दिया है. इससे साफ है कि भारत ने डील में अपना हित अच्छे से सुरक्षित रखा है. आगे जब पूरा डिटेल्ड समझौता आएगा तब और साफ होगा. लेकिन फिलहाल ये बदलाव भारत के लिए सकारात्मक हैं.

एक दिन में दो खुशखबरी! ट्रेड डील को हरी झंडी और सरकार ने दिया आर्थिक तोहफा

नई दिल्‍ली  भारतीय कारोबारियों और निर्यातकों को एक ही दिन में दो-दो खुशखबरी मिली है. पहले तो अमेरिका के साथ ट्रेड डील लगभग कन्‍फर्म होने की खबर आई, जिससे टैरिफ 50 से घटकर 15 तक आ सकता है. अब सरकार ने भी निर्यातकों को मिलने वाली टैक्‍स व शुल्‍क में छूट का दायरा बढ़ाने का फैसला किया है. इसके तहत निर्यातकों के लिए दो योजनाओं आरओडीटीईपी और आरओएससीटीएल के तहत अधिसूचित दरों की समीक्षा के लिए पूर्व सचिव नीरज कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक समिति भी बनाई है. सरकार अभी निर्यात किए जाने वाले उत्‍पादों पर शुल्क एवं टैक्‍स की छूट योजना (आरओडीटीईपी) उन कर, व शुल्क को लौटाने (रिफंड) का प्रावधान करती है जो निर्यातकों द्वारा वस्तुओं के विनिर्माण एवं वितरण की प्रक्रिया में खर्च किए जाते हैं. इनका कंपेनसेशन केंद्र, राज्य या स्थानीय स्तर पर किसी अन्य तंत्र के तहत नहीं किया जाता है. अब इस योजना को मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया है. वर्तमान आरओडीटीईपी दरें 0.3 से 4.3 फीसदी के बीच हैं. कपड़ा निर्यातकों के लिए अलग योजना परिधान यानी कपड़ा निर्यातकों के लिए साल 2021 में राज्य एवं केंद्रीय कर एवं शुल्क में छूट (आरओएससीटीएल) योजना की घोषणा की गई थी. इसके तहत उन्हें अपने निर्यात पर केंद्रीय एवं राज्य करों में छूट मिलती है. आरओएससीटीएल योजना के तहत, परिधानों के लिए छूट की अधिकतम दर 6.05 प्रतिशत है, जबकि सिले हुए (मेड-अप) कपड़ों के लिए यह 8.2 प्रतिशत तक है. परिधान और सिले हुए कपड़े जैसे घरेलू वस्त्र इस योजना के अंतर्गत आते हैं. दरों को निर्धारित करने पर बात करेगी समिति सरकारी आदेश के अनुसार, समिति के दो सदस्य सीमा शुल्क एवं केंद्रीय उत्पाद शुल्क के पूर्व प्रधान मुख्य आयुक्त एस.आर. बरुआ और केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के पूर्व सदस्य विवेक रंजन हैं. इसमें कहा गया कि समिति प्रशासनिक मंत्रालयों, निर्यात संवर्धन परिषदों, जिंस बोर्ड, व्यापार निकायों और अन्य हितधारकों के साथ बातचीत करेगी ताकि आरओएससीटीएल और आरओडीटीईपी दरों पर उनके विचार हासिल किए जा सकें. मौजूदा तरीकों की होगी समीक्षा समिति के सदस्‍य निर्यातित उत्पाद पर लगने वाले केंद्रीय, राज्य व स्थानीय स्तर पर शुल्क/कर/उपकर की गणना के लिए तौर-तरीके तय करेगी जिसमें निर्यातित उत्पाद के उत्पादन में प्रयुक्त वस्तुओं एवं सेवाओं पर पूर्व चरण के लिए वसूले गए अप्रत्यक्ष कर भी शामिल होंगे. समिति घरेलू शुल्क क्षेत्रों विशेष आर्थिक क्षेत्रों और अग्रिम प्राधिकरण धारकों से निर्यात के लिए आरओडीटीईपी और आरओएससीटीएल योजनाओं के तहत अधिकतम दरों की सिफारिश करेगी. समिति अपनी मुख्य रिपोर्ट 31 मार्च 2026 तक सरकार को सौंप देगी. क्‍या होगा इसका फायदा इन योजनाओं के तहत स्थानीय कर के वापस मिलने (रिफंड) से वैश्विक बाजारों में भारतीय कारोबारियों को प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद मिलती है. इस साल अप्रैल-सितंबर के दौरान निर्यात 3.02 प्रतिशत बढ़कर 220.12 अरब डॉलर हो गया, जबकि आयात 4.53 प्रतिशत बढ़कर 375.11 अरब डॉलर रहा है. फिलहाल भारत का व्यापार घाटा 154.99 अरब डॉलर है, जिसे नीचे लाने के लिए ही सरकार प्रोत्‍साहन योजनाएं चलाती है.  

भारत ने अमेरिका से कहा- ट्रेड डील पर डेडलाइन की बात नहीं करेंगे

नई दिल्ली  भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर सहमति ना बनने पर खिसियाए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीते सोमवार को एक बार फिर भारत को निशाने पर लिया था। ट्रंप ने कहा कि भारत अब टैरिफ कम करने की पेशकश कर रहा है, लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है। इसके एक दिन बाद अब भारत ने एक बार फिर उन्हें दो टूक जवाब दिया है। भारत के वाणिज्य औऱ उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को एक कार्यक्रम में कहा है कि भारत डेडलाइन वाले ट्रेड डील पर कभी चर्चा नहीं करता है। पीयूष गोयल ने अमेरिका-भारत ट्रेड डील पर भारत के दृष्टिकोण पर बातचीत करते हुए हुए कहा कि भारत जल्दबाजी में समझौते करने के लिए दबाव में काम नहीं करता। उन्होंने कहा, "हम कभी भी समय-सीमा वाले व्यापार समझौतों पर बातचीत नहीं करते। हम सिर्फ अच्छे और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौतों पर ही बातचीत करते हैं।" अमेरिका के साथ बातचीत जारी- गोयल पीयूष गोयल ने आगे कहा कि भारत अपने सभी समझौतों में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, "हम एक समान और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते के लिए हमेशा तैयार हैं।" केंद्रीय मंत्री ने इस दौरान यह पुष्टि भी की है कि भारत अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर सक्रिय रूप से चर्चा कर रहा है। गोयल ने कहा, "अभी बहुत कुछ हुआ है, अभी बहुत कुछ होना बाकी है। BTA के लिए अमेरिका के साथ हमारी बातचीत जारी है।’’ छठे दौर की वार्ता स्थगित गौरतलब है कि भारत और अमेरिका मार्च से इस समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। अब तक पांच दौर की वार्ता पूरी हो चुकी है। हालांकि 27 अगस्त से 50 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने के बाद अमेरिकी दल ने अगले दौर की वार्ता के लिए भारत का अपना दौरा स्थगित कर दिया है। इसके बाद अभी तक छठे दौर की वार्ता के लिए कोई तारीख तय नहीं की गई है। गोयल ने कार्यक्रम में यह भी कहा है कि भारत ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात, मॉरीशस, ब्रिटेन और चार यूरोपीय देशों के समूह ईएफटीए के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कर चुका है और अन्य देशों के साथ संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं।