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RBI ने Crypto को लेकर जताई चिंता, संसदीय समिति से कानूनी मान्यता नहीं देने की सिफारिश

नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सरकार को आगाह किया है कि क्रिप्टोकरेंसी जैसी वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा हैं. आरबीआई का मानना है कि भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्था में डिजिटल करेंसी को कानूनी मान्यता बिल्कुल नहीं दी जानी चाहिए. बीजेपी सांसद भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता वाली संसद की वित्त मामलों की स्थायी समिति के सामने आरबीआई ने यह बात मजबूती से रखी है।  देश की सुरक्षा को बड़ा खतरा समिति की बैठक में 'वर्चुअल डिजिटल एसेट और आगे की राह' विषय पर चर्चा हुई. इस दौरान आरबीआई के अधिकारियों ने साफ किया कि क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल देश की सुरक्षा और आर्थिक स्थिति को नुकसान पहुंचा सकता है. केंद्रीय बैंक ने चिंता जताई कि इस डिजिटल पैसे का उपयोग आतंकवाद को बढ़ावा देने (टेरर फंडिंग) और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे खतरनाक और गैरकानूनी कामों में आसानी से किया जा सकता है।  विदेशी कंपनियों पर लगाम कसना मुश्किल आरबीआई ने इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह बताया कि क्रिप्टो करेंसी का व्यापार ज्यादातर भारत के बाहर सक्रिय विदेशी कंपनियों (ऑफशोर एंटिटीज) के जरिए होता है. इन बाहरी कंपनियों पर भारतीय रेगुलेटरी संस्थाओं के लिए नजर रखना और उन पर नियंत्रण पाना बेहद मुश्किल है. अपनी बात को मजबूत करने के लिए आरबीआई ने वैश्विक स्तर के उदाहरण भी दिए. केंद्रीय बैंक ने बताया कि चीन और कतर जैसे देशों ने इस तरह की सभी वित्तीय गतिविधियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है, जबकि यूरोपीय देशों ने इसे बहुत ही कड़े नियमों के दायरे में रखा हुआ है।  आईसीएआई (ICAI) ने दिया कानून का समर्थन इसी संसदीय समिति के सामने देश की सबसे बड़ी चार्टर्ड अकाउंटेंट संस्था, 'इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया' (ICAI) ने भी अपनी रिपोर्ट सौंपी. आईसीएआई ने कहा कि वह वर्चुअल डिजिटल एसेट के लिए एक मजबूत और स्पष्ट कानून बनाने के पक्ष में है. संस्था ने भरोसा दिया कि वे सरकार और निवेशकों की मदद के लिए एक खास वित्तीय और अकाउंटिंग फ्रेमवर्क तैयार कर सकते हैं।  पारदर्शिता बढ़ाने पर ज़ोर आईसीएआई ने सुझाव दिया कि वे विभिन्न प्रकार की डिजिटल एसेट्स के आर्थिक व्यवहार पर गहन रिसर्च कर सकते हैं. इस रिसर्च के आधार पर वे ऐसा गाइडेंस नोट या नियम तैयार करेंगे, जिससे कंपनियों की बैलेंस शीट और वित्तीय रिपोर्ट में क्रिप्टोकरेंसी के लेन-देन को पारदर्शिता से दिखाया जा सके. इससे देश में टैक्स चोरी रुकेगी और डिजिटल संपत्ति का सही लेखा-जोखा मिल सकेगा।  संसदीय समिति के अध्यक्ष भर्तृहरि महताब ने बैठक के बाद पुष्टि की कि रिजर्व बैंक देश में क्रिप्टोकरेंसी को कानूनी दर्जा देने के पूरी तरह खिलाफ है. उन्होंने यह भी बताया कि समिति फिलहाल आयकर कानून के तहत डिजिटल एसेट्स के ऑडिट और टैक्स से जुड़े पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है। 

AI शेयरों में निवेश करने वालों के लिए अलर्ट! RBI ने बताया क्यों बढ़ रहा है खतरा

 नई दिल्‍ली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ी चेतावनी दी है. यह वॉर्निंग ग्‍लोबल मार्केट में AI की वजह से आई बड़ी गिरावट को लेकर है. केंद्रीय बैंक का कहना है कि ग्‍लोबल मार्केट में कॉरपोरेट अर्निंग में ग्रोथ के रिवैल्‍यूएशन और AI रिलेटेड स्‍टॉक के वैल्‍यूएशन के कारण आई गिरावट भारतीय बाजार को भी प्रभावित कर सकती है।  RBI ने अपनी फाइनेंशियल स्‍टैबिलिटी रिपोर्ट (FSR) में कहा है कि AI से रिलेटेड निवेश अब बॉन्‍ड मार्केट्स समेत बाकी कैपिटल मार्केट के अन्‍य सेक्‍टर्स में भी फैल रहे हैं. साउथ कोरिया, ताइवान और जापान समेत कई मार्केट्स में हाल ही में AI से सबंधित शेयरों में तेजी और उच्‍च अस्थिरता देखी गई थी।  रिपोर्ट में कहा गया है कि AI से संबंधित टेक कंपनियों के एक छोटे ग्रुप के कारण फोकस ज्‍यादा बना हुआ है, जो एआई को अपनाने में टॉप इकोनॉमी देशों या इसकी सप्‍लाई चेन में भाग लेने वाली अर्थव्‍यवस्‍थाओं में शेयर मार्केट के प्रदर्शन को तेजी से प्रभावित कर रहा है।  अमेरिकी बाजार में आ सकती है बड़ी गिरावट हाल ही में कुछ उभरते बाजारों के बेहतर प्रदर्शन की खास वजह व्‍यापक मजबूती के बजाय एआई से जुड़ी कंपनियां रही हैं. केंद्रीय बैंक ने कहा कि ये दोनों ही वित्तीय अस्थिरता के सोर्स बने हुए हैं, क्‍योंकि इन कंपनियों में बिकवाली से अमेरिका में व्‍यापक बाजार में गिरावट आ सकती है और आय संबंधी प्रभावों के माध्‍यम से अन्‍य बाजारों में भी इसका असर फैल सकता है।   लोन देने वाली कंपनियां भी हो सकती हैं प्रभावित आरबीआई के रिपोर्ट में कहा गया है कि जैसे-जैसे हाइपरस्केल कंपनियां घटते फ्री कैश फ्लो के बीच एआई बिल्डआउट पर कैपिटल एक्‍सपेंडेचर बढ़ा रही हैं , उन्होंने इन निवेशों को फंडिंग जारी के लिए पिछले दो वर्षों में बड़ा लोन लिया है. खर्च में और अधिक विस्तार होने के साथ ही लोन फंड में भी बढ़ोतरी होने की उम्‍मीद है. आरबीआई ने कहा कि इसलिए, एआई बेस्‍ड असेट वैल्‍यू में गिरावट इस चैनल के माध्यम से जोखिम पैदा कर सकती है, क्योंकि बैंक पर्सनल लोन फर्मों और एआई बूम को फंडिंग करने वाले अन्य फर्म भी प्रभावित हो सकते हैं।  एआई बबल की फटने की आशंका बढ़ी गौरतलब है कि अमेरिका में कई पैमानों पर इक्विटी वैल्‍यूवेशन के मापदंड ऐतिहासिक सीमा के ऊपरी स्‍तर पर बने रहे. वहीं आरबीआई के अनुसार, अमेरिकी इक्विटी बाजारों में बाकी विश्व का निवेश उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है, और मार्च 2020 में 7.5 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर मार्च 2026 में अमेरिकी इक्विटी में सकल विदेशी हिस्सेदारी 21 ट्रिलियन डॉलर हो गई है।  जबकि दक्षिण कोरिया का शेयर बाजार एक सप्ताह पहले 10% गिर गया, जिससे लोअर सर्किट लग गया और ट्रेडिंग रुक गई. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि एआई बबल के फटने की आशंकाएं बढ़ गईं. भारतीय बाजार समेत अन्य एशियाई बाजारों में भी गिरावट आई। 

Crypto Regulation: RBI और संसदीय समिति की महत्वपूर्ण बैठक, क्रिप्टो के भविष्य पर हो सकता है बड़ा निर्णय

नई दिल्ली क्रिप्टोकरेंसी (Crypto Regulations) के लिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार करने के लिए भारत सरकार लगातार काम कर रही है। इस संबंध में संसदीय वित्त समिति, रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) के अधिकारियों से मुलाकात करने वाली है। दिल्ली में 2 जुलाई को होने वाली इस बैठक में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDAs) को रेगुलेट करने के मुद्दे पर बातचीत की जाएगी। नोटिस के अनुसार, कमेटी "वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDAs) पर एक अध्ययन और आगे की राह" विषय पर रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करेगी। RBI का सतर्क रवैया रेगुलेटर्स के साथ क्रिप्टोकरेंसी पर चल रही बातचीत के लिए यह एक अहम मोड़ है, क्योंकि RBI का डिजिटल एसेट्स को लेकर हमेशा से ही सतर्क रवैया रहा है। समय-समय पर RBI गवर्नर्स ने VDA इकोसिस्टम की कमियों और बैंकिंग सिस्टम पर इसके असर को लेकर चेतावनी दी है। नवंबर 2025 में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा था, "स्टेबलकॉइन्स और क्रिप्टोकरेंसी में बहुत ज़्यादा जोखिम है, इसलिए हम इनके मामले में बहुत सावधानी बरत रहे हैं।" हालांकि, सेंट्रल बैंक UPI, डिजिटल पेमेंट और डिजिटल लेंडिंग का समर्थन करना जारी रखे हुए है। यह इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के साथ आठवीं बैठक होगी। पिछली दो बैठकों में, स्टैंडिंग कमेटी ने भारत में काम कर रहे कई घरेलू और ग्लोबल क्रिप्टो एक्सचेंजों से मुलाकात की थी ताकि उनकी चिंताओं और सुझावों को समझा जा सके। 20 मई को, पैनल ने दिल्ली में क्रिप्टो एक्सचेंज Binance, WazirX और Zebpay के साथ रेगुलेशन के दायरे, VDA इंडस्ट्री के लिए आगे की राह और टैक्स से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के लिए बैठक की।  इससे पहले, दिसंबर 2025 में CoinDCX, CoinSwitch और Coinbase के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक हुई थी। रेगुलेटर्स ने पीयर-टू-पीयर (P2P) ट्रांज़ैक्शन से जुड़ी चिंताओं, इंटरनेशनल ट्रांज़ैक्शन और रेमिटेंस से जुड़ी समस्याओं, विदेशी और भारतीय क्रिप्टो एक्सचेंजों को एक ही पॉलिसी और कानूनी ढांचे के तहत लाने, और ग्लोबल एक्सचेंजों के लिए मौजूदा GST सिस्टम से जुड़ी दिक्कतों के बारे में सवाल पूछे थे।  

RBI New Rule: ₹25,000 तक का लाभ मिलेगा, भारतीय रिजर्व बैंक ने लागू किए नए नियम

  नई दिल्‍ली सोचिए एक दिन आपके फोन पर एक मैसेज आता है कि आपके 20,000 रुपये कट गए हैं, जबकि आपने कभी इसका पेमेंट नहीं किया था और ना ही कोई अप्रूवल दिया था. फिर तुरंत आप इसकी जांच करते हुए बैंक से बात करते हैं, बैंक भी ये बताने में असमर्थ होता है कि पैसे कैसे मिलेंगे।  आपने शिकायत भी दर्ज करा दी कि आपके खाते से 20,000 रुपये का ऑनलाइन फ्रॉड हो चुका है, लेकिन सवाल हमेशा से रहेगा कि आपको पैसा वापस मिलेगा या नहीं? क्‍योंकि ज्‍यादातर ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में कस्‍टमर्स का पैसा रिकवर नहीं हो पाता है. हालांकि, अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) सीधे तौर पर शामिल हो चुका है।   RBI ने एक नया नियम निकाला है, जिसके तहत अगर आपके साथ ऑनलाइन फ्रॉड या UPI के जरिए स्‍कैम होता है तो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया आपको मुआवजे का भुगतान करेगा. 24 जून 2026 को, आरबीआई ने नोटिफिकेशन जारी किया है। किस तरह के फ्रॉड पर मिलेगा मुआवजा ये नियम स्‍मॉल फाइनेंस बैंकों, पेमेंट बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और स्थानीय क्षेत्र बैंकों को छोड़कर सभी कमर्शियल बैंकों पर लागू होते हैं और 1 जनवरी, 2027 से उस तारीख को या उसके बाद किए गए किसी भी इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन के लिए प्रभावी होंगे।  सरल शब्दों में कहें तो, इसमें आज आप जितने भी प्रकार के डिजिटल भुगतान करते हैं, वे सभी शामिल हैं, जैसे यूपीआई ट्रांसफर, नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, डेबिट और क्रेडिट कार्ड से भुगतान, चाहे वे कार्ड स्वाइप या टैप करके किए गए हों या कार्ड की जानकारी ऑनलाइन दर्ज करके किए गए हों. अगर आपने डिजिटल माध्यम से पैसे का लेन-देन किया है, तो इसे इस कैटेगरी में रखा जाएगा।  कौन करेगा भुगतान?  जब कोई धोखाधड़ी वाला लेनदेन होता है, तो नुकसान के लिए कौन जिम्मेदार है, आप, बैंक, या कोई और? RBI ने यह भी जानकारी दी है कि यह तय किस आधार पर किया जाएगा. आरबीआई का कहना है कि बैंक सिर्फ यह कहकर हट नहीं सकता कि फ्रॉड के दौरान कस्‍टमर्स लापरवाह थे, अब उन्‍हें साबित भी करना होगा।  RBI ने रखा तीन कंडीशन     अगर धोखाधड़ी बैंक की गलती के कारण हुई है, जैसे कि सुरक्षा में चूक, सिस्टम में गड़बड़ी, या बैंक द्वारा आपको धोखाधड़ी की सूचना न भेजना, तो नियम स्पष्ट है. बैंक को पूरे पैसे का भुगतान करना होगा, चाहे कस्‍टमर ने इसकी जानकारी दी हो या नहीं।      अगर धोखाधड़ी किसी तीसरे पक्ष, जैसे कि भुगतान ऐप, भुगतान गेटवे या दूरसंचार प्रदाता के कारण हुई है, न कि आपके या बैंक के कारण, तो भी आपको शून्य दायित्व और पूर्ण धनवापसी प्राप्त होगी, लेकिन केवल तभी जब कस्‍टमर धोखाधड़ी की घटना की तारीख से पांच कैलेंडर दिनों के भीतर बैंक को इसकी सूचना देता है. पांच दिन बाद रिपोर्ट करें, और आपकी देनदारी बैंक की अपनी आंतरिक नीति के अनुसार तय की जाएगी।      अगर धोखाधड़ी आपकी लापरवाही के कारण हुई है, जैसे कि आपने अपना ओटीपी साझा किया, अपने बैंक से मिली स्पष्ट धोखाधड़ी की चेतावनी को अनदेखा किया, या कोई संदिग्ध ऐप डाउनलोड किया, तो नियम अधिक जटिल हैं, और यहीं पर इस अधिसूचना का वास्तव में नया हिस्सा सामने आता है।  आपकी गलती पर भी मिल सकती है रकम नए नियमों के तहत, भले ही आप तकनीकी रूप से लापरवाह रहे हों, जैसे कि आपने किसी फ़िशिंग लिंक पर क्लिक किया हो या कोई ऐसा ओटीपी शेयर किया हो जो आपको नहीं करना चाहिए था, फिर भी आपको मुआवजा मिल सकता है, बशर्ते नुकसान कम हो और आपने तुरंत कार्रवाई की हो।  कितना मिलेगा मुआवजा?  नोटिफिकेशन में कहा गया है कि मुआवजे का भुगतान पूरे लाइफ में एक ही बार किसी एक व्‍यक्ति को किया जाएगा. यह भुगतान 25,000 रुपये या 85 फीसदी जो भी कम हो किया जाएगा. अगर मान लीजिए किसी व्‍यक्ति के साथ 50 हजार रुपये की धोखाधड़ी हुई है और कस्‍टमर ने शिकायत दर्ज कराई है, तो उसे अधिकतम 25,000 रुपये का ही मुआवजा दिया जाएगा. अगर उसके साथ दोबारा फ्रॉड होता है तो उसे कोई मुआवजा नहीं मिलेगा।  कौन कितना करेगा पेमेंट?  छोटे धोखाधड़ी के मामलों में, खासकर 29,412 रुपये से कम के नुकसान वाले मामलों में, जहां मुआवजा नुकसान का 85 प्रतिशत होता है. घरेलू धोखाधड़ी के मामलों में, 65 प्रतिशत रिजर्व बैंक द्वारा, 10 प्रतिशत ग्राहक के बैंक द्वारा और बाकी 10 प्रतिशत लाभार्थी बैंक द्वारा वहन किया जाएगा. लाभार्थी बैंक, वह बैंक है जिसने सबसे पहले आपका चोरी हुआ पैसा प्राप्त किया था।  29,412 रुपये और 50,000 रुपये के बीच के थोड़े बड़े नुकसान के लिए, जहां मुआवजे की अधिकतम सीमा 25,000 रुपये है, RBI, ग्राहक का बैंक और लाभार्थी बैंक क्रमशः 19118 रुपये, 2941 रुपये और 2941 रुपये का योगदान करेंगे।   

पेंशनर्स के परिवारों को राहत, फैमिली पेंशन के लिए नया खाता खोलने की जरूरत नहीं

नई दिल्ली  केंद्रीय पेंशनभोगियों और उनके जीवनसाथी के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और राहत भरी खबर है. पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग (DoPPW) तथा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के अनुसार, मुख्य पेंशनभोगी के निधन के बाद उनके पति या पत्नी के साथ चल रहा जॉइंट बैंक अकाउंट बंद नहीं किया जाएगा. इसके साथ ही, फैमिली पेंशन शुरू कराने के लिए जीवित जीवनसाथी को कोई भी नया सिंगल बैंक अकाउंट खोलने की आवश्यकता नहीं होगी. सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य संकट की घड़ी में बुजुर्गों को बैंकों की लंबी कागजी कार्रवाई और चक्कर काटने से बचाना है।  क्या है नया नियम और व्यवस्था? पेंशन विभाग और बैंकिंग नियमों के मुताबिक, यदि पेंशनभोगी का अपने जीवनसाथी के साथ "आइदर और सर्वाइवर" (Either or Survivor) या "फॉर्मर और सर्वाइवर" मोड में संयुक्त खाता है, तो पेंशनभोगी की मृत्यु के बाद उसी खाते में फैमिली पेंशन ट्रांसफर की जाएगी. बैंक इस मौजूदा जॉइंट अकाउंट को ही सिंगल अकाउंट में परिवर्तित कर देगा. इसके लिए पूरी बैंकिंग प्रक्रिया को नए सिरे से दोहराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।  फैमिली पेंशन शुरू कराने की आसान प्रक्रिया पेंशनभोगी के निधन के बाद परिवार को सबसे पहले संबंधित बैंक शाखा को सूचित करना होगा. इसके लिए जीवनसाथी को केवल निम्नलिखित दस्तावेज जमा करने होंगे:     मृत्यु प्रमाण पत्र: पेंशनभोगी के निधन की आधिकारिक पुष्टि के लिए.     PPO की कॉपी: यदि पीपीओ में पति/पत्नी का नाम फैमिली पेंशन के लिए पहले से दर्ज है, तो काम बेहद आसान हो जाता है।      साधारण आवेदन पत्र और KYC: बैंक खाते का स्टेटस अपडेट करने के लिए एक साधारण फॉर्म और पहचान पत्र।  इन दस्तावेजों को जमा करते ही बैंक केंद्रीय पेंशन प्रसंस्करण केंद्र (CPPC) को सूचना भेजेगा और उसी खाते में फैमिली पेंशन क्रेडिट होना शुरू हो जाएगी. इस प्रक्रिया में जीवित पति/पत्नी को 'फॉर्म 14' भरने की भी जरूरत नहीं पड़ती।  देरी से बचने के लिए अभी करें ये काम विशेषज्ञों के अनुसार, अक्सर फैमिली पेंशन में देरी नियमों की वजह से नहीं, बल्कि दस्तावेजों में कमियों के कारण होती है. इसलिए पेंशनभोगियों को समय रहते ये कदम उठाने चाहिए: नाम की स्पेलिंग जांचें: सुनिश्चित करें कि पीपीओ, आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक खाते में जीवनसाथी के नाम की स्पेलिंग बिल्कुल एक जैसी हो।  KYC अपडेट रखें: बैंक खाते का नो-योर-कस्टमर (KYC) रिकॉर्ड हमेशा अपडेटेड रखें ताकि खाता कभी फ्रीज न हो।  जॉइंट अकाउंट मोड: यदि खाता जॉइंट नहीं है, तो उसे तुरंत 'आइदर या सर्वाइवर' मोड में बदलवा लें। 

क्या आपका भी है इस बैंक में खाता? RBI ने लगाई 6 महीने की रोक, जानें क्या होगा असर

मुंबई  भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने ग्राहकों के हित को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। दरअसल, आरबीआई ने मोगावीरा सहकारी बैंक, मुंबई की वित्तीय स्थिति में गिरावट को देखते हुए इसपर कई पाबंदियां लगा दी हैं। यह पहली बार नहीं है जब आरबीआई ने किसी सहकारी बैंक पर पाबंदियां लगाई हैं। इससे पहले मई में भी एक सहकारी बैंक का लाइसेंस रद्द किया गया था। मोगावीरा सहकारी बैंक पर क्या एक्शन? मोगावीरा सहकारी बैंक पर लगी पाबंदियों के तहत खाताधारकों के लिए पैसे निकालने की अधिकतम सीमा एक लाख रुपये निर्धारित की गई है। ये पाबंदियां 12 जून को कारोबार बंद होने के बाद से लागू हुईं, जो छह महीने की अवधि के लिए प्रभावी होंगी। हालांकि, इनकी समय-समय पर समीक्षा की जाएगी। क्या-क्या नहीं कर पाएगा बैंक? आरबीआई ने कहा, ''सहकारी बैंक अब कोई भी लोन और उधार को मंजूर नहीं दे सकेगा और न ही मौजूदा लोन को रिन्यू कर पाएगा। इसके अलावा, बैंक किसी प्रकार का निवेश नहीं कर सकेगा, कोई नई देनदारी नहीं ले सकेगा और उधार लेने, नए जमा स्वीकार करने पर भी रोक रहेगी। बैंक की वर्तमान नकदी स्थिति को देखते हुए उसे निर्देश दिया गया है कि वह किसी भी जमाकर्ता को उसके बचत, चालू अथवा अन्य किसी खाते से अधिकतम एक लाख रुपये तक की निकासी की अनुमति दे।'' भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा कि बैंक के कामकाज में सुधार के लिए वह लगातार उसके निदेशक मंडल और वरिष्ठ प्रबंधन के साथ संपर्क में था। हालांकि, बैंक ने निगरानी संबंधी चिंताओं को दूर करने और जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किया। इसी कारण ये निर्देश जारी करना जरूर हो गया। आरबीआई ने इस बैंक का किया लाइसेंस रद्द बता दें कि बीते महीने केंद्रीय रिजर्व बैंक ने महाराष्ट्र के फलटन स्थित 'द यशवंत सहकारी बैंक' के पास पर्याप्त पूंजी और आय की संभावनाएं नहीं होने के आधार पर लाइसेंस रद्द कर दिया है। यह सहकारी बैंक, बैंकिंग विनियमन अधिनियम के कुछ प्रावधानों का पालन करने में विफल रहा है और मौजूदा वित्तीय स्थिति में वह अपने जमाकर्ताओं को पूरी राशि लौटाने में सक्षम नहीं है। इसके साथ ही आरबीआई ने महाराष्ट्र के सहकारिता आयुक्त एवं पंजीयक से बैंक को बंद करने और परिसमापक नियुक्त करने का अनुरोध किया है। आरबीआई ने कहा कि परिसमापन पर बैंक के जमाकर्ताओं को जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम (डीआईसीजीसी) के तहत अधिकतम पांच लाख रुपये तक की बीमा राशि मिलेगी। आरबीआई के अनुसार, बैंक के 99.02 प्रतिशत जमाकर्ताओं को उनकी पूरी जमा राशि मिलने की पात्रता है।

पॉलीमर नोटों पर चल रहा विचार, लेकिन अभी अंतिम फैसला नहीं; RBI गवर्नर ने साफ की स्थिति

मुंबई  भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए गवर्नर संजय मल्होत्रा ने देश की मुद्रा को लेकर एक बहुत बड़ी जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि आरबीआई भारत में प्लास्टिक यानी पॉलीमर के नोट चलाने के विचार पर काम कर रहा है. हालांकि, गवर्नर ने यह साफ किया कि यह योजना अभी बिल्कुल शुरुआती दौर में है और इस पर कोई आखिरी फैसला नहीं लिया गया है. बैंक अभी इसके हर फायदे और नुकसान की अच्छे से जांच कर रहा है।  पहले क्यों नहीं चल पाए थे प्लास्टिक के नोट? भारत में प्लास्टिक के नोट चलाने की कोशिश पहले भी हो चुकी है. साल 2014 के आसपास सरकार ने देश के पांच शहरों—जयपुर, शिमला, भुवनेश्वर, मैसूर और कोच्चि में 10 रुपये के प्लास्टिक नोटों का एक छोटा सा टेस्ट (ट्रायल) किया था. लेकिन उस समय यह तरीका सफल नहीं हो पाया. इसकी सबसे बड़ी वजह यह थी कि देश के ATM और बैंकों की नोट गिनने वाली मशीनें केवल कागजी नोटों के हिसाब से बनी थीं. प्लास्टिक के नोटों की वजह से मशीनें बार-बार जाम होने लगीं. साथ ही, भारत की तेज गर्मी में इन नोटों के आपस में चिपकने और सिकुड़ने का डर भी था. इसी वजह से तब इस काम को रोक दिया गया था. अब आरबीआई इन सभी पुरानी कमियों को दूर करने की तैयारी कर रहा है।  क्या होते हैं पॉलीमर नोट और इनके क्या फायदे हैं? प्लास्टिक या पॉलीमर नोट किसी कड़क प्लास्टिक कार्ड (जैसे एटीएम कार्ड) की तरह नहीं होते. ये एक खास तरह के बहुत पतले और लचीले प्लास्टिक (BOPP) से बनते हैं. इन्हें आप आम कागजी नोटों की तरह ही आसानी से मोड़कर जेब या पर्स में रख सकते हैं. इन नोटों के कई बड़े फायदे हैं:     ज्यादा मजबूती: ये नोट पानी या पसीने से गलते नहीं हैं और आसानी से फटते भी नहीं हैं. इसलिए ये बहुत लंबे समय तक चलते हैं।      गंदगी का असर नहीं: इन नोटों पर धूल, मिट्टी या पानी का असर नहीं होता, जिससे ये गंदे और काले नहीं पड़ते।      नकली नोटों पर रोक: प्लास्टिक के नोटों पर ऐसे सुरक्षा घेरे (सिक्योरिटी फीचर्स) लगाए जा सकते हैं, जिनकी नकल करना नामुमकिन होता है. इससे देश में नकली नोटों का धंधा पूरी तरह बंद हो जाएगा।      पैसों की बचत: हालांकि इन्हें छापने का शुरुआती खर्च ज्यादा होता है, लेकिन लंबे समय तक चलने के कारण बार-बार नए नोट छापने का सरकारी खर्च बच जाता है।  दुनिया के कई देशों में है यह व्यवस्था दुनिया में सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया ने साल 1988 में प्लास्टिक के नोटों का इस्तेमाल शुरू किया था. आज के समय में ब्रिटेन (यूके), कनाडा, सिंगापुर, मलेशिया और थाईलैंड समेत दुनिया के 60 से ज्यादा देशों में प्लास्टिक के नोट बहुत कामयाबी से चल रहे हैं. आरबीआई गवर्नर ने लोगों को भरोसा दिलाया है कि इस नए बदलाव के दौरान देश में पैसों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। 

विदेशी निवेश नियमों में ढील का असर: डॉलर के मुकाबले रुपया उछला, बाजार में बढ़ी हलचल

नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी निवेश के नियमों को आसान बनाने के बाद आज भारतीय रुपये में जबरदस्त मजबूती देखने को मिली. शुक्रवार को अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 50 पैसे मजबूत होकर 95.24 के स्तर पर पहुंच गया. इससे पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 95.74 के स्तर पर बंद हुआ था।  निवेश नियमों में ढील से बढ़ा भरोसा रिजर्व बैंक ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के लिए सरकारी बॉन्ड में निवेश करने के नियमों को काफी सरल कर दिया है. इसके साथ ही, अनिवासी भारतीयों (NRIs) और विदेशी भारतीय नागरिकों (OCIs) के लिए भी भारतीय शेयर बाजार (इक्विटी) में निवेश की सीमा को बढ़ा दिया गया है।  बाजार के जानकारों का मानना है कि आरबीआई के इन कदमों से देश में विदेशी डॉलर का प्रवाह बढ़ेगा. 'फुली एक्सेसिबल रूट' (FAR) का दायरा बढ़ने और विदेशी मुद्रा स्वैप जैसी खास सुविधाओं से रुपये को बड़ी ताकत मिली है. आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भरोसा जताया कि भारत का 682 अरब डॉलर का विशाल विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी वैश्विक संकट से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम है।  ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी मौद्रिक नीति बैठक में आरबीआई ने ब्याज दरों (रेपो रेट) को 5.25 प्रतिशत पर ही बरकरार रखा है. केंद्रीय बैंक ने बाजार को लेकर अपना रुख 'न्यूट्रल' यानी तटस्थ रखा है, जिससे जरूरत पड़ने पर आगे कदम उठाए जा सकें।  महंगाई और विकास दर के नए अनुमान कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनाव को देखते हुए रिजर्व बैंक ने अपने आर्थिक अनुमानों में कुछ बड़े बदलाव किए हैं:     विकास दर (GDP): चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया गया है।      महंगाई (CPI): खुदरा महंगाई दर का अनुमान 4.6% से बढ़ाकर 5.1% किया गया है।  वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) आज करीब 1 फीसदी की तेजी के साथ 95.37 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है. तेल की यह बढ़ती कीमत भारत के आयात बिल के लिए एक चुनौती बनी हुई है, लेकिन आरबीआई के नए सुधारों ने फिलहाल बाजार के डर को दूर कर रुपये को बूम दे दिया है। 

लोनधारकों को राहत या इंतजार? RBI ने रेपो रेट को रखा स्थिर

नई दिल्ली केंद्रीय बैंक RBI ने 3 से 5 जून तक चली मॉनिटरी पॉलिसी मीटिंग के बाद रेपो रेट 5.25 पर बरकरार रखने का फैसला लिया है. गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने शुक्रवार सुबह 10 बजे MPC मीटिंग में लिए गए फैसलों के बारे में जानकारी दी. वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद रेपो रेट नहीं बढ़ाने के फैसले को जानकार, एक राहत की तरह मान रहे हैं. इस फैसले से स्‍पष्‍ट है कि अगर आपने रेपो रेट से लिंक्‍ड होम लोन, कार लोन या अन्‍य तरह का बैंक लोन लिया है, तो आपके लोन की EMI नहीं बढ़ेगी।  कैसी रहेगी देश की GDP ग्रोथ?  केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान मामूली रूप से कम कर दिया है. गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने बताया कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए रियल GDP ग्रोथ अनुमान  6.9 से कम कर 6.6 फीसदी कर दिया है।      जून 2026 तिमाही: 6.6%     सितंबर 2026 तिमाही: 6.3%     दिसंबर 2026 तिमाही: 6.5%     मार्च 2027 तिमाही: 6.8%   इस साल अनुमान से ज्‍यादा रह सकती है महंगाई महंगाई दर पर RBI का अनुमान है कि इस साल देश में महंगाई थोड़ी ज्‍यादा रह सकती है. इसमें तेल और गैस की बढ़ी कीमतों का बड़ा रोल रहेगा. मार्च में महंगाई दर 3.4 फीसदी और अप्रैल में 3.5 फीसदी रही थी, जबकि इससे पहले फरवरी 2026 में महंगाई दर 3.2 रही थी.  ये आंकड़े केंद्रीय बैंक के 4% के लक्ष्‍य से कम थे. हालांकि आने वाले दिनों में महंगाई बढ़ सकती है. RBI के अनुमान के अनुसार वित्त वर्ष 2027 में महंगाई दर 5.1 फीसदी रह सकती है।      जून 2026 तिमाही: 4.2%     सितंबर 2026 तिमाही: 5.1%     दिसंबर 2026 तिमाही: 5.9%     मार्च 2027 तिमाही: 5.4% हर दो महीने में होती है RBI की मीटिंग मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी में 6 सदस्य होते हैं। इनमें से 3 RBI के होते हैं, जबकि बाकी केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। RBI की मीटिंग हर दो महीने में होती है। वित्त वर्ष 2026-27 में मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की कुल 6 बैठकें होंगी। पहली बैठक 6-8 अप्रैल 2026 को हुई थी। RBI MPC मीटिंग के अन्य बड़े फैसले     ग्रोथ का अनुमान घटाया: वेस्ट एशिया (मध्य पूर्व) में चल रहे तनाव और सप्लाई चेन में रुकावटों के चलते RBI ने आर्थिक विकास दर यानी GDP ग्रोथ के अनुमान को घटा दिया है। अब चालू वित्त वर्ष के लिए GDP ग्रोथ आउटलुक को 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया गया है।     स्टांस 'न्यूट्रल' रखा: महंगाई के बढ़ते जोखिमों के बावजूद मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने अपनी नीति का रुख 'न्यूट्रल' (तटस्थ) बनाए रखने का फैसला किया है। कमेटी स्थिति पर नजर रखते हुए डेटा के आधार पर आगे कदम उठाएगी।     महंगाई को लेकर चिंता: गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि हालांकि रिटेल महंगाई अभी टारगेट के दायरे में है, लेकिन वैश्विक तनाव के कारण फ्यूल (ईंधन) और एनर्जी की बढ़ती कीमतें आगे चलकर खुदरा बाजार और आम जनता की जेब पर दबाव डाल सकती हैं।     कमजोर मानसून का डर: पश्चिम-दक्षिण मानसून में कमी (कम बारिश) के अनुमान को लेकर भी चिंता जताई गई है। इसका सीधा असर खेती-किसानी की पैदावार और ग्रामीण इलाकों में मांग पर पड़ सकता है। हालांकि, सरकार की फसल विविधीकरण यानी डायवर्सिफिकेशन जैसी योजनाएं इसके असर को कम करने में मदद करेंगी।     सर्विस सेक्टर मजबूत: अच्छी बात यह है कि घरेलू आर्थिक गतिविधियां अब भी मजबूत बनी हुई हैं। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर का प्रदर्शन बेहतर है और GST रेशनलाइजेशन व स्थिर रोजगार के चलते शहरी क्षेत्रों में कंजम्पशन (खपत) को सहारा मिल रहा है। रेपो रेट क्या है, इससे लोन कैसे सस्ता होता है? RBI जिस ब्याज दर पर बैंकों को लोन देता है उसे रेपो रेट कहते हैं। रेपो रेट कम होने से बैंक को कम ब्याज पर लोन मिलेगा। बैंकों को लोन सस्ता मिलता है, तो वो अक्सर इसका फायदा ग्राहकों को पास कर देते हैं यानी बैंक भी अपनी ब्याज दरें घटा देते हैं। रिजर्व बैंक रेपो रेट बढ़ाता और घटाता क्यों है? किसी भी सेंट्रल बैंक के पास पॉलिसी रेट के रूप में महंगाई से लड़ने का एक शक्तिशाली टूल है। जब महंगाई बहुत ज्यादा होती है तो सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट बढ़ाकर इकोनॉमी में मनी फ्लो को कम करने की कोशिश करता है। पॉलिसी रेट ज्यादा होगी तो बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज महंगा होगा। बदले में बैंक अपने ग्राहकों के लिए लोन महंगा कर देते हैं। इससे इकोनॉमी में मनी फ्लो कम होता है। मनी फ्लो कम होता है तो डिमांड में कमी आती है और महंगाई घट जाती है। इसी तरह जब इकोनॉमी बुरे दौर से गुजरती है तो रिकवरी के लिए मनी फ्लो बढ़ाने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट कम कर देता है। इससे बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज सस्ता हो जाता है और ग्राहकों को भी सस्ती दर पर लोन मिलता है।

महंगाई और कच्चे तेल के दबाव के बीच RBI क्या बदलेगा रेपो रेट? जानें EMI पर असर

नई दिल्ली  भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय बैठक 3 जून से शुरू होने जा रही है. बाजार विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं को देखते हुए केंद्रीय बैंक इस बार भी अपनी प्रमुख नीतिगत दर (रेपो रेट) को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रख सकता है. आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय समिति 5 जून को अपने फैसलों की घोषणा करेगी।  वैश्विक संकट और महंगाई का दबाव दुनिया भर में भू-राजनीतिक तनाव, विशेष रूप से पश्चिम एशिया के संकट ने कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बुरी तरह प्रभावित किया है. इस कारण भारतीय रुपये पर भी दबाव बढ़ा है. हालांकि मौजूदा तिमाही में भारत की खुदरा महंगाई दर 4 से 4.1 प्रतिशत के दायरे में रहने का अनुमान है, लेकिन स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की हालिया आर्थिक शोध रिपोर्ट के अनुसार, अगली तीन तिमाहियों में यह फिर से 5 प्रतिशत के आंकड़े को पार कर सकती है. यही कारण है कि आरबीआई कोई भी जल्दबाजी भरा कदम उठाने से बच रहा है।  आर्थिक विकास दर (जीडीपी) के अनुमान एसबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) की चौथी तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जिससे पूरे वित्त वर्ष की विकास दर 7.5 प्रतिशत के मजबूत स्तर पर पहुंच सकती है. हालांकि, बाहरी वैश्विक चुनौतियों को देखते हुए अगले वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए विकास दर धीमी होकर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है. यदि वैश्विक हालात और बिगड़ते हैं, तो आरबीआई को अपने विकास अनुमानों में कटौती और महंगाई के अनुमानों में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।  वैकल्पिक उपायों पर जोर विशेषज्ञों का कहना है कि दरों को स्थिर रखते हुए भी आरबीआई बाजार को नियंत्रित करने के लिए अन्य नीतिगत उपकरणों का उपयोग कर सकता है. उदाहरण के लिए, बाजार में नकदी और बॉन्ड यील्ड को संतुलित करने के लिए केंद्रीय बैंक 'ऑपरेशन ट्विस्ट' जैसे कदमों का सहारा ले सकता है. इसके तहत लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड खरीदे जाते हैं और कम अवधि के बॉन्ड बेचे जाते हैं, जिससे मुख्य ब्याज दरों को बिना बदले ही वित्तीय बाजार को स्थिरता दी जा सकती है. कुल मिलाकर, आगामी नीति पूरी तरह से आंकड़ों और वैश्विक परिस्थितियों पर आधारित होगी।