samacharsecretary.com

छोटे कारोबारियों के लिए खुशखबरी, RBI ने बढ़ाई कोलैटरल-फ्री लोन की सीमा

मुंबई देश में अब सूक्ष्म और लघु उद्यम (एमएसई) को 20 लाख रुपए तक का कोलैटरल फ्री लोन (बिना कुछ गिरवी रखकर लोन लेना) मिलेगा। यह जानकारी आरबीआई की ओर से सोमवार को जारी सर्कुलर में दी गई। आरबीआई द्वारा जारी सर्कुलर में कहा गया कि भारतीय रिजर्व बैंक ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र को लोन देने संबंधी (संशोधन) निर्देश, 2026 जारी किए हैं। ये संशोधन निर्देश सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र को लोन देने संबंधी मुख्य दिशा-निर्देश (दिनांक 23 जुलाई, 2025 तक अपडेटेड) के कुछ प्रावधानों में बदलाव करते हैं। सर्कुलर में आगे कहा गया कि इस संशोधन के बाद सूक्ष्म और लघु उद्यम (एमएसई) बिना कुछ गिरवी रखकर 20 लाख रुपए तक का लोन ले सकते हैं। इसके अलावा कुछ नियामक बदलावों के अनुरूप कुछ संशोधनों को अलग से अधिसूचित किया जाएगा। केंद्रीय बैंक ने बताया कि यह संशोधित निर्देश एक अप्रैल 2026 से लागू होंगे। आरबीआई ने आगे बताया कि इन निर्देशों का उद्देश्य सीमित परिसंपत्तियों वाले सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए अंतिम छोर तक लोन वितरण को मजबूत करना है, जिससे वह आसानी से लोन ले पाएं। सरकार लगातार एमएसएमई उद्योगों को मदद करने के लिए कदम उठा रही है। बीते महीने सरकार ने डाक चैनल के माध्यम से होने वाले निर्यात को निर्यात लाभों से जोड़ दिया है। इससे उन छोटे उद्योगों को फायदा होगा, जो कि निर्यात करने के लिए डाक चैनलों का इस्तेमाल करते हैं। संचार मंत्रालय ने बयान में कहा, "डाक विभाग (डीओपी) ने केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) द्वारा जारी अधिसूचनाओं का पालन करते हुए डाक चैनल के माध्यम से किए गए निर्यातों के लिए शुल्क वापसी, निर्यातित उत्पादों पर शुल्क और करों में छूट (आरओडीटीईपी) तथा राज्य और केंद्रीय करों एवं शुल्कों पर छूट (आरओएससीटीएल) जैसे निर्यात लाभों को 15 जनवरी, 2025 से लागू कर दिया है।"

RBI MPC: रेपो रेट स्थिर, GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया, जानें क्या हैं बड़े फैसले

 नई दिल्‍ली  भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है. 5.25 फीसदी पर रेपो रेट को अनचेंज रखा है, जिसका मतलब है कि आपके लोन की ईएमआई पर कोई असर नहीं होगा. रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने कहा कि मॉनिटरी पॉलिसी की बैठक में रेपो रेट को नहीं बदलने का फैसला किया है.  एमपीसी बैठक के फैसले पर अपडेट देते हुए भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ने कहा कि जहां ग्‍लोबल लेवल पर अनिश्चितता फैली हुई है, वहीं भारत में महंगाई पूरी तरह से कंट्रोल है. महंगाई दर आरबीआई के सीमा से नीचे बना हुआ है.  महंगाई दर 4 फीसदी के आसपास बना हुआ है, जिसका मतलब है कि हमारी इंडस्‍ट्री और देश पर महंगाई का ज्‍यादा भार नहीं है.  जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने कहा कि अगले दो दिनों में भारत को जीडीपी और महंगाई दोनों के लिए एक नया बेस ईयर मिलने वाला है. उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था लचीली बनी हुई है और घरेलू महंगाई और विकास के महंगाई सकारात्मक हैं. केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपने ग्रोथ अनुमान को 7.3 प्रतिशत से संशोधित करके 7.4 प्रतिशत कर दिया है. उन्होंने कहा कि बजट 2026 में घोषित कई उपाय विकास के लिए अनुकूल होंगे, साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि सेवाओं के निर्यात में मजबूती बनी रहेगी.  भारत-अमेरिका डील से निर्यात को मजबूती उन्होंने कहा कि बजट 2026 में घोषित कई उपाय विकास के लिए अनुकूल होंगे और सेवाओं के निर्यात में मजबूती बनी रहेगी. इसके अलावा, उन्होंने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता और संभावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता  का भी जिक्र किया और कहा कि इन डील्‍स से भारत के निर्यात को मजबूती मिलेगी.  रेपो रेट में बदलाव नहीं होने के बाद शेयर बाजार में गिरावट देखी गई. सेंसेक्‍स 340 अंक टूटकर 83000 के नीचे आ गया, जबकि निफ्टी 150 अंक गिरकर 25500 के नीचे कारोबार कर रही थी. बैंक निफ्टी में भी करीब 300 अंकों की गिरावट देखने को मिली. आज ऑटो, बैंकिंग और रियल एस्टेट शेयरों में गिरावट देखी गई. बीएसई ऑटो इंडेक्स 542 अंक गिरकर 60,803 पर आ गया, जबकि बीएसई बैंकएक्स 158 अंक गिरकर 67,378 पर पहुंच गया. इसी दिन बीएसई रियल्टी इंडेक्स भी 49 अंक गिरकर 6,343 पर आ गया. 

रुपये की गिरावट रोकने के लिए RBI का बड़ा फैसला, 9.7 अरब डॉलर की बिक्री

नई दिल्ली डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में जारी कमजोरी को थामने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी मुद्रा बाजार में आक्रामक हस्तक्षेप किया है. केंद्रीय बैंक ने नवंबर महीने के दौरान कुल 9.7 अरब डॉलर की शुद्ध बिक्री की. आरबीआई के मासिक बुलेटिन के अनुसार, नवंबर में उसने 14.35 अरब डॉलर की खरीद की, जबकि 24.06 अरब डॉलर की बिक्री की गई. इससे पहले अक्टूबर में भी रिज़र्व बैंक ने बाजार में 11.88 अरब डॉलर बेचे थे. नवंबर के दौरान रुपये पर दबाव लगातार बना रहा. 21 नवंबर को रुपया डॉलर के मुकाबले 89.49 के स्तर तक फिसल गया था, जो उस समय का ऐतिहासिक निचला स्तर माना गया. इसकी प्रमुख वजह अमेरिका से जुड़े व्यापारिक मोर्चे पर अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी रही. पूरे महीने में रुपये में करीब 0.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. हालात और बिगड़ते हुए बुधवार को रुपया 91.7425 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया. यह पिछले दो महीनों में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट रही. वैश्विक बाजारों में “रिस्क-ऑफ” माहौल, यानी निवेशकों का जोखिम से बचना, और घरेलू शेयर बाजार से पूंजी की निरंतर निकासी ने दक्षिण एशियाई मुद्राओं, खासकर रुपये, पर अतिरिक्त दबाव डाला. रुपये पर दबाव के कारण विशेषज्ञों के अनुसार, मेटल इंपोर्टर्स की ओर से डॉलर की बढ़ती मांग रुपये की कमजोरी का एक बड़ा कारण है. इसके अलावा, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) द्वारा भारतीय बाजार से पूंजी निकालना भी मुद्रा पर नकारात्मक असर डाल रहा है. एक अन्य अहम वजह अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर बढ़ती यील्ड है. जैसे-जैसे अमेरिकी बॉन्ड ज्यादा रिटर्न देने लगते हैं, वैश्विक निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालकर अमेरिका जैसे सुरक्षित और अधिक यील्ड वाले विकल्पों की ओर रुख करते हैं. इससे डॉलर मजबूत होता है और रुपये जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राएं कमजोर पड़ती हैं. आम लोगों पर असर रुपये में गिरावट का सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ता है. कमजोर रुपया आयात को महंगा बनाता है, जिससे ईंधन, खाद्य तेल और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतें बढ़ती हैं. इसका नतीजा महंगाई के रूप में सामने आता है. इसके अलावा, विदेश में पढ़ाई करने की लागत भी बढ़ जाती है, क्योंकि ट्यूशन फीस और रहने का खर्च डॉलर में चुकाना पड़ता है. चूंकि कच्चा तेल और कई अन्य जरूरी वस्तुएं अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर में खरीदी जाती हैं, इसलिए रुपये की कमजोरी देश की आर्थिक चुनौतियों को और गहरा कर सकती है.

कैश संकट पर RBI का दांव मजबूत, 50,000 करोड़ के बॉन्ड खरीदकर बढ़ाई लिक्विडिटी

मुंबई भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को देश के बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए 50,000 करोड़ रुपए के बॉन्ड खरीदे। इसके जरिए केंद्रीय बैंक का उद्देश्य देश की अर्थव्यवस्था की रफ्तार को बढ़ाना है। यह खरीदारी आरबीआई द्वारा पिछले सप्ताह की गई मौद्रिक नीति की घोषणा का हिस्सा है, जिसके तहत सरकारी बॉन्ड की खरीद के माध्यम से बाजार में 1 लाख करोड़ रुपए और विदेशी मुद्रा अदला-बदली सुविधा के माध्यम से करीब 5 अरब डॉलर के बराबर की राशि बैंकिंग सिस्टम में डाली जाएगी। केंद्रीय बैंक रुपए को अधिक गिरने से रोकने के लिए बाजार में अमेरिकी डॉलर बेच रहा है, जिसके कारण बैंकिंग प्रणाली से काफी नकदी बाहर निकल गई है और इससे बाजार में ब्याज दरों में वृद्धि होने की संभावना भी बढ़ जाती है। मौद्रिक नीति के ऐलान के समय भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने कहा था कि आरबीआई शुद्ध मांग और समय देनदारियों (एनडीटीएल) के लगभग 1 प्रतिशत के अधिशेष स्तर को स्पष्ट रूप से लक्षित किए बिना बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त तरलता सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा, "मौद्रिक संचरण हो रहा है और हम इसे समर्थन देने के लिए पर्याप्त तरलता प्रदान करेंगे।" मल्होत्रा ​​ने कहा कि बैंकिंग सिस्टम में वर्तमान लिक्विडिटी कभी-कभी एनडीटीएल के 1 प्रतिशत से अधिक हो जाती है, जो 0.6 प्रतिशत और 1 प्रतिशत के बीच रहती है, और कभी-कभी इससे भी अधिक हो जाती है। उन्होंने आगे कहा, "सटीक संख्या, चाहे 0.5, 0.6 या 1 प्रतिशत हो, मायने नहीं रखती। महत्वपूर्ण यह है कि बैंकों के पास सुचारू रूप से कार्य करने के लिए पर्याप्त भंडार हो।" केंद्रीय बैंक ने ओपन मार्केट ऑपरेशंस (ओएमओ) और फॉरेक्स बाय-सेल स्वैप के माध्यम से लिक्विडिटी उपायों की घोषणा की है। ओएमओ के तहत 1 लाख करोड़ रुपए मूल्य की सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद दो किस्तों में की जाएगी, प्रत्येक किस्त 50,000 करोड़ रुपए की होगी, जो 11 दिसंबर और 18 दिसंबर के बीच होगी। इसके अतिरिक्त, 16 दिसंबर को तीन साल के लिए 5 अरब डॉलर का यूएसडी/आईएनआर बाय-सेल स्वैप किया जाएगा। 

नासिक जिला महिला विकास सहकारी बैंक पर RBI का बैन, खाताधारकों के लिए मुश्किलें बढ़ी

नई दिल्ली रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने महाराष्ट्र के एक सहकारी बैंक के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। नासिक जिला महिला विकास सहकारी बैंक लिमिटेड को 9 दिसंबर से कारोबार बंद करने का आदेश जारी किया गया है। यह कदम बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 के अलग-अलग प्रावधानों के तहत 19 की गई शक्तियों के तहत केंद्रीय बैंक ने उठाया।अब बैंक को आरबीआई के अप्रूवल के बिना लोन या एडवांस ग्रांट या रिन्यू करने से रोकने गया है। आदेश के तहत बैंक कोई इन्वेस्टमेंट भी नहीं कर सकता। न ही नई जमा राशियों को स्वीकार कर सकता है। इसके अलावा किसी भी प्रॉपर्टी या एसेट बचने, ट्रांसफर और डिस्पोज करने से भी रोका गया है। रिजर्व बैंक ने यह स्पष्ट किया है कि इस बैंक का लाइसेंस  कैंसिल नहीं किया गया है।  बैंक अपनी फाइनेंशियल स्थिति में सुधार होने तक निर्देशों का पालन करेगा। तब तक बैंक पर पाबंदियां लागू रहेंगी। क्या है वजह? (RBI Action) आरबीआई ने यह कदम लिक्विडिटी की स्थिति को देखते हुए उठाया है। सुपरवाइजर चिताओं और बैंक के डिपॉजिटरों के हितों की रक्षा के लिए जरूरी यह फैसला जरूरी था। केंद्रीय बैंक ने बैंक को 8 दिसंबर को जारी आदेश की एक कॉपी अपने वेबसाइट पर दिखाने का निर्देश भी दिया। ताकि कस्टमर और हितधारकों को इस बात की जानकारी मिल सके। बैंक के स्टेटस की समीक्षा नियमित तौर पर आरबीआई करता रहेगा। जरूरत पड़ने पर निर्देशों में बदलाव भी हो सकते हैं। यह आदेश 6 महीने तक लागू रहने वाला है। अगला फैसला रिव्यू के आधार पर लिया जाएगा। ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा? बैंक पर प्रतिबंध लगने के कारण कई ग्राहकों को भी परेशानी हो सकती है। आरबीआई द्वारा जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक इस बैंक के ग्राहकों को सेविंग अकाउंट या करंट अकाउंट या किसी भी खाते में जमा राशि में से केवल 35,000 रुपये निकालने की अनुमति होगी। हालांकि बैंक कुछ जरूरी चीजों  जैसे कि कर्मचारियों की सैलरी, किराया और बिजली के बिल इत्यादि पर खर्च कर सकता है। डीआईसीजीसी के के नियमों के तहत प्रत्येक कस्टमर को 5 लाख रुपये तक की जमा राशि पर जमा बीमा क्लेम करने की सुविधा मिलती है। कोई भी खाताधारक अपनी मर्जी और सही वेरिफिकेशन के बाद इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।  

लोन लेने वालों के लिए बड़ी खुशखबरी, इन 5 बैंकों ने इंटरेस्ट रेट कम किया

नई दिल्ली भारतीय रिज़र्व बैंक की चौथी रेपो कटौती के बाद देशभर में लोन मार्केट तेजी से बदल गया है. 25 बेसिस पॉइंट की ताज़ा कमी ने बैंकों को ब्याज दरें घटाने पर मजबूर किया है, जिससे ग्राहकों की होम, कार और पर्सनल लोन EMI में सीधी राहत मिल रही है. भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने ब्याज दरों के मोर्चे पर लगातार अपनी आक्रामक नीति जारी रखी है. बीते सप्ताह केंद्रीय बैंक द्वारा रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती किए जाने के बाद, देश में ऋण लेने का माहौल बदल गया है. इस कदम ने बैंकों को अपनी दरों को समायोजित करने के लिए प्रेरित किया है, जिससे आम ग्राहकों के लिए होम, कार और पर्सनल लोन की लागत कम हो गई है. चौथी कटौती के बाद रेपो रेट कितना हुआ? RBI का यह फैसला साल 2025 में रेपो रेट में चौथी बार की गई कटौती है. फरवरी में शुरू हुई इस कटौती की श्रृंखला ने नीतिगत दर को अब 5.25% के स्तर पर ला दिया है. कुल मिलाकर, इस वर्ष अब तक 1.25% की संचयी कमी दर्ज की गई है. RBI ने मुद्रास्फीति को सफलतापूर्वक नियंत्रित करने के बाद यह कदम उठाया है, जिससे विकास को बढ़ावा देने का रास्ता साफ हुआ है. किन 5 बैंकों ने सस्ता किया लोन?    बैंक का नाम कटौती नई दरें लागू मुख्य विवरण बैंक ऑफ इंडिया (BOI) RBLR में 25 bps की कटौती 5 दिसंबर से RBLR 8.35% से घटकर 8.10% हुई. इंडियन बैंक (Indian Bank) RBLR में 25 bps; MCLR में 5 bps की कटौती 6 दिसंबर से RBLR 8.20% से घटकर 7.95% हुई. बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) रेपो-बेस्ड लेंडिंग रेट में 25 bps की कटौती 6 दिसंबर से दर 8.15% से घटकर 7.90% हुई. करूर वैश्य बैंक (Karur Vysya Bank) MCLR में 10 bps की कटौती 7 दिसंबर से MCLR 9.55% से घटकर 9.45% हुई. बैंक ऑफ महाराष्ट्र (BoM) रेपो-लिंक्ड रिटेल लोन में 25 bps की कटौती 6 दिसंबर से होम लोन 7.10% से और कार लोन 7.45%से शुरू. यह ब्याज दर कटौती उन सभी ग्राहकों के लिए एक सकारात्मक संकेत है जिनके ऋण रेपो रेट से जुड़े हुए हैं, जिससे उनकी मंथली किस्तें (EMIs) कम होंगी और लोन लेना अब अधिक आकर्षक हो जाएगा.

खाता धारकों को राहत: Zero Balance Account पर RBI ने जोड़ीं कई मुफ्त सुविधाएं, बदले नियम

जम्मू-कश्मीर  भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने आम लोगों की बैंकिंग को और आसान बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। कई लोग ऐसे होते हैं जो बैंक खाता तो खोलना चाहते हैं, लेकिन उनके पास ज्यादा पैसे नहीं होते या वे मिनिमम बैलेंस जैसी शर्तें पूरी नहीं कर पाते। ऐसे लोगों के लिए BSBD यानी जीरो बैलेंस खाते बनाए गए थे, लेकिन समय के साथ बैंक इन खातों को सीमित सुविधाओं वाला मानने लगे थे, जिससे ग्राहकों को कई तरह की परेशानियाँ झेलनी पड़ती थीं।  अब इन खातों को साधारण सेविंग्स अकाउंट से कमतर नहीं माना जाएगा। यानी, बैंक को BSBD खाताधारकों को भी वही सुविधाएं देनी होंगी जो वे सामान्य सेविंग्स अकाउंट ग्राहकों को देते हैं। अगर कोई ग्राहक चाहे, तो वह लिखित में या ऑनलाइन रिक्वेस्ट देकर अपने सेविंग्स अकाउंट को BSBD खाते में बदलवा सकता है और बैंक को यह काम 7 दिन के भीतर पूरा करना होगा। ये नए नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे। BSBD खातों में अब क्या-क्या सुविधा मिलेगी?  मुफ्त इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और पासबुक/मासिक स्टेटमेंट साल में कम-से-कम 25 पन्नों की चेकबुक महीने में 4 बार नकद निकासी फ्री UPI, IMPS, NEFT, RTGS या कार्ड से पेमेंट — इन पर कोई चार्ज नहीं और इन्हें 4 फ्री निकासी में नहीं गिना जाएगा RBI का यह कदम डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने, ग्राहकों को ज्यादा अधिकार देने और बैंकिंग को सभी के लिए सुलभ बनाने की दिशा में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है।

रेपो रेट में कमी से ईएमआई पर बचत, लाखों लोगों के लिए राहत की खबर

नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee) ने रेपो रेट में कटौती कर दी है। यह 0.25 प्रतिशत की है, जिसके बाद रेपो रेट घटकर 5.25 प्रतिशत रह गई है। मजबूत आर्थिक वृद्धि और महंगाई में नरमी के बीच RBI ने नीतिगत दर में यह कटौती की है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने समिति के फैसलों की जानकारी दी। इंडस्ट्रियल क्रेडिट ग्रोथ भी मजबूत- संजय मल्होत्रा RBI गवर्नर ने कहा है कि इंडस्ट्रियल क्रेडिट ग्रोथ भी मजबूत हुई है। बड़ी इंडस्ट्रीज़ में भी क्रेडिट ग्रोथ दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि पहले के रेट कट का असर सभी सेक्टरों में बड़े पैमाने पर हुआ है। साल 2025 में रेपो रेट में अब तक कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती की जा चुकी है। इससे पहले, केंद्रीय बैंक ने इस साल फरवरी से जून तक रेपो रेट में कुल 1 प्रतिशत की कटौती की थी। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI जिस रेट पर बैंकों को लोन देता है उसे रेपो रेट कहते हैं। जब RBI रेपो रेट घटाता है, तो बैंकों को सस्ता कर्ज मिलता है और वो इस फायदे को ग्राहकों तक पहुंचाते हैं। यानी, आने वाले दिनों में होम और ऑटो जैसे लोन 0.25% तक सस्ते हो जाएंगे। ताजा कटौती के बाद 20 साल के ₹20 लाख के लोन पर ईएमआई 310 रुपए तक घट जाएगी। इसी तरह ₹30 लाख के लोन पर ईएमआई 465 रुपए तक घट जाएगी। नए और मौजूदा ग्राहकों दोनों को इसका फायदा मिलेगा। रेट कट के बाद शेयर बाजार में तेजी RBI की ओर से रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती किए जाने के बाद शेयर बाजार में तेजी है। सुबह 11 बजे के ​करीब BSE 311.74 अंकों की बढ़त के साथ 85,577.06 पर है। सुबह यह गिरावट में खुला था। एनएसई भी 90.70 अंकों की बढ़त के साथ 26,124.45 पर है। NSE के सेक्टोरल इंडेक्सेज में गिरावट और तेजी का मिलाजुला रुख है। 1 लाख करोड़ रुपये के बॉन्ड की खरीद-बिक्री करेगा RBI- संजय मल्होत्रा RBI गवर्नर ने कहा कि केंद्रीय बैंक कैश मैनेजमेंट के लिए 1 लाख करोड़ रुपये के बॉन्ड की खरीद-बिक्री करेगा। उन्होंने बैंक, एनबीएफसी से अपनी पॉलिसी और संचालन के केंद्र में ग्राहकों को रखने का भी निर्देश दिया। साथ ही कहा कि स्थिरता सुनिश्चित करते हुए अर्थव्यवस्था की उत्पादक जरूरतों को हम सक्रिय तरीके से पूरा करना जारी रखेंगे। रेपो रेट के घटने से हाउसिंग डिमांड बढ़ेगी रेपो रेट घटने के बाद बैंक भी हाउसिंग और ऑटो जैसे लोन्स पर ब्याज दरें कम करते हैं। ब्याज दरें कम होने पर हाउसिंग डिमांड बढ़ेगी। ज्यादा लोग रियल एस्टेट में निवेश कर सकेंगे। इससे रियल एस्टेट सेक्टर को बूस्ट मिलेगा। RBI ने महंगाई अनुमान घटाया, GDP अनुमान बरकरार रखा इस साल 4 बार घटी रेपो रेट, 1.25% की कटौती हुई RBI ने फरवरी में हुई मीटिंग में ब्याज दरों को 6.5% से घटाकर 6.25% कर दिया था। मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की ओर से ये कटौती करीब 5 साल बाद की गई थी। दूसरी बार अप्रैल में हुई मीटिंग में भी ब्याज दर 0.25% घटाई गई। जून में तीसरी बार दरों में 0.50% कटौती हुई। अब एक बार फिर इसमें 0.25% की कटौती की गई है। यानी, मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने तीन बार में ब्याज दरें 1.25% घटाई। रेपो रेट क्या है, इससे लोन कैसे सस्ता होता है? RBI जिस ब्याज दर पर बैंकों को लोन देता है उसे रेपो रेट कहते हैं। रेपो रेट कम होने से बैंक को कम ब्याज पर लोन मिलेगा। बैंकों को लोन सस्ता मिलता है, तो वो अकसर इसका फायदा ग्राहकों को पास कर देते हैं। यानी, बैंक भी अपनी ब्याज दरें घटा देते हैं। रिजर्व बैंक रेपो रेट बढ़ाता और घटाता क्यों है? किसी भी सेंट्रल बैंक के पास पॉलिसी रेट के रूप में महंगाई से लड़ने का एक शक्तिशाली टूल है। जब महंगाई बहुत ज्यादा होती है, तो सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट बढ़ाकर इकोनॉमी में मनी फ्लो को कम करने की कोशिश करता है। पॉलिसी रेट ज्यादा होगी तो बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज महंगा होगा। बदले में बैंक अपने ग्राहकों के लिए लोन महंगा कर देते हैं। इससे इकोनॉमी में मनी फ्लो कम होता है। मनी फ्लो कम होता है तो डिमांड में कमी आती है और महंगाई घट जाती है। इसी तरह जब इकोनॉमी बुरे दौर से गुजरती है तो रिकवरी के लिए मनी फ्लो बढ़ाने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट कम कर देता है। इससे बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज सस्ता हो जाता है और ग्राहकों को भी सस्ती दर पर लोन मिलता है। हर दो महीने में होती है RBI की मीटिंग मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी में 6 सदस्य होते हैं। इनमें से 3 RBI के होते हैं, जबकि बाकी केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। RBI की मीटिंग हर दो महीने में होती है। बीते दिनों रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठकों का शेड्यूल जारी किया था। इस वित्तीय वर्ष में कुल 6 बैठकें होंगी। पहली बैठक 7-9 अप्रैल को हुई थी। अब हर साल ईएमआई पर बचेंगे हजारों रुपये, इन पैसों से बनेगा मोटा फंड रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार 5 दिसंबर को इस साल का एक और बड़ा तोहफा देते हुए लोन की ब्‍याज दरों में बड़ी कटौती कर दी है. गवर्नर ने रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती की तो बैंक से लोन लेने वाले हर आदमी के चेहरे पर मुस्‍कान खिल उठी. उन्‍हें लग गया कि अब उनके मकान खरीदने और वाहन खरीदने के सपने और भी सस्‍ते होने जा रहे हैं. गवर्नर के इस फैसले का एक आदमी पर कितना असर पड़ेगा, इसकी झलक एक छोटे से कैलकुलेशन से ही साफ समझ आ जाती है. दरअसल, रिजर्व बैंक की रेपो रेट यानी नीतिगत ब्‍याज दरों में कटौती होते ही सभी बैंकों को अपने खुदरा लोन की ब्‍याज दरें भी घटानी पड़ेंगी. इन खुदरा कर्ज में होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन सहित हर तरह के छोटे-मोटे लोन आते हैं. रिजर्व बैंक ने इस साल तीसरी बार रेपो रेट में कटौती की है और … Read more

रेपो रेट पर RBI के संभावित फैसले से बाजार में हलचल, निवेशकों की घबराहट से गिरावट तेज़

मुंबई  भारतीय रिजर्व बैंक आज रेपो रेट पर फैसले का ऐलान करेगे. इससे पहले ही शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव दिखाई दे रहा है. शुरुआती कारोबार में सेंसेक्‍स 150 अंक टूट गया, जबकि निफ्ट में 40 अंकों की गिरावट आई थी. लेकनि अभी तेजी के साथ निफ्टी 26000 के ऊपर कारोबार कर रहा है, जबकि सेंसेक्‍स 85283 पर बना हुआ है.  बीएसई सेंसेक्‍स के 14 शेयर गिरावट पर कारोबार कर रहे हैं, जबकि 16 शेयरों में शानदार उछाल आई है. बैंकिंग, डिफेंस और आईटी शेयर  इस तेजी को लीड कर रहे हैं. सबसे ज्‍यादा उछाल जोमैटो, बीईएल और बजाज फाइनेस जैसे शेयरों में देखी जा रही है. रिलायंस, ट्रेंट, भारती एयरटेल और टाटा मोटर्स के श्‍ेयरों में करीब 1 फीसदी की गिरावट है.  ये शेयर सबसे ज्‍यादा टूटे  हिंदुस्‍तान कंस्‍ट्रक्‍शन कंपनी के शेयरों में आज करीब 8 फीसदी की गिरावट आई है, जो अभी 20 रुपये पर कारोबार कर रहा है. इसी तरह, Kaynes Technology India के शेयर 4 फीसदी से ज्‍यादा टूटे हैं. इंडिया सीमेंट और राउट मोबाइल के शेयर में 4 फीसदी की कमी आई है.  इन सेक्‍टर्स में उछाल  सेक्‍टर की बात करें तो मीडिया, मेटल, फार्मा, पीएययू बैंक, हेल्‍थकेयर, कंज्‍यूमर्स को छोड़कर आईटी, एफएमसीजी और ऑटो सेक्‍टर्स में उछाल आई है. इस सेक्‍टर्स के शेयर तेजी दिखा रहे हैं. वहीं डिफेंस शेयर भी अच्‍छी तेजी दिखा रहे है. बीएसई पर आज 3,342 शेयर एक्टिव हैं, जिसमें से 1326 शेयरों में उछाल दिख रही है और 1847 शेयरों में गिरावट आई है. वहीं 169 शेयर अनचेंज हैं. 42 शेयर 52 सप्‍ताह के हाई पर है और 140 शेयर 52 सप्‍ताह के न‍िचले स्‍तर पर हैं. 72 शेयरों में अपर सर्किट और 66 शेयरों में लोअर सर्किट लगा है. आरबीआई के फैसले का इंतजार  गौरतलब है कि भारतीय रिजर्व बैंक की 2 दिनों तक चली मोनिटरी पॉलिसी की बैठक में लिए गए फैसले का आज ऐलान होगा. आरबीआई गवर्नर संजय मल्‍होत्रा आरबीआई के फैसले का ऐलान करेंगे, जिसमें रेपो रेट में कटौती का अनुमान लगाया जा रहा है. उम्‍मीद की जा रही है कि रेपो रेट में आरबीआई 25 बेसिस पॉइंट की कटौती कर सकता है. हालांकि अभी इस उम्‍मीद पर शेयर बाजार रिएक्‍ट नहीं कर रहा है. 

सेविंग अकाउंट पर बड़ा बदलाव, RBI ने सभी बैंकों को 1 लाख तक समान ब्याज दर लागू करने के निर्देश दिए

नई दिल्ली देश में सेविंग अकाउंट में पैसे जमा करने वाले लाखों लोगों के लिए RBI ने एक बड़ा फैसला लिया है. कई लोग यह सोचकर परेशान रहते थे कि किस बैंक में खाता खुलवाएं, किस बैंक में ब्याज ज्यादा मिलेगा या कौन सा बैंक सुरक्षित है. अब RBI के नए नियम ने इस उलझन को काफी हद तक खत्म कर दिया है. क्योंकि अब 1 लाख रुपये तक की जमा राशि पर पूरे देश के सभी कमर्शियल बैंक एक जैसा ब्याज देंगे. यानी चाहे आपका खाता SBI में हो, कैनरा बैंक में या किसी और बैंक में अब ब्याज में फर्क नहीं पड़ेगा. RBI का नया नियम क्या कहता है? RBI ने सभी कमर्शियल बैंकों को निर्देश दिया है कि सेविंग अकाउंट  में 1 लाख रुपये तक जो भी रकम जमा रहेगी, उस पर सभी बैंक एक समान ब्याज दर लागू करेंगे. अब तक हर बैंक अपने हिसाब से अलग-अलग ब्याज देता था, जिसकी वजह से ग्राहकों में कन्फ्यूजन रहता था. लेकिन नए नियम के बाद इस रकम तक ब्याज दर पूरी तरह एक जैसी होगी, जिससे आम ग्राहको को सुविधा होगी. न्यूनतम अवधि से पहले एफडी तोड़ने पर ब्याज नहीं आरबीआई ने बचत, चालू बैंक खाते समेत सावधि जमा (एफडी) और ओवरड्यू एफडी समेत अन्य नियमों में कई अहम बदलाव किए हैं। इसके मुताबिक, बैंक द्वारा तय न्यूनतम अवधि से पहले एफडी तोड़ने पर कोई ब्याज नहीं मिलेगा। आरबीआई ने एफडी की न्यूनतम मानक अवधि सात दिन की है, लेकिन बैंक अपने मुताबिक इसे अधिक न्यूनतम अवधि तय कर सकते हैं। नए नियमों में न्यूनतम अ‌वधि पूरी होने पर एफडी तोड़ी जाती है तो बैंक आपको वही ब्याज देगा, जो उस अवधि के लिए लागू है। यानी जितने समय तक पैसा बैंक में रहा, इस अ‌वधि का ही ब्याज मिलेगा। पहले से तय तय की गई ऊंची ब्याज दर लागू नहीं होगी। यही नहीं, नए नियमों में यह भी जोड़ा गया है कि अगर किसी एफडी की मेच्योरिटी पीरियड गैर-कारोबारी दिन पर पड़ती है, तो ग्राहक को उस दिन का भी ब्याज मिलेगा और बैंक अगले कार्यदिवस को भुगतान करेगा। बैंकों को स्पष्ट करने होंगे नियम नए नियमों के अनुसार, अब बैंकों को एफडी से जुड़े सभी नियम ग्राहकों को पहले से स्पष्ट रूप से बताने होंगे। मसलन, एफडी की न्यूनतम अ‌वधि की सीमा कितनी है। यदि इससे पहले एफडी तोड़ने हैं तो कितना जुर्माना लगेगा। जुर्माना की रकम बैंक खुद तय कर सकते हैं। सभी शाखाओं में एक जैसी दरें सभी शाखाओं में एफडी की दरें एक ही तरह की लागू होंगी। ग्राहकों और बैंक के बीच ब्याज दर पर कोई मोलभाव नहीं होगा। हालांकि, बड़े जमा यानी तीन करोड़ रुपये या उससे अधिक की एफडी पर अलग ब्याज दरें लागू हो सकती हैं। बैंक यह नहीं कर सकेंगे आरबीआई ने नए नियमों के तहत स्पष्ट किया है कि जमा कराने पर लॉटरी, इनाम, विदेश यात्रा जैसी स्कीम नहीं दे सकेंगे। जमा के बदले किसी एजेंट को अवैध कमीशन नहीं दे सकेंगे। सिर्फ कंपाउंड ब्याज दिखाकर भ्रामक विज्ञापन भी नहीं करेंगे। कुछ संस्थाओं और राजनीतिक पार्टियों को सेविंग अकाउंट खोलने की अनुमति नहीं। ये नियम भी लागू     बैंक कर्मचारी, रिटायर्ड कर्मचारी और उनके कुछ परिजनों को सावधि जमा व बचत खाते पर एक फीसदी अतिरिक्त ब्याज दिया जा सकता है।     वरिष्ठ नागरिकों के लिए बैंक चाहे तो अलग और अधिक ब्याज दर वाली एफडी स्कीम चला सकते हैं।     टाइम डिपॉजिट (टीडी) मैच्योर होने के बाद पैसे न निकालने पर बचत खाते की ब्याज दर या टीडी की मूल ब्याज दर यानी दोनों में से कम ब्याज वहीं मिलेगा।     चालू खाते पर सामान्य रूप से कोई ब्याज नहीं मिलेगा। लेकिन खाता धारक की मृत्यु होने की स्थिति में मृत्यु की तारीख से भुगतान तक बचत खाते वाली दर से ब्याज मिलेगा।     जमा खातों पर ब्याज दर से जुड़े पुराने सभी दिशानिर्देश रद्द कर दिए गए हैं। अब बैंकिंग क्षेत्र में ब्याज दरों को लेकर एकीकृत और सरल नियमों को लागू किया गया है। एनआरई और एनआरओ सावधि खाता अनिवासी भारतीयों के लिए भी आरबीआई ने निर्देश जारी किए हैं। एनआरआई जमा पर ब्याज दर घरेलू सावधि जमा से अधिक नहीं हो सकती। एनआरआई की सावधि जमा की न्यूनतम अवधि एक वर्ष होगा। जबकि एनआरओ की सात दिन होगी। एनआरआई/एनआरओ को जमाओं पर वरिष्ठ नागरिक या बैंक स्टाफ को अतिरिक्त ब्याज नहीं मिलेगा। एनआरई खाता अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) के लिए एक प्रकार का बैंक खाता है जो उन्हें अपनी विदेशी आय को भारत में रखने और भारतीय रुपये में बदलने की सुविधा देता है। जबकि एनआरओ खाता एक अनिवासी साधारण खाता है जो अनिवासी भारतीयों को भारत में अर्जित आय जैसे कि किराया, लाभांश और पेंशन को प्रबंधित करने की अनुमति देता है। SBI हो या Canara… अब सबका ब्याज एक जैसा! RBI का यह नियम सभी बैंकों पर लागू है.भले ही  देश का सबसे बड़ा पब्लिक सेक्टर बैंक SBI है या Canara बैंक बचत खाते में 1 लाख तक की राशि पर ब्याज अब सभी जगह समान मिलेगा. इससे छोटे ग्राहकों का फायदा होगा, क्योंकि  वे अब बैंक चुनने का फैसला केवल सर्विस और सुविधा देखकर ले सकेंगे, ब्याज दरों के अंतर पर नहीं. 1 लाख से ज्यादा रकम पर क्या होगा? नया नियम केवल 1 लाख रुपये तक की रकम पर लागू होगा. इस सीमा से ऊपर जमा रकम पर बैंक अपनी अलग ब्याज दर तय कर सकते हैं. यानी अगर किसी के खाते में 1 लाख से ज्यादा बैलेंस है, तो उस पर ब्याज पहले की तरह बैंक की अपनी दरों के अनुसार मिलेगा. ब्याज की गणना कैसे होगी? RBI ने यह भी साफ किया है कि ब्याज की गणना हर दिन के अंत में आपके खाते में जितनी राशि है, उसके आधार पर होगी. इससे फायदा यह है कि जिस दिन आपके खाते में बैलेंस ज्यादा होगा, उस दिन ज्यादा ब्याज मिलेगा. आपके खाते में कब आएगा ब्याज ? बैंकों को निर्देश दिया गया है कि बचत खाते का ब्याज कम से कम तीन महीने में एक बार खाते में जरूर जमा किया जाए. इससे ग्राहकों को समय-समय पर ब्याज मिल जाएगा और यह … Read more