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नासिक जिला महिला विकास सहकारी बैंक पर RBI का बैन, खाताधारकों के लिए मुश्किलें बढ़ी

नई दिल्ली रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने महाराष्ट्र के एक सहकारी बैंक के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। नासिक जिला महिला विकास सहकारी बैंक लिमिटेड को 9 दिसंबर से कारोबार बंद करने का आदेश जारी किया गया है। यह कदम बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 के अलग-अलग प्रावधानों के तहत 19 की गई शक्तियों के तहत केंद्रीय बैंक ने उठाया।अब बैंक को आरबीआई के अप्रूवल के बिना लोन या एडवांस ग्रांट या रिन्यू करने से रोकने गया है। आदेश के तहत बैंक कोई इन्वेस्टमेंट भी नहीं कर सकता। न ही नई जमा राशियों को स्वीकार कर सकता है। इसके अलावा किसी भी प्रॉपर्टी या एसेट बचने, ट्रांसफर और डिस्पोज करने से भी रोका गया है। रिजर्व बैंक ने यह स्पष्ट किया है कि इस बैंक का लाइसेंस  कैंसिल नहीं किया गया है।  बैंक अपनी फाइनेंशियल स्थिति में सुधार होने तक निर्देशों का पालन करेगा। तब तक बैंक पर पाबंदियां लागू रहेंगी। क्या है वजह? (RBI Action) आरबीआई ने यह कदम लिक्विडिटी की स्थिति को देखते हुए उठाया है। सुपरवाइजर चिताओं और बैंक के डिपॉजिटरों के हितों की रक्षा के लिए जरूरी यह फैसला जरूरी था। केंद्रीय बैंक ने बैंक को 8 दिसंबर को जारी आदेश की एक कॉपी अपने वेबसाइट पर दिखाने का निर्देश भी दिया। ताकि कस्टमर और हितधारकों को इस बात की जानकारी मिल सके। बैंक के स्टेटस की समीक्षा नियमित तौर पर आरबीआई करता रहेगा। जरूरत पड़ने पर निर्देशों में बदलाव भी हो सकते हैं। यह आदेश 6 महीने तक लागू रहने वाला है। अगला फैसला रिव्यू के आधार पर लिया जाएगा। ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा? बैंक पर प्रतिबंध लगने के कारण कई ग्राहकों को भी परेशानी हो सकती है। आरबीआई द्वारा जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक इस बैंक के ग्राहकों को सेविंग अकाउंट या करंट अकाउंट या किसी भी खाते में जमा राशि में से केवल 35,000 रुपये निकालने की अनुमति होगी। हालांकि बैंक कुछ जरूरी चीजों  जैसे कि कर्मचारियों की सैलरी, किराया और बिजली के बिल इत्यादि पर खर्च कर सकता है। डीआईसीजीसी के के नियमों के तहत प्रत्येक कस्टमर को 5 लाख रुपये तक की जमा राशि पर जमा बीमा क्लेम करने की सुविधा मिलती है। कोई भी खाताधारक अपनी मर्जी और सही वेरिफिकेशन के बाद इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।  

लोन लेने वालों के लिए बड़ी खुशखबरी, इन 5 बैंकों ने इंटरेस्ट रेट कम किया

नई दिल्ली भारतीय रिज़र्व बैंक की चौथी रेपो कटौती के बाद देशभर में लोन मार्केट तेजी से बदल गया है. 25 बेसिस पॉइंट की ताज़ा कमी ने बैंकों को ब्याज दरें घटाने पर मजबूर किया है, जिससे ग्राहकों की होम, कार और पर्सनल लोन EMI में सीधी राहत मिल रही है. भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने ब्याज दरों के मोर्चे पर लगातार अपनी आक्रामक नीति जारी रखी है. बीते सप्ताह केंद्रीय बैंक द्वारा रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती किए जाने के बाद, देश में ऋण लेने का माहौल बदल गया है. इस कदम ने बैंकों को अपनी दरों को समायोजित करने के लिए प्रेरित किया है, जिससे आम ग्राहकों के लिए होम, कार और पर्सनल लोन की लागत कम हो गई है. चौथी कटौती के बाद रेपो रेट कितना हुआ? RBI का यह फैसला साल 2025 में रेपो रेट में चौथी बार की गई कटौती है. फरवरी में शुरू हुई इस कटौती की श्रृंखला ने नीतिगत दर को अब 5.25% के स्तर पर ला दिया है. कुल मिलाकर, इस वर्ष अब तक 1.25% की संचयी कमी दर्ज की गई है. RBI ने मुद्रास्फीति को सफलतापूर्वक नियंत्रित करने के बाद यह कदम उठाया है, जिससे विकास को बढ़ावा देने का रास्ता साफ हुआ है. किन 5 बैंकों ने सस्ता किया लोन?    बैंक का नाम कटौती नई दरें लागू मुख्य विवरण बैंक ऑफ इंडिया (BOI) RBLR में 25 bps की कटौती 5 दिसंबर से RBLR 8.35% से घटकर 8.10% हुई. इंडियन बैंक (Indian Bank) RBLR में 25 bps; MCLR में 5 bps की कटौती 6 दिसंबर से RBLR 8.20% से घटकर 7.95% हुई. बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) रेपो-बेस्ड लेंडिंग रेट में 25 bps की कटौती 6 दिसंबर से दर 8.15% से घटकर 7.90% हुई. करूर वैश्य बैंक (Karur Vysya Bank) MCLR में 10 bps की कटौती 7 दिसंबर से MCLR 9.55% से घटकर 9.45% हुई. बैंक ऑफ महाराष्ट्र (BoM) रेपो-लिंक्ड रिटेल लोन में 25 bps की कटौती 6 दिसंबर से होम लोन 7.10% से और कार लोन 7.45%से शुरू. यह ब्याज दर कटौती उन सभी ग्राहकों के लिए एक सकारात्मक संकेत है जिनके ऋण रेपो रेट से जुड़े हुए हैं, जिससे उनकी मंथली किस्तें (EMIs) कम होंगी और लोन लेना अब अधिक आकर्षक हो जाएगा.

खाता धारकों को राहत: Zero Balance Account पर RBI ने जोड़ीं कई मुफ्त सुविधाएं, बदले नियम

जम्मू-कश्मीर  भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने आम लोगों की बैंकिंग को और आसान बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। कई लोग ऐसे होते हैं जो बैंक खाता तो खोलना चाहते हैं, लेकिन उनके पास ज्यादा पैसे नहीं होते या वे मिनिमम बैलेंस जैसी शर्तें पूरी नहीं कर पाते। ऐसे लोगों के लिए BSBD यानी जीरो बैलेंस खाते बनाए गए थे, लेकिन समय के साथ बैंक इन खातों को सीमित सुविधाओं वाला मानने लगे थे, जिससे ग्राहकों को कई तरह की परेशानियाँ झेलनी पड़ती थीं।  अब इन खातों को साधारण सेविंग्स अकाउंट से कमतर नहीं माना जाएगा। यानी, बैंक को BSBD खाताधारकों को भी वही सुविधाएं देनी होंगी जो वे सामान्य सेविंग्स अकाउंट ग्राहकों को देते हैं। अगर कोई ग्राहक चाहे, तो वह लिखित में या ऑनलाइन रिक्वेस्ट देकर अपने सेविंग्स अकाउंट को BSBD खाते में बदलवा सकता है और बैंक को यह काम 7 दिन के भीतर पूरा करना होगा। ये नए नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे। BSBD खातों में अब क्या-क्या सुविधा मिलेगी?  मुफ्त इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और पासबुक/मासिक स्टेटमेंट साल में कम-से-कम 25 पन्नों की चेकबुक महीने में 4 बार नकद निकासी फ्री UPI, IMPS, NEFT, RTGS या कार्ड से पेमेंट — इन पर कोई चार्ज नहीं और इन्हें 4 फ्री निकासी में नहीं गिना जाएगा RBI का यह कदम डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने, ग्राहकों को ज्यादा अधिकार देने और बैंकिंग को सभी के लिए सुलभ बनाने की दिशा में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है।

रेपो रेट में कमी से ईएमआई पर बचत, लाखों लोगों के लिए राहत की खबर

नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee) ने रेपो रेट में कटौती कर दी है। यह 0.25 प्रतिशत की है, जिसके बाद रेपो रेट घटकर 5.25 प्रतिशत रह गई है। मजबूत आर्थिक वृद्धि और महंगाई में नरमी के बीच RBI ने नीतिगत दर में यह कटौती की है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने समिति के फैसलों की जानकारी दी। इंडस्ट्रियल क्रेडिट ग्रोथ भी मजबूत- संजय मल्होत्रा RBI गवर्नर ने कहा है कि इंडस्ट्रियल क्रेडिट ग्रोथ भी मजबूत हुई है। बड़ी इंडस्ट्रीज़ में भी क्रेडिट ग्रोथ दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि पहले के रेट कट का असर सभी सेक्टरों में बड़े पैमाने पर हुआ है। साल 2025 में रेपो रेट में अब तक कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती की जा चुकी है। इससे पहले, केंद्रीय बैंक ने इस साल फरवरी से जून तक रेपो रेट में कुल 1 प्रतिशत की कटौती की थी। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI जिस रेट पर बैंकों को लोन देता है उसे रेपो रेट कहते हैं। जब RBI रेपो रेट घटाता है, तो बैंकों को सस्ता कर्ज मिलता है और वो इस फायदे को ग्राहकों तक पहुंचाते हैं। यानी, आने वाले दिनों में होम और ऑटो जैसे लोन 0.25% तक सस्ते हो जाएंगे। ताजा कटौती के बाद 20 साल के ₹20 लाख के लोन पर ईएमआई 310 रुपए तक घट जाएगी। इसी तरह ₹30 लाख के लोन पर ईएमआई 465 रुपए तक घट जाएगी। नए और मौजूदा ग्राहकों दोनों को इसका फायदा मिलेगा। रेट कट के बाद शेयर बाजार में तेजी RBI की ओर से रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती किए जाने के बाद शेयर बाजार में तेजी है। सुबह 11 बजे के ​करीब BSE 311.74 अंकों की बढ़त के साथ 85,577.06 पर है। सुबह यह गिरावट में खुला था। एनएसई भी 90.70 अंकों की बढ़त के साथ 26,124.45 पर है। NSE के सेक्टोरल इंडेक्सेज में गिरावट और तेजी का मिलाजुला रुख है। 1 लाख करोड़ रुपये के बॉन्ड की खरीद-बिक्री करेगा RBI- संजय मल्होत्रा RBI गवर्नर ने कहा कि केंद्रीय बैंक कैश मैनेजमेंट के लिए 1 लाख करोड़ रुपये के बॉन्ड की खरीद-बिक्री करेगा। उन्होंने बैंक, एनबीएफसी से अपनी पॉलिसी और संचालन के केंद्र में ग्राहकों को रखने का भी निर्देश दिया। साथ ही कहा कि स्थिरता सुनिश्चित करते हुए अर्थव्यवस्था की उत्पादक जरूरतों को हम सक्रिय तरीके से पूरा करना जारी रखेंगे। रेपो रेट के घटने से हाउसिंग डिमांड बढ़ेगी रेपो रेट घटने के बाद बैंक भी हाउसिंग और ऑटो जैसे लोन्स पर ब्याज दरें कम करते हैं। ब्याज दरें कम होने पर हाउसिंग डिमांड बढ़ेगी। ज्यादा लोग रियल एस्टेट में निवेश कर सकेंगे। इससे रियल एस्टेट सेक्टर को बूस्ट मिलेगा। RBI ने महंगाई अनुमान घटाया, GDP अनुमान बरकरार रखा इस साल 4 बार घटी रेपो रेट, 1.25% की कटौती हुई RBI ने फरवरी में हुई मीटिंग में ब्याज दरों को 6.5% से घटाकर 6.25% कर दिया था। मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की ओर से ये कटौती करीब 5 साल बाद की गई थी। दूसरी बार अप्रैल में हुई मीटिंग में भी ब्याज दर 0.25% घटाई गई। जून में तीसरी बार दरों में 0.50% कटौती हुई। अब एक बार फिर इसमें 0.25% की कटौती की गई है। यानी, मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने तीन बार में ब्याज दरें 1.25% घटाई। रेपो रेट क्या है, इससे लोन कैसे सस्ता होता है? RBI जिस ब्याज दर पर बैंकों को लोन देता है उसे रेपो रेट कहते हैं। रेपो रेट कम होने से बैंक को कम ब्याज पर लोन मिलेगा। बैंकों को लोन सस्ता मिलता है, तो वो अकसर इसका फायदा ग्राहकों को पास कर देते हैं। यानी, बैंक भी अपनी ब्याज दरें घटा देते हैं। रिजर्व बैंक रेपो रेट बढ़ाता और घटाता क्यों है? किसी भी सेंट्रल बैंक के पास पॉलिसी रेट के रूप में महंगाई से लड़ने का एक शक्तिशाली टूल है। जब महंगाई बहुत ज्यादा होती है, तो सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट बढ़ाकर इकोनॉमी में मनी फ्लो को कम करने की कोशिश करता है। पॉलिसी रेट ज्यादा होगी तो बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज महंगा होगा। बदले में बैंक अपने ग्राहकों के लिए लोन महंगा कर देते हैं। इससे इकोनॉमी में मनी फ्लो कम होता है। मनी फ्लो कम होता है तो डिमांड में कमी आती है और महंगाई घट जाती है। इसी तरह जब इकोनॉमी बुरे दौर से गुजरती है तो रिकवरी के लिए मनी फ्लो बढ़ाने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट कम कर देता है। इससे बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज सस्ता हो जाता है और ग्राहकों को भी सस्ती दर पर लोन मिलता है। हर दो महीने में होती है RBI की मीटिंग मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी में 6 सदस्य होते हैं। इनमें से 3 RBI के होते हैं, जबकि बाकी केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। RBI की मीटिंग हर दो महीने में होती है। बीते दिनों रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठकों का शेड्यूल जारी किया था। इस वित्तीय वर्ष में कुल 6 बैठकें होंगी। पहली बैठक 7-9 अप्रैल को हुई थी। अब हर साल ईएमआई पर बचेंगे हजारों रुपये, इन पैसों से बनेगा मोटा फंड रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार 5 दिसंबर को इस साल का एक और बड़ा तोहफा देते हुए लोन की ब्‍याज दरों में बड़ी कटौती कर दी है. गवर्नर ने रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती की तो बैंक से लोन लेने वाले हर आदमी के चेहरे पर मुस्‍कान खिल उठी. उन्‍हें लग गया कि अब उनके मकान खरीदने और वाहन खरीदने के सपने और भी सस्‍ते होने जा रहे हैं. गवर्नर के इस फैसले का एक आदमी पर कितना असर पड़ेगा, इसकी झलक एक छोटे से कैलकुलेशन से ही साफ समझ आ जाती है. दरअसल, रिजर्व बैंक की रेपो रेट यानी नीतिगत ब्‍याज दरों में कटौती होते ही सभी बैंकों को अपने खुदरा लोन की ब्‍याज दरें भी घटानी पड़ेंगी. इन खुदरा कर्ज में होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन सहित हर तरह के छोटे-मोटे लोन आते हैं. रिजर्व बैंक ने इस साल तीसरी बार रेपो रेट में कटौती की है और … Read more

रेपो रेट पर RBI के संभावित फैसले से बाजार में हलचल, निवेशकों की घबराहट से गिरावट तेज़

मुंबई  भारतीय रिजर्व बैंक आज रेपो रेट पर फैसले का ऐलान करेगे. इससे पहले ही शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव दिखाई दे रहा है. शुरुआती कारोबार में सेंसेक्‍स 150 अंक टूट गया, जबकि निफ्ट में 40 अंकों की गिरावट आई थी. लेकनि अभी तेजी के साथ निफ्टी 26000 के ऊपर कारोबार कर रहा है, जबकि सेंसेक्‍स 85283 पर बना हुआ है.  बीएसई सेंसेक्‍स के 14 शेयर गिरावट पर कारोबार कर रहे हैं, जबकि 16 शेयरों में शानदार उछाल आई है. बैंकिंग, डिफेंस और आईटी शेयर  इस तेजी को लीड कर रहे हैं. सबसे ज्‍यादा उछाल जोमैटो, बीईएल और बजाज फाइनेस जैसे शेयरों में देखी जा रही है. रिलायंस, ट्रेंट, भारती एयरटेल और टाटा मोटर्स के श्‍ेयरों में करीब 1 फीसदी की गिरावट है.  ये शेयर सबसे ज्‍यादा टूटे  हिंदुस्‍तान कंस्‍ट्रक्‍शन कंपनी के शेयरों में आज करीब 8 फीसदी की गिरावट आई है, जो अभी 20 रुपये पर कारोबार कर रहा है. इसी तरह, Kaynes Technology India के शेयर 4 फीसदी से ज्‍यादा टूटे हैं. इंडिया सीमेंट और राउट मोबाइल के शेयर में 4 फीसदी की कमी आई है.  इन सेक्‍टर्स में उछाल  सेक्‍टर की बात करें तो मीडिया, मेटल, फार्मा, पीएययू बैंक, हेल्‍थकेयर, कंज्‍यूमर्स को छोड़कर आईटी, एफएमसीजी और ऑटो सेक्‍टर्स में उछाल आई है. इस सेक्‍टर्स के शेयर तेजी दिखा रहे हैं. वहीं डिफेंस शेयर भी अच्‍छी तेजी दिखा रहे है. बीएसई पर आज 3,342 शेयर एक्टिव हैं, जिसमें से 1326 शेयरों में उछाल दिख रही है और 1847 शेयरों में गिरावट आई है. वहीं 169 शेयर अनचेंज हैं. 42 शेयर 52 सप्‍ताह के हाई पर है और 140 शेयर 52 सप्‍ताह के न‍िचले स्‍तर पर हैं. 72 शेयरों में अपर सर्किट और 66 शेयरों में लोअर सर्किट लगा है. आरबीआई के फैसले का इंतजार  गौरतलब है कि भारतीय रिजर्व बैंक की 2 दिनों तक चली मोनिटरी पॉलिसी की बैठक में लिए गए फैसले का आज ऐलान होगा. आरबीआई गवर्नर संजय मल्‍होत्रा आरबीआई के फैसले का ऐलान करेंगे, जिसमें रेपो रेट में कटौती का अनुमान लगाया जा रहा है. उम्‍मीद की जा रही है कि रेपो रेट में आरबीआई 25 बेसिस पॉइंट की कटौती कर सकता है. हालांकि अभी इस उम्‍मीद पर शेयर बाजार रिएक्‍ट नहीं कर रहा है. 

सेविंग अकाउंट पर बड़ा बदलाव, RBI ने सभी बैंकों को 1 लाख तक समान ब्याज दर लागू करने के निर्देश दिए

नई दिल्ली देश में सेविंग अकाउंट में पैसे जमा करने वाले लाखों लोगों के लिए RBI ने एक बड़ा फैसला लिया है. कई लोग यह सोचकर परेशान रहते थे कि किस बैंक में खाता खुलवाएं, किस बैंक में ब्याज ज्यादा मिलेगा या कौन सा बैंक सुरक्षित है. अब RBI के नए नियम ने इस उलझन को काफी हद तक खत्म कर दिया है. क्योंकि अब 1 लाख रुपये तक की जमा राशि पर पूरे देश के सभी कमर्शियल बैंक एक जैसा ब्याज देंगे. यानी चाहे आपका खाता SBI में हो, कैनरा बैंक में या किसी और बैंक में अब ब्याज में फर्क नहीं पड़ेगा. RBI का नया नियम क्या कहता है? RBI ने सभी कमर्शियल बैंकों को निर्देश दिया है कि सेविंग अकाउंट  में 1 लाख रुपये तक जो भी रकम जमा रहेगी, उस पर सभी बैंक एक समान ब्याज दर लागू करेंगे. अब तक हर बैंक अपने हिसाब से अलग-अलग ब्याज देता था, जिसकी वजह से ग्राहकों में कन्फ्यूजन रहता था. लेकिन नए नियम के बाद इस रकम तक ब्याज दर पूरी तरह एक जैसी होगी, जिससे आम ग्राहको को सुविधा होगी. न्यूनतम अवधि से पहले एफडी तोड़ने पर ब्याज नहीं आरबीआई ने बचत, चालू बैंक खाते समेत सावधि जमा (एफडी) और ओवरड्यू एफडी समेत अन्य नियमों में कई अहम बदलाव किए हैं। इसके मुताबिक, बैंक द्वारा तय न्यूनतम अवधि से पहले एफडी तोड़ने पर कोई ब्याज नहीं मिलेगा। आरबीआई ने एफडी की न्यूनतम मानक अवधि सात दिन की है, लेकिन बैंक अपने मुताबिक इसे अधिक न्यूनतम अवधि तय कर सकते हैं। नए नियमों में न्यूनतम अ‌वधि पूरी होने पर एफडी तोड़ी जाती है तो बैंक आपको वही ब्याज देगा, जो उस अवधि के लिए लागू है। यानी जितने समय तक पैसा बैंक में रहा, इस अ‌वधि का ही ब्याज मिलेगा। पहले से तय तय की गई ऊंची ब्याज दर लागू नहीं होगी। यही नहीं, नए नियमों में यह भी जोड़ा गया है कि अगर किसी एफडी की मेच्योरिटी पीरियड गैर-कारोबारी दिन पर पड़ती है, तो ग्राहक को उस दिन का भी ब्याज मिलेगा और बैंक अगले कार्यदिवस को भुगतान करेगा। बैंकों को स्पष्ट करने होंगे नियम नए नियमों के अनुसार, अब बैंकों को एफडी से जुड़े सभी नियम ग्राहकों को पहले से स्पष्ट रूप से बताने होंगे। मसलन, एफडी की न्यूनतम अ‌वधि की सीमा कितनी है। यदि इससे पहले एफडी तोड़ने हैं तो कितना जुर्माना लगेगा। जुर्माना की रकम बैंक खुद तय कर सकते हैं। सभी शाखाओं में एक जैसी दरें सभी शाखाओं में एफडी की दरें एक ही तरह की लागू होंगी। ग्राहकों और बैंक के बीच ब्याज दर पर कोई मोलभाव नहीं होगा। हालांकि, बड़े जमा यानी तीन करोड़ रुपये या उससे अधिक की एफडी पर अलग ब्याज दरें लागू हो सकती हैं। बैंक यह नहीं कर सकेंगे आरबीआई ने नए नियमों के तहत स्पष्ट किया है कि जमा कराने पर लॉटरी, इनाम, विदेश यात्रा जैसी स्कीम नहीं दे सकेंगे। जमा के बदले किसी एजेंट को अवैध कमीशन नहीं दे सकेंगे। सिर्फ कंपाउंड ब्याज दिखाकर भ्रामक विज्ञापन भी नहीं करेंगे। कुछ संस्थाओं और राजनीतिक पार्टियों को सेविंग अकाउंट खोलने की अनुमति नहीं। ये नियम भी लागू     बैंक कर्मचारी, रिटायर्ड कर्मचारी और उनके कुछ परिजनों को सावधि जमा व बचत खाते पर एक फीसदी अतिरिक्त ब्याज दिया जा सकता है।     वरिष्ठ नागरिकों के लिए बैंक चाहे तो अलग और अधिक ब्याज दर वाली एफडी स्कीम चला सकते हैं।     टाइम डिपॉजिट (टीडी) मैच्योर होने के बाद पैसे न निकालने पर बचत खाते की ब्याज दर या टीडी की मूल ब्याज दर यानी दोनों में से कम ब्याज वहीं मिलेगा।     चालू खाते पर सामान्य रूप से कोई ब्याज नहीं मिलेगा। लेकिन खाता धारक की मृत्यु होने की स्थिति में मृत्यु की तारीख से भुगतान तक बचत खाते वाली दर से ब्याज मिलेगा।     जमा खातों पर ब्याज दर से जुड़े पुराने सभी दिशानिर्देश रद्द कर दिए गए हैं। अब बैंकिंग क्षेत्र में ब्याज दरों को लेकर एकीकृत और सरल नियमों को लागू किया गया है। एनआरई और एनआरओ सावधि खाता अनिवासी भारतीयों के लिए भी आरबीआई ने निर्देश जारी किए हैं। एनआरआई जमा पर ब्याज दर घरेलू सावधि जमा से अधिक नहीं हो सकती। एनआरआई की सावधि जमा की न्यूनतम अवधि एक वर्ष होगा। जबकि एनआरओ की सात दिन होगी। एनआरआई/एनआरओ को जमाओं पर वरिष्ठ नागरिक या बैंक स्टाफ को अतिरिक्त ब्याज नहीं मिलेगा। एनआरई खाता अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) के लिए एक प्रकार का बैंक खाता है जो उन्हें अपनी विदेशी आय को भारत में रखने और भारतीय रुपये में बदलने की सुविधा देता है। जबकि एनआरओ खाता एक अनिवासी साधारण खाता है जो अनिवासी भारतीयों को भारत में अर्जित आय जैसे कि किराया, लाभांश और पेंशन को प्रबंधित करने की अनुमति देता है। SBI हो या Canara… अब सबका ब्याज एक जैसा! RBI का यह नियम सभी बैंकों पर लागू है.भले ही  देश का सबसे बड़ा पब्लिक सेक्टर बैंक SBI है या Canara बैंक बचत खाते में 1 लाख तक की राशि पर ब्याज अब सभी जगह समान मिलेगा. इससे छोटे ग्राहकों का फायदा होगा, क्योंकि  वे अब बैंक चुनने का फैसला केवल सर्विस और सुविधा देखकर ले सकेंगे, ब्याज दरों के अंतर पर नहीं. 1 लाख से ज्यादा रकम पर क्या होगा? नया नियम केवल 1 लाख रुपये तक की रकम पर लागू होगा. इस सीमा से ऊपर जमा रकम पर बैंक अपनी अलग ब्याज दर तय कर सकते हैं. यानी अगर किसी के खाते में 1 लाख से ज्यादा बैलेंस है, तो उस पर ब्याज पहले की तरह बैंक की अपनी दरों के अनुसार मिलेगा. ब्याज की गणना कैसे होगी? RBI ने यह भी साफ किया है कि ब्याज की गणना हर दिन के अंत में आपके खाते में जितनी राशि है, उसके आधार पर होगी. इससे फायदा यह है कि जिस दिन आपके खाते में बैलेंस ज्यादा होगा, उस दिन ज्यादा ब्याज मिलेगा. आपके खाते में कब आएगा ब्याज ? बैंकों को निर्देश दिया गया है कि बचत खाते का ब्याज कम से कम तीन महीने में एक बार खाते में जरूर जमा किया जाए. इससे ग्राहकों को समय-समय पर ब्याज मिल जाएगा और यह … Read more

क्रेडिट स्कोर अपडेट होंगे हर हफ्ते, RBI के नए नियम से बढ़ सकती है लोन सुविधा

नई दिल्ली. अगर आप लोन लेना चाहते हैं या EMI भरते हैं तो आरबीआई के नए प्रस्तावित नियम आपके लिए गेमचेंजर साबित होंगे. अभी तक क्रेडिट स्कोर महीने में सिर्फ दो बार अपडेट होता था, लेकिन अप्रैल 2026 से यह हर 7 दिन में अपडेट हो सकता है. इससे आपका क्रेडिट प्रोफाइल (Credit Profile), लोन ब्याज (Loan Interest Rate) और क्रेडिट कार्ड लिमिट (Credit Card Limit) सबकुछ तेजी से बदल सकेगा.  भारत में क्रेडिट स्कोर से जुड़ी व्यवस्था जल्द ही बड़े बदलाव से गुजरने वाली है. RBI ने एक महत्वपूर्ण मसौदा जारी किया है, जिसके तहत अब क्रेडिट स्कोर हर हफ्ते अपडेट किया जाएगा. अभी स्कोर महीने में दो बार अपडेट होता है, लेकिन अप्रैल 2026 से यह प्रक्रिया और तेज हो जाएगी. इससे न सिर्फ उधारकर्ताओं के लिए लोन और क्रेडिट कार्ड लेना आसान होगा, बल्कि बैंकों को भी अधिक सटीक और अप-टू-डेट डेटा मिलेगा. विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव भारतीय क्रेडिट इकोसिस्टम को पहले से अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाएगा. आरबीआई की नई ड्राफ्ट गाइडलाइंस (RBI Draft Directions) के मुताबिक अब क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनियां महीने में 5 दिन अपडेट जारी करेंगी. यानी अगर किसी ने बकाया क्लीयर किया, क्रेडिट कार्ड बंद किया, EMI चुकाई या रिपेमेंट हिस्ट्री सुधरी, तो इसका असर उसी हफ्ते क्रेडिट स्कोर (Credit Score Update) में दिखने लगेगा. इससे लाखों उधारकर्ताओं को तेज मंजूरी, कम ब्याज और ज्यादा पारदर्शिता मिलेगी. अब महीने भर नहीं, हर हफ्ते रिफ्रेश होगा आपका क्रेडिट डेटा RBI के Credit Information Reporting Amendment, 2025 के मसौदे के अनुसार, CRIF High Mark जैसी Credit Information Companies (CICs) को हर महीने की 7, 14, 21, 28 तारीख और माह के अंतिम दिन डेटा रिफ्रेश करना होगा. चाहें तो बैंक और NBFC के साथ समझौते की स्थिति में इससे ज्यादा बार भी अपडेट किया जा सकता है. बैंकों को महीने के अंत का पूरा डेटा तीन दिनों में भेजना होगा और हर साप्ताहिक अपडेट के लिए केवल नया या बदला हुआ डेटा दो दिनों के भीतर जमा करना होगा. इसमें नए खाते, बंद खाते, रिपेमेंट अपडेट, डेमोग्राफिक बदलाव और SMA जैसी क्लासिफिकेशन की सारी जानकारी शामिल होगी. समय सीमा का पालन न करने पर CICs को RBI के DAKSH पोर्टल पर रिपोर्ट करना होगा. तेज अपडेट से उधारकर्ताओं को तुरंत मिलेगा फायदा इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर उधारकर्ताओं यानी Borrowers पर पड़ेगा. अभी तक क्रेडिट स्कोर में सुधार दिखने में दो हफ्ते से ज्यादा लग जाते थे, लेकिन अब साप्ताहिक अपडेट से यह सुधार जल्दी नजर आने लगेगा. कोई कर्ज चुकाया, क्रेडिट कार्ड बिल समय पर भरा या कोई गलती सुधारी- इनका असर स्कोर में तेजी से झलकेगा. इससे लोन अप्रूवल की संभावना बढ़ेगी और ब्याज दरें भी कम हो सकती हैं क्योंकि कई बैंक स्कोर-आधारित प्राइसिंग अपनाते हैं. वहीं, गलत रिपोर्टिंग या डेटा मिसमैच जैसी समस्याएं भी जल्दी पकड़ में आएंगी, जिससे विवादों और शिकायतों में कमी आ सकती है. बैंकों को मिलेगा नया टूल, जोखिम आंकना होगा आसान साप्ताहिक रिपोर्टिंग से बैंकों को भी बड़ा लाभ मिलेगा क्योंकि उन्हें ताजा और सटीक उधारकर्ता डेटा मिल सकेगा. इससे बैंक बेहतर Underwriting कर पाएंगे, यानी कौन-सा ग्राहक कितना जोखिम वाला है, इसका मूल्यांकन अधिक भरोसेमंद ढंग से हो सकेगा. नए डेटा से बैंक लोन की ब्याज दर, राशि और अवधि जैसे तत्वों को अधिक प्रभावी ढंग से तय कर सकेंगे. इसके अलावा ऋण गुणवत्ता पर भी बेहतर निगरानी रख पाएंगे. RBI का यह कदम भारतीय क्रेडिट सिस्टम को वास्तविक समय डेटा की दिशा में आगे बढ़ाता है, जिससे भविष्य में Daily या Real-Time Updates भी संभव हो सकते हैं.

HSBC होम लोन का खर्च होगा कम? RBI के रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की संभावना

नई दिल्ली   आगे कुछ समय के लिए मुद्रास्फीति टारगेट लेवल से कम बने रहने का अनुमान है इस बीच एचएसबीसी ग्लोबल इन्वेस्टमेंट रिसर्च की ओर से कहा गया कि आरबीआई की ओर से रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की जाएगी। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) का रेपो रेट को लेकर फैसला 5 दिसंबर को आएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि विकास दर अभी तक मजबूत बनी हुई है, जिसे सरकारी खर्च और जीएसटी-कट लेड रिटेल खर्च से बढ़ावा मिल रहा है। इसके अलावा, नवंबर फ्लैश मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 56.6 से संकेत मिलता है कि जीएसटी के कारण वृद्धि अपने पीक पर पहुंच गई है क्योंकि कुल मिलाकर नए ऑर्डर कम आ रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, "अभी विकास दर मजबूत बनी हुई है, लेकिन मार्च 2026 की तिमाही में इसमें नरमी आ सकती है। हमें उम्मीद है कि भारतीय रिजर्व बैंक आगामी दिसंबर नीति बैठक में पॉलिसी रेट को कम करेगा।" रिपोर्ट में कहा गया कि चालू वित्त वर्ष की सितंबर तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर सालाना आधार पर 8.2 प्रतिशत रही, जो कि जून तिमाही के जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत और हमारे 7.5 प्रतिशत के अनुमान से अधिक रही। वहीं, ग्रॉस वैल्यू एडेड वृद्धि दर 8.1 प्रतिशत और नॉमिनल जीडीपी 8.7 प्रतिशत की दर से बढ़ी। जीडीपी में वृद्धि की गति तेज रही, जिसके बहुत से कारण रहे। इनमें से एक महत्वपूर्ण कारक 22 सितंबर को लागू की गई जीएसटी दरों में कटौती रही, जिसे लेकर 15 अगस्त को घोषणा की गई थी। एचएसबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, "हमारा मानना है कि कंज्यूमर डिमांड में वृद्धि की उम्मीद से उत्पादन में वृद्धि देखी गई। हमारे हालिया शोध दर्शाता है कि कम आय वाले राज्य अब वृद्धि की राह पर आ गए हैं, यहां तक कि वे उच्च आय वाले राज्यों से भी तेज गति से आगे बढ़ रहे हैं।"रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के निर्यात पर 50 प्रतिशत के अमेरिकी रेसिप्रोकल टैरिफ के बावजूद भी भारत की विकास दर तेज गति से बढ़ती रही। होम लोन हो जाएगा सस्ता? रेपो रेट में कटौती के आसार रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक 3 से 5 दिसंबर तक होने वाली है। 5 दिसंबर को गवर्नर संजय मल्होत्रा फैसला सुनाएंगे। जानकारों ने अनुमान जताया है कि रेपो रेट में 25 आधार अंक की कटौती हो सकती है। हालांकि कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि दूसरी तिमाही में उम्मीद से बेहतर 8.2 फीसदी की GDP ग्रोथ को देखते हुए सेंट्रल बैंक रेट में कोई बदलाव नहीं कर सकता है। लिहाजा केंद्रीय बैंक ब्याज दर को स्थिर रख सकता है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति पिछले दो महीनों से सरकार के तय दायरे की निचली सीमा (दो प्रतिशत) से भी कम है। अक्टूबर में तो यह रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई। खाने-पीने की चीजें सस्ती होने और GST में कटौती की वजह से महंगाई पर लगाम लगी है। सेंट्रल बैंक ने पिछले साल फरवरी में रेट कम करने का अपना साइकिल शुरू किया था। पॉलिसी अनाउंसमेंट में रेपो रेट को कुल मिलाकर 100 बेसिस पॉइंट्स घटाकर 5.5 फीसदी कर दिया था। घटेगी EMI, सस्ते होंगे लोन RBI के इस फैसले से लोन पर ब्याज दरें कम हो सकती हैं। रेपो रेट घटने पर बैंकों को आरबीआई से कम ब्याज दर पर लोन मिल सकेगा। बैंक इस सस्ते कर्ज का फायदा ग्राहकों तक भी पहुंचाते हैं। रेपो रेट में गिरावट के बाद आमतौर पर बैंक लोन पर ब्याज दरों को घटा देते हैं। जिससे आम नागरिक के लिए भी लोन सस्ता हो जाता है। होम लोन की ईएमआई नई ब्याज दर के हिसाब से घट जाएगी और नए लोन भी कम ब्याज दर पर उपलब्ध होंगे। अगर रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती होती है तो यह घटकर 5.25 फीसदी पर पहुंच सकता है। अब तक RBI ने क्या किया है? RBI फरवरी से जून के बीच रेपो रेट में कुल 100 bps की कटौती कर चुका है (6.5% से 5.5%)। लेकिन अगस्त और अक्टूबर की पॉलिसी में दरों को बिना बदलाव के छोड़ दिया गया था। जानिए क्या है रेपो रेट यह वह दर होती है जिस जिस पर रिजर्व बैंक दूसरे बैंकों को कर्ज देता है। अगर रेपो रेट बढ़ाया जाता है तो साफ है कि बैंकों को रिजर्व बैंक से महंगी दर पर कर्ज मिलेगा। इस तरह कर्ज महंगे हो जाएंगे ।

RBI का नया नियम: बदल गए आपके बैंक के डोमेन नेम, जानें क्या है नया वेब एड्रेस

मुंबई  अगली बार जब आप अपने बैंक की वेबसाइट खोलने जाएं, तो एक पल रुकिए। अगर आपकी उंगलियां sbi.com या hdfcbank.com टाइप करने जा रही हैं, तो यह खबर आपके और आपके पैसों के लिए बेहद जरूरी है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के सख्त निर्देश पर देश के सभी बड़े-छोटे बैंकों ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट का डोमेन नाम बदल दिया है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई), एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक सहित तमाम बैंक अब '.bank.in' डोमेन पर शिफ्ट हो गए हैं। यह कदम साइबर फिशिंग हमलों से ग्राहकों की गाढ़ी कमाई बचाने के लिए उठाया गया अब तक का सबसे मजबूत उपाय है। फिशिंग का बढ़ता खतरा आरबीआई के इस फैसले की जड़ में ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड के बढ़ते मामले हैं। फिशिंग अपराधी बैंक की असली वेबसाइट से मिलती-जुलती नकली साइट बनाकर यूजर्स को ठगते थे। उदाहरण के तौर पर, अगर असली साइट 'mybank.com' थी, तो ठग 'mybank.co.in' या 'mybank-online.com' जैसी फर्जी साइट बना लेते। ये साइट्स रंग-रूप, लोगो और डिजाइन में पूरी तरह असली जैसी लगती थीं। अपराधी एसएमएस या ईमेल भेजकर डराते या लालच देते – जैसे 'आपका अकाउंट ब्लॉक हो गया', 'KYC एक्सपायर हो गई' या '50,000 रुपये की लॉटरी जीत गए'। लिंक पर क्लिक करते ही यूजर नकली साइट पर पहुंचता और यूजरनेम, पासवर्ड, ओटीपी डाल देता। नतीजा? ठग खाता खाली कर देते। पुराने '.com' या '.in' डोमेन कोई भी आसानी से खरीद सकता था, इसलिए रोकना मुश्किल था। नया सुरक्षा कवच कैसे काम करेगा? आरबीआई ने फिशिंग के इस जाल को तोड़ने के लिए '.bank.in' डोमेन अनिवार्य किया है। यह सामान्य डोमेन नहीं, बल्कि हाई-सिक्योरिटी जोन है। '.com', '.in' या '.org' जैसे टॉप-लेवल डोमेन (TLD) कोई भी रजिस्टर करा सकता है, लेकिन '.bank.in' केवल आरबीआई से लाइसेंस प्राप्त वित्तीय संस्थानों को ही मिलेगा। कड़ी सत्यापन प्रक्रिया: बैंक को आरबीआई की सभी शर्तें पूरी करनी होंगी। फर्जी साइट्स पर रोक: अब कोई ठग '.bank.in' से मिलती-जुलती नकली वेबसाइट नहीं बना पाएगा। गारंटीड सुरक्षा: यह डोमेन खुद एक पहचान पत्र की तरह है, जो पुष्टि करता है कि आप असली और वेरिफाइड बैंकिंग पोर्टल पर हैं। यह ठीक वैसा ही है जैसे सरकारी साइट्स के लिए 'gov.in' या 'nic.in' विश्वसनीयता की गारंटी देते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बदलाव से फिशिंग अटैक में भारी गिरावट आएगी और ग्राहक निश्चिंत होकर ऑनलाइन बैंकिंग कर सकेंगे। आरबीआई ने बैंकों को निर्देश दिया है कि पुरानी साइट्स से यूजर्स को स्वचालित रूप से नई '.bank.in' साइट पर रीडायरेक्ट किया जाए। ग्राहकों से अपील है कि हमेशा ब्राउजर में '.bank.in' चेक करें और संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें।  

बॉन्ड नीलामि से राजस्थान को 5,000 करोड़ का कर्ज, RBI से हुआ समझौता

जयपुर राजस्थान सरकार ने विकास कार्यों और योजनाओं के वित्तीय प्रबंधन के लिए इस बार 5000 करोड़ रुपये का कर्ज रिजर्व बैंक (RBI) के माध्यम से स्टेट ग्रांटेड सिक्योरिटीज (SGS) बॉन्ड जारी करके जुटाया है। यह राशि सरकार ने सीधे कर्ज लेने के बजाय तीन अलग-अलग बॉन्ड के जरिए एकत्र की है। इन बॉन्ड्स की अदायगी 10 से 26 साल की अवधि में की जाएगी।  तीन बॉन्ड से जुटाए 5000 करोड़ रुपये आरबीआई की ओर से जारी की गई प्रेस रिलीज के अनुसार ; राजस्थान SGS 2043 बॉन्ड के रि-इश्यू से 1500 करोड़ रुपये जुटाए गए हैं, जिस पर 7.57% ब्याज देना होगा (अवधि 18 वर्ष)। राजस्थान SGS 2035 बॉन्ड के जरिए 2000 करोड़ रुपये जुटाए गए हैं, जिस पर 7.23% ब्याज (अवधि 10 वर्ष) निर्धारित है। राजस्थान SGS 2051 बॉन्ड से 1500 करोड़ रुपये जुटाए गए हैं, जिसकी अवधि 26 वर्ष है और ब्याज दर 7.30% रखी गई है। राज्य सरकार हर साल विकास योजनाओं के लिए बॉन्ड के माध्यम से फंड जुटाती है, लेकिन इस बार अन्य राज्यों की तुलना में राजस्थान को अपने बॉन्ड पर थोड़ा अधिक ब्याज देना पड़ रहा है। अन्य राज्यों ने भी बॉन्ड से जुटाया फंड राजस्थान के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु ने भी आरबीआई के जरिए फंड जुटाया है।     महाराष्ट्र ने 5000 करोड़,     तमिलनाडु ने 3000 करोड़,     छत्तीसगढ़ ने 2000 करोड़,     और उत्तर प्रदेश ने 2000 करोड़ रुपये जुटाए हैं। तमिलनाडु को अपने बॉन्ड पर राजस्थान की तुलना में कम ब्याज दर पर फंड मिला है।  दिवाली के दिन हुआ बॉन्ड नीलामी परिणाम जारी 20 अक्टूबर (दिवाली के दिन) आरबीआई ने राजस्थान समेत सभी राज्यों के बॉन्ड की नीलामी आयोजित की थी। इसके बाद बॉन्ड नीलामी के परिणाम सार्वजनिक किए गए।  बढ़ता कर्ज, विकास योजनाओं के लिए कर्ज पर निर्भरता राजस्थान सरकार पर कुल कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है। बीते 10 वर्षों में राज्य का ऋण तेजी से बढ़ा है और अब यह 8 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया है। बजट दस्तावेजों के अनुसार, 2025-26 तक यह आंकड़ा 8 लाख करोड़ पार कर सकता है। सरकार की आय का बड़ा हिस्सा कर्मचारियों के वेतन और पेंशन में खर्च हो जाता है, जिसके कारण विकास कार्यों के लिए कर्ज लेना मजबूरी बन गया है। इस साल राजस्थान ने अपने बजट में करीब 70 हजार करोड़ रुपए का कर्ज प्रस्तावित किया है।