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कागज नहीं, अब प्लास्टिक के होंगे भारतीय नोट! जानिए RBI का पूरा प्लान

नई दिल्ली  भारतीय करेंसी नोट पर बड़ा अपडेट आया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में करेंसी नोटों की लगातार बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए प्लास्टिक या पॉलीमर नोट छापने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पटना और मुंबई में हुई केंद्रीय बैंक की पिछली दो बोर्ड बैठकों में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई है। पॉलिमर नोटों की टिकाऊपन और कम उत्पादन लागत के कारण यह निर्णय लिया जा रहा है। ऐसी संभावना है कि आम जनता के लिए प्लास्टिक नोटों के इस्तेमाल का पायलट प्रोजेक्ट जल्द ही शुरू किया जा सकता है। प्लास्टिक के नोट कागज के नोटों की जगह क्यों लाए जा रहे? इस निर्णय के पीछे मुख्य कारण लागत और नोटों का टिकाऊपन है। RBI सूत्रों के अनुसार, पॉलिमर नोटों की उत्पादन लागत वर्तमान में चल रहे कागज के नोटों की तुलना में काफी कम है। इसके अलावा, भारत तकनीकी रूप से आधुनिक हो चुका है और देश के एटीएम को इन प्लास्टिक नोटों को आसानी से निकालने के लिए अपग्रेड किया जाएगा। पुराने और गंदे नोटों को नष्ट करने में क्या दिक्कतें आ रही हैं? कागजी नोट ज्यादा साल तक नहीं चल पाते हैं, जिससे वे मूल कागज और गंदे नोटों की तुलना में निम्न गुणवत्ता के होते हैं। आरबीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 (FY25) में ही लगभग ₹23.8 अरब मूल्य के नोट नष्ट किए गए, जो पिछले वर्ष ₹21.24 अरब की तुलना में 12.3 प्रतिशत अधिक है। इनमें सबसे अधिक संख्या ₹500 और ₹100 के नोटो की थी। इतनी बड़ी मात्रा में करेंसी नोटों को नष्ट करना और नए नोट छापना सरकारी खर्च पर भारी बोझ डालता है। वित्त वर्ष 2024-25 में नोट छापने की लागत ₹6,372.8 करोड़ थी, जो पिछले वर्ष (₹5,101.4 करोड़) की तुलना में काफी अधिक है। प्लास्टिक नोटों की शुरुआत से इस खर्च में काफी कमी आएगी। डिजिटल पेमेंट के युग में भी कैश की मांग क्यों बढ़ी? देश में यूपीआई और डिजिटल लेनदेन तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन नकदी (कैश) की मांग में कोई बदलाव नहीं आया है। 15 मई तक, बाजार में कुल नकदी (सीआईसी) 11.5 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड ₹42.86 लाख करोड़ के उच्च स्तर पर पहुंच गई। छोटे नोटों (10 और 20 रुपये) की मांग अधिक होने के बावजूद, कुल सीआईसी में उनकी हिस्सेदारी क्रमशः 0.7% और 0.8% है। सरकार ने सिक्कों को बढ़ावा देने का प्रयास किया, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई है। 2012 का ट्रायल फेल, अब क्या नया बदलाव? भारत में प्लास्टिक नोटों पर चर्चा पहली बार नहीं हो रही है। 2012 में, तत्कालीन यूपीए सरकार ने पांच शहरों में परीक्षण के तौर पर 1 अरब प्लास्टिक के 10 रुपये के नोट जारी करने का फैसला किया था। हालांकि, एटीएम और बैंकों में तकनीकी समस्याओं के कारण परियोजना को रोक दिया गया था। हालांकि, पिछले एक दशक में तकनीक में काफी बदलाव आया है। रिपोर्ट्स का कहना है कि अब एटीएम इन टूल्स से आसानी से पुराने और पुराने तकनीकी छात्रों को आसानी से पहचाना जा सकता है। दुनिया में किन देशों में चलते हैं प्लास्टिक नोट? पॉलिमर या प्लास्टिक के नोट वर्तमान में लगभग 60 देशों में चल रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया 1988 में प्लास्टिक का 10 डॉलर का नोट जारी करने वाला पहला देश था। सिंगापुर, इंडोनेशिया, थाईलैंड, मलेशिया, रोमानिया और कनाडा जैसे देशों ने भी बाद में इन्हें अपना लिया। वहीं, अमेरिकी डॉलर अभी भी कपास और लिनन के विशेष मिश्रण से बनाया जाता है।  

RBI देगा सरकार को अब तक का सबसे बड़ा डिविडेंड; रिकॉर्ड 2.87 ट्रिलियन रुपये के ट्रांसफर को बोर्ड की मंजूरी

नई दिल्ली ग्लोबल टेंशन के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) सरकार के लिए संकटमोचक बनेगा । दरअसल, RBI की ओर से इस वर्ष सरकार को अब तक का सबसे अधिक डिविडेंड दिए जाने की दी मंजूरी । ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार सरकार को इस हफ्ते रिजर्व बैंक से रिकॉर्ड 2.87 ट्रिलियन रुपये रुपये का सरप्लस ट्रांसफरमिलेगा । RBI बोर्ड शुक्रवार को इस डिविडेंड को मंजूरी दी । बता दें कि RBI ने 2024-25 के लिए केंद्र सरकार को 2.69 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड डिविडेंड दिया था जो इससे पिछले वर्ष 2023-24 के 2.11 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 27 प्रतिशत अधिक था। बहुत से लोगों को लगता है कि आरबीआई किसी निजी कंपनी की तरह अपने शेयरधारकों को डिविडेंड देता होगा, लेकिन ऐसा नहीं है. आरबीआई पूरी तरह देश का केंद्रीय बैंक है और भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम 1934 की धारा 47 के तहत यह तय है कि अपने खर्च और जरूरी रिजर्व फंड अलग रखने के बाद जो अतिरिक्त पैसा बचेगा, उसे केंद्र सरकार को ट्रांसफर किया जाएगा. इसी अतिरिक्त रकम को सरप्लस ट्रांसफर या डिविडेंड कहा जाता है. सरकार के लिए यह गैर कर राजस्व का सबसे बड़ा स्रोत माना जाता है. इस पैसे का इस्तेमाल वित्तीय घाटा कम करने, सड़क, रेलवे और हाईवे जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को फंड करने और कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च बढ़ाने के लिए किया जाता है।  RBI आखिर कमाई कैसे करता है आरबीआई आम बैंकों की तरह लोगों को लोन नहीं देता, लेकिन उसके पास कमाई के कई बड़े स्रोत होते हैं।      सबसे बड़ा जरिया विदेशी मुद्रा भंडार यानी फॉरेक्स रिजर्व है. आरबीआई अरबों डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार को अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड जैसी सुरक्षित जगहों पर निवेश करता है, जिससे उसे ब्याज के रूप में भारी कमाई होती है।      इसके अलावा डॉलर और रुपये की खरीद-बिक्री से भी केंद्रीय बैंक को फायदा होता है. जब बाजार में रुपये पर दबाव बढ़ता है, तब आरबीआई डॉलर बेचकर बाजार को स्थिर करने की कोशिश करता है. इसी तरह के फॉरेक्स ऑपरेशंस से भी मुनाफा कमाया जाता है।      सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला ब्याज और नोट छापने की लागत और उसकी वास्तविक वैल्यू के बीच का अंतर भी आरबीआई की कमाई का हिस्सा होता है।  इस बार रिकॉर्ड डिविडेंड की वजह क्या है वित्त वर्ष 2026 के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में करीब 10 प्रतिशत की कमजोरी देखने को मिली. इससे आरबीआई की विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों का मूल्य बढ़ा और उसकी बैलेंस शीट मजबूत हुई. इसके अलावा केंद्रीय बैंक ने रुपये की तेज गिरावट को रोकने के लिए डॉलर बेचकर बाजार में सक्रिय हस्तक्षेप किया. इससे भी आरबीआई को अच्छा फायदा हुआ. भारत का विदेशी मुद्रा भंडार भी बढ़कर करीब 688 अरब डॉलर तक पहुंच गया. निवेश से बेहतर रिटर्न और फॉरेक्स ऑपरेशंस की मजबूत कमाई ने केंद्रीय बैंक के सरप्लस को और बढ़ाने में मदद की।  सरकार के लिए क्यों अहम है यह रकम पिछले कुछ वर्षों में आरबीआई से मिलने वाला डिविडेंड तेजी से बढ़ा है और यह सरकार के लिए बेहद अहम राजस्व स्रोत बन चुका है. पिछले तीन वित्त वर्षों में यह रकम तीन गुना से ज्यादा बढ़ चुकी है. अगर इस बार सरकार को 3.5 लाख करोड़ रुपये तक का डिविडेंड मिलता है, तो इससे सरकार को उधारी कम लेने में मदद मिल सकती है. साथ ही वित्तीय घाटे को नियंत्रित रखने और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर खर्च जारी रखने में भी राहत मिलेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भी आरबीआई की ओर से सरकार को ऊंचे स्तर का डिविडेंड मिलता रह सकता है, हालांकि केंद्रीय बैंक ने अभी तक आधिकारिक तौर पर संभावित भुगतान पर कोई टिप्पणी नहीं की है।  रिजर्व बैंक केैसे करता है कमाई? RBI अपनी विदेशी मुद्रा संपत्तियों, सरकारी बॉन्ड निवेश और करेंसी छपाई से होने वाली आय के जरिए यह सरप्लस कमाता है। बहरहाल, यह सरप्लस ऐसे समय में मिलने जा रहा है जब अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जंग की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। इससे भारत का आयात बिल बढ़ने, चालू खाते के घाटे पर दबाव बनने और विदेशी निवेशकों की बिकवाली तेज होने की आशंका है। इसी दबाव के बीच RBI का यह बड़ा भुगतान सरकार के लिए राहत का काम करेगा। क्या कहते हैं एक्सपर्ट? PGIM इंडिया एसेट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड में फिक्स्ड इनकम के प्रमुख पुनीत पाल के मुताबिक बॉन्ड मार्केट पहले से ही RBI से मिलने वाले लगभग 3 ट्रिलियन रुपये के भुगतान को अपनी कीमतों में शामिल कर चुका है। उन्होंने कहा कि ज्यादा डिविडेंड राजकोषीय प्रबंधन में मदद कर सकता है लेकिन इसका तब तक कोई खास असर नहीं पड़ेगा जब तक कि यह काफी ज्यादा न हो।

गिरते रुपये पर RBI का बड़ा एक्शन संभव, महंगी हो सकती है लोन EMI

नई दिल्‍ली डॉलर के मुकाबले रुपये में आ रही रिकॉर्ड गिरावट ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की चिंताएं बढ़ा दी हैं. इस गिरावट को थामने और अर्थव्यवस्था को स्थिरता देने के लिए केंद्रीय बैंक अब कुछ सख्त कदम उठा सकता है. ब्‍याज दरों में बढ़ोतरी भी केंद्रीय बैंक कर सकता है. मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा समेत शीर्ष अधिकारियों ने हाल के दिनों में बैठकें की हैं. सूत्रों के मुताबिक, इन बैठकों में रुपये को संभालने के लिए ब्याज दरें बढ़ाने से लेकर विदेशी निवेशकों से डॉलर जुटाने जैसे तमाम कड़े विकल्पों पर गंभीरता से मंथन किया जा रहा है।  इस सप्ताह रुपया डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक निचले स्तर पर गिरकर लगभग 97 प्रति डॉलर के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. इस तेज गिरावट ने केंद्रीय बैंक की नींद उड़ा दी है. रुपये की कमजोरी को रोकने के लिए नीतिगत ब्याज दरों (Repo Rate) में बढ़ोतरी में खूब काम आ सकती है. केंद्रीय बैंक इस विकल्प पर बहुत गंभीरता से विचार कर रहा है. आरबीआई की अगली एमपीसी मीटिंग 5 जून से शुरू होगी, लेकिन संकट की गंभीरता को देखते हुए रिजर्व बैंक तय कार्यक्रम से पहले भी इमरजेंसी मीटिंग बुलाकर दरों में बदलाव कर सकता है. इससे पहले मई 2022 में भी आरबीआई तय शेड्यूल से अलग जाकर अचानक ब्याज दरें बढ़ा चुका है।  लोन हो जाएंगे महंगे यदि आरबीआई ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर देता है तो बैंकों को केंद्रीय बैंक से कर्ज महंगा मिलेगा. नतीजा यह होगा कि कमर्शियल बैंक भी आम जनता के लिए होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरें बढ़ा देंगे, जिससे आम आदमी पर मासिक ईएमआई का बोझ बढ़ जाएगा।  2013 वाले फॉर्मूले की तैयारी रुपये में गिरावट की रफ्तार उम्मीद से कहीं ज्यादा तेज है. हालांकि, देश की आर्थिक बुनियाद मजबूत है और बैंकिंग प्रणाली भी पूरी तरह स्थिर है, लेकिन वैश्विक दबाव के चलते यह मजबूती विनिमय दर (Exchange Rate) में दिखाई नहीं दे रही है. इस स्थिति से निपटने के लिए आरबीआई साल 2013 के “टेपर टैंट्रम” संकट के दौरान आजमाए गए फॉर्मूले को दोबारा लागू करने पर विचार कर रहा है. उस समय भी रुपये को बचाने के लिए विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ाने के उद्देश्य से स्थानीय बैंकों के माध्यम से एनआरआई (NRI) जमा योजनाएं शुरू की गई थीं।  रुपये की सेहत सुधारने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाना बेहद जरूरी है. इसके लिए आरबीआई इस बार बड़े पैमाने पर फंड जुटाने की प्लानिंग कर रहा है. आरबीआई का अनुमान है कि अप्रवासी भारतीयों के लिए विशेष डिपॉजिट स्कीम लाकर इस बार लगभग 50 अरब डॉलर तक जुटाए जा सकते हैं, जबकि 2013 के संकट के दौरान इसके जरिए 30 अरब डॉलर जुटाए गए थे।  इन पर भी हो रहा विचार डॉलर की किल्लत दूर करने के लिए अन्य देशों के केंद्रीय बैंकों के साथ अतिरिक्त करेंसी स्वैप एग्रीमेंट किए जा सकते हैं. संप्रभु डॉलर बॉन्ड (Sovereign Dollar Bond): विदेशों से सीधे डॉलर जुटाने के लिए सरकार की मदद से डॉलर बॉन्ड जारी करने पर भी विचार हो रहा है, हालांकि इस पर अंतिम फैसला पूरी तरह केंद्र सरकार को लेना होगा। 

महंगाई के मोर्चे पर राहत भरी खबर: अप्रैल में CPI 3.48%, खाने-पीने की कई चीजें हुईं सस्ती

नई दिल्ली  अप्रैल 2026 के लिए कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) और कंज्यूमर फूड प्राइस इंडेक्स (CFPI) पर आधारित खुदरा महंगाई दर के अनंतिम (Provisional) आंकड़े जारी कर दिए गए हैं। नए आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल में आम जनता को महंगाई के मोर्चे पर मिली-जुली राहत मिली है। जहां एक तरफ आलू-प्याज जैसी रोजमर्रा की सब्जियों के दाम घटे हैं, वहीं सोने-चांदी के गहनों और टमाटर ने आम आदमी की जेब पर भारी बोझ डाला है। महंगाई रफ्तार पकड़ रही है। अप्रैल में भारत में खुदरा महंगाई में बड़ा उछाल देखने को मिला है। देश में खुदरा महंगाई को दिखाने वाले संकेतक कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) में 3.48 % का उछाल आया है। यह लगातार छठवां महीना है, जब देश में महंगाई बढ़ी है। इससे पहले मार्च 2026 में CPI 3.40% पर पहुंच गया था। लगातार छठवें महीने बढ़ी महंगाई देश में महंगाई एक बार फिर आम आदमी की जेब पर दबाव बढ़ाने लगी है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल 2026 में खुदरा महंगाई दर यानी CPI Inflation बढ़कर 3.48% पर पहुंच गई। मार्च 2026 में यह 3.40% थी। लगातार छठे महीने CPI में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे महंगाई अब 1 साल के शीर्ष स्तर पर पहुंच गई है। रसोई का बजट फिर बिगड़ा खाद्य महंगाई भी बढ़कर 4.20% हो गई है। ग्रामीण इलाकों में खाद्य महंगाई 4.26% और शहरी क्षेत्रों में 4.10% रही। इसका सीधा असर रसोई के बजट पर पड़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल में भोजन और पेय पदार्थों की महंगाई 4.01% दर्ज हुई। चांदी ने दिया सबसे बड़ा झटका सबसे ज्यादा झटका कीमती धातुओं ने दिया। चांदी के गहनों की महंगाई दर 144.34% रही, जबकि सोना, डायमंड और प्लैटिनम ज्वेलरी 40.72% महंगी हुई। नारियल, टमाटर और फूलगोभी की कीमतों में भी तेज उछाल देखने को मिला। इन चीजों में मिली राहत हालांकि कुछ वस्तुओं में राहत भी मिली है। आलू की कीमतों में 23.69% और प्याज में 17.67% की गिरावट दर्ज की गई। मोटर कार और एयर कंडीशनर जैसी वस्तुएं भी सस्ती हुई हैं। किन राज्यों में सबसे ज्यादा महंगाई? राज्यों की बात करें तो तेलंगाना में सबसे ज्यादा 5.81% महंगाई दर्ज हुई। इसके बाद पुडुचेरी, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु का नंबर रहा। वहीं दिल्ली में महंगाई दर 1.96% रही, जो बड़े राज्यों में अपेक्षाकृत कम है। कैटेगरी अप्रैल 2026 मार्च 2026 स्थिति खुदरा महंगाई दर (CPI) 3.48% 3.40% बढ़ोतरी खाद्य महंगाई (CFPI) 4.20% 3.87% बढ़ोतरी ग्रामीण महंगाई 3.74% 3.63% बढ़ोतरी शहरी महंगाई 3.16% 3.11% बढ़ोतरी भोजन और पेय पदार्थ 4.01% 3.40% बढ़ोतरी हाउसिंग इंफ्लेशन 2.15% — स्थिर चांदी ज्वेलरी महंगाई 144.34% 148.42% बेहद ऊंची गोल्ड/डायमंड/प्लैटिनम ज्वेलरी 40.72% 45.88% ऊंची टमाटर महंगाई 35.28% 36.00% ऊंची फूलगोभी महंगाई 25.58% 34.16% ऊंची आलू -23.69% -19.03% सस्ता प्याज -17.67% -27.78% सस्ता सबसे ज्यादा महंगाई वाला राज्य तेलंगाना (5.81%) — शीर्ष पर दिल्ली महंगाई दर 1.96% — अपेक्षाकृत कम   RBI की बढ़ सकती है टेंशन महंगाई में लगातार बढ़ोतरी भारतीय रिजर्व बैंक के लिए भी चिंता बढ़ा सकती है। अगर आने वाले महीनों में खाद्य कीमतों में राहत नहीं मिलती है तो ब्याज दरों पर RBI का रुख सख्त हो सकता है। ऐसे में EMI से लेकर रोजमर्रा के खर्च तक आम आदमी पर दबाव और बढ़ने की आशंका है।

RBI गवर्नर की चेतावनी: वेस्ट एशिया संकट से देश की अर्थव्यवस्था पर होगा बड़ा असर

नई दिल्‍ली वेस्‍ट एशिया संकट को लेकर आरबीआई गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने बड़ी चेतावनी दी है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के मॉनेटरी पॉलिसी बैठक में कहा गया है कि आने वाले समय में महंगाई बढ़ने वाली है. साथ ही जीडीपी को लेकर भी चेतावनी दी है. हालांकि, आरबीआई ने राहत देते हुए रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है।  मिडिल ईस्‍ट में आए संकट का असर भारतीय नागरिकों पर कम करने के लिए रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर अनचेंज रखा है. बढ़ती ग्रोथ के साथ महंगाई को कंट्रोल में रखने के लिए आरबीआई ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया. इस बैठक में आरबीआई ने अपना रुख न्‍यूट्रल रखा है।  महंगाई को लेकर चेतावनी आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा महंगाई अनुमान 4.6 फीसदी रखा है. वहीं वित्त वर्ष 2027 के लिए कोर महंगाई अनुमान 4.4 फीसदी किया है. वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के लिए खुदरा महंगाई अनुमान बिना बदलाव के 4 फीसदी पर रखा है. वहीं,वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही के लिए महंगाई अनुमान 4.2 फीसदी से बढ़ाकर 4.4 फीसदी कर दिया है. इसी तरह वित्त वर्ष 2027 की तीसरी तिमाही के लिए महंगाई अनुमान 4.7 फीसदी से बढ़ाकर 5.2 फीसदी किया गया है।  जीडीपी ग्रोथ कम होने का अनुमान  आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी ग्रोथ अनुमान 6.9 लगाया है, जो वित्त वर्ष 2026 के अनुमान 7.4 फीसदी से कम है.  वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में रीयल जीडीपी ग्रोथ अनुमान 6.8 फीसदी रखा है, जो पहले 6.9 फीसदी था. वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में रीयल GDP अनुमान 6.9 रखा है।  आरबीआई गवर्नर ने क्‍या दी चेतावनी?  केंद्रीय बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने अल नीनो की संभावित परिस्थितियों के उभरने की आशंका जताई है, जो भारत के महंगाई दर के लक्ष्‍यों के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं. साथ ही उन्‍होंने कहा कि तनाव के कारण एनर्जी कीमतों में हाल ही में हुई बढ़ोतरी एक रिस्‍क के तौर पर उभरा है. हालांकि,  पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें अब तक अपरिवर्तित रही हैं. खुदरा महंगाई फरवरी में बढ़कर 3.21 प्रतिशत हो गई, जो 11 महीनों में सबसे अधिक है. थोक कीमतें एक साल से अधिक समय में अपने उच्चतम स्तर 2.13 प्रतिशत पर पहुंच गईं। 

RBI का ऐलान: इस बार भी रेपो रेट में ‘No Change’, EMI नहीं घटेगी

नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की एमपीसी बैठक के नतीजे आ गए हैं और आरबीआई गवर्नर ने बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण फैसलों के बारे में जानकारी दी. बीते फरवरी महीने की तरह इस बैठक में भी रेपो रेट को 5.25% पर यथावत रखा गया है, यानी इसमें कोई भी बदलाव नहीं किया गया है. इसका सीधा मतलब है कि आपके होम लोन या कार लोन की ईएमआई पर कोई भी असर नहीं होगा, न तो ये घटेगी और न ही ये बढ़ेगी।  गवर्नर संजय मल्होत्रा ने एमपीसी बैठक के नतीजों का ऐलान करते हुए आगे कहा कि समिति ने न्यूट्रल रुख बनाए रखा है. रेपो रेट को यथावत रखने के साथ ही SDF 5%, MSF 5.50% पर स्थिर हैं. इसके अलावा FY27 के लिए रियल जीडीपी ग्रोथ 6.9% रहने का अनुमान जाहिर किया है।  2025 में हुई थी दनादन कटौती बता दें कि बीते साल 2025 में आरबीआई ने एक के बाद एक कई बार रेपो रेट में कटौती कर लोन लेने वालों को तोहफा दिया था और Repo Rate में कुल 125 अंकों की कटौती की गई थी. लेकिन इस साल की पहली बैठक फरवरी में हुई थी और उसमें कटौती के सिलसिले पर ब्रेक लगा था और इस बार फिर इसमें कोई बदलाव न करते हुए केंद्रीय बैंक ने 5.25 फीसदी पर स्थिर रखा था. पहले से ही ज्यादातर अर्थशास्त्री Repo Rate Unchanged रहने का अनुमान जाहिर कर रहे थे।  कैसे EMI पर असर डालता है रेपो रेट?  रेपो रेट (Repo Rate) वह दर होती है, जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक तमाम बैंकों को कर्ज देती है. इसका उपयोग अर्थव्यवस्था में महंगाई को कंट्रोल करने के लिए भी किया जाता है. जब रेपो रेट बढ़ता है, तो बैंकों के लिए लोन लेना महंगा हो जाता है, जिससे आम जनता के लिए होम लोन या ऑटो लोन की EMI बढ़ जाती है।  इस रफ्तार से भागेगी इंडियन इकोनॉमी आरबीआई की ओर से देश की जीडीपी ग्रोथ को लेकर भी अनुमान जाहिर किए गए हैं. गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि  FY26 के लिए रियल जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 7.6% रखा गया है. जबकि  FY27 के लिए रियल जीडीपी ग्रोथ 6.9% रहने का अनुमान है. पहली तिमाही के लिए इसे कम करते हुए 6.8% किया गया है।  महंगाई को लेकर ये अनुमान Indian GDP के साथ ही आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा महंगाई का अनुमान भी जाहिर किया. उनके मुताबिक, 2027 में खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation) 4.6% किया गया है. उन्होंने FY27 की पहली तिमाही में CPI बेस्ड महंगाई 4% रहने का अनुमान जताया है, जबकि दूसरी तिमाही के लिए इसे 4.4% किया गया है. इसके अलावा तीसरी तिमाही (Q3) के लिए महंगाई बढ़ने की आशंका जताई गई है और अनुमान को 5.2% किया गया है।  'भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत' मिडिल ईस्ट युद्ध और ग्लोबल टेंशन के अलावा डॉलर के मजबूत होने, क्रूड ऑयल की कीमतों में इजाफा होने को लेकर बात करते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि ग्लबोल टेंशनों से दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं पर बुरा असर पड़ा, लेकिन भारत में इसका कोई खास प्रभाव देखने को नहीं मिला है. दुनियाभर के शेयर बाजार और कमोडिटी मार्केट में उथल-पुथल देखने को मिली. उन्होंने कहा कि ग्लोबल इकोनॉमी के लिए चुनौतियां बनी हुई हैं. ग्लोबल सप्लाई चेन में रुकावटों से आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ रहा है। 

साइबर ठगी के शिकार? RBI देगी राहत, अब डिजिटल फ्रॉड पर मिलेगा मुआवजा

मुंबई डिजिटल ट्रांजेक्शन के दौर में ऑनलाइन ठगी का शिकार होने वाले करोड़ों भारतीयों के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) राहत की एक बड़ी योजना लेकर आया है। आरबीआई ने डिजिटल लेनदेन में ग्राहकों की सुरक्षा और जवाबदेही से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव का एक प्रारूप (Draft) पेश किया है। इस नई नीति का मुख्य उद्देश्य छोटे मूल्य की धोखाधड़ी (Small Value Frauds) के लिए ग्राहकों को सीधा मुआवजा दिलाना और बैंकों की जिम्मेदारी तय करना है। प्रस्तावित समय-सारणी के अनुसार, जनता 6 अप्रैल, 2026 तक इस ड्राफ्ट पर अपने सुझाव दे सकती है और ये नियम 1 जुलाई, 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो सकते हैं। अब बैंकों को साबित करनी होगी ग्राहक की गलती नए नियमों के तहत, डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में 'सबूत' जुटाने का पूरा बोझ अब बैंकों के कंधों पर होगा।     बैंक की जिम्मेदारी: बैंक को यह सिद्ध करना होगा कि धोखाधड़ी ग्राहक की लापरवाही से हुई है, न कि बैंकिंग सिस्टम की किसी खामी से।     व्यापक परिभाषा: 'अधिकृत इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन' के दायरे को बढ़ाकर अब इसमें जबरदस्ती (Coercion) या धोखे से कराए गए भुगतान को भी शामिल किया गया है। इन स्थितियों में ग्राहक की होगी 'जीरो लायबिलिटी' (Zero Liability):     बैंक की चूक: यदि फ्रॉड बैंक की किसी तकनीकी कमी या लापरवाही के कारण हुआ हो।     थर्ड-पार्टी ब्रीच: यदि किसी तीसरे पक्ष की गलती से नुकसान हुआ है और ग्राहक 5 दिनों के भीतर इसकी सूचना बैंक को दे देता है। छोटे फ्रॉड के लिए मुआवजे का नया मॉडल RBI ने पहली बार ₹50,000 तक के डिजिटल फ्रॉड के लिए एक विशेष मुआवजे के ढांचे का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत पीड़ित को उसके शुद्ध नुकसान का 85% या अधिकतम ₹25,000 (जो भी कम हो) वापस मिल सकेगा। मुआवजे की शर्तें:     यह लाभ एक व्यक्ति को जीवन में केवल एक बार ही मिल सकेगा।     धोखाधड़ी की रिपोर्ट 5 दिनों के भीतर बैंक और साइबर क्राइम पोर्टल दोनों पर दर्ज करना अनिवार्य होगा। अलर्ट और रिपोर्टिंग के लिए सख्त निर्देश सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए RBI ने बैंकों के लिए नए रिपोर्टिंग मानक तय किए हैं:     अनिवार्य SMS अलर्ट: ₹500 से अधिक के हर डिजिटल लेनदेन पर बैंक को तुरंत SMS अलर्ट भेजना होगा।     24×7 रिपोर्टिंग चैनल: बैंकों को डिजिटल फ्रॉड की शिकायत के लिए चौबीसों घंटे चालू रहने वाली हेल्पलाइन या पोर्टल की सुविधा देनी होगी। RBI का यह कदम न केवल ग्राहकों का डिजिटल बैंकिंग पर भरोसा बढ़ाएगा, बल्कि बैंकों को अपने सुरक्षा तंत्र को और अधिक मजबूत करने के लिए भी प्रेरित करेगा।

साइबर वॉर में AI टूल का आगाज, RBI का MuleHunter फर्जी बैंक खातों को करेगा खत्म

 नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सहायक फर्म Reserve Bank Innovation Hub ने एक एडवांस्ड AI टूल तैयार किया है, जो साइबर क्रिमिनल्स, स्कैमर्स और डिजिटल अरेस्ट करने वालों पर नकेल कसेगा. इस AI टूल का नाम MuleHunter.AI है. यह AI टूल हर महीने लगभग 20,000 म्यूल अकाउंट्स का पता लगाकर उन्हें बंद कर रहा है। डिजिटल अरेस्ट, साइबर फ्रॉड और अन्य ऑनलाइन फर्जीवाड़ों के पीछे के एक विशाल फर्जी बैंक अकाउंट का नेटवर्क होता है, जिसे म्यूल अकाउंट भी कहते हैं। इन फर्जी अकाउंट (म्यूल अकाउंट) का यूज ठगी गई रकम ट्रांसफर को एक जगह से दूसरी जगह पर भेजने में इस्तेमाल किया जाता है. कई साल से साइबर क्रिमिनल्स म्यूल अकाउंट नेटवर्क का यूज करके भोले-भाले लोगों को शिकार बना रहे हैं। म्यूल अकाउंट को पकड़ना क्यों मुश्किल है म्यूल अकाउंट को पकड़ना इसलिए मुश्किल होता है क्योंकि ये बहुत थोड़े समय के लिए होते हैं. जैसे ही म्यूल अकाउंट को ओपन किया जाता है, उसके कुछ दिन बाद ही बंद कर दिया जाता है. ज्यादातर म्यूल अकाउंट को फर्जी डॉक्यूमेंट के आधार पर ओपन किया जाता है। अमित शाह भी कर चुके हैं तारीफ  केंद्रीय गृह मंत्री अमित ने हाल ही में बढ़ते हुए साइबर अपराधों के खिलाफ इसको एक अहम हथियार बताया है. ये टूल सिर्फ साइबर ठगी को ट्रैक नहीं करता है, बल्कि उसकी धड़कन को समझता है। म्यूल अकाउंट को कर देगा फ्रीज  साइबर ठगी के बाद जैसे ही म्यूल अकाउंट के जरिए रुपये को एक अकाउंट से दूसरे बैंक अकाउंट और फिर तीसरे बैंक अकाउंट में ट्रांसफर किया जाता है. यह सिस्टम उसको ट्रैक करता है और ट्रांजैक्शन को रोक देता है. साथ ही बैंक अकाउंट को फ्रीज कर देता है।  कई बैंकों में यूज हो रहा सिस्टम  बताते चलें कि यह टूल अभी करीब दो दर्जन बैंक सिस्टम में यूज जा रहा है. MuleHunter.AI टूल का असली मकसद साइबर ठगों के खातों की पहचान करना और उनको बंद करना है। MuleHunter.AI क्या है     इसे Reserve Bank Innovation Hub ने डेवलप किया है, जो भारतीय रिजर्व बैंक की सहायक कंपनी है.      यह एक स्पेशल सिस्टम है, जो म्यूल अकाउंट्स के नेटवर्क को खत्म करने के लिए खासतौर से तैयार किया गया है.      अन्य सिस्टम के तहत घटना के बाद धोखाधड़ी पकड़ते हैं. यह टूल गोल्डन ऑवर में ही अपराध पकड़ लेता है.  कैसे काम करता है ये सिस्टम      यह टूल संदिग्ध लेनदेन को पैसा निकलने से पहले ही फ्रीज करने की काबिलियत रखता है.      यह मशीन लर्निंग का इस्तेमाल करता है और तुरंत काम होता है.      यह बैंक खातों में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को डिटेक्ट करता है.      खास पैटर्न के आधार पर यह खातों के मिसयूज की तुरंत पहचान कर लेता है.  I4C ने कई लाख म्यूल अकाउंट की पहचान की  इंडियन साइबर क्राइम कॉर्डिनेशन सेंटर (I4C) के मुताबिक, 31 दिसंबर 2025 तक 26.5 लाख लेयर-1 म्यूल अकाउंट्स की पहचान की गई थी. करीब 20,000 करोड़ रुपये साइबर क्रिमिमनल्स द्वारा लूटे जाने वाले पैसे में से 8,189 करोड़ रुपये पीड़ितों को वापस मिल चुके हैं। सबसे ज्यादा म्यूल अकाउंट कहां मिले हरियाणा के नूंह में 2025 में 1,000 से ज्यादा म्यूल अकाउंट पकड़े जा चुके हैं. वहीं जामताड़ा में 350 से ज्यादा ऐसे खाते पकड़े जा चुके हैं। होम मिनिस्ट्री ने दी है डेडलाइन  होम मिनिस्ट्री ने दिसंबर 2026 तक सभी फाइनेंशियल इंस्टीट्यूट को MuleHunter प्लेटफॉर्म से कनेक्ट होने की डेडलाइन दी है. इसमें बैंक सरकारी फाइनेंशियल एजेंसियां भी हैं।

‘अब नहीं होंगे हिडन चार्जेज…’ RBI ने बैकों को दिए आदेश, ऐप से हटाएं धोखाधड़ी वाली ट्रिक्स

नई दिल्ली आपके साथ भी ऐसा होता होगा कि आप अपने बैंक का ऐप खोलते हैं और उसमें अतिरिक्त सेवाओं को खरीदने के लिए बार-बार मैसेज या नोटिफिकेशन आने लगते हैं. इनमें से कई मिडलीडिंग भी होते हैं. या फिर चेकआउट के समय आपको हिडन शुल्क दिखाई दिए हों, तो आप अकेले ऐसे यूजर नहीं हैं. अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ऐसे मामलों में सख्त नजर आ रहा है और डिजिटल बैंकिंग को अधिक पारदर्शी बनाने के क्रम में बैंकों को कड़ा आदेश दिया है.  आरबीआई ने कहा- 'हटा लें ये सब…' केंद्रीय बैंक ने अब 'Responsible Business Conduct Amendment Directions, 2026', के ड्राफ्ट में बैंकों को सख्त निर्देश दिया है. आरबीआई ने कहा है कि बैंक जुलाई 2026 तक अपनी वेबसाइटों और मोबाइल ऐप से सभी डार्क पैटर्न (Dark Patterns) हटा दें, जो कि ग्राहकों को गुमराह करने या उन पर दबाव डालने के लिए डिजाइन की गई ट्रिक्स हैं. इसमें बैंकों द्वारा वित्तीय उत्पादों और किसी भी सेवा की पेशकश से पहले ग्राहक की स्पष्ट सहमति अनिवार्य रूप से लें. RBI के इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहकों को उचित जानकारी के बिना उत्पाद खरीदने या शुल्क चुकाने के लिए गुमराह कतई न किया जाए. बैंकों को ग्राहक की स्पष्ट अनुमति के बिना वित्तीय उत्पादों को एक साथ बेचने पर भी रोक लगा दी जाएगी. RBI क्यों डार्क पैटर्न पर सख्त?  डार्क पैटर्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल की जाने वाली ऐसी डिजाइन तकनीकें हैं, जिनका उद्देश्य यूजर के व्यवहार को प्रभावित करना होता है, जिसे वे आसानी से पूरी तरह समझ न सकें. इनमें हिडन चार्ज, भ्रमित करने या प्रलोभन देने वाले विकल्प या फिर ग्राहकों को अतिरिक्त सेवाएं स्वीकार करने के लिए बार-बार प्रेरित करने वाले संकेत शामिल हो सकते हैं. बैंकों को इन ट्रिक्स पर रोक के संबंध में आरबीआई द्वारा दिए गए निर्देश, ये सुनिश्चित करने के लिए हैं, कि ग्राहकों को ठीक से पता हो कि वे किस चीज के लिए साइन-अप कर रहे हैं. यानी वे गुमराह न हों.  सर्वे में हुआ ये बड़ा खुलासा  इंडिया टुडे पर छपी रिपोर्ट के मुताबिक, लोकलसर्कल्स द्वारा किए गए एक सर्वे से पता चलता है कि इस तरह की ट्रिक्स का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है. RBI का यह कदम इस सर्वे के परिणामों के बाद आया है. इसमें 388 जिलों के 1,61,000 से अधिक लोगों से प्रतिक्रियाओं को शामिल किया गया. निष्कर्षों से पता चला है कि इस तरह की गुमराह करने वालीं डार्क पैटर्न ट्रिक्स कई ऑनलाइन बैंकिंग प्लेटफार्मों पर आम बात हैं. सर्वे में शामिल यूजर्स ने बताया कि हिडन चार्ज के बारे में खुलासा शुरुआत में स्पष्ट रूप से नहीं किया जाता है और किसी भी प्रक्रिया के अंत में इन छिपे हुए शुल्कों का सामना ग्राहक को करना पड़ता है. इसके अलावा ग्राहकों को अतिरिक्त सेवाओं को एक्टिव करने के लिए बार-बार नोटिफिकेशन परेशान करने वाले होते हैं.  जुलाई तक हटाने होंगे डार्क पैटर्न बैंकों को जुलाई 2026 तक डार्क पैटर्न को पूरी तरह से हटाने और नए नियमों का पालन करने का समय दिया गया है. RBI द्वारा मोबाइल बैंकिंग (Mobile Banking) पर लोगों की बढ़ती निर्भरता को देखते हुए ये कदम उठाया गया है, जो डिजिटल वित्तीय सेवाओं को आसान, निष्पक्ष और अधिक भरोसेमंद बनाने के लिए है. 

साइबर ठगी के शिकार ग्राहकों के लिए बड़ी खबर, RBI देगा 25 हजार रुपये तक मुआवजा

नई दिल्ली केंद्रीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने साइबर फ्रॉड के शिकार ग्राहकों के लिए बड़ी योजना बनाई है। अब ऐसे ग्राहकों को धोखाधड़ी वाले ट्रांजैक्शन के मामले में 25,000 रुपये तक का हर्जाना मिल सकेगा। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद जारी बयान में इसके बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कम मूल्य के धोखाधड़ी वाले ट्रांजैक्शन के मामलों में 25,000 रुपये तक का हर्जाना देने के लिए एक फ्रेमवर्क लाने का प्रस्ताव है। 50 हजार रुपये तक के फ्रॉड मामले शामिल इसमें 50 हजार रुपये या उससे कम की धोखाधड़ी के मामलों को शामिल किया जाएगा। आरबीआई गवर्नर ने बताया कि "बिना कोई सवाल पूछे" ग्राहकों को 85 प्रतिशत राशि (अधिकतम 25 हजार रुपये) वापस की जायेगी। धोखाधड़ी की राशि में से 15 प्रतिशत का नुकसान ग्राहक को उठाना होगा और 15 प्रतिशत का नुकसान संबंधित बैंक उठाएगा। शेष 70 प्रतिशत राशि आरबीआई देगा। हालांकि, किसी भी स्थिति में ग्राहक को 25,000 रुपये से अधिक का हर्जाना नहीं मिलेगा। एक बार ही ले सकेंगे लाभ आरबीआई गवर्नर ने स्पष्ट किया कि ग्राहक इस सुविधा का लाभ अपने जीवनकाल में सिर्फ एक बार उठा सकेंगे। उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि ग्राहक एक बार की गलती से सीख लें।" एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने साफ किया कि भले ही ग्राहक ने खुद ही ठगों को ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) बताया हो, तब भी वे हर्जाना राशि पाने के हकदार होंगे। मल्होत्रा ने कहा कि डिजिटल धोखाधड़ी में 50 हजार रुपये तक की राशि वाले मामले 65 प्रतिशत हैं, हालांकि मूल्य के हिसाब से उनका अनुपात काफी कम है। यह पहली बार है जब आरबीआई ने साइबर फ्रॉड मामले में पीड़ित को हर्जाने देने की पहल की है। RBI के डेटा के मुताबिक भारतीय बैंकों ने वित्त वर्ष 2024-25 में कार्ड और इंटरनेट-आधारित ट्रांजैक्शन से जुड़े धोखाधड़ी के 13,469 मामले दर्ज किए, जिससे 520 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। वहीं, 2023-24 में 29,080 धोखाधड़ी और 1,457 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। साइबर फ्रॉड की शिकायत सबसे पहले बैंक/पेमेंट ऐप को सूचित करें। इसके बाद 1930 पर कॉल करें। यह नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन का ऑफिशियल नंबर है। ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। इसके लिए वेबसाइट https://cybercrime.gov.in पर विजिट करें। यहां सभी डिटेल भरने के बाद Acknowledgement नंबर मिलेगा। इसे सेव करके रखना जरूरी है। इस नंबर को लेकर नजदीकी साइबर सेल/पुलिस स्टेशन से संपर्क करें। आप शिकायत का स्टेटस cybercrime.gov.in पर ट्रैक कर सकते हैं।