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RBI का नया फैसला: ATM से पैसे निकालना अब हो सकता है मुश्किल

पंजाब  ATM यूजर्स के लिए बेहद ही खास खबर सामने आई है। जानकारी के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ATM लेन-देन से जुड़े नए नियम लागू कर दिए हैं, जिनका सीधा असर अब आम ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा। जारी हुए नए नियमों में मुफ्त लेन-देन की सीमा, अतिरिक्त शुल्क और नकदी निकालने व जमा करवाने से जुड़े नियम शामिल हैं। RBI के ये नए नियम डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और बड़े नकद लेन-देन पर निगरानी रखने के उद्देश्य से लागू किए गए। नए नियम:  मेट्रो और नॉन-मेट्रो शहरों के लिए नई सीमाएं मेट्रो शहरों में: हर महीने 3 मुफ्त ATM लेन-देन नॉन-मेट्रो शहरों में: हर महीने 5 मुफ्त ATM लेन-देन इन सीमाओं में कैश निकासी के साथ-साथ बैलेंस चेक और अन्य गैर-वित्तीय लेन-देन भी शामिल लेन-देन पर लगेंगे चार्ज वित्तीय लेन-देन : प्रति लेन-देन 23 रुपए तक शुल्क (GST सहित) गैर-वित्तीय लेन-देन (बैलेंस चेक आदि): 11 रुपए तक शुल्क अब PAN व आधार जरूरी RBI ने काले धन पर रोक लगाने और वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नकदी लेन-देन से जुड़े नियम सख्त कर दिए हैं। यदि कोई व्यक्ति एक वित्तीय वर्ष में 20 लाख रुपए या उससे अधिक की नकदी जमा या निकासी करता है, तो उसे PAN नंबर और आधार कार्ड देना अनिवार्य होगा।   ऐसे करें बचाव: ATM का उपयोग सोच-समझकर करें। केवल जरूरत पड़ने पर ही कैश निकालें बैलेंस चेक या मिनी स्टेटमेंट के लिए नेट बैंकिंग या मोबाइल ऐप का उपयोग करें। बार-बार छोटी रकम निकालने से बचें ताकि अतिरिक्त शुल्क न लगे।

अमेरिका में RBI गवर्नर का बयान – Trump की टैरिफ नीति से भारत को घबराने की जरूरत नहीं

वाशिंगटन अमेरिका ने भारत पर टैरिफ बीते अगस्त महीने में बढ़ाकर 50 फीसदी (US Tariff On India) कर दिया था. इसके बाद देश में इसके असर से जुड़ी तमाम आशंकाएं भी जाहिर की जा रही है, लेकिन केंद्रीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा (RBI Governor Sanjay Malhotra) ने इस पर बड़ी बात कही है. अमेरिका के वाशिंगटन डीसी में IMF और विश्व बैंक की सालाना बैठक के मौके पर उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक बुनियाद बेहद मजबूत है और अमेरिकी टैरिफ कोई बड़ी चिंता का विषय नहीं है.  'भारत के लिए टैरिफ चिंता का विषय नहीं' आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में भारत पर लगे अमेरिकी टैरिफ से जुड़ी चिंताओं को सीधे तौर पर खारिज किया है. उन्होंने कहा कि टैरिफ के बजाय भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था व्यापार दबाव का सामना जरूर कर सकती है. आईएमएफ और विश्व बैंक की बैठक के अवसर पर उन्होंने साफ किया कि भारत मुख्यतः घरेलू अर्थव्यवस्था है, इसलिए हम पर इसका प्रभाव तो पड़ता है, लेकिन यह कोई बड़ी चिंता का विषय बिल्कुल भी नहीं है. ट्रेड डील से होगा भारत को लाभ गवर्नर वार्ता सत्र में बोलते हुए संजय मल्होत्रा ​​ने कहा कि टैरिफ के चलते वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद भारत की व्यापक आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है. उन्होंने कहा कि हम नीतिगत अनिश्चितताओं के दौर में हैं, जो एक ऐसा जोखिम है जिस पर सभी उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं को विचार करना चाहिए. आरबीआई गवर्नर के मुताबिक, अगर वाशिंगटन के साथ ट्रेड डील (India-US Trade Deal) जल्दी ही किसी नतीजे पर पहुंच जाती है, तो इसमें संभावित लाभ भी हो सकता है.  रुपये पर दबाव पर बोले RBI गवर्नर  Trump Tariff के असर के बीच कमजोर इंडियन करेंसी रुपया के बारे में बोलते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने अपनी बात को दोहराया. उन्होंने कहा कि, 'आरबीआई किसी स्पेशल वैल्यू टारगेट को लक्षित नहीं करता है. हमारा मानना ​​है कि बाजार ही तय करेगा कि मूल्य स्तर क्या होना चाहिए? हमारा प्रयास वास्तव में यह सुनिश्चित करना है कि रुपये की एक व्यवस्थित गति बनी रहे और किसी भी असामान्य अस्थिरता पर अंकुश लगाया जा सके.' रेपो रेट में कटौती की गुंजाइश! चर्चा के दौरान गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने आगे महंगाई पर बात करते हुए कहा कि अनुमानों में कमी के बाद महंगाई दर में नरमी का आउटलुक इकोनॉमिक ग्रोथ को और अधिक समर्थन देने के लिए नीतिगत गुंजाइश प्रदान करता है. उनके मुताबिक, रेपो रेट (Repo Rate) में और अधिक कटौती करने की गुंजाइश है, लेकिन मेरा मानना ​​है कि इसके लिए यह उपयुक्त समय नहीं है, क्योंकि इसका उम्मीद के मुताबिक प्रभाव नहीं होगा.

RBI ने दी डिजिटल पेमेंट्स को नई दिशा, छोटे लेन-देन के नियमों में बड़ा बदलाव

नई दिल्ली देश के प्रमुख बैंकों ने RBI के सामने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत वे ₹100 से कम के छोटे डिजिटल लेन-देन पर SMS अलर्ट भेजना बंद करना चाहते हैं। बैंक इसके लिए RBI की हरी झंडी का इंतजार कर रहे हैं। बैंक अधिकारियों का कहना है कि UPI और अन्य डिजिटल तरीकों से होने वाले छोटे लेन-देन में भारी बढ़ोतरी हुई है। इसके कारण ग्राहकों को लगातार SMS अलर्ट मिल रहे हैं, जिससे उन्हें Notification Fatigue हो रही है। लगातार अलर्ट आने से ग्राहक महत्वपूर्ण और बड़े लेन-देन के अलर्ट को भी नजरअंदाज करने लगे हैं, जिससे धोखाधड़ी की आशंका बढ़ जाती है। नए प्रस्ताव के तहत ग्राहकों को केवल बड़े या एक निर्धारित संख्या/मूल्य से अधिक के लेन-देन के लिए ही SMS अलर्ट भेजे जाएंगे। जानकार सूत्रों के मुताबिक यह प्रस्ताव पिछले महीने सभी सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों के आंतरिक विचार-विमर्श के बाद RBI को भेजा गया है। बैंकों ने इसके साथ ही धोखाधड़ी की आशंका को कम करने के लिए सुरक्षा उपायों की एक सूची भी प्रस्तुत की है। ग्राहकों को मिलेगा ऑप्शन वर्तमान में RBI के दिशानिर्देशों के अनुसार बैंकों को ग्राहकों को SMS अलर्ट देना जरुरी है। नए प्रस्ताव में ग्राहक को यह ऑप्शन दिया जाएगा कि वे ₹100 से कम के लेन-देन के लिए SMS अलर्ट बंद करना चाहते हैं या नहीं। जिन ग्राहकों को अलर्ट की जरूरत होगी, वे ऐप नोटिफिकेशन या ईमेल अलर्ट के जरिए से अलर्ट प्राप्त करना जारी रख सकते हैं। बैंक अधिकारियों ने बताया कि एक SMS भेजने पर लगभग ₹0.20 की लागत आती है, जो ग्राहक से वसूली जाती है। बैंकों का मानना है कि इस बदलाव से तकनीक का बेहतर उपयोग होगा और ग्राहकों को वास्तविक उपयोग के अनुसार ही शुल्क लिया जाना चाहिए।

RBI ने लगाया रोक, इस बैंक के ग्राहकों की बढ़ी टेंशन — खाते से निकासी पर सख्त सीमा

नई दिल्ली भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने हिमाचल प्रदेश के सोलन स्थित द बघाट अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। अब यह बैंक न तो नए डिपॉजिट स्वीकार कर सकेगा और न ही नए लोन जारी कर पाएगा। इतना ही नहीं, बैंक अपनी देनदारियों के भुगतान पर भी रोक का सामना करेगा। क्या हैं RBI के ताज़ा निर्देश?     बिना पूर्व अनुमति नया ऋण या जमा स्वीकार नहीं होगा।     बैंक अपनी मौजूदा वित्तीय देनदारियाँ पूरी नहीं कर पाएगा।     हालिया निरीक्षण में सामने आई गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के बाद यह कदम उठाया गया। ग्राहकों के लिए क्या नियम?     बैंक से निकासी सीमा सिर्फ ₹10,000 तय की गई है।     ग्राहकों की जमा राशि का उपयोग उनके बकाया ऋण के समायोजन में किया जा सकता है। बीमा सुरक्षा का क्या होगा? RBI ने साफ किया है कि ग्राहकों की जमा राशि पर DICGC बीमा कवर जारी रहेगा।     हर जमाकर्ता को अधिकतम ₹5 लाख तक बीमा सुरक्षा मिलेगी।     यह सुरक्षा उनके खाते की स्थिति और अधिकार के अनुसार लागू होगी। लाइसेंस रद्द नहीं RBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि ये पाबंदियाँ लाइसेंस रद्द करने के बराबर नहीं हैं। बैंक सीमित शर्तों के तहत अपना संचालन जारी रखेगा।

रुपया बचाने को एक्टिव हुआ RBI, गिरावट थामने के लिए बनाया रणनीतिक ब्लूप्रिंट

नई दिल्ली  भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये को गिरने से बचाने के लिए एक अहम कदम उठाया. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, RBI ने डॉलर-रुपया बाय/सेल स्वैप (Buy/Sell Swap) के जरिए विदेशी मुद्रा बाजार (forex market) में दखल दिया. इस कार्रवाई के बाद रुपये की कीमत 88.77 प्रति डॉलर पर टिकी रही, जो उसके सर्वकालिक निचले स्तर 88.80 के बेहद करीब थी. ट्रेडर्स का कहना है कि RBI ने एक साथ स्पॉट मार्केट और फॉरवर्ड मार्केट में दखल देकर डॉलर की उपलब्धता और रुपये की स्थिरता दोनों को नियंत्रित करने की कोशिश की. जानिए आखिर ये ‘बाय/सेल स्वैप’ होता क्या है और इससे कैसे रुकती है रुपये की गिरावट. क्या होता है RBI का ‘डॉलर-रुपया बाय/सेल स्वैप’ ‘बाय/सेल स्वैप’ एक ऐसा सौदा होता है जिसमें RBI अभी के समय में (स्पॉट मार्केट में) डॉलर खरीदता है, लेकिन साथ ही यह तय कर लेता है कि भविष्य की किसी तारीख पर (फॉरवर्ड मार्केट में) वही डॉलर वापस बेच देगा. सीधे शब्दों में कहें तो यह एक तरह का टेंपरेरी ट्रांजेक्शन होता है, जिसका मकसद बाजार में अचानक आई डॉलर की मांग को पूरा करना और रुपये पर दबाव को कम करना होता है. इस प्रक्रिया में RBI न तो स्थायी रूप से डॉलर जमा करता है और न ही अपनी विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ा बदलाव लाता है. बस इतना सुनिश्चित करता है कि डॉलर की कमी से रुपया कमजोर न पड़े. इससे रुपये की गिरावट कैसे रुकती है जब बाजार में डॉलर की मांग अचानक बढ़ जाती है, जैसे तेल कंपनियां, इंपोर्टर्स या फॉरेन इन्वेस्टर्स एक साथ डॉलर खरीदने लगते हैं, तो डॉलर की कीमत बढ़ती है और रुपया कमजोर होता है. ऐसे समय में RBI बाजार में डॉलर की सप्लाई बढ़ाकर डॉलर की कीमत को स्थिर रखता है. अगर RBI डॉलर बेचता है तो बाजार में डॉलर की भरमार हो जाती है और रुपया संभल जाता है. अगर RBI ‘बाय/सेल स्वैप’ करता है, तो वह अस्थायी तौर पर डॉलर खरीदता है लेकिन भविष्य में बेचने का वादा करता है. इससे बाजार में भरोसा बनता है कि RBI रुपया कमजोर नहीं होने देगा, जिससे ट्रेडर्स रुपये पर सट्टा लगाना कम कर देते हैं. फॉरवर्ड प्रीमियम क्यों घटा RBI की इस स्वैप कार्रवाई के बाद डॉलर-रुपया फॉरवर्ड प्रीमियम यानी भविष्य के सौदों पर ब्याज दरें कम हो गईं. 1-वर्षीय इम्प्लाइड यील्ड 6 बेसिस पॉइंट गिरकर 2.23% पर आ गई, जो एक महीने में सबसे निचला स्तर है. यह संकेत देता है कि बाजार को भरोसा है कि RBI स्थिति पर नियंत्रण रखेगा और आने वाले समय में रुपये में बड़ी गिरावट की संभावना नहीं है. क्यों जरूरी है RBI की ये दखलअंदाजी भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और डॉलर पर निर्भरता काफी ज्यादा है. ऐसे में डॉलर का महंगा होना सीधा असर महंगाई और आयात लागत पर डालता है. RBI के समय रहते कदम उठाने से एक ओर रुपये की स्थिरता बनी रहती है, तो दूसरी ओर विदेशी निवेशकों को भी भरोसा मिलता है कि भारतीय बाजार में वोलैटिलिटी सीमित रहेगी.

महंगाई घटने वाली है, RBI सर्वे ने दी खुशखबरी, त्योहारों पर बढ़ेगा आपका बजट

नई दिल्ली  केंद्र सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक, देश के घरों में खाने-पीने और दूसरी चीजों की कीमतों पर दबाव कम हो रहा है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के नए सर्वे से ये बात सामने आई है. आरबीआई का ये बाय-मंथली इन्फ्लेशन एक्सपेक्टेशंस सर्वे ऑफ हाउसहोल्ड्स (IESH) सितंबर 2025 का राउंड था. इसमें घरवालों ने बताया कि मुख्य उत्पादों की कीमतों और महंगाई का दबाव घट रहा है. हालांकि, अभी की महंगाई की धारणा थोड़ी बढ़ी हुई लगी. एनआई की रिपोर्ट के अनुसार, सर्वे में कहा गया कि घरों ने फूड प्रोडक्ट्स, नॉन-फूड प्रोडक्ट्स, हाउसिंग और सर्विसेज की लागत में राहत महसूस की है. ये सर्वे 28 अगस्त से 6 सितंबर के बीच 19 बड़े शहरों में किया गया. कुल 6,082 लोगों ने जवाब दिए. तीन महीनों में महंगाई की उम्मीद घटी सर्वे के नतीजों के अनुसार, घरों की मौजूदा मीडियन महंगाई की धारणा पहले राउंड से 20 बेसिस पॉइंट्स बढ़कर 7.4 फीसदी हो गई. लेकिन आने वाले समय के लिए उम्मीदें कम हुईं. अगले तीन महीनों की महंगाई की उम्मीद 20 बेसिस पॉइंट्स घटकर 8.1 फीसदी रह गई. एक साल आगे की उम्मीद 30 बेसिस पॉइंट्स कम होकर 8.7 फीसदी हो गई. एक साल में इतने फीसदी कीमतें बढ़ेंगी छोटे समय और एक साल के लिए, जिन लोगों को लगता है कि सामान्य कीमतें और महंगाई बढ़ेगी, उनका प्रतिशत पिछले सर्वे से कम हुआ. उत्पादों के हिसाब से, अगले तीन महीनों में 77.8 फीसदी लोगों को कीमतें बढ़ने की आशंका है, जो पहले 79.5 फीसदी था. एक साल में 86.8 फीसदी कीमतें बढ़ने का अंदेशा है, पहले ये 88.1 फीसदी था. उम्र के हिसाब से, 25 साल से कम उम्र के युवाओं ने सबसे कम मौजूदा महंगाई 7.0 फीसदी बताई. वहीं, 60 साल से ऊपर के घरों में ये 7.9 फीसदी रही. शहरों में कोलकाता में सबसे ज्यादा 10.5 फीसदी की धारणा थी, उसके बाद मुंबई 8.5 फीसदी और दिल्ली 8.0 फीसदी. आरबीआई ने साफ किया कि ये सर्वे घरों की महंगाई पर नजर डालता है, जो उनके खरीदारी के पैटर्न से प्रभावित होता है. लेकिन ये नतीजे बैंक की अपनी महंगाई की राय को जरूरी नहीं दर्शाते. ये जानकारी घरवालों को राहत देती है कि कीमतें धीरे-धीरे काबू में आ रही हैं, लेकिन सतर्क रहना जरूरी है.

एसएमएस-ओटीपी पर निर्भरता खत्म: अप्रैल 2026 से आरबीआई के नए भुगतान प्रमाणीकरण नियम

 नई दिल्ली डिजिटल भुगतान पर नए नियम, जो एसएमएस-आधारित वन-टाइम पासवर्ड से परे दो-कारक प्रमाणीकरण (2एफए) का अनुपालन करने के अधिक तरीकों की अनुमति देते हैं, 1 अप्रैल से लागू होंगे। भारतीय रिजर्व बैंक ने गुरुवार को यह एलान किया। केंद्रीय बैंक ने कहा कि प्रमाणीकरण का आधार "यूजर्स के पास कुछ है", "यूजर जो जानता है" या "यूजर जो है" हो सकते हैं। इसमें अन्य बातों के साथ-साथ पासवर्ड, एसएमएस-आधारित ओटीपी, पासफ्रेज, पिन, कार्ड हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर टोकन, फिंगरप्रिंट या बायोमेट्रिक्स का कोई अन्य रूप (डिवाइस-नेटिव या आधार-आधारित) शामिल हो सकते हैं। भारत दुनिया के उन बाजारों में से एक है जो 2FA पर जोर देते हैं। इसके तहत वित्तीय क्षेत्र के खिलाड़ी लेनदेन को निष्पादित करने के लिए एसएमएस-आधारित अलर्ट पर भरोसा करते रहे हैं। आरबीआई ने (डिजिटल भुगतान लेनदेन के लिए प्रमाणीकरण तंत्र) निर्देश, 2025 लॉन्च किया है। इसमें यह स्पष्ट किया गया कि 2FA अनिवार्य बना रहेगा और एसएमएस ओटीपी का भी उपयोग किया जा सकता है। केंद्रीय बैंक ने पहली बार फरवरी 2024 में इस कदम की घोषणा की थी ताकि भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को वैकल्पिक प्रमाणीकरण तंत्र को लागू करने के लिए तकनीकी प्रगति का लाभ उठाने में सक्षम बनाया जा सके। आरबीआई ने कहा कि जोखिम प्रबंधन के नजरिए से वित्तीय प्रणाली के हितधारक लेनदेन के स्थान, उपयोगकर्ता के व्यवहार पैटर्न, डिवाइस विशेषताओं, ऐतिहासिक लेनदेन प्रोफाइल आदि के आधार पर मूल्यांकन के लिए लेनदेन की पहचान कर सकते हैं। केंद्रीय बैंक ने कहा कि यदि इन निर्देशों का पालन किए बिना किए गए लेनदेन से कोई नुकसान होता है, तो जारीकर्ता को बिना किसी आपत्ति के ग्राहक को नुकसान की पूरी भरपाई करनी होगी। इसमें कार्ड जारीकर्ताओं से गैर-आवर्ती, सीमा-पार कार्ड नॉट प्रेजेंट (सीएनपी) लेनदेन को मान्य करने के लिए एक तंत्र स्थापित करने को भी कहा गया है। इसके तहत 1 अक्टूबर, 2026 से विदेशी व्यापारी या विदेशी अधिग्रहणकर्ता की आरे से प्रमाणीकरण के लिए अनुरोध किया जा सकेगा।

PhonePe को RBI की हरी झंडी, डिजिटल भुगतान में SMEs और मर्चेंट्स को मिलेगी सहूलियत

मुंबई  PhonePe को RBI से ऑनलाइन पेमेंट एग्रीगेटर का लाइसेंस मिल गया है इससे SMEs और मर्चेंट्स के लिए डिजिटल भुगतान करना आसान होगा. यह कदम छोटे और मध्यम व्यवसायों को डिजिटल लेनदेन में सुरक्षित और तेज़ सुविधा प्रदान करेगा और वित्तीय समावेशन बढ़ाएगा.  भारत में डिजिटल पेमेंट का क्रेज लगातार बढ़ रहा है और इस क्षेत्र में PhonePe ने अपनी ताकत साबित की है. 650 मिलियन से अधिक रजिस्टर्ड यूजर्स और 45 मिलियन मर्चेंट आउटलेट्स के नेटवर्क के साथ, PhonePe रोजाना 360 मिलियन से अधिक ट्रांजैक्शन प्रोसेस करता है. अब कंपनी ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से ऑनलाइन पेमेंट एग्रीगेटर लाइसेंस प्राप्त कर लिया है. यह मंजूरी न केवल कंपनी के लिए बल्कि छोटे और मध्यम व्यवसायों (SMEs) और मर्चेंट्स के लिए भी नई संभावनाएँ लेकर आई है. RBI लाइसेंस का महत्व RBI से मिली यह मंजूरी PhonePe को डिजिटल मर्चेंट्स को ऑनबोर्ड करने और उनके लेनदेन को सुरक्षित और तेज़ बनाने का अधिकार देती है. यह कदम डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म्स पर निगरानी बढ़ाने और उपभोक्ता सुरक्षा सुनिश्चित करने के RBI के प्रयासों का हिस्सा है. SMEs और मर्चेंट्स पर फोकस PhonePe विशेष रूप से छोटे और मध्यम व्यवसायों को डिजिटल भुगतान के समाधान प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है. कंपनी के चीफ बिजनेस ऑफिसर, युवराज सिंह शेखावत के अनुसार, यह लाइसेंस मर्चेंट सर्विसेज के विस्तार में सहायक होगा और व्यापारियों को डिजिटल लेनदेन की सुविधा देने में मदद करेगा. PhonePe की सेवाएं     SMEs और मर्चेंट्स को UPI, QR कोड और अन्य डिजिटल भुगतान विकल्प उपलब्ध कराना     मर्चेंट्स के लिए टेक्नोलॉजी और एनालिटिक्स टूल्स प्रदान करना     व्यवसायिक लेनदेन को तेज़, सुरक्षित और पारदर्शी बनाना RBI का यह कदम भारत में डिजिटल भुगतान को और अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाएगा. SMEs का डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आना वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देता है और कैशलेस लेनदेन की दिशा में अहम कदम है. PhonePe को RBI से लाइसेंस क्यों मिला है? RBI ने PhonePe को ऑनलाइन पेमेंट एग्रीगेटर लाइसेंस दिया है ताकि यह डिजिटल मर्चेंट्स को ऑनबोर्ड कर सके और उनके लेनदेन को सुरक्षित, तेज और पारदर्शी बना सके. यह लाइसेंस SMEs और मर्चेंट्स के लिए क्यों महत्वपूर्ण है? इस लाइसेंस के बाद छोटे और मध्यम व्यवसाय डिजिटल भुगतान स्वीकार कर सकते हैं, जिससे उनका व्यापार बढ़ेगा और लेनदेन अधिक सुरक्षित होगा. PhonePe रोजाना कितने ट्रांज़ैक्शन प्रोसेस करता है? PhonePe प्रतिदिन 360 मिलियन से अधिक ट्रांज़ैक्शन प्रोसेस करता है और इसका मर्चेंट नेटवर्क 45 मिलियन से अधिक आउटलेट्स तक फैला हुआ है. इस लाइसेंस से उपभोक्ताओं को क्या लाभ मिलेगा? उपभोक्ताओं को सुरक्षित और तेज़ डिजिटल भुगतान का विकल्प मिलेगा, साथ ही लेनदेन में पारदर्शिता बढ़ेगी.