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8वें वेतन आयोग में ₹69,000 न्यूनतम वेतन की चर्चा, 4.4 फैमिली यूनिट और HRA बढ़ाने की मांग क्यों?

नई दिल्ली 8वें वित्त आयोग के पास कर्मचारी और पेंशनर्स से जुड़े संगठन लगातार सुझाव दे रहे हैं। संगठनों की तरफ से जो प्रमुख मांगें अधिक फिटमेंट फैक्टर के अलावा है वो एचआरए, फैमिली काउंच, डीए और टीटीपीए को बढ़ाना है। इन संगठनों का कहना है कि लेवल 1 और 2 के कर्मचारियों को दिल्ली जैसे शहर में मौजूदा पे स्केल पर अपनी जरूरतों को पूरा करने में काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। आइए जानते हैं कि क्या मांग की जा रही है? क्या कहना है फेडरेशन का? (8th Pay Commission demands) इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार आल इंडिया एनपीएस एप्लॉयीज फेडरेशन के प्रेसीडेंट मनजीत सिंह पटेल का कहना है कि मौजूदा समय में एंट्री लेवल पर बेसिक पे 18000 रुपये का है। इसमें एचआरए 5400 (दिल्ली जैसे शहरों के लिए) है। और टीटीपीए 2800 रुपये (जिसमें 60 प्रतिशत डीए बढ़ोतरी) मिल रहा है। मनजीत सिंह पटेल का कहना है कि मौजूदा 5400 रुपये एचआरए और 2800 रुपये टीटीपीए दिल्ली जैसे शहर के लिए पर्याप्त नहीं है। यही वजह है कि संगठन लगातार फैमिली यूनिट को बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। 8th pay commission: फिटमेंट फैक्टर्स भी बढ़ाने पर है जोर 36% HRA की मांग (8th Pay Commission HRA) पटेल का कहना है कि मौजूदा खर्च को देखते हुए कर्मचारियों का एचआरए कम से कम 36 प्रतिशत कर देना चाहिए। वहीं, फैमिली काउंट 4.4 होना चाहिए। इसके अलावा 8वें वित्त आयोग से लेवल एक कर्मचारी के लिए कम से कम 9000 रुपये टीपीटीए की मांग की गई है। उनका कहना है कि 2.1 फिटमेंट फैक्टर रखने पर सैलरी में कम से कम 65 प्रतिशत का इजाफा होगा। 25 प्रतिशत डीए होने पर बेसिक पे के साथ विलय (8th Pay Commission DA) AINPSEF ने पे कमीशन से डीए के 25 प्रतिशत होने पर बेसिक पे के साथ मर्जर की डिमांड की है। इसके अलावा इस संगठन ने 8वें पे कमीशन से फैमिली यूनिट को बढ़ाकर 5 करने की डिमांड की है। अगर ऐसा हुआ तो बेसिक कर्मचारियों का कम से कम 69000 रुपये का हो जाएगा। बता दें, लगभग सभी संगठनों की तरफ से 8वें वित्त आयोग से फैमिली काउंट को बढ़ाने की मांग हुई है। मौजूदा समय में 3 है फैमिली काउंट (8th Pay Commission family Count) 7वें वित्त आयोग ने सेंट्रल गवर्नमेंट के कर्मचारियों के लिए फैमिली काउंट को तीन रखा था। इसमें कर्मचारी के लिए 1.0, पत्नी के लिए 0.8 और दो बच्चों के लिए 0.6-0.6 यूनिट था। AINPSEF ने फैमिली यूनिट को 4.4 करने की मांग की गई है। इसमें माता-पिता के लिए भी 0.7-0.7 यूनिट जोड़ने की डिमांड की गई है। फैमिली यूनिट बढ़ने से क्या लाभ अगर फैमिली यूनिट को 8वें पे कमीशन की तरफ से 4.4 किया गया तब की स्थिति में कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 2.05 गुना बढ़ेगी। कैसे HRA बढ़ने पर बढ़ जाएगी सैलरी? मौजूदा समय में बेसिक सैलरी 18000 रुपये है। डीए 58 प्रतिशत जोकि 10800 रुपये होता है। एचआरए 30 प्रतिशत जोकि 5400 रुपये होता है। टीपीटीए 1800 + 58% = 1800 + 1800 =2880 रुपये होता है। AINPSEF ने 2.1 फिटमेंट फैक्टर रहने की स्थिति में 37800 रुपये बेसिक पे की बात कही है। इसमें 2 प्रतिशत डीए को जोड़ ले तो 756 रुपये महंगाई भत्ता होता है। एचआरए को अगर 36 प्रतिशत जोड़ लिया जाए तो यह 13608 रुपये होगा। बता दें, टीपीटीएए 9000 रुपये + 2% = 9180 रुपये होगा। यानी कर्मचारियों की सैलरी 37800 रुपये से बढ़कर 8वें वित्त आयोग के लागू होने के बाद 61344 रुपये तक पहुंच सकती है। यानी ओवर आल कुल 65 प्रतिशत का इजाफा हो जाएगा।

फिटमेंट फैक्टर 2 से 4 तक की मांग: 8वें पे कमीशन से बढ़ सकती है बेसिक सैलरी में भारी उछाल

 नई दिल्ली 8वां पे कमीशन इस समय लगातार कर्मचारी और उनके संगठनों से बातचीत कर रहा है। सबसे अधिक किसी एक बात पर निगाह है तो वह फिटमेंट फैक्टर्स है। अधिक फिटमेंट फैक्टर होने की स्थिति में बेसिक पे उतना ही बढ़ जाएगा। जिसकी वजह से कर्मचारी संगठन लगातार अधिक फिटमेंट फैक्टर की डिमांड कर रहे हैं। हालांकि, अभी तक फिटमेंट फैक्टर को लेकर कोई भी आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। आइए जानते हैं कि फिटमेंट फैक्टर कैसे सैलरी को प्रभावित करेगा। फिटमेंट फैक्टर कैसे प्रभावित करेगा सैलरी मौजूदा समय में लेवल एक के अधिकारियों का बेसिक पे 18000 रुपये है। अगर फिटमेंट फैक्टर 2 रहता है तब की स्थिति में मिनिमम बेसिक पे 36000 रुपये हो सकता है। वहीं, 2.5 फिटमेंट फैक्टर रहने की स्थिति में 45000 रुपये बेसिक पे पहुंच जाएगा। वहीं, फिटमेंट फैक्टर तीन रहने की स्थिति में बेसिक पे 54000 रुपये हो सकता है। वहीं, लेवल 13 के कर्मचारी जिनका बेसिक पे इस समय 123100 रुपये है। 2 फिटमेंट फैक्टर रहने की स्थिति बेसिक पे 246200 रुपये हो सकता है। फिटमेंट 2.5 रहने की स्थिति में मिनिमम बेसिक पे 307750 रुपये हो सकता है। 8वां वित्त आयोग लगातार कर रहा है मीटिंग पे कमीशन की तरफ से देश के अलग-अलग शहरों में मीटिंग हो रही है। दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और फिर उसके बाद उत्तर प्रदेश में 8वे वित्त आयोग की मीटिंग हो चुकी है। आगे बंगाल और उड़ीसा में 8वें पे कमीशन की मीटिंग प्रस्तावित है। बता दें, 8वें वित्त आयोग का गठन नवंबर 2025 किया गया था। इस आयोग के पास 18 महीने का समय पर है। इस दौरान कंपनी को रिपोर्ट जमा कर देना है। फिटमेंट फैक्टर को लेकर उम्मीद जताई जा रही है 8वें पे कमीशन को कर्मचारी सगंठनों की तरफ से जमा किए गए मेमोरेंडम में 4 के करीब फिटमेंट फैक्टर भी रखने की मांग हुई है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मौजूदा मार्केट के हिसाब से सरकारी कर्मचारियों और बेहतर सैलरी मिलनी चाहिए। अब देखना है कि आयोग कितना फिटमेंट फैक्टर तय करता है। फिटमेंट फैक्टर के अलावा कर्मचारी संगठनों की तरफ से मौजूदा डीए कैलकुलेशन का फॉर्मूले भी बदलाव की डिमांड की जा रही है। बता दें, पे कमीशन का गठन हर 10 साल में किया जाता है।

सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! 8वें वेतन आयोग से पहले बड़ा फैसला संभव, जानें ताजा अपडेट

 नई दिल्‍ली केंद्र सरकार के कर्मचारियों को आठवें वेतन आयोग के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है, लेकिन उससे पहले ही उन्‍हें सैलरी में बढ़ोतरी का तोहफा मिल सकता है. रिपोर्ट्स में कहा गया है कि 8वां वेतन आयोग आने से पहले एक बार फिर कर्मचारियों के महंगाई भत्ता में बढ़ोतरी हो सकता है।  जुलाई नजदीक आने और महंगाई के उच्च स्तर पर बने रहने के कारण, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को जल्द ही अपने महंगाई भत्ते में एक और बढ़ोतरी देखने की उम्मीद बढ़ रही है. हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन महंगाई के नए आंकड़ों ने एक नए संशोधन की उम्मीदों को और बढ़ा दिया है।  क्‍यों बढ़ रही वेतन बढ़ोतरी की उम्‍मीद?  दरअसल, केंद्र सरकार साल में दो बार महंगाई भत्ता संशोधित करती है. आमतौर पर जनवरी और जुलाई से इन बढ़ोतरियों को लागू किया जाता है. यह भत्ता सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बढ़ती महंगाई से निपटने में मदद करने के लिए है।  अंतिम महंगाई भत्ता (DA) दर की गणना औद्योगिक कामगारों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) के आधार पर की जाती है, जो खुदरा कीमतों में होने वाले बदलावों पर नजर रखता है. आवश्यक आंकड़े उपलब्ध होने के बाद, सरकार कैबिनेट की मंजूरी लेने से पहले संशोधित दर की गणना करती है. चूंकि आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें अभी तक लागू नहीं की गई हैं, इसलिए कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग के ढांचे के तहत महंगाई भत्ता (DA) में संशोधन मिलता रहेगा।  नया महंगाई का आंकड़ा क्‍या दिखाता है?  आंकड़ों के अनुसार, मई में कुल खुदरा महंगाई दर 3.93% रही, जो अप्रैल में 3.48% थी. ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई दर 3.74% से बढ़कर 4.25% हो गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में महंगाई 3.16% से बढ़कर 3.53% हो गई. फूड महंगाई में भी बढ़ोतरी हुई है।  फूड महंगाई में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है. अखिल भारतीय उपभोक्ता फूड प्राइस इंडेक्‍स (CFPI) के अनुसार, मई में फूड इन्‍फ्लेशन 4.78% रही, जबकि अप्रैल में यह 4.20% थी. ग्रामीण क्षेत्रों में यह बढ़कर 4.85% हो गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 4.66% तक पहुंच गई।  कुल महंगाई दर और फूड प्रोडक्‍ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी से संकेत मिलता है कि रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की लागत पर दबाव बना हुआ है. हालांकि महंगाई भत्ता (DA) की गणना सामान्य कंज्‍यूमर प्राइस इंडेक्‍स के बजाय CPI-IW पर आधारित है, फिर भी ये आंकड़े बताते हैं कि महंगाई दर का रुझान जारी है, जिससे एक और DA बढ़ोतरी की घोषणा की संभावना को सपोर्ट मिलता है।  अभी कर्मचारियों को कितना डीए मिल रहा है?  केंद्र सरकार ने आखिरी बार अप्रैल 2026 में महंगाई भत्ता (DA) में संशोधन किया था, जिसमें 1 जनवरी, 2026 से प्रभाव से 2 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई थी. इस संशोधन के बाद, केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता (DA) और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई राहत (DR) बेसिक सैलरी के 58% से बढ़कर 60% हो गई. जुलाई 2026 से लागू होने वाले अगले महंगाई भत्ते (DA) संशोधन की घोषणा अभी बाकी है. हालांकि, नए महंगाई के आंकड़े से यह जानकारी मिलती है कि महंगाई भत्ते में अभी 2 से 3 फीसदी तक इजाफा हो सकता है।   अभी 8वें वेतन आयोग का प्रॉसेस कहां तक बढ़ा?  जहां एक ओर कर्मचारी आगामी वेतन संशोधन पर बारीकी से नजर रख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर 8वें वेतन आयोग को लेकर भी चर्चाएं जारी हैं. पिछले कुछ महीनों में, कर्मचारी यूनियन और अन्‍य समूहों ने कई मांगें रखी हैं. इनमें महंगाई दर के अनुसार न्यूनतम मूल वेतन बढ़ाना, भत्तों में संशोधन करना, वेतन संरचना में सुधार करना और पेंशन संबंधी लाभों में बदलाव करना शामिल है. हालांकि, सरकार ने अभी तक नए वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू नहीं किया है। 

8th Pay Commission: महंगाई के असर से बदल सकते हैं वेतन के नियम, कर्मचारियों की नई मांग

नई दिल्ली ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज़ फेडरेशन (AIDEF) ने आठवें वेतन आयोग से महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) का कैलकुलेशन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले फॉर्मूले में बदलाव की मांग की है. उनका कहना है कि मौजूदा फॉर्मूला कर्मचारियों और पेंशनर्स पर महंगाई के बोझ का सही कैलकुलेशन नहीं करता है।  महंगाई के अनुसार ज्‍यादा खर्च  अभी महंगाई भत्ता (DA) और पेंशन भत्ता (DR) में संशोधन अखिल भारतीय औद्योगिक श्रमिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW) के 12 महीने के एवरेज पर बेस्‍ड है. यह इंडेक्‍स कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बढ़ती कीमतों के लिए नुकसान की भरपाई करने और महंगाई के खिलाफ उनकी खरीदने की क्षमता की रक्षा के लिए है।  मौजूदा फॉर्मूले में बड़ी खामियां             हालांकि, आठवें वेतन आयोग को सौंपे गए अपने दूसरे डिमांड में AIDEF ने कहा कि मौजूदा फॉर्मूले में महत्वपूर्ण कमियां हैं और यह कर्मचारियों और सेवानिवृत्त लोगों के बदलते खर्च करने के तरीकों को पर्याप्त रूप से नहीं दिखा सकता है।    देखें ये आंकड़े        फेडरेशन के अनुसार, 2022-23 में पेश किए गए संशोधित कंज्‍यूमर प्राइस इंडेक्‍स में फूड आइटम्‍स और मौसमी एग्री प्रोडक्‍ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी को पर्याप्‍त तौर पर नहीं बताता है. एआईडीईएफ ने बताया कि खाद्य और पेय पदार्थों का भार अब सूचकांक में 36.75% है, जबकि आवास, स्वास्थ्य सेवा, परिवहन, संचार और डिजिटल सेवाओं जैसी कैटेगरी को ज्‍यादा वेटेज दिया गया है।    पेंशनर्स के लिए चुनौती AIDEF ने पेंशनभोगियों के चुनौतियों का भी जिक्र किया, जिनमें से कई अपनी मंथली इनकम का एक बड़ा हिस्सा स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम, दवाओं, चिकित्सा उपचार और देखभाल सेवाओं पर खर्च करते हैं. अगर इन आवश्यक वस्तुओं की कीमतें महंगाई से ज्‍यादा बढ़ती हैं, तो महंगाई राहत में बदलाव उतना नहीं होता है।  मौजूदा फॉर्मूले की जांच की मांग इन चिंताओं को देखते हुए, AIDEF ने मौजूदा महंगाई फॉर्मूले की जांच करने और सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के खर्च को मैनेज करने के लिए बदलने के लिए कहा है।  हर राज्‍य में आयोग की हो रही बैठक गौरतलब है कि आठवें वेतन आयोग की बैठक कई राज्‍यों में पूरी हो चुकी है, जिसमें सैलरी बढ़ोतरी, महंगाई भत्ते में इजाफा और फिटमेंट फैक्‍टर समेत कई मांग रखी गई है. 

सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी, 8वें वेतन आयोग में बेसिक पे ₹51,000 बढ़ने की संभावना

 नई दिल्ली  8वें वेतन आयोग को मेमोरेंडम और सुझाव सौंपने की डेडलाइन बीते 15 जून को खत्म हो चुकी है. इसका मतलब है कि अब कोई नया सुझाव स्वीकार नहीं होगा. ये आठवें वेतन आयोग की प्रक्रिया का पहला प्रमुख चरण था. अब फोकस कर्मचारियों और पेंशनर्श की मांगों को लेकर आयोग द्वारा की जाने वाली सिफारिशों पर है।  कर्मचारी यूनियनों ने जो प्रस्ताव दिए हैं, उनमें उच्च मिनिमम बेसिक पे, DA का बेसिक पे में मर्जर के साथ ही फिटमेंट फैक्टर में संशोधन सबसे ऊपर है. Fitment Factor कर्मचारियों की सैलरी के कैलकुलेशन को एक दम से बदल देता और फिलहाल ये 2.57 लागू है, इसमें छोटा सा भी बदलाव सैलरी में बंपर उछाल ला सकता है. कर्मचारी संगठनों की डिमांड इसे बढ़ाकर 3.83 करने की है. अगर इसमें डिमांड के मुताबिक, बदलाव किया जाता है, तो फिर लगभग 55 लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और लगभग 69 लाख पेंशनभोगियों को बड़ा फायदा होगा।  Fitment Factor आखिर है क्या? फिटमेंट फैक्टर का कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा रोल होता है, यह एक ऐसा आंकड़ा होता है, जिसका यूज केंद्रीय वेतन आयोग द्वारा किसी कर्मचारी के पूर्व-संशोधित मूल वेतन (या पेंशन) को नए, संशोधित मूल वेतन में बदलने के लिए किया जाता है. इसमें किसी भी तरह का परिवर्तन सीधे सैलरी, पेंशन और संबंधित बकाया राशि को प्रभावित करता है. इसका फॉर्मूला 'New Basic Pay: Current Basic Pay x FF' होता है. फिलहाल, 7th Pay Commission के तहत केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 2.57 लागू है, जिसे 3.83 करने की मांग उठ रही है।  अब तक ऐसे बदला फिटमेंट फैक्टर वेतन आयोगों के दौरान महंगाई और अन्य कारकों के चलते अब तक कई बार इसे बदला जा चुका है. छठे वेतन आयोग ने ये आंकड़ा 1.86 रखा गया था, जिसे 7वां वेतन आयोग लागू किए जाने के साथ 2.57 कर दिया गया था और इसका असर ये देखने को मिला कि छठे वेतन आयोग के दौरान जो न्यूनतम बेसिक सैलरी 7,000 रुपये थी, वो एक झटके में उछलकर 18,000 रुपये हो गया।  सरकार ने मांगी डिमांड, तो इतना सैलरी हाइक हालांकि, सरकार को तय करना है कि फिटमेंट फैक्टर कितना किया जाएगा, सरकार 3.83 को स्वीकार नहीं करती है तो कौन सा दूसरा रास्ता निकालती है? अगर ये डिमांड मान ली जाती है, तो फिर न्यूनतम बेसिक पे 68,940 रुपये हो जाएगा. यानी 18000 रुपये मिनिमम पे वालों को करीब 51000 रुपये की बढ़ोतरी मिलेगी।  लेकिन जरूरी नहीं फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर डिमांड के मुताबिक ही कर दिया जाए. 8वें वेतन आयोग के तहत अलग चयन भी हो सकता है, जैसे इसे 2.57, 3.0, 3.5 भी किया जा सकता है. ऐसे में अलग-अलग संभावनाओं के आधार पर Basic Salary Hike की गणना करें, तो 18000 रुपये न्यूनतम सैलरी…      फिटमेंट फैक्टर 3.0: ₹54,000     फिटमेंट फैक्टर 3.5: ₹63,000     फिटमेंट फैक्टर 3.83: ₹68,940 अब जिस कर्मचारी का वर्तमान बेसिक-पे 44,900 रुपये है, उसके लिए…     फिटमेंट फैक्टर 3.0: ₹1,34,700     फिटमेंट फैक्टर 3.5: ₹1,57,150     फिटमेंट फैक्टर 3.83: ₹1,71,967       हालांकि, ये आंकड़े सिर्फ उदाहरण के लिए हैं कि आखिर कैसे फिटमेंट फैक्टर सैलरी हाइक में बड़ा रोल निभाता है. इसे लेकर वास्तविक वेतन संशोधन आयोग की अंतिम सिफारिशों और सरकार की मंजूरी पर निर्भर करेगा। 

केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन पर बड़ा अपडेट, 8वें पे कमीशन से बढ़ी उम्मीदें

नई दिल्ली 8वें पे कमीशन को लेकर अब प्रक्रिया काफी तेज हो गई है। वित्त आयोग देश के अलग-अलग हिस्सों में बैठकें कर रहा है। कर्मचारी संगठनों से लगातार राय मांगी जा रही है। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की निगाह वित्त आयोग की बैठकों और इससे जुड़ी जानकारी पर बनी हुई है। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की फिटमेंट फैक्टर पर सबसे अधिक निगाह है। 6वें और 7वें वित्त आयोग के दौरान फिटमेंट फैक्टर ही केंद्र में रहा था। इसी से सैलरी संशोधन, डीए अन्य सभी कैलकुलेट किया जाएगा। बता दें, 28 फरवरी 2014 को 7वें वित्त आयोग का गठन किया गया था। लेकिन इसके लागू होने में 21 महीने का समय लगा था। 19 नवंबर 2015 को 7वें वित्त आयोग ने अपनी रिपोर्ट जमा की थी। 8वें वित्त आयोग की बात करें तो इसका गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था। आयोग के पास रिपोर्ट जमा करने के लिए 18 महीने का समय है। रिपोर्ट्स के अनुसार पे कमीशन 25 जुलाई 2027 तक सभी पक्षों से बातचीत के आधार पर तय रिपोर्ट को जमा कर सकता है। जिसपर अंतिम फैसला सरकार की तरफ से लिया जाएगा। क्या होता है फिटमेंट फैक्टर? एक तरह से फॉर्मूला होता है जिसके कैलकुलेशन के आधार पर कर्मचारियों की नई बेसिक सैलरी का पता चलता है। इसी फॉर्मूला के जरिए पुराने बेसिक पे की जगह नया रिवाइज बेसिक सैलरी तय किया जाता है। कैसे प्रयोग होता है फॉर्मूला? मौजूदा बेसिक पे x फिटमेंट फैक्टर = नया बेसिक पे सातवें बेसिक पे के वक्त पर फिटमेंट फैक्टर 2.57 था। जिसके बाद मिनिमम बेसिक सैलरी केंद्रीय कर्मचारियों की 7000 रुपये से बढ़कर 18000 रुपये के स्तर पर पहुचं गया। बता दें, केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी में हर 10 साल में एक बार इजाफा होता है। इस बार कितना फिटमेंट फैक्टर रह सकता है? अभी तक 8वें पे कमीशन के लिए कोई आधिकारिक फिटमेंट फैक्टर का ऐलान नहीं किया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार 2.28 से 3.83 फिटमेंट फैक्टर इस बार तय किया जा सकता है। पहले के समय में फिटमेंट फैक्टर नहीं हुआ करता था। जिसकी वजह से पे कमीशन की तरफ से सैलरी रिवीजन के लिए अलग-अलग फैक्टर्स को आधार बनाया जाता था। जिसके बाद कोई फैसला होता था। हालांकि, तब भी मूल में कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी और भत्ता ही होते थे। जिसे मार्केट के अनुसार बढ़ाया जाता था। बता दें, 8वें पे कमीशन के फैसलों का असर 1.1 केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को होगा।

जुलाई में बढ़ सकती है कर्मचारियों की सैलरी, DA 63% पहुंचने की संभावना; जानिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी बड़ी बातें

नईदिल्ली  केंद्रीय कर्मचारियों के लिए एक बड़ी खबर आ रही है. जल्‍द ही इन कर्मचारियों को लेकर सरकार बड़ा फैसला ले सकती है. इनकी सैलरी में बढ़ोतरी हो सकती है और केंद्रीय कर्मचारियों के बैंक अकाउंट में जुलाई से बढ़ी हुई सैलरी आ सकती है।  महंगाई भत्ते को लेकर अपडेट       दरअसल, केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स की करीबी नजरें 8वें वेतन आयोग पर लगी हैं. कर्मचारी संघों द्वारा ज्‍यादा फिटमेंट फैक्‍टर रखने और मिनिमम बेसिक सैलरी बढ़ाने को कह रहे हैं. इस बीच, महंगाई भत्ते को लेकर अपडेट आया है।  किस आधार पर होगा डीए कैलकुलेशन         कहा जा रहा है कि जुलाई में महंगाई भत्ता बढ़ सकता है. जुलाई में महंगाई भत्ता बढ़ने की उम्‍मीद की वजह इंडस्ट्रियल वर्कर्स के लिए ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (AICPI-IW) है. डीए का कैलकुलेशन इसी इंडेक्स के आधार पर किया जाता है. यह इंडेक्स इस साल मार्च में 149.1 था, जो अप्रैल में बढ़कर 149.9 हो गया।  रिटेल महंगाई में इजाफा इंडस्‍ट्रियल वर्कर्स के लिए रिटेल महंगाई दर भी बढ़ा है. यह 4.27 से बढ़कर 4.46 फीसदी हो गया है. अप्रैल 2026 तक उपलब्ध  AICPI-IW डेटा के आधार पर 12 महीने का एवरेज 147.51 है।  3 फीसदी बढ़ सकता है डीए  ऐसे में 2016 की बेस सीरीज को 2001 के बेस में कनवर्ट करने के लिए 2.88 लिंकिंग फैक्टर का यूज करते हैं तो डीए कैलकुलेशन के बाद करीब 62.51 फीसदी हो जाएगा. इसी कारण डीए में 3 फीसदी बढ़ने की उम्‍मीद की जा रही है।  जुलाई की सैलरी में हो सकती है बढ़ोतरी  साल में दो बार महंगाई भत्ता में बढ़ोतरी की जाती है. सरकार ने जनवरी के महंगाई भत्ता को बढ़ा दिया है और अब जुलाई में होने वाले डीए में बढ़ोतरी की उम्‍मीद की जा रही है. अगर जुलाई से ही इसमें बढ़ोतरी होती है तो केंद्रीय कर्मचारियों को जुलाई महीने की सैलरी के साथ ही बढ़े हुए महंगाई भत्ता भी भेजा जा सकता है।  अभी 60 फीसदी महंगाई भत्ता अभी केंद्र सरकार के कर्मचारी का महंगाई भत्ता 60 फीसदी है. ऐसे में अगर सरकार जुलाई में महंगाई भत्ता बढ़ाने का फैसला करती है तो यह बढ़कर 63 फीसदी तक पहुंच सकता है।  केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग के नियम और शर्तों को मंजूरी दे दी है। इसके बाद अब करीब 55 लाख सेवारत कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनर्स की सैलरी, पेंशन और भत्तों में बड़े बदलाव की उम्मीद है। आयोग को अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। फिटमेंट फैक्टर क्या है और यह क्यों जरूरी है? फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक यानी मल्टीप्लायर है जिसका इस्तेमाल केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की बेसिक सैलरी को रिवाइज करने के लिए किया जाता है। नया सैलरी स्ट्रक्चर तय करने में इसकी भूमिका सबसे जरूरी होती है। 7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जो 2016 से प्रभावी हुआ था। इसके तहत अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹15,000 थी, तो वह बढ़कर ₹38,550 हो गई थी। कर्मचारी यूनियनों की मांग और एक्सपर्ट्स का अनुमान 8वें वेतन आयोग के लिए केंद्रीय कर्मचारी यूनियनों और एसोसिएशनों ने मुख्य रूप से फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाने और न्यूनतम बेसिक पे में बड़ी बढ़ोतरी की मांग की है। कुछ यूनियनों ने फिटमेंट फैक्टर को 3 से 5 या उससे अधिक करने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, पेंशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतनी बड़ी मांग वित्तीय वास्तविकताओं के अनुकूल नहीं हो सकती है। पेंशन एक्सपर्ट्स के अनुसार, आयोग न्यूनतम वेतन की गणना के तरीके में बदलाव कर सकता है। इसके लिए परिवार की उपभोग इकाइयों (कंजम्पशन यूनिट्स) को तीन से बढ़ाकर पांच किया जा सकता है और फिटमेंट फैक्टर को 2.64 करने पर विचार किया जा सकता है। कितनी बढ़ सकती है कर्मचारियों की इनहैंड सैलरी? सैलरी में होने वाली अंतिम बढ़ोतरी इस बात पर निर्भर करेगी कि आयोग क्या सिफारिश करता है और सरकार किसे मंजूरी देती है। इसे दो अलग-अलग उदाहरणों से समझा जा सकता है…     पहला उदाहरण (60% DA के आधार पर): मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक पे ₹100 है। 60% महंगाई भत्ता (DA) मिलाकर उसकी कुल कमाई ₹160 हो जाती है। नए फिटमेंट फैक्टर के बाद अगर बेसिक पे दोगुनी होकर ₹200 हो जाती है, तो मौजूदा ₹160 के मुकाबले उसकी प्रभावी सैलरी में करीब 25% की बढ़ोतरी होगी।     दूसरा उदाहरण (फिटमेंट फैक्टर 3 होने पर): अगर सरकार मौजूदा फिटमेंट फैक्टर को 2.57 से बढ़ाकर 3.0 कर देती है, तो एंट्री-लेवल की बेसिक पे में 15 से 20% से ज्यादा की बढ़ोतरी हो सकती है। इस स्थिति में ₹15,000 की बेसिक सैलरी सीधे ₹45,000 हो जाएगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सरकार कर्मचारी यूनियनों की मांग से कम फिटमेंट फैक्टर भी रखती है, तो भी सरकारी खर्च में बड़ी बढ़ोतरी होगी और कर्मचारियों को अपनी सैलरी में एक सम्मानजनक उछाल देखने को मिलेगा। 7वें वेतन आयोग में कितना हुआ था फायदा? तुलना के लिए 7वें केंद्रीय वेतन आयोग ने सबसे निचले स्तर के कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी को बढ़ाकर ₹18,000 प्रति महीने किया था। इसके साथ ही नई भर्ती वाले क्लास-I अधिकारियों की सैलरी को ₹56,100 तय किया गया था। इसके कारण 1 जनवरी 2016 से कुल सैलरी और पेंशन में 14.29% की कुल बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। राज्यों का दौरा कर रही है 8वें वेतन आयोग की टीम वर्तमान में 8वां वेतन आयोग अलग-अलग राज्यों का दौरा कर रहा है। आयोग की टीम वहां कर्मचारी एसोसिएशनों और यूनियनों से मुलाकात कर रही है। इस दौरान कर्मचारियों की मांगों और उनके प्रस्तावों के ज्ञापन (मेमोरेंडम) नोट किए जा रहे हैं। यूनियनों ने मुख्य रूप से सैलरी रिवीजन और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले फायदों में सुधार की मांग रखी है। कब लागू होगा 8वां वेतन आयोग और कब तक आएगी रिपोर्ट? केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2025 में 8वें वेतन आयोग की शर्तों को मंजूरी दी थी और पैनल को रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया था। हालांकि 7वें वेतन आयोग की जगह 8वें वेतन आयोग को 1 जनवरी 2026 से लागू मान लिया गया है, लेकिन आयोग को अपना काम पूरा करने में करीब … Read more

सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा अपडेट, जुलाई में वेतन वृद्धि की उम्मीद; 8वें वेतन आयोग पर नजरें

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग के नियम और शर्तों को मंजूरी दे दी है। इसके बाद अब करीब 55 लाख सेवारत कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनर्स की सैलरी, पेंशन और भत्तों में बड़े बदलाव की उम्मीद है। आयोग को अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। फिटमेंट फैक्टर क्या है और यह क्यों जरूरी है? फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक यानी मल्टीप्लायर है जिसका इस्तेमाल केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की बेसिक सैलरी को रिवाइज करने के लिए किया जाता है। नया सैलरी स्ट्रक्चर तय करने में इसकी भूमिका सबसे जरूरी होती है। 7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जो 2016 से प्रभावी हुआ था। इसके तहत अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹15,000 थी, तो वह बढ़कर ₹38,550 हो गई थी। कर्मचारी यूनियनों की मांग और एक्सपर्ट्स का अनुमान 8वें वेतन आयोग के लिए केंद्रीय कर्मचारी यूनियनों और एसोसिएशनों ने मुख्य रूप से फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाने और न्यूनतम बेसिक पे में बड़ी बढ़ोतरी की मांग की है। कुछ यूनियनों ने फिटमेंट फैक्टर को 3 से 5 या उससे अधिक करने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, पेंशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतनी बड़ी मांग वित्तीय वास्तविकताओं के अनुकूल नहीं हो सकती है। पेंशन एक्सपर्ट्स के अनुसार, आयोग न्यूनतम वेतन की गणना के तरीके में बदलाव कर सकता है। इसके लिए परिवार की उपभोग इकाइयों (कंजम्पशन यूनिट्स) को तीन से बढ़ाकर पांच किया जा सकता है और फिटमेंट फैक्टर को 2.64 करने पर विचार किया जा सकता है। कितनी बढ़ सकती है कर्मचारियों की इनहैंड सैलरी? सैलरी में होने वाली अंतिम बढ़ोतरी इस बात पर निर्भर करेगी कि आयोग क्या सिफारिश करता है और सरकार किसे मंजूरी देती है। इसे दो अलग-अलग उदाहरणों से समझा जा सकता है…     पहला उदाहरण (60% DA के आधार पर): मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक पे ₹100 है। 60% महंगाई भत्ता (DA) मिलाकर उसकी कुल कमाई ₹160 हो जाती है। नए फिटमेंट फैक्टर के बाद अगर बेसिक पे दोगुनी होकर ₹200 हो जाती है, तो मौजूदा ₹160 के मुकाबले उसकी प्रभावी सैलरी में करीब 25% की बढ़ोतरी होगी।     दूसरा उदाहरण (फिटमेंट फैक्टर 3 होने पर): अगर सरकार मौजूदा फिटमेंट फैक्टर को 2.57 से बढ़ाकर 3.0 कर देती है, तो एंट्री-लेवल की बेसिक पे में 15 से 20% से ज्यादा की बढ़ोतरी हो सकती है। इस स्थिति में ₹15,000 की बेसिक सैलरी सीधे ₹45,000 हो जाएगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सरकार कर्मचारी यूनियनों की मांग से कम फिटमेंट फैक्टर भी रखती है, तो भी सरकारी खर्च में बड़ी बढ़ोतरी होगी और कर्मचारियों को अपनी सैलरी में एक सम्मानजनक उछाल देखने को मिलेगा। 7वें वेतन आयोग में कितना हुआ था फायदा? तुलना के लिए 7वें केंद्रीय वेतन आयोग ने सबसे निचले स्तर के कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी को बढ़ाकर ₹18,000 प्रति महीने किया था। इसके साथ ही नई भर्ती वाले क्लास-I अधिकारियों की सैलरी को ₹56,100 तय किया गया था। इसके कारण 1 जनवरी 2016 से कुल सैलरी और पेंशन में 14.29% की कुल बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। राज्यों का दौरा कर रही है 8वें वेतन आयोग की टीम वर्तमान में 8वां वेतन आयोग अलग-अलग राज्यों का दौरा कर रहा है। आयोग की टीम वहां कर्मचारी एसोसिएशनों और यूनियनों से मुलाकात कर रही है। इस दौरान कर्मचारियों की मांगों और उनके प्रस्तावों के ज्ञापन (मेमोरेंडम) नोट किए जा रहे हैं। यूनियनों ने मुख्य रूप से सैलरी रिवीजन और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले फायदों में सुधार की मांग रखी है। कब लागू होगा 8वां वेतन आयोग और कब तक आएगी रिपोर्ट? केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2025 में 8वें वेतन आयोग की शर्तों को मंजूरी दी थी और पैनल को रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया था। हालांकि 7वें वेतन आयोग की जगह 8वें वेतन आयोग को 1 जनवरी 2026 से लागू मान लिया गया है, लेकिन आयोग को अपना काम पूरा करने में करीब 18 महीने का समय लगने की उम्मीद है। आयोग ने मेमोरेंडम जमा करने की आखिरी तारीख को बढ़ाकर 15 जून 2026 कर दिया है। इसके बाद सभी हितधारकों (स्टेकहोल्डर्स) के सुझावों की जांच की जाएगी और अंतिम सिफारिशें तैयार होंगी। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि अगर रिपोर्ट जून-जुलाई 2027 तक सौंपी जाती है, तो सरकार पर एरियर (बकाया) देने की देनदारी काफी बढ़ जाएगी। सिफारिशें स्वीकार और लागू होने के बाद, केंद्र सरकार बीच की अवधि का पूरा एरियर कर्मचारियों को देगी। फिलहाल कर्मचारी संगठन ज्यादा मल्टीप्लायर और बेहतर रिटायरमेंट फायदों के लिए दबाव बना रहे हैं, जबकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि अंतिम फैसला देश के वित्तीय हालातों को देखकर ही लिया जाएगा। क्या होता है वेतन आयोग ? केंद्रीय वेतन आयोग केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सैलरी, भत्तों, पेंशन और अन्य फायदों की समीक्षा करने के लिए गठित एक पैनल होता है। आमतौर पर देश में हर 10 साल में एक नए वेतन आयोग का गठन किया जाता है, जो बदलती अर्थव्यवस्था और महंगाई के हिसाब से सरकारी कर्मचारियों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए सिफारिशें देता है।

8th Pay Commission Update: कर्मचारियों की बढ़ सकती है चांदी, नया फॉर्मूला लागू हुआ तो मिल सकता है भारी एरियर

नई दिल्ली भारत के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की निगाहें इस समय 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) पर टिकी हुई हैं। कर्मचारी संगठनों और पेंशनर संघों की आयोग के अधिकारियों के साथ लगातार बैठकें चल रही हैं, जिनमें वेतन वृद्धि, फिटमेंट फैक्टर, भत्तों और पेंशन सुधार जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है। 8वें वेतन आयोग में अगर 2.86 फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो लेवल-14 के कर्मचारियों का 20 महीने में अनुमानित एरियर करीब 53 लाख के पार पहुंच सकता है। 15 जून 2026 तक आयोग को ज्ञापन सौंपने की अंतिम तिथि तय की गई है, जबकि 22-23 जून को लखनऊ में भी महत्वपूर्ण बैठकें प्रस्तावित हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि 8वें वेतन आयोग के लागू होने पर कर्मचारियों की सैलरी कितनी बढ़ेगी और उन्हें कितना एरियर (Arrears) मिल सकता है। हालांकि, केंद्र सरकार ने अभी तक 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट लागू करने की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आयोग को रिपोर्ट जमा करने के लिए दिए गए 18 महीने के समय को देखते हुए इसका क्रियान्वयन 2027 की दूसरी छमाही में हो सकता है। नवंबर 2025 में आयोग का कार्यकाल तय किया गया था और अगर यह मई 2027 तक रिपोर्ट सौंपता है, तो उसके बाद कैबिनेट की मंजूरी और अन्य प्रक्रियाओं में 3 से 6 महीने का समय लग सकता है। इस स्थिति में अगस्त या सितंबर 2027 तक नई सैलरी लागू होने की संभावना है। चूंकि 7वें वेतन आयोग की अवधि 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो चुकी है, इसलिए कर्मचारियों को 1 जनवरी 2026 से एरियर मिलने की उम्मीद है। अगर लागू होने में लगभग 20 से 21 महीने की देरी होती है, तो कर्मचारियों को एकमुश्त बड़ी राशि मिल सकती है। वेतन स्तर (Pay Level) सामान्य प्रारंभिक बेसिक वेतन प्रमुख पद (Common Designations) लेवल 11 ₹67,700 उप सचिव (Deputy Secretary), ग्रुप-A में पदोन्नत वरिष्ठ सेक्शन अधिकारी, डिप्टी डायरेक्टर, कार्यकारी अभियंता (Executive Engineer), डिप्टी कमांडेंट लेवल 12 ₹78,800 निदेशक (Director), संयुक्त निदेशक (Joint Director), केंद्रीय संस्थानों में प्रोफेसर, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी लेवल 13 ₹1,23,100 कुछ संगठनों में संयुक्त सचिव स्तर के पद, वरिष्ठ निदेशक, मुख्य अभियंता (Chief Engineer), उच्च ग्रेड के वैज्ञानिक लेवल 14 ₹1,44,200 वरिष्ठ संयुक्त सचिव, अतिरिक्त महानिदेशक (Additional Director General) स्तर के अधिकारी, वरिष्ठ वैज्ञानिक, बड़े विभागों के प्रमुख लेवल 11 से 14 के कर्मचारी, जो आमतौर पर ग्रुप-A अधिकारी होते हैं, इस बढ़ोतरी से सबसे ज्यादा लाभ पाने वालों में शामिल हो सकते हैं। इनमें डिप्टी सेक्रेटरी, डायरेक्टर, प्रोफेसर, चीफ इंजीनियर, वैज्ञानिक, वरिष्ठ संयुक्त सचिव और अन्य उच्च प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं। वर्तमान में लेवल 11 का शुरुआती बेसिक वेतन ₹67,700, लेवल 12 का ₹78,800, लेवल 13 का ₹1,23,100 और लेवल 14 का ₹1,44,200 है। अगर 8वें वेतन आयोग में 2.0 से लेकर 2.86 तक का फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाता है, तो इन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में भारी उछाल देखने को मिल सकता है। उदाहरण के तौर पर, लेवल 11 के कर्मचारी की बेसिक सैलरी 2.0 फिटमेंट फैक्टर पर ₹1.35 लाख और 2.86 फिटमेंट फैक्टर पर लगभग ₹1.94 लाख तक पहुंच सकती है। इसी तरह लेवल 14 के अधिकारियों की बेसिक सैलरी ₹4 लाख रुपये के करीब तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। इसके साथ ही 20 महीने के एरियर की गणना की जाए तो कई कर्मचारियों को लाखों रुपये का एकमुश्त भुगतान मिल सकता है। 8वें वेतन आयोग (2.0 फिटमेंट फैक्टर) पर संभावित एरियर लेवल वर्तमान बेसिक वेतन (रु.) संशोधित बेसिक वेतन (रु.) बेसिक वेतन में वृद्धि (रु.) 20 माह का अनुमानित एरियर (रु.) लेवल 11 ₹67,700 ₹1,35,400 ₹67,700 ₹13,54,000 लेवल 12 ₹78,800 ₹1,57,600 ₹78,800 ₹15,76,000 लेवल 13 ₹1,23,100 ₹2,46,200 ₹1,23,100 ₹24,62,000 लेवल 14 ₹1,44,200 ₹2,88,400 ₹1,44,200 ₹28,84,000 8वें वेतन आयोग (2.15 फिटमेंट फैक्टर) के आधार पर संभावित एरियर लेवल वर्तमान बेसिक वेतन (रु.) संशोधित बेसिक वेतन (रु.) बेसिक वेतन में वृद्धि (रु.) 20 माह का अनुमानित एरियर (रु.) लेवल 11 ₹67,700 ₹1,45,555 ₹77,855 ₹15,57,100 लेवल 12 ₹78,800 ₹1,69,420 ₹90,620 ₹18,12,400 लेवल 13 ₹1,23,100 ₹2,64,665 ₹1,41,565 ₹28,31,300 लेवल 14 ₹1,44,200 ₹3,10,030 ₹1,65,830 ₹33,16,600 8वें वेतन आयोग (2.28 फिटमेंट फैक्टर) के आधार पर संभावित एरियर लेवल वर्तमान बेसिक वेतन (रु.) संशोधित बेसिक वेतन (रु.) बेसिक वेतन में वृद्धि (रु.) 20 माह का अनुमानित एरियर (रु.) लेवल 11 ₹67,700 ₹1,54,356 ₹86,656 ₹17,33,120 लेवल 12 ₹78,800 ₹1,79,664 ₹1,00,864 ₹20,17,280 लेवल 13 ₹1,23,100 ₹2,80,668 ₹1,57,568 ₹31,51,360 लेवल 14 ₹1,44,200 ₹3,28,776 ₹1,84,576 ₹36,91,520 8वें वेतन आयोग (2.57 फिटमेंट फैक्टर) के आधार पर 20 माह के संभावित एरियर लेवल वर्तमान बेसिक वेतन (रु.) संशोधित बेसिक वेतन (रु.) बेसिक वेतन में वृद्धि (रु.) 20 माह का अनुमानित एरियर (रु.) लेवल 11 ₹67,700 ₹1,73,989 ₹1,06,289 ₹21,25,780 लेवल 12 ₹78,800 ₹2,02,516 ₹1,23,716 ₹24,74,320 लेवल 13 ₹1,23,100 ₹3,16,367 ₹1,93,267 ₹38,65,340 लेवल 14 ₹1,44,200 ₹3,70,594 ₹2,26,394 ₹45,27,880 2.86 फिटमेंट फैक्टर पर लेवल 11-14 के कर्मचारियों को मिलने वाले 20 महीनों के अनुमानित एरियर लेवल वर्तमान मूल वेतन संशोधित मूल वेतन मूल वेतन में वृद्धि 20 महीनों का एरियर 11 67,700 1,93,622 1,25,922 25,18,440 12 78,800 2,25,368 1,46,568 29,31,360 13 1,23,100 3,52,066 2,28,966 45,79,320 14 1,44,200 4,12,412 2,68,212 53,64,240   ध्यान देने वाली बात यह है कि एरियर केवल बढ़ी हुई बेसिक सैलरी पर मिलता है। महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), बच्चों की शिक्षा भत्ता (CEA) जैसे अन्य भत्तों पर एरियर नहीं दिया जाता, क्योंकि नए वेतन आयोग में इनकी दरें अलग से संशोधित की जाती हैं। इसलिए कर्मचारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण भूमिका फिटमेंट फैक्टर की रहने वाली है। 8वां वेतन आयोग केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी राहत लेकर आ सकता है। अगर रिपोर्ट 2027 में लागू होती है और कर्मचारियों को 20 महीने का एरियर मिलता है, तो लाखों सरकारी कर्मचारियों के खातों में बड़ी रकम आ सकती है। अब सभी की नजर आयोग की सिफारिशों और सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं, जो आने वाले महीनों में तस्वीर पूरी तरह साफ कर देगा।

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! 8th Pay Commission से वेतन में हो सकती है बंपर बढ़ोतरी

नई दिल्ली केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। कर्मचारी संगठनों की ओर से फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने की मांग की जा रही है। अगर सरकार सबसे अधिक प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर 3.83 को मंजूरी देती है, तो केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन (Basic Pay) मौजूदा ₹18,000 से बढ़कर करीब ₹68,940 हो सकता है। क्या होता है फिटमेंट फैक्टर? फिटमेंट फैक्टर एक गणितीय गुणक (Multiplier) होता है, जिसके आधार पर कर्मचारियों के मौजूदा बेसिक पे और पेंशन को नए सैलरी स्ट्रक्चर में परिवर्तित किया जाता है। वेतन आयोग की सिफारिशों में यह सबसे महत्वपूर्ण तत्वों में से एक माना जाता है, क्योंकि इसी के आधार पर वेतन, पेंशन, भत्ते और एरियर तय होते हैं। 7वें वेतन आयोग में कितना था फिटमेंट फैक्टर? 7वें वेतन आयोग ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया था। इसके बाद कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन ₹7,000 से बढ़कर ₹18,000 हो गया था। 8वें वेतन आयोग के लिए क्या हैं मांगें? विभिन्न कर्मचारी संगठनों और विशेषज्ञों ने अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर की मांग की है।विशेषज्ञों का फिटमेंट फैक्टर का अनुमान 1.92 है। जबकि, ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) का 3.00 और फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशन (FNPO) का 3.25 है। वहीं, जम्मू-कश्मीर कर्मचारी मंच का अनुमान 3.05 और जम्मू-कश्मीर कर्मचारी समन्वय समिति का 2.86 से 3.68 है। नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM)ने 3.83 का अनुमान लगाया है। फिटमेंट फैक्टर के हिसाब से कितना हो सकता है वेतन? मौजूदा न्यूनतम मूल वेतन ₹18,000 को आधार मानें तो संभावित वेतन इस प्रकार हो सकता है… 1.92 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹34,560 2.57 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹46,260 2.86 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹51,480 3.00 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹54,000 3.25 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹58,500 3.68 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹66,240 3.83 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹68,940 अगर सरकार 7वें वेतन आयोग जैसा 2.57 का फिटमेंट फैक्टर ही लागू करती है, तब भी न्यूनतम मूल वेतन ₹46,260 तक पहुंच सकता है। वहीं, कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांग 3.83 फिटमेंट फैक्टर मंजूर होने पर वेतन में करीब 283 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिल सकती है। सिर्फ वेतन ही नहीं, भत्ते भी बढ़ेंगे फिटमेंट फैक्टर बढ़ने का असर केवल मूल वेतन तक सीमित नहीं रहेगा। इसके साथ ही हाउस रेंट अलाउंस (HRA) में बढ़ोतरी होगी। ट्रांसपोर्ट अलाउंस और अन्य भत्तों की समीक्षा होगी और मौजूदा महंगाई भत्ता (DA) मूल वेतन में समाहित किया जाएगा। नया सैलरी स्ट्रक्चर लागू होने के बाद DA की गणना फिर से शुरू होगी। कर्मचारियों की निगाह सरकार के फैसले पर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजर अब सरकार और 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर टिकी है। फिटमेंट फैक्टर जितना अधिक होगा, वेतन और पेंशन में उतनी ही बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। हालांकि अंतिम फैसला सरकार को ही लेना है।