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केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर! 8वें वेतन आयोग के सामने CGEGIS में 10 गुना बीमा कवर बढ़ाने का प्रस्ताव

नई दिल्ली केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए 8वां वेतन आयोग सिर्फ वेतन और भत्तों तक सीमित नहीं है। कर्मचारी संगठनों ने इसके सामने कई दूसरे मुद्दे भी रखे हैं, जिनमें CGEGIS (Central Government Employees Group Insurance Scheme) में बदलाव की मांग प्रमुख है। कर्मचारियों का कहना है कि CGEGIS के तहत मिलने वाला बीमा कवर मौजूदा समय की महंगाई और परिवार की बढ़ती जरूरतों के मुकाबले बेहद कम है। खास बात यह है कि इस योजना की बीमा राशि में लंबे समय से कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। कर्मचारी संगठनों के अनुसार, ग्रुप C कर्मचारियों के लिए करीब ₹1.50 लाख का बीमा कवर आज भी बना हुआ है, जिसे पुराने वेतन आयोग की सिफारिशों से जोड़ा जाता है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं। CGEGIS को नए सिरे से तैयार करने की मांग 8वें वेतन आयोग के सामने दिए गए ज्ञापनों में कर्मचारी संगठनों ने CGEGIS को नए सिरे से तैयार करने की मांग की है। MSA (Ministerial Staff Association) ने बीमा कवर को मौजूदा दरों से कम से कम 10 गुना बढ़ाने का सुझाव दिया है। संगठन का तर्क है कि आज के समय में किसी कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु होने पर परिवार को मिलने वाली यह राशि पर्याप्त आर्थिक सुरक्षा नहीं देती। ग्रुप A के लिए ₹3 करोड़ तक का बीमा FNPO (Federation of National Postal Organisations) ने भी योजना में बड़े बदलाव की मांग करते हुए ग्रुप C के लिए ₹1 करोड़, ग्रुप B के लिए ₹1.50 करोड़ और ग्रुप A के लिए ₹3 करोड़ तक का बीमा कवर सुझाया है। इसके लिए अलग-अलग मासिक योगदान का प्रस्ताव भी रखा गया है। पहले के वेतन आयोगों में चर्चा पर खत्म हुई बात कर्मचारी संगठनों का कहना है कि पहले के वेतन आयोगों में भी CGEGIS के योगदान और बीमा राशि को बढ़ाने की जरूरत पर चर्चा हुई थी, लेकिन योजना में अपेक्षित बदलाव नहीं हो सका। FNPO ने सुझाव दिया है कि पहले 7वें वेतन आयोग से जुड़े प्रस्तावित बीमा स्तरों को लागू किया जाए और उसके बाद महंगाई तथा वेतन में बदलाव के आधार पर इसे समय-समय पर बढ़ाया जाए। संगठन ने महंगाई भत्ते के एक निश्चित स्तर तक पहुंचने पर बीमा कवर में स्वतः बढ़ोतरी का सुझाव भी दिया है असमय मृत्यु की स्थिति में आर्थिक सहायता CGEGIS में बीमा के साथ बचत का हिस्सा भी शामिल होता है। कर्मचारी संगठनों का मानना है कि मौजूदा व्यवस्था में बीमा सुरक्षा को ज्यादा प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि कर्मचारी की असमय मृत्यु की स्थिति में उसके परिवार को पर्याप्त आर्थिक सहायता मिल सके। इसी वजह से बीमा और बचत के अनुपात में बदलाव की मांग भी उठी है। हालांकि, इन सभी मांगों पर अंतिम फैसला 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों और उसके बाद केंद्र सरकार के निर्णय पर निर्भर करेगा। फिलहाल, केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजर इस बात पर है कि 8वां वेतन आयोग CGEGIS को लेकर क्या सिफारिश करता है और क्या दशकों से चली आ रही इस व्यवस्था में अब बड़ा बदलाव देखने को मिलता है।

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर! 8वां वेतन आयोग इस स्कीम में कर सकता है बदलाव, जानें असर

नई दिल्ली  केंद्रीय कर्मचारियों के लिए गठित आठवां वेतन आयोग मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन' (MACP) स्कीम की समीक्षा कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो इस योजना में बदलाव की मांग की गई है। अब वेतन आयोग इस मांग पर गंभीरता से विचार कर रहा है। क्या है मामला? मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन (MSA), सर्वे ऑफ इंडिया ने अपने ज्ञापन में मांग की है कि MACP के तहत फाइनेंशियल अपग्रेडेशन (वित्तीय लाभ) केवल अगले पे मैट्रिक्स लेवल पर नहीं, बल्कि कर्मचारी के अगले प्रमोशनल पद के पे लेवल के हिसाब से दिया जाना चाहिए। MSA ने यह भी कहा कि अपग्रेडेशन की संख्या तीन से बढ़ाकर पांच की जानी चाहिए, जो नौकरी के 8, 15, 22, 28 और 32 साल पूरे होने पर मिलें। MSA के अनुसार, मौजूदा नियमों के तहत MACP में असल 'प्रमोशनल हायरार्की' के अगले वेतनमान के बजाय 'पे मैट्रिक्स' में अगला लेवल दिया जाता है। इसके अलावा, फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशन्स (FNPO) ने 6, 12, 18, 24 और 30 वर्षों में पांच बार प्रमोशन का प्रस्ताव रखा। FNPO ने एक और अहम बदलाव की मांग की है। संगठन के मुताबिक अगर कोई कर्मचारी किसी प्रमोशन को स्वीकार नहीं करता है, तो उसके MACP लाभ को रोका या टाला नहीं जाना चाहिए। यानी MACP का लाभ प्रमोशन से अलग रखा जाना चाहिए। उदाहरण से समझें मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई कर्मचारी लेवल-7 पर है और उसका अगला प्रमोशनल पद लेवल-10 का है, तो मौजूदा व्यवस्था में उसे MACP के तहत केवल लेवल-8 मिल सकता है। इससे वास्तविक प्रमोशन और वित्तीय लाभ के बीच बड़ा अंतर पैदा हो जाता है। एसोसिएशन ने कहा कि इससे कर्मचारियों का मनोबल गिरा है। ऐसे मामले भी सामने आए हैं जहाँ ज्यादा जिम्मेदारियों (जैसे ऑफिस सुपरिटेंडेंट) पर प्रमोट किए गए जूनियर स्टाफ लेवल 6 में ही बने रहते हैं जबकि उनके जूनियर, जिन्हें प्रमोशन नहीं मिला, उन्हें MACP के तहत लेवल 7 मिल जाता है। इसके अलावा, राष्ट्रीय परिषद-जेसीएम स्टाफ साइड ने मांग की है कि प्रमोशन क्रम में MACP प्रोवाइड किया जाए, जिसका समर्थन कई अन्य यूनियनों ने भी किया है। रेलवे वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति ने 10 साल के अंतराल के मानवीय नुकसान को उजागर करते हुए कहा कि फाइनेंशियल अपग्रेडेशन के बीच 10 साल का लंबा अंतराल लंबे समय तक गतिरोध का कारण बनता है, खासकर उन कैडरों में जहां प्रमोशन के पद सीमित हैं। बता दें कि पिछले साल आठवें वेतन आयोग का गठन हुआ था। वेतन आयोग को 18 महीने में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने की डेडलाइन मिली हुई है।

8th Pay Commission News: कर्मचारी कर रहे OPS बहाली की मांग, UPS में सुधार का मिल सकता है विकल्प

नईदिल्ली     8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) में सैलरी-पेंशन को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों की उम्मीदें लगातार बढ़ती जा रही हैं. हालांकि, इसके साथ ही पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने की मांग भी तेजी से जोर पकड़ रही है. 8वें वेतन आयोग के गठन के बाद से ही केंद्रीय कर्मचारियों और यूनियनों ने पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने पर बड़ा जोर दिया है. कर्मचारी संगठन नई पेंशन योजना (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को खारिज करते हुए सिर्फ OPS की वापसी चाहते हैं।  ओल्ड पेंशन स्कीम की वापसी की मांग कर्मचारी संगठन और रेलवे यूनियनों का कहना है कि न्यू पेंशन स्कीम(NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम  (UPS) कर्मचारियों की सोशल सोक्योरिटी की गारंटी पूरी तरह नहीं देती हैं. इसलिए यूनियनों की ये बड़ी मांग है कि 8वें वेतन आयोग के तहत सभी कर्मचारियों के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) को फिर से लागू किया जाए।  एक तरह कर्मचारी संगठन 8वें वेतन आयोग के तहत ओपीएस लागू करने पर अड़े हुए हैं, जबकि दूसरी तरफ इकनॉमिक एक्सपर्ट और कानूनी जानकार इस मांग पर पूरी तरह सहमत नजर नहीं आ रहे हैं .यूनियनों की इस मांग पर उन्होंने अपनी चिंताएं जताई हैं. उनका मानना है कि पुरानी पेंशन योजना को दोबारा लागू करना व्यावहारिक नहीं है।  कर्मचारियों को NPS और UPS से क्यों है ऐतराज? कर्मचारी यूनियनों की सबसे बड़ी चिंता आर्थिक सुरक्षा को लेकर है. उनका तर्क है कि ओपीएस में निश्चित पेंशन मिलती थी,  जबकि  NPS का रिटर्न पूरी तरह बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करता है, जिससे रिटायरमेंट के बाद पेंशन पर असर पड़ता है।  लीगल और इकोनॉमिक एक्सपर्ट्स ने क्यों जताई चिंता? एक्सपर्ट के अनुसार, ओपीएस लागू करने से सरकारी खजाने पर बेहद भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा, जिससे देश के विकास कार्यों का बजट प्रभावित हो सकता है.कानूनी रूप से भी सरकार पहले ही NPS को बेहतर करने के लिए यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) का ऑप्शन ला चुकी है. ऐसे में  पुरानी व्यवस्था पर पूरी तरह लौटना नीतिगत और कानूनी रूप से  उलझाऊ और बेहद मुश्किल है।  ओल्ड पेंशन से लेकर मिनिमम सैलरी तक: कर्मचारियों की 5 बड़ी मांगें 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की बैठकों का दौर जारी है. हाल ही में चेन्नई में हुई बड़ी बैठक में केंद्रीय कर्मचारियों- पेंशनभोगियों  के लिए पेंशनर्स फोरम ने 5 बड़ी मांगें आयोग के सामने रखा है।      सबसे पहली और बड़ी मांग यह है कि नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) को हटाकर पुरानी पेंशन योजना (OPS) को तुरंत बहाल किया जाए. सालों से जारी इस मांग को चेन्नई बैठक में  सबसे ज्यादा जोर दिया गया।      इसके अलावा, रिटायर हो चुके कर्मचारियों और उनके आश्रितों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए बेसिक पेंशन और फैमिली पेंशन दोनों में सम्मानजनक बढ़ोतरी की अपील की गई है. उनकी मांग है कि न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़ाकर ₹68,000 किया जाए और 10 साल के लंबे इंतजार के बजाय स्थाई 'वेज-रिविजन' सिस्टम बने।      पेंशन कम्यूटेशन या कम्यूटेड पेंशन की रिकवरी के नियमों को लेकर लंबे समय से अस्पष्टता बनी हुई है, जिस पर राहत और आसान नियम बनाने की मांग की है।      वहीं, प्रमोशन और सैलरी इंक्रीमेंट से जुड़े मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (MACP) के तहत मिलने वाले फायदों को रिवाइज करने की मांग उठाई गई है, ताकि डाक कर्मचारियों के करियर ग्रोथ और पे-स्केल में सुधार हो सके।      इसके साथ ही, कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बेहतर भत्ते, लीव रूल्स और एक मजबूत सोशल सिक्योरिटी कवर देने की बात भी आयोग के समक्ष रखी गई है।  OROP पर क्या कहती हैं लीगल एक्सपर्ट? सशस्त्र बलों की तर्ज पर सिविलियन कर्मचारियों के लिए 'वन रैंक, वन पेंशन' (OROP) लागू करने की मांग पर लीगल फर्म CMS INDUSLAW की पार्टनर अमृता टोंक का कहना है कि सिविल सेवाओं का ढांचा सेना से अलग होता है. हर विभाग, काडर और भर्ती के साल का हिसाब अलग होने के कारण एक समान OROP फॉर्मूला लागू करने से नई असमानताएं पैदा हो सकती हैं।  प्री-2026 पेंशनर्स के अधिकारों पर उनका मानना है कि पेंशन और ग्रेच्युटी कर्मचारियों द्वारा अर्जित किए गए अधिकार हैं. आयोग पुराने पेंशनर्स के लाभों को फ्रीज नहीं कर सकता. कानूनी रूप से सही रास्ता यही है कि नए बदलावों को केवल भविष्य में जुड़ने वाले नए कर्मचारियों पर ही लागू किया जाए।  आगे  क्या रास्ता निकाल सकती है सरकार? जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाला यह आयोग मई-जून 2027 के आसपास अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप सकता है. 16 से 18 सितंबर को चंडीगढ़ में अगली बैठक होनी है।  एक्सपर्ट्स के अनुसार, OPS की पूरी तरह बहाली की गुंजाइश भले ही कम हो, लेकिन सरकार कर्मचारियों के हितों का ध्यान रखते हुए यूपीएस में कुछ और सुधार कर सकती है.हालांकि ओपीएस की पूरी तरह बहाली की संभावना बहुत कम है। 

8th Pay Commission में पेंशनर्स की बल्ले-बल्ले! 3.8 फिटमेंट फैक्टर से कितनी बढ़ेगी पेंशन, जानें गणना

नई दिल्ली क्‍या आठवें वेतन आयोग में केंद्रीय कर्मचारियों को सैलरी में 30% की बढ़ोतरी से ही संतोष करना होगा? क्‍या पेंशनर्स को भी उनके पेंशन में इतनी ही बढ़ोतरी से संतोष करना होगा. 8वें वेतन आयोग की देश के अलग-अलग शहरों में हो रही बैठकों के बीच 3.833 फिटमेंट फैक्‍टर का प्रस्‍ताव दे चुके संगठन AINPSF यानी ऑल इंडिया NPS फेडरेशन को आशंका है कि आयोग ज्‍यादा फिटमेंट फैक्‍टर की सिफारिश शायद ही करे।  संगठन के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष डॉ मंजीत पटेल तो 2.10 फिटमेंट फैक्‍टर पर भी कैलकुलेशन कर अपने सदस्‍यों की राय मांग रहे हैं. 7वें वेतन आयोग की तुलना में 8वें वेतन आयोग के लिए उनका कैलकुलेशन सैलरी और पेंशन में करीब 31% की बढ़ोतरी की संभावना जता रहा है।  8वें वेतन आयोग में कितनी बढ़ जाएगी सैलरी और पेंशन?  इस सवाल का पक्‍का जवाब तो फिलहाल 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के पास भी नहीं है. देशभर में बैठकों का दौर समाप्‍त होने के बाद आयोग आकलन करेगा और तभी अपनी सिफारिशें तैयार करेगा. बहरहाल, अलग-अलग संगठन उम्‍मीदें लगाए बैठे हैं. इधर, डॉ मंजीत सिंह पटेल ने 100 रुपये के मूल वेतन पर सातवें वेतन आयोग और आठवें वेतन आयोग के लिए कैलकुलेशन सामने रखा है. उनका आकलन बताता है कि सैलरी 31.25% बढ़ सकती है. और पेंशन भी इसी अनुपात में बढ़ाई जा सकती है।  100 रुपये के मूल वेतन पर कैलकुलेशन का फॉर्मूला सैलरी 225 रुपये से बढ़कर 257 रुपये होने में या फिर 158 रुपये से बढ़कर 210 रुपये होने में, कहां ज्‍यादा लाभ दिख रहा है आपको? डॉ पटेल ने अपनी पोस्‍ट में यही लिखा है. इस संबंध में हमने जब उनसे बात की तो उन्‍होंने बताया कि 100 रुपये के मूल वेतन पर मोटा-मोटी कैलकुलेशन किया गया है. उन्‍होंने समझाया पहले सातवें वेतन आयोग का कैलकुलेशन समझ लें       छठे वेतन आयोग में मान लीजिए किसी की सैलरी 100 रुपये थी.      तब DA बढ़कर 125% पहुंच गया था.      यानी बेसिक + DA मिलाकर सैलरी बनी- 225 रुपये      7वां वेतन आयोग हुआ तो 2.57 फिटमेंट फैक्‍टर लागू हुआ तो सैलरी हो गई 100 x 2.57= 257 रुपये      वास्‍तविक बढ़ोतरी= 257-225 = 32 रुपये      इसे 225 रुपये के आधार पर प्रतिशत में निकाला जाए तो ये महज 14.22% बढ़ोतरी हुई.  अब इसी तरह 8वें वेतन आयोग का कैलकुलेशन देखिए      7वें वेतन आयोग में किसी की सैलरी 100 रुपये मान लीजिए     DA बढ़कर 60% पहुंच गया है.     यानी बेसिक + DA मिलाकर सैलरी बनी- 160 रुपये      अब अगर 2.10 फिटमेंट फैक्‍टर लागू होता है तो सैलरी हो जाएगी: 210 रुपये      वास्‍तविक बढ़ोतरी= 210-160 = 50 रुपये     अब इसे 210 रुपये के आधार पर प्रतिशत में निकाला जाए तो बढ़ोतरी होगी- करीब 31.25% डॉ पटेल ने कहा कि अगर 8वें वेतन आयोग में व्‍यवहारिक तौर पर 2.10 फिटमेंट फैक्‍टर लागू होता है तो कर्मचारियों और पेंशनर्स को 31% की बढ़ोतरी से ही संतोष करना पड़ सकता है।  31% बढ़ोतरी पर किस लेवल के कर्मचारियों की कितनी हो जाएगा सैलरी?  लेवल 1 कर्मचारी की शुरुआती बेसिक सैलरी ₹18,000 है. इस पर 60% DA यानी ₹10,800 जोड़ने पर कुल रकम ₹28,800 बनती है. अब यदि इस ₹28,800 पर 31% बढ़ोतरी की जाए, तो ये राशि करीब ₹37,728 प्रति माह हो जाएगी।  लेवल 5 में कर्मचारी की शुरुआती बेसिक सैलरी ₹29,200 होती है. इस पर 60% DA जोड़ने के बाद रकम ₹46,720 बनती है और अगर इसमें 31% बढ़ाया जाए, तो यह अनुमानित रूप से ₹61,203 प्रति माह हो जाएगी।  इसी तरह लेवल 10 की एंट्री बेसिक सैलरी ₹56,100 है. 60% DA के साथ यह ₹89,760 बनती है और इस पूरी राशि में 31% जोड़ने पर अनुमानित रकम करीब ₹1.18 लाख प्रति माह पहुंचती है।  लेवल 14 में एंट्री बेसिक पे ₹1,44,200 प्रति माह है. 60% DA के साथ यह रकम ₹2,30,720 होती है, जबकि इस कुल राशि में 31% जोड़ने पर अनुमानित वेतन ₹3,02,243 प्रति माह पहुंचेगा।  लेवल 18 में कैबिनेट सचिव स्तर की निर्धारित बेसिक सैलरी ₹2,50,000 प्रति माह है. 60% DA के बाद यह ₹4,00,000 हो जाती है और इस रकम पर 31% की गणितीय बढ़ोतरी के बाद कुल अनुमानित राशि ₹5,24,000 प्रति माह बनती है।  किस संगठन ने फिटमेंट फैक्‍टर और मिनिमम सैलरी पर क्‍या प्रस्‍ताव दिया है?  कर्मचारियों के संगठनों के संयुक्‍त प्रतिनिधि NC-JCM स्‍टाफ साइड (National Council of the Joint Consultative Machinery) ने 3.833 फिटमेंट फैक्टर और 69,000 रुपये मिनिमम सैलरी का प्रस्ताव रखा है. वहीं, AINPSEF (All India New Pension Scheme Employees Federation) और AIDEF (All India Defence Employees' Federation) ने भी 3.833 फिटमेंट फैक्टर और 69,000 रुपये मिनिमम सैलरी का प्रस्ताव रखा है. FNPO (Federation of National Postal Organisations) की भी यही मांग है. कुछ संगठनों ने व्यवहारिक तौर पर कम फिटमेंट फैक्‍टर का भी प्रस्‍ताव दिया है।  IRTSA (Indian Railways' Technical Supervisors' Association) ने 2.92 के न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर और 52,560 रुपये न्यूनतम सैलरी (Multiple with minimum at Rs 52,560) का प्रस्ताव रखा है।  दिल्‍ली गवर्नमेंट स्‍कूल टीचर्स ने 2.62 फिटमेंट फैक्टर और 47,210 रुपये मिनिमम सैलरी का प्रस्ताव रखा है. वहीं चेन्नई GPO पेंशनर्स ने 3.77 फिटमेंट फैक्टर और 68,000 रुपये मिनिमम सैलरी का प्रस्ताव रखा है. भारत पेंशनर्स समाज (BPS) ने 3.833 फिटमेंट फैक्टर और 69,000 रुपये मिनिमम सैलरी का प्रस्ताव रखा है। 

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ा अपडेट! 8वें वेतन आयोग में DA को बेसिक पे में मिलाने की उठी मांग

नई दिल्ली आठवां वेतन आयोग अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपने के लिए एक्शन मोड में है। 18 महीने की डेडलाइन तक रिपोर्ट तैयार करने के लिए वेतन आयोग, कर्मचारी संगठनों के साथ लगातार बैठक कर रहा है। इसी कड़ी में चेन्नई और पुडुचेरी में हितधारकों के साथ चर्चा की गई। इन बैठकों में केंद्रीय कर्मचारियों की कई मांगें सामने आई हैं। इनमें महंगाई भत्ते (DA) को बेसिक पे में मर्ज करने की मांग भी प्रमुख है। क्या है डिमांड? केंद्र सरकार के प्रमुख कर्मचारी संगठनों ने सिफारिश की है कि जब डीए 25% से अधिक हो जाए, तो इसे मूल वेतन में मिला दिया जाना चाहिए। ये डिमांड नेशनल काउंसिल – जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM), ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) और ऑल इंडिया न्यू पेंशन स्कीम एम्प्लॉइज फेडरेशन (AINPSEF) ने की है। AINPSEF का तर्क है कि DA को बेसिक पे में मर्ज करने से कर्मचारियों की सैलरी में अपेक्षाकृत तेज वृद्धि हो सकती है। AINPSEF का कहना है कि DA को बेसिक पे में मिलाने से सैलरी तेजी से बढ़ेगी और कर्मचारियों को अच्छी सैलरी बढ़ोतरी के लिए 10 साल तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। AINPSEF का कहना है कि इस विलय से मुख्य रूप से निचले स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों को फायदा होगा, जिनकी सैलरी कम होती है और जो बड़े शहरों में रहते हैं जहां खर्च ज्यादा होते हैं। वहीं, भारतीय रेल पर्यवेक्षक संघ और प्रगतिशील शिक्षक न्याय मंच ने डीए के 50 फीसदी होने पर उसे बेसिक पे में मर्ज करने का सुझाव दिया है। Level-1 कर्मचारी की सैलरी का उदाहरण NC-JCM ने 8वें वेतन आयोग को सौंपे अपने मेमोरेंडम में कहा है कि जब डीए 25% की सीमा पार कर जाए तो इसे बेसिक पे में मिला दिया जाना चाहिए। मान लीजिए कि लेवल 1 के किसी कर्मचारी की बेसिक पे 18,000 रुपये है। अगर 8वें वेतन आयोग का फिटमेंट फैक्टर 2.1 है, तो 1 जनवरी 2026 को उनकी संशोधित सैलरी 37,800 रुपये हो सकती है। अगर कर्मचारी को हर साल औसतन 4% DA बढ़ोतरी मिलती है और सालाना इंक्रीमेंट की दर 3% से बढ़कर 7% हो जाती है तो 1 जनवरी 2033 को उनकी अनुमानित ग्रॉस सैलरी (बेसिक पे + DA) लगभग 77,694 रुपये होगी। यह 37,800 रुपये की संशोधित बेसिक पे से 106% अधिक है। यहां ध्यान रखना जरूरी है कि डीए को बेसिक पे में मर्ज करना अभी सरकार का मंजूर नियम नहीं है। इसी तरह 2.1 फिटमेंट फैक्टर, 7% इंक्रीमेंट और 4% औसत सालाना DA बढ़ोतरी भी केवल उदाहरण के लिए इस्तेमाल किए गए अनुमान हैं। 

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर! 8th Pay Commission में बदल सकता है 40 साल पुराना नियम

नई दिल्ली आठवें वेतन आयोग की सिफारिशो का इंतजार बेसब्री से हो रहा है। वेतन आयोग से कर्मचारी संगठनों की डिमांड भी तरह-तरह की है। ऐसी ही एक डिमांड पेंशनभोगियों की भी है। यह डिमांड अगर लागू हो जाता है रिटायर केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 40 साल पुराने नियम में बदलाव हो जाएगा। क्या है डिमांड? केंद्र सरकार के पेंशनभोगियों और कर्मचारी संगठनों की मांग है कि कम्युटेड पेंशन (समय से पहले ली गई पेंशन) को बहाल करने की 15 साल की अवधि को कम किया जाए। कई संगठनों ने 8वें वेतन आयोग से सिफारिश की है कि इसे 10 से 12 साल बाद बहाल किया जाए। उनका तर्क है कि मौजूदा नियम उन वित्तीय और एक्चुअरियल मान्यताओं पर आधारित है जो कई दशक पुरानी हैं। बता दें कि साल 1986 में कम्युटेड पेंशन के 15 साल वाले नियम को लागू किया गया था। कहने का मतलब है कि यह 40 साल पुराना नियम है। पेंशन कम्युटेशन क्या है? केंद्र सरकार के कर्मचारी रिटायरमेंट के समय अपनी बेसिक पेंशन का 40% तक कम्युट (समय से पहले एकमुश्त लेना) करवा सकते हैं और उस रकम को एकमुश्त पा सकते हैं। इसके बदले, कम्युट किए गए हिस्से को उनकी मासिक पेंशन से काट लिया जाता है। मौजूदा नियमों के तहत, काटी गई पेंशन 15 साल बाद बहाल कर दी जाती है। क्यों उठ रहे सवाल? कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठनों का तर्क है कि जब यह सिस्टम लागू किया गया था तब की वित्तीय और जनसांख्यिकीय (डेमोग्राफिक) स्थितियां अब काफी बदल चुकी हैं। बता दें कि नेशनल काउंसिल ऑफ द जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM), ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) और फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशन्स (FNPO) ने बहाली की अवधि 11 साल करने की मांग की है। इसके अलावा, इंडियन रेलवेज टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन ने 12 साल का प्रस्ताव दिया है, जबकि ऑल इंडिया न्यू पेंशन स्कीम एम्प्लॉइज फेडरेशन ने 10 साल की मांग की है। भारत पेंशनर्स समाज और ऑल पेंशनर्स एसोसिएशन ने भी 11 साल की सिफारिश की है। ₹100 की कम्युटेड पेंशन का उदाहरण नेशनल काउंसिल ऑफ द जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी ने 100 रुपये की कम्युटेड पेंशन का उदाहरण दिया है। 61 साल की उम्र के पेंशनर के लिए 8.194 के कम्युटेशन फैक्टर पर हर ₹100 मासिक पेंशन कम्युट करने पर करीब ₹9,833 की एकमुश्त राशि मिलती है। इसके बाद पेंशनर की मासिक पेंशन से ₹100 की कटौती होती है। 10 साल में कुल कटौती ₹12,000 और 15 साल में ₹18,000 हो जाती है। संगठन का तर्क है कि करीब 10 साल में कम्युट की गई राशि की भरपाई हो जाती है और उसके बाद की कटौती की समीक्षा की जानी चाहिए।

8th Pay Commission में बढ़ेगी मिनिमम सैलरी? ₹68 हजार की मांग से पेंशन तक, पुडुचेरी मीटिंग से पहले 7 बड़े अपडेट

पुडुचेरी आठवें वेतन आयोग की टीम आज 9 सितंबर, बुधवार को पुडुचेरी में है, जहां कर्मचारी और पेंशनर संगठनों के साथ मीटिंग होने वाली है. इससे पहले चेन्नई मीटिंग संपन्न हुई. देश के करीब 49 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 69 लाख से ज्‍यादा पेंशनर्स के लिए चेन्नई मीटिंग से बड़े अपडेट्स सामने आए हैं।  चेन्नई में 7 और 8 सितंबर को हुई आयोग की बैठकों में डाककर्मियों से जुड़े संगठन, पेंशनर ग्रुप, GPO पेंशनर्स फोरम, कुछ अन्‍य कर्मचारी संगठन शामिल हुए और सैलरी, पेंशन, भत्तों समेत अन्‍य मुद्दों पर भी अपनी मांगें रखीं और सुझाव दिए. चेन्नई के ITC Grand होटल में हुई इन मीटिंग्‍स में संगठनों का फोकस सैलरी रिवीजन, अलाउंसेज और पेंशन रिफॉर्म पर रहा. आइए जानते हैं, चेन्नई मीटिंग से आए 5 बड़े अपडेट्स क्‍या हैं।  1). GPO पेंशनर्स फोरम ने रखी मांगें  चेन्नई मीटिंग में GPO पेंशनर्स फोरम के प्रतिनिधियों ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के सदस्‍यों के सामने सैलरी, पेंशन में संशोधन, भत्तों में बढ़ोतरी और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों में सुधार का सुझाव दिया. खास तौर पर डाक कर्मियों के करियर की दिक्कतों, जरूरतों और सुधारों पर जोर दिया।  2). सैलरी में सुधार की स्‍थाई व्‍यवस्‍था हो  संगठन के प्रतिनिधियों ने मीटिंग के दौरान सैलरी स्‍ट्रक्‍चर में बदलाव की मांग की. उन्‍होंने सैलरी में संशोधन के लिए एक स्थाई व्यवस्था पर जोर दिया. साथ ही मौजूदा पे-मैट्रिक्स सिस्टम की जगह रनिंग स्केल लागू करने की मांग की. संगठन का मानना है कि इस व्‍यवस्‍था से कर्मचारियों की बेहतरी होगी।  3). 68,000 रुपये मिले न्‍यूनतम वेतन  चेन्नई मीटिंग में केंद्रीय कर्मचारियों का न्‍यूनतम वेतन यानी मिनिमम बेसिक सैलरी बढ़ाकर 68,000 रुपये किए जाने का सुझाव दिया गया है. GPO पेंशनर्स फोरम के सदस्‍यों ने  NC-JCM और शुरुआती कुछ संगठनों के सुझाव के अनुसार, न्‍यूनतम वेतन 69,000 रुपये किए जाने की बात उठी थी।  4). सालाना इंक्रीमेंट 6 से 7 फीसदी हो  चेन्‍नई में एम्प्लॉई संघ ने एनुअल इंक्रीमेंट हाइक यानी सालाना वेतन बढ़ोतरी की मांग उठाई. संगठन ने मौजूदा 3% इंक्रीमेंट को बढ़ाकर 6 से 7 फीसदी करने का सुझाव दिया. NC-JCM स्‍टाफ साइड यानी नेशनल काउंसिल ऑफ द जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी ने भी इस विषय को ऑलरेडी पुश किया हुआ है. NC-JCM ने सालाना इंक्रीमेंट को बढ़ाकर 6 से 7% करने का प्रपोजल दिया है।  5). ओल्‍ड पेंशन स्‍कीम बहाल हो   GPO पेंशनर्स फोरम ने पेंशन व्‍यवस्‍था में बड़े बदलाव की मांग रखी है. इनमें रीस्टोरिंग ऑफ ओल्ड पेंशन स्कीम यानी पुरानी पेंशन स्‍कीम को फिर से बहाल करने की मांग की है. इसके अलावा फैमिली पेंशन को बढ़ाने की भी मांग की है. पेंशन के अन्‍य स्ट्रक्चर्स पर भी बात हुई है।  6). भत्तों और सुविधाओं पर भी सुझाव  अपकमिंग फिटमेंट फैक्टर, डियरनेस अलाउंस, हाउस रेंट अलाउंस पर भी बात हुई. चेन्नई GPO पेंशनर्स फोरम के प्रतिनिधियों ने अन्‍य मांगों के साथ-साथ कम्यूटेशन की रकम की वसूली में राहत, MACP फायदों में बदलाव, बेहतर भत्ते और छुट्टी के फायदे पर बात रखी. साथ ही सोशल सिक्‍योरिटी को और मजबूत करने वाल उपायों की मांग की।  7). महिला कर्मि‍यों और दिव्यांगों के लिए मांग पेंशनर फोरम के प्रतिनिधियों ने कर्मचारियों के लिए बेहतर सुविधाओं के साथ-साथ करियर की अन्‍य जरूरतों के बारे में भी बातें की और प्रोमोशन जैसे मसलों पर भी जोर दिया. डाक विभाग में महिला कर्मचारियों और दिव्यांगों से जुड़ी जरूरतों और मुद्दों पर भी संगठन ने आयोग के सामने पक्ष रखा।  आज पुडुचेरी में अहम मीटिंग  चेन्नई में 7 और 8 सितंबर को मीटिंग खत्‍म होने के बाद केंद्रीय वेतन आयोग की टीम आज पुडुचेरी में मीटिंग करने वाली है. इस मीटिंग में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स से जुड़े अलग-अलग संगठनों के शामिल होने की संभावना है. मीटिंग में सैलरी, पेंशन, भत्तों, फिटमेंट फैक्‍टर, हेल्‍थ स्‍कीम समेत अन्‍य मुद्दों पर बात हो सकती है। 

8th Pay Commission पर बड़ा सवाल, पुराने पेंशनर्स को फिटमेंट फैक्टर का फायदा मिलेगा या नहीं? PM मोदी को पत्र

नई दिल्ली आठवें वेतन आयोग के लागू होने का केंद्रीय सरकारी कर्मचारी जितनी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, उतना ही इंतजार देशभर के पेंशनर्स को भी है. 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन हुए 10 महीने से ज्‍यादा समय हो गया है और आयोग इस बीच काफी सारी एक्‍सरसाइज कर चुका है. फिलहाल देश के अलग-अलग शहरों में आयोग की बैठकों का दौर जारी है।  इस बीच पेंशनर्स के एक संघ रिटायर्ड एम्प्लॉइज वेलफेयर एसोसिएशन (Retired Employees Welfare Association) ने 8th Pay Commission के ToR यानी टर्म ऑफ रेफरेंस के एक बिंदु पर आशंका जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र (Letter to PM Modi) लिखा है।  क्‍या पुराने पेंशनर्स को नहीं मिलेगा फिटमेंट फैक्‍टर का लाभ? रिटायर्ड एम्प्लॉइज वेलफेयर एसोसिएशन (Retired Employees Welfare Association) ने मंगलवार, 7 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी को पत्र भेजा है. संघ को आशंका है कि OPS यानी ओल्‍ड पेंशन स्‍कीम के तहत आने वाले पुराने पेंशनर्स को फिटमेंट फैक्‍टर का लाभ नहीं मिलेगा. एसोसिएशन ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के Terms of Reference में संशोधन की मांग की है. संगठन के अनुसार , करीब 69 लाख पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि उन्हें पेंशन संशोधन का लाभ मिलेगा या नहीं।  8th CPC के ToR में किस बात को लेकर है आपत्ति?  संघ की आपत्ति 8वें वेतन आयोग के ToR के प्वाइंट 2(e) की भाषा को लेकर है. उनका कहना है कि मौजूदा ToR में पेंशन, NPS और UPS का उल्लेख है, लेकिन पुराने पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स की पेंशन रिवीजन को स्पष्ट रूप से नहीं लिखा गया है।  एसोसिएशन का कहना है कि 7वें वेतन आयोग के ToR में 'revision of pre-retirement pension' का स्पष्ट उल्लेख था. संगठन ने छठे और 5वें वेतन आयोग के ToR में भी पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स का स्पष्ट उल्लेख होने का दावा किया है।  वित्त मंत्री और वित्त सचिव को भी भेजा पत्र  एसोसिएशन ने वित्त मंत्री और वित्त सचिव को पहले पत्र भेजे जाने की बात कही है. संगठन के मुताबिक, अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं हुआ है।  एसोसिएशन ने मांग की है कि ToR में स्पष्ट रूप से जोड़ा जाए कि 8वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए सभी पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स की पेंशन/फैमिली पेंशन के संशोधन पर भी सिफारिश का लाभ देगा।  जब तक औपचारिक संशोधन नहीं होता, तब तक सरकार से प्रेस रिलीज या आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करने की मांग की गई है. संगठन ने ये पत्र प्रधानमंत्री के अलावा वित्त मंत्री, वित्त सचिव और DoPPW के सचिव को भी भेजा है।  पेंशन को लेकर डरने की जरूरत नहीं, यहां दूर करें कन्‍फ्यूजन    इस मसले पर कुछ जानकारों से बात की और मसले को समझने का प्रयास किया कि क्‍या वाकई ये डर वाजिब है. अगर हां तो सरकार या आयोग आगे क्‍या कर सकता है. 8वें वेतन आयोग के गजट नोटिफिकेशन में ToR में प्वाइंट 2(e) की भाषा को लेकर संघ शंका में है. रिटायर्ड एम्‍प्‍लॉयीज वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव साधु सिंह से बात करने की कोशिश की, जो खबर लिखे जाने तक नहीं हो पाई है. फिर हमने दूसरे एक्‍सपर्ट्स से समझने की कोशिश की।  ऐसे मामलों के एक एक्‍सपर्ट ने समझाया कि आपत्ति क्‍यों है… उन्‍होंने कहा, ' 2(e) में लिखा है- Review the structure of Death-cum-Retirement Gratuity and Pension including NPS/UPS and outside NPS for the employees… यानी प्रावधान में पेंशन, ग्रेच्युटी, NPS/UPS और NPS के बाहर के कर्मचारियों का उल्लेख है, लेकिन एसोसिएशन का तर्क है कि इसमें 'existing pensioners' यानी मौजूदा पेंशनर्स, pre-2026 retirees यानी 2026 से पहले रिटायर होने वाले कर्मी, 'family pensioners' या 'revision of pre-retirement pension' जैसी स्पष्ट भाषा नहीं है. इसी को लेकर को लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री से ToR संशोधन की मांग की है।  8वें वेतन आयोग के ToR को लेकर NDTV ने AINPSF के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष डॉ मंजीत सिंह पटेल से समझना चाहा. उन्‍होंने इसी ToR में 2(f) के तीसरे प्‍वाइंट का जिक्र किया, जिसमें लिखा है- The Unfunded cost of non-Contributory Pension Schemes…'.  डॉ पटेल ने समझाया कि Unfunded Non Contributed के अंदर बिना कंट्रीब्‍यूशन वाले पेंशनर्स यानी NPS/UPS के अलावा वाले पुराने पेंशनर्स भी आ जाते हैं. दूसरी बात कि अगर 2(e) में पुराने पेंशनर्स का जिक्र नहीं है तो पुराने वर्किंग एम्‍प्‍लॉईज का भी अलग से जिक्र नहीं है. तो इसका मतलब ये न समझा जाए कि वे भी फिटमेंट फैक्‍टर के लाभ के दायरे में नहीं आएंगे। 

8वें वेतन आयोग में कर्मचारियों को मिल सकते हैं 14 लाख रुपये तक, जानिए कैसे बनेगा पूरा हिसाब

नई दिल्ली 8वें वेतन आयोग की टीम अब अगली बैठक चेन्‍नई में करने वाली है. इसके बाद कुछ और शहारों में इसकी बैठक होगी, फिर फाइनल रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी. इसके बाद कर्मचारी कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार करेंगे, तब जाकर 8वां वेतन आयोग देश में लागू कर दिया जाएगा।  1 करोड़ से ज्‍यादा के कर्मचारी और पेंशनर्स भले ही 8वां वेतन आयोग कभी भी लागू किया जाए, लेकिन यह जनवरी 2026 से ही प्रभावी माना जाएगा. एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि 1 करोड़ से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को जनवरी 2026 से जोड़कर एक साथ एरियर भेजा जाएगा. आइए जानते हैं यह एरियर कितना हो सकता है।  14 लाख रुपये से ज्‍यादा का एरियर एक कैलकुलेशन के मुताबिक, अगर 8वां वेतन आयोग लागू होने में 20 महीने की देरी होती है, तो लेवल 7 के कर्मचारियों को 20 महीने के एरियर के तौर पर ₹14 लाख से ज्‍यादा का अमाउंट एकमुश्‍त मिल सकता है. अब आइए जानते हैं लेवल 4 से 7 तक के बीच कर्मचारियों को कितना एरियर दिया जाएगा।     वेतन आयोग के लागू होने में जितनी देरी होगी, बकाया यानी एरियर की रकम उतनी ही बड़ी होती जाएगी. सूत्रों और एक्‍सपर्ट्स का अनुमान है कि 8वें वेतन आयोग की स‍िफारिशों को पूरी तरह से लागू होने में करीब 20 महीने या उससे ज्‍यादा का समय लग सकता है।         कितना फिटमेंट फैक्‍टर?  अगर 2.57 के फिटमेंट फैक्‍टर के आधार पर बेसिक सैलरी का कैलकुलेशन किया जाता है, तो मंथली पे ज्‍यादा होगा और उतना ही कर्मचरियों को एरियर दिया जाएगा. यह एरियर कर्मचारियों और पेंशनर्स को एकसाथ भेजा जा सकता है।         लेवल 7 के कर्मचारियों की कुल सैलरी एरियर अनुमानित बेसिक पे 7वें वेतन आयोग के तहत 44,900 रुपये माने, तो 2.57 फिटमेंट फैक्‍टर पर 8वें वेतन आयोग के तहत अनुमानित बेसिक पे ₹1,15,393 होगा. ऐसे में मंथली एरियर ₹70,493 बनेगा और अब 20 महीने का कुल एरियर देखें तो ₹70,493 ✕ 20 = ₹14,09,860 यानी 14.10 लाख रुपये होगा।         लेवल 6 से 4 लेवल तक के कर्मचारियों का कितना एरियर बनेगा  इसी आधार पर कैलकुलेशन करें तो लेवल 6 के कर्मचारियों का 20 महीने बाद एरियर ₹11.11 लाख, लेवल-5 के कर्मचारियों का एरियर ₹9.13 लाख और लेवल-4 के कर्मचारियों को एरियर ₹8 लाख रुपये होगा। 

Central Employees के लिए बड़ी खबर, 8वें वेतन आयोग से DA तक इन फैसलों का है इंतजार

नई दिल्ली केंद्रीय कर्मचारियों के लिए अगले दो महीने काफी अहम रहने वाले हैं। दरअसल, इन दो महीनों में ना सिर्फ केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) पर फैसला होगा बल्कि आठवें वेतन आयोग की कई अहम बैठकें भी होने वाली हैं। इन बैठकों के बाद वेतन आयोग कुछ अहम फैसले ले सकता है। आइए डिटेल में जान लेते हैं। कब होगा डीए पर फैसला? केंद्र सरकार के कर्मचारी और पेंशनभोगी जुलाई 2026 के महंगाई भत्ते (DA) में बदलाव पर सरकार के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। अगर सबकुछ ठीक रहा तो सरकार दशहरे तक इसका ऐलान कर सकती है। इस बार दशहरा 20 अक्टूबर को है। इसका मतलब है कि 20 अक्टूबर तक डीए का ऐलान हो सकता है। बता दें कि डीए की दर साल में दो बार एक तय फॉर्मूले के आधार पर बदली जाती है, जो 'ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स' (AICPI-IW) से जुड़ा होता है। सरकार ने 1 जनवरी 2026 से DA को 2 प्रतिशत अंक बढ़ाकर 58% से 60% कर दिया था। पेंशनभोगियों के लिए महंगाई राहत यानी डीआर को भी बढ़ाकर 60% कर दिया गया था। अब 3 प्रतिशत बढ़ोतरी का अनुमान है। ऐसे में केंद्रीय कर्मचारियों का जुलाई से दिसंबर तक के लिए डीए बढ़कर 63% हो जाएगा। 8वें वेतन आयोग की ताबड़तोड़ बैठकें आठवें वेतन आयोग के गठन को 10 महीने पूरे होने वाले हैं। गठन के 10 महीने बाद अब वेतन आयोग अपनी रिपोर्ट को बनाने की तैयारी में है। जानकार बताते हैं कि वेतन आयोग की कर्मचारी संगठनों के साथ बैठकों का अंतिम दौर चल रहा है। 8वें वेतन आयोग की आने वाली बैठकें -9 सितंबर को पुडुचेरी में बातचीत -16 से 18 सितंबर तक चंडीगढ़ में बातचीत -7 और 8 अक्टूबर को बेंगलुरु में बातचीत यह संभव है कि वेतन आयोग अब अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा और जनवरी तक अंतरिम रिपोर्ट सरकार को सौंप सकता है। बता दें कि केंद्र सरकार ने 3 नवंबर 2025 को 8वां वेतन आयोग बनाया था। जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाला यह आयोग केंद्र सरकार द्वारा 3 नवंबर 2025 को स्थापित किया गया था। यह अस्थायी संस्था संबंधित सरकारी निकायों, पेंशनभोगियों और अन्य हितधारकों के साथ बातचीत के बाद सरकार को अपनी सिफारिशें सौंपेगी। इसके दायरे में वेतन, भत्ते, पेंशन और सेवा में सुधार जैसे विषय शामिल हैं। उम्मीद है कि वेतन आयोग की फाइनल रिपोर्ट मई-जून 2027 तक पेश की जाएगी। अगर सैलरी, फिटमेंट फैक्टर, भत्ते या पेंशन में कोई बदलाव किया जाता है, तो यह 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों और उसके बाद सरकार के फैसले पर निर्भर करेगा। छठे और सातवें वेतन आयोग के दौरान, फिटमेंट फैक्टर क्रमशः 1.86 और 2.57 तय किए गए थे। 8वें वेतन आयोग के लिए, BPMS, NC(JCM) और AIDEF जैसे यूनियन और संगठन 3 से 4 तक के फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं।