samacharsecretary.com

प्रधानों की नियुक्ति बनाम अदालत का सवाल: पंचायत व्यवस्था पर असमंजस गहराया

जौनपुर
ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के सरकार के निर्णय पर उच्च न्यायालय इलाहाबाद की शुक्रवार को आई सख्त टिप्पणी के बाद प्रधानों और पंचायत प्रतिनिधियों की धड़कन बढ़ गई हैं।

अदालत ने इस व्यवस्था को असंवैधानिक बताते हुए सरकार से चुनाव की स्पष्ट समय सीमा पूछे जाने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या सरकार ने यह निर्णय पर्याप्त कानूनी और संवैधानिक विचार-विमर्श के बाद लिया था।

यदि सरकार का फैसला न्यायिक कसौटी पर नहीं टिक पाया तो पंचायतों में चल रहे विकास कार्यों, नई योजनाओं की स्वीकृति और प्रशासनिक निर्णयों पर क्या असर पड़ेगा, इसे लेकर भी असमंजस की स्थिति है।

अब सबकी नजर 13 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी है। बहरहाल इस मुद्दे पर जब प्रधानों से उनकी राय ली गई तो अलग-अलग मत सामने आए।

    सरकार का निर्णय बिल्कुल ठीक था। प्रशासन को प्रशासक बनाए जाने के बाद उनकी जिम्मेदारी जनता के प्रति नहीं होती। हमारी समझ से जब तक सरकार पूरी चुनावी तैयारी नहीं कर लेती है, चुनाव का कोई औचित्य नहीं है। -विजय सिंह, प्रधान गैरवाह।

    यह सरकार और कोर्ट के बीच गतिरोध में प्रधान व आम जनता परेशान है। अब इसे सरकार की तय करे कि उसे करना क्या है। हम चुनाव के लिए तब भी तैयार थे और अब भी हैं। -राम प्रकाश दुबे, अध्यक्ष प्रधान संघ, सुइथाकलां।

    सरकार के समक्ष व्यावहारिक कठिनाई थी जिसके चलते यह निर्णय लेना पड़ा। सरकार ने जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए वर्तमान प्रधानों को ही प्रशासक बनाया। अब कोर्ट के निर्णय पर कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती है। -बलराम बिंद, प्रधान, ईशापुर।

    पिछड़ा वर्ग आरक्षण तय न होने से सरकार को मजबूरी में यह कदम उठाना पड़ा, जो जनता के हित मे था। अब कोर्ट का क्या रुख है और उस पर सरकार क्या निर्णय लेती है इसे देखना होगा। -राम सकल वर्मा, प्रधान, सारी जहांगीर पट्टी।

    सरकार का निर्णय आम जनता के हित में था। विकास कार्यों की गति प्रभावित न हो इसलिए सरकार द्वारा प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त किया गया, रही बात कोर्ट की तो उसका जवाब सरकार ही दे सकती है। -राजन यादव, प्रधान, समसुद्दीनपुर।

 

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here