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जून गया, अब मानसून की एंट्री का इंतजार खत्म! जानिए कब बरसेंगे बादल

जयपुर  राजस्थान में प्री-मानसून की बारिश का दौर थमने के बाद पिछले कुछ दिनों से पारा चढ़ा हुआ है. तापमान 40 से 45 डिग्री तक होने के चलते कई जिले भीषण गर्मी की चपेट में हैं. अब मानसून का इंतजार है और प्रदेशवासियों का इंतजार जल्द ही खत्म होने वाला है. मौसम विभाग के मुताबिक, मानसून का काउंटडाउन शुरू हो गया है. पिछले 24 घंटों में प्रतापगढ़ के अरनोद में सर्वाधिक 94 मिमी वर्षा दर्ज की गई. वहीं, अगले 3–4 दिनों तक तेज आंधी के साथ बारिश का दौर जारी रह सकता है, जिसमें हवाओं की गति 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने की संभावना है. दक्षिणी-पूर्वी हिस्से में अनुकूल स्थिति मौसम विभाग के अनुसार, 2 जुलाई से प्रदेश में बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना है. जबकि अगले 2–3 दिनों में मानसून की आधिकारिक एंट्री हो सकती है. दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में इसके लिए अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं. पूर्वानुमान के मुताबिक, जयपुर, भरतपुर, कोटा और बीकानेर संभाग में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. जबकि जोधपुर और बीकानेर में फिलहाल उमस भरी गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है. राजस्थान में 300 से ज्यादा बांध सूखे वहीं, इस साल मानसून की धीमी शुरुआत ने जल संकट के संकेत भी दिए हैं. कुल 693 बांधों में उनकी कुल क्षमता का केवल 44.22% पानी ही उपलब्ध है, जो पिछले साल इसी अवधि में 46.59% था. इनमें से 307 बांध पूरी तरह से सूख चुके हैं, 381 आंशिक रूप से भरे हैं और केवल 5 छोटे बांध ही पूरी तरह लबालब हो पाए हैं. जल संसाधन विभाग की 23 जून की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 23 प्रमुख बड़े बांधों में फिलहाल 56.09% पानी मौजूद है.  इस हफ्ते हो सकती है मध्यम से भारी बारिश मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण पश्चिम मानसून की उत्तरी सीमा इस समय गुजरात, मध्यप्रदेश, झारखंड, बिहार के कुछ भागों से होकर गुजर रही है. अगले 2-3 दिन में गुजरात, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ भागों में मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं. विभाग के मुताबिक, कोटा और उदयपुर संभागों में कुछ भागों में आगामी दिनों में कहीं-कहीं मध्यम से तेज बारिश होने की संभावना है. 3 से 5 जुलाई तक पूर्वी राजस्थान के कुछ और भागों में बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी और कहीं-कहीं मध्यम से भारी बारिश हो सकती है.

मध्य प्रदेश के अधिकांश जिलों में मानसून का इंतजार, भोपाल-इंदौर समेत कई इलाकों में आज बारिश की संभावना

भोपाल  मध्यप्रदेश में मानसून की रफ्तार अभी भी धीमी बनी हुई है। प्रदेश के केवल 15 जिलों तक ही मानसून पहुंच पाया है, जबकि 40 जिलों में अब तक इसकी एंट्री नहीं हुई है। इसी बीच भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने सोमवार को उज्जैन, देवास, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, मंडला और बालाघाट जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन क्षेत्रों में अगले 24 घंटों के दौरान 4 इंच या उससे अधिक बारिश होने की संभावना जताई गई है। वहीं, राजधानी भोपाल, इंदौर सहित प्रदेश के अधिकांश जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं। मौसम विभाग के अनुसार कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ बारिश का दौर जारी रह सकता है। मध्य प्रदेश के 6 जिले उज्जैन, देवास, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, मंडला और बालाघाट में सोमवार को भारी बारिश का अलर्ट है। यहां 24 घंटे में 4 इंच या इससे अधिक बारिश हो सकती है। वहीं, भोपाल, इंदौर समेत प्रदेश के ज्यादातर जिलों में कहीं-न-कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है। 42 जिलों में तेज बारिश का येलो अलर्ट मौसम विभाग ने भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, सिवनी, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर और टीकमगढ़ जिलों में तेज बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, निवाड़ी, नीमच और मंदसौर जिलों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी होने की संभावना है। हालांकि इन जिलों में मानसून की आधिकारिक एंट्री अभी नहीं हुई है। एक जगह थम गया मानसून मौसम विभाग के अनुसार 24 जून को प्रदेश में मानसून ने प्रवेश किया था। इसके बाद अलीराजपुर, इंदौर, धार, हरदा, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला और डिंडौरी में मानसून पहुंचने की आधिकारिक घोषणा की गई। हालांकि इसके बाद मानसून आगे नहीं बढ़ पाया। इसकी वजह से ग्वालियर-चंबल, सागर और रीवा संभाग के कई इलाकों में दिन और रात दोनों समय गर्मी का असर बना हुआ है और तापमान सामान्य से अधिक बना हुआ है। रविवार को कई जिलों में हुई बारिश रविवार को प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी और बारिश का दौर देखने को मिला। मंदसौर और रतलाम में तेज बारिश दर्ज की गई, जबकि रतलाम में आधा इंच से अधिक वर्षा रिकॉर्ड हुई। इसके अलावा गुना, श्योपुर, बड़वानी, शाजापुर, सीहोर, मंदसौर, उज्जैन और छतरपुर समेत कई जिलों में भी अच्छी बारिश हुई, जिससे मौसम में ठंडक महसूस की गई। इन जिलों पर मानसून मेहरबान 24 जून को बड़वानी जिले में मानसून की दस्तक हुई है और अब मानसून यहां मेहरबान हो गया है. जिले के कई इलाकों में हुई झमाझम बारिश से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं और खेतों में बुवाई का काम तेज हो गया है. हालांकि तेज बारिश से कुछ जगहों पर नुकसान भी हुआ है. पलसूद क्षेत्र के वेदपुरी गांव में एक किसान का मकान ढह गया, जिसमें दबकर एक गाय की मौत हो गई. हालांकि घटना के समय परिवार के सदस्य सुरक्षित बाहर निकल आए, जिससे बड़ा हादसा टल गया. वहीं पाटी के बोकराटा क्षेत्र में नदी-नाले उफान पर आने से पुलिस को सुरक्षा के लिए मोर्चा संभालना पड़ा।  नदी-नाले उफान पर इधर, पाटी के बोकराटा-चौकी मार्ग पर लगातार बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर आ गए. पुल के ऊपर से पानी बहने लगा, जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई. बसें और दोपहिया वाहन किनारे खड़े रहे और आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन तुरंत मौके पर पहुंचे. पुलिसकर्मियों ने पुल पर निगरानी करते हुए लोगों को जान जोखिम में डालकर पुल पार नहीं करने की समझाइश दी।  चौकी प्रभारी आशीष शर्मा ने लोगों से अपील की है कि बारिश के दौरान नदी-नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहें तथा किसी भी आपात स्थिति की सूचना तुरंत पुलिस और प्रशासन को दे।  2-3 दिनों में छत्तीसगढ़ के सभी जिलों को करेगा कवर छत्तीसगढ़ में अगले चार दिन बारिश में वृद्धि का अनुमान जताया गया है. मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश के सभी संभाग के कुछ स्थानों पर तेज बारिश हो सकती है. वहीं अगले दो से तीन दिनों में दक्षिण पश्चिम मानसून के पूरे प्रदेश में बढ़ने का अनुमान है।  बीते दिन की बात करे तो छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में तापमान सबसे ज्यादा रहा. यहां तापमान 40 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. वहीं राजधानी रायपुर में तापमान 38.7 डिग्री सेल्सियस रहा और आज भी 38 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।  24 जून को हुई थी मानसून की एंट्री मध्यप्रदेश में मानसून ने 24 जून को प्रवेश किया था। इसके बावजूद अब तक केवल 15 जिलों तक ही इसका विस्तार हो सका है, जबकि प्रदेश के 40 जिले अभी भी मानसून का इंतजार कर रहे हैं। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार जून महीने में अब तक राज्य में सामान्य से 38 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। ऐसे में किसान और आम लोग दोनों ही मानसून के तेजी से सक्रिय होने का इंतजार कर रहे हैं।  

केरल में मानसून की रफ्तार धीमी, अल-नीनो के असर से 33 फीसदी कम बारिश; खेती पर संकट के आसार

नई दिल्ली केरल में मॉनसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, राज्य में इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की बारिश में अब तक 33 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है. मौसम विभाग (IMD) के अधिकारियों के मुताबिक, बारिश की सबसे ज्यादा कमी वायनाड जिले में देखने को मिली है, जहां सामान्य से 64 प्रतिशत कम बारिश हुई है. कम बारिश से किसानों की चिंता बढ़ गई है और खेती-किसानी पर इसका असर दिखाई देने लगा है।  भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की डायरेक्टर वीके. मिनी ने जानकारी दी कि राज्य के सिर्फ चार जिले तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पथानामथिट्टा और त्रिशूर में ही अब तक सामान्य बारिश हुई है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अगले कुछ दिनों में बारिश नहीं हुई तो ये जिले भी कम बारिश वाले जिलों की कैटेगरी में आ सकते हैं।  IMD के मानकों के अनुसार, जब किसी जिले में बारिश की कमी 19 प्रतिशत से अधिक हो जाती है, तो उसे 'बारिश की कमी' (Rainfall Deficient) की श्रेणी में रखा जाता है. वर्तमान स्थिति में राज्य के अधिकांश जिलों में यह स्थिति बन चुकी है।  खेती पर कम बारिश का असर बारिश की इस कमी ने कृषि क्षेत्र को सीधे प्रभावित करना शुरू कर दिया है. कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे आईएमडी की सामान्य से कम (Below Normal) बारिश की भविष्यवाणी को देखते हुए खास उपाय अपनाएं. अल नीनो के असर से इस साल कम बारिश होने की आशंका है. वीके. मिनी ने बताया कि बारिश पर आधारित कृषि क्षेत्रों (Rain-fed Areas) पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा. सामान्य से कम बारिश से मिट्टी की नमी घट रही है और खरीफ फसलों की बुआई में भी देरी हो रही है।  मौसम पर अल-नीनो का कैसा असर? सामान्य रूप से जून के महीने में बंगाल की खाड़ी के ऊपर दो डिप्रेशन और पांच तक निम्न दबाव प्रणालियां बनती हैं, जो मॉनसून की हवाओं को मजबूत करती हैं. इसी के साथ देश के बड़े हिस्सों में अच्छी बारिश होती है लेकिन इस साल जून में बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक भी डिप्रेशन नहीं बना. केरल में सामान्यतः जून और जुलाई-अगस्त में दो-दो तथा सितंबर में एक डिप्रेशन बनता है, लेकिन अल नीनो की स्थिति के कारण इन प्रणालियों के बनने में कमी आ सकती है।  पारंपरिक कृषि कैलेंडर प्रभावित केरल में 21 जून से 4-5 जुलाई तक का समय खेती के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. इसे पारंपरिक रूप 'तिरुवाथिरा नजट्टुवेला' कहा जाता है. यह धान की रोपाई और बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है, क्योंकि इस दौरान दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अपने चरम पर होता है. लेकिन इस साल अल नीनो के असर से  कृषि कैलेंडर प्रभावित हुआ है।  IMD ने चेतावनी दी कि अगर बारिश की कमी लंबे समय तक बनी रही तो भूजल स्तर घट सकता है. पेयजल संकट पैदा हो सकता है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ सप्ताह में अच्छी बारिश नहीं हुई तो न केवल धान बल्कि अन्य फसलों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। 

मध्य प्रदेश में 43 जिलों के लिए वर्षा चेतावनी, एंट्री के बाद थमा मानसून; 2-3 दिन और नहीं मिलेगी राहत

भोपाल  मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून के प्रवेश के बाद उसकी रफ्तार थम सी गई है। मौसम विभाग ने राज्य के 43 जिलों में आज शनिवार को मध्यम से भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, जबकि कुछ इलाकों में अत्यधिक वर्षा की संभावना भी जताई गई है। विभाग के अनुसार, मानसून अभी पूरी तरह सक्रिय नहीं हुआ है। सामान्य स्थिति में इस समय तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश हो जानी चाहिए थी, लेकिन सिस्टम के कमजोर पड़ने के कारण इसमें 2-3 दिन की और देरी होने की संभावना है। खासतौर पर ग्वालियर-चंबल संभाग में मानसून सबसे देर से पहुंचने वाला है।. मानसून ने 24 जून को दी थी दस्तक गौरतलब है कि प्रदेश में मानसून ने 24 जून को दस्तक दी थी। पहले ही दिन इंदौर, धार, आलीराजपुर, हरदा, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला और डिंडौरी जिलों में मानसून के आगमन की आधिकारिक घोषणा कर दी गई थी। हालांकि, इसके बाद से परिस्थितियां थमी हुई हैं, लेकिन मौसम विभाग का कहना है कि आगामी 48 से 72 घंटों में मानसून के आगे बढ़ने के लिए मौसम अनुकूल हो रहा है। शनिवार को इन जिलों में भारी बारिश का अनुमान इस बीच, शनिवार को राजधानी भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, रीवा और सागर संभाग समेत प्रदेश के करीब 40 से अधिक जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश का अनुमान जताया गया है। वहीं, ग्वालियर-चंबल संभाग, नीमच, मंदसौर और बुंदेलखंड के कुछ हिस्सों में छिटपुट बौछारें पड़ सकती हैं। एमपी के कई हिस्सों में दिखा आंधी-बारिश का दौर इससे पहले, शुक्रवार को राज्य के कई हिस्सों में तेज आंधी और भारी बारिश का दौर देखने को मिला। सिवनी में करीब दो इंच और उज्जैन में डेढ़ इंच से ज्यादा पानी बरसा। शाजापुर, दतिया, राजगढ़ और मंडला समेत कई इलाकों में मौसम बदला रहा। इस बदलते मौसम के बीच बालाघाट और देवास जिलों से दर्दनाक हादसे भी सामने आए, जहाँ आकाशीय बिजली गिरने और दीवार ढहने की अलग-अलग घटनाओं में कुल 5 लोगों की असमय मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। कहां-कहां है अलर्ट? मौसम केंद्र ने रीवा, सागर, जबलपुर, शहडोल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और चंबल सहित कुल 43 जिलों में आज बारिश-आंधी का येलो अलर्ट जारी किया है। कुछ जिलों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने और 50-60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाओं का भी अनुमान है। कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि खेतों में खड़ी फसलों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें। खासकर सोयाबीन, मक्का और दलहन की फसलों पर अतिरिक्त नजर रखने की जरूरत है। कब तक सुधरेगा मौसम? मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, अगले 48-72 घंटों में एक नया सिस्टम सक्रिय होने की उम्मीद है, जिसके बाद राज्य भर में मानसून की गति बढ़ सकती है। ग्वालियर, मुरैना, भिंड, शिवपुरी और श्योपुरकलां जैसे उत्तरी जिलों में सामान्य बारिश में सबसे ज्यादा देरी हो सकती है। वर्षा के आंकड़ों में सुधार पिछले तीन दिनों की बारिश से प्रदेश की औसत वर्षा की स्थिति में सुधार हुआ है। 1 जून से अब तक सामान्य से 41 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जबकि 24 जून तक यह कमी 50 प्रतिशत थी। लगातार बारिश के कारण बारिश का घाटा घटा है, हालांकि पूर्वी मध्य प्रदेश में अब भी सामान्य से काफी कम वर्षा हुई है। एमपी में तेज बारिश…सिवनी में 2 इंच पानी गिरा इससे पहले शुक्रवार को तेज आंधी और बारिश का दौर रहा। सिवनी में करीब 2 इंच पानी गिर गया। शाजापुर के शुजालपुर, अकोदिया समेत आसपास के इलाकों में झमाझम बारिश हुई। उज्जैन में डेढ़ इंच से ज्यादा पानी गिरा। वहीं, दतिया, इंदौर, राजगढ़, शिवपुरी, मंडला, रीवा, सागर, बालाघाट, खंडवा, शाजापुर, आगर-मालवा, मंदसौर समेत कई जिलों में आंधी-बारिश का दौर जारी रहा। बालाघाट के बैहर तहसील के बिरवा ग्राम पंचायत में बिजली गिरने से 2 बच्चों सहित 3 लोगों की मौत हो गई, जबकि 6 लोग झुलस गए। मृतकों की पहचान लल्की मेरावी, झामसिंह ताराम (35) और सतीश वलके के रूप में हुई है। वहीं, देवास के खटांबा गांव में सूरज की पूजा के दौरान आंधी-बारिश से गैलरी गिर गई। हादसे में 2 महिलाओं की मौत हो गई, जबकि एक बच्ची समेत 3 लोग घायल हो गए। मृतकों की पहचान लक्ष्मीबाई और भगवंताबाई के रूप में हुई है। आंधी-बारिश की वजह से दिन के तापमान में खासी गिरावट हुई है। खरगोन में तापमान सबसे कम 30 डिग्री पहुंच गया। खंडवा में 30.1 डिग्री, सागर में 31.1 डिग्री, छिंदवाड़ा में 31.8 डिग्री, बैतूल में 32.7 डिग्री, सिवनी-उमरिया में 33.2 डिग्री, धार में 33.4 डिग्री, नर्मदापुरम में 33.8 डिग्री सेल्सियस रहा। प्रदेश के 5 बड़े शहरों में भोपाल-इंदौर में 33.8 डिग्री, उज्जैन में 33.5 डिग्री, जबलपुर में 36.7 डिग्री और ग्वालियर में 41.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।    

पंजाब में मानसून की एंट्री, फिरोजपुर में झमाझम बारिश; 27-28 जून को कई जिलों में बारिश का अलर्ट जारी

फिरोजपुर  शुक्रवार सुबह से शुरू हुई झमाझम बारिश ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया। पिछले कई दिनों से पड़ रही भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों को बारिश ने बड़ी राहत दी है। सुबह से लगातार हो रही वर्षा के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई और वातावरण में ठंडक घुल गई। बारिश शुरू होते ही सड़कों और बाजारों का नजारा भी बदल गया। लोगों ने गर्मी से राहत मिलने पर खुशी जताई। ठंडी हवाओं के चलने से मौसम सुहावना हो गया, जिससे लोगों ने राहत की सांस ली। मौसम में आए इस बदलाव से जहां आम जनजीवन को राहत मिली है, वहीं किसानों ने भी बारिश को फसलों के लिए लाभदायक बताया। हालांकि लगातार बारिश जारी रहने पर कुछ निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनने की आशंका भी बनी हुई है। फिलहाल लोगों के लिए यह बारिश भीषण गर्मी से राहत लेकर आई है। भीषण गर्मी और उमस से परेशान पंजाब व चंडीगढ़ के लोगों के लिए राहत भरी खबर है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में बारिश की संभावना जताई है। विभाग के अनुसार, 27 और 28 जून को कई जिलों में बारिश होने के आसार हैं। इसे देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं दूसरी तरफ पंजाब में बिजली की मांग ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। भीषण गर्मी के बीच राज्य में बिजली की मांग 16 हजार मेगावाट के पार पहुंच गई है। बीते दिन अधिकतम मांग 16,335 मेगावाट दर्ज की गई, जो इस वर्ष का सबसे उच्च स्तर है। पिछले वर्ष 25 जून को यह मांग 14,697 मेगावाट थी, जबकि वर्ष 2024 में अधिकतम मांग 15,345 मेगावाट दर्ज की गई थी। राज्य के 15 में से 12 थर्मल पावर यूनिट फिलहाल बिजली उत्पादन कर रहे हैं। मौसम अपडेट 1. 26 जून राज्य के अधिकांश इलाकों में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। 2. 27 और 28 जून इन दो दिनों में मानसून सबसे ज्यादा सक्रिय रहेगा। मौसम विभाग ने पंजाब के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। कई जिलों में जलभराव और ट्रैफिक प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई है। 3. 29 जून से 1 जुलाई बारिश का दौर जारी रहेगा, हालांकि इसकी तीव्रता कुछ कम हो सकती है। कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश देखने को मिलेगी। तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आएगी मौसम विभाग के मुताबिक, फिलहाल पंजाब के कई जिलों में अधिकतम तापमान 36 से 41 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। अगले तीन दिनों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने से तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज होने की संभावना है। इससे लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी और मौसम सुहावना होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बारिश धान की रोपाई कर रहे किसानों के लिए काफी लाभदायक होगी।  

बारिश में जलभराव रोकने पर गडकरी का फोकस, सड़कों को तालाब बनने से बचाने के लिए क्या है प्लान?

मुंबई  मॉनसून में अक्सर सड़कों के तालाब बन जाने की खबरों के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बारिश आने से पहले ही तैयारी करने के जरूरी निर्देश दिए हैं. गडकरी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं पर मानसून से जुड़ी तैयारियों को पूरी तरह मजबूत किया जाए और खराब मौसम के कारण होने वाली बाधाओं को कम करने के लिए जरूरी एहतियाती कदम उठाए जाएं।  सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) के अनुसार, यह निर्देश उन समीक्षा बैठकों के दौरान दिए गए, जिनमें तेलंगाना, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में चल रही राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की गुणवत्ता, रखरखाव और प्रगति का आकलन किया गया है. गडकरी ने सड़क परिवहन की नींव राष्ट्रीय राजमार्गों पर खासतौर पर ध्यान रखने के लिए कहा है।  इन परियोजनाओं में तेलंगाना के 4,931 किलोमीटर, जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के 2,035 किलोमीटर और लद्दाख के 804 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग शामिल हैं। मंत्रालय के अनुसार, यह समीक्षा मीडिया रिपोर्टों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मिली प्रतिक्रियाओं और अधिकारियों, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), नेशनल हाईवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) और परियोजना ठेकेदारों से प्राप्त जानकारी के आधार पर की गई।  बैठकों के दौरान गडकरी ने चल रही परियोजनाओं, रखरखाव कार्यों और सुरक्षित, टिकाऊ एवं प्रभावी राजमार्ग बुनियादी ढांचा सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों की समीक्षा की।  गडकरी ने परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने पर जोर देते हुए कहा कि गुणवत्ता और जवाबदेही के उच्चतम मानकों को बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों और कार्यान्वयन एजेंसियों को निगरानी व्यवस्था मजबूत करने, समय पर काम पूरा करने तथा आधुनिक निर्माण तकनीकों और बेहतर कार्य पद्धतियों को अपनाने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि इससे सड़कों की मजबूती, यात्रा सुविधा और राजमार्गों का दीर्घकालिक प्रदर्शन बेहतर होगा।  मानसून के दौरान संभावित चुनौतियों को देखते हुए मंत्री ने अधिकारियों को प्रभावी ड्रेनेज प्रबंधन, ढलानों की स्थिरता (स्लोप स्टेबिलाइजेशन) और सुरक्षा कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने मौसम से जुड़ी आपात स्थितियों से निपटने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली (रैपिड रिस्पॉन्स सिस्टम) तैनात करने पर भी जोर दिया। मंत्री के अनुसार, ये कदम राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क पर निर्बाध यातायात, सड़क सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की मजबूती सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी हैं।  गडकरी ने कहा कि अच्छी तरह से विकसित और रखरखाव वाली सड़कें क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने, आर्थिक विकास को गति देने, पर्यटन को बढ़ावा देने और यात्रियों की सुविधा सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि समय पर परियोजनाओं का पूरा होना, गुणवत्ता सुनिश्चित करना और आधुनिक इंजीनियरिंग समाधानों को अपनाना सड़क क्षेत्र की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। 

9 दिन की देरी के बाद सक्रिय हुआ मानसून, 46 जिलों में तेज बारिश और आंधी की चेतावनी

भोपाल  मध्य प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में आखिरकार मानसून की एंट्री हो गई है। मौसम विभाग ने छिंदवाड़ा समेत 15 जिलों में मानसून पहुंचने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। पिछले 24 घंटों में हुई अच्छी बारिश और दक्षिण-पश्चिम से आने वाली नमी युक्त हवाओं के आधार पर यह घोषणा की गई। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 2 से 3 दिनों में मानसून प्रदेश के शेष हिस्सों को भी कवर कर लेगा। भरी गर्मी लोगों को परेशान कर सकती गुरुवार को प्रदेश के 46 जिलों में तेज आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं सीधी जिले में लू चलने की संभावना है, जबकि ग्वालियर, मुरैना, भिंड, रीवा, सिंगरौली, मंदसौर और नीमच समेत कई जिलों में उमस भरी गर्मी लोगों को परेशान कर सकती है। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में सबसे अंत में मानसून पहुंचेगा मौसम विभाग के अनुसार आलीराजपुर, इंदौर, हरदा, धार, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, खरगोन, सिवनी, बालाघाट, मंडला, बड़वानी और डिंडौरी जिलों में मानसून पहुंच चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में सबसे अंत में मानसून पहुंचेगा। प्रदेश के बाकी हिस्सों को अगले 2 से 3 दिन में मानसून कवर कर लेगा। मौसम विभाग के अनुसार गुरुवार को प्रदेश के 46 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट है। सीधी में लू चल सकती है, जबकि नीमच, मंदसौर, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, रीवा और सिंगरौली में उमस-भरी गर्मी रहेगी। इन जिलों में आ चुका मानसून आलीराजपुर, इंदौर, हरदा, धार, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, खरगोन, सिवनी, बालाघाट, मंडला, बड़वानी, डिंडौरी में मानसून के आने की घोषणा हो चुकी है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले दो से चार दिन के अंदर मानसून पूरे प्रदेश में छा जाएगा। यह सबसे आखिरी में ग्वालियर-चंबल में मानसून पहुंचेगा। 9 दिन लेट हो गया मानसून एमपी में मानसून की एंट्री की सामान्य तारीख 15 जून है, लेकिन इस बार यह 9 दिन लेट यानी, 24 जून को प्रदेश में आया। मानसून आ गया है? इसका आंकलन कैसे होता है? यह मौसम वैज्ञानिक अरुण कुमार से जाना। उन्होंने बताया कि छिंदवाड़ा में पिछले 24 घंटे में 75 मिमी यानी, 3 इंच बारिश हो गई। सीमा से जुड़े जिलों में भी लगातार बारिश का दौर जारी रहा। कई जिलों में पर्याप्त बारिश हुई और दक्षिण-पश्चिम से नमी वाली मानसूनी हवाएं भी आईं। इन्हीं के अध्ययन से मानसून की एंट्री की अधिकारिक घोषणा की जाती है। इन जिलों में पहुंच चुका है मानसून मौसम विभाग ने अलीराजपुर, बड़वानी, धार, इंदौर, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला और डिंडौरी में मानसून के प्रवेश की आधिकारिक घोषणा कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगले दो से चार दिनों में मानसून पूरे प्रदेश को कवर कर लेगा। नौ दिन की देरी से हुई एंट्री मध्य प्रदेश में मानसून की सामान्य आगमन तिथि 15 जून मानी जाती है, लेकिन इस बार यह 24 जून को पहुंचा। यानी मानसून निर्धारित समय से करीब नौ दिन देरी से आया। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून की घोषणा केवल बारिश के आधार पर नहीं होती, बल्कि वर्षा की मात्रा, नमी वाली हवाओं की दिशा और उनके प्रभाव क्षेत्र का विस्तृत अध्ययन किया जाता है। छिंदवाड़ा में पिछले 24 घंटों के दौरान 75 मिमी से अधिक बारिश दर्ज होने के साथ दक्षिणी सीमावर्ती जिलों में लगातार सक्रिय मानसूनी गतिविधियां देखी गईं, जिसके बाद इसकी आधिकारिक घोषणा की गई। बारिश का कोटा अभी भी आधा अधूरा मानसून के देर से आने का असर शुरुआती सीजन पर साफ दिखाई दे रहा है। प्रदेश में 1 जून से 24 जून तक औसतन 84.8 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक केवल 42 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। यह सामान्य से लगभग 50 प्रतिशत कम है। इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर सहित 48 जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे बना हुआ है।  इस साल कम बरसात की आशंका भारतीय मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक इस वर्ष प्रदेश के अधिकांश जिलों में सामान्य से कम वर्षा हो सकती है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर समेत 47 जिलों में बारिश का स्तर औसत से नीचे रहने का अनुमान है। सामान्य तौर पर मध्य प्रदेश में मानसून सीजन के दौरान करीब 37.3 इंच वर्षा होती है, लेकिन इस बार यह आंकड़ा 30 से 32 इंच के बीच रहने की संभावना जताई गई है। केवल सात जिलों में सामान्य से अधिक बारिश अब तक के आंकड़ों के अनुसार भोपाल, अशोकनगर, आगर-मालवा, गुना, मंदसौर, नीमच और श्योपुर ऐसे जिले हैं जहां सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इसके विपरीत इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, सागर, रीवा, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, बालाघाट, धार, खरगोन, रायसेन, सीहोर समेत 48 जिलों में वर्षा का स्तर सामान्य से कम बना हुआ है। मौसम विभाग का मानना है कि अगले तीन दिनों में मानसून की सक्रियता बढ़ने से बारिश की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है और प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल जाएगा।  विश्लेषण करने के बाद ही इसकी पुष्टि की जाती है इस वर्ष मध्य प्रदेश में मानसून सामान्य तिथि 15 जून के बजाय 24 जून को पहुंचा, यानी करीब 9 दिन की देरी से। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून की घोषणा केवल बारिश के आधार पर नहीं होती, बल्कि लगातार वर्षा, हवा की दिशा, नमी और अन्य मौसमीय संकेतकों का विश्लेषण करने के बाद ही इसकी पुष्टि की जाती है। खेती के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी हालांकि इस बार मानसून के बावजूद बारिश को लेकर चिंता बनी हुई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के अनुसार भोपाल, इंदौर, जबलपुर समेत प्रदेश के 47 जिलों में सामान्य से कम वर्षा हो सकती है। 1 जून से 24 जून तक प्रदेश में औसतन 84.8 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन केवल 42 मिमी वर्षा दर्ज हुई है, जो सामान्य से लगभग 50 प्रतिशत कम है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों की बारिश प्रदेश की जल स्थिति और खेती के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी।  

बारिश से बेहाल मुंबई, जलभराव के चलते रेलवे ट्रैक डूबे और अंधेरी सबवे बंद

 मुंबई  मानसून की पहली बारिश मंगलवार को मुंबई में आफत बनकर आई। सड़कें, रेलवे ट्रैक और सबवे सभी जगहों पर पानी भर गया और शहर के कई हिस्सों में जन-जीवन बुरी तरह से प्रभावित हुआ। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बुधवार के लिए मुंबई में भारी बारिश का अनुमान लगाते हुए 'येलो अलर्ट' जारी किया है। पूरे राज्य में बारिश का मौसम बने रहने के कारण महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों के लिए येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किए गए हैं। जलभराव से रोजमर्रा की जिंदगी बाधित मंगलवार तक हुई भारी बारिश के कारण मुंबई के कई इलाकों में भारी जलभराव हो गया। सड़कों पर चलना मुश्किल हो गया और सिविक अधिकारियों द्वारा बाढ़ प्रभावित इलाकों में आवाजाही पर रोक लगाने के कारण यात्रियों को ट्रैफिक में रुकावटों का सामना करना पड़ा। एवरार्ड नगर में पानी से भरे सबवे को भी आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया। साकी नाका मेट्रो स्टेशन इलाके समेत शहर के अलग-अलग हिस्सों की तस्वीरों में भारी बारिश का रोजमर्रा की आवाजाही पर असर साफ दिखा। 'नहीं ढूंढ़ पाए समस्या का अस्थाई समाधान' अंधेरी अंडरपास की स्थिति के बारे में बात करते हुए बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के अधिकारी ऋतिक ने कहा, "हम पानी भरने की इस गंभीर समस्या का कोई अस्थायी समाधान नहीं ढूंढ पाए हैं। हमारे अधिकारी यह सुनिश्चित करने के लिए यहां तैनात रहते हैं कि गाड़ियां यहां से न गुजरें। लेकिन कुछ रिक्शा चालक फिर भी अपनी गाड़ियों को वहां से निकालने की कोशिश करते हैं। एक रिक्शा सबवे के बीच में फंस गया था। उसकी जान खतरे में थी। हमारे दो अधिकारियों ने उसे बाहर निकालने में मदद की।" बीएमसी के एक और अधिकारी रॉबर्ट ने कहा, "हम पूरी कोशिश कर रहे हैं कि अंडरपास के अंदर कोई भी गाड़ी न जाए। हम ज्यादा से ज्यादा लोगों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।" रेल सेवा जारी रही बीएमसी ने कहा कि पानी से भरे अंधेरी अंडरपास को छोड़कर सभी सबवे चालू रहे, जबकि शहर भर में रेल सेवा सामान्य रूप से चलती रही। जोरदार बारिश के बावजूद, वेस्टर्न रेलवे ने पुष्टि की कि सुबह के व्यस्त समय में हार्बर लाइन और चर्चगेट-दहानू कॉरिडोर समेत मुख्य रूटों पर सबअर्बन ट्रेन सेवाएं सामान्य रूप से चल रही थीं। हालांकि, रात भर लगातार हुई बारिश के कारण मुंबई और नवी मुंबई के कुछ हिस्सों में जलभराव हो गया। भारी बारिश से थमी मुंबई की रफ्तार वसई, विरार और नालासोपारा क्षेत्रों में बुधवार रात से लगातार भारी बारिश हो रही है, जिससे कई इलाकों में सड़कों पर जलभराव की स्थिति बन गई है. जलभराव के कारण स्थानीय सेवाएं प्रभावित हुईं और यात्रियों को आवाजाही में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. पहली ही तेज बारिश ने कई क्षेत्रों में परेशानी बढ़ा दी है. वहीं, भवानी पार्क इलाके में एक पेड़ भी गिर गया, जिसे हटाने के लिए दमकल विभाग की टीम युद्धस्तर पर राहत कार्य में जुटी हुई है. लगातार बारिश को देखते हुए प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है।  मुंबई में रेड वॉर्निंग के बीच बुधवार शाम से लगातार मूसलाधार बारिश हो रही है. इसी दौरान दादर स्टेशन के पूर्वी इलाके में भारी बारिश के कारण एक बड़ा पेड़ गिरकर एक कार पर आ गिरा, जिससे कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई व्यक्ति घायल नहीं हुआ. सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और पेड़ की शाखाएं काटकर उसे हटाने का काम शुरू कर दिया. लगातार बारिश के चलते शहर के कई इलाकों में जलभराव और यातायात प्रभावित होने की भी खबरें हैं।   मुंबई में मंगलवार रात से शुरू हुई बारिश बुधवार सुबह तक लगातार जारी रही. मुंबई में बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. भारी बारिश के कारण शहर के कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई. पनवेल से नवी मुंबई आने वाले कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक की रफ्तार बेहद धीमी रही. सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें दिखाई दीं और लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक समय लगा।   बारिश का असर मुंबई की लोकल ट्रेन सेवाओं पर भी साफ दिखाई दिया. पश्चिमी रेलवे की लोकल ट्रेनें 20 से 25 मिनट की देरी से चल रही हैं. वहीं सेंट्रल लाइन पर ट्रेनों की रफ्तार और भी ज्यादा प्रभावित हुई है तथा कई ट्रेनें लगभग 30 मिनट की देरी से चल रही हैं. सेंट्रल रेलवे की सेवाओं में भी व्यवधान दर्ज किया गया है, जिससे रोजाना यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।  सबसे बड़ा असर हार्बर लाइन पर देखने को मिला. रेलवे प्रशासन ने जानकारी दी है कि तकनीकी कारणों के चलते हार्बर लाइन की सेवाएं पूरी तरह बंद कर दी गई हैं. प्रशासन के अनुसार भारी बारिश और उससे जुड़े तकनीकी कारणों की वजह से यह कदम उठाया गया. इससे नवी मुंबई और मुंबई के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।  बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के आंकड़ों के अनुसार 23 जून सुबह 8 बजे से 24 जून रात 2 बजे तक शहर क्षेत्र में औसतन 78 मिमी बारिश दर्ज की गई. पूर्वी उपनगरों में 87 मिमी और पश्चिमी उपनगरों में 113 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई. रात 1 बजे से 2 बजे के बीच सबसे ज्यादा बारिश भांडुप कॉम्प्लेक्स में 40 मिमी दर्ज हुई. इसके अलावा एस वार्ड में 35 मिमी, टी वार्ड में 31 मिमी और मिथागर म्यूनिसिपल स्कूल क्षेत्र में 29 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।  पश्चिमी उपनगरों में आनंद नगर म्यूनिसिपल स्कूल क्षेत्र में 32 मिमी, दिंडोशी वसाहत और दहिसर में 30 मिमी तथा मालवणी फायर स्टेशन क्षेत्र में 26 मिमी बारिश हुई. वहीं शहर क्षेत्र में काला किला धारावी में 19 मिमी, आदर्श नगर स्कूल वर्ली में 16 मिमी तथा दादर और वर्ली फायर स्टेशन क्षेत्र में 15 मिमी बारिश दर्ज की गई. मिटी नदी का जलस्तर भी बढ़कर 1.83 मीटर तक पहुंच गया है, जिस पर प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है।  मुंबई में कितनी बारिश हुई? बीएमसी के बारिश के आंकड़ों के अनुसार, 23 जून को सुबह 8:00 बजे से रात 11:00 बजे के बीच शहर … Read more

लेट हो रहा मानसून, लेकिन बारिश बनी राहत! पंजाब में पारा लुढ़का, अगले चार दिन यलो अलर्ट

अमृतसर  पंजाब में भले ही मानसून आने में देरी हो रही है, लेकिन कईं जगहों पर हुई हल्की बारिश से भीषण गरमी से कुछ राहत मिली है। सोमवार को पंजाब के तापमान में 3.6 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। इससे अब पारा सामान्य से 2.3 डिग्री नीचे पहुंच गया है। सबसे अधिक 38.6 डिग्री का पारा बठिंडा का दर्ज किया गया।  मौसम विभाग ने अगले चार दिनों के लिए पंजाब में यलो अलर्ट जारी कर दिया है। इसके तहत पंजाब में गरज-चमक के साथ 40 से 50 किलोमीटर की रफ्तार से तेज हवाएं चलेंगी और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। विभाग ने मंगलवार व बुधवार के लिए पंजाब के 14 जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है।  इनमें पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन, होशियारपुर, नवांशहर, कपूरथला, जालंधर, लुधियाना, संगरूर, फतेहगढ़ साहिब, रूपनगर, पटियाला और मोहाली शामिल हैं। इसके बाद 25 जून से पश्चिमी विक्षोभ मजबूत होगा और दो दिन पंजाब के सभी जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश पड़ेगी। पंजाब के न्यूनतम तापमान में भी 1.5 डिग्री की कमी दर्ज की गई। यह सामान्य. से 1.7 डिग्री नीचे हो गया है। सबसे कम 23.2 डिग्री का न्यूनतम पारा पठानकोट का दर्ज किया गया। जून के आखिरी हफ्ते में दस्तक दे सकता है मानसून  मौसम विभाग के चंडीगढ़ केंद्र के डायरेक्टर सुरिंदर पाल के मुताबिक मानसून पूर्वी भारत में तेजी से आगे बढ़ चुका है और अब उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ रहा है। अगर स्थितियां अनुकूल बनी रहीं और इसी तरह से मानसून आगे बढ़ता रहा, तो जून के आखिरी हफ्ते में 29 या फिर 30 जून को यह पंजाब में प्रवेश कर सकता है। डायरेक्टर ने कहा कि पंजाब में 25 जून तक होने वाली बारिश पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से पड़ेगी। यह प्रि मानसून की बारिश नहीं है। गौरतलब है कि इससे पहले पंजाब में 20 से 25 जून के बीच मानसून के दस्तक देने की संभावना जताई गई थी।  अमृतसर का अधिकतम पारा 34.9 डिग्री (सामान्य से 3.2 डिग्री नीचे) लुधियाना का 34.2 डिग्री, पटियाला का 36.3 डिग्री, पठानकोट का 36.6 डिग्री, फाजिल्का का 36.0 डिग्री, होशियारपुर का 34.8 डिग्री, एसबीएस नगर का 31.8 डिग्री और रूपनगर का 36.8 डिग्री दर्ज किया गया। अमृतसर का न्यूनतम पारा 24.0 डिग्री, लुधियाना का 23.8 डिग्री, पटियाला का 26.7 डिग्री, बठिंडा का 25.5 डिग्री, फाजिल्का का 25.8 डिग्री, होशियारपुर का 24.7 डिग्री और रूपनगर का 25.8 दर्ज किया गया।

बारिश और तेज हवाओं से बदलेगा मौसम, कई जिलों में वज्रपात की चेतावनी

रांची  झारखंड में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं. भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार राज्य के अधिकांश हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक आसमान में बादल छाये रहने, हल्की से मध्यम वर्षा तथा गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने की संभावना है. मौसम विभाग ने 27 जून तक झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है. पंजाब से बिहार तक एक टर्फ सक्रिय है. झारखंड से तटीय आंध्र प्रदेश तक एक अन्य टर्फ भी बना हुआ है, जिससे राज्य में नमी बढ़ रही है. विभाग ने कहा है कि झारखंड, बिहार और ओडिशा के कुछ और हिस्सों में 23 जून के आसपास मॉनसून के आगे बढ़ने की संभावना है. दो से तीन डिग्री गिर सकता है पारा मौसम विभाग के अनुसार 25 जून तक राज्य में अधिकांश स्थानों पर बादल छाये रहेंगे और कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है. 22 और 23 जून के दौरान अधिकतम तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है. इसके बाद तापमान में फिर दो से तीन डिग्री की वृद्धि होने की संभावना जताई गई है. गुमला में सबसे ज्यादा बारिश हुई पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के विभिन्न हिस्सों में हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश हुई. सबसे अधिक बारिश चैनपुर (गुमला जिला) में 40.2 मिलीमीटर रिकॉर्ड की गई. इसके अलावा रांची में 35.6 मिलीमीटर, बोकारो में 35.5 मिलीमीटर और नामकुम में 23.5 मिलीमीटर बारिश हुई. आज तेज हवा और वज्रपात का अलर्ट 22 जून को दक्षिणी (कोल्हान) और निकटवर्ती मध्य (राजधानी और आसपास) जिलों में तेज हवा और वज्रपात की चेतावनी जारी की गई है. 23 से 27 जून तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में गरज-चमक, वज्रपात और 40-50 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना बनी रहेगी.