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पंजाब में मानसून की एंट्री, फिरोजपुर में झमाझम बारिश; 27-28 जून को कई जिलों में बारिश का अलर्ट जारी

फिरोजपुर  शुक्रवार सुबह से शुरू हुई झमाझम बारिश ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया। पिछले कई दिनों से पड़ रही भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों को बारिश ने बड़ी राहत दी है। सुबह से लगातार हो रही वर्षा के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई और वातावरण में ठंडक घुल गई। बारिश शुरू होते ही सड़कों और बाजारों का नजारा भी बदल गया। लोगों ने गर्मी से राहत मिलने पर खुशी जताई। ठंडी हवाओं के चलने से मौसम सुहावना हो गया, जिससे लोगों ने राहत की सांस ली। मौसम में आए इस बदलाव से जहां आम जनजीवन को राहत मिली है, वहीं किसानों ने भी बारिश को फसलों के लिए लाभदायक बताया। हालांकि लगातार बारिश जारी रहने पर कुछ निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनने की आशंका भी बनी हुई है। फिलहाल लोगों के लिए यह बारिश भीषण गर्मी से राहत लेकर आई है। भीषण गर्मी और उमस से परेशान पंजाब व चंडीगढ़ के लोगों के लिए राहत भरी खबर है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में बारिश की संभावना जताई है। विभाग के अनुसार, 27 और 28 जून को कई जिलों में बारिश होने के आसार हैं। इसे देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं दूसरी तरफ पंजाब में बिजली की मांग ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। भीषण गर्मी के बीच राज्य में बिजली की मांग 16 हजार मेगावाट के पार पहुंच गई है। बीते दिन अधिकतम मांग 16,335 मेगावाट दर्ज की गई, जो इस वर्ष का सबसे उच्च स्तर है। पिछले वर्ष 25 जून को यह मांग 14,697 मेगावाट थी, जबकि वर्ष 2024 में अधिकतम मांग 15,345 मेगावाट दर्ज की गई थी। राज्य के 15 में से 12 थर्मल पावर यूनिट फिलहाल बिजली उत्पादन कर रहे हैं। मौसम अपडेट 1. 26 जून राज्य के अधिकांश इलाकों में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। 2. 27 और 28 जून इन दो दिनों में मानसून सबसे ज्यादा सक्रिय रहेगा। मौसम विभाग ने पंजाब के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। कई जिलों में जलभराव और ट्रैफिक प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई है। 3. 29 जून से 1 जुलाई बारिश का दौर जारी रहेगा, हालांकि इसकी तीव्रता कुछ कम हो सकती है। कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश देखने को मिलेगी। तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आएगी मौसम विभाग के मुताबिक, फिलहाल पंजाब के कई जिलों में अधिकतम तापमान 36 से 41 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। अगले तीन दिनों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने से तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज होने की संभावना है। इससे लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी और मौसम सुहावना होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बारिश धान की रोपाई कर रहे किसानों के लिए काफी लाभदायक होगी।  

बारिश में जलभराव रोकने पर गडकरी का फोकस, सड़कों को तालाब बनने से बचाने के लिए क्या है प्लान?

मुंबई  मॉनसून में अक्सर सड़कों के तालाब बन जाने की खबरों के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बारिश आने से पहले ही तैयारी करने के जरूरी निर्देश दिए हैं. गडकरी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं पर मानसून से जुड़ी तैयारियों को पूरी तरह मजबूत किया जाए और खराब मौसम के कारण होने वाली बाधाओं को कम करने के लिए जरूरी एहतियाती कदम उठाए जाएं।  सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) के अनुसार, यह निर्देश उन समीक्षा बैठकों के दौरान दिए गए, जिनमें तेलंगाना, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में चल रही राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की गुणवत्ता, रखरखाव और प्रगति का आकलन किया गया है. गडकरी ने सड़क परिवहन की नींव राष्ट्रीय राजमार्गों पर खासतौर पर ध्यान रखने के लिए कहा है।  इन परियोजनाओं में तेलंगाना के 4,931 किलोमीटर, जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के 2,035 किलोमीटर और लद्दाख के 804 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग शामिल हैं। मंत्रालय के अनुसार, यह समीक्षा मीडिया रिपोर्टों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मिली प्रतिक्रियाओं और अधिकारियों, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), नेशनल हाईवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) और परियोजना ठेकेदारों से प्राप्त जानकारी के आधार पर की गई।  बैठकों के दौरान गडकरी ने चल रही परियोजनाओं, रखरखाव कार्यों और सुरक्षित, टिकाऊ एवं प्रभावी राजमार्ग बुनियादी ढांचा सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों की समीक्षा की।  गडकरी ने परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने पर जोर देते हुए कहा कि गुणवत्ता और जवाबदेही के उच्चतम मानकों को बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों और कार्यान्वयन एजेंसियों को निगरानी व्यवस्था मजबूत करने, समय पर काम पूरा करने तथा आधुनिक निर्माण तकनीकों और बेहतर कार्य पद्धतियों को अपनाने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि इससे सड़कों की मजबूती, यात्रा सुविधा और राजमार्गों का दीर्घकालिक प्रदर्शन बेहतर होगा।  मानसून के दौरान संभावित चुनौतियों को देखते हुए मंत्री ने अधिकारियों को प्रभावी ड्रेनेज प्रबंधन, ढलानों की स्थिरता (स्लोप स्टेबिलाइजेशन) और सुरक्षा कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने मौसम से जुड़ी आपात स्थितियों से निपटने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली (रैपिड रिस्पॉन्स सिस्टम) तैनात करने पर भी जोर दिया। मंत्री के अनुसार, ये कदम राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क पर निर्बाध यातायात, सड़क सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की मजबूती सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी हैं।  गडकरी ने कहा कि अच्छी तरह से विकसित और रखरखाव वाली सड़कें क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने, आर्थिक विकास को गति देने, पर्यटन को बढ़ावा देने और यात्रियों की सुविधा सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि समय पर परियोजनाओं का पूरा होना, गुणवत्ता सुनिश्चित करना और आधुनिक इंजीनियरिंग समाधानों को अपनाना सड़क क्षेत्र की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। 

9 दिन की देरी के बाद सक्रिय हुआ मानसून, 46 जिलों में तेज बारिश और आंधी की चेतावनी

भोपाल  मध्य प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में आखिरकार मानसून की एंट्री हो गई है। मौसम विभाग ने छिंदवाड़ा समेत 15 जिलों में मानसून पहुंचने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। पिछले 24 घंटों में हुई अच्छी बारिश और दक्षिण-पश्चिम से आने वाली नमी युक्त हवाओं के आधार पर यह घोषणा की गई। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 2 से 3 दिनों में मानसून प्रदेश के शेष हिस्सों को भी कवर कर लेगा। भरी गर्मी लोगों को परेशान कर सकती गुरुवार को प्रदेश के 46 जिलों में तेज आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं सीधी जिले में लू चलने की संभावना है, जबकि ग्वालियर, मुरैना, भिंड, रीवा, सिंगरौली, मंदसौर और नीमच समेत कई जिलों में उमस भरी गर्मी लोगों को परेशान कर सकती है। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में सबसे अंत में मानसून पहुंचेगा मौसम विभाग के अनुसार आलीराजपुर, इंदौर, हरदा, धार, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, खरगोन, सिवनी, बालाघाट, मंडला, बड़वानी और डिंडौरी जिलों में मानसून पहुंच चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में सबसे अंत में मानसून पहुंचेगा। प्रदेश के बाकी हिस्सों को अगले 2 से 3 दिन में मानसून कवर कर लेगा। मौसम विभाग के अनुसार गुरुवार को प्रदेश के 46 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट है। सीधी में लू चल सकती है, जबकि नीमच, मंदसौर, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, रीवा और सिंगरौली में उमस-भरी गर्मी रहेगी। इन जिलों में आ चुका मानसून आलीराजपुर, इंदौर, हरदा, धार, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, खरगोन, सिवनी, बालाघाट, मंडला, बड़वानी, डिंडौरी में मानसून के आने की घोषणा हो चुकी है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले दो से चार दिन के अंदर मानसून पूरे प्रदेश में छा जाएगा। यह सबसे आखिरी में ग्वालियर-चंबल में मानसून पहुंचेगा। 9 दिन लेट हो गया मानसून एमपी में मानसून की एंट्री की सामान्य तारीख 15 जून है, लेकिन इस बार यह 9 दिन लेट यानी, 24 जून को प्रदेश में आया। मानसून आ गया है? इसका आंकलन कैसे होता है? यह मौसम वैज्ञानिक अरुण कुमार से जाना। उन्होंने बताया कि छिंदवाड़ा में पिछले 24 घंटे में 75 मिमी यानी, 3 इंच बारिश हो गई। सीमा से जुड़े जिलों में भी लगातार बारिश का दौर जारी रहा। कई जिलों में पर्याप्त बारिश हुई और दक्षिण-पश्चिम से नमी वाली मानसूनी हवाएं भी आईं। इन्हीं के अध्ययन से मानसून की एंट्री की अधिकारिक घोषणा की जाती है। इन जिलों में पहुंच चुका है मानसून मौसम विभाग ने अलीराजपुर, बड़वानी, धार, इंदौर, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला और डिंडौरी में मानसून के प्रवेश की आधिकारिक घोषणा कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगले दो से चार दिनों में मानसून पूरे प्रदेश को कवर कर लेगा। नौ दिन की देरी से हुई एंट्री मध्य प्रदेश में मानसून की सामान्य आगमन तिथि 15 जून मानी जाती है, लेकिन इस बार यह 24 जून को पहुंचा। यानी मानसून निर्धारित समय से करीब नौ दिन देरी से आया। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून की घोषणा केवल बारिश के आधार पर नहीं होती, बल्कि वर्षा की मात्रा, नमी वाली हवाओं की दिशा और उनके प्रभाव क्षेत्र का विस्तृत अध्ययन किया जाता है। छिंदवाड़ा में पिछले 24 घंटों के दौरान 75 मिमी से अधिक बारिश दर्ज होने के साथ दक्षिणी सीमावर्ती जिलों में लगातार सक्रिय मानसूनी गतिविधियां देखी गईं, जिसके बाद इसकी आधिकारिक घोषणा की गई। बारिश का कोटा अभी भी आधा अधूरा मानसून के देर से आने का असर शुरुआती सीजन पर साफ दिखाई दे रहा है। प्रदेश में 1 जून से 24 जून तक औसतन 84.8 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक केवल 42 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। यह सामान्य से लगभग 50 प्रतिशत कम है। इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर सहित 48 जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे बना हुआ है।  इस साल कम बरसात की आशंका भारतीय मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक इस वर्ष प्रदेश के अधिकांश जिलों में सामान्य से कम वर्षा हो सकती है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर समेत 47 जिलों में बारिश का स्तर औसत से नीचे रहने का अनुमान है। सामान्य तौर पर मध्य प्रदेश में मानसून सीजन के दौरान करीब 37.3 इंच वर्षा होती है, लेकिन इस बार यह आंकड़ा 30 से 32 इंच के बीच रहने की संभावना जताई गई है। केवल सात जिलों में सामान्य से अधिक बारिश अब तक के आंकड़ों के अनुसार भोपाल, अशोकनगर, आगर-मालवा, गुना, मंदसौर, नीमच और श्योपुर ऐसे जिले हैं जहां सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इसके विपरीत इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, सागर, रीवा, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, बालाघाट, धार, खरगोन, रायसेन, सीहोर समेत 48 जिलों में वर्षा का स्तर सामान्य से कम बना हुआ है। मौसम विभाग का मानना है कि अगले तीन दिनों में मानसून की सक्रियता बढ़ने से बारिश की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है और प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल जाएगा।  विश्लेषण करने के बाद ही इसकी पुष्टि की जाती है इस वर्ष मध्य प्रदेश में मानसून सामान्य तिथि 15 जून के बजाय 24 जून को पहुंचा, यानी करीब 9 दिन की देरी से। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून की घोषणा केवल बारिश के आधार पर नहीं होती, बल्कि लगातार वर्षा, हवा की दिशा, नमी और अन्य मौसमीय संकेतकों का विश्लेषण करने के बाद ही इसकी पुष्टि की जाती है। खेती के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी हालांकि इस बार मानसून के बावजूद बारिश को लेकर चिंता बनी हुई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के अनुसार भोपाल, इंदौर, जबलपुर समेत प्रदेश के 47 जिलों में सामान्य से कम वर्षा हो सकती है। 1 जून से 24 जून तक प्रदेश में औसतन 84.8 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन केवल 42 मिमी वर्षा दर्ज हुई है, जो सामान्य से लगभग 50 प्रतिशत कम है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों की बारिश प्रदेश की जल स्थिति और खेती के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी।  

बारिश से बेहाल मुंबई, जलभराव के चलते रेलवे ट्रैक डूबे और अंधेरी सबवे बंद

 मुंबई  मानसून की पहली बारिश मंगलवार को मुंबई में आफत बनकर आई। सड़कें, रेलवे ट्रैक और सबवे सभी जगहों पर पानी भर गया और शहर के कई हिस्सों में जन-जीवन बुरी तरह से प्रभावित हुआ। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बुधवार के लिए मुंबई में भारी बारिश का अनुमान लगाते हुए 'येलो अलर्ट' जारी किया है। पूरे राज्य में बारिश का मौसम बने रहने के कारण महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों के लिए येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किए गए हैं। जलभराव से रोजमर्रा की जिंदगी बाधित मंगलवार तक हुई भारी बारिश के कारण मुंबई के कई इलाकों में भारी जलभराव हो गया। सड़कों पर चलना मुश्किल हो गया और सिविक अधिकारियों द्वारा बाढ़ प्रभावित इलाकों में आवाजाही पर रोक लगाने के कारण यात्रियों को ट्रैफिक में रुकावटों का सामना करना पड़ा। एवरार्ड नगर में पानी से भरे सबवे को भी आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया। साकी नाका मेट्रो स्टेशन इलाके समेत शहर के अलग-अलग हिस्सों की तस्वीरों में भारी बारिश का रोजमर्रा की आवाजाही पर असर साफ दिखा। 'नहीं ढूंढ़ पाए समस्या का अस्थाई समाधान' अंधेरी अंडरपास की स्थिति के बारे में बात करते हुए बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के अधिकारी ऋतिक ने कहा, "हम पानी भरने की इस गंभीर समस्या का कोई अस्थायी समाधान नहीं ढूंढ पाए हैं। हमारे अधिकारी यह सुनिश्चित करने के लिए यहां तैनात रहते हैं कि गाड़ियां यहां से न गुजरें। लेकिन कुछ रिक्शा चालक फिर भी अपनी गाड़ियों को वहां से निकालने की कोशिश करते हैं। एक रिक्शा सबवे के बीच में फंस गया था। उसकी जान खतरे में थी। हमारे दो अधिकारियों ने उसे बाहर निकालने में मदद की।" बीएमसी के एक और अधिकारी रॉबर्ट ने कहा, "हम पूरी कोशिश कर रहे हैं कि अंडरपास के अंदर कोई भी गाड़ी न जाए। हम ज्यादा से ज्यादा लोगों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।" रेल सेवा जारी रही बीएमसी ने कहा कि पानी से भरे अंधेरी अंडरपास को छोड़कर सभी सबवे चालू रहे, जबकि शहर भर में रेल सेवा सामान्य रूप से चलती रही। जोरदार बारिश के बावजूद, वेस्टर्न रेलवे ने पुष्टि की कि सुबह के व्यस्त समय में हार्बर लाइन और चर्चगेट-दहानू कॉरिडोर समेत मुख्य रूटों पर सबअर्बन ट्रेन सेवाएं सामान्य रूप से चल रही थीं। हालांकि, रात भर लगातार हुई बारिश के कारण मुंबई और नवी मुंबई के कुछ हिस्सों में जलभराव हो गया। भारी बारिश से थमी मुंबई की रफ्तार वसई, विरार और नालासोपारा क्षेत्रों में बुधवार रात से लगातार भारी बारिश हो रही है, जिससे कई इलाकों में सड़कों पर जलभराव की स्थिति बन गई है. जलभराव के कारण स्थानीय सेवाएं प्रभावित हुईं और यात्रियों को आवाजाही में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. पहली ही तेज बारिश ने कई क्षेत्रों में परेशानी बढ़ा दी है. वहीं, भवानी पार्क इलाके में एक पेड़ भी गिर गया, जिसे हटाने के लिए दमकल विभाग की टीम युद्धस्तर पर राहत कार्य में जुटी हुई है. लगातार बारिश को देखते हुए प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है।  मुंबई में रेड वॉर्निंग के बीच बुधवार शाम से लगातार मूसलाधार बारिश हो रही है. इसी दौरान दादर स्टेशन के पूर्वी इलाके में भारी बारिश के कारण एक बड़ा पेड़ गिरकर एक कार पर आ गिरा, जिससे कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई व्यक्ति घायल नहीं हुआ. सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और पेड़ की शाखाएं काटकर उसे हटाने का काम शुरू कर दिया. लगातार बारिश के चलते शहर के कई इलाकों में जलभराव और यातायात प्रभावित होने की भी खबरें हैं।   मुंबई में मंगलवार रात से शुरू हुई बारिश बुधवार सुबह तक लगातार जारी रही. मुंबई में बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. भारी बारिश के कारण शहर के कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई. पनवेल से नवी मुंबई आने वाले कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक की रफ्तार बेहद धीमी रही. सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें दिखाई दीं और लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक समय लगा।   बारिश का असर मुंबई की लोकल ट्रेन सेवाओं पर भी साफ दिखाई दिया. पश्चिमी रेलवे की लोकल ट्रेनें 20 से 25 मिनट की देरी से चल रही हैं. वहीं सेंट्रल लाइन पर ट्रेनों की रफ्तार और भी ज्यादा प्रभावित हुई है तथा कई ट्रेनें लगभग 30 मिनट की देरी से चल रही हैं. सेंट्रल रेलवे की सेवाओं में भी व्यवधान दर्ज किया गया है, जिससे रोजाना यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।  सबसे बड़ा असर हार्बर लाइन पर देखने को मिला. रेलवे प्रशासन ने जानकारी दी है कि तकनीकी कारणों के चलते हार्बर लाइन की सेवाएं पूरी तरह बंद कर दी गई हैं. प्रशासन के अनुसार भारी बारिश और उससे जुड़े तकनीकी कारणों की वजह से यह कदम उठाया गया. इससे नवी मुंबई और मुंबई के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।  बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के आंकड़ों के अनुसार 23 जून सुबह 8 बजे से 24 जून रात 2 बजे तक शहर क्षेत्र में औसतन 78 मिमी बारिश दर्ज की गई. पूर्वी उपनगरों में 87 मिमी और पश्चिमी उपनगरों में 113 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई. रात 1 बजे से 2 बजे के बीच सबसे ज्यादा बारिश भांडुप कॉम्प्लेक्स में 40 मिमी दर्ज हुई. इसके अलावा एस वार्ड में 35 मिमी, टी वार्ड में 31 मिमी और मिथागर म्यूनिसिपल स्कूल क्षेत्र में 29 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।  पश्चिमी उपनगरों में आनंद नगर म्यूनिसिपल स्कूल क्षेत्र में 32 मिमी, दिंडोशी वसाहत और दहिसर में 30 मिमी तथा मालवणी फायर स्टेशन क्षेत्र में 26 मिमी बारिश हुई. वहीं शहर क्षेत्र में काला किला धारावी में 19 मिमी, आदर्श नगर स्कूल वर्ली में 16 मिमी तथा दादर और वर्ली फायर स्टेशन क्षेत्र में 15 मिमी बारिश दर्ज की गई. मिटी नदी का जलस्तर भी बढ़कर 1.83 मीटर तक पहुंच गया है, जिस पर प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है।  मुंबई में कितनी बारिश हुई? बीएमसी के बारिश के आंकड़ों के अनुसार, 23 जून को सुबह 8:00 बजे से रात 11:00 बजे के बीच शहर … Read more

लेट हो रहा मानसून, लेकिन बारिश बनी राहत! पंजाब में पारा लुढ़का, अगले चार दिन यलो अलर्ट

अमृतसर  पंजाब में भले ही मानसून आने में देरी हो रही है, लेकिन कईं जगहों पर हुई हल्की बारिश से भीषण गरमी से कुछ राहत मिली है। सोमवार को पंजाब के तापमान में 3.6 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। इससे अब पारा सामान्य से 2.3 डिग्री नीचे पहुंच गया है। सबसे अधिक 38.6 डिग्री का पारा बठिंडा का दर्ज किया गया।  मौसम विभाग ने अगले चार दिनों के लिए पंजाब में यलो अलर्ट जारी कर दिया है। इसके तहत पंजाब में गरज-चमक के साथ 40 से 50 किलोमीटर की रफ्तार से तेज हवाएं चलेंगी और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। विभाग ने मंगलवार व बुधवार के लिए पंजाब के 14 जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है।  इनमें पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन, होशियारपुर, नवांशहर, कपूरथला, जालंधर, लुधियाना, संगरूर, फतेहगढ़ साहिब, रूपनगर, पटियाला और मोहाली शामिल हैं। इसके बाद 25 जून से पश्चिमी विक्षोभ मजबूत होगा और दो दिन पंजाब के सभी जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश पड़ेगी। पंजाब के न्यूनतम तापमान में भी 1.5 डिग्री की कमी दर्ज की गई। यह सामान्य. से 1.7 डिग्री नीचे हो गया है। सबसे कम 23.2 डिग्री का न्यूनतम पारा पठानकोट का दर्ज किया गया। जून के आखिरी हफ्ते में दस्तक दे सकता है मानसून  मौसम विभाग के चंडीगढ़ केंद्र के डायरेक्टर सुरिंदर पाल के मुताबिक मानसून पूर्वी भारत में तेजी से आगे बढ़ चुका है और अब उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ रहा है। अगर स्थितियां अनुकूल बनी रहीं और इसी तरह से मानसून आगे बढ़ता रहा, तो जून के आखिरी हफ्ते में 29 या फिर 30 जून को यह पंजाब में प्रवेश कर सकता है। डायरेक्टर ने कहा कि पंजाब में 25 जून तक होने वाली बारिश पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से पड़ेगी। यह प्रि मानसून की बारिश नहीं है। गौरतलब है कि इससे पहले पंजाब में 20 से 25 जून के बीच मानसून के दस्तक देने की संभावना जताई गई थी।  अमृतसर का अधिकतम पारा 34.9 डिग्री (सामान्य से 3.2 डिग्री नीचे) लुधियाना का 34.2 डिग्री, पटियाला का 36.3 डिग्री, पठानकोट का 36.6 डिग्री, फाजिल्का का 36.0 डिग्री, होशियारपुर का 34.8 डिग्री, एसबीएस नगर का 31.8 डिग्री और रूपनगर का 36.8 डिग्री दर्ज किया गया। अमृतसर का न्यूनतम पारा 24.0 डिग्री, लुधियाना का 23.8 डिग्री, पटियाला का 26.7 डिग्री, बठिंडा का 25.5 डिग्री, फाजिल्का का 25.8 डिग्री, होशियारपुर का 24.7 डिग्री और रूपनगर का 25.8 दर्ज किया गया।

बारिश और तेज हवाओं से बदलेगा मौसम, कई जिलों में वज्रपात की चेतावनी

रांची  झारखंड में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं. भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार राज्य के अधिकांश हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक आसमान में बादल छाये रहने, हल्की से मध्यम वर्षा तथा गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने की संभावना है. मौसम विभाग ने 27 जून तक झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है. पंजाब से बिहार तक एक टर्फ सक्रिय है. झारखंड से तटीय आंध्र प्रदेश तक एक अन्य टर्फ भी बना हुआ है, जिससे राज्य में नमी बढ़ रही है. विभाग ने कहा है कि झारखंड, बिहार और ओडिशा के कुछ और हिस्सों में 23 जून के आसपास मॉनसून के आगे बढ़ने की संभावना है. दो से तीन डिग्री गिर सकता है पारा मौसम विभाग के अनुसार 25 जून तक राज्य में अधिकांश स्थानों पर बादल छाये रहेंगे और कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है. 22 और 23 जून के दौरान अधिकतम तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है. इसके बाद तापमान में फिर दो से तीन डिग्री की वृद्धि होने की संभावना जताई गई है. गुमला में सबसे ज्यादा बारिश हुई पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के विभिन्न हिस्सों में हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश हुई. सबसे अधिक बारिश चैनपुर (गुमला जिला) में 40.2 मिलीमीटर रिकॉर्ड की गई. इसके अलावा रांची में 35.6 मिलीमीटर, बोकारो में 35.5 मिलीमीटर और नामकुम में 23.5 मिलीमीटर बारिश हुई. आज तेज हवा और वज्रपात का अलर्ट 22 जून को दक्षिणी (कोल्हान) और निकटवर्ती मध्य (राजधानी और आसपास) जिलों में तेज हवा और वज्रपात की चेतावनी जारी की गई है. 23 से 27 जून तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में गरज-चमक, वज्रपात और 40-50 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना बनी रहेगी.

मुंबई में मॉनसून का कहर! अंधेरी सबवे पानी में डूबा, सड़कों पर जलभराव; IMD ने दी चेतावनी

 मुंबई महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने दस्तक दे दी है. सोमवार सुबह से जारी बारिश के बीच कई इलाकों में जलभराव की खबरें सामने आ रही हैं. अंधेरी सबवे में पानी भर गया है. वहीं, कई सड़कों पर भी पानी ही पानी दिखाई दे रहा है।  भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 22 जून को शहर में बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है. मौसम विभाग के मुताबिक, बीते दिन यानी रविवार को शहर के कई इलाकों में सीजन की पहली अच्छी बारिश दर्ज की गई है. मौसम विभाग ने आज भी आंधी-बारिश की चेतावनी दी है।    मौसम विभाग के अनुसार, इस महीने की शुरुआत में मॉनसून दक्षिण कोंकण तक पहुंच गया था, लेकिन पिछले कुछ दिनों से मॉनसून सोलापुर के पास रुका हुआ था. महाराष्ट्र में एक बार फिर मॉनसून एक्टिव हुआ है लेकिन रफ्तार अभी धीमी है. बता दें कि मुंबई में हर साल मॉनसून में मूसलाधार बारिश होती है लेकिन इस बार मॉनसून ने अभी तक अच्छी रफ्तार नहीं पकड़ी है।    IMD के अनुसार, मुंबई और आसपास के इलाकों में आज पूरे दिन बारिश की गतिविधियां जारी रहेंगी. कुछ जगहों पर गरज और बिजली चमकने के भी आसार हैं. मौसम विभाग ने मुंबई में आज येलो अलर्ट जारी किया है, जिसका मतलब है कि मौसम खराब रह सकता है, लेकिन बहुत ज्यादा खतरा नहीं है।  मौसम विभाग के अनुसार, मुंबई के ऊपर कुछ बादल छाए हुए हैं. हालांकि, महाराष्ट्र के बाकी हिस्सों में अभी मॉनसून की अच्छी बारिश नहीं हुई है. मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में ही बारिश की गतिविधियां देखी जा रही हैं।  मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मॉनसून की शुरुआत इस बार थोड़ी देरी से हुई है. लेकिन अब हवाओं में नमी बढ़ने से बारिश शुरू हो गई है. मुंबई के आसमान में सुबह से ही बादल छाए हुए हैं. जबकि कई इलाकों में हल्की बारिश भी हो रही है. वहीं, कुछ जगहों पर तेज हवाएं चल रही हैं।  इस बीच मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने अलर्ट है. मॉनसून की बारिश के दौरान निचले इलाकों में पानी भरने की समस्या से निपटने के लिए पंपिंग मशीनें चेक की जा रही हैं. ट्रैफिक पुलिस को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि लोगों को बारिश से होने वाले ट्रैफिक जाम से ना जूझना पड़े।  मॉनसून की बारिश किसानों के लिए अच्छी खबर है. महाराष्ट्र के कई जिलों में खरीफ फसलों की बुवाई शुरू हो सकेगी. मौसम विभाग ने जानकारी दी कि अगले कुछ दिनों में मॉनसून और मजबूत हो सकता है. पूरे महाराष्ट्र में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है। 

उत्तर भारत में गर्मी से राहत की तैयारी, IMD ने बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया

नई दिल्ली यूपी समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में गर्मी पड़ रही है। लोग बेसब्री से मॉनसून का इंतजार कर रहे हैं। इस बीच, मॉनसून पर खुशखबरी सामने आई है कि 23 जून को यह कई राज्यों में पहुंचने वाला है। मौसम विभाग ने बताया है कि महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में यह 23 को पहुंच जाएगा। यानी कि इन राज्यों में पड़ रही गर्मी से राहत मिलेगी। इसके अलावा, सब हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, पूर्वोत्तर भारत में 21 जून तक बहुत भारी बारिश होगी। वहीं, कोंकण, गोवा, मध्य महाराष्ट्र में आज और पूर्वी उत्तर प्रदेश, विदर्भ में 25 जून, बिहार, तेलंगाना में 21 जून तक हीटवेव चलेगी। उसके बाद भारी गर्मी से राहत मिलने की संभावना है। मध्य और पूर्वी भारत में आज कई राज्यों में आंधी तूफान चलने की चेतावनी जारी की गई है। उत्तर भारत के कुछ राज्यों में बारिश का अलर्ट है। जम्मू कश्मीर, लद्दाख में 20-22 जून के बीच बारिश होगी। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड में 20-26 जून के बीच बरसात होगी। हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब में 20-23 जून, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 20 जून, 26 जून, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 25-26 जून के बीच बारिश होगी। पश्चिमी राजस्थान में 20-24 जून, पूर्वी राजस्थान में 20-26 जून के बीच बारिश देखने को मिलेगी। हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब में 20-23 जून के बीच तेज स्पीड से आंधी तूफान और बिजली कड़कने का अलर्ट है। इसके अलावा, पूर्वी राजस्थान, पश्चिमी राजस्थान में 20 जून को आंधी चलने वाली है।जम्मू कश्मीर, लद्दाख में 20-21 जून को ओले गिरेंगे। मध्य भारत की बात करें तो छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश, विदर्भ, पश्चिमी मध्य प्रदेश में 20-26 जून के बीच बारिश होगी। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 21-24 जून, पूर्वी मध्य प्रदेश, विदर्भ में 20-24 जून, छत्तीसगढ़ में 20-26 जून के बीच बारिश, आंधी, तेज हवाओं का अलर्ट है। पूर्वी भारत की बात करें तो अंडमान और निकोबार द्वीप, सब हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम में 20-26 जून, गंगीय पश्चिम बंगाल में 20-25 जून, ओडिशा में 20-21 जून के बीच बरसात देखने को मिलने वाली है। गंगीय पश्चिम बंगाल में 26 जून, बिहार, झारखंड में 20-26 जून, ओडिशा में 22-26 जून के बीच बरसात होगी। वहीं, अंडमान और निकोबार द्वीप में 20-26 जून, सब हिमालयी पश्चिम बंगाल में 20 जून, गंगीय पश्चिम बंगाल में 20-21 जून, झारखंड में 22-26 जून, बिहार में 20-22 जून, 25-26 जून, ओडिशा में 22-24 जून को बारिश, आंधी तूफान चलेगा। पूर्वोत्तर भारत की बात करें तो अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में 20-26 जून को बारिश होगी। अरुणाचल प्रदेश में 20-24 जून, असम, मेघालय में 23-26 जून, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में 20-23 जून में बहुत भारी बारिश होगी।

MP Weather Update: बारिश से पहले बढ़ी बेचैनी, उमस ने किया बेहाल; मौसम विभाग ने दी अहम चेतावनी

भोपाल  देशभर में भीषण गर्मी से परेशान लोग बड़ी शिद्दत से दक्षिण-पश्चिम मानसून का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, पिछले कुछ दिनों से मानसून की प्रगति में एक 'अस्थायी ठहराव' देखा जा रहा है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार 18 जून 2026 तक मानसून की उत्तरी सीमा हरनाई, सोलापुर, हैदराबाद, रांची और मुजफ्फरपुर पर ही टिकी हुई है। आखिर वातावरण में नमी बढ़ने के बावजूद मानसून की रफ्तार क्यों थम गई है और मध्यप्रदेश में इसका क्या असर होने वाला है, आइए विस्तार से समझते हैं। मध्यप्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून लगातार आगे बढ़ रहा है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के कई जिलों में गरज-चमक, बारिश और 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून की उत्तरी सीमा प्रदेश के कई हिस्सों को कवर कर चुकी है और आने वाले 4-5 दिनों में इसके और आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। क्यों थम गई मानसून की रफ्तार? मौसम वैज्ञानिक शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, मानसून की गति धीमी होने के पीछे सबसे बड़ा कारण बंगाल की खाड़ी का खामोश होना है। इस समय खाड़ी में कोई मजबूत निम्न दाब क्षेत्र नहीं बन पा रहा है, जो मानसूनी हवाओं को आगे धकेलने के लिए ऊर्जा देता है। इसके अलावा अन्य प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:     जेट स्ट्रीम का प्रभाव उपोष्ण पश्चिमी जेट का असर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।     प्रशांत महासागर में समुद्री सतह का तापमान सामान्य से अधिक है और साल के उत्तरार्ध में अल नीनो परिस्थितियां बनने की संभावना है।     वहीं मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन भी फिलहाल हिंद महासागर में मानसून को सहारा नहीं दे पा रहा है।     सिस्टम की कमी: मध्य भारत में फिलहाल किसी मजबूत चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) का अभाव है। मध्यप्रदेश में प्री-मानसून ने पकड़ी भारी रफ्तार भले ही मानसून की आधिकारिक एंट्री में थोड़ा ठहराव आया हो, लेकिन मध्यप्रदेश में मानसूनी सक्रियता तेजी से बढ़ रही है। प्रदेश में उमस का ग्राफ अचानक बहुत ऊपर चला गया है, जो इस बात का सीधा संकेत है कि मानसून की दस्तक अब ज्यादा दूर नहीं है। शाम के समय दर्ज की गई सापेक्षिक आर्द्रता के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं     बैतूल: 90 प्रतिशत     रायसेन: 77 प्रतिशत     पचमढ़ी: 73 प्रतिशत     भोपाल: 64 प्रतिशत खजुराहो-नौगांव में पारा 41 पार, पर तपन हुई कम वातावरण में बादलों और नमी की मौजूदगी के कारण राज्य के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य के आसपास या उससे नीचे आ गया है। पूर्वी मध्यप्रदेश में खजुराहो 41.4°C और नौगांव 41.0°C सबसे गर्म दर्ज किए गए, जबकि पश्चिमी हिस्से में दतिया 41.2°C में तेज गर्मी रही। हालांकि, नमी बढ़ने से रातें अब भी गर्म बनी हुई हैं, जहां खजुराहो में न्यूनतम तापमान 28.0°C और सतना में 27.9°C दर्ज किया गया। शैलेन्द्र कुमार नायक, मौसम, जलवायु एवं पर्यावरण विश्लेषक, भोपाल पिछले 24 घंटों में कहां कितनी हुई बारिश? सिवनी: 22.6 मिमी श्योपुर: 20.4 मिमी बैतूल: 16.6 मिमी रीवा: 13.0 मिमी राजगढ़: 13.0 मिमी भोपाल: 14.0 मिमी सतना: 12.0 मिमी सागर: 8.7 मिमी अगले 2 से 3 दिनों के लिए मौसम विभाग का अलर्ट मौसम विश्लेषक शैलेंद्र नायक के अनुसार, इसे 'ब्रेक मानसून' कहना गलत होगा, यह सिर्फ एक छोटा सा विराम है। मध्यप्रदेश में मानसून के स्वागत के लिए माहौल पूरी तरह अनुकूल हो चुका है। अगले 48 से 72 घंटों के भीतर प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने और वर्षा की गतिविधियों में भारी बढ़ोतरी होने की संभावना है। जैसे ही बंगाल की खाड़ी या विदर्भ के ऊपर कोई चक्रवाती घेरा मजबूत होगा, मानसून पूरी ताकत से एमपी में दाखिल हो जाएगा। इन जिलों में तेज बारिश और आंधी का अलर्ट मौसम विभाग ने भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, रतलाम, उज्जैन, देवास, शाजापुर, आगर-मालवा, इंदौर, नीमच, मंदसौर, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुरकलां, अनूपपुर, डिंडौरी, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी और पन्ना समेत कई जिलों में गरज-चमक और बारिश की चेतावनी जारी की है।     प्रदेश में मानसून की गतिविधियां तेज होने लगी हैं।     भोपाल सहित कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना।     कुछ जिलों में 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।     अगले 2 दिनों में दिन के तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट के आसार।     किसानों और आम नागरिकों को मौसम विभाग ने सतर्क रहने की सलाह दी है।

Monsoon 2026 Update: मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक तय, कई जिलों में बारिश और आंधी का अलर्ट

भोपाल  मध्य प्रदेश में मौसम ने फिर करवट ली है। IMD ने अगले 5 दिनों के लिए प्रदेश के कई जिलों में गरज-चमक, बारिश, वज्रपात और 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून लगातार आगे बढ़ रहा है और उसके प्रभाव से प्रदेश में व्यापक वर्षा गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। MP में मानसून का इंतजार अब अंतिम चरण में दिखाई दे रहा है। आईएमडी के अनुसार सोमवार को प्रदेश का वातावरण तेजी से मानसूनी स्वरूप ग्रहण कर रहा है। रात के तापमान में गिरावट, हवा में बढ़ती नमी और अधिकांश क्षेत्रों में हो रही बारिश संकेत है कि मानसून के आगमन के लिए परिस्थितियां अनुकूल बन रही हैं। प्रदेश के अधिकांश जिलों में न्यूनतम तापमान सामान्य से कम दर्ज किया गया। राजधानी भोपाल में न्यूनतम तापमान 20.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से लगभग 5 डिग्री कम है। राजगढ़, दमोह, शिवपुरी और ग्वालियर जैसे जिलों में भी रात का तापमान सामान्य से 3 से 4 डिग्री नीचे दर्ज हुआ। यह स्थिति बताती है कि बादलों और नमी की उपस्थिति के कारण वातावरण में शीतलता बनी हुई है। शिवपुरी में सबसे अधिक बारिश दर्ज पिछले 24 घंटों में शिवपुरी में 20.1 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो प्रदेश में सर्वाधिक रही। इसके अलावा मालांजखंड, ग्वालियर, जबलपुर और गुना में भी बारिश रिकॉर्ड की गई। हालांकि वर्षा अभी पूरे प्रदेश में एक समान नहीं हुई है, लेकिन यह स्पष्ट संकेत है कि वातावरण में पर्याप्त नमी और अस्थिरता मौजूद है।     अगले 5 दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और आंधी की संभावना।     कुछ जिलों में 50-60 किमी/घंटा की रफ्तार से चल सकती हैं तेज हवाएं।     भोपाल, विदिशा, रायसेन, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा समेत कई जिले अलर्ट पर।     ग्वालियर, चंबल, सागर और रीवा संभाग के कई जिलों में भी मौसम बदलेगा।     मानसून महाराष्ट्र, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में आगे बढ़ चुका है। प्रदेश के किन इलाकों में रहेगा ज्यादा असर मौसम विभाग के अनुसार 16 से 20 जून के बीच भोपाल, विदिशा, रायसेन, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, जबलपुर, डिंडोरी, उमरिया, कटनी, शहडोल, अनूपपुर, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, दमोह, सागर और आसपास के जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। दिन-रात के तापमान में 2 से 5 डिग्री गिरावट बारिश की गतिविधियों के चलते प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान में 2 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है। कई जिलों में मौसम सुहावना बना हुआ है। खरीफ फसलों के लिए वरदान साबित होगी बारिश मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यदि अगले कुछ दिनों तक समुद्री नमी का प्रवाह इसी तरह बना रहता है तो मध्यप्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मानसून का तेजी से विस्तार हो सकता है। किसानों से लेकर आम नागरिकों तक सभी की निगाहें अब उस पहली व्यापक मानसूनी बारिश पर टिकी हैं, जो गर्मी से राहत देने के साथ खरीफ फसलों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। मौसम विभाग की सलाह     खराब मौसम के दौरान पेड़ों और कमजोर संरचनाओं से दूर रहें।     बिजली चमकने पर खुले मैदान में न जाएं।     किसान फसलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक इंतजाम करें।     तेज हवा और बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें।