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दहलीज पर ठहरा मानसून, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कब बरसेंगे बादल? IMD ने दिया अपडेट

भोपाल / रायपुर   दक्षिण-पश्चिम मानसून (Monsoon 2026) की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ गई है. दक्षिण भारत से आगे बढ़ने के बाद महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के आसपास ठहर गया है, तो वहीं पूर्वोत्तर राज्यों को कवर करने के बाद मानसून बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में रुक गया है. मानसूनी गतिविधियां कमजोर होने से मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत 16 राज्यों में बारिश का इंतजार बढ़ गया है।  मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ वालों को करना होगा मानसून का इंतजार मौसम विभाग के अनुसार, 13 जून 2026 तक केरलम, कर्नाटक, गोवा, तमिलनाडू, महाराष्ट्र, आंध प्रदेश, तेलंगाना, मणिपुर, त्रिपुरा, नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, असम, मेघालय, सिक्किम, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और ओडिशा तक मानसून पहुंच चुका है. वहीं छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, लद्दाख, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश,जम्मू खस्वीर,पंजाब, हरियाणा, दिल्ली के लोगों को अभी थोड़ा और इंतेजार करना होगा।   छत्तीसगढ़ की दहलीज पर अटका मानसून बता दें कि मानसून की रफ्तार फिलहाल छत्तीसगढ़ की दहलीज पर आकर अटक गया है. इधर, मौसम विभाग ने बताया कि 15 जून 2026 को दक्षिण-पश्चिम मॉनसून आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के बचे हुए हिस्सों- तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ गया है।  मौसम विभाग ने बताई संभावित तारीख मौसम विभाग ने बताया कि अगले 4-5 दिनों के दौरान दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के मध्य अरब सागर, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के बचे हुए हिस्सों और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ेगी. बता दें कि छत्तीसगढ़ में आमतौर पर मानसून की दस्तक 13 जून और मध्य प्रदेश में 15 जून के आसपास हो जाती है, लेकिन इस मानसूनी गतिविधियां कमजोर होने के कारण इसकी रफ्तार थम गई है. मौसम विभाग की माने तो मध्य प्रदेश में 18-19 जून को दक्षिण-पश्चिम मानसून दस्तक दे सकता है. हालांकि दोनों राज्यों में प्री मानसून एक्टिव है, जिसके चलते लगातार बारिश हो रही है।  MP-छत्तीसगढ़ में प्री मानसून एक्टिव इस बीच मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है. छत्तीसगढ़ में अगले पांच दिनों तक प्रदेश के कई स्थानों में तेज हवा के साथ हल्की बारिश की संभावना है. कई जगहों पर 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी भी चल सकता है. वहीं मध्य प्रदेश में 30 से ज्यादा जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. राजधानी भोपाल, सागर, रायसेन, सीहोर में तेज बारिश होगी, जिससे मौसम सुहाना रहेगा. हालांकि कई जिलों में तेज धूप रहेगी। 

मॉनसून की रफ्तार पर ब्रेक! भारत के बड़े हिस्से में सूखे जैसे हालात, सैटेलाइट इमेज ने बढ़ाई टेंशन

 नई दिल्ली जून का महीना आधा बीत चुका है, लेकिन भारत की जीवनरेखा कहे जाने वाले दक्षिण-पश्चिम मॉनसून को लेकर एक बेहद हैरान और डराने वाली तस्वीर सामने आई है. सैटेलाइट इमेज और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के हालिया आंकड़ों से पता चला है कि देश के बड़े हिस्से में मॉनसून अचानक बेहद कमजोर हो गया है. अंतरिक्ष से ली गई तस्वीरों में मॉनसून का बादलों वाला पारंपरिक रूप पूरी तरह गायब नजर आ रहा है।  हालात इतने गंभीर हैं कि जून के शुरुआती दो हफ्तों में ही देश भर में बारिश का आंकड़ा सामान्य से काफी नीचे गिर गया है, जिससे खरीफ फसलों की बुआई और पानी की उपलब्धता पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, समुद्र में नमी की कोई कमी नहीं है, लेकिन हवा के एक अजीब बर्ताव ने मॉनसून की रफ्तार को पूरी तरह ब्रेक लगा दिया है।  सैटेलाइट तस्वीरों में गायब दिखे बादल  मौसम विभाग (IMD) द्वारा 4 जून से 15 जून के बीच जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में देश भर में केवल 19.2 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि सामान्य तौर पर इस दौरान 53.7 मिमी बारिश होनी चाहिए थी. इसका सीधा मतलब यह है कि देश इस समय 64% के भारी घाटे का सामना कर रहा है।  आईएमडी के रेनफॉल डिपार्चर मैप में मध्य, दक्षिणी और पूर्वी भारत के विशाल हिस्से पीले और लाल रंगों में रंगे हुए हैं, जो सूखे जैसे गंभीर हालात को दर्शाते हैं. इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात 15 जून को भारत के INSAT-3DS सैटेलाइट से ली गई तस्वीरें हैं. आमतौर पर इस मौसम में भारत का जो नक्शा बादलों की घनी सफेद चादर से ढका रहता था, वह इस बार प्रायद्वीपीय और मध्य भारत में बिल्कुल साफ और सूखा दिखाई दे रहा है।  आखिर साल 2026 में क्यों हांफ रहा है भारतीय मॉनसून? मौसम वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मॉनसून ने कुछ ही दिन पहले कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में सही समय पर दस्तक दे दी थी, तो अचानक यह गायब कैसे हो गया? विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या समुद्र के तापमान या पानी की कमी के कारण नहीं है, बल्कि यह धरती से कई किलोमीटर ऊपर वायुमंडल में चल रही हवाओं की आपसी जंग का नतीजा है।  इस समय आसमान की ऊपरी सतह पर बहने वाली 'वेस्टरली जेट स्ट्रीम' (पश्चिमी हवाओं का प्रवाह) अपनी सामान्य जगह से बहुत ज्यादा दक्षिण की ओर खिसक आई है. यह असामान्य बदलाव मॉनसून के सबसे मुख्य इंजन यानी 'ईस्टरली जेट' (पूर्वी हवाओं) के रास्ते में रुकावट बन गया है।  हवाओं की ऊपरी जंग ने रोका बादलों का बनना सामान्य परिस्थितियों में, ऊपरी वायुमंडल में बहने वाली ईस्टरली जेट स्ट्रीम भारत के ऊपर हवा को ऊपर की ओर खींचती है, जिससे घने बादल बनते हैं और पूरे उपमहाद्वीप में झमाझम बारिश होती है. लेकिन इस बार शक्तिशाली पश्चिमी हवाएं इस पूरी प्रक्रिया को दबा रही हैं. नतीजा यह हो रहा है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में भरपूर नमी और पानी वाले बादल मौजूद होने के बावजूद, वे भारत की मुख्य भूमि पर बरस नहीं पा रहे हैं।  हवा का यह ऊपरी दबाव बादलों को बनने और टिकने ही नहीं दे रहा है. यही वजह है कि मॉनसून कागजों और नक्शों पर तो आगे बढ़ गया है, लेकिन जमीन पर बूंद-बूंद बारिश के लिए लोग तरस रहे हैं. मौसम वैज्ञानिक इसे मॉनसून का पूरी तरह खत्म होना नहीं, बल्कि ऊपरी वायुमंडलीय गतिकी के कारण आया एक बड़ा 'मॉनसून पॉज' (मॉनसून का ठहरना) मान रहे हैं।  क्या आने वाले दिनों में सुधरेंगे हालात? इस भीषण गर्मी और सूखे के बीच राहत की एकमात्र बात यह है कि मौसम के पूर्वानुमान मॉडल संकेत दे रहे हैं कि यह संकट स्थाई नहीं है. मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस सप्ताह के अंत तक पश्चिमी जेट स्ट्रीम का यह अजीबोगरीब पैटर्न धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगेगा. जैसे ही यह पश्चिमी बाधा हटेगी, मॉनसून फिर एक्टिव होगा।  उम्मीद जताई जा रही है कि जून के आखिरी हफ्तों में हवाओं का रुख बदलेगा और मध्य तथा दक्षिण भारत के उन हिस्सों में व्यापक बारिश का दौर फिर से शुरू होगा, जो आमतौर पर इस सीजन की पहचान होते हैं. तब तक पूरे देश को मॉनसून की इस दूसरी पारी का इंतजार करना होगा। 

Monsoon Pattern Change: जून-जुलाई में कमजोर पड़ रहा मानसून, छत्तीसगढ़ में बारिश का नया ट्रेंड सामने आया

रायपुर  छत्तीसगढ़ में सुकमा और दंतेवाड़ा के किसान बारिश ज्यादा होने से परेशान है। जबकि जशपुर और बलरामपुर के किसान बारिश कम होने से चिंता में है। रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर के किसान हर साल आसमान देखकर यही सोचते हैं कि इस बार जून साथ देगा या नहीं। पिछले 40 से 50 साल के बारिश के आंकड़े बताते हैं कि छत्तीसगढ़ में मानसून अब पहले जैसा नहीं रहा। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में उसकी चाल बदल रही है। बस्तर में बारिश बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं, जबकि सरगुजा संभाग के कई जिलों में बारिश घट रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि खेती की शुरुआत तय करने वाला जून अब सबसे ज्यादा अनिश्चित महीना बनता जा रहा है। ये केवल मौसम की कहानी नहीं है। इसका मतलब है कि किसान कब बुआई करेगा, तालाब में कितना पानी भरेगा, शहरों को कितना पानी मिलेगा, भूजल कितना रिचार्ज होगा और गर्मी के दिनों में पानी की किल्लत कितनी बढ़ेगी। यानी बदलता मानसून सीधे लोगों की जिंदगी से जुड़ा हुआ मामला है। दिलचस्प बात यह है कि यह बदलाव ऐसे समय में दिख रहा है जब छत्तीसगढ़ एक और मानसून सीजन के मुहाने पर खड़ा है। इस साल भी किसानों की नजर पहली अच्छी बारिश पर टिकी है। मौसम विभाग सामान्य मानसून की संभावना जता रहा है, लेकिन पिछले दशकों के आंकड़े बताते हैं कि अब केवल यह जानना काफी नहीं है कि कितनी बारिश होगी। असली सवाल यह है कि बारिश कब होगी और कहां होगी। पहले पूरी तस्वीर समझिए छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है। राज्य की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है। लाखों किसान आज भी बारिश के भरोसे खेती करते हैं। प्रदेश में सिंचाई का दायरा बढ़ा जरूर है, लेकिन अब भी बड़ा हिस्सा वर्षा आधारित खेती पर टिका है। यही वजह है कि मानसून यहां सिर्फ मौसम नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था का इंजन है। बारिश अच्छी हुई तो फसल अच्छी होगी, बाजार चलेगा, गांवों में नगदी आएगी। बारिश बिगड़ी तो असर खेत से लेकर मंडी और घर की रसोई तक दिखाई देता है। पिछले कई दशकों के आंकड़ों का एनालिसिस बताता है कि राज्य में औसत बारिश भले बहुत ज्यादा नहीं बदली हो, लेकिन उसका पैटर्न बदल गया है। यही सबसे बड़ा संकेत है। बस्तर भीग रहा, सरगुजा सूख रहा एक समय था जब पूरे छत्तीसगढ़ को एक जैसी बारिश वाला राज्य माना जाता था। अब तस्वीर बदल रही है। दक्षिण छत्तीसगढ़ यानी बस्तर संभाग के कई जिलों में बारिश बढ़ने का रुझान दिखाई देता है। सुकमा, नारायणपुर और कोंडागांव जैसे जिलों में लंबे समय के आंकड़े वर्षा बढ़ने की ओर इशारा करते हैं। सुकमा में बारिश बढ़ने का ट्रेंड राज्य में सबसे ज्यादा पाया गया है। इसके उलट सरगुजा, बलरामपुर, सूरजपुर और जशपुर जैसे जिलों में बारिश घटने का रुझान दिखाई देता है। जशपुर में गिरावट सबसे ज्यादा दर्ज की गई है। यानी एक तरफ राज्य का दक्षिणी हिस्सा ज्यादा पानी की ओर बढ़ रहा है, दूसरी तरफ उत्तरी हिस्सा कम बारिश की ओर बढ़ता दिख रहा है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) के मौसम वैज्ञानिकों द्वारा किया गया वर्षा का आकलन और लंबे समय के बारिश के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 50 सालों में छत्तीसगढ़ के अलग-अलग क्षेत्रों में मानसून के पैटर्न में बदलाव दर्ज किया गया है। यह बदलाव आने वाले सालों में जल प्रबंधन और खेती की रणनीति को पूरी तरह बदल सकता है। खेती की शुरुआत तय करने वाला जून सबसे ज्यादा अनिश्चित जून के महीने में खेत तैयार होते हैं। धान की नर्सरी डाली जाती है। बुआई की योजना बनती है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि यही महीना सबसे ज्यादा अनिश्चित होता जा रहा है। कुछ सालों में जून में अच्छी बारिश हुई। कुछ सालों में बारिश बहुत कम रही। यानी किसान के लिए सबसे बड़ा जोखिम सीजन की शुरुआत में ही खड़ा हो जाता है। यही वजह है कि कई बार किसान जल्दी बुआई कर देते हैं और बाद में बारिश रुक जाती है। दूसरी ओर कुछ सालों में मानसून देर से सक्रिय होता है और पूरा कृषि कैलेंडर पीछे खिसक जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में खेती की सबसे बड़ी चुनौती कुल बारिश नहीं, बल्कि जून की अनिश्चितता होगी। मानसून पीछे खिसक रहा है? आंकड़ों में एक और दिलचस्प पैटर्न दिखाई देता है। जून और जुलाई की बारिश में गिरावट के संकेत मिलते हैं, जबकि अगस्त और सितंबर में बढ़ोतरी का रुझान दिखाई देता है। सरल भाषा में समझें तो मानसून का वजन अब शुरुआती महीनों से हटकर बाद के महीनों की ओर जाता दिख रहा है। पहले किसान जून और जुलाई के भरोसे खेती शुरू करते थे। अब कई बार अगस्त और सितंबर ज्यादा सक्रिय नजर आते हैं। इस बदलाव का असर धान की फसल पर पड़ता है। शुरुआती समय में पर्याप्त पानी नहीं मिला तो पौध कमजोर होती है। वहीं कटाई के आसपास ज्यादा बारिश होने पर तैयार फसल को नुकसान हो सकता है। क्या कहते हैं मौसम एक्सपर्ट मौसम विज्ञान केंद्र, रायपुर की डायरेक्टर गायत्री वाणी के मुताबिक, मानसून के सीजन में सबसे ज्यादा बारिश जुलाई और अगस्त महीने में होती है। जून में बारिश को लेकर सबसे ज्यादा अनिश्चितता रहती है, क्योंकि यह पूरी तरह मानसून के प्रदेश में पहुंचने और उसकी प्रगति पर निर्भर करता है। सबसे ज्यादा बारिश कहां, सबसे कम कहां? छत्तीसगढ़ के अंदर भी बारिश का अंतर काफी बड़ा है। सुकमा आज भी राज्य का सबसे ज्यादा बारिश वाला जिला है। इसके बाद बस्तर, नारायणपुर, दंतेवाड़ा और बीजापुर आते हैं।दूसरी ओर दुर्ग, बलौदाबाजार, मुंगेली, कबीरधाम और बेमेतरा अपेक्षाकृत कम बारिश वाले जिलों में शामिल हैं। ज्यादा बारिश भी हमेशा अच्छी खबर नहीं आमतौर पर माना जाता है कि जहां ज्यादा बारिश होती है वहां किसानों को फायदा होता होगा, लेकिन ऐसा नहीं है। यदि 4 महीने में धीरे-धीरे बारिश हो तो खेती को फायदा मिलता है। लेकिन यदि कुछ दिनों में बहुत ज्यादा पानी गिर जाए तो उसका बड़ा हिस्सा बह जाता है। इससे खेतों में कटाव बढ़ता है। छोटी नदियां और नाले उफान पर आ जाते हैं। गांवों का संपर्क टूटता है। फसलें जलभराव से प्रभावित होती हैं। यानी समस्या सिर्फ कम … Read more

पूर्णिया से शुरू हुआ विस्तार, जल्द पटना तक पहुंचेगा मानसून

पटना दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने बिहार में दस्तक दे दी है। पूर्णिया के रास्ते गुरुवार को मॉनसून ने बिहार में प्रवेश लिया। मौसम विभाग के अनुसार कोसी और सीमांचल क्षेत्र के 7 जिलों में मॉनसून का प्रसार हो चुका है। इसके आगे बढ़ने की परिस्थितियां अनुकूल हैं। अगले एक-दो दिन तक इसका प्रसार थोड़ा धीमा हो सकता है, लेकिन इस सप्ताह के अंत तक यह बिहार के अधिकतर जिलों को कवर कर लेगा। पटना समेत अन्य जिलों के लोगों को मॉनसून का बेसब्री से इंतजार है। मौसम विभाग के अनुसार, बिहार में दस्तक देने के बाद मॉनसून कुछ हिस्सों में आगे बढ़ गया है। इसकी उत्तरी सीमा मधुबनी से होकर गुजर रही है। अगले 2-3 दिनों में इसके बिहार के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ने की संभावना है। इस साल मॉनसून ने समय से पहले ही एंट्री ली है। मॉनसून के बिहार में प्रवेश की सामान्य तारीख 13 से 15 जून होती है। हालांकि, इस साल 11 जून को ही मॉनसून बिहार पहुंच गया। पहले दिन 7 जिलों में हुआ मॉनसून का प्रसार पटना स्थित मौसम विज्ञान केंद्र ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि बिहार में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून का आगमन हो चुका है। इसका प्रसार किशनगंज, अररिया, सुपौल, पूर्णिया, कटिहार, मधेपुरा और मधुबनी जिलों में हो चुका है। पटना में कब पहुंचेगा मॉनसून? मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो आगामी 2-3 दिनों में मॉनसून के बिहार के शेष हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। इस सप्ताह के अंत तक मॉनसून के राजधानी पटना और दक्षिण बिहार के जिलों तक पहुंचने की पूरी संभावना नजर आ रही है। पूर्णिया में भारी बारिश से जलजमाव 24 घंटे में कहां-कितनी बारिश हुई? मॉनसून के आने से पहले ही उत्तर बिहार में भारी बारिश का दौर जारी है। बीते 24 घंटे के भीतर मिथिला, सीमांचल, कोसी, चंपारण क्षेत्र में झमाझम बारिश हुई। किशनगंज जिले के तैयबपुर में सर्वाधिक 148 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। सुपौल के सरायगढ़ भपटियाही में 106 मिमी, खगड़िया के बलतारा में 70 मिमी, समस्तीपुर के हसनपुर में 67.6 मिमी, मधुबनी के लौकही में 61.2 मिमी, पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर में 58 मिमी पानी गिरा। 12 जून को 10 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट मौसम विज्ञान केंद्र, पटना ने बिहार के 10 जिलों में शुक्रवार को भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इनमें किशनगंज, अररिया, सुपौल, मधुबनी, दरभंगा, सीतामढ़ी, शिवहर, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण और गोपालगंज जिले शामिल हैं। इसके अलावा अन्य जिलों में भी हल्के से मध्यम दर्जे की बरसात होने की संभावना है।

Monsoon Update: बिहार-झारखंड में जल्द होगी जोरदार बारिश, जानिए यूपी और दिल्ली में कब देगा दस्तक

भोपाल  मॉनसून ने 4 जून को केरल में दस्तक देने के बाद तेज रफ्तार बरकरार रखी है. वो अब तक 14 राज्यों के पार निकल गया है. भारत मौसम विभाग के अनुसार, मॉनसून अगले 3-4 दिनों में छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड और ओडिशा पहुंच सकता है.दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के और आगे बढ़ने के लिए हालात अनुकूल बने हुए हैं। अगले 3-4 दिनों में मॉनसून महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के बाकी हिस्सों, पश्चिम बंगाल के कुछ और हिस्सों और छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड और ओडिशा के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ेगा।  बुधवार को भारत मौसम विभाग ने ये पूर्वानुमान जारी किया. अगले 5-7 दिनों के दौरान पूर्वोत्तर भारत और उप हिमालयी क्षेत्र पश्चिम बंगाल में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश (7-20 सेमी) होने की संभावना है. साथ ही केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में भी भारी बारिश हो सकती है।  मॉनसून दिल्ली-यूपी कब पहुंचेगा मॉनसून ने मंगलवार को सभी उत्तर-पूर्व भारत के राज्यों को कवर कर लिया था.भारत मौसम विभाग की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, मॉनसून पिछले सात दिनों में पूर्वोत्तर राज्यों के साथ-साथ केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र और गोवा पहुंच चुका है. मॉनसून दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यो में 25 जून तक पहुंच सकता है. जबकि हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड समेत पहाड़ी राज्यों में मॉनसून जून के अंत तक या जुलाई में पहुंच सकता है।  दिल्ली, यूपी में कल से झमाझम बारिश मॉनसून अभी भले ही उत्तर भारत न पहुंचा हो, लेकिन दिल्ली, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में गुरुवार से दो दिन बारिश का अलर्ट है. मौसम विभाग का कहना है कि दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद समेत वेस्ट यूपी, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड में गुरुवार से बारिश देखने को मिल सकती है. दिल्ली में बारिश के साथ गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं. इस दौरान तेज हवाएं भी चलेंगी।  दिल्ली एनसीआर में पिछले हफ्ते भी दो दिन तेज बारिश देखने को मिली थी. जबकि मंगलवार रात को 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी आई थी. दिल्ली एनसीआर में 11-12 जून को पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से बारिश का अलर्ट है।  केरल में ऑरेंज अलर्ट मॉनसून सीजन के पहले हफ्ते में केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और बंगाल के कुछ क्षेत्रों में जबरदस्त बारिश हो रही है. केरल के अलपुझा और एर्नाकुलम जिले के लिए ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया गया है. केरल के कोल्लम, पथनमिट्टा, कोट्टायम, त्रिशूर, मल्लपुरम, कोझिकोड और कन्नूर जैसे जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है।  तेलंगाना भी भारी बारिश तेलंगाना के विकाराबाद, महबूबनगर, नारायणपेट और जोगुलांबा गडवाल में भी भारी बारिश हो रही है. हालांकि मौसम विभाग ने इस साल मजबूत अल नीनो की भविष्यवाणी की है, जो मॉनसूनी बारिश के लिए खतरा साबित हो सकता है. बारिश में कमी से जून-जुलाई के दौरान तापमान दो डिग्री तक ज्यादा रह सकता है। 

प्री-मानसून बारिश ने बदला मौसम का मिजाज, कुछ इलाकों में रिकॉर्ड बारिश, मौसम विभाग की चेतावनी बरकरार

भोपाल  मध्य प्रदेश में मानसून की आधिकारिक दस्तक अभी बाकी है, लेकिन प्री-मानसून गतिविधियां लगातार सक्रिय हैं। जून के पहले नौ दिनों में हुई बारिश ने कई जिलों में सामान्य आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया है। हालात यह हैं कि प्रदेश के 14 जिलों में अब तक 100 प्रतिशत से लेकर 672 प्रतिशत तक अधिक बारिश दर्ज की जा चुकी है। मौसम विभाग ने इस वर्ष प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा की संभावना जताई है, लेकिन मानसून पूर्व बारिश ने फिलहाल राहत और चुनौती दोनों हालात पैदा कर दिए हैं। 1 से 9 जून के बीच प्रदेश में औसतन आधा इंच से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है। बारिश के बीच गर्मी भी बरकरार एक ओर कई इलाकों में बारिश हो रही है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के कई हिस्सों में गर्मी का असर कम नहीं हुआ है। मंगलवार को खजुराहो सबसे गर्म रहा, जहां तापमान 46 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दतिया में 44 डिग्री और राजगढ़, रीवा व टीकमगढ़ में 43 डिग्री के आसपास तापमान रहा। प्रदेश के 26 शहरों में पारा 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और जबलपुर में भी तापमान 40 डिग्री के करीब रहा, जबकि ग्वालियर में 42.8 डिग्री दर्ज किया गया। निवाड़ी सबसे आगे, नीमच और भोपाल भी रिकॉर्ड सूची में बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो निवाड़ी में सामान्य 1.9 मिमी के मुकाबले 14.7 मिमी बारिश दर्ज हुई, जो 672 प्रतिशत अधिक है। नीमच में 493 प्रतिशत, आगर-मालवा में 385 प्रतिशत, श्योपुर में 346 प्रतिशत, मंदसौर में 334 प्रतिशत और भोपाल में 304 प्रतिशत अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है। इसके अलावा अलीराजपुर, अशोकनगर, देवास, हरदा, मुरैना, राजगढ़, सीहोर और शाजापुर में भी सामान्य से दोगुने से ज्यादा पानी गिर चुका है। आज 16 जिलों में बारिश के आसार मौसम विभाग ने बुधवार को बड़वानी, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, जबलपुर, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी और अनूपपुर में बारिश की संभावना जताई है। वहीं भोपाल समेत प्रदेश के कई अन्य जिलों में उमस और गर्मी का असर बना रह सकता है। बदला मौसम का मिजाज, लू की जगह ओलों का अलर्ट मौसम विभाग ने ताजा पूर्वानुमान में बड़ा बदलाव किया है। जिन जिलों में पहले 10 और 11 जून के लिए लू का अलर्ट जारी किया गया था, वहां अब 12 जून को ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है। मुरैना, भिंड, टीकमगढ़ और छतरपुर में ओले गिर सकते हैं। इसके अलावा प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तेज हवाओं के साथ बारिश होने के संकेत हैं।  

अगले 48 घंटे बेहद अहम! IMD की चेतावनी, कई राज्यों में मूसलाधार बारिश और मौसम का बड़ा बदलाव

नई दिल्ली देश में मौसम का रुख एक बार फिर पूरी तरह बदल चुका है. केरल में दस्तक देने के बाद मानसून ने महाराष्ट्र में अपनी मजबूत एंट्री कर ली है. यह एंट्री भले ही तय समय के आसपास हुई हो, लेकिन इसके असर ने पूरे देश को अलर्ट मोड पर ला दिया है. एक तरफ जहां किसानों के चेहरे पर राहत की उम्मीद दिख रही है, वहीं दूसरी तरफ कई राज्यों में मौसम विभाग की चेतावनियों ने चिंता बढ़ा दी है।  IMD के ताजा अपडेट के मुताबिक आने वाले दिनों में मानसून तेजी से आगे बढ़ेगा और कई राज्यों को अपनी चपेट में लेगा. अरब सागर से लेकर बंगाल की खाड़ी तक मौसम प्रणाली सक्रिय हो चुकी है, जिसका सीधा असर उत्तर, पूर्व और दक्षिण भारत में देखने को मिलेगा।  अल-नीनो की परिस्थितियों के बावजूद दक्षिण-पश्चिम मॉनसून मूसलाधार बारिश करवाता हुआ तेजी से आगे बढ़ रहा है। मॉनसून अब महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और पूर्वोत्तर के सभी राज्यों को कवर कर चुका है। मौसम विभाग ने कहा है कि आने वाले सात दिन कई राज्यों पर भारी पड़ सकते हैं। केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, सिक्किम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, नागालैंड, मेघालय और पश्चिम बंगाल के उप-हिमालयी क्षेत्रों में भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं IMD ने उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली में भी पश्चिमी विक्षोभ के असर और बारिश का अलर्ट जारी किया है। 11 से 12 जून तक उत्तर भारत में बारिश और ओलावृष्टि हो सकती है। इन राज्यों में होने वाली है मॉनसून की एंट्री मॉनसून अब तेजी से आगे बढ़ते हुए पूर्वोत्तर के राज्यों के बचे हुए हिस्से को कवर करने वाला है। वहीं दो से तीन दिन में ही यह ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल को भी पूरी तरह से कवर कर लेगा। रिपोर्ट के मुताबिक 5 जुलाई तक मॉनसून पूरे देश को कवर करेगा। महाराष्ट्र के कई हिस्सों में भी मॉनसून पहुंच चुका है और झमाझम बारिश हो रही है। पश्चिमी विक्षोभ कराएगा बारिश मौसम विभाग के अपडेट के मुताबिक पश्चिमी हिमालयी इलाके में सक्रिय होने वाला पश्चिमी विक्षोभ अगले तीन से चार दिन में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में भी बारिश करवाने वाला है। इन राज्यों में 9 से 14 जून तक हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इसके अलावा 10 से 14 जून के बीच पूर्वी उत्तर प्रदेश, दिल्ली, चंडीगढ़, हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी राजस्थान में भी बारिश हो सकती है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान में 11 और 12 जून को तेज हवाओँ के साथ बारिश हो सकती है। दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में 11 और 12 जून को धूलभरी आंधी चल सकती है। मौसम विभाग के मुताबिक हवाओँ की गति 50 से 60 किमी प्रतिघंटे तक पहुंचने की संभावना है। यूपी-बिहार का मौसम मौसम विभाग के मुताबिक 10 से 14 जून के बीच उत्तर प्रदेश में बारिश का दौर शुरू होगा। इसके अलावा मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 9 से 14 जून के बीच मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। 10 जून के बाद बिहार के पटना, सिवान, भागलपुर, मुंगेर जिलों में मध्यम बारिश हो सकती है। झारखंड, बिहार और गंगा के आसपास के क्षेत्रों में 10 से 15 जून के बीच आंधी के साथ तेज बारिश की संभावना है। दिल्ली का मौसम आईएमडी के अनुसार, हालांकि बारिश से कुछ स्थानों पर थोड़ी राहत मिली। सुबह साढ़े आठ बजे तक 24 घंटे की कुल वर्षा के आंकड़ों के अनुसार, केवल पालम और आयानगर में हल्की बारिश हुई लेकिन सुबह साढ़े आठ बजे से शाम साढ़े पांच बजे के बीच किसी भी वेधशाला में बारिश दर्ज नहीं की गई। आईएमडी के अनुसार, 10 जून तक अधिकतम तापमान धीरे-धीरे बढ़कर 43 डिग्री तक पहुंच सकता है, और उसके बाद 11 जून से आंधी की वजह से तापमान में गिरावट आ सकती है। देशभर में मौसम का सिस्टम एक्टिव, तेज हवाओं और बारिश का खतरा     मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार वर्तमान में कई चक्रवाती परिसंचरण अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय हैं. यही वजह है कि मौसम का मिजाज बेहद अस्थिर हो गया है. कहीं तेज धूप के बाद अचानक बारिश हो रही है तो कहीं आंधी-तूफान ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं।      अगले 2 से 3 दिनों में मानसून के और आगे बढ़ने की संभावना है. इसके बाद यह छत्तीसगढ़, ओडिशा, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम तक पहुंच सकता है.हवाओं की गति कई जगहों पर 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है, जिससे पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ गया है।  दिल्ली-NCR में मौसम का बदलाव और तेज हवाओं का असर दिल्ली-NCR में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है. 7 जून को आंशिक बादल छाए रहने के साथ तेज हवाओं और बारिश की संभावना जताई गई है. अधिकतम तापमान 38 से 40 डिग्री के बीच रह सकता है, लेकिन आंधी और बारिश के चलते शाम तक राहत मिल सकती है. मौसम विभाग ने यहां 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की चेतावनी दी है. कई इलाकों में अचानक मौसम बिगड़ सकता है, जिससे यातायात और जनजीवन प्रभावित होने की संभावना है।  उत्तर प्रदेश में मौसम का बदलता रुख और आंधी-तूफान का अलर्ट उत्तर प्रदेश में मौसम अगले कुछ दिनों तक काफी सक्रिय रहने वाला है. पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्सों में रुक-रुककर बारिश और गरज-चमक की स्थिति बनी रहेगी. 9 से 12 जून के बीच कई जिलों में तेज बारिश की संभावना है. IMD ने राज्य के कई जिलों में 70 से 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की चेतावनी दी है. लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, कानपुर और मेरठ जैसे शहरों में मौसम अचानक बदल सकता है. गर्मी और उमस के बीच यह बारिश कुछ राहत भी दे सकती है, लेकिन बिजली गिरने का खतरा बना रहेगा।  बिहार में मौसम का मिजाज और बारिश की गतिविधियां बिहार में 7 और 8 जून को मौसम काफी सक्रिय रहने वाला है. कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ आंधी-तूफान की स्थिति बन सकती है. पटना, गया, दरभंगा, पूर्णिया और भागलपुर जैसे जिलों में तेज हवाएं चलने की संभावना है. 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, … Read more

बारिश ने बढ़ाई रफ्तार, 12 राज्यों में मेहरबान हुआ मॉनसून; यूपी-बिहार में भी बदलेगा मौसम

नई दिल्ली दक्षिण-पश्चिम मॉनसून तेजी से आगे बढ़ रहा है और अब तक 12 राज्यों तक पहुंच चुका है। केरल से प्रवेश करने के बाद कर्नाटक, तमिलनाडू, आंध्र प्रदेश के अलावा पूर्वोत्तर के राज्यों में झमाझम बारिश शुरू हो गई है। वहीं महाराष्ट्र में भी मॉनसून का असर देखने को मिल रहा है। उत्तर भारत में इन दिनों हीटवेव का असर देखा जा रहा है। हलाांकि मौसम विभाग ने एक राहत की खबर सुनाई है। 11 जून से पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में भी पश्चिमी विक्षोभ ऐक्टिव हो सकता है। ऐसे में दिल्ली-यूपी समेत उत्तर भारत में भी बारिश का अनुमान है। राजस्थान में गिरे ओले राजस्थान के श्रीगंगानगर में धूलभरी आंधी के बाद बारिश शुरू हुई और फिर ओलावृष्टि होने लगी। मौसम विभाग के मुताबिक 8 जून को भी कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है। मध्य प्रदेश के इंदौर में भी तेज आंधी के साथ हल्की बारिश हुई है। करवट लेने वाला है मौसम दिल्ली एनसीआर में फिलहाल 9 और 10 जून को हीटवेव जारी रहने का अनुमान है। 10 जून से मौसम करवट ले सकता है। मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दो दिनों में ही दिल्ली एनसीआर का तापमान 45 डिग्री तक पहुंच सकता है। इन राज्यों में मूसलाधार बारिश मौसम विभाग के मुताबिक मॉनसून की वजह से कर्नाटक और केरल में बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। वहीं पूर्वोत्तर में भी झमाझम बारिश हो रही है। मॉनसून त्रिपुरा, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, असम और नगालैंड, मिजोरम तक पहुंच चुका है। यहां कई जगहों पर भारी बारिश और भूस्खलन की चेतावनी दी गई है। 5 जुलाई तक मॉनसून पूरे देश को कवर कर लेगा। अगले दो दिन कैसा रहेगा मौसम मौसम विभाग के मुताबिक अगले दो दिन पूर्वोत्तर और दक्षिण के राज्यों में बारिश जारी रहेगी। वहीं ओडिशा, बिहास, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी आंधी के साथ बारिश हो सकती है। राजस्थान के पूर्वी हिस्से में 40 से 50 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। 10 जून को केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल और अंडमान निकोबार में भी तूफान के साथ बारिश का अनुमान है। यूपी में कब होगी बारिश उत्तर प्रदेश में मौसम के दो रंग देखने को मिल रहे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हीटवेव का असर देखा जा रहा है। यहां 9 और 10 जून को भी लू जारी रहेगी। वहीं 10 जून के बाद बारिश की संभावना है। पूर्वी यूपी में आंधी के साथ हल्की बारिश हो सकती है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में 8 और 9 जून को हल्की बारिश हो सकती है। 11 जून को पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के बाद उत्तराखंड में बारिश की गितिविधियां तेज होंगी। बिहार का मौसम बिहार में भी 10 जून के बाद ही बारिश का अनुमान लागाय गया है। 11 जून को भी कई जगहों पर गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। गर्मी की लिहाज से फिलहाल दो दिन भारी बताए गए हैं। झारखंडा में 8 जून को भी 40 से 60 किमी की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है। साथ ही हल्की बारिश हो सकती है।

रायगढ़ में देर रात बरसे बादल, तेज हवाओं और बारिश के साथ मौसम विभाग की चेतावनी

रायपुर  दक्षिण-पश्चिम मानसून ने गुरुवार 4 जून को केरल में दस्तक दे दी है। सामान्य तौर पर मानसून 1 जून तक केरल पहुंच जाता है, लेकिन इस बार इसकी एंट्री तीन दिन देरी से हुई। छत्तीसगढ़ में फिलहाल मानसून नहीं पहुंचा है। हालांकि मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में गरज-चमक, बिजली गिरने और 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार पिछले 24 घंटे में प्रदेश के अधिकतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ, जबकि न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई। रायपुर और राजनांदगांव प्रदेश के सबसे गर्म शहर रहे, जहां अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। वहीं सबसे कम न्यूनतम तापमान 23.3 डिग्री सेल्सियस अंबिकापुर में दर्ज हुआ। प्रदेश में पिछले 24 घंटे के दौरान केवल हल्की बारिश दर्ज की गई। छोटेडोंगर, मैनपाट और अंबिकापुर में 10-10 मिमी वर्षा रिकॉर्ड हुई। अगले 24 घंटे कैसा रहेगा मौसम मौसम विभाग के मुताबिक आज (शुक्रवार) प्रदेश के कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। कई जिलों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। यही स्थिति अगले दो दिनों तक भी बनी रह सकती है। रायपुर में धूलभरी आंधी और बारिश के संकेत रायपुर में बादल छाए रहने, गरज-चमक, बारिश और धूलभरी आंधी की संभावना जताई गई है। शहर का अधिकतम तापमान 42 डिग्री और न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। अगले सप्ताह से शुरू हो सकती है मानसूनी एक्टिविटी हालांकि अभी छत्तीसगढ़ में मानसून की सीधी एंट्री नहीं हुई है, लेकिन बंगाल की खाड़ी में मानसून की तेज प्रगति को देखते हुए प्रदेश में अगले एक सप्ताह के दौरान प्री-मानसून गतिविधियों में और बढ़ोतरी हो सकती है।

मध्यप्रदेश में मौसम का प्रहार: देवास में बही कार, झाबुआ में झमाझम बारिश; जानिए कब आएगा मानसून

भोपाल  मध्य प्रदेश में मानसून की एंट्री भले ही न हुई हो, लेकिन प्री मानसून जमकर बरस रहा है। झाबुआ में शुक्रवार सुबह जोरदार बारिश हुई। धार, पीथमपुर और रतलाम में भी पानी गिरा। इससे पहले भोपाल में गुरुवार शाम करीब 70 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार के साथ आंधी चली और बारिश हुई। करीब 80 पेड़ या उनकी टहनियां सड़कों पर गिर गईं। इससे ट्रैफिक जाम के हालात बने। ओले भी गिरे। देवास में बारिश की वजह से एक कार रपटे से बह गई। हादसा मसुरिया-भंडारिया रोड पर हुआ। कार सवार चार लोगों ने कूदकर जान बचाई।मौसम केंद्र के मुताबिक, शुक्रवार को भोपाल-इंदौर समेत करीब 45 जिलों में मौसम बदला रहेगा। 60KM प्रतिघंटा तक की रफ्तार से आंधी चल सकती है। नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, श्योपुर, शिवपुरी, अशोक नगर, सागर और दमोह में तेज आंधी का ऑरेंज अलर्ट है।वहीं, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, धार, अलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, दतिया, मुरैना, भिंड, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, पांढुर्णा, सतना, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं तेज आंधी तो कहीं बारिश वाला मौसम बना रहेगा।  केरल में मानसून की आधिकारिक एंट्री के साथ ही मध्य प्रदेश में मौसम ने पूरी तरह करवट ले ली है. प्रदेश में मानसून भले अभी नहीं पहुंचा हो, लेकिन प्री-मानसून गतिविधियां जोर पकड़ चुकी हैं. पिछले दो दिनों से प्रदेश के बड़े हिस्से में तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का दौर जारी है. मौसम विभाग ने 5 जून को प्रदेश के 45 जिलों के लिए विशेष अलर्ट जारी किया है. कई इलाकों में 50 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना जताई गई है. राजधानी भोपाल समेत कई शहरों में मौसम का यह बदला हुआ मिजाज लोगों को गर्मी से राहत दे रहा है, लेकिन तेज हवाओं और पेड़ गिरने की घटनाओं ने प्रशासन की चिंता भी बढ़ा दी है।  इंदौर में 6.8 डिग्री लुढ़का पारा, कई शहरों में गिरावट मध्य प्रदेश में पिछले 24 घंटे के अंदर 20 से ज्यादा जिलों में तेज आंधी और बारिश का दौर रहा। रतलाम में सबसे ज्यादा डेढ़ इंच पानी गिर गया। भोपाल में पौन इंच और इंदौर-श्योपुर में आधा इंच से ज्यादा बारिश हुई। धार, गुना, नर्मदापुरम, शाजापुर, रायसेन, राजगढ़, उज्जैन, जबलपुर, छतरपुर, झाबुआ, सीहोर, मैहर समेत कई जिलों में भी बारिश रिकॉर्ड की गई है। आंधी-बारिश की वजह से रात के तापमान में खासी गिरावट आई है। भोपाल में पारा 20.2 डिग्री सेल्सियस रहा। इंदौर में एक ही रात में 6.8 डिग्री की गिरावट के बाद तापमान 19 डिग्री पर आ गया। ग्वालियर में 27.5 डिग्री और जबलपुर में 26.6 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। हिल स्टेशन पचमढ़ी सबसे ठंडा रहा। यहां न्यूनतम तापमान 18 डिग्री दर्ज किया गया। धार में 20.3 डिग्री, श्योपुर में 21 डिग्री, रतलाम में 21.2 डिग्री, दमोह में 22.5 डिग्री, शिवपुरी में 23 डिग्री, गुना में 23.5 डिग्री, खंडवा में 24 डिग्री, नर्मदापुरम में 24.1 डिग्री, नरसिंहपुर में 24.6 डिग्री और रायसेन में 24.8 डिग्री सेल्सियस टेम्परेचर रहा। केरल पहुंचा मानसून, एमपी में 20 जून तक आने की संभावना मौसम विभाग के अनुसार, इस साल मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक 5 से 7 दिन लेट हो सकती है। प्रदेश में मानसून के एंटर होने की सामान्य तारीख 15 जून है। दक्षिणी हिस्से से मानसून एमपी में दस्तक देता है। साल 2025 में 1 दिन बाद यानी 16 जून को मानसून एंटर हो गया था, जबकि विदाई 15 अक्टूबर तक हुई थी। सामान्यत: केरल में आने के 15 दिन बाद एमपी में भी मानसून दस्तक दे देता है। इस वजह से इस बार प्रदेश में मानसून आने की तारीख 20 से 22 जून बताई जा रही है। केरल में 4 जून को ही मानसून ने दस्तक दी है। गुरुवार शाम भोपाल में तेज आंधी और बारिश ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया. करीब 70 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चली हवाओं के कारण शहर में लगभग 80 पेड़ और उनकी टहनियां सड़कों पर गिर गईं. कई इलाकों में ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी. शाजापुर, सीहोर, इछावर और शुजालपुर में भी तेज बारिश और ओलावृष्टि दर्ज की गई. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्तमान में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती परिसंचरण तंत्र के कारण अगले चार दिनों तक प्रदेश में मौसम का यही रुख बना रह सकता है. तापमान में भी 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज होने की संभावना है।  अगले चार दिन तक बना रहेगा मौसम का असर मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में फिलहाल प्री-मानसून सिस्टम सक्रिय है। ट्रफ लाइन और पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से शुक्रवार को भी भोपाल, इंदौर सहित करीब 45 जिलों में तेज आंधी और बारिश की संभावना है। कुछ क्षेत्रों में हवा की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रतिघंटा तक पहुंच सकती है। नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, श्योपुर, शिवपुरी, अशोकनगर, सागर और दमोह जिलों के लिए तेज आंधी का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। गर्मी से मिली बड़ी राहत लगातार हो रही बारिश और बादलों की आवाजाही के चलते प्रदेश के अधिकांश शहरों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से नीचे आ गया है। भोपाल में अधिकतम तापमान 37.4 डिग्री, इंदौर में 38.4 डिग्री, उज्जैन और जबलपुर में 39 डिग्री तथा ग्वालियर में 40.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। केवल कुछ शहरों में ही तापमान 40 डिग्री से ऊपर रहा। सबसे अधिक तापमान नौगांव में 42.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। कई जिलों में तेज बारिश और तापमान में भारी गिरावट रायसेन जिले के गैरतगंज, देवनगर और सिलवानी क्षेत्र में देर रात तेज आंधी के साथ बारिश हुई। नर्मदापुरम जिले के पिपरिया में रातभर रुक-रुककर बारिश का दौर चला, जिससे तापमान में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। कई इलाकों में दिन और रात के तापमान में 8 से 10 डिग्री तक की कमी देखने को मिली। मानसून की दस्तक में हो सकती है देरी मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रदेश में मानसून इस बार सामान्य तिथि से कुछ दिन देर से पहुंच सकता है। मध्य प्रदेश में मानसून की सामान्य प्रवेश तिथि 15 जून मानी जाती है, लेकिन इस बार इसके 20 से 22 जून के बीच पहुंचने की संभावना जताई जा … Read more