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लखनऊ विश्वविद्यालय में लगेगा विशाल रोजगार मेला, 35 से अधिक कंपनियां करेंगी चयन

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन की ओर से शनिवार को यूनिवर्सिटी ऑफ लखनऊ के मालवीय सभागार में विशाल रोजगार मेले का आयोजन किया जाएगा। इस रोजगार मेले के माध्यम से प्रदेश के युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। 35 से अधिक प्रतिष्ठित कंपनियां हिस्सा लेंगी कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के मिशन निदेशक पुलकित खरे विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। रोजगार मेले में 35 से अधिक प्रतिष्ठित कंपनियां हिस्सा लेंगी, जो विभिन्न क्षेत्रों में युवाओं का चयन करेंगी। मेले के माध्यम से 2500 से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियां करेंगी भर्ती रोजगार मेले में ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, टूरिज्म एवं हॉस्पिटैलिटी, मैन्युफैक्चरिंग, सूचना प्रौद्योगिकी एवं आईटीईएस, बैंकिंग-फाइनेंशियल सर्विसेज एंड इंश्योरेंस तथा परिधान उद्योग सहित कई क्षेत्रों की कंपनियां भाग लेंगी। भाग लेने वाली प्रमुख कंपनियों में बारबेक्यू नेशन,पेटीएम हिटैची, शाही इंडस्ट्रीज, स्विफ्ट ट्रक, जीएम मॉडयूलर्स सहित कई बड़ी कंपनियां शामिल होंगी। हर वर्ग के युवाओं को मिलेगा अवसर इस रोजगार मेले की खास बात यह है कि इसमें 8वीं पास से लेकर आईटीआई, पॉलिटेक्निक, स्नातक, बीटेक और एमबीए तक की योग्यता रखने वाले अभ्यर्थी भाग ले सकेंगे। सामान्यतः अभ्यर्थियों की आयु सीमा 18 से 45 वर्ष निर्धारित की गई है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के अधिकारियों के अनुसार यह रोजगार मेला “समावेशी रोजगार” की अवधारणा पर आधारित है, ताकि विभिन्न शैक्षिक पृष्ठभूमि वाले युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सकें। कौशल और रोजगार पर योगी सरकार का फोकस मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार कौशल विकास और रोजगार सृजन को प्राथमिकता दे रही है। सरकार का लक्ष्य युवाओं को केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि उन्हें रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ना है। यही कारण है कि प्रदेशभर में लगातार रोजगार मेले, कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम और निजी कंपनियों के साथ साझेदारी के जरिए युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है।

मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने किया न्यू वर्कशॉप ब्लॉक-सी का उद्घाटन, युवाओं को रोजगार से जोड़ने पर जोर

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार युवाओं को कौशल आधारित शिक्षा और रोजगार से जोड़ने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसी क्रम में प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने गुरुवार को आईटीओटी अलीगंज (आईटीआई परिसर), लखनऊ में न्यू वर्कशॉप ब्लॉक-सी बिल्डिंग का उद्घाटन किया। नई बिल्डिंग में 10 नए व्यवसायों की शुरुआत के साथ संस्थान की प्रशिक्षण क्षमता में बड़ा विस्तार हुआ है। सरकार इसे “आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश” के संकल्प को मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण पहल के रूप में देख रही है। मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि योगी सरकार का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं बल्कि युवाओं को हुनरमंद बनाकर रोजगार और स्वरोजगार के योग्य तैयार करना है। उन्होंने कहा कि आईटीओटी जैसे संस्थान युवाओं के सपनों को साकार करने के केंद्र बन रहे हैं। प्रशिक्षकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि छात्रों में आत्मविश्वास जगाना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है, क्योंकि आत्मविश्वास ही उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने विशेष रूप से ड्रॉपआउट रोकने पर जोर देते हुए कहा कि प्रत्येक छात्र की निरंतर उपस्थिति और प्रगति सुनिश्चित करना संस्थानों की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। मंत्री ने कहा कि समाज के कमजोर और मध्यम वर्ग से आने वाले विद्यार्थियों के लिए कौशल प्रशिक्षण जीवन बदलने वाला अवसर साबित हो सकता है। उन्होंने प्रशिक्षकों से छात्रों के साथ-साथ अभिभावकों से भी संवाद बढ़ाने की अपील की, ताकि प्रशिक्षण और शिक्षा के प्रति भरोसा और मजबूत हो सके। कार्यक्रम में प्रमुख सचिव व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास डॉ. हरिओम ने कहा कि योगी सरकार के नेतृत्व में विभाग लगातार आधुनिक और उद्योग आधारित पाठ्यक्रमों को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने बताया कि बदलते समय की जरूरतों के अनुसार पारंपरिक कोर्सेज के साथ नई तकनीकों और इंडस्ट्री आधारित ट्रेड्स को भी शामिल किया जा रहा है, ताकि युवाओं को सीधे रोजगार से जोड़ा जा सके। उन्होंने कहा कि संस्थानों का मूल्यांकन केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इस आधार पर होना चाहिए कि वहां से प्रशिक्षित होकर कितने युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार प्राप्त हुआ। निदेशक प्राविधिक डी. के. सिंह ने बताया कि नई बिल्डिंग के निर्माण से पहले संस्थान में 10 व्यवसाय संचालित हो रहे थे, जो अब बढ़कर 20 हो गए हैं। इसके साथ ही संस्थान में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं की संख्या भी लगभग 1300 तक पहुंच गई है। उन्होंने बताया कि संस्थान में आईटीआई प्रशिक्षकों के लिए सीआईपीएस प्रशिक्षण भी संचालित किया जा रहा है, जिसके तहत अब तक 1338 प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। वहीं हाल ही में चयनित 1781 नए अनुदेशकों के प्रशिक्षण की प्रक्रिया भी जारी है, जिससे प्रदेश में कौशल प्रशिक्षण की गुणवत्ता और मजबूत होगी। न्यू वर्कशॉप ब्लॉक-सी में शुरू किए गए नए व्यवसायों में ड्रेस मेकिंग, ड्राफ्ट्समैन मैकेनिक, इंस्ट्रूमेंट मैकेनिक, मैकेनिक डीजल, मैकेनिक ट्रैक्टर, ऑफिस मैनेजमेंट, पेंटिंग टेक्नोलॉजी, सेक्रेटेरियल प्रैक्टिस (हिंदी), इलेक्ट्रीशियन पावर डिस्ट्रीब्यूशन और टर्नर जैसे आधुनिक एवं रोजगारपरक ट्रेड शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इन कोर्सेज से युवाओं को उद्योगों की मांग के अनुरूप प्रशिक्षण मिलेगा और प्रदेश में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। कार्यक्रम के दौरान मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे छात्र-छात्राओं से संवाद कर उनकी समस्याएं और सुझाव भी सुने। साथ ही उन्होंने परिसर में नीम का पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर निदेशक प्रशिक्षण अभिषेक सिंह, अपर निदेशक मानपाल सिंह सहित विभागीय अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

हर प्रशिक्षण बैच में 5% सीटें दिव्यांगजनों के लिए अनिवार्य रूप से आरक्षित

लखनऊ उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन द्वारा समाज के वंचित एवं विशेष जरूरत वाले वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। योगी सरकार की इस पहल के तहत प्रदेश में संचालित सभी अल्पकालीन कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों के प्रत्येक बैच में दिव्यांगजनों के लिए 5 प्रतिशत सीटें अनिवार्य रूप से आरक्षित की गई हैं। प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने बताया  कि भारत सरकार के दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के अनुरूप एसिड अटैक पीड़ितों को दिव्यांगजन की श्रेणी में शामिल किए जाने के दृष्टिगत उन्हें कौशल प्रशिक्षण में विशेष प्राथमिकता प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि कोई एसिड अटैक पीड़ित महिला प्रशिक्षण प्राप्त करने की इच्छुक एवं पात्र है, तो उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पंजीकृत किया जाना सुनिश्चित किया जाए। कौशल विकास केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और सम्मान लौटाने का सशक्त जरिया है। उन्होंने कहा कि मिशन का लक्ष्य है कि प्रशिक्षण एवं रोजगार के माध्यम से इन महिलाओं को समाज में समान अवसर एवं नई पहचान मिल सके। मिशन निदेशक पुलकित खरे की पहल पर प्रदेश के सभी जनपदों की जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाइयों (डीपीएमयू) को निर्देशित किया गया है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में गठित होने वाले प्रशिक्षण बैचों में आरक्षित सीटों पर पात्र लाभार्थियों का चयन सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए महिला कल्याण तथा बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के जिला प्रोबेशन अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जनपदवार एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं का विवरण तैयार कर अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों को इस योजना से जोड़ा जा सके। उन्होंने सभी संबंधित विभागों एवं अधिकारियों से निर्देशों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने का आह्वान किया, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद महिलाएं इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकें।

बरेली जिले में आयुष्मान मरीजों के इलाज पर 682 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान

लखनऊ योगी सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है। गरीबों और जरूरतमंदों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित आयुष्मान भारत योजना के तहत प्रदेश में अब तक 50 लाख 40 हजार 937 आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों ने कुल 91 लाख 87 हजार 418 बार इलाज कराया है। इन मरीजों के इलाज के लिए 15 हजार 140 करोड़ रुपये से अधिक का क्लेम किया गया, जिनमें से अब तक 13 हजार 315 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। यह आंकड़े बताते हैं कि योगी सरकार गरीबों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने के लिए गंभीरता से कार्य कर रही है। बरेली में 1 लाख 83 हजार 714 आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों ने लिया योजना का लाभ साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि प्रदेश में आयुष्मान योजना के तहत सबसे अधिक भुगतान बरेली जिले के लाभार्थियों के इलाज पर किया गया है। बरेली जिले में 1 लाख 83 हजार 714 आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों ने योजना का लाभ लिया। यहां 3 लाख 72 हजार 319 उपचार क्लेम दर्ज किए गए। इसके लिए 682 करोड़ 99 लाख 77 हजार 778 रुपये का क्लेम किया गया, जबकि 620 करोड़ 81 लाख 64 हजार 359 रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इसके साथ ही बरेली पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर है। गोरखपुर दूसरे स्थान पर है। यहां 1 लाख 71 हजार 492 लाभार्थियों ने योजना के तहत इलाज कराया और कुल 3 लाख 59 हजार 529 क्लेम दर्ज किए गए। इन क्लेमों के लिए 591 करोड़ 25 लाख 5 हजार 428 रुपये की धनराशि स्वीकृत हुई, जबकि 539 करोड़ 56 लाख 47 हजार 285 रुपये का भुगतान किया गया। वहीं मुरादाबाद तीसरे स्थान पर रहा। जिले में 1 लाख 29 हजार 1 लाभार्थियों ने आयुष्मान योजना के तहत इलाज कराया। यहां 2 लाख 57 हजार 480 क्लेम दर्ज हुए, जिनके लिए 519 करोड़ 60 लाख 94 हजार 301 रुपये का क्लेम किया गया और 459 करोड़ 91 लाख 43 हजार 815 रुपये का भुगतान किया गया। बिजनौर, सहारनपुर, वाराणसी, बुलंदशहर, मेरठ, लखनऊ के लोगों ने भी प्रमुखता से लिया योजना के लाभ साचीज की सीईओ ने बताया कि बिजनौर, सहारनपुर, वाराणसी, बुलंदशहर, मेरठ, लखनऊ और कानपुर नगर के आयुष्मान कार्ड धारकों ने योजना का प्रमुखता से लाभ उठाया। इसमें बिजनौर में 486 करोड़ रुपये से अधिक, सहारनपुर में 463 करोड़ रुपये से अधिक और वाराणसी में 449 करोड़ रुपये से अधिक के क्लेम दर्ज किए गए। वहीं लखनऊ और कानपुर नगर जैसे बड़े शहरों में भी करोड़ों रुपये का भुगतान कर मरीजों को राहत दी गई। बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2017 के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया। प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाने, जिला अस्पतालों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने और स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल बनाने पर विशेष जोर दिया गया। इसी का परिणाम है कि आज प्रदेश के गरीबों को बड़े अस्पतालों में भी मुफ्त इलाज की सुविधा मिल रही है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए योगी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना, 7500 गो आश्रय स्थलों पर तैयार होगी जैविक खाद

लखनऊ योगी सरकार प्रदेश के गोपालकों, स्वयं सहायता समूहों और किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी लेकर आई है। सरकार अब प्रदेश के लगभग 7500 गो आश्रय स्थलों पर गोबर से बड़े पैमाने पर जैविक खाद तैयार कराएगी, जिसे किसानों को सब्सिडी पर उपलब्ध कराया जाएगा। इसे गोसंरक्षण से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने की दिशा में योगी सरकार का बड़ा और दूरगामी कदम माना जा रहा है। इस योजना के तहत तैयार होने वाली जैविक खाद को 50 किलो के पैकेट में उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि हर किसान तक इसे आसानी से पहुंचाया जा सके। कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों और एजेंसियों के माध्यम से इसकी टेस्टिंग व खरीद की जाएगी। इससे ग्रामीण क्षेत्र में युवाओं, पशुपालकों और स्वयं सहायता समूहों के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे। गोबर से खाद तैयार करने के लिए बाकायदा ट्रेनिंग देकर प्रशिक्षक तैयार किए जाएंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश अब गोसंरक्षण, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के नए मॉडल के तौर पर उभरा है। योगी सरकार का लक्ष्य गोसंरक्षण को किसानों की आय, प्राकृतिक खेती, महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण रोजगार से सीधे जोड़ना है। इसी उद्देश्य के तहत इस योजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है। गोबर के जरिए बढ़ेगी गांवों की आमदनी उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि योगी सरकार ने गोसंरक्षण को ग्रामीण समृद्धि के मॉडल के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। पहली बार प्रदेश में गाय के गोबर को आर्थिक संसाधन के रूप में विकसित किया जा रहा है। इससे गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और पशुपालन से जुड़ी आय में बड़ा इजाफा होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में गोबर आधारित जैविक खाद निर्माण, पैकेजिंग, परिवहन और विपणन से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। खासकर युवाओं और पशुपालकों को इससे सीधा लाभ मिलेगा। किसानों को मिलेगा डीएपी-यूरिया के साथ जैविक विकल्प योगी सरकार की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब प्राकृतिक खेती और ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। इससे किसानों को डीएपी और यूरिया के साथ जैविक खाद का विकल्प भी मिलेगा और खेती अधिक टिकाऊ बनेगी। योगी सरकार ने गोसंरक्षण अभियान के लिए लगभग 2000 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं, जबकि वृहद गोसंरक्षण केंद्रों की स्थापना के लिए अलग से 100 करोड़ रुपये की व्यवस्था अलग से की गई है। गोसंरक्षण में शीर्ष राज्य बनकर उभरा उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में गो-तस्करी की घटनाएं आम थीं, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अवैध बूचड़खानों पर सख्त कार्रवाई कर उन्हें पूरी तरह बंद कराया गया। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश गोसंरक्षण के लिए सबसे ज्यादा काम करने वाला राज्य बनकर उभरा है। पारदर्शिता बढ़ी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिली मजबूती योगी सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में प्रत्येक जिले में कम से कम एक बड़ा आत्मनिर्भर गोसंरक्षण केंद्र स्थापित किया जाए, जहां गोवंश संरक्षण के साथ जैविक उत्पाद निर्माण और प्रशिक्षण की सुविधाएं भी उपलब्ध हों। मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के अंतर्गत अब तक लगभग सवा लाख पशुपालकों को 1.80 लाख से ज्यादा गोवंश सुपुर्द किए जा चुके हैं। गोवंश के भरण-पोषण के लिए सरकार 50 रुपये प्रतिदिन प्रति गोवंश की दर से डीबीटी के माध्यम से सीधे पशुपालकों के बैंक खातों में राशि भेज रही है। इस व्यवस्था से भ्रष्टाचार पर नियंत्रण लगा है और पारदर्शिता बढ़ी है। साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है। गोबर और गोमूत्र आधारित प्राकृतिक खेती मॉडल को बढ़ावा प्रदेश के लगभग 7500 गो आश्रय स्थलों में इस समय 12.5 लाख गोवंश संरक्षित हैं। योगी सरकार अब इन गोशालाओं को गोबर की खाद के प्रोडक्शन सेंटर के रूप में विकसित करने जा रही है। गोबर और गोमूत्र आधारित प्राकृतिक खेती मॉडल को बढ़ावा देकर किसानों की खेती की लागत कम करने और आय बढ़ाने की रणनीति बनाई गई है। एक गाय से रोज लगभग 5 लीटर गोमूत्र और 10 किलोग्राम गोबर प्राप्त होता है। यही संसाधन जैविक खाद, प्राकृतिक कीटनाशक और अन्य गो आधारित उत्पादों के निर्माण में उपयोग किए जाएंगे।

मिशन 2027 के लिए यूपी में कैबिनेट फेरबदल, योगी की नई टीम की झलक

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की सियासत में अगले कुछ घंटे बेहद हलचल भरे रहने वाले हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट का विस्तार अब किसी भी वक्त हो सकता है. सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय नेतृत्व की हरी झंडी मिलने के बाद संभावित मंत्रियों को आज शाम तक लखनऊ मुख्यालय पहुंचने के निर्देश दे दिए गए हैं. कयास लगाए जा रहे हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज राज्यपाल से मुलाकात कर सकते हैं, जिसके बाद शपथ ग्रहण की तारीख और समय पर आधिकारिक मुहर लग जाएगी।  2027 का ‘प्लान’ और विकास के साथ हिंदुत्व बीजेपी हमेशा 24X7 चुनावी मोड में रहने वाली पार्टी मानी जाती है. अब पार्टी की निगाहें 2027 में होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव पर टिकी हैं. बीजेपी यूपी में जीत की ‘हैट्रिक’ लगाने की तैयारी में है. इस मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए पार्टी न केवल सरकार का चेहरा बदलेगी, बल्कि बोर्ड, निगम और आयोगों में भी कार्यकर्ताओं को जगह देकर संगठन को मजबूती देगी. रणनीति साफ है, पश्चिम बंगाल की तर्ज पर ‘विकास और हिंदुत्व’ के साथ-साथ मजबूत जातिगत समीकरणों को साधना।  महिला कोटे पर विशेष फोकस, अखिलेश के PDA को जवाब इस बार के विस्तार में सबसे खास बात ‘नारी शक्ति’ पर फोकस है. बीजेपी महिला आरक्षण के मुद्दे पर विपक्ष, खासकर सपा को घेरने की तैयारी में है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद भी नारी शक्ति के अपमान पर विपक्ष को आड़े हाथों लेते रहे हैं. ऐसे में योगी कैबिनेट में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई जा रही है।      कृष्णा पासवान: फतेहपुर से तीन बार की विधायक कृष्णा पासवान का नाम सबसे आगे है. उनके जरिए बीजेपी न केवल महिला कार्ड खेलेगी, बल्कि दलित (पासी) समाज को भी साधेगी. यह अखिलेश यादव के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले की काट माना जा रहा है।      पूजा पाल: सपा की बागी विधायक पूजा पाल को भी मंत्री पद की जिम्मेदारी मिल सकती है. सपा के बागी और पुराने दिग्गजों की एंट्री मंत्रिमंडल में 6 नए चेहरों को जगह मिलने की पूरी संभावना है. इसमें जातिगत संतुलन का खास ख्याल रखा गया है:     मनोज पांडेय: सपा से आए ब्राह्मण चेहरा मनोज पांडेय को मंत्री बनाकर बीजेपी अवध क्षेत्र में अपना आधार मजबूत करना चाहती है.     चौधरी भूपेंद्र सिंह: पश्चिम यूपी के बड़े जाट नेता भूपेंद्र सिंह का मंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है.     अशोक कटारिया: गुर्जर समाज में पैठ रखने वाले पूर्व मंत्री और एमएलसी अशोक कटारिया को एक बार फिर मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है.     रोमी साहनी: खीरी क्षेत्र में सिखों और पंजाबी खत्री बिरादरी की नाराजगी दूर करने के लिए रोमी साहनी को मौका मिल सकता है. प्रमोशन और विभागों में फेरबदल की तैयारी सूत्रों का कहना है कि सिर्फ नए चेहरे ही शामिल नहीं होंगे, बल्कि पुराने मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड पर भी काम होगा. कुछ राज्य मंत्रियों (स्वतंत्र प्रभार) को उनकी बेहतर परफॉर्मेंस, खासकर बंगाल चुनाव के दौरान किए गए कार्यों के लिए कैबिनेट मंत्री के रूप में प्रमोट किया जा सकता है. साथ ही कई मंत्रियों के विभागों में बड़े बदलाव की भी चर्चा है।  बुजुर्ग मंत्रियों को नहीं हटाएगी पार्टी? सियासी गलियारों में चर्चा थी कि कुछ उम्रदराज मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है, लेकिन पार्टी के एक धड़े का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले ऐसा करने से गलत संदेश जा सकता है. चूंकि यह विस्तार कुछ ही समय के लिए है और जल्द ही आचार संहिता लागू हो जाएगी, इसलिए बीजेपी क्षेत्रीय क्षत्रपों और बुजुर्ग नेताओं को नाराज करने का जोखिम नहीं लेना चाहती। 

बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में होगा राज्यस्तरीय कार्यक्रम, सुबह 11 बजे सीएम योगी आदित्यनाथ करेंगे शुभारंभ

लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने शिक्षामित्रों के मानदेय में वृद्धि के बाद अब उनके सम्मान को भी प्राथमिकता देते हुए व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। इस पहल को प्रदेशव्यापी स्वरूप देते हुए आगामी 5 मई को गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राज्यस्तरीय भव्य कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे। ₹18,000 प्रतिमाह मानदेय के साथ लगभग 1.43 लाख शिक्षामित्रों को इस प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा, जिसके माध्यम से पूरे प्रदेश में यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि शिक्षा व्यवस्था की नींव को मजबूत करने वाले शिक्षामित्रों को अब उचित पहचान और संबल मिल रहा है। शिक्षामित्रों को अप्रैल माह से ही बढ़े हुए मानदेय का लाभ मिलना शुरू हो चुका है और अब 5 मई को गोरखपुर के बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह से मुख्यमंत्री इसके औपचारिक शुभारंभ के साथ शिक्षामित्रों से संवाद भी करेंगे। सुबह 11 बजे होने वाले इस कार्यक्रम के समानांतर सभी जनपदों में भी आयोजन कर इसे व्यापक रूप दिया जाएगा। परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत लगभग 1.43 लाख शिक्षामित्रों के लिए लिया गया यह निर्णय अब पूरी तरह लागू हो चुका है। 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी इस व्यवस्था के अंतर्गत बेसिक शिक्षा के 13,597 और समग्र शिक्षा के 1,29,332 शिक्षामित्रों को ₹18,000 प्रतिमाह की दर से भुगतान किया जा रहा है, जिससे उनका आर्थिक सशक्तीकरण हुआ है। योगी सरकार शिक्षा क्षेत्र में सुधार और बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। मानदेय में वृद्धि और यह पहल शिक्षामित्रों के मनोबल को बढ़ाने के साथ-साथ विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता को भी नई दिशा देगी। गोरखपुर में होने वाला यह आयोजन शिक्षा सुधार के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। लाइव प्रसारण और व्यापक भागीदारी कार्यक्रम का सीधा प्रसारण दूरदर्शन और मुख्यमंत्री के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर किया जाएगा, जिससे प्रदेशभर के शिक्षामित्र इस अवसर के साक्षी बन सकें। साथ ही, सभी जनपदों में भी समानांतर रूप से आयोजन किए जाएंगे, जहां स्थानीय स्तर पर जन-प्रतिनिधियों, अधिकारियों, शिक्षकों और शिक्षामित्रों की भागीदारी उल्लेखनीय होगी।

मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड) से अनाथ बच्चों को मिल रहा सहारा

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार बेसहारा बेटियों के लिए अभिभावक की भूमिका निभा रही है। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड-19) के तहत योगी सरकार ने न सिर्फ अनाथ बच्चों के भविष्य को सुरक्षित किया है, बल्कि बेसहारा बेटियों की शादी कराकर उनके जीवन में माता-पिता की कमी को काफी हद तक पूरा करने का प्रयास किया है। इस योजना के तहत अब तक 60 से ज्यादा बेसहारा बेटियों की शादी कराई जा चुकी है। योजना के तहत योगी सरकार बेटियों की शादी के लिए 1 लाख रुपये की आर्थिक मदद कर रही है। यह इस बात का प्रतीक है कि सरकार जमीनी स्तर पर जिम्मेदारी निभा रही है। बेटियों की शादी कराकर सरकार ने अभिभावक की भूमिका निभाई दरअसल मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड-19) आज हजारों परिवारों के लिए उम्मीद का सहारा बन चुकी है। योगी सरकार ने इस योजना के तहत अब तक 66 बेसहारा बेटियों की शादी कराई है। इस तरह यह सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि उन बेटियों के लिए एक भरोसा है, जिनके सिर से माता-पिता का साया उठ चुका है। सरकार इन बेटियों के विवाह के लिए 1,01,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है, जिससे उनका नया जीवन सम्मान के साथ शुरू हो सके। वर्तमान में 10 हजार से ज्यादा बच्चों को मिल रहा लाभ इस योजना की शुरुआत साल 2021 में की गई थी। इसका उद्देश्य उन बच्चों को सहारा देना है, जिन्होंने कोविड-19 महामारी के कारण 1 मार्च 2020 के बाद अपने माता-पिता या अभिभावकों को खो दिया था। ऐसे बच्चों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनके भरण-पोषण, शिक्षा और भविष्य की होती है। इसे ध्यान में रखते हुए योगी सरकार ने एक व्यापक और संवेदनशील व्यवस्था तैयार की। वर्तमान समय में इस योजना के तहत 10,904 बच्चों को लाभ मिल रहा है, जबकि शुरुआत में यह संख्या 13,926 थी।  हजारों बच्चों को मिल रहा योजना का लाभ कई बच्चे समय के साथ वयस्क हो गए या योजना की अवधि पूरी कर चुके हैं, जिससे लाभार्थियों की संख्या में कमी आई है। इसके बावजूद हजारों बच्चों को निरंतर सहायता मिल रही है, जो इस योजना की प्रभावशीलता को दर्शाता है। साथ ही बच्चों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार प्रतिमाह 4000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है। यह सहायता 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने या 12वीं कक्षा पास करने तक (जो पहले हो) दी जाती है। इसके साथ ही शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने 8085 लैपटॉप भी वितरित किए हैं, जिससे बच्चे डिजिटल शिक्षा से जुड़ सकें और प्रतिस्पर्धी माहौल में पीछे न रहें। कोविड के कारण अनाथ हुए बच्चों के लिए निशुल्क आवास की व्यवस्था योजना के तहत 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए कई विशेष प्रावधान किए गए हैं। जिन बच्चों का कोई अभिभावक नहीं है, उनके लिए सरकारी बाल देखरेख संस्थाओं में निःशुल्क आवास की व्यवस्था की गई है। वहीं 11 से 18 वर्ष तक के बच्चों को कक्षा 12 तक कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय और अटल आवासीय विद्यालयों में मुफ्त शिक्षा दी जा रही है। इसके साथ ही उन्हें 12,000 रुपये सालाना की अतिरिक्त सहायता भी प्रदान की जाती है। बच्चों की संपत्ति सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी जिलाधिकारी को योगी सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इन बच्चों की संपत्ति सुरक्षित रहे। इसके लिए जिलाधिकारी को इन बच्चों का संरक्षक बनाया गया है, ताकि उनकी चल-अचल संपत्ति की कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। यह कदम बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके अलावा 18 से 23 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को भी योजना के दायरे में रखा गया है। उच्च शिक्षा, डिप्लोमा या प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे नीट,जेईई और क्लैट की तैयारी कर रहे युवाओं को प्रतिमाह 2500 रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जा रही है। इससे न केवल उनकी पढ़ाई जारी रहती है, बल्कि उन्हें अपने सपनों को साकार करने का अवसर भी मिलता है। योगी सरकार का लक्ष्यः कोई बेटी खुद को असहाय न महसूस करें महिला कल्याण निदेशालय की निदेशक डॉ. वंदना वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड-19) प्रदेश सरकार की एक संवेदनशील और दूरदर्शी पहल है, जिसका उद्देश्य उन बच्चों और बेटियों को संबल देना है, जिन्होंने महामारी में अपने अभिभावकों को खो दिया। डॉ. वर्मा ने बताया कि योजना के तहत बच्चों को आर्थिक सहायता, मुफ्त शिक्षा, डिजिटल संसाधन और सुरक्षित आवास जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। साथ ही बालिग होने पर बेटियों के विवाह के लिए आर्थिक सहयोग भी सुनिश्चित किया गया है। प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी बच्चा या बेटी खुद को असहाय महसूस न करे और सभी को समान अवसर मिल सकें।

यूपी में शिक्षा पर फोकस: योगी आदित्यनाथ सरकार का मिशन—अब कोई बच्चा नहीं रहेगा स्कूल से बाहर, 1 मई से विशेष अभियान शुरू

श्रमिक बस्तियों से ईंट-भट्ठों तक पहुंचेगी टीम, 6 से 14 आयु वर्ग का 100 प्रतिशत नामांकन लक्ष्य ड्रॉपआउट पर सीधा प्रहार, योगी सरकार ने ‘स्कूल चलो अभियान’ को मिशन मोड में किया लागू ड्रॉपआउट बच्चों को चिह्नित कर मुख्यधारा से जोड़ने पर फोकस, ट्रांजिशन दर बढ़ाने का लक्ष्य लखनऊ योगी सरकार ने शिक्षा के मोर्चे पर बड़ा और निर्णायक कदम उठाते हुए ‘स्कूल चलो अभियान’ को उत्तर प्रदेश में मिशन मोड में लागू कर दिया है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि अब कोई भी बच्चा स्कूल से बाहर नहीं रहेगा। इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा, पार्थ सारथी सेन शर्मा ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 6 से 14 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे का नामांकन हर हाल में सुनिश्चित किया जाए। पहली मई से प्रदेशभर में विशेष अभियान चलाकर श्रमिक बस्तियों, ईंट-भट्ठों और वंचित वर्गों के बच्चों को चिह्नित कर स्कूल से जोड़ा जाएगा। यह अभियान खास तौर पर उन बच्चों पर केंद्रित होगा, जो अब तक शिक्षा की मुख्यधारा से बाहर हैं। दिव्यांग बच्चों के नामांकन को प्राथमिकता देने, आरटीई के अंतर्गत लॉटरी के माध्यम से चयनित पात्र बच्चों का आवंटित विद्यालय में शत-प्रतिशत नामांकन कराने और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में बालिकाओं के प्रवेश को बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकार ने ड्रॉपआउट और आउट-ऑफ-स्कूल बच्चों की पहचान कर उन्हें पुनः शिक्षा से जोड़ने के लिए जमीनी स्तर पर रणनीति तैयार की है। कक्षा 5 से 6, 8 से 9 और 10 से 11 तक 100% ट्रांजिशन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बच्चों की पढ़ाई बीच में न छूटे और शिक्षा की निरंतरता बनी रहे। जागरूकता अभियान, स्थानीय प्रशासन की सक्रिय भागीदारी और निरंतर मॉनिटरिंग के माध्यम से इस अभियान को प्रभावी बनाने की योजना है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश हैं कि प्रत्येक गांव, वार्ड और बस्ती स्तर पर सर्वे कर बच्चों को चिह्नित किया जाए और उन्हें विद्यालय से जोड़ा जाए। जहां पहले ड्रॉपआउट चिंता का विषय था, अब सरकार घर-घर पहुंचकर हर बच्चे को स्कूल से जोड़ रही है।

योगी सरकार की योजना का असर, डेयरी नेटवर्क से महिलाओं की आय बढ़ी

 लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा शुरू की गई 'महिला सामर्थ्य योजना' आज अवध क्षेत्र में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के कायाकल्प का सबसे बड़ा माध्यम बनकर उभरी है। अयोध्या से लेकर कानपुर नगर तक के सात जनपदों के डेढ़ हजार से अधिक गांवों में इस योजना ने न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि उनके सामाजिक और आर्थिक स्तर को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया है। अब इस योजना का सफल विस्तार लखनऊ, उन्नाव और बाराबंकी जैसे जिलों में भी किया जा रहा है, जो प्रदेश की 'आधी आबादी' के सशक्तिकरण के प्रति सरकार के संकल्प को दर्शाता है। मुख्यमंत्री का विजन: सशक्त महिला, समृद्ध समाज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि जब एक महिला आर्थिक रूप से मजबूत होती है, तो पूरा परिवार और समाज समृद्ध होता है। इसी सोच को धरातल पर उतारते हुए 'महिला सामर्थ्य योजना' के माध्यम से महिलाओं को उत्पादन से लेकर बाजार उपलब्ध कराने और भुगतान की प्रक्रिया तक सीधे जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री के इस फोकस का नतीजा है कि आज अवध की महिलाएं डेयरी नेटवर्क का हिस्सा बनकर अपने परिवारों की मुख्य आर्थिक संरक्षक बन चुकी हैं। डेयरी नेटवर्क से श्वेत क्रांति और 1380 करोड़ का डीबीटी इस योजना की सबसे बड़ी सफलता इसका विशाल डेयरी नेटवर्क है। अवध क्षेत्र के गांवों से आज प्रतिदिन लगभग 4 लाख लीटर दूध का संग्रह किया जा रहा है। यह महज एक आंकड़ा नहीं, बल्कि संगठित आर्थिक गतिविधि का प्रमाण है। योजना की पारदर्शिता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक महिलाओं के बैंक खातों में 1380 करोड़ रुपये से अधिक की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सीधे भेजी जा चुकी है। इस व्यवस्था ने बिचौलिया तंत्र को जड़ से खत्म कर महिलाओं का भरोसा सरकार और सिस्टम पर मजबूत किया है। शून्य से शिखर तक: एक लाख महिलाओं का जुड़ाव योजना की विकास यात्रा किसी मिसाल से कम नहीं है। मार्च 2023 में महज 340 गांवों और 8000 महिलाओं के साथ शुरू हुआ यह अभियान आज 1550 गांवों तक फैल चुका है, जिसमें एक लाख से अधिक महिलाएं सक्रिय रूप से जुड़ी हैं। दुग्ध व्यवसाय का यह तेजी से हुआ विस्तार यह सिद्ध करता है कि योगी सरकार की नीतियां सीधे जमीन पर असर डाल रही हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए द्वार खोल रही हैं। सफलता की मिसाल: सुल्तानपुर की अनीता वर्मा योजना की कामयाबी को सुल्तानपुर के दूबेपुर ब्लॉक की अनीता वर्मा जैसी हजारों महिलाओं की सफलता से समझा जा सकता है। मुकुंदपुर गांव की रहने वाली अनीता ने केवल दो गायों से अपना काम शुरू किया था और आज वह सफलता का एक वैश्विक मॉडल बन चुकी हैं। गत वर्ष उन्हें लगभग साढ़े छह लाख रुपये का भुगतान हुआ है। अनीता की यह कहानी न केवल आर्थिक बदलाव की गाथा है, बल्कि यह साबित करती है कि यदि ग्रामीण महिलाओं को सही अवसर और सरकारी योजनाओं का साथ मिले, तो वे समाज का भविष्य बदलने की क्षमता रखती हैं।