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जटिल प्रसव के मामले भी अब संभाल रहे छोटे जिलों के अस्पताल

लखनऊ योगी सरकार ने पिछले नौ वर्षों में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में बड़े कदम उठाए हैं। आज प्रदेशवासियों को उनके ही जिले में गुणवत्तापूर्ण इलाज की सुविधा मिल रही है। योगी सरकार के प्रयासों का ही नतीजा है कि वर्तमान में जटिल प्रसव वाले मामलों को बड़े शहरों की ओर रेफर करने की प्रवृत्ति अब प्रदेश में कम हो रही है। छोटे शहरों में ही जटिल मामले संभाले जा रहे हैं। इसके साथ ही योगी सरकार ने 76 जिला अस्पतालों के 1,791 डाक्टरों को बीते चार वर्षों में प्रशिक्षण दिया। आरआरटीसी मॉडल से जिलों में मजबूत हो रही मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाएं उत्तर प्रदेश सहित देश के कई हिस्सों में मातृ एवं नवजात मृत्यु दर को कम करना आज भी स्वास्थ्य प्रणाली के सामने बड़ी चुनौती है। विशेषकर जिला और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर विशेषज्ञ सेवाओं की कमी, आपात स्थितियों में त्वरित निर्णय की क्षमता का अभाव और समय पर रेफरल की जटिलताओं के कारण कई बार ऐसी स्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं, जिन्हें रोका जा सकता है। इन्हीं सवालों का व्यावहारिक और प्रभावी उत्तर बनकर उभरा है रीजनल रिसोर्स एंड ट्रेनिंग सेंटर (आरआरटीसी) मॉडल। प्रदेश में इस वक्त 20 मेडिकल कॉलेज आरआरटीसी के रूप में काम कर रहे हैं।  आरआरटीसी मॉडल: प्रशिक्षण से आगे, एक “सिस्टम स्ट्रेंथनिंग इंजन” आरआरटीसी ने पारंपरिक प्रशिक्षण मॉडल से आगे बढ़ते हुए हब-एंड-स्पोक आधारित मेंटरशिप मॉडल विकसित किया, जिसमें मेडिकल कॉलेज “नॉलेज हब” के रूप में कार्य करता है और जिले “स्पोक” के रूप में उससे निरंतर मार्गदर्शन प्राप्त करते हैं। इस मॉडल के तहत ऑन-साइट मेंटरिंग, निरंतर क्षमता निर्माण, नर्सिंग स्टाफ का सशक्तीकरण व मल्टी-डिपार्टमेंट सहयोग लिया जाता है। अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज परिसर में स्थापित आरआरटीसी इस मॉडल की मिसाल है। यहां से अलीगढ़, हाथरस व कासगंज जिला अस्पताल के डॉक्टरों व स्टाफ की क्षमतावृद्धि की गई । आज वे जटिल से जटिल मामलों को संभाल रहे हैं। आरआरटीसी की को-ऑर्डिनेटर डॉ. तबस्सुम रहमत बताती हैं कि “हमारा लक्ष्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि हर स्वास्थ्य इकाई को इस स्तर तक सक्षम बनाना है कि वह जटिल परिस्थितियों का सामना आत्मविश्वास के साथ कर सके।” जमीनी बदलाव: कासगंज से उभरती एक मिसाल आरआरटीसी मॉडल का प्रभाव सबसे स्पष्ट रूप से कासगंज जिला महिला अस्पताल में देखा जा सकता है। वर्ष 2017 में जहां इस अस्पताल में पहला सफल सी-सेक्शन एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी, वहीं आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। ऑपरेशन थिएटर पूरी तरह सुसज्जित और सक्रिय है। अधिकतर डॉक्टर और स्टाफ प्रशिक्षित हैं। जटिल प्रसव मामलों का स्थानीय स्तर पर ही प्रबंधन संभव हो रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि पहले जिन मामलों को तत्काल बड़े शहरों में रेफर करना पड़ता था, अब उनमें से कई का इलाज जिले में ही हो रहा है। इससे न केवल समय की बचत हुई है, बल्कि माताओं और नवजातों के लिए जीवनरक्षक अंतर भी पैदा हुआ है। संकट के समय भी निरंतरता: कोविड-19 के दौरान अनुकूलन कोविड-19 महामारी के दौरान जब स्वास्थ्य सेवाओं पर अभूतपूर्व दबाव था, तब भी आरआरटीसी की पहल नहीं रुकी। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रशिक्षण जारी रखा गया, विशेष सत्र आयोजित किए गए, और यह सुनिश्चित किया गया कि संस्थागत प्रसव और नवजात देखभाल सेवाएं बाधित न हों। यह दर्शाता है कि यह मॉडल केवल स्थिर परिस्थितियों में ही नहीं, बल्कि संकट के समय भी अनुकूल और प्रभावी है। एक केस, जो बताता है क्षमता का वास्तविक अर्थ जेएन मेडिकल कालेज की डॉ. नसरीन नूर एक जटिल केस को याद करती हैं। 23 वर्षीय एक महिला तेज पेट दर्द के साथ आई। प्रारंभिक जांच में स्थिति सामान्य प्रतीत हो रही थी, लेकिन विस्तृत मूल्यांकन में हेटरोटॉपिक प्रेग्नेंसी का पता चला। एक गर्भाशय में और दूसरा ट्यूब में, जिसमें से ट्यूब वाली प्रेग्नेंसी फट चुकी थी। तत्काल सर्जरी कर मरीज की जान बचाई गई। सावधानीपूर्वक फॉलोअप के बाद उसी महिला ने नौ महीने बाद एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। यह केवल एक सफल केस नहीं, बल्कि यह संकेत है कि अब प्रणाली जटिल और जीवन-जोखिम वाली स्थितियों को पहचानने और संभालने में सक्षम हो रही है।

योगी सरकार के 9 वर्षों में यूपी ने तोड़े पर्यटन क्षेत्र के सारे रिकार्ड, बना पर्यटन का सिरमौर

लखनऊ उत्तर प्रदेश पर्यटन क्षेत्र में सफलता की जो नई कहानी लिख रहा है, वह केवल पर्यटकों की रिकॉर्ड संख्या तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बन चुकी है। उत्तर प्रदेश में आस्था और अर्थव्यवस्था एक-दूसरे की पूरक बनकर प्रदेश में पर्यटन की विकास यात्रा को नई दिशा दे रही है। इस दिशा में सीएम योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप तैयार की गई पर्यटन नीति- 2022 के सफल क्रियान्वयन के साथ इको टूरिज्म का विकास, पर्यटन सुविधाओं में अवसंरचनात्मक सुधार, बेहतर कनेक्टिविटी, सुदृढ़ कानून व्यवस्था, एयरपोर्ट, एक्सप्रेस-वे और परिवहन सेवाओं के विस्तार ने यूपी में पर्यटन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। साथ ही योगी सरकार का ‘टेंपल एंड फेस्टिवल इकॉनामी’ का मॉडल उत्तर प्रदेश को एक वैश्विक स्पिरिचुअल टूरिज्म हब के रूप में विकसित कर रहा है। आईआईएम लखनऊ ने कुछ समय पहले अयोध्या में पर्यटन को लेकर अध्ययन किया था। इसमें उसने योगी सरकार की टेंपल इकॉनामी की सराहना की है।  योगी सरकार के नौ वर्षों के शासनकाल में उत्तर प्रदेश ने पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है, जिसकी गवाही पर्यटन के आंकड़े देते हैं। योगी सरकार के पहले वर्ष 2017 में यूपी में लगभग 23.75 करोड़ पर्यटक आए थे, वहीं 2019 में यह संख्या लगभग दोगुनी बढ़कर 54.06 करोड़ पहुंच गई। हालांकि, इसमें कोविड महामारी के दौरान गिरावट दर्ज की गई, लेकिन योगी सरकार की पर्यटन नीति – 2022 के प्रभावी क्रियान्वयन से तेज रिकवरी हुई। परिणाम यह हुआ कि वर्ष 2024 में 64.91 करोड़ पर्यटकों के साथ यूपी देश में सर्वाधिक घरेलू पर्यटकों वाला राज्य बन गया और विदेशी पर्यटकों के मामले में चौथा। यही नहीं, वर्ष 2025 में महाकुंभ-2025 के आयोजन से पर्यटकों की संख्या अभूतपूर्व रूप से बढ़कर 156.18 करोड़ तक पहुंच गई। गौरतलब है कि पिछले 9 वर्षों में यूपी में आने वाले पर्यटकों की संख्या लगभग सात गुना बढ़ चुकी है। वर्तमान में राष्ट्रीय पर्यटन में यूपी की हिस्सेदारी 21.9 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो यूपी को वैश्विक पर्यटन का केंद्र बनाने की दिशा में उल्लेखनीय संकेत है। प्रदेश में 5 लाख से अधिक रोजगार का सृजन मुख्यमंत्री के विजन को साकार करती उत्तर प्रदेश पर्यटन नीति-2022 प्रदेश में पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन को साकार करने वाली साबित हुई है। इस नीति के तहत होटल, होमस्टे, ईको-टूरिज्म, वेलनेस और एडवेंचर टूरिज्म समेत 22 गतिविधियों को बढ़ावा देते हुए निवेश आधारित सब्सिडी की व्यवस्था की गई है। जिसके तहत अब तक ₹36,681 करोड़ के निवेश लक्ष्य को हासिल किया गया है। साथ ही 1,684 से अधिक पर्यटन इकाइयों को पंजीकरण प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं। जिससे प्रदेश में 5 लाख से अधिक रोजगार का सृजन हुआ और महिलाओं का भागीदारी में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।  उत्तर प्रदेश में 12 से अधिक टूरिस्ट सर्किटों का निर्माण धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रदेश में विभिन्न तीर्थ परिषदों का निर्माण कर उनका कायाकल्प किया गया। जिससे एक ओर तो तीर्थों में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा में बढ़ोतरी हुई, साथ ही इन क्षेत्रों में पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिला। इसमें अयोध्या, देवीपाटन, ब्रज तीर्थ, विंध्याचल, चित्रकूट, नैमिषारण्य, शुक तीर्थ विकास परिषदों का गठन प्रमुख है। इसके साथ ही प्रदेश में 12 से अधिक टूरिस्ट सर्किटों, रामायण, कृष्ण, बौद्ध, जैन, सूफी, स्वतंत्रता संग्राम सर्किट आदि का निर्माण किया गया है। इसके साथ ही 83 धार्मिक मार्गों के चौड़ीकरण व विकास से श्रद्धालुओं की यात्रा और सुगम हुई है। सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण कर पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा दिया प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण कर पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा दिया गया। इसमें लखनऊ में भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय की स्थापना, कौशांबी में संग्रहालय, बाराबंकी में बाबू केडी सिंह संग्रहालय, गोरखा रेजिमेंट सेंटर, मेरठ में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम को समर्पित संग्रहालय और गोरखपुर में शहीद स्मारक जैसे निर्माण कार्य उल्लेखनीय हैं। प्रयागराज में आजाद पार्क और ‘देखो प्रयागराज’ ट्रेल का अनुभव, बुंदेलखंड (महोबा) का विरासत पर्यटन स्थल के रूप में विकास, अयोध्या में अंतर्राष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान, कुशीनगर में बुद्ध थीम पार्क, आगरा स्थित बटेश्वर और श्रावस्ती का समेकित पर्यटन विकास जैसी विभिन्न परियोजनाएं प्रदेश में सांस्कृतिक समृद्धि के साथ पर्यटन विकास की वाहक साबित हो रही हैं। राज्य में 49 इको-टूरिज्म परियोजनाएं शुरू की गईं राज्य में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अगस्त 2022 में यूपी इको टूरिज्म बोर्ड का गठन किया गया। जिसके माध्यम से प्रदेश के प्रमुख इको टूरिज्म केंद्रों दुधवा, कतर्नियाघाट, पीलीभीत टाइगर रिजर्व, अमानगढ़ और सोहगीबरवा वन क्षेत्रों के साथ अन्य प्राकृतिक पर्यावासों में भी नाइट स्टे, वॉच टॉवर, नेचर ट्रेल, कैफेटेरिया, होमस्टे और बर्ड वॉचिंग जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। राज्य में 49 इको-टूरिज्म परियोजनाएं शुरू की गईं हैं, साथ ही ग्रामीण पर्यटन के लिए 234 गांवों का चयन किया गया है। प्रदेश के सभी जिलों में युवा पर्यटन क्लबों का गठन कर स्थानीय सहभागिता को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। ‘टेंपल एंड फेस्टिवल इकॉनामी’ मॉडल सबसे प्रभावशाली कारक सिद्ध हुआ यही नहीं, योगी सरकार का ‘टेंपल एंड फेस्टिवल इकॉनामी’ मॉडल यूपी में पर्यटन विकास का सबसे प्रभावशाली कारक सिद्ध हुआ है। इसका सबसे सशक्त उदाहरण अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के रूप में देखने को मिला। अयोध्या में आने वाले पर्यटकों की संख्या वर्ष 2017 के 2.84 लाख से अविश्वसनीय रूप से बढ़कर वर्ष 2024 में 16.44 करोड़ के पार पहुंच गई। यही नहीं, वर्ष 2025 में भी अयोध्या में 29.95 करोड़ श्रद्धालुओं का आगमन हुआ। इसी क्रम में वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर, प्रयागराज में कुंभ और महाकुंभ के आयोजनों ने इन तीर्थक्षेत्रों में पर्यटन को अभूतपूर्व बढ़ावा दिया है। योगी सरकार का यह मॉडल बड़े शहरों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि वर्ष 2017 से 2025 तक 197 ऐतिहासिक और पवित्र स्थलों का जीर्णोद्धार हुआ, जिससे प्रदेश में पर्यटनजनित व्यापार और रोजगार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। उत्तर प्रदेश में त्योहार और उत्सव अब दिव्य-भव्य महोत्सव का रूप ले चुके हैं। इसमें अयोध्या का दीपोत्सव, वाराणसी की देव दीपावली और मथुरा के ब्रज और बरसाना के होली उत्सव में देशी-विदेशी पर्यटकों की भीड़ लगती है। यही नहीं, प्रयागराज के महाकुंभ-2025 में … Read more

रामनवमी पर डबल छुट्टी! योगी सरकार ने 27 मार्च को भी किया अवकाश घोषित

लखनऊ रामनवमी पर योगी सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। पहले से घोषित 26 मार्च के सार्वजनिक अवकाश के साथ अब 27 मार्च को भी छुट्टी घोषित कर दी गई है। मंदिरों में रामनवमी के दौरान श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।   हर साल इस पर्व पर बड़ी संख्या में लोग पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए मंदिरों में पहुंचते हैं, जिससे व्यवस्था बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसे में अतिरिक्त अवकाश से लोगों को सुविधा मिलेगी और भीड़ प्रबंधन में भी मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस निर्णय के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया है कि सरकार आस्था और परंपराओं के सम्मान के लिए प्रतिबद्ध है। प्रशासन को भी निर्देश दिए गए हैं कि सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं। लगातार दो दिन की छुट्टी से श्रद्धालुओं को न केवल धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने का अवसर मिलेगा, बल्कि यात्रा और दर्शन भी अधिक सहज हो सकेंगे।

योगी सरकार के प्रयासों से खरीफ और रबी दोनों सीजन में डिजिटल क्रॉप सर्वे को मिली रफ्तार, लाखों किसान योजनाओं से जुड़े

किसानों के हित में बड़ा कदम, यूपी में तेजी से आगे बढ़ रहा ‘फार्मर रजिस्ट्री’ अभियान लखनऊ,  उत्तर प्रदेश में कृषि क्षेत्र को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में योगी सरकार लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। प्रदेश में डिजिटल क्रॉप सर्वे और फार्मर रजिस्ट्री अभियान के माध्यम से किसानों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने और कृषि व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। खरीफ और रबी दोनों सीजन में डिजिटल क्रॉप सर्वे को तेजी से आगे बढ़ाया गया है। इसके तहत प्रदेश के राजस्व गांवों में बड़ी संख्या में खेतों और फसलों का डिजिटल सर्वे किया जा रहा है, जिससे फसल से संबंधित सटीक आंकड़े उपलब्ध हो सकें। इसके अलावा किसानों को योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से मिल सके।   प्रदेश में कुल 1,08,935 राजस्व गांवों में से 95,765 गांवों का जियो रेफरेंसिंग कार्य पहले ही पूरा किया जा चुका है। इसके आधार पर खरीफ और रबी दोनों सीजन में लाखों खेतों का डिजिटल सर्वे किया गया है। खरीफ सीजन में 5,37,08,511 से अधिक प्लॉट का सर्वे अंतिम रूप से स्वीकृत किया गया है, जबकि रबी सीजन में भी 5,56,44,677 से अधिक प्लॉट का सर्वे पूरा किया जा चुका है। फार्मर रजिस्ट्री अभियान को मिली गति योगी सरकार द्वारा किसानों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए फार्मर रजिस्ट्री अभियान को भी मिशन मोड में चलाया जा रहा है। केंद्र सरकार के अनुसार प्रदेश में पीएम किसान योजना के लाभार्थियों की संख्या लगभग 2,88,70,495 है। सत्यापन अभियान के बाद 2,31,36,350 से अधिक किसानों का डेटा उपलब्ध हुआ है। इनमें से अब तक 1, 67,01,996 से अधिक पीएम किसान सम्मान योजना के लाभार्थी फार्मर रजिस्ट्री में शामिल हो चुके हैं, जो कुल लक्ष्य का लगभग 72.19 प्रतिशत है। इसके अतिरिक्त करीब 28, 37,162 वे किसान भी फार्मर रजिस्ट्री में पंजीकृत किए गए हैं जो पीएम किसान सम्मान योजना में शामिल नहीं हैं।    डिजिटल तकनीक से कृषि व्यवस्था होगी मजबूत योगी सरकार का मानना है कि डिजिटल क्रॉप सर्वे और फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से किसानों का सटीक डाटाबेस तैयार होगा, जिससे फसल बीमा, कृषि अनुदान, आपदा राहत और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ सही किसान तक पहुंचाने में आसानी होगी। इससे कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता भी बढ़ेगी और योजनाओं के क्रियान्वयन में गति आएगी।    योगी सरकार के कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीक के प्रयोग को बढ़ावा देने से उत्तर प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होता जा रहा है। आने वाले समय में इन पहल के माध्यम से किसानों को योजनाओं का लाभ और अधिक प्रभावी तरीके से मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

बरेली, जौनपुर और आगरा में विशेष अभियान के दौरान सबसे अधिक बनाए गए कार्ड

लखनऊ आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत छूटे पात्र लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड का लाभ देने के लिए योगी सरकार प्रदेश भर में विशेष अभियान चला जा रही है। अभियान की शुरुआत बीते साल 25 नवंबर को हुई। यह 25 दिसंबर, 2025 तक चला। इस दौरान 5 लाख 52 हजार से अधिक कार्ड बनाए गए। अभियान की सफलता को देखते हुए इस साल 15 जनवरी से दोबारा विशेष अभियान शुरू किया गया, जो वर्तमान में चल रहा है। विशेष अभियान की अवधि में अब तक 17 लाख 94 हजार से अधिक कार्ड बनाए जा चुके हैं। अभियान के दौरान विशेष रूप से आशा कार्यकताओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और आंगनबाड़ी सहायिकाओं के साथ उनके परिवार के कार्ड बनाए जा रहे हैं। अभियान के दौरान सबसे अधिक बरेली में कार्ड बनाए गए। इससे बरेली कार्ड बनाने में पूरे प्रदेश में पहले, जौनपुर दूसरे और आगरा तीसरे स्थान पर हैं।   70 वर्ष या अधिक आयु के करीब 25 लाख 70 हजार बुजुर्गों के कार्ड बनाए गए   साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत उत्तर प्रदेश देश में सबसे अधिक आयुष्मान कार्ड बनाने वाला राज्य बन चुका है। योजना के तहत प्रदेश में अब तक लगभग 5.64 करोड़ आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं, जिससे करोड़ों परिवारों को सालाना पांच लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा मिल रही है। इसके अलावा वरिष्ठ नागरिकों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से संचालित वय वंदना योजना के तहत 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के करीब 25 लाख 70 हजार बुजुर्गों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं।  उन्होंने बताया कि योगी सरकार वंचित पात्र लाभार्थियों को योजना से जोड़ने के लिए प्रदेश भर में विशेष अभियान चला जा रही है। यह अभियान पहले 25 नवंबर से 25 दिसंबर, 2025 तक संचालित किया गया। अभियान की सफलता को देखते हुए इसे इस साल 15 जनवरी से 15 अप्रैल तक विस्तारित किया गया है। अभियान के तहत 12 मार्च तक 17 लाख 94 हजार से अधिक आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। अभियान को स्वास्थ्य विभाग, पंचायती राज विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के समन्वय से संचालित किया जा रहा है। ग्राम स्तर पर स्वयंसेवकों और स्थानीय कार्यकर्ताओं के माध्यम से पात्र परिवारों तक पहुंच बनाकर उनका सत्यापन किया गया और मौके पर ही आयुष्मान कार्ड बनाए गए। अभियान के दौरान सबसे अधिक बरेली ने 1,12,855 कार्ड बनाकर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। इसी तरह जौनपुर 83,042 कार्ड बनाकर दूसरे, आगरा 76,702 कार्ड बनाकर तीसरे स्थान पर है जबकि प्रयागराज 74,252 कार्ड बनाकर चौथे और आजमगढ़ 70,266 कार्ड बनाकर पांचवे स्थान पर है।  1.51 लाख आंगनबाड़ी सहायिकाओं और उनके परिवार के बनाए गए कार्ड साचीज की एसीईओ डॉ. पूजा यादव ने बताया कि विशेष अभियान के दौरान आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और आंगनबाड़ी सहायिकाओं तथा उनके परिवारों के आयुष्मान कार्ड बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रदेश में लगभग 4.28 लाख आशा कार्यकर्ता और उनके परिवार के सदस्य योजना के दायरे में आते हैं। इनमें से 12 मार्च तक करीब 3.24 लाख लोगों के आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके हैं। अभी लगभग 1.03 लाख लोगों के कार्ड बनना शेष है। इस दौरान सबसे अधिक कुशीनगर में 6,620 कार्ड बनाए गए। इसी प्रकार लगभग 2.17 लाख आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और उनके परिवारों में से 1.53 लाख के आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं, जबकि लगभग 64 हजार लाभार्थियों के कार्ड बनने बाकी हैं। इस दौरान सबसे अधिक अंबेडकरनगर में 3,176 कार्ड बनाए गए। वहीं 2.32 लाख आंगनबाड़ी सहायिकाओं और उनके परिवारों में से लगभग 1.51 लाख लोगों के कार्ड जारी किए जा चुके हैं, जबकि करीब 81 हजार लोगों के कार्ड बनना अभी शेष है। इस दौरान सबसे अधिक अंबेडकरनगर में 3,077 कार्ड बनाए गए। वहीं जीरो पावर्टी अभियान के तहत चिन्हित निर्धन परिवार के सदस्यों का भी आयुष्मान कार्ड बनाया गया। इसमें सबसे अधिक वाराणसी में कार्ड बनाए गए। इसके बाद हापुड़, बागपत, गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर में कार्ड बनाए गए।

योगी सरकार का बड़ा कदम: सरयू नहर परियोजना विस्तार से पूर्वांचल को मिलेगा सिंचाई का लाभ

सरयू नहर परियोजना से पूर्वी यूपी में 14.04 लाख हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र विकसित करने का लक्ष्य सतत विकास को सुनिश्चित करेगा सरयू नहर परियोजना का विस्तार, बढ़ेगी किसानों की उत्पादकता और आय लखनऊ, यूपी का सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन ‘हर खेत को जल’ के मुताबिक पूरे प्रदेश में सिंचाई व्यवस्था का विस्तार कर रहा है। इस क्रम में सिंचाई विभाग सरयू नहर परियोजना का विस्तार कर रहा है, जिससे पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा-निर्देश में प्रदेश का सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग इस राष्ट्रीय परियोजना के तहत कुल 14.04 लाख हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र विकसित करने का लक्ष्य तय किया है। इस दिशा में वर्ष 2026-27 में नए कुलाबों का निर्माण और गैप्स को पूरा करने के साथ प्रेशर सिंचाई प्रणाली विकसित कर सरयू नहर परियोजना की सिंचाई क्षमता में लगातार वृद्धि की जा रही है। इससे न केवल पूर्वी यूपी में सिंचाई कमांड एरिया में वृद्धि हो रही है, बल्कि क्षेत्र के किसानों के उत्पादन और आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। वर्ष 2026-27 में होगा 1655 कुलाबों का निर्माण, 14 नहर गैप में चल रहा है निर्माण कार्य सरयू नहर परियोजना के तहत पूर्वी यूपी के नौ जिलों में 9000 कुलाबों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से लगभग 7345 कुलाबों का निर्माण पूरा हो चुका है। शेष 1655 कुलाबों का निर्माण सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग वित्तीय वर्ष 2026-27 में पूरा कर रहा है। इससे क्षेत्र में लगभग 66,200 हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षेत्र का विकास होगा, जिसका लाभ क्षेत्र के किसानों को रबी और खरीफ दोनों फसलों में मिलेगा। इसी क्रम में नहरों में 14 गैप्स के कारण बड़े क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होती है। इनमें से 14 नहर गैप्स में निर्माण कार्य तेज गति से चल रहा है। इस कार्य के पूरा होने से लगभग 27,863 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा का विस्तार होगा। प्रेशर सिंचाई परियोजना का हो रहा है चरणबद्ध विकास, बढ़ेगा 1.31 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र सरयू नहर परियोजना के तहत कम जल उपलब्धता वाले क्षेत्रों में सिंचाई व्यवस्था का विस्तार करने के उद्देश्य से यूपी सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के सहयोग से प्रेशर सिंचाई परियोजना का चरणबद्ध विकास कर रहा है। सरयू नहर परियोजना के कमांड एरिया में प्रेशर सिंचाई परियोजना पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर अप्रैल 2025 से चल रही है। इस क्रम में प्रेशर सिंचाई के जरिए लगभग 1.31 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षेत्र का विस्तार करने का लक्ष्य तय किया गया है। कुल मिलाकर प्रदेश का सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग 0.95 लाख हेक्टेयर क्षेत्र कुलाबा निर्माण और गैप भरने से पूरा करने का प्रयास कर रहा है, जबकि शेष लक्ष्य को प्रेशर सिंचाई परियोजना के माध्यम से प्राप्त किया जा रहा है। योगी सरकार के प्रयासों से सरयू नहर परियोजना के सिंचित क्षेत्र में उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है, जिसका प्रत्यक्ष लाभ पूर्वांचल के किसानों को मिल रहा है।

कौशल विकास मिशन के तहत 18 से 25 मार्च के बीच लखनऊ, झांसी और वाराणसी में आयोजित होंगे रोजगार मेले

युवाओं को निजी कंपनियों में नौकरी के अवसर उपलब्ध कराने की पहल कौशल विकास मिशन के माध्यम से रोजगार से जोड़ा जा रहा युवाओं को प्रदेश सरकार की प्राथमिकता—कौशल, प्रशिक्षण और रोजगार लखनऊ,  योगी सरकार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने और उन्हें कौशल के आधार पर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन प्रदेश के विभिन्न जनपदों में बृहद रोजगार मेलों का आयोजन कर रहा है। इससे बड़ी संख्या में युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। राज्य सरकार के निर्देशानुसार मार्च माह में तीन प्रमुख शहरों में रोजगार मेले आयोजित किए जाएंगे। इन रोजगार मेलों में विभिन्न कंपनियां भाग लेकर प्रशिक्षित और योग्य युवाओं का चयन करेंगी। सरकार का उद्देश्य है कि कौशल प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को सीधे रोजगार से जोड़ा जाए। तीन प्रमुख शहरों में होगा आयोजन कौशल विकास मिशन द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार 18 मार्च को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में बृहद रोजगार मेले का आयोजन किया जाएगा। इस मेले में लखनऊ, कानपुर, अयोध्या और बरेली मंडल के अभ्यर्थियों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। इसके बाद 24 मार्च को झांसी के बुंदेलखंड महाविद्यालय में रोजगार मेला आयोजित होगा, जिसमें झांसी, चित्रकूट और आगरा मंडल के युवाओं को भाग लेने का अवसर मिलेगा। इसी क्रम में 25 मार्च को वाराणसी स्थित राजकीय आईटीआई करौंदी परिसर में रोजगार मेले का आयोजन किया जाएगा। इस मेले में वाराणसी, मिर्जापुर और प्रयागराज मंडल के युवाओं को विभिन्न कंपनियों में रोजगार के अवसर मिलेंगे। कौशल और रोजगार को जोड़ने पर जोर प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश सरकार की नीति के तहत कौशल विकास मिशन युवाओं को प्रशिक्षण देने के साथ-साथ उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। रोजगार मेलों के माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं और कंपनियों को एक मंच पर लाकर रोजगार की प्रक्रिया को आसान बनाया जा रहा है। जिला प्रशासन और मिशन की संयुक्त जिम्मेदारी रोजगार मेलों के सफल आयोजन के लिए कौशल विकास मिशन द्वारा संबंधित मंडलों में नोडल अधिकारियों की भी नियुक्ति की गई है। साथ ही जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाइयों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर कार्यक्रम को सफल बनाएं। युवाओं के लिए अवसरों का विस्तार मिशन डायरेक्टर पुलकित खरे ने बताया कि योगी सरकार की विभिन्न योजनाओं, कौशल प्रशिक्षण, स्टार्टअप और निवेश आधारित औद्योगिक विकास के चलते प्रदेश में रोजगार के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। रोजगार मेलों के माध्यम से युवाओं को सीधे कंपनियों से जुड़ने और अपनी योग्यता के अनुसार नौकरी पाने का अवसर मिल रहा है। 100 से अधिक कंपनियां देंगी रोजगार योजना के तहत प्रत्येक आयोजन स्थल पर 100 से अधिक कंपनियों और नियोक्ताओं को आमंत्रित किया जाएगा, जिनके माध्यम से बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। इन रोजगार मेलों में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, मुख्यमंत्री युवा कौशल योजना, आईटीआई और पॉलिटेक्निक से प्रशिक्षित युवाओं के साथ-साथ अन्य अभ्यर्थियों को भी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही महिला अभ्यर्थियों की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने, जीरो पॉवर्टी अभियान के अंतर्गत चयनित परिवारों के युवाओं को प्राथमिकता देने तथा इच्छुक और योग्य दिव्यांगजनों के लिए विशेष अवसर उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जा रही है। कौशल विकास मिशन के अनुसार प्रत्येक आयोजन स्थल पर चयनित कंपनियों के माध्यम से न्यूनतम 1.50 लाख रुपये वार्षिक वेतन वाली रिक्तियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का भी प्रयास किया जा रहा है। ताकि अधिक से अधिक युवाओं को बेहतर रोजगार मिल सके और प्रदेश में कौशल, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिल सके।

गो तस्करों पर योगी सरकार का बड़ा एक्शन, 35 हजार से अधिक आरोपी सलाखों के पीछे

लखनऊ योगी सरकार ने सूबे की सत्ता संभालने के बाद प्रदेश में गोकशी, गोतस्करों और अवैध पशु वध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत ताबड़तोड़ कार्रवाई की, जो आज भी लगातार जारी है। इसके साथ गोकशी को पूरी तरह से रोकने के लिए वर्ष 2020 में गोवध निवारण कानून में संशोधन किया गया और जून-2020 में उत्तर प्रदेश गोवध निवारण (संशोधन) अध्यादेश जारी किया गया। इसके तहत अब तक प्रदेश भर में गोकशी के 14,182 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 35,924 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। यूपी सरकार का मानना है कि गोकशी पर नियंत्रण केवल कानून व्यवस्था का विषय नहीं बल्कि यह सामाजिक आस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है। इसी को ध्यान में रखते हुए योगी सरकार द्वारा पुलिस, प्रशासन और विशेष कानूनों के माध्यम से लगातार कार्रवाई की जा रही है। गोकशी से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किए गए आरोपियों के खिलाफ केवल सामान्य मुकदमे ही नहीं दर्ज किए गए, बल्कि उनके विरुद्ध कड़े कानूनों के तहत भी कार्रवाई की गई। गोकशी के मामले में 35,924 आरोपियों में से 13,793 के खिलाफ गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई की गई, जबकि 178 आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) की कार्रवाई की गई। इसके अलावा 14,305 मामलों में गैंगस्टर एक्ट के तहत कठोर कार्रवाई की गई है। योगी सरकार की सख्त कार्रवाई से गोकशी व गोतस्करी से जुड़े संगठित गिरोहों पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिली। इस दौरान प्रदेश में सक्रिय गोकशी से जुड़े नेटवर्क को ध्वस्त किया गया और आरोपियों की संपत्तियों की भी जांच की गई। गोकशी के मामलों में केवल गिरफ्तारी तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रही, बल्कि आर्थिक स्तर पर भी अपराधियों पर प्रहार किया गया। गैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1) के तहत कार्रवाई करते हुए लगभग 83 करोड़ 32 लाख रुपए की संपत्ति जब्त की गई। इसका उद्देश्य अपराध से अर्जित संपत्ति को जब्त करने से संगठित अपराधियों की आर्थिक ताकत कमजोर करना है ताकि भविष्य में ऐसे अपराधों को पूरी तरह रोका जा सके। इतना ही नहीं, कई मामलों में अवैध कमाई से खरीदी गई जमीन, वाहन और अन्य संपत्तियों को भी कुर्क किया गया है। योगी सरकार ने गोकशी पर नियंत्रण के लिए पुलिस की विशेष टीमों का गठन किया। विशेष टीमों द्वारा खुफिया निगरानी, जिलास्तरीय टास्क फोर्स और सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष सतर्कता के जरिये गोकशी-गोतस्करी के नेटवर्क को ध्वस्त किया गया। साथ ही प्रदेश के कई संवेदनशील जिलों में रात के समय पुलिस गश्त बढ़ाई गई, वहीं पशु परिवहन से जुड़े मामलों की भी विशेष निगरानी की गई। इसके अलावा अवैध बूचड़खानों के खिलाफ लगातार अभियान चलाए गए। योगी सरकार की सख्त कार्रवाई से प्रदेश में अवैध पशु वध से जुड़े मामलों में काफी कमी आई है और संगठित गिरोहों की गतिविधियों पर अंकुश लगा है। उत्तर प्रदेश गोवध निवारण (संशोधन) अध्यादेश 2020 में नियमों को सख्त किया गया। अध्यादेश के तहत प्रदेश में गोहत्या पर 10 साल कठोर कारावास की सजा, 3 से 5 लाख तक जुर्माने का प्रावधान और गोवंश के अंगभंग करने पर 7 साल की जेल व 3 लाख जुर्माना है।

आंगनबाड़ी केंद्रों में एक लाख 33 हजार से अधिक स्टेडियोमीटर का होगा वितरण

लखनऊ उत्तर प्रदेश में बच्चों के स्वस्थ भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए योगी सरकार पोषण अभियान के अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्रों पर विशेष ध्यान दे रही है । प्रदेश भर के आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी के लिए 1 लाख 33 हजार से अधिक आधुनिक उपकरण स्टेडियोमीटर जल्द उपलब्ध कराए जाएंगे। इन उपकरणों की मदद से बच्चों की लंबाई की सटीक जानकारी प्राप्त हो रही है, जिससे उनके पोषण स्तर का सही आकलन करने में मदद मिलती है।  ग्रोथ मॉनिटरिंग के लिए आधुनिक उपकरण प्रदेश सरकार द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों पर ग्रोथ मॉनिटरिंग के लिए कई आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। वर्ष 2021 और 2022 में एक लाख 88 हजार से अधिक स्टेडियोमीटर उपकरणों की आपूर्ति की गई थी। स्टेडियोमीटर के माध्यम से 2 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों की ऊंचाई का सटीक आकलन किया जाता है। इस उपकरण की मदद से बच्चों के विकास की नियमित निगरानी संभव हो रही है और कुपोषण की पहचान समय रहते की जा रही है। सरकार का मानना है कि बचपन में स्वास्थ्य और पोषण की सही देखभाल ही एक मजबूत समाज की नींव रखती है। इसी उद्देश्य से प्रदेश के लाखों बच्चों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए आंगनबाड़ी व्यवस्था को तकनीकी रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। तकनीक के सहारे कुपोषण पर प्रहार योगी सरकार ने कुपोषण के खिलाफ चल रही लड़ाई में तकनीक को महत्वपूर्ण हथियार बनाया है। प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के विकास की निगरानी के लिए आधुनिक ग्रोथ मॉनिटरिंग डिवाइस का उपयोग किया जा रहा है। इन उपकरणों के संचालन के लिए जिला कार्यक्रम अधिकारी और बाल विकास परियोजना अधिकारियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। इसके बाद उनके माध्यम से आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और मुख्य सेविकाओं को भी प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि बच्चों के स्वास्थ्य का आकलन वैज्ञानिक तरीके से किया जा सके। इससे न केवल बच्चों की वृद्धि की सटीक जानकारी मिल रही है बल्कि समय रहते पोषण संबंधी आवश्यक कदम उठाने में भी मदद मिल रही है।

योगी सरकार का सख्त निर्देश, राज्य विश्वविद्यालय तय शासनादेश के अनुसार ही लें परीक्षा शुल्क

शासनादेश के विपरीत फीस वसूली पर ऑडिट कराकर कार्रवाई करने की चेतावनी छात्रहित को सर्वोपरि रखते हुए विश्वविद्यालयों को लेने चाहिए निर्णय शिक्षा को सर्वसुलभ और पारदर्शी बनाने के लिए योगी सरकार प्रतिबद्ध लखनऊ,  शिक्षा व्यवस्था को सुलभ, सस्ता और पारदर्शी बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार सख्त कदम उठा रही है। इसी क्रम में उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने राज्य विश्वविद्यालयों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे परीक्षा शुल्क केवल शासनादेश में निर्धारित दरों के अनुसार ही लें। शासनादेश के विपरीत अधिक शुल्क वसूलने वाले विश्वविद्यालयों के ऑडिट कराने और आवश्यक कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी गई है। प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने सोमवार को विधानसभा स्थित अपने कार्यालय कक्ष में लखनऊ विश्वविद्यालय और संबद्ध महाविद्यालयों द्वारा शासनादेश के विपरीत फीस लिए जाने के संबंध में समीक्षा बैठक की। बैठक में विश्वविद्यालयों की शुल्क संरचना, परीक्षा शुल्क और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री ने निर्देश दिए कि राज्य विश्वविद्यालयों को निर्धारित शासनादेश के अनुसार ही परीक्षा शुल्क लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई विश्वविद्यालय निर्धारित शुल्क से अधिक परीक्षा शुल्क वसूलता है तो उसकी ऑडिट कराई जा सकती है और उचित कार्रवाई की जाएगी। मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार शिक्षा को सुलभ, सस्ता, पारदर्शी व छात्र हितैषी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि फीस में अनावश्यक वृद्धि से आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को शिक्षा प्राप्त करने में कठिनाई होती है, इसलिए विश्वविद्यालयों को छात्रहित को सर्वोपरि रखते हुए निर्णय लेने चाहिए। शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार राज्य विश्वविद्यालयों में परीक्षा शुल्क की समानता सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न पाठ्यक्रमों हेतु प्रति सेमेस्टर परीक्षा शुल्क निर्धारित किया गया है। इसके तहत बीए, बीएससी, बीकॉम, बीबीए, बीसीए, बीएड, बीपीएड, बीजेएमसी, बीएफए और बीवोक जैसे पाठ्यक्रमों के लिए 800 रुपये, एलएलबी, बीएससी एग्रीकल्चर (ऑनर्स), बीटेक, बायोटेक जैसे पाठ्यक्रमों के लिए 1000 रुपये तथा बीडीएस, नर्सिंग, बीएएमएस और बीयूएमएस जैसे पाठ्यक्रमों के लिए 1500 रुपये प्रति सेमेस्टर परीक्षा शुल्क निर्धारित किया गया है। उच्च शिक्षा मंत्री ने राज्य विश्वविद्यालयों को निर्देशित किया कि वे शासनादेशों का पूर्ण रूप से पालन सुनिश्चित करें और वित्तीय अनुशासन बनाए रखें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को अपने संसाधनों को मजबूत करने, नए पाठ्यक्रम शुरू करने और वित्तीय प्रबंधन को बेहतर बनाने की दिशा में भी प्रयास करने चाहिए, ताकि संस्थान आत्मनिर्भर बन सकें। बैठक में अधिकारियों और विश्वविद्यालय प्रतिनिधियों ने विश्वविद्यालयों की वित्तीय स्थिति, परीक्षा संचालन से जुड़ी चुनौतियों और संभावित समाधानों पर भी अपने सुझाव प्रस्तुत किए। उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि योगी सरकार विश्वविद्यालयों की वास्तविक आवश्यकताओं पर विचार करते हुए आवश्यक सहयोग प्रदान करने के लिए तैयार है, लेकिन शासनादेशों का पालन सभी संस्थानों के लिए अनिवार्य है। बैठक में एमएलसी उमेश द्विवेदी, अवनीश कुमार सिंह, प्रमुख सचिव एम. पी. अग्रवाल, सचिव अमृत त्रिपाठी,  कुलपति लखनऊ विश्वविद्यालय प्रो. जय प्रकाश सैनी सहित विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।